कागज़ के सामने हारता इंसानगाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से उड़ती आई है। ...
पारसनाथ की छाया में गिरिडीह : रवीन्द्रनाथ, “एकला चलो रे” और एक सांस्कृतिक भूगोलछोटानागपुर का पठारी प्रदेश भारतीय भूगोल ...
रात का समय था...टेबल पर गोदान खुली हुई थी...बाहर कहीं दूर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी...और ...
रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में ...
कोलकाता की एक पुरानी, शांत दोपहर थी। खिड़की से आती हल्की धूप कमरे में फैली हुई थी, और सामने ...