Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
રોનક જોષી. રાહગીર
શું ક્યારેય દરિયાના કિનારે બેસીને તમે વિતેલી ક્ષણોને ફરી જીવવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે? જ્યારે રેતી પર લખેલા નામ ભૂંસાઈ જાય છે, પણ હૃદયની ભીની માટીમાં એ સ્મરણો કાયમી અંકાઈ જાય છે.
આ ગઝલ વિરહ, મૌન અને અધૂરી આશાઓની એક એવી સફર છે જ્યાં 'રાહગીર' પોતાની જિંદગીના કિનારે ઊભા રહીને વીતેલા સમય સાથે સંવાદ કરે છે. દરિયાનું મૌન, આથમતો સૂરજ અને પાંપણે આવીને અટકેલી વાતો—આ ગઝલનો દરેક શેર એક અલગ વેદના અને ગહનતા રજૂ કરે છે.
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રોનક જોષી 'રાહગીર'.
મારા ફેસબુક પેજની લિંક ઓપન કરી માણો મારી સંપૂર્ણ ગઝલ.
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Abha Dave
महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🙏🏻
हाइकु - महावीर जयंती पर
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1)थे वर्धमान
राजा सिद्धार्थ पुत्र
माँ थी त्रिशाला।
2) नाम अमर
वर्धमान से स्वामी
हैं महावीर ।
3)महावीर जन्म
चैत्र मास शुक्ल पक्ष
थी त्रयोदशी।
4)हैं तीर्थंकर
चौबीसवें महान
पाया है मान।
5)केवलज्ञान
कठिन तप फल
शांति का पल।
6)सत्य अहिंसा
उपदेश है न्यारा
मार्ग है प्यारा
7) नैतिक पाठ
पंचशील सिद्धांत
बनाए शांत।
8)महान ज्ञानी
थे महावीर स्वामी
दुनिया मानी।
9)क्षमाशीलता
धर्म है मैत्री भाव
भरते घाव।
10)तप है धर्म
उसी संग सत्कर्म
छुपा है मर्म।
11)प्रेम -करुणा
प्रवचन का सार
जीवनाधार।
12)जन कल्याण
जन्मे थे महावीर
पाया निर्वाण ।
आभा दवे
मुंबई
kattupaya s
அன்பு நண்பர்கள் அனைவருக்கும் வணக்கம். என்னுடைய தமிழ் நாவல் நிழல் தரும் வசந்தம் நாளை முதல் matrubhartiயில் வெளியாக உள்ளது. உங்கள் அன்பு மற்றும் ஆதரவு எப்போதும் எதிர்நோக்கும்.. kattupaya s
Sneha Gupta
एक शिक्षक का रूप – एक सच्चा स्वरूप,
हर व्यक्ति का आधार, जीवन का स्तंभ, और मृत्यु का शंख।
कभी आँसुओं की बाढ़, कभी गर्व का मंज़र,
हर नायाब खेल का स्तंभ है।
वक्त है – इसे रेत का नाम।
गिरी से रौड़ा या कंकड़ से धराधर,
हर ओर इसका वर्चस्व है।
जीवन का पतन या उत्थान,
पल-पल गिरता, झर-झर बहता,
हर रंग जीवन के आलिंगन करता।
महारथी सा अद्भुत है, सबको नाचना चाहता है।
समय है – इसे सम्राट का नाम।
Written by: Sneha Gupta
Jyoti Gupta
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Mare Do Alfaz
रात और ख्वाब की, जो मिलावट है....
सच पूछो तो यही,
मोहब्बत की सजावट..
मेरे दो @ल्फाz..
AbhiNisha
कविता रोने की आजादी है
जब रोने का जी करें
तो रो लो
ठहरे हुए आंसू आंखों में रहकर
जहर बन जाएंगे
इससे पहले रो लो
जी भर रो लो
इससे पहले की तुम्हारा जी किसी को मारने के करें
रो लो
जब रोने का जी करे तो रो लो
इससे पहले की तुम्हें
जग के साथ-साथ खुद से नफरत हो जाए
रो लो
तुम्हारा दर्द तुम्हें खो जाए
इससे पहले तुम रो लो
जी भर रो लो
दुनिया भर के गम लेकर
तुम लाचार हो यह भरम लेकर
तुम खुद के नशे काटो
इससे पहले रो लो
रोने से शायद तुम हल्का महसूस करोगी
इसलिए रो लो
जी भर रो लो
चेक चेक कर रो लो
हां तुम रो लो
सायद रोने से मन में बिछे नफरत काम हो जाए
इसलिए रो लो
शायद रन के बाद जीने का इच्छा करें
इसलिए रो लो
शायद रन के बाद जीने की कोई उम्मीद मिल जाए
इसलिए रो लो
जी भर तुम रो लो
सारे थकान खत्म हो जाएंगे
इसलिए रो लो
तुम रो लो जी भर रो लो
जिंदा रहने के लिए
घुट घुट कर कब तलक जिओगे
जो जहर है दिल के अंदर वह बाहर निकालो
खुद से भी बोलो
अगर कोई नहीं है सुनने वाला
खुद के जख्मी दिल को डटोलो
और जी में जो आए बोलो
तुम रो लो
खुद को तुम प्यार से सहलाओ
खुद को तुम खुद ही गले लगाओ
और खुद को और रोने दो
दर्द थोड़ी कम होंगे
और तुम फिर से मुस्कुराने के लिए नज़रें उठा होगी
शायद और ज्यादा मुस्कुराओगी
हां तुम रो लो
जब तक जी चाहे रो लो
किसी चीज की आजादी हो या ना हो
तुम्हें रोने की आजादी है
तुम रो लो
जी भर रो लो
और फिर आओ उठो
और खुद को संभालो
रहा लंबी है दर्द गेहरा है
फिर भी चलना है
डगमगाते कदम लेकर
कापते बदन लेकर
रोते हुए तुम्हें खुद को संभालना है
हां तुम रो लो
पर खुद को संभालो
रोने की आजादी है
तुम रो लो
जी भर रो लो
आगर ऐ कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯
Mara Bachaaaaa
सारे सवालों के जवाब
तब मिले,
अहमियत में उनकी जब
हम ना मिले।
- Mara Bachaaaaa
Anjana A Kulkarni
Please read, it's my first novel and I am waiting for all your valuable support and feedback
Rupal Jadav
First Gazal Album Will Be Out Tomorrow ............
kashish
socha bol du dil ki baate ...
khe du jo bhi hai mere man mai uske liye jgha...
mujhe lagata tha uske liye bhi hai meri trah tbhi to ham dur hoker bhi sath the ...
lekin jab bola tab uska mana tha
shayad mai hi karti thi use vo nhi karta tha lekin fir usene dikhaya khu vo bhi karta hai ....
29/3/26 last time pata nhi ab mile ge bhi ya nhi ....
by kashish
Sudhir Srivastava
चौपाई - आस
इक रोटी की आस लगाई।
राह ईश ने उसे दिखाई।।
तड़प भूख की रुला रही है।
मुख पर बड़ी वेदना भी है।।
लिए एक उम्मीद मैं आई।
भूख हमें है विवश कराई।।
तुम हमको दुत्कार न देना।
जीवन नैया द्वय की खेना।।
नहीं माँगती धन दौलत वो।
भूख पेट से व्याकुल है वो।।
नहीं तोड़िए उसकी आशा।
दूर करो बस आप निराशा।।
तेरे द्वारे वो है आई ।
वो भी तो इक माँ है भाई।।
आँसू जैसे पिए हुए है।
मन में ढेरों आस लिए है।।
*******
चौपाई - जग
समझो जग की माया भाई।
सुख-दुख की सब यहां मिठाई।।
जिसने जग को जान लिया है।
नव जीवन पहचान दिया है।।
यह जग सारा बड़ा निराला।
मुखड़ा उजला दिल है काला।।
आओ इसमें हम रम जाएं।
राजनीति में नाम कमाएं।।
इस जग का इतिहास पुराना।
रहे बताते दादा नाना।।
हमको अपना फर्ज निभाना।
जग के सुंदर गीत सुनाना।।
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चौपाई - गुणसागर
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खुद को मत कहिए गुणसागर।
भेद नहीं तुम करो उजागर।।
अपनी छवि मत आप गिराओ।
मूर्ख नहीं बन काम बनाओ।।
जितने भी दिखते गुण सागर।
कभी भरी नहिं उनकी गागर।।
लिए घड़ा वे घूम रहे हैं।
मुँह काला वे आप किए हैं।।
सुधीर श्रीवास्तव
वात्सल्य
લોકો એને આંગણે વધુ આવે છે જે પરોપકારી હોય.બાકી સ્મશાને તો મડદા જ જાય.તમને કોઇ એવું આવતું હોય મળવા જેને સ્વાર્થ જ ન હોય.એમને માત્ર તમારું નિરાળું વ્યક્તિત્વ જ ખેંચી લાવતું હોય છે.અને એજ સાચો તમારો ચાહક હોય કે સાચો મિત્ર છે,અન્યથા આ જગતમાં કોઇ કોઇ ને મળવા સાતમા આસમાન-પાતાળે સ્વાર્થ હશે જ. - વાત્સલ્ય
Sudhir Srivastava
यमराज का ट्रंप को श्राप
*******
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले
और वहाँ के राष्ट्रपति को पत्नी के साथ
अलोकतांत्रिक ढंग से अपराधियों की तरह
बलपूर्वक बंधक बनाकर अमेरिका लाने की
खबर आने के बाद मित्र यमराज को बड़ा गुस्सा आया।
बिना सोचे विचारे वो सीधे व्हाट्स हाउस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया,
जो मुँह में आया-जमकर सुनाया, फिर धमकाया
ट्रंप तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।
शान्ति का नोबेल पुरस्कार भी चाहने की छटपटाहट में
तू सारे अलोकतांत्रिक काम करता है।
कहने को तो तू शाँति का मसीहा बनता है
पर दुनिया जानती है, कि तू हर ओर युद्ध ही चाहता है।
अपने हथियारों का बड़ा बाजार बनाये रखने की जुगत में
दुनिया के अलग-अलग देशों को
आपस में लड़ाते रखना चाहता है।
दूसरे देशों में अपरोक्ष अतिक्रमण की आड़ में
सबसे बड़ा लंबरदार बनने की चाह में
तेल, गैस, खनिज, स्वर्ण भंडार पर एकाधिकार चाहता है।
दोहरे मापदंड अपनाकर खुद को महान बताता है,
समूचे विश्व का नायक बनना चाहता है,
अपना व्यवसाय चमकाना
बेटे को स्थापित करना चाहता है।
पर तेरा ये सपना कभी पूरा नहीं होगा,
अब मैं यमराज! आज तुझे श्राप देता हूँ,
क्योंकि तू अपने देश और नागरिकों से भी
विश्वासघात के नित नए आयाम गढ़ता है।
आखिर तू खुद को क्या समझता है?
लगता है कि तू एकदम पागल हो गया है,
तू लाख कोशिश कर ले, चाहे जितना हाथ पाँव मार ले,
खुद को खुदा ही क्यों न समझ ले,
तू निश्चित ही हारेगा और एक दिन सिर पकड़ कर रोयेगा,
अपने अधर्म -कर्म के लिए पछताएगा
अपनी सोच पर रोएगा, आंसू बहाएगा।
आखिर तू भी तो महज एक इंसान हैं
आज़ अमेरिका का राष्ट्रपति है, हमेशा तो नहीं रहेगा,
तब तू खौलते दूध में आये उबाल बाद
शांत हो जाने की तरह जल्दी ही बैठ जायेगा,
तब विश्व ही नहीं तेरा देश भी तुझे भाव नहीं देगा,
क्योंकि तू तो क्या हर कोई मेरे कोप से डरेगा।
वैसे भी सत्ता का घमंड एक दिन उतर ही जायेगा
जब तेरा कार्यकाल पूरा हो जाएगा,
और तेरे नोबल पुरस्कार का पाने सपना
दिवास्वप्न बनकर रह जायेगा,
क्योंकि यह यमराज का श्राप है
जो कभी खाली भी नहीं जायेगा।
और जो मुझे उकसाएगा
वो एक जन्म ही नहीं दो-चार जन्मों तक पछताएगा,
पर मेरा वो कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा,
तू भी एक कोशिश करना चाहे, तो जरूर कर ले
क्या पता तेरा जलवा यमलोक में भी बढ़ जाए,
और तू मेरे श्राप का तोड़ निकाल ले जाए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - गर्मी
ऐसा कुछ उपाय अपनाओ।
दुविधा से तुम बाहर आओ।।
कोई भी उपाय अपनाओ।
गर्मी को यूँ मार भगाओ।।
रंग आधुनिकता का छोड़ो।
गाँवों से मुँह कभी न मोड़ो।।
खाली जगहों पर वृक्ष लगाओ।
हरियाली से लगन लगाओ।।
भोजन सादा ठंडा पानी।
जीवन की हो सुखद कहानी।।
प्रकृति से सब नाता जोड़ों।
मूल को अपने कभी न छोड़ो।।
जल्दी सोना जल्दी उठना।
शौच बाद कुछ आप टहलना।।
प्रकृति से अपना नाता रखना।
इससे दूर कभी मत होना।।
सरल सहज जीवन अपनाओ।
व्यर्थ नहीं तनाव में आओ।।
निज जीवन संयमित बनाओ।
गर्मी को यूँ मार भगाओ।।
सुधीर श्रीवास्तव
ziya
thank you so muchhh all gusy
Anghad
વહાલા વાંચક મિત્રો મારી નવી સિરીઝ આજે જ શરૂ થઈ છે જરૂર થી વાંચજો અને વંચાવજો
https://www.matrubharti.com/book/19991020/kaalchakra-1
Anjana A Kulkarni
Sometimes, it's not motivation but a wounded ego that pushes us to become better than we ever were.
Shivraj Bhokare
"मेरी खामोशियों को लफ़्ज़ों का लिबास मिल गया,
कलम पकड़ी तो जीने का एक एहसास मिल गया,
लोग ढूँढते रहे सुकूँ महफ़िलों के शोर में,
मुझे तो सादे कागज़ों में सारा जहान मिल गया।"
Shivraj Bhokare
"मेरी हर अधूरी नज़्म का तू ही खूबसूरत अंजाम है,
मेरी कोरी डायरी के हर पन्ने पर बस तेरा ही नाम है।
लिखने बैठूँ जो इश्क़, तो स्याही कम पड़ जाती है,
शायद मेरी कलम को भी तुझसे मोहब्बत तमाम है।"
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Shivraj Bhokare
तन्हा नहीं हूँ मैं, महादेव का साथ है,
मेरे सिर पर रखा मेरे भोलेनाथ का हाथ है।
चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ राह में,
जब शिव साथ हैं, तो डरने की क्या बात है?"
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- Shivraj Bhokare
Shivraj Bhokare
तलवार की धार से नहीं, मैं कलम की नोक से लड़ता हूँ,
हवाओं के रुख के खिलाफ अक्सर मैं ही खड़ा होता हूँ।
मशहूर होने का शौक नहीं मुझे ज़माने में,
बस हक की बात को बेबाकी से कागज पर उतरा करता हूँ।
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Shivraj Bhokare
शेर के पाँव में अगर कांटा चुभ जाए,
तो इसका मतलब ये नहीं कि अब कुत्ते राज करेंगे।
वक्त बुरा हो सकता है मेरा, लेकिन याद रखना,
मैदान में वापसी हम धमाके के साथ करेंगे।
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Piyu soul
तेरी मुस्कान से रोशन मेरा जहाँ हो जाता है,
तेरे ख्यालों में ही मेरा हर अरमान सज जाता है।
न जाने कैसी ये मोहब्बत की आदत लगी है,
तू दूर हो फिर भी दिल तेरे ही पास रह जाता है। 🌸
Dhamak
અંધારામાં દબાયેલા એ સત્યો મને જગાડે છે,
કંઈ પણ બોલ્યા વગર ઘણું સમજાવે છે.
ઈચ્છાઓના આ વળાંક પર હું શું શોધી રહી છું?
ખબર નથી કેમ હું આમ એકલી ભટકી રહી છું?
દમ ઘૂંટાય એવી આ જગ્યા, હૈયું પથ્થર જેવું થયું,
પ્રેમ બધો સૂકાઈ ગયો ને મન તલવાર જેવું થયું.
નીકળી પડી છું એવા રસ્તે જ્યાંથી પાછું નથી વળવું,
ભલે ગમે તે થાય, હવે મારે નથી ડરવું.
નસીબના આ ખેલમાં હું સપનાઓ પાછળ દોડું છું,
જે મારા નથી કદી, એને જ હું ઝંખું છું.
આભમાં બહુ ઊંચે ઊડીને યાદોમાં ખોવાઈ જાઉં,
વેરવિખેર યાદોમાં મારી જાતને હોમી દઉં.
લાગે છે કે હારી ગઈ, પણ ખેલ હજી બાકી છે,
સત્ય બહાર લાવવાની એક વેળા હજી બાકી છે.
જ્યારે હકીકત સામે આવશે ત્યારે આ દુનિયા જોશે,
સત્તાના આ કિલ્લાઓ પળવારમાં નીચે પડશે.
હીના ગોપીયાણી
Rajeev Namdeo Rana lidhori
*आकांक्षा पत्रिका के 2026 हास्य_व्यंग्य विशेषांक हेतु रचनाएं #सहयोग_सहित सादर आमंत्रित हैं :-*
टीकमगढ़ जिले से विगत 20 साल से नियमित प्रकाशित एकमात्र साहित्यिक पत्रिका *आकांक्षा* के *हास्य-व्यंग्य विशेषांक* हेतु रचनाएं सहयोग सहित सादर आमंत्रित हैं -
*प्रमुख शर्तें :-*
1- एक रचना किसी भी विधा आधिकतम(14 पंक्तियां) *सहयोग -200 रुपए* बिना फोटो के एक रचना प्रकाशित की जाएंगी
2- दो रचनाएं किसी भी विधा अधिकतम(14 पंक्तियां) सहयोग -300 रुपए *फोटो_सहित दो रचनाएं* प्रकाशित की जाएंगी
3- *बिना सहयोग राशि के रचनाएं प्रकाशित करने में हम *असमर्थ* हैं। प्रकाशित होने पर एक प्रति *निःशुल्क* भैंट की जाएगी।
*आपको होने वाले कुछ #प्रमुख_लाभ:-*
आपकी रचनाओं को 102 देशों के लगभग *सात लाख* के अधिक पाठक *सोशल_मीडिया* के विभिन्न प्लेटफार्म में पढ़ेंगे तथा लगभग 20 देश की प्रतिष्ठित *लाइब्रेरियों* सहित 40 पत्र- पत्रिकाओं के *संपादकों* तक पहुंचेगी आपकी रचना। 'आकांक्षा' की अनेक विद्वानों द्वारा समीक्षा की जाती है। आपको टीकमगढ़ में समय समय पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों व कवि सम्मेलनों में आमंत्रित कर सम्मानित भी किया जाएगा।
-आपकी *बुंदेली* रचनाओं को देश की पहली बुंदेली में प्रकाशित *#अनुश्रुति* त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका में फोटो सहित *निःशुल्क* प्रकाशित किया जाएगा तथा उसकी पीडीएफ फाइल भी *#निःशुल्क* भेजी जाएगी।
तो फिर देर किस बात की शीघ्र ही मोबाइल -9893520965 पर *#फोन_पे* से पहले सहयोग राशि भेजकर स्क्रीन शाट भेजे फिर *व्हाट्स_ऐप* पर अपनी रचनाएं व फोटो भेजे अधिक जानकारी के लिए समय-रात दोपहर-2-5 एवं 8-10 के बीच मोबाइल से संपर्क कीजिए।
*अंतिम_तिथि:-*
कृपया सहयोग राशि एवं रचनाएं *20 अप्रैल 2026* तक अवश्य भेज दीजिए।
***
✍️ *राजीव नामदेव"राना लिधौरी"*
संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक-'अनुश्रुति'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
*टीकमगढ़* (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
known stranger
लुफ़्त-ए-क़ुर्बत-ए-यार का हमसे आलम ना पूछिए
हम फिर हम नहीं रहते खुदा का गुमान रखते है
- नोन
Anup Gajare
"दूर कही जब"
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तुम्हें देखना चाहता था
हरे रंग की सारी में
बेलों का पल्लू ओढ़कर
किसी मजबूत तने सी।
तुम्हारी नाभी कि
खोह पर मरते था
किसी को क्या पता
कितना अंधकार उसीस्थान से जन्म लेता रहा।
दूर तक फैलें नीले
रंग में डूबी तुम्हारी
हरे रंग की आंखें
जिसमें मेलोलिन
की कमी थी
बस उसी हिस्से में
मैं मुसाफिर दुबक बैठा था
दुबक बैठा था किसी कीट की तरह।
जल प्रपात में
बहता हुआ सामान्य
जीवन जीना चाहता था
तुम्हारे संग
बस एक छोटा रोजगार
उतना ही छोटा घर
उसके आंगन में झाड़ू लगाती
तूम!
कितना सूक्ष्म
सपना था ये
क्या पता था
कभी तो
नींद खुल जाएगी,
प्रिये
तूम इंतज़ार मत करना
अब मैं मुचकुंद के
वरदानी निंद्रा से बाहर
आ गया हु,
सामने वासुदेव खड़े है
मुझे नहीं पता वे कौन हैं
उनकी दिव्यता में डूब रहा हु।
उनका इंतजार करती
कोई थी
या शायद है
तुम्हारी तरह
वृंदावन के किसी अरण्य में
इंतजार करती हुई
उनके पहले उसका
नाम आ जाता है।
विरह मीठा है
या उसका कोई स्वाद ही नहीं है।
फिर भी
कभी-कभी
रात के तीसरे पहर में
जब नींद का जल
धीरे-धीरे उतरता है
और चेतना की रेत
नंगी होने लगती है,
तब
तुम्हारी वही हरी साड़ी
किसी वृक्ष की छाल की तरह
मेरे भीतर उग आती है।
मैं छूना चाहता हूँ उसे
पर उंगलियाँ
काई से ढकी किसी स्मृति पर
फिसल जाती हैं।
तुम्हारी हँसी
अब किसी ध्वनि की तरह नहीं
बल्कि
एक अधूरी प्रतिध्वनि है
जो गूंजती नहीं—
बस ठहर जाती है
सीने के किसी अंधे कुएँ में।
मैंने सोचा था
जाग जाना ही मुक्ति है
पर यह जागना भी
एक और प्रकार की नींद निकला—
जहाँ
तुम नहीं हो
पर तुम्हारा न होना
हर जगह उपस्थित है।
वासुदेव की आँखों में
जब भी झाँकता हूँ
तो एक क्षण के लिए
तुम्हारी परछाई
जल पर बनती है
और उसी क्षण
टूट भी जाती है।
क्या तुम वही थी
जिसे मैं प्रेम कहता था?
या तुम वह द्वार थी
जिससे गुजरकर
मैं इस अनंत रिक्ति में आ गिरा?
अब
जब कोई नाम लेता है तुम्हारा
तो वह नाम
शब्द नहीं रहता
एक धीमा कंपन बन जाता है
जो
हड्डियों तक उतर जाता है।
मैंने त्याग दिया है
तुम्हें पाने का स्वप्न,
पर तुम्हें खोने की प्रक्रिया
अभी भी जारी है।
और शायद
यही विरह है—
न मिलना नहीं,
न खोना,
बल्कि
दोनों के बीच
अनंत समय तक
लटका रहना।
कभी सोचता हूँ
यदि फिर से
वही छोटा सा घर मिले,
वही आँगन,
वही झाड़ू लगाती हुई तुम—
तो क्या मैं
वापस चला जाऊँगा
उस सरल अज्ञान में?
या
यह जानकर भी
कि वह सपना है,
मैं फिर से
उसी में डूबना चाहूँगा?
उत्तर नहीं मिलता।
बस
एक शांत स्वीकृति है—
कि तुम
अब कोई स्त्री नहीं,
न ही कोई स्मृति,
तुम
एक अवस्था हो
जिसमें
मैं कभी था,
और अब नहीं हूँ।
और शायद
इसीलिए—
विरह का कोई स्वाद नहीं होता,
क्योंकि
वह स्वयं ही
स्वाद लेने वाला
हो जाता है।
_______________________________________________
Anish
तुम जिसे होशियारी समझते हो उसे बेवफाई कहते है।
Maulik Patel
એક સાંજે એની પાસે,
શાંત મને ઝરણાં પાસે,
વાતો કરું હૃદય સાથે,
અને માથું મૂકું એના ખભા પાસે.
Soni shakya
समय निकलने के बाद,
दी हुई अहमियत की कोई कीमत नहीं..
🥀🥀🥀🥀
- Soni shakya
Kaushik Dave
આ દેહ છે જૂનું ભાડાનું મકાન, એનો ભરોસો ના કરશો,
આત્મા તો છે અમર અવિનાશી, એનો જ સંગાથ ધરશો.
ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો...
ઘડીક અહીં તો ઘડીક ત્યાં, આ પંખીનો છે મેળો,
આજે અજવાળું કાયામાં, કાલે અંધારાનો છેડો;
શ્વાસ ખૂટે ને પાંજરું છૂટે, મિથ્યા છે આ અભિમાન.
ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો...
ચોળાશે ચામડી ને અટકી જશે આ કાયાની માયા,
જેને પાળ્યું પોષ્યું રાત-દિન, એ તો છે બસ છાયા;
રામ નામની લગની લગાડી, ભજવા શ્રી રામ ભગવાન.
ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો...
જૂનું વસ્ત્ર તજીને આત્મા, નવું રૂપ જો લેશે,
કર્મ તણી આ પોટલી લઈને, નવો જ મારગ ખેડશે;
સેવા-સ્મરણમાં વિતાવો જીવડા, ધરજો પ્રભુનું ધ્યાન.
ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો...
દેહ છે કૌશિકનો પણ આત્મા અજરામર છે
ઈશ્વર કહે કે જૂનું છે ઘર ને નવી આત્મા છે.
- કૌશિક દવે
Chaitanya Joshi
જીવતે જીવ કદર નૈ કરે એ આ સમાજ છે.
મોઢે વખાણીને સળી કરે એ આ સમાજ છે.
દાઝ્યા ઉપર મલમ લગાડશે નહીં કદી પણ,
ઘા ઉપર મીઠું ભભરાવે એ આ સમાજ છે.
ખુશી તમારી જોઈને ઘા પણ ખોતરી જાણે,
ખરાખરીમાં જે મોઢું ફેરવે એ આ સમાજ છે.
નમતા પલ્લે બેસવાની છે આદત એને વર્ષોથી,
લાભ ખાટવા ગમે તે બોલે એ આ સમાજ છે.
કાચીંડાનું લેટેસ્ટ વર્ઝન જોવાની કોઈ જરૂર નૈ ,
બધાની હાજરીમાં રાજ ખોલે એ આ સમાજ છે.
-ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
kattupaya s
Please read and expecting your valuable feedback.
Chaitanya Joshi
હાથમાં લઈને કરતાલ એ હરિ ને જગાડતો.
પદો પોતાનાં પ્રેમથી એ હરિને સંભળાવતો.
શેષશાયીની નિદ્રા તૂટતી જ્યાં એ પોકારતો,
હડી કાઢે હરિ જ્યાં નરસિંહ આભ ગજવતો.
વ્યસન હરિને નરસિંહના ભજનનું પડી ગયેલું,
એને ક્યાં હતા પારકા પોતાના સૌને સમજતો.
હરિ થતા વ્યાકુળ જો નરસિંહ ના સંભળાતો, પ્રભાતના પહોરથી પ્રભુને દિનરાત એ પ્રાર્થતો.
ત્યજીને ક્ષીરસાગર નરસિંહના રુદે હરિ વસતા
હાકલ હરિને કરી પછી પ્રતિચારને એ સુણતો.
-ચૈતન્ય જોષી .'દિપક' પોરબંદર.
kattupaya s
Good morning friends.
My new tamil novel " nizhal tharum vasantham" is going to be published on 1/4/2026 on matrubharti.expecting your love and support. "நிழல் தரும் வசந்தம்"
Shailesh Joshi
ગમતું વ્યક્તિ શોધવાની અને એની સાથે સંબંધો મજબૂત બનાવવા માટેની સરળ રીત
જુઓ આ ફેસબૂક motivation રીલ
https://www.facebook.com/share/r/183wgLJQGF/
Anjali Singh
"तू मिले तो दिन बन जाए,
ना मिले तो भी तेरा ही ख्याल आए…
अजीब सा रिश्ता है तुझसे मेरा,
दूर रहकर भी तू हर पल पास नजर आए…" 💫
akhil kumar
मैंने शिव को देखा 🙏
ऊं नम शिवाय
Mamta Trivedi
ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं कविता का शीर्षक है 🌹
https://youtube.com/watch?v=0sQN7u_H2Jc&si=P4SjsEr6xGejLJ_s
Saliil Upadhyay
मैं अपनी बराबरी किसी से नहीं करता....
जैसा भी हुं बेहतरीन हुं।
अकेले खड़े होने का साहस रखता हुं क्युकी मुझे पता है दुनिया ज्ञान देती है साथ नहीं...।
खुश रहो और मस्त रहो🌹
Archana Singh
" रिश्ते कभी बोझ नहीं होते ,
पर अगर संभालकर ना
रखा जाए तो ...
बोझिल जरूर हो जाते हैं " ।
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Rinal Patel
શ્રી હરિ એ જેને જન્મથી તેજસ્વી બનાવેલ હોય તેના તેજને કોઈ સ્પર્શ કરશે તો એ તો બળી જશે ને!!!
આ સંસારનો નિયમ છે.
અંતરની દ્રષ્ટિએ.
-Rinall.
Dada Bhagwan
On Mahavir Bhagwan’s Janma Kalyanak, may we remain in equanimity and progress towards Moksha.
On the auspicious occasion of Lord Mahavir Swami Janma Kalyanak, let us read about His life stories here: https://dbf.adalaj.org/Ao4GIP2E
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Bhavesh Tejani
અડક્યા વગરનો આભડછેટ લાગ્યો છે એને,
મને જોઈને રસ્તો બદલે છે ઈ...!
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
खुशियो की तलाश में ताउम्र फिरता इधर
उधर l
जिस तरफ भी ध्यान गया वहां तह गया
आदमी ll
सदा ही मुस्कुराने हुए अपनों लोगों की
ख़ातिर l
दिल से लाचार हो भावनाओ में बह गया
आदमी ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Komal Mehta
શું મળ્યું? કે શોધ્યું કઈ નથી 🙂↔️
સમય સાથે આગળ વધતા વધતા
એક વાત સમજાણી…….
કઈ કદી મારું હતું નહીં …….
સનાતન સત્ય સમજાયું આખરે કે……
છોડી દે સમજવાની અને સમજવાની મથામણ…
બસ વ્યસ્ત રે તું જીવન માં
- Komal Mehta
known stranger
રહી ગયેલી શ્વાસોનો થોડો એહતરામ કરી લઈએ,
જીવ્યા એકલા હવે સાથ થોડું જીવન જીવી લઈએ.
દિવસો તો વીત્યા ફરજમાં, રાતો ગઈ ચિંતા સાથે,
બે પળ હસી લઈએ, થોડું દિલ ભીંજવી લઈએ.
કેટલું સંગ્રહ્યું દુઃખને આજીવન સ્મિતને રાખ્યું ઉધાર,
આજ ભાર ઉતારીને આંખોમાં સચ્ચાઈ ભરી લઈએ.
હજી મોડું નથી કહો, જે કદી કહેવામાં રહી ગયું,
અહંકારને એક બાજુ મૂકી માફી પણ માંગી લઈએ.
જો કાલ ન આવે તો અફસોસ ન રહે મનના ખૂણે,
આજની આ સાંજને યાદોની જેમ સજીવી લઈએ.
- known
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
रखो सुरक्षित वस्तु को, ले जाएँगे चोर। पर रक्षित जो देव से, क्या कर सकें छिछोर।
दोहा --४६६
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Sonu Kumar
बाबा राम रहीम का सच क्या है?
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श्री गुरमीत राम रहीम जी पर लगाए गए मुकदमें की तथ्यात्मक समय सारणी :
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(i) सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए !! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए )
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(ii) घटना के 3 साल बाद भेजे गए इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने सी बी आई जांच के आदेश जारी किये !! और बहाना यह था कि - हाई कोर्ट के जज ने वाजपेयी को सी बी आई जांच करवाने के आदेश दिए थे !!!
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(iii) सी बी आई के आईपीएस अधिकारी ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को "सबूत" के तौर पर मान लिया गया !!!
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(iv) कथित साध्वियां लगातार कह रही थी कि - 'कोई अपराध नहीं हुआ था ', किन्तु उनके बयानों का आशय बलात्कार निकाला गया। उनके द्वारा दिए गए पहले बयानों को सबूत माना गया और बाद के कथ्यों को अस्वीकार कर दिया गया !!
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तब सी बी आई वाजपेयी के नियंत्रण में काम कर रही थी। यह अंदाजा लगाने की बात है कि किसने क्या किया होगा और कैसे किया होगा। तो इस मामले में आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है। और 18 साल बाद इस मुकदमे के फैसले में गुरमीत राम रहीम जी को दोषी करार देकर जेल भेज दिया गया !!!
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दरअसल पूरा देश एक विशाल सर्कस के मंच में तब्दील हो चुका है। और किसी व्यक्ति को लग सकता है कि - तो इससे क्या फर्क पड़ता है। असल में समस्या यह है कि कई देशो में इस तमाशे की डोज़ काफी कम है। और जिस देश में यह तमाशा कम है वह देश अच्छी व्यवस्थाओ के कारण तेजी से मजबूत होगा और अंततोगत्वा या तो हम पर नियंत्रण हासिल कर लेगा या हमें नष्ट कर देगा। और उस समय यह कॉमेडी हमारी ट्रेजिडी बन जायेगी।
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डेरा सच्चा सौदा प्रकरण ; समस्या एवं समाधान
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अध्याय
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(1) समस्या यह है कि आबादी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि राम रहीम जी के साथ न्याय नहीं किया गया है।
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(2) वजहें, जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है
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(3) तर्क ; जिनसे यह स्थापित किया जाता है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है
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(4) डेरा और राजनीति
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(5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है
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(6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो
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(7) समाधान
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(8) संत और संतत्व की परिभाषा पर मेरा प्रतिभाव
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टिप्पणी : इस जवाब में कुल 8 बिंदु है। 7 बिन्दुओ में मैंने इस प्रकरण से जुडी हुयी विभिन्न सूचनाएं, तथ्य एवं इनके आधार पर मेरा निष्कर्ष रखा है। इस निष्कर्ष या विश्लेषण को आप मेरा दृष्टिकोण भी कह सकते है। यदि मेरा दृष्टिकोण पूर्वाग्रह से ग्रसित है तो मैं इस बात से इंकार नहीं करता कि मैं पूर्वाग्रह से मुक्त होकर लिखता हूँ। जवाब में एक बिंदु समाधान का भी है, और यह बिंदु महत्वपूर्ण है। पाठको से आग्रह है कि मेरे दृष्टिकोण की तुलना में समाधान वाले हिस्से को ज्यादा भार दें।
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(1) समस्या यह है कि लाखों डेरा समर्थको एवं लाखों स्वतंत्र कार्यकर्ताओ का मानना है कि श्री राम रहीम जी के मामले में अदालत द्वारा दिया गया फैसला संदिग्ध है !!
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हो सकता है श्री राम रहीम जी दोषी हो, और ये भी हो सकता है कि वे निर्दोष हो। किन्तु इतना तो तय है कि देश की आबादी का एक वर्ग इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसी तरह का असंतोष संत श्री आसाराम जी बापू के मामले में भी देखने को मिला था। आसाराम जी के मामले में भी देश की आबादी का एक वर्ग यह मानता था एवं आज भी मानता है उनके साथ न्याय नहीं किया गया। संत रामपाल जी, जयेंद्र सरस्वती जी एवं नित्यानंद जी से जुड़े हुए मामलो में भी देश की एक बड़ी आबादी की यही धारणा थी।
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इस तरह यहाँ 2 वर्ग बन जाते है :
पहला वर्ग वह है जो यह मानता है कि श्री राम रहीम जी के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है और वे दोषी है, व उनके दोषी होने का सबसे बड़ा सबूत यह है कि अदालत ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है !! अदालत ने उन्हें किस आधार पर दोषी ठहराया है और क्या सबूत बरामद किये गए है, इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है !!
जबकि दुसरे वर्ग का मानना है कि, हो सकता है वे दोषी हो या हो सकता है कि दोषी नहीं भी हो। इस वर्ग को अदालत के फैसले पर विश्वास नहीं है, तथा इस अविश्वास की "पर्याप्त एवं वाजिब" वजहें मौजूद है।
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टिप्पणी - इस लेख में उन नागरिको के लिए कुछ नहीं है जो यह मानते है कि 2000 के नोटों में चिप लगी हुयी है, और इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि टीवी-अख़बार पर ऐसा बताया गया था, और वे यह भी मानते है कि भारत के जज चाहे पैदाइशी ईमानदार न हो किन्तु नियुक्ति मिलते ही एक प्रकार की जादुई प्रक्रिया द्वारा वे ईमानदार हो जाते है !!! यह लेख सिर्फ उन लोगो के काम का है जो जाया तौर पर न्यायमूर्ति पूजक नहीं है और साथ ही यह भी मानते है कि 2000 के नोटों में ऐसी कोई चिप नहीं है।
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(2) वजहें , जो पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है :
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एक पोचा तर्क यह है कि इन सभी संतो की भक्ति के कारण इनके भक्त अदालत पर अंगुली उठा रहे है। यह एक गलत तर्क है। आप संतो और उनके भक्तो की बात को जाने दीजिये। सलमान खान का उदाहरण लीजिये। जब उन्हें छोड़ दिया गया था तब भी देश की आबादी का एक बड़ा वर्ग इस तरह की आवाजे उठा रहा था कि हमारी अदालते भ्रष्ट है। तो यह खुली हुयी बात है कि पेड मीडिया द्वारा की जाने वाली तमाम पॉलीस के बावजूद भारत का एक वर्ग यह मानता है कि हमारी जज भ्रष्ट है !!
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क्यों कार्यकर्ताओ के एक वर्ग का मानना है कि हमारी अदालतें भ्रष्ट है ?
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क्योंकि ऐसी कोई वजह ही नहीं है जो इस बात का इत्मीनान दिलाए कि भारत की अदालतें भ्रष्ट नहीं है। लेकिन ऐसी ढेर सारी वजहें है जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट न हो ऐसा किसी भी तौर से संभव नहीं है। कुछ वजहें निचे दी गयी है :
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2.1 साक्षात्कार : भारत में जज बनने के लिए साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है। साक्षात्कार में अंक देना जजों के हाथ में होता है। तो भाई भतीजावाद एवं घूस (सेटिंग) के अवसर यहीं से बन जाते है। इस तरह नियुक्ति से ही भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। जज एवं नेता साक्षात्कार की प्रक्रिया को हटाना नहीं चाहते। यदि साक्षात्कार को हटा दिया जाए तो जजों के भ्रष्ट होने की एक वजह समाप्त हो जायेगी। लेकिन फिलहाल साक्षात्कार है , अत: भ्रष्टाचार है। उल्लेखनीय है कि चीन में जजों की नियुक्ति में साक्षात्कार नहीं है। सिर्फ लिखित परीक्षा के माध्यम से ही जजों की नियुक्ति की जाती है। इस वजह से चीन के जज भारतीय जजों की तुलना में कम भ्रष्ट है।
समाधान - जजों की नियुक्ति प्रक्रिया से साक्षात्कार को हटाया जाना चाहिए।
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2.2. पदोन्नति एवं स्थानान्तरण : जजों की नियुक्ति, स्थानांतरण एवं पदोन्नतियां वरिष्ठ जजों के हाथ में होती है। शेषन जज हाई कोर्ट के एवं हाई कोर्ट के जज सुप्रीम कोर्ट के चंगुल में है। यदि हाई कोर्ट का जज भ्रष्ट है तो वह शेषन कोर्ट के सभी जजों पर मनचाहे फैसले करवाने के लिए चाबुक चला सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट के जज भ्र्ष्ट है तो वे पूरी न्यायपालिका को भ्रष्ट बना देते है। और सुप्रीम कोर्ट के जज पूरी तरह से निरंकुश है।
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यदि सुप्रीम कोर्ट का जज कुर्सी पर रहते हुए घूस खा रहा है तो उसकी शिकायत कहाँ करेंगे आप ?
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दरअसल शेषन कोर्ट, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी एक टोली बना ली है। इनके फैसले में किसी का कोई दखल नहीं। जनता को तो भूल ही जाइए, सरकार तक का दखल नहीं !! जब किसी आदमी को यह पता हो कि उसे पकड़ने वाला कोई नहीं है, न ही कोई उससे सवाल पूछने वाला है, तो उसके भ्रष्ट होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। यह निरंकुशता भ्रष्टाचार को जन्म देती है।
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उल्लेखनीय है कि जापान में जजों को हर आम चुनाव में नागरिको के अनुमोदन से गुजरना पड़ता है। जब भी चुनाव होते है तो बेलेट पेपर के साथ एक अतिरिक्त प्रश्न रखा जाता है कि क्या आप इस जज को नौकरी से निकालना चाहते है या नहीं। इस तरह से नागरिको के पास विकल्प होता है कि वे भ्रष्ट एवं निकम्मे जज को खारिज कर सके। जज को भय रहता है कि भ्रष्टाचार करने पर जनता मुझे खारिज कर सकती है। इस वजह से उनके भ्रष्टाचार में कमी आती है। इसे रिटेंशन इलेक्शन या रिव्यू कहते है। किन्तु भारत के जज और नेता यह कतई नहीं चाहते कि नागरिको को जजों के काम काज पर टिप्पणी करने का अवसर दिया जाए।
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अमेरिका में इससे भी बेहतर प्रणाली है। वहां नागरिक के पास जजों को किसी भी समय नौकरी से निकालने प्रक्रिया है। वहां के जज जानते है कि यदि वे भ्रष्टाचार करेंगे तो यह छिपेगा नहीं और जनता उन्हें नौकरी से निकाल देगी। इस तरह जनता द्वारा नौकरी से निकाले जाने का भय उन्हें कम भ्रष्ट बना देता है, और वे तमीज से पेश आते है। नागरिको द्वारा बहुमत का प्रयोग करके इस तरह नौकरी से निकालने की प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है।
समाधान - भारत में जजों को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार आम नागरिको को दिया जाना चाहिए। इससे नागरिको का न्यायपालिका में दखल बढेगा और इस अंकुश से भ्रष्टाचार में कमी आएगी।
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2.3. पैसे लेकर सीधे नियुक्तियां : क्या आप जानते है कि, उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा से भी नहीं गुजरना होता है !! वरिष्ठ जज कोर्ट में प्रेक्टिस करने वाले किसी भी वकील को सीधे हाई कोर्ट में न्यायधीश के पद पर नियुक्ति दे सकते है !! एक तरह से यह नियम घूसखोरी को कानूनी करने के लिए बनाया गया है, जिसका परोक्ष अर्थ यह है कि –
यदि आपके भाई भतीजे वरिष्ठ जज है , यदि आप एक वकील है , और यदि आपके पास घूस देने के लिए मोटी राशि है तो आप सीधे ही हाई कोर्ट के जज बन सकते है !! अनुमान किया जा सकता है कि इस ढंग से जो व्यक्ति जज बनेगा वह कितना भ्रष्ट होगा, और इस तरीके से जो जज किसी को जज बनाएंगे वे कितने ईमानदार होंगे !!
समाधान - पसंदगी के आधार पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया को ख़त्म किया जाना चाहिए। न्यायधीश जनता के बहुमत से अनुमोदित और यदि वे भ्रष्ट आचरण करते है तो उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार जिले / राज्य / देश के मतदाताओं के पास हो।
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2.4. मन मर्जी क़ानून बनाने की शक्ति : जब तक संसद दखल कर के इसे पलट न दे तब तक सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट की रुलिंग्स का प्रभाव कानूनों की तरह ही होता है। और, यदि संसद कोई क़ानून बनाती है तो सुप्रीम कोर्ट उसे अवैध भी घोषित कर सकती है। इस तरह कानूनों को वैध / अवैध घोषित करने और क़ानून / संविधान की व्याख्या का अधिकार जजों के पास है।
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दूसरे शब्दों में, भारत में अंततोगत्वा जज ही यह तय करते है कि कौनसा क़ानून लागू होगा और कौनसा नहीं होगा। क्या संवैधानिक है और क्या असंवैधानिक है यह तय करने का अधिकार भी जजों के पास है !! और ख़ास बात यह है कि जजों पर नागरिको का कोई नियंत्रण नहीं है।
समाधान - कानूनों एवं संविधान की व्याख्या का अधिकार आम नागरिको के पास होना चाहिए। इससे जनता यह निर्धारित कर सकेगी कि कौनसा क़ानून देश हित में है व कौनसा देश विरोधी।
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2.5. मामले को असीमित समय तक लटकाने की शक्ति : धीमी अदालती प्रकिया भ्रष्टाचार को जन्म देती है। जजों के पास किसी मामले को असीमित समय तक लटका कर रखने की शक्ति है। वे घूस खाकर किसी मुकदमें के फैसले को इच्छित समय तक टालते रह सकते है, तथा घूस मिलने पर किसी मामले में अति न्यायिक सक्रियता दिखा सकते है। भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लटके हुए है। इनमे कई नेता, अभिनेता, अधिकारी, उद्योगपति आदि शामिल है। वे इनके मामलों की सुनवाई धीमी गति से करते है ताकि लम्बे समय तक आरोपी जजों के पंजे में फंसा रहे। चीन के 2 लाख जजों के मुकाबले भारत में सिर्फ 18 हजार जज होने से अदालती प्रक्रिया धीमी है और इस वजह से जजों में भ्रष्टाचार है।
समाधान - भारत को जजों की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख करने की जरुरत है।
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2.6. अवमानना का क़ानून : जजों को कोई भ्रष्ट कह कर न पुकारे, इसके लिए जजों ने अवमानना का क़ानून बनाया है। यदि आप जज को भ्रष्ट कहेंगे तो जज आपको अदालत की अवमानना के आरोप में जेल पहुंचा देंगे। इस क़ानून के कारण जजों के भ्रष्टाचार की चर्चा नहीं हो पाती और इससे जज निशंक होकर भ्रष्टाचार कर पाते है। एक तरह से जजों ने इस तरह का क़ानून बनाकर पूरे देश को बाध्य कर दिया है कि वे जजों को ईमानदार एवं फ़रिश्ता माने !! और आपको अपने आस पास ऐसे लोग बहुतायत से मिलेंगे जो बिना किसी वजह से जजों को हरिश्चंद्र की औलाद मानकर चलते है। और इसकी उनके पास सिर्फ एक वजह है – उन्होंने यह अख़बार में पढ़ा हुआ होता है कि भारत के जज ईमानदार है !!
समाधान - अवमानना के क़ानून को रद्द किया जाना चाहिए।
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2.7. विवेकाधिकार की असीम शक्ति : जजों का विवेकाधिकार भी भष्टाचार को बढ़ावा देता है। कानूनों को कितना भी विस्तृत रूप से लिखा जाये, तब भी कई बिन्दुओ को तय करने के लिए दंडाधिकारी को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करना होता है। यह विवेकाधिकार भारत के जजों को असीमित शक्ति प्रदान कर देता है। वे घूस खाकर अपने विवेकाधिकार का इस तरह से इस्तेमाल करते है, जिससे घूस देने वाले को लाभ पहुँचाया जा सके। एक मशहूर कथन है कि –
क़ानून मोम के टुकड़े की तरह होते है, और इसकी व्याख्या करने वाला इसे मनचाहे सांचे में ढाल सकता है !!
समाधान - विवेकाधिकार की शक्ति जजों की जगह नागरिको के ज्यूरी मंडल को दी जानी चाहिए।
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तो ऊपर दिए गयी प्रशासनिक वजहें बताती है कि हमारी न्यायपालिका में ऐसी पर्याप्त व्यवस्थाएं है जो यह सिद्ध करती है कि ऐसी कोई वजह मौजूद नहीं है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के जज देश के अन्य अधिकारियो एवं नेताओ की तुलना में ज्यादा ईमानदार है।
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बल्कि स्थिति इसके उलट है। दरअसल जजों की नियुक्ति-पदोन्नति की प्रणाली, विवेकाधिकार का प्रयोग एवं अवमानना का क़ानून उन्हें ज्यादा भ्रष्ट होने के ज्यादा सहज अवसर प्रदान करता है। और उन्हें नेताओं की तरह कभी जनता के प्रति जवाबदेहिता की प्रक्रिया से नही गुजरना पड़ता !! जीवन में कभी भी नही !! यही वजह है कि हमारी न्यायपालिका में भारी भ्रष्टाचार है।
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2.8. दूसरी तरफ सिर्फ दो वजहें है जिसकी वजह से यह बात स्थापित की जाती है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है :
अवमानना के क़ानून का भय : यदि आप जजों पर अंगुली उठाएंगे तो वे आपको अवमानना का दोषी ठहरा कर जेल में डाल देंगे !! इस वजह से भारत के सभी समझदार एवं बड़े आदमी निरंतर यह दोहराते रहते है कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है !!!
दूसरी बड़ी वजह पेड मिडिया है : धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में जज सिस्टम को जारी रखना चाहते है, ताकि वे जजों को घूस देकर मनचाहे फैसले निकलवा सके। इस तरह धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक अपने पक्ष में फैसले लेने के लिए जजों के भ्रष्टाचार का लाभ उठाते है। अत: वे जजों की छवि बनाये रखने के लिए पेड मिडिया को भुगतान करते है। पेड मिडिया निरंतर इस तरह की धारणा खड़ी करता है जिससे नागरिको में यह भ्रम फैले कि भारत के माननीय जज बेहद ईमानदार है।
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(3) डेरा और राजनीति :
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यह एक बहुत ही गलत धारणा है कि धर्म में राजनीति का एवं राजनीति में धर्म का दखल नहीं होना चाहिए। दरअसल धर्म राजनीति से अलग किया ही नही जा सकता।
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वजह ?
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कोई भी धार्मिक संस्था या धार्मिक गुरु लोगो से जुड़ा होता है तथा उसकी गतिविधियों में धार्मिक जमाव होता है। जहाँ भी लोगो का जमाव होगा वहां दखल करना राजनीति की मजबूरी है। राजनेता ऐसे सभी व्यक्तियों का पीछा करते है जिसके पास लोगो के किसी समूह को प्रभावित करने की क्षमता हो।
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धार्मिक संस्थाओ के पास यह क्षमता काफी बढ़ी हुयी होती है। अत: राजनेता चाहते है कि अमुक गुरु या संस्था अपने श्रद्धालुओं को उनके पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित करे। कोई गुरु या संस्था राजनीति से अलग रहना चाहे तो भी राजनेता उनका पीछा करते है। धार्मिक गुरुओ के पास इनसे बचने का कोई विकल्प नहीं है।
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और कभी कभी इसका उल्टा भी देखने में आता है। सभी धार्मिक संस्थाओ को अपने विस्तार के लिए सरकार से मधुर सम्बन्ध बनाये रखना जरुरी होता है। इसीलिए वे बढ़त बनाये रखने और स्वयं को सुरक्षित करने के लिए सत्ता के साथ गठजोड़ बनाते है। कुल मिलाकर धार्मिक संस्थाओ / गुरुओ के पास लोगो का जमाव है और ये लोग वोट करते है। राजनीति में प्रत्येक व्यक्ति एक वोट है। तो धर्म में राजनीति स्थायी तत्व है। इससे बचा नहीं जा सकता।
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जो लोग इस तरह का ज्ञान बाँटते फिरते है कि धर्म का राजनीती में दखल नहीं होना चाहिए वे भी यह बात अच्छी तरह से जानते है कि पूरी धर्म का राजनीती में दखल अनिवार्य तत्व है, किन्तु वे अपने निहित स्वार्थो के लिए इस तरह के भ्रम फैलाते है।
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मौजूदा स्थिति में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ, कांग्रेस, अकाली और आम आदमी पार्टी में से कोई भी राजनैतिक दल डेरा के समर्थन में नहीं था / है।
अकाली स्थानीय राजनीति और धार्मिक वजहों से तथा बीजेपी=संघ राष्ट्रीय राजनीति की वजह से डेरे को गिराना चाहते थे !!
अपनी राजनैतिक वजहों के चलते कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की रुचि भी डेरे को बचाने में नहीं थी।
आरएसएस हिन्दू धर्म के अनुयायियों को अपने नीचे "एक" करने के मिशन पर है। संघ के अनुसार विभिन्न सम्प्रदाय एवं गुरु वगैरह हिन्दुओ को विभाजित कर रहे है, और इसकी वजह से हिन्दुओ को एक करने का उनका मिशन पिछड़ जाता है !! अत: संघ पिछले 90 वर्ष से विभिन्न सम्प्रदायों एवं गुरुओ को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखता है।
गोल्डन टेम्पल पर अपना प्रभाव रखने वाले अकाली भी डेरे को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखते है।
कोंग्रेस को डेरे ने एक लम्बे समय तक राजनैतिक समर्थन दिया था, किन्तु हाल ही में डेरे के बीजेपी की और चले जाने से कोंग्रेस को भी डेरे के गिर जाने से कोई दिक्कत नहीं है।
इसके अलावा मिशनरीज द्वारा समर्थित तर्क शील सोसाइटी जैसे संगठन भी डेरे के खिलाफ है।
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बहरहाल, विभिन्न दलों और संगठनो के अपने हित और उनकी राजनीति है, और इसके कई आयाम हो सकते है।
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इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु यह है कि मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियां डेरे को गिराना चाहती थी। अत: इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि संघ / कोंग्रेस / अकाली आदि क्या चाहते थे। भारत में एफडीआई बढ़ने से मिशनरीज की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि बीजेपी / कोंग्रेस / अकाली / आम आदमी पार्टी आदि कोई भी दल मिशनरीज के खिलाफ नहीं जा सकते। अत: इस प्रकरण में संघ / कोंग्रेस / अकाली एवं आम आदमी पार्टी की भूमिका को ज्यादा गंभीरता से लेने से हम मूल विषय से भटक जायेंगे।
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यहाँ हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि परदे के पीछे जो भी सियासत रही हो , लेकिन निष्पादन जज द्वारा ही किया जाता है।
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आशय यह कि किसी व्यक्ति को जेल में भेजने की शक्ति सिर्फ जज के पास ही होती है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी इस शक्ति से वंचित है। तो जब किसी व्यक्ति को फंसाना होता है तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक हमेशा जज का ही इस्तेमाल करते है। जब तक जज नहीं चाहेगा तब तक किसी भी व्यक्ति को किसी तरह से जेल में नहीं पहुचायां सकता। और यदि जज किसी व्यक्ति को जेल भेजना चाहता है तो उसे फिर कोई बचा भी नहीं सकेगा। ऊपर उन कारणों को बताया गया है जो इस बात की पुष्टि करते है कि भारत की अदालतें उतनी ही भ्रष्ट है जितने कि अन्य विभाग।
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(5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है :
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सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए ! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह भी दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए ) !!!
घटना के 3 साल बाद यानी 2002 में इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने CBI जांच के आदेश जारी किये !!!
इन पत्रों में यह नहीं लिखा गया था कि ये पत्र किसने भेजे है। अत: CBI के आईपीएस अधिकारीयों ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc-164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को आगे की जांच के लिए सबूत के तौर पर मान लिया गया !!!
2005 तक CBI ने पीड़ीताओ से कई बार पूछताछ की। किन्तु हर बार पीड़ीताओ ने बयान दिया कि हमारे साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ !!
CBI का कहना है कि उन्होंने कथित पीड़ीताओ को 2002 में ही खोज निकाला था !! किन्तु सीबीआई ने उनके बयान 2006 में दर्ज किये, और 2006 में ही चालान पेश किया।
CBI ने दोनों कथित पीड़ीताओ के बयान 2006 में फिर दर्ज किये, और इनमे यह कहा गया कि बलात्कार किया गया था !!
राम रहीम जी के वकील को दोनों पीड़ीताओ के बयानों की कॉपी नहीं दी गयी !!
राम रहीम जी के वकील को पीड़ीताओ से क्रोस क्वेशचन करने का मौका नहीं दिया गया !!
पीड़ीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी किन्तु उन्हें बयान बदलने की अनुमति नहीं दी गयी !!
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तो तकनिकी रूप से मुकदमे का सार यह है कि –
3 साल बाद प्राप्त हुए गुमनाम पत्रों के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश किये गए !! 6 साल बाद सीबीआई ने ख़त लिखने वालो को खोज निकाला और उनके बयान दर्ज किये !! उन्होंने 4 वर्ष तक यह कहा कि कोई बलात्कार नही हुआ था , किन्तु सीबीआई ने इसे नहीं माना !! 2006 में सीबीआई ने दो साध्वियों के बयान दर्ज किये जिनमे कहा गया कि, बलात्कार हुआ था !! वकील को इन पीडिताओ से क्रोस क्वेश्चन करने की अनुमति नहीं दी गयी !! पीडीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी, किन्तु उन्हें अनुमति नहीं दी गयी !! 11 साल पहले लिए गए इन बयानों के आधार पर जज ने घटना के 18 साल बाद राम रहीम जी को जेल भेज दिया !!!
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ध्यान देने वाली बात यह है कि, इस मुकदमे के सम्बन्ध में कोई भी "भौतिक सबूत" बरामद नहीं किये गए। सिर्फ बयानों को आधार पर फैसला दिया गया। जज को यह फैसला करना था कि कौन सच बोल रहा था और कौन झूठ। इस स्थिति में अभियुक्त एवं पीडिताओ का नारको टेस्ट लेकर पता किया जा सकता है कि किसका बयान सच था। किन्तु नारको टेस्ट नहीं लिया गया और जज ने लड़कियों के बयानों को सच मानने का फैसला किया !!!
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सुप्रीम कोर्ट की यह रूलिंग कि —
लड़की का बयान हर हाल में सच माना जाएगा और लड़की को अपना बयान बदलने की इजाजत नहीं होगी
मुख्य वजह बनी जिसके कारण सरकार के नियन्त्रण में काम करने वाले CBI के आईपीएस अधिकारी एवं जज श्री राम रहीम जी को जेल में पहुंचा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह रूलिंग रसूखदार लोगो को पंजे में लेने के लिए की है, और लगभग सभी हिन्दू संतो को गिराने के लिए इस रूलिंग का इस्तेमाल किया गया है, और आगे भी इसी रूलिंग का इस्तेमाल किया जाएगा।
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इस रूलिंग का एक सबसे बड़ा साइड इफेक्ट यह आया कि अवसरवादी काम काजी महिलाओं ने इसका इस्तेमाल सहकर्मी पुरुष साथियों को ब्लेकमेल करने में शुरू किया और ज्यादातर पुरुष मालिको ने महिलाओं से दूरी बनाने के लिए उन्हें नियुक्तियां देना बंद कर दिया !!
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पिछले 3 साल में मेरे खुद के सामने ऐसे दर्जन भर वाकये गुजर चुके है जब महिलाओं को नौकरियां गंवानी पड़ी है। और विडम्बना यह है कि उन महिलाओं / लडकियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस रूलिंग की वजह से वे नौकरियां गँवा रही है !!
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लिंक - Victim's testimony is enough for conviction for rape: court
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CBI के अधिकारियों ने ये बयान मजिस्ट्रेट के सामने कथित Crpc की धारा 164 के तहत दर्ज किये थे !! अब यदि बयान देने वाली लड़की अपने बयान को बदलती तो उसे झूठा बयान दर्ज करवाने के मुकदमे का सामना करना पड़ता। इस तरह उन्हें कोर्ट में श्री गुरु राम रहीम जी के खिलाफ फिर वही बयान देने के लिए बाध्य किया गया !!
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और फिर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का इस्तेमाल किया गया कि -
लड़की के बयान को अंतिम सत्य एवं अकाट्य सबूत माना जाएगा।
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और फिर हमारे पास ऐसे शिक्षित एवं जागरूक लोगो का जमघट है जो इस प्रक्रिया को क़ानून का शासन कह के संबोधित कर रहे है !!!
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इस सम्बन्ध में डेरा प्रमुख की पैरवी करने वाले वकील का साक्षात्कार निचे दिए लिंक पर देखें। इस साक्षात्कार में कहे गए तथ्यों को आप विश्वसनीय मान सकते है, क्योंकि वकील ने जो भी तथ्य रखे है वे रिकॉर्ड पर है, और गलत बयानी पर जज वकील को जेल भेज सकता है।
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और वकील का साफ़ कहना है कि आरोप लगाने वाली लकड़ियों ने क्या बयान दिया है उसकी कॉपी हमें दी ही नहीं गयी !! और भौतिक सबूत इस मामले में थे नहीं !! मतलब आरोप लगाने वाली लड़कियां कौन है वकील को मालूम नहीं है, उन्होंने क्या बयान दिए वो भी वकील को मालूम नहीं है !! और इन्ही बयानों के आधार पर 10 साल की सजा !!
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मैं आपसे आग्रह करूँगा कि कृपया यह पूरा साक्षात्कार देखें - Interview with S.K. Garg Narwana, Lawyer, Gurmeet Ram Rahim
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और क़ानून के इस मखौल को कवर करने के लिए मिशनरीज ने 24*7 घंटे देश भर में एक अलग तरह तमाशा रचा, जिसमें राम रहीम जी संत नहीं है , वे विलासी है, ऐश्वर्य प्रिय है, उनके पास गुफाएं है, उनके डेरे में स्वीमिंग पूल है, उन्होंने आलिशान महल बना रखा है, उनके पास 2 बाज, 3 उल्लू , 5 तीतर है, उनके पास ढेर सारी जमीन है, वे फिल्मे बनाते है, नाचते-गाते है, क्रिकेट खेलते है, कारोबार करते है , रंग बिरंगे कपड़े पहनते है आदि आदि जैसे बकवास आरोपों को पेड मीडिया द्वारा बार बार इसीलिए दोहराया गया ताकि बलात्कार के मूल मुकदमे पर चर्चा को टाला जा सके !!
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पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले ज्ञानी लोगो ने ये सब देखा-पढ़ा और फेसबुक-कोरा-व्हाट्स एप आदि के माध्यम से पूरे देश में फैलाने में भी योगदान दिया !!
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यदि इन फर्जी आरोपों पर बहस नहीं चलाई जाती है तो जनता का ध्यान बलात्कार के मुकदमे से जुड़े तथ्यों पर चला जाएगा। और तब जनता को यह मालूम होगा कि सिर्फ बयान को आधार बनाकर ही राम रहीम जी को दोषी ठहरा दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग ने जज को यह तय करने का अधिकार दे दिया था कि वह यदि चाहे तो पीड़िता के बयान को सच मान सकता है !! और जज को इस बात में सुविधा थी कि लड़की के बयान को सच मान लिया जाए !!
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इस तथ्य को चर्चा से बाहर करने के लिए मीडिया ने ऊपर दिए गए फर्जी आरोपों की झड़ी बनाकर यह धारणा खड़ी करने की कोशिश की है कि श्री राम रहीम जी एक दुर्जन व्यक्ति है। और सुबह शाम अनाज खाने के बावजूद कई लोग इन आरोपों को दोहरा रहे है। उन्हें इस बात पर सोचने का अवकाश ही नहीं है कि गुफाएं, स्वीमिंग पूल, महल आदि बनाना और फिल्मो में अभिनय करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
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(6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो
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टिप्पणी : मैं श्री राम रहीम जी का भक्त नहीं हूँ, न ही मैं कभी डेरे पर गया हूँ। और मुझे यह भी पता नहीं है कि अमुक मामले में श्री राम रहीम जी दोषी है या नहीं है। जब मेरे सामने यह मामला आया तो मैंने इसे कानूनी नजरिये से देखा, और कानूनी टर्म के अनुसार कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति यही निष्कर्ष निकालेगा कि यह मुकदमा पहले दिन से ही फर्जी है, और उन्हें जानबूझकर फंसाया गया प्रतीत होता है।
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लेकिन पेड मीडिया की अफीम लेने वाले व्यक्ति मुकदमे से जुड़े तथ्यों को टच ही नहीं करते है, वे उन्हें बस इसीलिए जेल में देखना चाहते है कि राम रहीम जी का रहन सहन उनके अनुसार एक संत जैसा नहीं है !! बताइये !!!
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जैसे जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ता गया उससे यह बात और भी साफ़ होती चली गयी कि मिशनरीज का उद्देश्य डेरे को तोडना है। मिशनरीज ने बड़ी मेहनत करके पंजाब को नशे की गिरफ्त में लिया है, और डेरे द्वारा इस तरह की प्रभावी गतिविधियाँ संचालित की जा रही थी जिससे लोग नशा छोड़ रहे थे !!
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इसके अलावा डेरे के ज्यादातर अनुयायियों में ओबीसी शामिल है और इनमें दलित भी है। मिशनरीज के लिए यह वर्ग आसान शिकार है। सहजधारी सिक्खों को गोल्डन टेम्पल की वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाने और दलित सिक्खों के गोल्डन टेम्पल से दूर छिटकने के बावजूद मिशनरीज इन्हें अपनी और खींच नहीं पा रही है, क्योंकि संत श्री राम रहीम एवं रामपाल जी इन्हें आश्रय दे देते है।
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यह देखना बेहद दुखद है कि, इन सभी संतो के अनुयायी करोडो रूपये लेकर वकीलों के चक्कर लगा रहे है, ताकि वकील उन्हें जजों से न्याय दिला सके। एक मात्र अपवाद संत श्री रामपाल जी रहे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि देश के 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है !!
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इन अनुयायियों को इस बात का भान नहीं है कि हमारे जज / प्रशासनिक अधिकारी / पुलिस अधिकारी / मंत्री एवं कल्कि पुरुष तृतीय मोदी साहेब समेत संघ के सभी मंत्री अमेरिकी धनिकों की फौलादी पकड़ में है। ये सभी नेता अधिकारी एवं सभी मीडिया कर्मी ( पेड अर्नव, पेड सुधीर, पेड रजत एवं पेड रविश समेत ) अमेरिकी धनिकों की कठपुतलियां मात्र है।
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गुरमीत जी , श्री आसाराम जी बापू, श्री रामपाल जी आदि संतो ने अपने असाधारण कार्यो से इस बात को सुनिश्चित किया कि गरीब /दलित / ओबीसी आदि मिशनरीज के आश्रय में चले जाने की जगह हिन्दू धर्म में बने रहे।
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मैं इसे फिर से दोहराता हूँ -
यदि आज गरीब /दलित / ओबीसी आदि हिन्दू धर्म में बने हुए है तो मंदिर प्रमुखों, प्राचीन राजाओ, संघ के नेताओं, बीजेपी नेताओं का इसमें योगदान शून्य है। इसका असली श्रेय सिर्फ इन तथा इन जैसे अन्य संप्रदाय प्रमुखों की नयी खेप को जाता है।
और विडम्बना यह है कि आज उदारवादी / पढ़े लिखे / आधुनिक हिन्दू इन संतो को जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है !!!
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हिन्दुओ को अपने नीचे एक करने की चाहत रखने वाले संघ=बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ता भी इससे खुश है। उनका नजरिया है कि, चलो अच्छा हुआ। यदि ये सभी संत हवालात में भेज दिए जाते है तो हम उनके अनुयायियों को आसानी से संघ=बीजेपी में जोड़ लेंगे !!
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इन्हें यह अहसास ही नहीं है कि, मिशनरीज की ताकत के सामने इनकी कोई हैसियत नहीं है। यदि संत गुरमीत जी , संत श्री आसाराम जी एवं संत रामपाल जैसे लोग कमजोर हो गए तो दलितों / ओ बी सी / गरीबो की एक बड़ी संख्या मिशनरीज की गोद में जा गिरेगी। ऐसे सभी व्यक्ति जो इन संतो को गलत तरीके से 10-20 साल के लिए जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है दरअसल वे जाने-अनजाने मिशनरीज की मदद कर रहे है।
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उन्हें इस बात को समझने की जरूरत है कि ये संत धर्म के नाम पर सिर्फ डायलॉग नहीं मार रहे है, बल्कि स्कूल, अस्पताल, दवाइयाँ, आश्रय आदि भी उपलब्ध करवा रहे है। और मिशनरीज को कथाएँ कहने वाले संतो से ज्यादा परेशानी नहीं होती है, किन्तु वे ऐसे संतो को बाधा के रूप में देखते है जो परोपकारी कार्य कर रहे है !!
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ओह माय गॉड फिल्म कान्हा Vs कान्हा नामक नाटक पर लिखी गयी है। परेश रावल ने इसमें मुख्य भूमिका भी निभायी है और वे इसके सह निर्माता भी है। इस नाटक के फायनेंसर संघ=बीजेपी के नेता है, औ
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या
“नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)
का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है।
शब्दार्थ:--
नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीन
भवति = होता है / बनता है
भावार्थ:
मनुष्य को हमेशा अपने विचारों, कर्मों और जीवन-दृष्टि में नवीनता बनाए रखनी चाहिए।
अर्थात—जड़ता, आलस्य और पुराने, अप्रासाँगिक विचारों में अटके न रहकर निरंतर विकास, परिवर्तन और नव-सृजन की ओर बढ़ते रहना ही जीवन की सार्थकता है।
गहन व्याख्या:
ऋग्वेद यहाँ यह संकेत देता है कि
प्रकृति स्वयं हर क्षण नई होती रहती है (सूर्योदय, ऋतुओं का परिवर्तन)।
जो व्यक्ति भी नवीनता (innovation) को अपनाता है, वही जीवंत और प्रगतिशील रहता है।
मानसिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक स्तर पर “नया बने रहना” ही उन्नति का मूल है।
जीवन में अनुप्रयोग:
विचारों में – नए दृष्टिकोण अपनाना।
ज्ञान में – सतत अध्ययन और सीखना।
आत्म-विकास में – हर दिन स्वयं को बेहतर बनाना।
आध्यात्मिकता में – साधना में ताजगी और जागरूकता रखना।
संक्षेप में:
“जो हर दिन नया बनता है, वही सच में जीवित और सफल होता है।
वेदों में प्रमाण,--
1. ऋग्वेद प्रमाण
1. ऋग्वेद-- 1/31/8
“नव्यो नव्यो भवति जायमानः”
भावार्थ – मनुष्य को बार-बार नया बनते रहना चाहिए; निरंतर उन्नति और नवता ही जीवन का धर्म है।
2. ऋग्वेद-- 1/89/1
“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”
भावार्थ – हमारे पास चारों दिशाओं से नए-नए शुभ विचार आते रहें।
यह मंत्र स्पष्ट रूप से मानसिक नवीनता और openness की शिक्षा देता है।
3. ऋग्वेद --10/191/2
“संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्”
भावार्थ – मिलकर चलो, मिलकर विचार करो, अपने मनों को एक करो (नए सामूहिक विचार विकसित करो)।
2. यजुर्वेद प्रमाण
4. यजुर्वेद-- 22/22
“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्”
भावार्थ – पूरे विश्व को श्रेष्ठ (उन्नत) बनाओ।
यह निरंतर सुधार और नव-निर्माण की प्रेरणा देता है।
5. यजुर्वेद-- 40/2 (ईशोपनिषद्)
“कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः”
भावार्थ – कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करो।
यहाँ निरंतर कर्म (dynamic life) = निरंतर नवीनता।
3. सामवेद प्रमाण
6. सामवेद-- 375 (ऋग्वेद 1/89/1 का ही रूप)
“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”
भावार्थ – चारों ओर से श्रेष्ठ, नए विचार हमें प्राप्त हों।
4. अथर्ववेद प्रमाण
7. अथर्ववेद-- 7/52/1
“नवीनं नव्यं वर्धय” (भावानुसार)
भावार्थ – जीवन में नवीनता को बढ़ाओ, उन्नति करते रहो।
निष्कर्ष:
वेदों का स्पष्ट संदेश है—
नए विचार अपनाओ, रूढ़ियों में मत फँसो सदैव उन्नति और नव-सृजन करते रहो।
इसलिए “नव्यो नव्यो भवति” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरे वैदिक दर्शन का मूल सिद्धांत है।
उपनिषदों में प्रमाण --
1. कठोपनिषद्
कठोपनिषद् 1.3.14
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत”
भावार्थ – उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त करो।
यहाँ “जाग्रत” और “उत्तिष्ठत” का अर्थ है—जड़ता छोड़कर नवीन चेतना में प्रवेश करना।
2. ईशावास्य (ईश) उपनिषद्
ईशोपनिषद्- 11
“विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह…”
भावार्थ – जो व्यक्ति विद्या और अविद्या दोनों को जानता है, वही मृत्यु से पार होकर अमरत्व को प्राप्त करता है।
यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण (holistic understanding) की शिक्षा देता है।
3. मुण्डकोपनिषद्
मुण्डकोपनिषद् --1.1.4–5
“द्वे विद्ये वेदितव्ये…”
भावार्थ – दो प्रकार की विद्याएँ जानने योग्य हैं—परा (आध्यात्मिक) और अपरा (भौतिक)।
यह जीवन में नए-नए आयामों में ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा है।
4. छान्दोग्य उपनिषद्
छान्दोग्य उपनिषद्-- 7.1.3
“तारति शोकमात्मविद्”
भावार्थ – आत्मा का ज्ञान पाने वाला शोक से पार हो जाता है।
आत्मज्ञान = आंतरिक रूप से नया जन्म / नवीनता।
5. बृहदारण्यक उपनिषद्++
बृहदारण्यक उपनिषद् --4.4.19
“तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति”
भावार्थ – उसी (ब्रह्म) को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार हो जाता है।
यहाँ ज्ञान के द्वारा नए अस्तित्व (transformation) की प्राप्ति बताई गई है।
6. श्वेताश्वतर उपनिषद्
श्वेताश्वतर उपनिषद्--- 6.23
“यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ…”
भावार्थ – जिसे ईश्वर और गुरु में परम भक्ति है, उसके लिए ज्ञान स्वतः प्रकट होता है।
ज्ञान का प्रकट होना = निरंतर नवीनता और आंतरिक विकास। निष्कर्ष:
उपनिषदों का मुख्य संदेश है—
जागो (Awaken)
ज्ञान प्राप्त करो (Learn continuously)
स्वयं को रूपांतरित करो ।(Transform yourself)
यही “नव्यो नव्यो भवति” का उपनिषदिक रूप है।
पुराणों में प्रमाण --
1. श्रीमद्भागवत महापुराण
श्रीमद्भागवत --1.2.18
“नष्टप्रायेष्वभद्रेषु नित्यं भागवतसेवया।
भगवत्युत्तमश्लोके भक्तिर्भवति नैष्ठिकी॥”
भावार्थ – नित्य (प्रतिदिन) सत्संग और साधना से अशुद्धियाँ दूर होती हैं और दृढ़ भक्ति उत्पन्न होती है।
यहाँ “नित्यं” (हर दिन) = निरंतर नवीनता और आत्म-शुद्धि।
श्रीमद्भागवत --11.20.9
“तावत्कर्माणि कुर्वीत न निर्विद्येत यावता।”
भावार्थ – जब तक वैराग्य उत्पन्न न हो, तब तक मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए।
निरंतर कर्म तथा जीवन में गतिशीलता और नवीनता।
2. विष्णु पुराण
विष्णु पुराण --1.22.53
“एवं प्रवर्तते सर्गः पुनः पुनरनादिकः।”
भावार्थ – यह सृष्टि बार-बार निरंतर उत्पन्न होती रहती है।
सृष्टि का चक्र है निरंतर नवीन सृजन (renewal)।
3. शिव पुराण
शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता 1.10.25
“ज्ञानं विना न मुक्ति:”
भावार्थ – ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं है।
ज्ञान प्राप्ति से निरंतर आत्म-विकास और नवीनता।
4. गरुड़ पुराण
गरुड़ पुराण --1.115.22
“विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्”
भावार्थ – विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है।
विद्यार्जन निरंतर नवीनता और प्रगति होती है।
5. ब्रह्मवैवर्त पुराण
ब्रह्मवैवर्त पुराण, कृष्ण जन्म खण्ड-- 59.45
“संसारः परिवर्तनशीलः”
भावार्थ – संसार निरंतर परिवर्तनशील है।
परिवर्तन ही नवीनता का शाश्वत सिद्धांत।
6. मार्कण्डेय पुराण
मार्कण्डेय पुराण-- 50.15
“नित्यं यत्नः कर्तव्यः”
भावार्थ – मनुष्य को सदा प्रयास करते रहना चाहिए।
सतत प्रयास से निरंतर उन्नति और नवीनता आतीं है
निष्कर्ष:
पुराणों का संदेश स्पष्ट है—
सृष्टि स्वयं निरंतर नई होती रहती है। मनुष्य को भी निरंतर कर्म, ज्ञान और साधना में आगे बढ़ना चाहिए। स्थिरता नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रगति ही जीवन का नियम है।
इस प्रकार पुराण भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को
सृष्टि के चक्र, ज्ञान और कर्म के माध्यम से पुष्ट करते हैं।
गीता में प्रमाण --
1. निरंतर कर्म (Dynamic Life)
गीता --3.8
“नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।”
भावार्थ – अपना कर्तव्य कर्म करो, क्योंकि कर्म न करना (जड़ता) से कर्म करना श्रेष्ठ है।
यह श्लोक बताता है कि सक्रिय रहना चाहिए जिससे निरंतर नवीनता बनी रहे
2. आत्म-उन्नति (Self-Development)
गीता-- 6.5
“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।”
भावार्थ – मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, पतन नहीं।
आत्म-उत्थान से व्यक्ति हर दिन बेहतर और नया बनता है।
3. अभ्यास और निरंतर साधना
गीता --6.26
“यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्।
ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्॥”
भावार्थ – चंचल मन जहाँ-जहाँ जाए, उसे बार-बार नियंत्रित कर आत्मा में स्थिर करो।
“बार-बार प्रयास” निरंतर सुधार होता है जिससे नवीनता बनी रहती है।
4. ज्ञान की नवीनता
गीता-- 4.38
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।”
भावार्थ – इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ नहीं है।
ज्ञान प्राप्ति से चेतना का विकास होता से।
5. परिवर्तन का सिद्धांत
गीता-- 2.22
“वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।”
भावार्थ – जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर नए शरीर धारण करती है।
यह श्लोक सीधे बताता है कि
पुराना छोड़कर नया अपनाना ही जीवन का नियम है।
6. निरंतर योग में स्थित रहना
गीता-- 2.48
“योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।”
भावार्थ – आसक्ति त्यागकर योग में स्थित होकर कर्म करो।
यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण से कर्म करने की शिक्षा है।
निष्कर्ष:
गीता का स्पष्ट संदेश है—
कर्म करते रहो (Act continuously)
स्वयं को उठाओ (Self-evolve)
ज्ञान प्राप्त करो (Learn & grow)
पुराना छोड़कर नया अपनाओ (Transform)
इस प्रकार गीता में “नव्यो नव्यो भवति” का भाव
कर्म, ज्ञान और परिवर्तन के माध्यम से पूर्ण रूप से प्रतिपादित होता है।
महाभारत में प्रमाण --
1. निरंतर प्रयास (Continuous Effort)
महाभारत, उद्योग पर्व -5.39.57
“उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः
दैवेन देयं इति कापुरुषा वदन्ति।”
भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो परिश्रमी और उद्यमी होता है; कायर लोग ही भाग्य की बात करते हैं।
निरंतर प्रयास = नवीनता और उन्नति का मूल।
2. कर्म का महत्व
महाभारत, शान्ति पर्व --12.153.18
“कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।”
भावार्थ – जीव कर्म से ही उत्पन्न होता है और कर्म से ही उसका विकास या पतन होता है।
कर्म करते रहना से जीवन गतिशील (नवीन) बना रहता है।
3. ज्ञान और विकास
महाभारत, शान्ति पर्व --12.188.15
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।”
भावार्थ – ज्ञान के समान इस संसार में कुछ भी पवित्र नहीं है।
ज्ञान = नए दृष्टिकोण और आंतरिक नवीनता।
4. आलस्य त्याग
महाभारत, वन पर्व-- 3.33.28
“अलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।”
भावार्थ – आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला बड़ा शत्रु है।
आलस्य छोड़ना = नवीनता और प्रगति की शुरुआत।
5. सतत् उन्नति का संदेश
महाभारत, शान्ति पर्व --12.237.11 (भावानुसार)
“नित्यं यत्नेन कर्तव्यं श्रेयः”
भावार्थ – मनुष्य को नित्य (हर दिन) प्रयास करते रहना चाहिए।
“नित्यं” = हर दिन नया प्रयास, नया विकास।
निष्कर्ष:
महाभारत का स्पष्ट संदेश है—
उद्यम और प्रयास करते रहो
ज्ञान प्राप्त करते रहो, आलस्य से दूर रहो, हर दिन स्वयं को बेहतर बनाओ
यही “नव्यो नव्यो भवति” का महाभारतीय रूप है—
निरंतर कर्म, प्रयास और आत्म-विकास के द्वारा नया बनते रहना।
स्मृतियों में प्रमाण --
1. मनुस्मृति
(क) मनुस्मृति --4.138
“नित्यं यत्नेन कर्तव्यं कर्म शुद्धिमिच्छता।”
भावार्थ – जो व्यक्ति शुद्धि (उन्नति) चाहता है, उसे नित्य (प्रतिदिन) प्रयत्नपूर्वक कर्म करना चाहिए।
“नित्यं यत्न” = हर दिन नया प्रयास, नवीनता।
(ख) मनुस्मृति-- 2.87
“स्वाध्यायेन नित्ययुक्तः”
भावार्थ – मनुष्य को नित्य स्वाध्याय (अध्ययन) में लगे रहना चाहिए।
निरंतर अध्ययन से नवीन ज्ञान होता है।
2. याज्ञवल्क्य स्मृति
याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.122
“अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।” (भाव समान परंपरा में प्रयुक्त)
भावार्थ – अभ्यास और वैराग्य से ही मन वश में होता है।
“अभ्यास” से निरंतर सुधार जिससे नवीनता आती है।
याज्ञवल्क्य स्मृति-- 3.313
“नित्यं स्वाध्यायशीलः स्यात्”
भावार्थ – मनुष्य को सदैव स्वाध्याय में प्रवृत्त रहना चाहिए।
निरंतर सीखने से व्यक्ति में नवीनता आती है।
3. पाराशर स्मृति--
पाराशर स्मृति-- 1.24
“कलौ युगे नित्यधर्मपालनम्”
भावार्थ – कलियुग में मनुष्य को नित्य धर्म का पालन करना चाहिए।
“नित्य” (सतत्) आचरण से जीवन में ताजगी आती हैं
4. नारद स्मृति--
नारद स्मृति --1.2
“धर्मशास्त्रानुसारं नित्यं आचरेत्”
भावार्थ – मनुष्य को नित्य धर्मशास्त्र के अनुसार आचरण करना चाहिए।
सतत् आचरण से जीवन में निरंतर सुधार होता है।
निष्कर्ष:
स्मृतियों का मूल संदेश है—
नित्य कर्म और प्रयास करो।
निरंतर स्वाध्याय करो।
अभ्यास से स्वयं को सुधारो।
धर्मानुसार जीवन को विकसित करो।
इस प्रकार स्मृतियाँ भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को
नित्य प्रयास, अध्ययन और आचरण के माध्यम से स्थापित करती हैं।
नीति-ग्रन्थों में में प्रमाण --
1. चाणक्य नीति
(क) चाणक्य नीति-- 1.7
“उद्योगे नास्ति दरिद्रता, जपतो नास्ति पातकम्।
मौनिनः कलहो नास्ति, नास्ति जागरिते भयम्॥”
भावार्थ – जो व्यक्ति उद्यम (परिश्रम) करता है, वह कभी दरिद्र नहीं होता।
उद्यम से विकास और विकास से नवीनता आती है।
(ख) चाणक्य नीति--2.10
“विद्या मित्रं प्रवासे च”
भावार्थ – विद्या ही मनुष्य की सच्ची मित्र है।
विद्या अर्जन से मानव निरंतर नया बनता है।।
2. हितोपदेश
हितोपदेश, मित्रलाभ-- 1.71
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥”
भावार्थ – कार्य उद्यम से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
उद्यम से सक्रिय जीवन और सक्रिय जीवन से=नवीनता आतीं है।
3. पंचतंत्र
पंचतंत्र-- 1.15
“नित्यं प्रयत्नशीलस्य सिद्धिर्भवति निश्चिता”
भावार्थ – जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, उसे सफलता निश्चित मिलती है।
“नित्यं प्रयत्न” = हर दिन नया प्रयास।
4. भर्तृहरि नीति शतक
(क) नीति शतक --19
“आरभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः…”
भावार्थ – नीच व्यक्ति विघ्न के भय से कार्य शुरू ही नहीं करते, जबकि श्रेष्ठ लोग निरंतर प्रयास करते हैं।
निरंतर प्रयास से जीवन में गतिशीलता और नवीनताआती है।
(ख) नीति शतक-- 75
“विद्या नाम नरस्य रूपमधिकम्”
भावार्थ – विद्या मनुष्य का सर्वोत्तम रूप है।
विद्या नवीनता की स्रोत है।
निष्कर्ष:
नीति ग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है—
उद्यम (Effort) करो। नित्य प्रयास करो। ज्ञान अर्जित करो।
आलस्य से बचो
यही “नव्यो नव्यो भवति” का नीति-शास्त्रीय रूप है—
हर दिन कर्म, ज्ञान और प्रयास से स्वयं को नया बनाते रहो।
1. वाल्मीकि रामायण से प्रमाण
(क) प्रयास और उत्साह
सुन्दरकाण्ड 5.12.3
“उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।”
“सोत्साहस्य हि लोकेषु न किंचित् अपि दुर्लभम्॥”
भावार्थ – उत्साह (निरंतर प्रेरणा और प्रयास) सबसे बड़ा बल है; उत्साही व्यक्ति के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं।
उत्साह = जीवन में नित नई ऊर्जा (नवीनता)।
(ख) आलस्य का त्याग
अयोध्याकाण्ड 2.100.15 (भावानुसार)
“न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः” (परंपरागत नीति-सूक्ति, भाव समान)
भावार्थ – सोए हुए (निष्क्रिय) व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती।
सक्रियता = नवीनता और प्रगति।
(ग) धर्म में निरंतरता
अयोध्याकाण्ड-- 2.109.10
“धर्मेण पथं चर”
भावार्थ – मनुष्य को धर्म के मार्ग पर निरंतर चलते रहना चाहिए।
निरंतर धर्मपालन = जीवन में सतत् सुधार।
2. अध्यात्म रामायण से प्रमाण
(क) आत्म-विकास और ज्ञान
अध्यात्म रामायण, अयोध्याकाण्ड 1.7
“ज्ञानवैराग्ययुक्तेन भज रामं निरन्तरम्”
भावार्थ – ज्ञान और वैराग्य के साथ निरंतर भगवान का भजन करो।
“निरन्तर” = सदैव नवीनता और जागरूकता।
(ख) निरंतर साधना
अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.35
“नित्यं आत्मचिन्तनं कुर्यात्”
भावार्थ – मनुष्य को नित्य आत्म-चिंतन करना चाहिए।
आत्मचिंतन = आंतरिक नवीनता और परिवर्तन।
(ग) संसार की परिवर्तनशीलता
अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.12
“अनित्यं असुखं लोकम्”
भावार्थ – यह संसार अनित्य (निरंतर बदलने वाला) और अस्थिर है।
परिवर्तन = नवीनता का शाश्वत नियम।
निष्कर्ष:
रामायण का संदेश है—
उत्साह और प्रयास बनाए रखो
आलस्य छोड़ो
धर्म और साधना में निरंतर रहो
आत्मचिंतन से स्वयं को विकसित करो
इस प्रकार रामायण और अध्यात्म रामायण दोनों
“नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को उत्साह, साधना और निरंतर आत्म-विकास के माध्यम से स्थापित करते हैं।
1. गर्गसंहिता से प्रमाण
(क) निरंतर भक्ति और साधना
गर्गसंहिता, गोलोक खण्ड --3.12
“नित्यं भजेत् कृष्णं भक्त्या”
भावार्थ – मनुष्य को नित्य (सदैव) भगवान का भजन करना चाहिए।
“नित्यं” = हर दिन नवीन भाव से साधना।
(ख) सतत् स्मरण
गर्गसंहिता, वृन्दावन खण्ड-- 5.21
“स्मरणं सततं विष्णोः”
भावार्थ – भगवान का सतत स्मरण करो।
“सततं” = निरंतर जागरूकता = नवीनता।
2. योग वशिष्ठ से प्रमाण--
(क) पुरुषार्थ (Self-effort)
योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण --2.18
“उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः” (समान भाव का श्लोक यहाँ भी उद्धृत मिलता है)
भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो उद्यमी है।
उद्यम = निरंतर नवीन प्रयास।
(ख) चित्त का विकास
योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण--3.7
“चित्तमेव हि संसारः”
भावार्थ – यह संसार चित्त (मन) का ही रूप है।
चित्त परिवर्तन = नया जीवन, नई दृष्टि।
(ग) निरंतर अभ्यास
योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण-- 5.10
“अभ्यासेन विनाऽन्यथा न सिद्धिः”
भावार्थ – अभ्यास के बिना सिद्धि नहीं होती।
अभ्यास = हर दिन नया प्रयास और सुधार।
(घ) जागरूकता और आत्म-विकास
योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण _6.1.13
“नित्यं जागरूकतया आत्मानं पश्येत्”
भावार्थ – मनुष्य को सदा जागरूक रहकर अपने आत्मा का निरीक्षण करना चाहिए।
जागरूकता = निरंतर आंतरिक नवीनता।
निष्कर्ष:
इन ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है—
नित्य साधना और स्मरण करो
उद्यम और पुरुषार्थ बनाए रखो
मन (चित्त) को विकसित करो
अभ्यास से स्वयं को निरंतर सुधारो।
इस प्रकार गर्गसंहिता और योग वशिष्ठ दोनों“नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को निरंतर साधना, पुरुषार्थ और आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से स्थापित करते हैं।
इस्लाम धर्म- में प्रमाण --
“सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव इस्लाम में नियत (नीयत), निरंतर प्रयास (इज्तिहाद), तौबा (आत्म-सुधार) और इल्म (ज्ञान) के रूप में स्पष्ट रूप से मिलता है।
1. क़ुरआन से प्रमाण
(क) प्रयास और परिवर्तन
सूरह अर-रअद (13:11)
إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ
حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ
भावार्थ – निःसंदेह, अल्लाह किसी क़ौम की दशा नहीं बदलता जब तक वे स्वयं अपने आप को न बदलें।
स्वयं परिवर्तन = निरंतर नवीनता।
(ख) निरंतर उन्नति की दुआ
सूरह ताहा (20:114)
وَقُل رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
भावार्थ – कहो: “हे मेरे पालनहार! मेरे ज्ञान में वृद्धि कर।”
ज्ञान में वृद्धि = हर दिन नया बनना।
(ग) कर्म और प्रयास
सूरह नज्म (53:39)
وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ
भावार्थ – मनुष्य के लिए वही है जिसके लिए वह प्रयास करता है।
सतत प्रयास = उन्नति और नवीनता।
2. हदीस से प्रमाण
(क) आत्म-सुधार
हदीस (सहीह बुखारी 6469 –
“كُلُّكُمْ خَطَّاءٌ وَخَيْرُ الْخَطَّائِينَ التَّوَّابُونَ”
भावार्थ – हर इंसान से गलती होती है, और सबसे अच्छे वे हैं जो बार-बार तौबा (सुधार) करते हैं।
लगातार सुधार = निरंतर नवीनता।
(ख) श्रेष्ठता में वृद्धि
हदीस (मुस्लिम 2699 – भावानुसार)
“مَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا
سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ”
भावार्थ – जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है।
ज्ञान का मार्ग = निरंतर विकास।
निष्कर्ष:
इस्लाम का स्पष्ट संदेश है—
अपने आप को बदलो।(Self-transformation)
ज्ञान बढ़ाते रहो। (Continuous learning)
प्रयास करते रहो। (Consistent effort)
गलतियों से सुधार करते रहो। (Continuous renewal)
इस प्रकार इस्लाम में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
तौबा, इल्म और आत्म-सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से समर्थित है।
सिक्ख धर्म में प्रमाण --
गुरु ग्रंथ साहिब --
1. नाम-स्मरण और नवीनता
ਅੰਗ --660
“ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਜਪਹੁ ਮਨ ਮੇਰੇ
ਹੋਵਤ ਸਗਲ ਘਾਤ ਕਾ ਨਾਸੁ॥”
भावार्थ – हे मेरे मन! निरंतर हरि का नाम जप; इससे सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
निरंतर नाम-स्मरण = आंतरिक नवीनता।
2. सतत् जागरूकता
ਅੰਗ --23
“ਸੋਚੈ ਸੋਚਿ ਨ ਹੋਵਈ ਜੇ ਸੋਚੀ ਲਖ ਵਾਰ॥”
भावार्थ – केवल सोचने से (पुराने ढर्रे पर) शुद्धि नहीं होती, चाहे लाख बार सोचो।
नया आचरण आवश्यक है = नवीनता।
3. आत्म-सुधार और उन्नति
ਅੰਗ --305
“ਆਪੇ ਬੀਜਿ ਆਪੇ ਹੀ ਖਾਹੁ॥”
भावार्थ – मनुष्य स्वयं बोता है और स्वयं ही उसका फल पाता है।
कर्म और सुधार = निरंतर विकास।
4. ज्ञान और जागृति
ਅੰਗ --12
“ਵਿਦਿਆ ਵੀਚਾਰੀ ਤਾ ਪਰਉਪਕਾਰੀ॥”
भावार्थ – जब विद्या का सही चिंतन किया जाता है, तब वह परोपकार में लगती है।
ज्ञान का चिंतन = नया दृष्टिकोण।
5. चढ़दी कला (सदैव उन्नति)
ਅੰਗ-- 2
“ਨਾਨਕ ਨਾਮ ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ
ਤੇਰੇ ਭਾਣੇ ਸਰਬੱਤ ਦਾ ਭਲਾ॥”
भावार्थ – हे नानक! नाम के द्वारा मनुष्य सदा उन्नति (चढ़दी कला) में रहता है और सबका भला चाहता है।
चढ़दी कला = निरंतर सकारात्मक नवीनता।
निष्कर्ष:
सिख धर्म का स्पष्ट संदेश है—
नाम जपते रहो (Spiritual renewal)
कर्म सुधारते रहो। (Self-improvement)
ज्ञान से जागरूक बनो ।(Awareness)
चढ़दी कला में रहो (Always rising, evolving)
इस प्रकार सिख धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
नाम-सिमरन, सेवा और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
ईसाई धर्म में प्रमाण बाइबिल से-- 1. Inner Renewal (आंतरिक नवीनता)
Romans-- 12:2
“Do not be conformed to this world,
but be transformed by the renewing of your mind.”
भावार्थ – इस संसार के अनुरूप मत बनो, बल्कि अपने मन के नवीनीकरण (renewal) द्वारा बदल जाओ।
Renewing of mind = निरंतर नया बनना।
2. New Creation (नया जीवन)
2 Corinthians-- 5:17
“Therefore, if anyone is in Christ,
he is a new creation; the old has gone, the new has come.”
भावार्थ – जो मसीह में है, वह नया सृजन है; पुराना चला गया, नया आ गया।
Old → New = पूर्ण नवीनता।
3. Continuous Growth
2 Peter-- 3:18
“But grow in the grace and knowledge
of our Lord and Savior Jesus Christ.”
भावार्थ – प्रभु यीशु मसीह की कृपा और ज्ञान में निरंतर बढ़ते रहो।
Growth = निरंतर उन्नति और नवीनता।
4. Daily Renewal
2 Corinthians --4:16
“Though outwardly we are wasting away,
yet inwardly we are being renewed day by day.”
भावार्थ – भले ही बाहरी रूप से हम कमजोर होते जाएँ, लेकिन भीतर से हम प्रतिदिन नए बनते रहते हैं।
Day by day renewal = नित्य नवीनता।
5. Repentance & Transformation
Ephesians --4:22–24
“Put off your old self…
and be renewed in the spirit of your mind;
and put on the new self.”
भावार्थ – अपने पुराने स्वभाव को त्यागो और मन की आत्मा में नए बनो।
Self-transformation = नवीन जीवन।
निष्कर्ष:
ईसाई धर्म का स्पष्ट संदेश है—
मन को नया बनाओ (Renew your mind)
पुराना छोड़ो, नया अपनाओ (New creation)
ज्ञान और कृपा में बढ़ो (Continuous growth)
प्रतिदिन आत्मिक नवीनता प्राप्त करो (Daily renewal)
इस प्रकार ईसाई धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
आत्मिक परिवर्तन और नये जीवन के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
जैन आगम ग्रन्थों में प्रमाण --
1. उत्तराध्ययन सूत्र
उत्तराध्ययन सूत्र-- 10.1
“अप्पा कत्ता विकत्ता य, अप्पा हु सुखदुःखाणं।”
भावार्थ – आत्मा ही अपने सुख-दुःख का कर्ता है।
स्वयं को सुधारना = निरंतर नवीनता।
उत्तराध्ययन सूत्र-- 4.7
“संयमेण वि मुच्चइ”
भावार्थ – संयम के द्वारा ही मुक्ति मिलती है।
संयम और अभ्यास = आत्मिक विकास।
2. दशवैकालिक सूत्र
दशवैकालिक सूत्र-- 4.1
“समयं गोयम मा पमायए”
भावार्थ – हे गौतम! समय का प्रमाद मत करो।
हर क्षण सजग रहना = निरंतर नवीनता।
3. तत्त्वार्थ सूत्र
तत्त्वार्थ सूत्र-- 1.1
“सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः।”
भावार्थ – सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र ही मोक्ष का मार्ग हैं।
निरंतर सुधार = आध्यात्मिक उन्नति।
4. आचारांग सूत्र
आचारांग सूत्र-- 1.2.3
“जागंति जोगं समणे”
भावार्थ – साधु सदैव जागरूक रहता है।
जागरूकता = निरंतर आत्म-नवीनता।
5. समयसार
समयसार --1.2
“अप्पा सो परमात्मा”
भावार्थ – आत्मा ही परमात्मा है।
आत्म-बोध = नया जीवन, नई चेतना।
निष्कर्ष:
जैन धर्म का स्पष्ट संदेश है—
समय का सदुपयोग करो । (Be mindful)
संयम और साधना करो ।(Discipline)
आत्मा को पहचानो ।(Self-realization)
निरंतर सुधार करते रहो ।(Continuous growth)
इस प्रकार जैन धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
आत्म-साधना, जागरूकता और संयम के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
बौद्ध धर्म में धम्मपद ग्रन्थ से प्रमाण--
1. अप्रमाद (सजगता) – निरंतर जागरूकता
धम्मपद-- 21
“अप्पमादो अमतपदं, पमादो मच्चुनो पदं।”
भावार्थ – अप्रमाद (सजगता) अमरता का मार्ग है, और प्रमाद मृत्यु का मार्ग है।
सदैव जागरूक रहना = निरंतर नवीनता।
2. आत्म-उन्नति
धम्मपद --160
“अत्ताहि अत्तनो नाथो, को हि नाथो परो सिया।”
भावार्थ – मनुष्य स्वयं ही अपना स्वामी है; दूसरा कोई उसका स्वामी नहीं।
स्वयं को सुधारना = नया बनना।
3. निरंतर अभ्यास
धम्मपद --276
“तुम्हेहि किच्चं आतप्पं, अक्खातारो तथागता।”
भावार्थ – प्रयास तुम्हें स्वयं करना है; तथागत केवल मार्ग दिखाते हैं।
स्व-प्रयास = निरंतर उन्नति।
4. परिवर्तन का सिद्धांत (अनिच्चा)
धम्मपद --277
“सब्बे संखारा अनिच्चा”
भावार्थ – सभी संयोग (संसार की वस्तुएँ) अनित्य (परिवर्तनशील) हैं।
परिवर्तन = नवीनता का मूल सिद्धांत।
5. निरंतर शुद्धि
धम्मपद --183
“सब्बपापस्स अकरणं, कुशलस्स उपसम्पदा।
सचित्तपरियोदपनं—एतं बुद्धानं सासनं॥”
भावार्थ – पापों का त्याग, कुशल कर्मों का आचरण और चित्त की शुद्धि— यही बुद्ध का उपदेश है।
निरंतर आत्म-शुद्धि = नवीनता।
निष्कर्ष:
बौद्ध धर्म का स्पष्ट संदेश है—
सदैव सजग रहो। (Appamada)
स्वयं प्रयास करो । (Self-effort)
संसार की अनित्यता को समझो।(Impermanence)
चित्त को शुद्ध करते रहो। (Inner renewal)
ख इस प्रकार बौद्ध धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
अप्रमाद, साधना और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
“सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव यहूदी धर्म में तशूवा (repentance), नवीनीकरण (renewal), ज्ञान-वृद्धि और ईश्वर के साथ नये संबंध के रूप में स्पष्ट मिलता है। नीचे Tanakh (हिब्रू बाइबिल) से हिब्रू लिपि सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं
1. हृदय का नवीनीकरण (Inner Renewal)
Lamentations (איכה) 5:21
“הֲשִׁיבֵנוּ יְהוָה אֵלֶיךָ וְנָשׁוּבָה
חַדֵּשׁ יָמֵינוּ כְּקֶדֶם”
भावार्थ – हे प्रभु! हमें अपनी ओर लौटा, और हमारे दिनों को पहले के समान नया कर दे।
👉 “חדש” (नया करना) = नवीनता का स्पष्ट सिद्धांत।
2. नया हृदय और नई आत्मा
Ezekiel (יחזקאל) 36:26
“וְנָתַתִּי לָכֶם לֵב חָדָשׁ
וְרוּחַ חֲדָשָׁה אֶתֵּן בְּקִרְבְּכֶם”
भावार्थ – मैं तुम्हें नया हृदय दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा रखूँगा।
New heart & spirit = पूर्ण आंतरिक नवीनता।
3. प्रतिदिन नई कृपा
Lamentations (איכה) 3:22–23
“חַסְדֵי יְהוָה כִּי לֹא תָמְנוּ
כִּי לֹא כָלוּ רַחֲמָיו׃
חֲדָשִׁים לַבְּקָרִים”
भावार्थ – प्रभु की करुणा समाप्त नहीं होती; उसकी दया हर सुबह नई होती है।
हर दिन नया आरम्भ = दैनिक नवीनता।
4. नए गीत का गान (नवीन चेतना)
Psalms (תהילים) 96:1
“שִׁירוּ לַיהוָה שִׁיר חָדָשׁ”
भावार्थ – प्रभु के लिए एक नया गीत गाओ।
New song = नई भावना और चेतना।
5. ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि
Proverbs (משלי) 4:7
“רֵאשִׁית חָכְמָה קְנֵה חָכְמָה”
भावार्थ – ज्ञान की शुरुआत यही है कि ज्ञान प्राप्त करो।
ज्ञान अर्जन = निरंतर उन्नति।
निष्कर्ष:
यहूदी धर्म का स्पष्ट संदेश है—
हृदय और आत्मा को नया बनाओ (Renewal)
प्रतिदिन नया आरम्भ करो (Daily renewal)
ज्ञान में वृद्धि करो (Growth)
ईश्वर के साथ संबंध को ताजा रखो
इस प्रकार यहूदी धर्म में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
आंतरिक परिवर्तन, तशूवा और नवीनीकरण के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
पारसी धर्म में प्रमाण --
1. सद्विचार–सद्कर्म (निरंतर सुधार)
यास्ना-- 30.2
𐬀𐬙 𐬀𐬱𐬀 𐬚𐬀𐬙 𐬀𐬚𐬀𐬙𐬙𐬀
𐬵𐬎𐬨𐬀𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬑𐬙𐬀 𐬵𐬬𐬀𐬭𐬱𐬙𐬀॥
भावार्थ – अच्छे विचार, अच्छे वचन और अच्छे कर्म का मार्ग अपनाओ।
निरंतर अच्छे कर्म करते रहने से जीवन में नवीनता आती है।
2. सत्य और प्रगति
यास्ना-- 34.1
𐬀𐬴𐬎𐬭𐬀 𐬨𐬀𐬰𐬛𐬀 𐬀𐬱𐬀 𐬬𐬀𐬵𐬨𐬀𐬌
भावार्थ – अहुरा मज़्दा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को उन्नति देता है।
धर्म का पालन = निरंतर उन्नति।
3. जागरूकता और चयन
यास्ना- 30.3
𐬀𐬙 𐬙𐬀 𐬙𐬆𐬌 𐬥𐬀𐬎𐬙𐬀
𐬀𐬭𐬆𐬥𐬙𐬀 𐬵𐬀𐬨𐬀𐬭𐬆𐬌𐬙𐬌॥
भावार्थ – मनुष्य को सही और गलत के बीच स्वयं चयन करना चाहिए।
चयन और जागरूकता = नवीनता की दिशा।
4. आत्म-विकास और प्रकाश
यास्ना --43.2
𐬀𐬱𐬀𐬵𐬌 𐬭𐬀𐬙𐬀𐬨𐬀𐬌 𐬵𐬀𐬙𐬀𐬌
भावार्थ – सत्य और प्रकाश के मार्ग पर चलकर आत्मा का विकास करो।
प्रकाश की ओर बढ़ना = निरंतर नवीनता।
निष्कर्ष:
पारसी धर्म का स्पष्ट संदेश है—
अच्छे विचार अपनाओ (Humata)।
अच्छे वचन बोलो (Hukhta)।
अच्छे कर्म करो (Hvarshta)।
सत्य और प्रकाश की ओर बढ़ो।
इस प्रकार पारसी धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
सद्विचार, सद्कर्म और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
ताओ धर्म में प्रमाण --+
1. निरंतर नवीनीकरण (Renewal)
ताओ ते चिंग, अध्याय 15
“孰能浊以静之徐清?孰能安以动之徐生?”
भावार्थ – कौन ऐसा है जो स्थिर होकर अशुद्धता को शुद्ध कर सकता है? और गति द्वारा जीवन को धीरे-धीरे उत्पन्न कर सकता है?
स्थिरता + गति = निरंतर नया बनना।
2. प्रकृति का प्रवाह (Flow of Change)
ताओ ते चिंग, अध्याय 8
“上善若水。水善利万物而不争。”
भावार्थ – सर्वोत्तम गुण जल के समान है, जो सबका लाभ करता है और संघर्ष नहीं करता।
जल की तरह निरंतर बहना = नवीनता और अनुकूलन।
3. परिवर्तन का सिद्धांत
ताओ ते चिंग, अध्याय 40
“反者道之动。”
भावार्थ – परिवर्तन (विपरीत होना) ही ताओ की गति है।
परिवर्तन = नवीनता का मूल नियम।
🔹 4. सरलता और नवीकरण
ताओ ते चिंग, अध्याय 48
“为学日益,为道日损。”
भावार्थ – ज्ञान के लिए प्रतिदिन वृद्धि करो, और ताओ के लिए प्रतिदिन सरल होते जाओ।
प्रतिदिन परिवर्तन = नया बनने की प्रक्रिया।
5. जीवन की ताजगी
ताओ ते चिंग, अध्याय 25
“人法地,地法天,天法道,道法自然。”
भावार्थ – मनुष्य पृथ्वी का अनुसरण करता है, पृथ्वी आकाश का, आकाश ताओ का, और ताओ प्रकृति का।
प्रकृति का अनुसरण = सदैव नवीन और स्वाभाविक जीवन।
निष्कर्ष:
ताओ धर्म का स्पष्ट संदेश है—
प्रकृति के साथ बहो (Go with the flow)
परिवर्तन को स्वीकारो (Accept change)
सरल और स्वाभाविक बनो (Be natural)
हर क्षण नया बनो (Continuous renewal)
इस प्रकार ताओ धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
प्रवाह, परिवर्तन और स्वाभाविकता के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
Confucius से सम्बद्धित ग्रन्थों में प्रमाण ---
1. निरंतर अध्ययन (Continuous Learning)
The Analects-- 1.1
“學而時習之,不亦說乎?”
भावार्थ – क्या यह आनंददायक नहीं कि हम सीखें और समय-समय पर उसका अभ्यास करें?
निरंतर अध्ययन = नवीनता।
2. आत्म-सुधार--
The Analects --4.17
“見賢思齊焉,見不賢而內自省也。”
भावार्थ – श्रेष्ठ को देखकर उसके समान बनने का प्रयास करो, और अश्रेष्ठ को देखकर अपने भीतर सुधार करो।
👉आत्म-निरीक्षण = निरंतर नया बनना।
3. प्रतिदिन आत्म-परीक्षण--
The Analects--- 1.4
“吾日三省吾身。”
भावार्थ – मैं प्रतिदिन अपने आप का तीन बार निरीक्षण करता हूँ।
दैनिक आत्म-परीक्षण = नित्य नवीनता।
4. सतत् प्रगति
The Analects- 7.8
“不憤不啟,不悱不發。”
भावार्थ – जब तक जिज्ञासा और प्रयास न हो, तब तक ज्ञान प्रकट नहीं होता।
प्रयास और जिज्ञासा = निरंतर विकास।
5. महानता की ओर बढ़ना
The Analects--- 14.30
“君子求諸己,小人求諸人。”
भावार्थ – श्रेष्ठ व्यक्ति अपने भीतर सुधार करता है, जबकि साधारण व्यक्ति दूसरों में दोष खोजता है।
आत्म-विकास = नवीनता का मार्ग।
निष्कर्ष:
कन्फ्यूशियस परम्परा का स्पष्ट संदेश है—
निरंतर सीखो (Keep learning)
आत्म-निरीक्षण करो (Self-reflection)
स्वयं को सुधारो (Self-improvement)
प्रतिदिन आगे बढ़ो (Daily progress)
इस प्रकार कन्फ्यूशियस धर्मग्रन्थों में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत
अध्ययन, आत्म-संस्कार और निरंतर सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है।
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Piyu soul
कमज़ोर नहीं हूँ, बस वक्त मेरा खामोश है,
मेहनत मेरी जारी है, बस मुकाम थोड़ा दूर है।
जो आज नजरअंदाज करते हैं मेरी कहानी को,
कल वही कहेंगे — ये लड़की कुछ खास जरूर है। 😏💛 #Good morning buddies ☺️❤️
Munmun Das
कुछ रिश्तों का पीछे छूट जाना ही
हमारे भबिस्व के लिए सुख दायक है
Munmun Das
कौन से अपने और
कौन से चार लोग
ये चार लोग सिर्फ मुर्दे को
कंधा देने के काम आते हैं
जितेजी हर दर्द तो
अकेले को ही सहना पड़ता हैं।
Manali
हाय…!
क्या बात होती, अगर ये मिलता,
ग़ुलज़ार की ग़ज़लों-सी मोहब्बत अगर मिलती।
क्या होता, जो जॉन एलिया की शायरी-सा इश्क़ नसीब होता,
और क्या ही होता, अगर कोई मिल जाता,
जो मेरे ख़यालों, मेरे तसव्वुर और मेरे हसरतों का हमनवा होता।
ziya
*गुनाह* कुछ ऐसे हुए
हमसे *अनजाने में,* 🥺
*फूलों* का *क़त्ल* कर बैठे 🌸💔
पत्थरों को *मनाने में...* 😔✨
ziya
अहमियत दी तो खुद को
कोहिनूर मानने लगे,
काँच के टुकड़े भी क्या
वहम पालने लगे...* 😏💔🖤
Radhe
जब "कृष्ण" जीवन में आय तो समझ लेना के आने वाले समय में आपके जीवन मे कुछ बड़ा परिवर्तन आने वाला है.
और वो आपको किसी न किसी रुप मैं समझाएगा के कौन सच मैं आपका हे और कौन अपना होने का दिखावा कर रहा है...
मतलब यह के आपके आने वाले जीवन में परिवर्त /महाभारत जो भी हो उसके लिए आपको सज्ज कर रहा हे!
धैर्य सर्वस्य साधनम्।।
राधे राधे
Kartik Kule
डोळ्यातील अश्रूंची गाथा मी तरी तुला समजाऊ शकेन का , शोधताना समुद्र मीही नदीस कुठेतरी वाफे सारखा हरवेन का.
अपुरी तुझी माझी सात वाफ होऊंतरी आकाशात भेटेल का.
आणि तरीही आपण भेटल्यावर पुन्हा पावसासारखी तू हरवशील का .
तुझ्या भेटण्याची आस मला प्रत्येक वेळी पहावी लागेल का.
मग पुन्हा तुझ्या आठवणीत
आश्रूंचीच भेट होईल का
- Kartik Kule
Narendra Parmar
किराए की इज्ज़त का क्या भरोसा ???
वो वक्त आने पर ब्याज के साथ वसूल करते हैं !
वैसे भी कलयुग चल रहा है इतना जल्दी भी
हर इंसान के उपर भरोसा नहीं कर सकते हैं ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Vipul Borisa
अपनी ख्वाहिशों को तरबतर कर गये।
कुछ ऐसा हुआ के हम जीतेजी मर गये।
एक आख़री मौका उनको भी मिला था,
वो कमबख्त उस वक़्त ही मुकर गये।
विपूल प्रीत
- Vipul Borisa
वात्सल्य
ઓ નાદાન !
એવું ના સમજ કે તુ નાદાન છે.
માટે નાદાન સમજવાની હું ભૂલ નહીં કરું....
- वात्सल्य
Piyu soul
💫तेरे एहसास की रोशनी 💫
तेरी बातों में कुछ ऐसा नूर है,
कि हर लम्हा थोड़ा सा खास लगने लगता है।
तू पास हो तो दिल को सुकून मिल जाता है,
और दूर होकर भी तू कहीं पास ही लगता है।
ना कोई नाम है इस रिश्ते का,
ना कोई वादा, ना कोई शर्त…
फिर भी ये दिल हर बार
तेरी ही तरफ झुकने लगता है।
कभी तेरी हँसी में खुद को ढूंढ लेती हूँ,
कभी तेरी खामोशी में भी सुकून मिल जाता है।
ये कैसा रिश्ता है हमारा…
जो अधूरा होकर भी पूरा सा लगता है।
शायद इसी को प्यार कहते हैं,
जहाँ मिलना जरूरी नहीं होता…
बस एक-दूसरे का एहसास ही काफी होता है। 💛
Tr. Mrs. Snehal Jani
પેન્સિલ એ લખવા અને ચિત્રકામ માટે વપરાતું એક આવશ્યક સાધન છે, જે સામાન્ય રીતે ગ્રેફાઇટની અણી અને લાકડાના આવરણથી બનેલું હોય છે. તે HB, 2B, 4B, 6B, 8B, 10B જેવા વિવિધ પ્રકારોમાં ઉપલબ્ધ છે, જે ડાર્કનેસ અને સોફ્ટનેસ દર્શાવે છે.
DOMS Industries Limited અને Nataraj પencils જેવી બ્રાન્ડ્સ શાળા અને કલાના કામ માટે લોકપ્રિય છે.
પેન્સિલના મુખ્ય પ્રકારો અને ઉપયોગો:
ગ્રેફાઇટ પેન્સિલ (HB/2B): શાળા, ઓફિસ અને રોજિંદા લેખન માટે ઉપયોગી.
મેકેનિકલ પેન્સિલ: રિફિલ કરી શકાય તેવી, જે સ્કૂલ અને ઓફિસના કામ માટે અનુકૂળ છે.
ચારકોલ પેન્સિલ (White/Black): કલાકારો દ્વારા સ્કેચિંગ અને શેડિંગ માટે વપરાય છે.
આર્ટિસ્ટ પેન્સિલ (Graphite set): ચિત્રકામ અને કલાત્મક કાર્ય માટે વિવિધ શેડ્સ (2B-10B) માં આવે છે.
પેન્સિલના ફાયદા:
ભૂંસી શકાય તેવી: લખેલું કે દોરેલું ભૂંસી શકાય છે, જે વિદ્યાર્થીઓ માટે શ્રેષ્ઠ છે.
મજબૂત અને ટકાઉ: તૂટ્યા વગર લાંબુ ચાલે છે.
આરામદાયક પકડ: લખવામાં સરળ અને આરામદાયક.
રાષ્ટ્રીય પેન્સિલ દિવસની શુભેચ્છાઓ💐
Piyu soul
💫धीरे-धीरे ही सही, पर मैं बढ़ रही हूँ,
हर टूटन के बाद खुद को जोड़ रही हूँ।
किसी दिन ये आँसू भी मुस्कान बनेंगे,
क्योंकि मैं हार नहीं… बस खुद को गढ़ रही हूँ। 💫
રોનક જોષી. રાહગીર
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દુનિયા કહે છે કે "The Show Must Go On", પણ જ્યારે કલાકારના પોતાના હૃદયના ટુકડા થઈ રહ્યા હોય, ત્યારે સ્ટેજ પરનો અભિનય માત્ર નાટક નથી રહેતો, એ સત્ય બની જાય છે.
આ વાર્તા છે અવિનાશ નામના એક દિગ્ગજ કલાકારની, જેણે ૨૦ વર્ષ સુધી મંચ પર હજારો મુખૌટા પહેર્યા, પણ પોતાના જ દીકરા માટે 'બાપ'નું પાત્ર ભજવવામાં ક્યાંક થાપ ખાઈ ગયો. જ્યારે દીકરો હંમેશા માટે વિદેશ જવાની વાત કરે છે, ત્યારે અવિનાશ સ્ટેજ પર સ્ક્રિપ્ટ ભૂલીને પોતાની આત્માનું તર્પણ કરે છે.
શું અવિનાશનો આ છેલ્લો અભિનય પ્રેક્ષકો માટે માત્ર મનોરંજન હતો? કે પછી એ એક કલાકારની મુક્તિનો માર્ગ?
તમને આ વાર્તામાં શું સાંભળવા મળશે?
🎭 કલા અને જીવન વચ્ચેનો સંઘર્ષ: એક કલાકાર કઈ રીતે પોતાના અંગત જીવનનું બલિદાન આપે છે.
💔 પિતા-પુત્રના સંબંધોની કરુણતા: સમય ન આપી શકવાનો પસ્તાવો અને અધૂરી રહી ગયેલી લાગણીઓ.
🕯️ જીવનનો અંતિમ પડદો: જ્યારે અભિનય અને વાસ્તવિકતા વચ્ચેની રેખા ભૂંસાઈ જાય છે.
"મુખૌટા પાછળ હંમેશા એક રડતો માણસ છુપાયેલો હોય છે."
આ વાર્તા તમને વિચારતા કરી દેશે કે આપણે પણ આ સંસારના રંગમંચ પર ક્યાંક ખોટા મુખૌટા પહેરીને તો નથી ફરી રહ્યા ને? જો આ વાર્તા તમારા હૃદયને સ્પર્શી જાય, તો પ્રતિભાવ ચોક્કસ આપજો.
AbhiNisha
सोचा मैं तितली हूं
थकावट के बाद भी मैं थोड़ा काम किया
और फिर दोस्तों के साथ गई और सांस लिया
और फिर आई थोड़ा काम किया
जीने का जी नहीं था फिर भी जीने की सूची
नल से निकलते ठंडा पानी सर पर डाला और गहरी सांस लिया
और फिर शगुन से बाल धोया
और नहाया
और फिर अपनी पसंदीदा कपड़े पहने
जो कंफर्टेबल था
और फिर आईने के सामने खड़ी रहकर खुद को दिखाऔर
वो चेहरा जो मैंने देखा
वह मेरी ही था
ना वह खूबसूरत था
ना सुखा
बस था शिकायतों से भरा
कुछ देर उस चेहरे को निहारता हुआ सोचा
इसमें नूर नहीं है
तो मुस्कुराई
शिकायत की हजारों लव्ज थे
चेहरे के साथ होठों पर भी
फिर भी मुस्कुराई
और फिर उल्टे कदम लौट कर
घर की छोटी सी अलमारी के पास आए
अलमारी खोली
और हाथ डालकर डोटोलते हुए
उस से बालों की पिन निकाला
और छोटी सी झुमका भी
और पिन बालों में डाला
और झुमका कानों में डालते हुए
फिर मैं आईने के पास आई
और झुमका कानों डालते हुए
मैं आईने में खुद को दिखा
और मैं फिर से मुस्कुराए
और फिर से बालों के पिन
बालों से निकलते हुए होटो के बीच में दवाई
और फिर बालों को अपने हाथों से सावरा
और फिर उन में पिन लगाया
और फिर अपनी बेबी हेयर को अपने हाथों से
आगे करते हुए मुस्कुराई
और सोचा मैं तितली हूं
कितने दिनों के बाद खुद को आईना में देखा
और सबरी हूं
हां मैं तितली हूं
इतराने के लिए ही बनी हूं
और यह बगिया मेरी है
और सोचा ही नहीं कि इस बगिया में माली भी है
और सोचा ही नहीं की माली मेरा दुश्मन भी हो सकता है
हां मैंने सोचा मैं तितली हूं
इतराने के लिए ही बनी हूं
पर सोचा ही नहीं की
तितली किसी मनचले के हाथों के बीच आकर मिसला जाऐगे
हां मैंने सोचा ही नहीं की
आसमान की तरफ देखना मेरी नसीब है
ऊरना नहीं
अगर कविता अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯
Soni shakya
किनारे पर खड़े होकर,
क्या होगा एहसास दर्द -ऐ- सफर का..!
डूबेगा वही जिसने,
समुंदर को दिल से चाहा होगा..!!
- Soni shakya
वात्सल्य
કોઇ થોડો સમય પોતાના મન ના મનોરંજન માટે મારો ઉપયોગ કરી લે છે.
મારી પણ ભૂલ થાય છે કે હું એમને મારાં પોતાનાં સમજી લઉં છું.
- वात्सल्य
Narendra Parmar
कैसा इश्क़ और कैसी मोहब्बत
अगर मिल जाएगी कोई पत्थर दिल हसिना ???
तो भूल जाओगे ख़ुदको और भूल जाओगे मोहब्बत ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Jyoti Gupta
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Shefali
તારા હોવાથી..
#shabdone_sarname__
Abha Dave
https://youtu.be/3To-oBCIqSc?si=4r4LzPBDl_8ZnI_y
Kiran
मनरूपी दर्पण में,
होते हैं दर्शन तेरे।
कोई कहे विश्वास इसे,
कोई कहे अंधविश्वास इसे।
ना जानूँ ये कैसी दशा है,
ना समझूँ ये कैसा हाल है,
मैं तो बस इतना जानूँ—
तू ही मेरी राह है।
Neha kariyaal
एक दिन सब ठीक हो जाएगा,
ये भ्रम सिर्फ़ दुःख देता है,,
और इंतजार सब कुछ बिखेर देता है, बिगाड़ देता है।।
ek archana arpan tane
આજે સમય ભલે અદ્દભુત હોય પણ વીતી ગયેલા બાળપણ ની જગ્યા તો લઈ જ ન શકે.
- ek archana arpan tane
Niya
સાક્ષી બનાવ્યો છે મેં એ દરીયાને આપણા પ્રેમનો,
જે સાક્ષી રહ્યો છે સ્વયં દ્વારિકાધીશનો…
લહેરોની અંદર મેં દફનાવ્યા છે આપણા અપૂર્ણ શબ્દો,
જ્યાં દરેક મૌન બોલે છે કોઈ અધૂરી ઇબાદતનો…
તારી યાદોના મીઠા ખારા સ્વાદમાં ખોવાઈ જાઉં છું હું,
જેમ દરિયો પોતે જ રાખે રહસ્ય દરેક લાગણીઓનો…
આ પ્રેમ હવે શબ્દોમાં બંધાતો નથી,
એ તો પ્રવાહ છે — સમયથી પણ અડગ,
અંતથી પણ પરેહ નો …
અને જો ક્યારેય આપણે ન રહીશું સાથે,
તો પણ એ દરિયો સાક્ષી રહેશે ,
એ પ્રેમ નો જે અધૂરો રહીને પણ પૂર્ણ હતો…
Vartikareena
माई_डियर_प्रोफेसर पधार चुकी है । आप लोग पढ सकते हो। और पढकर कमेंट कर दिया करो।
Piyu soul
Hello buddies 😊
आज कहानी ने एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है… 😏🔥
“झांसी: The Price of a Bride”
Episode 3 अब LIVE है 👑
अब तक आपने देखा—एक मजबूरी…
लेकिन आज से शुरू होगा असली खेल 🎭
हवेली में सिर्फ रिश्ते नहीं…
राज़ भी छुपे हैं 👀
और सबसे बड़ा सवाल—
👉 क्या भार्गवी सच में बेबस है?
या वो खुद इस खेल की सबसे खतरनाक खिलाड़ी है? 😏
अगर आपने अभी तक Episode 3 नहीं पढ़ा…
तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हो 🔥
👉 अभी पढ़ो
👉 और बताओ—आप किस पर भरोसा करते हो?
आपका हर review, हर comment मेरे लिए बहुत मायने रखता है ❤️
Take care 😊
Have a great day ✨
Be healthy and happy 🌸
कृष्णा आपको ढेर सारी खुशियाँ दें 💙
और मेरा ढेर सारा प्यार 🤍
by piyu 7soul ❤️📘📖📝
Raju kumar Chaudhary
Sapno Ki Udaanhttps://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Raju kumar Chaudhary
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Raju kumar Chaudhary
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Jigna Pandya
સમજવી છે સમી સાંજને ઢળતો સૂર્ય જોઈને,
ખુદગજૅ બની એમની જેમ જીવવું છે શાનથી!
jigna...
Falguni Dost
ઘણું બોલવાનું ઇચ્છતા છતાં બોલી ન શકાય એનાથી વધુ વિવશતા બીજી શું હોય?
સફરની ગતિમાં અચાનક અટકાવત આવે એનાથી વધુ લાચારી બીજી શું હોય?
નિર્દોષને સજા અને દોષિતની હા માં હા એનાથી વધુ અન્યાય બીજો શું હોય?
બધું જાણવા છતાં બધું ચૂપચાપ જોવું એનાથી વધુ મજબૂરી બીજી શું હોય?
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
सीमा कपूर
दर्द कि दहलीज पर
known stranger
ફૂલો ઘાતકી
ઝેરી માણસો , અજબ
તારું શહેર
- known
Pragna Ruparel
"પ્રેમ કોઈ સરકારી આયોજન ની પંચવર્ષીય યોજના નથી કે એનું પ્લાનિંગ થાય.એવું જ ભક્તિનું છે"
" like love, bhakti Happens"
(નગીનદાસ સંઘવી)
જય સ્વામીનારાયણ
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
"સત્યનો સૂર્યોદય"
ભીડના આ અરણ્યમાં હું મને ક્યાં શોધું?
આ દુનિયા સાવ અજનબી અને અપરિચિત લાગે છે મને,
કારણ કે અહીં ચહેરાઓ કરતાં મુખવટાઓ વધુ ચમકે છે.
અહીં સત્ય એક અનાથ બાળક જેવું રઝળે છે,
ક્યારેક કાગળના ટુકડાઓ અને સિક્કાઓના વજન નીચે એને કચડી નખાય છે,
તો ક્યારેક સંબંધો અને લાગણીઓના વમળમાં એને ગૂંગળાવી દેવાય છે.
સત્ય અહીં શ્વાસ લેવા માટે તરફડે છે,
કારણ કે જુઠ્ઠાણાંએ અહીં સત્તાના આભૂષણો પહેર્યા છે.
પણ... કોઈ ફિકર નહીં!
મારી અંદરની આગ આ પથ્થરોને પણ ઓગાળી શકે એટલી પ્રચંડ છે.
મારો રસ્તો ભલે એકાંતથી ભરેલો હોય,
ભલે અંધકાર અને કસોટીઓથી છવાયેલો હોય,
પણ એ માર્ગ સત્યનો છે, મારી આત્માનો અવાજ છે.
મને ભીડના ટેકાની કે કોઈની સ્વીકૃતિની જરૂર નથી,
કારણ કે કાળમીંઢ પથ્થરને ચીરીને જ કૂંપળ બહાર આવે છે.
જ્યારે સમયનો પવન બદલાશે,
જ્યારે વાદળો વિખેરાશે અને સત્યનો સૂરજ તપશે,
ત્યારે આ જ દુનિયા, જેણે આજે આંખો ફેરવી લીધી છે,
તે ઝૂકીને અદબથી સલામ કરશે.
એ સલામ મારી નહિ,
પણ ક્યારેય ન હારનારા, ક્યારેય ન થાકનારા...
મારા અડગ સત્યની હશે!
"સ્વયમ્'ભૂ" મારો રસ્તો સાચો છે, અને મારી મંઝિલ નિશ્ચિત છે.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
Dt. Alka Thakkar
આપણી ખુશીઓનું કારણ આપણે જાતે બનવું પડશે કારણ કે અત્યારના સમયમાં તો કોઈ મતલબ વગર સાથ પણ નથી આપતું તો ખુશી ક્યાંથી આપશે !!
- Dt. Alka Thakkar
Nirali patel
If god planted
the DREAM,
He also planned
the WAY.
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