Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
MOU DUTTA

শব্দ গুলো স্তব্ধ আজ নিরুপায় মুখের হাসি যা বলতে চেয়ে এড়িয়ে যায় তা সকল আমি। অদ্ভুত সব চাওয়া আমার চাইছে অনেক কিছু না পেয়ে হারিয়ে যাচ্ছে নিও না আমার পিছু। হয়তো আমি হারিয়ে যাবো পড়বে না আর মনে। হৃদয় জুড়ে আঁকবে ছবি খুঁজবে মনের ভুলে। হয়তো সেদিন তোমায় ভেবে লিখতে আবার বসবো। হয়তো আবার তোমায় ভেবে অনেক ভালোবাসবো। হয়তো তুমি অন্য কারো মুখের হাসি জানি হয়তো তুমি সে হাসি তেই শান্তি পাও মানি। হয়তো সেদিন অনেক দূরে থাকবো আমি জানি। হয়তো সেদিন মনে পরেও থেমে যাবো একটু খানি। হয়তো তোমায় ভেবেই আবার চাঁদ আমি দেখবো হয়তো তোমায় ভেবেই জলে আবার আমি ভাসবো। হয়তো সেদিন ফোন এ তাকিয়ে থাকবো কিন্তু সেদিন ব্যস্ত তুমি অন্য কারো ছোঁয়ায়। হয়তো সেদিন বুকের মাঝে বইবে রক্তক্ষরণ হয়তো সেদিন মনকে আমি আবার নিজেই মারবো। হয়তো সেদিন ভুলবো তোমায় এই আশা টাই রাখবো। হয়তো সেদিন যত্ন করে আবার ভালোবাসবো। হয়তো সেদিন যত্ন করে তোমায় ভালোবাসবো। হয়তো সেদিন ক্লান্ত চোখে তোমার ছবি আঁকবো। হয়তো সেদিন হাতের মাঝে তোমার হাতই রাখবো হয়তো সেদিন বুক পকেট এ তোমার ছবি রাখবো। হয়তো সেদিন বুকের মাঝে তোমার নাম ই লিখবো। হয়তো সেদিন নতুন ভাবে নতুন করে তোমার মায়ায় পড়ব।হয়তো সেদিন তোমায় আমি আবার ভালোবাসবো।

Shailesh Joshi

જે સમયથી ફરીયાદો નામશેષ થવા લાગે એજ દિવસથી જીવનમાં શાંતિનો પ્રવેશ થવા લાગે - Shailesh Joshi

Armin Dutia Motashaw

To attain PEACE, we first need to have PEACE WITHIN. PEACE will then spread all around us. In our family, in our neighborhood, in society, country n our world. Anar

Narendra Parmar

अब तो ना कोई आरज़ू है मेरी और ना ही कोई तमन्ना है मेरी अब तो मौत जल्द से जल्द आ जाएं मेरी बस उसी का ही मुझे इंतजार है ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "

Abhishek Kunehadiya

मजबूरी

Kirti kashyap

"ज़िन्दगी के रंग" कभी रम्ज़ कभी नुमा है ज़िन्दगी, कभी गुमाँ तो कभी रवाँ है ज़िन्दगी। महज़ चंद हरफ़ों में ना होगी बयां, इक बहुत लम्बी दास्तां है ज़िन्दगी। फलसफ़ा ये रहा ज़िन्दगी से मेरा, ख़ामोशी में भी इक अयाँ है ज़िन्दगी। हर लम्हे को जीना ख़ुद के उसूलों पे, सच कहती हूँ, फिर खुशनुमा है ज़िन्दगी। मेरी नज़र से न देखना तुम यारों, मेरे लिए तो बस सज़ा है ज़िन्दगी। बेचैनी, बिखरा वजूद, सिसकती रूह, जैसे मेरे लिए कोई बद्दुआ है ज़िन्दगी। औरत की ज़िन्दगी कहाँ ख़ुद की हुई है, असीर है फक़त, न रिहा है ज़िन्दगी। चलती फिरती इक लाश है “कीर्ति”, जीते जी मेरे लिए क़ज़ा है ज़िन्दगी। Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️

Raj Brahmbhatt

आज भी दिन ढलने आया और रात बीतेगी। कल फिर वही उजाला होगा, कहानी फिर से रची जाएगी। वक़्त चलता रहता है यूँ ही न ठहरता है, न रुकता है; और इतिहास बनता जाता है। "Razzzz की बातें"

srishti tiwari

कहते हैं कि नर में होता है नारायण , पर उस नर में नारायण को खोजना सिखाया आपने। भटका सा था युवा भारत का, उसे सदमार्ग दिखाया आपने। आध्यात्मिक विचार इज़ सो ओल्ड कहते थे जेन ज़ी , आधुनिकता से आध्यात्मिकता का मेल कराया आपने। जो जा रहे थे नास्तिकता की ओर, उन्हें राधा रानी की महिमा का भान कराया आपने। जब लोग मानने लगे राधा कृष्ण को मनुष्य, तब भगवत शक्ति को खोजना सिखलाया आपने। ईश्वर भक्ति में मिलता है अलग ही आनंद, आप क्या है गुरु प्रेमानंद जी! गुरु, मेंटोर, या इंफ्लूएंसर हमने एक ऑलराउंडर है पाया आपमें। सृष्टि तिवारी ‘शान'

kattupaya s

அன்பு நண்பர்கள் அனைவரும் அளித்து வருகின்ற ஆதரவுக்கு நன்றி. யாதுமற்ற பெருவெளி அடுத்து வரும் இரு பாகங்கள் முக்கியமானவை. தவற விடாமல் வாசிக்க வேண்டுகிறேன்.

Neha kariyaal

एक मुलाकात ख़ुद से भी करना, क्योंकि वहां तुम मिलोगे। 🤗💜

kattupaya s

The pain in love never allow you to sleep well. read my stories sleep guaranteed. just funny, take care.

kattupaya s

Goodnight friends.. my novel yadhumatra peruveli part 23 will be published on 10/1/26@11am.Thanks

Shraddha Panchal

માનવ પ્રાર્થના કરતી વેળા સમજે છે કે, ભગવાન બધું સંભાળે છે, પણ નિંદા કરતી વેળા આ વાત ભૂલી જાય છે। પુણ્ય કરતી વેળા સમજે છે કે, ભગવાન જોવે છે , પણ પાપ કરતી વેળા આ વાત ભૂલી જાય છે। દાન કરતી વેળા સમજે છે કે, ભગવાન બધી જગ્યા એ વસે છે , પણ ચોરી કરતી વેળા આ વાત ભૂલી જાય છે। પ્રેમ કરતિ વેળા સમજે છે કે, ભગવાન એ જ દુનિયા બનાવી છે , પણ નફરત કરતી વેળા આ વાત ભૂલી જાય છે। આટલું બધું કર્યા પછી પણ , માનવ પોતાની જાત ને સૌથી વધારે , “બુદ્ધિમાન” સમજે છે ।।।😇🤎🤎

ek archana arpan tane

મારો વ્યવહાર તમને ઝેહરીલો લાગે છે પણ તમને શી ખબર કે મેં આસતીન માં સાપ ને પાળ્યો છે. - ek archana arpan tane

Hardik Boricha

अल्फाज_ए_शायरी पढ़ कर.... किसी ने पूछ ही लिया... कभी इश्क. ...ꙮ͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌͌. हुआ था क्या... .. ? नजरें_झुकीं औऱ हमने मुस्कुरा के कहा " आज भी है ...... 🫰♥️🫰

Hardik Boricha

🌹    कामयाबी वही वाली चुनना, जिसमे त्योहारों पर घर आ सको !   🍁 आज का सुविचार 🍁      🌹

KRUNAL

✨️​સૌંદર્યનું નજરાણુ✨️ ​તારા સ્મિતમાં છુપાયેલું છે એક આખું આકાશ, તારી આંખોમાં દેખાય છે અમીનો ઉજાસ. કુદરતે ઘડ્યું છે તને ફુરસદના પળે, જાણે કવિની કલ્પના સાકાર થઈને મળે. ​રૂપ તારું નીખરે છે લજ્જાના શણગારમાં, એક અનોખી ચમક છે તારા આ અંદાજમાં. સૌંદર્ય અને શક્તિનો આ સુંદર સંગમ છે, તારા વ્યક્તિત્વમાં વસેલો એક આત્મવિશ્વાસનો દમ છે. ​શાલીનતા અને લાવણ્યની તું મૂરત લાગે છે, તારા હોઠો પરનું સ્મિત કોઈ ગઝલ જેવું જાગે છે.

Hardik Boricha

अब इस क़ैद से रिहाई मुनकिन नहीं फ़ना हो सकते हैं मगर जुदाई मुनकिन नहीं सांसों पर भी काबिज़ है अब वो शख्स मौत तो मुनकिन है मगर उसकी महक मिट जाए ये मुनकिन नही, 💘💘💘💘

Hardik Boricha

चर्चाओं में रहने का हमें कोई शौक नहीं, लेकिन हमारी हर बात के चर्चे हैं तो हम क्या करें। 😎😎😎🔥🔥🔥😎😎😎

Hardik Boricha

❤️हल्की_हल्की_मुस्कुराहटे,, _____और_सनम_का ख्याल..!!💕 💕__बड़ा_अजीब_होता_है,, मोहब्बत_करने_वालो_का हाल..!! ❤️ HARDIK ❤️

Hardik Boricha

वो अब तिजारती पहलू निकाल लेता है मैं कुछ कहूँ तो तराज़ू निकाल लेता है वो फूल तोड़े हमें कोई ए'तिराज़ नहीं मगर वो तोड़ के ख़ुशबू निकाल लेता है इसलिए भी तिरे फ़न की क़द्र करता हूँ तू झूठ बोल के आँसू निकाल लेता है अँधेरे चीर के जुगनू निकालने का हुनर बहुत कठिन है मगर तू निकाल लेता है वो बेवफ़ाई का इज़हार यूँ भी करता है परिंदे मार के बाज़ू निकाल लेता है HARDIK ❤️

રોનક જોષી. રાહગીર

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Fazal Esaf

साया आणि सावली सांजवेळच्या वाऱ्यात गवतांच्या कुशीत घुसतांना तुझे स्मित माझ्या मनात जणू पाण्यावर पडलेले प्रकाशरंग. रस्त्यावरची माती माझ्या पायांत दाबली जात असते, तुझ्या आठवणींचा वास घेऊन जणू काळजाचं एक घर उभं राहतं. घरी पोचताना, दिव्यांच्या हलक्या प्रकाशात तुझा शब्द अजून गुंजत राहतो, जणू सावलीने साया शोधली आहे. आणि मी फक्त उभा राहतो त्या शांत क्षणात, जिथे न शब्द आहेत, न वेळ, फक्त तू आणि मी — आणि मातीची, वाऱ्याची, प्रकाशाची गंधभरीक चुप

Rajeev Namdeo Rana lidhori

राना लिधौरी'के हिंदी- दोहे नृत्य मधुवन में जब कर रहे,मधुर नृत्य गोपाल। सँग में नाचे राधिका, होते सभी निहाल।। जहाँ नृत्य में भाव हो,बजते घुँघरु खूब। साथी बनते एक से,दिखते सब महबूब।। नृत्य कला प्राचीन है,नाच गए नटराज। बहुत हुआ विख्यात है,दिखे न बैसा आज।। सुंदर गायन कंठ से,हो घुँघरु की तान। पैर नृत्य तब कर उठे,बूड़े और जवान।। नृत्य कला सरकार भी,दे संरक्षण आज। गुरू घराना चल रहे,रखें देश की लाज।। *** ✍️ राजीव नामदेव"राना लिधौरी"            संपादक "आकांक्षा" पत्रिका संपादक-'अनुश्रुति'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़ अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ (मप्र)-472001 मोबाइल- 9893520965 Email - ranalidhori@gmail.com

Fazal Esaf

वाढत्या काळात, गावाचे रस्ते शहरांच्या गोंधळात मिसळत जातात, पण माणूस अजूनही आपला आत्मा जपतो. जिथे शेतात काम करणारा व्यक्ती आणि घरातल्या स्त्रीच्या हातात जीवनाच्या गाठी घालणारे काम दिसते, तिथे आपली ओळख कायम राहते. प्रत्येक क्षण, प्रत्येक श्रम, आणि प्रत्येक थकवा ह्या ओळखीला अधिक घट्ट करतो. गावातील प्रत्येक घरात कथा आहेत – गायींच्या दुधातल्या थेंबांतून, अंगणातल्या झाडांवरून, रस्त्यावरच्या वाऱ्यातून. पण त्या कथा नेहमी ऐकल्या जात नाहीत. मुलं शहरात जातात, स्वप्न घेऊन जातात, आणि गावातील माणूस आपली ओळख, आपली माती, आपली साधी जीवनशैली जपण्याचा प्रयत्न करतो. हे संघर्ष त्याच्या जीवनाचा अविभाज्य भाग बनतो. मनुष्य आणि मातीची नाळ अशीच असते – एकमेकांवर अवलंबून, एकमेकांना ओळखत, आणि एकमेकांसाठी टिकत. गावातला संघर्ष, ओळख, आणि माणसाचे सामर्थ्य ह्या साऱ्या गोष्टी एका शांत पण खोल स्वरूपात त्याच्या हृदयात दडलेल्या असतात. प्रत्येक सकाळी नवीन संघर्षाला सामोरे जाताना, तो माणूस आपल्या अस्तित्वाचा अर्थ शोधतो – मातीमध्ये, हसण्यात, आणि आपल्या ओळखीच्या सांगण्यात.

Kartik Kule

की हर किसीको सच्ची मोहब्बतें नसीब नहीं होती और हर किसीकी पसंद सच्ची मोहब्बत नहीं होती बातोमें गहराई इतनी हे कि समझनेवाला भी पराया चाहिए वरना अपनौको तो येभी एक एक आसान सा लिखा हुआ पन्ना नजर आता हे - Kartik Kule

Fazal Esaf

गावाच्या मातीवर पावसाचे थेंब जरी पडले असले, तरी शेतकरी आपल्या हातातल्या कामाची किंमत जाणवत नाही. सारा दिवस सूर्योदयापासून सूर्यास्तापर्यंत मेहनत करतो, पण त्याचे उत्पन्न बाजाराच्या कचाट्यात हरवते. धनिकांचा जग जास्त मोठा वाटतो, गरीबाचा जीवन जास्त तंग, आणि माती मात्र तसंच उगम आणि श्रम स्वीकारत राहते.

Fazal Esaf

शाळा, रस्ते, आरोग्य सेवा—सर्व काही मोठ्या शहरात राहतात, गावात फक्त आठवणी आणि थोडीशी आशा उरते. मुलं शिक्षणासाठी गाव सोडतात, पण परतल्यावर त्यांना जुने रस्ते आणि मातीची आठवण आठवते. जे राहतात, त्यांना थकवा आणि निराशा सोबत घेऊन काम करावे लागते.

Fazal Esaf

Some Goodbyes.............

Fazal Esaf

Some Wounds heal into Habits.......

Fazal Esaf

Even Shadows leave us when the Light changes its Mind....

Kartik Kule

की हु नहीं में दिल टूटा आशिक पर फिर भी शायरी मोहब्बत वाली आती हे समझो न मुझे दिल टूटाआशिक ये मेरी अल्फाजोकी गलत फ्यामिली हे - Kartik Kule

Fazal Esaf

गावातील लोक जिवंत आहेत, त्यांच्या हसण्यात, त्यांच्या मेहनतीत, त्यांच्या आशेत. संकट कितीही मोठे असले, मातीच्या गंधात, पाण्याच्या थेंबांत आणि गवताच्या कुशीत त्यांची ताकद दिसते. जीवन कठीण आहे, पण त्यांचे धैर्य आणि जिद्द अखंड आहे, जसे मातीच्या मुळे धरतीशी घट्ट जोडलेली असते.

Rajeev Namdeo Rana lidhori

*प्रैस विज्ञप्ति:-* *म.प्र.लेखक संघ ने जारी किया सन्-2026 की गोष्ठियों का वार्षिक केलेंडर* *(सन्1998 से हर माह निरंतर गोष्ठी का रिकार्ड बनाया अबतक 333 गोष्ठियाँ आयोजित)* टीकमगढ़// साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ ने अपनी साहित्यिक कवि गोष्ठियों का वार्षिक केलेण्डर जारी किया है लेखक संघ के जिला अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में बताया कि सभी गोष्ठियाँ आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकगढ़ के स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति सभागार में दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक हर माह के प्रथम रविवार को आयोजित की जायेगी। म.प्र. लेखक संघ की 333वीं गोष्ठी दिनांक 4 जनवरी 2026 को नववर्ष के शुभ आगमन् पर केन्द्रित हो चुकी है। 334वीें गोष्ठी 1 फरवरी 2026 को संत रविदास जयंती पर धार्मिक गोष्ठी, 335वीें गोष्ठी 1 मार्च 2026 को होली पर केन्द्रित, 336वीें गोष्ठी 5 अप्रैल 2026 को वीर रस पर, 337वीें गोष्ठी 3 मई 2026 को नारद जंयती,, 338वीें गोष्ठी 7 जून 2026 को ‘पर्यावरण’ पर केन्द्रित होगी, 339वीें गोष्ठी 5 जुलाई 2026 को पावस गोष्ठी केन्द्रित, 340वीें गोष्ठी 2 अगस्त 2026 को मित्रता दिवस पर गोष्ठी, 341वीें गोष्ठी 6 सितम्बर 2026 को श्री कृष्ण जमाष्ठमी एवं विश्व साक्षरता दिवस’ परकेन्द्रित होगी, 342वीें गोष्ठी 4 अक्टूवर 2026 को राना दुर्गावती जंयती पर, 343वीें गोष्ठी 1 नबम्बर 2026 को ‘म.प्र.स्थापना दिवस’ पर, एवं 344वीें गोष्ठी 6 दिसम्बर 2026 को टटया भील के बलिदान दिवस एवं डाॅ.अंबेडकर की पुण्यतिथि पर आयोजित की जायेगाी। अप्रैल माह में ‘आकांक्षा’ पत्रिका का 21 वाँ अंक हास्य-व्यंग्य पर केन्द्रित प्रकाशित किया जायेगा। इसके अलावा राजीव नामदेव राना लिधौरी के संपादन में निरंतर प्रकाशित हो रही देश की ‘बुन्देली’ में प्रकाशित एक मात्र त्रैमासिक ई पत्रिका ‘अनुश्रुति’ का आगामी-18वाँ अंक- जनवरी-मार्च 2026 माह फरवरी में प्रकाशित होगा। जिसके लिए बुंदेली में सभी विधा में रचनाएँ निःशुल्क सादर आमंत्रित है। गौरतलब हो कि म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़ द्वारा अध्यक्ष राजीव नामदेव राना लिधौरी के संपादन में विगत 21 सालों से जिले की एकमात्र साहित्यिक पत्रिका आकांक्षा’ का प्रकाशन करते आ रहे है तथा इसके साथ ही बुन्देली में देश की एकमात्र त्रैमासिक ई पत्रिका ‘अनुश्रुति’ का ई सपंादन व प्रकाशन निरंतर करत आ रहे हैं। अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी के कुशल नेतृत्व में म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ सन् 1998 से अपनी निरतंर गोष्ठियों को आयोजित करके अब तक 333 गोष्ठियों का सफल आयोजन कर देशभर में चर्चित हो रहे हंै। यह जानकारी म.प्र.लेखक संघ के जिला अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ एवं जिला सचिव रामगोपाल रैकवार ने प्रैस को जारी विज्ञप्ति में दी है। *रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’* संपादक ‘आकांक्षा’ (हिन्दी) पत्रिका संपादक ‘अनुश्रुति’ (बुन्देली) पत्रिका अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़ शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.) पिनः472001 मोबाइल-9893520965

Kartik Kule

कि वो चमकते तारोसा बिखरता नहीं काग़ज़ के पन्नोंहपर यूंही कुछभी लिखता नहीं जैसा वो जमानेको दिखता है वैसा वो हे नहीं हर उस कागज पर लिखी बात को वो बाजारोम बैठकर बेचता नहीं - Kartik Kule

Kartik Kule

की चिताएं तो हमने देखिहे अपनौकी शोक से जलना किसको पसंद आता हे वरना बहती नदियों पर खाक होकर बहना कोस्को पसंद आता हे एक बार आईना उठाकर भी देखो जमानेके उसपर क्या क्या लिखा रखा हे - Kartik Kule

Jyoti Gupta

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S A Y R I K I N G

आज एक 6.7.साल पुराना दोस्त मिला मैने कहा हा भाई शादी वादी हुई या कपड़े खुद ही धो रहा है उसने कहा तेरी दोनों बातों का जवाब हा ही है 🤣🤣🤣👍👍

Tr.Anita Patel

વહેંચાઈ જવાયું, લાગણીઓ અને માંગણીઓ મધ્યે, મનમાં રમીને એ અઢળક સપના વિંધે. ધીમી નજરને હોઠે ફફડાટ, આ જીવને પણ કઈંક છે તલસાટ. અધૂરી આશાઓ, અધૂરા ઓરતાં, જીવન જાય છે મીઠી ક્ષણને ગોતતાં. ખભો મળે કે ખોળો અહીં, આંખે આશ વિસામાની વહી. આંખોથી વાત કરતું કોઈ મનગમતું માનવ મળે, તો આ મોં તો હંમેશ, વધ્યું મૌન જ વેંચે. -@nugami❤️

Akanksha srivastava

संघर्षों से निखरता जीवन ____________________ अच्छा हुआ जो मिली हमे कठिन राहे, कदम -कदम पर उलझी कई चाहे| अगर आसान होता हर एक सफर तो निखरता कैसे जीवन का असर| अच्छा हुआ जो हाथो मे कठिनाई आई वरना मेहनत की कीमत कैसे समझ पाई। रुकवटे आई, पर रोकी नही राह, ठोकरों ने ही दी हमे आगे की चाह| एक-एक शौक को हमने गॅवाया , जिम्मेदारियो को अपना श्वंंगार बनाया। तब समझ आया जीवन का अर्थ गहरा, संघर्ष बिना नही होगा जीवन सुनहरा। बिना ऑधी के उड़ान नही होती, बिना तपिश के पहचान नही होती। _____ आकांक्षा श्रीवास्तव

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ वफ़ा की रस्म को बस इक बार             निभाने आजा, तू  मेरे  ज़ख्मों  पे  मरहम  ही             लगाने आजा, माना कि दरमियाँ अब वो पहले            सी बात नहीं, पर ख़ुद को मेरी नज़रों में सच             दिखाने आजा, तूने वादे  किए थे, कि साथ न                छूटेंगे कभी, उन झूठे वादों का ही मान बढ़ाने                  आजा, ज़माना तो खड़ा है मेरी रुस्वाई             के इंतज़ार में, तू अपनी बेरुख़ी का ही, जश्न             मनाने आजा, अब तो रातों की नींद भी हम से               रूठ गई है, इन जलती आँखों को, ख़्वाब            दिखाने आजा, ये  आख़िरी  बार  है  कि  तुझे            पुकारा है मैंने, फिर कभी न लौटूंगा, ये यक़ीन           दिलाने आजा…🔥 ╭─❀💔༻  ╨─────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦ #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨─────────━❥

Imaran

😀😀😀😀😀😀😀 मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो, मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो, दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात, मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो ❤️imran ❤️

ALONE BOY

میں کوئی باغی نہیں تھا، میں تو بس ایک تھکا ہوا سپاہی تھا۔ میری زندگی کی سب سے بڑی بدقسمتی یہ رہی کہ میں نے ایک ایسے گھرانے میں آنکھ کھولی جہاں محبت "شرائط" پر ملتی ہے اور احترام "کامیابی" سے جڑا ہوا ہے۔ میں نے برسوں اپنی ہڈیوں کا ایندھن بنا کر اس امید میں کام کیا کہ شاید ایک دن میرے باپ کی نظروں میں میرے لیے وہ فخر چمکے گا جس کا میں بچپن سے پیاسا تھا۔ میں نے سینکڑوں راتیں اسکرین کی روشنی میں اپنی آنکھیں جلائیں، ہزاروں میل کی مسافتیں محض چند سکوں اور ایک بہتر مستقبل کی امید میں طے کیں، لیکن ہر شام جب میں تھکا ہارا گھر لوٹتا، تو میری محنت کا استقبال "شاباش" سے نہیں بلکہ "موازنے" سے کیا جاتا۔ میرے والدین نے کبھی یہ نہیں دیکھا کہ میں نے کتنا فاصلہ طے کیا ہے، انہوں نے ہمیشہ یہ ناپا کہ میں ابھی منزل سے کتنا دور ہوں۔ مجھ پر ذلت کے وہ لمحے سب سے بھاری تھے جب میری جائز تھکن کو "کام چوری" کا نام دیا گیا۔ جب میں نے ٹوٹ کر کہا کہ "مجھ سے اب نہیں ہوتا"، تو جواب ملا کہ "تمہارے اندر غیرت کی کمی ہے"۔ وہ لمحے جب میرے اپنے بھائی بہنوں اور کزنوں کی کامیابیوں کی مثالیں میرے منہ پر ایسے ماری گئیں جیسے کوئی کسی بھکاری کے سامنے سکے پھینکتا ہے۔ میں نے کوشش کی، میں نے واقعی جی جان سے کوشش کی کہ میں اس "سسٹم" کا حصہ بن سکوں جہاں خوشی کا مطلب صرف پیسہ ہے۔ لیکن جتنا میں نے بھاگنے کی کوشش کی، دلدل اتنی ہی گہری ہوتی گئی۔ آج صورتحال یہ ہے کہ میں اپنے ہی گھر میں ایک "بوجھ" بن چکا ہوں۔ میری موجودگی اب کسی کو خوشی نہیں دیتی، بلکہ ایک خاموش بوجھ بن گئی ہے جسے سب برداشت کر رہے ہیں۔ میں اب بات نہیں کرتا، کیونکہ میرا ہر لفظ ایک نئی بحث اور نئی ذلت کا آغاز بن جاتا ہے۔ میں نے اپنے دل کا حال سوشل میڈیا کے سپرد کر دیا ہے کیونکہ وہاں کے اجنبی کم از کم مجھے "ناکارہ" کہہ کر پکارتے تو نہیں ہیں۔ میری روح اب اس مقام پر ہے جہاں درد بھی محسوس ہونا بند ہو گیا ہے۔ میں نے ریت کی دیواریں بنانے میں زندگی گزار دی، اور اب جب وہ دیواریں گر رہی ہیں، تو سب معمار کو گالیاں دے رہے ہیں، کوئی یہ نہیں دیکھ رہا کہ اس معمار کے ہاتھ زخموں سے چور ہیں اور اس کی ہمت جواب دے چکی ہے۔ میں اب ٹوٹنے سے بہت آگے نکل گیا ہوں، اب میں صرف ختم ہونے کا انتظار کر رہا ہوں، تاکہ میرے حصے کی جگہ خالی ہو سکے اور میرے والدین کو اس "ذلت" سے چھٹکارا مل جائے جسے وہ میرا وجود سمجھتے ہیں / یہ میری زندگی کا حقیقی افسانہ جو میں سہ رہا ہوں یہ کہانی نہیں بلکہ میری زندگی کا حصہ ہے

Ajay Solanki

વિશ્વાસનો અકાળ અંત ભરોસો તૂટ્યો ત્યારે શબ્દો પણ ખામોશ થઈ ગયા, જેના પર હતો અતુટ વિશ્વાસ, એ જ પરાયા થઈ ગયા. ​ વચનો આપ્યા હતા ઘણા, પણ સચ્ચાઈ ખૂટી ગઈ, એ હસતા ચહેરા પાછળ, કેટલાય મહોરા છુપાઈ ગયા. ​દુખ એ નથી કે જીવનના રસ્તાઓ બદલાઈ ગયા, દુખ તો એ છે કે સગા પોતાના જ બદલાઈ ગયા. ​હવે શબ્દોને મનમાં જ દબાવી રાખવાનું શીખી લીધું, કારણ કે હૂંફ આપનારા જ અમને અંદરથી તોડી ગયા. ​ અમે સાચા હોવા છતાંય કાયમ ખોટા જ ઠર્યા, સમયની અદાલતમાં બધા સવાલો પણ મૌન થઈ ગયા. ​ હવે ભરોસો ઓછો અને સમજણ વધારે થઈ ગઈ છે, દગા મળ્યા પછી જ જીવનના સાચા અર્થ સમજાઈ ગયા છે.

Nilesh Rajput

वो मेरी पतंग से इश्क़ लड़ाने वाले, उन्हें क्या ख़बर कि आज भी उसके हर किन्ने मेरे माँझे की पहचान रखते हैं।

S A Y R I K I N G

तुम ख़फ़ा जो होती हो लगता है ख़ामोश हो जाऊं परेशानी तुम्हारी छीन लू तुमसे और मैं तुम्हारे आगोश में आ जाऊं

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ मिटा दो अपनी हसरतें किसी के             साथ के खातिर, पर किसी हसरत के खातिर अपनों            का साथ न छोड़ना, ये दुनिया तो बस तमाशबीनों का               मेला है दोस्त, तमाशे की खातिर कभी वफ़ा का             हाथ न छोड़ना, मिलेगा फलक भी तुझे और मिलेगी                  ज़मीन भी, मगर  बुलंदी  की  चाह  में अपनी            बुनियाद न छोड़ना, बड़ी मुश्किल से बनते हैं ये रिश्तों                के आशियाने, ज़रा  सी  तल्खी  के  पीछे  बना-         बनाया घर न छोड़ना, अकेले सफ़र में अक्सर मंज़िलें खो                   जाती हैं, पाने को जहाँ, तुम अपनों का हाथ             न छोड़ना…🤝❣ ╭─❀💔༻  ╨─────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦ #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨─────────━❥

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं

Desai Pragati

ज़रूरी नहीं हर बार रोता हुआ इंसान ही सही हो, कभी कभी बिना रोये वाली गिड़गिड़ाहाट भरी आवाज़ में भी सच्चाई होती है..!.. 🌻😄❤‍🩹

Manish Patel

दूरियां उतनी ही ठीक है जहां से आवाज़ दी जा सके,इतनी नहीं कि खुली चौखट पर भी घंटी बजानी पड़े - Manish Patel

Manish Patel

दूरियां उतनी ही ठीक है जहां से आवाज़ दी जा सके,इतनी नहीं कि खुली चौखट पर भी घंटी बजानी पड़े

Paagla

यह ज़रूरी नहीं कि रास्ता बनाने वाला खुद उस रास्ते पर चले

Gojo Satoru

the strongest Never failed

S A Y R I K I N G

जो किस्मत में नहीं उससे गिला नहीं करते कुछ लोग तो मिलकर भी मिला नहीं करते सुना है रोज मिलने से कम होती हैं मोहब्बत यही सोच कर तो तुम से मिला नहीं करते

Gautam Patel

शिव

Bitu

मोहब्बत में बात करने की अलग ही बात होती हैं, बात करते रहे तो किसी बात पर लड़ने लगते हैं... और बात ना हो तो "तुम बात नहीं करते" इस बात पर लड़ाई हो जाती हैं।। - Bitu....

Saroj Prajapati

ससुराल से भरी पूरी बेटियां मायके केवल स्नेह की भूख मिटाने जाती है ऐसी बेटियां भी मायके वालों को कुछ घंटे में ही अखरने लगती है तो सोचो हो अगर कोई तकदीर की मारी बहन बेटी वो कैसे मायके मे एक कतरा भी प्रेम स्नेह इज्जत का पाती होगी उसकी तो एक कौर रोटी भी उन्हें एक मण अनाज सी भारी नजर आती होगी।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Parmar Mayur

उन्होंने दिल से अपना माना नही और पराया भी माना नहीं, ए- रिश्ते को नाम भी क्या दे, जिसने कोई रिश्ता माना नहीं। - Parmar Mayur

Shailesh Joshi

वर्तमान सुर है और हम... instrument इसलिये जब हम वर्तमान के हिसाब से instrument बजाना सीख लेंगे, तो यकीनन हमारा जीवन मधुर और सुरीला बन जाएगा. - Shailesh Joshi

Soni shakya

समझ आया अब कि, प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं..! ख़ामोशी भी तुझे सुनती है, बुनती है..!! - Soni shakya

samiksha

https://www.instagram.com/_.samiksha.writes._?igsh=MWE3MDVrYTdzdHl6Ng==

Harshil Shah

Some nights don’t want to be understood. They just want to be remembered—imperfectly, dangerously, forever. Check out short story of a such wild night: https://www.matrubharti.com/book/19986751/the-london-singularity-unfolding-organic-chemistry-at-2-am

Dada Bhagwan

Let's take a look at the divine moments from the Dada's Punyatithi 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/jXbU3oXX #punyatithi #deathanniversery #dadabhagwan #photogallery #picoftheday #photooftheday #dadabhagwanfoundation

kajal jha

उदास छोड़ गए वो हमें बीच राह में, कभी जिनके लिए हमने अपनी दुनिया छोड़ी थी। लौटकर नहीं आते वो वक्त और वो लोग, जिनसे जुड़ने की आस में ये आँखें रोई थीं। अब तो बस खुद से ही गिला रहता है अक्सर, कि हमने क्यों किसी गैर से इतनी वफ़ा जोड़ी थी। - kajal jha

Shailesh Joshi

સમસ્યા તકલીફો કે હેરાનગતિ પ્રત્યેક જીવોને હોય છે, એમાંથી કેટલાક જીવો એનો સામનો કરે છે કેટલાક જીવો એનું સમાધાન શોધે છે જ્યારે કેટલાક જીવો એનાથી સમાધાન કરી લે છે, અને કેટલાક જીવો એને મને, કે "ક" મને સ્વીકારી લે છે, જ્યારે બાકીના જે જીવો વધ્યા એમાંથી અડધા જીવો એમને એમના જીવનમાં શું શું તકલીફો પડી રહી છે ? એ ગોખવાની હોય એમ બિલકુલ ગંભીરતા પૂર્વક એકલા એકલા એનું રટણ કરે રાખે છે, ને હવે જે વધ્યા એ જીવો પોતાને કઈ કઈ તકલીફો છે ? તેની વિસ્તાર પૂર્વક અને સતત અન્યોને એની જાણકારી આપી પોતાની સમસ્યાઓનો પ્રચાર કરે રાખે છે.

samiksha

कौन कहता है, हम पसंद नहीं किसी को, मुसीबतों से पूँछो... हमेशा हमे ही ढुढ़ती रहती है!!

Jyoti Gupta

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Parag gandhi

*ખરાબ લાગે તેવુ સાચુ કહી દયો પણ,* *સાચુ લાગે તેવું જુઠુ ક્યારેય ન બોલો..* *યાદ રાખજો શબ્દ શણગારી પણ દે અને સળગાવી પણ દે...* *🌹સુપ્રભાત 🌹*

Sonu Kumar

इस पुस्तक के बारे में: भारत में पिछले 21 वर्षों से "अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा लेने वाले कार्यकर्ता" जूरी कोर्ट, वोट वापसी पासबुक, रिक्त भूमि कर एवं धनवापसी पासबुक क़ानून ड्राफ्ट्स के नेतृत्व में जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए प्रयासरत है। राईट टू रिकॉल पार्टी इसी जन आन्दोलन का एक हिस्सा है। इस पुस्तक में मुख्य रूप से निम्न तरह की जानकारियां दी गयी हैः 1. वे इबारते दी गयी है जिन्हें गेजेट में छापकर गरीबी, भ्रस्टाचार आदि समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। 2. भारत की पुलिस एवं अदालतो में इतना भ्रष्टाचार क्यों है, और कौनसे क़ानून गेजेट में छापकर हम इसे ठीक कर सकते है। 3. किन कानूनों की वजह से अमेरिका-ब्रिटेन जैसे देश तकनिकी उत्पादन में दुनिया के अन्य देशो से बहुत आगे निकल गए 4. कौनसे कानून गेजेट में छापकर भारत स्वदेशी हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। 5. कैसे पेड मीडिया के प्रायोजक भारत के राज नेताओं को नियंत्रित करके भारत की जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल चीन के खिलाफ युद्ध में करना चाहते है। 6. भारत में निरंतर बढ़ रहे हिन्दू मुस्लिम तनाव का कारण, और कैसे हिन्दू धर्म को इतना मजबूत बनाया जा सकता है कि भारत में मिशनरीज के विस्तार एवं इस्लाम के बढ़ते हुए गलत प्रभाव को रोका जा सके संस्थापनाः राईट टू रिकॉल ग्रुप की शुरुआत श्री राहुल चिमनभाई मेहता ने 1999 में की थी। उन्होंने 1990 में IIT Delhi से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग और 1992 में अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी से Master of Science की डिग्री हासिल की। 1990 से 1999 तक अमेरिका में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने यह अनुसन्धान किया कि पुलिस, अदालतों एवं टेक्स के बेहतर कानूनों की वजह से अमेरिका-ब्रिटेन जैसे देश भारत एवं शेष देशो से तकनिकी उत्पादन के क्षेत्र में आगे, बहुत आगे निकल गए। 1999 में भारत लौटने के बाद उन्होंने जूरी कोर्ट, बोट वापसी, रिक्त भूमि कर एवं धन वापसी पासबुक आदि कानून ड्राफ्ट्स के बारे में नागरिको को सूचित करना शुरू किया। मेहता जी ने 2010 में पार्टी के मेनिफेस्टो का पहला संस्करण प्रकाशित किया था, जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते है - Rahulmehta.com/301.h.htm पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* " . भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ . (1) Notion press store : . Discount coupon code : RECALLIST . वोट वापसी धन वापसी भाग -1 . https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1 . वोट वापसी धन वापसी भाग - 2 . https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2 . (2) अमेजन : . भाग -1 : https://www.amazon.in/dp/B09NM3L3MG/ref=cm_sw_r_apan_glt_i_XGRT0J3BJ68G2XJTVWD0?fbclid=IwAR3I-AoOMea5Ox891B4UMOUuDvnkcCZfA91LJeoVJS_2CMfOw_HTWu4GpF8 . भाग - 2 : https://www.amazon.in/dp/B09NM6MK6J/ref=cm_sw_r_apan_glt_i_7XC3G3J5BJCGS472Z1FX?fbclid=IwAR1WwF5er71QB7X1BGSIKiO6aP_u2j3UtbdqHwC_81XNN_5XTiGNVc2fxDs . फ्लिपकार्ट : . भाग 1 : https://dl.flipkart.com/s/WKEjIiNNNN . भाग 2 : https://dl.flipkart.com/s/lMwrEpuuuN . ------------ . पीडीऍफ़ डाउनलोड - tinyurl.com/SolutionRTR . ------------

Parmar Mayur

कुछ लोग हवा की तरह होते हैं। सही में। वह दिखते नहीं है बस महसूस होते हैं। आपको शायद लगता हो कि वह कुछ नहीं है पर जैसे ही वह थोड़े दूर जाते हैं बस आपको बेचैनी और घुटन महसूस होने लगेगी। ऐसे लोगों को संभाल लिजिए, वह धड़कन ऐसे ही नहीं बने होते हैं। वह दिखते नही होते हैं दिखावा अच्छा नहीं लगता हो पर वक्त पर सांसें वहीं बनते हैं।

samiksha

हम कहां वाकिफ थे फरेब से हमें तो लगता था जो जैसा दिखता है वैसा ही है।।

Imaran

❤❤❤❤🌷☘💐💗 उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी, उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी, एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है, दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो! ❤imran ❤

Thakor Pushpaben Sorabji

જય શ્રી કૃષ્ણ,શુભ સવાર

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास बेवफ़ा शिद्दत से बेवफ़ा ने बेवफ़ाई से वफ़ा निभाई हैं l आंख मिचकें प्यार न करना बात समजाई हैं ll मोहब्बत का दम भरने वाले ने आसानी से l शुभचिंतक बन कर तन्हाई की राह दिखाई है ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Saliil Upadhyay

सुबह की हंसी दिनभर एनर्जी पति बाल कटवाकर घर लौटा और पत्नी से बोला देखो मैं तुमसे दस साल छोटा लगता हूं या नहीं ? हाजिर जवाब पत्नी बोली: मुंडन करा लेते तो ऐसा लगता अभी-अभी पैदा हुए हो...!

S Sinha

नादां थे जो दिल तुमसे लगा बैठे अनजाने में ये खता हुई हमसे पर तेरे सिवा मंजिलें और भी हैं चाँद तारों से आगे जहां और भी है

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

Sowmiya Narayanan Balakrishnan

All out for nothing, A wager of the heart on empty ground, Being liked by the wheels, not the balls— Fate applauds motion, not the aim. I laughed on hearing it; Laughter, a thin shield of sound, And she started blaming, Words rolling like loose screws in a rush of steel. Finally, she started chewing The silence, with a grunch on calls— Each bite cracking patience, Each ring echoing blame. Great to move, but she held me— A red light gripping my sleeve. “What now?” the road asked, And she hugged, folding the question shut. I tampered, then accepted, Hands trembling between pride and truth. With four words to bloom again, Petals spelling forgiveness: S-O-R-R-Y

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

धन मिलता है उसी को, करता है जो यत्न। रहे लक्ष्मी वहीँ पर, होता जहाँ प्रयत्न।। दोहा--३८५ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Yamini

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બદનામ રાજા

રાણો રાણાની રીતે... આવું કેવાવાળા મોટરસાયકલ ની આગળ સળીયો લગાવીને ફરતા થય ગયા છે... 😄

Prithvi Nokwal

🌹गीता पढ़ने के दुर्लभ लाभ 🌹 1. जब हम पहली बार भगवत गीता पढ़ते हैं, तो हम एक अंधे व्यक्ति के रूप में पढ़ते हैं. बस इताना ही समझ में आता है, कि कौन किसके पिता, कौन किसकी बहन, कौन किसका भाई है. बस इससे ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता. 2. जब दूसरी बार गीता पढ़ते हैं तो हमारे मन मे सवाल जागते हैं , कि उन्होंने ऐसा क्यों किया या उन्होंने वैसा क्यों किया ? 3. जब तीसरी बार गीता को पढ़ेंगे, तो हमें धीरे-धीरे उसके मतलब समझ में आने शुरू हो जायेंगे, लेकिन , हर एक को वो मतलब अपने तरीके से ही समझ में आयेंगे. 4. जब चौथी बार हम गीता को पढेंगे, तो हर एक पात्र की जो भावनायें हैं, उसको आप समझ पायेंगे कि किसके मन में क्या चल रहा है. 5. जब पाँचवी बार हम गीता को पढेंगे तो पूरा कुरूक्षेत्र हमारे मन में खड़ा होता है , तैयार होता है. हमारे मन में अलग-अलग प्रकार की कल्पनायें होती हैं. 6. जब हम छठी बार गीता को पढ़ते हैं, तब हमें ऐसा नहीं लगता कि हम पढ़ रहे हैं , हमें ऐसा ही लगता है , कि कोई हमें बता रहा है. 7. जब सातवीं बार गीता को पढेंगे तब हम अर्जुन बन जाते हैं , और ऐसा ही लगता हैं कि सामने वही भगवान हैं, जो मुझे ये बता रहे हैं. 8. और जब आठवीं बार गीता को पढ़ते हैं , तब यह एहसास होता है कि कृष्ण कहीं बाहर नहीं हैं, वो तो हमारे अंदर हैं और हम उनके अंदर हैं. ★ जब हम आठ बार भगवत गीता पढ़ लेंगे , तब हमें गीता का महत्व पता चलेगा कि संसार मे भगवत गीता से अलग कुछ है ही नहीं और इस संसार में भगवत गीता ही हमारे मोक्ष का सबसे सरल उपाय है. भगवत गीता में ही मनुष्य के सारे प्रश्नों के उत्तर लिखें हैं. जो प्रश्न मनुष्य ईश्वर से पूछना चाहता है, वो गीता में सहज ढंग से लिखे हैं. मनुष्य की सारी परेशानियों के उत्तर भगवत गीता में लिखे हैं. ★ गीता के जितने अध्याय हैं , उतनी बार भागवत गीता को पढ़िए. तब जाकर आप कृष्ण की तरह एक योद्धा बनेंगे, एक रणनीतिकार भी बनेंगे, और एक कुशल वक्ता भी बनेंगे.

Prithvi Nokwal

शिव अनंत है !

shree

wo kya hai na ki mene aj bhi sambhalkar rakhe hai. ha tumhre to diye hua haina, vo hasab se ishq behab dard aj bhi uski ek sukoon milta hai muje. kisi sham jab ekli bethti hu karti hu hisab tumahre unn wado ka jo shayad pure nahi hua. jab me ishq me mile dards se kap uthti hu kabhi achanak se mere dil ke kisi kone me wo mehfus pal jisko bade payar se jiya rha mene toda tha khud ko, meri rooh ke har ek katre me basta hai vo hal pal. jab yad ata hai muje. wo sannaata jis me mera dil shor karta tha. meri nind kandha tumhara hota tha. sanse meri dhadknoni raftar tumhari. kabhi mere balo se pith tak sarakta hath tumhra. kiya karu me iss ehasa ka, a ehsas muje kisi or chiz ma hakdar nahi bane deta. chahe kru hajar saval pr a dil muje bewafa nahi bane deta ♥️🥺.

Nisha ankahi

ख़ौफ़ आता है अब हर एक दस्तक से, किसी ने दिल यूँ भी तोड़कर देखा है। - Nisha ankahi

samiksha

और फिर एक समय आता है जब तकलीफ बताने में भी तकलीफ़ होती है।।

S A Y R I K I N G

भुलाने की सारी कोशिशें बेकार हो जाती है कुछ यादें मन से नहीं रूह से जुड़ी होती है

S A Y R I K I N G

इस दुनिया में, मैं सिर्फ़ तीन लोगों से मिलता हूँ.... तुम, मैं और 'हम' से । Good night

Roshan palanpuri

સાવ સીધી વાતમાં અવળું પડ્યું, હોઠ ને પંચાતમાં ક્યાં રસ હતો? રોશન પાલનપુરી

Roshan palanpuri

સાવ સીધી વાતમાં અવળું પડ્યું, હોઠ ને પંચાતમાં ક્યાં રસ હતો? રોશન પાલનપુરી

srishti tiwari

वो जो है मेरी परछाई , उसे भी दिलाना याद कहना ओ भाई। वैसे तो जीत कर ही मैं वापस लौटूंगा, और अगर न आया तो तिरंगे में लेटूंगा। सदा मां बाबा का ख्याल तू रखेगा , पढ़ाई में भी अव्वल सदा यूं आएगा । वो बोले मुझको आप ये न बोलो ना। अकेले छोड़ कर हमको न चले जाना। उसकी बातों ने उसके खतों ने और पूछा है बचपन की यादों ने की घर कब आओगे कि घर कब आओगे। लिखो कब आओगे कि तुम बिन यादें अधूरी अधूरी है। पूछा है बाबा ने कि घर कब आएगा, तेरे आने से आंगन खिल जाएगा। लिखते है बापू बेटे को कौन-सी मिठाई भेजूं मैं? करी है सगाई भाई की फोटो भी भेजी है । अगली बार जब आए तो लंबी छुट्टी पर आना । अब चिट्ठियों में न होगा बतियाना । कांपती अंगुलियों ने, तरसती आंखों ने कड़कती आवाज ने और पूछा है बाबा की लाठी ने। कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे। लिखो कब आओगे कि तुम बिन बातें सूनी-सूनी है। सृष्टि तिवाड़ी 'शान‘

Sandeep Raj Thakur

Musafir Jane Wale

Niya

વ્યસ્તતા માં પણ તું હાજરા હજુર હોય છે , જરાક વિચાર નવરાશની પળોમાં મારો શું હાલ થતો હશે… તું મારા માં હાજરા હજૂર હોય છે….

Bhavna Bhatt

હાલના સમયમાં જરૂરી છે

Bhavna Bhatt

એકવાર વિચારવું જોઈએ

Ajay Solanki

🔥 અધૂરી શોધ 🔥 ચાલ્યો હતો હું તને પામવા અનેક રસ્તાઓ પર, પણ દરેક વળાંક પર ખુલ્લા દરવાજા નથી મળતા. આંખોમાં સ્વપ્ન તો છે, પણ મંજિલ દેખાતી નથી, હાથ ફેલાવું છું, પણ હવે કોઈ સહારા નથી મળતા. ભીડમાં પણ એકલો છું બસ તારી યાદોની સાથે, આ શહેરમાં હવે એ જાણીતા ઇશારા નથી મળતા. અહેસાસ તો રહે છે સદા કે તું ક્યાંક આસપાસ છે, પણ નસીબના નકશામાં ક્યાંય એ કિનારા નથી મળતા. પૂછું છું સમય અને ભાગ્યને હું દરેક દુઆઓમાં, કેમ તારા સુધી પહોંચવાના સાચા રસ્તા નથી મળતા?

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