Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Shailesh Joshi
મોબાઈલની નજરમાં સ્વાર્થી બનો, અને દુનિયા જીતો,
જ્યારે આપણા મોબાઈલને એવું લાગવા માંડશે કે, આપણે એને કામ સિવાય હાથ પણ લગાવતા નથી,
એ દિવસથી ફરી પાછી આપણી એ જિંદગી શરૂ થશે, જે મોબાઈલ આવ્યા પછી ભુલાઈ ગઈ હતી.
- Shailesh Joshi
Chaitanya Joshi
ઠેરઠેર તપાસી જોયું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
જાણે કેટકેટલું ખોયું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
સત્યના પ્રયોગો થયા સૂના અસત્ય સઘળે પ્રકાશે,
મા ભારતીએ અશ્રુ સાર્યું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
હિંસાની હોળીમાં રખે દેશ જાય ભરખાતો આખરે,
અહિંસાનું શસ્ત્ર દોહ્યલું, ક્યાંય નથી 'બાપુ 'આજે.
ત્રણ ગોળીના પ્રહારે હર્યાં પ્રાણ સાબરમતીના સંતના,
દેશે સર્વસ્વ ગુમાવ્યું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
નયન ઊભરાયાં નિર્વાણદિને ૠણ યાદ કરતા તમારું,
દેશકાજે કેટકેટલું કર્યું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
જોડ તમારી ના મળે, અલંકારે છો અનન્વય ' બાપુ',
રાષ્ટ્રપિતાનું બિરુદ ધર્યું, ક્યાંય નથી ' બાપુ ' આજે.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Awantika Palewale
આ શબ્દોની આટીઘુટીમા મને ન ફસાવ,
તારું હૃદય જે કહે એ વાતમાં મને વસાવ.
આપેલાં વાક્યોના વળાંકમાં ખોવાઈ ન જા,
એક સાદી સ્માઈલમાં મને અર્થ સમજાવ.
શબ્દોના અર્થોના જંગલમાં ભટકી ન પડ,
તારી એક નજરથી આખું સત્ય જણાવ.
તારે જે કહેવું છે તે નયનથી જ કહી દે,
દરેક લાગણીને શાબ્દિક ન બનાવ.
હું છું તારી સામે, તું પણ હાજર છે,
બાકી દુનિયાને આ ચર્ચામાં ન લાવ.
શબ્દો તો માત્ર સાધન છે, મંજિલ નહીં,
એથી આગળ પણ એક સંસાર બનાવ .
Kiko Xoxo
The tickling sound,
from the clock,
reminding me of the time
that's never gonna come.
The essence of my
childhood memories
is still stored in my brain.
The way my friends and I played different games,
the trust we had for each other,
is now all long gone.
Only the essence of the memories
is left with us.
The tickling sound from the clock,
reminding me of the time.
That's never gonna come~
Mona Ghelani
સંબંધ જો હૃદયથી હોય તો મન કયારેય નથી ભરાતું...!!✍️🦋🌻♥️
M K
मेरी शख्सियत ही बदल गई ,
एक शख्स को चाहने में .....
पूरी उम्र तो नहीं कह सकती,
पर कुछ वक्त तो लगेंगे तुझे भुलाने में....!!
- M K
Pragna Ruparel
સંબંધો પણ ઊંધિયા જેવા
આપણો સ્વભાવ શાકભાજી જેવો રાખવો.બધા શાકભાજી મળીને સાથે રહે છે.સાથે શાક બનાવી ઊલટો ટેસ્ટ વધારે છે.આપણે એવા સ્વભાવ રાખવો કે બધા સાથે મળી જઈએ.બરાબર ને મિત્રો.
જય સ્વામીનારાયણ
Zarnaba
कुछ कहानी सिर्फ देखने से ही शुरू और देखने से ही ख़तम हो जाती है
Raa
bahut khushi ke pal ko miss karrahahu
Raa
bahut khushi ke pal ko miss karrahahu
Raa
bahut khushi ke pal ko miss karrahahu
Parmar Mayur
इंसान के जन्म के साथ ही,
मृत्यु 'निश्चित' है।
मरते नहीं है तो 'अच्छे विचार',
विचार 'जीवित' रहते है।
जो अच्छे विचारों के बीज बोते हैं,
वह 'वटवृक्ष की माफिक' फैलते हैं।
श्री कृष्ण, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, गांधीजी, आचार्य रजनीश (ओशो),
यह सब अभी जीवित नहीं है।
किन्तु उनके विचार जीवित है,
वह विचारों में 'अमर' है।
उनके नाम को उनके विचार ही अमरत्व प्रदान करके गए हैं।
उनके विरोधी भी जाहिर में उनके,
विचारों को मान दे,
उनकी प्रतिभाओं को 'नमन' करे।
तब हमें मान लेना चाहिए कि अच्छे विचारों से बना व्यक्तित्व कभी मरता नहीं है।
'श्रीं राम से हे राम' तक का सफर ,
सत्य,अहिंसा के पथ पर चल कर महान बनना कोई छोटी बात नहीं है।
Gautam Patel
gujarati ગીત
Raju kumar Chaudhary
#FutureOfNepal
#YoungTalents
#StudentMotivation
#Inspiration
#EducationMotivation
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Parag gandhi
આવતીકાલે
આપણી પાસે બહુ સમય હશે,
એ આપણા જીવનનો સૌથી
મોટો ભ્રમ છે !!
• *મૂર્ખને દોસ્ત ન બનાવાય*
• *દોસ્તને મૂર્ખ ન બનાવાય*
💐🌹🌻શુભ સવાર🌻🌹💐
Deepak Bundela Arymoulik
परवाज़
मैंने ज़मीन से नहीं,
अपने डर से विदा ली थी
जब पहली बार
ख़्वाबों ने
परवाज़ माँगी।
पंख काग़ज़ के थे
आसमान तंज़ करता था,
हवा कहती थी—
अभी ठहर जाओ,
मगर दिल को
रुकना नहीं आता था।
हर गिरना
एक सबक़ बना,
हर चोट ने
ऊँचाई का पता दिया—
मैं समझ गया
उड़ना हुनर नहीं,
हिम्मत की आदत है।
आज भी
उड़ान पूरी नहीं,
पर यक़ीन पूरा है—
जो ख़ुद पर भरोसा कर ले
उसे परवाज़
इजाज़त नहीं,
रास्ता देती है।
आर्यमौलिक
https://chat.whatsapp.com/CYldZlEnIvD9bRKHDqKbSV
Rima
Ek Aurat Ki Khamosh Taakat
**Nanhe haathon ki muskaan meri taakat hai,
Rishte ki zimmedari mere sir par.
Dil chahta hai kuch naya kar loon,
Apni khushi ko bhi saath le chaloon,
Par kisi par bojh na banoon—
Bas apni himmat ke saath aage badhti rahoon.
Sapne sambhal ke rakhe hain maine,
Roz thoda-thoda unhe jeeti hoon.
Pair zameen par hain, par soch udne ko tayaar,
Chhoti chhoti jeet mujhe udaan deti hai.
Mujhe kisi ke aage haath nahi phailana,
Bas apni mehnat se apni duniya banana hai.
Aur khud se roz yahi kehti hoon—
Har bandhan ke beech bhi
Main apni raah dhoondh hi lungi.**
Priyanshu Sharma
*Everything is happens for a reason. That a reason causes change. Sometimes it hurts. Sometimes it's hard, But in the end it's for the best..!! 🤗*
Priyanshu Sharma
rajan
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Samundar, raaz aur ek anjaan island par adharit mystery-thriller.
Agar kahani aapko engage kare, to Amazon par apna honest feedback zaroor share karein.
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dhanyabad 🙏
અનિકેત ટાંક
📚 ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલનવા ભાગ આવી ગયા છે!એક એવો ચક્રવ્યૂહ જેમાં સત્તાનો ખેલ, પારિવારિક ઝગડા, બિઝનેસની રણનીતિ અને એક પછી એક આશ્ચર્યજનક ટ્વિસ્ટ છે!
સત્તા vs માનવતા
એક ખોટી ઓળખ અને એક સંપૂર્ણ સાચી ઓળખ
બોર્ડરૂમમાં આંખોમાં આંખ રાખીને આગળ વધતો ખેલ
અને હજુ સુધી ચક્રવ્યૂહની સેન્ટરમાં પહોંચ્યા નથી!
આ રોમાંચ ચૂકશો નહીં!📱 તમારી માતૃભારતી એપ ખોલો અને “ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલ” નો નવો ભાગ આજે જ વાંચો!
https://www.matrubharti.com/novels/60696/chakravyuh-by-n-a
#ચક્રવ્યૂહ #સત્તાનો_ખેલ #GujaratiNovel #Matrubharti #NewEpisode #GujaratiStories
Kartik Kule
की नज़रों को तेरी में समझ न सका
तेरी मुस्कान के पीछे में तुझे परख न सका
गलती तुम्हारी नहीं थी गलती मेरी थी
जोतुम्हें आईने के पीछेसे
परख न सका
- Kartik Kule
Kartik Kule
अपनी ही चीजों को हमने ओर की होते देखा हे
आप हमे जलानेकी बात करतेहो हमने पहलेही शरीर को छोड़ रखा हे
- Kartik Kule
jkv production
"Expecting the nation to change without changing ourselves is like waiting for fruit without planting a seed. Social responsibility should come from duty, not from fear.
"మనం మారకుండా దేశం మారాలి అనుకోవడం.. విత్తనం నాటకుండా పండు కోసం ఎదురుచూడటం లాంటిది. సామాజిక బాధ్యత అనేది భయం వల్ల రాకూడదు, బాధ్యత వల్ల రావాలి."
written by vasa kanna
Kartik Kule
अपनी ही चीजों को हमने ओर की होते देखा हे
आप हमे जलानेकी बात करतेहो हमने पहलेही शरीर को छोड़ रखा हे
- Kartik Kule
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
खिली खिली धूप
यादों की खिली खिली धूप दिल को बहला गई l
फ़िर से मुलाकात की चिंगारीयों को भड़का गई ll
एक अलग ही मजा आ रहा नशीले रूतबे का
l
आज थोड़ी गर्मी थोड़ी ठंडी मौसम बहका गई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Imaran
Hame न #Mohabbat मिली न #Pyar💖 मिला,
Humko जो भी मिला #Bewafa👧 यार मिला,
Apni तो बन गई तमाशा Jindegi,
हर कोई मकसद का तलबगार मिला
💔imran 💔
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
Dinesh
🙏*જય બાબા સ્વામી*🙏
*આજનો સુવિચાર*
ભ્રમ હતો કે કાબેલિયતથી જ બધું મળે છે. સમયે સમયે જાણ થતી ગઈ કે કરેલાં સત્કર્મો/આશીર્વાદ જ ફળે છે.
*શુભ સવાર*
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
कामी-क्रोधी पुरुष जो, करे मद्य का पान। सुख उसको मिलता नहीं, मिले नहीं सम्मान।।
दोहा--402
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
Rima
माँ और बच्चे का रिश्ता
माँ एक बच्चे का रिश्ता ऐसा होता है,
जो शब्दों से नहीं, साँसों से जुड़ा होता है।
बच्चा रोए तो माँ का दिल काँप जाता है,
दर्द उसका हो या न हो, आँसू माँ के आ जाते हैं।
माँ खुद भूखी रह लेती है,
पर बच्चे की थाली पूरी देखना चाहती है।
अपनी नींद, अपने ख्वाब
सब चुपचाप उसके नाम कर जाती है।
बच्चा गिर जाए तो
दुनिया हँस भी दे,
माँ की गोद फिर भी
सबसे सुरक्षित जगह बन जाती है।
वो रिश्ता नहीं गिनता एहसान,
न उम्र देखता है, न हालात।
बच्चा चाहे बड़ा हो जाए,
माँ के लिए वो हमेशा बच्चा ही रहता है।
माँ और बच्चे का रिश्ता
ईश्वर का सबसे खूबसूरत करिश्मा है—
जहाँ बिना शर्त प्यार है,
और बिना कहे समझ लेना ही सब कुछ है। 🌸
Soni shakya
रातों से दोस्ती कर ली मैंने..
दिन को तो बस निभा लेते हैं..
- Soni shakya
Soni shakya
गिला ये नहीं कि तुम किसी और के हुए..!
गम तो ये है कि हम..
बेवजह नजरअंदाज किए गए..!!
- Soni shakya
writerscaste
your smile is
best medicine to me
your voice is oxygen to me..
- writerscaste
writerscaste
ప్రమాణం చేస్తున్నా
సదా నీతోనే
మరణం వరకు
నిన్ను వీడిపోను
- writerscaste
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
आंसू मेरे सुख गए...
shivani singh
किताबों के गणित से ज्यादा मुश्किल होता मन के गणित को हल करना,, अनेक पन्ने भरते भरते उत्तर गलत ही निकाल देती क्योंकि गणित में कमजोर नहीं क्योंकि उत्तर मेरे पक्ष में कभी होगा ही नहीं,, इसलिए मन के भूगोल के पीछे भाग रही और इतनी अपरिपक्व हो जाती घूम के वहीं आ जाती और अपने संवेदनाओं के व्याकरण को और कठिन बना देना चाहती और जब भी बेहतर होती, मेरे व्यक्तित्व का दर्शन आके मुझे झकझोर देता और मैं फिर शून्य में जाके बस मुस्कुरा देती.....
M K
पता नहीं कब बात होगी सही से
कब मुस्कुरा दोगे तुम मेरे कहने पर
क्यों सब कुछ बदल गया है यहां
यादों पर कलम चलाना नहीं है
तुम्हारे दिए संस्कार भरे धोखे बड़े लाज़वाब थे.....!!!
- M K
M K
तेरे दर्दों का गुलामी,
तुम्हारे आंखों के आंसू करे...
थोड़ा से ज्यादा तकलीफों का एहसास तुम्हे भी हो
शायद समझ आए,
जब नियत में खोट हो, चेहरा साफ कर
आईना देखने से क्या फायदा....???
- M K
Heena Ramkabir Hariyani
दुआ....
कहीं अब उसे मे ढूंढता ही नहीं,
दर दर भटक ने मे मजा ही नहीं,
सिखाके गया है एक सिख वो जो,
खुद को ही दुआओ में मागना रोज,
क्योंकि खुद ही से प्रेम और नफरत,
ये कोई आसान काम तो है नहीं।
हीना रामकबीर हरीयाणी
- Heena Ramkabir Hariyani
M K
बादलों से पूछा नहीं मैने,
उस शख्स तक जाने का कोई रास्ता,
जब आंखों में बरसात हो तो
फिर दर बदर क्यों भटकना...??
- M K
S K I N G
बाहर देशों में जब बच्चा पैदा होता हैं
तो उसे खिलौने लाकर देते है
ताकी वो खेले
और हमारे यहां
एक और पैदा करते है
ताकी दोनों साथ खेले
M K
अब मुझसे कोई करे न मोहब्बत
इस बात का पूरे शिद्दत से ख्याल रखती हूं,,
जान कहने वाले लोग अक्सर किनारा कर जाते हैं...!!
- M K
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
अगर इतना ही सब्र-ए-सुकून इस
इश्क़ में होता,
तो ज़हर-ए-जुदाई किसी ने भी
चखा नहीं होता,
सँभल जाते हम भी वक़्त की
आहट को सुन कर,
अगर तुमने भी आँखों में पर्दा
रखा नहीं होता,
ये जो बिखरे पड़े हैं, काग़ज़ों पे
लहू के कतरे,
कलम में दर्द कोई भी इतना
तीखा नहीं होता,
मज़ा तो तब था कि तुम साथ
चलते मंज़िलों तक,
सिर्फ़ यादों का साथ हमने ही
चखा नहीं होता,
बड़े सलीके से तुमने किया है कत्ल-
ए-तम्मना,
वरना हमने भी मौत का ये मंज़र
देखा नहीं होता,
शायरी तो बस एक बहाना है
दुनिया को बताने का,
कि अगर तुम वफ़ा करते तो हमने
भी कुछ लिखा नहीं होता…🔥
╭─❀💔༻
╨─────────━❥
#Zakhmi-e-zubani..✍🏼
#LoVeAaShiQ_SinGh☜
╨─────────━❥
aakanksha
चुपचाप सी ज़िंदगी में तू शोर बनकर आया,
सूनी सी राहों में तू एक मोड़ बनकर आया।
न कोई वादा था, न कोई इरादा मगर,
दिल के हर कोने में तू अपनी जगह बनाकर आया।
अब आदत सी हो गई है तेरे ख्यालों की,
जैसे सांसों को हवा की जरूरत हो जाती है… ❤️
Hardik Boricha
*"તું મારી વાત છોડ*
*જગત આખું હવામાં છે,*
*વગર પીધે*
*અહીંયા સૌ નશામાં છે.*
*ચમત્કારોની બસ*
*આદત પડી ગઈ છે,*
*ને ઈશ્વરથી*
*વધુ શ્રદ્ધા ભૂવામાં છે,*
*સ્પર્ધા વધી ગઈ છે*
*મૂર્તિ તણી ઊંચાઈમાં,*
*બાકી ભગવાન તો*
*સોપારી માંય સમાંયા છે.*
*ચહેરાના રંગ પર*
*ના જવાય હો દોસ્ત,*
*કેમ કે મેં તો દુધથી વધારે*
*ચા ના દીવાના જોયા છે.*
*કેટલી ધીરજ હશે*
*એ ટપાલ ના જમાના માં,*
*આજે બે મિનિટ મોડો*
*રીપ્લાય આપીએ તો*
*લોકોને શક કરતાં જોયા છે.*
*તમે ગમે તેટલું ઈંગ્લીશ ભણ્યા હોય પણ કુતરા પાછળ દોડે એટલે*
*"હઇડ હઇડ" જ કરવું પડે,*
*ત્યાં પછી "excuse me" ના ચાલે.*
*હસતા રમતા રહો*
🙏🙏
SUNIL ANJARIA
આજના સુપ્રીમ કોર્ટ ના ચુકાદાનું આખા દેશે સ્વાગત કર્યું.
એટ્રોસાઈટ એક્ટનો પણ આ રીતે ખૂબ દુરુપયોગ થાય છે. બેન્કની લોનો એ વર્ગ સબસિડી સુધી ચાલુ રાખે, એમને જ મળે એવી સબસિડી લે પછી રામેરામ. મેનેજર એ કોઈને દબડાવે તો સીધો એટ્રોસાઇટ. આ એક દાખલો છે.
મેં કુતૂહલવશ એક નિરીક્ષણ કરેલું, અત્યારે સવર્ણો લઘુમતીમાં આવી ગયા છે!
એ વર્ગને શિક્ષણ નહીં જેવા ભાવે, નોકરીમાં અને સારી જગ્યાએ એડમિશનમાં ખુબ મોટો ક્વોટા અને સવર્ણ કરતાં ખૂબ ઓછા ટકાએ, અનેક સગવડો માત્ર એમને.. આમાં બંધારણે આપેલ સમાનતા ક્યાં આવી?
હશે, છેલ્લાં બસો અઢીસો વર્ષ એ વર્ગનું શોષણ થયું હશે પણ પછી 80 વર્ષથી એને નામે એ સહુ નાનીનાની વાતમાં પોતાને પીડિત બતાવી કૂદી પડે છે. સવર્ણ વર્ગ એટલો એકત્રિત નથી એટલે કોઈ નવનિર્માણના બાપ જેવી ક્રાંતિ શક્ય નથી. સામે એ વર્ગના લોકો સોશિયલ મીડિયાનો પણ પૂરો ઉપયોગ ભેદભાવ ઓછો કરવા નહીં, વધારવા કરે છે.
ગામડામાં હવે કોઈ દલિતનો વરઘોડો ધરાર રાજપુતોના વિસ્તારમાં અમુક બુમો પાડતો ન નીકળે તો કોઈ હેરાનગતિ થતી નથી જ.
હવે શહેરમાં ટાવરોમાં બાજુવાળો પરપ્રાંતિય દલિત છે કે સવર્ણ એ ખબર પણ પડતી નથી.
હવે જેમને લાભો જાય એટલે ચલાવવું છે એ જ બધા ગોકીરો મચાવે છે.
મોરારજી દેસાઈને 100મુ વર્ષ બેઠું ત્યારે પત્રકારે પૂછ્યું કે દલિતો માટે સંદેશ? એમણે કહ્યું કે નદી સમુદ્રમાં ન મળે તો ગંધાઈ ઊઠે સુકાઈ જાય. એમ હવે દલિત સવર્ણ ભૂલી મુખ્ય પ્રવાહમાં આવી જવું જોઈએ. તેઓ બિચારા સવર્ણ હતા એટલે ક્યાંક વિરોધ થયો. 1997 માં.
ગાંધીજીએ એ વર્ગને પછાત ન ગણવા આભડછેટ દૂર કરવા કહેલું, એમને ઉચ્ચ પદે સ્થાપી દેવા નહીં. છતાં વચ્ચે નોટો પર ગાંધીજી કેમ, આંબેડકર કેમ નહીં એવો વિવાદ ચાલેલો. એ લોકો માટે સમાનતાની શરૂઆત કરનાર ગાંધીજી પણ સવર્ણ હતા એટલે એમને વિશે આ સોશિયલ મીડિયામાં જેમ તેમ લખાયેલું, અમુક વર્ગ દ્વારા, વાંચ્યું છે.
ખુદ આંબેડકરજીએ એ વખતની સ્થિતિમાં પાછળ રહી ગયેલા દલિતોને સાથે લાવવા દસ વર્ષ આરક્ષણ રાખવા કહેલું. એને હવે 80 વર્ષ થયાં. જે સરકાર હોય એ, હવે આરક્ષણ દૂર નહીં કરે એને મત નહીં. બોયકોટ ઇલેક્શન
બંધારણ મુજબ મને એક સવર્ણ તરીકે સમાનતા ને બદલે જિંદગી આખી ભેદભાવ નડ્યો છે. જ્યાં દલિત બહુમતી થઈ જાય એવી ઓફિસમાં પુરી હેરાનગતિ ભોગવી છે. મારે નોકરી કરવી હોય તો કોઈ જગ્યાએ ફરિયાદ થાય એમ ન હતું.
હવે સવર્ણો જ લઘુમતીમાં આવી ગયા છે એટલે તો વસતી ગણતરીમાં જાતિ નો સમાવેશ કરવાના છે એમ સાંભળ્યું.
આ ચુકાદો જે તે સત્તાવાળાઓની આંખ ઉઘાડનારો છે. હવે તો આ જાણીબુઝી એક વર્ગને અન્યાય કરી બીજા વર્ગની તરફેણ બંધ થવી ઘટે.
નાક દબાવવા એક થઈ કહી શકાય કે જો જાતિ આધારિત કે કોઈ પણ પ્રકારનું આરક્ષણ ચૂંટણી પહેલાં સમાપ્ત નહીં થાય તો કોઈ સવર્ણ મત જ નહીં આપે. આમેય એ લોકોની ઘણીખરી વોટબેંક વર્તમાન સરકારની વિરુદ્ધ છે. ફેર વર્તમાન સરકારને પડશે, અત્યારના વિરોધ પક્ષ ને નહીં.
મેં કોઈ માટે ઘસાતો શબ્દ નથી ઉચ્ચાર્યો. હું નરસિંહ મહેતાનું સંતાન છું, હું જાતિ માં માનતો નથી. પણ કોઈ પણ માનીને બીજા ઉપર આધિપત્ય ભોગવે એ પણ માન્ય નથી.
Hardik Boricha
सफर खूबसूरत है तुम्हारे साथ......✨
मंज़िल की फ़िलहाल बात नहीं करते!💔
Hardik Boricha
वो जो आज... अकेले..रहने पर तुला हुआ हैं,,,
उसने सबके साथ रहकर भी देख लिया होगा...??????❤️🌻
Hardik Boricha
कोई भी इंसान खुद नहीं बदलता,
जिंदगी में कुछ हादसे ऐसे हो जाते हैं
जो इंसान को बदलने पर मजबूर कर देते हैं। 💔💔
Hardik Boricha
त्याग दी सब ख्वाहिशे,
निष्काम होने के लिए,
राम ने खोया बहुत कुछ,
"श्री राम" होने के लिए...!
🙏 जय श्री राम 🙏
S K I N G
आज मैने एक लड़की से पूछा
आपके चेहरे को आपके बालों को देख कर ऐसा
लग रहा है
जैसे बिल्ली किसी काटे दार झाड़ में फंस गई है
S K I N G
संभवतः कोई देख ना सकेगा
मगर ये दुख...
तुम्हारी आत्मा निखार देता है!
बेहद मोहब्बत थी तुमसे तुम थी का मतलब तो समझते होंगे ना
मुझसे ना पूछना मेरे लिखने का सबब
मैंने अपनी हर नज़्म मरने के बाद लिखी है
S K I N G
एक लड़का लड़की देखने गया
लड़के को देख कर लड़की की मां बेहोश हो गई
जब होश में आई मां तो
बोली ये कमीना तो मुझे भी देखने आया था
🤞🤞🤞🤞🤞🤞🤞😭😭😭
Urvashi Oza
कुछ लोग आपको चाहे जितना भी सुना दे
उनसे नफ़रत नहीं हो पाती
Raju kumar Chaudhary
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Raju kumar Chaudhary
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Raju kumar Chaudhary
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Sudhir Srivastava
सरसी छंद- मुस्कान (१६,११)
आओ हम सब मिल बिखराएं, नित नूतन मुस्कान।
हर मुख पर खुशियां फैलाएं, ईश्वर का वरदान।।
जाने कैसी ये हठधर्मी, करते हैं अब लोग।
और भूलते जाते क्यों है, कहते हैं संयोग।।
खुद ही नाहक बनते जाते, दुश्मन हम क्यों आज।
समझा दे कोई तो हमको, पीछे क्या है राज।।
मुस्कानों की हम इक बगिया, चलो लगाएं आज।
और बांटने निकल पड़ें हम, सौगातों का ताज।।
मुश्किल जितना समझ रहे हो, उतना है आसान।
जानबूझकर बने हुए हो , आप व्यर्थ नादान।।
हर छोटी-छोटी बातों में, खोजें हम मुस्कान।
इक संकल्प हमें है करना, निज की नव पहचान।।
दान मान हम मुस्कानों को, बांटेंगे भरपूर।
सच मानो खुद ही भागेगी, कुंठा अपनी दूर।।
और नहीं कुछ करना हमको, बस रहना है मस्त।
मुस्कानों के संग सदा ही, रहना हमको व्यस्त।।
एक नया संसार बसाने, निकल पड़ें हम आप।
मिट जाएगा सारे जग का, रोग, शोक, संताप।।
सुधीर श्रीवास्तव
S K I N G
हर रोज मेरे दिल में उगने वाले मुझे हैरानी है तुम और मैं अलग अलग बसर कैसे कर सकते है?
Sudhir Srivastava
तथास्तु कह दो माँ
**********
आज बसंत पंचमी है
इतना तो मुझे भी पता है
कि आज माँ शारदे का दिवस विशेष है।
पर शायद आपको पता नहीं, जो अजूबा हो गया
मेरा मित्र यमराज मुझसे ख़फ़ा हो गया
और माँ शारदे की चौखट पर पहुँच गया।
सम्मान से माँ को शीष झुकाकर गुहार लगाया
माँ मुझ पर भी उपकार कर दो,
तनिक तो हमें भी ज्ञान को वर दे दो।
पर आपको तो वीणा बजाने से ही फुर्सत नहीं है।
कम से कम अपनी वीणा को भी तनिक विश्राम दे दो।
मैं यमराज द्वार पर आकर खड़ा हूँ
मुझे भी तो अपना दर्शन दे दो,
मम शीश पर अपना हाथ रख दो
मैं भी कविता लिखना और कवि बनना चाहता हूँ
इसके लिए भी कोई मंत्र दे दो।
अब ये मत कहना माँ! कि अपने यार को गुरु बना लो
लेकिन उसे भी सौ-पचास ग्राम सद्बुद्धि दे दो
आपका मन करे तो दो-चार चाँटे भी जड़ दो।
वो समझता है कि मैं मूढ़ अज्ञानी हूँ
कविता लिखना तो दूर
कवि बनने के योग्य तो बिल्कुल भी नहीं हूँ
वो मेरा यार है, इसलिए बर्दाश्त करता हूँ
वरना आपको भी पता है
कि मैं उसका तिया- पाँचा कर सकता हूँ।
यमराज की पीड़ा सुन माँ शारदे पिघल गईं,
वीणा रखकर द्वार पर आ गईं,
और आसन छोड़ चौखट पर आ गईं।
अपने सामने माँ को देख
यमराज किंकर्तव्यविमूढ़ हो सब कुछ भूल गया,
माँ शारदे के चरणों में लोट गया,
माँ मुझे माफ़ कर दो
मेरे यार को अद्भुत ज्ञान, उत्तम स्वास्थ्य
और वाणी विवेक का वर दे दो।
मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए,
बस! मेरे यार को वैश्विक पहचान
और हमारी यारी को अमरता का वरदान दे दो,
जो भी शिकवा शिकायत किया मैंने,
उसे मेरी मूर्खता मान नजरंदाज कर दो,
पर नाराज़ बिल्कुल न होना माते
अपने यार की सलाह पर ही तो मैं यहाँ आया
और आपके दर्शनों का सौभाग्य पाया हूँ,
इसके लिए यार को माफी के साथ
हम दोनों को अतुलित वर दे दो,
बस! ज्यादा नहीं थोड़ा सा उपकार कर दो,
अपने वरद पुत्र पुत्रियों के संग हमें भी भव से तार दो माँ, कविता भले ही मेरा यार लिखे
पर कवि कहलाने का सिर्फ मुझे ही
एकाधिकार और आशीर्वाद दे दो,
मेरी प्रार्थना पर सिर्फ एक बार तथास्तु कह दो,
हम दोनों मित्रों का नमन वंदन स्वीकार कर लो।
सुधीर श्रीवास्तव
Aarushi Singh Rajput
Of course 😮💨🤨 Apne Apne thoughts comment Jarur karna aap log
Aarushi Singh Rajput
Of course 😮💨🤨
Nilesh Rajput
स्त्री की चाह कभी आज़ादी थी ही नहीं। उसकी चाह तो बस उन मर्यादाओं को तोड़ना थी, जो सिर्फ़ उसके लिए बनाई गई थीं। पुरुषने जो मर्यादा तोड़ी, अपना सुकून पाने के लिए,वही मर्यादा तोड़ना चाहती थी स्त्री।
आज़ादी का भ्रम दिखाकर आख़िरकार स्त्रीने मर्यादा की खींची लकीर को तोड़ ही दिया।
Jyoti Gupta
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naam me kya rkha hai
इंसान तारों को तब देखता है,जब अंदर कोई सन्नाटा उतरता है, दिन में चेहरों की भीड़ रहती है,
रात को सच दिल से गुजरता है............
Mrs Farida Desar foram
हो सके तो लौ लौ लौट के आना,
आँखों को तेरा इंतजार,
बेसब्री से रेहता हे....
- Mrs Farida Desar foram
ArUu
मुझे प्रेम है अपने देश से,
पर सुविधा की चादर ओढ़े,
कर्तव्य की ठंड से काँपता हूँ,
प्रोफाइल में तिरंगा सजाता हूँ,
पर
ज़मीनी सच से आँखे चुराता हूँ।
मुझे प्रेम है अपने देश से,
पर भूखा बच्चा जब राह में रोता है,
सिस्टम का दोष बताकर
मैं चैन की नींद फिर सोता हूं
जाति, धर्म, भाषा के नाम पर,
मैं दीवारें ऊँची खड़ी करता हूँ,
उसी मलबे पर चढ़कर फिर,
देशभक्ति की हुंकार भरता हूँ।
कहता हूँ बदलाव चाहिए,
पर खुद बदलने से घबराता हूँ,
उँगली हमेशा औरों पर उठाता हूँ,
आईना देखने से कतराता हूँ।
शोर में सच को दबा देता हूँ,
भीड़ के साथ बह जाता हूँ,
गलत जब ताक़त बन जाए,
मैं चुप्पी को समझदारी बताता हूँ।
देश मेरा सपना नहीं,
सिर्फ़ बहस का विषय बन जाता है,
कुर्सी, सत्ता, स्वार्थ की आग में
हर आदर्श जल जाता है।
पर शायद अब भी वक़्त है,
इस नींद से जाग जाने का,
देश नहीं बदलेगा नारों से,
खुद को बेहतर बनाने का।
जब ईमान मेरी आदत बने,
संवेदना मेरी पहचान बने,
तभी कह सकूँगा गर्व से —
हाँ, मुझे सच में अपने देश से प्रेम है।
Shefali
#shandone_sarname__
#shabdone_sarname_
Niya
હવે પાનખર હું એકલી સહું છું,
પણ પીડાને હેત બનાવી,
મારી પ્રીતને બાંધતી નથી,
એને મુક્ત છોડું છું…
કારણ કે અનોખી પ્રીત
ફાંસામાં નહીં,
સ્વતંત્ર શ્વાસોમાં જ
અમર બને છે…
Dhamak
FIR vahi subah Hai
Nency R. Solanki
काम करने से निखरता हूँ,
बिखरता था कभी, अब जुडता हूँ!
- Nency R. Solanki
Mr joy x
20/09/2025
“अनजान प्रेम”
मैं तुमसे क्यों मिला ?
और तुम्हें गलती से कहा खो बैठा ?
ये अनजान और संगदिल प्यार
मैं कभी भुला नहीं सकता ।
तुम्हारे बिना मेरा दिल
टूटा हुआ शीशा है,
और जिसके टुकड़े भी है
तुम्हारी यादों से सजे हुए ।
मैं इसे कैसे बया करू?
मेरा दिल भी सिर्फ
तुम्हारे लिए धड़कता है !
मेरी आंखें हर पल तुम्हें ही ढूँढे
मैं बेसहारा हु और कही सो गया हूँ।
मेरा प्यार सच्चा है, मगर
उसका अहसास होने से पहले ही
गलती से तुम्हें कही खो बैठ ।
— jyotimoy choudhary
@mr joy x
Shraddha Panchal
ठहरे से लोग
इधर -उधर
दौड़ना और छोड़ना
नहीं जानते
वो ठहर जाते है
वक्त, चीजों और
ज़िन्दगी में आये
उन लोगो के साथ
उम्र भर के लिए 😇💕
Mohit Nath
~अगर जिंदगी में खुशी रहना है!
!! तो अकेले हो जाओ क्योंकि अकेलेपन~
(: से अच्छा कुछ भी नहीं है !!!
- Mohit Nath
Paagla
https://youtube.com/shorts/pblv7fgvHZg?si=9aPz3qS5ENxzPIQP
Annu jangra
agar aap me se koi Trading karna chata hai to aap meri video jrur dekhna
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Parmar Mayur
कोई एक व्यक्ति से हमें बुरा अनुभव होता है,
फिर हम सभी इंसानों को बूरा समझने लगे,
तो फिर गलतियां हमसे ही होगी।
हर एक इंसान में अच्छाई या बुराई ही पनपतीं है,
वह ग़लत बात है।
किसी में अच्छाई भी पनपतीं है तो किसी में बुराई।
अच्छे इंसानों पर भी आप भी बूरे होगे,
वह प्रश्न कब पैदा होता है।
मालूम है?
जब बुराई अच्छाई का नक़ाब पहनकर पहले पास आती है,
फिर वह अपने वास्तविक रूप में आकर असली रूप दिखलातीं है।
तब वह पीड़ित इंसान,
सभी अच्छे इंसानों को भी बूरा समझने लगता है।
किन्तु कुछ विवेक शक्ति भी होनी चाहिए,
अच्छाई और बुराई को समझने की।
एक बार धोखा खाए हुए इंसान में वह समझ अच्छी तरह आ जानी चाहिए।
रावण ने सीतामाता का हरण,
साधु वेश धारण करके किया,
वह रावण की नियत और सोच खराब थी,
साधु और साधुत्व नही।
इसलिए जिंदगी में नक़ाब पहनें मिलते रहते हैं चहेरे,
आज़मा लेना चाहिए जरुर, असलियत के दिख जाते है चहेरे।
Dhamak
फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)
मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)
तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...
फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK
Maulik Patel
પાણિયારા પાસે હું ઊભો રહીને એ પનિહારી ને હું જોવું છું,
પ્રેમથી અતિ વ્યાકુળ આ મનને હું અનાયાસે તૃપ્ત કરી ખાઉં છું,
આવું છું એવું કહીને હું ક્યાંક જઈને આવું છું,
પણ હું તો પ્રેમના સરનામાં પર કઈંક મૂકીને આવું છું."
Raju kumar Chaudhary
🎬 नायक: द रियल हीरो – अनिल कपूर की राजनीतिक थ्रिलर फिल्म की पूरी कहानी और समीक्षा
✨ छोटा विवरण
अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
📝 फिल्म परिचय
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है।
निर्देशक: एस. शंकर
मुख्य कलाकार: अनिल कपूर, रानी मुखर्जी, अमरीश पुरी, परेश रावल, जॉनी लीवर
यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
📖 कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं।
एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है। शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं।
गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह:
✅ भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं
✅ जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं
✅ दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं।
कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
🌟 फिल्म समीक्षा (Review)
👍 अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को असरदार ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
👎 कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
🏆 निष्कर्ष
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर बदलाव ला सकता है।
यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Raju kumar Chaudhary
NAYAK ( THE REAL HERO )अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
🔹 मुख्य कंटेंट (Story + Review)
फिल्म परिचय:
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन एस. शंकर ने किया और इसमें मुख्य भूमिका निभाई अनिल कपूर ने। यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं। एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है।
शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं। गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं, जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं और दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है।
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं। कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
फिल्म समीक्षा (Review)
अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
निष्कर्ष:
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर किस तरह बदलाव ला सकता है। यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार के विषय पर सोचने पर मजबूर करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Raju kumar Chaudhary
NAYAK ( THE REAL HERO )अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
🔹 मुख्य कंटेंट (Story + Review)
फिल्म परिचय:
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन एस. शंकर ने किया और इसमें मुख्य भूमिका निभाई अनिल कपूर ने। यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं। एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है।
शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं। गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं, जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं और दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है।
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं। कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
फिल्म समीक्षा (Review)
अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
निष्कर्ष:
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर किस तरह बदलाव ला सकता है। यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार के विषय पर सोचने पर मजबूर करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Maulik Patel
કઈંક લખું હું હૃદયના અંતરમાં,
પછી પાના ફેરવું હું મારી સ્મૃતિમાં,
હૃદયના ધબકારાઓ થકી હું મોકલું સંદેશો એને હું શિરા અને ધમનીમાં,
કારણ ગમે તે હોય પણ હું તો મળતો રહીશ એને Time Travel માં.
Kamini Shah
શમણાં પણ જોને આભમાં
વિખરાયાં
કાટમાળ થઈ ધરતી પર
પથરાયાં…
-કામિની
Shailesh Joshi
જો તમારે તમારો સમય, મગજ અને
તમારી મહેનત વધારે ન બગાડવી હોય તો
શક્ય હોય ત્યાં સુધી બસ આટલું જ કરજો,
કે કર્મથી લઈને પરિણામ સુધી
તમે એકલા જાતે જ જજો,
સલાહ સૂચન લેજો પરંતુ મદદ...
એતો ક્યારેય ન લેતા.
- Shailesh Joshi
Gautam Patel
बालाजी महाराज
Pragna Ruparel
સુખ
જો માણસ કેવળ સુખી થવા ઈચ્છે તો તેની ઈચ્છા પૂર્ણ થઈ શકે છે.પરંતુ જો માણસ અન્ય લોકો કરતાં વધુ સુખી થવા ઈચ્છે તો એમાં મુશ્કેલી ઉત્પન્ન થાય છે.કારણકે આપણે અન્યને વાસ્તવિકતા થી પણ અધિક સુખી સમજીએ છીએ.
ઇમર્સન.
Anup Gajare
"अनाम सा"
___________________________________________________
क्या बात कहूं उससे
जो मुझसे परे होकर भी
देखता है कि कुछ भी नहीं देखता।
उसका होना मेरे लिए महज एक संयोग है,
या सच में किसी आईने की तरह
वह मुझे रोज़ खिचड़ी बालों में
कंघी घुमाते हुए देखता है।
उसका कोई नाम नहीं,
पर क्या बस नाम ही
किसी चीज़ को वजूद देता है?
अस्तित्व होने से नहीं होता।
वह तो बस मेरी कल्पना से भी परे कुछ है,
जिसकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती,
जिसके बिना साँस छोड़ते हुए
मैं बुदबुदाता हूँ हवा को।
और उसकी झलक न दिखते हुए भी
महसूस होने की भावना से भी ऊपर का
कुछ मुझे छू जाता है।
लेकिन यह स्पर्श ज्ञान नहीं है।
उसे तो किसी भी मानवी संवेदना में
बाँधा नहीं जा सकता।
अंधकार में हिलता हुआ वह
हिल भी नहीं रहा होता।
मुझे मालूम है—
उसका यही न होना
मुझे उससे जोड़े रखता है।
जैसे बारिश की पहली मिट्टी की गंध में
नहाया हुआ मेढक
किसे देखता है?
उसकी डरावनी ध्वनि में
छुपा तत्व मुझे क्यों नहीं बोध होता।
क्या बस बंधन में बंधे
मांझे को पतंग के होने की
भावना महसूस नहीं होती?
किसी विलुप्त अवकाश में
उसका छुपा रहना क्या है,
या शायद मुझे ठीक एड्रेस पता नहीं है।
उसे ढूंढा नहीं जा सकता,
क्योंकि छुपना, खोजना—
यह सब इंसानी साज़िशें हैं।
मानवीय नियम वगैरा
झूठे नहीं हैं,
पर वह मेरे आयाम का हिस्सा होते हुए भी नहीं है।
या यूँ कहा जा सकता है
कि मनुष्य बस है—
जिसने अभिजीत को नहीं छुआ है।
बस किसी कोने में बसी हुई
अपनी सभ्यता उसे ढूंढती है।
उनके साथ भी यही होता होगा,
जिन्हें वह कभी दिखा
या शायद दिखा नहीं होगा।
एक बात कहूं—
वह कोई ईश्वर
या महबूब नहीं है।
______________________________________________
Yuvraj Chouhan
always believe in your self #support
Raju kumar Chaudhary
सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)🌟 शीर्षक: हार मानने से पहले
रमेश एक छोटे से गाँव का लड़का था। उसके पिता मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में काम। घर की हालत ऐसी थी कि कई बार रात का खाना भी पूरा नहीं होता था।
स्कूल में रमेश को कोई खास नहीं समझता था। उसके कपड़े पुराने थे, जूते फटे हुए। कुछ बच्चे हँसते हुए कहते—
“इससे कुछ नहीं होगा।”
हर बार ये शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ जाते।
एक दिन परीक्षा का रिज़ल्ट आया। रमेश फिर फेल हो गया। वह स्कूल के पीछे अकेला बैठकर रो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी ज़िंदगी भी उसी रिज़ल्ट की तरह “फेल” हो चुकी है।
घर आकर उसने माँ से कहा,
“अम्मा, मुझसे पढ़ाई नहीं होती। मैं काम करने चला जाऊँगा।”
माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा और धीरे से बोली—
“बेटा, हार वो नहीं जो गिर जाए, हार वो है जो उठना छोड़ दे।”
वही एक वाक्य रमेश की ज़िंदगी का मोड़ बन गया।
अगले दिन से रमेश ने एक नियम बना लिया—
रोज़ सुबह जल्दी उठना, दो घंटे पढ़ाई, और दिन में जो भी समझ न आए, दोबारा कोशिश।
कई बार वह थक जाता, कई बार मन करता छोड़ देने का। लेकिन माँ का वो वाक्य उसे हर बार रोक लेता।
समय बीतता गया। साल बदले।
और वही रमेश, जिसे कभी “बेकार” कहा गया था, आज सरकारी नौकरी में चयनित हो गया।
जिस दिन उसने माँ को सफलता की खबर दी, माँ की आँखों में आँसू थे—खुशी के।
✨ सीख
हालात चाहे जैसे हों, अगर इंसान हार मानने से पहले एक बार और कोशिश कर ले—तो किस्मत भी रास्ता बदल देती है।🌟 सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)
राजु एक साधारण से गाँव में रहने वाला लड़का था। उसके घर में न ज़्यादा पैसे थे, न बड़ी सुविधाएँ। लेकिन उसके पास एक चीज़ बहुत खास थी — सपने देखने की आदत।
जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब राजु पुरानी कॉपियों के खाली पन्नों पर कहानियाँ लिखा करता था।
वह लिखता था—
कभी किसान की पीड़ा,
कभी माँ की ममता,
तो कभी अपने ही संघर्ष की कहानी।
उसका सपना था—
“एक दिन मैं बड़ा लेखक बनूँगा, मेरी कहानियाँ लोगों के दिल तक पहुँचेंगी।”
लेकिन राह आसान नहीं थी।
स्कूल में लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे—
“कहानी लिखने से कोई बड़ा आदमी बनता है क्या?”
घरवाले कहते—
“पहले नौकरी सोचो, ये लिखना-पढ़ना बेकार है।”
कई बार राजु का हौसला टूट जाता।
एक दिन उसने अपनी डायरी बंद करते हुए सोचा—
“शायद वे सही हैं… मुझसे नहीं होगा।”
उसी रात उसने एक किताब पढ़ी, जिसमें लिखा था—
“सपने वो नहीं जो सोते वक्त आएँ, सपने वो हैं जो सोने न दें।”
ये पंक्ति राजु के दिल में उतर गई।
अगले दिन से उसने तय किया—
रोज़ लिखेगा, चाहे कोई पढ़े या नहीं।
रोज़ सीखेगा, चाहे कोई सराहे या नहीं।
वह सुबह जल्दी उठकर लिखता,
दिन में काम करता,
और रात को फिर शब्दों से दोस्ती करता।
उसकी कहानियाँ पहले मोबाइल पर पढ़ी गईं,
फिर सोशल मीडिया पर,
और एक दिन…
एक प्रकाशक की नज़र राजु की लेखनी पर पड़ी।
कुछ समय बाद राजु की पहली किताब छपी।
जब उसने किताब पर अपना नाम देखा —
“लेखक : राजु”
तो उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो आँसू हार के नहीं, सफलता के थे।
आज राजु एक जाना-माना लेखक है।
लेकिन वह आज भी वही बात कहता है—
✨ सीख
अगर सपना सच्चा हो और मेहनत ईमानदार,
तो हालात चाहे जैसे हों,
सफलता रास्ता खुद बना लेती हैFollow the PRB STORY CLUB channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb80wc69MF92VvNWbp1
Urvashi Oza
Do You know how it feels ?
खुद को कोसना & at the same time खुदको बेचारा फील करना..
રોનક જોષી. રાહગીર
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નવી ગઝલ
Sujda Fatima
It’s time to find my soul again in my search for Allah.
It’s time to rejoice in the name of the One.
It’s time to reclaim the self that knew happiness.
It’s time to rebuild with the strength He provides.
Rinki Singh
दादी जब परेशान होती थीं, किसी बात से दुखी या किसी उलझन से चिढ़ी हुई, तो अक्सर ईश्वर से शिकायत करती थीं। कहती थीं कि मन ऊब गया है, अब जीने का मन नहीं करता, भगवान कब पूछेंगे और कब बुलाएँगे। तब उनकी बातों में हमें बस झुँझलाहट दिखती थी, थकान का मज़ाक उड़ाना आसान लगता था। जब वे खुश होतीं, तो हम जानबूझकर उन्हें चिढ़ाते थे कि आज भगवान से नहीं कहोगी क्या दादी कि बुला लें। तब दादी हँसकर कहती थीं कि अभी कहाँ, अभी तो सारे पोते-पोतियों की शादी देखनी है, इतनी जल्दी थोड़े ही मरना है। उस समय यह सब बहुत साधारण लगता था, जैसे बुज़ुर्गों की आदतें होती हैं।
आज वही बातें भीतर उतरकर अर्थ बनाती हैं। अब जब मैं धीरे-धीरे दादी की उम्र की तरफ़ बढ़ रही हूँ, तो उनकी उलझनें, उनका दुःख और उनकी चुप पीड़ा समझ आने लगी है। अब पता चलता है कि वे शब्द शिकायत नहीं थे, थकान की स्वीकृति थे। कितनी ही बार मैं भी सब छोड़ देने का ख़याल लेकर बिस्तर तक पहुँची हूँ। लगता है कि अब और नहीं, अब बस थम जाना चाहिए। पर हर सुबह कुछ न कुछ मुझे वापस खींच लाता है- बच्चे की टिफ़िन, बड़ों की चाय, घर की ज़िम्मेदारियाँ, रसोई के तेल और मसालों में उलझा हुआ जीवन और उस क्षण मरने का ख़याल टल जाता है, स्थगित हो जाता है, जैसे किसी ने भीतर से कह दिया हो..आज नहीं।
जीवन से ऊब जाना शायद मनुष्य के जीवन का एक निश्चित पड़ाव है। मरने का ख़याल भी शायद कभी न कभी सबके मन में दस्तक देता है । पर उससे भी पहले हर दिन थोड़ा-थोड़ा मरते चले जाना, ऊब में फँस जाना और वहाँ से बाहर निकलने की इच्छा खो देना..यह सबसे पीड़ादायक है। अब मैं समझती हूँ कि दादी क्यों हर दिन जीवन से समझौता करती थीं। उन्होंने जीना नहीं छोड़ा था, उन्होंने बस मरना टाल दिया था।
आज मैं भी वही कर रही हूँ। न जीवन से प्रेम पूरी तरह बचा है, न उसे छोड़ने का साहस। बस रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कारणों में उलझकर मरना स्थगित कर देती हूँ। शायद यही जीवन है जहाँ पूरी तरह जीना नहीं, पूरी तरह मरना भी नहीं, बल्कि हर दिन अपने ही मन से चुपचाप समझौता करते हुए आगे बढ़ते रहना।
यह जीवन मोह पर टिका है,इस भरोसे पर कि सब अच्छा हो जाएगा।
और शायद यही भरोसा है, जो बना रहना चाहिए।
राजेश रेड्डी साहब ने कितनी सधी हुई बात कही है...
अजब ये ज़िन्दगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसां
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है
~ रिंकी सिंह
#matrubharti
yeash shah
નારી શું ઈચ્છે છે? અને નર શું વિચારે છે? આ પ્રશ્ન જો બન્ને માંથી એક ને વારંવાર થયા કરે તો સમજવું સંબંધ રિબોન્ડિંગ માંગે છે.
Shailesh Joshi
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એક - નોકરી ધંધા, અને લગ્નની ઉંમરે પહોંચતા, કલ્પનાઓની દુનિયામાંથી બહાર આવી જવું.
અને બે - દર વખતે પ્રયત્નો કરવાથી ધાર્યું પરિણામ
નથી મળતું, પરંતુ કોઈકવાર પ્રયત્નો કરીને પૂરેપૂરી રીતે થાકી હારી જઈએ, છતાં પણ જો આપણે આપણા
પ્રયત્નો ચાલુ રાખીએ તો ભલે ધાર્યું નહીં,
પરંતુ સારું પરિણામ તો ચોક્કસથી
મળે મળે અને મળે જ છે.
- Shailesh Joshi
महेश रौतेला
शब्दों तक पहुँचना भी
तपस्या है,
शब्दों को इकट्ठा करना और कठिन है
"उसने प्यार करता हूँ" कहने में
सालों लगा दिये।
** महेश रौतेला
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/cb-771yxHxc?si=WfoI2aZFEgLrr8BC
गरीब लड़के ने अमीर व्यापारी को सिखाया जीवन का सबसे बड़ा सबक | Heart Touching Moral Story | Baccho Ki Kahani"**
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