RAAHULL SHARMA stories download free PDF

अवनि एक अटूट विश्वास - 7

by RAAHULL SHARMA

क्या हुआ अवनि जी? अगर अकेले यह सब करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं, या मेरे साथ ...

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 8

by RAAHULL SHARMA
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अध्याय: जागीरदार रतन सिंह का आतंकबेटा तुम्हारे पूर्वज जागीरदार हृदय मोहन जो बहुत ही दयालु थे बहुत ही सज्जन ...

शैतानी घाटी का सफर - 11

by RAAHULL SHARMA
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पूरी घाटी में अब वो पुरानी सड़ांध और खौफनाक सन्नाटा नहीं था। जैसे ही उस महा-दानव की राख हवा ...

कालू की पहाड़ी - 12

by RAAHULL SHARMA
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बुजुर्ग की आंखों से बहते आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने अपनी फटी हुई आवाज़ ...

बेगूसराय द डार्क सिंडिकेट - 6

by RAAHULL SHARMA
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कमिश्नर राकेश संध्या के बिल्कुल करीब आए और धीमी लेकिन बेहद सख्त आवाज में बोले, "संध्या, तुमने सिर्फ अपनी ...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 7

by RAAHULL SHARMA
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उधर देवपुर की सीमा पर, बवंडर के शांत होते ही पंडित विश्वनाथ दीनानाथ त्रिवेदी का काफिला एक बार फिर ...

प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 6

by RAAHULL SHARMA
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अंकुर ने धीमे स्वर में पूछा, "हकीम साहब, हर इंसान का एक ऐसा कोना होता है जहाँ वह अपनी ...

रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 6

by RAAHULL SHARMA
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औरत थी, मुझे उस जमींदार के घर काम पर भेज दिया। मुझे लगा कि मेहनत करके मैं मेहूल को ...

अवनि एक अटूट विश्वास - 6

by RAAHULL SHARMA
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हवेली की सुबह आज कुछ अलग ही रंग लिए हुए थी।सूरज की सुनहरी किरणें जब सफेद संगमरमर के फर्श ...

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 7

by RAAHULL SHARMA
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सृष्टि के भीतर से एक ऐसी चीख निकली जिसने हवेली के झूमर तक तोड़ दिए। वह रूह जलने लगी ...