मेरा पूरा शरीर डर के मारे कांपने लगा था। मेरे माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थीं। मैंने ...
हम चारों हांफते हुए झटके से कार के अंदर घुसे और सारे दरवाजे अंदर से लॉक कर दिए। रोहित ...
चारों राजकुमार अब किशोर अवस्था में प्रवेश कर चुके थे। वे जितने सुंदर थे, उतने ही बुद्धिमान और पराक्रमी ...
उन सड़े हुए हाथों के नाखून कम से कम छह-छह इंच लंबे थे और उनमें से पीला मवाद टपक ...
अयोध्या नगरी... एक ऐसी नगरी जिसके नाम का मतलब ही था, जिसे कोई युद्ध में जीत न सके। सरयू ...
जैसे-जैसे हम उस वीरान और भुतहा गांव 'काला खोह' के अंदर बढ़ रहे थे, रूह कंपा देने वाली ठंडक ...
कॉलेज की छुट्टियां होते ही हम पांच दोस्तों—मैं, रोहित, नितिन, स्नेहा और अंजलि ने कुछ ऐसा करने का सोचा ...
अगली सुबह सूरज की पहली किरण निकलते ही आर्यन ने माधव और गाँव के कुछ हिम्मत वाले युवाओं को ...
जब आर्यन की चेतना वापस लौटी, तो सबसे पहले उसे अपनी पीठ पर कड़कड़ाती धूप और सूखी मिट्टी की ...
भाग 1: कबाड़खाना, कौतूहल और कालचक्ररामपुर गाँव की दोपहरें हमेशा से बेहद सुस्त और बोझिल हुआ करती थीं, खासकर ...