Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
SAYRI K I N G
किया मिलेगा उदास आंखों में
गौर करते हो खास आंखों में
छोड़ जाओ तो छोड़ के जाना
आखिरी कोई आस आंखों में
Vikas Mourya
जीवन संघर्ष से भरा है
Bitu
*शायरी* कोई *शौक*नहीं * न *कारोबार* *है।*
जनाब *जब* दर्द *ज़्यादा* हो *जाए*
तो *कलम * *खुद* *चलने लगती* हैं।
kattupaya s
Goodnight friends.. sweet dreams
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Jyoti Gupta
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ASHISH KUMAR
मौके तमाम मिले मगर हमने अपनी पसंद नहीं बदली...💗🌹
Nadwika
बोध का संताप.........
अनभिज्ञता में एक चंचलता थी,
स्वप्न प्रिय थे, और हास्य सहज।
पर बोध के इस मोड़ पर व्याकुलता क्यों है?
ये प्रश्न अब पत्थर सा भारी है—
जहाँ मुझे स्वप्न भयावह, हास्य पीड़ा
और जीवन....... केवल मौन सी लगती है।
- नद्विका
Niya
હું ખુશ છું તારી સાથે
મારી ખ્યાલોની દુનિયામાં,
અહીંયા કોઈ તને
મારાથી છિનવી નહીં કરી શકે ને…!
તું તારે જીવ તારી હકિકતની દુનિયામાં….
Soni shakya
मंजिल नहीं थे हम..
बस उसके सफर का एक सुहाना मोड़ थे..
- Soni shakya
Narayan
तेरे साथ को तरसे
तेरी बातों को तरसे..!
तेरे होकर भी हम
तुम्हें देखने को तरसे..!!
Imaran
कुछ कह नहीं रहे ,
कुछ सुन नहीं रहे ,
एसा क्यो लग रहा मुझे…
के अब तुम हमारे नहीं रहे
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Sudhir Srivastava
युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
*****
आज समूचा विश्व आशंकित है, होना भी चाहिए,
कुछ सनकी लोगों की सनक से
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा जो बढ़ गया है।
पर समझ नहीं आता है कि क्या मिलेगा उस जीत से?
जिसमें सब कुछ तबाह हो जायेगा,
संसाधन बर्बाद हो जायेंगे,
मूलभूत सुविधाएं भी संघर्ष का कारण बनेंगी
घर, दुकान, मकान, संस्थान खंडहर हो जायेंगे।
लाशों पर मंडराते गिद्धों के बीच
जीवित रहने के लिए कुछ खाने की तलाश करते
अभाव ग्रस्त मानव, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े
और आदिम युग के दिनों की आधुनिक तस्वीर
क्या यही नहीं है चल रहे युद्ध की विभीषिका का
अत्यंत भयावह और अंतिम परिणाम।
जबकि बच्चा-बच्चा जानता है कि
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है
बुद्ध के रास्ते पर चलकर ही
सौहार्दपूर्ण समाधान ही अंतिम विकल्प है,
पर कुछ लोगों के लंबरदार बनने की सनक ने
दुनिया को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है,
या मान लें इन सबके दिमाग में गोबर भरा है।
क्या वे इतने नासमझ हैं, जो बिल्कुल नहीं जानते
कि दुष्परिणाम उनको और उनके देशों,
लोगों को भी भोगना पड़ेगा,
युद्ध का दंश उनको भी न भूलने वाला ग़म
और अभावों की सौगात ही देगा।
तब वे किससे और किसके लिए युद्ध करेंगे
क्या युद्ध से ही खुद दो-दो हाथ कर
ऐसे ही अपनी मनमानी करेंगे?
चलो मान भी लिया तो भला उसका बिगाड़ क्या लेंगे?
पर इतना ज़रुर होगा कि आने वाली पीढ़ियों के मन में
अपने लिए नफरत की आग जरुर भर देंगे।
क्योंकि जब आने वाली पीढ़ियों को अहसास होगा
कि उनके पुरखे ही उनके जीवन में
अभावों, दुश्वारियों, बीमारियों के
माली बनने के बाद ही दुनिया छोड़कर गए हैं,
तब क्या वे सब उनके गुण गायेंगे?
बिल्कुल नहीं! पानी पी-पीकर कोसेंगे, गरियाएंगे।
मगर अब कुछ भी कहना बेकार है
दुनिया तबाही के पायदान पर आकर खड़ी है,
धरा खुद प्राणी विहीन होने के डर से काँप रही है,
हमें भी अब तैयार हो जाना चाहिए,
जीने की उम्मीद छोड़ घुट-घुटकर
मरने के लिए कफ़न बांध लेना चाहिए।
वैसे एक अंतिम विकल्प अभी शेष है
युद्ध के सौदागरों को सत्ता से दूर भगाइए,
और युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
हम आप सब या हमारा भारत ही नहीं
समूचे विश्व के साथ एकजुट होकर चलाइए,
और जैसे भी हो युद्ध का नामोनिशान मिटाइए
तभी फिर से मुस्कराने का विचार मन में लाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sonu Kumar
धनवापसी पासबुक और जूरी कोर्ट में से कौनसा क़ानून देश के लिए ज़्यादा ज़रूरी है ?
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मेरे विचार में, धनवापसी पासबुक जूरी कोर्ट की तुलना में ज्यादा जरुरी क़ानून है। यह इतना जरुरी है कि यदि इन दोनों में से कोई एक क़ानून गेजेट में छापना हो पहले धनवापसी पासबुक को छापा जाना चाहिए। जूरी कोर्ट का इसके बाद में आता है। यदि जूरी कोर्ट देश में लागू हो जाता है, किन्तु धनवापसी पासबुक गेजेट में नहीं आता है तो जूरी कोर्ट निष्फल हो जाएगा।
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कैसे ?
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(1) हमें जूरी कोर्ट क्यों चाहिए ?
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जूरी कोर्ट पुलिस, जजों, सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के भ्रष्टाचार में कमी लाएगा।
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(1.1) हमें पुलिस एवं जजों का भ्रष्टाचार दूर करने की जरूरत क्यों है ?
ताकि हम भारत में बड़े पैमाने पर कम लागत में बेहतर तकनिकी उत्पादन करने वाले छोटे एवं मझौले कारखानों की श्रंखला* खड़ी कर सके.
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(*) इसके लिए हमें जीएसटी हटाकर रिक्त भूमि कर लाने की भी जरूरत होगी। रिक्त भूमि कर आये बिना जमीन सस्ती नहीं होगी और कारखाने नहीं लग पायेंगे। और यदि जीएसटी नहीं हटाया गया तो जीएसटी छोटी इकाईयो को बाजार से बाहर कर देगा।
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(1.2) हमें भारत में कम लागत में बेहतर तकनिकी उत्पादन करने वाले छोटे एवं मझौले कारखानों की श्रंखला क्यों चाहिए ?
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ताकि हम भारत में बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित आधुनिक हथियारों का उत्पादन कर सके। तकनिकी उत्पादन करने वाले ये छोटे कारखाने हथियार निर्माण का आधार बनायेंगे।
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(1.3) हमें बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित आधुनिक हथियारों का उत्पादन करने की जरूरत क्यों है ?
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ताकि हम दुश्मन देश की सेना को अपने खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन लूटने से रोक सके। यदि हमने खुद के हथियारों का उत्पादन नहीं किया तो निम्नलिखित में से कोई एक या सभी स्थितियां घटित होगी :
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या तो चीन हमारे प्राकृतिक संसाधन, खनिज लूट लेगा और हमारी अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लेगा।
या "चीन से बचाने" के एवज में अमेरिका हमारे प्राकृतिक संसाधन, खनिज लूटकर हमारी अर्थव्यवस्था कब्ज़ा लेगा।
या चीन एवं अमेरिका दोनों मिलकर हमारे खनिज एवं अर्थव्यवस्था को शांति प्रिय तरीके से आपस में बाँट लेंगे।
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लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि, बड़े पैमाने पर तकनिकी उत्पादन करने वाले कारखानो का ढांचा खड़ा करने के लिए हमें कच्चा माल यानी खनिज की जरूरत होती है। यदि कोई देश खनिज के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है तो कारखानों को कच्चा माल महंगा मिलेगा, और लागत बढ़ जाएगी।
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लागत बढ़ने से माल नहीं बिकेगा, और धीरे धीरे कारखाने बंद हो जायेंगे। अब जूरी कोर्ट इन कारखानों को बचा नहीं सकता। क्योंकि जूरी कारखाना मालिको की रक्षा पुलिस एवं जजों से कर सकती है, न्याय दे सकती है, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का ढांचा मुहैया करा सकती है, किन्तु जूरी कारखाना मालिको को सस्ते में कच्चा माल लाकर नहीं दे सकती !!
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और यहाँ धनवापसी पासबुक की भूमिका आती है
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(2) धनवापसी पासबुक आने का क्या प्रभाव होगा ?
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धनवापसी पासबुक भारत में जारी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोक देती है। इस क़ानून के गेजेट में आने से भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज, प्राकृतिक संसाधन, जमीन आदि 135 करोड़ भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेगी।
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जब भारत आजाद हुआ था तो जवाहर लाल के नेतृत्व में सरकार ने हमारी इस संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया था। तब से नागरिको की यह संपत्ति सरकार के नियंत्रण में है, और वे पिछले 70 वर्षो ने इसे चिल्लर दामों बेच बेचकर पैसा बना रहे है। धनवापसी पासबुक नागरिको के हाथ में आने से हमारे खनिज बच जायेंगे। और जब हमारे खनिज बचेंगे तभी हम इतनी ताकतवर सेना खड़ी कर पायेंगे कि चीन एवं अमेरिका की सेनाओं का मुकाबला कर सके।
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तो हमें सेना चाहिए ताकि हम अपने प्राकृतिक संसाधनो को लुटने से बचा सके।
और सेना खड़ी करने के लिए हमें खनिज चाहिए। और धनवापसी पासबुक हमारे खनिज बचाती है, ताकि हम अपनी सेना खड़ी कर सके।
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खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है। यदि हमारी रीढ़ टूट गयी तो जूरी कोर्ट, रिक्त भूमि कर आदि क़ानून कोई निर्णायक बदलाव नहीं ला पायेंगे। मतलब यदि हमें खनिज गँवा दिए तो भारत अफ़्रीकी देशो की तरह हमेशा के लिए कंगाल हो जायेगा।
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(3) यदि जूरी कोर्ट आता है, किन्तु धनवापसी पासबुक नहीं आ पाती है, तो क्या हम अपने खनिज बचा पायेंगे ?
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खनिज बचाने के संघर्ष का रास्ता बहुधा युद्ध की और जाता है। जूरी कोर्ट आने के बावजूद खनिजो की लूट जारी रह सकती है, क्योंकि धनवापसी पासबुक के अभाव में नागरिक संघर्ष करने या युद्ध में जाने से इंकार कर सकते है। उदाहरण के लिए :
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(3.1) 1951 में ईरान का तेल अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां चिल्लर दामों में खोद रही थी। मूसादेक (Musaddeq) ने इस लूट को रोकने के लिए मुहीम चलायी गयी और 1951 में खनिज के राष्ट्रीयकरण का आदेश गेजेट में भी छाप दिया गया था। मूसादेक ईरान के प्रधानमंत्री बने। और उन्हें हटाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों द्वारा सैन्य विद्रोह करवाया गया।
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इस तरह ईरान में ही कार्यकर्ताओ / नेताओं के दो गुट बन गए थे। एक गुट अमेरिकियों की तरफ था और एक मूसादेक की तरफ। किन्तु नागरिको ने मूसादेक का साथ देने यानी अपने तेल को बचाने के लिए लोड उठाने से इनकार कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि मूसादेक को बल प्रयोग द्वारा अपदस्थ करके जेल में डाल दिया गया और ईरान का तेल फिर से अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों के कब्जे में चला गया !!
The Iranian Oil Fields are Nationalised
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तो ईरान के नागरिको ने लोड उठाने से इनकार क्यों कर दिया था ?
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क्योंकि उन्हें लगता था कि, इस तेल की लड़ाई से हमारा क्या लेना देना है !! मूसादेक की सरकार निकाले या अमेरिकी कम्पनियां निकाल ले। इससे हमें कौनसा लाभ-हानि होने वाला है। हमें तो अपना रोजगार देखना है। यदि खनिज को ईरान के नागरिको की संपत्ति घोषित कर दी जाती तो स्थिति पलट जाती। तब एक आम ईरानी नागरिक यह साफ़ तौर पर देख सकता था कि यदि हमने अपना तेल बचा लिया तो मुझे निजी तौर पर फायदा होगा, वर्ना मुझे वास्तविक वित्तीय नुकसान होगा।
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(3.2) इसी तरह जब इंडोनेशिया में 70 के दशक में सुकर्णो ने खनिजो का राष्ट्रीयकरण करके अमेरिकी कम्पनियों को देश से बाहर कर दिया तो सीआईए के सहयोग से इंडोनेशिया के जनरल ने सैन्य विद्रोह किया। तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने इंडोनेशिया की सेना की मदद से 1965 से 1966 के बीच सुकर्णो की पार्टी के 10 लाख लोगो का कत्ले आम किया। पार्टी के सभी नेताओं, कार्यकर्ताओ और समर्थको को ढूंढ ढूंढ कर मौत के घाट उतारा गया। वे ऐसा कर पाए क्योंकि इण्डोनेशिया के आम नागरिको ने खनिज बचाने के लिए लोड उठाने से इनकार कर दिया था !!
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आम नागरिको का मानना था कि इस सब लड़ाई झगड़े से हमें क्या नफा-नुकसान है। खनिज ये नहीं खोदेंगे तो वो खोद लेंगे। इससे हमें क्या फर्क आता है !! ये खनिज सरकार के है, मेरे नहीं। मुझे इस झगड़े में क्योकर जाना चाहिए।
Indonesia’s Forgotten Bloodbath
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(3.3) ब्रिटिश भारत को इतने लम्बे समय तक क्यों लूट पाए ?
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इसकी एक वजह यह भी थी कि आम नागरिको को लगता था कि पहले राजा का राज था और अभी कम्पनी का। हमें इधर भी लगान देना है, और उधर भी, और जो खनिज वे निकाल रहे है, उससे हमारा क्या लेना देना है। ये लड़ाई तो राजा की है। और जब लगान ज्यादा बढ़ा और दमन होने लगा तो उन नागरिक समूहों ने आवाज उठाना शुरू किया जिन्हें नुकसान हो रहा था। उदाहरण के लिए 57 के विद्रोह में सैनिक और किसान आंदोलनों में किसान शामिल हो रहे थे। आम नागरिको की सहभागिता काफी कम थी।
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और इसी स्थिति को आप आज भी देख सकते हो। नागरिक रोज खबरों में देखते है कि सरकार लगातार देश की राष्ट्रिय संपत्तियां एवं खनिज संसाधन (विनिवेश, निजीकरण, आर्थिक सुधार, कड़ा कदम, कठोर फैसला आदि के टेग लगाकर) बेच रही है। लेकिन आम नागरिक को इससे कोई लेना देना नहीं होता। आम नागरिक इस बात को साफ़ तौर पर समझ नहीं पाता कि सरकार ने घूस खाकर उसका सामान बेच दिया है।
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इस पासबुक के हाथ में आने के बाद जब नागरिक को मालूम होगा कि कोयले का भाव 2000 रू टन है और टाटा झारखंड में 1 रू प्रति एकड़ की रोयल्टी की रेट पर असीमित कोयला खोद रहा है तो उसे निजी तौर पर नुकसान होगा। क्योंकि तब हर महीने आने वाली राशि में से कुछ राशि कम हो जाएगी !! और तब खनिजो की लूट रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक संघर्ष करने के लिए तैयार होगा।
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किसी भी देश में राजनैतिक समस्याओं पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ताओ की संख्या 2-3% से ज्यादा नहीं होती। हालांकि यह संख्या भी कोई भी बदलाव लाने के लिए काफी होती है। किन्तु खनिजो को बचाने की लड़ाई का पैमाना इतना बड़ा है, और प्रतिद्वंदी इतने ताकतवर है कि बिना नागरिकों के सहयोग से किसी देश के खनिज बचा ले जाना काफी दुष्कर कार्य है। कार्यकर्ता तभी इन्हें बचा सकेंगे जब नागरिक भी यह लोड उठाने को तत्पर। और नागरिक राजनैतिक मामलो में सिर्फ तब लोड लेने को तैयार होते है जब इससे उनका नफा-नुकसान सीधे तौर पर जुड़ा हो।
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जहाँ तक भारत के कार्यकर्ताओ की बात है, यह बात साफ़ है कि भारत के कार्यकर्ता धनवापसी पासबुक के कानून को उतनी गंभीरता से नहीं ले रहे है, जितना कि उन्हें लेना चाहिए। बहरहाल, मेरा मानना है कि भारत के सूचित कार्यकर्ताओ को खनिजो की लूट को गंभीरता से लेना शुरू कर देना चाहिए। जो कार्यकर्ता गरीबी कम करने एवं भुखमरी ख़त्म करने की समस्याओं पर काम कर रहे है, उन्हें भी इस क़ानून को गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। क्योंकि इस क़ानून का एक प्रभाव यह है कि इससे गरीबी तेजी से कम होगी।
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(4) धनवापसी पासबुक जारी हो जाती है, लेकिन जूरी कोर्ट लागू नहीं होता तो क्या हम अपने खनिज बचा पायेंगे ?
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हाँ, बिलकुल बचा सकते है। एक बार यदि भारत के प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में धनवापसी पासबुक आ जाती है, तो खनिज रोयल्टी एवं सरकारी भूमि से आने वाला किराया प्रतिमाह उनके खाते में सीधे जमा होने लगेगा। और तब यदि अपने खनिज बचाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता है तो उनके पास इसकी वाजिब वजह होगी।
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यदि युद्ध की नौबत आती है तो नागरिक एवं कार्यकर्ता त्वरित उपाय के तौर पर हथियारबंद सज्जन नागरिक समाज (Weaponnization of Law Abide Citizens) जैसे क़ानून छपवाकर खुद को हथियारबंद कर सकते है, ताकि वे खनिज बचाने की लड़ाई लड़ सके।
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किन्तु यदि नागरिको के पास धनवापसी पासबुक नहीं हुयी तो हथियार होने के बावजूद उनके पास लड़ाई लड़ने की कोई जायज वजह नहीं होगी।
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अत: मेरे विचार में धनवापसी पासबुक का कानून जूरी कोर्ट, रिक्त भूमि कर, वोट वापसी पासबुक आदि सभी कानूनों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि यदि धन वापसी ही नहीं रही तो तो वोट वापसी करके क्या हासिल होने वाला है !!
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(5) धनवापसी पासबुक क़ानून का सार :
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इस कानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है, के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है।
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अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है। भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे ।
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इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी।
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यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी। लेकिन इस कानून के लेखको का मानना है कि मौजूदा खनन एवं अंतराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से प्रत्येक नागरिक को लगभग 400 से 500 रू मासिक की प्राप्ति हो सकती है।
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राष्ट्रीय खनिज अधिकारी (NMRO=National Mineral Royalty Officer) के पास खनिज रॉयल्टी और सरकारी जमीनों का किराया तय करने, इकठ्ठा करने और सभी नागरिकों के बैंक खातों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी एवं अधिकार होंगे।
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NMRO की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करेंगे, किन्तु यदि यह धनराशि आपको समय पर नही मिल रही है या अन्य किसी वजह से आप NMRO को नौकरी से निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद लाने के लिए अपनी राय दर्ज करना चाहते है तो आप धन वापसी पासबुक के साथ पटवारखाने में जाकर अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
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इस कानून के पारित होने के बाद यदि राष्ट्रीय खनिज अधिकारी या उसका स्टाफ कोई गबन-घपला-लापरवाही भ्रष्टाचार करता है या अन्य किसी मामले में उनकी कोई भी शिकायत आती है और यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य-सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खदानो, स्पेक्ट्रम और जमीनों पर लागू होगा। किन्तु केंद्र सरकार के अधीन जल संसाधन इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेगें। यह कानून राज्य, नगरपालिकाओं, जिले, तहसील, ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों पर भी लागू नहीं होगा।
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kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
वात्सल्य
काजल लगाने से, सुंदर वस्त्र पहनने से सज के जाने से क्या फायदा।!!
जहाँ जाने के बाद यें संवरना अपना कोई देखे ना तो क्या फायदा ?? - वात्सल्य
ધબકાર...
અગનગોળા વિખેરતો શાંત જાણે અસ્ત થવાને આરે સૂરજ,
ધબકાર અહેસાસ હું જાણે પોઢી રહ્યાં અનંત ગાઢ નિંદ્રામાં.
ધબકાર....😊
Sudhir Srivastava
युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
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आज समूचा विश्व आशंकित है, होना भी चाहिए,
कुछ सनकी लोगों की सनक से
तीसरे विश्व का खतरा जो बढ़ रहा है।
पर समझ नहीं आता है कि
क्या मिलेगा उस जीत से?
जिसमें सब कुछ तबाह हो जायेगा,
संसाधन बेकार हो जायेंगे,
मूलभूत सुविधाएं भी संघर्ष का कारण बनेंगी
घर, दुकान, मकान, संस्थान खंडहर हो जायेंगे।
लाशों पर मंडराते गिद्धों के बीच
जीवित रहने के लिए कुछ खाने की तलाश करते
अभाव ग्रस्त मानव, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े
और आदिम युग के दिनों की आधुनिक तस्वीर
क्या यही है चल रहे युद्ध की विभीषिका का
अत्यंत भयावह और अंतिम परिणाम सामने आयेंगे।
जबकि बच्चा-बच्चा जानता है कि
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है
बुद्ध के रास्ते पर चलकर ही
सौहार्दपूर्ण समाधान ही अंतिम विकल्प है,
पर कुछ लोगों के लंबरदार बनने की सनक ने
दुनिया को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
पर क्या वे इतने नासमझ हैं जो नहीं जानते
कि दुष्परिणाम उनको और उनके देशों को भी भोगना पड़ेगा,
युद्ध का दंश उनको भी न भूलने वाला ग़म
और अभावों की सौगात देगा।
तब वे किससे और किसके लिए युद्ध करेंगे
क्या युद्ध से ही खुद दो दो हाथ कर अपनी मनमानी करेंगे?
चलो मान भी लिया तो उसका क्या बिगाड़े लेंगे?
पर इतना ज़रुर होगा कि आने वाली पीढ़ियों के मन में
अपने लिए नफरत की आग जरुर भर देंगे।
क्योंकि जब उन्हें अहसास होगा
कि उनके जीवन के लिए उनके पुरखे ही
अभावों, दुश्वारियों, बीमारियों के
माली बनने के बाद ही दुनिया छोड़कर गए होंगे।
अब कुछ भी कहना बेकार है
दुनिया तबाही के पायदान पर आकर खड़ी है
धरा खुद प्राणी विहीन होने के डर से काँप रही है,
हमें भी अब तैयार हो जाना चाहिए,
जीने की उम्मीद छोड़ घुट-घुटकर
मरने के लिए तैयार रहना चाहिए।
या एक अंतिम विकल्प अभी शेष है
युद्ध के सौदागरों को सत्ता से दूर भगाइए
और युद्ध नहीं विश्व शांति अभियान
हम आप सब या हमारा भारत ही नहीं
समूचे विश्व के साथ एकजुट होकर चलाइए
और जैसे भी हो युद्ध का नामोनिशान मिटाइए
तभी फिर से मुस्कराने का विचार मन में लाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
रुका हुआ धन प्राप्त करने के उपाय
1. पीपल को जल अर्पित करें (शनिवार)
शनिवार की सुबह पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और सात परिक्रमा करें। इससे शनि की कृपा मिलती है और रुका हुआ धन मिलने में सहूलियत होती है।
2. सरसों के तेल का दीपक जलाना
शनिवार की संध्या को पीपल के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। यह बाधाओं को दूर करता है।
3. गोमती चक्र या श्री यंत्र की स्थापना
शुक्रवार के दिन घर के पूजा स्थान या तिजोरी में गोमती चक्र या श्री यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप दिखाकर ही रखें। यह धन के स्थायित्व और प्रवाह को बढ़ाता है।
4. दान करना
शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान किसी गरीब को करें। इससे ग्रह दोष शांत होते हैं और अटका हुआ धन वापस आने लगता है।
5. मंत्र जाप
प्रतिदिन सुबह 108 बार “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें। यह धन-संपत्ति आकर्षित करने और अड़चनें दूर करने में बेहद प्रभावी है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
अबूझ मुहूर्त का पाखण्ड
आजकल एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है कि लोग अपने विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत या अन्य शुभ कार्यों के लिए ज्योतिषीय मुहूर्त पूछने के बजाय कुछ पर्वों और त्योहारों को ही “अबूझ मुहूर्त” मानकर उसी दिन कार्य सम्पन्न कर लेते हैं। यह प्रवृत्ति शास्त्रीय परंपरा की दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती।
वास्तव में मुहूर्त शास्त्र अत्यन्त सूक्ष्म और वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, ग्रहस्थिति, लग्न आदि अनेक तत्वों का विचार करके ही किसी कार्य के लिए अनुकूल समय निर्धारित किया जाता है। यदि इन सभी सिद्धान्तों की उपेक्षा करके केवल किसी पर्व को ही स्वतः शुभ मान लिया जाए, तो यह मुहूर्त शास्त्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
१. चैत्र नवरात्रि
बहुत से लोग मानते हैं कि चैत्र नवरात्रि में सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। परंतु इस समय प्रायः सूर्य मीन राशि में होते हैं और यह काल मीन संक्रांति अथवा खरमास के अंतर्गत आता है। शास्त्रों में इस अवधि में विवाह आदि मांगलिक कार्य सामान्यतः वर्जित बताए गए हैं।
२. गणेश चतुर्थी
भगवान गणेश की उपासना का यह अत्यंत पवित्र पर्व है, परंतु ज्योतिष की दृष्टि से चतुर्थी तिथि ‘रिक्ता तिथि’ मानी गई है, जो मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं कही जाती।
३. रामनवमी
रामनवमी भगवान श्रीराम के प्राकट्य का महापर्व है। परंतु ज्योतिषीय मतानुसार नवमी भी रिक्ता तिथि मानी जाती है, इसलिए विवाह या गृहप्रवेश जैसे कार्यों के लिए इसे सामान्यतः उपयुक्त नहीं माना जाता।
४. महाशिवरात्रि
यह शिवभक्तों के लिए महान साधना का पर्व है, किंतु यह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है, जिसे अधिकांश मांगलिक कार्यों में अनुकूल नहीं माना गया है।
५. विजयादशमी
दशहरा अत्यंत शुभ और विजयोत्सव का दिन माना जाता है। इस दिन शस्त्रपूजन, शिक्षा आरम्भ या नया कार्य प्रारम्भ करना श्रेष्ठ माना गया है, परंतु अनेक परंपराओं में चातुर्मास के दौरान विवाह आदि संस्कारों को वर्जित बताया गया है।
६. दीपावली
दीपावली लक्ष्मीपूजन और आध्यात्मिक उत्सव का महान पर्व है, परंतु यह अमावस्या तिथि को आता है, जो सामान्यतः मांगलिक संस्कारों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।
इस प्रकार स्पष्ट है कि अधिकांश व्रत-पर्वों का उद्देश्य भगवान का स्मरण, उपासना और आध्यात्मिक साधना है, न कि विवाह या अन्य सांसारिक कार्यों का आयोजन।
यदि केवल सुविधा या भीड़ के कारण इन पर्वों को “अबूझ मुहूर्त” घोषित कर दिया जाए, तो यह शास्त्रीय मुहूर्त विचार की परंपरा को कमजोर करता है। अतः उचित यही है कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए शास्त्रसम्मत मुहूर्त का विचार करके ही कार्य किया जाए।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Sudhir Srivastava
फायकू
अब जीना बेकार है
समझ में आया
तुम्हारे लिए।
पावन भाव लिए वो
आगे बढ़ता रहा
तुम्हारे लिए।
बेकार है शिकवा-शिकायत
समझना नहीं जब
तुम्हारे लिए।
बंद करो विधवा विलाप
खोखला है सब
तुम्हारे लिए।
कैसे कह दूँ तुमसे
दूर नहीं जाना
तुम्हारे लिए।
हार-जीत तो खेल है
समझ लिया हमने
तुम्हारे लिए।
विश्वास तोड़ दिया मैंने
रोना बेकार है
तुम्हारे लिए।
जीवन की डोर बनी
व्यर्थ रुलाती है
तुम्हारे लिए।
ईश्वर से आस है
पूरा विश्वास है
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
ASHISH KUMAR
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Sudhir Srivastava
सायली छंद- जिंदगी
जिंदगी
आसान है
जीकर तो देखिए
हँसते मुस्कुराते
रहिए।
जिंदगी
एक मेला
सुख-दुख का
झमेला भी
समझिए।
जिंदगी
आपकी है
जीते ही रहिए
हँसिए-गाइए
मुस्कराइए।
जिंदगी
मानिए तो
ईश्वर का उपहार
धन्यवाद -आभार
साभार।
जिंदगी
सिखाती है
जीवन का पाठ
पढ़ना रोज
सीखिए।
जीवन
का एक
ही अंतिम सत्य
आना-जाना
जानिए।
जिंदगी
कट जायेगी
रोता क्यों है?
बेकार यार
तकरार।
सुधीर श्रीवास्तव
ASHISH KUMAR
https://bitli.in/m7Rkr67
Ruchi Dixit
परतें खुल रही है शायद सच
दिखा रही है ......
- Ruchi Dixit
archana
अगर इंसान कमाने लायक न रहे,
किसी के काम का न रहे,
और शरीर भी साथ छोड़ दे…
तो दुनिया ही नहीं,
कई बार अपने भी ठुकरा देते हैं।
यह किसी किताब की बात नहीं,
यह मेरे जीवन का अनुभव है।
SAYRI K I N G
कोई घूंघट कोई मुखौटा कोई नकाब में है,
सच कहूँ तो यहाँ कांटा हर गुलाब में है।
kattupaya s
ok guys if you have anything special food in your town pls share,
kattupaya s
I want to finish the food whatever it is with this lassy
kattupaya s
I love misal pav..
kattupaya s
when you bored of what you cooking then take this
DrAnamika
शब्दों के खेल से कई घर उजड़ गए
वरक़ पलटो इतिहास के,कई साथी बिछड़ गए.
#डॉ_अनामिका
Raa
kafi din bad mila Gujrati jay jay garvi gujrat
kattupaya s
This is the best food for the season.. just chill
Shailesh Joshi
સમય વ્યક્તિઓ અને માહોલ બદલવાની
બધીજ મથામણો કરીને થાક્યો,
છતાં મારા જીવનમાં એટલો ફેર ન જોવા મળ્યો,
જેટલો ફેર સમયાંતરે જીવનમાં આવતી રહેતી
નાની મોટી મગજમારીઓ, અને
રોજના ધાંધિયાઓને સહજ રીતે
સ્વીકારી લેવાની તૈયારી બતાવ્યા પછી જોવા મળ્યો.
- Shailesh Joshi
Mansi Desai Shastri
જયશ્રી ક્ર્ષ્ણ આપ સર્વે નો હું મારાં હ્રદય થી આભાર માનું છું એક લાખ થી વધુ જોનારાઓ છત્રીસ હજાર લોકો એ ડાઉનલોડ કરેલ વાર્તાઓ અને પાંચ હજાર રેટિંગ આ મારાં માટે સ્વપ્ન જેવું છે હું તમામ વાચક વર્ગ ની ઋણી છું માતૃભારતી એ મને એક ઓળખ આપી તે બદલ ep અને માતૃભારતી ટીમની પણ સદાય ઋણી રહીશ ❤️🙏🧿 આમ જ આશીર્વાદ, પ્રેમ, સહકાર આપતાં રહેજો
Vipul Borisa
એની છે દયા એટલે જ તો પીડા બરફ ની જેમ પીગાળી છે.
કોઈ ને આઠ કોઈ ને બાર આપણે ચોવીસ કલાકની પાળી છે.
વિપૂલ પ્રીત
- Vipul Borisa
Dada Bhagwan
Do You Know that you will only be robbed if it is in your karmic account? If it is not in your karma, then no one in this world can touch you, so be fearless. The newspapers will print anything but you should not be afraid of the news. It should not worry you even if thousands of people were being robbed.
Read more on: https://dbf.adalaj.org/ebBTd6Oj
#facts #spirituality #doyouknow #spiritualfacts #DadaBhawganFoundation
kattupaya s
muthamizhe..tamil song
સુરજબા ચૌહાણ આર્ય
મિત્રો અમે થોડા દિવસ પહેલા લગ્ન માં ગયા હતા. આમ તો અમારે ઘરની ફોરવીલ છે પણ એમના ફ્રેન્ડ ને ઇમરજન્સી કામ હોવાથી ફોરવીલ રાજેસ્થાન લઇ ગયો એટલે અમારે બસમાં જવુ પડ્યું મોઢેરા વાળી બસમાં મુદ્રા થી સામખિયાળી ની ટિકિટ લીધી બસ ભચાઉ પહોંચી ત્યાં ડાયરેક્ટ રાપર ની બસ હતી એટલે અમે ટિકિટ કંડક્ટર ને આપીને એ બસમાં બેઠા પછી બસ ખીરઈ અને બાદરગઢ વચ્ચે પોહચી એટલે બસનો ટાયર ફાટી ગયો એવો જોરથી અવાજ આવ્યો જાણે બૉમ ફાટ્યો બસમાં 40 પેસેન્જર હતા. અંતે જે થાય એ સારા માટે થાય છે.પછી મેં મારા નણંદ ના દિકરા ને ફોન કર્યો એટલે એ એમની ગાડી માં અમને લઇ ગયો.
Mara Bachaaaaa
बातों का दायरा,
यादों मे सिमट,
रह गया,
हमसे भूल ऐसी हुई,
उनका साथ छूट गया।
- Mara Bachaaaaa
kattupaya s
Time for short 😴. c u soon
kattupaya s
Dear tamil readers I request you to go through one of my short story about women freedom.
Tr. Mrs. Snehal Jani
જીવન જીવો
શક્યતાઓથી, નહીં
સંભાવનાથી
Chaitanya Joshi
મીઠા કરતા માઠા અનુભવો થયા ઘણા.
હતા આપણા એ બીજાના થયા ઘણા.
રોજ રોજ નવા સંઘાત જિંદગીએ દીધા,
નહોતા લાયકને લાગણીમાં વહ્યા ઘણા.
લાલીમાં મુખની જોઈને ના અનુમાન કરો,
ગાલ તમાચે રતુંબડા બનીને રહ્યા ઘણા.
ઉખેડી વાત અતીતની વયસ્કોએ સભામાં,
ભાતભાતના અનુભવો એણે કહ્યા ઘણા .
ના ખોતરશો ઘાવ ગણા છે હૃદયના ભીતરે,
વેદના અતીતની અકબંધ જે સહ્યા ઘણા.
ચૈતન્ય જોશી 'દિપક' પોરબંદર
kattupaya s
No problem if she doesn't care about you.. she is just checking your attitude.. enjoy the love have fun
kattupaya s
Time for breakfast.. no cylinder only induction stove..
kajal jha
जो इंसान दर्द में भी मुस्कुराना सीख जाता है,
उसे फिर कोई तोड़ नहीं सकता। 💔➡️🙂
हर किसी को खुश रखना शायद हमारे बस में नहीं,
लेकिन किसी को दुख न देना हमारे बस में ज़रूर है।
- kajal jha
kattupaya s
don't act like a gentleman. most of the girls don't like it nowadaya. act like a man just let the girls solve their problems
kattupaya s
until you are honest and confident with your activities never propose your crush. just wait for some more time.your crush may accept you without any conditions.
kattupaya s
Try to understand some people avoiding you because of their situation too. don't hate them. leave them on their own
kattupaya s
if you miss someone badly don't call them instead try to know that they have the same feeling..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
हो कौन बता दो
हो कौन बता दो एक बार तो बताना पड़ता हैं l
है ग़र इश्क़ तो बारहा बोलके जताना पड़ता हैं ll
मासूमियत और नजाकत को बरकरार रखके l
अंदर ओ बाहिर से खुद को सजना पड़ता हैं ll
यू खामोशी से इज़हार ए मोहब्बत नहीं होती l
तकाजा ये रश्में मोहब्बत का निभाना पड़ता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Rashmi Dwivedi
जिसका हाथ महादेव ने पकड़ रखा है दुनिया वाले उसकी कितनी भी टांग खींच ले उसे गिरा नहीं सकते। महादेव का सिंहासन लगा लो अपने मन के कक्ष में फिर होंगे सारे फैसला आपके पक्ष में। हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Imaran
आप भी हो गए हम से बेवफ़ा,
हमको यह ऐतबार ही नहीं होता,
हम तो कोसते हैं अपने आप को ही,
काश आपसे प्यार ही नहीं होता
💔imran 💔
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ख्याति देखकर भ्रात की, करे भ्रात षड्यंत्र। रहो सजग तुम भ्रात से, यही नैश का मंत्र।।
दोहा --४४९
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
MASHAALLHA KHAN
मुक्कदर मे शायद वो शक्स है ही नही
जिसको सजदो मे गिर कर मांगा है हमने .
-MASHAALLHA
kattupaya s
simple living is living with your potential abilities. keep going on your goal
kattupaya s
Morning walk is good for health. walking along with your crush is good for heart.
kattupaya s
Nothing brings happier in early morning than the tea prepared by loved ones for us.
kattupaya s
In life we do lot of mistakes and poor decision s. it not only affects us and others too. we pledge to take right decisions.
kattupaya s
Very Good morning friends.. Have a great day
Mare Do Alfaz
तुझे हक है अपनी दुनिया में
खुश रहने का..
मेरा क्या है....
मेरी तो दुनिया ही तू है...
- Mare Do Alfaz
Bindiya
બીજ રોપાયું
વૃક્ષ થયું મજાનું
તારા પ્રેમનું.
ASHISH KUMAR
"वो जो कहता था कि कुछ नहीं होता,
अब उसे देखो, उसे भी दर्द होता है।
मिटा कर अपनी सारी खुशियाँ जिसके लिए,
आज वो ही पूछता है कि 'तुम्हें क्या होता है?'"
"ज़ख्म कहाँ-कहाँ से मिले छोड़ो ये बात,
ज़िंदगी तू ये बता, अभी सफर कितना बाकी है।
हमने तो दिल खोल कर वफ़ा की थी उनसे,
शायद उन्हें हमारी वफ़ा ही कम जान पड़ती है।"
"बड़ी तब्दीलियाँ लाया है तुम्हारा छोड़ कर जाना,
अब हम अक्सर आईने में खुद को भी नहीं पहचानते।"
ASHISH KUMAR
"हकीकत कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
शिकवा करो तो उन्हें मजाक लगता है।
कितनी शिद्दत से हम उन्हें याद करते हैं,
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।"
ASHISH KUMAR
"दिल के पास आपका चेहरा कुछ इस तरह बसा है,
जैसे एक छोटी सी मुस्कान में सारा जहाँ छुपा है।"
ASHISH KUMAR
"धड़कन संभल जाती है तुम्हें देखने के बाद,
मगर ये दिल मचल जाता है तुम्हें सोचने के बाद।"
ASHISH KUMAR
"हज़ार महफ़िलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।"
બદનામ રાજા
હૈયાનાં હંસલા ઉડી જાય,
પછી મોતીના હારના મોહ ન હોય...
🌸
annu
हार मानू नकोस कधी,
मार्ग कठीण असला तरी चालत राहा.
वादळे कितीही आली तरी,
स्वप्नांच्या दिशेने धावत राहा.
पाय थकले तरी मन थकू देऊ नको,
अडथळे आले तरी थांबू नको.
प्रत्येक अपयश शिकवण देत असते,
त्यातूनच यशाची वाट सापडत असते.
आकाशाला स्पर्श करायचा असेल तर,
धाडस मनात ठेवावं लागतं.
स्वप्न पूर्ण करायचं असेल तर,
मेहनतही मनापासून करावी लागते.
आज नाही जमलं तरी उद्या जमेल,
प्रयत्न कधीच वाया जात नाहीत.
जिद्द आणि विश्वास ठेव स्वतःवर,
यशाचे दरवाजे कायम बंद राहत नाहीत.
Soni shakya
ना चाहते हुए भी उसे स्वीकारना पड़ा..
जिसे 'समझौता' कहते हैं..
- Soni shakya
M K
मेरी गलती पर मत हँसा कर
कहते हैं कर्म किसी को नहीं छोड़ता है
घूम फिर कर एक दिन वापस लौटता ही है....
" कहते हैं न जैसी करनी वैसी भरनी "
- M K
M K
मुझे रौशनी नहीं अंधेरा पसंद है,
कहते हैं अंधेरा छटने के बाद एक नया सवेरा होता है..!!
- M K
M K
मैं , मेरी आदतों से नाराज़ तो नहीं हूं
अंदर से आवाज़ आया, बस थोड़ी सी टूट चुकी हूं
बदल तो नहीं गई मै.....
हां, तकलीफें बढ़ कर तनाव का कारण बन चुकी है
सबको मैं गुस्सैल लगती हूं,,,
पर मेरे अंदर दबे जज़्बातों को कोई समझ नहीं पाता,
मैं ठीक हूं या नहीं....
कोई सवाल नहीं करता.....!!!!
- M K
Mara Bachaaaaa
ताउम्र अपने बनाने की तलब लिए बैठे थे,
मंजूर न था रब को, शिक़ायत किन्हें करे!
- Mara Bachaaaaa
રોનક જોષી. રાહગીર
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Narendra Parmar
मोहब्बत में आप काफी जानकारी रखतीं हों
दिमाग तो आपके पास दो पैसे का भी नहीं है
फिर भी आप सों रुपए का हिसाब रखतीं हों ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Mrudhula
This poem feels like a conversation with my own mind.
Every line reminds me that life is not just about thinking, but acting:
To ask questions,
To search for answers,
To try despite failures,
To journey with focus,
To win moments of success,
To preserve knowledge,
And finally, to make the right decisions.
It reminds me that my mind is powerful, and even when others doubt me or I face obstacles, my choices and efforts shape my life.
When I read it aloud, I feel motivated, focused, and ready to move forward.
It is like a map for my mind, guiding me from thought to action, from struggle to wisdom.
kalpita
पन्नों में कैद
मैंने चाहा था उसे पन्नों में कैद करना,
मगर वो तो स्याही बनकर
मेरी हर लकीर में बह गया।
कुछ लफ्ज़ बिखर गए
कुछ अल्फ़ाज़ निखर गए
लहू का रंग बनकर
मेरी नस नस में वो रम गया ।
चाहा था मैंने मोहब्बत जताना उससे,
लबों तक आकर हर बार ठहर गया।
वो इश्क़ न बन सका ज़िंदगी का,
मगर ख़ुदा बनकर इबादत में रह गया।
शने: शने: बदल रही है रफ्तार जिंदगी की
धुंधली सी पड़ रही है यादें मेरे यार की
’कल्पिता’ की बंद आंखों के कोने में
कतरा आंसू बन कर बस गया। ❤️
कल्पिता 🌻
SAYRI K I N G
ये बात कहना बहुत ज़रूरी है, ज़िंदगी मेरी है मगर, तेरा होना बहुत ज़रूरी है...!!
SAYRI K I N G
अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो डीजल नब्बे पेट्रोल सौ
सौ मे लगा धागा सिलेंडर ऊछल के भागा.
Avinash
https://www.instagram.com/arise_with_avi?igsh=MWp1ZDQ1anBwYTV0cQ==
A singh
हमने तो चाहा था उसे दिल से भी ज्यादा,
पर शायद हमारी चाहत ही कम पड़ गई।
वो तो छोड़ गया हमें बीच राह में,
और हमारी जिंदगी बस यादों में सिमट गई। 💔
kattupaya s
Goodnight friends.. it's time for dinner take care
kattupaya s
I asked her do you love me? she just laughed and closed her eyes.
Rajeev Namdeo Rana lidhori
https://youtu.be/PagjnEaQl2w?si=p2j3lJI45bMrUcnL
#साहित्य_अकादमी भोपाल द्वारा आयोजित #कवि_सम्मेलन की #झलकियां-#रपट
प्रस्तुति - #राजीव_नामदेव '#राना_लिधौरी'
#sahitya_acadmi #विकास_दवे @highlight
kattupaya s
Everything is going to change. That's the world's rule. but nothing going to change your loneliness.
kattupaya s
looks like you are in a dream world with her. in dream world everything is an illusion. you are living with illusion
kattupaya s
She is listening to all your stories means she is just believe in horror stories nothing else
kattupaya s
Reality is you are just a introvert. it's enough for the reason to be a single
kattupaya s
When you are too much worried nothing going to happen. yes you are worrying about your crush's breakup.
kattupaya s
yes iam committed to my home loans and the Emi that i have to pay..
बिट्टू श्री दार्शनिक
https://notionpress.com/sg/read/shreeji?utm_source=share_publish_email&utm_medium=whatsapp
available for sale on notion press online store.
Thank you for your support 🙏🏽😊
#poetry #love #book
kattupaya s
The most painful thing is people thinking that you are committed to someone by judging your personality.
Paagla
https://youtube.com/shorts/JcfehqsmOWg?si=g1hA9cN4LJEZS5Iv
Paagla
https://youtube.com/shorts/JcfehqsmOWg?si=g1hA9cN4LJEZS5Iv
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