श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ ...
रोहन ने उस दिन पहली बार घर का दरवाज़ा बहुत धीरे खोला था।जैसे अंदर कोई सो रहा हो।जैसे हल्की ...
बारिश का मौसम था। और बारिश भी ऐसी जो बस गिरती नहीं थी। बल्कि छत पर बैठकर कान के ...
रात के सन्नाटे में जब शहर की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। तब बहुत सी बातें ऐसी लगती हैं ...
समय की बात है, जब पहाड़ों के पीछे एक ऐसा राज्य था जिसका नाम लोग धीरे से लेते थे। ...
शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी ...
राघव के लिए वह दिन सिर्फ एक हार नहीं था, बल्कि जैसे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ हो गई ...
का समय था। शहर की पुरानी गलियों में हल्की ठंडी हवा बह रही थी। सड़क किनारे लगे पीपल के ...
अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल से नज़रें नहीं हटाईं। खिड़की ...
बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन्नाटा और ...