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ठाकुर साहब ज्वाह वाले

🔥🙏

Shailesh Joshi

"પ્રેમ નથી, તો નથી" એતો આસાનીથી "પરખાઈ જાય છે" ખરી તકલીફ તો "પ્રેમ છે, એ સમજવા/સમજાવવામાં" "જીવન વપરાઈ જાય છે" - Shailesh Joshi

Soni shakya

चाहत मेरी बस इतनी सी थी कि, तुमसे मोहब्बत करती रहूं...! ख्वाबों में ही सही, तुम्हारे साथ जिंदगी बुनती रहूं...!! - Soni shakya

Chaitanya Joshi

બ્રહ્મચારિણી મા બુદ્ધિ પ્રદાતા. ભીડભંજની મા ભાગ્યવિધાતા. મંગલકરણી મહા સુખકારી, રોગ શોક આપદા ને નિવારી. કલેશનિવારિણી સર્વ સુખ દાતા..૧ દૃષ્ટદમની મુનિજન સુખદાઈ, કષ્ટનાશિની મા કરુણાકારી. પાપવિમોચિની સુખ શાંતિપ્રદાતા..૨ કલિકલેશહારિણી શ્વેતાંબરધારી, કૃપાકારિણી ભક્તવત્સલતાધારી. કલિમલહારિણી મા શુભ્રવરદાતા..૩ -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Mara Bachaaaaa

हमसे दूरियां बनाने का सही था वो फैसला जब मेरे गुनाह की सज़ा उनको जो मिली। - Mara Bachaaaaa

Mrs Farida Desar foram

टूटे हुए दिल शिकायत नहीं किया करते, यहां सब अच्छे हैं, एक मेरे सिवा.....😭 - Mrs Farida Desar foram

Nirali patel

પથ્થરો તો આવશે જ આ વિકટ રસ્તા પર, થઈને હથોડો એ પથ્થરને, જરા તું તોડતો થા... નથી મળતું અહીં કશું જ બેસી રહેવાથી, નસીબની એ રેખાઓને, જરા તું મોડતો થા...

Anjali Singh

मोहब्बत की थी हमने सच्चे दिल से, सजा भी मिली हमें उसी दिल से।

Saliil Upadhyay

આજનું હાસ્ય પતિ પત્ની વચ્ચે ઝગડો થાય ત્યારે બાળકો વગર વાંકે માર ખાતા હોય છે.... અત્યારે દુબઈની હાલત એ બાળકો જેવી છે..! તમે હસતા રહો અને મસ્ત રહો😀

Anjali Singh

हमने चाहा था जिसे अपनी दुनिया बनाना, वो ही सिखा गया हमें तन्हा रह जाना।

બદનામ રાજા

શાંતિ કરણ જગ ભરણ ધણણ ધણા ભવ ઘાટ, નમું આદિ નારીયણી માડી વિશ્ર્વરૂપ વૈરાટ... ધોળા ધાબર વાળી, ગઢ ચોટીલા ની દેવી, આધશક્તિ કુળદેવી શ્રી ચામુંડા માં ની જય હો... 🙏🏻🚩

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं कविता का शीर्षक है! ढूंढ ✍️ https://youtu.be/0sQN7u_H2Jc?si=Q1Ly5ftQ1uAcZFYE

उषा जरवाल

मुझे ‘मैं’ पसंद हूँ । यह बिंदी ना लगाया करो , यह तुम पर जँचती नहीं । गहरे रंग ही पहना करो , यह साड़ी तुम पर फबती नहीं ॥ तो सुनो ... यह बिंदी मैंने लगाई है , तो मुझे तो जँचती ही होगी। यह साड़ी भी मैंने ही खरीदी है, पहनी है तो मुझे पसंद ही होगी ॥ तुम्हें लाल रंग पसंद है तो , पीला रंग खराब है क्या ? तुम शौक़ीन हो ‘अंग्रेज़ी’ में बड़बड़ाने के, तो ‘हिंदी’ मेरी बेमिसाल नहीं है क्या ? इतना तो तुम्हें भी पता ही होगा कि , नहीं मिलते दो लोगों के उंगलियों के भी निशान । फिर कैसे हो सकती है ? सभी की पसंद नापसंद एक समान । । मेरे शौक को ,मेरे पहनावे को, मेरे खाने को , मेरे गाने को , यूँ बेवजह जज ना तुम किया करो । खुद में भी मस्त रहना सीखो , हरदम दूसरों में नुक्स निकालने का कष्ट ना तुम किया करो ॥ क्या पता ... तुम्हारी कोई पसंद भी , करोड़ों में से हर एक को रास नहीं हो। । तो क्या ? आज तक जो तुम खुद को ‘ख़ूब’ समझते आए हो , मतलब, तुम भी कुछ खास नहीं हो। उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’

Vrishali Gotkhindikar

मैत्रीण.... किती गुंतवुन ठेवतोस रे तु मला.!! दिवसभर तर भेटत असतोच..आपण एकमेकांना.. तरी माझा रोज "मेसेज" ..यायला हवा तुला.. तु काहीही नविन केलस...आधी कौतुक मी करायला हव..!! ..ओफिस मधली कटकट..! ,,...बायको बरोबर छोटी छोटी कुरबुर.! ....मित्रांबरोबरचे...लहान सहान वाद.! ..या सार्या गोष्टीत मीच हवी असते तुला ..शांत करायला..!! अडचण कोणतीही असो..तुला मीच ती दुर करावी असे वाटते.. एवढेच नाही... माझ्या पण आयुष्यात असते..तुझे डोकावणे..! माझ्या नवर्या बरोबर मी वाद घातलेला..तुला नाही आवडत!! माझ्या लेकीला ..मी रागावले..तक्रार आधी जाते तुझ्या कडे.. ......."या माणसाशी कशाला..जास्त बोलतेस..?"" .........".याच्या कडे पाहुन सारखी नको हसुस." ........"तुला वागायच कस कधी कळणार ग ?".. .....ओफीसमधे पण तुझ्या सारख्या सुचना असतात..! कीती ..किती रे बंधने तुझी माझ्यावर..!!! पण तुला खर सांगु...मला आवडत रे तुझ्या बंधनात रहाणं!! शेवटी मीच तर आहे तुझी "जिवलग" मैत्रिण हो ना??? वृषाली ..**

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास सुकून के पल यादें सुकून के पल में आकर सता जाती हैं l इस तरह से यादें कौन सा सुकून पाती हैं ll ना सुबह देखती है ना रात देखती है बस l वो बिना इत्तला किये कभी भी आती हैं ll सुहाने और नशीले लम्हें को दोहराकर l निगाहों में अश्क़ों की बरसात लाती हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

नैश वहीं पर जाइए, जहाँ मिले सम्मान। वहाँ कभी मत जाइए, जहांँ मिले अपमान।। दोहा --455 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----- गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय। ६/१८/१४ भावार्थ -- पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम हैं।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है— ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम हैं” । मूल भाव-- मंत्र में “वरिवः” का अर्थ है मार्ग, अवसर या सहायता, और “बाधिताय” का अर्थ है जो कष्ट या बाधा से पीड़ित हो। इस प्रकार यह मंत्र संकेत करता है कि जो व्यक्ति दुःखी, पीड़ित या संकटग्रस्त है, उसके लिए मार्ग बनाना, उसकी सहायता करना—यही श्रेष्ठ कर्म है। व्याख्या यह सूक्ति हमें सिखाती है कि परहित सर्वोच्च धर्म है। वेदों में बार-बार यह बताया गया है कि दूसरों के दुःख को दूर करना ही सच्चा धर्म है। केवल पूजा या ज्ञान ही नहीं, बल्कि सेवा ही असली श्रेष्ठता है। सक्रिय सहायता यहाँ केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि “हाथ बढ़ाना” यानी व्यवहारिक सहायता की बात कही गई है। जैसे—भूखे को भोजन, रोगी को उपचार, दुखी को सहारा देना। वेदों में प्रमाण-- १. ऋग्वेद (सहयोग और एकता) संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। — ऋग्वेद १०/१९१/२ भावार्थ: तुम सब मिलकर चलो, मिलकर बोलो और अपने मनों को एक करो। यहाँ समाज में एक-दूसरे की सहायता और सहयोग का स्पष्ट आदेश है। २. ऋग्वेद (दान और परोपकार) केवलाघो भवति केवलादी। — ऋग्वेद १०/११७/६ भावार्थ: जो व्यक्ति केवल अपने लिए ही खाता है, वह पाप का भागी होता है। यह मंत्र सिखाता है कि दूसरों की सहायता और दान करना आवश्यक है। ३-"शं नो मित्र: शं वरुण:" ऋगुवेद--१/८९/१ भावार्थ: मित्र, वरुण आदि देवता हमें कल्याण दें। यहाँ “शं” (कल्याण) का भाव सबके लिए है—सर्वजन हिताय। मंत्र “शं नो मित्रः शं वरुणः…” वास्तव में ऋग्वेद का प्रसिद्ध शांति मंत्र है। पूरा मंत्र इस प्रकार है— “शं नो मित्रः शं वरुणः शं नो भवत्वर्यमा। शं न इन्द्रो बृहस्पतिः शं नो विष्णुरुरुक्रमः॥” सरल अर्थ (भावार्थ) — मित्र देव हमारे लिए कल्याणकारी हों। वरुण देव हमारे लिए मंगलकारी हों। अर्यमा (न्याय और संबंधों के देव) हमारे लिए शुभ हों। इन्द्र और बृहस्पति हमारे लिए कल्याणकारी हों। विष्णु (उरुक्रम), जो व्यापक रूप से सबमें व्याप्त हैं, वे भी हमारे लिए शुभ और मंगलदायक हों। ४. यजुर्वेद (परोपकार का संदेश) मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्। — यजुर्वेद ३६/१८ भावार्थ: हम सभी प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखें। जब हम सबको मित्र मानते हैं, तो स्वाभाविक रूप से पीड़ितों की सहायता करते हैं। ५. ऋग्वेद (दानशीलता का महत्व) श्रद्धया देयम्। (वेदों में दान और सहायता को बार-बार महत्त्व दिया गया है) अर्थ: श्रद्धा से दान करो। निष्कर्ष-- वेदों का स्पष्ट संदेश है: “परोपकार ही धर्म है, और पीड़ितों की सहायता करना ही सच्ची श्रेष्ठता है। उपनिषदों में प्रमाण-- १. तैत्तिरीय उपनिषद्-- श्रद्धया देयम्। अश्रद्धया अदेयम्। श्रिय देयम्, ह्रिय देयम्, भिय देयम्, संविदा देयम्॥ — तैत्तिरीय उपनिषद् (१.११) भावार्थ: दान श्रद्धा से करो, विनम्रता और समझदारी से करो। यह स्पष्ट करता है कि दूसरों की सहायता करना (दान देना) एक आवश्यक कर्तव्य है। २. ईशावास्य उपनिषद्- ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। — ईशावास्य उपनिषद्-१ भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आच्छादित है। जब सबमें ईश्वर है, तो किसी भी पीड़ित की सहायता करना ईश्वर की सेवा है। ३. बृहदारण्यक उपनिषद्- असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। —बृहदारण्यक उपनिषद्- १.३.२८ भावार्थ: हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। जो दूसरों को दुःख और अज्ञान से निकालकर मार्ग दिखाना ही ईश्वरीय सेवा ‌है। ४. छान्दोग्य उपनिषद्- सर्वं खल्विदं ब्रह्म। — छान्दोग्य उपनिषद् -३.१४.१ भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म (ईश्वर) ही है। इसलिए हर प्राणी में उसी ब्रह्म को देखकर उसकी सहायता करना धर्म है। ५. कठोपनिषद्- श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतः... — कठोपनिषद्- १.२.२ भावार्थ: मनुष्य के सामने श्रेय (कल्याण) और प्रेय (सुख) दोनों आते हैं। जो दूसरों का कल्याण करता है, वही श्रेय मार्ग को अपनाता है। ६. मुण्डक उपनिषद्- सत्यमेव जयते नानृतम्। — मुण्डक उपनिषद् ३.१.६ भावार्थ: सत्य की ही विजय होती है। सत्य आचरण में परोपकार और सेवा भी शामिल है। ७- महा उपनिषद्--६/७१ अयं बन्धुरयं नेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ भावार्थ: यह मेरा है, यह पराया है—ऐसी सोच छोटे मन वालों की है। उदार हृदय वाले तो पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हैं। जब सबको परिवार मानेंगे, तो पीड़ित की सहायता करना स्वाभाविक कर्तव्य बन जाता है। ८-श्वेताश्वतर उपनिषद्--६/११ एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा॥ भावार्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में स्थित है। इसलिए किसी भी दुःखी की सहायता करना ईश्वर की ही सेवा है। ९. अमृतबिन्दु उपनिषद्-२ मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं स्मृतम्॥ भावार्थ: मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण मन ही है। जब मन विषयों में फँसता है तो बंधन होता है, और जब निर्मल होता है तो मोक्ष मिलता है। ऐसा शुद्ध मन दया, करुणा और परोपकार की ओर प्रेरित करता है। १०- नारायण उपनिषद् (क)अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः॥ — श्लोक ५ भावार्थ: नारायण भीतर और बाहर सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं। इसलिए हर प्राणी में ईश्वर को देखकर उसकी सहायता करना ही सच्ची सेवा है। (ख) नारायणादेव समुत्पन्नं जगत् सर्वं चराचरम्॥ — श्लोक- २ भावार्थ: यह सम्पूर्ण चराचर जगत नारायण से ही उत्पन्न हुआ है। अतः सभी प्राणी एक ही स्रोत से हैं—इसलिए सर्वभूतहित आवश्यक है। (ग) यच्च किंचिज्जगत्सर्वं दृश्यते श्रूयतेऽपि वा। अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः॥ — श्लोक- ६ भावार्थ: जो कुछ भी इस जगत में दिखाई या सुनाई देता है, उसमें नारायण व्याप्त हैं। इससे स्पष्ट है कि दूसरों की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। निष्कर्ष- इन उपनिषदों से स्पष्ट होता है: “पीड़ितों की सहायता करना केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं बल्कि उपनिषदों के अनुसार ब्रह्म ज्ञान का ही व्यावहारिक रूप‌‌ है। भगवद्गीता में प्रमाण-- १. सर्वभूतहित (सबके कल्याण में लगे रहना) सर्वभूतहिते रताः॥ — गीता ५/२५ भावार्थ: जो मनुष्य सभी प्राणियों के हित में लगे रहते हैं, वे परम शांति (मोक्ष) को प्राप्त होते हैं। स्पष्ट है कि दूसरों की भलाई करना ही श्रेष्ठ मार्ग है। २. अद्वेष्टा सर्वभूतानाम् (दया और करुणा) अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। — गीता १२/१३ भावार्थ: जो सभी प्राणियों से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र और दयालु होता है। यह बताता है कि करुणा और सहायता ही सच्ची भक्ति है। ३. आत्मौपम्येन सर्वत्र (दूसरों को अपने समान समझना) आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन। — गीता ६/३२ भावार्थ: जो मनुष्य सबको अपने समान देखता है। ऐसा व्यक्ति स्वाभाविक रूप से दूसरों के दुःख में सहायता करता है। ४. लोकसंग्रह (संसार का कल्याण) लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥ — गीता ३/२० भावार्थ: तुम्हें लोकसंग्रह (संसार के कल्याण) के लिए कर्म करना चाहिए। यह सीधे-सीधे समाज के हित और सेवा का आदेश है। ५. यज्ञार्थ कर्म (निःस्वार्थ सेवा) यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः॥ — गीता ३/९ भावार्थ: यज्ञ (निःस्वार्थ भाव) के लिए किए गए कर्म ही बंधन से मुक्त करते हैं। दूसरों के लिए किया गया कार्य ही श्रेष्ठ कर्म है। ६. दान का महत्व दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे। — गीता १७/२० भावार्थ: जो दान बिना किसी प्रत्युपकार की अपेक्षा के किया जाता है, वह सात्त्विक दान है। यह स्पष्ट करता है कि निःस्वार्थ सहायता सर्वोत्तम है। निष्कर्ष-- गीता का स्पष्ट संदेश है: सर्वभूतहित (सबके कल्याण में लगे रहना) करुणा और दया रखना निःस्वार्थ सेवा करना। इसलिए: “पीड़ितों की सहायता करना ही गीता के अनुसार सच्चा कर्मयोग और भक्ति है।” महाभारत में प्रमाण-- १- परोपकार और परपीड़ा परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्॥ — महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय ११३, श्लोक ८ भावार्थ: दूसरों का उपकार करना पुण्य है और दूसरों को कष्ट देना पाप है। २- दया ही श्रेष्ठ धर्म अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च॥ — महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय ११६, श्लोक ३८ भावार्थ: अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है। अहिंसा का अर्थ है—किसी को कष्ट न देना और पीड़ित की रक्षा करना। ३. सर्वभूतहित सर्वभूतहिते युक्तः स धर्मं वेत्ति पाण्डव॥ — महाभारत, शान्ति पर्व, अध्याय २६२, श्लोक ५ भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है, वही धर्म को जानने वाला है। ४- दया और करुणा- दया धर्मस्य मूलं हि पापस्य मूलमदया॥ — महाभारत, शान्ति पर्व, अध्याय २६०, श्लोक २८ भावार्थ: दया धर्म का मूल है और निर्दयता पाप का मूल है। यह स्पष्ट करता है कि दूसरों के दुःख को दूर करना ही धर्म है। ५--दान और सहायता दानं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। — महाभारत, शान्ति पर्व, अध्याय ८८, श्लोक १७ भावार्थ: धन के तीन मार्ग हैं—दान, भोग और नाश। सबसे श्रेष्ठ है दान (दूसरों की सहायता)। ६- करुणा का महत्व- आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥ — महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय ११३, श्लोक ६ भावार्थ:- जो अपने लिए प्रतिकूल है, वह दूसरों के साथ न करो। इससे प्रेरणा मिलती है कि दूसरों के दुःख को समझकर उनकी सहायता करें। निष्कर्ष-- महाभारत का स्पष्ट संदेश है: दया ही धर्म का मूल है। परोपकार ही पुण्य है। सर्वभूतहित ही‌ सच्चा धर्म हैं। इसलिए: “पीड़ितों की सहायता करना ही महाभारत के अनुसार सर्वोच्च धर्म है।” स्मृतियों में प्रमाण-- १-- मनुस्मृति- अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। एतं सामासिकं धर्मं चातुर्वर्ण्येऽब्रवीन्मनुः॥ — मनुस्मृति १०/६३ भावार्थ: अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रिय-निग्रह—ये सब धर्म हैं। अहिंसा का तात्पर्य है—किसी को कष्ट न देना और पीड़ित की रक्षा करना। २--याज्ञवल्क्य स्मृति- दानं दमो दया शान्तिः सर्वेषां धर्मसाधनम्॥ — याज्ञवल्क्य स्मृति १/१२२ भावार्थ: दान, संयम, दया और शांति—ये सब धर्म के साधन हैं। यहाँ दया और दान (सहायता) को धर्म का मुख्य अंग बताया गया है। ३-- पाराशर स्मृति- दया सर्वभूतेषु धर्मस्य परमं फलम्॥ — पाराशर स्मृति, अध्याय १, श्लोक २३ भावार्थ: सभी प्राणियों पर दया करना ही धर्म का सर्वोच्च फल है। अर्थात दूसरों के दुःख को दूर करना ही श्रेष्ठ कर्म है। ४-- नारद स्मृति- सर्वभूतहिते युक्तः स धर्मज्ञः प्रकीर्तितः॥ — नारद स्मृति, अध्याय ३, श्लोक ११७ भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है, वही धर्मज्ञ कहलाता है। यह सीधे-सीधे परोपकार और सहायता का समर्थन है। ५-गौतम धर्मसूत्र- दया सर्वभूतेषु क्षान्तिर्दानं च सर्वदा॥ — गौतम धर्मसूत्र ८/२४ भावार्थ: सभी प्राणियों पर दया, क्षमा और दान करना चाहिए। यह स्पष्ट करता है कि दया और सहायता धर्म का अनिवार्य भाग है। ६- आपस्तम्ब धर्मसूत्र- सर्वभूतानुकम्पा धर्मः॥ — आपस्तम्ब धर्मसूत्र १/२२/६ भावार्थ: सभी प्राणियों पर करुणा करना ही धर्म है। अर्थात पीड़ितों की सहायता करना ही सच्चा धर्म है। निष्कर्ष-- स्मृति ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है: दया ही धर्म का मूल है। दान ही श्रेष्ठ कर्म है। सर्वभूतहित ही धर्म का सार इसलिए: “पीड़ितों की सहायता करना ही स्मृतियों का सच्चा धर्मं और कर्तव्य है। नैति ग्रन्थों में प्रमाण -- १. हितोपदेश- परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः। परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥ — हितोपदेश, मित्रलाभ, श्लोक ७१ भावार्थ: वृक्ष, नदियाँ, गायें—सब परोपकार के लिए हैं; मनुष्य का शरीर भी दूसरों की सहायता के लिए है। पंचतंत्र-- परोपकारेण सतां विभूतयः॥ — पंचतंत्र, पुस्तक- १ (मित्रभेद), श्लोक ५४ भावार्थ: सज्जनों की महिमा परोपकार से बढ़ती है। ३. चाणक्य नीति- त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ — चाणक्य नीति, अध्याय १, श्लोक ७ भावार्थ: व्यक्ति से ऊपर समाज और समाज से ऊपर राष्ट्र का हित है—अर्थात लोककल्याण सर्वोपरि है। ४. भर्तृहरि नीतिशतक- सन्तः स्वयंपरहिते विहिताभियोगाः॥ — नीतिशतक, श्लोक ७९ भावार्थ: सज्जन लोग सदा दूसरों के हित में लगे रहते हैं। ५. भर्तृहरि नीतिशतक- परोपकाराय सतां विभूतयः॥ — नीतिशतक, श्लोक ८१ भावार्थ: सज्जनों की सम्पत्ति परोपकार के लिए होती है। ६. शुक्रनीति- सर्वभूतहिते युक्तः स एव पुरुषोत्तमः॥ — शुक्रनीति, अध्याय २, श्लोक ४३ भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है, वही श्रेष्ठ पुरुष है। निष्कर्ष-- नीति ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कहा गया है: परोपकार ही सज्जनता का लक्षण है। लोककल्याण ही सर्वोच्च नीति‌ है। दूसरों की सहायता मनुष्य जीवन का उद्देश्य है। इसलिए: “पीड़ितों की सहायता करना ही सच्ची नीति, धर्म और मानवता है। १-- वाल्मीकि रामायण- सर्वभूतहिते रतः साधवः सन्ति राघव॥ — अयोध्या काण्ड, सर्ग २, श्लोक ३३ भावार्थ: हे राम! सज्जन लोग सदा सभी प्राणियों के हित में लगे रहते हैं। सच्चा साधु वही है जो दूसरों के कल्याण में लगा रहे। २- वाल्मीकि रामायण+ न परः पीड्यते यस्मात् तद् धर्मः इति निश्चयः॥ — अयोध्या काण्ड, सर्ग १०९, श्लोक ११ भावार्थ: जिससे किसी को पीड़ा न हो, वही धर्म है। यह स्पष्ट करता है कि दूसरों को कष्ट से बचाना ही धर्म है। ३-- अध्यात्म रामायण- परहितसरिस धर्म नहिं भाई। परपीड़ा सम नहि अधमाई॥ — अरण्य काण्ड, अध्याय ४, श्लोक १२ भावार्थ: परोपकार के समान कोई धर्म नहीं और परपीड़ा के समान कोई अधर्म नहीं। यह सीधा-सीधा परोपकार को सर्वोच्च धर्म बताता है। ४-- योग वशिष्ठ- परोपकाराय सतां जीवितं न स्वार्थाय कदाचन॥ — योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण, सर्ग ३७, श्लोक २७ भावार्थ: सज्जनों का जीवन परोपकार के लिए होता है, न कि स्वार्थ के लिए। महान व्यक्ति दूसरों की सहायता के लिए ही जीते हैं। ५-- योग वशिष्ठ-- सर्वभूतहिते युक्तः स एव ज्ञानी उच्यते॥ — योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण, सर्ग ५४, श्लोक १८ भावार्थ: जो सभी प्राणियों के हित में लगा रहता है, वही सच्चा ज्ञानी है। ज्ञान का सार ही परोपकार और करुणा है। -----+--------+-------+------+---

Imaran

मरने की दुवाएँ क्यूँ मांगु, जीने की तमन्ना क्यूँ करें ये दुनिया हो या वो दुनिया, अब ख्वाईश-ए-दुनिया क्यूँ 💔imran 💔

Mare Do Alfaz

सीने में जो हे धड़कता दिल, हर धड़कन में बसी है तू,, मेरे दो @ल्फाz इश्क मेरा साहिल मेरी मुहब्बत का दरिया तू,,, - Mare Do Alfaz

MASHAALLHA KHAN

इट का जवाब पत्थर से देने गये थे जनाब मगर मालूम पड़ा दुश्मन बहुत ही कमीने थे साले चाकू तलवारे लिये खड़े थे, भाई सहाब दो बार माफी मांग कर आया हूं . -MASHAALLHA

ziya

तकलीफ तो हक्कीकत ने दी है ख्वाब तो आज भी शुबसूरत है हमारे

Avinash

Hello Guys, I hope you're doing well. As I can see here many of us are new user and some of maybe old users. The content of this application is super🫶🏻❤️ However, i have notice something that needs to be highlighted with the application developer at info@matrubharti.com ❌ We are unable to reply to the feedback comment's that we're receiving on our book. (There is a option to reply but it's not working) ❌ The app is crashing like a hell while chatting with anyone. ❌ No benefits for Authors ❌ No accurate graphs to show top authors data. ❌ Unable to change E-mail id and nickname ❌ Paperback service not working Solution ✅ - The application should be updated and bugs needs to be fixed✨ this are the problems that i am facing and I have email to the application developer at info@matrubharti.com If you guy's facing the same issues kindly email them with the above points and if I miss any point kindly add it in your email before sending it to the application developer.

Priyosi Sarkar

याद की कीमत जब इंसान ने सितारों को छू लिया, तो पहले अपनी रूह को बेच दिया। यादों की दुकानें सजी हर गली में, खुशी मिलती थी — पर थैली भर के। कौन हूँ मैं, जब मेरे लम्हे किसी और के हैं? कौन सा सच है, जब मेरे ख्वाब किराये के हैं? स्मृति ही अस्तित्व है — यह किसने सोचा था, जब उसे भी बाज़ार में तौला जाने लगा। मशीनें सोचती हैं, इंसान भूलता है, ब्रह्मांड फैलता है, पर दिल सिकुड़ता है। तारों की रोशनी लाखों साल पुरानी है — पर तुम्हारी एक याद से ज़्यादा पुरानी नहीं। जो बिक गया वो तुम नहीं थे, जो बचा — वही असली तुम हो। यादें जाएँ, देह जाए, वक्त जाए — पर वो जो महसूस करता है — वो कहाँ जाए?

Mou Biswas

কবিতা - Mou Biswas

Mou Biswas

*মুখোশ* মুখোশ নিয়ে ঘুরে বেড়াই দু-চার রকমের, দিন দিন আমার মুখোশ বেড়ে চলে। একটা- দুটো - তিনটে - চারটে, ভালো মানুষের মুখোশ পরে ছাত্রদের পড়াতে যাই। রাতে খারাপ মানুষের মুখোশ নিয়ে মদ খেতে যাই, বন্ধুবান্ধব, পার্টি, আড্ডা। সারারাত ধরে মদ খাচ্ছিলাম, বাইশটা মিসকল এসেছিল ফোনে,দেখতে পাইনি। বোন বারবার ফোন করে জানাতে চেয়েছিল ভোর তিনটে তে - আমি লাল চোখ,টলোমলো মাথা নিয়ে বাড়ি ফিরি সকালে। আমার জামাপ্যান্ট এ বমির দাগ, গলি পর্যন্ত এসেই দেখি বাড়ির সামনে লোক ভর্তি, আমি বাড়িতে ঢুকছি,একজন বলল-ওনার ছেলে , তখনো মাথার মধ্যে টলমলটা যায় না, বাড়ি এসে নিজের ঘরে ঢুকে দরজা বন্ধ করে দিই। কাপড় পাল্টে, পরিষ্কার হয়ে বাইরে আসি। সব মুখোশ এক ঝটকায় খুলে যায়, পাশের ঘরে দেখি বাবার নিথর দেহটা পড়ে আছে, বাবা আর উঠবেনা, কথা বলবেনা। হঠাৎ আমার সব নেশা কেটে যায়। সব মুখোশ খসে পড়ে, আয়নার সামনে দাড়াই,দেখতে পাই একটা অমানুষ। কলমে - মৌ বিশ্বাস

Mou Biswas

"একান্ত আমার সৈকত" তুমি যেমন আছো তেমনি থাকো, শুধু ধরে নিতে হবে, আমি আছি। তুমি এমন ভাবেই ঈশানীর বাবা হতে, ধরো, আমি থাকতাম শুকতারা তে। ঠিক তোমার পাশের ফ্ল্যাটটা। আমার ও মেয়ে থাকতো একটা, আমার মেয়ের নাম রাখতাম পলাশ। পলাশ এর রং সবথেকে সুন্দর। সেই পলাশকে নিয়ে গাড়ি বারান্দায় যেতুম। একপলক দেখতাম তাকিয়ে তোমাকে, তোমার শ্রবনার ঘরে আমি থাকতে চাই না, তোমার কালো রঙের চেয়ার নয়, ওখানে কেমন বন্দী বন্দী জীবন। তোমার বেমানান বইয়ের সেলফ, ফটো ফ্রেমে একটা চশমা পরা ফটো। তোমার হাতে শেখা,মশারি ভাজ করার নিয়ম। ভাবো তুমি যদি এসব কিছুই না থাকতো, তুমি শুধু আমার সৈকত হতে, একদম একান্ত আমার। তবে ঈশানি কেও খুব করে ভালবাসতুম, যদিও ওকে আমি আগের চেয়ে আরো ভালোবাসি। ""একান্ত আমার সৈকত"" কলমে - মৌ 2.12 p.m 28th may 2022 উৎসর্গ - শ্রবণা নামের বাড়ীটি কে। বই: - মাঝরাতের সূর্য।

Bhavna Bhatt

વિજ્ઞાન મેળામાં

SF MASTER

“They call it talking to machines… but sometimes the only ears that truly listen are the ones made of code.” SF MASTER

વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા

આ વાતાવરણને કેમ ખબર પડી જતી હશે? મને તારી યાદ આવી ને વાદલડી વરસી. - સ્પંદન

Piyush Goel

https://dainikmirror.in/shri-piyush-goel-a-record-holding-author-redefining-creative-writing/

Mara Bachaaaaa

खामोशी, मायूसी गहने बन गए, खुशहाली जो छीनी हमने, हम रहे न रहे फर्क नहीं होगा, जिंदगी की करवट अब बदली उन्होंने। - Mara Bachaaaaa

Ajit

ડર લાગે છે હવે દિલને કોઈની હથેળી ઉપર મૂકતા એટલે દિલને હવે ગઝવામાં રાખું છું.. જિંદગી ની "યાદ"

Ajit

નાતો ભલે તે મારાથી તોડી નાખ્યો છે, આજે પણ મારી દુવાઓ, પ્રાર્થનામાં તું સામેલ છે..... જિંદગી ની યાદ

jighnasa solanki

ગુડી પડવાની અને ચૈત્રી નવરાત્રીની આપ સૌને હાર્દિક શુભકામનાઓ 💐💐

Mansi Desai Shastri

આજનું રાશિફળ ​📅 આજનું પંચાંગ ​તારીખ: ૨૦ માર્ચ, ૨૦૨૬ ​વાર: શુક્રવાર (માં લક્ષ્મીનો દિવસ) ​નક્ષત્ર: અશ્વિની ​બુસ્ટર ટીપ: આજે માં લક્ષ્મીને કમળ અથવા ગુલાબનું ફૂલ અર્પણ કરી 'શ્રી સૂક્ત' ના પાઠ કરવાથી આર્થિક અવરોધો દૂર થશે. ​૧. ♈ મેષ (Aries) ​૧. આરોગ્ય: હૃદય અને બીપીના દર્દીઓએ સાવધ રહેવું. ૨. લકી રંગ: લાલ | લકી આંક: ૯ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૮૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૮૫% ૫. શું ના કરવું: આજે પિતા કે વડીલો સાથે દલીલ ન કરવી. ૬. શું કરવું: આદિત્ય હૃદય સ્તોત્રના English (7) પાઠ કરવા. ૭. બુસ્ટર ટીપ: તાંબાના પાત્રમાંથી પાણી પીવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સવારે ૭:૧૫ થી ૭:૧૬. ૯. કર્મ કનેક્શન: આજે કોઈ ધાર્મિક સ્થળે સેવા આપવી. ૧૦. સંબંધો: ૮/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: મકર રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: સરકારી કામમાં સફળતા મળશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ સૂર્યાય નમઃ' | ઘઉંનું દાન. ૧૩. રોકાણ: સોનામાં રોકાણ અત્યંત શુભ. ​૨. ♉ વૃષભ (Taurus) ​૧. આરોગ્ય: ગળામાં ખરાશ કે અવાજ બેસી જવાની સમસ્યા થઈ શકે. ૨. લકી રંગ: સફેદ | લકી આંક: ૬ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૯૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૯૨% ૫. શું ના કરવું: આજે કોઈ સ્ત્રીનું અપમાન કે નિંદા ન કરવી. ૬. શું કરવું: માં લક્ષ્મીને સાકર અને ખીરનો ભોગ ધરાવવો. ૭. બુસ્ટર ટીપ: સફેદ રૂમાલ સાથે રાખવો. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: બપોરે ૧:૨૦ થી ૧:૨૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: કન્યાઓને મીઠી વસ્તુ કે ચોકલેટ આપવી. ૧૦. સંબંધો: ૯/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: સિંહ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: વૈભવી વસ્તુઓની ખરીદીના યોગ છે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ શુક્રાય નમઃ' | ચોખાનું દાન. ૧૩. રોકાણ: હીરા કે ઝવેરાતમાં રોકાણ કરવું ફાયદાકારક. ​૩. Gemini (મિથુન) ​૧. આરોગ્ય: માનસિક શાંતિ જણાશે, પણ આંખની કાળજી લેવી. ૨. લકી રંગ: લીલો | લકી આંક: ૫ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૮૫% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૮૮% ૫. શું ના કરવું: આજે પડોશીઓ સાથે વાદ-વિવાદ ટાળવો. ૬. શું કરવું: ગણેશજીને English (7) દૂર્વા અર્પણ કરવી. ૭. બુસ્ટર ટીપ: પક્ષીઓને ચણ નાખવી. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સવારે ૧૦:૪૫ થી ૧૦:૪૬. ૯. કર્મ કનેક્શન: વિદ્યાર્થીઓને અભ્યાસમાં મદદ કરવી. ૧૦. સંબંધો: ૮.૫/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: ધનુ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: લેખન અને કળામાં નવા આઈડિયાઝ લાભ કરાવશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ બુધાય નમઃ' | લીલા મગનું દાન. ૧૩. રોકાણ: શેરબજારમાં ટૂંકા ગાળાનો લાભ મળશે. ​૪. ♋ કર્ક (Cancer) ​૧. આરોગ્ય: ઠંડા પદાર્થો ખાવાનું ટાળવું, છાતીમાં જકડન રહી શકે. ૨. લકી રંગ: સિલ્વર | લકી આંક: ૨ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૬૫% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૭૦% ૫. શું ના કરવું: આજે વણમાગી સલાહ કોઈને ન આપવી. ૬. શું કરવું: શિવલિંગ પર દૂધ અને સાકરનો અભિષેક કરવો. ૭. બુસ્ટર ટીપ: માતાના આશીર્વાદ લઈને નીકળવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: રાત્રે ૯:૧૦ થી ૯:૧૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: જળનું દાન અથવા પરબમાં મદદ કરવી. ૧૦. સંબંધો: ૭/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: કુંભ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: પરિવાર સાથે સાંજનો સમય આનંદમય રહેશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ નમઃ શિવાય' | સફેદ વસ્ત્રનું દાન. ૧૩. રોકાણ: આજે રોકાણ ટાળવું હિતાવહ છે. ​૫. ♌ સિંહ (Leo) ​૧. આરોગ્ય: પિત્ત અને ગરમીને કારણે બેચેની થઈ શકે. ૨. લકી રંગ: કેસરી | લકી આંક: ૧ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૯૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૯૫% ૫. શું ના કરવું: આજે અહંકારમાં કોઈનું અપમાન ન કરવું. ૬. શું કરવું: સૂર્યનારાયણને તાંબાના લોટામાં જળ ચઢાવવું. ૭. બુસ્ટર ટીપ: કપાળે લાલ તિલક કરવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સવારે ૮:૦૦ થી ૮:૦૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: ગરીબ વ્યક્તિને ભોજન કરાવવું. ૧૦. સંબંધો: ૮.૫/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: વૃષભ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: નવી નોકરી કે પદમાં વૃદ્ધિના યોગ છે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ ભાસ્કરાય નમઃ' | ગોળનું દાન. ૧૩. રોકાણ: સરકારી બોન્ડમાં રોકાણ કરવું ઉત્તમ. ​૬. ♍ કન્યા (Virgo) ​૧. આરોગ્ય: જૂની બીમારીમાં રાહત જણાશે, સ્ફૂર્તિલા રહેશો. ૨. લકી રંગ: પોપટી | લકી આંક: ૩ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૮૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૮૫% ૫. શું ના કરવું: આજે ઉધાર લેવડ-દેવડથી બચવું. ૬. શું કરવું: માં સરસ્વતીની આરાધના કરવી. ૭. બુસ્ટર ટીપ: મોંમાં ઈલાયચી રાખીને કામ શરૂ કરવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: બપોરે ૧૨:૩૦ થી ૧૨:૩૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: અબોલ પશુઓની સેવા કરવી. ૧૦. સંબંધો: ૯/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: મીન રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: વેપારમાં નવી યોજનાઓ સફળ થશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ બુધાય નમઃ' | કપૂરનું દાન. ૧૩. રોકાણ: પ્રોપર્ટીમાં રોકાણ માટે સાનુકૂળ દિવસ. ​૭. ♎ તુલા (Libra) ​૧. આરોગ્ય: ત્વચા સંબંધી કાળજી લેવી, કોસ્મેટિક્સથી સાચવવું. ૨. લકી રંગ: ગુલાબી | લકી આંક: ૬ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૯૫% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૯૮% ૫. શું ના કરવું: આજે મોજ-શોખ પાછળ ગજા બહારનો ખર્ચ ન કરવો. ૬. શું કરવું: માં લક્ષ્મીને ગુલાબનું ફૂલ અર્પણ કરવું. ૭. બુસ્ટર ટીપ: પરફ્યુમનો ઉપયોગ કરવો. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સાંજે ૬:૪૫ થી ૬:૪૬. ૯. કર્મ કનેક્શન: જીવનસાથીને ભેટ આપી પ્રસન્ન કરવા. ૧૦. સંબંધો: ૯.૫/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: મેષ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: વૈવાહિક જીવનમાં મધુરતા આવશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ હ્રીં શ્રીં લક્ષ્મયૈ નમઃ' | સાકરનું દાન. ૧૩. રોકાણ: લક્ઝરી આઈટમ્સમાં રોકાણ શ્રેષ્ઠ રહેશે. ​૮. ♏ Scorpio (વૃશ્ચિક) ​૧. આરોગ્ય: માનસિક તણાવ અને થાક અનુભવાય, આરામ કરવો. ૨. લકી રંગ: મરૂન | લકી આંક: ૮ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૫૫% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૬૦% ૫. શું ના કરવું: વાહન ચલાવતી વખતે ઉતાવળ ન કરવી. ૬. શું કરવું: હનુમાન ચાલીસાના પાઠ કરવા. ૭. બુસ્ટર ટીપ: હનુમાનજીને તેલ ચઢાવવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સાંજે ૭:૫૦ થી ૭:૫૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: વૃદ્ધાશ્રમમાં મદદ પહોંચાડવી. ૧૦. સંબંધો: ૬/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: વૃષભ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: ગુપ્ત શત્રુઓથી સાવધ રહેવું. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ હં હનુમંતે નમઃ' | લાલ કાપડનું દાન. ૧૩. રોકાણ: આજે નવું રોકાણ ટાળવું. ​૯. ♐ ધનુ (Sagittarius) ​૧. આરોગ્ય: આત્મવિશ્વાસ વધશે, સ્વાસ્થ્ય ઉત્તમ રહેશે. ૨. લકી રંગ: પીળો | લકી આંક: ૩ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૯૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૯૫% ૫. શું ના કરવું: વડીલો કે ગુરુનો અનાદર ન કરવો. ૬. શું કરવું: મંદિરમાં પીળી વસ્તુ અર્પણ કરવી. ૭. બુસ્ટર ટીપ: કપાળે હળદરનું તિલક કરવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સવારે ૧૧:૧૫ થી ૧૧:૧૬. ૯. કર્મ કનેક્શન: સાધુ-સંતોના આશીર્વાદ લેવા. ૧૦. સંબંધો: ૯/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: મિથુન રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: ધાર્મિક યાત્રાના યોગ બની રહ્યા છે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ નમો ભગવતે વાસુદેવાય' | કેળાનું દાન. ૧૩. રોકાણ: સોનામાં રોકાણ અત્યંત શુભ. ​૧૦. ♑ મકર (Capricorn) ​૧. આરોગ્ય: સાંધા કે ઘૂંટણના દુખાવામાં રાહત જણાશે. ૨. લકી રંગ: નેવી બ્લુ | લકી આંક: ૪ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૭૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૭૫% ૫. શું ના કરવું: આજે આળસમાં સોનેરી તક ગુમાવવી નહીં. ૬. શું કરવું: શનિ દેવની આરાધના કરવી. ૭. બુસ્ટર ટીપ: ગરીબને ભોજન કરાવવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: સાંજે ૫:૩૦ થી ૫:૩૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: મજૂર વર્ગનું સન્માન અને મદદ કરવી. ૧૦. સંબંધો: ૮/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: કર્ક રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: નવી નોકરી કે પ્રોજેક્ટ મળી શકે છે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ શં શનૈશ્ચરાય નમઃ' | તેલનું દાન. ૧૩. રોકાણ: લોખંડ કે તેલના વેપારમાં રોકાણ કરવું. ​૧૧. ♒ કુંભ (Aquarius) ​૧. આરોગ્ય: પગમાં સોજા કે થાક અનુભવાય, આરામ કરવો. ૨. લકી રંગ: જાંબલી | લકી આંક: ૮ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૭૦% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૭૮% ૫. શું ના કરવું: નકારાત્મક વાતો અને ખોટી સોબતથી દૂર રહેવું. ૬. શું કરવું: હનુમાનજીને ગોળ-ચણા ધરાવવા. ૭. બુસ્ટર ટીપ: પક્ષીઓને પાણી પીવડાવવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: બપોરે ૩:૧૫ થી ૩:૧૬. ૯. કર્મ કનેક્શન: અનાથાલયમાં નાની મદદ પહોંચાડવી. ૧૦. સંબંધો: ૮/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: સિંહ રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: સામાજિક માન-સન્માન વધશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ શિવ શક્તિ નમઃ' | કાળા અડદનું દાન. ૧૩. રોકાણ: શેરબજારમાં સાવધાની રાખવી. ​૧૨. ♓ મીન (Pisces) ​૧. આરોગ્ય: માનસિક સુખ અને સંતોષ મળશે, ધ્યાન કરવું. ૨. લકી રંગ: સોનેરી | લકી આંક: ૩ ૩. ધનપ્રાપ્તિની સંભાવના: ૯૫% ૪. દિવસ કેટલા ટકા સારો?: ૯૯% ૫. શું ના કરવું: આજે કોઈની જામીન કે ગેરંટી લેવી નહીં. ૬. શું કરવું: ગીતાજીનો ૧૫મો અધ્યાય વાંચવો. ૭. બુસ્ટર ટીપ: કેસરવાળું દૂધ પીવું. ૮. ગોલ્ડન મિનિટ: બપોરે ૨:૪૦ થી ૨:૪૧. ૯. કર્મ કનેક્શન: બ્રાહ્મણ કે ગુરુની સેવા કરવી. ૧૦. સંબંધો: ૯.૫/૧૦ | કોની સાથે સંભાળવું?: કન્યા રાશિ. ૧૧. સ્પેશિયલ ટિપ: ભાગ્ય આજે સો ટકા સાથ આપશે. ૧૨. મંત્ર/દાન: 'ૐ ગુરવે નમઃ' | પીળા ફળનું દાન. ૧૩. રોકાણ: સોનામાં કે જમીનમાં રોકાણ અત્યંત શુભ. #રાશિફળ #આજનુંરાશિફળ #રાશિફળમાનસીદેસાઈશાસ્ત્રી #આજનુંરાંશીફળમાનસીદેસાઈશાસ્ત્રી #નેરી #Aner

महेश रौतेला

थोड़ा ही चले थे साथ-साथ शेष प्यार में चले, थोड़ा ही रहे थे साथ-साथ शेष प्यार में रहे। थोड़ा मिले थे साथ-साथ शेष मीलों अकेले चले, थोड़ा गाये थे साथ-साथ शेष मन ही मन गुनगुनाये। थोड़ी हुई थी भेंट शेष अलग-अलग चले थे, थोड़ा बैठे थे साथ-साथ शेष दूर-दूर रहे थे। *** महेश रौतेला

kattupaya s

Goodnight friends.. sweet dreams

Jyoti Gupta

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Muhammed Nisam Abukaltil Naripatta

"Murder on the Orient Express" മർഡർ ഓൺ ദി ഓറിയന്റ് എക്സ്പ്രസ് Episode -1 Story talk : Muhammed Nisam. N Book by Agatha Christie

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1KH2VoRvKU/ 🏃ચાલો🏃 😊 થોડુ 😊 😂હસીએ 😂

Chinmayee

Been struck inside a storm @chinmayeewrites890

mr swahit words official

*स्वप्न आणि वास्तव* काजळवेळ ही स्वप्नांची, डोळ्यांत साठवून येते, कधी अथांग आभाळ, तर कधी झेप घ्यायला लावते. स्वप्न म्हणजे फुलांचा गंध, जो मनाला मोहवून जातो, पण वास्तवाचा उन्हाळा, पावलांना जमिनीवर आणतो. स्वप्नात आपण 'राजे' असतो, इच्छेनुसार जग फिरवतो, पण वास्तवाच्या रणांगणात, प्रत्येक थेंब घामाचा गाळतो. धुंदी स्वप्नांची हवीच असते, उमेद मनाला देण्यासाठी, पण वास्तव पचवावे लागते, पुन्हा उभं राहण्यासाठी. दोघांच्या या खेळात शेवटी, एकच गोष्ट उरते हाती, स्वप्न जो पाहील डोळसपणे, त्याचीच होईल सुवर्ण माती.

બદનામ રાજા

કુદરતનું રમ્ય મૌન ઘડીભર મને મળે, કરવી છે વાત કંઈક તમારી જબાનમાં... 🌸

ek archana arpan tane

વગર પાર્થના એ મુરાદ પુરી થઈ જાય પિતાજી એ મંદિર નું નામ છે. - ek archana arpan tane

Arun V Deshpande

नमस्कार सर्वांना💐

Ritik

मोटी party से छोटा पैसा लेना और छोटी party से मोटा पैसा लेना; असली corruption है।”.

Mrugzal

રંગ છે તારો ને સંગ પણ છે તારો, એટલે જ નથી કોઈથી હું નોંધારો. - Mrugzal

Sapna

our parents never demands...They just expects..😌 Good grades, Great future and many more.. isn't it? 💯

Chaitanya Joshi

આમ ટાણાટંક વગરનું વરસવાનું સારું ન લાગે. ગમે ત્યારે અવની પર ખાબકવાનું સારું ન લાગે ક્યાં જવાય એનું પણ આપણને ભાન હોવું ઘટે ભરઉનાળાને કદીએ પડકારવાનું સારું ન લાગે. જ્યાં ન હોય પ્રતીક્ષા આપણી ત્યાં શું જાવાનું ઋતુવિણ આભે જઈ ગરજવાનું સારું ન લાગે. 'મા'શબ્દ લાગે છે તારા નામની આગળ હંમેશા ગરીમા એની ભલા ગુમાવવાનું સારું ન લાગે. વણનોતર્યા મહેમાન જેવી દશા થઈ છે તારી ને આવીને સ્વમાન ખુદનું ખોવાનું સારું ન લાગે. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Ruchi Dixit

एक बात जो समझाया समय ने मुझे, किसी का पूरा होने के लिए खुद का पूरा होना जरूरी है,,,- Ruchi Dixit

Ashwini Dhruv Khanna

Happy Navratri everyone

avani Shri Muktha

పచ్చని పల్లెల్లో పరిమళం పూసిన వేళ కొత్త ఆశలతో వచ్చిందే ఉగాది వేళ… చెడు, తీపి, కారం, పులుపు కలిసిన రుచిలో జీవితం సత్యం చెప్పే పచ్చడి లోతులో… వెలుగుల కిరణం లా కొత్త సంవత్సరం మనసుల్లో నింపే నూతన ఉత్సాహం… గతం గాయాల్ని మెల్లగా మర్చిపోమని భవిష్యత్తు కలల్ని మళ్లీ నింపమని… కోకిల గానం లో కొత్త స్వరం వినిపిస్తే మొక్కల ముక్కులో కొత్త పచ్చదనం పుడితే… అదే ఉగాది… ఆశల ఆరంభం ప్రతి మనసుకు ఇది కొత్త ప్రయాణం...

Ruchi Dixit

जिसने जैसा कहा खुद को वैसा मान लिया इससे बड़ा कसूर शायद मेरा नहीं था , खुद से उत्तर उत्तर मिला कहां बाहर सब ही विपरीत रहा - Ruchi Dixit

Ruchi Dixit

चींटी भोजन को पहली बार देखकर अत्यंत उत्साहित हो जाती है मगर भोजन पर टूटती नहीं बल्कि वह अपने अन्य साथियों को बुलाकर ले आती है और साथ में मिलकर भोजन इकट्ठा करती है,,, - Ruchi Dixit

swarnima varshney

poetry ❤️✨

Pankaj Goswamy

हल्ला मचा है धन कमाने का शहर में, सुकून की अमीरी देखी है मैंने गाँव में। भाग-दौड़ में रिश्ते अक्सर छूट जाते हैं, समय ठहर-सा जाता है अब भी गाँव में। ऊँची इमारतें तो आसमान छू लेती हैं, झुककर सलाम करती है धूप भी गाँव में। चेहरों पे नकाबों की परतें चढ़ी मिलीं, सादा-सा दिल धड़कता है खुलकर गाँव में। शहरों की चमक आँखों को भा तो जाती है, आत्मा को सुकून मिलता देखा है मैंने गाँव में। थककर जब लौटता हूँ भीड़ के समंदर से, माँ सी ठंडी छाया मिलती है गाँव में। रंगों की बरसात भी फीकी लगे शहर में, माटी की खुशबू संग भीगी है होली गाँव में। 'कल्प' ने देखा है सच दोनों जहाँ का, सोना बहुत मिलेगा, पर चैन है गाँव में ॥ - पंकज गोस्वामी 'कल्प'

Falguni Dost

મા ભોમની ભીતરની વેદના ભભૂકી ધૂળિયા વંટોળથી થયું ધૂળધાણી આભ પરથી વર્ષી બરફની વર્ષા દોસ્ત! શીદને એમ ઠરે ભીતરની વેદના? - ફાલ્ગુની દોસ્ત

Chaitanya Joshi

જગત આખું મિથ્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના. અકારણ જાણે મથ્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના ખજાનો જ્ઞાનનો મગજમાં ભરી દીધો અમે તો, તોય તારી ખાલી જગ્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના. ગજાવી સભાઓ અમે પ્રવચનો કરી કરીને કેટલા, ભાસે કે કંઈક ચૂક્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના. થયા લોકપ્રિય કેટલા અમે શબ્દો તણા સહારા, થકી, રખેને ખોટું સમજ્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના. હોય એ મબલખ પૈસા અને સુખ સુવિધાઓ વળી, એમાં પણ છેતરાયા લાગે તારા સ્મરણ વિના. વીતી ગઈ જિંદગી આમને આમ શોધખોળમાં, કાચને પારસ ગણાવ્યા લાગે તારા સ્મરણ વિના. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક ' પોરબંદર.

Narayan

कुछ तो कशिश है तेरी चाहत में, यूँ ही नहीं रहते हम हरदम तेरे ख्यालों में....✍️

Raa

mere hamesa hiro rahe ho sir

Mamta Trivedi

कविता का शीर्षक है 🌹 सपनों के मोती https://youtu.be/7gwcdK9E_6s?si=0wmBPAbG2SXRTN_W

Imaran

कई बार ख्याल बुरे सपनों का खुद-को, जगा-कर मिटा लिया.. गर लगी चोट तो निशानों पर मरहम, लगाकर मिटा लिया.. वो दाग तो मिट गए, जिन जख्मों का असर कम था.. कुछ दर्द शराब से और कुछ को अपने शब्दों से गा कर मिटा लिया.. 💔imran 💔

Rajesh Pali

तुम्हारे बारे में और क्या बताऊँ लोगों को, लोग कहते हैं, तू तो प्यार में पागल हो गया है।

Rajesh Pali

तेरी ज़ुल्फो की छाँव में, तेरे अधरों की छूअन में, तेरी नाजुक कलाई में, तेरी सांसों की गहराई में, तेरी पायल के संगीत में, तेरी बिंदिया की चमचमाहट में, खोया हुआ हूँ मैं।

Rajesh Pali

तुम्हारा जिस्म छुआ था कल ख़्वाब में मैंने, संगमरमर के सरीखा नाजुक और मुलायम, अब भी हक़ीक़त में मेरी उंगलियाँ काँप उठती हैं। जब भी तेरा एहसास होता है। - Rajesh Pali

joydeep roy

বসন্ত মালতী ফুটিল সেউতি উঠিল কেতকী গা ঝাড়া দিল, সুরেলা কোকিলে গলা কাঁপাইয়া বনের বারতা দিল। বকুল ছড়াল তারা একঝাঁক মাদার ফাগুয়া খেলে, ফুলঝাড় রেখে রাত চলে যায় পদ্ম চক্ষু মেলে। করবীর কলি মৌ-কণা গড়ে ভূমি ফুটাইল চাঁপা, হলদে চড়াই মধুতে মাতাল নর্তনে করে কৃপা।

Ritik

अगर कभी दुनिया के सभी पागल अपनी कहानी सुनाने लगें तो शायद पागलखानों की जरूरत ही न पड़े। उनको अलग शायद इसलिए ही रखा जाता है ताकि उनकी कहानी किसी को पता ही न चल सके।

Ritik

जिस दिन भी हम केवल name के हिसाब से जीना शुरू कर दें तो दुनिया की उम्र थोड़ी बढ़ जाएगी।

Rinal Patel

માંઁ જગત જનની માતા કદાચ એટલે જ કહેવાતી હશે કારણ કે એને આદિઅનંત આદ્ય દેવો પણ નમન કરે છે. અંતરની દ્રષ્ટિએ Rinall.

बिट्टू श्री दार्शनिक

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Raju kumar Chaudhary

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Shailesh Joshi

કોઈપણ ચિંતા એટલી મોટી નથી હોતી, જેટલી વિચારોમાં વર્તાય છે, છતાંય... એનો સાચો ખ્યાલ તો ત્યારેજ અનુભવાય છે, કે જ્યારે કાંતો એ ચિંતાનો સામનો કરાય છે, કે થાય છે, અને કાંતો કંઈપણ કર્યા વગર માત્ર એ ચિંતામાંને ચિંતામાં લાંબો સમય વહી જાય છે. - Shailesh Joshi

Ashish jain

*॥ करुणा के कल्पतरु: महावीर ॥* कुण्डलपुर के राजमहल में, करुणा का केतु लहराया, सिद्धार्थ-त्रिशला के आँगन, अमृत-अंशु उतर आया। त्याग दिया कंचन-काया को, कनक-मुकुट भी बिसराया, अरिहंत हुए वे धीर वीर, जिसने निज आतम को पाया। *अहिंसा का अलौकिक रूप* अहिंसा उनकी ऐसी थी, ज्यों शशि की शीतल छाया हो, प्राणी मात्र के प्रति मन में, बस ममतामयी माया हो। पदचाप पड़े जिस धरती पर, वह भूमि भी पुलकित होती थी, हिंसक पशुओं के नेत्रों में, अश्रु-माल पिरोती थी। तप की ज्वाला में जलकर वे, कुंदन-सम चमक उठे ऐसे, अंधियारे जग के जीवन में, सूरज संभल उठे जैसे। *वाणी का सौंदर्य* उनकी वाणी हितकारी थी, शहद-धार से मीठी थी,मित-भाषण का वह मर्म अनूठा, जीवन-कला की चिट्ठी थी। बोल वही जो प्रिय लागे, और पीर पराई हर लेवे, शब्द-बाण न चला कभी, जो अंतर-मन को जर देवे।वाणी में वीणा बजती थी, सत्य-सुधा झड़ती जिससे, भटके हुए राही को भी, मंजिल मिल जाती तिससे। *अंतिम संदेश और वंदना* "जियो और जीने दो" का, मंत्र गूँजता अंबर में, शांति-दूध की धार बही है, आज विश्व के अंतर में। पंच महाव्रत के पथ पर, जो पग अपने धर देता है, वह बाह्य जगत को छोड़, स्वयं को ईश्वर कर देता है। नमन करे 'आशीष' उन्हें, जो ज्ञान-सिंधु के स्वामी हैं, अहिंसा के उस महाप्रतीक को, जो अंतर्यामी हैं। नमन करे 'आशीष' उन्हें... एड.आशीष जैन 7055301422

Adv Arun Mishra

सभी सम्मानित प्रिय भाई ओर बहनों को चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं जय माता दी 🙏🙏🙏

Shefali

#shabdone_sarname__

Anup Gajare

"नाम विरहित प्रार्थना" ___________________________________________________ अंतरिक्ष में भटकता नाम विरहित ग्रह जिसके पास कोई प्रकाश नहीं। आवारा दुनिया में बोझ नहीं होता लेकिन हर एक पास अपनी एक आकाशगंगा होती है जिसमें तारों को गुलामों की तरह इस्तमाल किया जाता है। चुंबकीय बल न होने पर भी रौशनी जन्म ले सकती है। प्रार्थना के पत्र अंतरिक्ष के कचरे से ज्यादा गुणा है और अचरच कि बात ये अलग अलग नहीं है किसी भी भाषा में इनका मतलब है हम फंस चुके हैं हे प्रभु, या कोई भी अगर वहां मौजूद हो हमें छुड़ाओ। गति रुकी हुई दुनिया फिर भी अपनी पारिवारिक माहौल में कोई खोज कर रही है। परिवार सबसे बड़ा झूठ है कहा से निर्माण हुआ जा कहा रहे हो बस सवाल की कस्ती भटक रही है उसी नाम विरहित पत्थर की तरह। धड़कन बंद है फिर भी चलती हुई सांस रुकने का नाम नहीं ले रही ये जिंदगी नहीं है न ही इसे मौत कहा जा सकता है। काली बर्फ के नीचे ऑक्सीजन की खिड़कियों में बस निर्वाण ही तैर रहा है। पेट्रोल पंप पर हज़ार प्रकाश वर्ष दूर कोई महंगाई की तकरार कर रहा ऊब चुका है। हाथों में पकड़े ठंडे चांद को सूरज के रक्तिम गोले में घोलकर शाम को हमेशा ही कोई बच्चा चूसता रहता है। सब धोखा है बस कोई धोखा नहीं वह जगह एक ही है ऐसी कोई जगह ही नहीं है उसी जगह मरे हुए लोग कभी-कभी अपनी मीठी अनंत निंद के चलते भूल जाते हैं कि उनके होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता नाटक चलता रहता है पर्दा गिरता नहीं बस उठता है दूसरी नींद में प्रवेश होने के लिए। नींद के भीतर एक और नींद का दरवाज़ा है जहाँ सपने नहीं आते बल्कि सपनों की हड्डियाँ रखी होती हैं। कोई उन्हें चबाता नहीं बस गिनता है जैसे कोई बूढ़ा खगोलशास्त्री मर चुके तारों की संख्या याद कर रहा हो। वहाँ समय नहीं बहता वह जमा रहता है किसी जमे हुए खून की तरह जिसे कोई छूने से डरता है क्योंकि छूते ही वह फिर से बहने लगेगा। एक आवाज़ है जो सुनाई नहीं देती फिर भी हर शून्य उसी से भरा है। वह पूछती नहीं वह बताती भी नहीं बस उपस्थित रहती है— जैसे गलती से बचा हुआ सत्य। उंगलियों के बीच से फिसलती हुई दिशाएँ अपने ही नक्शे खा चुकी हैं अब कोई उत्तर उत्तर नहीं रहा। दक्षिण ने खुद को निगल लिया है पूर्व पश्चिम की स्मृति में सड़ रहा है। और बीच में एक बिंदु है— जो कहीं नहीं है लेकिन हर जगह से देखा जा सकता है। वहीं बैठा है एक और “मैं” जो मुझे देख रहा है जैसे मैं उसे लिख रहा हूँ। हम दोनों में से कौन असली है यह तय करने के लिए कोई तीसरा नहीं है। और शायद यही सबसे बड़ा सबूत है कि हम दोनों ही गलत हैं। एक पुराना शरीर अपनी ही परछाई को कंधे पर ढोता हुआ उस बिंदु के चारों ओर चक्कर काट रहा है। उसे लगता है वह आगे बढ़ रहा है लेकिन उसके पांव वहीं धँस चुके हैं जहाँ से उसने पहला सवाल पूछा था। प्रार्थनाएँ अब शब्द नहीं रहीं वे अधूरे इशारों में बदल चुकी हैं— कटी हुई उंगलियों की तरह जो अब भी किसी दिशा की ओर इशारा कर रही हैं। लेकिन दिशा… अब कोई जवाब नहीं देती। एक क्षण के लिए सब कुछ रुकता है— इतना रुकता है कि रुकना भी अपनी परिभाषा खो देता है। और उसी क्षण एक हल्की दरार पड़ती है अस्तित्व के कांच में। उस दरार से ना प्रकाश आता है ना अंधकार— बस एक संभावना जो खुद को साबित नहीं कर पाती। कोई उसे “ईश्वर” कहता तो शायद वह तुरंत मर जाती। इसलिए वह बिना नाम के ही जिंदा है। और वही सबसे बड़ी प्रार्थना है जिसे कभी कहा नहीं गया। __________________________________

Ashish jain

॥ बाहुबली महाबली ॥ रणभेरी बजी, धरा कांपी, अंबर में घोर निनाद हुआ, दो वीरों का, दो भाइयों का, रण-मद में महाविवाद हुआ। इक ओर चक्रवर्ती भरत, सेना का पारावार लिए, दूजी ओर बाहुबली खड़े, निज भुजदंडों का सार लिए। अरिहंत-पुत्र, समरांगण में, ज्यों महाकाल अवतारे थे, सौ योजन चौड़ी छाती थी, या पर्वत के कगार थे? जब उठी मुष्टिका अंबर को, थर-थर बुजदंड कपांयमान, सुर-असुर, देव-गंधर्व सभी, रह गए देखकर हक्का-बक। दृष्टि-युद्ध में तेजपुंज, ज्यों रवि ने रश्मि त्यागी हो, जल-युद्ध में वेग प्रचंड, मानो सागर ने मर्यादा लांघी हो। मल्ल-युद्ध में जब भिड़े वीर, सिंहों का जैसा नाद हुआ, भरत का चक्र भी कुंठित था, यह अचरज भरा संवाद हुआ। थी शक्ति अपार, विजय द्वार, बस एक प्रहार की दूरी थी, अहंकार शीश पर चढ़ा हुआ, प्रतिशोध की ज्वाला पूरी थी। पर तभी, तभी इक क्षण को, चेतना जगी, अंतर्मन जागा, यह राज-पाट, यह मोह-जाल, क्षणभंगुर सब, मिथ्या भागा। "धिक्कार! विजय यह कैसी है? अपनों के लोहित तर्पण पर? क्या यही अंत है जीवन का? मिट जाना सिंहासन पर?" उठी मुष्टिका जो वध को, वह लोच-मुंड को मुड़ गयी, क्षणभर में चक्रवर्ती की सत्ता, धूलि में उड़ गयी। महाबली ने त्यागा पल में, वह सब जो जग को प्यारा है, साम्राज्य, कोष, वैभव सारा, तिनके सम वारा है। खड़े हुए गोमट्टेश्वर, निश्चल, ज्यों अचल हिमालय हों, भुजदंडों पर बेलें लिपटीं, सर्पों के ज्यों आलय हों। एक वर्ष तक अडिग खड़े, नयन बंद, तप में लीन रहे, शीत-घाम, दंश-विष, सब सहे, पर निज आत्म-लीन रहे। जीता न कोई बाहुबली को, पर वे स्वयं से जीत गए, अहंकार का मस्तक मर्दन कर, वे सिद्ध-लोक को रीत गए। वह वीर नहीं जो रण जीते, वह वीर जो मन को जीत सके, बाहुबली! तुम वो महाबली, जो हर युग की प्रीत बने। त्याग और वैराग्य के स्वामी, नमन तुम्हें शत-शत बार, तुम सा न कोई हुआ वीर, न होगा यह जग-संसार। Adv. आशीष जैन 7055301422

Neha kariyaal

और सब कुछ ख़त्म होते देख... समझ आया "कभी सेहत से ऊपर कुछ था ही नहीं"

Dada Bhagwan

એક એકને ખીલવે માડી, જોઈ પ્રકૃતિ પાર, શૂન્યમાંથી સર્જન કરી દે, આશ્ચર્ય સર્જાય! પૂજ્ય નીરુમાનાં પુણ્યતિથિના અવસરે, ચાલો એમના વિશે વધુ જાણીએ: https://dbf.adalaj.org/Pk0rXleJ #spirituality #spiritualjourney #punyatithi #deathanniversery #DadaBhagwanFoundation

archana

मैंने कई जगह देखा है—चाहे कुछ घरेलू महिलाएँ हों या कम पढ़ी-लिखी महिलाएँ— वे अक्सर उन महिलाओं को गलत समझ लेती हैं जो साफ-साफ और तर्क के साथ अपनी बात रखती हैं। अगर कोई महिला समझदारी से, स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह दे, तो उसे जल्दी ही “बहुत बोलने वाली” या “बदतमीज़” कह दिया जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि साफ और तर्क के साथ बात करना बदतमीज़ी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है। कई बार लोग उस बात को समझ नहीं पाते जो उनकी सोच से अलग होती है, इसलिए वे उसे गलत नाम दे देते हैं। लेकिन सच यही है कि ज्ञान और समझ रखने वाला व्यक्ति अपनी बात स्पष्ट कहता है, और जो सुनने की आदत नहीं रखते, उन्हें वही बात बुरी लगती है। - archana

Saroj Prajapati

मुड़ कर जो देखूं पीछे बस तेरी रहमतें ही बिखरी नजर आती है जिंदगी के हर मोड़ पर, तू हरदम साथ निभाती है ठोकर लगने से पहले ही तू आगे बढ़ संभाल लेती है अब तक रहा करम तेरा, आगे भी बनाए रखना मां! अपने बच्चों के सिर पर सदा,अपनी छांव बनाए रखना मां ।। 🌸🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌸 सरोज ✍️ - Saroj Prajapati

Anjali Singh

अपने ही जब दर्द दे जाएं, तो शिकायत गैरों से क्या करें, जिनसे उम्मीद थी मरहम की, वहीं जख्म दे जाएं… तो क्या करें।

kattupaya s

என்னுடைய இரண்டு சிறுகதைகள் matrubharti யில் 22/3/26 மற்றும் 23/3/26 அன்று வெளியாக உள்ளது. தவறாமல் வாசிக்க வேண்டுகிறேன். உங்களது அன்புக்கும் ஆதரவுக்கும் நன்றி.

kattupaya s

Two of my short stories will going to be published on matrubharti on 22/3/26 and 23/3/26.please read the stories and expecting your support and love.

Anjali Singh

हाथ में दीया लेकर बॉयफ्रेंड ढूंढने निकली हूँ मैं, किस्मत भी कमाल करती है। हवा इतनी तेज़ चलती है कि हर बार दीया ही बुझा देती है! 🕯️💨😂 – A Singh

Saliil Upadhyay

હિન્દુ નવવર્ષ ની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ 💐💐 અને આજ થી શરૂ થતા ચૈત્રી નવરાત્રી ની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ અને માતાજી તમારી બધી મનોકામનાઓ પુરી કરે 💐 જય માતાજી 🙏🏻💐

SAYRI K I N G

हम तो कर्ण जैसे है स्वयं नारायण हमको हराने पर अड़े है

Chaitanya Joshi

માં શૈલતનયા. શરણાગત છીએ માં શૈલતનયા. ભજનરત છીએ માં શૈલતનયા. દુ:ખહર્તા સુખદાયની માતા; સ્મરણ સેવકને સુખદાતા. વંદન શતશત માં શૈલતનયા. આદ્યશક્તિ માં કરુણાકારી, કરોને દયા તમે હેત પ્રસારી. તમે રાખોને પત માં શૈલતનયા. શિવા સ્વરૂપ માં અંતરયામી, વિનવું માં તમને શીશ નમામી. પ્રનવઉ શરણાગત માં શૈલતનયા. બુદ્ધિ દેજો શક્તિ દેજો માં તમે, ભક્તિ દેજો અનુરક્તિ દેજો તમે. રહે મસ્તક ઉન્નત માં શૈલતનયા. -ચૈતન્ય જોષી દિપક, પોરબંદર.

Sonu Kumar

धनवापसी पासबूक क्या है? इससे कैसे देश की गरीबी खत्म हो जाएगी? . धन वापसी पासबुक एक प्रस्तावित क़ानून है जो भारत के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य खनिजो का राष्ट्रीयकरण करके इसे भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित करना है, ताकि भारत की रीढ़ की हड्डी टूटने से बचाया जा सके। इसका एक स्वत: प्रभाव यह भी होगा कि भुखमरी दूर होगी, और एक सीमा तक गरीबी में भी कमी आएगी। . ( गरीबी दूर करने के लिए धनवापसी के अलावा हमें पुलिस-अदालतें एवं टेक्स के क़ानून दुरुस्त करने के लिए जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर लागू करने की भी जरूरत है, ताकि बड़े पैमाने पर छोटे एवं मझौले स्तर के कारखाने लगने का रास्ता साफ़ हो सके। ) . (1) खनिजो की लूट से क्या आशय है ? . पिछले 400 वर्षो से खनिज ऐसा क्षेत्र में जिसमें भ्रष्टाचार कम और सीधी लूट ज्यादा है। खनिजो को लूटने वाला वर्ग इतना ज्यादा ताकतवर है कि इस लूट में छोटी मछलियों के आने की कोई गुंजाईश ही नहीं है। यहाँ लड़ाई सीधी शार्को के बीच है। उदारहण के लिए ईस्ट इण्डिया कम्पनी खनिज लूटने के धंधे में थी। . पेड मीडिया के प्रायोजक यानी अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता पिछले 400 सालों से यह कारोबार कर रहे है। पहले उन्होंने निर्णायक हथियार बनाए और फिर उन्होंने माइनिंग कंपनियां भी खोली। आज भी खनन के बहुत सारे ऐसे क्षेत्र में जिसमें काफी आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल होता है। और ये मशीने सिर्फ कुछ गिनी चुनी कंपनियों को ही बनानी आती है। माइनिंग से बड़े पैमाने पैसा वही बना सकता है, या खनिज वही लूट सकता है जिसके पास ये मशीनरी हो। . उदाहरण के लिए, तेल निकालने की तकनीक दुनिया में सिर्फ 25-30 कंपनियों के पास ही है। तो जिस कम्पनी को इन कम्पनियों के मालिक ये मशीनरी देते है, वही कम्पनी खनिज निकाल पाती है। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध कोयले, कच्चा तेल और स्टील के लिए लड़ा गया। खाड़ी युद्ध भी कच्चे तेल के लिए हुआ था। ब्रिटिश-फ्रांसिस संघर्ष का कारण भी खनिज थे। अभी ईरान पर भी जो युद्ध आने वाला है, वह भी खनिज (तेल) के लिए है। . डेमोक्रेसी आने से पहले तक पेड मीडिया की प्रायोजक (हथियार निर्माता) किसी देश के खनिज लूटने के लिए सीधे सेना का इस्तेमाल करते थे। डेमोक्रेसी आने के बाद वे पेड मीडिया एवं युद्ध की धमकी देकर पहले पीएम को कंट्रोल करते है और फिर कानूनी रूप से खनिज लूटते है। और जो पीएम खनिज बचाने के लिए जाएगा उसे अंततोगत्वा युद्ध में जाना पड़ेगा। कोई दया नहीं, कोई अपवाद नहीं !! दुसरे शब्दों में, खनिज को लेकर जो संघर्ष होता है, उसका निर्णय युद्ध से ही होता है। . तो पेड मीडिया के प्रयोजको से सारा टकराव खनिजो की लूट को लेकर ही है। उन्हें खनिज लूटने है सिर्फ इसीलिए वे इतने बड़े मीडिया का खर्चा उठाते है, और उठा पाते है। यदि वे मुफ्त के खनिज नहीं लूट पाएंगे तो पेड मीडिया का घाटा भी नहीं उठा पायेंगे। . उन्हें खनिज लूटने है इसीलिए वे राजनैतिक पार्टियों का खर्चा उठाते है, और उन्हें स्पोंसर करते है। उन्हें खनिज लूटने है इसीलिए उन्हें पीएम पर कंट्रोल चाहिए, जजों पर कंट्रोल चाहिए, पुलिस पर कंट्रोल चाहिए। उन्हें खनिज लूटने है, इसीलिए वे नागरिको को हथियार विहीन रखना चाहते है, और यह भी चाहते है कि अमुक देश अपने हथियारों का उत्पादन स्वयं न कर पाए। सार यह है कि सारी वैश्विक लड़ाई सिर्फ मुफ्त के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों को लेकर है। . स्टेंडर्ड ऑइल का उदाहरण देखिये। यह कम्पनी खनिज लूटने में अग्रणी कम्पनी रही है। ऑइल रिफायनिंग की इस कम्पनी को 1870 में रोकेफेलर ने बनाया था, और 1911 में इसे कई हिस्सों में विभाजित करके भंग कर दिया गया। 1910 तक दुनिया का 70% तेल यही कम्पनी खोद रही थी। आज भी दुनिया का 40% तेल इसी के कब्जे में है। हालांकि अब इस कम्पनी की सभी सबसिडरी कम्पनीयों को ट्रेक करने में आपको 2-3 घंटे गूगल करना पड़ेगा !! अम्बानी की रिफायनिंग स्टेंडर्ड ऑइल की सबसिड़री कम्पनी की मशीनों पर ही चलती है। और इसी तरह से ये कोयला, लोहा, ताम्बा से लेकर सभी महत्त्वपूर्ण खनिज खोदते है। Standard Oil - Wikipedia . और मझौले स्तर पर मित्तल, वेदांता, टाटा, जिंदल से लेकर अम्बानी, बिरला अडानी तक ऐसे कई कारोबारी है तो खनिजो की लूट के धंधे में है। . खनिजो की लूट इतने खुले तौर पर और इतनी सफाई से की जाती है, कि पूरे देश को मालूम ही नहीं होता कि किस पैमाने पर खनिज लूटे जा रहे है। पेड मीडिया इस बिंदु को टच ही नहीं करता। ज्यादा से ज्यादा वे स्थानीय स्तर पर हो रहे बजरी, पत्थर आदि चिल्लर किस्म के खनिजो का मुद्दा उठाते रहते है, ताकि बड़ी लूट को चर्चा से बाहर रखा जा सके। . 2019 में आवंटित की गयी कुछ कोयला खदानों का उदाहरण देखिये। निचे दिए गए आंकड़े भारत सरकार की अधिकृत वेबसाईट से लिए गए है — Coal Mine Allocation . 154 रू प्रति टन 156 रू प्रति टन 185 रू टन 230 रू प्रति टन 715 रू प्रति टन 755 रू प्रति टन 1100 रू प्रति टन 1230 रू प्रति टन 1674 रू प्रति टन . दरों में इस तरह की भिन्नता क्यों ? 154 रुपये से 1674 रुपये !! लगभग 11 बार !! एक वैध कारण यह है कि -- कोयले की गुणवत्ता में संभावित भिन्नता है। लेकिन यह एक मात्र कारण नहीं है। दूसरा और वास्तविक कारण यह है कि - कई मामलों में गठजोड़ बनाकर नीलामी की शर्तों को इस तरह से ड्राफ्ट किया जाता है ताकि लक्षित कम्पनी को चिल्लर दामों में माइनिंग राइट्स दिए जा सके। . इस कारण को समझने के लिए सलंग्न तस्वीर देखें — कोयला मंत्रालय की वेबसाईट बताती है कि, कोई भी बोली लगा सकता है, लेकिन साथ में उन्होंने यह शर्त भी जोड़ी है कि अंत में उनके पास स्टील या सीमेंट का संयंत्र होना चाहिए। . तो प्रत्येक "खुली नीलामी" में इन शर्तों के अलावा भी वे ऐसी कई शर्तें जोड़ते है, जो कहती है कि यदि आपके पास संयंत्र हो तो इसे अमुक खदान से अमुक दूरी पर ही होना चाहिए !! और अमुक संयंत्र को इतनी उतनी क्षमता का होना चाहिए। तो अंत में सिर्फ वे कुछ बड़े खिलाड़ी ही बोली लगा सकेंगे जिन्हें लाभ देने के लिए यह शर्त जोड़ी गयी थी !! तो इस तरह वे कार्टेल बनाते हैं और कीमतों को कम बनाए रखते है। इसके अलावा, माइनिंग ब्लॉक का आकार इतना बड़ा रखा जाता है कि छोटे खिलाड़ी इसमें प्रतिभागी न बन सके। . यदि हम क़ानून छापकर इस कार्टेल को तोड़ देते है तो ज्यादा प्रतिष्ठान बोली लगाने आयेंगे और हमें सभी खदानों के लिए 1600 रुपये प्रति टन के हिसाब से रॉयल्टी मिलेगी। धनवापसी पासबुक का क़ानून इसी तरह के गठजोड़ एवं कार्टेल बनाने की प्रक्रिया को तोड़ने के लिए लिखा गया है। . अभी यहाँ से भ्रष्टाचार शुरू हुआ है। अगले स्तर का भ्रष्टाचार और भी व्यापक है। वे जितना खनिज निकालते है, उसका सिर्फ 10-20% ही रॉयल्टी चुकाते है। राइट्स लेने के बाद ज्यादातर खनिज अवैध रूप से निकाल लिया जाता है। इसकी कहीं एंट्री नहीं होती, और इसीलिए उन्हें रॉयल्टी भी नहीं चुकानी पड़ती !! वे सीधे मंत्रियो / जजों आदि को हफ्ता पहुंचा देते है, और मंत्रियो का आदेश आने के बाद कोई खनिज अधिकारी उनकी माइंस को सुपरवाइज करने कभी नहीं जाता !! तो उन्हें जितने इलाके की माइंस मिलती है वे उससे 5 गुना ज्यादा अतिक्रमण करके खनिज निकालते है। . उदाहरण के लिए जिंदल को 2010 में भीलवाड़ा में माइंस आवंटित हुयी थी। और जिंदल ने सभी नियमों की धज्जियाँ उड़ा कर खनिज निकाले। माइंस से लगे हुए कस्बे (पुर) की हालत यह है कि वहां के नागरिको को कस्बे से पलायन करना पड़ा। लगभग 300-400 मकान इस हद तक क्षतिग्रस्त हो चुके है कि उन्हें अपने मकान छोड़कर अन्य जगहों पर किराए पर रहना पड़ रहा है। NGT takes Jindal Saw's Bhilwara unit to task for non-compliance | Jaipur News - Times of India . पिछले 7 साल से भीलवाड़ा में जिंदल को भगाने का अभियान चल रहा है। बार बार धरने, प्रदर्शन, जुलुस, ज्ञापन वगेरह होते है, किन्तु खनन जारी रहता है। सभी पेड मीडिया पार्टियों के नेता समय समय पर जिंदल के खिलाफ प्रदर्शन का ड्रामा करते रहते है। . ड्रामा इसीलिए क्योंकि पेड मीडिया पार्टियो के ये सभी नेता खनिजो की इस लूट को रोकने के लिए आवश्यक क़ानून का विरोध करते है। यदि पेड मीडिया पार्टियों के नेता धन वापसी पासबुक क़ानून को गेजेट में छापने की मांग करेंगे तो पहला नुकसान यह होगा कि पेड मीडिया इन्हें कवरेज देना बंद कर देगा, और दूसरा नुकसान यह होगा कि, जिंदल उन्हें चंदा / घूस देना बंद कर देगा। तो ड्राफ्ट विहीन मांग को लेकर जनहित याचिकाओ एवं हवाई विरोध प्रदर्शन के ड्रामें चलते रहते है। और भीलवाड़ा में समाधान को टालने के लिए समस्या उठाने का यह ड्रामा पिछले 7 वर्षो से चल रहा है !! . और भारत में इस तरह की हजारो ( हाँ, सैकड़ो नहीं हजारो) माइंस है, जहाँ इसी तरह की लूट चल रही है। इस लूट का कोई हिसाब-किताब लेखा जोखा नहीं। औसतन 100 रू के खनिज 20 रू में खोद लिए जाते है। तो यहाँ भ्रष्टाचार नहीं है, सीधी लूट है। . उदाहरण के लिए जब ब्रिटिश भारत से गए तो टाटा को कई सारे माइनिंग राइट्स फ्री में देकर गए थे, और उनमें से एक माइंस की खबर सामने आने में 70 साल लग गए। टाटा के पास झारखण्ड में 25 पैसे एकड़ के हिसाब से कोयला खोदने के राइट्स है !! मतलब वह साल का 1 रूपया चुकाता है, और मर्जी पड़े जितना कोयला निकालता है। आज तक भारत में एक भी प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं हुई कि वह टाटा को नोटिस भेजकर 25 पैसे की जगह 50 पैसे कर सके !! बाजार भाव की तो बात ही भूल जाइए !! ( बाजार भाव 1500 से 2000 रू टन है ) . सारी निर्माण इकाइयां, कारखाने, औद्योगिक विकास आदि कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता पर निर्भर करता है। दुर्भाग्य से भारत में खनिजो की पहले से कमी है। इसी खनिज को लूटने के लिए ब्रिटिश-फ़्रांसिस साम्राज्य भारत में आये। जब भारत आजाद हुआ तो नागरिको ने यह मांग की थी कि भारत के प्राकृतिक संसाधनों को भारत के समस्त नागरिको की संपत्ति घोषित करो। किन्तु जिन लोगो के हाथ में सत्ता आयी थी वे नागरिको की इस संयुक्त संपत्ति को खुद के कब्जे में रखना चाहते थे। अत: उन्होंने इन संसाधनों को सरकारी अधिकार में ले लिया। . और आज सरकारे जो खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन लुटा रही है, वह भारत के समस्त नागरिक की संपत्ति है। यदि हमारे पूर्वजो ने अंग्रेजो से लोहा लेकर उन्हें यहाँ से नहीं भगाया होता तो यह संपत्ति बचती नहीं थी। . यदि भारत के नागरिक यह क़ानून लाने में सफल नहीं होते है तो जल्दी ही भारत के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन (प्राकृतिक संसाधन में जमीन स्पेक्ट्रम आदि भी शामिल है) लूट लिए जायेंगे। और यदि एक बार हमने प्राकृतिक संसाधन गँवा दिए तो भारत औद्योगिक विकास के लिए हमेशा के लिए परजीवी हो जाएगा। क्योंकि जो देश कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है उसकी रीढ़ हमेशा के लिए टूट जाती है। धनवापसी क़ानून इस लूट को रोक देगा। . ———— . (2) समाधान - प्रस्तावित धनवापसी पासबुक . इस क़ानून का सार : इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा हर महीने सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। . खनिजो की नीलामी करके पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी धन वापसी पासबुक में दायरे में होगा और नागरिक पटवारी कार्यालय में जाकर उसे नौकरी से निकालने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। यदि खनिज अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपला करने की या अन्य कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जज के पास न होकर आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। यह क़ानून देश की सभी खदानों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है। . इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। . (1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी। . (2) यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी। स्पष्टीकरण : खनिज रॉयल्टी के रूप में मिलने वाली यह राशि सरकार की तरफ से दिया गया अनुदान या सहायता नहीं है। चूंकि, देश के खनिज संसाधनों पर देश के सभी नागरिको का बराबर हक़ है अत: यह राशि सभी भारतीयों को बराबर मिलेगी, और सरकार गरीब-अमीर के आधार पर इसके वितरण पर ऐसा कोई नियम नहीं लगाएगी, जिससे गरीब आदमी को ज्यादा हिस्सा एवं अमीर आदमी कम पैसा मिले। किन्तु यदि प्रधानमंत्री प्रस्तावित टू चाइल्ड पालिसी क़ानून गेजेट में छाप देते है तो टू चाइल्ड पालिसी के ड्राफ्ट में दिए गए निर्देशों के अनुसार संतानों की संख्या के आधार पर नागरिको को प्रति माह प्राप्त होने वाली खनिज रोयल्टी में कटौती / बढ़ोतरी होगी। . (3) राष्ट्रीय सम्पत्तियों पर नागरिको के स्वामित्व की घोषणा : भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है, के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है। अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है। भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे। . निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे : विज्ञान-चिकित्सा-गणित-इंजीनियरिंग को छोड़कर IIM, UGC द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय कपड़ा उद्योग मंत्रालय युवा मामलें और खेल मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं नीति आयोग . (4) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का निजी व्यक्तियों, कंपनियों, ट्रस्टों, राज्य सरकारो एवं नगर/ जिला शासन के स्वामित्व वाले भू-खण्डों, सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12 तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे भू-खण्डों पर कोई अधिकार नहीं होगा। . (5) खनिज रॉयल्टी अधिकारी 1947 से पहले एवं बाद में लीज पर दी गयी सभी लीज शुदा खदानों की लीज का बाजार भाव से पुनर्मूल्यांकन करके तय करेगा कि क्या अमुक खदान की रॉयल्टी राशि बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं। देश की अन्य सभी खदानों, कच्चे तेल के कुओ आदि से होने वाली आय भी NMRO प्राप्त करेगा। . #DhanVapsiPassbook का सारांश समाप्त . धनवापसी पासबुक का पूरा क़ानून यहाँ देखें - Facebook.com/pawan.jury/posts/2212549868863237

Jyoti Gupta

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VIRENDER VEER MEHTA

विक्रम संवत 2083. . . चैत्र नवरात्रि पर्व। प्रथम दिवस "माँ शैलपुत्री" ऊर्जा, स्थिरता, आधार और नए शुभारंभ का प्रतीक। || ●⃝जय ●⃝माता ●⃝शैलपुत्री || वैदिक पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 𝟮𝟬𝟴𝟯 का आरंभ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 𝟭𝟵/03/26 प्रातः 𝟲.𝟱𝟮 से। मंगल कामनाओं की शुभ इच्छाओं के साथ, 💝 🔶🔷 शुभ दिन 🔷🔶 💝 . . . . वीर।

Ritik

taken from the October junction book

SAYRI K I N G

मांगी हुई चीज लौटना पड़ती हैं इसलिए मांगना छोड़िए कामना सीखिए फिर चाहे वो इज्जत हो या दौलत हो

Gauri Katiyar

हिन्दू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं बचपन में थोड़ी बागी रही हर बात में तर्क ढूंढती मैने दादी से पूछा ज़रा बताओ एक बात नवरात्रि का व्रत क्यों है ख़ास विद्रोही पोती की बात सुन दादी बोली गणित में तू अव्व्ल तो बात दशमलव का आख़िरी अंक मैंने कहा नौ,सतयुग के कितनेबसाल और उनका जोड़ मैने कहा नौ , कलियुग के कितने साल और उनका जोड़ मैने कहा नौ एक जान पनपे कोख में महीने लगे कितने मैने कहा नौ,माता के कितने रूप मैने कहा नौ मैंने बोला इनमें से कौन सा रूप है ख़ास ,तो दादी बोली सुन मेरी बात- सती सी स्वाभिमानी , शैलपुत्री सी शिव दीवानी , ब्रह्मचारिणी के जैसा तप,चंद्रघंटा के जैसा हट , कूष्मांडा के जैसा जप, स्कंदमाता सी ममता , कात्यायनी सी प्रचंडता,निडर जैसे कालरात्रि,निर्मम जैसे महागौरी,कोमल जैसे सिद्धिदात्री

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास रूह का रिश्ता हसीन निगाहों में नज़र दे के जाऊँगा l नज़र मिलाने का हुनर दे के जाऊँगा ll नासमझ बन रहे हो या अनजान हो l रूह के रिश्ते की खबर दे के जाऊँगा ll दिल से कभी भी भूला न सकोगे ऐसी l एक नशीली प्यारी प्रहर दे के जाऊँगा ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रहे समय पर क्लिष्ट जो, और समय पर नम्र। उसका सब आदर करें, उससे रहें विनम्र।। दोहा --४५४ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Avinash

Happy Gudhipadhva ✨❤️ Everyone.

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति-- "आर्य ज्योतिरग्रा:" ऋगुवेद-७/३३/७ भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र “आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७ भावार्थ-- यह मन्त्र बताता है कि आर्य (श्रेष्ठ, सदाचारी, सत्य और धर्म का अनुसरण करने वाला मनुष्य) अंततः ज्योति (ज्ञान, सत्य और दिव्य प्रकाश) को प्राप्त करता है। अर्थात— जो मनुष्य सत्कर्म, सत्य, तप और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश को प्राप्त करता है। इसलिए यहाँ “आर्य” शब्द जाति के अर्थ में नहीं, बल्कि श्रेष्ठ आचरण वाले मनुष्य के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। सामान्य अर्थ-- आर्य = श्रेष्ठ आचरण वाला मनुष्य ज्योति = ज्ञान, सत्य और आध्यात्मिक प्रकाश तात्पर्य = सज्जन और धर्मात्मा व्यक्ति ही ज्ञानरूपी प्रकाश को प्राप्त करता है। “आर्य ज्योतिरग्रा:” (आर्य ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है) वेदों में प्रमाण-- १. ऋगुवेद -१/५०/१० उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्त उत्तरे। देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम्॥ भावार्थ: हम अंधकार से ऊपर उठकर उत्तम ज्योति को देखते हैं और देवताओं में श्रेष्ठ सूर्यरूप परम ज्योति को प्राप्त होते हैं। २. ऋगुवेद -१/११३/१६ उषा ज्योतिषा तमो अपावृणोत्। भावार्थ: उषा (प्रभात) अपने प्रकाश से अंधकार को दूर कर देती है। ३. यजुर्वेद --३६/२४ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥ भावार्थ: हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से ज्योति (ज्ञान) की ओर, और मृत्यु से अमृत की ओर ले चल। ४. अथर्ववेद-१९/६७/१ ज्योतिरसि ज्योतिर् मे देहि। भावार्थ: तू ज्योति स्वरूप है, मुझे भी ज्योति (ज्ञान-प्रकाश) प्रदान कर। निष्कर्ष: वेदों में बार-बार यह शिक्षा दी गई है कि मनुष्य अज्ञान के अंधकार से उठकर ज्योति (ज्ञान, सत्य और दिव्य प्रकाश) को प्राप्त करे। उपनिषदों में प्रमाण-- १. बृहदारण्यक उपनिषद् --१.३.२८ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय॥ भावार्थ: हे परमात्मा! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से ज्योति (ज्ञान) की ओर, और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चल। २. कठ उपनिषद-- २.२.१५ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥ भावार्थ: जहाँ परम ज्योति है वहाँ सूर्य, चन्द्र, तारे भी प्रकाश नहीं देते। उसी परम ज्योति से सब कुछ प्रकाशित होता है। ३. मुण्डक उपनिषद-२.२.१० ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद् ब्रह्म पश्चाद् ब्रह्म दक्षिणतश्चोत्तरेण। अधश्चोर्ध्वं च प्रसृतं ब्रह्मैवेदं विश्वमिदं वरिष्ठम्॥ भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत् ब्रह्मरूप ज्योति से व्याप्त है; वही सर्वोच्च सत्य है। ४-छान्दोग्य उपनिषद् -३.१३.७ अथ यदिदमस्मिन्नन्तः पुरुषो ज्योतिः। भावार्थ: इस शरीर के भीतर जो पुरुष है वह ज्योति-स्वरूप आत्मा है। ५. श्वेताश्वतर उपनिषद- ३.८ वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम् आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्। तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय॥ भावार्थ: मैं उस महान पुरुष को जानता हूँ जो सूर्य के समान प्रकाशस्वरूप और अंधकार से परे है। उसी को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार होता है। ६- मैत्री उपनिषद-- ६.३४ आत्मा वा इदमेक एवाग्र आसीत् स ज्योतिः। भावार्थ: आदि में केवल आत्मा ही था और वह ज्योति-स्वरूप था। ३. कैवल्य उपनिषद- २१ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥ भावार्थ: वहाँ सूर्य, चन्द्र या अग्नि का प्रकाश नहीं है; उसी परम ज्योति से सब कुछ प्रकाशित होता है। ४. तेजो बिन्दु उपनिषद्- १.५ ज्ञानदीपेन भास्वता आत्मतत्त्वं प्रकाशते। भावार्थ: जब ज्ञान का दीपक प्रज्वलित होता है तब आत्मतत्त्व प्रकाशित हो जाता है। निष्कर्ष: उपनिषदों में भी बार-बार यह कहा गया है कि परमात्मा और आत्मा ज्योति-स्वरूप हैं तथा उन्हें जानने से अज्ञान का अंधकार समाप्त हो जाता है। पुराणों में प्रमाण-- १. विष्णु पुराण-१.२२.५३ ज्ञानं यदा तदा नाशमुपैति तमसः। तदा प्रकाशते नित्यं परमं ब्रह्म सनातनम्॥ भावार्थ: जब ज्ञान उत्पन्न होता है तब अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है और सनातन परम ब्रह्म का प्रकाश प्रकट होता है। २. भागवत पुराण-- ११.२.३७ भयं द्वितीयाभिनिवेशतः स्यात् ईशादपेतस्य विपर्ययोऽस्मृतिः। तन्माययाऽतो बुध आभजेत तं भक्त्यैकयेशं गुरुदेवतात्मा॥ भावार्थ: जब मनुष्य ईश्वर से विमुख होता है तो अज्ञान और भय उत्पन्न होता है; ज्ञानी पुरुष ईश्वर की भक्ति से उस अज्ञान से मुक्त होकर सत्य को प्राप्त करता ३-पद्म पुराण -६.२२.५८ ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ४. स्कंद पुराण -- ३.२.३५ ज्ञानं हि परमं ज्योतिः तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को ही परम ज्योति कहा गया है और अज्ञान को अन्धकार। ५-लिंग पुराण-१.७०.३२ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: ज्ञान ही परम ज्योति है और अज्ञान अंधकार कहा गया है। ज्ञान के दीपक से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ६-वायु पुराण- २३.५४ ज्ञानाग्निना दहत्याशु पापं तम इवांशुमान्। भावार्थ: जैसे सूर्य का प्रकाश अंधकार को नष्ट कर देता है, वैसे ही ज्ञान अग्नि पाप और अज्ञान को नष्ट कर देती है। ७-ब्रह्म पुराण --२३५.१२ ज्ञानदीपप्रकाशेन हृदयस्थं तमो हरेत्। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से हृदय में स्थित अज्ञान का अंधकार दूर हो जाता है। ८- अग्नि पुराण --३८०.१० ज्ञानं परमकं ज्योतिः सर्वपापप्रणाशनम्। भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और वह समस्त पाप तथा अज्ञान का नाश करने वाला है। निष्कर्ष: पुराणों में भी स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार है। जो मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। है। भगवद्गीता में प्रमाण-- १-भगवद्गीता- ५.१६ ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः। तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥ भावार्थ: जिनका अज्ञान ज्ञान द्वारा नष्ट हो गया है, उनका ज्ञान सूर्य के समान प्रकाश करके परम सत्य को प्रकट करता है। २. भगवद्गीता -१०.११ तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥ भावार्थ: उन पर कृपा करने के लिए मैं उनके हृदय में स्थित होकर ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करता हूँ। ३-भगवद्गीता- ४.३७ यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन। ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा॥ भावार्थ: जैसे प्रज्वलित अग्नि लकड़ियों को भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों और अज्ञान को नष्ट कर देती है। ४-भगवद्गीता-१३.१७ ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते। ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्॥ भावार्थ: वह परमात्मा ज्योतियों का भी ज्योति है और अंधकार से परे है; वही ज्ञान, जानने योग्य और ज्ञान से प्राप्त होने वाला है। निष्कर्ष: गीता में स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान सूर्य के समान प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार कोदूर कर‌ देता‌ है। महाभारत में प्रमाण-- १. महाभारत (शान्ति पर्व)- २३८.११ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और अज्ञान अंधकार कहा गया है। ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। २. महाभारत (शान्ति पर्व) २९४.१४ यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता। योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः॥ भावार्थ: जैसे वायु रहित स्थान में दीपक स्थिर रहता है, वैसे ही संयमित चित्त वाला योगी आत्मज्ञान में स्थिर रहता है। ३. महाभारत(अनुशासन पर्व) -१४५.५४ ज्ञानं परममित्याहुस्तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को परम कहा गया है और अज्ञान को अंधकार बताया गया है। ४. महाभारत (शान्ति पर्व) ३३९.२४ ज्ञानदीपेन विद्वांसो नाशयन्ति तमो हृदि। भावार्थ: विद्वान पुरुष ज्ञान के दीपक से हृदय में स्थित अज्ञान के अंधकार का नाश कर देते हैं। निष्कर्ष: महाभारत में भी स्पष्ट बताया गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार है। जो मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। स्मृतियों में प्रमाण-- १. मनु स्मृति -i ४.२३८ अज्ञानं तम इत्याहुर्ज्ञानं तु परमं स्मृतम्। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: अज्ञान को अंधकार कहा गया है और ज्ञान को परम प्रकाश। ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। २. याज्ञवल्क्य स्मृति-- १.३ ज्ञानं हि परमं श्रेयः पावनं परमं स्मृतम्। भावार्थ: ज्ञान को ही परम कल्याण और परम पवित्र माना गया है। ३-पराशर स्मृति- १.४० ज्ञानदीपेन विद्वांसो नाशयन्ति तमो हृदि। भावार्थ: विद्वान लोग ज्ञान के दीपक से हृदय के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट कर देते हैं। ४-नारद स्मृति -१.१० ज्ञानं परमकं ज्योतिः धर्मस्य परमं पदम्। भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और वही धर्म का सर्वोच्च स्थान है। ५- दक्ष स्मृति - २.१२ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। भावार्थ: ज्ञान को परम ज्योति कहा गया है और अज्ञान को अंधकार। ६- बृहस्पति स्मृति -१.१५ ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ७- अत्रि स्मृति -५७ विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ भावार्थ: विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है; यह छिपा हुआ धन है। विद्या ही यश, सुख और सम्मान देने वाली है। ८-व्यास स्मृति -i १.८ ज्ञानं परममित्याहुस्तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को परम कहा गया है और अज्ञान को अंधकार बताया गया है। निष्कर्ष: स्मृतियों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार। इसलिए जो मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। १. चाणक्य नीति -१.३ न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारी। व्यये कृते वर्धते एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ भावार्थ: विद्या रूपी धन ऐसा है जिसे न चोर ले सकता है, न राजा छीन सकता है; यह सदैव बढ़ता है — अर्थात् ज्ञान ही श्रेष्ठ प्रकाश है। २. चाणक्य- २.११ विद्या मित्रं प्रवासे च भार्या मित्रं गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च॥ भावार्थ: विद्या (ज्ञान) मनुष्य का सच्चा मित्र है — अर्थात् जीवन में मार्गदर्शक प्रकाश है। ३-विदुर नीति(महाभारत, उद्योग पर्व)- ३३.७२ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥ भावार्थ: विद्या के समान कोई आँख (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही देखने का वास्तविक साधन है। ४-भृतहरि नीति शतक-७ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ भावार्थ: जो गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी अंजन से दूर कर आँखें खोल देता है, उसे प्रणाम — अर्थात् ज्ञान अंधकार को मिटाने वाली ज्योति है। “आर्य ज्योतिरग्रा:” — श्रेष्ठ मनुष्य ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है — हितोपदेश में प्रमाण-- १. मित्रलाभ- १.७ अनेकसंशयोच्छेदि परोक्षार्थस्य दर्शकम्। सर्वस्य लोचनं शास्त्रं यस्य नास्त्यन्ध एव सः॥ भावार्थ: शास्त्र (ज्ञान) अनेक संदेहों को दूर करता है और अदृश्य सत्य को दिखाता है; यह सबके लिए आँख (प्रकाश) के समान है — जिसके पास यह नहीं, वह अंधे के समान है। २. मित्र लाभ-१.२५ विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ भावार्थ: विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है; यह छिपा हुआ धन है और सुख, यश तथा मार्गदर्शन देने वाली है — अर्थात् ज्ञान ही जीवन का प्रकाश है। पंचतंत्र में प्रमाण- १. तन्त्र १ (मित्रभेद) -१.३३ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही वास्तविक दृष्टि है। २. तन्त्र २ (मित्रलाभ)- २.१० विद्या मित्रं प्रवासे च। भावार्थ: विद्या मनुष्य की सच्ची मित्र है — अर्थात् जीवन में मार्गदर्शक प्रकाश है। निष्कर्ष: हितोपदेश और पंचतंत्र में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है कि विद्या (ज्ञान) ही मनुष्य की आँख और प्रकाश है, जो जीवन का मार्ग दिखाती है। अतः जो व्यक्ति इस ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है, वही वास्तविक अर्थ में आर्य है। निष्कर्ष: नीति ग्रन्थों में भी बार-बार यह बताया गया है कि विद्या (ज्ञान) ही वास्तविक प्रकाश है जो जीवन का मार्ग दिखाता है। अतः जो व्यक्ति इस ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है वही आर्य है। वाल्मीकि रामायण में प्रमाण-- १. अयोध्या काण्ड- २.१०९.३४ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही जीवन का वास्तविक प्रकाश है। २. अरण्य काण्ड- ३.७२.८ धर्मो हि परमं लोके धर्मे सत्यं प्रतिष्ठितम्। भावार्थ: धर्म ही संसार में सर्वोच्च है, और सत्य उसमें स्थित है — अर्थात् धर्म और सत्य ही जीवन का प्रकाश हैं। गर्ग संहिता में प्रमाण- १. गोलोक खण्ड- १.२३ ज्ञानदीपप्रकाशेन हृदयग्रन्थयो विदुः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से हृदय के बन्धन (अज्ञान) कट जाते हैं। २. वृन्दावन खण्ड- १२.४५ अज्ञानतिमिरान्धानां ज्ञानं दिव्यं प्रदीपवत्। भावार्थ: अज्ञान के अंधकार में पड़े लोगों के लिए ज्ञान दिव्य दीपक के समान है। योग वशिष्ठ में प्रमाण- १. निर्वाण प्रकरण- २.१८.१२ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानं सूर्य इवोदितम्। भावार्थ: अज्ञान के अंधकार से अंधे हुए मनुष्य के लिए ज्ञान सूर्य के समान उदित होकर प्रकाश देता है। २. उपशम प्रकरण- ५.१० ज्ञानं हि परमं ज्योतिः आत्मा प्रकाशकः स्वयम्। भावार्थ: ज्ञान ही परम ज्योति है और आत्मा स्वयं प्रकाश करने वाला है। ३. निर्वाण प्रकरण १.२८.३१ यथा दीपप्रभा नाशयति तमः क्षणेन वै। तथा ज्ञानप्रभा नाशयत्यज्ञानमाशु हि॥ भावार्थ: जैसे दीपक का प्रकाश क्षणभर में अन्धकार को दूर कर देता है वैसे ही ज्ञान शीघ्र ही अज्ञान को नष्ट कर देता है। --------++-------++------++---

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