Jeetendra stories download free PDF

सादगी का मजाक

by A

श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ ...

तुम्हारे बिना भी तुम।

by A
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रोहन ने उस दिन पहली बार घर का दरवाज़ा बहुत धीरे खोला था।जैसे अंदर कोई सो रहा हो।जैसे हल्की ...

भूला हुआ स्टेशन।

by A
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बारिश का मौसम था। और बारिश भी ऐसी जो बस गिरती नहीं थी। बल्कि छत पर बैठकर कान के ...

सपनों में आने वाला प्यार।

by A
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रात के सन्नाटे में जब शहर की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। तब बहुत सी बातें ऐसी लगती हैं ...

चाँदनी के उस पार।

by A
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समय की बात है, जब पहाड़ों के पीछे एक ऐसा राज्य था जिसका नाम लोग धीरे से लेते थे। ...

समय का सौदागर।

by A
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शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी ...

हार के बाद की जीत

by A
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राघव के लिए वह दिन सिर्फ एक हार नहीं था, बल्कि जैसे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ हो गई ...

बेवजह की महोब्बत।

by A
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का समय था। शहर की पुरानी गलियों में हल्की ठंडी हवा बह रही थी। सड़क किनारे लगे पीपल के ...

अनकही देहलीज़

by A
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अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल से नज़रें नहीं हटाईं। खिड़की ...

असली कातिल।

by A
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बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन्नाटा और ...