Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
saheb

প্রথম প্রেম অন্ধ আমি, এই শহরে তোমায় খুঁজতে চাই, বোবা ফোনের পাশে বসে প্রেমের গান শোনাই... তুমি খোঁজো রোজ সকালে চেনা কুয়াশার ভোরে , আমি কেবলা হারিয়ে যাই রাতের শেষ প্রহরে.... হঠাৎ যদি পার্কের সেই ফাঁকা বেঞ্চ আসে মনে, নীরবে তুমি পাঠিও চিঠি উত্তর দেবো গোপনে... শূন্য আমি মরছি দেখ শুধু তোমার অভাবে, ফিরবে না আর এই শহরে প্রথম প্রেমের স্বভাবে।।

Raju kumar Chaudhary

RAJU EBOOK में आपका स्वागत है 📚 यह चैनल उन लोगों के लिए बनाया गया है जो Ebooks, Digital Knowledge और Online Learning से अपनी जिंदगी बदलना चाहते हैं। यहाँ आपको मिलेंगे: 📘 Powerful Ebooks 💡 Knowledge & Self-Improvement 💰 Online Income Ideas 📖 Life Changing Books Summary 🚀 Digital Learning Tips हमारा उद्देश्य है लोगों तक सस्ती और उपयोगी डिजिटल किताबें पहुँचाना ताकि हर व्यक्ति सीख सके और आगे बढ़ सके। अगर आप नई-नई ईबुक, ज्ञान और सफलता के रास्ते जानना चाहते हैं, तो अभी चैनल को Subscribe करें। 📩 Business / Ebook Purchase: rajuebook99@gmail.com

Raju kumar Chaudhary

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Meeta

મુલાકાતની એ પળોમાં સમય શાંત થઈ ગયો, તારી આંખોમાં જોઈ હ્રદય થોડું ગૂંચવાઈ ગયુ શબ્દો તો હોઠ સુધી આવીને અટકી ગયા, અને મૌનમાં જ લાગણી ના અનેક અર્થ સમાઈ ગયા. એ એક મુલાકાત આજે પણ યાદ રહી ગઈ, થોડી ખુશી અને થોડો ખાલીપો આપી ગઈ. આંખો મળ્યાં છતાં કંઈક અધૂરું રહી ગયું, કદાચ પ્રેમ હતો … જે નિશબ્દ કહી ગયું.... ❤️❤️ Meeta

Ajit

દર્દનો દરિયો ભીતર ભલે હોય, તમને હંમેશા સુખની નાવના મુસાફર બનાવ્યા છે.

Ajit

દર્દનો દરિયો ભીતર ભલે હોય, તમને હંમેશા સુખની નાવના મુસાફર બનાવ્યા છે.

A singh

सिंगल रहना भी एक कला है, हर किसी के बस की बात नहीं, हम तो सिंगल समाज के सदस्य हैं, दिल देते हैं पर हर किसी को नहीं। 😄

M K

सोचा आज किसी सोच में डूब जाऊं, अपनी खामोशी पर कुछ पंक्तियां लिख जाऊं... करूंगी क्या अच्छाइयों का चादर ओढ़ कर मिट्टी में मिलने के बाद सबको भूल जाऊंगी... किरदार मेरा झूठा नहीं था, बस दिखावे से दूर रहने दिया मालूम चला चंद लम्हों में ही, गुनाहगार के करीब ही खड़ी थी... बस अब कोई मुझे आवाज न दे... मैं जैसी भी हूं,आइने की जैसी हूं... - M K

Gauri Katiyar

माता पिता का प्यार वो दौलत है जिसे जितना खर्च किया जाए वो कम है

A singh

अकेले चलना सीख लिया है हमने, अब किसी के साथ की आदत नहीं, जो दिल तोड़ कर चले गए, उनसे अब कोई शिकायत नहीं।

M K

एक दिन कलम चलेगी किसी के यादों पर पर मैं नाम लिखना भूल जाऊंगी मशरूफ रहने का झूठा दिखावा करते हो तुम फिर क्यों मैं ही सिर्फ अपना वादा निभाऊंगी...?? - M K

Anshika rai Nagvanshi

Dear Best friend "The light of your beauty flows through my unseen flame, Its fragrance holds me to the whispers of my hidden name. Your warmth breaks the stone of my pride, The sound of your lips calms the storm inside me. Your embrace hugs miles of waves that smile upon my soul, Your hands spark flames that dispel the inner darkness. The paths of your walk transform my karma into vast oceans, Your shadow becomes the eternal shield of my soul. You are the dimension of my spirit, Without your tune, I lose my sign. This is the tale of my soul, Jisme tu hi bashta hai."

वात्सल्य

दूर जाते वक़्त एकबार मुड़कर देखा होता तो महसूस होता ll आप यें घर,सोसायटी छोड़कर ज़ा बसे कोई बात नहीं है ll हमें पता है कि नई दुनिया बसाने की कसरतमे हम याद नहीं आएंगे ll आप सुखी राहो,हमें भूल जाओ कोई बात नहीं,हम याद करेँगे ll । - वात्सल्य

Ajit

મિઝાઝ થી મહોબ્બત નથી કરાતી, મન ફાવે તેમ પણ નથી કરાતી.... મહોબ્બત એક જવાબદારી છે એને કરી છે તો દિલથી નિભાવાતી.... જિંદગી ની "યાદ"

A singh

हमने तो बस सच्चा प्यार किया था, कोई सौदा नहीं किया था दिल का। पर उसने हमें ऐसे छोड़ दिया, जैसे कोई रिश्ता ही नहीं था कल का। _ A Singh

Riddhi Gori

તારા માટે તો શબ્દો ઘણાય છે, પણ બધા વચ્ચે હું ના મૂકી શકું; તારે મારી ભીતર આવવું પડે, જ્યાં ત્યાં ચીનગારી હું ના મૂકી શકું..!! - Riddhi Gori💙🤍

રોનક જોષી. રાહગીર

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid02uaLGbQdqbjqYSYk8G2xQsiCdAzqmm5cHuoBHqRWXS8UX5W2bGQhCw6VoZrbaVKA6l&id=100064986180022&mibextid=ZbWKwL

Riddhi Gori

ગમ્યું એ બધું મૃગજળ થઇ ગયું, બાકી હતું એ વાદળ થઇ ગયું… આંખોથી લખતો રહ્યો રાત આખી, સુરજ ઉગતા એ બધું ઝાકળ થઈ ગયું…!! - Riddhi Gori💙🤍

Riddhi Gori

આજ મન ના માળિયે ખાંખાખોળીયા કર્યા, સુકાયેલા બે આંસું ફરી ઝળઝળીયા મળ્યા... તૂટેલા અરમાન સાચવી ને ફરી ભેગા કર્યા, ત્યાં ફાટેલી જીંદગી ના ફર ફરીયા મળ્યા... - Riddhi Gori💙🤍

SAYRI K I N G

अब देख के जी घबराता है सावन की सुहानी रातों को पिया छोड़ गए दिल तोड़ गए अब आग लगे बरसातों को ऐ जान-ए-मोहब्बत जान-ए-ग़ज़ल आओ तो तुम्हारी नज्र करें आँखों में सजाए बैठे हैं हम प्यार भरी सौगातों को यूँ प्यार की क़स्में खा खा कर क्यूँ झूटी तसल्ली देते हो बस रहने दो हम जान गए सरकार तुम्हारी बातों को मसला हुआ आँचल शानों पर ये जुल्फ़ की लट उलझी उलझी आँखों की खुमारी कहती है रहते हो कहीं तुम रातों को जुल्फ़ों को हवा में लहराना हँस हँस के तुम्हारा बल खाना अंदाज़ हैं सब दिल लेने के हम जान गए इन बातों को बे-दर्द हसीनों की ख़ातिर क्यूँ होते हो बदनाम 'फ़ना' सफ़्फ़ाक सितम-गर क्या समझें हम दिल वालों की बातों को

SAYRI K I N G

अकेले रहना शुरू किया तो पता चला कि दुःख” की असली वजह तो लोग ही थे

Dhamodar Dhamod

నీడల మధ్య వెలుగు జీవితం అనే మార్గం… ఎప్పుడూ పూలతోనే నిండదు, కొన్ని సార్లు ముల్లులే ఎక్కువగా ఉంటాయి. కానీ ఆశ అనే చిన్న దీపం మన హృదయంలో వెలిగితే చీకటి ఎంత గాఢంగా ఉన్నా దారి కనిపిస్తుంది. ఓటమి అనే మబ్బులు మన ఆకాశాన్ని కమ్మినా, మనసు లోపల ఉన్న ధైర్యం వానగా కురిసి వాటిని తొలగిస్తుంది. మనిషి పడిపోవడం తప్పు కాదు, లేచి నిలబడకపోవడమే నిజమైన ఓటమి. ప్రతి గాయం ఒక పాఠం, ప్రతి కన్నీటి బిందువు ఒక వెలుగు రేఖ, గుండెల్లో గాయం చేసే ప్రతి నొప్పి మనకు చెప్పేది ఒక్కటే “ఆగకు ఇంకా ముందుకు నడువు” అని. ఎందుకంటే… నీడ ఎంత పొడవుగా ఉన్నా దాని వెనుక ఎక్కడో ఒక చోట వెలుగు తప్పకుండా ఉంటుంది అని.

Paagla

कई बार तुम्हें मजबूत बनने के लिए ऐसा फैसला भी लेना पड़ सकता है, जिसमें तुम्हारे अपने लोग तुम्हारे साथ नहीं होंगे

Mamta Trivedi

कविता का शीर्षक है 🌹सुविचार https://youtube.com/shorts/vDIhagkTF1E?si=p1u2qkH8HlmgTQKE

kattupaya s

Goodnight friends.. sleep well

kattupaya s

when your first love blossom on 35.hariharan singer

kattupaya s

At the moment I thank my followers and supporters for being patience with my writing. without your support iam nothing. Thanks onceagain

kattupaya s

swarnalatha the ace singer..

kattupaya s

Notifications vanishing in matrubharti. is it real Or surreal

kattupaya s

Sunday is literally over..you are not alone in this. don't feel emptiness

kattupaya s

someone is reading my story today with punctuation marks.. unfortunately iam so poor on it

kattupaya s

She is waiting for her dream boyfriend it's just a dream 😴💭

Imaran

पूरी तरह से आज दिल टूट गया मेरा, हमसफ़र मुझसे जब रूठ गया मेरा, गम के बादल यु छाए हुए थे, आँखों से हुई बारिश सब डूब गया मेरा 💔imran 💔

kattupaya s

Any change in matrubharti? Suddenly my story views high

kattupaya s

people hate you for no reason yes it is you are perfect in ur duties

kattupaya s

when you are in love it shows.. just like that u miss your mom suddenly

kattupaya s

when you feel u r waiting too long for the right person .. it's true you become old

kattupaya s

you are my lpg and that's my soul.right now my condition.

kattupaya s

The day you came back to me the day I reborn. but you offered death quotes of my life.

SAYRI K I N G

आज कल की लड़किया पैसा देख कर प्यार करती है

GIRLy Quotes

https://www.instagram.com/reel/DVnEXGtkhoB/?igsh=MWRlcmhqZDgyczJvaA==

Shefali

#shabdone_sarname__

Avinash

🫶🏻❤️

kattupaya s

Good evening friends.. have nice time

Dhamak

रणनी रेती ओढी बेठी, जळनुं नकली रूप, तरस्यूं हरणुं दोडतुं रहेतुं, तडकानो छे धूप। मृगजळनी ए मरीचिका, कोईने क्यां मारे छे? ए तो बस आशा आपीने, रणमां रझळावे छे। ​हाथथी छूटेला हरणांने, हइये अनेक धारणा, खोटा भ्रमनी जाळ बनी छे, जीवतरनी वरणा। धारणाओ ज्यारे तूटे, त्यारे आपत्ति लागे छे, झांझवाना आ खेलमां, मन क्यां साचुं जागे छे? ​नथी एमं कईं झेर, नथी एमं कोई प्यास, बस, हैयाने भटकवावा, रचे छे मीठो भास। DHAMAK

ASHISH KUMAR

"Baatein toh sabhi karte hain, Par tumhara khamosh rehna bhi ek dastaan hai."

ASHISH KUMAR

​"Humari shaksiyat ka andaza tum kya lagaoge, Hum toh unke bhi khwabon mein aate hain, jo humse baat tak nahi karte."

ASHISH KUMAR

"Tere chehre mein wo kashish hai, ki har koi fida ho jaye, Agar dekh le tu ek baar muskurakar, toh qayamat aa jaye."

Soni shakya

इश्क का दर्द भी क्या अजीब होता है.. रोते हैं हम और कसूर भी हमारा ही होता है.. - Soni shakya

Rahul Raaj

जरूरी नहीं कि जो इंसान अच्छा दिखता हो अच्छा बोलता हो अच्छा लिखता हो या अच्छे परिवार से हो... वो इंसान सच में अच्छा या सच्चा हो.. यहां सब अपने मतलब के लिए है.. कुछ लोग सहानुभूति पाने के लिए खुद को निराश दुखी दिखते है.. पर ज़िंदगी का हर तरह अच्छा बुरा वाला मजा ले रहे होते है.. कितनी ढोंगी लोग है

Bhavna Bhatt

મોજમાં રેવું સદાય

Avinash

🤌❤️🙏

Falguni Dost

કેટલા ઘાવ જે ભીતરે સાવ નામશેષ ધરબી દીધા હોય એ ઘાવ અમુક સંજોગોમાં સફાળા જાગી સર્પદંશની જેમ ડંખે છે. અને એ ફરી નામશેષ સમય જતા થઈ જાય છે, માત્ર ધીરજ એ એક જ વિકલ્પ છે. - ફાલ્ગુની દોસ્ત જય શ્રી રાધેકૃષ્ણ🙏🏻

Saroj Prajapati

मेरे चेहरे पर सजी मुस्कुराहट वो अभेद्य दरवाजा है जो लोगों को मेरे दुख दर्द तक पहुंचने ही नहीं देती। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Mrugzal

દુનિયાના દરવાજે રોજ સૌ મળે છે, તોય હૃદયમાં તો એક તું જ ભળે છે. #Mrugzal #TeaLover #EmptyHeart

SAYRI K I N G

में खुद को आग लगा लूंगा लेकिन किसी से मोहब्बत नहीं करूंगा

Riddhi Gori

તને પૂછું ને... તો વાત શરૂ થાય... રહેવા દે... વાત જ ના થાય, એ જ બરાબર છે. હું કહું મળીએ ને... મિલન થાય... પણ રહેવા દે... એ મિલન કરતાં ઇંતજાર જ બરાબર છે. હું માંગુ ને તું આપે, એમાં પણ સુખ તો છે... પણ છોડ... તું ના આપ, કારણ કે માગેલું સુખ ક્યાં વધારે ટકે છે? હું કહું કે હું દુઃખી છું... અને તું થોડી વાર તો સંભાળે... પણ રહેવા દે... એ ક્ષણભર સંભાળવા કરતાં આ દુઃખ જ બરાબર છે… હું બતાવું ભૂલ, ને તું માફી માંગે સાચું છે... પણ રહેવા દે ને... તને ક્યાં એ ભૂલનો અહેસાસ છે? હા, હક છે દરેક વસ્તુ કહેવાનો સંબંધમાં... પણ રહેવા દે... દર વખત હું જ કહું, એ પણ ક્યાં બરાબર છે? હું વારંવાર નમું છું, કારણ કે મને પ્રેમ છે... પણ તું રહેવા દે... શાયદ તને ક્યાં કંઈ એવું છે. તું છોડ ને તારી વાત... મને મારી કહેવા દે. તારા થી નહીં થાય કશું... તું રહેવા દે... એના કરતાં આ એકતરફી પ્રેમ જ સારો હું કરું છું... મને કરવા દે. તું રહેવા દે... બસ ... તું રહેવા દે. -Riddhi Gori 💙🤍

Riddhi Gori

मैं दुखी रहूँ, तो पास मत आया करो। मेरे आँसुओं का भार तुम पर अच्छा नहीं लगता ! मैं बस अपनी मुस्कानों का उजाला तुमसे बाँटना चाहती हूँ…!! - Riddhi Gori💙🤍

Ruchi Dixit

उस शब्द उस भावना उस अभिव्यक्ति का उसी प्रकार कोई मोल नहीं रह जाता जैसे बारिश के पानी का हर जगह एक समान बरसने पर....- Ruchi Dixit

Ruchi Dixit

किसी के पास विकल्प है किसी को विकल्प की तलाश है किसी को केवल चलते रहना है..... - Ruchi Dixit

Anup Gajare

"ईर्ष्या" ____________________________________________________ पागल होते दिनों में रात के कंबल ओढ़कर सुनाता रहता हु कठिन हत्याओ के गीत। जिसने रंगों में भर दिया रक्तिम नदी को उसके भीतर भी कुछ नहीं होगा उसके ऊपर गुरुत्वाकर्षण के बीज बोने के बाद खनिज तेल निकालते हुए कितनी चींटियां मारी गई। हर हादसे के पीछे खामोश यकीन ही नई शिकायत बनी रही। पेड़ो को काटने के बाद उसने मिट्टी से भरे हाथ लाल नदी में धोये थे। कई पीड़ाएं अंत में पीड़ित को नहीं छोड़ती परछाई हमेशा जिंदा रहती है किसी के बिच बहुत कुछ नहीं होता जब टूटे संसार के बादल बरसने लगते है लाल वर्षा। ऋतु में कोई नहीं छोड़ता अपने पैरों के निशान हर एक अखबार में फैली हैं कितनी करुण हत्याएं। हे बाप युद्ध शुरू है अपने गरीब बेटे भेज देना सरहद पर ताकी कोई सरहद न बचे। वातानुकूल परिस्थिति में ही युद्ध के अहम फैसले लिए जाते रहे क्यों किसी झोपडी में ये तय नहीं हुआ कि, अमीर के बेटे लड़ेंगे युद्ध की त्रासदियों को। वे तमाम कातिल भीतर भी निर्माण करते रहे उन्हीं फसलों को जिसके परिणाम ऊपरी सतह पर ही दिखाई दिए हमेशा। रेखा कभी सीधी खींची न जा सकी गोल बनना ही तकदीर रही हर अनंत की। गुलाब हमेशा उनके गार्डन में ही सुगंध देते रहे जिन्हें खून की गंध मालूम ही न थी। कितनी सीढ़ियां चढ़ने के बाद उसने खींचा पड़दा रंगभूमि की हत्या सबसे बड़ी कविता थी। उन दिनों भीतर बैठे शैतान से बातचीत की सुलह करता रहा उसने कहा पहले समझना होगा मुश्किल को मुश्किल से ही हल किया जा सकता है। कुदरत की पहली हत्या कब हुई थी? क्या मालूम पहला गुनहगार कौन था। जिसने भीतर के झुंड को कभी शांत न होने दिया शायद पत्थर के नुकीले कोणों से ही पहल हुई होगी। फिर इंसान के शमशान में हर एक मंत्र के बीच की अधूरी जगह में न जाने कितने प्राण भर गए होगे। थके हुए पशु ने समझा होगा कि, आलस्य समय की हत्या है— घड़ी चलती रहती है पर मनुष्य अपने ही दिनों को कुर्सियों पर सुला देता है। लालच भोजन की हत्या है— थाली में बचा हुआ अन्न कभी-कभी भूख से ज्यादा मनुष्य की भूख को दिखाता है। क्रोध शांति की हत्या है— एक क्षण का ज्वालामुखी सालों की ठंडी झील को उबाल देता है। पर ईर्ष्या… ईर्ष्या सबसे धीमी हत्या है। यह समय को नहीं मारती, अन्न को नहीं मारती, न ही शांति को ही। यह मनुष्य को मनुष्य से अलग कर देती है। दोस्त की हँसी में कांटा उगा देती है, और किसी की सफलता को जहर बना देती है। ईर्ष्या में कोई तलवार नहीं होती— फिर भी सबसे ज्यादा खून इसी में बहता है। क्योंकि ईर्ष्या दूसरे मनुष्य को नहीं पहले हमारे भीतर के मनुष्य को मारती है। ईर्ष्या ही जननी रही हो उस पहली पंक्ति की जिसे किसी किताब के पन्ने में मनुष्य हत्या के रूप में अबतक दर्ज न करवा सका हो। ____________________________________________________

Kaushik Dave

सपनों में हर रात कोई कहानी निकलती है, दिल की फ़ाइलों से दबी ज़िंदगानी निकलती है। ख़्वाबों की बारिश में भीगते हैं यादों के पल, सूखी सी आँखों से फिर रवानी निकलती है। कुछ समझ न आया था उन अधूरे लम्हों का, सोचते हैं तो कोई निशानी निकलती है। फ़ाइल में दबे रहे कई अरमान बरसों तक, खोली जो यादें तो एक कहानी निकलती है। अधूरी सी लगती थी जो सपनों की राह कभी, चलते चलो तो वही ज़िंदगानी निकलती है। कौशिक दिल के काग़ज़ पर लिखता रहा ख्वाबों को, तभी तो हर शेर में एक कहानी निकलती है।

kattupaya s

In our town many hotels were closed. I don't know when things will get normal. hospital canteens also suffering.

kattupaya s

Take care your valuable things. it's on demand..

kattupaya s

Hungry over the cylinder issue cannot be tolerated. but in petrol bunks and gas filling stations people try to get those things deparately. this is not a good sign for Modiji's government

kattupaya s

politics in cylinder issue already@peak.delivery boys taking some rest. people will understand the value of essentials

kattupaya s

hotel food cost may increased.. for a budget family it's not affordable. In cities it is too difficult.

kattupaya s

iam not worried about stand in queue for tea. but elders suffer a lot for the same

kattupaya s

Tea pricing varies from 10rs to 20rs due to cylinder issue. Tea lovers suffer a lot by this

kattupaya s

today morning I stand in a queue for tea in Tea shop. but he collected regular fate of tea. Thanks to that tea shop.owner

kattupaya s

All the good things must come to end. this philosophy not qpplicable to gas cylinder. just thinking over lunch..

Narayan

छू गया जब कभी.. ख्याल तेरा, दिल मेरा... देर तक धड़कता रहा!! कल तेरा जिक्र छिड़ गया घर में, और घर देर तक महकता रहा!! 🍁🍂🌹 - नारायण

Mare Do Alfaz

किन-ख्यालों-में-गुम-हो मेरी-नजर-से-देखो, हर-तरफ-तुम-ही-तुम-हो फिज़ाओं-में-महक़ी-है, तुम्हारी---खुशबू, हर-साँस-में-ज़िन्दगी-तुम-हो मेरे दो अल्फ़ाज़,

M K

MB मतलब मातृभारती ___ यहां झूठ इतना बोला जाता जिसकी कोई हद और न हिसाब है। लोग खुद को यहां क्या क्या बताते हैं...?? ias, ips जैसे free में बंट रहे पोस्ट है और उनको मिल गई हो बड़ी शान से बताते हैं अरे बाबा झूठ बोलने का एक सीमा तय करे, सभी यहां बेवकूफ तो होते नहीं है। उनकी बातों से ही झूठ का पता चलता है। खुद को संभालो जरा ... तुम्हारा झूठ उपहास का कारण न बन जाए । _M K

Shailesh Joshi

ચારેબાજુથી ભરાઈ જવાવાળી પરિસ્થિતિ તો એ લોકોને જ મળે છે, જે જિંદગીના મેદાનની વચ્ચોવચ રહીને જીવનના બધાજ પડકારો સામે લડે છે, પછી ભલે એમાં એ હારે કે જીતે, બાકી કિનારે કિનારે ચાલીને તો ક્યાં કોઈ જીંદગી પૂર્ણ પણે ખીલે છે ? - Shailesh Joshi

Nirali patel

Hard work beats talent when talent doesn’t work hard.

archana

इतिहास उठाकर देख लो— जितने भी महान लेखक, ज्ञानी, साधु-संत, ऋषि-मुनि, वीर योद्धा और राजा-महाराजा हुए हैं, सबने अपने जीवन में संघर्ष सहा है। उन्होंने समाज के लिए काम किया, आजादी के लिए लड़े, शिक्षा और ज्ञान के लिए अपना जीवन लगा दिया। लेकिन जब वे यह सब कर रहे थे, तब समाज ने उनका साथ कम दिया… उन पर आरोप लगाए, उनका मज़ाक उड़ाया, यहाँ तक कि कई बार पत्थर भी मारे। पर उन्होंने लोगों की बातों की चिंता नहीं की, वे अपने रास्ते पर चलते रहे। समय बीता… और वही लोग बाद में महान कहलाए, उनका नाम इतिहास में अमर हो गया। सच यही है— समाज अक्सर किसी को आगे बढ़ते देख पहले उसे गिराने की कोशिश करता है। आप चाहे कितने भी सकारात्मक क्यों न हों, कुछ लोग आपको गलत ही समझेंगे। संघर्ष में साथ देने के बजाय वे आलोचना और पत्थर ही बरसाएंगे। लेकिन यही दुनिया का नियम है— जो पत्थरों से डर गया, वह रास्ता नहीं बना पाया। और जिसने पत्थरों को सह लिया, वही इतिहास बना गया।

A singh

**आधी रात की खामोशी में अक्सर तेरी याद आ जाती है, जिसे अपना समझकर दिल दिया था आज वही सबसे ज्यादा रुला जाती है। तू तो शायद सुकून से सो जाता होगा, पर मेरी रातें आज भी तेरी यादों में कट जाती हैं… 💔** — A Singh

KRUNAL

​માત્ર ચાર દિવાલોનો સમન્વય એટલે ઘર નથી, ઈંટો વચ્ચે વહેતો અવિરત પ્રેમ એટલે ઘર. ​જ્યાં ઉંબરો ઓળંગતા જ બધો થાક ઓગળી જાય, ને મમ્મીના હાથની રસોઈમાં આખું જગત ભુલાઈ જાય. ​મોટા મકાનોમાં ભલે કાચના આયના લાગેલા હોય, પણ જ્યાં દાદાની વાતોમાં સંસ્કાર દેખાય, એ ઘર. ​પપ્પાની એ શિસ્તમાં છુપાયેલી વહાલની હેલી, ને ભાઈ-બહેનના ઝઘડામાં વસેલી દુનિયા આખેઆખી. ​ગમે તેટલા આલીશાન હોટલના ગાદલા કેમ ન હોય, પણ જે ખૂણે નિરાંતની ઊંઘ આવે, સાચું સુખ એટલે ઘર.

Saliil Upadhyay

सन्डे लाफ्टर  सुबह पत्नी चाय नाश्ता पूछने आई, तो मैंने कहा बना दो। फिर रुक कर पूछने लगी जी ये मोदी एक दिन मे 3 देश कैसे घूम सकते है?..! मैंने कहा:- अगर साथ में बीवी न हो तो आदमी एक दिन में मॉस्को, काबुल और लाहौर घूमते हुए दिल्ली आ सकता है.. !! वरना D Mart मे ही शाम हो जाती है। बस उसके बाद ना चाय आई ना नाश्ता...! पर आप हंसते हुए अच्छे लगते हैं तो हंसते रहो और मस्त रहो 🤣

Kaushik Dave

-कौशिक - Kaushik Dave

Ruchi Dixit

हृदय जिसे चुनता है वह आखिरी पड़ाव होता है भटकाव तो तलाश और विकल्प में है.. - Ruchi Dixit

वात्सल्य

*તમારી તસવીરમાં એવું શું છે,જે નીરખી મારી નયનો નાચે છે. હરખઘેલી થઇ થઇ એ રૂબરૂ જોવા તરસે છે. આ તો ખેલ છે,તમારી નયનો જોવાનો, હકીકત કાંઈક અલગ જ છે, ચિત્તને ચારેકોર્યથી ચોકી ગોઠવી છતાં બે નયનમાં તમારી છબી તગતગે છે.* - વાત્સલ્ય

Ruchi Dixit

प्रेम में बद्दुआ होती ही नहीं यह प्रेम जानता है ... - Ruchi Dixit

Jigar

રૂપ તારું સોહામણું, નામ તારું પ્યારું, જાનકી, તેજ તારું સૌના મન હરનારું. સીતા જેવું સરળ મન, ભક્તિ તારી સાચી, દુઃખમાં પણ તું હસતી રહે, હિંમત તારી ગાજી. મિત્રતા તારી નિરંતર, સ્નેહ તારો અપાર, જાનકી, તું છે સંસારમાં સુખનો સાગર. અથાગ સમુદ્ર ની ચંચળતા છે તારા માં તું છે નવી દિશા ને નવી ઉડાન તારા માં છે ધારા ના સપના ને તું છે એની એક પડછાયો નિરંતર તું એની સાથે છે એ તારી છે એક નવી દિશા શબ્દો ની વણઝાર વાની કરે ફરિયાદ સ્નેહ તારો એને મળે અપરંપાર..... તું છે નવી દિશા ને નવી ઉડાન .......જાનકી........... પ્રસ્તુતિ by "જીગર" - Jigar

Jigar

રૂપ તારું સોહામણું, નામ તારું પ્યારું, જાનકી, તેજ તારું સૌના મન હરનારું. સીતા જેવું સરળ મન, ભક્તિ તારી સાચી, દુઃખમાં પણ તું હસતી રહે, હિંમત તારી ગાજી. મિત્રતા તારી નિરંતર, સ્નેહ તારો અપાર, જાનકી, તું છે સંસારમાં સુખનો સાગર. અથાગ સમુદ્ર ની ચંચળતા છે તારા માં તું છે નવી દિશા ને નવી ઉડાન તારા માં છે ધારા ના સપના ને તું છે એની એક પડછાયો નિરંતર તું એની સાથે છે એ તારી છે એક નવી દિશા શબ્દો ની વણઝાર વાની કરે ફરિયાદ સ્નેહ તારો એને મળે અપરંપાર..... તું છે નવી દિશા ને નવી ઉડાન .......જાનકી........... પ્રસ્તુતિ by "જીગર" - Jigar

usman shaikh Malali

Disposable Relationships Intro: There was a time when love was like handmade paper—rough, imperfect, but made to last a lifetime. Promises were etched with ink that never faded. Today, relationships often feel like paper cups—used for a quick sip of warmth, then tossed aside without a second thought. We have entered an era of swipe-and-forget, where hearts are rented, not owned. This ghazal explores that fragile space between what love was meant to be and what it has become. The Ghazal Like plastic cups we use and toss, these bonds we make today, A heart is just a passing cost, in games we play today. You said "forever" on the phone, your voice so warm and true, But "forever" now is just a gloss, a word we say today. 3 We met, we clicked, we shared a dream, then drifted like the foam, A story started, then was lost, a brief display today. The loyalty of ancient looms, where threads were woven tight, Is traded for quick3e-text embossed, that fades to gray today. I carved your name upon my heart, you wrote mine in the sand, A rising tide, a tempest tossed, and washed away today. No letters tied with ribbon kept, no photographs in frames, Just screenshots on a phone that's tossed, at the end of the day today. We seek a love that's perfect, pre-packaged, and brand new, But real love has a different cost, a price we pay today. If hearts are just for renting, then no one owns the pain, And loneliness is what we've gained, in the price we pay today. Reflection: We live in a world of instant gratification. If a relationship requires work, we abandon it. If a conversation becomes difficult, we block the person. If the spark fades, we look for the next match. We treat people like products—evaluating, using, and discarding them when a newer model appears. But love was never meant to be disposable. The deepest connections are not found in perfection but in perseverance. They are built in the silence after an argument, in the choice to stay when leaving is easier, in the commitment to water the same plant every day rather than always looking for a new flower. Technology has given us endless options, but options are not connections. Every time we dispose of a relationship without trying to fix it, we dispose of a piece of our own capacity to love. Real love is not a paper cup to be thrown away after one use. It is a tree that grows slowly, survives storms, and provides shade for generations. The question is not whether we can find someone new. The question is whether we can find the courage to stay with someone old—to see their flaws and choose them anyway. In a world that throws everything away, the most radical act is to hold on. DisposableRelationships #ModernLove #Ghazal #EnglishGhazal #Poetry #RelationshipGoals #LoveAndLoss #Commitment #Heartbreak #SwipeCulture #RealLove #EmotionalHealth #MatrubhartiPoetry #DeepFeelings #LoveWisdom#usmanwrites#usmanshaikh

usman shaikh Malali

Love in the Time of Screens Intro: We live in an age where a heart is tapped, not touched. Love is declared with a meme and mourned with a "seen" but no reply. This is a story of digital emotions, where the distance between two hearts is measured in the lag of an internet connection, and the silence is louder than any notification. The Ghazal The silence of a single blue tick, a story never told, My eager heart, a captive, in a story never told. I type out a thousand feelings, then delete them one by one, Afraid of the cold truth in a story never told. Your profile picture glows at night, a ghost upon my screen, A phantom pain, a hollow gleam, a story never told. The "online" flicker mocks me, then vanishes in haste, A fleeting, cruel, and broken gleam, a story never told. I sent a string of heart-eyes, you left me on "delivered," Is love just a forgotten theme? A story never told? These emojis are our alphabet, this screen our only world, A fragile, virtual regime, a story never told. We share a million sunsets through a filtered, glossy pane, But share no single sunbeam, a story never told. My phone is warm against my ear, a poor substitute for you, A low-charge battery's final scream, a story never told. .Love in the Time of Screens A blue tick mocks, a story never told, My heart awaits a warmth that feels like cold. I send a heart, you leave me on "delivered," A phantom pain I silently behold. We share filtered sunsets, pane by pane, But share no single sunbeam to hold. Reflection: Technology promised to bring us closer, to erase the distances of miles and time zones. And in many ways, it has. We can witness a loved one's laugh through a video call, share a moment with a photo, and say "good morning" the second we wake up. We are more connected than ever before. But this connectivity is a paradox. We trade a coffee date for a comment, a heartfelt conversation for a flurry of instant messages. We curate perfect versions of ourselves online, but hide our messy, real emotions behind a screen. The same blue tick that confirms a message was read can also confirm a silence was chosen. The "seen" notification becomes a weapon, and the waiting period for a reply becomes a new form of anxiety. In our quest to be constantly connected, we have created a new kind of distance—a space between the words on the screen and the feelings in the heart. We are learning to love in a world of pixels and pings, where the most profound emotions are often reduced to a "seen" but not felt. And in that space, between sending and receiving, we find ourselves alone, holding a warm phone, waiting for a story that may never be told. #LoveInTheTimeOfScreens #DigitalLove #ModernLove #Ghazal #EnglishGhazal #Poetry #RelationshipGoals #BlueTick #UnrequitedLove #TechAndLove#usmanwrites#usmanshaikh#DigitalLove

Rushil Dodiya

तेरे बिना मन नहीं है, बस तन का है सिंगार। मुझे और कुछ न भाए, बस हार बाहों के डार।। हृदय में है पतझड़, और आँखों में सावन। तेरे बिन पापी की कुटिया, आकर द्वार कर दे पावन।। तेरे बिना ये तन है क्या, मिट्टी का एक प्याला है। कब तक रहेगा ये खाली, भर दे इसमें जो हाला है।। - Rushil

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या "भियं दधाना हृदयेषु शत्रु;न:" ऋगुवेद-- १०/८४/७ भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो। भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्। शाब्दिक अर्थ-- भियम् — भय दधाना — धारण करते हुए / उत्पन्न करते हुए हृदयेषु — हृदयों में शत्रूणाम् — शत्रुओं के भावार्थ-- हे दिव्य शक्ति! शत्रुओं के हृदयों में भय उत्पन्न कर दो, जिससे वे दुष्ट कर्म करने का साहस न कर सकें और उनका अहंकार व आक्रमण समाप्त हो जाए। संक्षिप्त व्याख्या-- इस मन्त्र में देवशक्ति से प्रार्थना की गई है कि अन्यायी और दुष्ट प्रवृत्ति वाले शत्रुओं के मन में ऐसा भय उत्पन्न हो जाए कि वे अधर्म और हिंसा का मार्ग छोड़ दें। इसका उद्देश्य केवल भय पैदा करना नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और अधर्म के निरोध की भावना है।वेदों में शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न होने या दुष्टों के भयभीत होने की भावना कई स्थानों पर मिलती है। कुछ प्रमुख वैदिक प्रमाण इस प्रकार हैं— १. ऋग्वेद-- भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्। — ऋग्वेद-१०/८४/७ भावार्थ — हे देवशक्ति! शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न कर दो। २. ऋग्वेद-- इन्द्रः शत्रूणां हृदयानि कम्पयति। — ऋग्वेद-१/८०/१३ भावार्थ — इन्द्र शत्रुओं के हृदयों को कम्पित (भयभीत) कर देते हैं। ३. ऋग्वेद-- त्वं न इन्द्राभिभूरसि त्वं शत्रूञ्जिघांससि। — ऋग्वेद,-१/५१/५ भावार्थ — हे इन्द्र! आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं और उन्हें पराजित करते हैं। ४. अथर्ववेद-- यथा वृक्षान् वातो भिनत्ति तथा शत्रून् भिनद्मि। — अथर्ववेद-६/७५/१ भावार्थ — जैसे वायु वृक्षों को हिला देती है, वैसे ही शत्रुओं को पराजित किया जाए। . अथर्ववेद-- भयं नो अस्तु शत्रुभ्यः। — अथर्ववेद-१९/१५/६ भावार्थ — शत्रुओं को भय हो, हमें नहीं। निष्कर्ष-- वेदों में बार-बार यह प्रार्थना मिलती है कि धर्म की रक्षा के लिए दुष्ट या आक्रमणकारी शत्रुओं के मन में भय उत्पन्न हो, जिससे वे अधर्म और हिंसा से दूर हो जाएँ। उपनिषदों में प्रमाण-- १. कठोपनिषद-- भयादस्याग्निस्तपति भयात्तपति सूर्यः। भयादिन्द्रश्च वायुश्च मृत्युर्धावति पञ्चमः॥ — कठोपनिषद-२/३/३ भावार्थ — उसी परमात्मा के भय से अग्नि तपती है, सूर्य प्रकाश देता है, इन्द्र और वायु कार्य करते हैं तथा मृत्यु भी अपना कार्य करती है। २. तैत्तिरीयोपनिषद-- भयाद्वातः पवते भयादेति सूर्यः। भयादग्निश्चेन्द्रश्च मृत्युर्धावति पञ्चमः॥ — तैत्तिरीयोपनिषद-२/८ भावार्थ — परम ब्रह्म के भय से ही वायु चलती है, सूर्य उदित होता है, अग्नि और इन्द्र अपना कार्य करते हैं तथा मृत्यु भी अपना कार्य करती है। ३. बृहदारण्यकोपनिषद- द्वितीयाद्वै भयं भवति। — बृहदारण्यक उपनिषद-१/४/२ भावार्थ — जहाँ द्वैत (दूसरापन) होता है वहीं भय उत्पन्न होता है। 4. मुण्डकोपनिषद-- भयादस्याग्निस्तपति सूर्यस्तपति। — मुण्डकोपनिषद-२/१/४ भावार्थ — परमात्मा की महाशक्ति से ही अग्नि और सूर्य अपना कार्य करते हैं। ५ श्वेताश्वतर उपनिषद-- भयादस्याग्निस्तपति भयात्तपति सूर्यः। भयादिन्द्रश्च वायुश्च मृत्युर्धावति पञ्चमः॥ — श्वेताश्वतर उपनिषद-६/२ भावार्थ — उसी परमेश्वर के भय से अग्नि तपती है, सूर्य प्रकाश देता है, इन्द्र और वायु अपना कार्य करते हैं तथा मृत्यु भी अपना कार्य करती है। ६- मैत्रायणी (मैत्री) उपनिषद-- महद्भयं वज्रमुद्यतं य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति। — मैत्रायणी उपनिषद-६/३० भावार्थ — यह ब्रह्म महान् भय के समान (वज्र के समान प्रभावशाली) है; जो उसे जान लेते हैं वे अमर हो जाते हैं। ७- कैवल्य उपनिषद-- सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। भावार्थ — जब साधक सभी प्राणियों में आत्मा को और आत्मा में सभी प्राणियों को देखता है, तब उसके लिए भय समाप्त हो जाता है। ८. अमृतबिन्दु उपनिषद-- मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। भावार्थ — मनुष्य के बन्धन और भय का कारण भी मन है और मुक्ति का कारण भी मन ही है। निष्कर्ष-- उपनिषदों में यह बताया गया है कि—परम ब्रह्म की महाशक्ति से समस्त जगत अनुशासन में चलता है।ब्रह्म को जानने से भय समाप्त हो जाता है। अज्ञान और द्वैत से ही भय उत्पन्न होता है। हैं। जुड़ी है। पुराणों में भी दुष्टों के हृदय में भय उत्पन्न होने अथवा अधर्मियों के भयभीत होने का उल्लेख अनेक स्थानों पर मिलता है। कुछ प्रमुख प्रमाण इस प्रकार हैं— १. विष्णु पुराण-- भयं द्वितीयाभिनिवेशतः स्यात्। — विष्णु पुराण-१/२/६ भावार्थ — जब जीव परमात्मा से अलग दूसरे में आसक्ति करता है तब भय उत्पन्न होता है। २. अग्नि पुराण-- दुष्टानां हृदये नित्यं भयमेव प्रवर्तते। भावार्थ — दुष्ट लोगों के हृदय में सदा भय बना रहता है। ३. गरुड़ पुराण-- पापानां फलमाप्नोति भयशोकसमन्वितम्। भावार्थ — पाप करने वाले मनुष्य को भय और शोक से युक्त फल प्राप्त होता है। ४. मार्कण्डेय पुराण-- देवीभयात् पलायन्ते दानवा दारुणा रणात्। भावार्थ — देवी के भय से दानव युद्धभूमि से भाग जाते हैं। ५- विष्णु पुराण-- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। (भाव समान सिद्धान्त) — विष्णु पुराण-४/२४ भावार्थ — जब-जब धर्म की हानि होती है तब भगवान अधर्मियों का नाश करने के लिए प्रकट होते हैं, जिससे दुष्ट भयभीत होते हैं। ६- लिंग पुराण-- तस्य नामभयाद् दैत्याः पलायन्ते दिशो दश। भावार्थ — भगवान के नाम के भय से दैत्य दसों दिशाओं में भाग जाते हैं। ७. स्कन्द पुराण-- धर्मे स्थितानां न भयं कदाचन। भावार्थ — जो लोग धर्म में स्थित रहते हैं उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं होता। निष्कर्ष-- पुराणों में यह सिद्धान्त बार-बार बताया गया है कि— ईश्वर से विमुखता और अधर्म से भय उत्पन्न होता है। भगवान या दिव्य शक्ति के प्रभाव से दुष्ट और दैत्य भयभीत हो जाते हैं। धर्म में स्थित व्यक्ति निर्भय रहता है। भगवद्गीता में प्रमाण-- १.अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। — गीता-१६/१ भावार्थ — निर्भयता, अन्तःकरण की शुद्धि और ज्ञानयोग में स्थित रहना—ये दैवी गुण हैं। २.दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः। वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते॥ — गीता-२/५६ भावार्थ — जो मनुष्य राग, भय और क्रोध से रहित है और सुख-दुःख में सम रहता है, वही स्थिरबुद्धि मुनि कहलाता है। ३.वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः। बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः॥ — गीता-४/१० भावार्थ — राग, भय और क्रोध से रहित होकर अनेक लोग ज्ञान और तप से शुद्ध होकर मेरे स्वरूप को प्राप्त हुए हैं। ४.परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ — गीता-४/८ भावार्थ — साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान युग-युग में अवतार लेते हैं। निष्कर्ष-- गीता में बताया गया है कि— धर्म और आत्मज्ञान से निर्भयता प्राप्त होती है। राग, भय और क्रोध का त्याग करना आध्यात्मिक उन्नति का लक्षण है। भगवान अधर्मियों का नाश करते हैं, जिससे दुष्ट प्रवृत्तियाँ नष्ट होती हैं। महाभारत में प्रमाण -- १.अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम। — अनुशासन पर्व, अध्याय-११६ , श्लोक-३७ भावार्थ — मैं सभी प्राणियों को अभय (निर्भयता) देता हूँ; यह मेरा व्रत है। २-. न भयमस्ति धर्मिष्ठे न सत्ये न कृतात्मनि। — शान्ति पर्व, अध्याय-१६२ भावार्थ — जो धर्मनिष्ठ, सत्यवादी और आत्मसंयमी है उसे किसी प्रकार का भय नहीं होता। ३. यत्र धर्मस्तत्र जयः। — महाभारत का प्रसिद्ध सिद्धान्त भावार्थ — जहाँ धर्म है, वहीं विजय होती है; इसलिए धर्मात्मा को भय नहीं होता। ४.धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। — वन पर्व (नीति वचन) भावार्थ — धर्म का नाश करने वाला स्वयं नष्ट हो जाता है, और जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है। निष्कर्ष-- महाभारत में यह स्पष्ट बताया गया है कि—धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति निर्भय रहता है। अधर्मी और अन्यायी अंततः भय और विनाश को प्राप्त होते हैं। धर्म ही मनुष्य की रक्षा करता है और विजय दिलाता है। स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण -- १-. मनुस्मृति भयाद् भोगाय कल्पन्ते सर्वे लोकाः स्वकर्मभिः। — मनुस्मृति-७/१५ (दण्ड-नीति प्रसंग) भावार्थ — दण्ड के भय से ही सभी लोग अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। २. मनुस्मृति दण्डः शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति। दण्डः सुप्तेषु जागर्ति दण्डं धर्मं विदुर्बुधाः॥ — मनुस्मृति-७/१८ भावार्थ — दण्ड ही समस्त प्रजा को अनुशासित करता है, वही उनकी रक्षा करता है; सबके सो जाने पर भी दण्ड जागता रहता है, इसलिए विद्वान दण्ड को ही धर्म का रक्षक मानते हैं। ३. याज्ञवल्क्य स्मृति दण्डो हि शासनो लोकस्य दण्ड एवाभिरक्षकः। — याज्ञवल्क्य स्मृति-१/३६६ भावार्थ — दण्ड ही लोक का शासन करने वाला और उसकी रक्षा करने वाला है। ४- नारद स्मृति दण्डभयात् प्रवर्तन्ते सर्वे धर्मेषु मानवाः। भावार्थ — दण्ड के भय से ही मनुष्य धर्म के मार्ग पर चलते हैं। ५- बृहस्पति स्मृति दण्डभयात् प्रवर्तन्ते सर्वे धर्मेषु मानवाः। भावार्थ — दण्ड के भय से ही मनुष्य धर्म के मार्ग में प्रवृत्त होते हैं। ६- पराशर स्मृति दण्डो हि शासनो लोके दण्ड एवाभिरक्षकः। भावार्थ — दण्ड ही संसार का शासन करने वाला और उसकी रक्षा करने वाला है। ७- कात्यायन स्मृति- दण्डभयेन लोकस्य सर्वं भवति शासितम्। भावार्थ — दण्ड के भय से ही समस्त समाज अनुशासन में रहता है। ८- आपस्तम्ब धर्मसूत्र धर्मेण शासितो लोको न भयेन प्रमाद्यति। भावार्थ — जब समाज धर्म से संचालित होता है, तब भय से उत्पन्न अव्यवस्था नहीं होती। निष्कर्ष-- अन्य स्मृतियों और धर्मसूत्रों में भी यह सिद्धान्त स्पष्ट है कि— दण्ड का भय समाज को अनुशासित रखता है। अधर्मी और अपराधी भय से नियंत्रित होते हैं। धर्म और न्याय की रक्षा के लिए दण्ड व्यवस्था आवश्यक मानी गई है। नीति ग्रन्थों में प्रमाण-- १. चाणक्य नीति तावद्भयस्य भेतव्यं यावद्भयमनागतम्। आगतं तु भयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमशङ्कया॥ — चाणक्य नीति, अध्याय-५ , श्लोक-१७ भावार्थ — भय आने से पहले तक उससे सावधान रहना चाहिए, परन्तु जब भय सामने आ जाए तो बिना संकोच उसका सामना करना चाहिए। २. भर्तृहरि नीति शतक भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ताः तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः। कालो न यातो वयमेव याता स्तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णाः॥ — नीतिशतक, श्लोक -७ भावार्थ — भोग हमने नहीं भोगे बल्कि हम ही भोगों से नष्ट हुए; समय नहीं बीता बल्कि हम ही बीत गए। ३. विदुर नीति (महाभारत, उद्योग पर्व) न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत्। यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्ध्या संविभजन्ति तम्॥ — उद्योग पर्व, अध्याय-३३ भावार्थ — देवता हाथ में दण्ड लेकर रक्षा नहीं करते; जिसकी रक्षा करना चाहते हैं उसे बुद्धि प्रदान करते हैं। ४. शुक्र नीति दण्डेन शास्यते लोको दण्ड एवाभिरक्षकः। भावार्थ — दण्ड से ही संसार शासित होता है और वही उसकी रक्षा करता है। निष्कर्ष-- नीति ग्रन्थों में यह सिद्धान्त बताया गया है कि— भय का सामना साहस से करना चाहिए। दण्ड और अनुशासन से समाज व्यवस्थित रहता है। बुद्धि, नीति और धर्म से ही मनुष्य निर्भय जीवन जीता है। १. वाल्मीकि रामायण भयेषु चाभयदातारं दातारं सर्वसम्पदाम्। — अयोध्याकाण्ड, सर्ग २, श्लोक २६ भावार्थ — श्रीराम भय के समय सबको अभय देने वाले और सभी प्रकार की सम्पत्तियों के दाता हैं। २. वाल्मीकि रामायण रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता। — अयोध्याकाण्ड, सर्ग १, श्लोक ३९ भावार्थ — श्रीराम समस्त प्राणियों के रक्षक और धर्म की रक्षा करने वाले हैं, इसलिए अधर्मी उनसे भयभीत रहते हैं। ३. अध्यात्म रामायण भयं त्यजस्व काकुत्स्थ रक्षिता तेऽस्मि सर्वदा। — अरण्यकाण्ड, अध्याय ३ भावार्थ — भय का त्याग करो, मैं सदा तुम्हारी रक्षा करने वाला हूँ। ४. गर्ग संहिता भयभीता द्रुतं यान्ति दैत्याः कृष्णस्य तेजसा। भावार्थ — भगवान श्रीकृष्ण के तेज से दैत्य भयभीत होकर शीघ्र भाग जाते हैं। निष्कर्ष-- रामायण और गर्ग संहिता में यह बताया गया है कि— भगवान धर्मात्माओं को अभय देते हैं। अधर्मी और दुष्ट उनके तेज और शक्ति से भयभीत हो जाते हैं। दिव्य शक्ति धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए प्रकट होती सकता है। १. हितोपदेश भयाद् धावति लोकः सर्वः। भावार्थ — भय के कारण ही लोग अनेक अनुचित कर्मों से रुक जाते हैं और अनुशासन बना रहता है। २. पंचतंत्र भयेन भेद्यते सर्वं न च भेद्यं अभयेन हि। भावार्थ — भय से अनेक कार्य सिद्ध हो जाते हैं, परन्तु जहाँ भय नहीं होता वहाँ नियंत्रण कठिन हो जाता है। ३. योग वशिष्ठ चित्तमेव हि संसारो रागादिदोषदूषितम्। तदेव तैर् विनिर्मुक्तं भवत्येव निरामयम्॥ भावार्थ — रागादि दोषों से दूषित चित्त ही संसार और भय का कारण है; जब वही चित्त उनसे मुक्त हो जाता है तब शान्त और निर्भय हो जाता है। ४. योग वशिष्ठ मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। (भाव समान सिद्धान्त) भावार्थ — मन ही मनुष्य के बन्धन, भय और मोक्ष का कारण है। निष्कर्ष-- हितोपदेश, पंचतंत्र और योग वशिष्ठ में यह बताया गया है कि— भय से समाज में अनुशासन और सावधानी उत्पन्न होती है। मन ही भय और बन्धन का मूल कारण है। जब मन शुद्ध और विवेकयुक्त हो जाता है तब मनुष्य निर्भय हो जाता है। ----+-------+-------+--------+-----+

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास टूटे साज़ दर्द को आदत बना लेना आसान नहीं हैं l ज़ख्मों को गले लगा लेना आसान नहीं हैं ll आखरी बार ख़ुदा हाफिज कहने के लिए l रंगीन महफिल सजा लेना आसान नहीं हैं ll हमेशा के जुदा होते वक्त कहने वाली सभी l बात को सीने में दबा लेना आसान नहीं हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

जिंदगी की रेस में हम भाग दौड़ करते है, उस भाग दौड़ में एक सुकून , कुछ वक्त का पड़ाव या थकान में शांति होते है दोस्त।। दोस्त मन के उठे चक्रवात में शांत प्रवाह में बहती हवा से होते है। घाव तो उठते है बहुत, पर मन के घाव में मलहम से होते दोस्त। दोस्त वो होते है जो तन से बंधे हुए आत्मा की तरह होते है। वो न हो तो तन भी मर जाता है। - ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

इस दुनिया में सिर्फ दो, होते सच्चै मीत। मातु और पितु पुत्र से, रखते पावन प्रीत।। दोहा --450 (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

kattupaya s

Good morning friends.. have a great Sunday

Mara Bachaaaaa

भूल क्या हुई हमसे, आप तो दूर हो गए, हमे भूल शायद जिंदगी में मशगूल हो गए। - Mara Bachaaaaa

Imaran

रोना लिखा है तक़दीर में रो लेंगे हम, अश्क़ों से अपने ज़ख़्मों को धो लेंगे हम, तुझसे करेंगे न शिकवा कभी बेवफ़ाई का, तेरे हर सितम को दिल से लगा लेंगे हम 😂imran 😂

Rashmi Dwivedi

भगवान सभी प्रार्थनाओं के उत्तर देते हैं पर उनके जवाब कभी-कभी वह नहीं होते जो हम चाहते हैं और हमें लगता है ईश्वर ने हमारा साथ नहीं दिया। हर हर महादेव ❤️ - Rashmi Dwivedi

Raa

acche logo ki talas me pura jivan verth gaya bad me pata chala me hi galat tha

Raa

9541113158

Raju kumar Chaudhary

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ, हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ। कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान, हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान। अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो, तो Follow करिए… यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

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