क्या हुआ अवनि जी? अगर अकेले यह सब करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं, या मेरे साथ ...
अध्याय: जागीरदार रतन सिंह का आतंकबेटा तुम्हारे पूर्वज जागीरदार हृदय मोहन जो बहुत ही दयालु थे बहुत ही सज्जन ...
पूरी घाटी में अब वो पुरानी सड़ांध और खौफनाक सन्नाटा नहीं था। जैसे ही उस महा-दानव की राख हवा ...
बुजुर्ग की आंखों से बहते आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने अपनी फटी हुई आवाज़ ...
कमिश्नर राकेश संध्या के बिल्कुल करीब आए और धीमी लेकिन बेहद सख्त आवाज में बोले, "संध्या, तुमने सिर्फ अपनी ...
उधर देवपुर की सीमा पर, बवंडर के शांत होते ही पंडित विश्वनाथ दीनानाथ त्रिवेदी का काफिला एक बार फिर ...
अंकुर ने धीमे स्वर में पूछा, "हकीम साहब, हर इंसान का एक ऐसा कोना होता है जहाँ वह अपनी ...
औरत थी, मुझे उस जमींदार के घर काम पर भेज दिया। मुझे लगा कि मेहनत करके मैं मेहूल को ...
हवेली की सुबह आज कुछ अलग ही रंग लिए हुए थी।सूरज की सुनहरी किरणें जब सफेद संगमरमर के फर्श ...
सृष्टि के भीतर से एक ऐसी चीख निकली जिसने हवेली के झूमर तक तोड़ दिए। वह रूह जलने लगी ...