Pooja Singh stories download free PDF

वाशिकारिणी - 6

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 630

इच्छा : प्रेम या प्रेतखाई के किनारे खड़ा शक्ति काँप रहा था।नीचे अंधेरा था… अंतहीन।उसी अंधेरे से एक जानी-पहचानी ...

वाशिकारिणी - 5

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 1k

आईना जो सच नहीं दिखाताशक्ति की चीख किले की दीवारों से टकराकर लौट आई…लेकिन उसकी आवाज़ उसे खुद सुनाई ...

पंखो में बंधा प्रेम

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 825

पक्षीलोक की सुबह आज कुछ अलग थी।आकाश सामान्य से अधिक उजला था, हवाओं में हल्की सी मिठास थी, और ...

वाशिकारिणी - 4

by Krishna bhakt bhajan and art
  • (5/5)
  • 1.2k

सच का पहला दरवाज़ाउस आदमी की आवाज़ में अजीब सी ठंडक थी।शक्ति उसकी तरफ देखता रहा, जैसे शब्द उसके ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 46

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 741

अंधकार लोक के विनाश के बाद, जब समस्त लोकों में संतुलन लौट आया, तब आकाश के द्वार एक बार ...

मेरी हो तुम - 3

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 1.2k

विवेक – अदिति | गहरा रिश्तारात का सन्नाटा चारों ओर फैला था।घर सो चुका था… लेकिन अदिति की आँखों ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 45

by Krishna bhakt bhajan and art
  • (4/5)
  • 864

पुनर्मिलन की शांति अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि आकाश में अचानक काले बादल घिर आए। हवा ...

मेरी हो तुम - 2

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 1.1k

आदित्य – चेताक्क्षी | सोलफुल रिश्तामंदिर में धूप और अगरबत्ती की खुशबू फैली थी।चेताक्क्षी दीपक जला रही थी।आदित्य उसे ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 44

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 1.2k

नागलोक में आज असामान्य हलचल थी। काले आकाश में लाल बिजली चमक रही थी, और नाग-स्तंभों पर लिपटे सर्प ...

मेरी हो तुम - 1

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 2.9k

पैहरगढ़ में कई दिनों बाद फिर से रौनक लौट आई थी।मंदिर की घंटियाँ, घरों में दीपक, और हर चेहरे ...