Shree Kriti stories download free PDF

घुँघरू - 5

by Shree Kriti
  • 258

चॉंद सिंदूरी आसमां में इतराने लगा था, बड़ी मनभावन जगह थी। निर्जन पहाड़ियों से होकर एक नदी एक छोटी ...

घुँघरू - 4

by Shree Kriti
  • (4.8/5)
  • 1k

कॉफ़ी कॉर्नर में एक नौजवान जोड़ा बैठा था। वह जोड़ा इतना हसीन था कि हर किसी की नज़र उन ...

घुँघरू - 3

by Shree Kriti
  • (5/5)
  • 1.7k

वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को ...

घुँघरू - 2

by Shree Kriti
  • (4.9/5)
  • 2.7k

हैलो फ्रेंड्स ! मैं हूँ विधि आहूजा! ओह ! अच्छा तो आप ये सोच रहे हैं कि मैं आखिर ...

घुँघरू - 1

by Shree Kriti
  • (0/5)
  • 4k

करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ...................शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना ...

किघकन्या - 7

by Shree Kriti
  • (0/5)
  • 3.3k

कुछ दिन पहले सहसा मृत्यु ने इस कहानी की सबसे निर्मल, सबसे भोली और सबसे सुकुमार पात्र ' रोहिणी ...

किघकन्या - 6

by Shree Kriti
  • 2.5k

अंधेरी रात थी ... सब ओर नीरवता छाई थी ... रात के अशुभ पक्षी चीत्कार कर रहे थे ... ...

किघकन्या - 5

by Shree Kriti
  • (0/5)
  • 2.9k

कुछ दिनों में ही वीर सिंह का हाल भयावह हो गया था ... आॅंखें खुन सरीखी लाल ... कांपती ...

किघकन्या - 4

by Shree Kriti
  • 3.1k

कुछ दिन बाद कुछ लकड़हारे उसी घाटी में लकड़ियाँ काटने गए। वहाँ उनकी नजर जमीन से निकले हुए हाथ ...

किघकन्या - 3

by Shree Kriti
  • 3.1k

अमावस की घनघोर काली अॅंधेरी रात थी, रोहिणी ने इस रात को चुना हवेली से भागने के लिए ... ...