Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Rupal Jadav
“ बहन ” POETRY & VOICE COVER BY RUPAL JADAV
OFFICIAL INSTAGRAM HANDLE :- @jadav_rupall
Bhavna Bhatt
જય સંતોષી માતા 🙏
kunal kumar
निर्वासित देवता
_________________'
सड़क के उस पार से रोज़
एक माँग उठती थी,
धीमी पर लगातार,
जैसे भूख
भाषा सीख रही हो।
मैं जानता था यह कोई भ्रम नहीं,
यह ज़रूरत है।
फिर भी मैंने आँखें मूँद लीं,
तालू काट लिए और उसे
डर, अँधेरा, षड्यंत्र कहकर
आगे बढ़ गया।
मैं कायर नहीं था
होता
तो शायद रुक भी जाता पर
मैं सुविधाजनक था।
और सुविधाजनक होना
एक भ्रामक मोतियाबिंद है
काला मोतियाबिंद,
जिसमें लोग खो देते हैं
अपनी संपूर्ण दृष्टि।
और इस तरह
किसी और की
नोची गई आँखें
मेरे अँधेपन से
कम महत्त्वपूर्ण लगने लगीं।
वैसे
सड़क के उस पार जाता
तो ज़िम्मेदारी दिखती।
और ज़िम्मेदारी से
मैं हमेशा बहुत सभ्य तरीक़ों से बचता आया हूँ।
अब उस तरफ़ से
कुछ नहीं उठता
न कोई माँग,
न कोई चीख,
सिवाय एक सड़ी-गली टीस के।
टीस,
जिसमें दर्ज है
उस दिन की उम्मीद—
मेरे आने की,
बचा लेने की।
ख़ैर,
वह मर चुकी है,
और उसके बदले
वह एक गंध हो गई ।
एक ऐसी गंध
जो कसाईखानों में,
वैश्याओं के मोहल्लों में
सामान्य हो जाती है।
यह गंध
पाप की नहीं,
उपेक्षा की है
और उपेक्षा
मेरे द्वारा की गई सबसे घिनोना कृत है ।
शायद इसलिए मैं हुआ सबकुछ
भाई , दोस्त , प्रेमी , पुत्र लेकिन
अंदर से रहा केवल
एक निर्वासित देवता ।
Armin Dutia Motashaw
HAPPY BIRTHDAY DARLING ZOI (JOISSH)
On this holy day of Mehrangan, a pink, plump, pretty princess, unto this family was born
Hungry you were, when you were born; soon after a LSCS done was, early in the morn
Flooded with sooooo many memories I am, with overwhelming emotions I am torn
Princess, at 15, a little Mom you have become, only her apron you haven't worn.
Wishing you all the very best alwayzzz in life I do; may life with its many blessings, you adorn.
Loads of love n all good wishes
Mom, Dad, Freyu, Ma, Taku, Roxy et al
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
मार्च : ध्रुवीकरण और निर्णायक परिवर्तन का महीना
शास्त्रीय एवं समकालीन ज्योतिषीय दृष्टि
मार्च एक तनावपूर्ण और अत्यधिक ध्रुवीकृत महीना बनकर उभरता है, क्योंकि सभी दृश्य ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ओर संकेंद्रित हैं।
कुंभ राशि में राहु के साथ मंगल और वक्री बुध का संयोग अशांति, भ्रांति, गलत सूचना तथा मानसिक अस्थिरता को जन्म देता है, वहीं मीन राशि में शनि–नेपच्यून का दीर्घकालीन संयोग उन आदर्शों और विश्वास प्रणालियों को घोल रहा है जिन पर अब निर्भर नहीं किया जा सकता।
शास्त्र कहते हैं:
“राहु–मंगलयुति: क्रोध-विवाद-विनाशकारी।”
(राहु और मंगल का योग क्रोध, संघर्ष और विनाश उत्पन्न करता है।) — सारावली
“बुधयुक्तो राहुर्मोहं वादं च वर्धयेत्।”
(बुध के साथ राहु भ्रम और मिथ्या वाणी को बढ़ाता है।) — फलदीपिका
इस उग्र वातावरण में एक संतुलनकारी शक्ति है—मीन राशि में उच्च का शुक्र, जो करुणा, कला और भावनात्मक सहारा प्रदान करता है।
“उच्चे शुक्रः सुख-भोग-कला-प्रदः।”
(उच्च का शुक्र सौंदर्य, आनंद और कलात्मक संवेदना देता है।) — बृहत् पराशर होरा शास्त्र
इसी समय गुरु का मार्गी होना विवेक और दृष्टि को धीरे-धीरे पुनः जाग्रत करता है।
“गुरुः मार्गे ज्ञान-विवेकं वर्धयेत्।”
(गुरु के मार्गी होने से ज्ञान और विवेक बढ़ता है।) — फलदीपिका
मीन राशि में शुक्र (1–25 मार्च)
शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में स्थित होकर इस महीने का मुख्य स्थिरकारी ग्रह बनता है। शनि–नेपच्यून के प्रभाव क्षेत्र से गुजरते हुए भी यह करुणा, भक्ति, कला और आध्यात्मिक संवेदनशीलता प्रदान करता है।
“शुक्रः मीने उच्चस्थो भवति करुणा-भक्ति-कला-प्रदः।”
(मीन में उच्च का शुक्र करुणा, भक्ति और कला प्रदान करता है।) — सारावली
किन्तु शास्त्र चेतावनी देते हैं—
“शुक्रः पापयुक्तः स्वप्न-व्यमोहं जनयेत्।”
(दुष्ट ग्रहों से युक्त शुक्र भ्रम और पलायन प्रवृत्ति उत्पन्न करता है।) — फलदीपिका
अतः यह काल सहानुभूति का है, पर अति-आदर्शवाद से बचने का भी।
सिंह राशि में पूर्णिमा — पूर्ण चंद्रग्रहण (3 मार्च)
यह पूर्ण चंद्रग्रहण नेतृत्व, सत्ता, प्रसिद्धि और अधिकार से जुड़े विषयों में निर्णायक मोड़ लाता है। केतु की संलग्नता किसी पुराने ढांचे के टूटने, परदाफाश और त्याग का संकेत देती है।
वराहमिहिर कहते हैं—
“ग्रहणं राज्ञां नाशं दर्शयेत्।”
(ग्रहण राजा और शासकों के पतन का संकेत देता है।) — बृहत् संहिता
“केतुसंयोगे छिन्नता त्याग-विनाशः।”
(केतु से जुड़ाव में कटाव और हानि होती है।) — सारावली
व्यक्तिगत स्तर पर यह आत्म-अभिव्यक्ति और अहंकार पर चिंतन का समय है। सामूहिक स्तर पर यह समूह-मानसिकता और दोषारोपण को बढ़ा सकता है। शास्त्र उपदेश देते हैं—
“ग्रहणे मौनं श्रेयस्करम्।”
(ग्रहण काल में मौन और संयम शुभ है।)
मिथुन राशि में गुरु मार्गी (11 मार्च)
गुरु का मार्गी होना दृष्टि की पुनर्स्थापना का संकेत है। मिथुन में गुरु सूचना, विचारधाराओं और कथाओं की पुनर्समीक्षा कराता है।
“गुरुः स्थिरः ज्ञान-विवेक-वर्धकः।”
(मार्गी गुरु विवेक और ज्ञान बढ़ाता है।) — बृहत् पराशर होरा शास्त्र
“बुधराशौ गुरुर्वाद-ज्ञान-विचार-कारकः।”
(मिथुन में गुरु ज्ञान और विमर्श को प्रोत्साहित करता है।) — फलदीपिका
यह स्पष्टता का नहीं, बल्कि समझ की ओर पहला कदम है।
राहु के साथ मंगल–बुध युति (13–15 मार्च)
यह माह का सबसे अस्थिर और उग्र योग है। आवेग, दुर्घटनाएँ, तकनीकी विफलता, अशांति और भ्रम की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
“राहु-मंगलयोर्युतिः अग्नि-भयं कलहं तथा।”
(राहु-मंगल योग अग्नि, भय और कलह उत्पन्न करता है।) — बृहत् संहिता
“बुधयुक्ते राहौ मिथ्या-वार्ता प्रवर्तते।”
(बुध-राहु से झूठी खबरें फैलती हैं।) — सारावली
शास्त्र स्मरण कराते हैं—
“न बलेन, तु युक्त्या कार्यसिद्धिः।”
(कार्य बल से नहीं, बुद्धि से सिद्ध होता है।)
मीन राशि में सूर्य (14 मार्च – 12 अप्रैल)
सूर्य शनि–नेपच्यून से युक्त होकर नेतृत्व संकट और दिशा भ्रम को उजागर करता है।
“सूर्य-शनि युतिः राज्य-पीड़ा-कारी।”
(सूर्य-शनि योग शासकों को कष्ट देता है।) — फलदीपिका
“मीने सूर्यः त्याग-भावं जनयेत्।”
(मीन में सूर्य त्याग और आत्मचिंतन कराता है।) — सारावली
विषुव (20 मार्च)
यह प्रकाश और अंधकार का संतुलन बिंदु है।
“विषुवकाले भूलोक-परिवर्तनम्।”
(विषुव पर सांसारिक घटनाओं में परिवर्तन होता है।) — बृहत् संहिता
यह धीमे और सजग परिवर्तन का समय है।
ज़मीन अमावस्या — नव संवत्सर (19 मार्च)
संवत्सर : पराभव
पराभव संवत्सर सत्ता के पतन और संरचनात्मक गिरावट का सूचक माना गया है।
“पराभवे नृपाणां हानिः।”
(पराभव वर्ष में शासकों की हानि होती है।)
उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र गंभीरता और वैराग्य देता है।
“उत्तरभाद्रपदे वैराग्यं गंभीरता च।”
यह एक मौन, गहन और आधारभूत पुनःआरंभ है।
“शनैः शनैः सर्वं भवति।”
(सभी परिवर्तन धीरे-धीरे होते हैं।) — मनुस्मृति
बुध मार्गी (21 मार्च)
बुध मार्गी होकर गति देता है, पर राहु से युति के कारण भ्रम शेष रहता है।
“बुधः राहुयुक्तः भ्रान्तिं जनयेत्।”
(बुध-राहु भ्रम उत्पन्न करते हैं।) — फलदीपिका
अतः—
“परीक्ष्य एव कर्तव्यम्।”
(जांच कर ही कार्य करें।) — हितोपदेश
निष्कर्ष:
मार्च कर्मफल, सत्ता-पतन और वैचारिक पुनर्संयोजन का महीना है। शास्त्र बताते हैं कि राहु-मंगल, ग्रहण और शनि-संयोग के काल विजय के नहीं, बल्कि विवेक के समय होते हैं। उच्च का शुक्र और मार्गी गुरु हमें करुणा और बुद्धि प्रदान करते हैं।
“कालः पचति भूतानि।”
(समय सब कुछ परिपक्व करता है।)
मार्च हमें प्रतिक्रिया नहीं, निरीक्षण; बल नहीं, समझ; और पुराने ढांचों से चिपके रहने के बजाय शांत, सच्चे नव-निर्माण की ओर ले जाता है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
क्या सिद्धियां प्राप्त की जा सकती है ???
कितनी प्रकार की सिद्धियां आज भी कार्य कर रही है ???
कैसे प्राप्त की है सिद्ध पुरषों ने सिद्धियां???
नियमित यम-नियम और योग के अनुशासन से न केवल दूसरों के मन की बातें भी जानी जा सकती हैं। परा और अपरा सिद्धियों के बल पर आज भी कई ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्हें देखकर हम अचंभित रह जाते हैं।
सिद्धि का अर्थ
सिद्धि का सामान्य अर्थ सफलता होता है। यह किसी कार्य में पूर्ण पारंगत होने को दर्शाता है। सामान्यतः सिद्धि को चमत्कार या रहस्य से जोड़ा जाता है, लेकिन योग के अनुसार सिद्धि का अर्थ इंद्रियों की पुष्टता और व्यापकता से है, अर्थात देखने, सुनने और समझने की क्षमता का उन्नयन।
परा और अपरा सिद्धियाँ
सिद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं – परा और अपरा।
अपरा सिद्धियाँ विषय संबंधी होती हैं, जो उत्तम, मध्यम और अधम प्रकार की हो सकती हैं। ये मुमुक्षुओं के लिए होती हैं।
परा सिद्धियाँ आत्मस्वरूप के अनुभव से जुड़ी होती हैं और केवल योगिराजों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।
दूसरों के मन को जानने की शक्ति
योग में इस शक्ति को मनःशक्ति योग कहा जाता है। इसके अभ्यास से व्यक्ति दूसरों के मन की बातें जान सकता है। यदि ज्ञान की स्थिति में संयम प्राप्त हो जाए और चित्त पूर्णतः शांत हो, तो यह शक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है।
ज्ञान की स्थिति में संयम का अर्थ है कि जो भी सोचा या समझा जा रहा है उसमें साक्षी रहने की स्थिति। ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।
जाति स्मरण का प्रयोग :
इसे पूर्वजन्म ज्ञान सिद्धि योग कहते हैं जैन धर्म में इसे 'जाति स्मरण' कहते हैं। इसका अभ्यास करने या चित्त में स्थित संस्कारों पर संयम करने से 'पूर्वजन्म का ज्ञान' होने लगता है।
आत्मबल की शक्ति :
योग साधना करें या जीवन का और कोई कर्म आत्मल की शक्ति या कहें की मानसिक शक्ति का सुदृढ़ होना जरूरी है तभी हर कार्य में आसानी से सफलता मिल सकती है। यम-नियम के अलावा मैत्री, मुदिता, करुणा और उपेक्षा आदि पर संयम करने से आत्मबल की शक्ति प्राप्त होती है।
बलशाली शरीर :
आसनों के करने से शरीर तो पुष्ट होता ही है साथ ही प्राणायाम के अभ्यास से वह बलशाली बनता है। बल में संयम करने से व्यक्ति बलशाली हो जाता है।
बलशाली अर्थात जैसे भी बल की कामना करें वैसा बल उस वक्त प्राप्त हो जाता है। जैसे कि उसे हाथीबल की आवश्यकता है तो वह प्राप्त हो जाएगा। योग के आसन करते करते यह शक्ति प्राप्त हो जाती है।
उपवास योगा सिद्धि :
कंठ के कूप में संयम करने पर भूख और प्यास की निवृत्ति हो जाती है। कंठ की कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता व अनाहार सिद्धि होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से पेट में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं। कंठ के इस कूप और नाड़ी के कारण ही भूख और प्यास का अहसास होता है।
इस कंठ के कूप में संयम प्राप्त करने के लिए शुरुआत में प्रतिदिन प्राणायाम और भौतिक उपवास का अभ्यास करना जरूरी है।
उदान शक्ति :
उदानवायु के जीतने पर योगी को जल, कीचड़ और कंकड़ तथा कांटे आदि पदार्थों का स्पर्श नहीं होता और मृत्यु भी वश में हो जाती है। कंठ से लेकर सिर तक जो व्यापाक है वही उदान वायु है। प्राणायम द्वारा इस वायु को साधकर यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
कर्म सिद्धि :
सोपकर्म और निरपकर्म, इन दो तरह के कर्मों पर संयम से मृत्यु का ज्ञान हो जाता है।
सोपक्रम अर्थात ऐसे कर्म जिसका फल तुरंत ही मिलता है।
निरपकर्म जिसका फल मिलने में देरी होती है।
क्रिया, बंध, नेती और धौती कर्म से कर्मों की निष्पत्ति हो जाती है।
स्थिरता शक्ति :
शरीर और चित्त की स्थिरता आवश्यक है अन्यथा सिद्धियों में गति नहीं हो सकती। कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से उदर में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं।
दिव्य श्रवण शक्ति :
समस्त स्रोत और शब्दों को आकाश ग्रहण कर लेता है, वे सारी ध्वनियां आकाश में विद्यमान हैं। आकाश से ही हमारे रेडियो या टेलीविजन यह शब्द पकड़ कर उसे पुन: प्रसारित करते हैं। कर्ण-इंद्रियां और आकाश के संबंध पर संयम करने से योगी दिव्यश्रवण को प्राप्त होता है।
अर्थात यदि हम लगातार ध्यान करते हुए अपने आसपास की ध्वनि को सुनने की क्षमता बढ़ाते जाएं और सूक्ष्म आयाम की ध्वनियों को सुनने का प्रयास करें तो योग और टेलीपैथिक विद्या द्वारा यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
कपाल सिद्धि :
सूक्ष्म जगत को देखने की सिद्धि को कपाल सिद्धि योग कहते हैं। कपाल की ज्योति में संयम करने से योगी को सिद्धगणों के दर्शन होते हैं। मस्तक के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं।
ब्रह्मरंध्र के जाग्रत होने से व्यक्ति में सूक्ष्म जगत को देखने की क्षमता आ जाती है। हालांकि आत्म सम्मोहन योग के द्वारा भी ऐसा किया जा सकता है। बस जरूरत है तो नियमित प्राणायाम और ध्यान की। दोनों को नियमित करते रहने से साक्षीभाव गहराता जाएगा तब स्थिर चित्त से ही सूक्ष्म जगत देखने की क्षमता हासिल की जा सकती है।
प्रतिभ शक्ति :
प्रतिभ में संयम करने से योगी को संपूर्ण ज्ञान की प्राप्त होती है। ध्यान या योगाभ्यास करते समय भृकुटि के मध्य तेजोमय तारा नजर आता है। उसे प्रतिभ कहते हैं। इसके सिद्ध होने से व्यक्ति को अतीत, अनागत, विप्रकृष्ट और सूक्ष्मातिसूक्ष्म पदार्थों का ज्ञान हो जाता है।
निरोध परिणाम सिद्धि :
इंद्रिय संस्कारों का निरोध कर उस पर संयम करने से 'निरोध परिणाम सिद्धि' प्राप्त होती है। यह योग साधक या सिद्धि प्राप्त करने के इच्छुक के लिए जरूरी है अन्यथा आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
निरोध परिणाम सिद्धि प्राप्ति का अर्थ है कि अब आपके चित्त में चंचलता नहीं रही। नि:श्चल अकंप चित्त में ही सिद्धियों का अवतरण होता है। इसके लिए अपने विचारों और श्वासों पर लगातार ध्यान रखें। विचारों को देखते रहने से वह कम होने लगते हैं। विचार शून्य मनुष्य ही स्थिर चित्त होता है।
चित्त ज्ञान शक्ति :
हृदय में संयम करने से योगी को चित्त का ज्ञान होता है। चित्त में ही नए-पुराने सभी तरह के संस्कार और स्मृतियां होती हैं। चित्त का ज्ञान होने से चित्त की शक्ति का पता चलता है।
इंद्रिय शक्ति :
ग्रहण, स्वरूप, अस्मिता, अव्वय और अर्थवत्तव नामक इंद्रियों की पांच वृत्तियों पर संयम करने से इंद्रियों का जय हो जाता है।
पुरुष ज्ञान शक्ति :
बुद्धि पुरुष से पृथक है। इन दोनों के अभिन्न ज्ञान से भोग की प्राप्ति होती है। अहंकारशून्य चित्त के प्रतिबिंब में संयम करने से पुरुष का ज्ञान होता है।
तेजपुंज शक्ति :
समान वायु को वश में करने से योगी का शरीर ज्योतिर्मय हो जाता है। नाभि के चारों ओर दूर तक व्याप्त वायु को समान वायु कहते हैं।
ज्योतिष शक्ति :
ज्योति का अर्थ है प्रकाश अर्थात प्रकाश स्वरूप ज्ञान। ज्योतिष का अर्थ होता है सितारों का संदेश। संपूर्ण ब्रह्माण्ड ज्योति स्वरूप है। ज्योतिष्मती प्रकृति के प्रकाश को सूक्ष्मादि वस्तुओं में न्यस्त कर उस पर संयम करने से योगी को सूक्ष्म, गुप्त और दूरस्थ पदार्थों का ज्ञान हो जाता है।
लोक ज्ञान शक्ति :
सूर्य पर संयम से सूक्ष्म और स्थूल सभी तरह के लोकों का ज्ञान हो जाता है।
नक्षत्र ज्ञान सिद्धि :
चंद्रमा पर संयम से सभी नक्षत्रों को पता लगाने की शक्ति प्राप्त होती है।
तारा ज्ञान सिद्धि :
ध्रुव तारा हमारी आकाश गंगा का केंद्र माना जाता है। आकाशगंगा में अरबों तारे हैं। ध्रुव पर संयम से समस्त तारों की गति का ज्ञान हो जाता है।
परकाय प्रवेश :
बंधन के शिथिल हो जाने पर और संयम द्वारा चित्त की प्रवेश निर्गम मार्ग नाड़ी के ज्ञान से चित्त दूसरे के शरीर में प्रवेश करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है। यह बहुत आसान है, चित्त के स्थिरता से सूक्ष्म शरीर में होने का अहसास बढ़ता है। सूक्ष्म शरीर के निरंतर अहसास से स्थूल शरीर से बाहर निकलने की इच्छा।
शरीर से बाहर मन की स्वाभाविक वृत्ति है उसका नाम 'महाविदेह' धारणा है। उसके द्वारा प्रकाश के आवरणा का नाश हो जाता है। स्थूल शरीर से शरीर के आश्रय की अपेक्षा न रखने वाली जो मन की वृत्ति है उसे 'महाविदेह' कहते हैं। उसी से ही अहंकार का वेग दूर होता है। उस वृत्ति में जो योगी संयम करता है, उससे प्रकाश का ढंकना दूर हो जाता है।
भाषा सिद्धि :
हमारे मस्तिष्क की क्षमता अनंत है। शब्द, अर्थ और ज्ञान में जो घनिष्ट संबंध है उसके विभागों पर संयम करने से 'सब प्राणियों की वाणी का ज्ञान' हो जाता है।
समुदाय ज्ञान शक्ति :
शरीर के भीतर और बाहर की स्थिति का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे शरीर को दीर्घकाल तक स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद मिलती है। नाभिचक्र पर संयम करने से योगी को शरीर स्थित समुदायों का ज्ञान हो जाता है अर्थात कौन-सी कुंडली और चक्र कहां है तथा शरीर के अन्य अवयव या अंग की स्थिति कैसी है।
पंचभूत सिद्धि :
पंचतत्वों के स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अन्वय और अर्थवत्तव ये पांच अवस्था हैं इसमें संयम करने से भूतों पर विजय लाभ होता है। इसी से अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है।
अंत में अष्टसिद्धि के नाम :
अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, इशीता, वशीकरण।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
Aum Namah Shivay
Pluto Generation in Astrology — What does it mean?
In astrology, Pluto is a slow-moving planet (takes about 248 years to orbit the Sun). It stays in one zodiac sign for 12–30 years, which means millions of people share the same Pluto sign.
That’s why Pluto is called a generational planet—it reflects collective psychology, deep social change, power struggles, and transformation of an entire generation rather than personal traits alone.
Pluto represents:-
Death & rebirth
Hidden power
Trauma & healing
Revolution
Obsession
Deep psychological change
Your Pluto sign = how your generation transforms the world.
Your Pluto house & aspects = how you personally live that transformation.
🧬 Major Pluto Generations & Their Themes
Pluto in Leo (1937–1957)
Theme: Power through identity & creativity
Ego, leadership, fame, charisma
Rise of celebrities, dictators, heroic figures
Generation concerned with recognition and authority
Pluto in Virgo (1957–1971)
Theme: Power through work & systems
Health, service, analysis, perfection
Medical revolutions, environmental awareness
Critique of institutions and routines
Pluto in Libra (1971–1984)
Theme: Power through relationships & justice
Marriage, divorce, law, equality
Feminism, human rights, partnership redefined
Transformation of social contracts
Pluto in Scorpio (1984–1995)
Theme: Power through taboo & emotional depth
Sex, death, money, trauma, psychology
AIDS crisis, financial scandals, occult interest
Deep emotional intensity and fearlessness
Pluto in Sagittarius (1995–2008)
Theme: Power through belief & truth
Religion, philosophy, globalization, internet
Clash of ideologies, terrorism, migration
Search for meaning and freedom
Pluto in Capricorn (2008–2024)
Theme: Power through structures & authority
Governments, corporations, capitalism
Financial crises, collapse of old systems
Redefining leadership and responsibility
Pluto in Aquarius (2024–2044) (current generation)
Theme: Power through technology & collective mind
AI, digital identity, community, networks
Revolution in science, society, and freedom
Dismantling hierarchies, rise of decentralized power
Why Pluto Generation Matters
Pluto generation shows:-
What a generation fears
What it must heal
What it will destroy and rebuild
Where collective karma is concentrated
It answers:-
“What deep transformation is my generation born to experience and create?”
Personal Level vs Generational Level
Pluto works on two levels:-
Generational:-
Same for everyone born in that period (historical events, social change)
Personal:-
Depends on:
House placement
Aspects to Moon, Sun, Ascendant, etc.
Example:
Pluto in Scorpio in the 10th house → personal transformation through career & power
Pluto in Scorpio in the 4th house → family karma, ancestral healing
In short:-
Pluto Generation = the collective soul lesson of your birth era.
It shows how humanity evolves through crisis, destruction, and rebirth.
Aapka Apna
Aachaarya Deepak Sikka
Founder of Graha Chaal Consultancy
Sudhir Srivastava
चौपाई - गम मत डेरा डालो मन पर
हम जीवन पथ चलना चाहें।
बनो नहीं बाधक मम राहें।।
रहा करो तुम अपने घर पर।
गम मत डेरा डालो मन पर।।
इतना भी मत करो शरारत।
मूरख क्या जो आप उघारत।।
तुमसे यूँ भी हम कब डरते।
चाहत नहीं तुम्हारी मरते।।
मान चुनौती आगे बढ़ते।
कठिन राह पर भी हम चलते।।
मान यार अब मेरा कहना।
अब तू हमसे सीखे डरना।।
दिल मेरा कमजोर नहीं है।
तेरा कोई जोर नहीं है।।
हर बाधा से लड़ना सीखा।
खट्टा-मीठा या हो तीखा।।
चाल चले तेरी न कोई।
जीत कभी तेरी नहिं होई।।
कोशिश चाहे जितना कर लो।
मौका है चुपचाप निकल लो।।
बात समझ मेरी यदि आई।
बन जाओ तुम मेरे भाई।।
फर्क नहीं पड़ना है मुझ पर।
गम मत डेरा डालो मन पर।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - गणपति
*********
प्रथम पूज्य हैं श्री गणेशा।
बुद्धि प्रदाता विध्न विनेशा।।
मूषक वाहन जिनके नामा।
मोदक प्रिय मिष्ठान सुनामा।।
शिव गौरा सुत गणपति नंदन।
भक्त करें नित तव का वंदन।।
रिद्धि-सिद्धि के संग बिराजो।
कृपा सभी के शीश पे साजो।।
हाथ जोड़ आसन बैठाओ।
पीत वस्त्र उनको पहनाओ।।
पान सुपारी भोग लगाओ।
फिर अपनी फरियाद सुनाओ।।
जन-मन के हो तुम उद्धारक।
रोग दोष के तुम्हीं निवारक।।
प्रथम पूज्य तुम देव कहाते।
सफल पाठ पूजन हो जाते।।
शुभ अरु लाभ पुत्र द्वय प्यारे।
हृदय बसत हैं सब संसारे।
भक्त आपको सदा पुकारें।
प्रभो दरस दो आकर द्वारे।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई -बड़ाई
********
नाहक नहीं बढ़ाई करना।
सत्य बोलने से मत डरना।।
सत्यमेव जयते की रचना।
सदा सर्वदा पढ़ते रहना।।
आप हमारी करो बड़ाई।
तभी कहेंगे तुमको भाई।।
आज समय की रीति निराली।
लक-दक दिखती होती काली।।
उचित लगे तब करो बड़ाई।
पर मत करना कभी लड़ाई।।
भले नहीं हो आप बड़ाई।
निज जीवन में करो कड़ाई।।
नहीं बड़ाई कभी अघाती।
सदा चाहती फूल अरू पाती।।
झाँसे में इसके मत आना।
महँगा पड़ता पानी दाना।।
सुधीर श्रीवास्तव
Narayan
साइंस कहता है कि दिल
एक मिनिट में 72 बार धड़कता है..
तुम्हारा मेरे करीब आना
साइंस की धज्जियां उड़ा देता है..
Narayan
धड़कने बेकाबू हो गई उनसे आंख मिलाने में
खुदा का शुक्र है वह गले नहीं मिला.. 💞
Narayan
फिदा हो जाऊँ तेरी किस-किस अदा पर,
अदायें लाख तेरी, बेताब दिल एक मेरा...❤️
Narayan
ये हम जो पत्थर के हो चुके है
अपने हिस्से का रो चुके है!
- नारायण
mohansharma
हालात तो मजबूर करेंगे कि रो ले..
पर तुम सोचो कि कैसे खुश हो ले..
Vipul Borisa
अपनी शिकस्त को उस हद तक ले जाना है।
या तो जीत जाना हे,या तो फिर मर जाना है।
विपूल प्रीत
- Vipul Borisa
Ajit
કુદરતે સાવ નકામો તો મને પણ નઈ બનાવ્યો હોય......
કોઈકના માટે તો મને પણ કોડી ના ભાવે સમજ્યો હોય......
જિંદગી ની "યાદ"
Siya Kashyap
औकात नहीं है एक बात निभाने की
पर बाते बहुत बड़ी-बड़ी है जनाब की
Siya Kashyap
औकात नहीं है एक बात निभाने की
पर बाते बड़ी बड़ी है जनाब की
Std Maurya
शीर्षक "अधूरी बाते"
मैं तुम्हारे ख्यालों में खो गया,
न जाने सुबह से शाम कब हो गई।
जब भी मेरी पलकें झपकती थीं,
बस तुम्हारी होठों की मुस्कान दिखती थी।
मैं तुम्हारे लिए यही सोचता था,
कि तुम करीब आकर मुझे कब सीने से लगाओगी...
इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ था मैं,
पर जब नींद से मेरी आँखें खुलीं,
तो आँखों में सिर्फ आँसू थे,
क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर थी।
पास थे तो बस तुम्हारे शब्द,
जो मेरे दिल के करीब थे।
— एसटीडी मौर्य✍️
#stdmaurya #std
Kaushik Dave
कठिन डगर है जीवन की, पर तू न अब घबराना,
अधर्म के इस शोर में, तू धर्म का शंख बजाना।
छल करेंगे अपने ही, जैसे शकुनि का पासा हो,
पर डगमगाना मत कभी, चाहे चारों ओर निराशा हो।
तू सारथी बना ले कृष्ण को, अपनी बुद्धि के रथ पर,
फिर देख कैसे खिलते हैं, फूल कांटों वाले पथ पर।
अभिमन्यु की वो वीरता, अब तुझमें जागृत होनी है,
लिखनी तुझे खुद हाथों से, अपनी जीत की अनहोनी है।
मौन खड़ा जो देख रहा, वो सब खेल समझता है,
जो लड़ता है अंत तक, वही इतिहास में सजता है।
हृदय में रख तू "नमो नमः", अधरों पर सत्य का गान हो,
श्री कृष्ण सदा सहायते, तेरा यही अटूट सम्मान हो।
- Kaushik Dave
Nothing
"Effective communication is the foundation of a healthy relationship, acting as the "glue" that builds trust, intimacy, and conflict resolution.."
Archana Rahul Mate Patil
माझ्या मराठी बोलू कौतुके
मातृभाषा मराठी माय मराठी!!!
*पोवाड्यातल्या शौर्याची,
आरतीतल्या टाळ्यांची.
अभंगातल्या विठू नामाची
भाषा माझी मराठी..
भजनातल्या भक्तीची.
गाऱ्हाण्यातील साकड्याची
गोंधळ्याच्या उदोउदोची
भाषा माझी मराठी...
जात्यावरच्या ओवी ची.
कीर्तनातल्या कथेची
भारुडआतल्या प्रबोधनाची
भाषा माझी मराठी
कथा कादंबऱ्याची
नाटक आणि कवितांची
बालगीत गोष्टींची
भाषा माझी मराठी
साधुसंतांचा उपदेश,
भगव्याचा स्वाभिमान
शिवरायांच्या उपकारांची
जाणीव आहे मराठी...
देणगी या शब्दांची
आठवण मातीची
अफाट या साहित्याची
भाषा माझी मराठी!!
संत परंपरेची
भक्त भगवंताची
सखू मीराबाई ची
भाषा ही मराठी..
ज्ञानदेव नामदेव
सोपान एकनाथ
जनार्धन चांगदेव
भाषा माझी मराठी
तुकोबा अन चोखोबा
संत सावता माळ्याची
माझ्या विठुरायाची
भाषा आहे मराठी
मराठी भाषा गौरव दिनाच्या मराठमोळ्या शुभेच्छा...!!!
Archu..!!!*
kashish
poodhe hi hai to kya ho jye gaa agar ham une tor de to...
ek maali se pucho kitna time laga ek phoolo ko ugane mai ...
ek us bachche ya buode se pucho jisko oxygen lene mai dikat aati hai...
delhi ke logo se pucho unki jindhgi aadhi kise ho gyi ...
or tum kehte ho ki poodhe hi hai to kya ho jye gaa agar ham une tor de to...
by kashish
ek archana arpan tane
સંબંધો માં જબરદસ્તી ના હોવી જોઇએ જેને જયાં અને જે સંબંધ માં શકુન મળે ત્યાં જ છોડી દેવું જોઇએ.
- ek archana arpan tane
Ajit
સર્વસ્વ મૂકી ને તને અપનાવી છે,
તે પણ મૂકી દીધો હવે સાનો ડર?
જિંદગી ની "યાદ"
Ajit
હું કેટલો નસીબદાર છું એતો જોવો યારો.........
પ્રેમ માટે પણ મરવાનું ને દર મહિને દિવસો સુધી બ્લોક થઈ ને મરવાનું...
જિંદગી ની "યાદ"
Ajit
ન પૂછજો હવે કોઈ હાલ મારા, હું બેહાલ બરાબર છું.......
મારા મનનું ધાર્યું થાય તો હું સ્મશાને પણ એકલો જવા માંગું છું.....
જિંદગી ની "યાદ"
Saliil Upadhyay
गब्बर की ना बीवी थी ना बच्चे थे ना कोई गर्लफ्रेंड !
फिर वो लूटपाट किसके लिए करता था?
उचित उत्तर देना बड़ा कन्फ्यूज़न है...!
- Saliil Upadhyay
Ajit
હું અહિયા સુધી પહોંચી ગયો છું.......
Chaitanya Joshi
કાનુડા ભરી લેને પિચકારી તો આજે હોળી મનાવીએ
જો તું એવું કૈં શકે વિચારી તો આજે હોળી મનાવીએ
તેં પણ મનાવી હશે અતીતે હોળી ગોપબાળોની સંગે,
જો રમવાની હોય તૈયારી તો આજે હોળી મનાવીએ
રંગ કેસૂડાના ઘોળીઘોળી તૈયાર કીધા છે વહાલમ મેં,
ને જોતાં રહે નરને નારી તો આજે હોળી મનાવીએ.
રંગ લગાવીને માખણ પણ ખવડાવીશ હોને કહાના,
ઊભય ઉરઅગન દે ઠારી તો આજે હોળી મનાવીએ
છોને અંશઅંશી થૈને બિનધાસ્ત આજે હોળી ખેલતા,
લાલા તારા પર જાઉં વારી તો આજે હોળી મનાવીએ
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Dr.Namrata Dharaviya
બેસી રહ્યું તું પાળની કોરે પતંગિયું,
સંભવ છે કોઈ ફૂલ ત્યાં ડૂબી ગયું હશે.
Abhishek deuraj
माँ — हमारी पहली मोहब्बत
माँ हमारी पहली मोहब्बत होती है,
दुनिया से पहले जो हमारी आदत होती है।
जिसकी गोद में सुकून का जहाँ मिलता है,
जिसकी आवाज़ में ही सारा आसमाँ मिलता है।
जब चलना भी नहीं आता था हमें,
वो गिरने से पहले थाम लेती थी।
हम रो भी ना पाएं दर्द से पहले,
वो बिना कहे ही जान लेती थी।
उसकी दुआओं का साया सिर पे रहता है,
तभी तो हर मुश्किल भी हल्का लगता है।
उसकी हँसी में रब की रहमत दिखती है,
उसकी ममता में जन्नत बसती है।
माँ हमारी पहली मोहब्बत होती है,
और सच कहूँ —
आख़िरी तक वही सबसे सच्ची इबादत होती है। ❤️
Chaitanya Joshi
શાંતિને ધીરજ રાખીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
મનોબળ મજબૂત ધરીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
વાંચેલુંને લખેલું પૂર્વે એ વાગોળવાનો વખત,
માનવસહજ કર્મ કરીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
પરિણામની ચિંતા કે ચિંતનનો સમય નથી કે,
યાદદાસ્તને ફરી ઢંઢોળીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
અઘરું કે સહેલું એ પળોજણમાં પડ્યા વગર,
સહેલું તે જે વહેલું લખીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
બનીને પાર્થ થૈ નિશ્ચિંત તમારું કર્મ કર્યે જાઓ,
કૃષ્ણને બસ સાક્ષી ગણીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Narayan
तुझे इतना चाहा कि,
फिर कुछ चाहा ही नहीं,
तुझे चाहकर .......❤🔥🍂🍁
- Narayan
A singh
भरोसा काँच की तरह होता है,
एक दरार पड़े तो चमक खो देता है।
फिर चाहे सच कितना भी साफ़ क्यों न हो,
टूटा यक़ीन हर बात को धुंधला कर देता है।
_ A Singh ✨
prit tembhe
मिल गया होता....✍️
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता....
अमावस के चांद को उसका सितारा मिल गया होता......
अगर एक लफ्ज़ छुप जाता छूपके से,
मुझे मेरे दिल का तराना मिल गया होता......
उस दिन तो नैय्या कुछ यूंही डूबी....
समुंदर चारों दिशाओं में खोया होता......
अगर तूफान नहीं आता , तो शायद
किनारा मुझे मिल गया होता.......
क्या कहे काटो को, फूल भी अब काटने लगे....
बच्चा था,ठीक था....लेकिन जवानी में भी कोई
धूल चाटने लगे.....
अच्छा हुआ हवा के साथ धूल भी उड़ गई.....
वरना उसकोही, सोने की चमक समझके बैठा होता,
अफसोस फिर भी आँखें करती है....
क्योंकि नजर को कोई नजारा मिल गया होता......!
इसलिए तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता....
अगर तूफान नहीं आता, किनारा मिल गया होता.......!!
Chaitanya Joshi
શિયાળાને વિદાય આપી આવી હુતાશણી.
ઉનાળાને રખે આવકારી આવી હુતાશણી.
યાદ પ્રહલાદની આજેય સ્મરણમાં આવતી,
હિરણ્યકશિપુને ધિક્કારી આવી હુતાશણી.
અગનકસોટી છોને થતી હોય હરિ જો હારે,
ભક્તવત્સલતાને સ્વીકારી આવી હુતાશણી.
હોલિકાદહને સહીસલામત રહ્યો પ્રહલાદને,
સત્યનો શકે વિજય મનાવી આવી હુતાશણી.
કેસૂડાંના રંગે માનવમહેરામણ તો ગયું રંગાઈને,
નૂતન જોમને ઉત્સાહ સંચારી આવી હુતાશણી.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Paagla
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simran kumari
rango ke bahar itish ke sang
barsat si prem ki kahani,
Krishna or Radha ji jubani,
holika ki bhasm se ubhari thi rah.
asatya par satya ki yah pahli chah.💖💖💖💖💖
gulab ki khooshbu me chupa sandesh,
mita de jat-pat, laye naye sabere ka tej♥️
sangeet , nritya or hansi ka mel,
itihas me gunjata yah parv anmol.💓💓💓💓💓
rango se bhara har chehra, har man,
yad dilaye ki achai hai jeevan ka dhan.♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Krupa Thakkar #krupathakkar
ફરજ સાચી રીતે બજાવવી તેજ સાધના...
સાધના માત્ર જપ, તપ, ધ્યાન અને યજ્ઞ થી મર્યાદિત નથી.
પરિવાર માં રહો અને માયા,મમતા,મોહ ,અપેક્ષા,આશા વગેરે નો ત્યાગ જ વૈરાગ્ય છે.
કર્તવ્ય નીભાવવું એ જ સન્યાસ કહેવાય...
Shailesh Joshi
किसी भी मौसम में कैसे भी हालात में
अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, चलो हम तो वृक्ष है,
हमारे पैर नहीं होते, मगर आप तो इन्सान है,
और तुम्हारे पास तो सिर्फ पैर नहीं, पैरों के साथ-साथ दिमाग भी है, और शायद तुम्हें सम्भालने वाले लोग भी है, इसलिए अपनी पहचान मत खोईए, क्योंकि हमें तो मौसम के हिसाब से ही जीना पड़ेगा, मगर आप तो कैसे भी करके अपने हालात संवार सकते हैं.
- Shailesh Joshi
Yash Singh
एक कागज राहों में पड़ा मिला मुझे ,
मैंने उसे नायाब बना दिया
अपने दिल की सारी बातें लिख दी उसे पर
और उसे अपनी डायरी में छुपा दिया
एक दिन पता चला वह किसी और की डायरी का हिस्सा था
किसी की अनकही बातों का अनकहा किस्सा था
कोई लिखना चाहता था उसे पर बहुत कुछ पर जब कांपते हाथों ने साथ ना दिया
तो उसने इसे फाड़ कर फेंक दिया
होकर व्याकुल किसी के प्रेम में इस पर टपकी दो आंसू की बूंदे थी
मैंने इसे नायाब बना दिया यह समझना मेरी भूल थी
नायाब तो था यह पहले से ही भले ही इस पर लोगों की पग धूल थी
Manish Patel
यदि हमारे अंदर संतोष है,
तो हम सबसे अमीर हैं।
शांति है तो सबसे सुखी हैं,
दया है तो सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति हैं
और स्वस्थ हैं तो
सबसे भाग्यशाली है good morning radhe radhe 🙏
Narayan
स्मृतियों की गूँज: मिलन की वो चंद घड़ियाँ और विरह का अनंत सफ़र 🌸✨
प्रेम अक्सर पलों में जीता है और सदियों तक याद किया जाता है। वह पहली मुलाकात, हाथों का धीमे से स्पर्श और वो बेफिक्र हँसी—जैसे समय वहीं ठहर गया हो। वे क्षणिक पल किसी जादुई सुखद अनुभूति से कम नहीं थे, जहाँ दुनिया का शोर थम गया था और सिर्फ दो दिलों की धड़कनें सुनाई देती थीं।
लेकिन नियति का खेल देखिए, वही आनंदपूर्ण क्षण अब विरह की अनंत पीड़ा बन चुके हैं। आज जब अकेलेपन की चादर ओढ़कर उन स्मृतियों को कुरेदते हैं, तो वह बीता हुआ सुख आँखों में नमी बनकर उतर आता है। प्रेम पाना सौभाग्य है, पर उसे खोकर उसकी यादों के सहारे जीना एक तपस्या।
शायद सच्चा प्रेम वही है जो पास न होकर भी एहसास में जिंदा रहे। विरह कठीन है, पर वह साथ बिताया हर लम्हा आज भी रूह को सुकून दे जाता है।🔥💕
Kamini Shah
જોને વસંત કેવી ખીલી છે
સખી
ઠાઠમાઠથી સજીને આવે જાણે
મહારથી…
-કામિની
Kaushik Dave
यह झुरियां तो बस वक्त की निशानी है
अपनी रुह की कहानी जिंदगानी है।
Saroj Prajapati
आत्मसम्मान पर भारी पड़ने लगे जब सुख
तो उसे त्यागने में क्यों इतना दुख
माना सुख सुविधाओं बिना जीवन नहीं आसान
किन्तु आत्मसम्मान विहीन इंसान भी तो होता पशु समान।
- Saroj Prajapati
Kaushik Dave
વિનાશ કાળે વિપરીત બુદ્ધિ,દેખાતો હોય પૃથ્વીનો અંત,
સત્તાની હોડમાં દેશો,હડપ કરતા નાના રાજ્યો.
વાતાવરણ તંગ બનતું, યુદ્ધના ભણકારા થાય,
બોંબ ધડાકા,અણુબોમ્બનો મારો,પૃથ્વીનો અંત નજીક દેખાય.
જોઈ રહ્યો છું પૃથ્વીનો છેલ્લો દિવસ,શ્વાસ લેતા શ્વાસ રૂંધાય,
આ તે કેવો હેવાન બન્યો માનવ,બસ પૃથ્વીનો અંત દેખાય.
- કૌશિક દવે
ziya
एक नाव पर दो पैर पैसारे ऐसे कैसे
वो भी प्यारा हम भी प्यारे ऐसे कैसे
Dada Bhagwan
Do you know that just like how our anger is not in our own control, neither is it in control of the other person? When someone is angry with us, if we get angry at them, the fire will be kindled.
To know more visit here: https://dbf.adalaj.org/Qjx1GppJ
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Imaran
कभी मिले फुरसत तो इतना जरूर बता देना,
वो कौन सी मोहब्बत थी जो हम तुम्हे न दे सके
💔imran 💔
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
मोहब्बत किसका नाम है ?
(१)
मोहब्बत रूह का आराम है,
खुदा का भेजा एक पैगाम है।
किसी की चाहतों का जाम है,
दिलों की धड़कनों का नाम है।
(२)
ये मीठा सा कोई एहसास है,
समंदर में भी जगती प्यास है।
मिलन की एक मीठी आस है,
जो दूर होकर भी बहुत पास है।
(३)
कभी ये ख्वाब की ताबीर है,
कभी हाथों की ये लकीर है।
ये आशिक के दिल की पीर है,
मगर फिर भी वही अमीर है।
(४)
ये छुपकर की गई मुलाक़ात है,
ये तारों से सजी एक रात है।
ये दो रूहों की पावन सौगात है,
ये सावन की झड़ी, बरसात है।
(५)
मोहब्बत दर्द की एक दवा है,
बसंती बाग की ठंडी हवा है।
निगाहों से बयां जो माजरा है,
यही तो ज़िंदगी का आसरा है।
(६)
कभी ये आग है जो जलाती है,
कभी शबनम सी ठंडक लाती है।
कभी ये नींद को भी उड़ाती है,
कभी मीठे से गीत गाती है।
(७)
ये होंठों पर सजी मुस्कान है,
ये बेज़ुबां दिलों की ज़ुबान है।
यही तो आशिकों की जान है,
इसी में बस रहा जहान है।
(८)
ये राधा और कृष्ण का साथ है,
ये शिव और शक्ति की बात है।
यही तो दुआओं का हाथ है,
मोहब्बत ही तो रब की ज़ात है।
(९)
मोहब्बत एक गहरा समंदर है,
छिपा जिसमें सुकूं का मंज़र है।
कभी ये फूल है, कभी खंजर है,
बिना इसके तो दिल बंजर है।
(१०)
ये वादों की कोई तदबीर नहीं,
ये पन्नों पर खिंची तस्वीर नहीं।
इसे काटे जो, ऐसी शमशीर नहीं,
मोहब्बत सी कोई तासीर नहीं।
(११)
ये सजदे में झुका हुआ सर है,
ये दुआओं से भरा एक घर है।
ये बेखौफ सा एक सफर है,
ये इबादत का ही तो असर है।
(१२)
ये वो मंदिर है जिसमें मूरत है,
ये वो शीशा है जिसमें सूरत है।
ये ही तो दिल की अब ज़रूरत है,
ये कितनी ही हसीन और खूबसूरत है।
(१३)
कभी ये धूप है, कभी ये छांव है,
ये शर्मीले से दिल का एक दांव है।
भंवर में फंसी जो, ये वो नाव है,
लगे जो जिगर पे, ये वो घाव है।
(१४)
मोहब्बत ज़िंदगी का सार है,
ये खुशियों का खिला बहार है।
ये कश्मकश है, और करार है,
ये वो मंज़िल है जिसका इंतज़ार है।
(१५)
ये जन्मों की पुरानी कोई प्रीत है,
ये होठों का मधुर सा गीत है।
ये धड़कन का अनूठा संगीत है,
ये हार के भी जो मिली, वो जीत है।
(१६)
ये वो धागा है जो दिल को बांधे,
ये वो तीर है जो नज़रों से साधे।
जो पूरे करे अधूरे इरादे,
ये वो कसमें हैं, और वो वादे।
(१७)
ये पूजा है, ये ही इबादत है,
ये तो जन्मों की कोई आदत है।
नज़र की ये हसीन नज़ाकत है,
ये मासूमों की एक शराफत है।
(१८)
ये वो रास्ता है जिस पर आशिक चले,
ये वो शमा है जिसमें परवाने जले।
ये वो फूल है जो कांटों में खिले,
ये वो मंज़िल है जो मुद्दतों में मिले।
(१९)
मोहब्बत ही तो बंदगी है दोस्तों,
ये रोशन सी एक ज़िंदगी है दोस्तों।
ये चाहत की सादगी है दोस्तों,
यही रूह की ताज़गी है दोस्तों।
(२०)
कभी ये फासलों की दूरी है,
कभी ये मिलने की मजबूरी है।
नज़र से जो मिले वो मंज़ूरी है,
मोहब्बत के बिना उम्र अधूरी है।
(२१)
ये खत में लिखी हुई कोई गज़ल है,
ये बीता हुआ वो सुनहरा कल है।
ये आंखों से छलकता हुआ जल है,
ये मीठा सा सब्र का वो फल है।
(२२)
ये यादों के संग उड़ती पतंग है,
ये वीराने में बजता मृदंग है।
ये सादगी है, और नया ढंग है,
ये तपस्या है, और सत्संग है।
(२३)
मोहब्बत एक गहरा खज़ाना है,
जिसे ढूंढने में बीता ज़माना है।
ये दीवानों का एक ठिकाना है,
हर एक धड़कन का ये तराना है।
(२४)
ये सूरज की पहली सी किरण है,
कस्तूरी महकता हुआ हिरण है।
ये पावन सा जीवन का आचरण है,
ये आत्मा का खुदा को समर्पण है।
(२५)
मोहब्बत से ही रौशन ये मुकाम है,
मोहब्बत ही तो मेरी सुबह-शाम है।
ये सूफी-संतों का मीठा कलाम है,
मेरी इस रचना का मोहब्बत को "स्वयम्'भू" सलाम है!
रचना: अश्विन राठौड़ "स्वयम्'भू
SAYRI K I N G
मेरी रूह में समाई है तेरी खुशबू लोग कहते हैं तेरा इत्र लाजवाब है... Shayri King
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
હાથમાં હોય એજ 'ડીલીટ' કરી શકાય,
હૈયામાં હોય એ નહીં...!!
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
SAYRI K I N G
किसने कहा हम पढ़ कर छोड़ देते है
अरे
जोह दिल को भा जाएं हम वो पन्ना मोड देते हैं
- SAYRI K I N G
SAYRI K I N G
मनाऊँ किस तरह होली मैं दोस्तों के साथ, सब के हाथ में खंजर हैं, गुलाल थोड़ी है!!
- SAYRI K I N G
Jyoti Gupta
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nilesh vyas
આ શહેર ક્યાં આજકાલનું છે,
આ શહેર તો બહુ કમાલનું છે.
એકે ય ખુણો ખાલી નહીં મળે,
આ શહેર નાની મોટી ઘમાલનું છે.
અંગ્રેજો ય ધૂળ ચાટતા થઇ ગયા,
આ શહેર ઇજ્જતના સવાલનું છે.
અહીંથી લાઠી લઈ નિકળેલો ફકીર,
આ શહેર ચપટી મીઠાની ચાલનું છે.
આ અમદાવાદ છે, તું ય શીખી જા,
આ શહેર નાની મોટી બબાલનું છે.
~નિલેશ
nilesh vyas
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kajal jha
“मैं अभी बाकी हूँ”
भीड़ भरे इस शहर में,
मैंने अक्सर खुद को खोया है,
चेहरों की इस मेला-धूप में
मन को तन्हा ही रोया है।
हँसी ओढ़कर निकली थी घर से,
आँखों में सावन छिपाए हुए,
सबको अपना दर्द सुनाया,
पर अपने ज़ख्म दबाए हुए।
रिश्तों की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते
कितनी बार फिसली हूँ मैं,
सबकी ख़्वाहिश पूरी करते
खुद से ही बिछड़ी हूँ मैं।
आईने ने जब सच बोला,
दिल थोड़ा-सा काँप गया,
“तू थक गई है अब मान भी ले,”
अंदर कोई चीख गया।
पर हार मानना फितरत में नहीं,
टूटकर भी जुड़ जाती हूँ,
रात अगर सौ बार गिराए,
सुबह बनकर उठ जाती हूँ।
मैंने सीखा है अंधेरों से
रोशनी खुद जलानी है,
कदम डगमगाएँ चाहे जितना,
राह नई बनानी है।
लोग कहेंगे — “बहुत बदली है,”
हाँ, मैं अब वैसी नहीं रही,
जो हर बात पे चुप रह जाती,
अब वो खामोशी नहीं रही।
अब शब्द मेरे हथियार बने हैं,
सपने मेरी ढाल हुए,
आँसू जो कल तक कमज़ोरी थे,
आज वही कमाल हुए।
मैंने दर्द को दोस्त बनाया,
उससे जीना सीखा है,
जिसने दिल को तोड़ दिया था,
उसी से हँसना सीखा है।
हाँ, कुछ रिश्ते छूट गए पीछे,
कुछ रास्ते अनजाने हैं,
पर जो मेरे अपने थे ही नहीं,
उनके क्या अफसाने हैं।
मैं अब खुद की आवाज़ बनूँगी,
भीतर की आग जलाऊँगी,
जो मुझको कमज़ोर समझेगा,
उसे अपना सच दिखलाऊँगी।
मैं नदी हूँ, रुकना क्या जानूँ,
पत्थर भी रास्ता देंगे,
मैं सपना हूँ, अधूरा सही,
एक दिन पंख लगा लेंगे।
तुम देखना, ये वक़्त गवाह होगा,
मैं फिर से मुस्कुराऊँगी,
टूटी हुई नहीं, मज़बूत बनकर
अपनी पहचान बनाऊँगी।
क्योंकि कहानी अभी खत्म नहीं,
अधूरा सा एक मुकाम हूँ,
गिरकर भी जो खड़ी हुई है —
हाँ, मैं वही इंसान हूँ।
मैं हार नहीं, शुरुआत हूँ,
मैं अंत नहीं, उड़ान हूँ,
जो खुद से फिर मिल आई है —
मैं अभी बाकी हूँ…
हाँ, मैं अभी बाकी हूँ।
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
साँझ ढले
साँझ ढले यादों का डेरा लग जाता हैं l
पलकों पे अश्कों का मेला लग जाता हैं ll
वो घटों एकदूसरे की आगोश में खो जाना l
दिल दिमाग पुरानी दिनों में सर जाता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Prashanth B
ಬಿಡುಗಡೆ, ಬೇಕಿಲ್ಲ ನೀವಾಗಲೇ ಮುಕ್ತರು..!! ಈ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ನಿಮಗೆ ಗೊಂದಲ ಉಂಟು ಮಾಡಿದೆಯೇ?
ಹಾಗಾದರೆ ಈ ಕವನ ಓದಿಕೊಳ್ಳಿ... ಈ ಒಡಲು ಬಂಧನದಲ್ಲಿ ಇದೆ, ಮನಸ್ಸು ಬಂಧನದಲ್ಲಿ ಇದೆ... ಆದರೆ ಅವನ್ನು ಅರಿವ ಅರಿವಿಗೆ ಬಂಧನವಿಲ್ಲ... ಅದು ನಿತ್ಯ ಮುಕ್ತ...
ಓ ಮನವೆ
ಓ ಮನವೆ,
ಸರಿದು ಹೋಗುವ ಮುನ್ನ, ಬರಿದಾಗ ಒಮ್ಮೆ
ನಿ ಯಾರಿಂದು ಕೇಳು, ಓ ಮನವೆ.
ನನ್ನ ಹೆಸರು, ಕುಲ, ಗೋತ್ರ, ನೆನವು, ನನಗೆ ಗೊತ್ತೆಂದೆನ್ನ ಬೇಡ,
ಎಲ್ಲ ನಾ ಬಲ್ಲೆನೆನಬೇಡ.
ಹೆಸರು, ಕುಲ, ಗೋತ್ರ, ನೆನವುಗಳಾಚೆ,
ನಿ ಯಾರೆಂದು ಕೇಳು, ಓ ಮನವೆ.
ಓ ಮನವೆ,
ಯಾವುದರ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆಯೋ, ಅದು ನೀನಲ್ಲ.
ಆ ಮಾಮರದ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ಮಾಮರವು ನೀನಲ್ಲ.
ಆ ಸದ್ದಿನ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ಸದ್ದು ನೀನಲ್ಲ.
ಮಾವಿನ ರುಚಿಯ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ರುಚಿಯು ನೀನಲ್ಲ.
ಗಂಧದ ಘಮದ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ಘಮವು ನೀನಲ್ಲ.
ರೇಷ್ಮೆಯ ನುಣುಪಿನ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ನುಣುಪು ನೀನಲ್ಲ.
ಓ ಮನವೆ,
ಸರಿದು ಹೋಗುವ ಮುನ್ನ ಬರಿದಾಗ ಒಮ್ಮೆ
ನಿ ಯಾರೆಂದು ಕೇಳು.
ಈ ಒಡಲ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಈ ಒಡಲು ನೀನಲ್ಲ.
ಈ ಯೋಚನೆಗಳ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಈ ಯೋಚನೆಗಳು ನಿನಲ್ಲ, ಓ ಮನವೆ.
ಕೆಟ್ಟ ಯೋಚನೆಗಳು ನೀನಲ್ಲ,
ಒಳ್ಳೆ ಯೋಚನೆಗಳು ನೀನಲ್ಲ.
ಆತಂಕವೂ ನೀನಲ್ಲ, ಓ ಮನವೆ.
ನಿನಗೆ ಅವೆಲ್ಲದರ ಅರಿವಿದೆ,
ನಿ ಯೋಚನೆಗಳಲ್ಲ, ಓ ಮನವೆ.
ಒಮ್ಮೆ ಯೋಚನೆಗಳು ನಿಂತೊಡನೆ ನಿರಾಳ,
ಆ ನಿರಾಳದ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ,
ಆ ನಿರಾಳವು ನೀನಲ್ಲ, ಓ ಮನವೆ.
ಹಾಗಾದರೆ, ಯಾರು ನೀ ಹೇಳು ಮನವೆ.
ಈ ಅರಿವೇ ನೀನು, ಮನವೆ.
ನೋಡು, ನಿನಗಿಲ್ಲ ಯಾವ ಆಕಾರ,
ನೋಡು, ನಿನಗಿಲ್ಲ ಯಾವ ಮಿತಿ,
ನೋಡು, ನಿನಗಿಲ್ಲ ಯಾವ ಪರಿಧಿ.
ನೋಡು ಓ ಮನವೆ, ಕೊನೆಮೊದಲಿಲ್ಲ ನಿನಗೆ.
ಎಲ್ಲವನರಿವೆ ನೀನು,
ನಿನ್ನ ನೀನು ಅರಿವೆ.
ಹೊರಗುರುವನು ಹುಡುಕಬೇಡ ಮನವೆ,
ಈ ಅರಿವೆ ನಿನ್ನ ಗುರುವು.
ನಿನಗೆ ನೀನೇ ದೀವಿಗೆ,
ನಿನಗೆ ನೀನೇ ಬೆಳಕು.
ಈ ಅರಿವೆ ಬೆಳಕು,
ನೀನೇ ಆ ಬೆಳಕು.
ಅರ್ಥಸಾರ (ಭಾವಾನುವಾದ)
ಈ ವಚನದಲ್ಲಿ ಕವಿ ಮನಸ್ಸಿಗೆ ಕೇಳುತ್ತಾರೆ — “ನೀ ಯಾರು?”
ನೀನು ಅರಿವಿನ ಸಾಕ್ಷಿ, ಆದರೆ ಅರಿತ ವಸ್ತುಗಳಲ್ಲ.
ದೇಹ, ಯೋಚನೆ, ಭಾವನೆ — ಇವು ನಿನ್ನಲ್ಲ.
ಅವುಗಳ ಅರಿವು ನಿನಗಿದೆ, ಆದರೂ ಅವು ನೀನಲ್ಲ.
ಆದ್ದರಿಂದ ಹೊರಗುರುವನ್ನೇ ಹುಡುಕಬೇಡ;
ನಿನ್ನೊಳಗಿನ ಅರಿವೇ ನಿನ್ನ ಗುರು, ನಿನ್ನ ದೀವಿಗೆ, ನಿನ್ನ ಬೆಳಕು.
ಸಾರಾಂಶವಾಗಿ — “ಮನಸ್ಸು ನಿನ್ನವಲ್ಲ, ಅರಿವು ನೀನು.” ✨
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
काम- क्रोध से युक्त नर, नहीं जानते धर्म। नशेबाज-भयभीत नर, करें नहीं सद्कर्म ।।
दोहा --433
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
Sonu Kumar
रफाल जेट से भारत की कौन सी सैन्य कमी पूरी होगी?
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भारत फाइटर प्लेन्स के इंजन नहीं बनाता, अत: हम अपनी सेना चलाने के लिए विदेशियों के लड़ाकू विमानो पर बुरी तरह से निर्भर है। इस स्थिति में हमारे पास 2 विकल्प बचते है :
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हम गेजेट में वे आवश्यक क़ानून प्रकाशित करें जिससे हम फाइटर प्लेन बनाने की क्षमता जुटा सके
हम विदेशियों से लड़ाकू विमान ख़रीदे।
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मैं बिंदु 1 में दिए गए विकल्प पर काम करने के मानता हूँ, और विदेशी हथियारों को खतरे के रूप में देखता हूँ। वजह यह है कि विदेशी हथियारों के कारण भारत की सेना युद्ध लड़ने के लिए विदेशियों पर निर्भर हो जाती है।
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(1) 1967 की बात है, तब अमेरिका ने भारत को आने वाली गेंहू की सप्लाई को बाधित कर दिया था। भारत को यह गेंहू Public Law-480 के तहत आता था, और अमेरिका इसे बिना किसी वाजिब कारण के रोक नहीं सकता था। अत: उन्होंने परिवहन प्रक्रिया के झमेले डालकर इसकी सप्लाई तोड़ दी जिससे भारत में गेंहू की कमी हो गयी।
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दरअसल, इस समय अमेरिका विएतनाम पर बम गिरा रहा था, और इंदिरा जी हनोई पर बमबारी करने की आलोचना की थी। और इंदिरा जी के इस बयान से अमेरिकी हथियार निर्माता नाराज हो गये थे !!.
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जब इंदिरा जी ने कहा कि, भारत वही कह रहा है जो पोप एवं यूएन महासचिव कह रहे है, तो अमेरिका ने जवाब दिया कि –
लेकिन पोप एवं यूएन को अपने नागरिको को खिलाने के लिए हमारे गेंहू की जरूरत नहीं है !!
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Public Law-480 के तहत भारत को ये गेंहू लेने के लिए रूपये में भुगतान करना होता था, डॉलर में नहीं। आज की तरह तब भी भारत के पास डॉलर नहीं थे। अत: भारत को अपमान का घूँट पीना पड़ा - Swallowing the humiliation
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ध्यान देने वाली बात यह है कि, यदि तब यह खबर मीडिया में नहीं आती तो भारत को पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा नहीं होना पड़ता। इस तरह पेड मीडिया किसी देश के प्रधानमंत्री को अपने देशवासियों और पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा होने से बचा लेता है !!
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पाकिस्तान को भी गेंहू अमेरिका ही देता था, और जब शिपयार्ड से गेंहू ऊँट गाड़ियों पर लादकर ले जाया जाता था, तो ऊँटो के गले में तख्तियां लटकायी जाती थी। इस तख्तियों पर बड़े अक्षरों में लिखा होता था – Thank you America !!
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(2) भारत का चीन से युद्ध होता है तो हमें फाइटर प्लेन्स की जरूरत होगी। यदि डॉलर हो तो गेंहू ख़रीदे जा सकते है किन्तु फाइटर प्लेन्स नहीं। क्योंकि फाइटर प्लेन्स गेंहू नहीं है। रूस के अलावा सिर्फ अमेरिकी+ब्रिटिश+फ्रेंच को ही ये बनाने आते है। और ये तीनो देश (अमेरिका+ब्रिटिश+फ्रेंच) एक ही ब्लॉक है।
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पेड मीडिया के प्रायोजको ने रफाल पर Thank you America & Thank you France की तख्ती न लटकाकर हमें सार्वजनिक शर्मिंदगी से बचा लिया है। और बदले में पेड मीडिया के प्रायोजक (अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक) हमसे इसकी बड़ी कीमत वसूल रहे है।
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रफाल के साथ 3 समस्याएं है :
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रफाल End Use Monitoring Agreement (EUMA) के साथ आया है : मतलब अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माता हमें किसी समय किसी देश पर इसके इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देते है तो हम इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उदाहरण के लिए जब एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने F-16 का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया था तो अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि वे F-16 का इस्तेमाल भारत पर न करें।
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बस इसी तरह अमेरिकी-फ्रेंच किसी भी समय हमें रफाल का इस्तेमाल न करने के लिए कह सकते है। और फिर हम इनका इस्तेमाल नहीं कर पायेंगे। जब आपको हथियार चलाना हो तो निर्यातक से इसकी अनुमति लेनी होती है। संक्षेप में इसी को EUMA कहते है।
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रफाल में kill Switch (KS) है : यदि कोई आयातक देश EUMA का उलंघन करता है तो निर्माता देश KS का इस्तेमाल करके हथियार को बंद कर देते है। और फिर रफाल काम नहीं करेगा !!
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स्पेयर पार्ट्स पर निर्भरता : अगले चरण में वे रफाल के स्पेयर पार्ट्स भेजना बंद कर देंगे, और रफाल पार्किंग स्टेंड में खड़ा रहेगा और कभी उड़ान नहीं भर सकेगा !!
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तो क्या होगा यदि भारत अमेरिकियों की बात नहीं मानता है, जैसे यदि पीएम सरकारी बैंको, रेल, सार्वजानिक उपक्रम आदि अमेरिकियों-फ्रेंच को बेचने से मना कर देता है, या अमेरिकियों को भारत में यूनिवर्सिटीज खोलने से रोक देता है, और अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माता पाकिस्तान को 200 रफाल और 500 F-16 दे देते है, और साथ ही अमेरिकी-फ्रेंच हमें स्पेयर पार्ट्स भेजना बंद कर देते है ?
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जवाब आपको पता है। क्योंकि यदि अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माता हमें फाइटर प्लेन्स / स्पेयर देने से इनकार कर देते है, या विलम्ब से देते है तो हम बुरी तरह फंस जायेंगे।
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किसी देश की सेना को नियंत्रित करने का यह सबसे अच्छा तरीका है – उनकी सेना में अपने फाइटर प्लेन्स, रडार, हैलिकोप्टर आदि इंस्टाल करो। और फिर आप अमुक देश को अपनी उँगलियों पर नचा सकते हो !! दुसरे शब्दों में, रफाल आने के बाद हमारी निर्भरता अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माताओं पर और भी बढ़ गयी है !! और इसीलिए हम अपनी राष्ट्रिय संपत्तियां और भी तेजी से खोने वाले है।
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तो रफाल एक उन्नत विमान है, लेकिन यह भारत के लिए कितना उपयोगी बना रहेगा, इसका फैसला अमेरिकी-फ्रेंच तय करेंगे, हम नहीं !!
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(3) समाधान :
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जैसा कि आप पिछले कुछ दिनों से अपने आस पास देख ही रहे है कि बीजेपी-कोंग्रेस-आपा के शीर्ष नेता एवं उनके समर्थक ऊपर दी गयी समस्या को समस्या की तरह नहीं देखते है। इसीलिए वे EUMA , Kill Switch और Spare Parts की समस्या पर जानबूझकर खामोश है।
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और वे इसे समस्या के रूप में इसीलिए नहीं देखते है, क्योंकि अभी तक पेड मीडिया ने उन्हें इसे समस्या के रूप में देखने के लिए नहीं कहा है !!
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और ठीक है, अभी हमारे पास प्लेन्स नहीं है, और चीन हम पर चढ़ा हुआ है, अत: हम चाहे या न चाहे हमें अमेरिका या रूस में से किसी देश से तो तत्काल में फाइटर प्लेन्स लेने ही पड़ेंगे। तो इस स्थिति में रफाल खरीदने को लेकर मेरा विरोध नहीं।
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लेकिन मेरा ऐतराज यह है कि, तब भी कोंग्रेस-बीजेपी-आम आदमी पार्टी के नेता एवं उनके समर्थक जानबुझकर उन आवश्यक कानूनों की चर्चा को क्यों टाल रहे है, जिन्हें लागू करके हम स्वदेशी हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर सके !! उलटे वे नागरिको में यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे है, कि रफाल के आने से भारत की सेना मजबूत हो गयी है।
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और यह भ्रम फैलाने के लिए वे – सिर्फ इस बिंदु को बार बार रेखांकित करते है कि रफाल आने के कारण चीन का मुकाबला करने की हमारी क्षमता बढ़ गयी है, किन्तु वे इस बात को जानबूझकर छिपा रहे है कि, इसी के साथ हम अमेरिकी-फ्रेंच हथियार निर्माताओ पर और भी निर्भर हो गए है।
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बहरहाल, यदि आप इसे समस्या के रूप में देखते है तो मेरे विचार में इसका समाधान प्रस्तावित वोइक (WOIC) क़ानून द्वारा किया जा सकता है। यदि वोइक एवं जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छाप दिया जाता है तो मेरा मानना है कि, भारत Made in India & Made by Indians की नीति पर चलते हुए अगले कुछ ही वर्षो में स्वदेशी तकनीक आधारित लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता जुटा लेगा।
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EUMA , Kill Switch और Spare Parts की समस्या के बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है, कृपया इसे पढ़ें -
https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/860309497675462/
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#WOIC , #JuryCourt
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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (२३) की व्याख्या
मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९
“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”
पदच्छेद--
पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानः
शाब्दिक अर्थ--
पितेव = पिता के समान
नः = हमारी
शृणुहि = सुनो
हूयमानः = पुकारे जाने पर
अर्थ-- हे प्रभु! पिता की भाँति हमारी पुकार सुनो।
यहाँ साधक और परमात्मा का सम्बन्ध पिता पुत्र का दिखाया गया है।
अन्य वेदों में भी इस भाव का प्रमाण मिलता है।
१. यजुर्वेद
(३६/१८)
“मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्”
अर्थ — हम सब प्राणियों को मित्रभाव से देखें और परमात्मा हमें कृपादृष्टि से देखें।
यहाँ ईश्वर का भाव रक्षक और मित्र का है, जो पिता के समान करुणामय है।
(४०/८ — ईशावास्य उपनिषद् मंत्र)
“स पर्यगाच्छुक्रमकायम्…”
अर्थ — वह परमात्मा सर्वव्यापक, शुद्ध और पापरहित है।
ऐसा सर्वव्यापक परमात्मा ही सबका आधार-पिता है।
२. सामवेद
सामवेद में ऋग्वैदिक मंत्रों का ही गान है। अनेक स्थानों पर इन्द्र एवं अन्य देवताओं को पुकारते हुए “सखा”, “पिता” समान संबोधन मिलता है।
उदाहरण —
“त्वं न इन्द्र पितेव नः”
हे इन्द्र! आप हमारे पिता के समान रक्षक बनें।
यहाँ भी वही वात्सल्य भाव है।
३. अथर्ववेद
(१९/६७/१)
“त्वं हि नः पिता वसो…”
अर्थ — हे प्रभो! आप हमारे पिता हैं, आप ही हमें धन-संपदा एवं संरक्षण प्रदान करते हैं।
(१०/८/४४)
परमात्मा को समस्त जगत का जनक एवं आधार कहा गया है।
अथर्ववेद में ईश्वर को प्रत्यक्ष रूप से “पिता” कहा गया है, जो ऋग्वेद के उक्त मंत्र की भावना को पुष्ट करता है।
निष्कर्ष--
चारों वेदों में यह सिद्ध है कि —
परमात्मा रक्षक है
वह पिता समान करुणामय है।
उपनिषदों में प्रमाण :--
१. तैत्तिरीयोपनिषद् (३.१)
“यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते…”
अर्थ — जिससे ये समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं, जिसमें स्थित रहते हैं और जिसमें लीन हो जाते हैं — वही ब्रह्म है।
जो सृष्टि का जनक है, वही वास्तविक अर्थ में सबका पिता है।
२. छान्दोग्योपनिषद् (६.२.१)
“सदेव सोम्य इदमग्र आसीत्…”
अर्थ — हे प्रिय! यह सब पहले सत् (ब्रह्म) ही था।
समस्त जगत उसी एक सत्य से प्रकट हुआ — अतः वही सबका मूल कारण और पालक है।
३. श्वेताश्वतरोपनिषद् (६.१७)
“यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्च…”
अर्थ — जो देवताओं का भी कारण है, वही समस्त जगत का स्वामी है।
जब देवताओं का भी कारण वही है, तो वह समस्त जीवों का परम जनक है।
४. मुण्डकोपनिषद् (१.१.७)
“यथोर्णनाभिः सृजते गृह्णते च…”
अर्थ — जैसे मकड़ी अपने से जाल निकालती है और पुनः समेट लेती है, वैसे ही ब्रह्म से जगत की उत्पत्ति और लय होती है।
यह उपमा ब्रह्म को सृष्टिकर्ता और आधार-पिता के रूप में स्थापित करती है।
५. कठोपनिषद् (२.२.१३)
“नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम्…”
अर्थ — वह नित्य, चेतन और सबका नियन्ता है।
जैसे पिता परिवार का पालक और नियन्ता होता है, वैसे ही परमात्मा समस्त प्राणियों का पालक है।
भाव--
उपनिषदों में “पिता” शब्द प्रत्यक्ष हर स्थान पर न हो, परन्तु —
सृष्टिकर्ता, पालक,आधार
करुणामय, नियन्ता
इन सभी विशेषणों से वही भाव सिद्ध होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता में प्रमाण--
१. (९.१७)
“पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः…”
अर्थ — मैं इस सम्पूर्ण जगत का पिता, माता, धारण करने वाला और पितामह हूँ।
यहाँ भगवान् स्वयं को जगत्-पिता घोषित करते हैं। यह “पितेव” भाव का प्रत्यक्ष समर्थन है।
२. (१४.४)
“अहं बीजप्रदः पिता”
अर्थ — हे अर्जुन! समस्त योनियों में जो भी शरीर उत्पन्न होते हैं, उनका बीज देने वाला पिता मैं हूँ।
स्पष्ट रूप से परमात्मा को समस्त जीवों का पिता कहा गया है।
३. (९.१८)
“गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्…”
अर्थ — मैं ही गति, भर्ता (पालनकर्ता), स्वामी, साक्षी, निवास, शरण और निष्काम मित्र हूँ।
“शरणं” और “सुहृत्” शब्द पिता के करुणामय संरक्षण को प्रकट करते हैं।
४. (१८.६६)
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज…”
अर्थ — सब धर्मों को त्यागकर मेरी शरण में आओ; मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा।
यह वही भाव है — जैसे बालक संकट में पिता को पुकारता है और पिता उसकी रक्षा करता है।
निष्कर्ष--
गीता में परमात्मा स्वयं को पिता कहते हैं।
वह बीज प्रदाता हैं।
वह शरणदाता और सुहृद् हैं।
इस प्रकार ऋग्वैदिक “पितेव नः शृणुहि” का भाव गीता में पूर्ण विकसित रूप में प्रकट होता है —
भक्त पुकारता है, और भगवान् पिता के समान उसकी रक्षा करते हैं।
महाभारत में प्रमाण--
१. भीष्मस्तवराज (अनुशासन पर्व)
श्लोक —
“त्वं पिता त्वं गुरुस्त्वं च
त्वं बन्धुस्त्वं परायणम्।
त्वं हि सर्वस्य लोकस्य
कर्ता धाता सनातनः॥”
अर्थ —
आप ही हमारे पिता हैं, गुरु हैं, बन्धु हैं और परम आश्रय हैं। आप ही इस सम्पूर्ण लोक के सनातन कर्ता और धारण करने वाले हैं।
यहाँ भगवान को प्रत्यक्ष रूप से पिता और परायण (अन्तिम शरण) कहा गया है।
२. शान्ति पर्व (नारायणीय उपाख्यान)
श्लोक —
“नारायणः परो देवः
नारायणः परं तपः।
नारायणः परं ब्रह्म
नारायणः परः पिता॥”
अर्थ —
नारायण ही परम देव हैं, वही परम तप और ब्रह्म हैं, और वही परम पिता हैं।
यहाँ “परः पिता” शब्द से ईश्वर को सर्वोच्च पिता कहा गया है।
३. उद्योग पर्व (विदुरनीति)
श्लोक —
“धर्म एव हतो हन्ति
धर्मो रक्षति रक्षितः।”
अर्थ —
धर्म का नाश करने वाला स्वयं नष्ट होता है, और धर्म की रक्षा करने वाला धर्म द्वारा रक्षित होता है।
पुराणों में प्रमाण --
१. श्रीमद्भागवत महापुराण ११.५.४१
श्लोक —
“देवर्षिभूताप्तनृणां पितॄणां
न किंकरो नायमृणी च राजन्।
सर्वात्मना यः शरणं शरण्यं
गतो मुकुन्दं परिहृत्य कर्तम्॥”
अर्थ —
जो पुरुष सम्पूर्ण भाव से शरण देने वाले भगवान् मुकुन्द की शरण में चला जाता है, वह देवताओं, ऋषियों, प्राणियों, संबंधियों और पितरों के ऋण से मुक्त हो जाता है।
यहाँ भगवान को “शरण्य” (सबको शरण देने वाले) कहा गया है — जैसे पिता शरण देता है।
२. विष्णु पुराण--
१.१९.८५
श्लोक —
“त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।”
अर्थ —
हे प्रभो! आप ही माता हैं, आप ही पिता हैं; आप ही बन्धु और सखा हैं।
यहाँ परमात्मा को प्रत्यक्ष रूप से “पिता” कहा गया है।
यह प्रार्थना-श्लोक परम्परागत रूप से विष्णु-स्तुति में उद्धृत है।
३. शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता)
श्लोक —
“त्वं पिता त्वं च मे माता त्वं बन्धुस्त्वं च दैवतम्।”
अर्थ —
हे प्रभो! आप ही मेरे पिता, माता, बन्धु और देवता हैं।
4--देवी भागवत पुराण--
श्लोक —
“या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता…”
अर्थ —
जो देवी समस्त प्राणियों में मातृरूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार।
जब परमशक्ति को “जगत्-जननी” कहा गया है, तो वही शक्ति पिता-स्वरूप भी मानी गई है — जो सबकी रक्षक है।
पुराणों में —
परमात्मा को प्रत्यक्ष “पिता” कहा गया है।
उन्हें शरण्य (शरण देने वाले) और पालनकर्ता बताया गया है।
स्मृति ग्रन्थो मेँ प्रमाण--
१. मनुस्मृति ७.१४४
श्लोक —
“पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने।
रक्षन्ति स्थाविरे पुत्रा न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति॥”
अर्थ —
बाल्यावस्था में पिता रक्षा करता है, युवावस्था में पति, और वृद्धावस्था में पुत्र।
यहाँ “पिता” को स्वाभाविक रक्षक कहा गया है। स्मृति-दृष्टि में रक्षण का यह आदर्श अंततः परमेश्वर में परिपूर्ण माना गया है।
२. याज्ञवल्क्य स्मृति १.३६७
श्लोक —
“धर्मो रक्षति रक्षितः।”
अर्थ —
जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
धर्म का परमाधार परमात्मा हैं; अतः वही अंतिम रक्षक — पिता के सदृश।
३. पराशर स्मृति १.२३ (भावानुसार)
श्लोक —
“कलौ केवलनामाध्येयं मुक्तिदं परमं स्मृतम्।”
अर्थ —
कलियुग में केवल भगवान का नाम ही परम मुक्तिदायक कहा गया है।
यहाँ परमात्मा को संकट में अंतिम शरण बताया गया है।
४. नारद स्मृति (प्रथम अध्याय, भावानुसार)
नारद स्मृति में धर्म और न्याय को ईश्वरीय व्यवस्था बताया गया है।
जो समस्त धर्म-व्यवस्था का मूल है, वही परम नियन्ता और रक्षक है।
निष्कर्ष--
स्मृति-ग्रन्थों में —
“पिता” को स्वाभाविक रक्षक कहा गया है।
धर्म को रक्षणकर्ता बताया गया है।
परमात्मा को अंतिम शरण और मुक्तिदाता माना गया है।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण--
१. विदुरनीति (महाभारत, उद्योग पर्व)
विदुर कहते हैं —
“धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।”
अर्थ — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
यहाँ धर्म को रक्षक कहा गया है। परमधर्मस्वरूप ईश्वर ही अंतिम रक्षक हैं — पिता के समान संरक्षण करने वाले।
२. चाणक्य नीति--
“एको देवः सर्वभूतेषु गूढः…
अर्थ — एक ही परम देव सब प्राणियों में स्थित है और सबका नियन्ता है।
३- नीतिशतकम् — भर्तृहरि
श्लोक —
“दिक्कालाद्यनवच्छिन्नानन्तचिन्मात्रमूर्तये।
स्वानुभूत्येकमानाय नमः शान्ताय तेजसे॥”
भावार्थ —
जो परमात्मा देश-काल से परे, अनन्त चैतन्यस्वरूप और शान्त हैं, उन्हें नमस्कार है।
यहाँ परमात्मा को सर्वाधार, सर्वव्यापक चेतन सत्ता कहा गया है — वही समस्त जीवों का आधार-पिता है।
४-. हितोपदेश--
श्लोक —
“सर्वेषामेव भूतानां हितं यः साधुचिन्तयेत्।
वाचि सत्यं दया हृदि स पिता स च बान्धवः॥”
भावार्थ —
जो सब प्राणियों का हित चाहता है, जिसकी वाणी सत्य और हृदय दयालु है — वही सच्चा पिता और बन्धु है।
यह श्लोक पिता के लक्षण बताता है — दया और हितचिन्तन। यही गुण परमात्मा में परिपूर्ण रूप से हैं।
५- पंचतंत्र--
श्लोक —
“धर्मो रक्षति रक्षितो हन्ति धर्मो हतः।”
भावार्थ —
जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
धर्मस्वरूप परमात्मा ही अंतिम रक्षक हैं — जैसे पिता पुत्र की रक्षा करता है।
६- योगवसिष्ठ--
श्लोक —
“चिदाकाशो हि भगवान् सर्वभूतहिते रतः।
स्वभावादेव भूतानां पालयत्यखिलं जगत्॥” (भावानुसार)
भावार्थ —
चैतन्यस्वरूप भगवान् स्वभाव से ही सब प्राणियों के हित में रत हैं और सम्पूर्ण जगत का पालन करते हैं।
यहाँ स्पष्ट है — परमात्मा स्वभावतः पालक और हितैषी हैं, जैसे पिता।
निष्कर्ष--
इन आर्ष ग्रन्थों में —
परमात्मा को सर्वभूतहितकारी कहा गया है।
धर्म और दया को रक्षणकारी बताया गया है।
ईश्वर को पालक और आधार के रूप में निरूपित किया गया है।
इस प्रकार ऋग्वेद के “पितेव नः शृणुहि” का भाव —
करुणामय, हितैषी, रक्षक-पिता — आर्ष एवं नीति-साहित्य में भी पुष्ट होता है।
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Rathod Karan
માતા મૂળ સંસ્કાર ની, બહેન સાહસ દેનાર,
પત્ની જીવન ઘડે સતત - સ્ત્રીથી પુરુષ તૈયાર.
#દુહો
Rashmi Dwivedi
सुप्रभात
लोग क्या बोलते है, यह उनकी बुद्धि का स्तर है आप क्या है, यह आपको पता होना चाहिए किसी के कहने से आपका अस्तित्व नहीं बदलता। हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Siboniso BoyBoy Dlamini
The Day the Fire Went Cold is a heartbreaking story set in rural Eswatini about a fourteen-year-old orphan, Luyanda, whose only family is his struggling grandmother. When she dies, he is left completely alone in a world that does not notice his pain.
With no parents, no relatives willing to help, and no place to belong, Luyanda is forced to fight hunger, loneliness, and silent suffering by himself.
This powerful and emotional short story explores poverty, abandonment, and the quiet battles many children fight behind closed doors.
Sometimes the world does not end with noise — sometimes it ends in silence.
— Siboniso BoyBoy Dlamini
Soni shakya
बादलों में छुपा चांद भी तुझे ढूंढ रहा है..
मेरी हर खामोशी में तेरा ही नाम गूंज रहा है..
- Soni smarty ✍️
Alka Aggarwal
“मैं ही निभा रही हूँ…
और वो बस रह रहा है।”
“हमारा रिश्ता है,
पर कोशिश सिर्फ मेरी।”
“मैं उसे बचा रही हूँ,
जो मुझे नहीं बचा रहा।”
“मैंने उसे चुना,
और उसने आदत।”
“मैं साथ चाहती हूँ,
और वो बस मौजूद है।”
“मैं उसे मनाती हूँ,
और वो दूर होता है।”
“मैंने शादी निभाई,
उसने बस होने दी।”
“मैं उसे खोने से डरती हूँ,
और उसे फर्क नहीं।”
“मैं उसकी हूँ पूरी,
और वो आधा भी नहीं।”
“मैं रिश्ता जी रही हूँ,
और वो समय।”
“मैंने सब दिया,
और उसे जरूरत नहीं थी।”
“मैं उसके लिए जरूरी हूँ,
ऐसा सिर्फ मैं सोचती हूँ।”
“मैंने प्यार किया,
उसने स्वीकार किया।”
“मैं रुक गई,
और वो कभी रुका ही नहीं।”
“मैंने ‘हम’ चाहा,
और उसने ‘मैं’ रखा।”
Alka Aggarwal
“पत्नी मजबूत दिखती है…
क्योंकि उसे टूटने की इजाज़त नहीं।”
“मैं सब संभाल लेती हूँ,
क्योंकि मेरे लिए कोई नहीं संभालता।”
“मैं रोती नहीं सामने,
क्योंकि मुझे ही सहारा बनना है।”
“पत्नी की थकान,
कभी दिखाई नहीं देती।”
“मैं ठीक हूँ कहती हूँ,
क्योंकि मुझे ही ठीक रहना है।”
“मैं कमजोर नहीं,
बस अकेली मजबूत हूँ।”
“मेरे दर्द का समय नहीं,
क्योंकि घर का समय पहले है।”
“मैं खुद को बाद में रखती हूँ,
क्योंकि सब पहले हैं।”
“पत्नी की चुप्पी में,
पूरा घर छुपा होता है।”
“मैं गिर भी जाऊँ,
तो उठना खुद ही पड़ता है।”
“मुझे सहारा नहीं,
जिम्मेदारियाँ मिली हैं।”
“मैं टूटती भी हूँ,
पर दिखती नहीं।”
“मेरी जरूरत सबको है,
पर मेरी जरूरत कोई नहीं।”
“मैं थकती हूँ,
पर रुक नहीं सकती।”
“पत्नी होना,
खुद को पीछे रखना है।”
Bhavna Bhatt
ભાગ :- ૪ .... એક વાર્તા
Bhavna Bhatt
જય ચેહર મા 🙏
Shraddha Panchal
खोए हुए लोग,
मेरे सपनों आते है ,
और मुजसे बाते करते है ,
जो करनी रह गई थी ,
मुजसे गले लगते है,
नींद खुलती है
और मैं चौंक जाती हूँ ,
हकीकत में वापिस आने के लिए ,
कुछ साँसे,
जल्दी जल्दी ले लेती हूँ ,
और हकीकत में पहोचते ही,
में उनको वापिस खो देती हूँ ,
मुजे सोने डर नहीं लगता है,
मुजे खोए हुए लोगो से मिलने से लगता है डर,
क्योकि मुजे पता है,
मुजे पता में उन्हे फिर खो दूँगी ,
बहुत घबराकर सोती हूँ में ,
क्योकि खोए हुए लोग को हररोज़ ,
खोती हूँ मैं ❤️🖤🖤🖤
Narayan
इक हसरत है...
उनसे मुलाकात करने की,
इक दफ़ा उस चेहरे
का दीदार करने की....
थाम कर के
अपने हाथों में हाथ उनका,
कुछ कदम उन के साथ-साथ
चलने की....
मिला कर नज़र
उस नाज़नीं की नज़र से,
कुछ दिल में जो दबी हैं वो
बात करने की..
Shailesh Joshi
પ્રેમની શરૂઆત
એટલે દુ:ખી થઈને પણ ખુશ રહેવાની શરૂઆત
પ્રેમમાં જેમ જેમ દુઃખ આવતું જાય,
છતાંય એ ગમતું જાય, એમ એમ
પરસ્પરનો પ્રેમ પણ વધતો જાય,
ને આજ છે, કાચી પ્રીતને
પરિપક્વ બનાવવાની સાચી રીત.
- Shailesh Joshi
Narayan
ना तेरे जैसा चाहिए ना तुझसे बेहतर चाहिए"
"लाखों करोड़ो की भीड़ में मुझे बस तू चाहिए"
"मिले जो दर्द तुमसे मैं सह लूँगा"
"लेकिन मेरे दर्द पर मरहम लगाने के लिए मुझे बस तू चाहिए"
"तुझसे मोहब्बत करना गलत है तो मुझे इसकी सजा चाहिए"
"लेकिन उस सजा के बाद मुझे बस तू चाहिए"
"कितना भी इंतज़ार करना पड़े मुझे बस तू चाहिए"
"मंजूर है मुझे लोगो की कही भली बुरी बातें सुन ना"
" लेकिन इन सब बातों के बाद भी मुझे बस तू चाहिए"
"हां हर पल हर लम्हा बस तू चाहिए तू
Dhamak
साथ चले इतना ही जिंदगी के लिए काफी है।
लेखक: धमक
(हां… हां…
हम्… हम्…)
न तुम पर हक जताना है
न मुझको कुछ मनवाना है
बस यूँ ही उम्र भर
साथ चलते जाना है
ना बड़ी सी ख्वाहिश है
ना कोई फरमाइश है
तेरा हाथ मेरे हाथ में
बस इतनी सी गुज़ारिश है
(हां… हां…)
दिन अपने अपने होंगे
रास्ते भी अलग होंगे
पर शाम ढले जब मिलें
तो चेहरे पे सुकून होंगे
ना कहना “तुम मेरे हो”
ना सुनना “मैं तुम्हारी”
बस साथ बैठी चुप्पी भी
लगती है कितनी प्यारी
साथ चले बस इतना ही
ज़िंदगी के लिए काफी है
तू पास रहे मुस्काता हुआ
यही मेरी ख़ुशी साफ़ी है
(हम्… हम्…
हां… हां…
Dhamak
Holi special
write a dhamak
देखो देखो होरी आई रे,
राधे-श्याम संग खेले होरी रे॥
आज व्रज में रंग बरसे, धूम मची चहुँ ओर,
हँसते-गाते नाचे ब्रजवासी, जय नंदकिशोर।
अबीर-गुलाल उड़े गगन में, महके ब्रज धाम,
सब मिल गाओ प्रेम से, जय राधे-श्याम॥
देखो देखो होरी आई रे,
राधे-श्याम संग खेले होरी रे॥
अरे सुनो, ठमक कहे – चलो आज राधा संग होरी खेलें रे॥
कान्हा हाथ पिचकारी लेके, मुस्काए बनवारी,
राधा संग रंग बरसावे, भीगे गोप-नारी।
ढोलक मृदंग मधुर से बाजे, गूंजे हरि का नाम,
भक्ति रंग में डूबा व्रज, जय राधे-श्याम॥
देखो देखो होरी आई रे,
राधे-श्याम संग खेले होरी रे॥
Sudhir Srivastava
चौपाई - खेद
भूल-चूक हो ही जाती है।
मानव जीवन की बाती है।।
सदा सत्य के साथ ही रहिए।
खेद जताने से मत बचिए।।
शब्द खेद की लीला न्यारी।
झुक जाते हैं सब तकरारी।।
इसमें कैसी झिझक शर्म है।
मानवता का यही धर्म है।।
भूल-चूक सबसे है होती।
नाहक नहीं लपेटो धोती।।
नहीं विषय विवाद बनाओ।
खेद जता आगे बढ़ जाओ।।
रावण की थी यही कहानी।
दंभ में बात नहीं थी मानी।।
खेद जताना उसे न भाया।
इसीलिए तो प्राण गँवाया।।
सुधीर श्रीवास्तव
Narayan
अक्सर वही लोग ख़ामोश रहना सिखाते है,
जिनसे हम बहुत सारी बातें करना चाहते हैं...❤🔥💕
- Narayan
Anjana Vyas
राम नाम के जप मे कोई नियम नही है
न देशकालनियमः शौचाशौचविनिर्णयः ।
परं संकीर्तनादेव राम रामेति मुच्यते ॥
राम नाम के जप मे न देश काल का नियम है, और न ही पवित्रता अपवित्रता का नियम है। किसी भी अवस्था मे राम नाम का संकीर्तन करने मात्र से जीव मुक्त हो जाता है।
Anjana Vyas
राम नाम के जप मे कोई नियम नही है
न देशकालनियमः शौचाशौचविनिर्णयः ।
परं संकीर्तनादेव राम रामेति मुच्यते ॥
राम नाम के जप मे न देश काल का नियम है, और न ही पवित्रता अपवित्रता का नियम है। किसी भी अवस्था मे राम नाम का संकीर्तन करने मात्र से जीव मुक्त हो जाता है।
🙏🚩🙏
SAYRI K I N G
जिस सब्जी के भाव बढ़ जाए
वो सब्जी मुझे पसंद नहीं आती हैं
SAYRI K I N G
जिसे हर मर्द पसंद आ जाए उसे औरत नहीं कहते
SAYRI K I N G
चाहूं तो तुम्हें पैसे उछाल कर खरीद लूं
पर मुझे सस्ती और बिकाऊ चीज़ खरीदने का शौक नहीं
Nothing
उस वक्त बारिश की हर बूंद में बस एक ही अहसास था,तुम सामने हो तो मौसम भी अपना लगता है।
#firstrain #firsttalk #firstunspokenproposal
Riddhi Patoliya
जिसे कहना पड़े
कि
"तकलीफ है",
उसे कहना ही क्यों
कि
"तकलीफ है"।
...
❣️
...Abhipsha...
Chloe Gong
hello how are you doing I'm Chloe and Im an author who loves to connect with other author's 😊😊
Bhavna Bhatt
બેસ્ટ ઓફ લક બાળકો
kashish
aankho mai alag si chmak aa gyi thi jab usko dekh kar...
ab tayar ho kar jati thi uske liye...
achcha lagne laga jab bina bole mere saree dosto ko pata chal gya uske bare mai...
ab use bhi dihre dihre pata chal rha tha mere baare mai...
use mere se tha isliye shayad kisi ke bagal mai nhi betha tha kisi or ke ...
dono ne kuch bola nhi lekin pata dono ko tha pasand hai to karta hai ...
lekin kuch hi time baad alag ho jana hai inko kyuki ab kya hi hoga inko milne ko...
by kashish
ek archana arpan tane
અમીરો એ ગરીબ લોકો માટે એક ભગવાન સિવાય બીજું કશું જ છોડ્યું નથી.
- ek archana arpan tane
રોનક જોષી. રાહગીર
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Jyoti Gupta
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