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Raju kumar Chaudhary
ज्ञान ही असली शक्ति हैकहानी: ज्ञान ही असली शक्ति है
एक गाँव में दो भाई रहते थे – अर्जुन और भीम। दोनों मेहनती थे, लेकिन सोच में फर्क था।
अर्जुन हमेशा सीखने और जानने में समय बिताता, किताबें पढ़ता और नए कौशल सीखता।
भीम सिर्फ काम करता, मेहनत करता, लेकिन सीखने की कोई आदत नहीं थी।
एक साल बाद गाँव में सूखा पड़ गया। फसल बर्बाद हो गई और लोग परेशान हो गए।
भीम के पास सिर्फ ताकत थी, लेकिन अर्जुन ने नए तरीके सीख रखे थे – पानी बचाने, फसल सुरक्षित रखने और खेती के नए तरीके।
अर्जुन ने गाँव वालों की मदद से फसल को बचाया और सभी का पेट भरा।
भीम ने मेहनत तो की, लेकिन कुछ मदद नहीं कर पाया।
अर्जुन ने कहा:
“ताकत से काम होता है, लेकिन ज्ञान से जीवन बचता है। ज्ञान ही सच्चा भगवान है।”
सभी गाँव वाले समझ गए कि जो ज्ञान रखता है, वही असली शक्ति रखता है।
💡 संदेश:
शक्ति, पैसा या स्थिति स्थायी नहीं, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। ज्ञान से आप खुद भी मजबूत बनते हैं और दूसरों की मदद भी कर सकते हैं।
Raju kumar Chaudhary
ज्ञान ही असली शक्ति हैकहानी: ज्ञान ही असली शक्ति है
एक गाँव में दो भाई रहते थे – अर्जुन और भीम। दोनों मेहनती थे, लेकिन सोच में फर्क था।
अर्जुन हमेशा सीखने और जानने में समय बिताता, किताबें पढ़ता और नए कौशल सीखता।
भीम सिर्फ काम करता, मेहनत करता, लेकिन सीखने की कोई आदत नहीं थी।
एक साल बाद गाँव में सूखा पड़ गया। फसल बर्बाद हो गई और लोग परेशान हो गए।
भीम के पास सिर्फ ताकत थी, लेकिन अर्जुन ने नए तरीके सीख रखे थे – पानी बचाने, फसल सुरक्षित रखने और खेती के नए तरीके।
अर्जुन ने गाँव वालों की मदद से फसल को बचाया और सभी का पेट भरा।
भीम ने मेहनत तो की, लेकिन कुछ मदद नहीं कर पाया।
अर्जुन ने कहा:
“ताकत से काम होता है, लेकिन ज्ञान से जीवन बचता है। ज्ञान ही सच्चा भगवान है।”
सभी गाँव वाले समझ गए कि जो ज्ञान रखता है, वही असली शक्ति रखता है।
💡 संदेश:
शक्ति, पैसा या स्थिति स्थायी नहीं, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। ज्ञान से आप खुद भी मजबूत बनते हैं और दूसरों की मदद भी कर सकते हैं।
Ashish jain
*मुखौटों से ओढ़ा धर्म*
लोग कहते हैं उन्हें आता है सारा जैन धर्म,
पर आचरण में दिखता नहीं कहीं कोई सत्कर्म।
बातों में तो अहिंसा का बड़ा राग गाते हैं,
पर व्यवहार में न जाने क्यों कटुता ले आते हैं।
खुद को 'जैन' बताने का यह कैसा है अभिमान?
जब भीतर न बचा हो करुणा का कोई स्थान।
सिर्फ कुल में जन्म लेने से कोई जैन नहीं होता,
बिना सम्यक विचारों के, इंसान बस भ्रम में है सोता।
कथनी और करनी का यह अंतर बड़ा भारी है,
आत्मा को भुलाकर बस दिखावे की तैयारी है।
जब तक हृदय में प्रेम और क्षमा का वास नहीं,
तब तक सच्चे जैन होने का होता आभास नहीं।
आशीष सुनो अब, धर्म सिर्फ किताबों में नहीं होता,
वो तो आचरण की शुद्धता और विचारों में है सोता।
Adv. आशीष जैन
7055301422
Saroj Prajapati
अब ना आया करो मेरी यादों में तुम
के तुम बिन जीना सीख लिया हमने
तेरी झूठी मुहब्बत के ज़ख्मों को ऐ ज़ालिम!
अब मुस्कुराकर सिलना सीख लिया हमने।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
kattupaya s
Even though in Sunday iam in sleep mode, the afternoon nap is the best. C u guys
Raju kumar Chaudhary
ज्ञान बड़ा है पैसा ?कहानी: खाली जेब और भरा दिमाग
एक गाँव में दो दोस्त रहते थे—
मोहन और सुरेश।
मोहन के पिता बहुत अमीर थे। घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी।
मोहन को लगता था—
“पैसा है तो सब कुछ है, पढ़ाई-लिखाई किस काम की?”
दूसरी ओर सुरेश गरीब परिवार से था।
उसके पास पैसा नहीं था, लेकिन सीखने की भूख थी।
वह किताबें पढ़ता, लोगों से सवाल पूछता और हर अनुभव से कुछ न कुछ सीख लेता।
समय बीतता गया…
एक दिन गाँव में बाढ़ आ गई।
मोहन का सारा पैसा, खेत और सामान बह गया।
वह टूट गया—
“अब मैं क्या करूँगा?”
उसी समय सुरेश ने हालात को समझा।
उसने अपने ज्ञान से लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचाया,
खेती के नए तरीके अपनाए
और छोटा-सा काम शुरू किया।
कुछ ही सालों में सुरेश सफल हो गया।
लोग उसकी सलाह लेने आने लगे।
वहीं मोहन सुरेश के पास मदद माँगने पहुँचा।
मोहन ने पूछा—
“तुम्हारे पास तो पहले कुछ भी नहीं था, फिर तुम इतना आगे कैसे निकल गए?”
सुरेश मुस्कुराया और बोला—
“पैसा खो जाए तो कुछ नहीं,
लेकिन अगर ज्ञान हो तो सब कुछ फिर से बनाया जा सकता है।”
मोहन की आँखें खुल गईं।
उसे समझ आ गया कि
पैसा साथ छोड़ सकता है,
पर ज्ञान जीवन भर साथ चलता है।
सीख:
👉 पैसा साधन है,
👉 ज्ञान शक्ति है,
👉 और शक्ति से साधन पैदा होते हैं।🔥 एक लाइन में बात:
पैसा जेब में रहता है,
ज्ञान दिमाग में —
और दिमाग जेब को भर देता है।
Archana Singh
वक्त ने पूछा :
" कैसी चल रही हैं ज़िंदगी "...?
मैंने कहा : " कुछ तेरे अनुसार ...
और कुछ मेरी सोच से विपरीत "...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Arun Mishra
कही लिखा था ,चंडीवारों पर जो होता है ,अच्छा होता है पर जिसपर गुजरती हैं,वही जनता है , दर्द आज मैं अपने ऊपर बीती हुई बार बताता हु ,कि किसी भी से दिल सोचसमझकर लगाना ,क्यों कि कभी कभी जो हम लोग समझ नहीं पाते है नियति वो कर देती है , पहले तो मैं प्यार को नहीं मानता था ,मैने जाने अनजाने बहुत से लोगों के प्यार को नहीं समझा ओर उनको नजरअंदाज कर गया पर जीवन में जब नियति ने वही खेल मेरे साथ खेला तो आज मुझे उन लोगों की याद आ गई,जिनकी हम कभी मोहब्बत हुआ करते थे ,ओर मैं उनको नहीं समझा ,मैं उन सभी का दोषी हो जिनकी मैने प्यार की कदर नहीं की अगर जीवन में मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य मिला तो मैं उनसे क्षमा जरूर मांगूंगा और नियति से यही प्रार्थना करूंगा कि जब तुमको उससे जोड़ना ही नहीं था ,उनको क्यों मिलवाते हो ,आज मुझे प्यार की ताकत और दर्द का आशीर्वाद मिला है जो , किसी को भी नहीं मिले पहले खुशी तो अच्छी लगती हैं,पर बाद का दर्द इंसान को खत्म,तोड़ देता है। मुझे उस लड़की के सिवा कुछ नजर ही नहीं आने लगा उसको खो देने का डर जिस प्यार की शुरुआत जो एक झूठ से शुरू हुई थी आज वही प्यार मेरे लिए दर्द बन गया ,इस लिए किसी से भी इतना मत जुड़ जाना कि वापस आने में दर्द हो , दिमाग जानता है कि ऐसा नहीं हो सकता है पर दिल बार बार उनके बारे में याद दिलाकर परेशान करता है , कृपा अगर कोई भी भाई इस दर्द से निकला हो तो मुझे कोई रास्ता दिखाए ,या मैं क्या करूं इस स्थिति में यह जरूर बताए शायद आप का विचार किसी की जिंदगी में परिवर्तन का सके 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 धन्यवाद
Kamini Shah
પાનખરના રૂતબા પર
ઓવાર્યો
ઋતુરાજ વસંત રૂમઝૂમતો
પધાર્યો…
-કામિની
InkImagination
“Sab ke paas waqt nahi hai,
ye jhooth hai…
Waqt hota hai,
bas hum us list me nahi hote.”
- InkImagination
Jyoti Gupta
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Chendamara
മകൾക്ക്
ഞാൻ പകർന്നൊരഗ്നിയേ.
എന്നെ ഞാനാക്കിയ ശക്തിയേ.
ഞാനൂതി മിനുക്കിയ തങ്കമേ.
ഇരുൾനീക്കുമെൻ അമരദീപമേ.
ഉയരണം നീയൊരിതിഹാസമായ്.
പറക്കണം ഒരഗ്നിശലഭമായ്.
Suresh sondhiya
"दोस्तों, क्या आपने 'The Hiding Truth' का चौथा एपिसोड पढ़ा? 🤫
सिया के हाथ में वो डिवाइस और उसके पिता का संदेश... कहानी अब एक बहुत बड़े मोड़ पर है।
मेरे पास अगले 6 एपिसोड तैयार हैं और यकीन मानिए, हर एपिसोड में एक नया धमाका होने वाला है! अगर आप इस रोमांच को मिस नहीं करना चाहते, तो मेरी प्रोफाइल को Follow जरूर करें।
अपनी रेटिंग और विचार कमेंट में लिखना न भूलें! 🚀"
आपका लेखक,
सुरेश"
Shailesh Joshi
કોઈપણ કામ એટલું અઘરું નથી હોતું,
જેટલું આપણને શરૂ કરવું અઘરું લાગે છે,
અને આજ કારણે
આપણે કામની શરૂઆતથી દૂર, અને
આપણી સફળતા આપણાથી દૂર ભાગે છે.
ખરેખર તો જે ભલે ધીરે ધીરે
શરૂઆત કરવા લાગે છે, એનું નસીબ
બીજા કરતાં થોડું વહેલું જાગે છે.
- Shailesh Joshi
hsc
ठंडी हवाएं, और चाय का गर्म एहसास है।
हर घूँट में घुली है एक सुकून मिठास है,
ये सभी वार भी तेरे नाम है, ये ज़िंदगी भी तेरे होने में ही स्वाद है।
Raju kumar Chaudhary
सफलता के दिग्गजों से सीख📘 पुस्तक समीक्षा: सफलता के दिग्गजों से सीख
यह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे विश्व-प्रसिद्ध सफल व्यक्तित्वों के प्रेरक विचारों का सार है, जो पाठकों को न केवल प्रेरित करती है बल्कि जीवन और करियर में आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट दिशा भी देती है। यह किताब उन लोगों के लिए खास है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने का रास्ता खोज रहे हैं।
पुस्तक का सबसे मजबूत पक्ष इसका व्यावहारिक दृष्टिकोण है। इसमें बताया गया है कि सफलता केवल भाग्य से नहीं, बल्कि सही सोच, साहसिक निर्णय और लगातार सीखने की आदत से मिलती है। रतन टाटा के विचार हमें सिखाते हैं कि ईमानदारी, दीर्घकालिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। वहीं बिल गेट्स के विचार नवाचार, तकनीक के सही उपयोग और निरंतर सीखते रहने के महत्व को उजागर करते हैं।
लेखक ने जोखिम (Risk) को नकारात्मक नहीं, बल्कि विकास का आवश्यक हिस्सा बताया है। पुस्तक समझाती है कि बिना जोखिम लिए बड़ी उपलब्धियाँ संभव नहीं हैं, लेकिन यह जोखिम सोच-समझकर और सीखने की मानसिकता के साथ लिया जाना चाहिए। असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानने की प्रेरणा इस पुस्तक की खास पहचान है।
इसके अलावा, पुस्तक बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें छोटे-छोटे चरणों में बाँटकर हासिल करने की रणनीति भी बताती है। यह पाठक को आत्मविश्वास देती है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है, बशर्ते उसकी सोच सही दिशा में हो।
भाषा सरल, स्पष्ट और प्रेरणादायक है, जिससे हर उम्र और वर्ग का पाठक आसानी से जुड़ सकता है। उदाहरणों और विचारों का चयन ऐसा है कि पढ़ते समय पाठक खुद को इन महान व्यक्तित्वों के अनुभवों से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
⭐ निष्कर्ष
यह पुस्तक केवल प्रेरणादायक कथनों का संग्रह नहीं, बल्कि सफल जीवन का व्यावहारिक मार्गदर्शक है। जो पाठक अपने करियर, व्यवसाय या व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह किताब अवश्य पढ़ने योग्य है।📘 पुस्तक समीक्षा
सफलता के दिग्गजों के विचार
यह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे विश्वविख्यात सफल व्यक्तित्वों के प्रेरणादायक विचारों का उत्कृष्ट संग्रह है। यह किताब उन पाठकों के लिए लिखी गई है जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन सही दिशा और सोच की तलाश में हैं।
पुस्तक का मुख्य संदेश है — सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि यह निरंतर सीखने, सही जोखिम उठाने और बड़े लक्ष्य तय करने से प्राप्त होती है। रतन टाटा के विचार हमें सिखाते हैं कि ईमानदारी, धैर्य और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी बड़ी ऊँचाइयों को छुआ जा सकता है। वहीं बिल गेट्स के अनुभव बताते हैं कि तकनीक, नवाचार और सीखने की भूख इंसान को असाधारण बना सकती है।
इस पुस्तक में जोखिम को डर के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखने की सीख दी गई है। लेखक स्पष्ट करता है कि बिना जोखिम लिए कोई भी बड़ी सफलता संभव नहीं है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक आवश्यक पड़ाव होती है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह केवल प्रेरणा नहीं देती, बल्कि व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। लक्ष्य कैसे तय करें, उन्हें छोटे चरणों में कैसे बाँटें और लगातार खुद को कैसे बेहतर बनाएं — इन सभी विषयों को सरल शब्दों में समझाया गया है।
भाषा सहज, सरल और प्रेरक है, जिससे नए पाठक भी आसानी से जुड़ जाते हैं। यह किताब पढ़ते समय ऐसा महसूस होता है जैसे कोई अनुभवी मार्गदर्शक हमें जीवन के महत्वपूर्ण सबक समझा रहा हो।
✨ निष्कर्ष
यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे दिग्गजों के विचार इसे पढ़ने योग्य ही नहीं, बल्कि बार-बार पढ़ने योग्य बनाते हैंयह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे सफल दिग्गजों के प्रेरक विचारों का संग्रह है। यह जोखिम उठाने, निरंतर सीखने और बड़े लक्ष्य निर्धारित कर सफलता पाने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।
किताब का लिंक कमेंट बॉक्स में..https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Imaran
ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुजर गए, आ जा कि ज़हर खाए ज़माने गुजर गए, ओ जाने वाले आ कि तेरे इंतजार में, रास्ते को घर बनाए ज़माने गुजर गए
🏕️imran 🏕️
kajal jha
ख़ामोश रातों में भी शोर सा रहता है,
तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा रहता है।
हम हँसते तो हैं दुनिया को दिखाने के लिए,
अंदर कहीं दर्द हमेशा ज़िंदा सा रहता है।
- kajal jha
samiksha
ये भविष्य की कल्पनाएं इतनी उलझन भरी क्यूं हैं
जब हकीकत सामने से ही होकर गुजरेगा।
Kartik Kule
की ख्वाहिशोके तेरे दौर को में भूलना नहीं चाहता
जिंदा दिल जमानेमे जीताहु फ़िरभी तुझे में भुलाना नहीं चाहता
तुम सदा खुश रहना वहां
जहां किसी औरके लिए जिया नहीं जाता
- Kartik Kule
Kartik Kule
की तेरी जानेके बाद हम थोड़ा बहुत मुस्करा सिख ही जाएंगे
बताएंगे नहीं पर ज़मानेसे हम रूठ ही जायेंगे
यादोंको तो तेरी भुलाना नहीं चाहेंगे
पर तेरी यादों के सात हम जी भी नहीं पाएंगे
याद रखना हमे तुम अपने ख्वाबोमे
ज़मानेसे रूठनेके बाद हम तुमसेही मिलना चाहेंगे
- Kartik Kule
Kartik Kule
की तेरी यादों कों में भुला नहीं
इंसान हु कोई पराया नहीं
वैसे तो वक्त वक्त पर याद करना चाहते थे हम पर क्या करे
घड़ी पहने वालोका ये जमाना नहीं
- Kartik Kule
Sarika Sangani
भगवान से नहीं पर अच्छी
इंसान बनने से डरती हूं मैं।
क्योंकि जब जब मैं अच्छी
इंसान बनती हूं , लोग मेरा
भगवान बनने
की कोशिश करने लगते है।
- Sarika Sangani
Sarika Sangani
भगवान से नहीं पर अच्छी
इंसान बनने से डरती हूं मैं।
क्योंकि जब जब मैं अच्छी
इंसान बनती हूं , लोग मेरा
भगवान बनने
की कोशिश करने लगते है।
- Sarika Sangani
Parag gandhi
*સાચા અને સારા છો*
*એટલે*
*લોકો તમારો*
*તિરસ્કાર નહી કરે*
*એવું*
*માની લેવાની ભૂલ*
*કદી ન કરવી,....*
*કારણ કે*
*વર્તમાન સમયમાં*
*સિધ્ધાંત મુજબ નહી*
*પરંતુ....*
*જરૂરિયાત અનુસાર*
*વ્યવહાર*
*ચાલી રહ્યો છે...*
*શુભ સવાર...*
SOHAN GHOSH
খোকা ও কাঠবিড়ালি।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি!
তুমি কি বাগানের মালি?
সকাল থেকে সন্ধ্যে,
ছুটে বেড়াও বাগানে।
পড়াশুনা না করে,
বেড়াও ঘুরে ঘুরে।
বকে না কেউ তোমায়—
বাবা-মা কিংবা কাকাই।
কি হলো, মুখ ঘুরিয়ে!
যাচ্ছো কোথায় পালিয়ে?
আরে, আরে, কাঠবিড়ালি!
গায়ে মেখে ধুলি,
চললে কোথায় শুনি!
ওরে দুষ্টু কাঠবিড়ালি!
আমায় দেখে পালাচ্ছো বুঝি?
আমার বন্ধু টিয়ে–
বাগানে যখন আসে,
তখন তুমি না পালিয়ে–
খেলা করো তার সাথে।
আমার পোষা ময়না,
তাকে দেখেও যাও না।
তবে, আমি কেন এলে
তুমি সব কাজ ফেলে,
ছুটে গিয়ে গাছে চড়ে
আমায় দেখো বারে বারে?
কি করছো? বসে গাছে।
এসো আমার কাছে।
খেলা করব দুজনে
ফুলে-ফলে ভরা বাগানে।
করো না আর চালাকি!
নিচে নেমে এসো এক্ষুনি!
শুনতে কি পাও নি?
তুমি কানে কালা নাকি?
ভালো কথা যায় না কানে,
যতই মরি চেচিয়ে।
বিচুতি পাতা তুলে এনে,
গায়ে দেব লাগিয়ে।
নিজেকে মালি ভেবে,
খুব তো করছো বড়াই
দেখবে এক্ষুনি, লাগিয়ে দেব,
কাকার সাথে লড়াই।
মাথা ভরা গোবর তোমার
ঘুঁটে হচ্ছে শুকিয়ে;
দেখবে এক্ষুনি, গায়ে তোমার
পেনের কালি দেবো ছিটিয়ে।
কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি,
বাগানের হয়েছ মালি?
বল দেখি কোন মাসে
কাশ ফুল ফোটে?
বল দেখি কোন মাসে
আউশ ধান উঠে?
বল দেখি কোন ফুল
পাকে জন্মায়?
পত্র কেন সবুজ হয়?
জবা কেন লাল?
বল দেখি ভেবে আমায়
এসব কেন হয়?
ভাব দেখাও ষোলো আনা!
এসব কি আছে জানা?
ওরে দুষ্টু কাঠবিড়ালি!
না জেনেই হয়েছ মালি।
বাগানের করে ফল চুরি
পেট করেছো ভারি।
উত্তর না দিয়ে,
যাচ্ছ কোথায় সরে?
নিয়ে যাবো দাদুর কাছে,
লেজটি তোমার ধরে।
SOHAN GHOSH
চললো খোকা।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
খোকা যাবে মামার বাড়ি,
হাতে নিয়ে মিষ্টির হাঁড়ি।
মুখে তার মিষ্টি হাসি —
যাবে খোকা মামার বাড়ি!
মামার বাড়ি যাবে খোকা,
সঙ্গে যাবে কুকুর ছানা।
পথ দেখাবে পোষা ময়না,
মামাবাড়িতে প্রচুর মজা।
SOHAN GHOSH
স্বপ্নময় সমাজ ২।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
আমাদের দেশে
কবে আসবে সে আসার সমাজ,
যেখানে মানুষ মানুষকে দেবে হৃদয়ের সাজ?
বিপদকালে থাকবে না কেউ একা,
সহমর্মিতায় গড়া হবে নতুন এক রেখা।
ভয় নয়, মায়াই হবে মানুষের মূল,
মন হবে স্বচ্ছ—থাকবে না কোনো ভুল।
না থাকবে হিংসা, না কোনো ঝগড়া,
বদলার পরিবর্তে আসবে ভালোবাসার ধারা।
দোষ করলে শাস্তি নয়—আগে আসবে শিক্ষা,
ভালোবাসার পাঠই হবে মানবতার দীক্ষা।
কথা নয়, মানুষকে চিনবে তার কাজে,
পরিচয় মিলবে কর্মেরই সাজে।
সেই সমাজে সব কাজই পাবে সমান মান,
ছোট-বড় ভেদ ভুলে দেবে হৃদয় দান।
যোগ্য হলে কেউ পাবে না সমালোচনার ভাষা—
প্রশংসাই হবে নিয়ম, ভালোবাসাই ভরসা।
মনুষ্যত্বের গড়া সেই সমাজ হবে এই আমার আশা।
वात्सल्य
तेरी उम्र का होता !!!
तेरे साथ कभी भी
खड़ा नहीं रेहता ll
क्यूंकि लोग सोचने लगते !!!
- वात्सल्य
SOHAN GHOSH
মা, আমি হব।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
মা, আমি হব —
আদর্শ ছেলে।
সকালে ঘুম থেকে উঠব
আমি সবার আগে,
নিজের সব কাজ, করব নিজে —
হাসিমুখে, শান্তভাবে।
তুমি যা বলবে,
পালন করব অক্ষরে অক্ষরে।
করব না বায়না,
করব না দুষ্টামি,
গুরুজনদের দেব
শ্রদ্ধা, সম্মান আমি।
অপমান হয় তোমার —
এমন কাজ নাহি করব।
পড়ব আমি মন দিয়ে
সারাটি দিন,
বড়ো হয়ে গড়ব ঘর
তোমার জন্য একদিন।
আর কিনব একখানি গাড়ি —
মাগো, গাড়ি চেপে
দেব আমরা দিগন্তে পাড়ি।
SOHAN GHOSH
মা, আমি হব।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
মা, আমি হব —
আদর্শ ছেলে।
সকালে ঘুম থেকে উঠব
আমি সবার আগে,
নিজের সব কাজ, করব নিজে —
হাসিমুখে, শান্তভাবে।
তুমি যা বলবে,
পালন করব অক্ষরে অক্ষরে।
করব না বায়না,
করব না দুষ্টামি,
গুরুজনদের দেব
শ্রদ্ধা, সম্মান আমি।
অপমান হয় তোমার —
এমন কাজ নাহি করব।
পড়ব আমি মন দিয়ে
সারাটি দিন,
বড়ো হয়ে গড়ব ঘর
তোমার জন্য একদিন।
আর কিনব একখানি গাড়ি —
মাগো, গাড়ি চেপে
দেব আমরা দিগন্তে পাড়ি।
SOHAN GHOSH
হাবু ও ডাক্তারবাবু।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
বিকেল থেকে হাবু,
পেটের যন্ত্রনায় বেজায় কাবু!
তাই গেলেন ডাক্তারখানা –
বললেন, “ডাক্তার বাবু,
কিছু করে সারান পেটের যন্ত্রণা!
বাঁচান আমায়, ডাক্তার বাবু”
“আজ-কাল কি খেয়েছিলে,
তা বলো দেখি, হাবু?”
“নেমন্তন্ন করেছিল কালকে –
আমাদের পাড়ার ভজা দাদু!
খেয়েছিলাম সেখানে –
ভাত-ডাল, দই-মিষ্টি-গজা!
খেতে লাগছিল কালকে ভীষণ মজা!”
“আজ সকালে বৃষ্টি হচ্ছিল রিমঝিম,
তাই খেয়েছিলাম খিচুড়ি আর
কালকের ভাজা ডিম।”
শুনে ডাক্তার বললেন ভেবে,
“তোমার চোখ দেখি আগে,
তারপর হবে পেটে!”
শুনে হাবু বেজায় কাবু,
বলল করুন সুরে,
“যন্ত্রণা হচ্ছে আমার পেটে –
তাহলে ডাক্তার, চোখ দেখো কেমনে?”
বললেন ডাক্তার রেগে,
“কালকের ভাজা ডিম দেখেও
কেমন করে তুমি খেলে –
সেটা বলো দেখি আগে!”
“যদি চাও সুস্থ থাকতে,
খাবার খাও বিবেচনা করে।
ভাত-ডাল, দই-মিষ্টি-গজা –
যতই খেতে লাগুক মজা!
খাওয়া যাবে না বেশি বেশি,
খেলে হবে শরীরের ক্ষতি।”
SOHAN GHOSH
বাগানের মালি কাঠবিড়ালি।
লেখক:– সোহন ঘোষ।
কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি,
তুমি কি বাগানের মালি?
সারা বাগান ঘুরে বেড়াও,
ইঁদুর এলে তেড়ে যাও।
আমি এলে কেন পালাও?
তুমি কি আমাকে ভয় পাও?
কাঠবিড়ালি, কাঠবিড়ালি।
তুমি কি বাগানের মালি?
SOHAN GHOSH
হাবুর শ্যালক।
লেখক:- সোহন ঘোষ। ( Sohan Ghosh)
চোখ খুলে, দেখো হাবু,
আমি তোমার শালাবাবু।
এলাম কি করে—
তা বলবো পরে।
পেয়েছে ভীষণ খিদে,
খেতে দাও আগে।
ঘরে আছে যত খাবার—
তাই দিয়েই করি আহার।
তুমি বাপু যাও বাজারে,
দই–গজা, মুড়কি–চিঁড়ে,
মাছ–মাংসও থলি ভরে।
ঝটপট আসবে নিয়ে,
খাব আজ পেট পুরে—
হাতের কব্জি ডুবিয়ে।
সঙ্গে যদি না থাকে মাছ ভাজা,
খেতে লাগে না মজা।
তাই পটল, বেগুন আর শিম ভাজা,
না পেলে দেবো তোমায় ভীষণ সাজা।
তারপর এসো নিয়ে গোবিন্দভোগ চাল,
সঙ্গে যেন থাকে মাংস আর মুগের ডাল।
আর চাই ঝিঙে–আলু–পোস্ত,
যেটা বাবা খেতে ভালোবাসতো।
সবার শেষে দেবে
দই, মিষ্টি, চাটুনি।
খেয়ে বলব, ভেবে—
তুমি কেমন রাঁধুনি?
Parmar Mayur
इंसान कोई भी विषय में उसका का 'मत और मंतव्य' कैसे देता है,
उससे ही उस इंसान की 'विवेक बुद्धि' की पहचान हो जाती है।
- Parmar Mayur
SOHAN GHOSH
ময়ূর-ময়ূরীর বিয়ে।
লেখক:- সোহন ঘোষ।
( Sohan Ghosh)
ডুমাডুম, ডুমাডুম, বাজনা বাজে।
ময়ূরের মাসি, পেখম তুলে নাচে।
ময়ূরের বিয়ে হবে আজ চাঁদনী রাতে,
পাশের গ্রামের ময়ূরীর সাথে।
ময়ূর করতে যাবে আজ বিয়ে,
বনের পাখিদের সঙ্গে নিয়ে।
রজনীগন্ধার মালা পড়ে,
ময়ূর ময়ূরীকে করবে বিয়ে।
চাঁদের আলো সাক্ষী রেখে,
নদীর ধারের ওই কদমতলাতে।
SOHAN GHOSH
Story Title: silence in the hunter’s shadow.
Writer: Sohan Ghosh.
This video is created using AI-generated cinematic visuals and ambient sound.
There is no voiceover or dialogue — only silence, atmosphere, and emotion.
The purpose of this video is artistic expression.
It does not promote violence.
It reflects how nature silently mourns when life is taken for pleasure.
Original literary content © Sohan Ghosh
All rights reserved.
Thank you for watching.
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Sonu Kumar
गौ नीति : भारतीय नस्ल के गौ-धन को सरंक्षित करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
(Gau Neeti : Proposed Notification to Protect Indian Cow )
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(इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।)
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इस कानून का सार : इस क़ानून के गेजेट में आने से देशी गाय की हत्या में कमी आएगी और गौ वंश का सरंक्षण होगा। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“मुख्यमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित गौ रक्षा क़ानून को गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 #VoteVapsiPassBook,
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======क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश। टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(I) नागरिको के लिए निर्देश :
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(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निचे दिए गए अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. गौ रक्षा अधिकारी ( Dy S.P. - Cow Protection Cell Incharge )
2. गौ कल्याण मंत्री ( Cow Welfare Minister )
3. जूरी प्रशासक ( Jury Administrator )
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(02) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। निचे दिए गए मामले जूरी ड्यूटी के दायरे में आयेंगे :
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(2.1) गौ रक्षा अधिकारी, गाय मंत्री, जूरी प्रशासक एवं उनके स्टाफ से सम्बंधित सभी प्रकार की नागरिक शिकायतें।
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(2.2) गौ वंश की तस्करी, गौ हत्या एवं देशी गाय से संबधित सभी प्रकार के मुकदमें।
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(2.3) देशी गाय के उत्पादों में जर्सी या अन्य नस्लों की गायों के उत्पादों की मिलावट को रोकने वाले कानूनों का उलंघन करने की शिकायतें।
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जूरी मंडल का चयन लॉटरी से किया जाएगा, मुकदमे की गंभीरता को देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य हो सकेंगे। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत आदि देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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(03) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (15.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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भाग (II) : नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश :
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[ टिप्पणी 1 : इस क़ानून में गाय शब्द से आशय है देशी गाय एवं उसका वंश। इस क़ानून में गौ रक्षा अधिकारी से आशय है, वह जिले का वह पुलिस अधिकारी जिसके पास गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) का चार्ज है। ]
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टिप्पणी 2 : गौ कल्याण मंत्री / मुख्यमंत्री यह क़ानून पास होने के 180 दिनों के भीतर निम्नलिखित बिन्दुओ का निष्पादन करने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगे जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जाएगा ]
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(4.1) मुख्यमंत्री एक गौ कल्याण मंत्री की नियुक्ति करेंगे। गाय मंत्री राज्य में देशी गाय या भारतीय नस्ल की गाय के सरंक्षण एवं देशी गाय के सभी उत्पादों आदि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्धारण, प्रबंधन एवं नियमन करेगा।
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(4.2) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक गौ प्रकोष्ठ ( Cow Protection Cell ) की स्थापना करेंगे। इस प्रकोष्ठ का मुखिया पुलिस उप अधीक्षक या सहायक अधीक्षक स्तर का पुलिस अधिकारी होगा, जो कि गौ रक्षा अधिकारी कहलायेगा। मामलों की संख्या को देखते हुए किसी जिले में इसके लिए अलग से अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है, या फिर किसी उप अधीक्षक को इसका अतिरिक्त चार्ज दिया जा सकता है। किन्तु यदि गौ रक्षा अधिकारी नागरिको की स्वीकृति से नियुक्त किया गया है तो वह सिर्फ गौ प्रकोष्ठ का कार्य ही करेगा।
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(4.3) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। जूरी प्रशासक गौ वंश से सम्बंधित शिकायतों एवं मुकदमो की सुनवाई के लिए जूरी मंडलों के गठन एवं संचालन का कार्य करेगा।
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(05) गौ वंश का परिवहन
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(5.1) गायो के परिवहन के लिए सिर्फ जालीदार वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। इन वाहनों पर गौ परिवहन यान लिखा रहेगा और सिर्फ इन्ही वाहनों में गायो को ले जाया जा सकेगा।
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(5.2) गौ वंश को किसी निचे दिए गए राज्यों में ले जाने पर पाबंदी रहेगी :
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5.2.1. यदि अमुक राज्य में गौ कशी कानूनी है
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5.2.2. यदि अमुक राज्य में इस तरह का कोई क़ानून नहीं है जो ऐसे राज्यों में गौ परिवहन पर प्रतिबन्ध लगाता है जिन राज्यों में गौ कशी कानूनी है।
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यदि कोई व्यक्ति ऐसे राज्यों में गौ वंश को ले जाता पाया जाता है तो मुख्यमंत्री अभियुक्त को पाँच वर्षों तक की सजा देने का क़ानून बना सकते है।
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(6) गौ शालाओं की स्थापना एवं उनका संचालन :
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(6.1) गौ कल्याण मंत्री तहसील स्तर पर गौ-शालाओ के संचालन के लिए नीति बनाएगा एवं यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक तहसील में गौ शालाओ का विधिवत संचालन हो। आवश्यकता अनुसार शहरों में 10,000 से 30,000 आबादी की प्रत्येक बस्ती में एवं पंचायत स्तर पर भी गौ शालाए खोली जा सकती है। इन गौ शालाओं को जो भी दान देगा उसे टेक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। गौ शालाएं बूढ़ी गायों को एक निर्धारित कीमत पर खरीदेगी।
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(6.2) राज्य सरकार भारतीय नस्ल की गायों का निषेचन जर्सी सांडो से करने के लिए चलायी गयी सभी योजनाओ को बंद करेगी तथा भारतीय नस्ल की गायों का गर्भाधान देशी नस्ल के उन्नत सांडो से करवाने को प्रोत्साहन देगी। यदि प्राइवेट कम्पनियां या निजी व्यक्ति जर्सी सांडो का इस्तेमाल देशी गायों के गर्भाधान में करते है तो इस पर कोई रोक नहीं होगी। सरकार शुक्राणु-विभाजन की प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिये पूंजी निवेश करेगी ताकि सांड की पैदावार कम की जा सके।
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(6.3) मुख्यमंत्री मंदिरों को राज्य सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए नोटिफिकेशन निकालेंगें ।
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(7) गौ उत्पादों को प्रोत्साहन एवं सरंक्षण
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(7.1) डेयरी उद्योगों एवं दूध विक्रेताओ को अपने दूध के डिब्बे या बोतल पर स्पष्ट रूप से यह अंकित करना होगा कि इसमें जो दूध है वह देशी गाय का है या वर्ण संकर प्रजाति का । दूध विक्रेता अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता के लिए विभाग से सर्टिफिकेट ले सकेंगे एवं छोटे पशुपालक अपनी गायों की नस्ल की शुद्धता का सेल्फ सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे। गाय मंत्री इन स्व घोषित सर्टिफिकेट को अनुमोदित करेगा।
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(7.2) यदि कोई विक्रेता अपने दूध पर देशी गाय के दूध का चिन्ह अंकित करता है और उसमे 5% से अधिक मिलावट पायी जाती है तो उस पर आर्थिक दंड या लाइसेंस का रद्दीकरण किया जाएगा। देशी गाय के उत्पादों से सम्बंधित सभी मामलो में मिलावट आदि की सुनवाई भी नागरिको की जूरी करेगी। देशी गाय के दूध के अन्य उत्पादों जैसे पनीर, घी आदि पर भी यही नियम लागू होंगे।
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(08) गाय का चमड़ा बेचने पर प्रतिबन्ध लगाया जाएगा। मृत गाय को दफनाया जायेगा या जलाया जायेगा। जूतों / बेग आदि के निर्माता अपने उत्पादों पर हरा गो-हत्या मुक्त लेबल लगा सकेंगे, जिसका मतलब होगा कि चमड़ा जिस पशु से आया है, उसकी प्राकृतिक मृत्यु हुई है और उसका मांस खाने के लिए प्रयोग नहीं किया गया था।
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(09) अधिकारियों द्वारा आवेदन एवं योग्यताएं :
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(9.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति गौ रक्षा अधिकारी के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(9.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक राज्य का गौ कल्याण मंत्री बनने के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(9.3) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 32 वर्ष से अधिक हो एवं उसे LLB की शिक्षा पूर्ण किये हुए 5 वर्ष हो चुके हो तो वह जिला जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(10) धारा 09 में दी गयी योग्यता धारण वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
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(11) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए "हाँ" दर्ज करना
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(11.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर गौ रक्षा अधिकारी गाय मंत्री एवं जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(11.2) स्वीकृति ( हाँ ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(11.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा ।
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(11.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। गाय मंत्री की स्वीकृतियों का प्रदर्शन राज्य के कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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(12) गौ कल्याण मंत्री एवं गौ रक्षा अधिकारी की नियुक्ति एवं निष्कासन
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(12.1) गौ रक्षा अधिकारी के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ रक्षा अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए गौ रक्षा अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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(12.2) गौ कल्याण मंत्री के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन गौ कल्याण मंत्री से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को गौ कल्याण मंत्री नियुक्त कर सकते है।
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(12.3) जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन जूरी प्रशासक से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री अमुक प्रत्याशी को जिला जूरी प्रशासक की नौकरी दे सकते है।
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(13) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन
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(13.1) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(13.2) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
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(13.3) यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बैठक करेंगे। बैठक सुबह 11 बजे से पहले शुरू हो जानी चाहिए और बैठक सांय 5 बजे तक चलेगी। जूरी सदस्यों को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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(14) शिकायतों एवं मुकदमो का जूरी द्वारा निपटान
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[ टिप्पणी : मुख्यमंत्री जूरी मंडल के गठन एवं संचालन के लिए आवश्यक विस्तृत प्रक्रियाएं गेजेट में प्रकाशित करेंगे, जिन्हें इस क़ानून में जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मतदाता भी इसी क़ानून की धारा 15.1 का प्रयोग करते हुए ऐसी आवश्यक प्रक्रियाएं जोड़ने का शपथपत्र दे सकता है। ]
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(14.1) धारा 02 में दिए गए सभी मामले जूरी मंडल द्वारा सुने जायेंगे। वादीगण अपने मामले की शिकायत सम्बंधित जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल के सदस्य मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है । यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए 5000 रूपये प्रति घंटे अधिकतम की दर से जुर्माना भी लगा सकते है।
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(14.2) यदि महाजूरी मंडल शिकायत स्वीकार कर लेता है तो महाजूरी मंडल मामले की सुनवाई करेगा। महाजूरी मंडल चाहे तो खुद सुनवाई कर सकता है, और यदि मामले ज्यादा है तो सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल का गठन भी कर सकता है। मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(14.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने एवं नार्क्को टेस्ट का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी द्वारा दिए गए फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील प्रवृत कानूनों के अनुसार उच्च जूरी मंडल या उच्च न्यायालय में कर सकते है।
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(15) जनता की आवाज :
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा 15.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 15.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
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======ड्राफ्ट का समापन=====
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “ मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित जिला जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापे - #GauNeeti, #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम / सीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #GauNeeti , #P20180436111 , #VoteVapsiPassbook ,
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7. Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (15) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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Gajendra Kudmate
कब तक लेती रहोगी ज़िंदगी
यूँ ही मेरा तुम इम्तेहान
बख्श भी दो मुझको अब तो
क्यों करती हो मुझको परेशान
गजेंद्र
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
नीलमणि
सजने सँवरने के लिए घर क्यूँ नहीं जाते l
नीलमणि के रत्नों से सँवर क्यूँ नहीं जाते ll
ग़र ऊँचाई से इतना डर लग रहा है तो फ़िर l
ऊंचे पहाड़ों से नीचे उतर क्यूँ नहीं जाते ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
Sunday quotes..
Raju kumar Chaudhary
द साइकोलॉजी ऑफ मनी ( The psychology of Money )📘 बुक रिव्यू: द साइकोलॉजी ऑफ मनी (The Psychology of Money)
✍️ लेखक: मॉर्गन हाउसल
🔹 परिचय
The Psychology of Money एक सामान्य फाइनेंस बुक नहीं है। यह किताब पैसे कमाने के तरीकों से ज़्यादा इस बात पर ज़ोर देती है कि हम पैसे के बारे में कैसे सोचते हैं और कैसे व्यवहार करते हैं। लेखक बताते हैं कि धन से जुड़े ज़्यादातर फैसले तर्क से नहीं, बल्कि भावनाओं, अनुभवों और मानसिकता से लिए जाते हैं।
📖 किताब का सारांश
यह किताब 20 छोटे-छोटे अध्यायों में बंटी है। हर अध्याय पैसे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मानसिक सच्चाई को समझाता है।
1️⃣ लक (Luck) और रिस्क (Risk)
लेखक बताते हैं कि अमीर बनने में सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि किस्मत और जोखिम भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई बार अच्छे लोग असफल हो जाते हैं और कई बार साधारण लोग बहुत सफल।
2️⃣ अमीर और धनवान में फर्क
अमीर (Rich): जिसके पास ज़्यादा पैसा आता है
धनवान (Wealthy): जो कम खर्च करता है और भविष्य के लिए बचाता है
असल दौलत वो है जो दिखाई नहीं देती, यानी बचाया हुआ पैसा।
3️⃣ कंपाउंडिंग की ताकत
थोड़ा-थोड़ा पैसा लंबे समय तक निवेश करने से बड़ा धन बन सकता है।
समय यहाँ सबसे बड़ा हथियार है।
4️⃣ ज्ञान से ज़्यादा व्यवहार ज़रूरी
पैसे में सफल होने के लिए ज्यादा पढ़ा-लिखा होना ज़रूरी नहीं,
बल्कि धैर्य, संयम और सही व्यवहार ज़रूरी है।
✨ किताब से मिलने वाली मुख्य सीख
✔️ पैसा हर इंसान के लिए अलग मतलब रखता है
✔️ जल्दी अमीर बनने की सोच सबसे बड़ा खतरा है
✔️ बड़ी गलती करने से बचना, बड़ी कमाई से ज़्यादा ज़रूरी है
✔️ धैर्य और अनुशासन ही असली धन है
✔️ दूसरों से तुलना करना आर्थिक दुख की जड़ है
⭐ यह किताब खास क्यों है?
आसान भाषा
असली जीवन के उदाहरण
बिना कठिन फाइनेंस शब्दों के गहरी सीख
हर उम्र और हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी
🏁 निष्कर्ष
The Psychology of Money हमें यह सिखाती है कि
“पैसा कैसे कमाया जाए” से ज़्यादा ज़रूरी है
“पैसे के बारे में सही सोच कैसे विकसित की जाए।”
अगर आप पैसे से जुड़ी तनाव, गलत फैसलों और तुलना की दौड़ से बाहर निकलना चाहते हैं, तो यह किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए।
Raju kumar Chaudhary
PSYCHOLOGY OF MONEY Book Review: "The Psychology of Money" by Morgan Housel
Morgan Housel's The Psychology of Money explores the complex and often irrational ways in which people think about and interact with money. The book is a compelling blend of psychology, history, and finance, offering valuable insights into how our emotions, biases, and experiences shape our financial decisions.
Summary:
The book is divided into 20 short chapters, each focusing on a unique concept or principle related to money. Rather than offering traditional financial advice on how to budget or invest, Housel digs deeper into the emotional and psychological aspects that govern our financial choices. Some of the major themes he explores include:
Luck and Risk: Housel emphasizes the role of luck and risk in financial outcomes. He explains how some people succeed financially due to factors outside of their control, while others, despite their best efforts, fail due to unforeseen circumstances. This perspective helps readers understand that financial success is not purely the result of skill or effort.
Wealth vs. Riches: The distinction between being rich and being wealthy is an important theme. Housel argues that wealth is often invisible—it’s the money you don’t spend. Riches, on the other hand, are often a result of conspicuous consumption, and people who appear wealthy may not actually be accumulating long-term wealth.
The Power of Compounding: Housel underscores the power of time in financial growth. Compounding returns are a critical factor in wealth accumulation, and understanding the long-term nature of investing is key to building financial security.
Behavior Over Strategy: One of the most significant insights from the book is that our behavior with money matters far more than our financial knowledge or strategy. Emotions like fear, greed, and envy can often derail even the best-laid financial plans.
Key Takeaways:
Money is Personal: The way we think about and handle money is deeply influenced by our personal experiences, culture, and upbringing. There is no one-size-fits-all approach to finances.
Financial Independence Requires Patience: The most important quality in achieving financial security is patience. Long-term thinking and consistent saving and investing, often in boring but safe options, tend to outperform the get-rich-quick schemes.
Risk Is Part of the Journey: Learning to accept risk is crucial. No financial plan is without risk, and understanding how to live with uncertainty is a necessary skill for successful money management.
Avoiding Mistakes is More Important Than Finding the Right Strategy: Housel highlights that avoiding catastrophic mistakes, such as blowing up your savings on bad investments or gambling, is often more valuable than finding the next big financial strategy.
Why This Book Stands Out:
Housel's writing is clear, accessible, and engaging. Unlike many finance books that delve deep into complex theories and formulas, The Psychology of Money uses storytelling and real-life examples to illustrate the psychological principles behind money decisions. The lessons are both simple and profound, and they apply to a wide range of readers, from those just starting their financial journey to experienced investors.
Conclusion:
The Psychology of Money is a must-read for anyone who wants to understand not just how to manage money, but why we behave the way we do with money. It challenges conventional financial wisdom and focuses on the human element that often gets overlooked. Housel’s insights provide a much-needed perspective on wealth-building that goes beyond the numbers, encouraging readers to develop a healthier, more sustainable relationship with money
kattupaya s
Good morning friends.. have a great Sunday
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
आठवड्यातून किमान एकदा..
Soni shakya
🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
कभी समय कोमल रहे, रहता कभी कठोर। समय देखकर खींचिए, बँधी हुयी जो डोर।।
दोहा--३९७
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Kinjaal Pattell
કદાચ મૌન પણ ક્યારેક બધું જ કહી દે છે, બસ તારી સમજવાની રાહ છે.
- Kinjaal Pattell
Soni shakya
आज..
चांद भी कुछ गुमनाम सा लगता है..
शायद..
उसे भी किसी ने नज़र अंदाज़ किया होगा..
- Soni shakya
Sohagi Baski
# যে চোখে আমি তোমাকে দেখেছি
তোমাকে আমার মনের কথা
আমি কোনোদিন বলিনি,
কারণ কিছু কথা
বলার আগেই ভেঙে যায়।
রোজ কথা হয়,
রোজ দেখা—
তবু প্রতিটা দেখা
আমাকে একটু একটু করে
একলা বানিয়ে দেয়।
আমি যেই চোখে তোমাকে দেখি,
সেই চোখে স্বপ্ন ভিজে থাকে,
ঘুমহীন রাত,
আর এমন একটা ভয়—
যেটা হারানোর আগেই
হারিয়ে ফেলে ।
তোমার চোখে আমি শুধু
একটা পরিচিত নাম,
একটা সময় কাটানোর মানুষ,
যাকে না থাকলেও
খুব একটা শূন্য লাগে না।
আমার হাসির আড়ালে
অনেক জল জমে থাকে,
চোখ দুটো ভিজে ওঠে
তোমার সামনেই—
কিন্তু তুমি কখনো দেখো না।
আমি চেয়েছিলাম
তুমি একদিন বলবে,
“আমি বুঝতে পারছি”—
কিন্তু তুমি শুধু বললে,
“সব ঠিক আছে তো?”
সব ঠিক নেই…
কিন্তু তোমার সামনে
কষ্ট দেখানোটা
আমার সাহস হয়নি।
আমি যে চোখে তোমাকে দেখেছি,
সেই চোখে আমি নিজেকেই
হারিয়ে ফেলেছি—
আর তুমি,
আমাকে কখনো
সেই চোখে দেখোনি।
সমাপ্তি 🍁
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
ज़ख्मी, हकीकत लिखने बैठे तो
कागज़ जलने लगते हैं,
मेरे लहजे की शिद्दत से, मुकद्दर
ढलने लगते हैं,
तुम्हें आता है हुनर, सिर्फ दिलों
पर नाम लिखने का,?
मगर जब मैं तंज़ करता हूँ, तो
पत्थर पिघलने लगते हैं,
मेरे लफ़्ज़ों में वो ज़हर है, जो
रूह को भी काट दे,
सुनें जब चीख मेरी कलम की
तो मंज़र बदलने लगते हैं,
गया वो वक़्त, जब शायर सिर्फ
ख़्वाब बुनते थे,
ज़ख्मी के महफ़िल में तो, अब
मुर्दा जमीर भी चलने लगते हैं,
संभल कर तू भी रहना, ऐ
मोहब्बत पर लिखने वाले,
वरना मैं वो हूँ, जिसके ज़िक्र से
अफ़साने जलने लगते हैं…🔥
╭─❀🥺⊰╯
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
Anil singh
"नमस्ते प्रिय पाठकों!
मेरी कहानी 'सौदे का सिंदूर' के पहले तीन भागों को आपने जो प्यार और सम्मान दिया है, उसके लिए मैं आपका तहे दिल से आभारी हूँ। आप सभी के रिव्यु और रेटिंग्स ने मेरा उत्साह हमेशा बढ़ाया है।
अब कहानी एक रोमांचक मोड़ पर है! क्या आप भाग 4 पढ़ने के लिए उत्सुक हैं?
अगर आप चाहते हैं कि मैं जल्द ही अगला अध्याय लेकर आऊं, तो कृपया कमेंट्स में अपनी राय दें। यह भी जरूर बताएं कि अब तक की कहानी आपको कैसी लगी? आपके शब्द ही मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा देते हैं।
- Anil singh
Anil singh
"प्रिय मित्रों,
'सौदे का सिंदूर' सिर्फ एक कहानी नहीं, मेरे द्वारा बुने गए जज्बात हैं। भाग 1, 2 और 3 को मिली आपकी प्रतिक्रियाओं ने मुझे भावविभोर कर दिया है।
मैं इस समय भाग 4 की रूपरेखा तैयार कर रहा हूँ, लेकिन उसे शब्दों में पिरोने के लिए मुझे आपके साथ और हौसले की जरूरत है।
आपको यह कहानी कितनी पसंद आ रही है?
क्या आप कहानी के अगले मोड़ के लिए तैयार हैं?
अपनी राय कमेंट्स में जरूर साझा करें। आपकी एक-एक टिप्पणी मेरे लेखन के सफर को ऊर्जा प्रदान करती है। इंतज़ार रहेगा!"
धन्यवाद!
"आपका लेखक, अनिल सिंह"
Narendra Parmar
कभी कभी बद्दुआएं भी अपने दुश्मन के लिए दुआं का काम
करतीं हैं !
क्योंकी जीस के लिए हम बददुआ करते हैं ईश्वर से,अक्सर
उनकी उम्र बढ़ती है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Raju kumar Chaudhary
कभी रिश्ते सिर्फ़ नाम के होते हैं,
लेकिन कुछ लोग… नाम के पीछे छिपी एक पूरी दुनिया को भी पहचान लेते हैं।
रागिनी अब सिर्फ आरव की बीवी नहीं थी —
वो अब खुद की पहचान की लड़ाई में उतर चुकी थी।"
रागिनी अपने पुराने दोस्तों से मिलती है
दोस्त:
रागिनी! तू तो एकदम बदल गई है।
रागिनी (मुस्कुराकर):
हाँ… अब मैं सिर्फ किसी की पत्नी नहीं,
खुद की कहानी भी हूँ।
दोस्त:
अब क्या करने का सोच रही है?
रागिनी:
एक NGO शुरू करूँगी — उन औरतों के लिए,
जिन्होंने अपनी आवाज खो दी है, जैसे मैंने खोई थी।
बॉस:
तुम्हारी वाइफ का NGO मीडिया में काफी वायरल हो रहा है।
आरव (हैरान):
क्या? उसने मुझे बताया भी नहीं…
(खुद से बड़बड़ाता है):
रागिनी… तुम मुझसे इतनी दूर कब हो गई?
आरव:
तुमने इतना बड़ा कदम अकेले क्यों उठाया?
रागिनी (शांत लेकिन दृढ़):
क्योंकि जब मैंने तुम्हारे साथ चलना चाहा,
तुमने मुझे पीछे छोड़ दिया था।
आरव:
मैं… शायद तुम्हें समझ नहीं पाया।
रागिनी:
अब समझना नहीं, साथ चलना सीखो।
"जब औरत अपने डर से बाहर निकलती है,
तब वो सिर्फ एक साथी नहीं रहती —
वो खुद की दुनिया बन जाती है।"
Raju kumar Chaudhary
कभी रिश्ते सिर्फ़ नाम के होते हैं,
लेकिन कुछ लोग… नाम के पीछे छिपी एक पूरी दुनिया को भी पहचान लेते हैं।
रागिनी अब सिर्फ आरव की बीवी नहीं थी —
वो अब खुद की पहचान की लड़ाई में उतर चुकी थी।"
रागिनी अपने पुराने दोस्तों से मिलती है
दोस्त:
रागिनी! तू तो एकदम बदल गई है।
रागिनी (मुस्कुराकर):
हाँ… अब मैं सिर्फ किसी की पत्नी नहीं,
खुद की कहानी भी हूँ।
दोस्त:
अब क्या करने का सोच रही है?
रागिनी:
एक NGO शुरू करूँगी — उन औरतों के लिए,
जिन्होंने अपनी आवाज खो दी है, जैसे मैंने खोई थी।
बॉस:
तुम्हारी वाइफ का NGO मीडिया में काफी वायरल हो रहा है।
आरव (हैरान):
क्या? उसने मुझे बताया भी नहीं…
(खुद से बड़बड़ाता है):
रागिनी… तुम मुझसे इतनी दूर कब हो गई?
आरव:
तुमने इतना बड़ा कदम अकेले क्यों उठाया?
रागिनी (शांत लेकिन दृढ़):
क्योंकि जब मैंने तुम्हारे साथ चलना चाहा,
तुमने मुझे पीछे छोड़ दिया था।
आरव:
मैं… शायद तुम्हें समझ नहीं पाया।
रागिनी:
अब समझना नहीं, साथ चलना सीखो।
"जब औरत अपने डर से बाहर निकलती है,
तब वो सिर्फ एक साथी नहीं रहती —
वो खुद की दुनिया बन जाती है।"
Narendra Parmar
हसीनाओं पर ज़्यादा भरोसा मत किजिए
कभी कभीअपने दोस्त और बड़े बुजुर्गो की बात मान लिजिए
फिर भी आप उनकी बात नहीं सुनेंगे तो ??
ग़लती तुम्हारी है फिर आप हसीना को दोष मत दिजिए ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Suraj Prakash
मैंने वो लाल टॉफी खाई और मेरा भविष्य मिट गया! #समय #जिंदगी #प्रेरककहानी
https://youtu.be/WKvT6FBM20Y?si=yIcxantQkcRBLpcz
Rajeev Namdeo Rana lidhori
Pigeon, two types of sparrows and squirrel eating biscuits at a fixed place on the boundary wall of #Akanksha_Public_School_Tikamgarh
कबूतर, दो प्रकार की गौरैया चिड़िया और गिलहरी एक निर्धारित स्थान #आकांक्षा_पब्लिक_स्कूल_टीकमगढ़ की बाउंड्री वॉल पर बिस्कुट खाती हुई
#rajeev_namdeo #
#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी
#tikamgarh
Parmar Mayur
एक सवाल बार-बार दिल को दर्द दे जाता है।
जो किस्मत में हे वो तो मिल ही जाता है,
सब कहते हैं,
पर उनका क्या?जो एक-दूजे के दिलों में रहते हुए भी पास रहे नहीं।
- Parmar Mayur
Parmar Mayur
एक सवाल बार-बार दिल को दर्द दे आता है।
जो किस्मत में हे वो तो मिल ही जाता है,
सब कहते हैं,
पर उनका क्या?जो एक-दूजे के दिलों में रहते हुए भी पास रहे नहीं।
- Parmar Mayur
Bitu
करके बेपनाह मोहब्बत मुझसे आपने
मुझे आम से खास बना दिया ,
लिखकर आपके नाम के साथ मेरा नाम जनाब
मैने भी दुनिया को आपसे रूबरू करा दिया ।
Bitu....
S K I N G
परिश्रम का alarm रोज बजता है,
उसे इतवार की छुट्टी नहीं होती ।
इसलिए फालतु लोगों से दूर रहो
न उनको पोस्ट पर भी आने दो
ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए
ये मतलबी होते है
किसी एक के कभी नहीं हो सकते
50 जगह मुंह मारने की आदत होती हैं
उषा जरवाल
छल - प्रपंच को आवरण की आवश्यकता होती है ।
सच तो स्वच्छंद होकर सामना करता है ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
उषा जरवाल
बातों की मिठास अंदर के भेद नहीं खोलती । मोर को देखकर कौन कह सकता है कि ये साँप खाता होगा ?
- उषा जरवाल
S K I N G
मौत जब आती हैं कदम अपने आप उसी और चलने लगते है
Jyoti Gupta
#AnandDham #HanumanJi #Bajrangbali #HanumanPooja #BhaktiReels #ViralReels #DivineDarshan #ReelsIndia #JaiBajrangbali#HanumanShorts #BhaktiShorts #TempleShorts #TrendingShorts #ViralShorts #GodBlessings #DivineShorts#ExplorePage #TrendingReels #SpiritualVibes #SanatanDharma #IndianGods #TrendingNow
Raa
प्रकृति हमेशा कामजोर को ही शिकार बनाती है। इसलिए इतना kमजोर मत रहो के आपको कोई सताएगा।
kमजोर बनोगे तो मारे जावोगे
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/14LjomQC4AG/
આજની વાસ્તવિકતા રજુ કરતી વાર્તા.
Anup Gajare
ताज अटैक हुआ था। परिवार, गली के लोग, शहर के लोग, राज्य के लोग… यहां तक कि पूरे देश के लोग टीवी में घुसे हुए थे, हर कोई स्क्रीन के सामने सिहर रहा था। और मैं? मैं डांबर की खाली सड़क पर खड़ा था, धूप सीधी चेहरे पर पड़ रही थी, बस उसी लड़की का इंतजार कर रहा था जो अभी कहीं उस सड़क पर से गुजरने वाली थी। दुनिया का सारा शोर मेरे चारों तरफ था, लेकिन मेरे लिए समय थम गया था।
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
{{ वफ़ा का कत्ल }}
मैं अपनी प्यास के सहरा में ख़ुद ही
जलता रहा,
वो जिस के हाथ में खंजर था साथ
चलता रहा,
वो मेरे साथ भी रहा, पर कभी
मेरा न हुआ,
किसी की याद में साँचे की तरह
ढलता रहा,
अजीब ज़ब्त है उसका, अजीब
शिद्दत है,
वो बेवफ़ा था मेरे लिए, पर कहीं
वफ़ा करता रहा,
मेरी शिकस्त पे हँसने की उसे
फुर्सत न मिली,
वो रकीबों के लिए मय-कदे में
मरता रहा,
अरे ये कैसी ज़िल्लत है कि अब मैं
दाद दूँ उसकी.?
जो मेरे लहू से किसी और का
दामन भरता रहा,
वो सगे-कूचा नहीं, वो तो वफ़ा का
मुजरिम है,
जो मेरे सामने रह कर भी, गैरों पे
मरता रहा…🔥
सगे-कूचा= गली का कुत्ता,
╭─❀🥺⊰╯
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#LoVeAaShiQ_SinGh°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
SHIVA
સંબંધ ભલે પેહલા જેવો હોય કે ના હોય, ભલે બધું બદલાઈ જતું હોય, પણ જે યાદો હોય છે એ નથી બદલાતી. I JUST LOVE TO BE IN THERE ALWAYS. WE BOTH ARE CHANGED EXCEPT THE MEMORIES..
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
Abhishek Kunehadiya
इंतजार
S K I N G
मैं चाह रहा तुम्हारे साथ इतना बुरा हो
कि तुम मर जाओ और किसी को ख़बर ना हो
cat
यूं रास्तों को क्यूं ताकता है तू,
मैं पूछती हु ....
" कोई आने वाला है क्या..?? "
written by me 🥀🥀
cat
यूं रास्तों को क्यूं ताकता है तू,
मैं पूछती हु ....
" कोई आने वाला है क्या..?? "
written by me 🥀🥀
Paagla
https://youtube.com/shorts/I4g_nnzD0Hc?si=RsBgaK8y3eYsGChk
Arun Mishra
प्यार जितना अधिक खुश देता है , उससे ज़्यादा उसे खोने का डर दर्द देता है , प्यार करना जितना आसान होता है, उससे ज्यादा तो उसको बुलाने में लगता है , पहले तो मैं लोगों को देखकर बोलता था कि नहीं होता है , पर जब आज उस स्थिति में जब मैं मुझे डर लग रहा है ,सोचकर जान निकल जाती है प्लीज मुझे इस दर्द से निकलने का कोई तरीका दे प्रेम में मुक्ति कैसे मिलेगी
Hayat
https://www.instagram.com/reel/DTchAcJEa2o/?igsh=MTdnMnRzZm1ldGwyZw==
Hayat
एक नाव में पैर पसारे.. ऐसे कैसे
वो भी प्यारे हम भी प्यारे ऐसे कैसे... 😔😔😂😂
- Hayat
aakanksha
तेरा इश्क़ मेरे हर दर्द की दवा बन गया,
तेरे आने से ही मेरा हर लम्हा ख़ुशनुमा बन गया।
जो सन्नाटा था रूह में, वो भी मुस्कुरा उठा,
तेरे होने से ही मेरा हर पल हसीं बन गया।
Dhamak
શિયાળાની એક આરામદાયક સાંજે,
મારા વીચારો😊
"ખરેખર, જીવનની સાચી શાંતિ
નાની-નાની પળોમાં જ છુપાયેલી હોય છે.
શિયાળાની ઠંડી સાંજ હોય,
બારીની બહાર શીતળ પવન લહેરાતો હોય,
રૂમમાં ઝીણી કમ્ફર્ટેબલ લાઈટનો મીઠો પ્રકાશ હોય
અને હાથમાં ગરમાગરમ મસાલા ચાનો કપ હોય...
સાથે ગમતું પુસ્તક અને પોચા,નરમ ઓશીકાનો
સાથ હોય, ત્યારે મનને સાચો આરામ મળે છે.
બસ, થોડા ધીમા પડો, ઊંડો શ્વાસ લો અને
આજની આ સુંદર પળને માણી લો;
આવતીકાલની ચિંતાને થોડીવાર માટે થોભાવી દો."
(મારા આ વિચારો આજની ગુલાબી ઠંડીને નામ)
લી. ઢમક
Anup Gajare
वृत्त कहानी – 1
शहर के बाहर निर्वात-सी सुनसान सड़क पर गाड़ी धीमे चल रही थी। काले रंग का वाहन अंधकार से ही पैदा हुआ लग रहा था। रास्ते के दोनों तरफ घने पेड़ों के पत्ते हवा से लहरा रहे थे।
फुटपाथ पर धूल थी। वहाँ से दिन में भी कोई नहीं गुजरता था। जगह ही ऐसी थी। खेतों का इलाका पीछे छूट चुका था। अब माहौल में मनुष्य के होने की संभावना न के बराबर थी—सिवाय गाड़ी में बैठे उस मनुष्य के।
क्या कर रहा था वह इस सन्नाटे में? बियाबान सड़कों पर सियाह गाड़ी में इस तरह के वातावरण में कोई यूँ ही तो नहीं घूमता।
पर उसका वहाँ होना इस बात की चुगली कर रहा था कि कुछ तो हुआ था—ऐसा कुछ, जो भीतर तक बेचैन कर दे। नहीं तो उसके यहाँ होने की कोई वजह ही नहीं थी।
पेशे से वह आदमी इस शहर का कमिश्नर था। दिखने में न तो बहुत बूढ़ा, न ही बहुत जवान। चौकोर चेहरा, धँसी हुई आँखें, मद्धम नाक, गालों पर गड्ढे—ये सब इस बात की निशानी थे कि कभी बहुत बड़े रोग से उसका सामना हुआ था—रोग या…
बाल संवारे हुए थे। मूँछों को ताव नहीं दिया था; वे बस अपनी जगह थीं। निचला होंठ थोड़ा बड़ा था—यही वजह थी कि ऊपर का होंठ थोड़ा छोटा नजर आता। ऐसा लगता, मानो उसने अपने निचले होंठों में पान दबाकर रखा हो।
उसका नाम विलास सारंगी था। कद-काठी न तो बहुत पतली थी और न ही वह इंसान हट्टा-कट्टा था। विलास लेदर की जाड़े वाली जैकिट से हमेशा खुद को ढके रखता था। नीचे खाकी पैंट होती और गले में लाल चौकोनों की लकीर वाला पंचा लटका रहता।
सारंगी अब तक विवाहशुदा नहीं था। शादी करने या न करने का कोई खास कारण नहीं था—बस हुई नहीं थी। और अब तो कोई सवाल ही नहीं उठता था कि इस तमाम झमेले में वह फँस जाए।
लेकिन अगर सही उम्र में विलास सारंगी शादी करता, तो उसकी संतानें वर्तमान में ठीक बीस साल की होतीं। उसने शादी नहीं की क्योंकि उसके फक्कड़ पिता ने कभी विवाह नहीं किया था।
पिता गटर या नाली में पड़े रहते। उनके शरीर से बदबू आती—मुँह से और भी उग्र, बासी बू। वे कभी नहाते नहीं थे।
पिता ने विलास को अपना ‘सारंगी’ नाम दिया था। बाकी ‘विलास’ नाम तो किसी पान के ठेलेवाले भैया ने उसे चिपका दिया था।
उसके पिता को विलास सूखी नदी के पास रेत पर पड़ा हुआ मिला था। किसी मांत्रिक की अधूरी साधना में, नदी के ठीक बीचोबीच, गांजे से बने वृत्ताकार गोले में एक नवजात बच्चा बिलग रहा था। मांत्रिक अपनी साधना अधूरी छोड़ चला गया था—चला गया था या भाग गया था, कहना मुश्किल था। पिता ने नवजात बच्चे को उठाया और गंदी नाली के पास चले आए। उन्होंने उसे पाला—या कहना सही रहेगा कि विलास अपने आप ही पल गया।
पिता नहीं जानते थे कि वह मांत्रिक उस नवजात बच्चे, यानी विलास, को कहाँ से उठाकर लाया था।
मांत्रिक बहुत गांजा फूँकता था। गाँव में भीख माँगता, खाना खाता—और फिर गांजा फूँकता। शायद इसलिए विलास के शरीर से तीव्र गांजे की गंध आती थी, पर नाली के काले पानी से वह हमेशा बुझ जाती। पूरे गाँव में कोई भी उस मांत्रिक को टोकता नहीं था। गाँव उससे डरता था।
मांत्रिक हर पेड़ के इर्द-गिर्द गांजे से गोल वृत्त बनाता। फिर वह पेड़ सूखने लगता। नदी भी शायद इसी वजह से सूखी थी। यह मंत्र फूँकने वाला गाँव में कहाँ से आया था—किसी को पता नहीं था।
धीरे-धीरे विलास के पिता जैसे और भी लोग उसकी संगत में रहने लगे। वे सब गोलाकार बैठते, बीचोंबीच एक अलाव लगाते। उस आग से गांजे की तीव्र गंध गाँव के रसोईघरों से निकले सफेद धुएँ में मिल जाती।
वे लोग काली गुड़िया के भीतर गांजा रखते। उन दिनों ऐसी ढेर सारी काली गुड़ियाँ गाँव के पेड़ों पर झूलती हुई दिखती थीं।
ऐसे माहौल में ही विलास सोलह साल का हो गया। एक दिन मांत्रिक पीपल के वृक्ष पर चढ़ा था। वक्त रात का था। वहाँ कोई नहीं था।
पता नहीं कैसे मांत्रिक का पैर फिसल गया और वह जमीन पर नहीं, बल्कि पीपल से सटे सिंदूर लगे पत्थर पर गिर गया। उसका खून पत्थर पर रिस रहा था। वह चीखा नहीं—गिरते ही उसने दम तोड़ दिया।
लोग जमा हुए तो सबने देखा कि मांत्रिक की उँगलियाँ वृक्ष की सबसे ऊँची टहनी की ओर उठी हुई थीं—वहीं, जहाँ से वह गिरा था। शायद वहाँ कोई बैठा था। हवा में पैर हिलाती, किसी बच्चे-सी आकृति उस टहनी पर थी। गाँववाले उसे देखकर सिहर गए। किसी ने पड़ताल नहीं की कि वह आकृति कौन थी।
उस रात के बाद सब कुछ जैसे ठंडा पड़ गया। गाँव में अब किसी भी पेड़ के इर्द-गिर्द वृत्त दिखाई नहीं देते थे। धीरे-धीरे पेड़ों की शाखाओं पर लटकी काली गुड़ियाँ भी कम होती गईं। फिर एक दिन ऐसा आया कि एक भी उल्टी लटकी काली गुड़िया किसी ने नहीं देखी।
जब विलास सारंगी सोलह बरस का था, उसका गाँव गांजा-मुक्त हो गया था। यह इतना आसान नहीं था—विलास ही जानता था कि उसके पिता ने सब कुछ ठीक होने के लिए क्या किया था…
तो यही था विलास सारंगी का अतीत। इस भूतकाल को कंधे पर लिए वह कैसे शादी करता? अगर करता, तो यकीनन बीस-इक्कीस साल के उसके बच्चे होते।
सारंगी आज इसी वजह से बहुत अस्वस्थ था। किसी बीस साल के छात्र ने उससे सवाल किया था। छात्र उसके न हुए बेटे की उम्र का था—अगर उसकी अपनी औलाद होती, तो क्या उसका भी यही सवाल होता?
उस छात्र ने सीधे पूछा था—“सर, गांजा पीनेवाले या बेचनेवाले लोगों तक नाबालिग कॉलेज के लड़के भी पहुँच जाते हैं, तो फिर पुलिस क्यों नहीं पहुँच पाती? ये सब बंद क्यों नहीं होता? क्या हम इसी चक्र में फँसे रहेंगे?”
सवाल ठीक निशाने पर बैठा था। इसके बाद उसे चक्कर आया। कुर्सी पर बिठाकर पानी दिया गया। भीड़ जमा हो गई—कोई कह रहा था बीपी बढ़ गया, कोई शुगर।
विलास सारंगी की बेचैनी का यही कारण था। वही सवाल उसकी अंदरूनी हालत बिगाड़ रहा था। इसी वजह से वह इतनी रात गए इस बियाबान, निर्मनुष्य माहौल में भटक रहा था।
कई दिनों की खोज के बाद उसे इस जगह के बारे में पता चला था।
यह कोई साधारण जगह नहीं थी। पेड़ों की टहनियों पर नींबू-मिर्च वाली काली गुड़ियाँ उल्टी लटकी हुई थीं। रात के अंधकार में वे भयावह दिख रही थीं। लगभग हर पेड़ के इर्द-गिर्द गोलाकार वृत्त खींचे गए थे। यही वह जगह थी, जहाँ से शहर में बिकने वाला हजारों टन गांजा आता था। यहाँ भी वही हो रहा था, जो सालों पहले उसके गाँव में हुआ था।
गाड़ी रोककर वह नीचे उतरा। अब विलास पैदल चल रहा था। उसके चमड़े के लाल जूतों की कोई आहट नहीं हो रही थी।
ढलान से उतरते हुए वह करंजी के पेड़ के पास आ गया। उल्टी लटकी गुड़िया देखना उसे अच्छा नहीं लग रहा था। तने की मटमैली जमीन पर वृत्त बना था—उसकी गोल रेखाएँ गांजे से खींची गई थीं।
सारंगी के ओबड़-खाबड़ गाल तन गए। धँसी आँखों में विस्मय नहीं, बल्कि घृणा और गुस्सा था। उसका बड़ा होंठ थरथराने लगा। उसने गले में लटके लाल पंचे में राख भर ली। तेज बदबू हवाओं में फैल गई।
“गांजा कहीं भी जाए, अपनी गंध कभी नहीं छोड़ता।” पिता के सालों पुराने शब्द उसके दिमाग को छलनी कर रहे थे। उसने करंजी के पेड़ के इर्द-गिर्द बने वृत्त को पंचे में लपेटकर गाँठ मार दी—यह करना उसके पिता ने ही सिखाया था।
फिर वह पेड़ की टहनी पर चढ़ गया। उल्टी लटकी गुड़िया डर पैदा कर रही थी, लेकिन यह करना जरूरी था। जैकिट की जेब से कटर निकालकर उसने गुड़िया का सिर धड़ से अलग कर दिया।
सन्नाटा। आठ सेकंड तक कोई हलचल नहीं।
और फिर—एक चीख। कोई हाँफ रहा था, चीख रहा था। वह जो भी था, सारंगी की ओर बढ़ रहा था। लकड़बग्घे जैसी शिकारी हँसी करंजी के इर्द-गिर्द फैल गई। गहरी साँसें गर्म हवा में घुलकर आँखों में खौफ भर रही थीं।
उसे अहसास हो चुका था कि उसकी जान ही नहीं, उससे कहीं ज्यादा कुछ दाँव पर था। कोई अज्ञात अस्तित्व घास को काँपता हुआ उसकी ओर बढ़ रहा था।
डर अपनी जगह था, लेकिन उसे एक अधूरे काम के पूरा होने का सुकून भी मिल रहा था। वह जानता था कि उसके साथ क्या होने वाला है—कभी उसके पिता ने भी तो यही भुगता था। सारंगी तैयार था।
लेकिन…
आहट धीमी होती गई, जैसे वह अस्तित्व पीछे हट रहा हो।
सारंगी के गले में हुक-सी अटक गई। उसे समझ नहीं आ रहा था—ऐसा तो नहीं होना चाहिए था। उसने काली गुड़िया का सिर काटा था, फिर वह पीछे क्यों हट रहा था?
उसे अपने गंजेड़ी पिता याद आए।
सालों पहले, नाली के पास, पिता ने गांजे से गोलाकार वृत्त बनाया था। उसमें आग जलाई और बीच में बैठ गए थे। सामने वही सिंदूर लगा पत्थर रखा था—जिस पर गिरकर मांत्रिक मरा था।
पिता ने अपने खून से वृत्त बनाया और मंत्र बुदबुदाते हुए काली गुड़िया का सिर काट दिया। गंध फैली, जुबान कड़वी हुई, अंधकार छा गया। यह सब सोलह साल का विलास पेड़ के पीछे से देख रहा था।
उसी रात पिता ने कहा था—“वह मांत्रिक बस जरिया था… असली चीज़ कुछ और थी।”
और जाते-जाते उन्होंने बताया था—“विलास… वह मांत्रिक ही तेरा असली बाप था।”
विलास फूट-फूटकर रो पड़ा। इसलिए नहीं कि उसके माने हुए पिता मर गए थे—बल्कि इसलिए कि उस रात पीपल की टहनी से मांत्रिक को धक्का देने वाला वही था।
वही वह बच्चे-सी आकृति था। और अब उसे समझ आ गया था कि वह किस बोझ को ढोते हुए जी रहा है
Kajal Rathod...RV
अगर मैं खुद से ही झूठ बोल दूं... तो मेरा बोलना किस बात का।
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
https://youtube.com/shorts/QCMahf9E9Qg?feature=share
Narendra Parmar
मत किजिए हसिनाओं से इश्क़
इसमें है लड़कों को बहुत सा रिश्क !
मिल जाए इश्क़ तो, लड़के को बल्ले बल्ले 😄😅😂
नहीं तो फिर लडका पागल होकर 💔😫😫😩
दिवाल पर अपना सर पटके और दर दर भटके ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
Bhavna Bhatt
આંગળી ચીંધવા વાળા
Nilesh Rajput
बड़ा अजीब सा इश्क़ निभा रही है वो,
जिसे मंदिरों की राह कभी रास न आई,
आज उसी मोहब्बत के सजदे में,
वो मस्जिदों के दर तक झुक आई।
Heena Ramkabir Hariyani
एक शिक्षा भगवानने दी मुझे "स्त्री" बनाके,
एक शिक्षा मेरी माँ ने दी अहमियत समझाके
हीना रामकबीर हरीयाणी
Raju kumar Chaudhary
📘 पुस्तक समीक्षा: सवाल ही जवाब है
पुस्तक का नाम: सवाल ही जवाब है
विधा: विचारात्मक / दर्शन / आत्मचिंतन
भाषा: हिंदी
✨ समीक्षा:
“सवाल ही जवाब है” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सोचने की एक नई दिशा है। यह किताब पाठक को सीधे जवाब नहीं देती, बल्कि ऐसे सवाल सामने रखती है जो पाठक को खुद के भीतर झाँकने पर मजबूर कर देते हैं। लेखक का मानना है कि जीवन के बड़े उत्तर बाहर नहीं, हमारे भीतर छिपे होते हैं—बस सही सवाल पूछने की ज़रूरत होती है।
किताब की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल भाषा और गहरी बात है। हर अध्याय एक नए प्रश्न से शुरू होता है, जो धीरे-धीरे जीवन, समाज, रिश्तों, संघर्ष और आत्मा से जुड़ी परतें खोलता है। लेखक कहीं उपदेश नहीं देता, बल्कि पाठक को खुद सोचने की आज़ादी देता है।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए बेहद खास है—
जो जीवन में उलझन महसूस करते हैं
जो खुद को बेहतर समझना चाहते हैं
जो जवाबों से ज़्यादा सही सवालों की तलाश में हैं
📌 विशेष बिंदु:
✔️ छोटी-छोटी पंक्तियों में बड़ा अर्थ
✔️ आत्मचिंतन को प्रेरित करने वाली शैली
✔️ हर उम्र के पाठक के लिए उपयोगी
✔️ बार-बार पढ़ने योग्य पुस्तक
⭐ निष्कर्ष:
“सवाल ही जवाब है” हमें यह सिखाती है कि जीवन में हर समस्या का हल तुरंत जवाब में नहीं, बल्कि सही सवाल पूछने में छिपा होता है। यह किताब सोचने वालों की किताब है, महसूस करने वालों की किताब है।
Raju kumar Chaudhary
📖 Book Review – सवाल ही जवाब है
पुस्तक: सवाल ही जवाब है
लेखक: [लेखक का नाम]
वर्ग: विचार, आत्मचिंतन
समीक्षा:
“सवाल ही जवाब है” एक ऐसी किताब है जो आपको अपने जीवन के हर पहलू पर सोचने पर मजबूर कर देती है। यह किताब सीधे उत्तर देने की बजाय सही सवाल पूछने की कला सिखाती है। लेखक ने सरल और प्रेरक भाषा में ऐसे प्रश्न उठाए हैं जो आपके अंदर झाँकने और खुद को समझने की यात्रा शुरू कर देते हैं।
यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन में स्पष्टता, दिशा और आत्म-ज्ञान की तलाश में है। चाहे रिश्ते हों, संघर्ष हों या समाज की जटिलताएँ—यह किताब आपको सोचने और समझने की ताकत देती है।
क्यों पढ़ें:
जीवन के बड़े सवालों के जवाब खोजने के लिए
आत्मचिंतन और सोच को मजबूत करने के लिए
हर पढ़ने पर नए विचार और प्रेरणा पाने के लिए
⭐ अंतिम विचार:
यह किताब केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि महसूस करने और अपने भीतर झाँकने की यात्रा है। “सवाल ही जवाब है” आपकी सोच को बदल सकती है और आपको अपने जीवन के सही सवाल खोजने में मदद कर सकती है।
Chaitanya Joshi
સ્વેટર, મફલરને ટોપી સાથે રખાવે.
શિયાળો સૌના અંગેઅંગને ધ્રૂજાવે.
ઠંડા પાણી થકી સર્વને એ અકળાવે.
શિયાળો સૌના અંગેઅંગને ધ્રૂજાવે.
મઝા અડદિયાની કેવી એ અપાવે,
ઓળા રોટલા પણ થાળીમાં લાવે.
જલદીથી પ્રભાતે પથારી ના મૂકાવે,
શિયાળો સૌના અંગેઅંગને ધ્રૂજાવે.
આનંદ પતંગોત્સવનો જે અપાવે,
તડકો સૂરજનો તપીતપી ગરમાવે.
કાળઝાળ ગરમી ગ્રીષ્મની ભૂલાવે.
શિયાળો સૌના અંગેઅંગને ધ્રૂજાવે.
વૃદ્ધ વડિલોને ઠંડી સહેજે ઠંગરાવે
તોયે સ્ફૂર્તિ સૌના શરીરમાં સંચારે.
ચોરે ચૌટે કેવાં તાપણાંઓ પ્રગટાવે,
શિયાળો સહુના અંગેઅંગને ધ્રૂજાવે.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Desai Pragati
किसीके लिए यादें बनना बुरी बात नहीं मगर,
कोशिस रहे की वो यादें अच्छी हो..!
Shailesh Joshi
આપણી ક્ષણે ક્ષણનો હિસાબ
ઈશ્વર પાસે હોય છે, અને ઈશ્વરનો હિસાબ તો
એકજ છે કે,
"જેવું વાવો તેવું લણો"
- Shailesh Joshi
syed amina
💕✨ke log kehte hai tumhari dosti to kuch dinon ki mehmaan hai
be tum kya jaano hamari dosti to zindai bhar ka ehsaas hai✨👀
Sonu Kumar
प्रेम Vs विवाह ; राजनीति Vs चुनावी राजनीति
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सभी प्रेम कहानियों के साहित्यों में एक गलत बात को बार बार दोहराया गया है कि -- जमाना प्यार का दुश्मन है !!
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यह बात ठीक नहीं है कि - ज़माना प्रेम का दुश्मन है। जमाने (जिसमें परिवार, समाज आदि शामिल है) को किसी भी व्यक्ति के प्रेम से कोई सख्त ऐतराज नहीं रहा है। जमाने को असली ऐतराज विवाह से होता है।
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और जब जमाना किसी के प्रेम पर ऐतराज कर भी रहा होता है तो उसका यह ऐतराज इस वजह से होता है कि कहीं प्रेमी युगल प्रेम करते करते विवाह न कर बैठे !!
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सलीम और मुगले आजम में इसीलिए ठन गयी थी कि सलीम अनारकली से निकाह करने पर अड़ गया था। यदि सलीम सिर्फ प्रेम तक सीमित रहता तो अकबर को कोई दिक्कत न थी। चाहे सलीम रोज नई अनारकली से प्रेम करें।
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और सभी लैला-मजनूओं की दास्तानों का सार यही है। जब तक बात प्रेम तक सीमित है, तब तक जमाना अनदेखी करता है। पर जैसे ही जमाने को विवाह का अंदेशा होता, जमाना बीच में कूद जाता है।
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यदि ज़माने को यह मुतमइन कर दिया जाए कि अमुक व्यक्ति सिर्फ प्रेम ही करेगा, और अपने प्रेमी से विवाह नहीं करेगा तो जमाना उसके प्रेम में बाधा नहीं बनता। उसे वह प्रेम करने की छूट दे देता है।
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क्योंकि जमाना आपको अपनी सम्पत्ति के रूप में देखता है, और प्रेम से जमाने कोई साम्पत्तिक हानि नहीं होती। ज़माना चाहता है कि आप प्रेम किसी से भी करो और कितनो से भी करो, और करते रहो, किन्तु विवाह सिर्फ वहां करो जहाँ जमाना चाहता है। क्योंकि यदि आप जमाने के खिलाफ जाकर विवाह कर लेते है तो जमाने को लगता है कि उसने नियंत्रण खो दिया है।
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यही शर्त "राजनीति एवं चुनावी राजनीति" पर लागू होती है।
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राजनीति में रुचि लेना, राजनैतिक विमर्श करना, जुलुस, प्रदर्शन, आन्दोलनो में हिस्सा लेना, सोशल मीडिया पर सरकार एवं राजनैतिक पार्टियों को कोसना आदि को जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) निरापद प्रेम के रूप में देखता है। और जमाने को आपकी इस प्रेमल राजनैतिक रुचि से कोई ऐतराज नहीं।
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जमाना सिर्फ इतना चाहता है कि -- जब चुनाव आये तो आप उनके द्वारा खड़ी की गयी पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कोंग्रेस, सपा, आपा, बसपा, अकाली आदि) को वोट देकर आ जाओ। बस !!
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और वोट देने के बाद अगले 5 साल तक आप फिर से अपने अपने राजनैतिक प्रेम में खुद को व्यस्त कर सकते है। और ज़माना आपको कभी डिस्टर्ब करने नहीं आएगा।
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जमाना (पेड मीडिया के प्रायोजक) सिर्फ इतना चाहता है कि आप जमाने द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों के वोट काटने के लिए कोई नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम न करें।
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यदि आपको नया राजनैतिक विकल्प चाहिए तो जमाना आपको नया राजनैतिक विकल्प (नवीनतम उदाहरण "आपा") बनाकर दे देगा। किन्तु कार्यकर्ता खुद से कोई राजनैतिक विकल्प खड़ा करने पर काम करे तो जमाने को ऐतराज है।
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क्योंकि यदि मतदाताओं को पेड मीडिया पार्टियों के एजेंडे के खिलाफ काम करने वाला राजनैतिक विकल्प मिल जाता है तो जमाने द्वारा खड़ी पेड मीडिया पार्टियों को वोटो की हानि होगी। और वोट ही राजनैतिक जगत की वास्तविक सम्पत्ति है।
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इस वजह से पेड मीडिया युवाओं को "चुनावी राजनीती" में आने से हतोत्साहित करता है।
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राजनीती में रुचि लेने वाले ज्यादा से ज्यादा युवा यदि "चुनावी राजनीति" में आने लगेंगे तो चुनाव लड़ने वाले लोगो की संख्या बढ़ जाएगी। तब राजनीति से चुनावी राजनीति में शिफ्ट हुए ये कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ नया राजनैतिक विकल्प खड़ा करने की दिशा में काम करने लगेंगे।
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और युवाओं को चुनावी राजनीती में आने रोकने के लिए उन्होंने कितने कानूनी, सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक लेंड माइन्स बिछा कर रखे है, इसे मैं लिखने जाऊँगा तो 1000 पृष्ठों में भी इसे समेटा नहीं जा सकता।
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सार यह है कि -- कार्यकर्ताओ को "राजनीती एवं चुनावी राजनीति" के बीच के फर्क को समझना चाहिए। वे आपको राजनीति में रुचि लेने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करेंगे किन्तु चुनावी राजनीति में रुचि लेने से हतोत्साहित !!
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और इस बात को अच्छे से नोट कर लें कि, जब भी कोई देश, समाज, राजनीति आदि की बात करने वाला कोई व्यक्ति या समूह इस मंशा से आपके पास आएगा कि आप राजनीती में रुचि ले किन्तु "चुनावी राजनीति" से दूरी बनाकर रखे तो वह हमेशा "जागरूक करने" की टर्म का इस्तेमाल करेगा !!
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दरअसल, जब कोई व्यक्ति यह कहता है कि - मैं लोगो को जागरूक कर रहा हूँ तो उसका उद्देश्य राजनीती में रुचि रखने वाले कार्यकर्ताओ को चुनावी राजनीति में आने से रोकना होता है।
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और राजनीती में रुचि रखने वाले लोगो को चुनावी राजनीती में आने से रोकने की प्रक्रिया को कुछ भी कह कर नहीं पुकारा जा सकता। इसीलिए इसे वह "जागरूक करने की प्रक्रिया" कह कर पुकारता है।
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जिस प्रेम को विवाह से इनकार है वह क्या है ?
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मुहब्बत जो डरती है -- अय्याशी है, गुनाह है : सलीम उवाच, मुगले आजम
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सलीम अनारकली से मुहब्बत को मुगले आजम से छिपाने से इनकार कर देता है। क्योंकि सलीम अनारकली से शादी करना चाहता था। और इसीलिए वह जानता था कि वह कोई गुनाह नहीं कर रहा। विवाह गुनाह नहीं है। किन्तु वे सभी अपने प्रेम को गुनाह की तरह इसीलिए छिपाते है क्योंकि विवाह को लेकर उनमें संशय होता है।
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Raju kumar Chaudhary
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Kamini Shah
પાનખરને હૈયે વસંતની
પધરામણી
મળી છે પ્રીતનાં પગરવની
એંધાણી…
-કામિની
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