Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Avinash
Belive in god's plan. Everything is alright written.So, don't chase anything for too log...
Take a little break. if it is yours it'll come back to you. ✨💓
Mrs Farida Desar foram
उनसे बात किए बिना,
हमारी रात न गुज़रती हे,
नींद भी आँखों से,
दूर हो जाती हैं फिर...
- Mrs Farida Desar foram
Jainish Dudhat JD
जिंदगी बहुत थका देती है
Chaitanya Joshi
તને મળવાની તલાવેલી રોજ રોજ મારે.
ને સાંભળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે.
જાય દિવસ ખાલી પ્રતીક્ષા કરી કરીને તારી,
ને ઓળખવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે.
ચક્ર સમયનું નિત્ય કાર્યરત રહે વણથંભ્યુ,
તને ભેટવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે.
રોજ નવલી આશા ધરીને દિવસ ઉગતોને,
સુકૃત ફળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે.
હરિ આટલી ના અટકતી રાહ સ્વીકારજે ,
વિયોગ ટાળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે.
--ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
Rashmi .k
“Whispers of an Unseen Heart”
Sometimes, my heart speaks in silence,
In languages no one ever taught me,
In rhythms that echo through sleepless nights,
And dreams that never find their dawn.
I smile in crowded rooms,
But my soul often sits alone,
Tracing the shadows of memories
That refuse to fade with time.
There are feelings I’ve hidden in corners,
Folded like old letters never sent,
Words soaked in unshed tears,
And confessions buried beneath courage.
I wanted to say so much—
To tell you how your presence
Was once the calm in my chaos,
The pause in my racing thoughts.
But fear wrapped around my voice,
And silence became my only reply.
Do you know what it feels like
To carry a storm inside your chest?
To laugh while breaking quietly,
To stand strong while falling apart within?
It’s like holding fire in bare hands—
Beautiful, painful, and impossible to let go.
Every night, I rewrite the same story,
Changing endings that never change,
Imagining conversations that never happened,
And holding onto hope that slowly slips away.
The truth is, I was never good at letting go.
I collect moments like fragile glass,
Even the ones that cut me deeply,
Because they remind me I once felt alive.
I remember the way your name
Felt like poetry on my lips,
How your laughter became my favorite song,
And your absence… my longest silence.
Sometimes, I wonder—
Was I just a passing chapter in your life?
While you became an entire book in mine,
Every page filled with you.
People say time heals everything,
But they never tell you how slow it moves
When your heart is stuck in yesterday,
And your mind refuses to move forward.
I tried to forget you—
I really did.
But how do you erase someone
Who became a part of your existence?
How do you unlearn a love
That felt like breathing?
So instead, I learned to live with it.
With the quiet ache,
With the unspoken words,
With the echoes of “what if” and “maybe.”
And somewhere along the way,
I realized something strange—
Not all love stories are meant to last,
Some are meant to teach.
You taught me how deeply I could feel,
How much I could care,
How strong I could pretend to be,
Even when I was breaking inside.
Now, I walk forward—
Not completely healed,
But stronger than before,
Carrying pieces of my past
Like lessons, not regrets.
And though a part of me
Will always whisper your name
In the quiet corners of my heart,
I no longer wait for you to return.
Because I’ve learned—
Some feelings are not meant to be spoken,
Some stories are not meant to be finished,
And some love…
Is simply meant to be felt,
Deeply, silently, and forever.
Vlog potli
ये नुस्ख़ा उस मर्ज का सटीक हो जाता
वो मुस्कुरा देती और मैं ठीक हो जाता।
- सुनील कुमार माटोलिया
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
Sapna Yadav
kuch alfaz..🥺🥀
SAZ
ये देश महान ये देश महान।
जिसके करते हम गुनगान।।
ये देश वीर शहीदों की शान।
जिसके करते हम गुणगान।।
सभी धर्म है एक समान।
ये देश महान ये देश महान।।
बड़ो का करते हम सम्मान।
ऐसा भारत देश महान।।
यहाँ महमानो को माना जाता है भगवान।
सहयोग की प्रथा इस देश की शान।।
ऐसा भारत देश महान।
जिसके करते हम गुनगान।।
तिरंगा झंडा इस देश की शान।
ये देश महान ये देश महान।।
दया धर्म है इस देश की शान।
ऐसा भारत देश महान।।
ये देश महान ये देश महान।
जिसके करते हम गुनगान।।
देश विदेश में भारत का नाम।
जिसके करते हम गुनगान।।
ये देश महान ये देश महान।
जिसके करते हम गुनगान।।
રોનક જોષી. રાહગીર
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અબોલ પ્રીતનું ઋણ સુંદર વાર્તા વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.
Narayan
किसी के साथ बरसों रहा तब ये समझ आया,
भलें बदनाम हैं काँटे, असल में फूल चूभते हैं। 🦋🌻
રોનક જોષી. રાહગીર
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મા બાપનું ઋણ 🙏
Sudhir Srivastava
नवरात्रि से पहले
*********
पहले तो स्वीकारिए मैया मेरा प्रणाम
और ध्यान से तब सुनो बात मेरी अविराम
फिर जो करना कीजिए आगे कोई काम।
यह मेरी शिकायत नहीं मेरे मन की पीड़ा है
जिसे कहने में डर भी लगता है, पर उठाया मैंने बीड़ा है।
बात इतनी सी है कि आप कहाँ विचरण कर रही हो
देश-दुनिया में क्या हो रहा है,
इस पर भी कुछ ध्यान दे रही हो?
मुझे तो नहीं लगता कि इस पर विचार भी कर रही हो,
बस नवरात्रि में अपने पूजा पाठ की तैयारियों का
घूम-घूमकर सिर्फ इंतजाम देख रही हो।
अब आप मेरा कहना मानो, मानव-मन की पीड़ा जानो।
मुझे लगता है कि आपको शायद ध्यान ही नहीं है
कि रुस-यूक्रेन युद्ध अभी तक चल रहा है
इजरायल-फिलीस्तीन में भी वार-पलटवार हो रहा है,
भारत पाकिस्तान की बात छोड़िए
कम से कम अफगानिस्तान -पाकिस्तान के मध्य
आये दिन संघर्ष के बारे में ही सोचिए।
ऊपर से अमेरिका इजरायल गठजोड़ के साथ
ईरान के युद्ध का नया वर्जन विनाशक हो रहा है,
विश्व युद्ध का डर दुनिया को सोने नहीं दे रहा है,
निरीह, असहाय निर्दोष मारे जा रहे हैं,
जगह-जगह खंडहर के ढेर डरा रहे हैं,
नित नये श्मशान आबाद होते जा रहे हैं।
अब ये मत कहना माते!
कि मैं आपको ये समाचार क्यों सुना रहा हूँ?
तो आप भी जान लो मैं तो सिर्फ अनुरोध कर रहा हूँ,
डरता भी हूँ, मगर अपनी माँ से ही तो बक-बक रहा हूँ।
अब आप कुछ कीजिए माते
चण्डी-काली-दुर्गा रुप दिखाइए
युद्ध के रावणों-राक्षसों को मारिए,
आम जन-मानस को अपने होने का अहसास कराइए।
सिर्फ भारत ही नहीं अखिल विश्व में
शांति स्थापित करने की राह दिखाइए,
शक्ति से, शांति से, प्यार या प्रहार से
जैसे भी हो हर युद्ध की आग अब बुझाइए,
विराम लगाने के लिए अपने प्रभाव का दर्शन कराइए।
अपने भक्तों, अभक्तों के मन से
विश्व युद्ध का डर अबिलंब दूर भगाइए,
हे आदशक्ति मैया! नवरात्रि से पहले
बस इतना कर धरती के हर प्राणी को
भयमुक्त होने का आभास कराइए,
इस नादान की फरियाद पर नाराज़ होने के
पहले अट्टहास कीजिए या मुस्कराइए,
पर जैसे भी हो सारे युद्ध पर
अब तो लगाम लगाइए, संदेह के बादल हटाइए।
और फिर निश्चिंत होकर आइए
नवरात्रि में अपनी पूजा, आरती, जप, साधना कराइए,
अपने भक्तों के दिलों में आसन जमाइए
अपनी जय-जयकार खूब कराइए
सबके साथ मुझ पर भी अपनी कृपा बरसाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
स्मृतियों में शेष
*************
आना-जाना प्रकृति का नियम है
जिस पर हमारे नियम-कानून,
सुख-दुख, मान-मर्यादा, अच्छे-बुरे,
अनुकूल -प्रतिकूल, स्थिति-परिस्थिति
कद-पद, प्रतिष्ठा, आभामंडल का
रंचमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ता है।
जाने वाला चला गया
फिर भी हमें जीना ही पड़ता है,
इस जीने के पीछे भी सबके बहाने
कुछ तीखे तो कुछ मीठे तराने हैं।
सबका अपना नजरिया है
मगर जाने वाले का जीवन जीने का भी
तो अपना अलग पहिया था।
आचार्य पंडित तिलक धारी मिश्र 'शास्त्री' जी
जब आज हमारे बीच नहीं हैं,
तब उनके परिजनों का
उन्हें याद करने का अपना अंदाज है,
उनके अंदाज, नजरिए, रहन- सहन, चिंतन,
पांडित्य को आत्मसात करने का विविध आयाम है।
हमारे अपने जो आज स्मृति शेष हैं
कुछ के लिए अशेष, कुछ के लिए विशेष
तो कुछ के लिए महज अवशेष हैं।
अब यह हमें सोचना है कि
कल हमें भी जाना ही है,
तब भी हमारे परिजनों का नजरिया
ठीक वैसा ही होगा,
जैसा अपने स्मृति शेष परिजनों के लिए आज हमारा है,
कौन प्यारा, न्यारा, दुलारा, हमारा है
या हमने ही उसे मारा है।
जीवन का ये चक्र चलता ही रहेगा,
समय के साथ हमारे सोचने समझने में
बुनियादी अंतर भी नहीं होगा।
जरुरत आज ही नहीं आने वाले कल में भी होगी
कि हम स्मृति शेष परिजनों की आत्मा को
कितना सुकून दे पाते हैं?
अथवा औपचारिकताओं के भंवर जाल मे
उलझकर खुद हँसते और उन्हें रुलाते हैं।
जो भी है, हम आपको ये क्यों बताकर सताते हैं
आपके जीवन में दखल देने का दुस्साहस करते हैं।
माफ़ कीजिए! हम तो सिर्फ
स्मृतिशेष विभूतियों को नमन करते हैं
अपनी भूल-चूक माफ करने का अनुरोध करते हैं,
मधुब्रत जी के साथ अपनी संवेदनाओं के साथ खड़े हैं
उनके पिता नहीं, पिता के उच्च आदर्श
श्रेष्ठ व्यक्तित्व, पाण्डित्य, आचार्य, छंदाचार्य
और उनकी कलम का गान करते हैं,
बारंबार नमन वंदन, प्रणाम करते हैं
अपने श्रद्धा पुष्प अर्पित करते हैं
उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने का
एक अल्प, अंकिचन प्रयास करते हैं,
उनको याद करते और शीश झुकाते हैं,
उनके सूक्ष्म संरक्षण का भाव संजोते हैं,
एक विभूति सदृश उनकी स्मृतियों को
सहेजने का हम भी आपके साथ प्रयास करते हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
अहम का संघर्ष : विनाश का द्योतक
*****
आज समूचा विश्व अहम के संघर्ष में फँसता जा रहा है
विश्व आशंकाओं के बीच डर-डर कर जी रहा है,
निरपराध, निर्दोष मारे जा रहे हैं,
मूलभूत सुविधाएं गर्त में जा रही हैं,
संसाधन बर्बाद हो रहे हैं,
प्रकृति के साथ विनाश का खेल खेला जा रहा है।
बम, गोला, बारुद से मौत का ताँडव किया जा रहा है
लाशों के ढेर लगते जा रहे हैं
जहाँ जीवन की खुशहाली थी
घर, दुकान, मकान, संस्थान, बड़ी - इमारतें
वर्षों की साधना से तैयार जन जीवन को
सुविधा देने वाली खोजें,
लाखों करोड़ों, अरबों खर्च कर
विकास की गंगा में बारुद रुपी जहर घोला जा रहा है,
रोजी, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा को
आदिम युग की ओर ढकेला जा रहा है।
विचारणीय प्रश्न है कि इसका परिणाम क्या होगा?
अहम का यह संघर्ष कब और कहां जाकर रुकेगा?
कुछ सनकी और विकृत मानसिकता का शिकार
क्या समूची मानवता और धरा के
विनाश का द्योतक बनेगा?
और इस धरती से मानव ही नहीं
जीव-जंतु, कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे
और खरपतवारों के नामोनिशान के साथ ही खत्म होगा?
क्या अहम के संघर्ष का इस तरह ही अंत होगा?
क्या धरती पर भूत-प्रेतों का डेरा होगा,
मंदिर, मस्जिद, गिरिजा, गुरुद्वारों में
भक्त नहीं सिर्फ, ईश्वर, अल्लाह, ईशामसीह
और गुरुग्रंथ साहिब के सिवा परिंदा भी नहीं होगा?
तब इस संघर्ष का लाभ आखिर किसको मिलेगा?
जब धरा पर कुछ भी नहीं होगा,
अपना तो छोड़िए जब कोई दुश्मन भी
हमारे सामने ही नहीं होगा।
सुधीर श्रीवास्तव
Imaran
क्यों डरता है राहों के सन्नाटे से,
रोशन होगी मंज़िल तेरे इरादे से।
मेहनत तेरी रंग लाएगी एक दिन,
तूफ़ाँ भी रुक जाएंगे तेरे जज़्बातों के आगे से
🩵❤️imran 🩵❤️
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
Vedanta Life Agyat Agyani
✧ बीज से ब्रह्मांड तक — जीवन का विज्ञान ✧
ईश्वर जीवन का सीधा विज्ञान है—
बीज से वृक्ष और फिर बीज।
यही ब्रह्मांड का खेल है।
बीज यात्रा में उतरता है,
वह रुकता नहीं—
वह सदैव गतिमान रहता है।
जीवन स्वयं एक यात्री है।
बीज अपने आप गति नहीं करता,
भले ही वह भूमि में पड़ा हो,
बारिश हो जाए—
पर जब तक उचित अवस्था न मिले,
उसमें गति नहीं आती।
जब धरती, जल, वायु और अग्नि—
पंचतत्व एक साथ संतुलित होते हैं,
तभी बीज अंकुरित होता है।
अग्नि केवल ताप नहीं है—
वह जीवन की छिपी हुई ऊर्जा है।
हर बीज में पंचतत्व और तीन गुण मौजूद हैं,
और उनके साथ चेतना भी विद्यमान है।
जब तत्व और गुण मिलते हैं,
तो चेतना एक जीव के रूप में प्रकट होती है।
फिर वही जीव पुनः विभाजित होता है,
और अंततः फिर से बीज बन जाता है।
अर्थात—
चेतना, गति और कार्य
पंचतत्व और त्रिगुण के माध्यम से
रूपांतरण करते हैं।
और अंत में—
सब कुछ फिर एक सूक्ष्म बीज में सिमट जाता है।
जब बीज के भीतर फिर पंचतत्व जुड़ते हैं,
तो गति पुनः आरंभ होती है।
बीज से बीज—
यही अस्तित्व की निरंतर गति है।
अस्तित्व स्वयं को विकसित करता है।
मनुष्य का बीज भी पुनः बीज बनता है,
जिसमें कुछ प्रयास मनुष्य का होता है,
और कुछ प्रकृति का।
दोनों के मिलन से नया जीवन उत्पन्न होता है।
यह मिलन ही प्रकृति का चुंबक है—
यही “काम” है।
शरीर अपनी शक्ति स्वयं पाता है,
अपना भोजन स्वयं ग्रहण करता है।
उसमें “मैं”, “तुम”, “वह”—
कुछ भी नहीं है।
यही जीवन का खेल है—
यही लीला है।
इसे समझना ही दर्शन है।
यह अद्भुत, अलौकिक और रहस्यपूर्ण खेल है,
जिसे देखने और समझने में आनंद बरसता है।
जो देख रहा है—
वह भी उसी की व्यवस्था है।
और जो दिख रहा है—
वह भी वही है।
“मैं” बीच में आकर
अहंकार बन जाता है,
और एक दीवार खड़ी कर देता है।
यही सबसे बड़ी रुकावट है।
इस खेल को समझना ही धर्म है।
स्वभाव को देखना और समझना ही धर्म है।
जीवन का यह खेल—
अद्भुत, रहस्यमय और रसपूर्ण है।
यही जीवन है,
यही आनंद है,
यही प्रेम है।
जब “कर्ता” हट जाता है,
तो देखने वाला ही आनंद बन जाता है।
और फिर वही ऊर्जा—
तुम्हारे माध्यम से कार्य करती है।
धर्म का अर्थ है—
“मैं” को हटा देना।
“मैं” हटते ही—
सब कुछ एक खेल बन जाता है।
धर्म का कार्य है—
आंख खोलना,
और अज्ञान का संकट समाप्त करना।
लेकिन समाज के लिए—
धर्म एक व्यवस्था भी है।
भीड़ को संभालने के लिए
नियमों की आवश्यकता होती है।
यदि केवल एक व्यक्ति होता,
तो धर्म की कोई आवश्यकता नहीं थी।
धर्म भीड़ को नियंत्रित करता है,
ताकि “मैं-मैं” और “तू-तू” का संघर्ष न हो,
और एक प्रकार की शांति बनी रहे।
परंतु—
जो शांति बनाए रखने वाले हैं,
वही कभी-कभी अशांति के कारण भी बन जाते हैं।
धर्म भय भी पैदा करता है—
अच्छा-बुरा, सही-गलत के नाम पर।
और यहीं से विभाजन शुरू होता है:
मैं हिंदू,
तू मुस्लिम।
पर यह विभाजन भी
भौगोलिक और परिस्थितिजन्य है।
अलग-अलग स्थानों,
अलग-अलग जलवायु और परिस्थितियों के कारण
अलग-अलग धर्म और व्यवस्थाएँ उत्पन्न हुईं।
जहाँ जैसी आवश्यकता थी,
वैसा धर्म बना।
यदि पूरी पृथ्वी की परिस्थितियाँ एक जैसी होतीं,
तो शायद धर्म भी एक ही होता।
पर विविधता है—
इसलिए धर्म भी अनेक हैं।
आज जब सब मिल गए हैं,
तो पुराने भौगोलिक नियमों को पकड़ना ही
संघर्ष का कारण बन रहा है।
फिर भी—
समाज के लिए
कुछ नियम आवश्यक हैं।
पर सत्य नियमों में नहीं है।
सत्य—
उस जीवन में है
जो हर क्षण स्वयं को जन्म देता है
Urmi Sonagara
એક સપનું એવું છે કે ,
એના બધા સપના ને હું મારા બનાવી ને પુરા કરું
એક સપનું એવું છે કે ,
તે પોતાની જિંદગી ની દરેક પળ ખુશી થી જીવે
એક સપનું એવું છે કે ,
તેના બોલ્યા વગર એની બધી વાતો સમજી જાવ
એક સપનું એવું છે કે ,
તેના હસતા ચેહરા પર ખુશી ના આંસુ હોય જેનું કારણ હું બનું
એક સપનું એવું છે કે ,
મારા દરેક સપના માં રોજ મને મળવા આવે
એક સપનું એવું છે કે ,
કોઈક દિવસ હું પણ એના સપના માં જાવ અને એને મળું
એક સપનું એવું છે કે ,
એની પ્રાર્થના માં કયારેક મને યાદ કરે ભગવાન પાસે આને મને માગે
એક સપનું એવું છે કે ,
એના બધા સપના ને હું મારા બનાવી ને પુરા કરું....
ek archana arpan tane
ભગવાન કહે છે કે કોઈ ને તકલીફ આપી મારી પાસે તારી ખુશી ના માંગીશ પણ કોઈ ને એક પળ ની ખુશી આપીશ તો તારી ખુશી ની ફીકર ન કરીશ.
- ek archana arpan tane
Narendra Parmar
बीवी तो सांवली अच्छी है
ताकि कोई उसे देखें नहीं 😏
और हम किसी और को देखें तो ??
वो कभी हमसे रुठे नहीं है
इसीलिए तो मैं कहेता हूं कि
बिवी तो सांवली अच्छी है ✔️💯
नरेन्द्र परमार ✍️
SAYRI K I N G
फोटो के हिसाब से शायरी हो जाए
, देखता हूं आज यहां कितने शायर है...!
Sonu Kumar
अमेरिका ने 1999 के कारगिल युद्ध में भारत को हराने के बाद, सभी भारतीय प्रधानमंत्रियों ने “परमिशन मिनिस्टर” बनने पर सहमति दे दी। और सभी भारतीय विपक्षी दलों (कांग्रेस, भाजपा, सीपीएम, आप) के शीर्ष नेताओं ने भी “परमिशन मांगने वाले सदस्य” बनने को स्वीकार कर लिया।
. इस सच्चाई को छिपाने के लिए बिकाऊ लोगों को पैसे दिए गए थे। लेकिन सोशल मीडिया के कारण यह बात अब सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गई है।
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वात्सल्य
બધાં જ જતાં રહ્યાં કોઇ ફરક ન્હોતો પડ્યો મને -
જ્યારથી તું ગઈ ત્યારથી એકલું લાગે છે,મને.
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
swarnima varshney
ek dil hai jo teri taraf bhagta hai ..
aur ek hakikat hai jo tere pass aane nhi deti..❤️
kattupaya s
if you don't like my attitude I request once again to block me. I don't want to be a disturbance in anybody's interest
kattupaya s
I felt bad when iam alone. but now feeling worst after meeting you
kattupaya s
it's over
kattupaya s
Time for short nap.. see u all soon
kattupaya s
it's the hardest decision once again iam taking. iam going block her again
kattupaya s
people who are confused with my posts,i request them to read my stories. everything is fun. don't compare me with my posts. iam different from my posts.
kattupaya s
I am unable to hate her she is something beyond my iq level.
Anup Gajare
"भंग"
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मैं तबतक निश्चित नहीं हु
जबतक कोई मुझे देख नहीं लेता।
ब्रह्मांड में फैली मटमैली हवाओं
की धूल में बिखरा कोई बादल
उसने अपनी खोज खुद ही की हैं।
बदलाव में बदलते रहना ही
नियति थी
उन सबकी जिनकी धारणा में
कोई निवारण नहीं रहा।
शरद ऋतु
हर साल भड़कती है
उसने अपनी कहानी किसी
को नहीं बताई
कौन बेखबर सुने
किसी और की पीड़ाओं से भरी कविता।
मैं बदलता नहीं हु
ये भी तो संभावना है
स्थिरता अपने आप में
सबकुछ बदल देती है।
सौरमंडल में घूमता
अजीब कण
सिमटकर बिखरता है
उसकी कोई प्यास या भूख भी होगी
या होगा उसके पास पीला राशनकार्ड
कतार में खड़े कणों में
ऊबता हुआ मैं।
अभी मुझे पता नहीं है
कि बढ़ती हुई
आंखे नीली गहरी
गहरी सांस छोड़ते हुए
देखती है
ढकते सूरज को।
अनंत में किसी एक ने
कहा था कि
उसने जान लिया
लेकिन जानकारी किसी के साथ
साझा करने में उसकी हिचक बीमारी की तरह
उसके सीने में बैठी रही।
अनिश्चित काल से
सियाह शून्य के अंधकार में
हिलता हुआ खुद को ही देखता रहा
कभी अरबों साल पहले
ही मैंने डायरी लिखना क्यों बंद कर दिया।
चींटी निर्बुद्ध प्राणी है
ब्रह्मांड के कण सा
उसका अपना कोई स्वत्त्व नहीं
ये भी अलग तरह की भावना में
डूबना नहीं तो क्या है।
उसके साथ होते हुए भी
मैं अलिप्त रहता हु
किसी परमाणु की तरह
फिसलना मेरी उम्र रही।
वहां क्या था
जहां सबने देखा
किसको दुखी कण नजर आया।
शायद
देखना भी एक भ्रम था
और देखे जाना
उससे भी गहरी साज़िश—
जहाँ आंखें नहीं
सिर्फ़ प्रकाश का संदेह था
और मैं
उस संदेह के किनारे बैठा
अपना चेहरा टटोलता रहा।
किसी ने पुकारा नहीं
फिर भी
ध्वनि की एक आदत
मेरे भीतर गूंजती रही
जैसे कोई पुराना नाम
जिसे अब कोई नहीं जानता।
समय ने
अपने ही वृत्त को काटकर
एक सीधी रेखा बनने की कोशिश की
और वहीं टूट गया—
वहीं
मैंने पहली बार
“पहले” और “बाद” के बीच
कोई अंतर नहीं पाया।
एक कण था
जो मुझसे छूटकर
किसी और की स्मृति में चला गया
वहां उसने खुद को
इतिहास कहा—
और मैं
वर्तमान की तरह
हर क्षण मिटता रहा।
नींद
शायद सबसे पुरानी भाषा थी
जिसमें
बिना बोले
सब कुछ कहा जा सकता था
पर मैं जागता रहा
जैसे कोई अधूरी पंक्ति
जिसे लिखने वाला
कभी लौटा ही नहीं।
तुमने कहा था—
“जानना” एक अंत है
लेकिन मैंने देखा
हर उत्तर के भीतर
एक और प्रश्न की हड्डी छिपी होती है
जिसे चबाते-चबाते
विचार खून में बदल जाते हैं।
अब
जब कोई नहीं देख रहा
मैं थोड़ा-सा निश्चित हूँ—
या शायद
यह भी वही क्षण है
जब कोई
कहीं से
मुझे देख रहा है।
और यदि
देखे जाने और न देखे जाने के बीच
कोई तीसरी जगह है—
तो मैं वहीं हूँ
एक अधूरी उपस्थिति की तरह
जो
होने और न होने के बीच
धीरे-धीरे
अपना अर्थ खोती जा रही है।
भंग होते हुए
अपनी अभंग छाया को
मैं पूछता हु
किसने देखा है
उसे जिसका कोई वजूद ही नहीं।
वजूद में न होना ही
यहां धूल पर लिखना है
कि कोई नहीं है
वापस लौट जाओ।
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Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
नारी रचना का ' वर्णन ' पुरुष वर्णन के बिना अधूरा है।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
Dada Bhagwan
યાદ કરતાં 'મા'ને, પ્રગટે ખુમારી,
'પ્રેમથી રહીશું', પ્રતિજ્ઞા અમારી!
પૂજ્ય નીરુમાનાં જીવનનો વધુ પરિચય અહીં મેળવો:
https://dbf.adalaj.org/LCmQ6MDO
#spirituality #spiritualjourney #deathanniversery #punyatithi #DadaBhagwanFoundation
Narendra Parmar
मुझमें और तुझमें एक ही फ़र्क है
तुम चहरे से खूबसूरत हो
और मैं दिल से खूबसूरत हूं ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
DrAnamika
जब मैं कहीं ना मिलूं
समझना मैं शब्दों खो गयी हूँ
दबे पाँव जाकर ...
दराजों से किताबें बटोर लायी हूँ..
#डॉ_रीना_अनामिका #हिंदी_काव्य
Pankaj Goswamy
ક્યારેક જીવનમાં
ઘણું બોલવા કરતા
થોડું મૌન રાખવું સારું લાગે છે.
કારણ કે, શબ્દો
હંમેશા મનની ઊંડાઈ સમજાવી શકતા નથી.
દિવસ દરમિયાન
માણસ ઘણી બાબતોમાં વ્યસ્ત રહે છે;
કામ, જવાબદારીઓ,
અને પોતાના લોકો માટેના પ્રયત્નોમાં.
પણ જ્યારે રાત શાંત બને છે,
અને આસપાસ બધું નિઃશબ્દ થઈ જાય છે,
ત્યારે મન ધીમેથી કહે છે;
“થોડો વિરામ લઈએ,
કાલે ફરીથી નવી શરૂઆત કરવી છે.”
કારણ કે, જીવન
દરેક દિવસે કંઈક શીખવે છે,
અને દરેક સવાર
ફરીથી આગળ વધવાની તક આપે છે.
એટલા માટે
મનને શાંત રાખવું
અને વિશ્વાસ સાથે ચાલતા રહેવું
એ જ જીવનની સાચી સમજ છે.
- પંકજ ગોસ્વામી 'કલ્પ'
Shailesh Joshi
આપણા જીવનની બધીજ પરીક્ષાઓ ઈશ્વરના હાથમાં હોય છે, એ આપણે સૌ જાણીએ છીએ, પરંતુ આપણે એ કેમ ભૂલી જઈએ છીએ કે, ઈશ્વરે લીધેલી પરીક્ષામાં પાસ થવા માટે, સમયની અને એમાં સફળ થવા માટે કરવા પડતાં પ્રયત્નોની કોઈ મર્યાદા નથી હોતી, ઈશ્વરે આપણને સૌને ભરપૂર સમય આપ્યો જ છે,
છતાંય આપણે ખોટી ઉતાવળ કરી, ખોટી રીતે, કે ખોટા રસ્તે
કેમ વળી જઈએ છીએ ?
તમે જ વિચારો કે,
આમાં નુકશાન કોને ?
માટે જીવનમાં સુખનો સમય ચાલતો હોય, કે દુ:ખનો
શાંતિ અને ધીરજ રાખ્યા વિના સારા સમયની પ્રાપ્તિ કે,
જીવનમાં કાયમી આનંદની અનુભૂતિ આપણે ક્યારે, કેટલી અને કેવી રીતે કરી શકીશું ?
archana
कौन कहता है चरित्र कॉपी नहीं होता,
यहां लोग चेहरों के साथ किरदार भी बदल लेते हैं…
बातों और व्यवहार की नकल करके,
अच्छाई का दिखावा कर लेते हैं…
इंस्टाग्राम की रीलों से सीखकर,
संस्कारों का नकाब पहन लेते हैं…
पर सच तो ये है —
चेहरा बदल जाता है,
पर दिल कभी कॉपी नहीं होता… 💔
ડો. માધવી ઠાકર
દોડ્યા એટલાને ઠોકર લાગી
ઉંમરની એટલી સમજાણ લાગી.
- ડો. માધવી ઠાકર ✍️
ડો. માધવી ઠાકર
ગજરો શોભતો શૃંગારની હરોળમાં
અંજાતી આખોએ પ્રેમની ગલીમાં
- ડો. માધવી ઠાકર ✍️
Shailesh Joshi
તારીખ, વાર, ગામ, નામ અને સરનામા બદલાય છે, ઘટનાઓ ને વારદાતો તો બધી એક જેવી જ થાય છે,
પાછું જાણે છે તો સૌ કે, ખોટા કર્મોની સજા અતિ
આકરી હોય છે, તોયે નીત નવા નવા દુ:ખદ કિસ્સાઓ
સતત ઉમેરાતાં જાય છે,
ઉપર ઈશ્વર પણ આજકાલ અવઢવમાં હશે, કે મારા બનાવેલા, મને માનતા, અને પૂજતા મારા જ લોકો,
આ કઈ દિશામાં જાય છે ❓️
- Shailesh Joshi
Kishor Sagathiya
ना डीजल से ना पेट्रोल से चलती है,
ना डीजल से ना पेट्रोल से चलती है
ये दुनिया है साहब ,
अपने मतलब से चलती है।
- Kishor Sagathiya
Kishor Sagathiya
जिंदगी में एक बात तो समझ आ गई ,कि मेरा सबके लिए अच्छा होना मेरे ही लिए अच्छा नहीं है।
- kalpana Sagathiya
Chaitanya Joshi
મારી શ્વાસ સરગમે તમે આવજો હરિ.
મારી ખુશી કે ગમે તમે આવજો હરિ.
આમંત્રણ અંતરથી આપ્યું અવિનાશીને,
શિર તો વારંવાર નમે તમે આવજો હરિ.
એક આશા રહી તમારી અબ્ધિવાસીની,
આગમન તમારું ગમે તમે આવજો હરિ.
પ્રતીક્ષા પરમેશની પ્રતિ દિન પ્રગટતીને,
મનના સંશયો તો શમે તમે આવજો હરિ.
વિનંતી કરી કરીને વહાણા વાયા વખતના,
આખરે માનવ જાત અમે તમે આવજો હરિ.
__ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
Kishor Sagathiya
आंखों में आंसू लिए मुझे घूर रहा था,
पता नहीं वो आईने में खड़ा सख्श कौन था।
- Kishor Sagathiya
Shailesh Joshi
જીવનમાં સુખ અને દુઃખ
આવવાના, કે જવાના
મુખ્ય આધાર બેજ છે,
એક આપણા વિચારો,
અને બે, એના પર
આપણે કરેલ અમલ.
- Shailesh Joshi
Mrs Farida Desar foram
खिल उठती हैं,
चेहरे की रंगत,
जब तुमसे बात हो जाती हैं,
दिल की दिल से,
मुलाकात हो जाती हैं....
luv u jindagi ❤️
- Mrs Farida Desar foram
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
૧. મહેનત અને નસીબ
નસીબની રેખાઓ પર ભરોસો ન કર "સ્વયમ્'ભૂ" એટલો,
પરસેવાની સ્યાહીથી જ લખાય છે તારો "સ્વયમ્'ભૂ"ફેંસલો.
૨. હિંમત અને સંઘર્ષ
રાતના અંધકારથી ડરીને ક્યાં સુધી"સ્વયમ્'ભૂ"બેસીશ?
સૂરજ બનીને ખુદ તું જ તારો રસ્તો કંડાર "સ્વયમ્'ભૂ"
૩. પડકારોનો સામનો
તોફાનોથી ડરીને કિનારે બેસવું મને મંજૂર નથી,
લહેરો સામે લડીને જીતવું "સ્વયમ્'ભૂ"હવે બહુ દૂર નથી.
૪. સફળતાનો શોર
તારી મહેનતની શાંતિ ભલે કોઈ ના સમજે,
તારી સફળતાનો શોર આખી દુનિયા"સ્વયમ્'ભૂ"સાંભળશે.
૫. ખુદ પર વિશ્વાસ
ખુદ પર વિશ્વાસ હોય તો પહાડ પણ ઝૂકી જાય છે,
મંઝિલની શું ઓકાત, એ પણ સામેથી"સ્વયમ્'ભૂ"મળી જાય છે.
૬. અલગ રસ્તો
ભીડની પાછળ ચાલવાની મારી કોઈ આદત નથી,
મારો રસ્તો હું"સ્વયમ્'ભૂ"ખુદ બનાવું, કોઈ સહારાની જરૂરત નથી.
૭. નિષ્ફળતાથી શીખ
પડ્યા પછી પણ ફરીથી ઊભા થવાની જે મજા છે,
એમાં જ તો છુપાયેલી અસલી જીતની સાચી"સ્વયમ્'ભૂ"મજા છે.
૮. ધીરજ
ધીરજ રાખજે દોસ્ત, આ કઠિન સમય પણ વીતી જશે,
કાંટાઓ વચ્ચે સંઘર્ષ કરતું તારું ફૂલ"સ્વયમ્'ભૂ"જરૂર ખીલી જશે.
૯. લક્ષ્ય પર ધ્યાન
લોકોના મેણાં-ટોણાંથી તું તારી મંઝિલ ના બદલ,
તારા સપનાંઓને સાકાર કરવાની"સ્વયમ્'ભૂ"તું જિદ્દ ના બદલ.
૧૦. અંદરની આગ
તારી અંદરની આગને ક્યારેય તું"સ્વયમ્'ભૂ"બુઝાવા ના દેતો,
હારીને બેસવાનો વિચાર મનમાં કદી લાવવા ના દેતો.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
"ઘૂંટાતું પ્રેમનું રહસ્ય"
ઘૂંટાતું પ્રેમનું રહસ્ય...
કોઈ જૂની સ્યાહીની જેમ,
રોજ થોડું-થોડું
મારા અસ્તિત્વના કોરા કાગળ પર
વધુ ઘેરા રંગે ઊપસી રહ્યું છે.
આંખોમાં સ્પષ્ટ વંચાતો છતાં,
હોઠોથી કદી ન બોલી શકાતો
એક એવો જાદુઈ મંત્ર છે આ...
જેના કોઈ નિશ્ચિત અર્થ નથી હોતા,
ફક્ત અહેસાસ હોય છે.
જેટલો આ ભેદ ઉકેલવા જાઉં છું,
એટલો જ તારા વિચારોમાં વધુ ગૂંચવાઉં છું.
આ એક એવી મીઠી મૂંઝવણ છે,
જેમાંથી હવે ક્યારેય છૂટવાનું મન નથી થતું.
બંધ આંખે જોયેલું કોઈ સપનું છે,
કે પછી ખુલ્લી આંખે અનુભવાતું અંતિમ સત્ય?
શ્વાસની હરએક આવન-જાવનમાં
બસ, છાનામાના તારા જ નામનો પડઘો પડે છે.
કંઈ જ ન કહીને પણ
મારા મૌનને બધું જ કહી જતું,
આ જ તો છે...
મારા ભીતર
સતત ઘૂંટાતું "સ્વયમ્'ભૂ" પ્રેમનું રહસ્ય.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
Jyoti Gupta
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Mara Bachaaaaa
दर्द में बना
उनके लिए,
उन्होंने मुड़कर
देखा भी नहीं।
यादों में
सिमट गए वो पल,
भूलना मुनासिब
समझा ही नहीं।
- Mara Bachaaaaa
Nandani
तुम तो दिल हो मेरा,,
तुम से दिल थोड़ी ना भर सकता है।। ❤️
Chaitanya Joshi
કૃપા થાય પરમેશની તો સારી મતિ મળે.
કૃપા થાય પરમેશની તો ઉર્ધ્વગતિમળે.
સઘળું કાંઈ આપણા હાથમાં નથી હોતું,
કૃપા થાય પરમેશની તો નિજ ક્ષતિ મળે.
સુખ દુઃખ ખ્યાલો આખરે મનના માનવા,
કૃપા થાય પરમેશની તો હરિભક્તિ મળે.
આવાગમનના ફેરા ટાળવાનું લક્ષ્ય સૌનું,
કૃપા થાય પરમેશની તો રામ રતિ મળે.
રોજ રોજ અટવાયા કરવાનું વિષયોમાં,
કૃપા થાય પરમેશની તો એથી મુક્તિ મળે.
--ચૈતન્ય ચંદુલાલ જોષી 'દિપક 'પોરબંદર.
सनातनी_जितेंद्र मन
सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं,
आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ......
जब सामने आती है, मैं उसमें खोता हूं।
वो मुझमें होती है, मैं उसमें होता हूं।।
दूऽर हुए जब वोऽऽ, मशगूऽल रहेऽ थे हम।
कुछ वक्त रहे सोखे, फिर मन के साथी गम़।।
अहसासों कि माला, सांसों में पिरोता हूं।
मिलने कि चाहत में, तेरी राह जोहता हूं...आतीं हैं जब यादें.......
सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं,
आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ......
हैं वादे सारे तेरे, "मन" दिल दुनिया घेरे।
खुद के रहे ना हम, मुंह जो हमसे फेरे।।
जीने कि तमन्ना थी, सदियों का इरादा था।
इक ऐसा वादा था, गफलत का तकादा था।।
गर शौक़ अधूरे थे, पहले न बताया क्यों।
मंजूर किया रिश्ता, कैसी मजबूरी थी।।
सभी बीते यादों को, रख दिल में ढोता हूं...आतीं हैं जब यादें.....
सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं,
आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ......
सनातनी_जितेंद्र मन
#sanatani_jitendra_mann
Soni shakya
अगर आप डर के आगे झुकते हो तो..
आप अपने दिल की बात कभी नहीं सुन पाओगे..
- Soni shakya
Chaitanya Joshi
દીપકના અજવાળામાં સમાઈ ગઈ છે જ્યોતિ.
તેથી જ એ તો સર્વસ્વ ગણાઈ ગઈ છે જ્યોતિ
દૂર રહેજો પતંગા આ તમને નહીં ફાવે માહોલ,
એવું કહીને જીવનમાં વણાઈ ગઈ છે જ્યોતિ.
પ્રકાશ પાથરતા દીપકની સન્મુખ રહી ને સતત,
સ્વયં દીપકનો ખુદ પર્યાય બની ગઈ છે જ્યોતિ
રાખી દૂર કાજલને સતવારો સતત આપનારી,
ને પ્રક્ષેપ દીપકનો જાણે કે થઈ ગઈ છે જ્યોતિ
એક જ મફત પ્રકાશ પાથરવાનું ઉભયનો હેતુ હંમેશા સૌના માનસ માં વસી ગઈ છે જ્યોતિ.
--ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
बंजर भूमि
बाग की बंजर भूमि पर गुल खिला ने चला हूँ l
गुलशन की दुनिया में प्यार पिला ने चला हूँ ll
खूबसूरती हुस्न की आशिकों बहका रही है l
तिराडो की कायनात को हिला ने चला हूँ ll
प्यार की नदियों की जल धारा को बहाकर l
प्यासी भूमि की प्यास को बुझा ने चला हूँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Wow Mission successful
जैसे गिरगिट अपना रंग बदलती है,
वैसे ही हालात जिंदगी बदलती है।
kattupaya s
when she said you are handsome my reaction. many reasons behind one meme
kattupaya s
she is smarter than u. she makes you cry and laugh at the same time . it's true
kattupaya s
she is ready to cry over your shoulders at any moment . but nobody wants that ice cream in rainy season
kattupaya s
That's my situation when I meet every single woman
kattupaya s
if you don't want to hurt anyone die peacefully u are not eligible to live in 🌎
Nayana Viradiya
"આપણો સંબંધ"
શબ્દ માત્ર નથી આપણો સંબંધ,
માત્ર નામની ડોર નથી આપણો સંબંધ.
શ્વાસ જેવી નાજુક વસ્તુ આપણો સંબંધ,
લાગણીનો શોર નથી વિશ્વાસ નો દોર આપણો સંબંધ.
ક્યારેક આંખોમાં બોલે છે આપણો સંબંધ,
ક્યારેક મૌનમાં મહેંકે આપણો સંબંધ.
ક્યારેક હાથ પકડીને ચાલે આપણો સંબંધ,
સદાય અંતરમાં વસતો આપણો સંબંધ.
એકમેકના જીવનનો સાચો સહારો આપણો સંબંધ,
થાકેલા મનનો છાંયો આપણો સંબંધ.
બોલ્યા વગર સમજાઈ એ આપણો સંબંધ,
દૂર રહીને પણ નજીક લાગે એ આપણો સંબંધ.
ક્યારેક રિસાવું, ક્યારેક હાસ્યથી મહેંકે આપણો સંબંધ,
ક્યારેક આંસુ વહેતા પણ ટકી રહેતો આપણો સંબંધ
જેમાં “હું” નહીં," તું " નથી “આપણુ ” રહેતું તે જ આપણો સંબંધ .
kattupaya s
yesterday we got into conversation finally it ended as usual. she is always right. I accepted I made a mistake.
Nayana Viradiya
Good morning
kattupaya s
funniest part of life is we doesn't know we are the main joker that everyone looking to use for
kattupaya s
don't wait for someone who doesn't know even your real name. I wasted time like that. now I know everyone's name
kattupaya s
Time will cure all your difficulties and hope your day will be better than yesterday
kattupaya s
My Tamil novel yadhumatra peruveli reached 25k downloads. Thanks for your Support and love.
Imaran
शिकवा करूं भी तो किससे?
दर्द भी मेरा है, और
दर्द देने वाला भी मेरा है
💔Imran 💔
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
मां चाहे सुत की प्रगति, कहती यह मम रक्त। रखा माह नौ पेट में, यह मुझमें है न्यस्त।।
दोहा--४५३
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
A singh
"लोग शराब के दीवाने होते होंगे,
हमें तो चाय का नशा पसंद है।"
☕ tea lover ❤️❤️❤️
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्या
न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद
भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।
“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”
पद–व्याख्या
न — नहीं
त्वत् अन्यः — आपसे अन्य, आपके अतिरिक्त
मघवन् — हे दानी प्रभु (इन्द्र के लिए प्रयुक्त संबोधन)
अस्य — इस (जगत / भक्त) का
मर्दिता — कष्ट दूर करने वाला, दुःख का नाश करने वाला
भावार्थ--
हे प्रभु! आपके अतिरिक्त इस संसार में दुःखों को दूर करने वाला और सच्चा सुख देने वाला दूसरा कोई नहीं है।
संक्षिप्त व्याख्या--
ऋग्वेद के इस वाक्य का तात्पर्य यह है कि परमात्मा ही संसार का वास्तविक सहायक और रक्षक है।
वही मनुष्य के दुःखों का नाश करता है।
वही कल्याण और सुख का दाता है।
इसलिए मनुष्य को ईश्वर पर विश्वास, प्रार्थना और श्रद्धा रखनी चाहिए।
इसका संदेश है कि सच्चा आश्रय और सुख केवल परमात्मा से ही प्राप्त होता है।
वेदों में प्रमाण--
१-ऋग्वेद १०.१२१.२
“यो देवानां नामधा एक एव।”
भावार्थ: वही एक परम सत्ता है जो सब देवताओं का आधार है।
२- यजुर्वेद- ३२.११
“न तस्य प्रतिमा अस्ति।”
भावार्थ: उस परमात्मा के समान या उसके बराबर कोई नहीं है।
३-अथर्ववेद- १०.८.१
“यो भूतं च भव्यं च सर्वं यश्चाधितिष्ठति।”
भावार्थ: वही परमात्मा भूत, भविष्य और सम्पूर्ण जगत का अधिष्ठाता है।
सार:
वेदों का सिद्धान्त है कि—
परमात्मा ही एकमात्र सर्वोच्च सत्ता है।
वही सुख देने वाला और दुःखों का नाश करने वाला है।
उपनिषदों में प्रमाण--
१-श्वेताश्वतरोपनिषद्- ६.१७
“यो देवानाṁ प्रभवश्चोद्भवश्च
विश्वाधिपो रुद्रो महर्षिः।”
भावार्थ: वही परमात्मा देवताओं का भी कारण है और सम्पूर्ण जगत का स्वामी है।
२-श्वेताश्वतरोपनिषद्- ६.१८
“यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं
यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै।”
भावार्थ: जो परमात्मा सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्मा को उत्पन्न करता है और वेदों का ज्ञान देता है, उसी परमात्मा की शरण लेनी चाहिए।
३-कठोपनिषद्- २.२.१३
“नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम्
एको बहूनां यो विदधाति कामान्।”
भावार्थ: वह एक परमात्मा सब नित्य और चेतन प्राणियों में श्रेष्ठ है और वही सबकी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है।
४- मुण्डकोपनिषद्- २.२.११
“ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद्
ब्रह्म पश्चाद् ब्रह्म दक्षिणतश्चोत्तरेण।”
भावार्थ: आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ सब ओर वही ब्रह्म (परमात्मा) है।
५-ईश उपनिषद-- ८
“स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणम्
अस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम्।”
भावार्थ: वह परमात्मा सर्वव्यापक, शुद्ध और निष्पाप है; वही सबका परम आधार है।
६-मैत्री उपनिषद्- ६.१७
“एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुः।”
भावार्थ: वह एक ही परमात्मा है, उसके समान दूसरा कोई नहीं है।
७--कैवल्योपनिषद्- १०
“स ब्रह्मा स शिवः सेन्द्रः सोऽक्षरः परमः स्वराट्।”
भावार्थ: वही परमात्मा ब्रह्मा, शिव और इन्द्र आदि सबका आधार है; वही परम और स्वतंत्र है।
८- नारायणोपनिषद्- ४
“नारायणः परो ज्योतिरात्मा नारायणः परः।”
भावार्थ: नारायण (परमात्मा) ही परम ज्योति और परम आत्मा है; वही सर्वोच्च सत्ता है।
सार-
उपनिषदों का भी यही मत है कि
परमात्मा एक और अद्वितीय है।
वही सबका पालनकर्ता, रक्षक और सुखदाता है।
उसके समान दूसरा कोई नहीं है।
पुराणों में प्रमाण--
१-भागवतपुराण- १०.१४.५८
“समाश्रिता ये पदपल्लवप्लवं
महत्त्पदं पुण्ययशो मुरारेः।”
भावार्थ: जो लोग भगवान के चरणों का आश्रय लेते हैं, उनके लिए संसार-सागर पार करना सरल हो जाता है; अर्थात् वही वास्तविक आश्रय हैं।
२-विष्णुपुराण- १.२२.५३
“एको विष्णुर्महद्भूतं पृथग्भूतान्यनेकशः।”
भावार्थ: वही एक विष्णु (परमात्मा) सम्पूर्ण जगत में अनेक रूपों में विद्यमान है।
३. शिवपुराण-१.२६
“नास्ति शम्भोः परं किञ्चित्।”
भावार्थ: भगवान शम्भु (परमात्मा) से बढ़कर कोई दूसरी सत्ता नहीं है।
४-पद्मपुराण,उत्तरखण्ड- २३६.१८
“हरिरेव सदा रक्षेत् हरिरेव परायणम्।”
भावार्थ: भगवान ही सदा रक्षा करने वाले और परम आश्रय हैं।
५-गरुड़पुराण- १.२३१.१२
“नारायणपराः सर्वे न कुतश्चन बिभ्यति।”
भावार्थ: जो लोग परमात्मा (नारायण) का आश्रय लेते हैं, वे किसी से भय नहीं करते; वही उनका रक्षक है।
६. स्कन्दपुराण- १.२.६.४५
“त्वमेव शरणं नाथ जगतां त्राणकारणम्।”
भावार्थ: हे प्रभु! आप ही सम्पूर्ण जगत के एकमात्र शरण और रक्षक हैं।
७-ब्रह्मपुराण- २३४.३१
“एको देवः सर्वभूतेषु गूढः।”
भावार्थ: एक ही परम देव सभी प्राणियों में स्थित है और वही सबका आधार है।
८- नारदपुराण- १.४१.५२
“त्वत्तो नान्यो जगन्नाथ रक्षकः सुखदायकः।”
भावार्थ: हे जगन्नाथ! आपसे बढ़कर कोई दूसरा रक्षक और सुख देने वाला नहीं है।
सार:
पुराणों का भी यही निष्कर्ष है कि
परमात्मा ही जगत का वास्तविक रक्षक है।
वही भय और दुःख को दूर करके सुख देने वाला है।
“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता” (ऋग्वेद) के भाव—कि परमात्मा ही वास्तविक सुखदाता और दुःखों को दूर करने वाला है—का समर्थन Bhagavad Gita में भी अनेक स्थानों पर मिलता है।
गीता में प्रमाण--
१. गीता १८.६६
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥”
भावार्थ :
सब प्रकार के आश्रयों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों और दुःखों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।
अर्थात् परमात्मा ही अंतिम रक्षक और दुःखों को दूर करने वाला है।
२. गीता ९.२२
“अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥”
भावार्थ :
जो लोग निरन्तर मेरा स्मरण और उपासना करते हैं, उनके योग और क्षेम (आवश्यकताओं और सुरक्षा) का भार मैं स्वयं उठाता हूँ।
अर्थात् परमात्मा ही अपने भक्तों की रक्षा और कल्याण करता है।
३. गीता ७.१४
“दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥”
भावार्थ :
यह मेरी त्रिगुणमयी माया बड़ी कठिन है; परन्तु जो मेरी शरण में आते हैं वे इसे पार कर लेते हैं।
अर्थात् ईश्वर की शरण ही संसार के दुःखों से मुक्ति का मार्ग है।
४. गीता १०.८
“अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते।”
भावार्थ :
मैं ही सम्पूर्ण जगत का कारण हूँ और मुझसे ही सब कुछ संचालित होता है।
अर्थात् परमात्मा ही सभी शक्तियों और सुखों का मूल स्रोत है।
५. गीता १२.६–७
“ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः…
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्।”
भावार्थ :
जो लोग अपने सभी कर्म मुझे समर्पित करके मेरी शरण लेते हैं, उन्हें मैं जन्म-मृत्यु रूपी संसार-सागर से निकाल देता हूँ।
सार--
गीता का भी यही सिद्धान्त है कि
परमात्मा ही वास्तविक आश्रय है।
वही भक्तों का रक्षक और पालनकर्ता है।
उसकी शरण से ही दुःखों का नाश और सच्चा सुख प्राप्त होता है।
महाभारत में प्रमाण--
१. भीष्मपर्व ६.६२.३३
“त्वमेव शरणं कृष्ण त्वमेव जगदीश्वरः।”
भावार्थ :
हे कृष्ण! आप ही हमारी शरण हैं और आप ही सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं।
अर्थात् परमात्मा ही वास्तविक आश्रय और रक्षक है।
२. शान्तिपर्व १२.३४८.५१
“एको देवः सर्वभूतेषु गूढः
सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।”
भावार्थ :
एक ही परम देव सब प्राणियों में स्थित है और वही सबका अन्तर्यामी है।
अर्थात् वही परमात्मा सबका आधार और रक्षक है।
३. वनपर्व ३.३१३.११७
“नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।”
भावार्थ :
नारायण को नमस्कार करके ही सब कार्यों का आरम्भ करना चाहिए; वही परम सहायक हैं।
४. उद्योगपर्व ५.७१.३
“नारायणपरं ब्रह्म नारायणपरं तपः।”
भावार्थ :
नारायण ही परम ब्रह्म हैं और वही सर्वोच्च तप तथा आश्रय हैं।
५. शान्तिपर्व १२.२३७.२४
“नारायणः परं सत्यं नारायणः परा गतिः।”
भावार्थ :
नारायण ही परम सत्य और मनुष्य की सर्वोच्च गति (अंतिम आश्रय) हैं।
६. शान्तिपर्व १२.३२१.२६
“ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशे तिष्ठति प्रभुः।”
भावार्थ :
परमात्मा सभी प्राणियों के हृदय में स्थित होकर उनका संचालन करता है।
सार-
महाभारत का निष्कर्ष भी यही है कि—परमात्मा ही जगत का वास्तविक स्वामी है।
वही मनुष्य का रक्षक और आश्रय है।
उसी की शरण से दुःखों का नाश और कल्याण होता है।
इस प्रकार महाभारत का सिद्धान्त भी ऋग्वेद की उक्त सूक्ति “न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता” के भाव को पुष्ट करता है कि परमात्मा ही सच्चा रक्षक और सुखदाता है।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण--
१-मनुस्मृति १२.१२२
“वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञो यत्र तत्राश्रमे वसन्।
इहैव लोके तिष्ठन्नेव ब्रह्मभूयाय कल्पते॥”
भावार्थ: जो मनुष्य परम सत्य (ब्रह्म) को जान लेता है, वही वास्तविक कल्याण और सुख को प्राप्त करता है।
२-याज्ञवल्क्यस्मृति- १.३४८
“ईश्वरप्रणिधानाद्वा सर्वदुःखक्षयो भवेत्।”
भावार्थ: ईश्वर का आश्रय लेने से मनुष्य के दुःखों का नाश होता है।
३-पराशर स्मृति- १.१९
“हरिरेव जगन्नाथः शरण्यः सुखदायकः।”
भावार्थ: परमात्मा ही सम्पूर्ण जगत का स्वामी, शरण देने वाला और सुख प्रदान करने वाला है।
४-व्यास स्मृति- १.११
“एको देवः सर्वभूतेषु रक्षकः।”
भावार्थ: एक ही परम देव सब प्राणियों का रक्षक है।
५-अत्रि स्मृति- १.७४
“एको देवः सर्वभूतेषु रक्षकः शरणं परम्।”
भावार्थ: एक ही परम देव सब प्राणियों का रक्षक और परम शरण है।
६-दक्ष स्मृति- २.२८
“ईश्वरः सर्वभूतानां नान्यः शरणदायकः।”
भावार्थ: परमात्मा ही सब प्राणियों को शरण देने वाला है, उसके अतिरिक्त दूसरा कोई नहीं।
७-गौतम स्मृति- ८.२४
“तमेव शरणं गच्छेत् सर्वभावेन मानवः।”
भावार्थ: मनुष्य को पूर्ण भाव से उसी परमात्मा की शरण में जाना चाहिए।
८-शंख स्मृति- १.६१
“नान्यो जगति रक्षिता सुखदाता च विद्यते।”
भावार्थ: इस जगत में परमात्मा के अतिरिक्त कोई दूसरा वास्तविक रक्षक और सुख देने वाला नहीं है।
सार:
स्मृतियों का भी यही मत है कि
परमात्मा ही सबका वास्तविक आश्रय और रक्षक है।
वही सुख देने वाला और दुःखों को दूर करने वाला है।
नैति ग्रन्थों में प्रमाण--
१-भृतहरि नीतिशतक-८४
“भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ताः
तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः।”
भावार्थ: संसार के भोग मनुष्य को स्थायी सुख नहीं देते; वास्तविक शान्ति और कल्याण परम सत्य (परमात्मा) की शरण से ही मिलता है।
२-चाणक्य नीति- १५.७
“सुखस्य मूलं धर्मः।”
भावार्थ: वास्तविक सुख का मूल धर्म है, और धर्म का आधार परमात्मा है।
३-शुक्रनीति- १.६६
“ईश्वराश्रयणादेव नित्यं सुखमवाप्यते।”
भावार्थ: परमात्मा का आश्रय लेने से ही मनुष्य को स्थायी सुख प्राप्त होता है।
४-विदुरनीति (उद्योग पर्व)- ३३.२७
“धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।”
भावार्थ: धर्म की रक्षा करने वाला मनुष्य सुरक्षित रहता है; धर्म ही उसका रक्षक बनता है, और धर्म का मूल परमात्मा है।
५-हितोपदेश, मित्रलाभ- १.३१
“यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्।”
भावार्थ: केवल बाहरी साधनों से कल्याण नहीं होता; विवेक और उच्च सत्य का आश्रय ही वास्तविक हित का कारण है।
६-पंचतंत्र- १.२६७
“दैवं पुरुषकारेण यत्नेनापि निवार्यते।”
भावार्थ: दैवी व्यवस्था और परम शक्ति का प्रभाव सर्वोच्च होता है; उसी के अधीन मनुष्य का जीवन चलता है।
७-सुभाषितरत्नभाण्डागार- ९५४
“दैवमेव परं बलं।”
भावार्थ: दैवी शक्ति (परमात्मा) ही सर्वोच्च बल और सहारा है।
८-सदुक्तिकर्णामृत ३.४२
“दैवाधीनं जगत्सर्वम्।”
भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत दैवी शक्ति (परमात्मा) के अधीन है।
सार:
नीति ग्रन्थों का भी यही निष्कर्ष है कि दैवी शक्ति / परमात्मा ही सर्वोच्च आधार है।
मनुष्य का वास्तविक सुख और संरक्षण उसी के आश्रय में है।
उसके बिना स्थायी कल्याण संभव नहीं है।
रामायण और गर्ग संहिता में प्रमाण--
१-वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड -१८.३३
“सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥”
भावार्थ: जो एक बार भी मेरी शरण में आकर कहता है कि “मैं आपका हूँ”, उसे मैं सब प्राणियों से अभय देता हूँ—यह मेरा व्रत है।
अर्थात् भगवान ही सच्चे रक्षक और आश्रय हैं।
२-अध्यात्म रामायण, अरण्यकाण्ड- २.४०
“राम एव परं ब्रह्म राम एव परं तपः।”
भावार्थ: भगवान राम ही परम ब्रह्म और परम आश्रय हैं; वही वास्तविक सुख और कल्याण देने वाले हैं।
३-गर्ग संहिता, गोलोक खण्ड -१.२३
“त्वमेव शरणं कृष्ण त्वमेव जगदीश्वरः।”
भावार्थ: हे कृष्ण! आप ही हमारी शरण और सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं।
४-गर्ग संहिता, गोलोक खण्ड -९.३८
“त्वत्तो नान्यो जगन्नाथ रक्षकः सुखदायकः।”
भावार्थ: हे जगन्नाथ! आपसे बढ़कर दूसरा कोई रक्षक और सुख देने वाला नहीं है।
सार:
रामायण और गर्ग संहिता दोनों का निष्कर्ष है कि—
भगवान ही मनुष्य का परम आश्रय हैं।
वही रक्षक, दुःखों का नाश करने वाले और सच्चा सुख देने वाले हैं।
१- योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण- २.१३
“ब्रह्मैवेदं जगत्सर्वं नान्यत्किञ्चन विद्यते।”
भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्म ही है, उसके अतिरिक्त दूसरा कुछ भी नहीं है।
२-योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण- ६.२७
“तमेव शरणं यान्ति ये विवेकिनो नराः।”
भावार्थ: विवेकशील मनुष्य उसी परम सत्य (ब्रह्म) की शरण ग्रहण करते हैं।
३- योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण- १.५६
“ब्रह्माश्रयात् परं सुखं नान्यत् विद्यते क्वचित्।”
भावार्थ: ब्रह्म (परमात्मा) के आश्रय से बढ़कर कहीं भी कोई अन्य सुख नहीं है।
सार:
योग वशिष्ठ का सिद्धान्त है कि—
परम ब्रह्म ही सर्वोच्च सत्य और आश्रय है।
उसी के ज्ञान और आश्रय से वास्तविक शान्ति और सुख प्राप्त होता है।
उसके अतिरिक्त कोई दूसरा स्थायी आश्रय नहीं है।
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MASHAALLHA KHAN
रात के खत्म होने का सब इन्तेजार करते है,
मगर कुछ लोग होते जो दिन खत्म होने के इन्तेजार मे रहते है, ताकि वह खुद को छिपा सके इस मतलबी दुनिया से .
-MASHAALLHA
kattupaya s
Good morning friends.. have a great day
બદનામ રાજા
मेरे प्रेम का समस्त अध्याय विरह का रहा,
में वंचित रहा प्रेम से, प्रेमिका से, ओर अंत में अपने आप से...
🌸🌸
Bindiya
"બિંદુ".
મારી આસપાસ જીવનવર્તુળ,
અને હું છું તેમનું કેન્દ્ર બિંદુ.
છે અસ્તિત્વ મારું નહિવત,
છતાંપણ હું છું વિરાટ બિંદુ.
Mansi Desai Shastri
ક્રિસ્પી ડેથ (ભાગ-5: અંતિમ પ્રકરણ)
સંજય ટેરેસ પરથી નીચે કૂદ્યો, પણ જ્યારે વિક્રમે નીચે જોયું, ત્યારે ત્યાં કોઈ નહોતું. સંજયે પહેલેથી જ નીચે એક સેફ્ટી નેટ ગોઠવી રાખી હતી. તે ભાગી છૂટ્યો હતો.
હોટલની પાર્ટીમાં અફરાતફરી મચી ગઈ હતી. ગજરાજ સિંહ અને બાકીના મહેમાનો ગભરાઈને ઉલ્ટીઓ કરવા લાગ્યા. એમ્બ્યુલન્સ બોલાવવામાં આવી. પણ જ્યારે ડોક્ટરોએ તપાસ કરી, ત્યારે એક ચોંકાવનારો ખુલાસો થયો.
"ઇન્સ્પેક્ટર, આ કોઈના શરીરમાં ઝેર નથી. આ માત્ર ખૂબ જ તીખું મરચું અને ફૂડ કલર છે, જે લોહી જેવું લાગે છે. મહેમાનોને જે ઉલ્ટીઓ થઈ રહી છે તે માત્ર ગભરામણને કારણે છે!" ડોક્ટરે કહ્યું.
ગજરાજ સિંહ હસી પડ્યા, "જોયું વિક્રમ? એ સંજય માત્ર અમને ડરાવી રહ્યો હતો. તે મારું કંઈ ન બગાડી શક્યો!"
પણ ગજરાજ સિંહની આ ખુશી લાંબી ન ટકી. વિક્રમના લેપટોપ પર જે ચીપ હતી, તેણે હોટલના મોટા પ્રોજેક્ટર પર એક નવો વિડિયો શરૂ કર્યો. આ વિડિયો એ '24 કલાક' નો નહોતો, પણ લાઈવ સ્ટ્રીમિંગ હતું!
સંજય કોઈ અજ્ઞાત જગ્યાએથી બોલી રહ્યો હતો, "ગજરાજ સિંહ, મેં તમારા શરીરમાં ઝેર નથી નાખ્યું, પણ તમારા બેંક એકાઉન્ટ અને કાળા કરતૂતોમાં નાખ્યું છે. તમે જ્યારે એ ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ ખાઈ રહ્યા હતા, ત્યારે એ ચીપ દ્વારા તમારો આખો ડેટા મારા સર્વર પર કોપી થઈ ગયો છે. અત્યારે જ તમારી બધી જ બેનામી મિલકતના દસ્તાવેજો સોશિયલ મીડિયા પર વાયરલ થઈ રહ્યા છે!"
ગજરાજ સિંહનો ચહેરો ફિક્કો પડી ગયો. મિનિટોમાં જ પોલીસ કમિશનરનો ફોન આવ્યો. ગજરાજ સિંહની ધરપકડના વોરંટ છૂટી ગયા હતા.અમદાવાદમાં 'ધ ગોલ્ડન પોટેટો' કાફે ફરી ખૂલ્યું, પણ આ વખતે તેનો માલિક કોઈ સમીર કે આર્યન નહોતો. તે કાફે ગરીબ ખેડૂતોના બાળકો માટેની એક સંસ્થા દ્વારા ચલાવવામાં આવતું હતું.
વિક્રમ ત્યાં કોફી પીવા ગયો. તેણે જોયું કે ટેબલ પર એક ફ્રેન્ચફ્રાઈઝનું પેકેટ પડ્યું હતું. પેકેટની પાછળ એક નાની લાઈન લખેલી હતી:
"સ્વાદ માત્ર જીભ માટે હોય છે, પણ ન્યાય આત્મા માટે."
સંજય ક્યાં ગયો એ કોઈને ખબર ન પડી, પણ એ રાત્રે ફ્રેન્ચફ્રાઈઝના એ સ્વાદે આખા શહેરના ભ્રષ્ટાચારને સાફ કરી નાખ્યો હતો.
Mansi Desai Shastri
ક્રિસ્પી ડેથ (ભાગ-4)
શહેરના સૌથી મોટા ફાઈવ સ્ટાર હોટલના ટેરેસ પર કોર્પોરેટર ગજરાજ સિંહની વર્ષગાંઠની પાર્ટી ચાલી રહી હતી. સંગીત, લાઈટ્સ અને મોંઘી વાનગીઓની મિજબાની હતી. ઇન્સ્પેક્ટર વિક્રમ હાંફતા હાંફતા ત્યાં પહોંચ્યા. તેમનો શ્વાસ અધ્ધર હતો, કારણ કે 'સંજય' નામના એ કાતિલનો આગલો શિકાર ગજરાજ સિંહ જ હતા.
વિક્રમે જોયું કે ગજરાજ સિંહના ટેબલ પર પણ એ જ 'ગોલ્ડન પોટેટો' કાફેની સ્પેશિયલ ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ સર્વ કરવામાં આવી હતી.
"રોકાઈ જાઓ! કોઈ આ ખાશો નહીં!" વિક્રમે બૂમ પાડી. આખી પાર્ટીમાં સન્નાટો છવાઈ ગયો.
ગજરાજ સિંહે હસતા હસતા કહ્યું, "ઇન્સ્પેક્ટર, તમે પણ આ નાસ્તાના દીવાના થઈ ગયા લાગે છે? આ તો શહેરની બેસ્ટ ફ્રાઈઝ છે."
વિક્રમે પ્લેટ ઝંચૂટી લીધી અને તપાસી. પણ આ વખતે કંઈક અલગ હતું. ફ્રાઈઝની નીચે લોહી નહીં, પણ એક નાની ડિજિટલ ચીપ હતી. વિક્રમે તરત જ પોતાના લેપટોપ સાથે એ ચીપ કનેક્ટ કરી.
સ્ક્રીન પર એક વિડિયો પ્લે થયો. આ વિડિયો પાંચ વર્ષ જૂનો હતો. જેમાં આર્યન, સમીર અને ગજરાજ સિંહ એક ટેબલ પર બેસીને દિનુ કાકાની જમીનના કાગળો પર સહી કરી રહ્યા હતા. વિડિયોમાં દિનુ કાકા બહાર રડી રહ્યા હતા અને ગજરાજ સિંહ અંદર બેસીને ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ ખાતા ખાતા હસતા હતા.
વિડિયોના અંતે સંજયનો અવાજ સંભળાયો:
"મેં તમને ઝેર નથી આપ્યું. મેં તમને તમારો જ અરીસો બતાવ્યો છે. પણ યાદ રાખજો, જે સ્વાદ તમે આજે માણ્યો છે, એ છેલ્લો હશે. કારણ કે 'ધ ગોલ્ડન પોટેટો' કાફેના દરેક બટાકામાં મેં એક એવું કેમિકલ ભેળવ્યું છે જે 24 કલાક પછી કામ કરવાનું શરૂ કરશે."
પાર્ટીમાં હાજર રહેલા અડધાથી વધુ મહેમાનો, જેમણે હમણાં જ એ ફ્રાઈઝ ખાધી હતી, તેમના ચહેરા પીળા પડી ગયા. ગજરાજ સિંહના હાથમાંથી કાચનો ગ્લાસ છૂટી ગયો.
વિક્રમે ચારેબાજુ નજર દોડાવી. વેઈટરના ડ્રેસમાં એક વ્યક્તિ દૂરથી વિક્રમ સામે જોઈને સ્મિત આપી રહ્યો હતો. એ બીજું કોઈ નહીં પણ સંજય હતો!
વિક્રમ તેની પાછળ ભાગ્યો, પણ સંજય હોટલના ટેરેસ પરથી નીચે કૂદી ગયો. શું સંજયે આત્મહત્યા કરી લીધી? કે પછી આ તેની કોઈ મોટી ગેમનો હિસ્સો હતો?
Mansi Desai Shastri
ક્રિસ્પી ડેથ (ભાગ-3)
સમીરનું અપહરણ થયાના સમાચાર મળતા જ ઇન્સ્પેક્ટર વિક્રમ એ અવાવરું ફાર્મહાઉસના ભોંયરામાં તપાસ કરવા ઉતરે છે. ત્યાંની હવા ભેજવાળી અને લોહીની ગંધથી ભરેલી હતી. ભોંયરાના એક ખૂણે તેને સમીર બેભાન હાલતમાં મળે છે, પણ તેના મોઢામાં જબરદસ્તી કાચા બટાકા ઠાંસવામાં આવ્યા હતા!
વિક્રમે સમીરને હોશમાં લાવ્યો. સમીરે રડતા રડતા કબૂલાત કરી, "સાહેબ, આ ખેતર મારું કે આર્યનનું નથી. આ ખેતર એક ગરીબ વૃદ્ધ ખેડૂત, દિનુ કાકાનું હતું. પાંચ વર્ષ પહેલા, મેં અને આર્યને ખોટા દસ્તાવેજો બનાવીને આ જમીન હડપી લીધી હતી. દિનુ કાકા આ જ ખેતરમાં ભૂખે મરી ગયા હતા..."
વિક્રમને હવે સમજાઈ રહ્યું હતું. આ કોઈ ભૂતપ્રેતની રમત નહોતી, પણ કોઈ જીવતા જાગતા માણસનો બદલો હતો. તેણે ખેતરના રેકોર્ડ ચેક કરાવ્યા. દિનુ કાકાને એક દીકરો હતો, જે વર્ષો પહેલા શહેર ભણવા ગયો હતો અને પછી ક્યારેય પાછો આવ્યો નહોતો.
એ દીકરાનું નામ હતું— સંજય.
વિક્રમનો મગજ ચકરાવે ચડ્યો. કાફેના રસોડામાં કામ કરનારા સ્ટાફનું લિસ્ટ ચેક કરતા તેને જાણવા મળ્યું કે મુખ્ય શેફનું નામ 'સંજય' હતું! પણ જ્યારે પોલીસ કાફે પહોંચી, ત્યારે સંજય ત્યાં નહોતો.
ત્યાં ટેબલ પર એક ગરમાગરમ ફ્રેન્ચફ્રાઈઝનું પેકેટ પડેલું હતું, જેની બાજુમાં એક ચિઠ્ઠી હતી:
"જેણે પિતાને ભૂખ્યા માર્યા, તેને હું ખવડાવી ખવડાવીને મારીશ. હવે વારો છે ત્રીજા પાત્રનો— જેણે કાગળ પર સહી કરી હતી."
વિક્રમ ચોંકી ગયો. ત્રીજું પાત્ર બીજું કોઈ નહીં પણ શહેરનો મોટો કોર્પોરેટર હતો, જે અત્યારે એક ભવ્ય પાર્ટીમાં ફ્રેન્ચફ્રાઈઝની મજા માણી રહ્યો હતો!
Mansi Desai Shastri
ક્રિસ્પી ડેથ (ભાગ-2)
આર્યનના મોત પછી આખા અમદાવાદમાં ફફડાટ ફેલાઈ ગયો હતો. 'ધ ગોલ્ડન પોટેટો' કાફે સીલ કરી દેવામાં આવ્યું હતું. ઇન્સ્પેક્ટર વિક્રમે ફોરેન્સિક રિપોર્ટ મંગાવ્યો, પણ જે પરિણામ આવ્યું તેણે તેને વધુ મૂંઝવણમાં મૂકી દીધો. આર્યનના શરીરમાં કોઈ ઝેર નહોતું મળ્યું, પણ તેના ગળામાં ફ્રેન્ચફ્રાઈઝનો એક ટુકડો ફસાયેલો હતો, જે કોઈ સામાન્ય બટાકું નહીં પણ 'માનવ હાડકા' જેવું સખત હતું!
વિક્રમ કાફેના માલિક, સમીરની પૂછપરછ કરવા પહોંચ્યો. સમીર ધ્રૂજી રહ્યો હતો.
"સાહેબ, હું તો બટાકા પેલા જૂના ફાર્મહાઉસથી મંગાવું છું જે વર્ષોથી બંધ હતું. ત્યાં સસ્તામાં માલ મળતો હતો."
વિક્રમ તરત જ એ ફાર્મહાઉસ પહોંચ્યો. શહેરથી દૂર એક અવાવરું જગ્યાએ આવેલું એ ખેતર જોઈને જ કમકમાટી છૂટી જાય તેવું હતું. ત્યાં તપાસ કરતા વિક્રમને જમીન નીચેથી એક નાની ડાયરી મળી. ડાયરીના છેલ્લા પાના પર લખ્યું હતું:
"જે બીજાની જમીન હડપે છે, તેની ભૂખ આ જ જમીન શાંત કરશે. પહેલો નંબર આર્યન, બીજો..."
બીજા નામ પર લોહીનો ડાઘ હતો, પણ અક્ષરો વંચાતા હતા: 'સ...'
વિક્રમને તરત યાદ આવ્યું કે આર્યન બ્લોગર બનતા પહેલા રિયલ એસ્ટેટનો બિઝનેસ કરતો હતો. શું આ કોઈ જૂના વેરનો બદલો હતો? તે હજી કંઈ વિચારે એ પહેલા જ તેના ફોન પર મેસેજ આવ્યો— કાફેના માલિક સમીરનું અપહરણ થયું હતું!
લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી
Mansi Desai Shastri
ક્રિસ્પી ડેથ (ભાગ-1)
અમદાવાદના પોશ વિસ્તારમાં આવેલી 'ધ ગોલ્ડન પોટેટો' કાફે તેના ખાસ મસાલેદાર ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ માટે આખા શહેરમાં પ્રખ્યાત હતી. લોકો ત્યાં કલાકો સુધી લાઈનમાં ઊભા રહેતા. પણ રવિવારની એ રાત્રે કંઈક એવું બન્યું જેણે શહેરના પોલીસ વિભાગને હચમચાવી દીધો.
શહેરનો જાણીતો ફૂડ બ્લોગર, આર્યન મલ્હોત્રા, લાઈવ સ્ટ્રીમિંગ કરી રહ્યો હતો. સામે ફ્રેન્ચફ્રાઈઝની પ્લેટ પડી હતી.
"મિત્રો, આ દુનિયાની સૌથી બેસ્ટ ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ છે..." આર્યને પહેલી ફ્રાઈઝ મોઢામાં મૂકી. પણ બીજી જ સેકન્ડે તેના ચહેરાના હાવભાવ બદલાઈ ગયા. તેનું ગળું રૂંધાવા લાગ્યું. કેમેરા ચાલુ હતો, હજારો લોકો લાઈવ જોઈ રહ્યા હતા. આર્યનના મોઢામાંથી ફીણ નીકળવા માંડ્યા અને તે ટેબલ પર ઢળી પડ્યો.
તેના હાથમાં રહેલી છેલ્લી ફ્રેન્ચફ્રાઈઝ જમીન પર પડી, જેનો રંગ પીળો નહીં પણ ઘેરો લાલ થઈ રહ્યો હતો.
મુખ્ય વળાંક (The Twist):
જ્યારે પોલીસ ઈન્સ્પેક્ટર વિક્રમ ઘટનાસ્થળે પહોંચ્યા, ત્યારે તેમને આર્યનની પ્લેટમાંથી એક ચોંકાવનારી વસ્તુ મળી. ફ્રેન્ચફ્રાઈઝના પેકેટના તળિયે લોહીથી લખેલી એક ચિઠ્ઠી હતી, જેમાં માત્ર એક જ વાક્ય હતું:
"સ્વાદની કિંમત હંમેશા લોહીથી ચૂકવવી પડે છે."
પોલીસને તપાસમાં ખબર પડી કે તે રાત્રે કાફેમાં જે બટાકા વપરાયા હતા, તે કોઈ સામાન્ય ખેતરમાંથી નહીં, પણ એક એવા સ્થળેથી આવ્યા હતા જે છેલ્લા 10 વર્ષથી સીલ હતું.
લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી
Bhavna Bhatt
મજાક સહન ન થાય તો નાં કરો
Bhavna Bhatt
મજાક સહન ન થાય તો નાં કરો
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
ભર ઉનાળે માવઠું વરસ્યું,
પછી ખબર પડી કે આજે તું સાડી પેરીને નીકળી.
- સ્પંદન
Adv Arun Mishra
कुदरत कुछ देने से पहले हमसे पहले कुछ ले जरूर लेती है ,इस लिए किसी के न तो आने की खुशी होनी चाहिए न जाने का दुःख प्रकृति किससे कब मिलना है,कब बिछड़ना है सब तय 🙏🙏🙏
Gauri Katiyar
दुखी रहने की बहुत सारे कारण हो सकते है पर खुश रहने के लिए किसी कारण की जरूरत नहीं होती
Sonam Brijwasi
Sangeeta ke naam mein hi sargam ki mithaas hai,
Uski har baat mein chhupi ek khaas si baat hai,
Jo sun le ek baar uski awaaz ko,
Uske dil mein bas jaane ki saugaat hai… 💫
AKHILABALARAJ
I don’t believe there should be any ruling in a friendship. If someone is controlling, is it really friendship?
Real friendship is about mutual respect, balance, and freedom, not one person dominating the other.
whatever friendship is friendship....that doesn't mean rulling....but, caring, sharing, loving, knowing better, enjoying together....
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In my life, I’ve been lucky to meet some real gems.
And this… is just a thought, an imagination.
DrPrakruti Gor
સારી રીતે રહેવું હોય...
તો સરખાં રહેવું પડે.....
Dr.Prakruti
kattupaya s
ok guys see u all with another set of thoughts. goodnight once again
Rashmi Dwivedi
कुछ भी नहीं तेरे हाथ में ........क्या लाया था जो चला गया है.....
kattupaya s
all my words are true. but understanding in your aspects iam not responsible for that.if you have any opinion pls share
kattupaya s
when I was ready to say my love she refused. when she was ready to accept my love i lost myself already.
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