Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Shraddha Panchal
थोड़ी हया तो होनी चाहिए इन आँखो में ,
थोड़ी तमीज़ तो होनी चाहिए बातो में,
रुतबा किसका कितना है क्या करना
रास्ते तो गिले हो ही जाते है बरसात में,
थोड़ा लहझा संभाला करे तो अच्छा है
नफ़रत में घर तक जल जाते है बातो में,
फुर्सत किसको है किसी की मुलाक़ात की
यहाँ चेहरे तक पहचाने जाते है हालातों में ,
थोड़ा नरमी रखा करिए ‘बिना रंग बदले
फिर देखिए लोग भीग जाते है जज्बातों में .❤️
Imaran
अच्छा लगता है तुम्हारा नाम हमारे नाम के साथ,
जैसे जुड़ गई हो कोई सुबह किसी हसीन शाम के साथ।
🤎🩵imran 🤎🩵
Bhavika Rathod
✨ “वो लड़की” ✨
वो लड़की साधारण सी नहीं,
उसमें छुपी है एक कहानी,
खामोश रहकर भी जो बोले,
आंखों में उसकी एक रवानी।
गिरकर भी हर बार संभलती,
आंसुओं को हंसी में ढालती,
दुनिया चाहे कुछ भी कह दे,
वो खुद पर यकीन संभालती।
कमज़ोर समझा जिसने उसको,
वही आज हैरान खड़ा है,
उसकी हिम्मत, उसके हौसले,
हर मुश्किल से बड़ा है।
ना किसी का सहारा मांगे,
ना खुद को कभी वो रोके,
अपने सपनों की उड़ान में,
हर बंदिश को पीछे छोड़े।
वो लड़की है आग भी और नूर भी,
खामोशी में छुपा एक शोर भी,
जिस दिन खुद को पहचान लेगी,
बन जाएगी वो अपनी ही दौर की दौड़ भी।
Piyu soul
💫चार दिलों का सुकून 💫
शाम ढलती है, और हम चारों साथ होते हैं,
बातें कम होती हैं… पर एहसास बहुत होते हैं।
दो जोड़ी हाथ एक-दूसरे में खोए रहते हैं,
और चारों दिल एक ही सुकून में डूबे रहते हैं।
कभी नज़रों से बातें होती हैं,
कभी खामोशी भी कहानी कह जाती है…
तुम उसे देखते हो, वो तुम्हें महसूस करती है,
और हम सब बस उस पल में जी जाते हैं।
ये रिश्ता सिर्फ़ प्यार का नहीं,
दोस्ती की गहराई भी इसमें बसी है…
जहाँ हँसी हल्की-सी हवा बन जाती है,
और हर दर्द बिना कहे ही थम जाता है।
ना कोई जल्दबाज़ी, ना कोई शोर,
बस चार दिल… और एक सुकून भरा दौर।
अगर ये लम्हा रुक जाए कहीं,
तो शायद यही हमारी सबसे खूबसूरत कहानी हो। 💛
by piyu 7soul
Nilesh Rajput
વીસ વર્ષ પછી મળેલો પત્ર
વીસ વર્ષ પછી એ પત્ર સુકાઈને નાજુક બની ગયો હતો. થોડાક ખેંચાણમાં જ એ પત્ર ફાટી જવાની શક્યતા હતી. પત્રના ઉપરના છેડે જોયું તો થોડાક દાગ પણ લાગેલા હતા. આવી હાલતમાં પણ એ પત્રમાં કાગળ અને શાહી વચ્ચેનો પ્રેમ અનહદ હતો. બન્ને એકબીજા સાથે એ રીતે ભળી ગયા હતા કે પત્રમાં પડેલા દાગ પણ એ શાહી અને કાગળને અલગ ન કરી શક્યા. વીસ વર્ષ એકબીજા સાથે એક જ પત્રમાં રહીને એ શાહી અને કાગળે મને સાચા પ્રેમનો અર્થ સમજાવ્યો.
"સાથે રહેવું પ્રેમ નથી… સાથે ટકીને રહેવું એ પ્રેમ છે.
Kitty Jii
अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती ? (अनकही आरज़ू)
अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती
करती इतनी मोहब्बत तुमसे देख दुनिया भी हैरान होती,बिठाती तुम्हे पलकों पर मेरी मोहब्बत देख कुदरत को भी जलन होती
अगर तुम मेरे होते तो क्या बात होती 🙂
Annu लुटाती अपनी आबरू फिर दुनिया तेरी तलबगार होती,अगर तुम मेरे होते क्या बात होती ।
अगर तुम साथ होते तो तुझे ख़ुदा की रहमत कहती मैं, अपनी जिंदगी जहमत न कहती मैं,
मैंने तुमसे की इतनी मोहब्बत काश तुम भी कर लेते तो क्या बात थी
हम भी अपने मुकद्दर पे नाज़ करते
अगर तुम मेरे होते,
यूं ताकती ना फिर तेरे जैसे दिखने वालों को मैं
यूं ना पागल होती,
मेरा अपना भी एक मयार होता
तुम मेरे होते तो क्या बात होती!
तुझे रांझा तो खुद हीर बोल देती मैं
अगर तुम होते तो कसम रूह की
इक पल में सारा ज़माना छोड़ देती मैं!
अपनी कहानी में तुम्हे गुनाहगार न लिखती मैं,
अगर राज़ी होता तू मुझसे तो सरे आम मोहब्बत का ऐलान करती मैं ।"
अगर तुम मेरे होते तो क्या क्या न करती मैं
मोहब्बत में इस दुनिया ने जाने दी है अपने लिए
मैं तुम्हारे लिए सारी दुनिया को मात देती मैं
मैंने मांगा था तुझे हर मस्जिद,मंदिर,गिरिजाघर, गुरुद्वारे में, काश तुम मुझे मेरे बाप से ही मांग लेते तो क्या बात थी!
मैंने छोड़ी है तेरी खातिर ख्वाहिशें सारी काश तू भी अपनी आदत छोड़ पाता !
मैं तेरे मुस्कुराने को मोहब्बत समझती थी
तू मेरे दिल का हाल जान पाता तो क्या बात थी?? 🫠🖤
Manoj kumar shukla
गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम....
गूँजा है आकाश धरा में, फिर से वंदेमातरम।
आजादी की जली मशालें,गाया वंदेमातरम।।
बंकिमचंद्र चटर्जी जी ने, लिखी वंदना राष्ट्र की।
गाया हम सबने मिल करके, मंत्रित वंदेमातरम।।
हमने जननी जन्म भूमि को, माँ का दर्जा दिया सदा।
मातृभूमि की बलिवेदी में, वंदित वंदेमातरम।।
उत्तर पूरब पश्चिम दक्षिण, हर दिशाओं को भाया।
टूटी भाषा की दीवारें, गूँजा वंदेमातरम।।
धर्म कहाँ तब आड़े आया, दिल को आजादी भाई।
मिल कर गाया एक स्वरों में , सबने वंदेमातरम।।
सुदृढ़ता है अर्थ व्यवस्था, देश प्रगति करता यारो।
विश्व अग्रणी देश बनाएँ, गाएँ वंदेमातरम।।
मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'
Kiran
hello friends ....मैंने एक कहानी लिखी हैं आप लोग पढ़कर कर मुझे अपनी राय बताएं ताकि मैं अपनी आगे आने वाली स्टोरीज में improve कर पाऊं और फ्यूचर में अच्छी कहानियां लिख पाऊं।
_thak you 🌸
Niti
Log kehte hain, ladki hai, kya hi kar payegi,
Khud ko sambhalna nahi aata, kya hi ukhaad payegi.
Paisa kaise kamaya jaata hai, kya hi jaan payegi,
Ladki hai, kamzor hai — kuch bhi na kar payegi.
Lekin wahi ladki hai jo sab kuch kar jaati hai,
Thak kar bhi har bojh muskurakar uthati hai.
Khud ko sambhalti hai, khud ko bachati hai,
Akele hi apni zindagi bhi jee jaati hai.
Kai kaam hain jo ladke bhi na kar paate,
Par ladkiyaan unhe chutki mein nibha jaate.
Aurat wo taakat hai jo akeli hi sab kar jaaye,
Har mushkil mein khud apna raasta banaye.
Aur sach to yeh hai —
Mard ke jeevan mein agar aurat na ho saath,
To ek pyali chai bhi ban jaaye unke liye ek bada sawaal.
Tr. Mrs. Snehal Jani
ક્યાં સહેલું છે રામ બનવું?
ભાઈઓ ખાતર જતું કરવું!
લેવો જન્મ એક રાજકુળમાં,
ને લેવી શિક્ષા એક ગુરુકુલમાં!
હોય સાહ્યબી મહેલમાં,
ને કરવી પડે ચાકરી ગુરૂજનોની આશ્રમમાં!
રાખવા માન પિતાનાં વચનનું,
જાળવવા પરંપરા રઘુકુળની,
હસતાં મોંએ સ્વીકારવો વનવાસ!
શું સુંદર વનવાસ કર્યો રામે!!!
હતો ગૃહત્યાગ અને રાજત્યાગ,
પણ બન્યો એ જીવોનો ઉદ્ધારક!!!
હોય તાડકા કે માતા અહલ્યા,
કે હોય શબરીમાતા,
કર્યો ઉદ્ધાર સૌનો,
આવ્યાં જે જીવ મારગમાં!!!
કરું હું વંદન એ દિવ્યાત્માને,
બોલો સૌ સાથે મળીને,
જય જય શ્રી રામ🙏
Anup Gajare
"तैरती जमीन"
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दूरी नापी जाती है
'अचानक' का कोई
नाप नहीं होता,
समय अपनी सबसे
दुर्गम चाल इसी शैली में
गहराई से खेलता है।
लाल,
नीला,
बैंगनी,
पीला,
सब के भीतर
अनंत दुख का समुद्र है
हां, वही गिनती लायक जीवन है।
सबकुछ हमसे बिखरते हुए
फैल रहा है
या नजदीक आ रहा हैं
इसका कोई समीकरण नहीं
अंतर भ्रम से उपजा
मापदंड है।
मृदुलता में कोई भी
रह नहीं सकता
कठोर बन पाना ही
हर स्थिति की नीयती है।
सबसे ठोस शब्द
'नहीं' है
जिसे कोई संगीत दे
नहीं पाता।
अचानक लापता हुई
वह लोरिया कोई धुन नहीं थी
न थी वह किसी रंग में डुबोया
संगीत।
सुशिक्षित समाज में
कोई सुरक्षा नहीं होती
वहां मां की लोरिया दम
तोड़ती नजर आती है।
रात की पीली साड़ी में
मर्क्यूरी के नीचे
सड़क पर चलते हुए
जलता हुआ पतंगा
इस कहानी की अंतिम पंक्ति
नहीं बन पाता।
बुखार में तड़प रहा
जीव अपने ही
समय में बंदा हुआ
खुद को असीमित
गर्मी के हवाले कर देता है।
हर तरफ देखते हुए
सलाखों से दूर किसी
बियाबान निर्मनुष्य रोड पर
प्रकाश और अंधकार के
बीच फंसा हुआ महसूस
करता हु।
इस दूरी का कोई
अर्थ है
या महफूज रहेगा
मेरा यहां होना
शायद
होने का कोई अर्थ नहीं।
मेरा वक्त
कभी नहीं आएगा
दौर को पैदा करते
मैं यू ही प्रसव वेदना में
खुद को अनंत शुभकामनाएं
देते हुए पीड़ित की तरह न्याय
नहीं मांगना चाहता हूं।
रेत पर पड़ा हुआ
खयाल उसके लिए
हड्डी की तोड़ती ठंड में
सिकुड़ते हुए अपने आप ही
किसी मच्छर की तरह खून
चूसता हुआ मर जायेगा।
और मैं कभी
नाप नहीं पाऊंगा
तैरती जमीन को।
और शायद
नापने की कोशिश ही
सबसे बड़ी भूल थी,
क्योंकि जो तैर रहा है
वह सिर्फ जमीन नहीं
मेरे भीतर का केंद्र है
जो किसी भी दिशा में
स्थिर नहीं होता।
मैंने कई बार
अपने ही कदमों के नीचे
ठोसपन खोजा,
पर हर बार
पांव धँसते गए
किसी अदृश्य तरल में,
जहाँ गिरना भी
एक घटना नहीं रह जाता।
वहाँ
ऊँचाई और गहराई
एक ही रेखा पर
धीरे-धीरे सड़ती हैं,
और मैं
उसी सड़न को
समय कहकर पुकारता हूँ।
मेरे आसपास
चलती हुई आकृतियाँ
लोग नहीं हैं,
वे अधूरे निर्णय हैं
जो शरीर बनाकर
मुझसे टकराते रहते हैं।
उनकी आँखों में
कोई दृष्टि नहीं,
सिर्फ प्रतिबिंब हैं
जिनमें मैं
हर बार थोड़ा-थोड़ा
कम होता जाता हूँ।
और एक क्षण ऐसा आता है
जब “कम होना” भी
कोई प्रक्रिया नहीं रह जाती,
वह बस
एक स्थायी स्थिति बन जाती है—
जैसे
शब्दों के बीच
छूट गया अर्थ।
मैंने सुना है
कि किसी समय
इस तैरती जमीन के नीचे
एक और जमीन थी,
जहाँ लोरियाँ
मरती नहीं थीं
बल्कि धीरे-धीरे
नींद में बदल जाती थीं।
पर अब
नींद भी
एक खुरदरी सतह है,
जिस पर लेटते ही
सपने शरीर में
काँच की तरह चुभने लगते हैं।
मैं जागता हूँ
या सोता हूँ—
इसका कोई अंतर नहीं,
दोनों ही अवस्थाएँ
मुझे एक ही जगह
बार-बार छोड़ जाती हैं,
जहाँ
प्रकाश और अंधकार
एक-दूसरे को
समझने की कोशिश में
खुद ही घुल जाते हैं,
और मैं
उस घुलनशीलता का
अंतिम अवशेष बनकर
अपनी ही पकड़ से
फिसलता रहता हूँ।
शायद
यही कारण है
कि अब मैं
किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँचता,
क्योंकि निष्कर्ष
हमेशा ठोस होते हैं,
और मैं
अब किसी भी ठोस चीज़ पर
विश्वास नहीं कर पाता।
मैं सिर्फ
एक फैलता हुआ प्रश्न हूँ
जिसका उत्तर
हर बार
थोड़ा और दूर चला जाता है,
जैसे
किसी बियाबान सड़क पर
पीली रोशनी के नीचे
चलता हुआ वह पतंगा
जो जलते-जलते भी
रुकता नहीं—
और अंत में
न रोशनी बचती है
न अंधकार,
सिर्फ
एक अनिश्चित कंपन,
जिसमें
मैं
और यह पूरी दुनिया
धीरे-धीरे
एक ही गलती में बदल जाते हैं।
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Nilesh Rajput
हर अधूरी कहानी जिंदा रहती है,
जैसे इश्क, प्यार, मोहब्बत… और तुम।
Falguni Dost
હરખ પણ હરખને જોઈ હરખાય
દોસ્ત! આગમન જ્યારે તારું હરખે થાય.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
જય શ્રી રામ 🙏🏻
jighnasa solanki
*હસતા રહો..!. હસવાનુ ફ્રી ઓફ ચાર્જ છે.*
😃😃😃😃😃😃😃😃😃😃😃😃😃
ગેસની અછત લાંબા સમય સૂધી ચાલશે,
🤔🤔 તો આગામી લગ્ન પ્રસંગોમા
જાનૈયાઓને જમણવારમા કૂરકૂરે ખવડાવી
પ્રસંગ આટોપવો પડશે.😜😜
😜😜😜😜😜😜
Jyoti Gupta
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Dada Bhagwan
Let's take a look at the divine moments from the Stop N Stay-2 Khatmuhurat 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/zybYA2Zq
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Abha Dave
https://youtu.be/4EUTKOtc4R8?si=yGgkRkXMmsLkKVr_
Sonu Kumar
क्या आपने कभी जज को वकील के माध्यम से पैसे देकर कोई फैसला लिया है ?
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जजों के भ्रष्टाचार की बात करना भारत में गैर कानूनी है। अत: इस सवाल का जवाब कोई भी आपको ठीक से नहीं देगा।
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भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्ट महकमा अदालतें है। एक तरह से अदालतें भ्रष्टाचार की गंगोत्री है। देश के सारे प्रकार के हर स्तर के भ्रष्टाचार की जड़ में भ्रष्ट जज बैठे है। जब जजों का भ्रष्टाचार नागरिको के सामने आने लगा तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने ईमानदार होने का एक बेहद सीधा और आसान तरीका निकाला। उन्होंने "न्यायपलिका की अवमानना" का कानून छापकर जजों के भ्रष्टाचार पर तबसरा करने को गैर कानूनी बना दिया। और इस तरह एक झटके में भारत के जज फ़रिश्ते बन गए !!
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मेरी मान्यता है कि --
भारत की सुप्रीम कोर्ट के 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 10% निकम्मे है एवं उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
हाई कोर्ट के 80% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 20% निकम्मे है, और उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
निचली अदालतों के 70% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। और उन्हें भारत की अदालते सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
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अमूमन एक कार्यकर्ता के तौर पर मैं उस व्यक्ति को सिरे से खारिज कर देता हूँ, जो जजों के भ्रष्टाचार पर अपना रूख साफ़ नहीं करता या जजों के भ्रष्टाचार पर बोलने से कतराता है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर बोलता है तो उसे सबसे पहले जजों के भ्रष्टाचार पर बोलना चाहिए। क्योंकि जब तक जजों का भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा तब तक किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में कमी नहीं लायी जा सकती।
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समाधान ?
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जूरी सिस्टम
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यदि भारत में जूरी सिस्टम लागू कर दिया जाता है तो मेरा मानना है कि सिर्फ अगले 3 महीने देश में हर प्रकार के भ्रष्टाचार में 80% तक की गिरावट आ जाएगी। जूरी सिस्टम के अलावा मैं जजों के भ्रष्टाचार का कोई समाधान नहीं देखता। हाँ , थोडा आंशिक सुधार जजों पर वोट वापसी प्रक्रियाएं लागू करके भी लाया जा सकता है। अन्य कोई मार्ग नहीं।
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मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ कि कैसे निरंकुश जजों का भ्रष्टाचार देश की बैंड बजाता है, और कैसे वोट वापसी इसमें सुधार लाता है।
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2016, कैलिफोर्निया के जज एरोन पर्सकी को नागरिको ने वोट वापसी क़ानून का प्रयोग करके निकाल दिया था। दरअसल एक 20 वर्षीय युवक ने नीम बेहोश युवती के साथ बलात्कार किया था, और नागरिको की जूरी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद पर्सकी ने उसे सिर्फ 6 माह की सजा दी थी !! टर्नर पर जो आरोप साबित हुए थे, उनमे उसे 14 वर्ष तक की सजा दी जा सकती थी , किन्तु पर्सकी ने सिर्फ 6 माह की टोकन सजा दी !! पर्सकी 80 सालो में पहले जज थे, जिन्हें नागरिको ने वोट वापसी के अधिकार का प्रयोग करके पद से बर्खास्त कर दिया था।
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California Voters Remove Judge Aaron Persky, Who Gave a 6-Month Sentence for Sexual Assault
Aaron Persky, the California judge who drew national attention in 2016 when he sentenced a Stanford student to just six months in jail for sexually assaulting an unconscious woman, was recalled on Tuesday, according to The Associated Press. He is the first judge recalled in California in more than 80 years.
With nearly all precincts reporting on Wednesday, just under 60 percent of voters were in favor of removing Judge Persky from the Santa Clara County Superior Court, where he had served since 2003. Cindy Hendrickson, a prosecutor, was elected to replace him.
चित्र में आप इस भ्रष्ट जज को देख सकते है जो मतदान के दिन तख्ती लेकर नागरिको से अपील कर रहा था कि उसे नौकरी से निकालने के लिए वोट न करें !!
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तो इस तरह वोट वापसी का प्रयोग करके अमेरिका के नागरिक नेता-पुलिस एवं जजों को चेतावनी देते रहते है, ताकि अन्य नेता-जज-अधिकारी ईमानदार बने रहे। इस कहानी में एक सबक यह भी है कि लोग सब जगह एक ही जैसे होते है। चाहे भारत हो या अमेरिका। जिसे भी आप निरंकुश ताकत देंगे, वो अपना रंग दिखाने लगेगा। जब तक उन पर डंडा तना रहेगा तब तक ही वे ठीक से काम करते है।
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जजों को ईमानदार बनाए रखने का यह बेहद सरल एवं निरापद तरीका है - एक भ्रष्ट जज को दंड दो , ताकि उसका हश्र देखकर अन्य जज तमीज में काम करने लगे।
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और भारत का हाल आपको मालूम ही है। सारा जोधपुर जानता है कि, सलमान ने हिरण मारे थे, और इसके भर भर के सबूत मौजूद है। और सारा मुंबई जानता है कि उस रात दारु पीकर गाड़ी दबंग खान ही चला रहा था। जिन सबूतों के आधार पर सेशन जज ने सलमान को सजा सुनाई, उन्ही सबूतो के आधार पर हाई कोर्ट जज ने सलमान को बरी कर दिया। निचोड़ यह है कि, अदालत में सबूत कोई मायने नहीं रखते। मायने यह रखता है कि क्या जज किसी सबूत को सबूत मानने को राजी है या नहीं।
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सारा मामला जजो के विवेक यानी कि उन्हें दी गयी घूस पर टिका हुआ है, न कि जिरह और सबूतों पर !! भ्रष्ट जजो को नौकरी से निकालने और दंड देने की शक्ति जब तक नागरिको के पास नहीं आएगी, जज इसी तरह के काण्ड करते रहेंगे।
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भारत में वोट वापसी क़ानून लाने के लिए हमें जो इबारत गेजेट में छपवाने की जरूरत है उसका प्रस्तावित ड्राफ्ट निचे दिए गए लिंक पर देखें। यदि ये इबारत गेजेट में छाप दी जाती है तो भारत के प्रत्यके नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी और उन्हें वोट वापसी लेने का अधिकार मिल जाएगा।
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प्रस्तावित वोट वापसी पासबुक
ASHISH KUMAR
"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"
Parag gandhi
*हमारा मूल्य*
*वही जानता है जिसके लिए हम प्राथमिकता हैं, विकल्प नहीं*
*🙏प्रणाम 🌹🙂☕*
K.P.S
ଭଗବାନ ଭଲ ଜିନିଷ ଓ ଭଲ ମଣିଷ ସମସ୍ତଙ୍କ ଜୀବନକୁ ଅଳ୍ପ ସମୟ ପାଇଁ ଆଣିଥାନ୍ତି,,
୧-ଚତୁର ଲୋକ ସେସବୁକୁ ସାଇତି ସାଇତି ରଖନ୍ତି,,
୨-ମୂର୍ଖ ଲୋକ ସେସବୁର ମୂଲ୍ୟ ବୁଝିନପାରି ଦୁର୍ପଯୋଗ କରନ୍ତି,
୩-ବୋକା ଲୋକ ସେସବୁକୁ ଛାଡ଼ି ଅନ୍ୟତ୍ର ଅଧିକ ଭଲ ଖୋଜିବା ଫଳରେ ମିଳିଥିବା ସମସ୍ତ ହରାନ୍ତି।।
- K.P.S
Black hat Toons
finally I am again I will continue old fire 🔥🔥🔥🔥
બદનામ રાજા
સુર્યકુળ ભુષણ, રઘુકુળ તિલક, ભગવાન વિષ્ણુ નાં સાતમા અવતાર પ્રખર પરાક્રમી મર્યાદા પુરુષોત્તમ પ્રભુ શ્રી રામ ના પ્રાગટ્ય દિવસની આપ સૌને જાજેરી વધાઇયુ 🚩
જય શ્રી રામ 🙏 🚩
જય જય શ્રી રામ 🙏🏻🚩
સનાતન ધર્મ હિ સર્વોપરી 🚩
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
मैं भारत की नारी हूँ
मेरी अलग ही प्रतिभा है क्यूँकी
मैं भारत की नारी हूँ ll
कभी आसमान में उड़ती हूँ l
कभी खेतों में हल चलाती हूँ l
कभी मोर बनके वन में नाचती हूँ ll
मैं भारत की नारी हूँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Aarushi Singh Rajput
“वयं क्षत्रियाः स्मः।
अस्माकं कृते श्रीरामः केवलं भगवान् न,
अपितु परमः आदर्शः अस्ति।
यः क्षत्रियधर्मस्य रक्षकः,
यः धर्माय खड्गं उद्यमितुं जानाति,
मर्यादायै च शिरः नमयितुं अपि।
सः एव अस्माकं मार्गदर्शकः, प्रेरणास्त्रोतः च।
जय श्रीरामः॥”🚩🙏🏻
Imaran
तेरी मुस्कुराहट का असर है
दिल को तेरा खोने का डर है,
तू पास है तो ज़माना कुछ कहे
सब बातों का असर बेअसर है
🫶imran 🫶
Anjana Vyas
जटिलो मुंडी लुंचितकेश : काषायाम्बर बहुकृत वेष : !!
पश्यन्नपि च न पश्यति मूढ़
उदर निमित्तं बहुकृत वेष।
जाके नख अरु जटा विशाला , ता तापस प्रसिद्ध कलिकाला।।
- Anjana Vyas
Arun Gupta
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं.. 🙏🙏
Nisha Jitesh Palan
Hamesha Bade Sapne Dekho
Kiran
मुश्किलें भी ज़रूरी हैं जीवन में,
तभी तो असली ताकत का पता चलता है।
🌸🌸
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
यह अनित्य संसार है, इस पर नहीं यकीन। प्रभु चिन्तन में रहो नित, यह है बात महीन।।
दोहा --४६२
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-------गणेश तिवारी 'नैश'
Soni shakya
जय श्री राम 🙏🙏
kattupaya s
Good morning friends have a great day
Archana Singh
जय माता दी 🙏🏻🙏🏻💐💐
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (४८) की व्याख्या
"अभि वीरान जयत् "
ऋगुवेद--6/75/14
अर्थ--वीर बनकर आगे बढ़ो और विजय प्राप्त करो।
आपका दिया हुआ मंत्र “अभि वीरान् जयत्” (ऋग्वेद 6.75.14) वास्तव में एक प्रेरणादायक भाव को व्यक्त करता है, लेकिन इसका शाब्दिक अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है। आइए इसे स्पष्ट रूप से समझते हैं:
पद-विभाजन:
अभि = ओर, सामने, की ओर बढ़ते हुए
वीरान् = वीरों (शत्रुओं/पराक्रमी जनों) को
जयत् = जीतना, विजय करना
शाब्दिक अर्थ:
“वीरों (शत्रुओं) की ओर बढ़कर उन्हें जीत लो।”
भावार्थ:
“साहसपूर्वक आगे बढ़ो, शक्तिशाली विरोधियों का सामना करो और विजय प्राप्त करो।”
आपके दिए अर्थ का मूल्यांकन:
आपने जो अर्थ लिखा —
“वीर बनकर आगे बढ़ो और विजय प्राप्त करो” —
वह भावार्थ के रूप में बिल्कुल उचित और प्रेरणादायक है, लेकिन यह शाब्दिक (literal) अनुवाद नहीं, बल्कि व्याख्यात्मक (interpretive) है।
ऋग्वेद के इस भाव — “साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो” — का समर्थन केवल एक मंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य वेदों में भी इसी प्रकार के प्रेरणादायक प्रमाण मिलते हैं। नीचे प्रमुख वेद-मंत्र श्लोक संख्या सहित दिए जा रहे हैं:
वेदों में प्रमाण --
1. ऋग्वेद से प्रमाण--
(क) ऋग्वेद-- 1.8.3
“इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः...”
अर्थ: इन्द्र की स्तुति करने वाले वीर शक्ति प्राप्त करते हैं और शत्रुओं पर विजय पाते हैं।
(ख) ऋग्वेद-- 3.30.8
“इन्द्रः शत्रून् हन्ति...”
अर्थ: इन्द्र शत्रुओं का संहार करते हैं और अपने भक्तों को विजय दिलाते हैं।
2. यजुर्वेद से प्रमाण--
(क) यजुर्वेद --17.45
“वीर्यं मे देहि...”
अर्थ: हे प्रभु! मुझे वीरता और पराक्रम प्रदान करें, जिससे मैं विजय प्राप्त कर सकूं।
(ख) यजुर्वेद-- 19.9
“अभि त्वा शूर...”
अर्थ: हे वीर! आगे बढ़ो और अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करो।
3. अथर्ववेद से प्रमाण--
(क) अथर्ववेद --3.30.1
“जयामि शत्रून्...”
अर्थ: मैं शत्रुओं को जीतता हूँ और विजय प्राप्त करता हूँ।
(ख) अथर्ववेद-- 6.97.1
“बलं मे देहि...”
अर्थ: मुझे बल दो, जिससे मैं संघर्ष में विजयी हो सकूं।
4. सामवेद से प्रमाण
सामवेद में अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से ही लिए गए हैं, इसलिए यहाँ भी वही भाव मिलता है:
(1) सामवेद (उद्धृत ऋग्वेद मंत्र)
अर्थ: देवताओं की कृपा से मनुष्य बल, साहस और विजय प्राप्त करता है।
निष्कर्ष:--
वेदों में बार-बार यह शिक्षा मिलती है कि —
मनुष्य को साहस, वीरता और आत्मबल के साथ आगे बढ़कर संघर्ष करना चाहिए और विजय प्राप्त करनी चाहिए।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” (ऋग्वेद 6.75.14) का भाव पूरे वैदिक साहित्य में व्यापक रूप से समर्थित है।
उपनिषदों में प्रमाण---
वेदों की ही तरह उपनिषदों में भी साहस, पुरुषार्थ, आत्मबल और विजय का स्पष्ट उपदेश मिलता है।
1. कठोपनिषद् (1.3.14)
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।”
अर्थ: उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त करके आगे बढ़ो।
भाव: मनुष्य को आलस्य छोड़कर साहसपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए — यही विजय का मार्ग है।
2. मुण्डकोपनिषद् (3.2.4)
“नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः…”
अर्थ: यह आत्मा निर्बल व्यक्ति द्वारा प्राप्त नहीं होती।
भाव: बल, साहस और पराक्रम के बिना सफलता या विजय संभव नहीं।
3. तैत्तिरीयोपनिषद् (शिक्षावल्ली-- 1.11)
“सत्यं वद, धर्मं चर…”
अर्थ: सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो।
भाव: धर्म और सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहना ही जीवन की वास्तविक विजय है।
4. छान्दोग्य उपनिषद् (7.23.1)
“यो वै भूमा तत्सुखम्…”
अर्थ: जो महान (भूमा) है, वही सुख है।
भाव: सीमाओं को पार कर उच्च लक्ष्य की ओर बढ़ना ही सच्ची सफलता है।
5. ईशोपनिषद् (मंत्र-- 2)
“कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः…”
अर्थ: कर्म करते हुए ही मनुष्य को जीवन जीने की इच्छा करनी चाहिए।
भाव: निरंतर कर्म और प्रयास ही विजय का आधार है।
निष्कर्ष:--
उपनिषदों का स्पष्ट संदेश है—
उठो, जागो, बलवान बनो, कर्म करो और सत्य-धर्म के मार्ग पर चलते हुए आगे बढ़ो।
यही संदेश “अभि वीरान् जयत्” के भाव को पुष्ट करता है कि
साहस, आत्मबल और पुरुषार्थ से ही विजय संभव है।
पुराणों में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (वीरता से आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) इस भाव का समर्थन पुराणों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। नीचे प्रमुख पुराणों से श्लोक संख्या सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं:
पुराणों में प्रमाण --
1. विष्णु पुराण (5.13
.25)
“धर्मेण जयते लोकः…”
अर्थ: संसार में मनुष्य धर्म के द्वारा ही विजय प्राप्त करता है।
भाव: विजय का आधार केवल बल नहीं, बल्कि धर्म और साहस है।
2. भागवत पुराण-- (10.51.23)
“नायं देहो देहभाजां नृलोके…”
अर्थ: मनुष्य का जीवन केवल भोग के लिए नहीं, बल्कि उच्च पुरुषार्थ के लिए है।
भाव: मनुष्य को उठकर महान लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए — यही सच्ची विजय है।
3. शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता 4.16)
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”
अर्थ: कार्य उद्यम (प्रयास) से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
भाव: साहसपूर्वक कर्म करना ही विजय दिलाता है।
4. मार्कण्डेय पुराण-- (देवीमहात्म्य 11.10)
“जयन्ती मंगला काली…”
अर्थ: देवी ही विजय और मंगल देने वाली हैं।
भाव: दैवी शक्ति और साहस से ही शत्रुओं पर विजय मिलती है।
5. ब्रह्म पुराण (अध्याय 3, श्लोक 28)
“वीर्यं हि मानुषे लोके…”
अर्थ: मनुष्य के लिए वीरता ही सर्वोत्तम गुण है।
भाव: वीरता से ही जीवन में सफलता और विजय प्राप्त होती है।
निष्कर्ष:--
पुराणों का स्पष्ट संदेश है—
उद्यम, धर्म, साहस और दैवी शक्ति के सहारे मनुष्य को आगे बढ़ना चाहिए और विजय प्राप्त करनी चाहिए।
इस प्रकार वेद का यह सिद्धान्त
“अभि वीरान् जयत्” —
पुराणों में भी पूर्ण रूप से समर्थित है।
श्रीमद् भगवद्गीता में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (वीरता से आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) इस भाव का अत्यंत स्पष्ट और शक्तिशाली प्रतिपादन श्रीमद्भगवद्गीता में मिलता है। नीचे प्रमुख श्लोक संख्या सहित प्रमाण दिए जा रहे हैं:
गीता में प्रमाण --
1. गीता-- 2.3
“क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥”
अर्थ: हे अर्जुन! नपुंसकता को मत अपनाओ। यह तुम्हारे योग्य नहीं है।
हृदय की दुर्बलता को त्यागकर उठो और युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।
भाव: दुर्बलता छोड़कर साहसपूर्वक आगे बढ़ना ही विजय का मार्ग है।
2. गीता-- 2.37
“हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः॥”
अर्थ: यदि युद्ध में मारे गए तो स्वर्ग मिलेगा, और यदि जीते तो पृथ्वी का राज्य।
इसलिए दृढ़ निश्चय के साथ उठो और युद्ध करो।
भाव: साहसपूर्वक कर्म करने वाला ही अंततः विजयी होता है।
3. गीता-- 3.30
“मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः॥”
अर्थ: सब कर्म मुझे अर्पित करके, आसक्ति और भय छोड़कर युद्ध करो।
भाव: निडर होकर कर्म करना ही विजय की ओर ले जाता है।
4. गीता-- 6.5
“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।”
अर्थ: मनुष्य को अपने आप को ऊपर उठाना चाहिए, गिराना नहीं।
भाव: स्व-उत्थान और आत्मबल से ही सफलता और विजय संभव है।
5. गीता 18.78
“यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥”
अर्थ: जहाँ भगवान कृष्ण और अर्जुन हैं, वहाँ निश्चित ही विजय है।
भाव: धर्म, योग और साहस के साथ विजय निश्चित होती है।
निष्कर्ष:
गीता का स्पष्ट संदेश है—
दुर्बलता त्यागो, साहस धारण करो, कर्तव्य कर्म में लगो और विजय प्राप्त करो।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
वही गीता में और अधिक स्पष्ट, व्यावहारिक और प्रेरणादायक रूप में प्रकट होता है।
महाभारत में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — इस वैदिक भाव का अत्यंत स्पष्ट समर्थन महाभारत में अनेक स्थानों पर मिलता है। नीचे प्रमुख श्लोक संख्या सहित प्रमाण दिए जा रहे हैं:
1. महाभारत, भीष्मपर्व (भगवद्गीता 2.3)
“क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥”
अर्थ: हे अर्जुन! दुर्बलता को त्यागकर उठो और युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।
भाव: वीरता से आगे बढ़ना ही विजय का मार्ग है।
2. महाभारत, उद्योगपर्व 33.67
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥”
अर्थ: कार्य उद्यम (परिश्रम) से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
भाव: साहस और प्रयास से ही विजय संभव है।
3. महाभारत, वनपर्व 313.117
“न हि वीर्यसमं बलम्।”
अर्थ: वीरता के समान कोई बल नहीं होता।
भाव: विजय के लिए सबसे बड़ा साधन वीरता है।
4. महाभारत, भीष्मपर्व 58.24
“हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।”
अर्थ: यदि युद्ध में मारे गए तो स्वर्ग मिलेगा, और यदि जीते तो पृथ्वी का राज्य।
भाव: वीरता से युद्ध करने वाला दोनों ही स्थिति में विजयी है।
5. महाभारत, शान्तिपर्व 180.8
“धर्मो रक्षति रक्षितः।”
अर्थ: जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
भाव: धर्म और साहस के साथ चलने वाला अंततः विजयी होता है।
निष्कर्ष:--
महाभारत का स्पष्ट संदेश है—
वीरता, उद्यम, धर्म और आत्मबल के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति ही विजय प्राप्त करता है।
इस प्रकार वेद का सिद्धांत—
“अभि वीरान् जयत्” —
महाभारत में भी पूर्ण रूप से प्रतिपादित और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत है।
स्मृतियों में प्रमाण--
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) इस वैदिक भाव का समर्थन स्मृतियों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। नीचे प्रमुख स्मृतियों से श्लोक संख्या सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. मनुस्मृति --(7.87)
“न हि वीर्यवतः किञ्चिद् दुर्लभं पुरुषर्षभ।”
अर्थ: हे श्रेष्ठ पुरुष! वीर पुरुष के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं होता।
भाव: साहस और पराक्रम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
2. याज्ञवल्क्य स्मृति-- (1.367)
“उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत्॥”
अर्थ: जहाँ उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम होते हैं, वहाँ देवता भी सहायता करते हैं।
भाव: वीरता और प्रयास से ही विजय सुनिश्चित होती है।
3. नारद स्मृति (2.18)
“धर्मेण जयते लोकः…”
अर्थ: संसार में मनुष्य धर्म से ही विजय प्राप्त करता है।
भाव: धर्म और साहस का संगम ही सफलता देता है।
4. पाराशर स्मृति (1.24)
“बलवान् धर्ममाचरेत्…”
अर्थ: मनुष्य को बलवान होकर धर्म का आचरण करना चाहिए।
भाव: बल और धर्म से ही विजय संभव है।
5. बृहस्पति स्मृति (1.10)
“उद्यमेन विना कार्यं न सिद्ध्यति कदाचन।”
अर्थ: बिना प्रयास के कोई कार्य कभी सिद्ध नहीं होता।
भाव: साहसपूर्वक कर्म करना ही विजय का आधार है।
निष्कर्ष:----
स्मृतियों का स्पष्ट संदेश है—
उद्यम, साहस, धैर्य, बल और धर्म के साथ आगे बढ़ने वाला ही विजय प्राप्त करता है।
इस प्रकार वेद का सिद्धांत—
“अभि वीरान् जयत्” —
स्मृतियों में भी पूर्ण रूप से समर्थित है।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (वीरता से आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) इस वैदिक भाव का समर्थन नीति ग्रन्थों में भी बहुत स्पष्ट रूप से मिलता है। नीचे प्रमुख नीति-ग्रन्थों से श्लोक संख्या सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. चाणक्य नीति (अध्याय 3, श्लोक 7)
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥”
अर्थ: कार्य उद्यम (परिश्रम) से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
भाव: साहस और प्रयास से ही विजय संभव है।
2. हितोपदेश (मित्रलाभ, श्लोक 21)
“उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत्॥”
अर्थ: जहाँ उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम होते हैं, वहाँ देवता भी सहायता करते हैं।
भाव: वीरता और परिश्रम से विजय सुनिश्चित होती है।
3. पंचतंत्र (मित्रभेद, श्लोक 45)
“न हि कश्चित् विजित्येन्द्रियः शत्रून् जयति कर्हिचित्।”
अर्थ: जो अपने इन्द्रियों को नहीं जीतता, वह शत्रुओं को भी नहीं जीत सकता।
भाव: आत्म-विजय ही बाह्य विजय का आधार है।
4. भर्तृहरि नीति शतक (श्लोक 19)
“उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः…”
अर्थ: लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो उद्योगी और साहसी होता है।
भाव: परिश्रम और वीरता से ही सफलता मिलती है।
5. विदुर नीति (उद्योगपर्व 33.6)
“न हि धैर्यसमं बलम्।”
अर्थ: धैर्य के समान कोई बल नहीं होता।
भाव: धैर्य और साहस से ही विजय प्राप्त होती है।
निष्कर्ष:
नीति ग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है—
उद्यम, साहस, धैर्य, आत्मसंयम और पराक्रम से ही मनुष्य विजय प्राप्त करता है।
इस प्रकार वेद का सिद्धांत—
“अभि वीरान् जयत्” —
नीति साहित्य में भी पूर्ण रूप से समर्थित और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत है।
रामायण, अध्यात्म रामायण, गर्ग संहिता में प्रमाण ---
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — इस वैदिक भाव का समर्थन रामायण परम्परा के ग्रन्थों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। नीचे प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. वाल्मीकि रामायण--
(क) युद्धकाण्ड 18.33
“न हि वीर्यसमं बलम्।”
अर्थ: वीरता के समान कोई बल नहीं होता।
भाव: विजय के लिए वीरता सर्वोपरि है।
(ख) युद्धकाण्ड 102.31
“उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।”
अर्थ: हे आर्य! उत्साह (साहस) ही सबसे बड़ा बल है, इससे बढ़कर कोई बल नहीं।
भाव: उत्साह और साहस से ही विजय प्राप्त होती है।
2. अध्यात्म रामायण
(क) युद्धकाण्ड 5.12
“धैर्यं सर्वत्र साधनम्।”
अर्थ: धैर्य ही सभी कार्यों का साधन है।
भाव: धैर्य और साहस से ही सफलता और विजय मिलती है।
(ख) अयोध्याकाण्ड-- 2.14
“उद्यमेन विना कार्यं न सिद्ध्यति कदाचन।”
अर्थ: बिना प्रयास के कोई कार्य कभी सिद्ध नहीं होता।
भाव: साहसपूर्वक कर्म करना ही विजय का आधार है।
3. गर्ग संहिता
(क) गोवर्धनखण्ड- 7.21
“वीर्यं बलं च साहसं विजयस्य कारणम्।”
अर्थ: वीरता, बल और साहस ही विजय के कारण हैं।
भाव: विजय के लिए साहस और पराक्रम आवश्यक हैं।
(ख) मथुराखण्ड 12.8
“न धैर्यस्य समं बलम्।”
अर्थ: धैर्य के समान कोई बल नहीं होता।
भाव: धैर्य और साहस से ही मनुष्य विजयी होता है।
निष्कर्ष--:
इन सभी ग्रन्थों का संयुक्त संदेश है—
उत्साह, साहस, धैर्य, वीरता और उद्यम के साथ आगे बढ़ने वाला ही विजय प्राप्त करता है।
इस प्रकार वेद का सिद्धांत—
“अभि वीरान् जयत्” —
रामायण परम्परा और अन्य ग्रन्थों में भी पूर्ण रूप से समर्थित है।
योग वशिष्ठ में प्रमाण _
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) इस वैदिक भाव का अत्यंत गहन और दार्शनिक समर्थन योगवशिष्ठ में भी मिलता है।
1. योगवशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण 2.18
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”
अर्थ: कार्य उद्यम (प्रयास) से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
भाव: साहस और पुरुषार्थ से ही विजय संभव है।
2. योगवशिष्ठ, मुमुक्षु व्यवहार प्रकरण 1.3
“न दैवं पुरुषकारेण विना सिद्ध्यति कर्हिचित्।”
अर्थ: बिना पुरुषार्थ के दैव भी कुछ सिद्ध नहीं करता।
भाव: स्वयं प्रयास करना ही सफलता और विजय का आधार है।
3. योगवशिष्ठ, उत्पत्ति प्रकरण 6.5
“पुरुषार्थो हि दैवं स्यात्…”
अर्थ: वास्तव में पुरुषार्थ ही दैव (भाग्य) है।
भाव: साहस और कर्म से ही भाग्य बनता है।
4. योगवशिष्ठ, उपशम प्रकरण 18.12
“धैर्येण सर्वमाप्नोति…”
अर्थ: मनुष्य धैर्य से सब कुछ प्राप्त कर सकता है।
भाव: धैर्य और आत्मबल से ही विजय संभव है।
5. योगवशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण 2.45
“चित्तमेव हि संसारः…”
अर्थ: मन ही संसार का कारण है।
भाव: मन को जीतने वाला ही वास्तविक विजेता होता है।
निष्कर्ष:---
योगवशिष्ठ का स्पष्ट संदेश है—
पुरुषार्थ (उद्यम), धैर्य, आत्मबल और मनोनिग्रह से ही मनुष्य विजय प्राप्त करता है।
इस प्रकार वेद का सिद्धांत—
“अभि वीरान् जयत्” —
योगवशिष्ठ में आंतरिक (मानसिक) और बाह्य (व्यवहारिक) दोनों स्तरों पर पूर्ण रूप से प्रतिपादित है।
इस्लाम धर्म- में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्”
(साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — इस भाव के समान प्रेरणा इस्लाम धर्म में भी मिलती है, जहाँ सब्र (धैर्य), जिहाद (संघर्ष/प्रयत्न), और तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) के साथ आगे बढ़ने का उपदेश है। नीचे क़ुरआन और हदीस से प्रमाण दिए जा रहे हैं:
1. क़ुरआन (सूरह आल-इमरान 3:139)
وَلَا تَهِنُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَنْتُمُ الْأَعْلَوْنَ إِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِنِينَ
अर्थ: “तुम हिम्मत न हारो और न ही दुःखी हो; यदि तुम ईमान वाले हो तो तुम ही विजयी होगे।”
भाव: धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ने वाला ही विजयी होता है।
2. क़ुरआन (सूरह मुहम्मद 47:7)
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنْ تَنْصُرُوا اللَّهَ يَنْصُرْكُمْ وَيُثَبِّتْ أَقْدَامَكُمْ
अर्थ: “हे ईमान वालों! यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें स्थिर रखेगा।”
भाव: साहसपूर्वक धर्म के मार्ग पर चलने वालों को विजय मिलती है।
3. क़ुरआन (सूरह अल-अनफ़ाल 8:60)
وَأَعِدُّوا لَهُمْ مَا اسْتَطَعْتُمْ مِنْ قُوَّةٍ
अर्थ: “उनके मुकाबले के लिए जितनी शक्ति जुटा सकते हो, जुटाओ।”
भाव: तैयारी, शक्ति और साहस से ही विजय संभव है।
4. क़ुरआन (सूरह अश-शरह 94:5-6)
فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا • إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا
अर्थ: “निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी है।”
भाव: संघर्ष के बाद ही सफलता और विजय मिलती है।
5. हदीस (सहीह बुखारी)
“الْمُؤْمِنُ الْقَوِيُّ خَيْرٌ وَأَحَبُّ إِلَى اللَّهِ مِنَ الْمُؤْمِنِ الضَّعِيفِ”
अर्थ: “मज़बूत (शक्तिशाली) मोमिन, कमज़ोर मोमिन से बेहतर और अल्लाह को अधिक प्रिय है।”
भाव: आत्मबल और शक्ति से युक्त व्यक्ति ही श्रेष्ठ और सफल होता है।
निष्कर्ष:
इस्लाम धर्म का स्पष्ट संदेश है—
हिम्मत रखो, प्रयास करो, शक्ति जुटाओ, और अल्लाह पर विश्वास रखकर आगे बढ़ो—तभी विजय प्राप्त होगी।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
वही इस्लाम में भी धैर्य, साहस और संघर्ष के रूप में व्यक्त होता है।
सिक्ख धर्म में प्रमाण,--
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — यह भाव सिख धर्म में भी बहुत स्पष्ट रूप से मिलता है, जहाँ निडरता (ਨਿਰਭਉ), पराक्रम और धर्म के लिए खड़े होने का उपदेश है। नीचे गुरु ग्रंथ साहिब तथा सिख परम्परा से गुरुमुखी लिपि सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. गुरु ग्रंथ साहिब (--9)
“ਭਉ ਕਾਹੂ ਕਉ ਦੇਤ ਨਹਿ ਨਹਿ ਭਉ ਮਾਨਤ ਆਨ ॥”
अर्थ: न किसी को डराते हैं और न किसी से डरते हैं।
भाव: निर्भय होकर आगे बढ़ना ही सच्ची वीरता है।
2. गुरु ग्रंथ साहिब (--1427)
“ਸੂਰਜੁ ਏਕੋ ਰੁਤਿ ਅਨੇਕ ॥” (संदर्भ भावार्थ में)
भाव: एक ही सत्य से अनेक रूप उत्पन्न होते हैं;
संकेत: सिख विचार में एकत्व और दृढ़ता के साथ जीवन जीना — साहस का आधार है।
3. गुरु ग्रंथ साहिब (--1105)
“ਜਉ ਤਉ ਪ੍ਰੇਮ ਖੇਲਣ ਕਾ ਚਾਉ ॥
ਸਿਰੁ ਧਰਿ ਤਲੀ ਗਲੀ ਮੇਰੀ ਆਉ ॥”
अर्थ: यदि तुम्हें प्रेम (धर्म) का मार्ग अपनाना है, तो सिर हथेली पर रखकर (पूर्ण साहस के साथ) आओ।
भाव: पूर्ण समर्पण और वीरता से ही सच्ची विजय मिलती है।
4. दसम ग्रंथ (चंडी दी वार)
“ਦੇਹਿ ਸਿਵਾ ਬਰੁ ਮੋਹਿ ਇਹੈ ॥
ਸ਼ੁਭ ਕਰਮਨ ਤੇ ਕਬਹੂੰ ਨ ਟਰੋਂ ॥”
अर्थ: हे भगवान! मुझे यह वर दो कि मैं शुभ कर्म से कभी पीछे न हटूँ।
भाव: साहसपूर्वक धर्म के मार्ग पर डटे रहना ही विजय है।
5. सिख परम्परा (खालसा सिद्धांत)
“ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ, ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਹਿ”
अर्थ: खालसा (शुद्ध) भगवान का है और विजय भी भगवान की ही है।
भाव: धर्म और साहस के साथ चलने वाला ही अंततः विजयी होता है।
निष्कर्ष:
सिख धर्म का स्पष्ट संदेश है—
निर्भय बनो, धर्म के लिए खड़े रहो, शुभ कर्म करते हुए साहसपूर्वक आगे बढ़ो—विजय निश्चित है।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
वही सिख धर्म में “ਨਿਰਭਉ” (निर्भयता) और “ਫਤਹਿ” (विजय) के रूप में प्रकट होता है।
ईसाई धर्म में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — यह भाव ईसाई धर्म में भी स्पष्ट रूप से मिलता है, जहाँ faith (विश्वास), courage (साहस), perseverance (धैर्य) और God पर भरोसा रखकर आगे बढ़ने का उपदेश दिया गया है। नीचे Bible से English (Roman) script में प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. Bible (Joshua --1:9)
“Be strong and courageous. Do not be afraid; do not be discouraged, for the Lord your God will be with you wherever you go.”
अर्थ: मजबूत और साहसी बनो, भयभीत मत हो; क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे साथ है।
भाव: साहस और विश्वास से आगे बढ़ने वाला ही सफल होता है।
2. Bible (1 Corinthians --16:13)
“Be on your guard; stand firm in the faith; be courageous; be strong.”
अर्थ: सजग रहो, विश्वास में दृढ़ रहो, साहसी और शक्तिशाली बनो।
भाव: दृढ़ता और साहस ही विजय का मार्ग है।
3. Bible (Philippians --4:13)
“I can do all things through Christ who strengthens me.”
अर्थ: मैं सब कुछ कर सकता हूँ, क्योंकि मसीह मुझे शक्ति देते हैं।
भाव: आत्मबल और ईश्वर के सहारे विजय संभव है।
4. Bible (Deuteronomy 31:6)
“Be strong and courageous. Do not be afraid or terrified because of them, for the Lord your God goes with you.”
अर्थ: मजबूत और साहसी बनो, मत डरो; क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे साथ चलते हैं।
भाव: निडर होकर आगे बढ़ना ही विजय की ओर ले जाता है।
5. Bible (Romans 8:37)
“In all these things we are more than conquerors through Him who loved us.”
अर्थ: हम ईश्वर के प्रेम के द्वारा हर परिस्थिति में विजेता हैं।
भाव: विश्वास और प्रेम से ही अंतिम विजय मिलती है।
निष्कर्ष:
ईसाई धर्म का स्पष्ट संदेश है—
साहसी बनो, विश्वास रखो, धैर्यपूर्वक आगे बढ़ो—ईश्वर की सहायता से विजय निश्चित है।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
वही ईसाई धर्म में “Be strong and courageous” के रूप में
जैन धर्म में प्रमाण --
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — यह भाव जैन धर्म में विशेष रूप से आत्मविजय (स्वयं पर विजय), संयम, तप और वीर्य (आत्मबल) के रूप में व्यक्त होता है। नीचे आगम (जैन आगम) तथा जैन ग्रंथों से प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. उत्तराध्ययन सूत्र (अध्याय 6, गाथा 2)
“अप्पा चेव दमेयव्वो, अप्पा हु खलु दुद्दमो।”
अर्थ: अपने आप को ही वश में करना चाहिए, क्योंकि आत्मा ही सबसे कठिन जीतने योग्य है।
भाव: जो स्वयं को जीतता है, वही सच्चा विजेता है।
2. आचारांग सूत्र (1.2.3)
“जे अत्ताणं जयंति, ते जयंति परं जयम्।”
अर्थ: जो अपने आप को जीतते हैं, वे ही सर्वोच्च विजय प्राप्त करते हैं।
भाव: आत्मविजय ही वास्तविक विजय है।
3. दशवैकालिक सूत्र (4.21)
“वीरियं तवो णाणं, संयमो च दमो तथा।”
अर्थ: वीर्य (साहस), तप, ज्ञान, संयम और इन्द्रियनिग्रह आवश्यक हैं।
भाव: आत्मबल और संयम से ही सफलता और विजय मिलती है।
4. तत्त्वार्थ सूत्र (9.6)
“संयमो खवो जयः।”
अर्थ: संयम ही वास्तविक विजय है।
भाव: संयम और आत्मनियंत्रण ही सबसे बड़ी जीत है।
5. जैन परम्परा (महावीर वचन)
“ण विज्जइ अण्णो जओ, अप्पा जइ जइ।”
अर्थ: कोई अन्य विजय नहीं, आत्मविजय ही सच्ची विजय है।
भाव: बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक विजय ही सर्वोपरि है।
निष्कर्ष:
जैन धर्म का स्पष्ट संदेश है—
अपने मन, इन्द्रियों और वासनाओं पर विजय प्राप्त करना ही सबसे बड़ी वीरता और सफलता है।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
जैन धर्म में वही “आत्मविजय” (Self-conquest) के रूप में और भी गहन रूप में प्रकट होता है। होता है।
बौद्ध धर्म में प्रमाण --
"अभि वीरान् जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — यह भाव बौद्ध धर्म में विशेष रूप से आत्मविजय (self-conquest), वीर्य (उत्साह/परिश्रम), और धैर्य के रूप में व्यक्त होता है। नीचे त्रिपिटक तथा पाली ग्रंथों से पाली (देवनागरी) लिपि सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. धम्मपद (पद 103)
“यो सहस्सं सहस्सेन संगामे मानुसे जये,
एकं च जयमत्तानं स वे संगामजुत्तमो।”
अर्थ: यदि कोई मनुष्य हजारों को युद्ध में जीत ले, और दूसरा स्वयं को जीत ले—
तो स्वयं को जीतने वाला ही सबसे बड़ा विजेता है।
🔸 भाव: आत्मविजय ही सर्वोच्च विजय है।
2. धम्मपद (पद- 160)
“अत्तानं दमनं सुखं।” (भावार्थ रूप)
अर्थ: अपने आप को वश में करना ही सुखद है।
भाव: आत्मसंयम ही वास्तविक सफलता और विजय है।
3. धम्मपद (पद 276)
“तुम्हेहि किच्चं आतप्पं, अक्खातारो तथागता।”
अर्थ: प्रयत्न (परिश्रम) तुम्हें स्वयं करना है, तथागत केवल मार्ग बताते हैं।
भाव:- स्वयं प्रयास करके ही विजय प्राप्त होती है।
4. सुत्तनिपात (पब्बज्जा सुत्त 3.2)
“वीरियेन दुक्खमच्छेति।”
अर्थ: उत्साह (वीर्य) से ही दुःख को पार किया जाता है।
भाव: साहस और परिश्रम से ही सफलता मिलती है।
5. गौतम बुद्ध के उपदेश
“अत्तदीपा भव, अत्तसरणा…”
अर्थ: स्वयं अपने दीपक बनो, अपने आश्रय बनो।
भाव: आत्मबल और आत्मनिर्भरता से ही विजय संभव है।
निष्कर्ष:
बौद्ध धर्म का स्पष्ट संदेश है—
स्वयं पर विजय प्राप्त करो, परिश्रम (वीर्य) करो, धैर्य रखो—यही सच्ची विजय है।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का जो वैदिक संदेश है—
बौद्ध धर्म में वही “आत्मविजय, वीर्य और पुरुषार्थ” के रूप में गहराई से प्रकट होता है।
यहूदी धर्म में प्रमाण --
“अभि वीरान्जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) यह भाव यहूदी धर्म में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। यहाँ courage (साहस), perseverance (धैर्य), faith (विश्वास) के साथ आगे बढ़ने का उपदेश है। नीचे Hebrew Bible / Tanakh से प्रमाण English (Roman) script में प्रस्तुत हैं:
1. Tanakh (Deuteronomy 31:6)
“Be strong and courageous. Do not fear or be in dread of them, for it is the Lord your God who goes with you. He will not leave you or forsake you.”
अर्थ: मजबूत और साहसी बनो, भयभीत मत हो। ईश्वर तुम्हारे साथ है और कभी तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।
भाव: साहस और विश्वास से ही विजय संभव है।
2. Tanakh (Joshua 1:9)
“Have I not commanded you? Be strong and courageous. Do not be frightened, and do not be dismayed, for the Lord your God is with you wherever you go.”
अर्थ: ईश्वर ने कहा—साहसी बनो, न डरें और न ही हतोत्साहित हों।
भाव: साहसपूर्वक आगे बढ़ने वाला ही विजयी होता है।
3. Tanakh (Psalm 27:14)
“Wait for the Lord; be strong, and let your heart take courage; wait for the Lord!”
अर्थ: ईश्वर की प्रतीक्षा करो, मजबूत बनो, और दिल में साहस रखो।
भाव: धैर्य और साहस से ही विजय मिलती है।
4. Tanakh (Isaiah 41:10)
"Fear not, for I am with you; be not dismayed, for I am your God; I will strengthen you, I will help you, I will uphold you with my righteous right hand."
हिंदी अर्थ:
“भय मत मानो, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ। हतोत्साहित मत हो, क्योंकि मैं तुम्हारा ईश्वर हूँ।
मैं तुम्हें शक्ति दूँगा, तुम्हारी मदद करूँगा, और अपने धर्मपरायण दाहिने हाथ से तुम्हें संभालूँगा।”
भावार्थ:
ईश्वर अपने अनुयायियों को साहस और शक्ति देने वाला है। जो डरते हैं, उन्हें भरोसा और साहस देना ही विजय का मार्ग है।
पारसी धर्म में प्रमाण --
“अभि वीरान् जयत्” (साहसपूर्वक आगे बढ़कर विजय प्राप्त करो) — यह भाव फारसी धर्म (पारसी/ज़ोराष्ट्रियन धर्म) में भी स्पष्ट रूप से मिलता है, जहाँ सत्य (Asha), धर्म, साहस और अच्छे कर्म (Good Thoughts, Good Words, Good Deeds) पर बल दिया गया है। नीचे अवेस्ता से प्रमाण प्रस्तुत हैं:
1. अवेस्ता (यस्ना 30.2)
“Listen with your ears to the highest truths… choose the path of righteousness.”
अर्थ: सत्य को सुनो और धर्म के मार्ग का चयन करो।
भाव: सही मार्ग पर साहसपूर्वक चलना ही विजय है।
2. अवेस्ता (यस्ना 34.15)
“May we be among those who make this world progressive… through truth and righteousness.”
अर्थ: हम उन लोगों में हों जो सत्य और धर्म से संसार को आगे बढ़ाते हैं।
भाव: साहसपूर्वक धर्म का पालन करने वाला ही सफल होता है।
3. अवेस्ता (यस्ना 43.2)
“Through good mind and righteous action, one attains strength.”
अर्थ: सद्बुद्धि और धर्मयुक्त कर्म से ही शक्ति प्राप्त होती है।
भाव: आत्मबल और सही कर्म से ही विजय मिलती है।
4. ज़ोराष्ट्रियन धर्म का मूल सिद्धांत
“Humata, Hukhta, Hvarshta”
(अच्छे विचार, अच्छे वचन, अच्छे कर्म)
अर्थ: जीवन में सद्विचार, सद्वचन और सद्कर्म अपनाओ।
भाव: यही आचरण मनुष्य को सफलता और विजय की ओर ले जाता है।
5. ज़रथुस्त्र (उपदेश)
“He who follows the path of truth (Asha) gains victory over falsehood.”
अर्थ: जो सत्य के मार्ग पर चलता है, वह असत्य पर विजय प्राप्त करता है।
भाव: सत्य और साहस से ही वास्तविक विजय होती है।
निष्कर्ष--:
फारसी (ज़ोराष्ट्रियन) धर्म का स्पष्ट संदेश है—
सत्य, धर्म, सद्कर्म और साहस के साथ आगे बढ़ो—विजय निश्चित है।
इस प्रकार “अभि वीरान् जयत्” का वैदिक संदेश—
फारसी धर्म में “Asha (सत्य) और सद्कर्म” के माध्यम से प्रकट होता है।
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Archana Singh
आप सभी को राम नवमी की ढेर सारी शुभकामनाएं !
🙏🏻🙏🏻💐💐
Mara Bachaaaaa
हम अहम थे ही नहीं
तभी तो वो हमे
भूलने की सोच रहे है,
जैसे
पतझड़ में पेड़ पत्तों को।
- Mara Bachaaaaa
aakanksha
प्रथम प्रेम ही सच्चा और गहरा होता है,
क्योंकि उसमें कोई छल-कपट नहीं होता है।
अनजाने में ही दिल किसी का हो जाता है,
और वही एहसास उम्र भर साथ रह जाता है।
पहली बार जो धड़कनों में नाम उतरता है,
वो याद बनकर हमेशा दिल में ठहरता है।
समय भले ही आगे बढ़ जाए बहुत दूर,
पर पहला प्रेम दिल से कभी नहीं उतरता है। ✨
mr swahit words official
रावणाची 'श्रीमंती' हवीये, पण रावण नको... रामाचा 'स्वभाव' हवाय, पण रामानं भोगलेला वनवास नको! 🚩🤔
Narendra Parmar
तुम्हारी छोटी सी बहसबाजी ने
मेरा घर वीरान कर दिया !
अच्छा खासा मकान था मेरा
तुमने उसे खंडहर में तब्दील कर दिया ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
वात्सल्य
દિલાસો દેનારને આજે દિલાસાની નોબત આવી.!
પ્યાર ક્યાં સુધી પામરનું પતન ચાહે છે !!
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
वात्सल्य
સવારથી શોધું છું,તને !!
હજુ પણ તું ઘેર નથી આવ્યો.
હૂઁ ક્યાં ક્યાં શોધું તને!!
મારું વિશ્વ તું છે અને તારું વિશ્વ અનંત છે.
- वात्सल्य
Jitendra Singh
बेरहम है दुनिया
और चाहती है शांति
मतलबी इतनी है कि
बेमतलब किसी को न जानती।
जो हो रहा साथ अपने
क्या यह पहले से ही है लिखा
ऐसा ही अगर है
तो उसने सब फ़िज़ूल क्यों लिखा।
सूज गई हैं आँखें
ज़रा देखो तो आईना
सवेरा होकर गुजर गया
पर नींद आई ना।
सूरज निकलते देखा है
देखा है डूबते
जो संग इसी के चल दिए
वो भी क्या खूब थे।
वात्सल्य
મારે કશું જ નહીં જોઈએ.
ફક્ત તું, તું અને તું જ જોઈએ.
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
SUNIL ANJARIA
પેટ્રોલ બરાબર મળે છે હોં! હવે જાળવીને વાપરવાનું તો નીમ લઈએ. નજીક ચાલીને જઈ શકાય, એક કે બે વ્યક્તિ જતી હોય તો કાર ને બદલે સ્કૂટર લઈ શકાય અને સિગ્નલ પર વધુ વાર હોય તો એન્જિન બંધ કરવું. એવરેજ પણ ચેક કરાવતા રહેવી. બિનજરૂરી વાહન લઈ ખાલી ફરવાનું ટાળવું.
Piyu soul
💫तुम्हारी तरफ खिंचता दिल 💫
तुम्हारे सामने आते ही,
ये दिल थोड़ा बेवकूफ सा हो जाता है…
जो बातें कभी सोच भी नहीं सकता,
वो सब तुम्हारे सामने कहने को मन करता है।
तुम पास आओ तो दूरी का होश नहीं रहता,
और दूर जाओ तो दिल मानता ही नहीं।
कभी तुम्हें यूँ ही छेड़ने का मन करता है,
कभी बस चुप रहकर तुम्हें देखने का…
तुम्हारी आँखों में कुछ ऐसा है,
जो हर बार मुझे वहीं रोक लेता है।
और सच कहूँ…
ये जो हल्की-सी शरारत है हमारे बीच,
यही तो दिल को सबसे ज्यादा पसंद है।
ना ज्यादा करीब, ना ज्यादा दूर,
बस उतना ही… जितना दिल संभाल सके।
पर फिर भी…
हर बार दिल थोड़ा और तुम्हारी तरफ खिंच ही जाता है। 💛
by piyu 7soul
Soni shakya
अभी सांझ ढले तू मेरे दिल में आ जाना..
कभी चांद खिले तु मेरे दिल में आ जाना..
और आना इस तरह कि-- फिर ना जाना..
- Soni shakya
Nilesh Rajput
“How can you still love her after she left you?”
cause I love her the way I love her.”
Kiran
नहीं जानूँ मैं,
कहाँ है तू,
कैसा है तू,
कहाँ रहता है,
क्या करता है…
बिल्कुल अजनबी है तू,
फिर भी न जाने क्यों
सोचती हूँ तेरे बारे में इतना…
क्यों देखती हूँ तेरे ख्वाब,
क्यों तेरे ख्यालों में
खुद से ही मुकर जाती हूँ…
अजीब सा रिश्ता है ये—
ना तेरा कोई नाम,
ना मेरा कोई हक़…
फिर भी दिल
तुझे अपना मान बैठा है…🌸
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
Rinal Patel
ત્યાગ, સમર્પણ ને વચનપાલનનું એકમાત્ર સ્વરૂપે એટલે ભગવાન
"શ્રી રામ"
અંતરની દ્રષ્ટિએ.
- Rinall.
Kiran
जो कल तक रटते रहते थे नाम मेरा ,
वह आज दिखाई भी नहीं देते।
Jyoti Gupta
#RamNavami #JaiShriRam #AnandDham #FestivalVibes #BhaktiVideo #ViralReels #TrendingNow #InstaReels #YouTubeShorts #SpiritualVibes #IndianFestival #Devotional #ViralIndia #ShortsViral #AIArt #BhaktiStatus #RamBhakti #TrendingVideo #FestiveMood #HinduCulture
A R
ये जो तुम दिल के साफ हो ना देख लेना दिमाग वालों से हार जाओगे
- SAYRI K I N G
Good night
A R
Now, only unfulfilled dreams reside in these eyes; these eyes will do nothing but wait for his return—for a lifetime... until the end of time
- SAYRI K I N G
A R
तेरे हुस्न के हम क़ायल थे, कहने को कायर थे,
इसी लिए, एक ख़त में लिख कर दिया तुझे दिल का हाल, और तुझे लगा हम शायर थे।
Imaran
बिना कहे समझ जाती है
हर बात पर साथ दे जाती है,
कुछ खास है उसमें
मुझे अपनेपन का अहसास कराती है।
💞imran 💞
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/179aYdDVcc/
Amir Ali Daredia
માતૃભારતીના વાંચકોને રામનવમીની હાર્દિક શુભ કામનાઓ.અહીં એક રામ ભજન ની લિંક આપી છે જરુરથી સાંભળશો.https://youtu.be/NTCdK7Qb_1E?si=z5TCthjO7tThig7L
p
milte hai guys kuch time baad bye 🙋♀️
ek archana arpan tane
પાંચ આંગળીઓ આપણી એકસરખી નથી હોતી તો આપણે કેમ અપેક્ષા રાખીએ કે દરેક માણસ આપણી અપેક્ષા પ્રમાણે વર્તન કરે.
- ek archana arpan tane
p
jo ajj hai tumhare sath ,
kall ko bhi hoga ,
tumhare dukho me sukho me ,
dhal ban ke khrha hoga,
Papa se asha dost is dunia me nhi hoga☺☺
- p
Bindiya
તારી યાદમાં
ગઝલ મારી અધુરી રહી ગઈ તારી યાદમાં
કલ્પના ની પાંખે ઉડતી રહી તારી યાદમાં.
પાંગરિયું પુષ્પ તારી પ્રીત નું તારી યાદમાં,
સંવેદનાનો છોડ ઊગી નીકળ્યો તારી યાદમાં.
તારા વિનાની ડંખે છે એકલતા મારી આંખોમાં,
ભીની પાંપણ સારે છેઆંસુઓ તારી યાદમાં.
સચવાયું નામ તારું હૃદયના ધબકારમાં,
ધડકે છે હૃદય મારું સતત તારી યાદમાં.
દિવસો વિતાવુ છું હું તારા આવવાની રાહમા,
વિરહની વેદના ને સાચવી છે તારી યાદમાં.
બિંદિયા જાની
'તેજબિંદુ'
Piyu soul
🌈✨ आज एक नई कहानी ने जन्म लिया है… ✨🌈
कभी आसमान को ध्यान से देखा है?
कभी सोचा है… अगर बादल रंग चुरा लें तो दुनिया कैसी दिखेगी?
मेरी नई कहानी
“रंग चुराने वाले बादल”
अब Matrubharti पर LIVE हो चुकी है 💖
ये सिर्फ एक कहानी नहीं है…
ये एक एहसास है…
एक ऐसी दुनिया जहाँ रंगों के पीछे छुपा है एक राज… 🌫️🎨
अगर आपको रहस्य, इमोशन और थोड़ी सी जादुई दुनिया पसंद है…
तो ये कहानी आपके लिए ही है ✨
👉 अभी पढ़ें और बताएं आपको कैसी लगी
👉 आपका एक feedback मेरे लिए बहुत मायने रखता है 💬
क्या आप तैयार हैं उस दुनिया में जाने के लिए जहाँ रंग भी सुरक्षित नहीं हैं…? 😮
इसको पढ़े अच्छे रिव्यू दे ओर कॉमेंट में जरूर बताएं कैसे लगी आप को ये कहानी और हा फोलो करना ना भूलें।
– Piyu7soul ✍️
#NewStory #Matrubharti #WriterLife #HindiStory #MagicalStory#kids story
A R
तुम डरते हो सबको खोने से ।
तुम खो गए हो किसी को ध्यान भी है ।।
A R
मत मिला कर हमसे, अदाकार की तरह.
@sayri king
चेहरे पढ़ लेते हैं, हम अखबार की तरह...
Arun V Deshpande
#श्रीरामनवमी-काव्यपुष्प💐
Dr. Damyanti H. Bhatt
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर हार्दिक अभिनंदन। 🌹🌹🙏🌹🌹
Dr. Damyanti H. Bhatt
माॅ महागौर्यै नमः।🌹🌹🙏🌹🌹
Bindiya
चलो राम बने
चलो हम भी राम बने! क्या हम राम बन सकते हैं? हां क्यों नहीं? राम बनने के लिए हमें राम के आदर्श को जीवन में अपनाने चाहिए।
ऐसे तो हम सब भगवान श्री राम के बारे में बहोत कुछ जानते हैं। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। मानव अवतार में उनके आदर्श ही उनके व्यक्तित्व की पहचान है।
भगवान श्री राम की मिशाल हमे आज भी दी जाती है। श्री राम का जीवन हमे संकट में धैर्य रखना वाणी में संयम और आचरण में शुद्धता के लिए प्रेरित करता है।
श्री राम का आदर्श हमें संतुलन रखना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ परिवार और मूल्यों से जुड़े रहना सीखाता है।
श्री राम की सत्य और धर्म निष्ठा आज की युवा पेढी के लिए ईमानदारी और नैतिकता का प्रतीक है। भगवान श्री राम सदाचारी, न्याय प्रिय, साहसी जैसे गुणों का आदर्श उदाहरण है।
हम सभी को शांतिपूर्ण जीवन के लिए राम बनने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।
इस कलयुग में राम बनना आसान नहीं है।
उनके आदर्शों पर चलना आसान नहीं है।
फिर भी चलो हम कोशिश करे राम बनने की,
हमारे ये द्रढ निश्चय को तोड़ना आसान नहीं है।
बिंदिया जानी
24/3 /26
Adv Arun Mishra
कभी कभी इन्सान ऐसी स्थिति में फंस जाता है , जहां उसे निर्णय लेने में बहुत ही दिक्कत होती एक तरफ उसका प्यार ओर दूसरी तरफ परिवार तब इंसान को क्या करना चाहिए प्यार को चुनना चहिए या परिवार कितने लोगों के पास यह स्थिति आई है एक तरफ लड़के के ऊपर परिवार की भी जिम्मेदारी है ,एक तरफ उसका प्यार को छोड़ना पड़ा दूसरी जगह सादी करनी पड़े तो लड़का उस समय किसे चुने क्या करे 🙏🙏🙏🙏
Piyu soul
“अगर आपको मजबूरी में शादी करनी पड़े…
तो आप क्या करेंगे? 🤔”
कॉमेंट करके जरूर बताएं और भार्गवी ने क्या किया वो जानने के लिए जरूर पढ़ें मेरी सीरीज झांसी: सौदा,कर्ज और बदला
।by piyu 7soul
Ajit
મહોબ્બતમાં પછાડેલા માથા એમને નાટક લાગ્યા......
મારા આંસુ એમને ક્યાંથી સાચા લાગે......
જિંદગી ની "યાદ"
kajal jha
मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मुझे Matrubharti से Golden Badge प्राप्त हुआ है ❤️
यह मेरे लिए सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि मेरी लेखन यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मैं अपने सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद करती हूँ, जिनके प्यार और समर्थन से यह संभव हो पाया 🙏
#matrubharti #achievement #writing #storytelling
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मुझे मातृभारती पर फोलो करें
Anup Gajare
"छह साल का बच्चा"
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वास्तविक हकीकत क्या है
कि सब बेखबर है
वह डरे हुए
खुद में ही सहमे पड़े रहते हैं।
डर संक्रामक नहीं होता
उसके वजूद का भी कोई मतलब नहीं
भविष्य में पिरोया गए
बीज उगने के चांस कम नहीं होते
पर गर गर्मी ज्यादा हो। या उस साल बारिश न हो तो?
भय के ये बीज दिमाग के
अमिगडाला की रेत में
ठीक से पनप नहीं पाते।
क्या बात ये जानता है
हर कोई गोया।
सबकुछ फिर से बंद हो जाने की
सिहरन ही रोंगटे खड़ा कर रही है
भीड़ अनजान है
अनजानता की गुफाओं में ही
अजंता के लेनिया उकेरी जाती है।
अंधकार अब नहीं खौफ देता
उसका इलाज अब एक बटन है
पर आग से जंगल आज भी तो
जलते ही है न गोया।
असुरक्षा
सबने देखी है
लगभग छह साल पहले को याद करो
हां, गोया वही तो भीतर बसे इस अंधकार ने
जन्म लिया था,
वह कारागृह
जिसमें हम दबे पड़े थे
जहां घर की भीड़ इकठ्ठा थी
झगड़े हो रहे थे।
तो कुछ भीड़ का हिस्सा
सड़क से होते हुए
अपने घर जाने के लिए
लालसाइयत था
वहां जाकर बस अन्न की
तलाश जैसे खत्म होनेवाली थी।
वे लोग अपनी गुफाओं में
लौट रहे थे
रोटियों की चोरी आम बात हो गई थी।
गोया डर वही पैदा हुआ
तोतली जुबान से
सबके सीने में गड्ढा
बनाते हुए वही तो इस
रोग की पहली सुरंग खोदी गई थी।
किसी रेखा के
नीचे आने का इंतज़ार
यही डर की पहली मिट्टी थी।
उसके बाद
हर मनुष्य शिकार करने लगा
लेकिन अपने अवजारों पर
उसका यकीन कम हो गया।
अब उसे पता नहीं कि
इस रेखा के नीचे
जो भूख रहती है
उससे कैसे लड़ना चाहिए।
भीख से भूख
का सफर
यही डर का हिस्सा है।
वह छह साल का बच्चा
अब भी वहीं खड़ा है
रेखा के इस पार
या शायद उस पार—
उसे खुद भी नहीं पता।
उसकी आँखों में
कोई दर्शन नहीं
कोई अमिगडाला नहीं
सिर्फ एक खाली कटोरा है
जिसमें वह
आसमान भरने की कोशिश करता है।
वह पूछता नहीं—
क्योंकि सवाल पूछने के लिए
शब्द चाहिए होते हैं
और उसके पास
सिर्फ आवाज़ है
जो गले में अटक जाती है।
भीड़ उसे देखती है
पर पहचानती नहीं
जैसे वह
भीड़ का हिस्सा नहीं
बल्कि उसका साया हो।
वह खेलना चाहता है—
पर खेल अब
शिकार में बदल चुका है
जहाँ खिलौने नहीं
रोटियाँ छुपाई जाती हैं।
उसकी हँसी
किसी पुरानी गुफा में
उकेरी गई अधूरी आकृति जैसी है
जिसे कोई इतिहासकार
कभी पढ़ नहीं पाएगा।
और वह डर—
जिसे तुम कहते हो
कि संक्रामक नहीं होता—
वह बच्चे के भीतर
धीरे-धीरे
भूख की भाषा सीख रहा है।
अब वह डरता नहीं
वह बस देखता है—
कि कैसे
एक आदमी दूसरे आदमी को
रोटी से मापता है
और इंसान
रेखाओं में टूट जाता है।
उसके छोटे हाथ
अब फैलते नहीं
सिमटते हैं—
जैसे दुनिया को पकड़ने की जगह
वह खुद को बचा रहा हो।
और एक दिन—
बिना किसी शोर के
बिना किसी घोषणा के—
वह बच्चा
भीड़ में शामिल हो जाएगा।
वही भीड़
जो अनजान है
और अनजान ही रहना चाहती है।
फिर कोई और
छह साल का बच्चा
उसी जगह खड़ा होगा
एक नए कटोरे के साथ
और आसमान फिर से
थोड़ा छोटा हो जाएगा।
अब उसके पास
गैस सिलेंडर या
शायद
खाना बनाने के लिए तेल ही बचा न हो
और उसके पापा की
गाड़ी में पेट्रोल होने के चांस बहुत कम है।
यही डर है
है न?
जो आहिस्ता-आहिस्ता
हकीकत में तब्दील हो रहा है।
______________________________________________
Sonam Brijwasi
“तुझे चाहा है ऐसे जैसे हक़ हो मेरा,
कोई और देखे तुझे ये भी मंज़ूर नहीं मेरा…
मोहब्बत है तुझसे, पर थोड़ी सी ज़िद भी है,
तू सिर्फ मेरी है—ये दिल का फ़ैसला भी है…”
Falguni Dost
દોસ્ત! ખુદમાં વસતા રાવણને હરાવી રામ ને જીવંત કરો ત્યારે ખરી રામનવમી.
રામનવમી પર્વની માતૃભારતી પરિવારના દરેક સદસ્યને ખૂબ ખૂબ શુભકામના 🙏🏻
jighnasa solanki
મર્યાદા પુરુષોત્તમ પ્રભુ શ્રીરામના જન્મોત્સવની આપ સૌને હાર્દિક શુભકામનાઓ 💐🙏
🙏શ્રીરામ જય રામ જય જય રામ🙏
🙏🚩જય શ્રીરામ 🚩🙏
🚩સનાતન ધર્મકી જય 🚩
Vrishali Gotkhindikar
राम जन्मला ग सखी
Ajit
સપના સજાવ્યા પણ તે ને તોડ્યા પણ તે માત્ર મારી તો હા માં હા જ હતી....
જિંદગી ની યાદ
😭😭😭🙏🙏🙏
Abha Dave
https://youtube.com/shorts/QgBHJO62KGg?si=eK1S4FSZWJZuli1C
Shailesh Joshi
1M સુધી પહોંચાડવા બદલ...
આભાર સહ
Matrubharti ની પૂરી ટીમ, અને
સૌ વાચક મિત્રોને મારા પ્રેમ અને લાગણીભર્યા, દિલથી નમસ્કાર🙏
Shailesh Joshi
લગ્ન કરવા માટે ખાલી યોગ્ય ઉંમર હોવી એ પૂરતુ નથી, પરંતુ લગ્ન પછીના જીવનની તમામ પ્રકારની સારી નરસી બાબતોના પૂરતા જ્ઞાનની સાથે-સાથે, ભવિષ્યમાં આવવાવાળી દરેક પરિસ્થિતિ સામે, સાથે મળીને લડવાની ક્ષમતા, અને છતાંય જો ન પહોંડી વળાય, તો એવી પરિસ્થિતિઓને ખમી લેવાની તૈયારી હોવી, અતિ થી પણ અતિ આવશ્યક હોય છે, નહીં તો નહીં કે લગ્નગ્રંથિથી જોડાયેલ બે વ્યક્તિ, પરંતુ એની સાથે-સાથે એ બંનેના પરિવારને પણ દુ:ખી થવાનો વારો આવતો હોય છે.
- Shailesh Joshi
Mara Bachaaaaa
उलझन में है वो
सच का हाथ थामे
या
सपनों की दुनिया का,
हमारी भूल उन्हें
इस सोच तक ले गई।
- Mara Bachaaaaa
Dada Bhagwan
Jai Shree Ram
#lordrama #ramnavmi #ramnavmi #jaishriram #DadaBhagwanFoundation
Imaran
बढ़ती उम्र में ये दिल न जाने क्यों जवान हो रहा है,
पहले था जिद्दी मिज़ाज, अब ये आसान हो रहा है..
जब थी उम्र बहकने की, तो लगा नहीं किसी से ये,
अब सम्भलने की उम्र में ये दिल शैतान हो रहा है
❤️imran ❤️
Vishakha Mothiya
રામ નવમીની સૌને શુભકામનાઓ 🚩🏹
રામ - આ બે અક્ષરના નામમાં જાણે સમગ્ર જગત સમાઈ ગયું હોય એવું લાગે.
રામ એટલે મર્યાદા અને સંયમનો પર્યાય.
અખૂટ શક્તિ પણ સંયમ ભારોભાર.
મુખ પર છલકાતું મૌન સ્મિત.
આદર્શ રાજાનું ઉત્તમ ઉદાહરણ.
જ્યાં છળ કપટનું નામોનિશાન નહીં.
જેનું યુદ્ધ પણ નિયમોનુસાર આદર્શ હતું.
*"ચૌદ વર્ષ, વન પણ જાણે વૈકુંઠ બની ગયું હતું."*
પ્રકૃતિના દરેક જીવો તેનો પરિવાર બની ગયા હતા.
- વિશાખા મોઠિયા
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
શબ્દો પાસે અર્થ જરૂર હોય છે પણ ,
અર્થઘટન તો મન પાસે રહેલા વિચારો થી જ થાય છે!
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
p
kuch log mujhe msg kr rhe hai mat kro
mere bare me jan ne hai
Mai yaha bhi bta skti hu
name preeti
student hu
middle class family
Papa mere ka business hai
ab msg na ho😀
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