Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Rinki Singh
वे स्त्रियाँ...
जो रह गईं बस इतनी-सी आकांक्षा में
कि कभी रोटी की भाप के साथ
उनकी मेहनत की भी कोई गर्म-सी प्रशंसा उठे..
उन्हें कोई प्रशस्ति-पत्र नहीं मिला |
जो स्त्रियाँ...
आजीवन सजाती-सँवारती रहीं
घर के कोने,
धूप की तरह फैलती रहीं आँगन-आँगन..
उनके लिए कभी कोई महफ़िल नहीं सजी |
जिन स्त्रियों ने...
सुबह की पहली किरण से
शाम की बुझती लौ तक
अपनों के पीछे भागते हुए
अपने बदन को पसीने से चमकाया
उनकी हथेलियों तक
कभी तमगों की चमक नहीं पहुँची |
जिनका अस्तित्व धीरे-धीरे डूब गया
किसी और के नाम के पीछे
जैसे नदी...
समुद्र में अपना नाम खो देती है..
उनका नाम..
कभी किसी पोस्टर की शोभा नहीं बना |
जिन्होंने...
जरा सी अहमियत को ही
उपलब्धि मान लिया
वे रह गईं एक विकल्प की तरह,
कभी किसी की अनिवार्य आवश्यकता नहीं बनीं
क्योकि...
उनके हिस्से नहीं आए
कोई उपलब्धि, कोई तमगा,
कोई महफ़िल, कोई किताब, कोई ख़िताब
इसलिए उनके हिस्से नहीं आया
कोई दिवस, कोई उत्सव
वे बस कहलाती रहीं..
नाकारा, कामचोर, असफल स्त्रियाँ
उनके हिस्से आए...
कुछ तिरछे वाक्य...
“तुमने किया ही क्या?”
“तुम करती ही क्या हो?”
“तुम कुछ नहीं जानती…”
तो प्यारी स्त्री ..!
अगर तुम नहीं कहलाई
कामकाजी और सफल स्त्री
एक दिन अपनों से ही
हर जगह दुत्कार पाओगी |
सच कहती हूँ, सखी!
मरने से पहले ही
मार दी जाओगी |
~रिंकी सिंह
#poetry
#matrubharti
Rashmi Dwivedi
🙏गीता में श्री कृष्ण कहते हैं.....
⚡कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
हिंदी अर्थ:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल की इच्छा करने वाले मत बनो और न ही कर्म न करने में तुम्हारी आसक्ति हो।
अर्थात् कर्म करो परिणाम ईश्वर अवश्य देंगे। हर हर महादेव ❤️
kattupaya s
Good morning friends.. have a great week
Soni shakya
सुप्रभात 🙏
ओम् नमः शिवाय 🙏🌹🙏
Firoz Khan
tere sath mujhe zindagi bitani hai
to mera budhpa to hi jawani hai
agar to mil gaya to mil jayega jaha
na mila to tu phir khatam zindagani hai
MASHAALLHA KHAN
गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई,
ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी,
लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की,
फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई .
-MASHAALLHA....
Mamta Trivedi
https://youtube.com/shorts/Y4lpXyIu0C4?si=9wlN7cgxckwDtrL2
બદનામ રાજા
સારા અનુભવથી ખરાબ
માણસો બદલાય કે ના બદલાય,
પરંતુ ખરાબ અનુભવથી સારા માણસો
ચોક્કસ બદલાય જાય છે...
🌸
simran kumari
mai or meri jindgi ka ahsas💓💓💓💓
''meri koi jajbat nahi hai,
meri kahani ka har panna khali hai !!
har panne par dard ki syahi lagi hai,
or kya bataun tumhe.....
meri koi kahani nahi hai!"
bas kuch tute khwab hai,
jo dil me Aaj vi adhure pade hai!"
♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Nothing
"किसीने मेरे साथ किए बर्ताव के लिये माफी नहीं मांगी,उन्होंने बस मेरे रिएक्शन के लिए मुझे ही दोषी ठहराया।"
rima
निभाना ही तो मुश्किल है, चाहना तो हर किसी को आता है। (✿♥‿♥)
Nothing
"તન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી ફરક પડે બાકી મન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી કોઈ ફરક પડતો નથી..અમુક વાર મન હારતું નથી પણ થાકી જાય છે.ક્યારેક પોતાની માનેલ વ્યક્તિના વ્યવહાર, વર્તનથી તો ક્યારેક પોતાની અપરિપૂર્ણ અપેક્ષાઓથી..તેમ છતાં એડજસ્ટમેન્ટ અને કોમ્પ્રો..કરવું પડે છે.જિંદગી છે તો જીવવું જ પડે છે..!"
rima
हम बुरे नहीं थे मगर तुमने बुरा कर दिया, पर अब हम बुरे बन गए हैं। ताकि तुम्हें कोई झूठा ना कह दे।🥰🥰
putti
ದಾರಿ ತಪ್ಪಿದ ಹಕ್ಕಿಗೆ, ಗೂಡು ತಲುಪುವ ಕನಸು ; ಮುಗಿಯದ ಹೆಜ್ಜೆಗೆ, ಊರ ಸೇರುವ ಕನಸು😐
Ruchi Dixit
प्रेम का वास्तविक अर्थ समानता है
एक तरफा केवल कामनाएं होती है जो
एक पूर्वप्रतीक्षित संसार का निर्माण करती है ।
- Ruchi Dixit
રોનક જોષી. રાહગીર
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જય ખોડિયાર 🙏
Raju kumar Chaudhary
“मेरी कीमत 10 लाख क्यों थी?”एक रात की तीव्र इच्छा और भावनाओं के बाद, एक उद्योगपति ने एक गरीब छात्रा को एक मिलियन रुपये देकर छोड़ दिया और बिना कोई निशान छोड़े गायब हो गया। सात साल बाद उसे पता चला कि आखिर उसकी “कीमत” इतनी क्यों थी।
उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनी के बाद, वह एक होटल के कमरे में जागी जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ मार्ग का दृश्य दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें इमारतों को हल्का सुनहरा रंग दे रही थीं, और उसी क्षण उसे हकीकत का भार महसूस हुआ।
उसका नाम काव्या शर्मा था, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र संकाय में तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह राजस्थान के एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों पर मिट्टी और मेहनत के निशान थे। वे जो भी रुपये उसे भेजते थे, वह एक मौन बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया विश्वास।
बिस्तर के पास की मेज पर एक मोटा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे। अंदर एक मिलियन रुपये थे। और एक छोटा सा नोट:
“इसे किस्मत समझ लो। मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।”
वह आदमी गायब हो चुका था।
कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी गरिमा की कीमत तय कर दी हो। लेकिन किराया बकाया था। विश्वविद्यालय की फीस दो हफ्तों में जमा करनी थी। उसके छोटे भाई को स्कूल के लिए किताबों की जरूरत थी। हकीकत किसी का इंतजार नहीं करती।
बहुत आँसू बहाने के बाद उसने एक फैसला किया: वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह इसे एक पुल बनाएगी, बेड़ी नहीं।
उसने विश्वविद्यालय के अपने सारे कर्ज चुका दिए। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि वे घर की छत ठीक कर सकें और खेती बेहतर कर सकें। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में रख दिए। धीरे-धीरे वह भावना कि यह एक अपमान था, मिटने लगी—और उसकी जगह एक अवसर ने ले ली।
साल बीत गए।
काव्या ने सम्मान के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसकी प्रतिभा और अनुशासन ने एक प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनी के दरवाजे खोल दिए। उसने नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट लिखना—लेकिन जल्द ही उसके वरिष्ठों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह पद दर पद ऊपर बढ़ती गई। उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। उसने अपने माता-पिता को पहली बार राजधानी देखने के लिए बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया।
बाहर से उसका जीवन सफलता की कहानी लग रहा था। लेकिन भीतर अब भी एक सवाल अनुत्तरित था।
वह आदमी कौन था? उसने ऐसा क्यों किया?
सात साल बाद, किस्मत ने उन्हें फिर से आमने-सामने ला खड़ा किया।
अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक वित्तीय सम्मेलन में भेजा—एक शानदार होटल में, ठीक उसी राजपथ क्षेत्र के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में एक सिहरन दौड़ गई। यादें कभी खत्म नहीं होतीं; वे बस सो जाती हैं।
जब वह अपना पहचान पत्र देख रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई:
—काव्या शर्मा?
वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय थम गया हो। सामने खड़े आदमी के बालों में अब हल्की सफेदी थी, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं।
वही आदमी था।
काव्या ने गहरी सांस ली। अब वह उस सुबह की डरी हुई लड़की नहीं थी। अब वह एक आत्मविश्वासी महिला थी।
—मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा।
वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। कार्यक्रम का शोर दूर-सा लग रहा था।
आदमी ने कहना शुरू किया:
—उस रात… तुम बहुत थकी हुई थीं और तुमने अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा पी ली थी। तुमने मुझे अपने माता-पिता के बारे में बताया, अपने भाई के बारे में, और इस डर के बारे में कि कहीं तुम्हें विश्वविद्यालय छोड़ना न पड़ जाए। तुमने मुझे कई दशक पहले का अपना ही अतीत याद दिला दिया।
काव्या ने भौंहें सिकोड़ लीं
Ruchi Dixit
किसी के लिए यह गर्व होगा कि कोई उसके बिना नहीं रह सकता किसी के लिए अहं होगा
एक शब्द दो अर्थ दो भाव ।।
- Ruchi Dixit
Raju kumar Chaudhary
गरीब माँ को देखकर लोग हँसे… लेकिन बेटे ने स्टेज पर ऐसा सच बताया कि सबकी आँखें भर आईं“जिस माँ की बदबू से पूरी क्लास नाक ढकती थी… उसी माँ ने ग्रेजुएशन के दिन ऐसा सच दिखाया कि पूरा हॉल रो पड़ा!”
उस दिन सुबह अर्जुन की माँ सरिता ने अपनी सबसे अच्छी साड़ी निकाली।
वह साड़ी नई नहीं थी।
असल में बहुत पुरानी थी।
उसका रंग कई जगहों से फीका पड़ चुका था, और किनारों पर छोटे-छोटे टांके लगे हुए थे जहाँ वह फट गई थी।
लेकिन सरिता के लिए वही उनकी सबसे कीमती साड़ी थी।
उन्होंने सावधानी से अपने हाथ धोए।
नाखून साफ किए।
बालों में तेल लगाया और उन्हें ठीक से बाँधा।
फिर धीरे से अर्जुन के पास आकर बोलीं—
“बेटा… आज तुम्हारा ग्रेजुएशन है न?”
अर्जुन ने सिर हिलाया।
माँ कुछ पल चुप रहीं, जैसे हिम्मत जुटा रही हों।
फिर धीमी आवाज़ में बोलीं—
“क्या… क्या मैं तुम्हारे साथ स्टेज पर आ सकती हूँ? बस तुम्हें मेडल पहनाना चाहती हूँ। यह मौका सिर्फ एक बार आता है।”
अर्जुन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
उसे तुरंत याद आ गया—
वही बच्चे…
वही हँसी…
वही ताने…
अगर माँ स्टेज पर जाएँगी… तो क्या होगा?
लेकिन जब उसने माँ के चेहरे की तरफ देखा, तो उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो अर्जुन ने पहले कभी नहीं देखी थी।
वह गर्व था।
वह उम्मीद थी।
और शायद… एक सपना भी।
अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“हाँ माँ, बिल्कुल। तुम ही कारण हो कि मैं आज यहाँ हूँ।”
कुछ देर बाद वे दोनों ग्रेजुएशन समारोह के लिए स्कूल पहुँचे।
जैसे ही वे जिम के अंदर दाखिल हुए, अर्जुन को तुरंत महसूस हुआ कि कुछ बदल गया है।
लोगों की नज़रें उनकी तरफ उठने लगीं।
सभी माता-पिता महंगे सूट और चमकदार साड़ियों में थे।
उनके शरीर से महंगे परफ्यूम की खुशबू आ रही थी।
और उनके बीच…
सरिता अपनी फीकी साड़ी में खड़ी थीं।
जैसे ही वह आगे बढ़ीं, अर्जुन ने देखा—
कुछ लोगों ने धीरे से अपनी नाक ढक ली।
किसी ने फुसफुसाकर कहा—
“वह यहाँ क्यों आई है?”
“पूरा माहौल खराब कर दिया।”
सरिता का चेहरा तुरंत झुक गया।
उन्होंने अर्जुन से धीमी आवाज़ में कहा—
“बेटा… मैं पीछे खड़ी रहती हूँ। मुझे शर्म आ रही है… कहीं लोग तुम्हारा मज़ाक न उड़ाएँ।”
अर्जुन ने उनका खुरदुरा हाथ कसकर पकड़ लिया।
लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि आज मंच पर वह कुछ ऐसा कहने वाला है…
जो पूरे हॉल की सोच बदल देगा।
👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Mrudhula
Sometimes I feel that loneliness is not a punishment, but a path that life gives to shape me into something stronger. There are days when the world feels dark and uncertain, yet a quiet voice inside reminds me to keep shining. I believe that somewhere in the future, destiny holds a moment of love and meaning waiting for me. Until then, I try to blossom in my own way, because someone out there may need the hope and light I carry. And in the end, I know every question life asks will find its answer, just as every life eventually finds its peaceful end.
kattupaya s
256 is the target for Newzealand..
Ruchi Dixit
स्त्री को स्त्री बनकर ही समझा जा
सकता है दूसरा अन्य कोई रास्ता नहीं ।
- Ruchi Dixit
kattupaya s
Hardik pandya the over ambitious guy
kattupaya s
Sanju samson on fire...
Mare DoAlfaz
हर एक हंसी में छुपी
खौफ की उदासी है..
Piyush Goel
https://www.piyushgoel.in
kattupaya s
Newzealand struggling with their bowling.. India looking 250
Armin Dutia Motashaw
HAPPY WOMEN'S DAY
Women don't need to be wished only on this special day
There's an absolute need to respect them everyday
A smile genuine, a kiss small or a hug big, will go a long way
Let's remember to celebrate daily Women's day, in this way.
Armin Dutia Motashaw
kattupaya s
After powerplay 92 for no loss India
Kajal Rathod...RV
Happiest women's day 🎊
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1Ao2ozFW4p/
🎊Happy Women's Day🎊
માણો સુંદર મજાની વાર્તા
kattupaya s
India batting... NewZealand won the toss
kattupaya s
it's a good batting track abhishek must come back to his form. 250 score will be minimum
Mahesh
લાગે છે મને એવું કે હું બસ ફોર્મલિટી પૂરી કરવા આવિયો છું...
બાકી કોને જરૂર છે મારી તે તો મને પણ નથી ખબર...!!!!!
- Mahesh
kattupaya s
Toss is the key today. if India won the toss then the game is ours
kattupaya s
I hope India will win the world Cup and the history rewriting will happen
kattupaya s
Too excited to watch India vs Newzealand final T20 cricket match.
Ravi Lakhtariya
થોડા સા વક્ત કયા લે લિયા
ઉન કે શબ્ર ને દમ તોડ દીયા.
વક્ત પે હી આયે થે હમ,
એસા જમાના કહ ગયા,
પર ઉસ વક્ત કો હી ઉન્હોંને કાફી સમજ લિયા
Ravi Lakhtariya
ના કુછ કહ સકતે હૈ ના કુછ લિખ સકતે હૈં,
બસ અંદર હી અંદર રો રહે હૈં,
જો ચાહિયે વો ખોવત હૈ
જો મિલત હૈ વો કિસકો ચાહત હૈ
kattupaya s
Good evening friends.. have a great evening
Paagla
https://youtube.com/shorts/txq4JAmjkS8?si=fZ8BI7_qfXaYIihA
pink lotus
isse pdhe 👍❣️ye mene new likhi he sayd aapko pasand aaye or sikhne bhi mile
agr koi he jo problms me fssa he to zarur pdhe sayd help ho jayegi 🌸❣️👍
Raju kumar Chaudhary
“कलंकित लड़की की विरासत”मैं कक्षा 10 में पढ़ते समय ही गर्भवती हो गई थी।
मेरे माता-पिता ने मुझे ठंडी निगाहों से देखा और कहा,
“तुमने इस परिवार को कलंकित किया है। अब से तुम हमारे बच्चे नहीं हो।”
उसके बाद उन्होंने मुझे घर से बाहर निकाल दिया…
जब मैं कक्षा 10 में थी, तब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूं।
जब प्रेगनेंसी टेस्ट पर दो लाइनें दिखाई दीं, तो मैं डर से कांप उठी, लगभग खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं, तभी तो खबर फैल चुकी थी।
मेरे माता-पिता मुझे ऐसे देखते थे मानो मैं कोई गंदी चीज हूँ।
“तुमने इस परिवार को कलंकित किया है। अब से तुम हमारे बच्चे नहीं हो।”
मेरे पिता के कहे हर शब्द मुझे चेहरे पर थप्पड़ की तरह महसूस हुए।
रात हो चुकी थी और बारिश हो रही थी। मेरी माँ ने मेरा फटा हुआ थैला आँगन में फेंक दिया और मुझे घर से बाहर निकाल दिया। मेरे पास एक पैसा भी नहीं था। मेरे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं थी।
पेट पकड़े हुए, मैं उस घर से दूर चली गई जो कभी मेरे जीवन का सबसे सुरक्षित स्थान हुआ करता था।
और मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मैंने किराए के एक कमरे में बच्चे को जन्म दिया, जिसका आकार मुश्किल से आठ वर्ग मीटर था।
यह मुश्किल था।
दर्दनाक।
लोगों की गपशप और आलोचनाओं से भरा हुआ।
लेकिन मैंने अपनी बेटी का पालन-पोषण अपनी पूरी ताकत से किया।
जब वह दो साल की हुई, तो हम शहर चले गए। मैं पढ़ाई के साथ-साथ वेट्रेस का काम भी करती थी।
और अंततः, भाग्य ने मुझ पर कृपा की।
मैंने एक ऑनलाइन व्यवसाय शुरू किया।
बाद में, मैंने अपनी खुद की कंपनी खोली।
छह साल बाद मैंने एक घर खरीदा।
दस साल बाद, मैं दुकानों की एक श्रृंखला का मालिक बन गया।
बीस साल बाद…
मेरी संपत्ति 200 अरब से अधिक थी।
मुझे पता था कि मैं सफल हो गया हूँ।
लेकिन मेरे दिल में चुभने वाला कांटा—
अपने ही माता-पिता द्वारा त्याग दिए जाने का दर्द—
कभी गायब नहीं हुआ।
एक दिन मैंने वापस लौटने का फैसला किया।
उन्हें माफ नहीं करना,
लेकिन उन्हें यह दिखाने के लिए कि उन्होंने क्या खोया है।
अपनी नई मर्सिडीज में सवार होकर मैं अपने गृहनगर वापस गया। पुराना घर अभी भी वहीं था—लगभग बीस साल पहले जैसा था, बल्कि पहले से भी ज्यादा जर्जर हालत में।
लोहे का गेट जंग खा चुका था।
दीवारें ढह रही थीं।
आंगन में खरपतवार बहुत ज्यादा उग आए थे।
मैं दरवाजे के सामने खड़ा हुआ, एक गहरी सांस ली और तीन बार जोर से खटखटाया।
लगभग अठारह वर्ष की एक युवती ने दरवाजा खोला।
मैं जम गया।
वह बिल्कुल मेरे जैसी दिखती थी। उसकी आंखें, नाक से लेकर उसके भौंहें सिकोड़ने का तरीका तक—
ऐसा लग रहा था मानो मैं अपने बचपन के रूप को देख रहा हूँ।
“आप किसे ढूंढ रहे हैं?” उसने विनम्रता से पूछा।
इससे पहले कि मैं जवाब दे पाती, मेरे माता-पिता बाहर आ गए।
जब उन्होंने मुझे देखा, तो वे दोनों जम गए। मेरी माँ ने अपना मुँह ढक लिया, उनकी आँखें लाल हो गईं।
मैंने ठंडी मुस्कान दी।
"अब तुम्हें पछतावा हो रहा है, है ना?"
लेकिन अचानक, वह लड़की मेरी माँ के पास दौड़ी, उनका हाथ पकड़ा और कुछ ऐसा कहा जिसने मुझे पूरी तरह झकझोर दिया...
कहानी के बारे में और अधिक जानने के लिए कमेंट सेक्शन देखें। 👇👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
“एक जुनून से भरी रात के बाद, एक युवा छात्रा को एक मिलियन रुपये मिले और उसे छोड़ दिया गया… सात साल बाद, उस ‘कीमत’ के पीछे की सच्चाई ने उसकी सांसें रोक दीं।”
उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनियों के बाद, वह एक शानदार होटल के कमरे में जागी, जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें अभी-अभी इमारतों को सुनहरा बना रही थीं, जब उसे अचानक वास्तविकता का भार महसूस हुआ।
उसका नाम कामिला मार्तिनेज़ नहीं, बल्कि काव्या मिश्रा था—दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की तीसरे वर्ष की छात्रा। वह वाराणसी के पास एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों में मिट्टी और मेहनत के निशान थे। हर रुपया जो वे भेजते थे, एक खामोश बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया दांव।
बिस्तर के पास मेज पर एक मोटा सा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे।
अंदर एक मिलियन रुपये नकद थे। और एक छोटा सा नोट:
“इसे किस्मत समझो।
मुझे मत ढूंढना।”
वह आदमी जा चुका था।
अगले कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे लगता था जैसे किसी ने उसकी इज्जत की कीमत लगा दी हो। लेकिन हकीकत बेरहम थी। कमरे का किराया बाकी था। दो हफ्तों में कॉलेज की फीस देनी थी। उसके छोटे भाई को सीनियर सेकेंडरी के लिए किताबें चाहिए थीं। वास्तविकता किसी को सांस लेने की मोहलत नहीं देती।
बहुत आँसू बहाने के बाद उसने फैसला किया—वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह उसे जंजीर नहीं, एक पुल बनाएगी।
उसने अपनी यूनिवर्सिटी की सारी फीस चुका दी। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि घर की छत ठीक हो सके और खेत की पैदावार बेहतर हो सके। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में डाल दिए। हर नोट जो कभी अपमान जैसा लगा था, अब एक अवसर बन गया।
साल गुजरते गए।
काव्या ने उत्कृष्ट अंकों के साथ पढ़ाई पूरी की। उसकी बुद्धिमत्ता और अनुशासन ने उसे एक बड़ी फाइनेंशियल कंपनी में नौकरी दिला दी। उसने सबसे नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट बनाना—लेकिन जल्दी ही उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह लगातार आगे बढ़ती गई।
उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। अपने माता-पिता को पहली बार दिल्ली घुमाने बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया।
बाहर से उसकी जिंदगी सफलता की कहानी थी।
लेकिन भीतर एक सवाल अब भी अनुत्तरित था।
वह आदमी कौन था?
और उसने ऐसा क्यों किया?
सात साल बाद, किस्मत ने फिर से उनके रास्ते मिला दिए।
अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक बड़े फाइनेंशियल कॉन्ग्रेस में भेजा, जो एक शानदार होटल में हो रहा था—ठीक उसी राजपथ के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। यादें कभी गायब नहीं होतीं; वे सिर्फ सो जाती हैं।
जब वह अपना बैज ले रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई:
—काव्या मिश्रा?
वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय रुक गया हो। सामने खड़ा आदमी थोड़ा सफेद बालों वाला था, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं।
वही आदमी।
काव्या ने गहरी सांस ली। वह अब वह डरी हुई लड़की नहीं थी जो उस सुबह जागी थी। अब वह एक मजबूत और आत्मविश्वासी महिला थी।
—मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा।
वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। इवेंट में मौजूद लोगों की हल्की-सी फुसफुसाहट अब सिर्फ पृष्ठभूमि का शोर रह गई।
—उस रात...
पूरी कहानी कमेंट में 👇👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
“फटे कपड़ों वाला प्रतिभाशाली“फटे-पुराने कपड़ों में एक युवक नौकरी के लिए आवेदन करने आया… और जब कंपनी के अध्यक्ष की बेटी ने उसे अपने कार्यालय में बुलाया, तो पूरी इमारत हैरान रह गई।
उस सुबह Arya Solutions India की इमारत महँगे सूट और गहरी बेचैनी से भरे एक मधुमक्खी के छत्ते जैसी लग रही थी। अभी सुबह ही थी, लेकिन लॉबी पहले से ही चमकते काँच, प्रीमियम कॉफी की खुशबू और महत्वपूर्ण बैठकों की गूँज से भर चुकी थी।
उस दिन अंतरराष्ट्रीय ग्राहक आने वाले थे, और रिसेप्शन पर नैना शर्मा किसी कस्टम अधिकारी की तरह खड़ी थी—हर आने वाले को सिर से पाँव तक देखती हुई, होंठों पर नियंत्रित मुस्कान के साथ, तय करती हुई कि किसे अंदर जाने देना है और किसे नहीं।
ठीक सुबह 9:17 पर घूमने वाला काँच का दरवाज़ा धीरे-धीरे घूमा।
एक युवक अंदर आया—लगभग पच्चीस साल का, दुबला-पतला, बिखरे बाल, और उसने एक ऐसी शर्ट पहनी हुई थी जिसकी बाँह पर छोटा-सा चीरा था। उसके जूते इतने घिस चुके थे कि लगता था चमड़ा अब हार मानने वाला है।
उसके हाथ में एक पुरानी फाइल थी—वैसी फाइल जिसके कोने इतने मुड़े हुए थे कि लगता था जैसे किसी युद्ध से बचकर आई हो।
उसे देखते ही नैना के होंठ तिरछे हो गए।
— “ये क्या है?” उसने ऐसे स्वर में पूछा जो केवल आदत की वजह से विनम्र लगता था।
युवक ने हल्का-सा घूंट भरा, फिर आदर से मुस्कुराया।
— “नमस्ते मैडम। मैं इंटरव्यू के लिए आया हूँ। मैंने ऑनलाइन आवेदन किया था। आज बुलाया गया था।”
नैना ने कंप्यूटर पर टाइप किया। सूची में एक नाम था:
आदित्य मेहरा
उसने नाम दो बार पढ़ा, जैसे स्क्रीन दया करके गलती कर सकती हो।
— “तुम… इंटरव्यू देने आए हो?” उसने प्रोटोकॉल के पीछे छिपी हैरानी के साथ दोहराया।
— “जी, मैडम।”
नैना ने बिना उसकी ओर देखे कोने में रखी कुर्सियों की कतार की ओर इशारा किया।
— “वहाँ बैठो। मैं एचआर को अपडेट करती हूँ।”
वहाँ पहले से दो पुरुष और एक महिला बैठे थे—साफ-सुथरे कपड़े, नई फाइलें, महँगा इत्र, और वह आत्मविश्वास जो आलीशान जिंदगी में पले लोगों के पास होता है।
जैसे ही आदित्य किनारे बैठा, नीले ब्लेज़र वाले आदमी ने अपने दोस्त से धीरे से कहा—
— “क्या ये भी इंटरव्यू देगा?”
— “यार, लगता है गलत बिल्डिंग में आ गया है,”
दोनों धीमे से हँस पड़े।
आदित्य ने सब सुन लिया। लेकिन उसने सिर नहीं उठाया।
वह दीवार पर लगी एक बड़ी तस्वीर को देखता रहा—कंपनी की मालिक की तस्वीर, जो एक पुरस्कार ले रही थीं:
काव्या मल्होत्रा
सिर्फ 27 साल की उम्र में वह कॉरपोरेट दुनिया में एक किंवदंती बन चुकी थीं। उन्होंने अपने पिता की लगभग टूट चुकी कंपनी को संभाला और अनुशासन और दिल के अनोखे मिश्रण से उसे फिर खड़ा किया।
“ठंडी,” कुछ लोग कहते थे।
“न्यायपूर्ण,” दूसरे कहते थे।
ऊपर तीसरी मंज़िल पर, बोर्डरूम में काव्या रिपोर्ट देख रही थीं जब एचआर डायरेक्टर रोहित कपूर एक फाइल लेकर अंदर आए।
— “मैडम, आज डेवलपर पद के लिए अंतिम इंटरव्यू हैं।”
— “उन्हें भेज दीजिए,” काव्या ने ऊपर देखे बिना कहा।
नीचे बीस मिनट बीत गए।
एक-एक करके दो “परफेक्ट” उम्मीदवारों को बुलाया गया। लॉबी में अब भी हल्का संगीत बज रहा था और महत्वपूर्ण दिन की तनावपूर्ण ऊर्जा फैली हुई थी।
अब केवल आदित्य बचा था।
नैना ने झिझकते हुए तीसरी मंज़िल पर फोन किया।
— “मैडम… एक उम्मीदवार बाकी है, लेकिन…” उसकी आवाज़ धीमी हो गई — “वह… प्रोफेशनल नहीं लगता।”
दूसरी तरफ कुछ सेकंड की चुप्पी रही।
फिर काव्या की शांत और सीधी आवाज़ आई—
— “नाम?”
— “आदित्य मेहरा।”
फिर एक क्षण की खामोशी।
— “उसे ऊपर भेजो। अभी।”
नैना चौंक गई।
— “अभी?”
— “अभी,” काव्या ने दोहराया।
नैना ने फोन रखा और उलझन व झुंझलाहट से आदित्य को देखा।
— “तुम्हें… ऊपर बुलाया है।”
बाकी उम्मीदवार ऐसे देखने लगे जैसे उन्होंने भूत देख लिया हो।
आदित्य धीरे-धीरे खड़ा हुआ, अपनी फाइल सीने से लगाई, और लिफ्ट की ओर चला—मानो उसे विश्वास ही न हो कि वह उस मंज़िल तक जाने लायक है।
तीसरी मंज़िल पर लिफ्ट का दरवाज़ा खुला। सामने शांत गलियारा था और काँच का एक केबिन, जिस पर चाँदी के अक्षरों में लिखा था:
CEO — काव्या मल्होत्रा
एक सहायक ने इशारा किया।
— “अंदर जाइए। मैडम आपका इंतज़ार कर रही हैं।”
आदित्य ने धीरे से दरवाज़ा खटखटाया।
— “अंदर आ सकता हूँ?”
— “आइए,” अंदर से शांत आवाज़ आई।
ऑफिस बड़ा था, लेकिन सादा—लकड़ी की सजावट, प्राकृतिक रोशनी, और सुव्यवस्थित माहौल।
काव्या मेज़ के पास खड़ी थीं, लैपटॉप खुला था। उनका सूट बिल्कुल व्यवस्थित था, मुद्रा मजबूत, और नज़र… न तो अपमान करने वाली, न ही मुफ्त में दया देने वाली।
उन्होंने उसे सिर से पाँव तक देखा।
न कोई मज़ाक।
न कोई दया।
बस ध्यान से देखना।
— “बैठिए, आदित्य।”
वह वहीं ठिठक गया।
— “मैडम… मेरे कपड़े—”
— “मैंने कहा, बैठिए।”
उनकी दृढ़ता कठोर नहीं थी।
जैसे कह रही हो: “यहाँ अपने होने के लिए माफी मत माँगो।”
आदित्य बैठ गया, घबराहट दबाते हुए।
काव्या ने लैपटॉप उसकी ओर घुमा दिया।
— “आपने डेवलपर के लिए आवेदन किया है। मैंने आपके प्रोजेक्ट देखे हैं। आप किसी प्रसिद्ध विश्वविद्यालय से नहीं हैं… लेकिन आपका कोड…”
उन्होंने उसकी आँखों में देखा।
— “आपका कोड आपके लिए बोलता है।”
आदित्य ने सिर झुका लिया।
— “मैंने सिर्फ ऑनलाइन सीखा है, मैडम। थोड़े-बहुत फ्रीलांस काम किए… जो भी मिला।”
काव्या ने सिर हिलाया।
— “मैं आपको एक असली समस्या दूँगी। मेरी टीम तीन दिनों से इसमें फँसी हुई है। अगर चाहें… तो कोशिश कीजिए। अभी।”
आदित्य की आँखें बदल गईं।
पहली बार डर गायब हो गया—और उसकी जगह कुछ और आ गया: खुद को साबित करने की भूख।
— “अभी?” उसने धीरे से पूछा।
— “अभी।”
अगले पंद्रह मिनट तक ऑफिस में सिर्फ तीन आवाज़ें थीं—कीबोर्ड की टक-टक, साँसों की लय, और माउस की क्लिक।
काव्या कुछ नहीं बोलीं।
वह सिर्फ उसे देखती रहीं।
आदित्य की उँगलियाँ जैसे उड़ रही थीं… और उसके चेहरे पर ऐसी एकाग्रता थी मानो पूरी दुनिया सिमटकर सिर्फ उस स्क्रीन में रह गई हो…
पूरी कहानी कमेंट में…👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Krupali Kapadiya
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SAYRI K I N G
"मुझे किसी ने मारा नहीं...
"पर सबने धीरे-धीरे जीने की
"वजहें छीन ली!
Raju kumar Chaudhary
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Raju kumar Chaudhary
62 साल की उम्र में, मैंने अपने पहले प्यार से दोबारा शादी की: हमारी शादी की रात, जैसे ही मैंने अपनी पत्नी के कपड़े उतारे, मैं यह देखकर हैरान और टूट गया
61 साल की उम्र में, मैंने अपने पहले प्यार से दोबारा शादी की: हमारी शादी की रात, जैसे ही मैंने उसकी ड्रेस उतारी, मैं यह देखकर हैरान और टूटा हुआ था...
इस साल मैं 61 साल का हो गया हूँ। मेरी पहली पत्नी का आठ साल पहले एक गंभीर बीमारी से निधन हो गया था। तब से, मैं एक शांत, एकाकी जीवन जी रहा हूँ। मेरे सभी बच्चे शादीशुदा हैं। हर महीने वे मुझे कुछ पैसे देने, मेरी दवाइयाँ छोड़ने और फिर जल्दी से चले जाने के लिए आते हैं।
मैं उन्हें दोष नहीं देता। वे व्यस्त हैं - मैं समझता हूँ। लेकिन तूफ़ानी रातों में, बिस्तर पर लेटे हुए, टिन की छत पर बारिश की तेज़ आवाज़ सुनते हुए, मैं खुद को बहुत छोटा और दिल तोड़ने वाला अकेला महसूस करता हूँ।
पिछले साल, मैं फ़ेसबुक ब्राउज़ कर रहा था जब मुझे हाई स्कूल का अपना पहला प्यार अचानक मिल गया। उस समय मुझे उस पर बहुत क्रश था - उसके लंबे, लहराते बाल, चमकदार आँखें और एक ऐसी मुस्कान थी जो पूरी कक्षा को रोशन कर देती थी। लेकिन जब मैं अभी भी कॉलेज की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, तब उसके परिवार ने उसकी शादी दक्षिण में मुझसे दस साल बड़े एक आदमी से तय कर दी।
उसके बाद हमारा संपर्क टूट गया। अब, चालीस साल बाद, हम फिर से एक-दूसरे से मिले। वह विधवा हो गई थी - उसके पति का पाँच साल पहले देहांत हो गया था। वह अपने सबसे छोटे बेटे के साथ रह रही थी, जो घर से दूर काम करता था और बहुत कम ही घर आता था।
पहले तो हम बस हालचाल जानने के लिए मैसेज करते थे। फिर हम फ़ोन करने लगे। फिर कॉफ़ी के लिए मिलने लगे। और पता ही नहीं चला, हर कुछ दिनों में मैं खुद को स्कूटर पर फलों का एक थैला, पेस्ट्री का एक डिब्बा और कुछ जॉइंट सप्लीमेंट्स लेकर उसके घर जाते हुए पाता।
एक दिन, मज़ाक में, मैंने कहा:
– "हम दोनों बुज़ुर्ग शादी क्यों नहीं कर लेते और एक-दूसरे का साथ देते रहते हैं?"
अचानक, उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैं घबरा गया और उसे समझाने की कोशिश की कि यह मज़ाक है, लेकिन वह हँस पड़ी और हल्के से सिर हिला दिया।
और इस तरह, 61 साल की उम्र में, मैंने दोबारा शादी कर ली - अपने पहले प्यार से।
हमारी शादी के दिन, मैंने गहरे भूरे रंग का ब्रोकेड का लंबा ट्यूनिक पहना था। उसने एक सादा सफ़ेद रेशमी आओ दाई पहना था, उसके बालों को एक छोटे से मोती के क्लिप से बड़े करीने से पिन किया हुआ था। दोस्त और पड़ोसी जश्न मनाने आए थे। सबने कहा, "तुम दोनों फिर से टीनएजर्स लग रही हो।"
और सच कहूँ तो, मैं फिर से जवान महसूस कर रही थी। उस रात, शादी की दावत की सफ़ाई करने के बाद, रात के 10 बजने वाले थे। मैंने उसके लिए एक कप गर्म दूध बनाया, फिर गेट बंद करने और लाइट बंद करने के लिए बाहर गई।
हमारी शादी की रात — एक ऐसी रात जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं अपने बुढ़ापे में दोबारा अनुभव करूँगी — आखिरकार आ ही https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
DrAnamika
भेड़ चाल से सिर्फ मूर्ख ही अपनी शोभा बढा़ते है दम है तो अकेले चलकर दिखाओ
#डॉ_अनामिका #हिंदी_का_विस्तार
#हिंदी_का_विकास #गद्यकृति #गद्य_साहित्य #बज्म़
समस्त देशवासियों को रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
A singh
विचार
जो समय बीत गया
वह फिर कभी लौटकर नहीं आता।
उस पर अफसोस करने से
सिर्फ दिल ही भारी होता है।
इसलिए बीते हुए कल में नहीं,
आने वाले कल में उम्मीद रखिए।
क्योंकि ज़िंदगी हर सुबह
एक नया मौका देती है।
जो पल आज हमारे पास है
उसे मुस्कुराकर जी लीजिए,
क्योंकि कल शायद
ये पल भी याद बन जाएगा।
ना बीते हुए कल का पछतावा,
ना आने वाले कल का डर —
बस आज को
खुशी और उम्मीद के साथ जिएं।
हर हर महादेव। 🕉️
— A Singh ✨
A singh
ज़िंदगी का सच
बचपन हँसते-खेलते बीत गया,
और हम जवानी की दहलीज़ पर आ खड़े हुए।
पर अजीब बात है कि
जैसे ही जवानी आई,
बचपन याद आने लगा।
बचपन को याद करते-करते
जवानी भी धीरे-धीरे बीत जाएगी,
फिर बुढ़ापा आएगा
और बुढ़ापे में फिर वही जवानी याद आएगी।
और एक दिन ऐसा भी आएगा
जब बुढ़ापा भी बीत जाएगा,
और हम इस दुनिया को
चुपचाप अलविदा कह देंगे।
इसलिए समझदारी इसी में है
कि जो पल अभी हमारे पास है
उसे मुस्कुराकर जिएं।
खुद भी खुश रहें
और दूसरों को भी खुशियां दें।
क्योंकि क्या पता
जो आज हमारा दोस्त है
वो कल दुश्मन बन जाए।
लेकिन ये क्यों सोचें?
ये भी तो हो सकता है
कि जो आज हमारा दुश्मन है
वो कल हमारा सबसे अच्छा दोस्त बन जाए।
क्या पता आज जिनसे हम
लड़ रहे हैं या नाराज़ हैं,
कल वही इस दुनिया में ना हों
और बस उनकी यादें रह जाएं।
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
इसे नफ़रत में क्यों गंवाना?
ना किसी से नफ़रत करो,
ना किसी से द्वेष रखो।
बस दिल में प्रेम रखो,
क्योंकि आखिर में
यादें भी वही रह जाती हैं
जहाँ प्रेम होता है।
हर हर महादेव। 🕉️
_ A singh
वात्सल्य
કાશ.....!
હજુ ૨૧ વર્ષ અહીં કાઢી નાખતે!!!!
કાશ !! પાટણ શહેરમાં કેટલાયે કાળી મજૂરી કરી પોતાના સપનાનું મંદિર (ઘર )બનાવે છે...!!
અને એ ઘરને છોડતાં દીપક જલતો રાખી,એ ઘરને વંદન કરી ખુલ્લા બારણે પાછા પગે પ્રયાણ થયું હોત !!! અને પછી એ કમાડની કુંચી કોઈ વિશ્વાસને સોંપી હોત !
જે ઘરમાં....... ટાઢ,તડકો,વરસાદ,આબરૂ,રક્ષણ,સુખ,સંપત્તિ,સંતતિ,સમાજ,સંસાર,સત્તા,સમય,સમાધાન,સ્નેહ,સુવિચાર,શણગાર,સગાઇ જેવા અનેક પરિબળે એ પવિત્ર જગ્યામાં જન્મ લઈ પાંગરવા દીધાં!!
કાશ ! એ મંદિરને તમે ક્ષણમાં છોડી દેતાં કાળજું મારું કંપ્યું !!! કેમ સમજાવું...!!!! "વાત્સલ્ય"!! તારા ઘરની વેદના !!!
કોઇ હરખાતું'તું જોઈ દૂર દૂર શું !! એ સુંદર મુખના હાવભાવ......... !!!!!!
Nisha Jitesh Palan
Kisi ne poocha – Housewife karti hi kya hai?
Jawab simple hai…
Wo ghar nahi, poori zindagi sambhalti hai.
Uski koi salary nahi hoti,
par uski value priceless hoti hai.
Happy Women’s Day ❤️
- Nisha Jitesh Palan
A singh
नारी कोई कहानी नहीं,
एक पूरी किताब होती है।
दर्द भी सहती है चुपचाप,
फिर भी सबके लिए खुशियों का ख्वाब होती है।
महिला दिवस की शुभकामनाएं।
_ A singh
A singh
माँ भी है, बेटी भी है, बहन भी है,
हर रिश्ते में प्यार बसाती है।
नारी ही इस दुनिया की असली ताकत है,
जो हर घर को स्वर्ग बनाती है।
Happy Women’s Day
A singh
दर्द इतना मिला है ज़िंदगी से,
कि अब शिकायत भी नहीं होती,
लोग बदल जाते हैं यहाँ,
और हमें हैरानी भी नहीं होती।
_ A singh
Avinash
#KeralaVibes
Resting with the Jatayu: Embracing epic moments in Kerala's history and natural beauty.
Thakor Pushpaben Sorabji
હા હું સ્ત્રી છું
સર્જન કર્યું પરમાત્માએ મારું
સક્ષમ બનાવી પરિસ્થિતિઓ સહેવાને
હા,હું સ્ત્રી છું!...................
અવતાર મારો એક સ્ત્રીનો ને
ઉપમા સ્ત્રી તરીકે મારી ઝાઝેરી
હા,હું સ્ત્રી છું!..................
ખુદનુ દર્દ હું ભૂલી જાઉં
પરિવારનું ધ્યાન,સારસંભાળ હું રાખું
હા, હું સ્ત્રી છું!................
કોમળ હૃદયી બનાવી પ્રભુ તે
અડગ બનાવી મુશ્કેલીથી લડતા શીખવી તે
હા, હું સ્ત્રી છું!...............
ખુશ રાખી,ખુશ રહું પરિવાર સાથે
ભૂલી જાઉં ખુદને હું સમર્પિત પરિવારને
હા,હું સ્ત્રી છું!................
પુષ્પા.એસ.ઠાકોર "પુષ્પ" # ઉંદરા#
જય શ્રી કૃષ્ણ
Bk swan and lotus translators
పనసకాయ (Jackfruit) టేస్టీగా ఉండటమే కాకుండా ఆరోగ్యానికి కూడా చాలా మంచిది. పనసకాయతో చేసుకోగలిగే కొన్ని ముఖ్యమైన మరియు రుచికరమైన వంటకాలు ఇక్కడ ఉన్నాయి:
1. పనసపొట్టు కూర (Jackfruit Shredded Curry)
ఇది ఆంధ్ర స్టైల్లో చాలా ఫేమస్. పనసపొట్టును ఉడికించి, ఆవపిండి పెట్టి చేసే ఈ కూర అద్భుతంగా ఉంటుంది.
* చిట్కా: దీనికి చింతపండు పులుపు మరియు ఆవపిండి ఘాటు తోడైతే రుచి అదిరిపోతుంది.
2. పనసకాయ బిర్యానీ (Jackfruit Biryani / Kathal Biryani)
శాకాహారులకు ఇది "వెజ్ మటన్ బిర్యానీ" అని చెప్పవచ్చు. పనస ముక్కలు మసాలాలను బాగా పీల్చుకుని, బిర్యానీలో మాంసం ముక్కల్లాంటి అనుభూతిని ఇస్తాయి.
3. పనసకాయ ఇగురు (Jackfruit Masala Gravy)
పనస ముక్కలను అల్లం వెల్లుల్లి పేస్ట్, ఉల్లిపాయలు మరియు గరం మసాలాతో కలిపి గ్రేవీలా వండుతారు. ఇది అన్నంలోకి మరియు చపాతీలోకి చాలా బాగుంటుంది.
4. పనసకాయ వేపుడు (Jackfruit Fry)
పనస ముక్కలను చిన్నగా కోసి, ఉప్పు, కారం, పసుపు వేసి నూనెలో డీప్ ఫ్రై లేదా షాలో ఫ్రై చేస్తారు. ఇది సాంబార్ లేదా పప్పు చారులోకి సైడ్ డిష్గా సూపర్ ఉంటుంది.
5. పనస గింజల కూర (Jackfruit Seeds Curry)
పనస పండు తిన్న తర్వాత గింజలను పారేయకుండా, వాటి పైన ఉండే పొట్టు తీసి కూర వండుకోవచ్చు.
* కాంబినేషన్: పనస గింజలను వంకాయతో కలిపి వండితే ఆ రుచే వేరు.
6. తీపి వంటకాలు (Sweet Dishes)
పనస పండు (ముగ్గినది) తో చేసే వంటకాలు:
* పనస పండు పాయసం: కొబ్బరి పాలు, బెల్లం ఉపయోగించి చేస్తారు.
* పనస తొనల గారెలు: పనస ముక్కలను పేస్ట్ చేసి, బియ్యం పిండి లేదా రవ్వ కలిపి గారెల్లా వేస్తారు.
ముఖ్య గమనిక: పనసకాయను కట్ చేసేటప్పుడు చేతులకు మరియు కత్తికి కొద్దిగా నువ్వుల నూనె లేదా వంట నూనె రాసుకుంటే, ఆ జిగురు అంటుకోకుండా ఉంటుంది.
1. పనసకాయ పకోడి (Jackfruit Pakora)
పనస ముక్కలను ఉడికించి, శనగపిండి, బియ్యం పిండి, మసాలాలు కలిపి నూనెలో వేయిస్తారు. ఇది వర్షం పడేటప్పుడు వేడివేడిగా తింటే చాలా బాగుంటుంది.
2. పనసకాయ ఆవకాయ (Jackfruit Pickle)
మామిడికాయ ముక్కల్లాగే పనస ముక్కలతో కూడా పచ్చడి పెడతారు. పనస ముక్కలను ఆవపిండి, మెంతిపిండి, నూనెతో కలిపి పచ్చడి చేస్తే అది నెలల తరబడి నిల్వ ఉంటుంది.
3. పనస గింజల వేపుడు (Roasted Jackfruit Seeds)
పనస గింజలను కేవలం కూరలోనే కాకుండా, ఉడకబెట్టి లేదా నిప్పుల మీద కాల్చి కొంచెం ఉప్పు, కారం చల్లుకుని తింటే మంచి ప్రోటీన్ స్నాక్ లాగా ఉంటుంది.
4. పనస పండు హల్వా (Jackfruit Halwa)
బాగా పండిన పనస తొనలను పేస్ట్లా చేసి, నెయ్యి, బెల్లం మరియు జీడిపప్పు వేసి దగ్గరకు ఉడికిస్తే రుచికరమైన హల్వా తయారవుతుంది. ఇది కేరళలో 'చక్క వరట్టి' (Chakka Varatti) అని పిలుస్తారు.
5. పనసకాయ కట్లెట్స్ (Jackfruit Cutlets)
ఉడికించిన పనస ముక్కలను మెదిపి (mash చేసి), అందులో ఉడికించిన ఆలుగడ్డ, ఉల్లిపాయలు, పచ్చిమిర్చి, గరం మసాలా కలిపి కట్లెట్స్ లాగా చేసుకుని తవా మీద కాల్చుకోవచ్చు.
6. పనస పొట్టు పులిహోర (Jackfruit Shredded Pulihora)
సాధారణ పులిహోరలాగే ఉంటుంది కానీ, ఇందులో పనస పొట్టును ఉడికించి పోపులో కలిపి చేస్తారు. ఇది అన్నంతో పనిలేకుండా విడిగా కూడా చాలా రుచిగా ఉంటుంది.
ముఖ్యమైన చిట్కాలు:
* లేత పనసకాయ: బిర్యానీ, కూరలు, వేపుళ్లకు 'లేత పనసకాయ' (Raw/Tender Jackfruit) వాడితేనే రుచి బాగుంటుంది.
* పండు పనస: పాయసం, హల్వా వంటి తీపి వంటకాలకు బాగా పండిన తొనలు వాడాలి.
Sonu Kumar
भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ?
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मीडिया घाटे का कारोबार है। मीडिया का घाटा पूरा करने या इन्हें भुगतान करने वाले समूहों के आधार पर भारत में मीडिया के 2 वर्ग है :
चूंकि दूरदर्शन के कर्मचारियों को वेतन नागरिको द्वारा वसूल किये गए टेक्स से चुकाया जाता है, अत: सरकार द्वारा नियंत्रित मीडिया सिटिजन पेड मीडिया है।
प्राइवेट मीडिया का घाटा निजी कम्पनियों के मालिक पूरा करते है, और वे ही सूचनाएं देने के लिए मीडियाकर्मीयों को भुगतान करते है।
.
लोकतंत्र आने के बाद से मीडिया समूह दुसरे नंबर की सबसे ताकतवर कम्पनियां बन गयी है। पहला नंबर हथियार बनाने वाली कम्पनियों का है। पिछले 200 वर्षो से वैश्विक राजनीती पर हथियार निर्माताओ का कब्जा है, और दुनिया में सबसे बेहतर हथियार बनाने वाली कम्पनियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिको के पास है।
.
जो भी देश अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों को टक्कर देने वाले हथियार नहीं बना पा रहा है, उन देशो के मीडिया को अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है। भारत भी हथियार निर्माण में काफी पिछड़ा हुआ है, अत: भारत के मीडिया को भी अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है।
.
इन कम्पनियों का मुख्य एजेंडा वैश्विक भारत पर आर्थिक-सामरिक-धार्मिक नियंत्रण बनाना है। पेड मीडिया के माध्यम से वे भारत की मुख्यधारा की सभी राजनैतिक पार्टियों एवं नेताओं को नियंत्रित करते है, ताकि इनका इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में किया जा सके।
.
[ इस जवाब में 3 खंड है। पहले खंड में उन कम्पनियों के बारे में कुछ विवरण है जिनका वैश्विक एवं भारतीय मीडिया में सबसे प्रभावी दखल है। खंड (2) में पेड मीडिया के प्रायोजको के वैश्विक एजेंडे को भारत के सन्दर्भ में बताया है। खंड (3) में उन कदमों का विवरण है, जिन्हें उठाकर आप उनके एजेंडे को ज्यादा अच्छे से समझ सकते है। मूल जवाब दुसरे खंड में है, अत: आप सीधे खंड (2) को पढ़ सकते है। ]
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खंड 1 ; पेड मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियां कौन है ?
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राजतन्त्र में गेजेट छापने की शक्ति राजा के पास थी। राजा के पास सेना होती थी, और इसीलिए राजा ताकतवर था। 12 वीं सदी में युरोप में जूरी सिस्टम आया और ब्रिटेन-फ़्रांस ने तेजी से तकनिकी विकास करना शुरू किया। चूंकि निर्णायक हथियारो पर नियंत्रण से वास्तविक ताकत आती है, अत: जब भी किसी राज्य में तकनिकी विकास होता है तो अंततोगत्वा यह विकास हथियार निर्माण की दिशा में मुड़ जाता है।
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17 वीं सदी में ब्रिटेन में निजी कम्पनियां बड़े पैमाने पर हथियार बनाने लगी थी, और 18 वीं सदी तक आते आते उन्होंने ऐसे निर्णायक हथियार बना लिए थे कि जिस सेना के पास ये हथियार होते थे वह सेना जीतना शुरू कर देती थी।
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उदाहरण के लिए 1805 से 1815 के बीच सिर्फ बर्मिघम के कारखानों ने ही लगभग 40,00,000 बन्दूको का उत्पादन किया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी इन्ही बन्दूको की सहायता से विभिन्न राजाओ की सेनाओं को हराकर अपने उपनिवेश स्थापित कर रही थी। बन्दूको निर्माण की दूसरी कॉटेज इंडस्ट्री लन्दन में थी। लन्दन एवं बर्मिंघम में बंदूक बनाने के इन कारखानों के मालिको ने ही पूरी दुनिया में ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार को सुनिश्चित किया।
Brief History
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उस समय बंदूक निर्णायक हथियार थी, और इसके उत्पादन पर नियंत्रण रखने वालो की ताकत को आप इस तरह समझ सकते है कि, यदि 1 लाख बन्दूको एवं कारतूस की पेटियों से भरा जहाज सिराजुद्दौला को सप्लाई कर दिया जाता तो क्लाइव लॉयड न तो प्लासी का युद्ध जीतता था और न ब्रिटिश भारत में घुस पाते थे।
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सिराजुद्दौला के पास यह अस्लहा आ जाता तो वह पूरे भारत को भी टेक ओवर कर लेता। लेकिन पूरे भारत का बादशाह बनने के बाद भी क्या सिराजुद्दौला बर्मिंघम के फैक्ट्री मालिक से टकराव ले सकता था ? नहीं !! क्योंकि वे सिराजुद्दौला के प्रतिद्वंदियों को 4 जहाज भरकर बंदूक भेज देते है, और सिराजुद्दौला के कारतूसो की सप्लाई रोक देते !! और इस तरह नवाब फिर से पिट जाता !! क्योंकि असली ताकत तब आती है जब आप अपने हथियार खुद बनाते हो।
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मतलब, 200 साल पहले ही राजा वगेरह नाम के राजा रह गए थे, और असली ताकत हथियार निर्माताओं के पास आ चुकी थी। पेड इतिहासकार इन तथ्यों को दर्ज नहीं करते, क्योंकि उन्हें यह जानकारी छिपाने के लिए पेमेंट की जाती है।
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बहरहाल, सिराजुद्दौला और भारत के अन्य राजाओं को हथियार बनाने वाली कंपनियों ने हथियार नहीं दिए, और वे हारते चले गए !! शिवाजी के पास पुर्तगाली तोपे थी, और यह एक बड़ी वजह थी कि वे मुकाबला कर पा रहे थे। बाजीराव को फ्रेंच तोपे सप्लाई कर रहे थे, और अहमद शाह अब्दाली के पास रशियन तोपखाना था।
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1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया तो जवाहर लाल ने अमेरिका-रूस को हथियार भेजने के लिए चिट्ठियां लिखी थी। और जब चीन को लगा कि भारत को हथियारों की सप्लाई आ सकती है, तो चीन ने बढ़ना रोक दिया।
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1965 में भारत पाकिस्तान में अन्दर तक चला गया था, लेकिन अमेरिका यानी हथियार बनाने वाली कपनियों के हस्तक्षेप के कारण हमें रुकना पड़ा। 1971 में फिर से यही हुआ। अमेरिका ने अपना नौ सेना बेड़ा पाकिस्तान की मदद के लिए रवाना कर दिया, और हमें फिर पीछे हटना पड़ा !! रूस के बीच में आने की वजह से हम बच गए वर्ना अमेरिकी धनिक भारत को 1971 में ही टेक ओवर कर लेते थे। और रूस अमेरिका को इसीलिए रोक पाया क्योंकि उस समय अमेरिका के साथ साथ रूस के पास भी निर्णायक हथियार थे।
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आप पिछले 200 सालो में हुए दुनिया के सभी युद्धों का अध्ययन करके देख सकते हो। जिस देश को निर्णायक हथियार बनाने वाली कम्पनियों का सहयोग मिला हुआ है, वे देश युद्ध जीत जाते है, वर्ना हार जाते है !! 16 वीं सदी से पहले तक बड़ी सेना का महत्त्व होता था, लेकिन बाद में जैसे जैसे हथियारों की तकनीक उन्नत होती गयी वैसे वैसे युद्ध में निर्णायक भूमिका हथियारों की हो गयी। द्वितीय विश्व युद्ध 6 साल तक चलता रहा लेकिन अमेरिका के फाइटर प्लेन ने 2 बम गिराकर युद्ध का फैसला कर दिया था।
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तब से आज हथियारों की तकनीक इतनी आगे जा चुकी है कि निर्णायक हथियारों से लैस 5 हजार का दस्ता 50 लाख की सेना को ख़त्म कर सकता है। वो भी परमाणु बमों का इस्तेमाल किये बिना।
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मेरा बिंदु यह है कि पिछले 200 वर्षो से इस धरती पर सबसे ताकतवर समूह हथियार कम्पनियां है, और अमेरिकी कम्पनियों के मालिक सबसे बेहतर एवं सबसे मारक हथियार बना रहे है। और इस वजह से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक वास्तविक अर्थो में वैश्विक राजनीती को प्रभावित एवं नियंत्रित करते है।
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हथियार कम्पनियों के मालिको को सस्ते में माल बनाने के लिए मुफ्त का कच्चा माल यानी खनिज चाहिए। तो वे हथियारों का इस्तेमाल करके राजा को नियंत्रित (उपनिवेश की स्थापना) करते थे, और फिर खनिज लूटते थे। डेमोक्रेसी आने के बाद राजा की जगह पीएम ने ले ली, अत: उन्होंने लूट चलाने के लिए पीएम को कंट्रोल करना शुरू किया।
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पीएम को कंट्रोल करने के 2 तरीके है
या तो आपको पीएम को युद्ध में हराने की क्षमता जुटानी होगी,
या फिर चुनाव में।
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युद्ध में खून खराबा होता है, और लागत भी काफी ज्यादा आती है। अत: हथियार कम्पनियों के मालिको ने मतदाताओं को चाबी देने के लिए पेड मीडिया पर कंट्रोल लेना शुरू किया। पेड मीडिया द्वारा वे मतदाता को नियंत्रित करते है, और मतदाता के माध्यम से पीएम एवं राज नेताओं को। यदि किसी देश का पीएम मीडिया पर अपना कंट्रोल लेने की कोशिश करेगा तो उसे युद्ध में जाना पड़ेगा।
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निर्णायक हथियारों के अलावा ये कम्पनियां और भी ऐसी ढेर सारी तकनिकी वस्तुएं बनाती है जो दुनिया के ज्यादातर देशो को बनानी नहीं आती। और इन वस्तुओ के बिना न तो देश चलाया जा सकता है, और न ही बचाया जा सकता है।
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इसमें मुख्य रूप से हथियार, इंधन, दवाइयाँ, चिकित्सीय उपकरण एवं माइनिंग मशीनरी शामिल है। किन्तु निर्णायक बढ़त फिर भी इन्हें हथियारों से ही मिलती है। क्योंकि किसी भी प्रकार के टकराव का अंतिम पड़ाव हमेशा युद्ध ही होता है।
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निचे मैंने कुछ ताकतवर कम्पनियों के बारे में सांकेतिक जानकारी दी है। अन्य विवरण के लिए कृपया गूगल करें।
Infographic: The World's Biggest Arms-Producing Companies
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Lockheed Martin, USA ($40.83 billion)
Boeing , USA ($29.51 billion)
Raytheon , USA ($22.95 billion)
BAE Systems , USA ($22.79 billion)
General Dynamics , USA ( $19.23 billion)
Airbus group, Trans-European : ($11.2 billion)
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और ऐसी 15 से 20 कम्पनियां है जो अपना समूह (लॉबी) बनाकर काम करती है। इन कंपनियों के कुल एसेट्स को आप जोड़ ले तो योगफल भारत के कुल विदेशी मुद्रा कोष से कहीं ज्यादा निकल जाएगा, और जहाँ तक ताकत की बात है इनमे से प्रत्येक कम्पनी की ताकत पूरे भारत देश से ज्यादा है। मतलब यदि ऊपर दी गयी किसी भी कम्पनी या इस कम्पनी समूह से भारत का युद्ध हो जाता है तो ये कम्पनियां भारत को उधेड़ कर रख देगी !! क्योंकि ये कम्पनियां ऐसी चीजे बनाती है, जो दुनिया के ज्यादातर देश नहीं बना पाते !!
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लॉकहिड मार्टिन पर गूगल करें कि ये कम्पनी किस तरह के सामान बनाती है ; Lockheed Martin - Wikipedia
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यदि ये कम्पनियां भारत पर हमला करने के लिए अपने उन्नत हथियार बांग्लादेश या पाकिस्तान को डिस्काउंट / मुफ्त में देना शुरू करें (जैसा कि उन्होंने कारगिल में किया था) और हमारी सप्लाई लाइन काट दे तो हमारे पास क्या विकल्प है !! सिर्फ रूस ही ऐसे हथियार बनाता है जो इनके हथियारों का मुकाबला कर सके। लेकिन 1971 की बात और थी। आज रूस इन कम्पनियों के खिलाफ जाकर भारत को मदद देने का जोखिम नहीं उठा सकता। कारगिल युद्ध में भी रूस पीछे हट गया था और उसने हमें लेसर गाइडेड बम नहीं भेजे थे।
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और फिर ये कोई देश नहीं है कि हम इनसे कोई वार्ता कर सके। ये निजी कम्पनियां है, और सिस्टम से बाहर काम करती है। ये बोल देंगे ये सामान बनाकर बेचना हमारा धंधा है। आपसे पूछकर बनायेंगे और बेचेंगे क्या !! तुम्हारी हैसियत है तो तुम भी बना लो, कौन रोक रहा है !!
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मिसाल के लिए, जब भारत का कारगिल युद्ध हुआ तो हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और ये बम सिर्फ इन्ही कंपनियों को बनाने आते है। यदि हमें ये बम नहीं मिलते तो हम कारगिल नहीं जीत सकते थे !! यह एक तथ्य है !! और अभी जब हमें एयर स्ट्राइक करनी थी तो फिर से हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और फिर से हमें इनसे विनती करनी पड़ी कि वे हमें लेसर गाईडेड बम उपलब्ध कराए !! यदि ये कम्पनियां हमें बम न भेजती तो स्ट्राइक न होती थी !! यह एक तथ्य है !!
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कारगिल में जब हमारी यह कमजोरी खुलकर नागरिको के सामने आ गयी थी तो वाजपेयी ने लेसर गाईडेड बम (सुदर्शन) बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। लेकिन तमाम कोशिशो के बावजूद हम काम आने लायक लेसर गाइडेड बम नहीं बना सके !! यह भी एक तथ्य है !!
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अभी ये सिर्फ हथियार कम्पनियां है। इसके बाद तेल निकालने वाली कम्पनियां आती है। भारत के पास तेल के कुँए तो है लेकिन तेल निकालने की तकनीक नहीं है। दुनिया में तेल निकालने की तकनीक भी लगभग दर्जन भर कंपनियों के पास ही है। अब भारत अपना 80% तेल भी आयात करता है, और हम अपने 80% हथियार भी विदेशियों से लेते है !!
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हथियार कम्पनियों के मालिको ने पहले सत्ताओ को कंट्रोल किया, और फिर इकॉनोमी को कंट्रोल करने के लिए उन्होंने बैंक खोले। अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ( जो डॉलर छापता है ) पर गूगल करिए। इसकी होल्डिंग प्राइवेट बैंको के पास है। इसके बाद इन्होने तेल निकालने की तकनीक जुटाई और इस पर एकाधिकार बनाया।
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इसके बाद चिकित्सीय उपकरण जैसे MRI, अल्ट्रा साउंड, हार्ट सिटी स्कैनर एवं आवश्यक दवाइयाँ बनाने वाली कम्पनियां। और ये जो मशीने बनाते है उनकी तकनीक भी कुछ गिनी चुनी कंपनियों के पास है। और फिर इन ताकतवर कंपनियों के पीछे अमेरिका की अन्य मल्टीनेशनल कम्पनियां जैसे बैंक, खनन, बीमा, संचार, कम्प्यूटर आदि।
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कुल मिलाकर कुछ 100 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एक समूह है, जिनके पास ऐसी तकनीक है जो दुनिया के 190 देशो के पास नहीं है। और कुछ 30-40 अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच घराने है, जो पिछले 150 वर्षो से इन कम्पनियों को चला रहे है। यही अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक पेड मीडिया के प्रायोजक है !!
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इन कम्पनियों की बढ़त तकनीक की वजह से है। पिछली 2 सदियों से इन्होने इस तकनीक पर एकाधिकार बनाकर रखा है। अन्य देश यदि यह तकनीक जुटा लेते है तो इनकी ताकत खत्म हो जायेगी। अत: इन कम्पनियों के मालिक पिछले 200 वर्षो से बराबर इस मद में निवेश कर रहे है कि अन्य देश यह तकनीक न जुटाएं।
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यदि पीएम ऐसे क़ानून छापने लगता है जिससे अमुक देश में तकनिकी उत्पादन होने लगे तो ये कम्पनियां अपना बाजार खोने लगेगी। अत: अपने कारोबारी हितो को बचाने और अतिरिक्त मुनाफा बनाने के लिए उन्हें पीएम को कंट्रोल की जरूरत होती है। और पीएम को कंट्रोल करने के लिए इन्हें मीडिया पर कंट्रोल चाहिए !!
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पेड मीडिया के अंग : पेड मीडिया सिर्फ न्यूज चेनल एवं अखबार नहीं है। इसका फैलाव इससे कहीं विस्तृत एवं गहरा है।
मुख्य धारा के सभी न्यूज चैनल एवं सभी मनोरंजन चैनल
मुख्य धारा के सभी अख़बार
सोशल मीडिया कम्पनियां
गणित-विज्ञान-एकाउंट्स को छोड़कर सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकें एवं साहित्य
मुख्यधारा की सभी खबरिया एवं मनोरंजन मैगजीने
मुख्यधारा की सभी फ़िल्में
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जब पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण नेताओं पर कमजोर हो जाता है, तो उनके एजेंडा भी धीमा हो जाता है, और जब उनका नियंत्रण बढ़ता है तो उनके एजेंडे की रफ़्तार भी बढ़ जाती है। इस तरह पिछले 74 सालों में नियंत्रण घटने-बढ़ने के कारण उनके एजेंडे की रफ़्तार भी घटती-बढती रहती है। किन्तु 2001 के बाद से उनका नियंत्रण लगातार बढ़ता जा रहा है, और आज यह इतना बढ़ चुका है कि पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में भारत से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके है।
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1947 से 1990 तक भारत में पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण कब बढ़ा / घटा, जानने के लिए यह जवाब पढ़ें : क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं -- https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/
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खंड 2 ; पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है ?
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उनका मुख्य एजेंडा अपने कारोबारी हितो की रक्षा करना है। चूंकि उनकी शक्ति का स्त्रोत हथियारों की तकनीक पर टिका हुआ है, अत: किसी देश के नेताओं को नियंत्रण में लेने के बाद वे उन्हें बाध्य करके ऐसे क़ानून छपवाते है जिससे देश तकनिकी वस्तुओं का उत्पादन न कर सके। इसके लिए वे गेजेट एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
गेजेट में वे ऐसी इबारते छपवाते है जिससे उनकी शक्ति बढे
और नागरिको को भ्रमित करने के लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है
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जवाब के इस भाग में मैंने उन कानूनों एवं लाक्षणिक बिन्दुओ के बारे में जानकारी दी है जिनका अवलोकन करके आप यह जान सकते है कि भारत में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक अपना एजेंडा किस गति से लागू कर रहे है।
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का एजेंडा :
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(1) आर्थिक नियंत्रण बनाने के लिए
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(1.1) भारत के प्राकृतिक संसाधन एवं खनिज लूटने के लिए उनका अधिग्रहण करना।
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(1.2) आवश्यक सेवाओं जैसे मीडिया, पॉवर, बैंकिंग, माइनिंग, रेलवे, एविएशन, ऑटो मोबाइल, निर्माण, कृषि, दवाइयाँ आदि के कारोबार पर एकाधिकार बनाना।
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वे पेड मीडिया पार्टियों एवं उनके नेताओं का इस्तेमाल करके गेजेट में लगातार ऐसी इबारतें छपवायेंगे जिससे देश की राष्ट्रिय संपत्तियां, प्राकृतिक संसाधन, सार्वजनिक उपक्रम आदि बिक जायेंगे और ये संपत्तियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों के स्वामित्व में चली जाएगी।
पेड मीडिया में इस बेचान को एक सधी हुयी आर्थिक नीति एवं साहसिक फैसले के रूप में बताया जाएगा। नागरिको का ध्यान बंटाने के लिए वे अस्पष्ट आर्थिक शब्दावली जैसे विनिवेश, विदेशी निवेश, आर्थिक सुधार, निजीकरण, पीपीपी मोड़, उदारीकरण, भूमंडलीकरण, पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, नव उदारवाद आदि का इस्तेमाल करते है।
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[ उदारहण के लिए, अभी टाटा झारखंड में 1 रू सालाना की दर पर कोयला खोद रहा है, जबकि बाजार भाव 2,000 रू टन का है। और यह जानकारी भी सामने इसीलिए आ पाई क्योंकि जियो के कारण डोकोमो का धंधा सिकुड़ने लगा और टाटा ने जियो के रास्ते में सरकारी अडंगे लगाने शुरू किये। और फिर रिलायंस ने टाटा की घड़ी दबाने के लिए फर्स्ट पोस्ट को यह खबर लगाने के लिए पेमेंट की !! ऐसी सैंकड़ो खदाने है जहाँ से इसी तरह से खनिज लूटे जा रहे है।
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पेड मीडिया इन्हें रिपोर्ट नहीं करता इसीलिए हमें यह मालूम नहीं होता। टाटा 1947 से ही 1 रू में यह कोयला खोद रहा है, लेकिन 74 साल में किसी ने भी इस खबर को रिपोर्ट नहीं किया। टाटा अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों की शेल कम्पनी है। जब ब्रिटिश गए थे इन्हें इस तरह के कई माइनिंग राइट्स मुफ्त में दे गए थे। आज भी इनके सभी धंधे अमेरिकन एवं ब्रिटिश धनिकों की मशीनों पर चल रहे है। 1990 के बाद से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने सीधे भारत में आना शुरू किया और अब वे बेहद तेजी से भारत के संसाधनों का अधिग्रहण कर रहे है। ]
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(1.3) भारत में तकनिकी उत्पादन करने वाली छोटी स्वदेशी इकाइयों को बाजार से बाहर करना।
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तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय छोटे कारखानों को बाजार से बाहर करना उनका मुख्य एजेंडा है। जिस देश में छोटे कारखानों का आधार टूट जाता है, वह देश हमेशा के लिए तकनीकी वस्तुओ के लिए परजीवी हो जाता है। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जहाँ भी जाती है वहां के तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय कारखानों को गायब करने में काफी संजीदगी से काम करती है। तकनिकी आधार टूटने के बाद अमुक देश हर क्षेत्र में तकनीक के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों का ग्राहक बन जाता है।
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बॉटम 80% का गणित-विज्ञान का आधार तोड़ना।
अनुत्पादक नस्ल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को इतिहास, राजनीती विज्ञान, मनोरंजन, खेलकूद आदि जैसे क्षेत्रो में जाने के लिए प्रेरित करना।
रेग्रेसिव टेक्स सिस्टम में छोटे कारोबारीयों का कारोबार बड़ी फैक्ट्रियो के पास चला जाता है। अत: वे रिग्रेसिव टेक्स प्रणाली के समर्थन, एवं प्रोग्रेसिव टेक्स के सख्त खिलाफ है। सेल्स टेक्स, एक्साइज टेक्स, वैट एवं जीएसटी आदि सभी रिग्रेसिव टेक्स प्रणालियाँ है।
वे गेजेट में ऐसी इबारतें छापेंगे जिससे शहरी क्षेत्र की जमीन महंगी बनी रहे। जमीन की कीमतें ऊँची रहने से कारखाने लगाना मुश्किल हो जाता है।
तकनिकी उत्पादन तोड़ने के लिए उन्हें अदालतों एवं पुलिस का ऐसा स्ट्रक्चर चाहिए कि पैसा फेंकने वाले का काम हो सके। यदि किसी देश में अदालतें एवं पुलिस ईमानदार है तो तकनिकी विकास में विस्फोटक विकास होने लगता है। अत: वे अदालतों को किसी भी कीमत पर केंद्रीकृत बनाये रखना चाहते है।
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(2) सैन्य नियंत्रण बनाने के लिए
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आर्थिक नियंत्रण बढ़ने के साथ ही अगले चरण में वे सैन्य नियंत्रण बनाना शुरू करते है। यदि कोई देश अपने आर्थिक क्षेत्र अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को देने से इनकार करता है तो फिर कोई न कोई बहाना से सेना भेजकर पहले सैन्य नियंत्रण बनाया जाता है, और फिर वे अर्थव्यवस्था का अधिग्रहण करना शुरू करते है। ईराक इसी मॉडल का शिकार हुआ था, और अब ईरान का नंबर है। भारत ने आर्थिक नियंत्रण देना स्वीकार कर लिया अत: हम युद्ध से बच गए। और अब वे सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की इबारतें गेजेट में छपवा रहे है।
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(2.1) भारत की सेना पर नियंत्रण बनाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के हथियार इंस्टाल करना।
अगस्तावेस्ट लेंड, रफाल आदि के बाद अभी जब ट्रंप ने भारत की विजिट की तो फिर से भारत को 3 बिलियन डॉलर के ब्लेक हॉक हेलीकोप्टर लेने के लिए बाध्य किया। इन सभी जटिल हथियारों को खरीदते समय निर्माता से End Use Monitoring Agreement करना होता है। EUMA और स्पेयर पार्ट्स की निर्भरता के कारण सेना हथियार का इस्तेमाल करने के लिए अमुक निर्माता पर हमेशा निर्भर बनी रहती है।
भारत ने इंसास राइफलो में सुधार एवं उत्पादन को बेहद धीमा कर दिया है, और अमेरिका भारतीय सेना में अपनी राइफले इंस्टाल कर रहा है। पिछले वर्ष ही सेना ने इंसास का ऑर्डर केंसिल करके 6 लाख रायफल का कोंट्रेक्ट अमेरिकी कम्पनी को दिया है।
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(2.2) भारत के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न होने देना।
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पाकिस्तान के पास सामरिक बम है और वह आज भी अपनी परमाणु क्षमता निरंतर बढ़ा रहा है। भारत के पास सामरिक परमाणु बम नहीं है, और अमेरिका 123 एग्रीमेंट करके 2008 में ही हमारा परमाणु कार्यक्रम बंद करवा चुका है। 2010 में पोकरण-2 के मुख्य वैज्ञानिक ने ( रिटायर होने के बाद ) सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि भारत का हाइड्रोजन बम का टेस्ट असफल रहा था। फिशन ब्लास्ट का परिक्षण सफल था, किन्तु हम फिशन और लोइल्ड डिवाइस का परिक्षण तो 1974 में ही सफलतापूर्वक कर चुके थे। बाद में इसकी पुष्टि परिक्षण में शामिल अन्य वैज्ञानिक ने भी की। इसके अलावा भारत ने आज तक कभी भी वातावरणीय परिक्षण भी नहीं किया है। और फिर भी हम अपना सैन्य परमाणु कार्यक्रम बंद कर चुके है।
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(2.3) भारत एवं विशेष रूप से कश्मीर में अपने सैन्य अड्डे बनाना।
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ईरान+चीन के खिलाफ भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहते है, और इसके लिए उन्हें भारत की जमीन-सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए। अभी आप भारत में जो हिन्दू-मुस्लिम तनाव देख रहे है, यह इसी नीति का हिस्सा है। भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ने के बाद जब अमेरिका भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करेगा तो एंटी-मुस्लिम सेंटिमेंट की लहर की चपेट में आकर भारतीय हिन्दू ईरान में सेना भेजने का विरोध नहीं करेंगे।
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(2.4) नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना।
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यह सब तभी तक चलता है, जब तक नागरिको को इस बारे में पता नहीं रहे कि उनका पीएम अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियंत्रण में जा चुका है। यदि राजनैतिक कार्यकर्ता एवं नागरिक पेड मीडिया की चपेट से बाहर आ जाते है, या कोई नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के खिलाफ हो जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को निष्कासित करने और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक कानूनों की मांग को लेकर जन आन्दोलन खड़ा हो सकता है।
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और तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास भारत को काबू करने का एक मात्र विकल्प यह होगा कि वह सीधे सेना का इस्तेमाल करे। किन्तु जिस देश के नागरिको के पास हथियार होते है उस देश की सेना को तो हराया जा सकता है, किन्तु टेरेटरी को टेकओवर नहीं किया जा सकता। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों नागरिको को हथियार रखने की अनुमति देने के सख्त खिलाफ है।
उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके भारतीयों के दिमाग में हथियारों के प्रति इतनी नफरत भर दी है कि यदि आप घर घर जाकर फ्री में बंदूके बाँटोगे तब भी अधिकांश नागरिक इन्हें लेने से इनकार कर देंगे। उन्होंने प्रत्येक भारतीय के दिमाग में यह वाक्य नट बोल्ट से अच्छी तरह से कस दिया है कि – यदि भारतियों को को बंदूक रखने की अनुमति दे दी गयी तो वे एक दुसरे मार देंगे !!
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(3) धार्मिक नियंत्रण बनाने के लिए :
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का गठजोड़ मिशनरीज के साथ है। अत: जब किसी देश पर उनका आर्थिक-सैन्य नियंत्रण बढ़ता है, तो अगले चरण में वे स्थानीय धर्मो को आपस में लड़वाकर कन्वर्जन के प्रयास शुरू करते है। पिछले 400 सालो से अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का यही ट्रेक रहा है।
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(3.1) भारत में सांप्रदायिक आधार पर अलगाववादी हिंसक गृह युद्ध की जमीन तैयार करना।
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(3.2) भारतीय मुस्लिमों को अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना
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(3.3) भारत को 3 हिस्सों में विभाजित करना ( कश्मीर एवं पूर्वोत्तर )।
वे शुरू से ही भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून डालने के खिलाफ रहे है। इससे धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ता है, और अलगाव की जमीन तैयार होती है।
इसके अलावा वे भारत में रह रहे 2 करोड़ अवैध विदेशी निवासियों को खदेडने के भी खिलाफ है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें किसी भी समय हथियार भेजकर गृह युद्ध ट्रिगर किया जा सके।
हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने के लिए वे गाय का भी कई तरीको से इस्तेमाल करते है। आजादी से पहले भी उन्होंने गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने में किया था।
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(3.4) सरकारी नियंत्रण में लेकर मंदिरों की संपत्तियां लूटना एवं उत्सवों में होने वाले धार्मिक जमाव को तोडना।
वे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के भी खिलाफ है, ताकि मंत्रियो एवं जजों का इस्तेमाल करके मंदिर की जमीनो को बेचा जा सके।
उत्सवो में धार्मिक जमाव तोड़ने के लिए वे भ्रष्ट जजों एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
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(3.5) देशी गाय की प्रजाति को लुप्त प्राय करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
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(3.6) भारत में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन करना।
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(4) सामाजिक एवं सांस्कृतिक एजेंडा
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सामाजिक-पारिवारिक कलेश, जातीय-क्षेत्रीय अलगाव से उत्पादक व्यक्तियों को मानसिक एवं आर्थिक हानि होती है, और समग्र देश की उत्पादकता गिर जाती है। साथ ही इसमें कारोबार एवं धर्मांतरण भी है। संस्कृति का रूपांतरण करने के बाद कन्वर्जन करना आसान हो जाता है।
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(4.1) जाति एवं नस्ल के आधार पर हिंसक अलगाव खड़ा करना।
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(4.2) लैंगिक आधार पर आपसी घर्षण बढ़ाकर परिवार एवं विवाह नामक संस्थाए ध्वस्त करना।
पहले 498A का इस्तेमाल करके उन्होंने परिवारों को तोड़ा, और फिर लिव इन को कानूनी करके लिव इन संतानों को कानूनी मान्यता दी।
उन्होंने 2012 में यह क़ानून छापा कि, पुरुष पर यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए लड़की का सिर्फ बयान ही पर्याप्त होगा। इन सभी क़ानूनो के समग्र प्रभाव से स्त्री-पुरुष के बीच सामाजिक संघर्ष बढ़ गया, और यह आगे भी बढ़ता जाएगा।
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(4.3) फूहड़ता, अश्लीलता एवं नग्नता को सार्वजनिक स्वीकार्यता दिलाना।
उन्होंने सेल्फ सेंसरशिप का क़ानून छापा ताकि वेब सीरिज, इंटरनेट आदि में गाली गलौज और यौन विकृतियों की सामग्री को बढ़ावा दिया जा सके।
पारिवारिक स्तर पर अश्लीलता एवं फूहड़ता को स्वीकार्यता दिलाने के लिए वे मनोरंजन चेनल्स का इस्तेमाल करते है।
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(4.4) दवाईयों पर निर्भरता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट को बढ़ावा देना।
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(4.5) अफीम एवं भांग पर प्रतिबंधो को कठोर करना।
इन प्रतिबंधो से एक तरफ दवाईयों की बिक्री बढ़ती है, और दूसरी तरफ युवाओं को शराब, ड्रग आदि नशो की और धकेलना आसान हो जाता है। मिशनरीज कन्वर्जन में नशे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करती है। अभी पंजाब में इस मॉडल पर काम चल रहा है। आगे अन्य राज्यों का भी नम्बर आएगा।
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(5) राजनैतिक एजेंडा
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वे राजनीति में केंद्रीकृत व्यवस्था चाहते है ताकि बड़ी पार्टियों में पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नेताओं को प्लांट किया जा सके। यदि पार्टियाँ एवं नेता उनके कंट्रोल से निकल गए तो वे गेजेट में इबारतें छपवाने की क्षमता खो देंगे।
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(5.1) EVM जारी रखना।
evm उन व्यक्तियों के निर्देश पर परिणाम दिखाती है जो व्यक्ति इसका प्रोग्राम लिखते है। नेताओ को कंट्रोल करने के लिए evm उनका सबसे प्रभावी टूल है। पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे इस तरह की गलतफहमी फैलाते है तो अमुक राजनीतिक दल या पीएम evm द्वारा वोटो की हेरा फेरी कर रहा है। जबकि केंचुआ और evm पर पीएम का कोई कंट्रोल नहीं होता है।
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(5.2) छोटी पार्टियों को कमजोर करना।
वे निरंतर ऐसे क़ानून छापते है जिससे छोटी पार्टियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जाए और सिर्फ बड़ी पार्टियाँ मैदान में रहे।
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(5.3) बड़ी पार्टियों का केन्द्रीयकरण करना।
वे राजनैतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र यानी कि पार्टी मेम्बर्स को वोटिंग राइट्स देने के खिलाफ है। इससे वे भारत की बड़ी पार्टियों में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा पाते है जो उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
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(5.4) युवाओं को राजनीती से दूर रहने के लिए प्रेरित करना
ऐसा करने के लिए पेड मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है।
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(5.5) नागरिको के मतदान एवं चुनावी अधिकारों में कटौती करना
उन्हें इस तरह का सिस्टम चाहिए कि एक बार वोट देने के बाद अगले 5 वर्ष तक मतदाताओ की प्रशासनिक-राजनैतिक प्रक्रियाओ में कोई भूमिका न रहे, ताकि वे पीएम एवं मंत्रियो को घूस देकर या उनका हाथ मरोड़ कर मनमर्जी की इबारतें गेजेट में निकलवा सके। वोट वापसी, जनमत संग्रह प्रक्रियाएं इस मेकेनिज्म को पूरी तरह से तोड़ देती है। अत: वे इन दोनों प्रक्रियाओ को गेजेट में छापने के सख्त खिलाफ है।
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(6) प्रशासनिक एजेंडा :
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पुलिस एवं अदालतों की सरंचना इस तरह रखना कि पैसा फेंककर अपना काम करवाया जा सके
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पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। जो आदमी पुलिस एवं जजों को नियंत्रित करता है, उस पर कोई भी क़ानून लागू नहीं होता। क्योंकि जब भी कोई क़ानून तोड़ा जाता है अपराधी को पकड़ने का काम पुलिस, और दंड देने का काम जज करता है।
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वे इतने बड़े भारत में अपने एजेंडे को इसीलिए आगे बढ़ा पा रहे है, क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम का डिजाइन इस तरह का होता है कि इसमें चयनात्मक न्याय दिया जा सकता है। मतलब, जब पैसे वाला आदमी फंसता है तो वह जज को पैसा देकर अपने पक्ष में फैसला निकलवा लेगा। इसी तरह जिसके पास पैसा है वह अपने प्रतिद्वंदियों को भी उल्टे सीधे मुकदमों में फंसा कर अंदर करवा सकता है।
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अदालतों एवं पुलिस को अपनी पकड़ में रखने के लिए वे भारत में जज सिस्टम जारी रखना चाहते है, एवं जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करते है। वे जूरी सिस्टम से इतनी घृणा करते है कि उन्होंने भारत की सभी पाठ्यपुस्तको में से इस लफ़्ज को निकाल दिया है। आपको भारत की किसी भी अखबार, साहित्य, पाठ्यपुस्तक और यहाँ तक की क़ानून की किताबों तक में जूरी सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी !!
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उल्लेखनीय है कि अमेरिका एवं ब्रिटेन की अदालतों में जूरी सिस्टम है, जज सिस्टम नहीं। और जूरी सिस्टम होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस जैसे देश भारत जैसे देशो से तकनीक के क्षेत्र में आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए !!
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खंड 3 ; पेड मीडिया का एजेंडा आगे बढ़ाने वाले लोगो को चिन्हित करना :
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अपने ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल करके वे पेड मीडिया पर कंट्रोल लेते है और फिर पेड मीडिया की सहायता से नेता खड़े करते है। नागरिक एवं कार्यकर्ता इसे देख न सके इसके लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है। जो नेता उनके एजेंडे के खिलाफ जाता है उसका प्लग निकाल दिया जाता है, और नया नेता प्लांट कर दिया जाता है।
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आप पिछले 20 वर्षो का अवलोकन करें तो देखेंगे कि तमाम सत्ता परिवर्तनों के बावजूद गाड़ी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, और आगे भी गाड़ी इसी दिशा में जायेगी। पेड मीडिया में जितने भी चेहरे आप देखते है, वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते है। जो व्यक्ति या नेता या संस्था या पार्टी या बुद्धिजीवी ऊपर दिए गए एजेंडे के किसी भी बिंदु के खिलाफ जायेगा उसे मुख्य धारा के पेड मीडिया में आप फिर नहीं देखेंगे।
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बहरहाल, पेड मीडिया की भारत पर पकड़
Ghanshyam Patel
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
કુદરત નુ અનમોલ સર્જન ,
એટલે ……….
મા ,
બહેન ,
દિકરી ,
ભાર્યા ,
સખી ,
માસી ,
દાદી ,
મામી ,
કાકી ,
ફોઈ ,
શિક્ષિકા ……….
આવા , તો કેટલાય રુપ ને સજાવતી...સંભારતી
સ્નેહ ,
પ્રેમ ,
લાગણી ,
સહનશીલતા ,
લજજા ,
સહિષણુતા ,
ગમતુ છોડી દેવાની ભાવના
અને વખત આવે ,
માં કાલીકા નુ રુપ ધરવાની શકિત ધરાવનારી અસંખ્ય મેધધનુષી રંગો નુ મિશ્રણ અને પ્રભુ ની ઉત્તમ રચના એટલે જ ,
એક માત્ર
સ્ત્રી ____સન્નારી .
જગતની તમામ નારીઓને હૃદયથી ,
🙏🏻 HAPPY WOMEN'S DAY 🙏🏻
yeash shah
How to Interpret Tarot Cards? (For Beginners)
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Each Tarot Card, Represents 5 Elements.
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(1) Numbers
(2) Colour
(3) Symbol
(4) Picture
(5) Entire Story or Theme of the card.
There are Two segments of 78 tarot Cards
(1)Major Arcana
(2) Minor Arcana
Major Cards :
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These 22 Cards From ""The Fool"" to ""The World "" Represents the Major Secrets of life, Big Events, Important Insights. It Represents The important Persons in our life.
Minor Cards
--------------
There are 4 types of Minor Cards
(1) Swards ( Thoughts)
(2) Cups
( Emotions)
(3) Wands
(Actions)
(4) Pantacles
(Prosperity)
There are in total 56 Minor Cards.
What 5 elements of Cards Represents
(1) Numbers -
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Number Represents The life order. Also Connected With Numerology and Planets.
(2) Colour - Colours like Yellow, Red, Grey ,Blue Represents Mood and the Temperament of cards.
(3) Symbols - Symbols like Infinity, Wheel, Books Angels tells about The Hidden Knowledge or philosophy of Life. It Reveals Hidden msgs also.
(4) Picture - Picture Represents The Core State or Condition of Life. Like 5 of Cups Represents sadness or disappointments
(5) Entire Story or Theme - The sum of all 4 Elements Above , In total Can give Deeper Insights about any Questions.
#Apart from this Basic Readings
You can think about the Phycological And Spiritual Meanings of the card driven and can give Guidence according to the Context of the question asked by the Client.
Saroj Prajapati
ह्रदय में ममता का सागर
आंखों में अंगार
मैं ही कष्टनिवारणी
मैं ही काली का अवतार ।।
@sarojप्रजापति
🌸..महिला दिवस विशेष ..🌸
- Saroj Prajapati
Bhatt Bhavin
इश्क था नहीं........ભટ્ટસાહેબ.
इश्क था नहीं तो जताया क्यूं,
टूटे दिल को फिर सजाया क्यूं।
जो वादे करके निभाने नहीं थे,
तो फिर वादों को बनाया क्यूं।
रात को बात करना अच्छा लगा,
तो फिर सपनो को ठुकराया क्यूं।
बोला था साथमे चलेंगे साथ-साथ,
ये सफर में अकेले तरसोदा क्यूं।
मालूम था कि साथ चलना नहीं है,
" साहेब " फिर सपनो को सिंचोया क्यूं।
sahitya
प्रेम!!
हमेशा जिज्ञासा थी इस भाव को लेकर....
सोचा करती थी...
आखि़र कितना महत्व है इस भाव का?
क्यों ईश्वर ने भी चुना इसे?
वियोग और कष्ट के मूल्य पर भी।।
कुछ तो होगा ना?
हासिल तो होता ही होगा?
तभी तो यह जग पूजता है...
उन प्रेम के प्रतिरूप को।।
हर भाव से सर्वोपरि होगा ना यह भाव?
शायद?
या निश्चित ही!!
तभी तो जग ढूंढता है....
इस 'संसार-सागर' में प्रेम की एक 'बूंद'...
मैंने जितना सुना...
उतना अधिक जानना चाहा।
जितना पढ़ा...
उतना ही अधिक जानना चाहा।।
मगर फिर एक दिन विराम लगा....
सुना...
पहले एक से....
फिर किसी और दिन किसी और से....
"प्रेम करने वाली लड़कियां 'अच्छी' नहीं होती"
सच में??
'प्रेम' करने वाली लड़कियां 'अच्छी' नहीं होती?
Tr. Mrs. Snehal Jani
જે ઘરમાં સ્ત્રીઓને યોગ્ય સન્માન મળે છે, એ ઘરની સ્ત્રીઓને બહારથી મળતાં સન્માનની કોઈ લાલસા હોતી નથી. અને જો આ સ્ત્રીઓની કોઈ વિશેષ ઉપલબ્ધિ માટે કોઈ સંસ્થા દ્વારા સન્માન કરવામાં આવે તો એમાં એનાં પરિવારનો સંપૂર્ણ સહયોગ મળતો હોય છે.
આ મંચની તમામ મહિલાઓને 'આંતરરાષ્ટ્રીય મહિલા દિન'ની શુભેચ્છાઓ💐
Raju kumar Chaudhary
🎵 गीत: “आमाको सपना अब पूरा हुँदैछ”
Verse 1
सानो झुपडीको ढोकाबाट
टाढा आकाश हेर्दै
आमाले एक दिन भनिन्
“देश कहिले उज्यालो हुन्छ?”
भोकले सपना चुँडिने
दिनहरू धेरै देख्यौँ
तर मनको विश्वास
कहिल्यै हामीले छोडेनौँ।
Pre-Chorus
अन्धकार लामो भए पनि
बिहान अवश्य आउँछ
आमाले रोपेको आशा
आज फूल बनेर फुल्छ।
Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
हामी युवाको आवाज
आकाशमा गुन्जिँदैछ।
डरका सबै साङ्ला
आज टुट्दैछन्
नयाँ नेपालको बिहान
अब उदाउँदैछ।
Verse 2
सडकहरूमा युवाहरू
आँधी बनेर उठेका
अन्यायको अगाडि
अब हामी नझुकेका।
भित्ताभरि लेखिएका
क्रान्तिका ती शब्द
नयाँ इतिहासको
बन्दैछन् आज अध्याय।
Pre-Chorus
आमाको आँसुहरू
आज शक्तिमा बदलियो
सपना देख्ने आँखा
आज उज्यालोमा बदलियो।
Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
हामी युवाको आवाज
आकाशमा गुन्जिँदैछ।
डरका सबै साङ्ला
आज टुट्दैछन्
नयाँ नेपालको बिहान
अब उदाउँदैछ।
Bridge
हामी नै भविष्य हौँ
हामी नै उज्यालो
तिम्रो विश्वासको बाटो
अब बन्यो हाम्रो बाटो।
Final Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
नयाँ नेपालको सूर्योदय
आज देखिँदैछ।
तिमी मुस्कुराऊ आमा
समय बदलिँदैछ
हामी उठेका छौँ
र तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ… 🌅
video link
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Sonam Brijwasi
radhe shyam guys...
kaise ho sab
Alok Mishra
जो ये राहें बोलती राज़ खोलती ।
हर राहगीर को रोज तोलती ।
हो जाता कहर इस जमानें में
जो राहें भी अपनी रज़ा बोलती ।
- Alok Mishra
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
“પરીવર્તન કદી કષ્ટદાયક નથી હોતું ,
કષ્ટદાયક તો “પરીવર્તન“લાવવાની પ્રક્રિયા હોય છે...!!
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
jighnasa solanki
દરેકને વાંચવુ ગમે,
હું એવુ રસપ્રદ પુસ્તક છુ.
છતા મને વાંચવુ સરળ નથી.
કારણ કે
હું શબ્દોથી નહી,
લાગણીઓથી આલેખાયેલુ પુસ્તક છુ.
💐HAPPY WOMAN'S DAY 💐
kajal jha
नज़र ने नज़रों से मिला तो यह ख्याल आया,
ये मेरा दिल कहाँ से कहाँ आ गया।
एक पल में अजनबी से रिश्ता बन गया,
और मुझे खुद से ही प्यार हो गया। ❤️
- kajal jha
Shailesh Joshi
એક વારમાં આપણું ધાર્યું ન થાય,
એ સ્વાભાવિક છે
બે વારમાં પણ જો આપણું કામ ન થાય, કોઈ વાર એવું પણ બની શકે,
ને જો એજ કામમાં, આપણને ત્રણ કે ચાર પ્રયત્ને સફળતા મળે, તો એ આપણું નસીબ.
પણ જ્યારે કોઈ કામની સફળતા માટે આપણા અસંખ્ય પ્રયત્નો નિષ્ફળ જવા લાગે.....
તો આપણે સમજી લેવું જોઈએ કે,
કાંતો આપણે ખોટા રસ્તે પ્રયત્ન કરી રહ્યા છીએ, કાંતો આપણી માંગણી ખોટી છે.
Radhika Lakshmi
దేనికైనా సమాధానం చిరునవ్వు....
ఎంతటి అలసటకైనా సమాధానం చిరునవ్వు...
ఎన్ని ప్రశ్నలకైనా సమాధానం చిరునవ్వు...
ఎంత చులకనకైనా సమాధానం చిరునవ్వు...
ఎన్ని కోరికలైనా సమాధానం చిరునవ్వు...
ఎన్ని సమస్యల పరిష్కారానికైనా సమాధానం చిరునవ్వు.....
కన్నవారి ప్రేమకైనా,కోపానికైనా....మెట్టినింటి బంధానికైనా బాధ్యతకైనా.....
పేగుబంధాలకైనా.... తోడబుట్టిన వారి పలకరింపుకైనా......
ఆడపడుచు అలకకైనా....బావామరుదుల సరదా మాటలకైనా....సమాధానం చిరునవ్వు....
అత్త తానూ అతివనని మరిచి మాట అన్నా
కన్నీరు దాచేసి చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు...
తన కుటుంబాన్ని నడిపిస్తూ తండ్రిలా తనని గౌరవిస్తున్నా
కోడలు కూతురులాంటిదని మరిచి అవమానించినా
ఉబికి వచ్చే కన్నీటిని దాచేసి చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు....
పగలంతా తన కోసం తానే బాధ్యతల్ని పంచుకుని కాదు తనవి కూడా
తాళి కట్టిన కారణంగా అన్నీ తానే అయి నడుచుకుంటున్నా
ఇంకా ఏదో చేయలేదని తనకేదో తక్కువయిందని నిందించి
తూలనాడే మాటకైనా మనసు పడితే రోదన లోపల నొక్కేసి కన్ళీళ్ళతో కూడా చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు.....
ఆడదానిగా జన్మించడం ఒక గొప్ప వరం అని
పురాణాలు ఘోషిస్తున్నాయి....
అందరూ ఆడది ఆడది అంటూ గొప్పలు చెప్పేస్తారు....
కానీ భ్రూణముగా ఉండగానే ఉసురు తీసేస్తారు...
పోనీ బ్రతకనిచ్చినా చిన్నచూపు తో చూస్తారు....
పది రోజుల ప్రాయం నుంచి ఎనభై ఏళ్ళ వరకు ఎవరినీ వదలని కామంతో కళ్ళు మూసుకుపోయి కాటేస్తారు....
ఏదీ మా బ్రతుకు....ఎక్కడ ఉంది మా బ్రతుకు....
ఎన్నాళ్ళు మాకు ఈ బ్రతుకు అని మగువ అడిగితే సమాధానం చెప్పే మగవాడు ఏడి?
అందరూ అలా కాదు ఉన్నారని చెప్పడం లేదు కానీ అండగా నిలబడే వారు లేరే అని....
ఏది ఏమైనా ఇలాంటి పరిస్థితుల్లో కూడా ఎదురొడ్డి అడుగు ముందుకు వేస్తూ
తనకంటూ ఒక గుర్తింపును తెచ్చుకుని గెలుపు వైపు పయనిస్తోన్న పడతికి మా వందనం...
అభినందనలు......మహిళా దినోత్సవ శుభాకాంక్షలు.....
Raju kumar Chaudhary
मेरे बेटे को गए अभी सिर्फ़ तीन महीने ही हुए हैं। मेरी बहू भड़कीले कपड़े पहन रही है। हर रात मुझे उसके कमरे से किसी मर्द की आवाज़ सुनाई देती है, जिससे मैं सुन्न हो जाती हूँ।
जब से मेरे बेटे की एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई है, नई दिल्ली वाले छोटे से घर की सारी गर्माहट गायब हो गई है। तीन महीने बीत चुके हैं, और मैं - सावित्री देवी - अभी भी आरव की अनुपस्थिति के एहसास की आदी नहीं हुई हूँ। हर दोपहर, मैं पूजा के कोने के सामने बैठती हूँ, अपने बेटे की गेंदे की माला वाली तस्वीर को देखती हूँ, और उसके द्वारा छुई गई हर चीज़ पर हाथ फेरती हूँ।
जबकि मैं अभी भी दर्द में हूँ, निशा - मेरी बहू - मुझे उलझन में डाल देती है। पहले, वह साधारण कपड़े पहनती थी, बस थोड़ा सा काजल और हल्की लिपस्टिक लगाकर, फिर काम पर चली जाती थी। अब वह खूब सारा मेकअप करती है, शरीर से चिपकी हुई ऑफिस ड्रेस/कुर्ता पहनती है, और हर सुबह टाइल वाले फर्श पर ऊँची एड़ी के जूते खड़खड़ाते हैं।
वह जल्दी काम पर जाती है और देर से घर आती है। कुछ दिन तो वह लगभग आधी रात को घर आती है। जब मैंने पूछा, तो उसने बस अस्पष्ट रूप से कहा:
कंपनी एक प्रोजेक्ट जल्दी में कर रही है, मुझे माफ़ करना।
मैंने सिर हिलाया, लेकिन मेरा मन शंकाओं से भरा था।
एक सप्ताहांत की रात चरमोत्कर्ष पर पहुँची। रात के लगभग एक बजे, मैं बाथरूम जाने के लिए उठी, अपनी बहू के कमरे के पास से गुज़रते हुए मुझे बाहर से किसी आदमी की आवाज़ सुनाई दी, जो निशा की फुसफुसाहट के साथ मिली हुई थी। मैं रुक गई, मेरा दिल मानो ज़ोर से दबा जा रहा था: इस घर में हम सिर्फ़ दो ही हैं, माँ और बेटी, तो उसके कमरे में कौन था?
अगली सुबह, मैंने सोच-समझकर अपने शब्द चुने:
— निशा, कल रात मैंने... तुम्हारे कमरे में किसी आदमी की आवाज़ सुनीhttps://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz
Nilesh Rajput
क्यों हमें महिला दिवस और पुरुष दिवस मनाना पड़ता है?
क्या हम सिर्फ मानव दिवस नहीं मना सकते?
एक तरफ हम बराबरी की बात तो करते हैं,
लेकिन फिर किसी एक जात या वर्ग के नाम पर दिन क्यों मनाते हैं?
अगर सच में बराबरी चाहिए,
तो शायद हमें सबसे पहले खुद को सिर्फ इंसान मानना सीखना होगा।
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
मीठे बोल
आज प्यारे मीठे बोल में एक अफ़साना था l
अपनों को प्यार की भाषा को समझाना था ll
खुदा ने भेजा है तो वक्त जाया नहीं करना था l
कायनात में आए थे कुछ करके जाना था ll
इस जन्म में अच्छे कर्मों को जमा करके सखी l
पिछले जनमों का भी हिसाब निपटाना था ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Raju kumar Chaudhary
“गर्भवती पत्नी को धक्का देकर बोला—‘मैं वकील हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकती!’… उसे नहीं पता था कि वह भारत के चीफ जस्टिस की बेटी है।”
मैं अनन्या हूँ। उम्र अट्ठाईस साल। और उस रात, जब मेरी दुनिया टूट रही थी… मैं सात महीने की गर्भवती थी।
तीन साल पहले जब मेरी शादी रोहित से हुई थी, मुझे सच में लगा था कि मुझे वो इंसान मिल गया है जिसके साथ मैं पूरी जिंदगी सुरक्षित और खुश रहूँगी। रोहित दिल्ली की एक बड़ी कॉर्पोरेट लॉ फर्म में काम करने वाला तेज़-तर्रार और महत्वाकांक्षी वकील था। आत्मविश्वासी, स्मार्ट, और हमेशा अपने करियर के बारे में बड़े सपने देखने वाला।
जब हम मिले थे, उसने मुझे एक साधारण लड़की के रूप में जाना था—एक फ्रीलांस लेखिका और कभी-कभी ट्यूशन पढ़ाने वाली। सादा जीवन जीने वाली, बिना किसी खास बैकग्राउंड के।
और सच कहूँ तो… यही मैं चाहती भी थी।
मैं नहीं चाहती थी कि कोई मुझे मेरे परिवार की वजह से जाने। मैं चाहती थी कि रोहित मुझे इसलिए चुने क्योंकि मैं मैं हूँ, न कि इसलिए कि मैं किस घर से आती हूँ।
इसलिए मैंने अपनी पहचान छिपा ली।
मैंने अपना असली सरनेम नहीं बताया।
मैंने अपने परिवार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया।
क्योंकि मैं देखना चाहती थी कि बिना किसी ताकत, बिना किसी नाम और बिना किसी प्रभाव के—क्या कोई मुझे सच में प्यार कर सकता है।
लेकिन शायद… यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।
शादी के बाद धीरे-धीरे सब बदलने लगा।
शुरू में छोटी-छोटी बातें थीं। रोहित का देर से घर आना, मेरे काम को गंभीरता से न लेना, या उसकी माँ का मुझे ताना मारना कि मैं “किसी काम की नहीं” हूँ। मैं चुप रही। मैंने सोचा हर शादी में थोड़ा समय लगता है।
लेकिन रोहित की माँ—सुशीला देवी—मुझे कभी अपनी बहू मान ही नहीं पाईं।
उनकी नजरों में मैं हमेशा “गरीब घर की लड़की” थी जिसने उनके सफल बेटे से शादी करके किस्मत बना ली।
धीरे-धीरे उनकी बातें तानों से आदेशों में बदल गईं।
और रोहित…
वह कभी मेरा साथ नहीं देता था।
हर बार वही एक जवाब—
“माँ का दिल मत दुखाओ, अनन्या।”
जब मैं गर्भवती हुई, मुझे लगा शायद सब बदल जाएगा।
शायद एक बच्चे की खबर परिवार को करीब ला देगी।
शायद रोहित मुझे थोड़ा और समझेगा।
शायद उसकी माँ का दिल भी पिघल जाएगा।
लेकिन हुआ इसका उल्टा।
जैसे-जैसे मेरा पेट बड़ा होता गया, घर में मेरी इज्जत छोटी होती गई।
और फिर आई वो रात… क्रिसमस ईव की रात।
रोहित के माता-पिता के बड़े घर में फैमिली डिनर रखा गया था। लगभग पंद्रह मेहमान आने वाले थे—रोहित के ऑफिस के लोग, कुछ रिश्तेदार, और कुछ खास लोग जिन्हें प्रभावित करना जरूरी था।
मैं उस समय सात महीने की गर्भवती थी। मेरे पैर सूज जाते थे, कमर में लगातार दर्द रहता था, और डॉक्टर ने ज्यादा खड़े रहने से मना किया था।
लेकिन उस रात…
मुझे आराम करने के लिए नहीं कहा गया।
मुझे किचन में भेज दिया गया।
सुशीला देवी ने बड़ी सहजता से कहा,
“इतने मेहमान आ रहे हैं। बहू हो, खाना तो बनाओगी ही।”
और फिर उन्होंने एक लंबी सूची मेरे हाथ में थमा दी।
बटर चिकन।
मटन बिरयानी।
चार तरह की सब्जियाँ।
नान।
रायता।
सलाद।
और तीन तरह की मिठाइयाँ।
मैं अकेली किचन में खड़ी थी।
ओवन की गर्मी, गैस की लपटें, और मेरे शरीर की थकान—सब मिलकर मुझे तोड़ रहे थे। लेकिन मैं चुप रही। क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि जब रोहित आएगा… वह समझेगा।
वह कहेगा—
“माँ, अनन्या प्रेग्नेंट है। उसे आराम करने दो।”
जब रोहित घर आया, वह सच में किचन में आया भी।
उसने मुझे देखा—पसीने से भीगी हुई, थकी हुई, पेट पकड़कर खड़ी।
एक पल के लिए मुझे लगा… अब वह कुछ कहेगा।
लेकिन उसने बस हँसते हुए कहा—
“डियर, जल्दी करो। माँ कह रही हैं मेहमान भूखे हैं। और हाँ… स्वाद अच्छा होना चाहिए। मेरी लॉ फर्म के पार्टनर्स आए हैं।”
और फिर वह वाइन का गिलास लेकर लिविंग रूम में चला गया।
उस पल… मेरे दिल के अंदर कुछ टूट गया।
दो घंटे बाद खाना तैयार था।
शानदार डाइनिंग टेबल सजी हुई थी। महँगी प्लेटें, चमकते गिलास, और हँसते हुए मेहमान।
मैंने चुपचाप एक प्लेट ली।
मैं बस टेबल के कोने में बैठकर थोड़ा खाना चाहती थी। पूरे दिन मैंने कुछ ठीक से खाया भी नहीं था।
लेकिन जैसे ही मैं बैठने लगी…
अचानक मेरी कुर्सी खींच ली गई।
मैंने ऊपर देखा।
सुशीला देवी मुझे घूर रही थीं।
उनकी आवाज में व्यंग्य था—
“ये कुर्सी कहाँ से उठा ली, अनन्या?”
मैंने थकी हुई आवाज में कहा,
“माँ जी… मैं भी थोड़ा खाना खाना चाहती हूँ। सुबह से किचन में हूँ। चक्कर आ रहे हैं…”
उन्होंने हल्की हँसी हँसी।
और जो उन्होंने अगला वाक्य कहा… उसने पूरी टेबल को चुप करा दिया।
“यहाँ नहीं बैठ सकती। ये सीटें VIP मेहमानों के लिए हैं।”
और फिर उन्होंने धीरे से जोड़ा—
“किचन में जाकर खा लो। खड़े होकर।”
उस पल… कमरे की हवा जैसे अचानक भारी हो गई।
और मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में… मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है।
👉 पूरी कहानी कमेंट्स सेक्शन में देखें। ?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
बारिश की ठंडी रात थी।
शहर की अदालत लगभग खाली हो चुकी थी।
लेकिन एक कोर्टरूम के अंदर…
आज एक ऐसा मुकदमा चल रहा था
जिसे देखकर हर किसी की साँसें थम गई थीं।
जज की कुर्सी पर बैठी थी
एक सख्त और घमंडी महिला जज।
उसका चेहरा बिल्कुल शांत था।
आँखों में ज़रा भी दया नहीं थी।
उसके सामने खड़ा था एक आदमी…
फटे कपड़े…
बिखरे बाल…
और हाथों में भारी जंजीरें।
उसकी आँखों में आँसू थे।
चेहरा दर्द से भरा हुआ था।
कोर्ट में मौजूद लोग उसे देख कर फुसफुसा रहे थे।
किसी ने कहा —
“ये तो कोई अपराधी लगता है…”
दूसरे ने कहा —
“लगता है बहुत बड़ा केस है…”
लेकिन तभी अचानक
कोर्ट में मौजूद एक बुज़ुर्ग वकील ने धीमी आवाज़ में कहा—
“तुम लोगों को पता भी है…
ये आदमी कौन है?”
सबकी नज़रें उसकी तरफ मुड़ गईं।
वकील ने गहरी साँस ली…
और कहा—
“ये… उसी जज का पति है।”
पूरा कोर्टरूम एकदम सन्न रह गया।
लोगों को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ।
जज की कुर्सी पर बैठी महिला
और जंजीरों में जकड़ा आदमी…
कभी पति-पत्नी थे।
लेकिन आज
दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके थे।
आख़िर ऐसा क्या हुआ था
कि एक गरीब पति
अपनी ही जज पत्नी से बदला लेने की कसम खा चुका था?
और वह कौन सा राज़ था
जो अगर अदालत में खुल जाता…
तो सबकी ज़िंदगी बदल जाती?
कहानी यहीं से शुरू होती है…
और आगे जो हुआ
वह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था…https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Imaran
कशिश हो शायरी की तुम,
गजल की जान लगती हो,
खुदा के नूर जैसी हो,
नजर की शान लगती हो,
मेरे अल्फाज में तुम हो,
मेरे अंदाज में तुम हो,
मेरे हर खूबसूरत नज्म की,
पहचान लगती हो
👰♀️imran 👰♀️
Fazal Esaf
भारत संघर्षाच्या छायेखाली
अमेरिका–इराण संघर्ष आणि त्याचे दूरगामी परिणाम
अमेरिका आणि इराणमधील वाढती तणावाची परिस्थिती आता केवळ मध्यपूर्वेतील संघर्षापुरती मर्यादित नाही. या संघर्षाच्या लहरी भारतापर्यंत पोहोचल्या आहेत — एक देश जो मध्यपूर्वेच्या ऊर्जा, व्यापार आणि कामगार बाजारपेठांशी खोलवर जोडलेला आहे.
घरे, उद्योग, शेतकरी ते निर्यातदार — सर्व स्तरावर परिणाम होत आहेत.
हा लेख भारतावर आणि त्याच्या नागरिकांवर होणाऱ्या संभाव्य परिणामांचा, सर्वात संवेदनशील क्षेत्रांचा आणि परिस्थितीशी सामना करण्यासाठी उपायांचा आढावा घेईल.
१. ऊर्जा धक्का: तातडीचा दबाव
भारत आपल्या कच्च्या तेलाचा ८०–९०% आणि मोठ्या प्रमाणावर LNG मध्यपूर्वेतून आयात करतो, ज्या मार्गांमध्ये स्ट्रेट ऑफ होर्मुजचा समावेश आहे, जो सध्या भौगोलिकदृष्ट्या अस्थिर आहे.
तेलाची किंमत वाढ: ब्रेंट क्रूड $120–$150 प्रति बॅरल ओलांडू शकते, ज्यामुळे पेट्रोल, डिझेल आणि LPGच्या किंमती वाढतात.
घरेलू परिणाम: लाखो भारतीय कुटुंबांना वाहतूक आणि इंधन खर्च वाढल्यामुळे आर्थिक ताण येईल.
उद्योग परिणाम: उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, रसायने आणि उर्जासंबंधी उद्योगांवर परिणाम होईल.
चलन अस्थिरता: जागतिक जोखीमामुळे भारतीय रुपया डॉलरसाठी कमकुवत होऊ शकतो, ज्यामुळे आयात आणि परकीय कर्जावर दबाव येईल.
उपाय:
ऊर्जा आयात विविध स्रोतांकडून (रशिया, आफ्रिका, अमेरिका) करणे; नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्प वाढवणे.
तात्पुरती धक्केसाठी धोरणात्मक तेल व गॅस साठे मजबूत करणे.
देशांतर्गत तेल, गॅस आणि नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्प जलद गतीने सुरू करणे.
२. व्यापार आणि निर्यात संवेदनशीलता
भारताची अर्थव्यवस्था फक्त ऊर्जा पुरवठ्यापुरती मर्यादित नाही; मध्यपूर्वेतील व्यापार जास्त व्यापक आहे.
कृषी निर्यात: बासमती तांदूळ, मसाले, चहा — जहाज मार्गांच्या अस्थिरतेमुळे विलंब होऊ शकतो.
उद्योग आणि हिरे: गुजरातमधील हिरे प्रक्रिया केंद्रांसाठी दुबईमार्गे कच्च्या हिर्यांचा आयात विलंबित होतो.
शिपिंग आणि विमा खर्च: समुद्री जोखीम वाढल्याने निर्यात महागड्या होऊ शकते.
उपाय:
निर्यात बाजारपेठा आफ्रिका, आग्नेय आशिया, युरोप व अमेरिका यांच्याकडे विविध करणे.
क्रेडिट हमी आणि निर्यात विमा उपाययोजना करणे.
पर्यायी वाहतूक मार्ग तयार करणे (उदा. आंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण वाहतूक मार्ग).
३. नोकऱ्या आणि भारतीय वस्तीवर परिणाम
८–१० मिलियन भारतीय कामगार खाडी देशांमध्ये कार्यरत आहेत, ज्यांचे रेमिटन्स आर्थिक गतिशीलतेसाठी महत्त्वाचे आहेत.
बाहेरील आर्थिक मंदीमुळे नोकऱ्या गमावल्या तर घरगुती खरेदीवर परिणाम होईल.
परत येणाऱ्या कामगारांमुळे शहरातील इन्फ्रास्ट्रक्चर, घरबांधणी आणि सामाजिक सेवा ताणाखाली येऊ शकतात.
उपाय:
परदेशी कामगारांच्या हक्कांचे रक्षण करण्यासाठी कूटनीतिक प्रयत्न वाढवणे.
घरगुती रोजगारासाठी कौशल्य विकास कार्यक्रम वाढवणे.
४. क्षेत्र-विशिष्ट परिणाम
कृषी: खत व डिझेलच्या कमतरतेमुळे पीक उत्पादन कमी होऊ शकते; अन्नधान्य किंमती वाढतील.
ऊर्जा व नवीकरणीय: LNG पुरवठा मंद झाल्यास घरगुती व औद्योगिक उर्जा संकट निर्माण होऊ शकते.
IT आणि सेवा: अमेरिका व युरोपमधील ग्राहक प्रकल्पांमध्ये विलंब करतात; महसूलावर परिणाम.
सुरक्षा व रणनीतिक सामग्री: महत्त्वाच्या आयातांमध्ये विलंब; संरक्षण आणि उत्पादनावर परिणाम.
उपाय:
खत, इंधन व कच्च्या मालाचे धोरणात्मक साठे तयार करणे.
महत्त्वाच्या घटकांचे स्थानिक उत्पादन प्रोत्साहित करणे.
आयात कमी करण्यासाठी नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्पांमध्ये गुंतवणूक करणे.
५. वित्तीय बाजार आणि आर्थिक धोके
स्टॉक मार्केटची अस्थिरता भांडवल बाहेर जाण्यास कारणीभूत ठरू शकते; गुंतवणूकदारांचा विश्वास कमी होऊ शकतो.
बँकिंग आणि विमा: जहाज व वस्तूंच्या जोखमीमुळे प्रीमियम व कर्जाचे दर वाढतील.
चलन संरक्षण: रुपया कमकुवत झाल्यास कंपन्यांना डेरिव्हेटिव्हसद्वारे संरक्षण करावे लागेल.
उपाय:
वस्तू व चलन जोखमीसाठी वित्तीय साधने वापरणे.
चलनवाढ नियंत्रित करण्यासाठी कर आणि मौद्रिक धोरण समन्वयित करणे.
६. सामाजिक आणि मानवीय चिंता
इंधन व अन्नधान्य किंमती वाढल्याने गरीब व उपभोगक वर्गावर परिणाम होईल.
परत येणाऱ्या कामगारांमुळे शहरी भागांमध्ये ताण निर्माण होऊ शकतो.
सार्वजनिक भीती व अनिश्चिततेमुळे मानसिक आरोग्यावर परिणाम होईल.
उपाय:
गरजूंना थेट आर्थिक सहाय्य व सबसिडी देणे.
अफवा व भीती टाळण्यासाठी जनजागृती मोहीम.
उच्च-प्रभाव क्षेत्रात सामाजिक सुरक्षा जाळे मजबूत करणे.
७. भौगोलिक आणि रणनीतिक विचार
भारताला अमेरिका, इराण, खाडी देश व इजरायल यांच्यात संतुलन राखावे लागेल.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जवळील समुद्री सुरक्षा अनिवार्य आहे.
प्रादेशिक अस्थिरता अफगाणिस्तान, पाकिस्तान व खाडी देशांवर परिणाम करू शकते.
उपाय:
मुख्य व्यापार मार्गांवर नौदल व समुद्री सुरक्षा वाढवणे.
सर्व पक्षांसोबत कूटनीतिक संवाद व रणनीतिक योजना ठेवल्या पाहिजेत.
रणनीतिक सामग्री व संरक्षण पुरवठ्यासाठी contingency plan तयार करणे.
८. तंत्रज्ञान आणि पुरवठा साखळी सुधारणा
डिजिटल ट्रॅकिंग व लॉजिस्टिक्स प्रणाली वापरून पुरवठा साखळीमध्ये अडथळा कमी करणे.
रशिया व मध्य आशियामार्गे पर्यायी वाहतूक मार्ग शोधणे.
वस्तूंच्या कमतरतेसाठी predictive analytics वापरणे.
उपाय:
स्मार्ट लॉजिस्टिक्स व पुरवठा साखळीमध्ये गुंतवणूक.
महत्त्वाच्या आयातांसाठी प्रादेशिक स्टोरेज हब्स तयार करणे.
ऊर्जा, कृषी व व्यापारासाठी AI-आधारित अंदाज प्रणाली प्रोत्साहित करणे.
९. परिस्थिती योजना
हलके तणाव: तात्पुरती तेल किंमत वाढ व निर्यात विलंब.
मध्यम तणाव: ऊर्जा खर्च वाढ, रेमिटन्स कमी, क्षेत्र-विशिष्ट अडचणी.
पूर्ण संघर्ष: दीर्घकालीन ऊर्जा संकट, मोठा निर्यात अडथळा, परदेशी कामगार परत येणे, प्रादेशिक अस्थिरता.
उपाय:
प्रत्येक परिस्थितीसाठी contingency plan तयार करणे, आर्थिक, ऊर्जा व सामाजिक उपायांसह.
आपत्कालीन वित्तीय व अन्न साठे राखणे.
आंतरराष्ट्रीय संस्थांशी संवाद साधून मध्यस्थी करणे.
१०. दीर्घकालीन संधी
नवीकरणीय ऊर्जा, LNG व अणुऊर्जेद्वारे ऊर्जा स्वावलंबन जलद करणे.
आयातावर अवलंबित्व कमी करण्यासाठी स्थानिक उत्पादन वाढवणे.
अन्नधान्य, औषधे व संरक्षण यांसाठी रणनीतिक देशांतर्गत व प्रादेशिक पुरवठा साखळी तयार करणे.
भारताची जागतिक आर्थिक व कूटनीतिक स्थिती बळकट करणे.
निष्कर्ष
अमेरिका–इराण संघर्ष फक्त प्रादेशिक युद्ध नाही; तो भारतात आर्थिक, सामाजिक आणि रणनीतिक आव्हाने निर्माण करणारा घटक आहे.
ऊर्जा खर्च वाढ, व्यापार अडथळे, कामगार संवेदनशीलता आणि भौगोलिक दबाव हे सर्व भारताची प्रतिकारशक्ती तपासतील.
परंतु, दूरदृष्टी, विविध उपाय, मजबूत contingency plan व तंत्रज्ञानाच्या वापरामुळे भारत या संकटातून सुरक्षित राहू शकतो आणि दीर्घकालीन रणनीतिक लाभ मिळवू शकतो.
आजची तयारी, उद्याच्या अनिश्चिततेसाठी भारताचे विमा कवच आह
Meghna Sanghvi
Happy women's Day 🎀
Bhavesh Tejani
તારા અવગુણો સાથે પણ મને પ્રેમ છે,
ગુણો ને તું હું આમેય ગણકારતો નથી.
Raju kumar Chaudhary
देर रात की शिफ्ट के बाद घर लौटते हुए, पत्नी यह देखकर हैरान रह गई कि उसका पति अपनी मालकिन के बगल में गहरी नींद में सो रहा है। वह चुपचाप बैठी रही, किसी संतोषजनक नतीजे का इंतज़ार कर रही थी…
देर रात की शिफ्ट के बाद जब मारिया अपने घर लौटी, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच उसी घर के अंदर उसका इंतज़ार कर रहा है।
नई दिल्ली के लुटियंस इलाके में बने उनके बड़े और खूबसूरत घर के बाहर सब कुछ हमेशा की तरह शांत था। रात के लगभग दस बज रहे थे। सर्द हवा में पेड़ों की पत्तियाँ हल्के-हल्के सरसराती थीं। मारिया ने कार पार्क की, अपने कंधे पर बैग ठीक किया और धीरे-धीरे मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ी।
आज का दिन उसके लिए खास था।
AIIMS अस्पताल में लगातार कई घंटे की नाइट शिफ्ट करने के बाद भी उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। थकान थी, लेकिन दिल में एक छोटी-सी खुशी भी थी। आखिर आज उसकी और अर्जुन की शादी की दसवीं सालगिरह थी।
उसने अपने बैग में रखा छोटा सा गिफ्ट बॉक्स हल्के से छुआ।
उस बॉक्स में एक बेहद महँगी पाटेक फिलिप घड़ी थी—जिसके पीछे खुदा हुआ था:
“Maria & Arjun – Forever.”
मारिया ने सोचा था कि वह घर जाकर अर्जुन को सरप्राइज़ देगी। शायद वह जाग रहा होगा… शायद उसने भी कुछ प्लान किया होगा।
लेकिन जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसे कुछ अजीब लगा।
घर में असामान्य सन्नाटा था।
ना टीवी चल रहा था।
ना किचन से कोई आवाज़।
ना अर्जुन की हँसी।
बस दीवार पर लगी पेंडुलम घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक…
मारिया ने जूते उतारे, अपना बैग सोफे पर रखा और धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगी।
हर कदम के साथ उसके दिल में एक अनजानी बेचैनी बढ़ रही थी।
ऊपर पहुँचकर उसने देखा—बेडरूम का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं था। हल्की पीली रोशनी बाहर आ रही थी।
मारिया ने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया।
और उसी पल उसकी दुनिया रुक गई।
बिस्तर पर अर्जुन सो रहा था।
लेकिन वह अकेला नहीं था।
उसकी बाँहों में एक औरत थी—जिसे मारिया ने पहले कभी नहीं देखा था।
दोनों गहरी नींद में थे।
पतली चादर नीचे खिसक चुकी थी, जिससे उस औरत का कंधा साफ दिखाई दे रहा था। कमरे में दो लोगों की शांत साँसों की आवाज़ थी—जैसे वे किसी मीठे सपने में खोए हों।
कुछ सेकंड तक मारिया दरवाज़े पर ही खड़ी रह गई।
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
किसी औरत के लिए यह पल शायद तूफ़ान बन जाता—चीख, आँसू, गुस्सा।
लेकिन मारिया ने कुछ भी नहीं किया।
उसकी आँखों में अचानक एक अजीब सी ठंडक उतर आई।
वह बिना आवाज़ किए मुड़ी… और नीचे लिविंग रूम में चली गई।
वहाँ से उसने एक भारी नक्काशीदार कुर्सी उठाई।
धीरे-धीरे वापस बेडरूम में आई।
और वह कुर्सी बिस्तर के सामने रख दी।
फिर वह चुपचाप उस पर बैठ गई।
उसकी बाहें सीने पर क्रॉस थीं। आँखें सीधे बिस्तर पर टिकी थीं।
कमरे में सिर्फ पेंडुलम घड़ी की आवाज़ गूँज रही थी।
टिक… टिक… टिक…
समय गुजरता रहा।
एक घंटा।
दो लोग अब भी सो रहे थे।
और उनके सामने बैठी एक औरत—अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फैसला सोच रही थी।
लेकिन उन्हें अभी तक इसका अंदाज़ा भी नहीं था।
और जब अर्जुन की आँख खुलने वाली थी…
तो वह दृश्य ऐसा था जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा।
👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
SAYRI K I N G
इश्क अगर इबादत, न बने.. तो इश्क से बड़ा फरेब, कुछ भी नहीं..
PRASANG
નારીનો લલકાર.!!!
સદીઓના અન્યાય સામે બગાવતી લલકાર ઉઠી છે,
દેવદાસી દાહક વ્યથામાંથી કરુણ પોકાર ઉઠી છે.
સતીચિતાની રાખમાંથી માનવ ગૌરવ જાગ્યું આજે,
ભસ્મકણમાંથી તેજસ્વી ચમકતી તલવાર ઉઠી છે.
આડંબર ધાર્મિક પ્રથાઓના ઘેરા અંધકાર સામે,
સત્યજ્યોતિના સંકલ્પોથી કઠોર પ્રહાર ઉઠી છે.
સંવિધાનના શબ્દોમાં સમતાનો પ્રકાશ પ્રગટ્યો,
હિન્દુ કોડના માર્ગોથી નવો ન્યાયી વ્યવહાર ઉઠી છે.
વિધાનગૃહ પ્રાંગણમાં ગુંજે અધિકાર ઘોષણા આજે,
અસમતા સિંહાસન સામે જનનો ધિક્કાર ઉઠી છે.
વિજ્ઞાન ગગનપંથે દીકરી સ્વપ્નપંખે ચડી ઉડે છે,
ઈસરોના પરિશ્રમથી વિશ્વવ્યાપી વિસ્તાર ઉઠી છે.
“પ્રસંગ” કલમે લખી દીધી બદલાતી કાળગાથા,
ભારતનારી અંતરમાંથી ક્રાંતિનો હુંકાર ઉઠી છે.
"પ્રસંગ"
પ્રણયરાજ રણવીર
Chaitanya Joshi
બ્રહ્માએ હાથ ધોયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
એના જેવા ના જોયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
ના બની શકયું કોઈ કે જે એનું સ્થાન લઈ શકે,
ભારોભાર ત્યાગ ભર્યા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
રૂપની સાથે સેવા,સમર્પણને સહનશીલતા દીધાં,
ધરાને કોઈ સૌગાત ધર્યા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
સ્નેહ, સૌંદર્યને લાગણી રગેરગે વણી દીધા પછી,
ગુણ માતૃત્વના એણે ગાયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
અનેકરુપધારી વ્યક્તિ સમય સમય પર દેખાતું ને,
કીધી પરોપકારી એની કાયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું.
- ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
Raju kumar Chaudhary
“जब अरबपति CEO ने डिलीवरी बॉय बनकर गर्लफ्रेंड का टेस्ट लिया… और उसने उसके मुंह पर पैसे फेंक दिए!”
केनज़ो… अब अर्जुन बन चुका था।
सिर्फ 27 साल की उम्र में वह अग्रवाल एम्पायर का CEO था — एशिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक का मालिक।
युवा। आकर्षक। और इतना अमीर कि उसके पास जितना पैसा था, उतना कई देशों के बजट से ज्यादा था।
लेकिन एक चीज़ थी जो उसके पास नहीं थी…
सच्चा प्यार।
उसकी जिंदगी में जितनी भी महिलाएं आईं, सभी का एक ही मकसद था — उसका पैसा।
किसी को उसकी मुस्कान से मतलब नहीं था… किसी को उसकी मेहनत से नहीं… किसी को उसके अकेलेपन से नहीं।
सबको चाहिए था बस उसका बैंक बैलेंस।
इसीलिए जब अर्जुन की मुलाकात वैशाली से हुई… उसने एक फैसला लिया।
उसने अपनी असली पहचान छिपा ली।
उसने खुद को एक साधारण कर्मचारी के रूप में पेश किया।
न कोई लग्जरी कार…
न कोई बॉडीगार्ड…
न कोई करोड़ों की घड़ी।
बस एक सामान्य लड़का… जो नौकरी करता है।
छह महीनों में अर्जुन और वैशाली की नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं।
वे डेट पर जाते, बातें करते, हँसते।
वैशाली को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उसका “साधारण” बॉयफ्रेंड असल में शहर के आधे हिस्से का मालिक है।
लेकिन समय के साथ अर्जुन ने एक बदलाव नोटिस किया।
वैशाली धीरे-धीरे बदल रही थी।
वह अक्सर महंगे ब्रांड्स की बातें करने लगी…
लक्ज़री बैग… महंगे रेस्टोरेंट… करोड़पति लाइफस्टाइल।
और सबसे अजीब बात…
कभी-कभी वह अर्जुन को देखकर कहती—
“तुम्हें और मेहनत करनी चाहिए… मुझे बड़ा लाइफ चाहिए।”
अर्जुन मुस्कुराता… लेकिन अंदर से सोचता रहता।
एक रात उसने खुद से कहा—
“अगर मैं इसे पूरी दुनिया देने वाला हूँ… तो पहले मुझे ये जानना होगा कि क्या ये मुझे तब भी स्वीकार करेगी… जब मेरे पास कुछ भी नहीं होगा।”
और फिर उसने एक योजना बनाई।
एक आखिरी टेस्ट।
उस शाम वैशाली का जन्मदिन था।
वह अपने सोशल फ्रेंड्स के साथ शहर के एक हाई-एंड कैफे में पार्टी कर रही थी।
उसी समय अर्जुन ने एक अजीब फैसला लिया।
उसने एक फूड डिलीवरी राइडर की यूनिफॉर्म पहन ली।
पुराने जूते…
थोड़े गंदे कपड़े…
और जानबूझकर वह दौड़कर आया ताकि वह पसीने से तर दिखे।
उसके हाथ में था…
एक छोटा सा सस्ता केक
और फूलों का एक साधारण गुलदस्ता।
जब वह कैफे के अंदर गया…
सबकी नज़रें उस पर टिक गईं।
और फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“हैप्पी बर्थडे, बेब!”
अचानक पूरे टेबल पर सन्नाटा छा गया।
वैशाली के दोस्त अर्जुन को ऊपर से नीचे तक घूरने लगे।
फिर एक लड़की धीरे से बोली—
“ओह माय गॉड… वैशाली… ये तेरा बॉयफ्रेंड है?
एक डिलीवरी बॉय?”
और अगले ही पल…
जो हुआ, उसने अर्जुन की जिंदगी बदल दी।
👇👇**पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।**👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Raju kumar Chaudhary
गरीब चाय वाले ने भरी लड़की की फीस… सालों बाद डॉक्टर बनकर उसने जो किया, इंसानियत रो पड़ी
बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास एक तंग सी गली थी। उस गली के मुहाने पर हर सुबह एक छोटी सी लकड़ी की ठेली लगती थी। उस ठेली से उठती उबलती चाय की भाप पूरे माहौल में खुशबू फैला देती थी।
उस ठेली को चलाने वाला लड़का था राहुल।
राहुल की उम्र मुश्किल से 22–23 साल होगी। दुबला-पतला शरीर, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, साधारण कपड़े और आंखों में एक अजीब सी शांति। उसकी मुस्कान इतनी सच्ची थी कि जो भी उससे चाय लेने आता, बिना मुस्कुराए वापस नहीं जाता।
लेकिन राहुल की जिंदगी आसान नहीं थी।
जब राहुल सिर्फ 15 साल का था, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। उसके पिता स्टेशन पर कुली का काम करते थे। घर में कमाने वाला वही एक इंसान था। पिता के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी राहुल के कंधों पर आ गई।
उसकी मां पहले से ही बीमार रहती थी और उसकी छोटी बहन स्कूल में पढ़ती थी।
मजबूरी में राहुल को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।
उसने स्टेशन के बाहर चाय की छोटी सी ठेली लगा ली। हर सुबह 4 बजे उठना, दूध लाना, चाय पत्ती खरीदना, ठेली लगाना और देर रात तक काम करना — यही उसकी जिंदगी बन गई।
लेकिन इन सबके बावजूद राहुल ने कभी शिकायत नहीं की।
वह हर ग्राहक से आदर से बात करता। कई बार गरीब मजदूरों को उधार में भी चाय दे देता। स्टेशन के आसपास काम करने वाले लोग उसे बहुत पसंद करते थे।
और देखें 👉👉 https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Jyoti Gupta
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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
सबको अपना मानते, सभी हमारे यार। किन्तु छिपे थे शत्रु जो, किए वक्त पर वार।
दोहा --४४३
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
स्तोतुर्मघवन काममा पृण।
ऋगुवेद सूक्ति-- (३२) की व्याख्या
१/५७/५
भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो।
मंत्र :
“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”
— ऋगुवेद --1.57.5
पदच्छेद--
स्तोतुः / स्तोतुर् — स्तुति करने वाले, भक्त या उपासक का
मघवन् — दानी, कृपालु (इन्द्र अथवा परम दाता ईश्वर के लिए प्रयुक्त)
कामम् — इच्छा, अभिलाषा
आ पृण — पूर्ण करो, भर दो, संतुष्ट करो।
भावार्थ-
हे मघवन (दानी प्रभु)! जो भक्त आपकी स्तुति करता है, उसकी उचित और धर्मसम्मत कामनाओं को पूर्ण करो।
इस मंत्र में वेद यह शिक्षा देता है कि ईश्वर दानी और कृपालु है। जो व्यक्ति श्रद्धा, स्तुति और सत्कर्म के साथ ईश्वर की उपासना करता है, उसकी आवश्यक और धर्मयुक्त इच्छाओं को ईश्वर पूर्ण करता है।
यहाँ “मघवन्” शब्द विशेष रूप से उस परम शक्ति के लिए है जो दया, दान और कृपा से जीवों का पालन करती है।
भक्त जब ईश्वर का गुणगान करता है, तो उसका मन शुद्ध होता है और उसकी इच्छाएँ भी स्वार्थ से हटकर कल्याणकारी बन जाती हैं। ऐसी शुद्ध कामनाओं की पूर्ति ईश्वर की कृपा से होती है।
सारांश--
यह मंत्र सिखाता है कि भक्तिपूर्वक ईश्वर की स्तुति करने वाला व्यक्ति अपनी धर्मयुक्त कामनाओं की पूर्ति ईश्वर की कृपा से प्राप्त करता है।
1.ऋगुवेद से प्रमाण--
“यं यं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पतिः।” (ऋग्वेद 2.23.1)
अर्थ :
ब्रह्मणस्पति (ईश्वर) जिस भक्त को अपना बना लेता है, उसकी इच्छाओं और कार्यों को सिद्ध करता है।
2. ऋगुवेद--
“स नः पितेव सूनवे अग्ने सुपायनो भव।” (ऋग्वेद 1.1.9)
अर्थ :
हे अग्ने! जैसे पिता पुत्र की इच्छाओं को पूरा करता है, वैसे ही हमारे लिए कल्याणकारी बनो।
3. यजुर्वेद से प्रमाण--
“तेजोऽसि तेजो मयि धेहि।
वीर्यमसि वीर्यं मयि धेहि।” (यजुर्वेद 19.9)
अर्थ :
हे प्रभु! आप तेजस्वी हैं, हमें भी तेज प्रदान करें; आप वीर्यस्वरूप हैं, हमें भी शक्ति दें।
अर्थात् ईश्वर से अपनी आवश्यक शक्तियों और इच्छित गुणों की प्राप्ति की प्रार्थना।
4. अथर्ववेद से प्रमाण
“भद्रं नो अपि वातय मनः।” (अथर्ववेद 7.52)
अर्थ :
हे प्रभु! हमारे मन में शुभ और कल्याणकारी इच्छाएँ उत्पन्न करें और उन्हें पूर्ण करें।
उपनिषदों से प्रमाण —
1. कठ उपनिषद--
“एष सर्वेषु भूतेषु गूढोऽत्मा न प्रकाशते।
दृश्यते त्वग्रया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभिः॥” (कठोपनिषद् 1.3.12)
अर्थ :
यह परमात्मा सब प्राणियों में स्थित है, परन्तु सूक्ष्म बुद्धि और भक्ति से उसका अनुभव होता है और वही भक्त को परम फल देता है।
2. मुण्डक उपनिषद --
“यं यं लोकं मनसा संविभाति
विशुद्धसत्त्वः कामयते यांश्च कामान्।
तं तं लोकं जयते तांश्च कामान्।” (3.1.10)
अर्थ :
जिसका अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, वह जिस लोक और जिन कामनाओं की इच्छा करता है, उन्हें प्राप्त कर लेता है।
3. तैत्तिरीय उपनिषद् --
“स यो ह वै तत्परं ब्रह्म वेद
ब्रह्मैव भवति।” (तैत्तिरीयोपनिषद् 2.1)
अर्थ :
जो मनुष्य परम ब्रह्म को जान लेता है, वह ब्रह्मरूप होकर सभी इच्छाओं की तृप्ति प्राप्त करता है।
4. छान्दोग्य उपनिषद --
“सर्वे कामा: समश्नन्ति।” (छान्दोग्य उपनिषद् 8.1)
अर्थ :
जो आत्मा और ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त कर लेता है, उसकी सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
५: श्वेताश्वतर उपनिषद्_.
“यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं
यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै।
तं ह देवमात्मबुद्धिप्रकाशं
मुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये॥” (6.18)
अर्थ :
जो परमात्मा ब्रह्मा को उत्पन्न करता है और वेदों का ज्ञान देता है, उसी देव की शरण में जाने से साधक को अपनी अभिलाषित सिद्धि प्राप्त होती है।
६-ईश उपनिषद--
“विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते॥” (मंत्र 11)
अर्थ :
जो मनुष्य ज्ञान और कर्म दोनों को समझता है, वह मृत्यु के बंधन से पार होकर अमृत पद को प्राप्त करता है—अर्थात् उसकी सर्वोच्च अभिलाषा पूर्ण होती है।
७-प्रश्न उपनिषद_
“स यो ह वै तत्परं ब्रह्म वेद
ब्रह्मैव भवति।” (प्रश्नोपनिषद् 6.5)
अर्थ :
जो मनुष्य परम ब्रह्म को जान लेता है, वह ब्रह्मस्वरूप होकर अपनी सर्वोच्च इच्छाओं की सिद्धि प्राप्त करता है।
८-बृहदारण्यक उपनिषद--
“आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।” (2.4.5)
अर्थ :
आत्मा का दर्शन, श्रवण, मनन और ध्यान करना चाहिए; इससे मनुष्य को परम सत्य और जीवन की पूर्णता प्राप्त होती है।
निष्कर्ष :
उपनिषद यह बताते हैं कि जो व्यक्ति ईश्वर या ब्रह्म की शरण लेकर ज्ञान और भक्ति करता है, उसकी सर्वोच्च कामनाएँ पूर्ण होती हैं और वह परम आनन्द को प्राप्त करता है।
पुराणों से प्रमाण—
1.विष्णु पुराण --
“ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।”
अर्थ :
जो भक्त जिस भाव से भगवान की शरण में आता है, भगवान उसी प्रकार उसकी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और उसे फल देते हैं।
2.शिव पुराण --
“भक्तानामभयं दाता सर्वकामफलप्रदः।”
अर्थ :
भगवान शिव अपने भक्तों को भय से मुक्त करते हैं और उनकी सभी उचित कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
3. भागवत पुराण--
“सत्यं दिशत्यर्थितमर्थितो नृणां
नैवार्थदो यत्पुनरर्थिता यतः।” (10.88.8)
अर्थ :
भगवान भक्तों की प्रार्थना सुनकर उन्हें उनकी याचना के अनुसार फल देते हैं।
4. पद्म पुराण --
“भक्तवत्सल भगवान्
सर्वाभीष्टफलप्रदः।”
अर्थ :
भगवान भक्तवत्सल हैं और भक्तों की सभी अभिलाषित कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
५-स्कंद पुराण --
“भक्तानां कामदं देवं
भक्तवत्सलमव्ययम्।”
अर्थ :
भगवान भक्तवत्सल हैं और अपने भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
६. गरुड़ पूराण-
“भक्त्या सम्पूजितो विष्णुः
ददाति मनसेप्सितम्।”
अर्थ :
भगवान विष्णु भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों को उनके मन की अभिलाषा प्रदान करते हैं।
७- ब्रह्म पुराण --
“आराधितो हि भगवान्
भक्तानां फलदो हरिः।”
अर्थ :
भगवान हरि की आराधना करने पर वे भक्तों को इच्छित फल प्रदान करते हैं।
८-- अग्नि पुराण --
“भक्तानुग्रहकर्ता हि
सर्वकामफलप्रदः।”
अर्थ :
भगवान भक्तों पर अनुग्रह करने वाले और उनकी कामनाओं को फल देने वाले हैं।
निष्कर्ष :
पुराणों में भी स्पष्ट बताया गया है कि भगवान भक्तवत्सल हैं और भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों की धर्मयुक्त कामनाओं को पूर्ण करते है।
गीता से प्रमाण--
(4.11)
“ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥”
अर्थ :
हे अर्जुन! जो भक्त जिस प्रकार मेरी शरण में आता है, मैं भी उसे उसी प्रकार फल देता हूँ; सभी मनुष्य मेरे मार्ग का ही अनुसरण करते हैं।
2. (9.22)
“अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥”
अर्थ :
जो भक्त निरन्तर मेरा स्मरण और उपासना करते हैं, उनके योग (जो नहीं है उसे प्राप्त कराना) और क्षेम (जो है उसकी रक्षा करना) का भार मैं स्वयं उठाता हूँ।
3. (7.21–22)
“यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति।
तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥
स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते।
लभते च ततः कामान्मयैव विहितान् हि तान्॥”
अर्थ :
भक्त जिस देवता की श्रद्धा से पूजा करना चाहता है, मैं उसकी श्रद्धा को दृढ़ करता हूँ और उसी के द्वारा वह अपनी इच्छित कामनाओं को प्राप्त करता है।
गीता में स्पष्ट कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से भगवान की शरण में जाता है, भगवान उसकी आवश्यकताओं और धर्मयुक्त कामनाओं की पूर्ति करते महाभारत से प्रमाण
१ --(शान्ति पर्व)
“भक्तानामनुग्रहकर्ता
दाता सर्वाभिलषितफलः।”
अर्थ :
भगवान अपने भक्तों पर अनुग्रह करने वाले और उनकी अभिलाषित कामनाओं को फल देने वाले हैं।
2-- (अनुशासन पर्व)
“यथा यथा हि पुरुषः
श्रद्धया परमेश्वरम्।
तथा तथा लभते सिद्धिं
भक्त्या परमया युतः॥”
अर्थ :
मनुष्य जितनी श्रद्धा और भक्ति से परमेश्वर की उपासना करता है, उसी के अनुसार वह सिद्धि और इच्छित फल प्राप्त करता है।
3.--(शान्ति पर्व)
“न हि भक्तः प्रणश्यति।”
अर्थ :
भगवान के भक्त का कभी नाश नहीं होता; उसकी रक्षा और कल्याण स्वयं भगवान करते हैं।
निष्कर्ष--
महाभारत में भी यह सिद्ध किया गया है कि भगवान भक्तों पर कृपा करके उनकी धर्मयुक्त इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।
स्मृति ग्रन्थों से प्रमाण—
१. मनु स्मृति --
“यः श्रद्धया देवताः नित्यं
यजते भक्तिसंयुतः।
तस्य तुष्यन्ति देवाश्च
प्रयच्छन्ति च वाञ्छितम्॥”
अर्थ :
जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से देवताओं की उपासना करता है, देवता उससे प्रसन्न होकर उसकी इच्छित कामनाओं को पूर्ण करते हैं।
२. याज्ञवल्क्य स्मृति --
“श्रद्धया परया युक्तो
यः कुर्यात् परमेश्वरम्।
तस्य सिद्धिर्भवेत् शीघ्रं
सर्वकामफलप्रदा॥”
अर्थ :
जो मनुष्य परम श्रद्धा से परमेश्वर की उपासना करता है, उसे शीघ्र ही सिद्धि और कामनाओं का फल प्राप्त करते हैं।
३--पराशर स्मृति--
“भक्त्या तुष्टो हरिर्नित्यं
ददाति मनसेप्सितम्।”
अर्थ :
भगवान हरि भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों को उनके मन की अभिलाषा प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष :
स्मृति ग्रन्थों में भी यह बताया गया है कि भक्ति और श्रद्धा से ईश्वर प्रसन्न होकर भक्तों की उचित कामनाओं को पूर्ण करते हैं।
. नीति ग्रन्थों से प्रमाण--
१-चाणक्य नीति--
“यथा बीजं तथा फलम्।”
अर्थ :
मनुष्य जैसा कर्म और भावना करता है, उसे उसी प्रकार का फल प्राप्त होता है।
अर्थात् भक्ति और सद्भाव से ईश्वर की कृपा तथा इच्छित फल प्राप्त
२-(क)भृतहरि नीति शतक से प्रमाण--
“फलानि कर्मानुगुणानि देहिनां
बुद्धिर्कर्मानुसारिणी।”
अर्थ :
मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है और उसी के अनुसार उसकी बुद्धि भी चलती है।
अर्थात् सत्कर्म और भक्ति से मनुष्य को इच्छित फल प्राप्त होता है।
२(ख) भृतुहरि नीति शतक--
“दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या।”
अर्थ :
मनुष्य को अपने पुरुषार्थ से कार्य करना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ और ईश्वर की कृपा से ही सफलता और इच्छित फल प्राप्त होते हैं।
3.(क) विदुर नीति से प्रमाण--
“यथा हि एकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत्।
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति॥”
अर्थ :
जिस प्रकार एक पहिये से रथ नहीं चलता, उसी प्रकार केवल दैव से कार्य सिद्ध नहीं होता; उसमें पुरुषार्थ भी आवश्यक है।
३(ख). विदुर नीति,--
“दैवं पुरुषकारेण यत्नेन विनियोजयेत्।”
अर्थ :
मनुष्य को अपने प्रयास और पुरुषार्थ के साथ ईश्वर की कृपा का सहारा लेना चाहिए; तभी इच्छित फल प्राप्त होते हैं। निष्कर्ष :_
चाणक्य नीति, भृतुहरि नीति शतक और विदुर नीति में यह बताया गया है कि ईश्वर की कृपा और मनुष्य का पुरुषार्थ मिलकर ही इच्छाओं और कार्यों की सिद्धि कराते हैं, जो ऋग्वेद के इस मंत्र के भाव के अनुरूप है।
२-पंचतंत्र से प्रमाण
“देवतानां प्रसादेन
सर्वकार्याणि सिद्ध्यन्ति।”
अर्थ :
देवताओं की कृपा से मनुष्य के कार्य और अभिलाषाएँ सिद्ध हो जाती हैं।
3. योग वशिष्ठ से प्रमाण
“ईश्वरानुग्रहादेव
पुंसामद्वैतवासना।”
अर्थ :
ईश्वर की कृपा से ही मनुष्य को उच्च ज्ञान और जीवन की अभिलाषित सिद्धि प्राप्त होती है।
४--गर्ग संहिता से प्रमाण
“भक्तवत्सल भगवान्
भक्तानां कामदः सदा।”
अर्थ :
भगवान अपने भक्तों पर सदा कृपा करते हैं और उनकी कामनाओं को पूर्ण करते हैं।
निष्कर्ष :
नीति ग्रन्थों और आर्ष ग्रन्थों में भी यह सिद्ध किया गया है कि भक्ति, श्रद्धा और सद्कर्म से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है और भक्त की धर्मयुक्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं।
हितोपदेश से प्रमाण—
देवतानां प्रसादेन
सिद्ध्यन्ति सर्वसंपदः।”
अर्थ :
देवताओं (ईश्वर) की कृपा से मनुष्य की सभी संपत्तियाँ और इच्छित कार्य सिद्ध हो जाते हैं।
“दैवं च पुरुषकारं च
कर्मसिद्धेः कारणम्।”
अर्थ :
किसी कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर की कृपा (दैव) और मनुष्य का पुरुषार्थ दोनों आवश्यक हैं।
निष्कर्ष :
में भी बताया गया है कि मनुष्य के पुरुषार्थ के साथ जब ईश्वर की कृपा मिलती है, तब उसकी इच्छाएँ और कार्य सिद्ध होते हैं।
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kattupaya s
be real and believe in reality. whatever your imagination in online world is not true.
Rashmi Dwivedi
अगर कुछ बदल रहा है तो कुछ नया होने वाला है अगर हाथ से कुछ छूट रहा है तो उससे बेहतर आने वाला है।हर हर महादेव ❤️
- Rashmi Dwivedi
kattupaya s
when you enjoy the friendship with fake identity it will lead into various troubles like money loss, blackmail like etc. be aware of it.
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