---अध्याय 4 – मुश्किलों की दस्तकदिन बीतते-बीतते मुकुंद कॉलेज की लय पकड़ने लगा था। सुबह की lectures, library का ...
अध्याय 3 – अनजाने रास्तेतीसरा दिन मुकुंद के लिए कुछ अलग ही था। सुबह हॉस्टल की घंटी और गलियारों ...
अध्याय 2 – नए रिश्ते और चुनौतियाँअगली सुबह, हॉस्टल की खिड़कियों से धूप की हल्की किरणें कमरे में घुस ...
जिंदगीनामा – शुरुआत यह मैं हूँ… और यह ‘मैं’ शब्द यहाँ अहंकार का प्रतीक है। अहंकार वह शक्ति है ...
---अध्याय 1 – पहली मुलाकात
कुछ एहसास ऐसे होते हैं जिन्हें अल्फ़ाज़ में बयां करना मुश्किल होता है। ये शायरी उन ही लम्हों की दास्ताँ ...