Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Jyoti Gupta

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Ghanshyam Patel

वही रहना सीखिये ______ जहाँ तुम्हारी उपस्थिति मायने रखती हो ।

Deepak Bundela Arymoulik

तेरी यादें तुझसे मिलने को मजबूर करती हैं... I मेरी हसरते देहलीज पर तेरी रोज मरती हैं... II

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Std Maurya

​"उगता हुआ सितारा हूँ, बुराइयाँ तो होंगी; मशहूर थोड़ी हूँ जनाब, जो तालियों की शोर होंगी।" - Std Maurya

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Parmar Mayur

शहर की एक होटल में न्यूज चैनल पर देश-के बजट पर तू-तू मैं-मैं हो रही थी, सब देखें रहे थे। इसी समय पर कुछ भूखे बच्चे कुछ खाना मिल जाए, उस आशा से बहार खड़े खड़े देख रहे थे ।

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास ख़ास कोई मेरा पूछे तो कहना ख़ास नहीं हूँ l किसी भी जवान दिल की आश नहीं हूँ ll लोगों को दिखाने को नज़दीक आया था l जितना दिखता हूँ उतना भी पास नहीं हूँ ll जरा सी बात रूठ के जाने की बातों से l गभरा के रुकने जाने वाली साँस नहीं हूँ ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

S Sinha

" If you don't read the newspaper you are uninformed , If you read the newspaper you are misinformed. " Mark Twain

Meghna Sanghvi

ઉઠીને તરત તને યાદ કરવો, મારા જીવનનો એક ક્રમ બની ગયો છે. કદાચ એવું બને કે, તારી યાદ વગર મારી સવાર જ ન પડે. હું ભલે દુનિયાના કોઈપણ ખૂણે જઈ આવું પણ તારી જગ્યા મારા હ્રદયમાં ખુબ ખાસ છે 😊😊😊

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/__bx03aDXCM?si=6FiN_XaYDHQhgb6N

महेश रौतेला

ध्रुव ने तपस्या की और ध्रुव पद पाया, सिद्धार्थ ने तप किया ज्ञान पा मोक्ष पा लिया, हम आजीविका कमाते-कमाते तप गये, प्यार को पकड़ न सके समता पर झगड़ न सके, शुद्ध समयवादी होकर समय पर लटक लिये। *** महेश रौतेला

Nadwika

उन्माद....... जीवन एक सत्य है, और अनुराग-विरह... उसकी सत्यता। ​किसी के मोह में पड़कर मौन हो जाना, मुझे एक निशीथ रात्रि में प्रकाश की चाह रखने वाले किसी उन्माद से कम नहीं लगता। - नद्विका

Sanket Gawande

मनचला सा दिल है मेरा, हवाओं से बात करता... मनचला सा मन है मेरा, हर ख़्वाब में रात करता... मनचली सी क़िस्मत मेरी, कभी नज़्म कभी शोर... मनचली सी हैसियत मेरी, आज कहीं कल कहीं और.... मनचला सा मुसाफ़िर हूँ... नक़्शों से बे-ख़बर.... मनचला सा राहगीर हूँ....हर मोड़ पे बे-सफ़र.... मनचली है दुनिया मेरी, रंग बदलती हर घड़ी..... मनचली सी आदत मेरी, टूटना फिर से जुड़ पड़ी..... मनचला सा हाल है मेरा, सवालों में गुमशुदा..... मनचला सा दिल है मेरा, ख़ुद से ही हमक़दा.... मन चले तो क्या गिला हो, ये तो दिल की सरकशी है.... मन न चले तो समझो अब, नई दुनिया की बुनियाद रखी है... -संकेत गावंडे

aakanksha

ख़ामोशी की स्याही में लिखी जाती हैं बातें अधूरी, हर दर्द को पन्नों पर सजाया जाता है, पर अपनी आवाज़ कभी न उभरती… हर शब्द में उम्मीद, हर चुप्पी में शक्ति… और हर नीले काग़ज़ के पीछे, छिपा है एक सपना, जो एक दिन खुद को पन्नों में नहीं, ज़िंदगी में लिख देगा। 💙✍️

ziya

कभी सुबह यादे आते हो तो कभी शाम को यादे आते हो आईने मे खुद को देखु तो तुम यादे आते हो

Bhavna Bhatt

ચેહર મા નો માંડવો

Vishakha Mothiya

Bhairav Battalion 🪖 | India's New Light Commando Force આ વખતના ૭૭ મા પ્રજાસત્તાક દિનની પરેડમાં કર્તવ્ય પથ પર સિંહ ગર્જના કરતી ભારતીય સેનાની એક નવી રેજિમેન્ટ કૂચ કરતી જોવા મળી હતી.આ નવી રેજિમેન્ટનું જેવું નામ છે એવું જ કાર્ય છે. તો ચાલો જાણીએ, ભૈરવ બટાલિયન વિશે; સાથે જાણીશું તેની રચના, ઉદેશ્ય, રોલ - મિશન વગેરે. વાંચવા માટે અહીં ક્લિક કરો - https://vishakhainfo.wordpress.com/2026/02/01/bhairav-battalion/ શેર કરજો 🙏 જય હિન્દ, જય ભારત🫡🇮🇳 #bhairavbattalion #indianarmy #blogs #informative #generalknowledge #mustread

Rajiv Jangid

विशेष अवसर पर, अक्सर, हम मिलते हैं। बातें भी होती हैं, पर– सीमाओं के भीतर। अगर यह झूठ है, तो तुम आ सकती हो अपने सबूतों के साथ। मगर मुझे पता है, मुझे हराने तुम कभी नहीं आओगी।

Atul Bhatti

કરી મેં વાત ભાવથી,ભળી છે બે વાત દાવથી, હવા પ્રસરી છે આખરે,આ શતરંજના દાવથી. ​ જઈને પોતાના પાસે હું હવે શું સાબિત કરું? તજી દીધો છે મેં માહોલ,લાગણીના અભાવથી. ​ પુરાવા મળ્યા નથી હજુ કોઈ જ મારી વાતના, લઈ લીધા છે જામીન મેં,સમયના પ્રભાવથી. ​મજા કંઈક છે અલગ અતુલ,હવે મૌન રહેવામાં, રુજાતા નથી જખમો ક્યાંય,આ હૃદયના ભાવથી. -Atul bhatti

Meeta

પથ્થર જેવી પાથ પર પણ સ્મિત રાખી ચાલ્યા, લીસી લાગણીના સ્પર્શે, હૃદય હારી ગયા.... - Meeta

Jayvirsinh Sarvaiya

ગઢ ગયા, ગરાસ ગયા, ગયા અમારા ગામ, ગર્વ લેતા અમે રહી ગયા, ને ૭/૧૨માં નો રાખ્યા નામ.

Soni shakya

एक समंदर उफनता रहता है मेरे अंदर.. बाहर एक शांत नदी का किनारा बन जाती हुं.. टुटने का हक भी छीन लिया मैंने खुद से.. सब के लिए मैं हमेशा बस सहारा बन जाती हुं.. - Soni shakya

Shefali

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Jyoti Gupta

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Chaitanya Joshi

સંધ્યા સમે કિનારા સમીપ આવો દરિયાદેવ તમે. ભરતી પૂનમની આજે હવે લાવો દરિયાદેવ તમે. આથમતો સૂરજ પણ કિરણો થકી સ્પર્શતો તમને આલિંગન એનું પણ આજે સ્વીકારો દરિયાદેવ તમે. મળવા ધરિત્રિને રખે પૂર્ણિમાએ આવ્યા હશે તમે, અવનીવાસીને મળીને હરખાવો દરિયાદેવ તમે. નયનરમ્ય નીર તમારાં સંધ્યામાં કલગી ઉમેરનારાં, રખેને આથમતા સૂરને પણ વધાવો દરિયાદેવ તમે. જોઈને ભરતી તમારી ઉરમાં પણ ભરતી થતી કેટલી! સરખે સરખાં માનવહૈયાંને મળાવો દરિયાદેવ તમે. વખાણે સૌંદર્ય તમારું કિનારે ટહેલતાં માનવસહુ આજે. નૈકટ્ય ધરા- સમદરનું શકે મનાવો દરિયાદેવ તમે. - ચૈતન્ય જોષી. ' દીપક " પોરબંદર. - Chaitanya Joshi

Chaitanya Joshi

સંધ્યા સમે કિનારા સમીપ આવો દરિયાદેવ તમે. ભરતી પૂનમની આજે હવે લાવો દરિયાદેવ તમે. આથમતો સૂરજ પણ કિરણો થકી સ્પર્શતો તમને આલિંગન એનું પણ આજે સ્વીકારો દરિયાદેવ તમે. મળવા ધરિત્રિને રખે પૂર્ણિમાએ આવ્યા હશે તમે, અવનીવાસીને મળીને હરખાવો દરિયાદેવ તમે. નયનરમ્ય નીર તમારાં સંધ્યામાં કલગી ઉમેરનારાં, રખેને આથમતા સૂરને પણ વધાવો દરિયાદેવ તમે. જોઈને ભરતી તમારી ઉરમાં પણ ભરતી થતી કેટલી! સરખે સરખાં માનવહૈયાંને મળાવો દરિયાદેવ તમે. વખાણે સૌંદર્ય તમારું કિનારે ટહેલતાં માનવસહુ આજે. નૈકટ્ય ધરા- સમદરનું શકે મનાવો દરિયાદેવ તમે. - ચૈતન્ય જોષી. ' દીપક " પોરબંદર.

Prabhjot Singh Nagra

इलेक्ट्रॉन–नाभिक स्थिरता सिद्धांत (सूत्रों के आधार पर पूर्ण व्याख्या) 1. प्रस्तावना परमाणु के अंदर नाभिक (nucleus) धनात्मक आवेश (+Z) रखता है और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश (−e) रखते हैं। भौतिकी का मुख्य प्रश्न यह है कि इतने अधिक आकर्षण बल के बावजूद इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर क्यों नहीं जाता? इस सिद्धांत में इसका उत्तर केवल सूत्रों (सूत्‍रों) के माध्यम से दिया गया है। 2. नाभिक–इलेक्ट्रॉन के बीच बल (Fi) नाभिक द्वारा i-th इलेक्ट्रॉन पर लगाया गया आकर्षण बल Coulomb नियम से दिया जाता है: जहाँ: Fi = i-th इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला आकर्षण बल K = Coulomb स्थिरांक Z = नाभिक का आवेश (protons की संख्या) e = इलेक्ट्रॉन का आवेश rᵢ = i-th इलेक्ट्रॉन की नाभिक से दूरी 👉 यह बल हमेशा नाभिक की ओर होता है। 3. दूरी का प्रभाव (rᵢ का रोल) सूत्र से स्पष्ट है: अर्थात: यदि rᵢ कम होता है → Fi बहुत अधिक बढ़ जाता है यदि rᵢ अधिक होता है → Fi कम हो जाता है यदि केवल यही बल कार्य करता, तो इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जाना चाहिए था। 4. इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बल (Fᵢⱼ) परमाणु में एक से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन दूसरे इलेक्ट्रॉन को प्रतिकर्षित करता है: जहाँ: Fᵢⱼ = i-th और j-th इलेक्ट्रॉन के बीच प्रतिकर्षण बल rᵢⱼ = दोनों इलेक्ट्रॉनों के बीच दूरी j ≠ i = इलेक्ट्रॉन स्वयं अपने ऊपर बल नहीं लगाता 👉 यह बल नाभिक से बाहर की दिशा में कार्य करता है। 5. बलों का संतुलन (Force Balance) i-th इलेक्ट्रॉन पर दो मुख्य प्रभाव होते हैं: (A) अंदर की ओर बल (B) बाहर की ओर प्रभाव इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण इलेक्ट्रॉन की गति से उत्पन्न प्रभाव जब: तब इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दूरी (rᵢ) पर स्थिर हो जाता है। 6. इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरता? यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बहुत पास जाए: rᵢ बहुत कम हो जाता है Fi अत्यधिक बढ़ जाता है ऊर्जा न्यूनतम से कम होने लगती है (जो संभव नहीं) इसलिए प्रकृति एक न्यूनतम दूरी बनाए रखती है जहाँ बल संतुलित रहते हैं। 7. सिद्धांत का निष्कर्ष इस सिद्धांत के अनुसार: नाभिक इलेक्ट्रॉन को Fi बल से अपनी ओर खींचता है। इलेक्ट्रॉन आपस में Fᵢⱼ बल से एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं। दूरी घटने पर आकर्षण बढ़ता है, पर बाहर की ओर प्रभाव भी बढ़ता है। एक विशेष दूरी पर ये सभी प्रभाव संतुलित हो जाते हैं। 👉 इसी संतुलन के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरता और परमाणु स्थिर रहता है। 8. ऊर्जा की दृष्टि से व्याख्या (Energy Point of View) इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा दो भागों से मिलकर बनती है: (A) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच स्थितिज ऊर्जा: ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि यह आकर्षण बल की ऊर्जा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, स्थितिज ऊर्जा अधिक ऋणात्मक होती जाती है। (B) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) इलेक्ट्रॉन की गति के कारण उसमें गतिज ऊर्जा होती है: जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास जाता है, उसकी गति बढ़ती है और गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है।

Pallav Sanyal

कविता : “स्वार्थ में भी प्रेम हैं ” मैं मानता हूँ, दुनिया में कुछ भी निःस्वार्थ नहीं, हर मुस्कान के पीछे भी एक ख्वाहिश कहीं छिपी रही। तुम्हें चाहना भी शायद मेरी आदत बन गई, क्योंकि तुम्हारे साथ रहकर ही मेरी दुनिया सज गई। मैं कहूँ “मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ”, तो सच ये है — मैं खुद को तुममें खोजता हूँ। तुम्हारी हँसी से मेरा दिल सुकून पाता है, तुम्हारे आँचल में ही मैं अपना घर बसाता हूँ। मैं तुम्हें चाहता हूँ, क्योंकि तुम मुझे अच्छा लगाते हो, तुम्हारे बिना मेरे दिन अधूरे रह जाते हो। शायद ये प्यार भी एक मीठा सा स्वार्थ है, जिसमें मैं खुद को हर रोज़ बचा ले जाता हूँ। फिर भी, इस स्वार्थ में जो अपनापन है, वही तो प्यार की सबसे खूबसूरत पहचान है। अगर तुम्हारे साथ रहकर मैं मुस्कुरा लूँ, तो यही मेरा सबसे सच्चा इम्तिहान है। पल्लव सान्याल

Pallav Sanyal

कविता : “स्वार्थ में भी प्रेम हैं ” मैं मानता हूँ, दुनिया में कुछ भी निःस्वार्थ नहीं, हर मुस्कान के पीछे भी एक ख्वाहिश कहीं छिपी रही। तुम्हें चाहना भी शायद मेरी आदत बन गई, क्योंकि तुम्हारे साथ रहकर ही मेरी दुनिया सज गई। मैं कहूँ “मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ”, तो सच ये है — मैं खुद को तुममें खोजता हूँ। तुम्हारी हँसी से मेरा दिल सुकून पाता है, तुम्हारे आँचल में ही मैं अपना घर बसाता हूँ। मैं तुम्हें चाहता हूँ, क्योंकि तुम मुझे अच्छा लगाते हो, तुम्हारे बिना मेरे दिन अधूरे रह जाते हो। शायद ये प्यार भी एक मीठा सा स्वार्थ है, जिसमें मैं खुद को हर रोज़ बचा ले जाता हूँ। फिर भी, इस स्वार्थ में जो अपनापन है, वही तो प्यार की सबसे खूबसूरत पहचान है। अगर तुम्हारे साथ रहकर मैं मुस्कुरा लूँ, तो यही मेरा सबसे सच्चा इम्तिहान है। पल्लव सान्याल

Pallav Sanyal

कविता: तुम होती "काश तुम होती, मुझे समझ पाती, मेरी खामोशी को पढ़ लेती। काश तुम होती, मुझसे कहती, दिल की बातों को नजर से सुनती। मेरे बारे में थोड़ा जान लेती, मेरी पीड़ा को पहचान लेती। तुम तो समय हो, बहते हुए मिले , तुम्हें क्या फर्क पड़ता है, रुके या चले। मैं तुम्हारे पीछे दौड़ रहा हूँ, हर दिन खुद को भुला रहा हूँ। अगर कभी तुम मेरे पीछे आती, तो मेरी थकान मिट जाती। यही है भाग-दौड़ का जीवन, हर चेहरे के पीछे छिपा है एक सावन। भीड़ में रहकर भी मैं तन्हा हूँ, अपने ही साए से अनजान हूँ। यार, मैं सच में अकेला हूँ, बिना आवाज़ का सवाल हूँ। कोई बस एक बार पूछे, “कैसे हो?” — मन कहता है बहुत अच्छे ।" पल्लव सान्याल

Nisha ankahi

मैंने सीखा है हर रोज़ थोड़ी सी ख़ुशी बचा लेना, बुरे दिनों के लिए। - Nisha ankahi

Pallav Sanyal

कविता:हे रात… हे रात, तुम क्या जानती हो तुम्हारी गोद में जागते सब , वे नींद में नहीं होते —वे अपने को दफ़्न कर रहे होते हैं कब। उनकी सीने में दुख का अथाह सागर, उनकी धड़कन में जलती तेज लौ का अथाह डागर , हर साँस के साथ चलती उतरती अनकही सी मौत को वो निहारती। वे आसमान के चमकीले तारे नहीं हैं, जो खुलकर चमक सकें, वे बुझती-बुझती लौ हैं जो काँपते-काँपते थम जाती हैं। खुशियाँ कब की राख हुईं, हँसी बस एक दिखावा हुई, विनाश के उस मोड़ पर खतम हुआ है उनका उस ठोर पर। ज़िंदा लोग अँधेरे से डरते हैं, उन्हें भोर का इंतज़ार रहते है, पर जिनके भीतर सूरज मरते है, वे हर पल अँधकार सहते है। लाशों की कोई सुबह नहीं है, न कोई नया खिलता सवेरा है, उनके हिस्से में लिख दी गई अनंत रात का एक डेरा है। इसलिए हे रात, समझ लो तुम, जो तुम्हारा हाथ कसके थामे हैं, वे इस दुनिया में जीते नहीं हैं, बस साँसों का बोझ उठाए रखते हैं। चलते-फिरते साए हैं वे, जिनमें जीवन की कोई आह नहीं है, नाम भले ही इंसान का ये— हक़ीक़त में साँस लेती वह लाश हैं। पल्लव सान्याल

ziya

? Dangerous Queen 👑 (एक डार्क पावर कविता) वो आई… ना फूलों की खुशबू लेकर, ना दुआओं की चादर ओढ़े, वो आई तो जैसे क़यामत ने औरत का रूप धारण कर लिया हो। उसके क़दमों की आहट में मौत का संगीत था, और उसकी आँखों में वो आग जो सदियों से दबाई गई थी। लोग कहते थे— “औरत कमज़ोर होती है,” पर उन्होंने ये नहीं देखा कि जब कमज़ोरी ज़हर बन जाए तो वो ताक़त से भी ज़्यादा ख़तरनाक होती है। वो एक रानी थी, पर ताज उसका गहना नहीं था, उसकी पहचान थी— उसकी ख़ामोशी, जो बोलती कम और तबाही ज़्यादा करती थी। उसके होंठों पर मुस्कान थी, पर वो मुस्कान किसी वादे की नहीं, किसी साज़िश की तरह धीरे-धीरे फैलती थी। उसने इश्क़ किया था कभी… पूरी सच्चाई से, पूरी मासूमियत से, पर बदले में उसे मिला था धोखा, ख़ामोशी और टूटे हुए ख़्वाबों का कब्रिस्तान। उस रात जब उसने आख़िरी बार रोया, आँसुओं ने उससे पूछा— “अब क्या?” और उसी पल एक लड़की मरी… और एक Dangerous Queen जन्मी। अब वो प्यार नहीं माँगती थी, वो सिर्फ़ हिसाब रखती थी। हर ज़ख़्म का, हर झूठ का, हर उस शख़्स का जिसने उसे कम समझा। उसकी चाल शतरंज जैसी थी, एक-एक क़दम सोच-समझ कर, और सामने वाला ये समझ ही नहीं पाता कि वो खेल रहा है या खेला जा रहा है। राजमहल के गलियारों में उसका नाम फुसफुसाहट बन गया था, लोग डरते थे उससे नज़र मिलाने से, क्योंकि जो उसकी आँखों में देख ले, वो अपने अंजाम को पहचान लेता था। वो खूबसूरत थी, पर उसकी खूबसूरती नज़रें नहीं माँगती थी, वो डर पैदा करती थी। उसके बालों की लटों में कई राज़ उलझे थे, और उसकी हँसी में कई लोगों की बरबादी की कहानी छुपी थी। वो जानती थी कि दुनिया औरत को या तो देवी बनाती है या शिकार, पर उसने चुना तीसरा रास्ता— शासक। उसने तलवार उठाई, पर दुश्मन सामने नहीं था, दुश्मन यादों में था, और यादों को मारना सबसे मुश्किल होता है। उसने हर डर को अपने पैरों तले कुचला, हर ताने को अपने ताज की कील बना लिया। अब वो रोती नहीं थी, क्योंकि आँसू कमज़ोरी नहीं, पर उसके लिए वक़्त की बर्बादी थे। वो जब चलती थी, तो हवा भी रास्ता देती थी, और जब वो रुकती थी, तो इतिहास साँस रोक लेता था। कई मर्द आए, उसे जीतने के लिए, पर वो भूल गए कि रानी को जीता नहीं जाता, या तो उसके साथ राज किया जाता है या फिर उसके ख़िलाफ़ मिटा दिया जाता है। उसने इश्क़ को कमज़ोरी नहीं बनने दिया, उसने सीखा कि मोहब्बत अगर ताक़त न बने तो ज़हर बन जाती है। अब वो प्यार करती थी, पर शर्तों के साथ, अब वो भरोसा करती थी, पर आँखें खुली रखकर। वो Dangerous थी, क्योंकि उसने डरना छोड़ दिया था। वो Queen थी, क्योंकि उसने झुकना छोड़ दिया था। और वो ज़िंदा मिसाल थी उन हर औरतों के लिए जिन्हें तोड़ा गया, पर वो टूटी नहीं। वो कहती थी— “मैं बुरी नहीं हूँ, मैं बस वो हूँ जो तुमने मुझे बना

રોનક જોષી. રાહગીર

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Pallav Sanyal

कविता:हे रात… हे रात, तुम क्या जानती हो तुम्हारी गोद में जागते सब , वे नींद में नहीं होते —वे अपने को दफ़्न कर रहे होते हैं कब। उनकी सीने में दुख का अथाह सागर, उनकी धड़कन में जलती तेज लौ का अथाह डागर , हर साँस के साथ चलती उतरती अनकही सी मौत को वो निहारती। वे आसमान के चमकीले तारे नहीं हैं, जो खुलकर चमक सकें, वे बुझती-बुझती लौ हैं जो काँपते-काँपते थम जाती हैं। खुशियाँ कब की राख हुईं, हँसी बस एक दिखावा हुई, विनाश के उस मोड़ पर खतम हुआ है उनका उस ठोर पर। ज़िंदा लोग अँधेरे से डरते हैं, उन्हें भोर का इंतज़ार रहते है, पर जिनके भीतर सूरज मरते है, वे हर पल अँधकार सहते है। लाशों की कोई सुबह नहीं है, न कोई नया खिलता सवेरा है, उनके हिस्से में लिख दी गई अनंत रात का एक डेरा है। इसलिए हे रात, समझ लो तुम, जो तुम्हारा हाथ कसके थामे हैं, वे इस दुनिया में जीते नहीं हैं, बस साँसों का बोझ उठाए रखते हैं। चलते-फिरते साए हैं वे, जिनमें जीवन की कोई आह नहीं है, नाम भले ही इंसान का ये— हक़ीक़त में साँस लेती वह लाश हैं। पल्लव सान्याल

S K I N G

नींद आखिर ठहरेगी भी कैसे ? सब मिलाकर दो ही तो करवटें हैं एक यादों की तरफ, एक उम्मीदों की तरफ।

Pallav Sanyal

कविता: कल का क्या भरोसा कल का क्या भरोसा है, किसी की ज़िंदगी छोटी, किसी की लंबी होती है, मौत कभी किसी के दरवाज़े पर दस्तक देती है, तो कभी किसी के सिरहाने खामोशी से खड़ी होती है। कौन जानता है किसके हिस्से में कल का सूरज उगेगा भी या नहीं उगेगा… आज तुम मुझसे मुँह फुलाकर बैठे हो, पर क्या पता कल मैं तुम्हारे सामने खड़ा हो पाऊँगा भी या नहीं। दिल से जुड़े रिश्तों को यूँ ही ग़लतफ़हमियों के हवाले मत करो, ये रिश्ते काँच की तरह होते हैं, एक दरार पूरी आवाज़ बदल देती है। मन-मुटाव की इस गाँठ को इतना कसकर मत बाँधो, कभी-कभी ढीली डोर में ही रिश्ते साँस लेते हैं। तुमने मुझसे बात करना छोड़ दिया— मगर मिला क्या तुम्हें? वक़्त तो रेत है, मुट्ठी कसो या खोलो, फिसल ही जाता है। आज जो पास है वो ही कल सबसे दूर होगा, तुम आवाज़ लगाते रह जाओगे और हम यादों की धुंध में बहुत आगे निकल चुके होंगे। मैं तुमसे बहुत दूर जा रहा हूँ… शायद लौटूँ, शायद कभी मिल भी जाऊँ, या शायद सिर्फ़ एक अधूरी याद बन जाऊँ। अगर फिर मुलाक़ात न हो सके, तो बस इतना याद रखना— मैंने तुम्हें दिल से चाहा था, और जाते-जाते तुम्हारी ख़ुशी की दुआ साथ ले जा रहा हूँ। तुम खुश रहना… यही मेरी आख़िरी ख़ामोश विनती है। पल्लव सान्याल

Pallav Sanyal

कविता: क्षितिज उस क्षितिज के पीछे तुम्हारी आँखें उभरती हैं, गहरे नीरव समुंदर में सुनहरी यादें तरलीत हैं। शाम ने तुम्हारे पलक पोंछ कर सूरज को चूम लिया, और एक अकेला आँसू सागर की तरफ़ चल दिया। 😢 नीला आसमान भी ठहर सा गया, सांसें छीनती गई, तुम्हारी नज़रों में डूबते , छलकते हर आंसे टिकती हुईं। लहरों पर टिके हुए मीठे वादों के टुकड़े बिखरते हुए, पुराने कल की ख़ामोशी में नव गीत अब सुनते हुए। हर सूरज उतरते ही कुछ मिसालें चमक बन जाती हैं, तुम्हारी आँखे, आँचल में ढले हुए सितारे मील जाती हैं। धुंधली सी परछाई सी छिपती है चेहरे के किनारों पर, और मैं गिनता हूँ उन लम्हों को जो तुमसे गुज़रे हारों पर। चाहत की लहरों ने किनारे पर ख़ामोशी लिख दी, शब्द टूटे पर एहसासों ने फिर मुस्कान की इबादत खड़ी की। रात की चादर जब पानी पर धीरे-धीरे चलती है, सूरज के पीछे से जैसे छाया और रौशनी मचलती है। आँसू बनकर सूरज समुन्दर में गिरता है मगर जलता नहीं, वह ताप और याद दोनों का संगम है — संभलता तो है मगर मुश्किल नहीं। पर हर सुबह की किरण ये सिखाती है फिर से उठना, क्योंकि किनारा इंतज़ार करती है, और आँखें फिर से देखना। 🌅

Angel

kamaal ki baat hai na..... hum sapne bhi waise hi dekhte hai jinhe pura karna mushkil hota hai. - Angel

Paagla

https://youtube.com/shorts/7ydAjpUc2hg?si=Koe-jN1CyxynpC3q

Saroj Prajapati

दिखावों का दौर है, चापलूसी की होड़ है क्यों तन मन थकाता क्यों नहीं चमचा बन जाता सारी जिंदगी कटेगी मौज में, सभी रहेंगे जेब में।। 😜 सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Kartik Kule

की सवर जाए जिंदगी तो याद करना मुझे वरना खुशियोको भुलानेके लिये एक कड़वा सच ही काफ़ी हे - Kartik Kule

Kartik Kule

कि क्या खूब दिखती होंगी वो चिताएं जो किसको आजाद करनेके लिए सजाई जाती होंगी कमबख्त जिंदा इंसानों ने उसेभी नर्क का द्वार बता दिया - Kartik Kule

GIRLy Quotes

प्यार अक्सर "long distance", "गरीबी", जैसी कठिन परिस्थितियों मे भी survive कर जाता है, पर धोखेबाजी, झूठ, मे प्यार survive नही कर पाता है। धोखे का पता चलते ही उस इंसान से नफरत होने लग जाती है, साथ मे बिताया गया वक्त कचरा बन जाता है, खूबसूरत यादें भी सड़ने लग जाती हैं। जिसमे से अच्छे पल ढूंढ़ने की हिम्मत भी नही होती है। धोखेबाजी प्यार का अस्तित्व ही खत्म कर देती है।

Ashish jain

शीर्षक: "श्रमण चर्या का बदलता चोला" ब्रह्म मुहूर्त में जो उठकर, आत्म-ध्यान में लीन थे, जैन आगम के वे साधक, संयम में प्रवीण थे। पर आज देख कर ये दृश्य, मन भारी हो जाता है, जब साधु वेश में कोई, सुबह नाश्ता चबाता है। कहाँ गई वह 'नवकारसी', कहाँ गया वह त्याग? चाय की चुस्की में अब, जाग रहा अनुराग। दोपहर की गोचरी तो बस, एक रस्म बन गई है, साधु की वो तप-तपस्या, अब तो कहीं खो गई है। सूरज कहता - "सावधान! अब विदा मुझे तुम होने दो", चौ विहार का समय हुआ, अब जठराग्नि को सोने दो। मगर शाम के पाँच बजे भी, जो भोजन की आस रखे, वो क्या खाक मुमुक्षु होगा, जो जीभ पर ना लगाम रखे। चामुंडराय ने क्या सोचा था, क्या ऐसे होंगे निर्ग्रंथ? क्या भोग-विलास की राह चलेगा, ये पावन जैन पंथ? श्वेत वस्त्र तो धारण किए, पर मन में भारी लालसा है, ये श्रमण धर्म है या बस, सुविधानुसार एक तमाशा है? तप की अग्नि ठंडी पड़ी, इंद्रियों का जोर बढ़ा, साधुता की बलि चढ़ाकर, स्वाद का चस्का खूब बढ़ा। आशीष! देख ये विडंबना, रक्षक ही भक्षक बनता है, शास्त्रों का शासन रोता है, जब संयम रोज मरता है। Adv.आशीष जैन 7055301422

वात्सल्य

શું કામ દુઃખી થવું ! શું કામ આપઘાત કરવો!! શું કામ ઝેર પીવું,શું કામ ડૂબી મરવું, શું કામ વીજળી હાર્યે બાથ અને શું કામ ખાવો પડે ગળે ફાંસો?? ❤️ ધીરજ રાખ દોસ્ત થોડી ધીરજ રાખ,ધંધામાં ધ્યાન દે,રૂપિયા કમાઈ લે,તારા માટે પૂજા કરેં છે,પીપળાની!!!!કોઇ સુંદર છોકરી !!! - વાત્સલ્ય - वात्सल्य

Dhanish Dhondiyal

#sad #shayari

Dhanish Dhondiyal

#bewafai #sadstatus

Sudhir Srivastava

दोहा - श्री जी कनक प्रभा कला जन्म से थी हुईं, जीवन की मुस्कान। कनक प्रभा हो पथ चली, शासन माता जान।। सूरजमल जिनके पिता, छोटी बाई मातु। कनक बन गई एक दिन,सोना जैसी धातु।। श्री तुलसी ने कला को, दिया नया था नाम। कनक प्रभा की कीर्ति से, फैला नव पैगाम।। तेरा पंथी साधिका, तुलसी दीक्षा पाय। साध्वी प्रमुखा रूप में, पद को किया सुभाय।। कनक प्रभा जी साधिका, बहुगुण की थीं खान। जैन, भिक्षुणी, लेखिका, सन्यासी सम्मान।। कनक प्रभा जी का हुआ, अमर जगत में नाम। बिना मोह माया किया, रखे भाव निष्काम ।। तुलसी कृतियों का किया, सदा आपने गान। तनिक नहीं था आप में, लोभ, मोह अभिमान।। सकल जगत में आपका, बड़ा मान सम्मान। चरण वंदना सब करें, कृपा आपकी जान।। शासन माता को करूँ, नमन जोड़ कर हाथ। सूक्ष्म रूप में ही सही, रहो हमारे साथ।। महिलाओं को कनक ने, नई दिखाई राह। उन्नति पथ पर ले बढ़ें, ये थी उनकी चाह।। साध्वी जी ने गढ़ दिया, एक नया प्रतिमान। विविध पदों पर काम कर, रहीं सदा गतिमान।। शासन माता कनक ने, पाया कउत्तम स्थान। इक्यासी की उम्र में, जीशवन का अवसान।। धन्य-धन्य जीवन हुआ, यश गाथा उत्कर्ष। जिनसे प्राणी सीखते, क्या होता है हर्ष।। तेरापंथी साध्वी, ऊँचा तव स्थान। तीस वर्ष में मिल गया, साध्वी प्रमुखा मान।। कनक प्रभा जी आपको, शत-शत बार प्रणाम। जैन धर्म को आपने, दिया नया आयाम।। महरौली में आपका, हुआ देह का त्याग। जैन धर्म के लोग सब, मानें इसे प्रयाग।। दिव्या पर करिए कृपा, कनक प्रभा जी आप। और निधी का संग में, हरो शोक संताप।। सुधीर श्रीवास्तव

Maulik Patel

તારો એક અભાવ છે, એવો મને ભાવ છે, પ્રેમ કરવો મારો સ્વભાવ છે, બાકી મને તાવ છે.

Nilesh Rajput

एक बिका हुआ पत्रकार नेताओं की गोदी में, ये बैठे रहते हफ्ते चार, दो कौड़ी के लालच में, यहाँ बिकते रहे पत्रकार, गंदा पानी, टूटी सड़कें, सच के सामने ये मुँह छुपाते, चाटुकारिता की हद तो देखो, अरावली तोड़ने के फायदे गिनाते, झूठी सारी न्यूज़ फैलाकर, हक़ माँगने पर देशद्रोही कहलाते, देशभक्तों को जेल में डालकर, खुद को विश्वगुरु कहलाते। शिक्षा, रोज़गार की बातें छोड़कर, वंदे मातरम् पर बहस कराते, हिंदू–मुस्लिम से मन भर गया, अब हिंदू–हिंदू को लड़वाते। जनता सारी जाग्रत हुई, बिना डरे कहेंगी दिल की बात, हिंदुस्तान की क़सम खाकर, मिलकर बदलेंगे यह सरकार।

Manju jhanwar

सोचना बंद करो आगे क्या होगा अगर यह हुआ तो अगर वैसे हुआ तो तुम इतना मत सोचो आज तक तुमने जो सोचा क्या सब वही ही हुआ नहीं ना या कुछ कुछ पर तुम तो सोचते जा रहे हो जो होना है वहीं तो हुआ सोचना ग़लत तो नहीं पर इतना सोचना अच्छा नहीं तुम परेशान होते हो कितना चिंतित होते हो बेवजह दुखी होते हो क्या जीवन यही है? जरा कुछ पल रुको तो सही क्या सोच रहे हो देखो तो सही फिर कहना मैं ग़लत नहीं तुम्हारा सोचना है, कितना सही तुम कई बार तड़पते हो कितना छटपटाते हो आखिर क्या हासिल हुआ तुम्हारा सोचा कितना हुआ जरुरत से ज्यादा मत सोचो सोचने की भी सीमा होती है किसी ने कुछ कह दिया तुम सोचने लग गए वो उसकी समस्या है वो जो चाहे,कहता रहे न जाने कितनी दफा तुम अपनी सोच पर हंसे हो सच में पछताये हो सच बताओ, बेमतलब का सोचना कितना घातक हुआ जो तुम्हारे साथ नहीं हुआ वो भी तुमने सोचा लिया चलो कोई बात नहीं अब तो रुकना है खुद से हर समय कहना है सोचना है उतना जरुरी हो जितना नहीं मेरे पास वक्त इतना

archana

“वह सोचता है कि अंधेरे में मुझे रोक कर खुश है… पर मैं उसे दिखा रही हूँ — हाँ, मैं अंधेरे में हूँ, पर सब पता है मुझे। सब समझ चुकी हूँ।” - archana

bhavesh

"સંપત્તિ કે શક્તિ ગમે તેટલી હોય, પણ જો પરિવારનો સાથ ન હોય તો માણસ હારી જાય છે. એકતામાં જ સાચું સુખ અને વિજય છે. 🙏✨

Rima

आज घर बहुत याद आ रहा है आज घर बहुत याद आ रहा है, बहुत ज़्यादा थक चुकी हूँ मैं। दिल करता है सब छोड़कर माँ-पापा के पास चली जाऊँ, पर ज़िंदगी ने नहीं— मैंने खुद अपने रास्तों पर ताले लगा दिए। खुशियों को टालते-टालते खुद को ही रोक लिया। सबका हाथ थामते-थामते अपना हाथ कब छूट गया, पता ही नहीं चला। सबके बारे में सोचते-सोचते खुद को कहीं बहुत पीछे छोड़ आई हूँ। हर रिश्ता बचाते-बचाते अपने ही टूटने की आवाज़ अनसुनी कर दी। माँ, आज मैं मज़बूत नहीं हूँ, बस खड़ी हूँ… गिरने की इजाज़त भी खुद को नहीं दी। खुश रहने के लिए नहीं, सिर्फ़ रिश्ते बचाने के लिए हर दिन खुद से समझौता करती रही। माँ, आ जा मेरे पास… मेरे बाल सँवार दे, आज मुझसे ये भी नहीं हो पा रहा। तेरी बेटी बहुत थक गई है माँ, अब खुद को संभालने की ताक़त भी टूटती जा रही है। मज़बूत बनने की आदत में रोने का हक़ खो दिया है मैंने। आज सच में मुझसे नहीं हो पा रहा माँ… बस एक बार गले लगा ले, शायद इस बिखरे हुए दिल को थोड़ा सा घर जैसा सुकून मिल जाए। 🌧️

संजय कुमार दवे

હર હર મહાદેવ 🙏🚩

Nilesh Rajput

मैं छोड़ दूँ शिकायतेँ सभी तेरे लिए, क्या तुम फिर भी झूठी क़सम खा पाओगी क्या? मैं तेरे वास्ते ले लूँ एक मकान नया, क्या तुम उन्हें अपना घर बना पाओगी क्या? मैं वक़्त को रोक भी दूँ दो पल के लिए भी, क्या तुम वक्त पे आ पाओगी क्या? मैं कर भी लूँ इश्क़ तुझसे अभी, क्या तुम फिर से बेवफ़ा बन पाओगी क्या?

GIRLy Quotes

punar janam.. Kuch bhi nahi hota dogle.. anantkal ke liye tumne .. muje kho Diya hai.. ab 36 so jagaho par muh Marta re.. - GIRLy Quotes

Bhavna Bhatt

જય રાંદલ માતાજી

Bhavna Bhatt

મારાં ઓચ્છવલાલ દાદા... એમનાં સારાં કાર્યો ની મહેક હજુ પણ ફેલાયલી છે.... 🙏

shabdh skhi

दूसरों का हक़ और ख़ुशी छीनकर उसने अपना घर बसाना चाहा..! एक लड़की होकर दूसरी लड़की का घर तोड़ डाला. फिर भी मुझे शिकायत उससे नहीं है 🙂 क्योंकि मेरे साथ ऊपर वाले ने न्याय कर दिया... रिजल्ट सबके सामने आ ही गया👌😂 - shabdh skhi

Sudhir Srivastava

दोहा-कहें सुधीर कविराय ३५ ******* बुजुर्ग ******* छाँव शीष जिनके रहे, इनकी शीतल छाँव। उन पर चलता है नहीं, कभी किसी का दाँव।। जो करता इनका सदा, मान और सम्मान। ईश्वर की उस पर कृपा, दूर रहें अपमान।। आया है कैसा समय, शर्म हया सब दूर। मात-पिता बूढ़े हुए, हम मस्ती में चूर।। वृद्ध जनों को मिल रहा, वृद्धा आश्रम ठौर। अपनों में आने लगा, जब से स्वारथ बौर।। अपने ही अब कोसते, अपनों को ही रोज। जाने क्या हैं पा रहे, खाकर इनका भोज।। कौन आज है आपका, शुभचिंतक सिरमौर। मुश्किल में यदि हैं पड़े, कौन दे रहा ठौर।। ******* वाणी ******* वाणी बतलाती हमें, मानव का व्यवहार। चाहे जितना हो बड़ा, उसका घर परिवार।। कटु वाणी है छीनती, इक दूजे का चैन। कहीं दुश्मनी हो रही, कहीं भीगते नैन।। वाणी में क्या है रखा, नहीं समझते आप। इसीलिए तो कर रहे, अंजाने में पाप।। वाणी पर जिसने रखा, निज अंकुश भरपूर। पास उसी के आ रहे, कल तक थे जो दूर।। वाणी जिसकी मौन है, उससे डरिए आप। नहीं छेड़ना भूल से, मिले बहुत संताप।। ****** नववर्ष ******** नया वर्ष छब्बीस का, लेकर आया हर्ष। हर प्राणी खुशहाल हो, फैले नव उत्कर्ष।। नये वर्ष में हम सभी, मिलकर करें विचार। पावन रखना है हमें, उचित प्रेम व्यवहार।। नये वर्ष में क्या नया, बड़ा प्रश्न है आज। प्रेम प्यार व्यवहार सम, होगा सबका काज।। नये वर्ष में दीजिए, मिलकर दुआ हजार। खुशहाली से हो भरा, मम जीवन संसार।। छोटों को आशीष है, चरण बड़ों के शीश। नया वर्ष सबको सदा, देता शुभ आशीष॥ ******* गणतंत्र दिवस ****** उत्सव है गणतंत्र का, हर्षित भारत देश। संविधान गुण गा रहे, अद्भुत है परिवेश।। लोकतंत्र सबसे बड़ा, सजा तिरंगा ताज। सर्वधर्म समभाव का, भारत में है राज।। संविधान का हम सभी, करते हैं गुणगान। और तिरंगा दे रहा, हमको निज पहचान।। आज देख कर्तव्य पथ, भारत का उत्कर्ष। दुश्मन सब बेचैन हैं, शुभचिंतक में हर्ष।। दुनिया ने जब से सुनी, महामहिम की बात। दुश्मन सब बेचैन हैं, डर-डर काटें रात।। संविधान की आड़ में, होते कितने खेल। लोकतंत्र के नाम पर, भाग रही है रेल।। अजर-अमर गणतंत्र को, दुनिया देती मान। भारत का गौरव बढ़े, यही हमारी शान।। ****** हिंदी ****** हिंदी का गौरव बढ़े, ऐसा करिए काम। नाहक में ही आप सब, होते क्यों बदनाम।। हिंदी हमसे पूछती, बतलाओ तो आज। कह सुधीर कैसे बनूँ, भाषा का सरताज।। ***** यमराज ***** भटक गये यमराज जी, जाने कैसे राह। या जागी कुछ है नई, उनके मन में चाह।। मुझ पर कोई अब नहीं, देता थोड़ा ध्यान। इसीलिए यमराज जी, बाँट रहे गुरु ज्ञान।। लगता जैसे सो गया, आज मित्र यमराज। इसीलिए क्या थम गया, मेरा सारा काज।। काम बहुत ही शेष है, समय छूटता हाथ। अब केवल यमराज ही, दे सकता है साथ।। मंजिल अपनी आ गई, अब तो यारों पास। आप सभी को है पता, यम अपने हैं खास।। ****** विविध ****** नाहक मन में है भरा, इतना अधिक गुबार। या फिर केवल चाहते, ठनी रहे ये रार।। मन का मैल निकालिए, यही समय की माँग। या फिर तोड़ें आपकी, हम सब मिलकर टाँग।। भलमानुष इतना नहीं, बनकर रहिए आप। कल पछताने से भला, नहीं करो ये पाप।। कौन दे रहा आपको, भला आजकल भाव। नाम एक बतलाइए, नहीं कुरेदे घाव।। जन्मदिवस है अटल का, आज बहुत ही खास। स्वामी अद्भुत गुणों के, संग हास परिहास।। तुलसी पूजन खास है, सभी पूजिए आज। श्रद्धा अरु विश्वास से, करते रहिए काज।। ठंडी दुश्मन बन रही, राजा हो या रंक। नाहक लेती स्वयं ही, अपने शीश कलंक।। तीन दिवस प्रतिभाग कर, लौट गया से मित्र। समझक्ष नहीं आता मुझे, खींचूँ कैसे चित्र।। संचालक सब आलसी, या फिर कोई रोग। या नाहक हैरान हूँ, सब हैं स्वस्थ निरोग।। मायूसी को छोड़ दो, मत हो आप अधीर। इससे तो अच्छा भला, बनकर रहो कबीर।। समय बड़ा बलवान है, इसका रखिए ध्यान। मूरख हो तुम क्या बड़े, गाते नीरस गान।। कुछ बड़बोले लोग हैं, सदा बघारें ज्ञान। नहीं समझते वे कभी, उनका अलग विधान।। चाह रहे जो हम सभी, रहा न उसका अंत। यही हमें समझा रहे, ज्ञानी मुनिजन संत।। कहना मानोगे नहीं, बुद्धिमान हो आप। बेवकूफ हम भी नहीं, नाहक करते जाप।। मौन छोड़ कर आइए, सभी पटल के द्वार। कम ज्यादा कुछ कीजिए, आप व्यक्त उद्गार।। हार-हार कर जीतना, है अपना सिद्धांत। इसी राह चलते हुए, जीवन लक्ष्य सुखांत।। जो जलते हैं आपसे, उनको मत दो भाव। आप मौन हो दीजिए, जलनखोर को घाव।। जितना भी मैं आपको, देता आया भाव। उतना ज्यादा आपने, सदा कुरेदा घाव।। जो भी जितना योग्य है, उतना पाता मान। इसके बिन मिलता कहाँ, और किसे सम्मान।। बेटी, पत्नी, माँ, बहन, मातृशक्ति का रुप। यही सदा से सह रहीं , सबसे ज्यादा धूप।। नाहक ही तो आप हैं, जाने क्यों हैरान। मुखमंडल ऐसा लगे, वीराना मैदान।। वाणी बुद्धि विवेक का, जो रखता है ध्यान। कलयुग के इस दौर का, वह मूरख नादान।। छोटों को आशीष है, चरण बड़ों के शीश। नया वर्ष सबको सदा, देता शुभ आशीष॥ दोहा लिखने के लिए, समय मिला अब आज। इधर-उधर के फेर का, समझ लीजिए राज।। ठंडी से हलकान हैं, सभी अमीर-गरीब। इससे बचने के लिए, सबकी निज तरकीब।। आज विमुख क्यों हो रहे, अपने सारे लोग। इसका कोई राज है, या केवल संयोग।। नाहक शिकवा क्यों करें, हम अपनों से आज। वही हमें दिखला रहे, अपना ऊँचा ताज।। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

फायकू - मकर संक्रांति 4-3-2 वर्ण (अंतिम पंक्ति - तुम्हारे लिए अनिवार्य) ******* मकर संक्रांति का पर्व है अति विशेष तुम्हारे लिए। सनातन संस्कृति का स्वर सूर्य हुए उत्तरायण तुम्हारे लिए। स्नान, ध्यान, दान, मान, खिचड़ी पर्व महान, तुम्हारे लिए। बदलती प्रकृति की आभा, बसंत की दस्तक तुम्हारे लिए। रंग बिरंगे पतंगों से सज गया आकाश तुम्हारे लिए। तिल गुड़ की महक प्रकृति की मुस्कान तुम्हारे लिए माघ पूर्णिमा की तिथि मकर संक्रांति विशेष तुम्हारे लिए। सात्विक संदेश लेकर आया मकर संक्रांति पर्व तुम्हारे लिए। प्रकृति की सुंदरतम छटा मुस्कान बिखेरती है तुम्हारे लिए। जप, तप, दान किया गंगा स्नान भी तुम्हारे लिए। जीवन दर्शन समझ लिया, अब हमने भी, तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव

Shailesh Joshi

જીવનમાં મળતી બધીજ નિરાશાઓ કંઈ સમય, સંજોગો કે પછી કોઈ વ્યક્તિને કારણે નથી મળતી, અમુક નિરાશાઓ આપણા વધારે પડતાં સારા સ્વભાવને કારણે, અથવા તો પોતાના, કે અન્ય કોઈ વ્યક્તિ કે બાબતે અતિ વિશ્વાસને કારણે પણ મળતી હોય છે. - Shailesh Joshi

રોનક જોષી. રાહગીર

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ArUu

अकेलापन बहुत घातक है जब आप इसे नजरअंदाज करते है। पर जब आप उसपे काम करना शुरू करते है तो ये एक बेहिसाब उपलब्धि है😻 ArUu ✍️

Deepak Bundela Arymoulik

मांगना ही छोड़ दिया हमनें वक्त किसी से, क्या पता उनके पास इनकार का भी वक्त न हो!!

Awantika Palewale

કુંપળ થઈ તારી આસપાસ રહું છું તારા શ્વાસની લયમાં રોજ ખીલું છું તારું એક સ્મિત શ્વાસનો આધાર બને હૃદયમાં રંગોનું મેઘધનુષ રચાય છે પવનની સૌમ્ય લહેર સાથે તું આવે છે તારા સ્પર્શથી જીવન મારું મહેકે છે. કુંપળની જેવી નાજૂક મારી લાગણી, તારી હાજરીમાં જ મળે સાચી શાંતિ. તારી આંખોમાં ઝળકે સપનાની દુનિયા, જાણે તારાઓએ રચી હોય કોઈ દુનિયા કુંપળ થઈ હું તારી નજીક ઝૂલું છું તારા પ્રેમના બગીચામાં હંમેશાં રહું. જ્યાં તું હોય ત્યાં મારું ઘર બને છે તારા વિના આ જીવન અધૂરું લાગે. કુંપળ થઈ હું તારા હૃદયને ચૂમું છું તારી સાથે જીવનની ક્ષણ ગૂંથું છું

Saroj Prajapati

नया सूरज नई सुबह, मन पर छाया अंधकार हटा सोच को दे एक नई दिशा, जीवन को मिलेगी नई राह।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

kajal jha

प्यार, दर्द और संघर्ष: ज़िंदगी की सबसे सच्ची कहानी ज़िंदगी कभी एक रंग में नहीं होती। यह कभी मुस्कुराती है, कभी रुलाती है, और कभी इतना थका देती है कि इंसान खुद से सवाल करने लगता है। इस पूरी यात्रा में तीन शब्द ऐसे हैं जो हर इंसान की कहानी में किसी न किसी मोड़ पर ज़रूर आते हैं— प्यार, दर्द और संघर्ष। ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, अलग नहीं। जहाँ प्यार होता है, वहाँ दर्द भी होता है, और जहाँ दर्द होता है, वहाँ संघर्ष अपने आप जन्म ले लेता है। प्यार: जो अधूरा भी पूरा लगता है प्यार एक एहसास है, जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं। यह कभी किसी की मुस्कान में दिखता है, कभी किसी की खामोशी में। प्यार वो नहीं होता जो सिर्फ़ साथ रहने से साबित हो, बल्कि वो होता है जो दूरी में भी महसूस हो। कभी-कभी प्यार बिना कहे हो जाता है। न कोई वादा, न कोई इज़हार—बस एक अपनापन, एक जुड़ाव। लेकिन यही प्यार जब सच्चा होता है, तो सबसे ज़्यादा तकलीफ़ भी देता है। क्योंकि सच्चे प्यार में उम्मीदें होती हैं, और उम्मीदें जब टूटती हैं, तो दर्द बन जाती हैं। कुछ प्यार मुकम्मल होते हैं, तो कुछ अधूरे। लेकिन सच यह है कि अधूरे प्यार ज़्यादा याद रह जाते हैं। क्योंकि जो मिल गया, वह आदत बन जाता है, और जो नहीं मिला, वह कहानी। दर्द: जो इंसान को भीतर से बदल देता है दर्द हमेशा चीखकर नहीं आता। कई बार यह मुस्कान के पीछे छिपा होता है। लोग सोचते हैं कि जो हँसता है, वह खुश है—लेकिन अक्सर सबसे गहरे ज़ख्म वही लोग छिपाते हैं। प्यार से मिला दर्द सबसे अलग होता है। यह शरीर को नहीं, आत्मा को चोट पहुँचाता है। यह रातों की नींद छीन लेता है, सवालों से भर देता है— “क्या मेरी कमी थी?” “क्या मैं काफ़ी नहीं था/थी?” दर्द इंसान को तोड़ता भी है और बनाता भी है। शुरू में वह कमज़ोर करता है, लेकिन धीरे-धीरे वही दर्द इंसान को मज़बूत बना देता है। क्योंकि जब इंसान बहुत कुछ खो चुका होता है, तो फिर खोने का डर खत्म हो जाता है। संघर्ष: खुद को साबित करने की लड़ाई जहाँ दर्द होता है, वहीं से संघर्ष शुरू होता है। संघर्ष सिर्फ़ हालात से नहीं होता, बल्कि खुद से भी होता है। हर सुबह खुद को समझाना कि “आज भी उठना है”, “आज भी मुस्कुराना है”, “आज भी आगे बढ़ना है”—यही असली संघर्ष है। संघर्ष में इंसान अकेला हो जाता है। भीड़ में होते हुए भी अकेला। क्योंकि हर कोई आपकी मुस्कान देखता है, आपकी लड़ाई नहीं। लोग आपकी सफलता की तालियाँ बजाते हैं, लेकिन आपके आँसू नहीं देखते। संघर्ष सिखाता है कि ज़िंदगी किसी के लिए नहीं रुकती। चाहे दिल टूटा हो, चाहे सपने बिखरे हों—दुनिया अपनी रफ्तार से चलती रहती है। और इंसान को या तो उसके साथ चलना होता है, या पीछे छूट जाना होता है। प्यार, दर्द और संघर्ष का रिश्ता इन तीनों का रिश्ता बहुत गहरा है। प्यार हमें किसी से जोड़ता है। दर्द हमें खुद से मिलाता है। और संघर्ष हमें मज़बूत बनाता है। अगर प्यार न हो, तो दर्द का एहसास नहीं होगा। अगर दर्द न हो, तो संघर्ष की ताक़त नहीं आएगी। और अगर संघर्ष न हो, तो इंसान कभी खुद को पहचान नहीं पाएगा। ज़िंदगी उन्हीं को आगे बढ़ाती है, जो टूटकर भी खड़े होना सीख जाते हैं। जो दर्द को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताक़त बना लेते हैं। अंत में हर इंसान की कहानी अलग होती है, लेकिन भावनाएँ वही होती हैं। प्यार सबको होता है, दर्द सबको मिलता है, और संघर्ष हर किसी को करना पड़ता है। फर्क सिर्फ़ इतना है कि कोई हार मान लेता है, और कोई आगे बढ़ जाता है। अगर आज आपकी ज़िंदगी में दर्द है, संघर्ष है, तो घबराइए मत। यह इस बात का सबूत है कि आपने प्यार किया है, आपने महसूस किया है, आपने जिया है। और यक़ीन मानिए— संघर्ष के बाद जो इंसान बनता है, वह पहले से कहीं ज़्यादा ख़ूबसूरत होता है

Imaran

एक पल का एहसास बनकर आए तुम, दुसरे ही पल खुशबु की तरह उड़ गए तुम, जानते हो तनहाईयों से डर लगता था हमे, फिर भी तन्हा छोड चले गए तुम 💔imran 💔

Shefali

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Saliil Upadhyay

Gold Effect ડોક્ટર : તમારી સોનોગ્રાફી કરવી પડશે. દર્દી: સાહેબ…ગરીબ માણસ છું,તાંબાગ્રાફી કે પિત્તળગ્રાફીછે? - Saliil Upadhyay

Jyoti Gupta

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Arun V Deshpande

ई दै-ज्योतिर्मय साहित्य- -०१फेब्रुवारी२०२६ रविवार अंकात प्रकाशित कविता- ****** वर्तमान ********* चालतोय मी निरंतर सावली कुठे दिसेना भीषण एकाकी वाटेवर सोबती कुणी भेटेना ।। रस्ते सारे गजबजलेले वाहने बेभान सुटलेले जो तो आपल्या नादात लुप्त झाला आपलेपणा ।। बेगडी वैभवी जगात बुजलेला साधा माणूस तुच्छ नजरांचा झेलतो उद्धटसा मुजोरपणा ।। असे आहे वर्तमान हे कालचे ते होते भले बेभरोसी सारे उद्याला होईल कसे,कोडे पडले ।। ****** कवी अरुण वि.देशपांडे-पुणे 9850177342 –----------------------------------------------

Sandeep Raj Thakur

vakt Ke Taraju Se har koi Tolta hai

ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

ગગન વાટી વિચરતુ વિહંગ ક્યાં કશે કોઈ હદે જઈ બંધાણુ? સાંજ થઈને ફરી એ વિહંગ, એ જ નીડે જઈને પાછું સંતાણુ... - ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

कही पहुंचने के लिए कही से त्याग होकर चलना जरूरी है। खोज में विचरण करेंगे तभी खुद का मार्ग मिलेगा।। - ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास खुशबू प्यार की खुश्बू से जिंदगी के बाग में बसंत छाई हुई हैं l आत्म सम्मान, जीने की चाहत और ताक़त पाई हुई हैं ll जी भरके बरसने की चाहत हुई तो कड़ी सर्दियों में l बनके बादल रिमझिम बारिस की बौछार लाई हुई हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

writerscaste

అమ్మ ప్రేమ ఎనలేనిది అమ్మ ప్రేమ ఎల్లలు లేనిది అమ్మ ప్రేమ వర్ణించలేనిది అమ్మ ప్రేమ అనంతమైనది అమ్మ ప్రేమ అపురూపమైనది అమ్మ ప్రేమ అమరం అమ్మ ప్రేమ వరం అమ్మ ఋణము తీర్చలేనిది... - writerscaste

writerscaste

I burn out all my memories But pain remains as ash ఎవరిని ప్రేమించవద్దు.. People change! - writerscaste

writerscaste

ని వలపు కౌగిలిలో బంధించావు ని వడి లో కరిగిపోయాను Like the Chocolate melts in our mouth - writerscaste

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।। दोहा --404 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।। दोहा --404 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।। दोहा --404 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----गणेश तिवारी 'नैश'

वात्सल्य

कितने दिन तक दूर रहोगे !! जिंदगी की आयू सो सालकी ! औऱ उस मेँ पचास साल सो कर गँवा दिए ll दस साल बचपन में ll औऱ ओर दस-पंद्रह साल पढ़ने में!! कभी तो गिनती कीजिए।! ll प्रिया ll ज्यादा रूठने में औऱ दूर रेहने से क़्या मिलता है ll - वात्सल्य - वात्सल्य

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

वात्सल्य

मिलने का मन क़रता है,पर निकल नहीं सकते ll क्यूंकि अब शरीर को अकेलेपन लगता है ll वो साथ आती नहीं ll औऱ ओर कोई साथ निभाता नहीं ll - वात्सल्य

Roshan baiplawat

emotion

ziya

आईने जैसा किरदार रखते है फ़िक्र तो वो करें मेरी जान जो चहेरे दो चार रखते हैं

Dhamak

Shivratri special song with my original lyrics

writerscaste

sending my heart... as a clouds...

sonika bhawsar

(Intro) Say it now… what your heart hides inside, It’s my promise… I’ll never let it fade with time… (Verse 1) My breath is tied to the beat of your heart, Without you near, my world falls apart… You are my soulmate, you are my star, Only you are the reason I am… (Chorus) Say it now… what your heart hides inside, It’s my promise, I’ll never leave your side… With you, my vow will stay, Yes… forever I’ll stay, Oh with you… only with you… (Verse 2) In my dreams, I only see your face, In my memories, you’re my only place… To live with you, to fade with you, That’s all my heart ever knew… (Bridge) May this bond remain for endless years, Through every joy and through all the tears… You’re my beginning, you’re my end, On you my love will always depend… (Outro) Say it now… oh say it now… What your heart hides inside, say it now… With you my vow will stay… Yes… forever I’ll stay…

Shalini Gautam

पहले मैं आसमाँ में थी, और लोग जमीन पर , आज लोग फलक पर हैं, और मैं खाक में.. - Shalini Gautam

santosh Mishra

उसके चक्कर में ज़माना भूल गए, उसके बाद मुस्कुराना भूल गए। जब सफलता कदमों में थी हमारे, उसी मोड़ पर वो साथ छोड़ गए। जब दोनों हाथ फैलाए आसमान था, तभी वो हमें तन्हा छोड़ गए। उनके छोड़ने के ग़म में हम इस आसमान में उड़ना ही भूल गए। कुछ इस कदर मिला धोखा कि, ख़ुद ही ख़ुद को अंदर से मारते गए, और इस सब के बीच, हम सारा ज़माना भूल गए।”**

Soni shakya

प्रेम करना तो सभी को आता है पर .. उसे संवारना हर किसी के बस की बात नही.. - Soni shakya

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

વિષય: સાહિત્યમાં માનવાધિકાર શીર્ષક: માણસાઈનો દસ્તાવેજ ​કાગળિયામાં ચીતરેલા કાયદાની વાત નઈ, મારે તો કરવી સે ધબકતા કાળજાની વાત! ​આ ચોપડામાં લખ્યું ઈ બધું હાચું, પણ ઓલી ડેલીએ ઉભેલો માણહ, જેના મોઢા પર આખા મલકનો થાક સે, ઈને વંચાય એવો કોઈ કાયદો ખરો? ​તમે કયો સો કે બધા હરખા... તો પસી આ પરસેવો પાડીને જે રોટલો પકવે, ઈની થાળીમાં જ કેમ ભુખના ડાઘા? ​હક એટલે શું બાપલિયા? ખાલી પાંચ વરહે આંગળીએ શાહી લગાડવી? ના રે ના... હક એટલે... કોઈની શરમ ભર્યા વગર, આંખમાં આંખ નાખીને વાત કરવાની ત્રેવડ! કોઈ શેઠની દયા નઈ, પણ પરસેવાનો પાવરો! ​સાહિત્ય તો ત્યારે જ જીવતું કે’વાય, જ્યારે ઈ કોઈના ફાટેલા લૂગડાંનો થીગડું બને. શબ્દો જ્યારે કોઈના ડૂમો ભરાયેલા ગળાનો રાડારોટી અવાજ બને! ​આ મોટા મોટા ગ્રંથોમાં, માણસ ગોતવો અઘરો થઈ ગ્યો સે, બસ હવે તો... માણસને માણસ રે’વા દયો, ઈથી મોટો કોઈ માનવાધિકાર નથી, ને ઈથી મોટી કોઈ કવિતા નથી સ્વયમ્'ભૂ! અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

raj

छोटे क़दम, बड़े सपने, आँखों में आसमान है। हार से जो न घबराए, वही असली इंसान है। मेहनत की राहों पर चल, थकना भी एक कहानी है। आज जो बीज तू बोएगा, कल वही तेरी निशानी है। 🌱

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