CHIRANJIT TEWARY stories download free PDF

तेरे मेरे दरमियान - 76

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।कार मे वो अकेली थी लेकिन उसके अंदर अकेलापन समंदर जैसा ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 55

by CHIRANJIT TEWARY
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दयाल की बात सुनकर दक्षराज जौर जौर से हंसने लगता है और कहता है---> हा हा हा हा । ...

तेरे मेरे दरमियान - 75

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य की बात को पुरा होने से पहले ही बात को बिच मे काट देती है और जानवी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 54

by CHIRANJIT TEWARY
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सभी आलोक की और बड़े गौर से दैख रहा था । आलोत अपनी जारी रखते हुए कहता है--> उनकी ...

तेरे मेरे दरमियान - 74

by CHIRANJIT TEWARY
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अशोक फिर कहता है --अशोक :- बेटा मैं तुम्हें बाद मे कॉल करता हूँ ।आदित्य :- ठिक है पापा ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 53

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश गुणा और चतूर से कहता है--थैंक्स यार तुम दौनो ने मेरी बहुत हेल्प की । अगर आज ये ...

तेरे मेरे दरमियान - 73

by CHIRANJIT TEWARY
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मोनिका :- क्यों आदित्य, क्या हूआ , हम ऐसा क्यों नही कर सकते ।आदित्य :- क्योंकी ये गलत है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 52

by CHIRANJIT TEWARY
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मातंक कहता है--> तुम चिंता ना करो मित्र कुम्भनी हमारी भी पुत्री हैऔर उसे बचाने के लिए हम कुछ ...

तेरे मेरे दरमियान - 72

by CHIRANJIT TEWARY
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कुछ देर बाद पापा ने नरमी से कहा—अशोक :- "बेटा, तू पहले अपने आपसे साफ-साफ कह—क्या तू उसे खोने ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 51

by CHIRANJIT TEWARY
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कुंभ्मन परेसान होकर कहता है--> ये....ये मुझे क्या हो रहा है । मैं....मैं ठीक से चल क्यों नही पा ...