(रात का वक़्त है।घर के बाहर ठंडी हवा चल रही है।सिमरन सो रही है — उसके चेहरे पर शांति ...
जंगल का रास्ता खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। रितांश और सिद्धिदात्री लगातार आगे बढ़ रहे थे। ...
एक महीना कब पलक झपकते बीत गया, किसी को पता ही नहीं चला। कैलेंडर की तारीख़ जैसे ही पलटी, ...
सुनसान हाईवे – रातरात काफी हो चुकी थी। संपूर्णा अपनी कार से घर लौट रही थी।हाईवे लगभग खाली था। ...
(मंदिर के बाहर सुबह की हल्की किरणें फैल रही हैं।रात का अँधेरा धीरे-धीरे मिट चुका है।करण मंदिर की सीढ़ियों ...
उधर...जंगल से सैकड़ों किलोमीटर दूर...रात के लगभग दो बजे थे। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। राधा अपने कमरे ...
इधर श्रेया की आँखों से नींद रूठ चुकी थी। करवट बदलते-बदलते उसका मन बार-बार करण की तरफ भाग जाता। ...
चौहान हवेली – रातपूरा घर सो चुका था। हर तरफ सन्नाटा फैला हुआ था। संपूर्णा अपने कमरे में बेड ...
(जंगल में गहरा सन्नाटा छाया है।पेड़ों के बीच से धुंध की परतें निकल रही हैं।18 साल की मासूम सिमरन ...
रात का तीसरा पहर था। बरगद के विशाल पेड़ के नीचे...सिद्धिदात्री गहरी नींद में थी। अनजाने में उसका सिर ...