Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Akanksha srivastava
समझदारी की दस्तक
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बचपन की वो शाम शायद उस दिन खत्म हो गयी,
जब हमारे शौक जिम्मेदारियों में तब्दील हो गए।
जिस दिन हमने गिरने से ज्यादा खुद को
संभालना सीख लिया।
बोलने से पहले सोचना सीख लिया।
जिद करने से पहले मान जाना सीख लिया।
पैर फैलाने से पहले चादर मापना सीख लिया।
रिश्तें निभाने से पहले उन्हें परखना सीख लिया।
और शायद तभी से हम बड़े कहलाने लगे।
Kamini Shah
સહનશક્તિની પણ
એક હદ હોય ને
પછી
વાંસળી ની જગ્યાએ
સુદર્શનચક્ર હોય…
-કામિની
Meera Singh
यादों का बोझ बहुत लेकर चले
क्यों न अब थोड़ी देर ठहर लिया जाए।
बहुत जी लिए अब तुम बिन हम
क्यों न अब मर लिया जाए। ।
मीरा सिंह
Bhavesh Tejani
સન્નાટો તારા વિખૂટા પડ્યા પછીનો,
અતીશય વ્હાલ કરે છે મને,
અહીં બસ હું છું, તારા સ્મરણો છે,
ત્રીજા કોઈને મનાઈ છે આવવાની અહીં...
Soni shakya
कभी-कभी सोचती हूं,
मैं भी उसके जैसी बन जाऊं..!
पर दिल कहता है नहीं,
तुम 'वो' नहीं हो..!!
- Soni shakya
Shailesh Joshi
મિત્રો બે પાંચ મિનિટનો સમય કાઢીને પણ એકવાર આપણી પોતાની આસપાસના લોકો, કે પછી કોઈપણ રીતે આપણે જે જે લોકોને ઓળખતા હોઈએ એમની ઉપર, થોડો ઊંડો અભ્યાસ કરી જોજો કે એમાંથી,
ગમે તે કરીને પણ મોજશોખ કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? અને પોતાના જોરે મોજશોખ પૂરા કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? પછી આપણને ખ્યાલ આવી જશે કે, આપણા બધાના જીવનમાં જરૂરી સુખ, શાંતિ અને આનંદ ક્યારે, કેટલો અને કેવી રીતે આવે ?
જુઓ ટૂંકમાં સફળ જીવનનો સાર બતાવતો Motivation youtubeshorts gujarati #quotes 👇 આભાર
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Pragna Ruparel
આપણી દીકરી
ટીનએજ ની દીકરીઓને પ્રેમ થઈ જાય છે.તે નવી વાત નથી પણ એને સામે નું પાત્ર
કેવું છે.એ જોવાનું કહેવું.અને આ દોરમાંથી સેફ( યાને કે સલામતી) નીકળે એવી તમારે એને હિંમત આપવી.અને સમજાવવું ને જરૂર પડે તો મેન્ટોર ની મદદ લઈ .અને કાઉન્સેલિંગ કરાવવું પણ એને તમારે કેર પણ ખુબજ કરવી.
જય સ્વામીનારાયણ
Mrugzal
હે....મૃગજળ
હર એક ઘૂંટ સુકુન સે ભરી હૈ,
મેં કૈસે કહ દુ કી ચાય બૂરી હૈ…
Dada Bhagwan
પ્રસ્તુત પદ "વર્તમાને જિનેશ્વર સીમંધર સ્વામી" દ્વારા વર્તમાન જિનેશ્વર શ્રી સીમંધર સ્વામી કે જે કેવળજ્ઞાન સહિત છે અને આપણને મોક્ષ પ્રાપ્ત કરવા માટે માર્ગદર્શન પૂરું પાડે એ માટે પ્રાર્થના કરીએ.
Watch here: https://youtu.be/r99jMP9z1U0
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Arth Shah
Once, before memory began, the world was not yet a name. It was a breathing field of possibilities, a restless sea of forms waiting to awaken. Out of that darkness, came a whisper — and the whisper became wind, and the wind began shaping faces. From single cells to scales and feathers, from coral to the first cry of a newborn — the Earth became a vast asylum of creation, a fever dream of variation. It bore everything: beasts with teeth like mountains, trees that spoke in seasons, civilizations that reached for the sun and burned their own wings. Billions of voices bloomed — and just as swiftly, fell silent. Species came and vanished like sparks struck from eternity’s stone. The oceans rose and swallowed empires. The stars watched — patient, cold, indifferent. And yet in that constant vanishing, something miraculous occurred: the awareness of loss. Somewhere among the ruins and pollen, a creature began to remember. It built altars, wrote songs, buried its dead. It called itself human. It looked at the passing clouds and felt sorrow — and named that sorrow beauty. It saw youth fade, flowers wilt, and dreams dissolve — and called that meaning. It wept at what it could not keep — and thought, perhaps, that love was real. But everything it clung to — its gods, empires, and names — slipped quietly into dust. For nothing the world makes lasts longer than the breath that makes it. Each child is a comet — burning only long enough to illuminate the night of its own creation. And still, they come — these fragile sparks — laughing, building, touching, hoping. They paint the world with their fleeting colors, forgetting that even the hand that paints will fade. Yet maybe that’s the secret: that only what dies can be beautiful. The eternal cannot shimmer — it merely is. But the transient — the breaking wave, the falling leaf, the human life trembling between birth and disappearance — carries a light no infinity can hold. Because to know that you are temporary, and still to smile — that is the rarest grace. And so, this vast garden blooms and withers endlessly. Everything that ever lived, lives still — as memory, as dust, as warmth in the unseen air. Each form returns to silence, not in tragedy, but in rhythm. The story was never about survival. It was always about the momentary glimmer — that fragile awareness in the dark. The world is not beautiful despite its impermanence. It is beautiful because of it.
वात्सल्य
*જે ક્ષુપ,છોડ,વૃક્ષ પર પર્ણ,ફૂલ,ફળ લાગે છે,તે હંમેશાઁ ઝૂકેલા જોવા મળશે.*
🌺
*તે છોડ,ક્ષુપ,છોડ પર કાંટા હોય તો તે સખત,વાંકા અને સીધા આકારે જોવા મળે છે.*
*છતાં પર્ણ,ફૂલ,ફળ સાવચેત રહી જીવે છે.*
- વાત્સલ્ય
Jyoti Gupta
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kajal jha
तेरी यादों का साया हर पल साथ रहता है,
दिल की धड़कनों में बस तेरा ही नाम रहता है।
चाँदनी रातों में तेरा चेहरा नज़र आता है,
ख़्वाबों की दुनिया में तू ही तू समा जाता है।
तेरी हँसी से रोशन है मेरी ज़िंदगी का जहाँ,
तेरे बिना लगता है सब कुछ वीरान।
मोहब्बत की राहों में तेरा ही सहारा है,
दिल कहता है तू ही मेरी दुनिया सारा है।
- kajal jha
Imaran
मौत का Kuch पता Nahi✖ है इसलिए बात कर लिया करो,
Kiya पता फिर Yaad😓 करो Aur तब Ham न रहे
😂imran 😂
Pandya Rimple
अपनी दुनिया को चुनिंदा लोगों तक सीमित रखिए, क्यूंकि अत्यधिक कुछ भी हो वो हानिकारक ही होता है।
-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_
mohanmurarisharma
कितने ही अच्छे बन लो लेकिन कभी तुम्हारी कोई एक बात तुम्हारी निन्यानवे अच्छाइयों पर भारी पड़ जायेगी.. और तुम बुरे लगने लगोगे..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सुहाना मौसम
सुहाने मौसम की रवानी चित को बहका गई l
पहचानी सी आहट धड़कनों को धड़का गई ll
दिखने में तो बड़ा दिवाना लगता है नखराला l
जब चाहे बदल जाने की अदाएं भड़का गई ll
इश्क़ की फितरत तो देखो भरी महफिल में l
हुस्न मालिका के रूख से नकाब सरका गई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
वात्सल्य
*જલસા કરો તેનો કોઇ વિરોધ નથી,પરંતુ આવકની મર્યાદામાં કરો,કોઈને બોજ ના બનો.કોઈના ઓશિયાળા બની ના જીવો.પૂર્વજની કે પપ્પાની પુંજી પર પાગલપણ એ સમય જતાં પોતાના પગ પર કુહાડી મારવા સમાન છે.પોતાની વીસ-બાવીસ વર્ષની ઉમર પછી સંતાને કોઈના પર બોજ ના બનતાં મનમાં માનેલાં સોણલાં સાકાર કરવાની ઉંમરે ઊંઘી રહેશો તો વૃદ્ધત્વ વહેલું નક્કી સમજો.શુભ સવાર.*
. - વાત્સલ્ય
Parag gandhi
*માણસ ને ભરપૂર માત્રા માં જો કંઇ મળ્યું હોય તો એ છે બુદ્ધિ.....*
*કારણકે આજ દિવસ સુધી કોઈએ ફરિયાદ નથી કરી કે મારામાં ઓછી છે...*🆖💘🌹💫
*💥શુભ સવાર💥*
sachit karmi
जिवन मे प्रेम कि सच्चाई
Std Maurya
शीर्षक -"विदाई"
फूलों की महक मिल रही, उम्र धीरे-धीरे गुजर रही,
वह पुराना समय अब कहाँ से आएगा?
हम थे बागों की चहल-पहल, मगर वो पुराने बाग कहाँ से आएंगे?
चिड़ियों की आवाज़ में हम मगन थे, मगर वो चिड़िया अब कहाँ से आएगी?
कुछ फूलों से मिले, कुछ फूलों से दूर हो गए,
मगर वह पुराना समय अब कहाँ पर आएगा?
अब सुनो मेरी इन नन्हीं कलियों,
हम तो बागों में रहने वाले फूल थे,
अब हम खिल गए हैं, इसलिए बागों में जगह कहाँ?
दस्तूर है हर बाग का, खिल कर महकना पड़ता बागों के आँगन में,
न महको तो फिर तुम फूल कहाँ?
सुनिए मेरे बागों के माली,
हम आपको कोटि-कोटि करते हैं प्रणाम,
आपने ही सींचा है हमें अपनी ममता से,
अब महक कर दुनिया में रोशन करेंगे आपका नाम।
कुछ हसीन शब्दों से
कुछ सुनहरे रंगों से आपका
किताबों के हऱ पन्नों में लिख दूँगा नाम
कलम नहीं मेरी जादू है
मगर दिया हुआ तों आप लोगो वरदान हैं
-सत्येंद्र कुमार "एसटीडी "✍️
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Std Maurya
"इश्क की किताब हम भी लिखेंगे,
अभी अपने रक्त से इंकलाब लिख रहा हूँ।
रक्त बच जाने दो, फिर हम भी
अपनी अधूरी मोहब्बत का हिसाब लिखेंगे।"
- Std Maurya
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पिता कार्य में पुत्र भल, सदा बँटाए हाथ। काम बढ़ाए पिता का, और निभाए साथ।।
दोहा --407
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
મનોજ નાવડીયા
મને કઈ નહિં આપતા,
આ શ્વાસ પર ઉધારના ચાલે છે,
તું આવ્યો ખાલી હાથે,
આ તન પર ભાર લાગે છે,
તારી સઘળી અનંત ઈચ્છાઓ,
આ મન પણ ભાગ માગે છે,
તું શુન્યવત બની જાય તો,
આ બધું નહીવત લાગે છે.
મનોજ નાવડીયા
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
smita
तेरी सांवली सूरत पर जब मुस्कान आती है,😊
मेरी धड़कन तेरा नाम गुनगुना जाती है।💖
Sonu Kumar
क्या भारत में सैन्य विद्रोह द्वारा तख्तापलट हो सकता है ?
बिलकुल हो सकता है। पुलिस के अलावा भारत के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के पास या नागरिको के पास सेना को रोकने के लिए हथियार नहीं है !!
वास्तविक अर्थो में भारत में सबसे ताकतवर संस्था सेना है। सेना के पास हथियार है, हथियार चलाने का प्रशिक्षण है, आदेशो का पालन करवाने और आदेश देने के लिए पद सोपान प्रक्रिया है और वांछित अनुशासन है। दुसरे नंबर पर सबसे शक्तिशाली संस्था पुलिस है। किन्तु भारत की पुलिस के पास सेना की तुलना में नगण्य हथियार है, अतः यदि सेना टेक ओवर करती है, और पुलिस सेना का विरोध करती है तो पुलिस सेना के सामने कुछ घंटें भी नहीं टिकेगी।
भारत की सेना जनरल के कंट्रोल में है, और जनरल पीएम से आदेश लेता है। यदि सेना के कनिष्ठ अधिकारी यह मानने लगते है कि भारत का प्रधानमन्त्री भ्रष्ट या निकम्मा है और देश को गड्ढे में धकेल रहा है. या फिर उन्हें यह लगने लगता है कि पीएम को हटा दिया जाना चाहिए, और यदि ऐसे में जनरल अपने कुछ बरिष्ठ अधिकारियो के साथ मिलकर तख्ता पलट की योजना बनाता है तो जनरल भारत में तख्ता पलट करने में सफल हो सकता है। या मान लो कि जनरल का मूड बन जाता है और यदि जनरल अपने अधीनस्थ अधिकारियो के साथ तख्ता पलट की कोशिश करता है तो उसे रोकने वाला कोई नहीं है है !!
ऐसी स्थिति में सेना को सिर्फ भारत के नागरिक ही रोक सकते है, किन्तु भारत के नागरिक हथियार विहीन है, अतः यदि भारत की सेना विद्रोह कर देती है, तो भारत के नागरिको को फौजी शासन स्वीकार करना होगा। यदि नागरिक सेना के खिलाफ छुट पुट प्रदर्शन करते है तो सेना फायरिंग खोल कर उन्हें आसानी से दबा सकती है। 100-200 नागरिको के गोलियां लगने के बाद नागरिक समझ लेंगे कि प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं है। और तब सेना खुद को राष्ट्रवादी और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी बता कर मामला रफा दफा कर सकता है।
भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। क्योंकि जनरल को यह संदेह रहता है कि तख्ता पलट में कनिष्ठ अधिकारी एवं सैनिक जनरल का साथ देंगे या नहीं। किन्तु यदि कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहते है तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल आसानी से तख्ता पलट कर सकेगा।
जिस देश में राजनेता बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण से बाहर होने लगते है और वे नेताओं को काबू नहीं कर पाते तो ऐसे हालात में विदेशी ताकतें (विशेष तौर पर अमेरिका) देश को कंट्रोल में लेने के लिए सेना का इस्तेमाल करती है। भारत में फिलहाल ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं है क्योंकि भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों के सभी नेता पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथो बिके हुए है अतः उन्हें अपना एजेंडा भारत में लागू करने के लिए सेना की जरूरत नहीं है।
हालांकि भारत में दो बार ऐसे हालात बने थे जब सेना द्वारा तख्ता पलट की कमजोर सम्भावना होने के संकेत मिलते है।
1) जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन शुरू किया, बैंको का राष्ट्रीयकरण कर दिया, पाकिस्तान के दो टुकड़े किये और अमेरिका के आगे झुकने से इनकार कर दिया तो अमेरिका ने पहले उन्हें भ्रष्ट जजों (इलाहाबाद का हाई कोर्ट जज जगमोहन लाल सिन्हा) के माध्यम से गिराने की कोशिश की। जब इंदिरा जी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर ताले लगवा दिए तो उन्होंने इंदिरा जी का तख्ता पलटने के लिए सेना को एप्रोच करना शुरू किया था। तब जेपी ने दो बार सार्वजनिक रूप से ऐसी अपील की थी कि यदि इंदिरा गांधी सेना को कोई गलत आदेश देती है तो सेना को उसका पालन करने से मना कर देना चाहिए। और जब पानी सर से ऊपर निकल गया तो इंदिरा जी ने आपातकाल लगाकर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया था।
2) जब देश मनमोहन सिंह से उकताया हुआ था तब. 2012 में जनरल वी के सिंह के कार्यकाल के दौरान हिसार में तैनात "33 आई रेजिमेंट" एवं आगरा की "50 पैरा ब्रिगेड" ने दिल्ली की और कूच किया था। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे रिपोर्ट किया था. घटना उस दिन से एक दिन पहले की है जब वी के सिंह को अपने जन्म प्रमाण पत्र से सम्बन्धित मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था। सरकार को, रक्षा मंत्रालय को और गृह मंत्री को इस मोबिलाईजेशन की कोई जानकारी नहीं थी। लगभग 18 घंटे तक सरकार असमंजस में बनी रही। प्रोटोकोल के अनुसार बिना रक्षा मंत्री की अनुमति के सेना की कोई भी टुकड़ी दिल्ली की और नहीं बढ़ सकती। बाद में सेना ने स्पष्टीकरण दिया कि यह एक रूटीन एवं औचक प्रोसीजर था। सरकार ने यह बात मानी कि उन्हें नोटिफाईड नहीं किया गया था. किन्तु सरकार ने किसी भी प्रकार के कू (coup) की सम्भावना को सिरे से नकारा।
https://zeenews.india.com/news/nation/army-moved-two-units-towards-delhi-report 768126.html
लोकतंत्र की जननी हथियारबंद नागरिक समाज है। जिस देश के नागरिको की शक्ति उस देश की सेना से अधिक बढ़ जाती है. वहां किसी भी स्थिति में लोकतंत्र का निलम्बन नहीं किया जा सकता। भारत के नागरिक हथियार विहीन है, और यदि सेना विद्रोह कर देती है तो नागरिको के पास उन्हें रोकने के लिए चाकू और नेल क़टर ही है। ब्रिटिश ने सिर्फ । लाख बन्दुक धारियों के माध्यम से भारत के 40 करोड़ नागरिको को 200 सालो तक अपने कंट्रोल में रखा। भारत में 17 लाख की सेना है और सभी हथियारों से लेस है। तो मुकाबले की बात तो भूल ही जाइए। अतः भारत में यदि सेना तख्ता पलट नहीं कर रही है, तो यह केवल चांस की बात है। यदि सेना तख्ता पलट कर देती है तो हम नागरिक "लोकतंत्र वापिस लाओ" के नारे लगाने के सिवा कुछ नहीं कर सकते।
https://www.facebook.com/share/p/1C1XiG4uRM/
#वोट_वापसी_पासबुक
Abhishek Chaturvedi
शिवशक्ति:— तपस्या से प्रेम तक.....
Bhavna Bhatt
વાહેગુરુ જી...
Nadwika
"कल का गौरव आज रद्दी की ढेरी है... हम उस पीढ़ी के अवशेष हैं जिसकी किस्मत अंधेरी है।"
mohanmurarisharma
मिलने पर अब वो नजरेे तो चुराने लगा है..
कैसे कह दें मोहन कि वो हमें भूल गया है..
Heena Ramkabir Hariyani
एक शिक्षा भगवानने दी मुझे "स्त्री" बनाके,
एक शिक्षा मेरी माँ ने दी अहमियत समझाके
हीना रामकबीर हरीयाणी
ArUu
मैं कभी जिक्र नहीं करती या शायद कह नहीं पाती।
पर मेरे पास एक नायाब हीरा है।
बेशकीमती या यू कहूँ अमूल्य
जब सारी दुनियां मेरे खिलाफ हो जाएगी न
मुझे यकीन है
उस वक्त भी वो मेरे साथ खड़ी होगी
भले ही मैं गलत हूं
वो मेरा साथ देगी।
उसके सामने मुझे किसी चीज का डर नहीं रहता।
मैं उसके लिए हर हाल में सही हूं।
❤️
S K I N G
वो मुझे कभी नहीं मिलेगी ये जानकार भी मुझे सिर्फ उसी से प्यार है।
Soni shakya
कोई गिला ना होता अगर ,
ये सिलसिला ही ना होता..!
या तो तु ..मिल गया होता,
या फिर.. मिला ही ना होता..!!
- Soni shakya
pink lotus
aghor subidha me nhi
sunya tame mile 🙏❣️
Narendra Parmar
मुझसे एक गुस्ताखी हों गई है
तुझे बगैर पहेचाने
मोहब्बत जो मुझे हों गई है ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
Saroj Prajapati
दुख अपना...खुद ही सहना
फिर क्यों किसी से कहना !
रोकर सुनेंगे, हंसकर उड़ाएंगे
दुख का तेरे तमाशा बनाएंगे।
दुख भी एक मियाद लेकर आता है
एक सीमा के बाद खुद ही कम हो जाता है।
तूफान के बाद हो जाता है सब शांत
दुख लोगों की करा जाता है पहचान।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
स्वच्छतेचं वेड मला
santosh Mishra
एक रात ऐसी आएगी,
जब मैं एक-एक बात लिखूँगा—
न जज़्बात की कोई चाशनी होगी,
न झूठ का कोई सहारा लूँगा।
मैं कागज़ पर तेरे गुनाहों को,
पूरे सबूतों के साथ लिखूँगा।
उस रात अदालत मेरी होगी और गवाह मेरी तन्हाई,
हर फ़ैसला... सिर्फ और सिर्फ मेरे हक़ में होगा।
और तब...
बिना किसी नकाब के, बिना किसी पर्दे के,
तुझे, तेरे नाम के साथ...
ज़माने भर के लिए ‘बेवफ़ा’ लिख दूँगा।
sonika bhawsar
What do you really know of my love,
My Romeo?
What you’ve heard about me—
How much was truth, how much was a lie, who really knows?
Oh, you stole my heart away,
And the thief of my heart became my killer.
Try to understand the depth of my love,
Your words—only you know what they mean.
I understood only you,
Romeo…
Romeo…
If I share your happiness with a smile,
I whisper every secret of your heart.
I speak of love with all my devotion,
And you fall apart when I tell the story.
In your story, my name will always remain,
I salute your love—
Oh my beloved…
Oh my beloved.
Jitin Tyagi
चिढ़ाना तेरा अब मुझे भाने लगा हैं।
कही मुझे तुझसे प्यार तो नहीं होने लगा हैं।
बेमतलब छेड़ना मुझे तेरा अब परेशान नहीं करता
क्या प्यार यहीं होता हैं। जो मुझे तुझसे होने लगा हैं।
गलतियों पर तेरी अब हँसी आती हैं।
ये वही सच्चा वाला प्यार तो नहीं जो अब मुझे तुझसे होने लगा हैं।
Rajiv Jangid
शहर में रात नहीं होती
बिजली के गोले,
समूह में इकट्ठा होकर
सूरज बन जाते हैं
और रात को छिपा लेते हैं।
गाँव में रात और दिन
दोनों होते है समय पर,
वहाँ तारे सूरज का
विकल्प बन जाते हैं।
अब धरती भी बट गई है
दो-दो हिस्सों में,
एक धरती प्रकृति के साथ
और एक प्रकृति के विरुद्ध।
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
मैंने आपके प्यार में...
Shraddha Panchal
शिकायते भी उसीसे
और
भगवान से प्रार्थना में भी ,
जब एक ही शख़्स हो,
समज लो प्रेम करने
की अदा आ गई है हममे ❤️
Archana Singh
चकाचौंध की दुनिया
वो गहरी खाई हैं ,
जिसमें एक बार
पांव रख दिया तो ,
निकलना असंभव हैं...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
पैसें का
"अभाव "
सही हैं , पर ...
पैसें का
" प्रभाव "
घातक हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Jyoti Gupta
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Ankit K Trivedi - મેઘ
વિચાર્યું હશે કે પડ્યા-પડ્યા કાટ લાગી જશે,
અને મૂલ્ય ભંગારનું બની જશે;
પણ આતો વરખ જ કાટ નો હતો ,
એમને ક્યાં ખબર હતી કે ઘસાઈ ને આતો સોનું થઈ જશે.
વિચાર્યું હશે કે શબ્દોની ક્યાં સ્ટોરેજ હોય છે,
એ વાત વાત માં ભૂલી જશે;
એમને ક્યાં ખબર છે કે શબ્દોના વાક્યો બની ,
આખી પુસ્તકાલય ભરાઈ જશે.
©- અંકિત કે ત્રિવેદી 'મેઘ'
ek archana arpan tane
કેટલાક સંબંધો દેવદુતો સાચવે છે તોડેલા તુટતાં નથી પણ વધારે મજબૂત બને છે.
- ek archana arpan tane
Thakor Pushpaben Sorabji
જીતી ગઈ આજે હું
હારી ને પણ"કાના"
હારમાં પણ જીત મળી મુજને
બસ છે જ્યાં તારો મારો
સથવારો વ્હાલા!
જય શ્રી કૃષ્ણ:પુષ્પા.એસ.ઠાકોર
- Thakor Pushpaben Sorabji
Shefali
#shabdone_sarname__
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Bk swan and lotus translators
The concept of Bharat Mata (Mother India) wasn’t created by a single person at one specific moment; rather, it evolved through literature and art during the late 19th and early 20th centuries as a symbol of Indian nationalism.
Here is the timeline of how the "Mother" came to life:
1. The Literary Origins (Late 1800s)
* 1866: One of the earliest mentions of a mother-nation figure appeared in Bhudeb Mukhopadhyay’s satirical work Unabimsa Purana (The Nineteenth Purana).
* 1873: A play titled Bharat Mata by Kiran Chandra Bandyopadhyay was performed in Bengal. It depicted the motherland as a woman suffering under colonial rule, inspiring rebels to fight for her.
* 1882: The concept truly took hold in the public imagination with Bankim Chandra Chattopadhyay’s famous novel, Anandamath. It contained the hymn "Vande Mataram" (I bow to thee, Mother), which personified the nation as a goddess and became the anthem of the freedom struggle.
2. The Visual Birth (1905)
While the idea was in books, the first famous visual depiction was created in 1905 by the artist Abanindranath Tagore (nephew of Rabindranath Tagore).
* The Context: It was painted during the Swadeshi Movement, a protest against the British partition of Bengal.
* The Transformation: Tagore originally titled the painting Banga Mata (Mother Bengal) but later renamed it Bharat Mata to give it a pan-Indian appeal.
* The Image: He depicted her as a saffron-clad, four-armed ascetic (Sadhvi) holding:
* A book (Knowledge)
* Sheaves of paddy (Food)
* A white cloth (Clothing)
* A rosary/mala (Spiritual strength)
3. Religious and Political Evolution (1930s)
The concept shifted from a purely nationalist symbol to a semi-religious one.
* 1936: The first Bharat Mata Temple was inaugurated by Mahatma Gandhi in Varanasi. Notably, this temple contains no traditional idol but a large marble relief map of undivided India, emphasizing that the "Mother" is the land itself.
Summary Table
| Year | Key Contributor | Form |
|---|---|---|
| 1873 | Kiran Chandra Bandyopadhyay | Play titled Bharat Mata |
| 1882 | Bankim Chandra Chattopadhyay | Novel Anandamath ("Vande Mataram") |
| 1905 | Abanindranath Tagore | First iconic painting of Bharat Mata |
| 1936 | Shiv Prasad Gupta | First Bharat Mata Temple (Varanasi) |
Priya
Never Design Your Character Like a Garden
Where anyone Can Walk
Design Your Character Like the Sky
Where Everyone Desire To Reach
Paagla
https://youtube.com/shorts/K4nQstJZKyk?si=DMU0kRamK3dvb7XT
Imaran
Teri👉 आरज़ू Mera ख्वाब है;
जिसका रास्ता Bahut खराब है;
Mere ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा;
#DiL💔 का हर पन्ना #_Dard💔 की किताब है।
📖imran 📖
Bhavesh Tejani
વેર વિખેર કરીને બેઠો છું બધું ઓરડામાં,
એક સપનું મૂક્યું હતું એ જ ખોવાયું છે.
by unknown
mohanmurarisharma
वो एक अजनबी नजदीक आया ही था मोहन..
वापस अजनबी होकर बहुत दूर जाने के लिए..
Vrishali Gotkhindikar
पत्र सुमने 2
प्रिय सोना...
आज पहिल्या वेळा तू नसताना ऍमेझॉन वर ऑर्डर केले
दोन ड्रेस घेतले स्वतः साठी
खुप दिवस घेणंच झालं नव्हतं
आणि एक कार कव्हर
बघ ना तू इथे नाहीस त्यामुळे तुझी लालचुटुक कार अगदी पोरकी झालीय
इथे सगळ्याच्याच आपल्या आपल्या गाड्या आहेत
त्यामुळे तुझ्या गाडीला कोणाचा हात लागत नाही
तू कार च्या बाबतीत किती particular असायचा
कार कायम स्वच्छ लागायची तुला
मध्यंतरी नीट पुसली पण गेली नव्हती
त्यामुळे थोडी मळकी झाली होती
मधल्या काळात कोण कधी पुसते आहे इकडे कोणाचे लक्षच नव्हते
पुसायचे राहू दे ती गमती म्हणून किंवा तुझी आठवण म्हणून चालवायला सुद्धा कोणी तयार नाही
काल आधी स्वच्छ पुसून घेतली कार वॉश करणाऱ्या कडून
आणि छान मिलिटरी स्टाईल कव्हर मागवले आहे
उद्या घालून घेईन
म्हणजे थोडी intact तरी राहील
मला आठवते आहे
आपण ऍमेझॉन शॉपिंग खूप करायचो
अगदी चप्पल बूट पासून कपडे, रेनकोट, स्वयंपाक सामग्री, नाईट ड्रेसेस..
कुठलीही गोष्ट घ्यायची असे ठरले की तू मोबाईल घेऊन आधी सर्च करायचा
माझे ड्रेस ,त्यांची स्टाईल ,फॅशन, रंग
हे सगळं तू ठरवत होतास
मग मला दाखवली की मग त्यावर शिक्का मोर्तब व्हायचे
दर वर्षी शाकंभरी देवीला साडी घेताना मला पण एक रंग पसंत करायला सांगून माझ्या साठी पण खरेदी करायचा
कोणतीही वस्तु उत्तम असावी याकडे तुझा कटाक्ष असे
स्वस्त काही तुला पसंत पडत नसे
काही कपडे मला आवडले तरीही ते तुझ्या वयाला शोभणार नाहीत असे म्हणून तू कधी कधी reject पण करायचा
मलाही कधी त्यात काही वावगे वाटले नाही
तुझे कपडे बूट सिलेक्ट करताना सुद्धा तुला माझी चॉईस लागायची
जरी बाहेर दुकानात आपण शॉपिंग केली तरीही पसंती तुझीच असे
तुझी चॉईस खूप सुंदर होती
असे म्हणले की तू हसत म्हणायचा
म्हणून तर मी तुला पसंत केले
कपड्यांच्या बाबतीत सुद्धा ते वापरायचे तुझे हिशोब ठरलेले असत
एकदा एखादा कपडा अंगात घातला की तुझ्या मते दहा रुपये फिटले
अशा हिशोबाने त्याची किंमत वसूल झाली की ते कपडे द्यायला ठेवलेल्या गाठोड्यात टाकायचे
हाच हिशोब बूट व इतर गोष्टींना लागू होत असे
दर तीन महिन्यांनी जुनी भांडी वस्तु याचा पसारा आपण देउन टाकत असू
कपडे देताना सुद्धा स्वच्छ धुवून नीटनेटक्या घड्या घालून देण्याकडे तुझा कटाक्ष असे
आपल्या दोघांच्या कपड्यांचा वापर चांगला असल्याने
जरी द्यायला काढले तरी ते कपडे इतके चांगले असत
की सामाजिक काम करणारे आपले मित्र म्हणत
अहो किती छान कपडे का बरे देताय
तेव्हा माझे उत्तर असे
छान असताना असे कपडे देऊन टाकायचे म्हणजे घेणाऱ्याला बरे वाटते
आणि हे कपडे दिल्याने आम्ही पण नवीन कपडे नवीन फॅशन वापरायला मोकळे
जुने बूट चप्पल बाटल्या डबे आपण कित्येकदा जवळ बांधकाम चालू असणाऱ्या वॉचमन लोकांना देत असू पण त्यांनाही खूप देऊन झाल्यावर आपण त्या गोष्टी व्यवस्थित पिशवीत ठेवून दिसेल अशा अवस्थेत जवळच्या ओढ्याच्या कट्ट्यावर ठेवत असू
माझ्या किंमती साड्यांच्या बाबतीत मात्र तुझे मत अगदी वेगळे असायचे
इतर वापराचा नियम त्यांना नसायचा
कित्येक साड्या वर्षात एकदोन वेळच
नेसल्या जात
तेव्हा तू मला म्हणायचा तू देवी आहेस
देवी कधी एकदा नेसलेली साडी परत नेसते का..
अशा वेळी मला भारावल्या सारखे होत असे..
Kaushik Dave
मन की बातें मन में ही रह गए,
कुछ बातें बताई नहीं,
कुछ बातें सीधी-सादी थीं,
मन को उलझाने वाली बातें नहीं कहीं।
मन में कोई राज़ नहीं,
कोई पर्सनल डिटेल शेयर या बताई नहीं,
राज की बातें राज़ रखीं,
ज़िंदगी में चिंता नहीं लाई।
- Kaushik Dave
mohanmurarisharma
खूबसूरती का तो मोहन तूने क्या खूब भण्डार पाया..
मगर तू दिल ये अपना क्यों खूबसूरत लेकर नहीं आया ..
Gautam Patel
party song 🥳
Ravi
मालूम है मुझको अब वो दोर नहीं रहा ,
कि जब मन किया उससे राब्ता हुआ,
सारा दिन साथ बिताया फिर भी समय का एहसास ना हुआ,
मालूम है मुझको अब वो दोर नहीं रहा ।
उसे देखूं और बस निहारता रहूं,
जब मिलूं बस उसके ही अफसाने सुनूं ,
मालूम है मुझको अब वो दोर नहीं रहा ।
यूं रातों को जगना , फिर भी कुछ कहना बाकी रह जाना,
कुछ किस्सों का अनसुना रह जाना,
मालूम है मुझको अब वो दोर नहीं रहा ।
ओर अंत में...
ले जाते ख्वाब मुझको उस समय में वापिस,
जहां फिर से जी लेता उन पलों को थोड़ा रुककर,
पर जब आंख खुली तो खुद को यही कहता,
कि
मालूम है मुझको अब वो दोर नहीं रहा। 😂😂
Kamini Shah
અતીતની સ્મૃતિઓ આજ
યાદોને ઝૂલે
રમતાં હતાં બાણપણમાં
દોરડાને ઝૂલે…
-કામિની
Pragna Ruparel
જીવન
પિઝા આવે છે.ચોરસ બોક્સ માં.ખોલો તો ગોળ નીકળે છે.અને ખાતી વખતે ત્રિકોણ હોય છે.વિચારો મિત્રો,જીવન પણ આવું જ છેને?દેખાય તેવું છે,નહી!
જય સ્વામીનારાયણ.
Nandita pandya
"અમારી મોજ અને અંદાજ બંને નિરાલા છે,
કારણ કે આ "નંદુ" ના સ્મિત અને ઠાઠ રોયલ છે.
દિલની મીઠાશ ને અદામાં થોડો વટ રાખું છું,
હું નંદુ છું, બસ પોતાની ધૂનમાં દુનિયા જીતું છું!"
- Nandita pandya
Archana Singh
उम्मीद की लौ अब
लड़खड़ाने लगी हैं ...!
क्या कहूं दोस्तों ...!
अब हमारे खिलाफ़
हवाएं भी चलने लगी हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Shailesh Joshi
સારા બનતા બનતા કંઈ કેટલાય વિઘ્નો નડે છે,
અને એમાંથી ઘણા ખરા તો
અડધે રસ્તેથી પાછા પણ વળે છે,
ને એટલે જ એમને,
હથેળીમાં દીવો લઈને શોધવા પડે છે,
સારા માણસ એમ કંઈ રસ્તામાં થોડા મળે છે,
- Shailesh Joshi
Archana Singh
मेरे अंतर्द्वंद में
एक शोर सी चल रहीं हैं , और ...
चहुं ओर सन्नाटा छाईं हैं ...!
ज़िंदगी जाने तु मुझे फिर ,
ये किस मोड़ पर लाई हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Gautam Verma
ये जो समंदर-सा अहसास है,
इन नदियों के पास कहाँ।
ये तो घूमती है,
भटकती है,
गूंजती है,
फिर हवाओं को अपने में समाती है।
मुड़कर देखती भी नहीं,
टहलती जाती है एक ओर।
जो बसावटे हैं, उन्हें छोड़,
जो वनस्पति है, उन्हें छोड़,
आगे की ओर—जैसे कोई भागा जा रहा हो।
ये मिलना चाहती हो किसी जिम्मेदार से,
जैसे इनका कोई अपना बनाता हो।
इन्हें हवा में उड़कर मिलो दूर से,
जैसे कि समंदर तपकर उड़ता है
इन नदियों के लिए,
उन पहाड़ों पर जो बसे हुए हैं।
नदियों के ऊपर,
ये मंडराती हुई
मिलती है समंदर से—
जो खड़ा हो
जैसे सिर्फ इनसे मिलने पर।
समंदर तो खुद एक देवता है,
जिसमें खोज अभी बाकी है,
जिसकी पहुँच अभी बाकी है।
जिसकी लहरों में खुद संसार बसा है,
जिसकी ज़मीनें दुनिया को जोड़ती हैं,
और नदियाँ इसको पूजती हैं।
ये तो खारा है।
नदियाँ घूमती हैं।
नदियाँ मीठी हैं।
S K I N G
क़त्ल करती तो दुनिया की नज़र में आ जाती
समझदार मेहबूबा थी इश्क कर के छोड़ गई
khwahishh
"उफ़ ये अरमान भी क्या चीज होते है,
कितना बर्बाद करते है।
बस बेबात करते है।"
- khwahishh
MASHAALLHA KHAN
बदला नही था वक्त हम ही बदल गये
औरो के फासलो से हम तो सम्भल गये
तू इंतेकाम लेने आया है किस बात का
हम तो पहले ही कितना कुछ भुगत गये.
Dada Bhagwan
‘હે દાદા ભગવાન! તમે તો મોક્ષ લઈને બેઠા છો. અમને તમે મોક્ષ આપો. નહીં તો અમને નિમિત્ત ભેગું કરી આપો!’ આ પ્રાર્થનાથી આપણું કામ થઈ જાય! - દાદા ભગવાન
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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
देख बुढ़ापा पिता का, बन जाए सुत दण्ड। देख-भाल दिल से करे, करे न वह पाखण्ड।।
दोहा-- 406
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Renu Chaurasiya
माँ अक्सर चुप रहती है,
पर उसकी खामोशी खाली नहीं होती…
उसमें छुपे होते हैं
हज़ार सवाल,
लाख दुआएँ,
और अनगिनत त्याग।
वो कम बोलती है,
पर हर आहट पहचान लेती है।
बच्चे की आँखों की नमी,
आवाज़ की थकान,
दिल की उलझन—
सब पढ़ लेती है बिना शब्दों के।
माँ की खामोशी
कभी शिकायत नहीं करती,
बस चुपचाप
अपने हिस्से के दर्द
आँचल में बाँध लेती है।
जब दुनिया शोर मचाती है,
माँ की चुप्पी ही
सबसे सुकून भरी आवाज़ बन जाती है…
क्योंकि उस खामोशी में
सिर्फ़ प्रेम होता है—
निस्वार्थ, असीम और सच्चा।
kajal jha
बिहार: अतीत की गौरवशाली गाथा और भविष्य की अनकही कहानीबिहार:
अतीत की गौरवशाली गाथा और भविष्य की अनकही कहानी
बिहार—एक ऐसा प्रदेश, जिसका नाम आते ही लोगों के मन में अलग-अलग तस्वीरें उभरती हैं। किसी को यह इतिहास की भूमि लगता है, तो किसी को संघर्ष का प्रतीक। लेकिन सच्चाई यह है कि बिहार इन दोनों से कहीं अधिक है। यह वह धरती है, जिसने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता और लोकतंत्र का पहला पाठ पढ़ाया। बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक जीवित एहसास है—जो दर्द से गुज़रकर भी उम्मीद करना जानता है।
इतिहास की गोद में पला बिहार
बिहार का इतिहास इतना समृद्ध है कि उसके बिना भारत की कहानी अधूरी लगती है। यही वह भूमि है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया और पूरी दुनिया को अहिंसा व शांति का मार्ग दिखाया। यही वह जगह है जहाँ महावीर स्वामी ने जैन धर्म का प्रचार किया। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने उस दौर में शिक्षा का दीप जलाया, जब दुनिया का बड़ा हिस्सा अज्ञानता में डूबा हुआ था।
यहाँ की धरती ने चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे महान शासक दिए, जिनकी नीतियाँ आज भी अध्ययन का विषय हैं। लोकतंत्र की जड़ें भी यहीं से जुड़ी मानी जाती हैं। यह इतिहास बिहार को सिर्फ गौरव नहीं देता, बल्कि जिम्मेदारी भी देता है—कि वह फिर से अपनी पहचान को मजबूत करे।
संस्कृति जो आत्मा से जुड़ी है
बिहार की संस्कृति उसकी आत्मा है। यहाँ की परंपराएँ सादगी और गहराई से भरी हुई हैं। छठ पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ इंसान प्रकृति के सामने नतमस्तक होकर सूर्य को धन्यवाद देता है। यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि अनुशासन, शुद्धता और सामूहिकता का प्रतीक है।
भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका जैसी भाषाएँ यहाँ की संस्कृति को और समृद्ध बनाती हैं। लोकगीत, सोहर, कजरी, विवाह गीत—इनमें बिहार की खुशियाँ, दर्द और रिश्तों की मिठास झलकती है। गाँव की चौपाल, खेतों में काम करते किसान, और शाम को ढलते सूरज के साथ लौटते मजदूर—ये दृश्य बिहार की असली पहचान हैं।
संघर्ष: जो मजबूरी बना, लेकिन हार नहीं
बिहार का नाम अक्सर संघर्ष से जोड़ दिया जाता है। बेरोज़गारी, बाढ़, सूखा और पलायन—ये समस्याएँ वर्षों से यहाँ की सच्चाई रही हैं। लाखों बिहारी रोज़गार और बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घर-परिवार से दूर चले जाते हैं। कोई दिल्ली जाता है, कोई मुंबई, तो कोई पंजाब या खाड़ी देशों तक।
लेकिन यह पलायन कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का प्रमाण है। एक बिहारी जब अपना गाँव छोड़ता है, तो वह सिर्फ अपना सामान नहीं उठाता, बल्कि माँ-बाप की उम्मीदें, गाँव की दुआएँ और अपने प्रदेश का नाम भी साथ लेकर चलता है। यही कारण है कि देश के हर कोने में बिहारी अपनी मेहनत और ईमानदारी से पहचान बनाते हैं।
शिक्षा और मेहनत: बिहार की असली ताकत
अगर बिहार को सही मायनों में समझना है, तो उसकी शिक्षा के प्रति दीवानगी को समझना होगा। यहाँ एक साधारण परिवार का बच्चा भी बड़े सपने देखता है। वह कठिन हालात में भी पढ़ाई नहीं छोड़ता। प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार के युवाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यहाँ प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही।
IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक—हर क्षेत्र में बिहार के लोग अपनी छाप छोड़ रहे हैं। यह साबित करता है कि समस्या प्रतिभा की नहीं, अवसरों की रही है। अगर बिहार को सही दिशा और संसाधन मिलें, तो यह राज्य फिर से देश का नेतृत्व कर सकता है।
ग्रामीण बिहार: जहाँ सादगी बसती है
बिहार का असली चेहरा उसके गाँवों में बसता है। आज भी यहाँ रिश्तों में अपनापन है। पड़ोसी सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं। सीमित साधनों के बावजूद, लोग दिल से अमीर हैं। गाँव की सुबह मुर्गे की बाँग से शुरू होती है और रात लालटेन की रोशनी में कहानियों के साथ खत्म होती है।
खेती आज भी यहाँ की रीढ़ है। किसान मौसम की मार झेलते हैं, फिर भी उम्मीद नहीं छोड़ते। हर नई फसल के साथ वे एक नए सपने को बोते हैं—कि आने वाला कल बेहतर होगा।
बदलता बिहार: उम्मीद की नई किरण
आज बिहार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सड़कों, पुलों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में धीरे-धीरे सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है। युवा अब सिर्फ सरकारी नौकरी के सपने तक सीमित नहीं, बल्कि स्टार्टअप, स्वरोज़गार और नए विचारों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
डिजिटल दुनिया ने बिहार के युवाओं को एक नया मंच दिया है। अब छोटे शहरों और कस्बों से भी प्रतिभा सामने आ रही है। यह बदलाव भले ही धीमा हो, लेकिन स्थायी है।
बिहार की सबसे बड़ी पूँजी: उसका युवा
बिहार का युवा आज सवाल करता है, सोचता है और बदलाव चाहता है। वह अपने राज्य को पिछड़ा कहलाते नहीं देखना चाहता। उसके भीतर गुस्सा भी है और जुनून भी। अगर इस ऊर्जा को सही दिशा मिले, तो बिहार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
निष्कर्ष
बिहार को सिर्फ उसकी समस्याओं से नहीं, उसकी संभावनाओं से पहचाना जाना चाहिए। यह वह धरती है जिसने अतीत में दुनिया को रास्ता दिखाया और भविष्य में भी दिखा सकती है। बिहार दर्द से गुज़रा है, लेकिन टूटा नहीं है। उसकी मिट्टी में आज भी संघर्ष से जन्मी उम्मीदें सांस लेती हैं।
बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं—यह एक भावना है, एक पहचान है, और एक सपना है, जो आज भी बेहतर कल की तलाश में ह
Raa
mere har bar ye line jarur padata hu
Imaran
किसी आशिक़ ने Kiya खूब कहा है,
Khamoshi को इकतियार कर लेना,
Apne #DiL💔 को बेकरार कर लेना,
Jindegi का असली #_Dard💔 लेना हो तो,
किसी से बेपनाह #Pyar💖 कर लेना
🫶imran 🫶
Jyoti Gupta
#AnandDham
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Ghanshyam Patel
वही रहना सीखिये ______
जहाँ तुम्हारी उपस्थिति मायने रखती हो ।
Deepak Bundela Arymoulik
तेरी यादें तुझसे मिलने को मजबूर करती हैं... I
मेरी हसरते देहलीज पर तेरी रोज मरती हैं... II
Yamini
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Std Maurya
"उगता हुआ सितारा हूँ, बुराइयाँ तो होंगी;
मशहूर थोड़ी हूँ जनाब, जो तालियों की शोर होंगी।"
- Std Maurya
Yamini
Pencil Sketch
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P.YBS
Yamini
Pencil Sketch
Art By,
P.YBS
Parmar Mayur
शहर की एक होटल में न्यूज चैनल पर
देश-के बजट पर तू-तू मैं-मैं हो रही थी,
सब देखें रहे थे।
इसी समय पर कुछ भूखे बच्चे कुछ खाना मिल जाए,
उस आशा से बहार खड़े खड़े देख रहे थे ।
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ख़ास
कोई मेरा पूछे तो कहना ख़ास नहीं हूँ l
किसी भी जवान दिल की आश नहीं हूँ ll
लोगों को दिखाने को नज़दीक आया था l
जितना दिखता हूँ उतना भी पास नहीं हूँ ll
जरा सी बात रूठ के जाने की बातों से l
गभरा के रुकने जाने वाली साँस नहीं हूँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
S Sinha
" If you don't read the newspaper you are uninformed ,
If you read the newspaper you are misinformed. "
Mark Twain
Meghna Sanghvi
ઉઠીને તરત તને યાદ કરવો, મારા જીવનનો એક ક્રમ બની ગયો છે.
કદાચ એવું બને કે, તારી યાદ વગર
મારી સવાર જ ન પડે.
હું ભલે દુનિયાના કોઈપણ ખૂણે જઈ આવું પણ તારી જગ્યા મારા હ્રદયમાં ખુબ ખાસ છે
😊😊😊
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/__bx03aDXCM?si=6FiN_XaYDHQhgb6N
महेश रौतेला
ध्रुव ने तपस्या की
और ध्रुव पद पाया,
सिद्धार्थ ने तप किया
ज्ञान पा मोक्ष पा लिया,
हम आजीविका कमाते-कमाते
तप गये,
प्यार को पकड़ न सके
समता पर झगड़ न सके,
शुद्ध समयवादी होकर
समय पर लटक लिये।
*** महेश रौतेला
Nadwika
उन्माद.......
जीवन एक सत्य है,
और अनुराग-विरह... उसकी सत्यता।
किसी के मोह में पड़कर मौन हो जाना,
मुझे एक निशीथ रात्रि में
प्रकाश की चाह रखने वाले
किसी उन्माद से कम नहीं लगता।
- नद्विका
Sanket Gawande
मनचला सा दिल है मेरा, हवाओं से बात करता...
मनचला सा मन है मेरा, हर ख़्वाब में रात करता...
मनचली सी क़िस्मत मेरी, कभी नज़्म कभी शोर...
मनचली सी हैसियत मेरी, आज कहीं कल कहीं और....
मनचला सा मुसाफ़िर हूँ... नक़्शों से बे-ख़बर....
मनचला सा राहगीर हूँ....हर मोड़ पे बे-सफ़र....
मनचली है दुनिया मेरी, रंग बदलती हर घड़ी.....
मनचली सी आदत मेरी, टूटना फिर से जुड़ पड़ी.....
मनचला सा हाल है मेरा, सवालों में गुमशुदा.....
मनचला सा दिल है मेरा, ख़ुद से ही हमक़दा....
मन चले तो क्या गिला हो, ये तो दिल की सरकशी है....
मन न चले तो समझो अब, नई दुनिया की बुनियाद रखी है...
-संकेत गावंडे
aakanksha
ख़ामोशी की स्याही में
लिखी जाती हैं बातें अधूरी,
हर दर्द को पन्नों पर सजाया जाता है,
पर अपनी आवाज़ कभी न उभरती…
हर शब्द में उम्मीद,
हर चुप्पी में शक्ति…
और हर नीले काग़ज़ के पीछे,
छिपा है एक सपना,
जो एक दिन खुद को पन्नों में नहीं,
ज़िंदगी में लिख देगा। 💙✍️
ziya
कभी सुबह यादे आते हो तो
कभी शाम को यादे आते हो
आईने मे खुद को देखु तो
तुम यादे आते हो
Bhavna Bhatt
ચેહર મા નો માંડવો
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