संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों की खिड़कियों में एक-एक करके रोशनियाँ बुझ ...
कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा ...