Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Khushbu kumari

मजबूरी है मेरी

Kiran

मैं समय को बस गुजरते देखता रहा,और वो खामोशी से कहता गया—मुबारक हो, तुम बर्बाद होते जा रहे हो …

Vartikareena

माई डियर प्रोफेसर का भाग 5 आ चुका है। आप लोग पढ सकते हो। अब से हर पार्ट के पोस्ट होते ही आप लोगो को मै इन्फोर्मे कर दुंगी। पढ लेना ।

Shailesh Joshi

વિશ્વાસ કેળવવામાં વર્ષો, ને તૂટવામાં ક્ષણ લાગે છે, ને પાછો એકવાર તૂટયા પછી એને ફરી જોડવામાં તો, વર્ષોના વર્ષો લાગે છે, માટે એક વાત સ્પષ્ટ પણે સમજી લેવી કે, સંબંધોમાં પરસ્પર વિશ્વાસ જાળવી રાખવા માટે, સૌથી વધારે જરૂરી જે પરિબળ છે એ છે, પરસ્પરનો પ્રેમ અને લાગણી, અને એને તોડવામાં જે સૌથી મોટું પરિબળ કામ કરે છે, એ છે, કોઈપણ પ્રકારની માંગણી, કેમકે લાગણીઓ તૂટવામાં માંગણીઓ બહુ મોટો ભાગ ભજવતી હોય છે. - Shailesh Joshi

Anup Gajare

"सृजन बनाम संहार" ____________________________________________________ बेजान ढांचे में फुकी हवा कल्पना में बसे भ्रम को खत्म नहीं करती। उड़ती हुई लाशें, या गिरे हुए पत्ते वृक्ष से कोई भी समझौता नहीं करते उनकी मृतकता ही परिवेश है। उनका होना मेरे लिए ठीक वैसा ही अनुभव है जैसा उनका न होना। हे बीथोवन हम तुझे भूल गए याद रखा हिटलर का नरसंहार पर तेरी सिंफनी को कभी ठीक से देखा ही नहीं गया। पेड़ उनके लिए कभी नहीं रोते पत्तों की रुलाई जिन्होंने संगीत नहीं बल्कि हिंसा का सृजन किया। बीथोवन की न लिखी दसवीं सिंफनी मैं हु। और क्या समुद्ध हो सकता है जिसने कभी खुद को समझा ही नहीं उसके होने से पहले ही उसे नष्ट कर दिया गया था किसी कंपोजिशन की तरह। भ्रम में उपजे हालात एक दूसरा रंग निर्माण करते रहे टीस का हिस्सा मेरे जहन में बचा रहा किसी प्रेत की तरह। हवा मृत बंसी में टहलती हुई होठों के बीच फंस गई ये भी एक आत्महत्या ही थी। ढांचे में आखरी कोशिका ने खत लिखा था कि, मैं उनके करीब कभी न जाऊ, जिनके लिए मेरे लिए वक्त की दीवार नहीं है। समय मेरे चारों ओर दीवार नहीं बनाता, वह तो धीरे-धीरे मेरे भीतर उगता है किसी फफूंदी की तरह। मैंने देखा है घड़ियों को मरते हुए— उनकी सुइयाँ एक ही क्षण पर टंगी रह जाती हैं, जैसे निर्णय लेने से डर गई हों। और उस ठहरे हुए पल में मैंने खुद को बार-बार जन्म लेते देखा, बिना किसी शोर के, बिना किसी उद्देश्य के। क्या यही सृजन है? या यह भी संहार का ही एक धीमा संस्करण है? मैंने अपने ही हाथों अपने ही चेहरे को छुआ— वह मेरा नहीं था। वह किसी और की अधूरी रचना थी, जिसे जल्दबाज़ी में त्याग दिया गया था। जैसे कोई कलाकार अपनी कैनवास को आधे रंग में छोड़कर भाग गया हो। और मैं… वही अधूरा रंग हूँ, जो सूख चुका है पर मिटा नहीं। मेरे भीतर अब भी गूंजती है वह अनसुनी धुन— जिसे लुडविग वान बीथोवन कभी लिख नहीं पाया। पर शायद वह धुन लिखी ही नहीं जानी थी— उसे तो बस जीया जाना था, टूटे हुए ढांचों में, मृत कोशिकाओं के बीच, जहाँ सृजन हमेशा संहार के बिल्कुल पास बैठा होता है। मैंने संहार को धीरे-धीरे सृजन करते देखा है— वह पहले सब कुछ छीनता है, फिर खालीपन को एक आकार देता है। और वही आकार हम “अस्तित्व” कह देते हैं। अब मुझे समझ आता है— मैं कोई व्यक्ति नहीं, कोई स्मृति नहीं, कोई विचार भी नहीं। मैं बस एक असफल प्रयास हूँ— जिसे ब्रह्मांड ने लिखने की कोशिश की, और फिर मिटा दिया। पर मिटाने की प्रक्रिया में जो धूल बची… वही मैं हूँ। और शायद यही मेरी सबसे बड़ी त्रासदी है— कि मैं पूरी तरह कभी नष्ट भी नहीं हुआ। ______________________________________________

MASHAALLHA KHAN

यू सबसे दूर दूर रहना मेरी आदत नही कुछ मजबुरिया है जो मैने सबसे छिपा रखी है . -MASHAALLHA

Kuldeep Roni

तेरी बातों से ये लगता है मुझे तू धोखा देकर जाएगा मुझे तेरी यादों से ऐसे गुज़र जाऊंगा जैसे हवा छूकर गुजरती है मुझे KULDEEP RONl

Kuldeep Roni

आसमान जमीन पर लाकर दिखा जमीन मिट्टी में मिलाकर दिखा और तु क्या है क्या नहीं है हमें है मालूम क्या कहा औकात औकात से बाहर जाकर दिखा और तू रो कर क्या दिखाता है हमें औकात है तो हंस कर दिखा धोखा वफा चाहत इश्क मोहब्बत प्यार तेरे से जो हो सकता है वो करके दिखा मौत तेरे सामने खड़ी है रोनी तुझे बचना है तो बच कर दिखा

Prem Solanki

पहले भरोसा तोड़ता हैं कोई फ़िर दिल, बाद में आदमी ख़ुद-ब-ख़ुद टूट जाएगा, ✍️PARTH SOLANKI✍️

Dada Bhagwan

उत्कृष्ट परम विनय अर्थात् प्रभु श्रीराम राम नवमी के अवसर पर मोबाईल और डेस्कटॉप वोलपेपर डाऊनलोड करने के लिए यहाँ विज़िट करे: https://dbf.adalaj.org/d4FXLi5E #jaishriram #jaishreeram #lordrama #ramnavmi #DadaBhagwanFoundation

Kiran

राह में आते रहते हैं काँटे, लगता है उन्हें भी हम पसंद आ गए हैं… - Kiran

SAYRI K I N G

पल कुछ ठहर गए, कुछ पल गए कुछ खोटे थे, कुछ चल गए कुछ को पकड़ा था हाथों में कुछ हाथों में से फिसल गए फिर से मिल जाये बीता वक़्त हम पल दो पल को मचल गए कुछ पलों से हमने दौड़ लगाई वो खुद से भी आगे निकल गए पलों की सवारी रुकती कब है कुछ आज गए, कुछ कल गए कुछ ठहर गए, कुछ पल गए कुछ खोटे थे, कुछ चल गए

SAYRI K I N G

बिखरी हुई हर एक चीज़ को बुरा कहने वालों, तुमनें देखी ही नहीं चेहरे पर जुल्फें गिरती उनकी...

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

થોડું વિચારી ને જો જો. લાકડીનાં નહીં, લાગણીનાં ઘા વધુ દર્દ આપે છે. - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

Preet

good morning guys have a good day 😊 - Preet

Imaran

तेरे दीदार से मेरे दिल की धड़कन में मोहब्बत का एहसास होता है, तू ही मेरा दिलबर और मेरी मेरी जान है 🫶imran 🫶

Thakor Pushpaben Sorabji

સમજ્યા સૌને સમજાવ્યા પણ સૌને પણ સમજ્યા એ એમની જ સમજણે જય શ્રી કૃષ્ણ:પુષ્પા એસ ઠાકોર - Thakor Pushpaben Sorabji

Om Mahindre

After weeks of writing… it’s finally live 🔥 The Seventh Death: A Millbrook Horror is now on Amazon Kindle Direct Publishing for just ₹ 99 If you love horror that stays in your mind… this is for you. Read now 👇 https://amzn.in/d/06kw8dER

Thakor Pushpaben Sorabji

રાધે રાધે

Thakor Pushpaben Sorabji

જય શ્રી કૃષ્ણ "પુષ્પ"

PRASANG

भीतर का अँधेरा। भय नाम का चेहरा अब कोई सच नहीं है, भीतर का अँधेरा भी उतना सच नहीं है। कदम बाँधता साया ये अपने ही मन का, राहों में कहीं भी कोई अवरोध नहीं है। नज़रों ने खींचीं ये बंधन की लकीरें, बाहर कहीं कोई दोहरी सरहद नहीं है। सीने में अगर आग ज़रा-सी भी जले तो, हर ख़ौफ़, हर इक तूफ़ान कुछ भी नहीं है। कल का जो भय था, बस वहम ही ठहरा, आने वाले लम्हों में वो बात नहीं है। ख़ुद से जो भिड़ा, फ़तह उसी पर ही ठहरी, बाहर कहीं कोई जंग का मैदान नहीं है। ‘प्रसंग’ कहे- ये ख़ौफ़ झूठी परछाईं, आँखें जो खुलें तो इसमें भी दम नहीं है। - प्रसंग प्रणय राज रणवीर

DrAnamika

संकट मे साथ देने का दावा करने वाले लोग संकट की घड़ी में सबसे पहले साथ छोड गए --डॉ अनामिका--

Kiran

सुकून ........

kattupaya s

Good morning friends.. have a nice Wednesday

PRASANG

वक़्त का फ़ैसला अपनी सूरत पे यूँ इतराना ठीक नहीं, आईना यूँ कभी बहक जाना ठीक नहीं। वक़्त के हाथ में सब राज़ लिखे होते, आज हँसना है तो कल रोना ठीक नहीं। रंग-ओ-रूप, दौलत, धूप-छाँव जैसे हैं, इन पे मन का यूँ भरम खाना ठीक नहीं। जो भी पाया है, वो बस दो पल का मेला है, इस मेले में ख़ुद को खो जाना ठीक नहीं। मिट्टी से उठकर फिर मिट्टी में मिलना है, इस सच्चाई को यूँ झुठलाना ठीक नहीं। नर्म लफ़्ज़ों में भी सच बोला जाता है, हर सच को यूँ तलवार बनाना ठीक नहीं। ‘प्रसंग’ कहे, ये दुनिया फ़ानी मंज़र है, इस पर इतना दिल बहलाना ठीक नहीं। - प्रसंग प्रणयराज रणवीर

Sonu Kumar

अमेरिका अपना नुकसान की भरपाई भारत को युद्ध में धकेलने से करवा रहा हैं.. भारत के मोदी राहुल केजरीवाल तीनों अमेरिका के सामने घुटने टेक चूके हैं.. जनता के पास बचने का समाधान फिलहाल यही हैं की जितना जल्दी हो सके EVM की जगह चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए | क्योंकि तीनों की चोटी us uk धनिको के पास हैं क्योंकि पेड मिडिया के स्पोंसर वही हैं.. यदि भारत की जनता अमेरिका जैसे वोटवापसी सिस्टम, जूरी कोर्ट, बैलेट पेपर चुनाव, जनमत संग्रह, हथियारबंद नागरिक समाज क़ानून लागु करवाने के लिए PM, CM पर दबाव बनाने चाहिए | #CancelEVM #VotvapsiPassbook #JuryCourt #TCP #Gunlawreferndum #GunLawIndia #CoorgGunLawReferendum

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

गुण की पूजा हर जगह, करते हैं सब लोग। धन का बस उपयोग यह, करें वस्तु का भोग।। दोहा --४६० (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास नववर्ष में लेते है प्रतिज्ञा नववर्ष में लेते है प्रतिज्ञा की कभी हार नहीं मानेंगे l दूसरों की खुशी में खुद की खुशी मुकम्मल जानेंगे ll परस्पर भाईचारा, एकता और अखंडता को कायम कर l शांति को प्रस्थापित कर चैन सुकून की नीद पायेगे ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Archana Singh

मरने की तमन्ना में जिये जा रहे हैं , गैरों के हिसाब से ज़िंदगी का ज़हर पीएं जा रहे हैं ! हमें कहां ख़्वाहिश समंदर की थी , बस एक बूंद की तमन्ना किए जा रहे हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४६) की‌ व्याख्या- "कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" ऋग्वेद-5/51/15 भाव--पूरे विश्व को आर्य(श्रेष्ठ) बनाओ। मंत्र — “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” ऋग्वेद (5/51/15) शाब्दिक अर्थ-- कृण्वन्तः = बनाओ / करो विश्वम् = सम्पूर्ण संसार आर्यम् = आर्य (श्रेष्ठ, सदाचारी) भावार्थ: “सम्पूर्ण विश्व को आर्य (श्रेष्ठ, सज्जन, संस्कारित) बनाओ।” इसे‌ गहराई से समझें-- यहाँ “आर्य” शब्द का अर्थ किसी जाति या नस्ल से नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ आचरण वाला,सत्यनिष्ठ संस्कारित और उदार व्यक्ति। इस मंत्र का संदेश है: पूरी मानवता को नैतिक, सभ्य और उच्च जीवन मूल्यों वाला बनाना। वैदिक दृष्टि-- यह मंत्र हमें सिखाता है कि— केवल स्वयं के सुधार तक सीमित न रहें बल्कि‌ समाज और विश्व के उत्थान के लिए कार्य करें। ज्ञान, संस्कार और सदाचार का प्रसार करें। यही भावना आगे चलकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सारा विश्व एक परिवार है) को साकार करती है। वेदों में प्रमाण-- 1. ऋग्वेद-- 10.191.2 संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। भावार्थ: मिलकर चलो, मिलकर बोलो, तुम्हारे मन एक समान हों। अर्थ: सम्पूर्ण मानवता में एकता और समन्वय स्थापित करना — यही “विश्व को श्रेष्ठ बनाना” है। 2. ऋग्वेद-- 1.89.1 आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। भावार्थ: सभी दिशाओं से हमारे पास कल्याणकारी विचार आएँ। अर्थ: पूरी दुनिया से अच्छे विचार ग्रहण करना और फैलाना। 3. यजुर्वेद-- 36.18 मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे। भावार्थ: मैं सभी प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखूँ। अर्थ: सबके प्रति मैत्री भाव — यही आर्यत्व (श्रेष्ठता) है। 4. अथर्ववेद-- 12.1.45 माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। भावार्थ: यह पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ। अर्थ: समस्त पृथ्वी को अपना परिवार मानना। 5. अथर्ववेद-- 3.30.1 समानो मन्त्रः समिति: समानी... भावार्थ: तुम्हारे विचार, उद्देश्य और भाव एक समान हों। अर्थ: समाज में सामंजस्य और एकता स्थापित करना। निष्कर्ष-- इन सभी वैदिक मंत्रों का सार यही है कि— सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार समझो। सभी के लिए कल्याणकारी सोच रखो। मानवता में एकता, मैत्री और सदाचार स्थापित करो। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का वास्तविक विस्तार है— उपनिषदो में प्रमाण-- 1. ईशोपनिषद् --1 ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। भावार्थ: इस सम्पूर्ण जगत में जो कुछ भी है, वह ईश्वर से व्याप्त है। अर्थ: जब सबमें एक ही परमात्मा है, तो सबके प्रति श्रेष्ठ भाव रखना ही “विश्व को आर्य बनाना” है। 2. मुण्डक उपनिषद्-- 3.1.6 सत्येन पन्था विततो देवयानः। भावार्थ: सत्य के द्वारा ही देवयान (उच्च मार्ग) प्रशस्त होता है। अर्थ: सत्य के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य श्रेष्ठ बनता है और दूसरों को भी बनाता है। 3. कठोपनिषद्-- 1.3.14 उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। भावार्थ: उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त करो। अर्थ: स्वयं जागरूक बनो और दूसरों को भी ज्ञान देकर श्रेष्ठ बनाओ। 4. छान्दोग्य उपनिषद-- 6.8.7 तत्त्वमसि (श्वेतकेतु)। भावार्थ: तू वही (ब्रह्म) है। अर्थ: हर व्यक्ति में दिव्यता है—उसे पहचानकर जीवन को श्रेष्ठ बनाना ही आर्यत्व है। 5. बृहदारण्यक उपनिषद्- ---1.4.14 अहं ब्रह्मास्मि। भावार्थ: मैं ब्रह्म हूँ। अर्थ: आत्मा की महानता को समझकर जीवन को उच्च बनाना। 6. तैत्तिरीय उपनिषद्-- 1.11.1 सत्यं वद, धर्मं चर। भावार्थ: सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो। अर्थ: यही श्रेष्ठ (आर्य) जीवन का मूल आधार है। निष्कर्ष-- उपनिषदों का संदेश यही है कि— आत्मज्ञान प्राप्त करो, सत्य और धर्म का पालन करो, सबमें एक ही ब्रह्म को देखो,और इस ज्ञान से सम्पूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाओ यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" का संदेश है। पुराणों में प्रमाण-- 1. विष्णु पुराण-- 1.19.41 वर्णाश्रमाचारवता पुरुषेण परः पुमान्। विष्णुराराध्यते पन्था नान्यत्तत्त्वोषकारणम्॥ भावार्थ: वर्णाश्रम धर्म का आचरण करने वाला मनुष्य भगवान विष्णु की आराधना करता है; यही श्रेष्ठ मार्ग है। अर्थ: सदाचार और धर्मपालन से समाज को श्रेष्ठ बनाना। 2. भागवत पुराण-- 1.2.6 स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुकी अप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति॥ भावार्थ: वह धर्म श्रेष्ठ है जिससे निष्काम भक्ति उत्पन्न हो और आत्मा प्रसन्न हो। अर्थ: ऐसा धर्म अपनाना जो सबके कल्याण का कारण बने। 3. पद्म पुराण (सृष्टि खण्ड) परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्। भावार्थ: दूसरों का उपकार करना पुण्य है और दूसरों को पीड़ा देना पाप। अर्थ: परोपकार से ही विश्व श्रेष्ठ बनता है। 4. गरुड़ पुराण-- 1.113.10 (सामान्य संदर्भ) अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च। भावार्थ: अहिंसा परम धर्म है। अर्थ: सभी प्राणियों के प्रति करुणा और अहिंसा — यही आर्यत्व है। 5. अग्नि पुराण (अध्याय 372 के आसपास) सर्वभूतहिते रतः। भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है। अर्थ: सबके कल्याण की भावना रखना। 6. नारद पुराण (पूर्व भाग) धर्मः सर्वेषां भूतानां हितः। भावार्थ: सभी प्राणियों का हित ही धर्म है। अर्थ: धर्म का उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व का कल्याण है। निष्कर्ष-- पुराणों का सार स्पष्ट है— परोपकार, अहिंसा, और सर्वहित ही सच्चा धर्म है। मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे समाज और विश्व का उत्थान हो। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का पुराणों में व्यावहारिक रूप है— दूसरों का भला करो और पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाओ। गीता में प्रमाण-- 1.(क) गीता-- 3.20 और 21 कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः। लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि॥ (3.20) यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ (3.21) भावार्थ: श्रेष्ठ पुरुष अपने आचरण से लोक का मार्गदर्शन करता है; इसलिए उसे लोकसंग्रह (विश्व के कल्याण) के लिए कर्म करना चाहिए। अर्थ: स्वयं श्रेष्ठ बनकर पूरे समाज को श्रेष्ठ बनाना। (ख). गीता-- 12.4 सर्वभूतहिते रताः। भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगे रहते हैं। अर्थ: सबके कल्याण में लगे रहना — यही “विश्व को आर्य बनाना” है। (ग). गीता-- 5.25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणम् ऋषयः क्षीणकल्मषाः। छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः॥ भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगे रहते हैं, वे परम शांति को प्राप्त करते हैं। अर्थ: सर्वहित ही श्रेष्ठता का मार्ग है। (घ) गीता-- 6.29 सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥ भावार्थ: योगी सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने में सभी को देखता है। अर्थ: सबमें एकता का दर्शन — यही उच्च (आर्य) दृष्टि है। (च). गीता-- 18.46 यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥ भावार्थ: जिससे सबकी उत्पत्ति हुई है, उसी की अपने कर्मों से पूजा करके मनुष्य सिद्धि प्राप्त करता है। अर्थ: अपने कर्तव्य से विश्व-व्यवस्था को श्रेष्ठ बनाना। निष्कर्ष गीता का स्पष्ट संदेश है— लोकसंग्रह (विश्व कल्याण) के लिए कर्म करो, सर्वभूतहित में लगे रहो, अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करो। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का गीता में व्यावहारिक रूप है— स्वयं श्रेष्ठ बनो और पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाओ। महाभारत में प्रमाण-- 1(क) महाभारत, शान्ति पर्व-- 262.5 अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च। भावार्थ: अहिंसा परम धर्म है। अर्थ: सभी प्राणियों के प्रति करुणा और अहिंसा — यही विश्व को श्रेष्ठ बनाने का आधार है। (ख). महाभारत, शान्ति पर्व --109.11 सर्वभूतहिते रतः। भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है। अर्थ: सर्वहित की भावना ही आर्यत्व (श्रेष्ठता) है। (ग). महाभारत, अनुशासन पर्व --113.8 आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्। भावार्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल है, वह दूसरों के साथ न करो। अर्थ: नैतिक आचरण द्वारा समाज को श्रेष्ठ बनाना। (घ). महाभारत, शान्ति पर्व-- 90.24 धर्मो रक्षति रक्षितः। भावार्थ: जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। अर्थ: धर्म पालन से ही समाज और विश्व सुरक्षित व श्रेष्ठ बनता है। (च)०. महाभारत, शान्ति पर्व 167.9 न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। भावार्थ: ज्ञान के समान कोई पवित्र वस्तु नहीं है। अर्थ: ज्ञान का प्रसार ही विश्व को श्रेष्ठ बनाता है। (छ). महाभारत, वन पर्व --313.117 परोपकाराय सतां विभूतयः। भावार्थ: सज्जनों की सम्पत्ति परोपकार के लिए होती है। अर्थ: दूसरों का भला करना ही सच्ची श्रेष्ठता है। निष्कर्ष-- महाभारत का स्पष्ट संदेश है— अहिंसा, परोपकार और धर्म का पालन करो सर्वभूतहित में लगे रहो ज्ञान और सदाचार का प्रसार करो यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का महाभारत में व्यावहारिक रूप है स्वयं श्रेष्ठ बनकर समाज और विश्व को श्रेष्ठ बनाना। 1(क). मनुस्मृति-- 6.92 धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥ भावार्थ: धैर्य, क्षमा, इन्द्रियनिग्रह, सत्य आदि धर्म के दस लक्षण हैं। अर्थ: इन गुणों को अपनाकर मनुष्य स्वयं तथा समाज को श्रेष्ठ बनाता है। (ख). मनुस्मृति-- 10.63 अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। एतं सामासिकं धर्मं चातुर्वर्ण्येऽब्रवीन्मनुः॥ भावार्थ: अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रियनिग्रह — यह सबके लिए समान धर्म है। अर्थ: सार्वभौमिक नैतिकता से सम्पूर्ण विश्व का उत्थान। २- याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.122 अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥ भावार्थ: अहिंसा, सत्य, दान, स्वाध्याय, तप आदि धर्म के अंग हैं। अर्थ: इनका पालन समाज को श्रेष्ठ बनाता है। 3- याज्ञवल्क्य स्मृति 1.156 (सामान्य संदर्भ) सर्वभूतहिते रतः। भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है। अर्थ: सर्वहित ही सच्चा धर्म है। 4-. पाराशर स्मृति-- 1.24 (सामान्य संदर्भ) अहिंसा परमोधर्मः। भावार्थ: अहिंसा ही परम धर्म है। अर्थ: करुणा और अहिंसा से ही विश्व श्रेष्ठ बनता है। 5-. नारद स्मृति (प्रारम्भिक अध्याय) धर्मो हि सर्वभूतानां हितः। भावार्थ: सभी प्राणियों का हित ही धर्म है। अर्थ: धर्म का उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व का कल्याण है। निष्कर्ष-- स्मृतियों का सार यही है— अहिंसा, सत्य, दया, दान को अपनाओ। सर्वभूतहित में लगे रहो। ऐसा आचरण करो जिससे सम्पूर्ण समाज और विश्व का उत्थान हो। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का स्मृतियों में व्यावहारिक रूप है— स्वयं श्रेष्ठ बनो और पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाइए। नीति ग्रन्थों में प्रमाण-- 1. हितोपदेश “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” हितोपदेश, मित्रलाभ, श्लोक 71 अर्थ: उदार लोगों के लिए पूरी पृथ्वी परिवार है — यही “विश्व को श्रेष्ठ बनाओ” की भावना है। 2. पंचतंत्र-- “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥” भावार्थ --यह बृहदारण्यक उपनिषद् का प्रसिद्ध मंत्र है। इसमें सभी के लिए सुख और मंगल की कामना की गयी है। 3. चाणक्य नीति “परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः। परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥” चाणक्य नीति, अध्याय 1, श्लोक 13 अर्थ: प्रकृति की हर वस्तु परोपकार के लिए है — मनुष्य भी ऐसा ही बने। 4. विदुर नीति (महाभारत से) “सर्वभूतहिते रतः” महाभारत, उद्योग पर्व, अध्याय 33 (विदुर नीति) जो सब प्राणियों के हित में लगा रहता है वही श्रेष्ठ है। 5. चाणक्य नीति “त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥” चाणक्य नीति, अध्याय 1, श्लोक 17 यह श्लोक बताता है कि बड़े हित (समष्टि) को प्राथमिकता देना चाहिए — जो “विश्व हित” की ओर संकेत है। निष्कर्ष- इन सभी नीति ग्रन्थों यह स्पष्ट करते हैं कि परोपकार, विश्व-कल्याण, समस्त मानवता को एक परिवार मानना। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” (ऋग्वेद) का वास्तविक अर्थ और उद्देश्य है।: 1. वाल्मीकि रामायण में प्रमाण-- (1) “सर्वभूतहिते रतः” स्थान: अयोध्याकाण्ड- 2.1.31 (कुछ संस्करणों में भिन्नता) श्रीराम के गुण बताते हुए कहा गया है कि वे सभी प्राणियों के हित में लगे रहते थे। यह “विश्व को श्रेष्ठ बनाना” का प्रत्यक्ष रूप है। (2)“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” स्थान: युद्धकाण्ड --6.124.17 (लोकप्रिय पाठ) अर्थ: माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। यहाँ अपने कर्तव्य और धर्म पालन से समाज को श्रेष्ठ बनाने का संदेश है। 2. गर्ग संहिता में प्रमाण-- (1) “लोकानां हितकारिणौ” स्थान: गर्ग संहिता, गोलोक खण्ड (अध्याय भिन्न संस्करणों में बदलता है) श्रीकृष्ण और बलराम को संपूर्ण लोकों के हित करने वाले कहा गया है। (2)“भवाय सर्वभूतानाम्” संदर्भ: विभिन्न अध्यायों में भगवान के अवतार का उद्देश्य अर्थ: “सभी प्राणियों के कल्याण के लिए” यह स्पष्ट करता है कि दिव्य कार्य का उद्देश्य विश्व का कल्याण और उत्थान है। 3- योग वशिष्ठ में प्रमाण- (1) “सर्वभूतहिते रतः” स्थान: योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण (अध्याय भिन्न) ज्ञानी पुरुष का लक्षण बताया गया है कि वह सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है। (2)“यथा सर्वाणि भूतानि आत्मन्येव पश्यति” स्थान: योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण अर्थ: जब मनुष्य सभी प्राणियों को अपने समान देखता है— तब वह किसी का अहित नहीं करता और विश्व को श्रेष्ठ बनाने की दिशा में कार्य करता है। क़ुरआन और हदीस में प्रमाण-- “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” (संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाओ / सबका उत्थान करो) का जो भाव है—सर्वजन हित, नैतिकता और मानवता—वह इस्लामिक धर्मग्रन्थों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। नीचे क़ुरआन और हदीस से प्रमाण दिए जा रहे हैं: 1. क़ुरआन से प्रमाण (क) “इन्नल्लाह यअमुरु बिल-अद्लि वल-इह्सान…” (إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالإِحْسَانِ) सूरह अन-नहल (16:90) अर्थ: अल्लाह आदेश देता है न्याय (अद्ल) और भलाई (एहसान) का। यह समाज को श्रेष्ठ बनाने का मूल सिद्धांत है। (2) “मन क़तल नफ़्सन… फका-अन्नमा क़तलन्नास जमीयन, व मन अह्याहा फका-अन्नमा अह्यन्नास जमीयन” सूरह अल-माइदा (5:32) अर्थ: जिसने एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की, उसने मानो पूरी मानवता को मारा; और जिसने एक को बचाया, उसने पूरी मानवता को बचाया। यह विश्व-कल्याण और मानवता की रक्षा का सर्वोच्च भाव है। (3) “व मा अरसल्नाक इल्ला रहमतन लिल-आलमीन” सूरह अल-अंबिया (21:107) अर्थ: (हे मुहम्मद) हमने आपको सारे संसार के लिए दया (रहमत) बनाकर भेजा। यहाँ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की बात है। (4) “ला इकराह फिद्दीन” सूरह अल-बक़रा (2:256) अर्थ: धर्म में कोई जबरदस्ती नहीं है। यह सहिष्णुता और नैतिक श्रेष्ठता का सिद्धांत है। 2. हदीस से प्रमाण-- (सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम) (1) “खैरुन्नास मन यनफ़अुन्नास” (मुस्नद अहमद / अन्य संग्रहों में) अर्थ: सबसे अच्छा इंसान वह है जो दूसरों के लिए सबसे अधिक लाभदायक हो। यह “विश्व को श्रेष्ठ बनाओ” का सीधा रूप है। (2) “ला युमिनु अहदुकुम हत्ता युहिब्ब लि-अखीहि मा युहिब्बु लिनफ़्सिहि” सहीह बुखारी 13 / सहीह मुस्लिम 45 अर्थ: तुम में से कोई सच्चा ईमान वाला नहीं हो सकता जब तक वह अपने भाई के लिए वही पसंद न करे जो अपने लिए करता है। यह सर्वहित और समानता की भावना है। निष्कर्ष इस्लामिक ग्रन्थों में भी वही मूल भावना मिलती है जो “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” में है: न्याय और भलाई (अद्ल, इ जहसान) संपूर्ण मानवता की रक्षा विश्व के लिए दया (रहमत) दूसरों के लिए उपयोगी बनना अर्थात् — सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के उत्थान और कल्याण के लिए कार्य करना। सिक्ख ग्रन्थों में प्रमाण-- गुरु ग्रन्थ साहिब से प्रमाण-- (1) “ਸਰਬੱਤ ਦਾ ਭਲਾ” (सरबत दा भला) अर्थ/स्रोत: यह पंक्ति सिख अरदास का मुख्य भाग है (गुरु परम्परा से) अर्थ: सभी का भला हो, सबका कल्याण हो। यह सीधे “विश्व को श्रेष्ठ बनाओ” का भाव है। (2) “ਨ ਕੋ ਬੈਰੀ ਨਹੀ ਬਿਗਾਨਾ, ਸਗਲ ਸੰਗ ਹਮ ਕਉ ਬਨਿ ਆਈ” गुरु ग्रन्थ साहेब- 1299 अर्थ: न कोई मेरा शत्रु है, न कोई पराया; मैं सबके साथ प्रेमपूर्वक रहता हूँ। यह विश्व-बंधुत्व और श्रेष्ठ आचरण का संदेश है। (3) “ਸਭਨਾ ਜੀਆ ਕਾ ਇਕੁ ਦਾਤਾ, ਸੋ ਮੈ ਵਿਸਰਿ ਨ ਜਾਈ” गुरु ग्रन्थ साहेब- 425 अर्थ: सभी जीवों का दाता एक ही परमात्मा है। इससे सभी में एकता और समानता का भाव आता है। दशम ग्रन्थ में प्रमाण-- (1) “ਮਾਨਸ ਕੀ ਜਾਤ ਸਭੈ ਏਕੈ ਪਹਿਚਾਨਬੋ” (गुरु गोबिन्द सिंह) स्रोत: दशम ग्रंथ अर्थ: पूरी मानव जाति को एक ही समझो। यह सम्पूर्ण मानवता को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देता है। (2) “ਜਿਨ ਪ੍ਰੇਮ ਕੀਓ ਤਿਨ ਹੀ ਪ੍ਰਭੁ ਪਾਇਓ” (गुरु गोबिन्द सिंह) स्रोत: दशम ग्रंथ अर्थ: जिसने प्रेम किया, उसी ने परमात्मा को पाया। प्रेम और करुणा से ही विश्व का उत्थान संभव है। निष्कर्ष-- सिक्ख धर्म का मूल संदेश ही है: सरबत दा भला → सबका कल्याण कोई पराया नहीं → विश्व-बंधुत्व सबमें एक ही परमात्मा → समानता प्रेम और सेवा → श्रेष्ठ समाज का निर्माण इसलिए सिक्ख धर्म भी पूरी तरह से“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” के भाव को पुष्ट करता है— “सभी का भला करो, सभी को श्रेष्ठ बनाओ।” ईसाई धर्म में प्रमाण-- 1. बाइबल से प्रमाण (1) “Love your neighbour as yourself.” (अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो) मत्ती- 22:39 (Matthew 22:39) यह सार्वभौमिक प्रेम और मानवता का मूल सिद्धांत है। (2) “Blessed are the peacemakers: for they shall be called the children of God.” मत्ती- 5:9 (Matthew 5:9) अर्थ: धन्य हैं वे जो शांति स्थापित करते हैं। यह समाज और विश्व को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा है। (3) “Do to others as you would have them do to you.” लूका- 6:31 (Luke 6:31) अर्थ: दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा तुम अपने लिए चाहते हो। यह नैतिक श्रेष्ठता और समानता का सिद्धांत है। (4) “Love your enemies and pray for those who persecute you.” मत्ती 5:44 (Matthew 5:44) अर्थ: अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो और जो तुम्हें सताते हैं उनके लिए प्रार्थना करो। यह उच्चतम स्तर की करुणा और श्रेष्ठता दर्शाता है। (5) “Let your light shine before others, that they may see your good deeds.” मत्ती 5:16 (Matthew 5:16) अर्थ: अपने अच्छे कर्मों से दूसरों के सामने प्रकाश फैलाओ। यह पूरे समाज को प्रेरित कर श्रेष्ठ बनाने का संदेश है। (6) “Go into all the world and preach the gospel to all creation.” मरकुस 16:15 (Mark 16:15) अर्थ: पूरे संसार में जाओ और शुभ संदेश फैलाओ। यह विश्व-स्तर पर नैतिकता और धर्म का प्रसार है। निष्कर्ष- ईसाई धर्मग्रन्थों में भी वही मूल भाव मिलता है: सबसे प्रेम करो (Universal Love) शांति स्थापित करो (Peace) समानता और नैतिकता (Golden Rule) अच्छे कर्मों से समाज को प्रेरित करो अर्थात् — पूरा विश्व नैतिक, प्रेमपूर्ण और श्रेष्ठ बने। यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का सार्वभौमिक रूप है। जैन धर्म में प्रमाण-- 1. तत्त्वार्थ सूत्र (1) “परस्परोपग्रहो जीवानाम्” अध्याय 5, सूत्र 21 अर्थ: “सभी जीव एक-दूसरे के उपकार (सहयोग) के लिए हैं।” वो यह स्पष्ट रूप से बताता है कि सभी का हित करना ही धर्म है — यही “विश्व को श्रेष्ठ बनाना” है। 2. आचारांग सूत्र “सव्वे पाणा न हन्तव्वा” प्रथम श्रुतस्कंध, अध्याय 4 (भावार्थ) अर्थ: “सभी प्राणियों की हिंसा नहीं करनी चाहिए।” अहिंसा के माध्यम से ही विश्व का कल्याण संभव है। 3. उत्तराध्ययन सूत्र (3) “खम्मामि सव्व जीवे, सव्वे जीवा खमंतु मे। मित्ति मे सव्व भूएसु, वेरं मज्झ न केणइ॥” अध्याय 4, श्लोक 62 अर्थ: मैं सभी जीवों से क्षमा चाहता हूँ, सभी मुझे क्षमा करें; मेरा सभी से मित्रभाव है, किसी से वैर नहीं। यह विश्व-बंधुत्व और शुद्ध आचरण का सर्वोच्च आदर्श है। 4. दशवैकालिक सूत्र (4) “अहिंसा परमॊ धर्मः” (भावार्थ रूप में जैन परम्परा में अत्यंत प्रसिद्ध) संदर्भ: दशवैकालिक सूत्र (भावार्थ आधारित परम्परा) अर्थ: अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है। अहिंसा से ही सभी जीवों का कल्याण और श्रेष्ठता संभव है। 5. महावीर स्वामी के उपदेश (5) “जीओ और जीने दो” (परम्परागत उपदेश) अर्थ: स्वयं भी जीओ और दूसरों को भी जीने दो। यह सम्पूर्ण विश्व के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व का सिद्धांत है। निष्कर्ष-- जैन धर्म का मूल ही है: अहिंसा (Non-violence) सर्वजीव कल्याण (Universal welfare) मित्रभाव और क्षमा (Friendship & Forgiveness) परस्पर सहयोग (Mutual support) इसलिए जैन धर्म भी पूरी तरह से यह सिखाता है कि— “संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाओ, सबका भला करो” यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का मूल रूप है। बौद्ध धर्म में प्रमाण-- त्रिपिटक से प्रमाण-- पिटक–ग्रन्थ–श्लोक/सूत्र संख्या सहित दिए जा रहे हैं: 1. सुत्त पिटक – करणीय मेत्ता सुत्त (1) “सुखिनो वा खेमिनो होंतु, सब्बे सत्ताः” सुत्त निपात-- 1.8 (Karaniya Metta Sutta) अर्थ: “सभी प्राणी सुखी और सुरक्षित हों।” यह सार्वभौमिक कल्याण (Universal welfare) का सीधा संदेश है। (2) “माता यथा निअं पुत्रं आयुसा एकपुत्तमनुरक्खे…” सुत्त निपात-- 1.8 अर्थ: जैसे माता अपने इकलौते पुत्र की रक्षा करती है, वैसे ही सभी प्राणियों के प्रति प्रेम रखो। यह सर्वोच्च करुणा और विश्व-हित का आदर्श है। 2. धम्मपद (3) “सब्बपापस्स अकरणं, कुसलस्स उपसम्पदा; सचित्तपरियोदपनं — एतं बुद्धानं सासनं॥” धम्मपद, श्लोक 183 अर्थ: पाप न करना, पुण्य करना और मन को शुद्ध रखना— यही बुद्ध का उपदेश है। यह मनुष्य को श्रेष्ठ बनाकर समाज को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। (4) “न हि वेरेन वेरानि सम्मन्ति ध कुदाचनं; अवेरेन च सम्मन्ति…” धम्मपद, श्लोक 5 अर्थ: द्वेष से द्वेष कभी समाप्त नहीं होता, केवल प्रेम (अद्वेष) से ही समाप्त होता है। यह विश्व-शांति और श्रेष्ठता का मूल सिद्धांत है। 3. अंगुत्तर निकाय (5) “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” अंगुत्तर निकाय (AN 4.95 आदि संदर्भ) अर्थ: “अनेक लोगों के हित और सुख के लिए” बुद्ध के उपदेशों का उद्देश्य ही संपूर्ण समाज और विश्व का कल्याण है। 4. गौतम बुद्ध के उपदेश (6) “मेत्ता (मैत्री), करुणा, मुदिता, उपेक्षा” (चार ब्रह्मविहार) अर्थ: सभी प्राणियों के प्रति प्रेम (मैत्री),दया (करुणा) आनंद (मुदिता) समभाव (उपेक्षा) यह विश्व को श्रेष्ठ बनाने का मानसिक और आध्यात्मिक आधार है। निष्कर्ष बौद्ध धर्म का मूल संदेश है: सब प्राणी सुखी हों (Metta) करुणा और प्रेम से द्वेष समाप्त करो बहुजन हित और सुख के लिए कार्य करो स्वयं को सुधारो, विश्व सुधरेगा अर्थात् —संपूर्ण विश्व का उत्थान और कल्याण यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का मूल रूप है। (यहूदी धर्मग्रन्थ,तनाख) में प्रमाण-- 1. तनाख से प्रमाण (1) “Love your neighbor as yourself.” लैव्यव्यवस्था 19:18 (Leviticus 19:18) अर्थ: अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो। यह सार्वभौमिक प्रेम और नैतिक श्रेष्ठता का मूल सिद्धांत है। (2) “Seek peace and pursue it.” भजन संहिता 34:14 (Psalms 34:14) अर्थ: शांति की खोज करो और उसका अनुसरण करो। यह समाज और विश्व में शांति स्थापित करने का संदेश है। (3) “What does the Lord require of you? To act justly, love mercy, and walk humbly with your God.” मीका 6:8 (Micah 6:8) अर्थ: ईश्वर तुमसे क्या चाहता है? — न्याय करो, दया से प्रेम करो, और विनम्रता से चलो। यह नैतिक जीवन द्वारा विश्व को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। (4) “Justice, justice shall you pursue.” व्यवस्थाविवरण 16:20 (Deuteronomy 16:20) अर्थ: न्याय का ही अनुसरण करो। यह समाज को धर्मपूर्ण और श्रेष्ठ बनाने का आधार है। (5) “He has told you, O man, what is good…” मीका 6:8 (Micah 6:8) (ऊपर का ही विस्तृत भाग) यह बताता है कि अच्छा जीवन जीकर समाज का उत्थान करना ही धर्म है। 2. यहूदी परम्परा (Talmud) (6) “What is hateful to you, do not do to your fellow.” (जो तुम्हें अपने लिए बुरा लगे, वह दूसरों के साथ मत करो) तलमूद – Shabbat 31a यह प्रसिद्ध उपदेश हिलेल का है। यह “Golden Rule” का नकारात्मक रूप है, जो सार्वभौमिक नैतिकता सिखाता है। निष्कर्ष-- यहूदी धर्म में मुख्य सिद्धांत हैं: पड़ोसी से प्रेम (Love) न्याय और धर्म (Justice) दया और विनम्रता (Mercy & Humility) शांति का अनुसरण (Peace) अर्थात् — समाज और विश्व को नैतिक, न्यायपूर्ण और श्रेष्ठ बनाना यही “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” का मूल रूप है। -----+------+-----+------+------+-

Manjibhai Bavaliya મનરવ

हाइकु कन्या शुकून परिवार की शोभा शृंगार भाव

softrebel

दो दोस्तों में प्रेम पनप सकता है किन्तु दो दोस्तों के बीच उत्पन्न प्रेम दोस्ती को भी दूषित कर देता है। - softrebel

softrebel

दो दोस्तों में प्रेम पनप सकता है किन्तु दोस्ती के उपरांत हुआ प्रेम दोस्ती को भी दूषित कर देता है। - softrebel

Bhavna Bhatt

જય બજરંગબલી 🙏

Beyondwords

કર્મનો સગાથી મારો કોઈ નથી, બાકી બધા તો માર્ગના મુસાફર છે. હિસાબ તો અંદરનો જ ચાલે છે, બહારના સંબંધો બધાં અસ્થાયી છે. - Beyondwords✍️

Beyondwords

किसी मुश्किल मोड़ पर तुम मेरा हाथ छोड़कर चली गई… मैं उस पल टूटा नहीं था, बस खामोशी से अंदर ही अंदर बिखर गया था। बहुत कुछ कहना था, चीखना था, रोकना था तुम्हें… पर अजीब है ना— मेरी आवाज़ भी तुम्हारे साथ ही चली गई। तब समझ आया— मोहब्बत में दरवाज़े हम खोलते हैं, मगर उन्हें बंद करने वाले वही होते हैं… जिन पर हम सबसे ज़्यादा यकीन करते हैं। जिसे मैंने अपना सुकून समझा, वही मेरी बेचैनी बन गया… जिसे अपना घर कहा, वही मुझे बेघर कर गया। और आज भी… उस दरवाज़े के बंद होने की आवाज़ मेरे अंदर गूंजती रहती है— हर बार मुझे थोड़ा और तोड़ जाती है। हाँ, एक खिड़की खुली थी कहीं… मगर वहाँ से कोई उजाला नहीं आया, बस मेरा अपना अकेलापन मुझे घूरता रहा। सच तो ये है— तुम्हारा ना मिलना इतना दर्द नहीं देता, जितना ये एहसास देता है कि मैंने तुम्हें सच में अपना मान लिया था… और मेरी गलती बस इतनी थी— कि मैंने तुम्हें चाहा… सिर्फ चाहा नहीं, पूरी तरह से तुम्हारा हो गया था… - beyond_word l✍️

bhagwat singh naruka

आज कल के रिश्ते बहुत नाजुक है समय समय पर वक्त देते रहे वरना वो टूट जाते है ।🙏🙏🙏♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️🙏🙏🙏🙏🙏♥️♥️♥️♥️♥️

bhagwat singh naruka

जो बीत रहा है वो वक्त नहीं ,,,जीवन है ♥️♥️♥️♥️♥️🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Beyondwords

સ્પર્શ કરીને પાણી જયારે વહી જતું હશે, ત્યારે એ પથ્થરને પણ કંઈક લાગણી તો થતી જ હશે… ચુપ રહીને સહન કરવાનું એનું સ્વભાવ હશે, એટલે જ તો એનું દુઃખ ક્યારેય દેખાતું નહીં હશે… ક્યારેક લાગણીઓ શબ્દોમાં નથી ઉતરતી, પણ મૌનમાં ઘણું બધું બોલાતું જ હશે… જેને આપણે નિર્જીવ ગણીએ છીએ, કદાચ એ પણ અંદરથી રડતું જ હશે… - શબ્દો_ની_પાર✍️

Sonam Brijwasi

“तेरा नाम लेते ही बदल जाता हूँ मैं, किसी और का ख्याल आए तो जल जाता हूँ मैं… प्यार है तुझसे बेहिसाब, ये मान ले, पर तुझे खोने के डर से थोड़ा पागल भी हो जाता हूँ मैं…”

Ajit

મૂકવા આવે છે સ્નેહીજનો સ્મશાન સુધી મર્યા પછી પણ...... તમે તો પ્રેમના નામે બિનવારસી હાલતમાં છોડી દીધો ને સંતાઈ ગયા.....? જિંદગી ની "યાદ"

Vibhuti Desai

નર્મદા તટે શિવશરણે જતાં ભાવિકો રાજી. વિભૂતિ દેસાઈ ઘાસવાલા. બીલીમોરા.

Rinal Patel

"તમને જે જોઈએ છેે એ તમને તમારી ક્ષમતા પ્રમાણે મળશે જ" એવો અભિગમ તમનેે તમારી એ વસ્તુ તમને અપાવશે જ પણ જો , તમને જે જોઈએ છે એ વસ્તુ "હું એ મેળવીને જ રહીશ" એવો અભિગમ તમનેે હાનિ પહોંચાડી શકે. અંતરની દ્રષ્ટિએ. Rinall.

Archana Singh

" खेल तो क़िस्मत रही हैं ... हमें तो ज़माना बीत गया " ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Rashmi Dwivedi

इतना भी कभी कुछ नहीं बिगड़ेगा कि तुम उसे ठीक ना कर पाओ हर हर महादेव ❤️ - Rashmi Dwivedi

Jyoti Gupta

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kattupaya s

Goodnight friends.. Thanks for the support towards my stories.

महेश रौतेला

इसी प्यार के कारण हम फिर-फिर मिलते हैं, इसी प्यार के कारण हम फिर-फिर लड़ते हैं। इसी प्यार के कारण आँसू नित बहते हैं, इसी प्यार के कारण सब राधे-राधे कहते हैं। इसी प्यार की अगुवाई में दुनिया नित चलती है, इसी प्यार की परछाई में राधा अब तक बैठी है। *** *** महेश रौतेला

Kiran

"सवार को सवारी चाहिए, ये दुनिया का उसूल है, पर हमें तो वो चाहिए, जो दिल से कबूल है।" -

Piyu soul

हमारी दोस्ती का सफ़र ✨ सफर में बहुत लोग मिले, कई बातें अधूरी रह गईं, पर हमारी दोस्ती ने हर राह में रोशनी भर दी। हँसी में, खामोशी में, दर्द में भी साथ खड़े रहे, जैसे हर मौसम में फूल अपनी खुशबू छोड़ते हैं। हौसले की एक छोटी सी आग, हमारी बातें और सपनों में जगती है, हर गिरावट के बाद उठने की ताक़त हमें देती है। ये दोस्ती सिर्फ़ नाम नहीं, एहसास है, जो हर मुश्किल में मुस्कान और उम्मीद बनकर साथ रहती है। 💛 by piyu 7soul

Shivraj Bhokare

Winners find a way . losers find an excuse..

Awantika Palewale

धड़कनों में तेरा नशा उतर आता है साँस लेते ही दिल बहक सा जाता है तेरी नज़रों की वो हल्की सी छुअन, बिन पिए ही मुझमें जाम उतर आता है रात चुपके से सिमट आती है बाहों में, तेरा एहसास जब लिबास उतर आता है होंठ ख़ामोश हैं, पर दिल की ज़ुबाँ से, हर एक जज़्बात बेहिसाब उतर आता है तू पास न हो फिर भी कमी महसूस नहीं, इश्क़ बनकर तू हर पास उतर आता है संभलना चाहूँ भी तो सम्भल ना पाऊँ, तेरी यादों का खुमार लाजवाब उतर आता है नाम तेरा जो लिया मैंने,,,,,,,,,,, हर शेर में इश्क़ बेहिसाब उतर आता है

Paagla

https://youtube.com/shorts/PUKbsLOyDf0?si=fkPtxhAvc1ycH7u7

Sneha Gupta

🐦सबसे छोटी चिड़िया🐦 घोंसले की बगिया वो मेरी नगरी, माँ का प्यार, बड़ों का दुलार, घर की मैं सबसे छोटी चिड़िया। बारिश की रुकावट मगर, बड़े पेड़ों की छाया, अपनों के साथ संसार जगमगाया। जन्नत के पल या दुख का मेला, मगर टहनियों ने हर समय घेरा, घर की मैं सबसे छोटी चिड़िया। Created by: Sneha Gupta Grade: 10th

Preet

kash kite ohh beete , wele murh aavan , asi fer raha vich khrhiye , jitho tu lenge - Preet

jighnasa solanki

લગ્નના ચાંદલામા આવેલો નવો ટ્રેન્ડ.....😜😜 લ્યો હવે આવા દિવસો પણ જોવા મળશે...... 🤣🤣🤣🤣🤣🤣

SAYRI K I N G

काश तुम थोड़ी सी सांवली होती, sayri king और मैं तुम्हें Lakme cream देकर impress कर लेता मगर तुम तो पहले से ही गोरी हो !!

Ruchi Dixit

जो थी वहीं हूं मसला तो सारा होने का ही है,,, - Ruchi Dixit

SAYRI K I N G

दिल करता है एक पत्थर पर लिखूं I MISS YOU और वो पत्थर तुम्हारे सर पर दे मार.... ताकि तुम्हे भी पता चले कि तुम्हारी याद कितना दर्द देती है....

Ruchi Dixit

व्यवहारिक दृश्य का वास्तविक सत्य से निराकरण तभी हो सकता है जब आत्मबोध हो । - Ruchi Dixit

SAYRI K I N G

Close the door gently. If it was love once, let it leave like love. Keep walking with love.

Ruchi Dixit

पहली बार का भरोसा और झूठ स्थाई हो जाता है सच के लिए हम कुछ दूर चल तो पड़ते हैं ट्रेन के डिब्बे की तरह मगर पूर्ण संतुष्टि न होने पर इंजन बार - बार रुकता है और अनुकूलता पटरी तोड़ने काम करती है ,,, - Ruchi Dixit

kattupaya s

My Tamil short story "anthimaalai" is now live on Matrubharti

Shefali

#shabdone_sarname__

Imaran

तेरा इश्क कभी इम्तिहान तो कभी इंतज़ार बन जाता है, फिर भी तेरे रिश्ता में ही मेरी जान और सच्चा प्यार बसता है 💞imran 💞

ek archana arpan tane

તમાશો જોવા લોકો નાં ટોળે ટોળા ઊમટ્યાં પણ જ્યારે એમનાં દર્દ ને સાંભળવા ની વાત આવી તો બધાં જ લોકો બહેરાં નીકળ્યા. - ek archana arpan tane

Fazal Esaf

“गावात आई-बाबा तुला खूप आठवतात रे, थोडा वेळ काढ, पुन्हा त्या वाटेने जाण्यासाठी। शहराच्या उजेडाने डोळे तर भरले तुझे, पण मन अंधारलंय आता हसण्यासाठी। दाराशी उभं राहून वाट पाहतात अजूनही, फक्त तुला एकदा पाहण्यासाठी। तू घर सजवलंस वस्तूंनी, सुखाच्या नावाखाली, पण खरं घर रिकामं पडलंय तुला हाक देण्यासाठी। ही कमाई, ही धावपळ कशासाठी शेवटी, जेव्हा आपलेच तडफडतात तुला जवळ घेण्यासाठी। एक दिवस परत येशील, पण कदाचित उशीर होईल, कारण वेळ थांबत नाही कुणाला भेटवण्यासाठी। सत्य इतकंच—आपलेच खरे धन असतात, बाकी सगळं उरतं फक्त दाखवण्यासाठी।” - Fazal Abubakkar Esaf

Mara Bachaaaaa

हर एक दिन उनका इंतजार करता ये दिल, मालूम है हमे भी हम नहीं उनकी मंजिल। - Mara Bachaaaaa

बिट्टू श्री दार्शनिक

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Nilesh Rajput

तेरी एक मुस्कान पे सौ बार ये दिल आया, ना पूछा कभी मैने कितनो को तुने आजमाया, पागल था मैं तेरे पीछे, ना देखा कभी मुड़ के, जूठा इश्क था ये तेरा, सच तो था बिस्तर के नीचे, वापस मुस्कुराके मेरा, जीना खराब कर दो होठों को तुम लगाके, कड़वी शराब कर दो तारों से मेरी अब मुलाकात कर दो, करके बदनाम मुझे तुम बर्बाद कर दो।

ASHISH KUMAR

इश्क वो नहीं जो दिखाया जाए, इश्क वो है जो निभाया जाए। सच्चा प्यार वही है जनाब, जो दूर रहकर भी महसूस किया जाए। ❤️

ASHISH KUMAR

तेरी मुस्कान से शुरू, तेरे ख्याल पर खत्म, मेरा हर दिन बस तुझ पर ही खत्म। तू साथ हो तो दुनिया अपनी लगती है, तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगती है।

Kiran

बहुत अल्हड़ है वो, थोड़ा अकड़ू भी है। कम बोलता है, मेरी बातें भी कम ही सुनता है। दिल का हाल भी ज़्यादा बताता नहीं, पर ये समझ नहीं आता… जालिम वो बुरा है, या मैं ही बुरी हूँ कहीं। - Kiran

Kiran

मेरी आँखों में छुपा दर्द दिखता नहीं तुम्हें, और कहते हो — हम तुम्हें बहुत चाहते हैं। अरे हुज़ूर...... यदि मुझे चाहते ही, तो मेरे दिल का हाल गैरों से न पूछते।

Piyu soul

✨ मेरी लिखने की कहानी… आसान नहीं थी ✨ कभी सोचा भी नहीं था कि मैं अपनी feelings को शब्दों में ढाल पाऊँगी… शुरुआत में तो बस एक डायरी थी, कुछ अधूरे ख्याल थे… और बहुत सारे डर 😔 डर इस बात का कि… “लोग क्या कहेंगे?” “क्या मेरी कहानी किसी को पसंद आएगी?” कई बार लिखा… फिर delete कर दिया। कई बार लगा छोड़ दूँ… ये मेरे बस की बात नहीं है। लेकिन दिल था कि मानता ही नहीं था ❤️ हर बार फिर से लिखना शुरू कर देती थी… आज जब मेरी stories Matrubharti पर publish होने जा रही हैं… तो लगता है कि वो हर struggle, हर sleepless night… worth था ✨ ये सफर अभी शुरू हुआ है… और मैं चाहती हूँ कि आप सब इसमें मेरे साथ चलें 🤝 अगर आपको मेरी writing पसंद आए… तो मुझे support जरूर करना 💖 👉 25 March — “झांसी: सौदा, कर्ज और बदला - 1” 👉 26 March — “रंग चुराने वाले बादल” ये सिर्फ stories नहीं हैं… ये मेरे दिल के टुकड़े हैं 💫 – Piyu 7soul ✍️ #WriterLife #StruggleToSuccess #NewWriter #Matrubharti

Raa

jo aanand sant fakir kare. o aanand kaha mari me.

उषा जरवाल

खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है मेरी बढ़ती उम्र का अनुभव - जल वक्त की बरसात थमने का नाम नहीं ले रही पर मेरा साहस खड़ा है, अडिग, अचल… चेहरे पर उभरती रेखाएँ कहती हैं, कि हर वर्ष ने मुझे और निखारा है… थकते कदमों के बावजूद भी मैंने काम से अपना नाता और संवारा है… भागते वक्त की तेज़ हवाओं में भी मेरा जुनून दीपक-सा जलता रहा… अब उम्र नहीं, मेरा हौसला बोलता है— हर ढलती साँझ में मैं और सँवरती रही ।

Anup Gajare

"उदास लड़का" ____________________________________________________ बेंच पर अक्षर उकेरता उदास लड़का मुझे गुफाओं के प्राचीन सभ्यता कि याद में डुबो देता है। मैं उसका बनाया हुआ आडा टेढ़ा आदम हु जो ईव्ह के लिए फल तोड़ता है। लड़का ट्रेन में बैठा खिड़की से भागते पेड़ो में सिहरन ढूंढ लेता है उसके दुबके हुए किसी अंधेरे कोने का हिस्सा मैं हु। प्रतीक्षा ही प्रेम है उसने बहुत प्रेम किया और युद्ध के समाचार पढ़ते हुए आह भरी। उसकी प्रिय ईरान के किसी गांव में अपने पति के आने का इंतजार करती रही। अमेरिका रावण का ग्यारहवां मस्तिष्क बन रहा था तब उदास लड़का किसी आदमी को अखबार में देखते हुए गालियां देता हुआ दिख पड़ा। गालियां पुरातन है युद्ध से भी पहले इनका सृजन हुआ था लड़का मुझे रेल में बोझ की तरह उकेरता हवा में प्रिय का हिस्सा बो रहा था। मैं इतिहास में फैला ऐसे कितने लड़कों को पहचानता था जिन्होंने अपनी प्रेमिका बुझा दी किसी दूसरे के युद्ध में हारे हुए बेबस लड़के मैं देखता आया हु। और वे लड़के अक्सर लौटते नहीं थे सिर्फ उनके नाम किसी पत्थर पर गलत वर्तनी में उकेर दिए जाते थे। उनकी जेबों में रखे अधूरे खत किसी संग्रहालय की धूल बन जाते थे जहां प्रेम इतिहास की वस्तु बनकर कांच के पीछे सांस लेता है। मैंने देखा है उनके हाथों की लकीरों में रेत भर जाती है और समय उन्हें पढ़ने से इंकार कर देता है। उदास लड़का अब भी ट्रेन की उसी सीट पर बैठा है जहां से बाहर का संसार पीछे भागता रहता है और भीतर सब कुछ ठहरा हुआ है। उसकी आंखों में कोई युद्ध समाप्त नहीं होता हर शाम एक नई हार उसके भीतर जन्म लेती है। वह प्रेम को किसी पुरानी भाषा की तरह याद करने की कोशिश करता है जिसके शब्द अब किसी भी मुंह से सही उच्चारण में नहीं निकलते। कभी-कभी वह अपना नाम भूल जाता है और खुद को किसी मरे हुए सैनिक की जगह रख देता है जिसकी पहचान सिर्फ एक संख्या थी। मैं उसकी उंगलियों के बीच फंसा हुआ समय हूं जो हर उकेरी गई रेखा के साथ थोड़ा और टूटता जाता है। और जब वह आखिरी बार बेंच पर झुककर लिखता है— तो अक्षर नहीं बल्कि एक शून्य उभरता है जिसमें ना आदम बचता है ना ईव्ह ना प्रेम ना प्रतीक्षा— सिर्फ एक लड़का जो इतिहास में कहीं गलती से जिंदा रह गया। मुर्दों से भरी ट्रेन में अकेला जिंदा लड़का जीवट उदास लड़का। ______________________________________________

archana

समाज में कई लोग यह समझते हैं कि अगर कोई इंसान बहुत कष्ट सह ले, अपमान सह ले और फिर भी चुप रहे, तो वह बहुत संस्कारी है। लेकिन सच्चाई यह है कि किसी को कष्ट देना और फिर उसकी सहनशीलता की तारीफ करना, यह इंसानियत नहीं है। किसी को दुख देकर हम कैसे खुश रह सकते हैं? अगर मैं ही किसी को कष्ट दूँ और फिर कहूँ कि “देखो, यह कितना संस्कारी है, सब सह लेता है”, तो यह संस्कार नहीं बल्कि अन्याय है। भगवान सब देखता है। जो इंसान दूसरों को कष्ट देता है, उसे अपने कर्मों का फल जरूर मिलता है— चाहे देर से ही सही। इसलिए किसी पर निर्णय देने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। हो सकता है कि जिसकी हम आलोचना कर रहे हैं, उसकी परिस्थिति और दर्द हमें दिखाई ही न दे रहा हो। सच्चा संस्कार तो यह है कि हम किसी को दुख न दें, बल्कि उसकी स्थिति को समझने की कोशिश करें।

Raju kumar Chaudhary

A beautiful and spiritual poster for Chaiti Chhath Puja festival. A serene sunrise scene on a riverbank with devotees standing in water offering arghya to the Sun God. Traditional Indian attire, women in colorful sarees holding bamboo baskets filled with fruits, sugarcane, and diyas. Warm golden sunlight reflecting on water, calm and divine atmosphere. Add glowing text in Hindi: "चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं" in elegant calligraphy. Include soft light effects, floating diyas, lotus flowers, and a peaceful sky. Ultra HD, cinematic lighting, highly detailed, vibrant colors, devotional mood. 🪄 Hindi Text (Poster पर लिखने के लिए) "🌞 चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं 🌼 सूर्य देव आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें 🙏"

Saroj Prajapati

रिजल्ट तो बनता रहेगा काम धंधा सब चलता रहेगा चलो कुछ वक्त खूबसूरत फूलों संग बिताए थोड़ी इनकी सुने कुछ अपनी इन्हें सुनाएं संघर्ष में हंसकर जीने की कला ये हमें सिखाएं चार दिन की है जिंदगानी, खुलकर जिएं और मुस्कुराएं जिंदगी का है बस यही फलसफा,ये महकते फूल हमें समझाएं।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Maya Hanchate httpstmeuUWEPTNoyAMZTRl

https://t.me/+uUWEPTNoyAM1ZTRl - Maya Hanchate in this app you get all the notification of uljhan rishton ki, Ishq ki library, dori.. please please subscribe.

Maya Hanchate httpstmeuUWEPTNoyAMZTRl

Khamoshiyan Sneh lagi... by Maya Hanchate... Gemini.. inspired by Dil Se Dil Tak (uljhan, rishton ki) sound by Suno app.

MASHAALLHA KHAN

मेरी नाव समुद्र के उस हिस्से मे जा फसी है जहा से बाहर निकल आना एक चमत्कार से कम नही होगा . -MASHAALLHA

Jenisha

જીવ થી પણ વ્હાલુ મારુ ઘર, દસકા પહેલા આ દરવાજે મેં (વરસાદ) ની જેમ રાહ જોઈને વ્હાલસોયુ વડીલ ઉભુ રેતુ, આજ કોઈ દરવાજો ખોલવા પણ રહ્યુ નથી, તો પણ આજ દસકાઓ પછી પણ એમજ ઉભુ છે અડીખમ અને અડગ એવુ વ્હાલસોયુ મારુ ઘર… -જીજીવીષા

Shailesh Joshi

દરેક મા-બાપ પોતાના સંતાનો માટે ખુબજ ચિંતાઓ કરતા હોય છે, અને કરવી પણ જોઈએ, પરંતુ સામે સંતાનોને પણ... એક ચિંતા તો રાખવી જ જોઈએ કે, ભલે અમારા મા-બાપ આખી જિંદગી "અમારા માટે" ચિંતાઓ કરે, પરંતુ અમારા મા-બાપની એકપણ ચિંતા, "અમારા લીધે" ન હોવી જોઈએ. - Shailesh Joshi

Shailesh Joshi

આપણા જીવનમાં અવારનવાર આવતી જતી રહેતી મોટાભાગની મુસીબતોનું મુખ્ય "કારણ" આપણું મગજ જ હોય છે, અને મોટાભાગની મુસીબતોનું મારણ પણ આપણું મગજ જ છે, માટે જો આપણે મુસીબતોથી બચવું હોય તો એનો "યોગ્ય" ઉપયોગ કરવા સિવાય આપણી પાસે બીજો કોઈ વિકલ્પ નથી. હા આમાં આપણામાંથી જ અમુક કે પછી ઘણાબધા લોકો, એમના ભાગમાં આવતી, કે પછી એમણે જાતે જ ઊભી કરેલી મુસીબતોથી દૂર ભાગવાનો, કે પછી એ મુસીબતોને દૂર ઠેલવાનો, અથવા તો જે તે મુસીબતોથી બચવાનો, કે પછી અમુક લોકો તો એમના જીવનમાં મુસીબતો આવે જ નહીં એવો ટૂંકા ગાળાનો રસ્તો પણ શોધી લે છે, અને એ પણ એમનું મગજ દોડાવીને, પરંતુ એક વાત તો જગજાહેર છે કે, સ્વાર્થથી ભરેલા ટૂંકા ગાળાના ફાયદા માટે અયોગ્ય રીતે ખોટી દિશામાં દોડાવેલ મગજ, આપણને જે ફાયદો કરાવે છે, એ ફાયદો હંમેશા ટૂંકા ગાળા માટે જ હોય છે, ને પછી આપણને આપણો સમય એવા સમયમાં લાવીને ઊભા કરી દે છે કે, આપણું મગજ ચાલવાનું તો દૂર, બિલકુલ કામ કરવાનું જ છોડી દે છે, ને આપણે અતિશય લાચાર ભરી પરિસ્થિતિમાં આવી જઈએ છીએ, એક એવી સ્થિતિ કે જેમાં આપણે સિવાય અફસોસ બીજું કશું કરી શકવાની સ્થિતિમાં નથી રહેતા. માટે કોઈપણ સારી નરસી પરિસ્થિતિ વખતે, ધીરજ રાખી, શાંત ચિત્તે, સમય અને સંજોગોને સારામાં સારી રીતે જોઈ સમજી લીધા પછી, જે તે બાબતે ખૂબજ ઊંડાણ પૂર્વક વિચારી જીવનમાં આગળ વધવું, એજ સાચી સમજદારી પણ છે, અને એ આપણા સુખરૂપ ઉજ્જવળ ભવિષ્ય માટે ખુબ ખૂબ અને ખૂબજ જરૂરી પણ છે.

Mrugzal

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Mrs Farida Desar foram

चाँद तारो की ख्वाहिश, हमने कहा की थी, हमें तो बस, एक सहारा चाहिए था, जिसके सीने पर रख के सिर, हम बस सुकून महसूस करे... - Mrs Farida Desar foram

Dr.Namrata Dharaviya

જોગણ થઈને રાધા શોધી ન શકી જેને વનમાં, મસ્ત બનીને મીરાએ શોધી લીધો એને મનમાં. -કલમ ના સથવારે ✍️ Dr.Namrata Dharaviya

Dada Bhagwan

વીતરાગનો આખો માર્ગ જ 'વિનય'નો છે. આ વિનય ધર્મની શરૂઆત હિન્દુસ્તાનમાં થાય છે. હાથ જોડવાથી તે સાષ્ટાંગ પ્રણામ સુધીમાં જે જે કરવામાં આવે છે તેવા પાર વગરના વિનયધર્મ છે. અને છેવટે 'પરમ વિનય' થયો એટલે મોક્ષ થાય. - દાદા ભગવાન વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/lu5mEP24 #quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

Jyoti Gupta

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Sonu Kumar

क्या हम भारत में चीनी उत्पादों से छुटकारा पा सकते हैं? . चीन की सेना भारत की सेना से कई गुना ज्यादा ताकतवर है, अत: हम चीनी उत्पादों से बच नहीं सकते। यदि हम अपनी सेना को चीन से ज्यादा ताकतवर बना ले तो हम चीन के बढ़ते नियंत्रण से छुटकारा पा सकते है। किन्तु तब अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां हमारी पूरी अर्थव्यवस्था को टेक ओवर कर लेगी। और यदि हमें अमेरिकी-ब्रिटिश से बचना है तो यह जरुरी है कि हमारी सेना अमेरिका के बराबर ताकतवर हो। . इस जवाब में मैंने ज्यादातर चीन के बढ़ते हुए नियंत्रण के बारे में बताया है, इसके समाधान के बारे में मैं फिर किसी जवाब में लिखा जाएगा। . -------- . (0) चीन का नियंत्रण भारत में क्यों बढ़ रहा है ? . (A) चीन के पास बड़े पैमाने पर तकनिकी उत्पादन करने का आधार है, जिसकी वजह से वे ऐसी वस्तुएं बनाते है, जो भारत नहीं बना पाता। और इसीलिए चीन से हमें ये वस्तुएं लेनी पड़ती है। यदि भारत को चीनी उत्पादों से छुटकारा पाना है तो गेजेट में ऐसे क़ानून छापने होंगे जिससे हम भारत में स्वदेशी तकनिकी उत्पादन बढ़ा सके। . अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां बेहद उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाती है, और भारत के विशाल मध्य वर्ग के लिए यह काफी महंगे है। अत: हम सस्ते और चिल्लर तकनिकी उत्पादो के लिए चीन पर निर्भर होते जा रहे है। या तो खुद बनाओ या चीन से लो। दूसरा कोई रास्ता नहीं है। चीनी वस्तुओ का बहिष्कार करना इतना बकवास रास्ता है कि मैं इस पर बात करके भी अपना टाइम जाया नहीं करना चाहता। . (B) लेकिन सिर्फ तकनिकी उत्पादन करने से भी हम चीनी सामान से छुटकारा नहीं पा सकते। इसके लिए यह जरुरी है कि हमारी सेना चीन का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर हो। मतलब यदि चीन के मोबाईल रोकने है तो सिर्फ चीन से बेहतर मोबाईल बनाकर हम उन्हें नहीं रोक सकते। इसके लिए हमें चीन से अच्छे फाइटर प्लेन बनाने होंगे !! हम चीन से बेहतर फाइटर प्लेन बनेंगे तो चीन के मोबाईल रुकेंगे। वर्ना नहीं। . भारत की सेना कमजोर होने के कारण चीन भारत पर उन कानूनों को गेजेट में छापने के लिए दबाव बनाता है जिससे चीन का भारत की अर्थव्यवस्था में नियंत्रण बढे। और इस तरह का दबाव सैन्य ताकत द्वारा बनाया जाता है। अन्तराष्ट्रीय मामलों में कोई कूटनीति वगेरह नहीं होती है। ये परले दर्जे की बकवास है, जिसे पेड मीडिया एवं पेड रक्षा विशेषज्ञों द्वारा नागरिको की आँखों में धुल झोंकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सारी कूटनीति बातें सीधे लफ्जो में होती है। . उदाहरण के लिए, चीनी आकर सीधे यह कहते है कि हमें भारत के अमुक ट्रेन ट्रेक पर रेल चलाने के ठेके दो, इतने उतने कर मुक्त सेज दो, वर्ना हम अपनी सेना भारत की सीमा में घुसा देंगे। अब यदि भारत उनकी बात मान जाता है तो कूटनीति सफल है, और भारत अपनी अर्थव्यवस्था के क्षेत्र चीनियों के हवाले कर देगा। यदि भारत टालता रहता है तो शी जिनपिंग भारत की सीमा में सेना घुसाना शुरू करेंगे। जैसे ही 5 किलोमीटर सेना अन्दर घुसेगी भारत उनकी मांगे मान लेगा और सेना लौट जाएगी। बस यही विदेश नीति है। . और फिर समाधान की गलत दिशा में धकलने के लिए पेड मीडिया एवं आई टी सेल को चीनी आयटमो का बहिष्कार करने के लिए कैम्पेन चलाने के लिए कह दिया जाता है। कार्यकर्ता इस बात को समझ नहीं पाते कि चीनी भारत सरकार के जरिये घुस रहे है, तो इस तरह के फर्जी बहिस्कार कैम्पेन से चीनियों को रोका नहीं जा सकता। . ——— . निचे कुछ उदाहरण दिए है जिससे आप जान सकते है कि चीनी आयटमो के इस तरह के फर्जी बहिष्कार कैम्पेन किस तरह चीनियों के लिए कवर का काम करते है, और वे सरकार को बाध्य करके किस तरह भारत में तथा भारत की सीमओं पर अपना नियंत्रण बढाते जा रहे है : . (1) इंडस्ट्रियल पार्क एवं सेज : 2014 में मोदी साहेब के पीएम बनने के बाद शी जिनपिंग पहली बार मोदी साहेब से मिलने भारत आये थे। और जब वे भारत आये तो अपनी सेना साथ लेकर आये। जैसे ही शी ने अहमदाबाद में लेंड किया वैसे ही चीन की सेना ने भारत में घुसना शुरू किया। . चीनी दो मोर्चो पर भारत की सीमा में 5 किलोमीटर तक अन्दर घुस आये। भारत ने चीन को 5 इंडस्ट्रियल पार्क, सेज और हाई स्पीड ट्रेन चलाने के ठेके दिए। डील होने के बाद जब शी जिनपिंग भारत से निकल गए तब चीन की सेना ने भारत छोड़ा !!! और जब शी जिनपिंग भारत आये तो इससे पहले उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करने वाले बयान दिए व अरुणाचल प्रदेश को चीन के नक़्शे में भी दिखाया !!! . यह खबर पढ़ें - China's President Talks Trade in India as Troops Face Off at Border . 1.1. और ये इंडस्ट्रियल पार्क एवं सेज क्या है ? . इनका आकार 100 एकड़ से 1000 एकड़ होगा, इन चाइनीज़ पार्को में यातायात, परिवहन, बिजली, पानी आदि के लिए चाइनीज़ नियम लागू होंगे। लेबर लॉ, PF लॉ, LBT , कस्टम, जीएसटी आदि टेक्स इन पर या तो इन पर लागू नही होंगे या फिर इन्हें कई प्रकार की छूटें मिलेगी। इन कम्पनियों को 30% आयकर भी नही देना होगा। हमारी देशी कम्पनियो को ये सब टेक्स चुकाने होंगे और वो लागत बढ़ने से मार्केट से बाहर हो जायेगी। चाइनीज़ हमारे यहाँ का कच्चा माल और सस्ता लेबर उपयोग कर के भारत के बाज़ार में अकल्पनीय माल डंप कर देंगे और उन्हें भारी मुनाफा होगा । . 1.2. और हमें इस मुनाफे के बदले में डॉलर भी चुकाने होंगे !!! तो आप खुद अंदाजा लगा सकते है कि जब सरकार चीनियों को 1000 एकड़ के कर मुक्त प्लाट पकड़ा रही है, ताकि वे यहाँ आकर उत्पादन करे तो आप उन्हें कैसे रोकेंगे !!! ये सेज / इंडस्ट्रियल पार्क उत्पादन इकाइयां नहीं है, बल्कि भारतीय इकाईयों के लिए क़त्ल खाने है। . सेज में एक्सपोर्ट के नाम पर ये टेक्स में छूट ले लेते है, और यह खुली हुयी बात है कि सेज इकाइयां शेल कम्पनियां खोलकर राउंड ट्रिपिंग करती है, और फर्जी एक्सपोर्ट दिखाती है। चीनियों के पास काफी डॉलर है। वे भारत में आने बाद हमारे मंत्रियो को घूस देकर और भी ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे भारत की स्थानीय इकाइयां और भी बर्बाद हो जायेगी। और समस्या यह है कि भारत के कार्यकर्ता नेताओं के भाषण सुनते है, लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनके नेता गेजेट में क्या क़ानून छाप रहे है !! . 1.3. 2014 में एग्रीमेंट हुआ था, और फिर आगे की प्रक्रिया शुरू हुयी। बीच में भारत की तरफ से काम में रुकावटें डाली जाने लगी तो 2017 में चीन ने फिर से अपनी सेना भारत में भेजकर हमारे दो बंकर नष्ट कर दिए, और मानसरोवर यात्रियों का जत्था रुकवा दिया !! . Face-off between Chinese, Indian troops in Sikkim after PLA 'transgression' - Times of India ► . 1.4. अभी चाइना ने विभिन्न राज्यों में अपने पार्क का इन्फ्रास्त्रक्चर लगाना शुरू किया है, और जल्दी ही ये कार्यशील हो जायेंगे . 2018 की खबर - Chinese investments in special economic zones in India . बीच में यदि रुकावट आई तो फिर से चीन की सेना भारत में घुसेगी !! . ———- . (2) चाइनीज रेलवे : अब चाइना की नजर भारत के हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क पर है। चीन भारत में कई हाई स्पीड कोरिडोर्स खरीदना चाहता है, ताकि रेलवे सेक्टर को टेक ओवर कर सके। . India seeks China's help for speeding-up of Bangalore-Chennai train corridor . 2.1. चाइना कुमिंग को कलकत्ता से भी जोड़ना चाहता है। यदि चीन यह रूट हथिया लेता है तो पूर्वोतर राज्यों पर भारत की पकड़ कमजोर हो जायेगी। ट्रेन रूट द्वारा चीन भारत के बाजार को चीनी उत्पादों से पाट देगा। पेड बुद्धिजीवी इस योजना को यात्रियों की संख्या की नजर से अव्यवहारिक बता रहे है। किन्तु चीन की योजना इस रूट से भारत में बड़े पैमान पर माल डंप करने की है। . China wants to build bullet train service with India that connects Kunming and Kolkata . अब यदि आप किसी भी समझदार किस्म के पेड विशेषग्य से पूछेंगे कि, जब शी जिनपिंग भारत आते है तो अपनी सेना भी साथ ले आते है, और फिर उनके सैनिक आकर हमारे बंकर नष्ट कर देते है, तो हम उन्हें भारत में कर मुक्त सेज क्यों दे रहे है ? तो वे बहुत ही राजदाराना लहजे में आपको यह समझायेंगे कि यह कूटनीति है, तुम नहीं समझोगे !!! और फिर वे इसे विकास से भी जोड़ देंगे !! . ——— . (3) चीन का POK पर नियंत्रण : चीन ने POK स्थित झेलम नदी पर 1100 मेगावाट जो की क्षमता में दुनिया का सबसे बड़ा पॉवर प्रोजेक्ट होगा का निर्माण शुरू किया। भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है क्योंकि इससे हमारी सुरक्षा को खतरा है। किन्तु 2015 में चीन ने हमारे विरोध को खारिज कर दिया !! और तो और इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा भी उस बैंक (AIIB) से आ रहा है जिसमे हमने बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स दे रखें है !! . China firm to build mega dam in PoK despite India's strong opposition . तो जब हमारे सम्बन्ध इतने अच्छे है कि 2014 में हम चीनियों को कर मुक्त सेज देते है, तो चीन बाँध पर भारत के ऐतराज को खारिज क्यों कर देता है ? पेड रक्षा विशेषग्य कर्हेंगे कि यह अन्तराष्ट्रीय कूटनीति है। पर मैं कहूँगा कि चीन की सेना इतनी ताकतवर हो चुकी है कि वह हमारे ऐतराज वगेरह सुनता भी नहीं है, और हमारे नेता भी जब ऐतराज दर्ज करवाते है तो उन्हें पता होता है कि वे एक रस्म पूरी कर रहे है !! . ——— . (4) तिब्बत : चीन ने तिब्बत में दुनिया का सबसे ऊँचे और बड़े बाँध का निर्माण कर लिया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस विशालकाय बाँध से चीन 2.5 बिलियन किलो वॉट बिजली का सालाना उत्पादन करेगा। थोड़ी बहुत बिजली तिब्बत को भी मिलेगी, बाकी चीन को जायेगी। भारत इस परियोजना पर शुरू से ही एतराज जताता आ रहा था, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर भारत की पारिस्थितिकी चीन के नियंत्रण में आ जायेगी, और चीन किसी भी समय बाँध के गेट खोलकर पूर्वोत्तर के राज्यों को जल-मग्न कर सकता है। . China operationalises biggest dam on Brahmaputra in Tibet, India worried . ——— . (5) श्रीलंका : श्रीलंका ने अपने तट का १०० हेक्टेयर का इलाका चीन को 99 साल की लिज़ पर दे दिया है। चीन वहाँ पर 1.4 बिलियन डॉलर खर्च करके अपना पोर्ट बना रहा है, और चीन ने वहाँ अपना युद्धपोत और पनडुब्बी भी तैनात की। भारत ने श्रीलंका से इस प्रोजेक्ट को नामंजूर करने को कहा तथा इसे श्रीलंका ने रोक भी दिया था। लेकिन इस प्रोजेक्ट को फिर से मंजूरी मिल गयी और काम शुरू हो गया। मोदी साहेब और अजित डोभाल साहेब ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसे श्रीलंका सरकार ने खारिज कर दिया है। . India Asked Lanka to Stop Colombo Port City Project, Says Gotabaya . ——— . (6) मालदीव भी : मालदीव ने चीन को मालदीव के टापू खरीदने और उनको विकसित करने के लिए क़ानून बनाकर अनुमति दी। अब चीन भारत और मालदीव के बीच बिखरे इन टापुओं का अधिग्रहण करके और नए टापू भी बना रहा है। इससे भारत और चीन के बीच मालदीव की उपस्थिति लुप्त हो जायेगी और चीन सीधे भारत तक बढ़ आएगा। भारत सरकार ने इस पर चिंता व्यक्त की है, किन्तु चीन और मालदीव ने भारत को "चिंता न करने" को कहा है। . Get Ready: China Could Build New Artificial Islands Near India . ——— . (7) और नेपाल भी : मधेशी नेपाल और भारत के उत्तरी राज्यों की सीमा से लगे नेपाल के तराई क्षेत्र में रहते है, तथा भारत के प्रतीकात्मक प्रतिनिधी माने जाते है। चीन ने नेपाल को चाबी दी जिसके फलस्वरूप नेपाल ने अपने नए संविधान में मधेशीयों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया, और इस वजह से भारत और नेपाल के रिश्ते बिगड़े। . विरोध प्रदर्शन की हिंसा में 50 से ज्यादा मधेशी मारे गए और नेपाल के स्थानीय गैर मधेसी समुदाय में एंटी इंडिया सेंटीमेंट्स पैदा हो गए। चीन ने नए संविधान का स्वागत किया, और चीन ने नेपाल को तेल-गैस आदि की आपूर्ति शुरू कर दी है। पहली बार चीन एवं नेपाल ने साझा युद्धाभ्यास करना शुरू किया। भारत की नाराजगी पर नेपाल के प्रधानमंत्री का कहना है कि भारत उनके निजी मामलो में टांग न अड़ाए तो बेहतर होगा !! . नेपाल को इंटरनेट सेवा अब तक भारत उपलब्ध करवाता था, किन्तु अब चीनी उस पर कब्ज़ा कर रहे है !!! . Nepal to get internet connection from China . चाइना एवं नेपाल को चीन से जोड़ने के लिए अब ट्रेन ट्रेक भी डाल रहा है। ट्रेन रूट से कनेक्ट हो जाने के बाद चीन का नियंत्रण नेपाल पर काफी बढ़ जाएगा। . China's growing footprint in Nepal: Challenges and opportunities for India | ORF . कुल मिलाकर नेपाल में चीन अपने कदम बढ़ा चुका है और जल्दी ही हम श्री लंका, मालदीव की तरह नेपाल भी चीन के हाथों गँवा देंगे !! आखिर नेपाल को भी चीन के तकनिकी उपकरण जैसे मोबाईल फोन, डीवीडी प्लेयर, हथियार आदि चाहिए। भारत तो ये सब खुद चीन से ले रहा है, तो नेपाल को भारत क्या आर्थिक लाभ दे सकेगा !! . Should Rising China-Nepal Military Ties Worry India? . ऊपर दिया गया सारा विस्तार पिछले 6-7 वर्षो के दौरान किया गया है। उपरोक्त ब्यौरों से मैं यह बिंदु स्पष्ट करना चाहता हूँ कि चीन सभी तरफ से भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, और उसने अब भारत में भी अपना सेट अप लगाना शुरू कर दिया है। . चीन हमले की स्थिति में है। हमारी सेना परजीवी होने के कारण हम चीन के इस सामरिक-आर्थिक हमले को नहीं रोक सकते। यदि हम आर्थिक रूप से रोकने की कोशिश करेंगे तो चीन सामरिक नुकसान पहुंचाकर भारत में घुसेगा। और यदि हम चीन को रोकने के लिए अमेरिका की शरण लेंगे तो अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत को पूरी तरह से निगल जायेगी !! . यदि बचना है तो सिर्फ एक रास्ता है - हमें अपनी सेना को आत्मनिर्भर बनाना होगा। इतना आत्मनिर्भर कि हम अमेरिका के सामने टिक जाएँ। वर्ना चीन से बचाने की एवज में अमेरिका हमें खा जाएगा। भारत के तमाम नेता और राजनैतिक पार्टियाँ अमेरिका के सामने पूरी तरह से समर्पण कर चुके है और वे भारत को अमेरिकी कम्पनियों के सुपुर्द करने के लिए काम कर रहे है !! . तो कार्यकर्ताओ को यह बात समझ लेनी चाहिए कि , जब भी हम चीनी उत्पादों को रोकने की कोशिस करेंगे तो हमें चीन की सेना से डील करना पड़ेगा। हम चीन की सेना से डील नहीं कर सकते और इसीलिए हमें चीनियों को भारत में घुसने की अनुमति देनी पड़ रही है। और भारत ही क्यों हमारे सभी पडौसी देशो की यही स्थिति है। चीन सभी को बलात रूप से टेक ओवर करता जा रहा है। . ———- . (8) टाइम पास समाधान : चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करो। ये समाधान बकवास इसीलिए है क्योंकि पैसा मुफ्त में नहीं आता। व्यक्ति जब कोई वस्तु खरीदता है तो वह चाहता है कि उसे कम पैसे में बेहतर वस्तु मिले। उसे आप राष्ट्रवाद का चकमा देकर घटिया एवं महंगी वस्तु खरीदने के लिए सिर्फ क्षणिक तौर पर ही प्रेरित कर सकते है। वास्तव में नहीं। . ——— . (9) वास्तविक समाधान : सेना को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाने के लिए हमें नए कानूनों की पूरी सीरिज चाहिए। किसी देश के तकनिकी उत्पादन की गुणवत्ता को तय करने वाले कई तत्व है। इन तत्वों में निम्नलिखित 5 तत्व इसे सबसे अधिक प्रभावित करते है : . (A) अदालतें (B) कर प्रणाली (C) भू प्रबंधन के क़ानून (D) जज-पुलिस-राजनेता का भ्रष्टाचार (E) गणित-विज्ञान की शिक्षा का स्तर . जजों का भ्रष्टाचार इंजीनियरिंग गुणवत्ता को सबसे ज्यादा एवं गणित-विज्ञान की शिक्षा का स्तर सबसे कम प्रभावित करता है। भारत के सभी सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार है, किन्तु भारत के जज तुलनात्मक रूप से सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। और इसीलिए भारत तकनिकी उत्पादन में पिछड़ गया है। इनमे से दो तत्वों के बारे में विवरण एवं समाधान मैंने अन्य जवाबो में लिखा है। शेष 3 तत्वों पर मैं फिर किसी जवाब में लिखूंगा। . =========

Megha

એક સ્ત્રી છું… હું પવન જેવી મુક્ત છું, પણ સમાજે બાંધી છે રેખાઓમાં, હું સપનાઓની માલિક છું, પણ ક્યારેક અટકું છું પરંપરાઓમાં. હું નદી જેવી વહેતી, ક્યારેક શાંત, ક્યારેક ઉગ્ર, હું પ્રેમનો દરિયો છું, પણ દિલમાં રાખું છું ઘણું જ સંગ્રહ. હું માતા, બહેન, દીકરી, મિત્ર, દરેક રૂપમાં હું જીવતી, હું તૂટું પણ ફરી ઊભી થાઉં, મારી અંદર શક્તિ અનંત વસતી. હું એક સ્ત્રી છું— નબળી નહીં, સંવેદનશીલ છું, હું સૃષ્ટિનું સર્જન છું, અને મારા અસ્તિત્વમાં જ શક્તિનું બળ છે.

Raju kumar Chaudhary

अप्सराहरुको गाथा नमस्कार सरस्वती मातालाई, शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई। स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल, अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल। इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो, अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो। त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी, प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी। रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी, तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला। मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला, उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला। इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा, तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना। "अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप," भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।" जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन, तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने। मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर, वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर। उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात, आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात। विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्, तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्। दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्, मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर। "प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर," भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।" फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्, "भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।" रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा, नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा। विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ, "तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!" रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा, तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना। उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा, पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्। सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने, तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय। उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्, "प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।" अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ, सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ। अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि, तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ, प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा, यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्! अप्सराहरुको गाथा (महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा) नमस्कार सरस्वती मातालाई, शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई। स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल, अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल। इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो, अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो। त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी, प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी। रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी, तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला। मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला, उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला। इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा, तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना। "अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप," भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।" जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन, तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने। मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर, वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर। उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात, आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात। विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्, तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्। दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्, मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर। "प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर," भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।" फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्, "भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।" रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा, नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा। विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ, "तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!" रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा, तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना। उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा, पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्। सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने, तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय। उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्, "प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।" अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ, सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ। मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्, जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए। प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्, हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि। दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्, शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्। गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ, अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।" तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्, शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्। आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्, विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ। शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्, सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ। दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्, भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्। अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार, दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर। मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ, भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ। अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ, परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ। मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा, मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ। रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले, ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा। उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्, तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ। अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा, तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग। "प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ," यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ। स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल, अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ। सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्, नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्। घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती, सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं। समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी, इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्। उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर, आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल। रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्, सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा। इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची," तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ। ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्, घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ। गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन, तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने। घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा, वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए। उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्, तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता। द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु, घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो। "म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर, "सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।" तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा, देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद। कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा, सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया। तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए, "तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए। छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए, तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो। पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए, कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने। घृताचीको गाथा यस्तै छ, सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ। श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ, अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो। घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि, तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्। मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा, प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ

Sapna

Good morning everyone 🌄 Just wanted to let u know that the 2nd part of my story is out now🥳 so go and read it.. I am so sure that u'll really love it so do read it🧿😊 And yes pls write ur reviews and give ratings so that I can understand whether u guys are really enjoying it or not..😊

SAYRI K I N G

लगता हैं अब हम वही मिलेंगे जहां मौत की कब्र होगी आखिरी मुलाकात आखिरी दफा तुझे देखेंगे सो जाऊंगा मौत की चादर ओड के उस आखिरी मुलाकात में भी

Imaran

तेरी आँखों में जो खामोशी है, वो दिल को छू जाती है, तेरी हर मुस्कान मेरे दिल को सुकून दे जाती है, हर पल तुझे सोचकर दिल खिल उठता है, तू मिले तो जिंदगी भी हसीन लग जाती है 🫶imran 🫶

Neha kariyaal

हृदय को अक्सर वही बात पीड़ा पहुंचती है,, जिन बातों को हम भूलना चाहते हैं।।

Narayan Mahor

कच्चा घर कच्चा घर था, छोटा सा, पर अपना-सा, सच्चा सा। दीवारों में प्यार बसा, माँ का आँचल, छाया-सा। छत टपकी बरसातों में, हँसते थे हम रातों में, बर्तन रख-रख भूल गए, दुख क्या है उन बातों में। टूटा-फूटा, साधारण था, फिर भी सबसे न्यारा था, कच्चा घर वो मिट्टी का, दिल से बहुत हमारा था… 🌧️

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