Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
हो कौन बता दो
हो कौन बता दो एक बार तो बताना पड़ता हैं l
है ग़र इश्क़ तो बारहा बोलके जताना पड़ता हैं ll
मासूमियत और नजाकत को बरकरार रखके l
अंदर ओ बाहिर से खुद को सजना पड़ता हैं ll
यू खामोशी से इज़हार ए मोहब्बत नहीं होती l
तकाजा ये रश्में मोहब्बत का निभाना पड़ता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Rashmi Dwivedi
जिसका हाथ महादेव ने पकड़ रखा है दुनिया वाले उसकी कितनी भी टांग खींच ले उसे गिरा नहीं सकते। महादेव का सिंहासन लगा लो अपने मन के कक्ष में फिर होंगे सारे फैसला आपके पक्ष में। हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Imaran
आप भी हो गए हम से बेवफ़ा,
हमको यह ऐतबार ही नहीं होता,
हम तो कोसते हैं अपने आप को ही,
काश आपसे प्यार ही नहीं होता
💔imran 💔
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ख्याति देखकर भ्रात की, करे भ्रात षड्यंत्र। रहो सजग तुम भ्रात से, यही नैश का मंत्र।।
दोहा --४४९
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
MASHAALLHA KHAN
मुक्कदर मे शायद वो शक्स है ही नही
जिसको सजदो मे गिर कर मांगा है हमने .
-MASHAALLHA
kattupaya s
simple living is living with your potential abilities. keep going on your goal
kattupaya s
Morning walk is good for health. walking along with your crush is good for heart.
kattupaya s
Nothing brings happier in early morning than the tea prepared by loved ones for us.
kattupaya s
In life we do lot of mistakes and poor decision s. it not only affects us and others too. we pledge to take right decisions.
kattupaya s
Very Good morning friends.. Have a great day
Mare Do Alfaz
तुझे हक है अपनी दुनिया में
खुश रहने का..
मेरा क्या है....
मेरी तो दुनिया ही तू है...
- Mare Do Alfaz
Bindiya
બીજ રોપાયું
વૃક્ષ થયું મજાનું
તારા પ્રેમનું.
ASHISH KUMAR
"वो जो कहता था कि कुछ नहीं होता,
अब उसे देखो, उसे भी दर्द होता है।
मिटा कर अपनी सारी खुशियाँ जिसके लिए,
आज वो ही पूछता है कि 'तुम्हें क्या होता है?'"
"ज़ख्म कहाँ-कहाँ से मिले छोड़ो ये बात,
ज़िंदगी तू ये बता, अभी सफर कितना बाकी है।
हमने तो दिल खोल कर वफ़ा की थी उनसे,
शायद उन्हें हमारी वफ़ा ही कम जान पड़ती है।"
"बड़ी तब्दीलियाँ लाया है तुम्हारा छोड़ कर जाना,
अब हम अक्सर आईने में खुद को भी नहीं पहचानते।"
ASHISH KUMAR
"हकीकत कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
शिकवा करो तो उन्हें मजाक लगता है।
कितनी शिद्दत से हम उन्हें याद करते हैं,
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।"
ASHISH KUMAR
"दिल के पास आपका चेहरा कुछ इस तरह बसा है,
जैसे एक छोटी सी मुस्कान में सारा जहाँ छुपा है।"
ASHISH KUMAR
"धड़कन संभल जाती है तुम्हें देखने के बाद,
मगर ये दिल मचल जाता है तुम्हें सोचने के बाद।"
ASHISH KUMAR
"हज़ार महफ़िलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।"
બદનામ રાજા
હૈયાનાં હંસલા ઉડી જાય,
પછી મોતીના હારના મોહ ન હોય...
🌸
annu
हार मानू नकोस कधी,
मार्ग कठीण असला तरी चालत राहा.
वादळे कितीही आली तरी,
स्वप्नांच्या दिशेने धावत राहा.
पाय थकले तरी मन थकू देऊ नको,
अडथळे आले तरी थांबू नको.
प्रत्येक अपयश शिकवण देत असते,
त्यातूनच यशाची वाट सापडत असते.
आकाशाला स्पर्श करायचा असेल तर,
धाडस मनात ठेवावं लागतं.
स्वप्न पूर्ण करायचं असेल तर,
मेहनतही मनापासून करावी लागते.
आज नाही जमलं तरी उद्या जमेल,
प्रयत्न कधीच वाया जात नाहीत.
जिद्द आणि विश्वास ठेव स्वतःवर,
यशाचे दरवाजे कायम बंद राहत नाहीत.
Soni shakya
ना चाहते हुए भी उसे स्वीकारना पड़ा..
जिसे 'समझौता' कहते हैं..
- Soni shakya
M K
मेरी गलती पर मत हँसा कर
कहते हैं कर्म किसी को नहीं छोड़ता है
घूम फिर कर एक दिन वापस लौटता ही है....
" कहते हैं न जैसी करनी वैसी भरनी "
- M K
M K
मुझे रौशनी नहीं अंधेरा पसंद है,
कहते हैं अंधेरा छटने के बाद एक नया सवेरा होता है..!!
- M K
M K
मैं , मेरी आदतों से नाराज़ तो नहीं हूं
अंदर से आवाज़ आया, बस थोड़ी सी टूट चुकी हूं
बदल तो नहीं गई मै.....
हां, तकलीफें बढ़ कर तनाव का कारण बन चुकी है
सबको मैं गुस्सैल लगती हूं,,,
पर मेरे अंदर दबे जज़्बातों को कोई समझ नहीं पाता,
मैं ठीक हूं या नहीं....
कोई सवाल नहीं करता.....!!!!
- M K
Mara Bachaaaaa
ताउम्र अपने बनाने की तलब लिए बैठे थे,
मंजूर न था रब को, शिक़ायत किन्हें करे!
- Mara Bachaaaaa
રોનક જોષી. રાહગીર
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Narendra Parmar
मोहब्बत में आप काफी जानकारी रखतीं हों
दिमाग तो आपके पास दो पैसे का भी नहीं है
फिर भी आप सों रुपए का हिसाब रखतीं हों ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Mrudhula
This poem feels like a conversation with my own mind.
Every line reminds me that life is not just about thinking, but acting:
To ask questions,
To search for answers,
To try despite failures,
To journey with focus,
To win moments of success,
To preserve knowledge,
And finally, to make the right decisions.
It reminds me that my mind is powerful, and even when others doubt me or I face obstacles, my choices and efforts shape my life.
When I read it aloud, I feel motivated, focused, and ready to move forward.
It is like a map for my mind, guiding me from thought to action, from struggle to wisdom.
kalpita
पन्नों में कैद
मैंने चाहा था उसे पन्नों में कैद करना,
मगर वो तो स्याही बनकर
मेरी हर लकीर में बह गया।
कुछ लफ्ज़ बिखर गए
कुछ अल्फ़ाज़ निखर गए
लहू का रंग बनकर
मेरी नस नस में वो रम गया ।
चाहा था मैंने मोहब्बत जताना उससे,
लबों तक आकर हर बार ठहर गया।
वो इश्क़ न बन सका ज़िंदगी का,
मगर ख़ुदा बनकर इबादत में रह गया।
शने: शने: बदल रही है रफ्तार जिंदगी की
धुंधली सी पड़ रही है यादें मेरे यार की
’कल्पिता’ की बंद आंखों के कोने में
कतरा आंसू बन कर बस गया। ❤️
कल्पिता 🌻
SAYRI K I N G
ये बात कहना बहुत ज़रूरी है, ज़िंदगी मेरी है मगर, तेरा होना बहुत ज़रूरी है...!!
SAYRI K I N G
अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो डीजल नब्बे पेट्रोल सौ
सौ मे लगा धागा सिलेंडर ऊछल के भागा.
Avinash
https://www.instagram.com/arise_with_avi?igsh=MWp1ZDQ1anBwYTV0cQ==
A singh
हमने तो चाहा था उसे दिल से भी ज्यादा,
पर शायद हमारी चाहत ही कम पड़ गई।
वो तो छोड़ गया हमें बीच राह में,
और हमारी जिंदगी बस यादों में सिमट गई। 💔
kattupaya s
Goodnight friends.. it's time for dinner take care
kattupaya s
I asked her do you love me? she just laughed and closed her eyes.
Rajeev Namdeo Rana lidhori
https://youtu.be/PagjnEaQl2w?si=p2j3lJI45bMrUcnL
#साहित्य_अकादमी भोपाल द्वारा आयोजित #कवि_सम्मेलन की #झलकियां-#रपट
प्रस्तुति - #राजीव_नामदेव '#राना_लिधौरी'
#sahitya_acadmi #विकास_दवे @highlight
kattupaya s
Everything is going to change. That's the world's rule. but nothing going to change your loneliness.
kattupaya s
looks like you are in a dream world with her. in dream world everything is an illusion. you are living with illusion
kattupaya s
She is listening to all your stories means she is just believe in horror stories nothing else
kattupaya s
Reality is you are just a introvert. it's enough for the reason to be a single
kattupaya s
When you are too much worried nothing going to happen. yes you are worrying about your crush's breakup.
kattupaya s
yes iam committed to my home loans and the Emi that i have to pay..
बिट्टू श्री दार्शनिक
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Thank you for your support 🙏🏽😊
#poetry #love #book
kattupaya s
The most painful thing is people thinking that you are committed to someone by judging your personality.
Paagla
https://youtube.com/shorts/JcfehqsmOWg?si=g1hA9cN4LJEZS5Iv
Paagla
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वात्सल्य
तेरी जीवन की कहानिमे दम था,मै पुरी सुनता रहा!!!
कहानी खतम कर तूम सो गई,मै रोता रहा,रात जगता रहा ll
- वात्सल्य
Shailesh Joshi
જે સ્થિતિમાં છીએ એજ સ્થિતિમાં
"થોડા સમયમાં જ"
જીવવાની મજા આવવા લાગશે,
બસ વધારે કંઈ નહીં, આજથી જ
વાત કોઈપણ હોય,
સાચું ખોટું કરાવવાની આદત છોડી દો.
- Shailesh Joshi
Harikrishna
નથી છતાં છો, પણ જ્યાં છો ત્યાં ખૂબ છો .....
kattupaya s
Good evening friends.. have a great weekend
Harikrishna
એ દિલ તું સાવ આવું કેમ?
તું ચાહે , એ ન ચાહે , તો ભુલાવુ કેમ?
તારે છે એક , એને પણ એક
પછી એનું થાવું, તો થાવું પણ કેમ?
ના કહી સકુ કંઇ , ના સહી શકુ હું
બોલ પછી મારે, ના મૂંઝાવું કેમ?
તારા મુંજાવાનો , કોઈ ફેર નથી પડતો
છતાં તારું આટલું , ચાહવું કેમ?
ચહેરો તો સંતાડી , સંઘરીએ રાખું
પણ પ્રેમને ભીતર , સંતાવું કેમ?
કાયાને માર મારી , સિધી ય કરી દઉં
પણ દિલ ! તને હાકથી સમજાવું કેમ?
આશ ઘણી રાખી , તું ફરતું ગુમાનમાં
છે એને પણ તું નઈ, તો કચવાવું કેમ?
શ્વાસ તો રોજ રાત, ધ્રુસ્કા ભરે છે
હવે આંખોને આમ સાવ, ભીંજાવું કેમ?
કરું કોશિશ કે , લાચાર ના દેખાઉં
પણ મુસ્કાન વગર , મુખ મલકાવું કેમ?
તું પણ નફ્ફટ ,એવું થઈ જા દિલ
આ 'નિંભર' ને રોજ, પછી લલચાવું કેમ?
Arun V Deshpande
शुभ संध्या💐
Sonu Kumar
जब कुरान में ऐसी आयतें लिखी हुई हैं, जिनमें लिखा है कि गाय का मांस नहीं खाना चाहिए, फिर मुस्लिम लोग गाय को काटकर क्यों खाते हैं?
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भारत में शरिया नाफ़िज़ नहीं है, इसीलिए इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि कुरान में क्या लिखा है। किसी भी राज्य का शासन गेजेट में लिखी गयी इबारतो पर चलता है, कुरान, बाइबिल या मनु स्मृति में लिखे गए दर्शन पर नहीं।
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(A) मध्य काल :
भारत में गायों पर सबसे पहला हमला अलाउद्दीन खिलजी ने किया था। उसके शासन काल में काफी गायें काटी गयी।
बाबर के शुरुआती दौर में गाय काटने की अनुमति थी लेकिन बाद में बाबर ने गौ कशी पर प्रतिबन्ध लगा दिए थे। बाबर जब मरा तो हुमायूं को वसीयत कर गया था कि, हिन्दुस्तान में गाय न कटने देना।
अकबर, जहांगीर एवं शाहजहाँ के काल में भी गाय काटने पर प्रतिबन्ध रहे।
औरंगजेब ने अपने शुरूआती दौर में गाय काटने की इजाजत दी, लेकिन कुछ वर्षो के बाद उसने भी गेजेट में गाय न काटने के आदेश निकाल दिए थे
उसके बाद से बहादुर शाह जफ़र तक लगातार गाय काटने पर प्रतिबन्ध जारी रहे।
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(B) ब्रिटिश काल :
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जब गोरे भारत आये तो हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाने के लिए कई सारे क़ानून छापें। पेड इतिहासकार इन कानूनों के बारे में कभी नहीं लिखते बल्कि उनकी इस नीति को सिर्फ “फूट डालो राज करो” टाइप का अस्पष्ट वाक्य लिखकर निपटा देते है। यदि पेड इतिहासकार कानूनों की डिटेल लिखेंगे तो पाठक यह जान जायेंगे कि मौजूदा सरकार कौनसे क़ानून छापकर और कौनसे कानूनों की अवहेलना करके गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढाने में कर रही है।
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बहरहाल, गोरो ने भारत में गाय काटने की अनुमति देना शुरू किया। नीति यह थी कि गाय काटने की इजाजत देने से मुस्लिम तबका गाय खाने लगेगा, और इससे हिन्दूओ में रोष पैदा होगा। तो क़ानून आने के बाद कत्लखानो में गायें कटने लगी और हिन्दू-मुस्लिमो में तनाव बढ़ने लगा। 1870 के आस पास भारत में पहला गौ बचाओ आन्दोलन शुरू हुआ। यह आन्दोलन देश व्यापी था और लगभग 25 वर्षो तक निरंतर बढ़ता रहा। लेकिन गोरे टस से मस नहीं हुए। बल्कि उन्होंने अदालत से यह रूलिंग निकाली कि गाय हिन्दुओ के लिए पवित्र नहीं है, अत: इसे काटना जायज है !! इसी दौरान गाय काटने को लेकर हिन्दू-मुस्लिम दंगे भी होने लगे।
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(C) आजादी के बाद :
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जवाहर लाल के शासन काल में गौ कशी जारी रही। बाद में साधु-संतो इस मांग को लेकर संसद का घेराव किया गया और इंदिरा जी ने भारत के उन सभी राज्यों में गौ कशी निषिद्ध क़ानून बनवाये जहाँ पर कोंग्रेस सरकार थी।
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तो भारत के ज्यादातर राज्यों में गौ हत्या प्रतिबन्ध के क़ानून तो है। लेकिन जिन राज्यों में गौ हत्या गैर कानूनी है, उन राज्यों में भी गाय काटी जाती है। वजह ?
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असल में सभी क़ानून ठीक से तभी काम करते है, जब क़ानून तोड़ने वालो को पकड़ने वाली पुलिस एवं दंड देने वाली अदालतें ठीक से काम करती है।
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भारत में कोई भी क़ानून ठीक से काम नहीं करते, और वे ठीक से इसीलिए काम नहीं करते क्योंकि भारत की पुलिस एवं अदालतें ठीक से काम नहीं करती। असल में, भारत की पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा भ्रष्ट है, और इसीलिए भारत के सभी प्रकार के विभागों में भ्रष्टाचार है। जब तक हम पुलिस एवं अदालतें नहीं सुधारते तब तक गौ कशी को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सकता।
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(D) समाधान ?
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मैंने इस समस्या के समाधान के लिए 2 क़ानून प्रस्तावित किये है
गौ हत्या रोकने के लिए गौ-नीति नामक क़ानून ड्राफ्ट
पुलिस एवं अदालतें सुधारने के लिए जूरी कोर्ट नामक क़ानून ड्राफ्ट
यदि प्रस्तावित गौ नीति को गेजेट में छाप दिया जाता है तो भारत में गाय काटना लगभग बंद हो जायेगी, और देशी गाय की प्रजाति का सरंक्षण शुरू होगा। गौ नीति नामक क़ानून ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य देशी गाय की प्रजाति को बचाना है।
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट मेरा मुख्य प्रस्ताव है, और यह भारत की पुलिस एवं अदालतों को सुधारने के लिए लिखा गया है। जूरी कोर्ट एक अलग क़ानून है, इसका ड्राफ्ट आप जूरी कोर्ट मंच में देख सकते है।
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(E) पेड मीडिया काल : असली बाधा
सबसे पहले आपको एक बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए कि आज के दौर में भारत की ऐसी कोई भी राजनैतिक पार्टी या नेता पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं दिखा सकता, जिसका फोटो आप पेड मीडिया यानी कि मुख्य धारा के टीवी चैनल्स एवं अख़बारो में देखते हो।
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गाय बचाने में रुचि रखने वाले लगभग सभी कार्यकर्ता इस बात की अवहेलना कर रहे है कि गाय को लेकर पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है।
ऐसे क़ानून जारी रखना जिससे गाय का इस्तेमाल करके हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाना।
देशी गाय की प्रजाति को लुप्त करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
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दुसरे शब्दों में, पेड मीडिया में नजर आने वाली भारत की मुख्य धारा की किसी पार्टी के नेता गाय बचाने के भावुक या उकसाऊ बयान तो दे सकते है, किन्तु गाय बचाने का क़ानून गेजेट में नहीं छाप सकते। मतलब यदि आप पेड मीडिया पार्टियों से गाय बचाने का क़ानून छापने की उम्मीद कर रहे है, तो सालों साल इन्तजार करने के बाद भी अंत में आपको निराशा ही हाथ लगेगी।
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मेरे विचार में यदि आपको देशी गाय की नस्ल बचाने में रुचि है तो निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए :
प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून का ड्राफ्ट पढ़ें
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने राज्य के मुख्यमंत्री को ट्विट भेजे कि वे गौ-नीति के ड्राफ्ट को गेजेट में छापे। आप चाहे तो यह ट्विट पीएम को भी भेज सकते है।
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यदि आपको लगता है कि प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून ठीक नहीं है, तो जिस भी पार्टी से आपको उम्मीद है, उसके नेताओं को ट्विट करें कि वे गौ हत्या रोकने के लिए जिस क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन करते है, उसका ड्राफ्ट आपको भेजे। यदि अमुक पार्टी के नेता आपको कोई जवाब नहीं देते है तो अमुक पार्टी के कार्यकर्ताओ से ड्राफ्ट मांगे। सोशल मीडिया पर आपको अमुक पार्टी के कार्यकर्ता आसानी से मिल जायेंगे।
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यदि अमुक पार्टी के नेता या कार्यकर्ता आपको गौ हत्या रोकने का कोई ड्राफ्ट नहीं देते है, तो मेरे विचार में यह बात साबित है कि उन्हें गाय बचाने की बातें करने में तो रुचि है, किन्तु गाय बचाने के लिए आवश्यक क़ानून लागू करने में उनकी रुचि बिलकुल नहीं है। और जैसा कि मैंने ऊपर बताया पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित पार्टियाँ गाय बचाने के एलान तो दे सकती है किन्तु वे इसके लिए आवश्यक क़ानून गेजेट में छापने का समर्थन नहीं कर सकती है।
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अगले चरण में सोशल मीडिया पर अपनी मित्र सूची तलाश करें। वहां पर आपको काफी कार्यकर्ता मिलेंगे जो गाय बचाने को लेकर मुखर रूप से लिखते है, और इसमें रुचि लेते है। उनसे पूछे कि वे गौ हत्या रोकने के लिए कौनसा क़ानून गेजेट में छपवाना चाहते है ? उनसे भी ड्राफ्ट मांगे।
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इस तरह गाय में रुचि रखने वाली सभी पार्टियों, नेताओं, कार्यकर्ताओ आदि से गाय बचाने का ड्राफ्ट माँगना शुरू करें। यदि इनमे से कोई व्यक्ति आपको कोई ड्राफ्ट देता है तो उसके ड्राफ्ट की तुलना गौ-नीति ड्राफ्ट से करें। यदि उनका ड्राफ्ट बेहतर है तो उस ड्राफ्ट की मांग करें और मुझे भी वह ड्राफ्ट भेजे, ताकि मैं भी अमुक ड्राफ्ट को गेजेट में छापने के लिए पीएम को कह सकूं।
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यदि कोई भी व्यक्ति आपको इसका ड्राफ्ट नहीं देता है तो उन्हें प्रस्तावित गौ-नीति का ड्राफ्ट दें, और उनसे कहें कि यदि वे प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो पीएम को ट्विट भेजकर इस मांग को आगे बढ़ा सकते है।
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सार : कुरान या ऐसे धर्मग्रंथो आदि में जो भी लिखा हो उसका पालन लोग अपनी सुविधानुसार एवं चयनात्मक रूप से करते है, किन्तु गेजेट में लिखी हुई इबारत का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होता है। सार यह है कि जिन नागरिको को गाय बचाने में रुचि है उन्हें गेजेट में लिखी हुई इबारतो पर ध्यान देना चाहिए, कुरान में लिखी आयतों पर नहीं !!
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कैसे पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में देशी गाय की नस्ल पर एकाधिकार बनाने की नीति पर काम कर रहे है, कैसे वे गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने में करते है, और कैसे इसे रोका जा सकता है, इसका विवरण मैंने इस जवाब में विस्तार से दिया है। इस जवाब में ही मैंने प्रस्तावित गौ-नीति क़ानून के विवरण भी दिए है।
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भारत में देसी गाय की क्या स्थिति है? देसी गाय को कैसे बचाया जा सकता है --https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/862195567486855/
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और एक बात – भारत में गाय को लेकर हिन्दू-मुस्लिम तनाव घटता बढ़ता रहेगा। किन्तु यदि ईरान एवं अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो भारत में यह तनाव निर्णायक स्तर पर बढ़ जाएगा। गाय का इस्तेमाल करके पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में ऐसे सिविल वॉर को ट्रिगर कर सकते है जो दशको लम्बा खिंच सकता है।
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और जब अमेरिका ईरान पर हमला करेगा तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि वे इसे ट्रिगर कर देंगे। लेकिन यदि भारत के कार्यकर्ता प्रस्तावित गौ-नीति गेजेट में छपवाने में सफल हो जाते है, तो पेड मीडिया के प्रायोजको के हाथ से तंदूर दहकाने का एक अस्त्र निकल जाएगा।
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Dada Bhagwan
ભગવાન ન્યાયસ્વરૂપ નથી ને ભગવાન અન્યાયસ્વરૂપેય નથી. કોઈને દુઃખ ના હો એ જ ભગવાનની ભાષા છે. ન્યાય-અન્યાય એ તો લોકભાષા છે. - દાદા ભગવાન
વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/j3lFLg7D
A singh
जहाँ “ॐ नमः शिवाय” की गूंज होती है,
वहीं हर भक्त की जिंदगी खुशनुमा होती है।
हर हर महादेव 🔱
Imaran
मुझे कबूल है हर दर्द, हर तकलीफ तेरी चाहत में..
सिर्फ इतना बता दो, क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत कबूल है
🫶imran 🫶
Ajit
બેરહેમ થયા છો કે કસોટી લઈ રહ્યા છો પ્રભુ.....?
એક જ વ્યક્તિ હતું મનગમતું એ પણ લઈ લીધું.....!
જિંદગી ની "યાદ"
ASHISH KUMAR
पौरों के लिए एक रूहानी और खूबसूरत शायरी:
"नज़रों से दूर सही, पर दिल के करीब तो हो,
मेरे खुदा से मांगी हुई सबसे प्यारी नसीब तो हो।
धड़कनों को भी अब तुम्हारी ही आदत सी है,
मेरे हर लफ्ज़ में छुपा हुआ छोटा सा राज़ तो हो।"
ASHISH KUMAR
"अधूरा सा एहसास"
तुम मिले तो जैसे हर दुआ मुकम्मल हो गई,
वीरान सी इस ज़िंदगी में खुशियों की हलचल हो गई।
न जाने क्या जादू है तुम्हारी इन खामोश नज़रों में,
कि तुम्हें देखते ही मेरी हर मुश्किल सरल हो गई।
कभी सुबह की पहली किरण सा ताज़ा है तुम्हारा एहसास,
कभी रात की चांदनी सा सुकून भरा तुम्हारा साथ।
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरी हर एक बात में,
जैसे तुम ही बसे हो मेरी धड़कन और मेरी हर सांस में।
मोहब्बत में बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी,
कि हर जन्म में मुझे ये पनाह मिले तुम्हारी।
दुनिया की इस भीड़ में मुझे और कुछ न चाहिए,
बस उम्र भर के लिए मुझे ये बाहें मिले तुम्हारी।
Siboniso BoyBoy Dlamini
WHY AREN'T YOU FOLLOWING ME GUYZ❗❗❗❗
Siboniso BoyBoy Dlamini
what do you guys think? is it necessary for part 2 or its good as it is?
I need your opinions ❗❗❗❗
Avinash
हेलो दोस्तो,
मेरी फर्स्ट किताब " अधूरी धुन - भाग २" पब्लिश हो गया है।
आप आपका मूल्यवान समय निकालके जरूर पढ़ें और कमेंट करे आपके रिव्यू।
धन्यवाद 💫
Bhatt Bhavin
કંઇક ચાહત આવી પણ..... ગઝલ / ભટ્ટસાહેબ
રાતની રાતો કરી છે, એમને જોવા અમે,
એમને ક્યાં ભાન છે ક્યાં, બેઠા છી રોવા અમે.
ગમતું એ એકાદ ઘર પણ, સાચવી ના શક્યા એ,
પાપની આંધી લઈને, પાપ ગ્યાં ધોવા અમે.
જે દિવાલો પર ચિત્રોને, કોતર્યા 'તા એ હવે,
ભૂસવા માટે કલરના, ડબ્બા ગ્યાં લેવા અમે.
એ બધી કોલેજની વાતો, અમે ભૂલ્યા હતા,
ને લગનના દાડે બેઠા, ઝેરને પીવા અમે.
જે ચહેરાને અમે, જોયો નથી કોઈ દિવસ,
એ હવે સાહેબ માટે, શોધવા આયા અમે.
Prita
When You Call
You build your words like castles in the sky,
Promises shining, but fading, they lie.
You leave me stranded, half-way through,
Like my heart’s a thing you can undo.
I stay, because love still pulls me near,
Even as cracks form, even as I fear.
But one day, the breaking will reach its end,
And I won’t be there for you to mend.
When you call my name, you’ll hear only air,
No soft reply, no “I’ll be there.”
And maybe then you’ll start to see,
What your promises have cost of me.
बिट्टू श्री दार्शनिक
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Don't forget to write your feedback. 😊
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#book
Ajit
એક તરફ વિશ્વાસ આપો છો ને પારેવાની પાંખો કાપો છો તમે....
સ્નેહ રૂપી ભ્રમમાં નાખીને અડધી રાતે કેમ રડાવો છો તમે......
જિંદગી ની "યાદ"
ASHISH KUMAR
श्रीकृष्ण के अनुसार 'श्रेष्ठ व्यक्ति' कौन है?
श्रीकृष्ण कहते हैं कि वही व्यक्ति श्रेष्ठ है जो:
• सुख और दुःख में एक समान रहता है।
• जिसमें धैर्य (Patience) और क्षमा करने की शक्ति
है।
• जो दूसरों की सफलता से जलता नहीं, बल्कि सबके
कल्याण की कामना करता है।
ASHISH KUMAR
5. वर्तमान में जीना (Living in the Present)
श्रीकृष्ण का एक बहुत ही सुंदर विचार है:
"जो हुआ, वह अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।"
• हमें अतीत (Past) का पछतावा और भविष्य
(Future) की चिंता छोड़कर आज के समय का सही
उपयोग करना चाहिए।
ASHISH KUMAR
4. क्रोध और मोह का त्याग (Relinquishing Anger and Attachment)
• क्रोध: गुस्से में मनुष्य की बुद्धि काम करना बंद कर
देती है, जिससे वह गलत निर्णय लेता है।
• मोह: किसी भी वस्तु या व्यक्ति से बहुत ज्यादा जुड़ाव
दुःख का कारण बनता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि संसार
में 'खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है',
इसलिए मोह का त्याग कर वर्तमान में जिएं।
ASHISH KUMAR
3. आत्मा की अमरता (Immortality of Soul)
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मोह से निकालने के लिए कहा कि मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा की नहीं।
• "नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।" (आत्मा
को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है।)
• यह सीख हमें सिखाती है कि जीवन में होने वाले
नुकसान या अपनों के खोने पर अत्यधिक शोक नहीं
करना चाहिए, क्योंकि जीवन का सार शाश्वत
(eternal) है।
ASHISH KUMAR
2. मन का नियंत्रण (Control over Mind)
मनुष्य का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र है और सबसे बड़ा शत्रु भी।
• जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, उसके
लिए मन एक मार्गदर्शक बन जाता है।
• जो मन के गुलाम बन जाते हैं, वे अपनी ही इच्छाओं
और क्रोध के जाल में फंसकर अपना नुकसान कर लेते
हैं।
ASHISH KUMAR
1. कर्म की प्रधानता (Importance of Karma)
श्रीकृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करना चाहिए।
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"
• अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। जब हम फल की चिंता छोड़ देते हैं, तब हमारा पूरा ध्यान काम की गुणवत्ता पर होता है और हम तनावमुक्त रहते हैं।
Chaitanya Joshi
જરૂરત છે બુદ્ધની હવે ,ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
જરૂરત છે શુદ્ધ ની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
માનવ માનવથી સેતુ બાંધવો ઘટે એકમેકથકી,
જરૂરત છે પ્રબુદ્ધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
માનવ છીએ યાદ કરો "જીવો અને જીવવા દો"
જરૂરત છે અવધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે
વિદારી વેર વૈમનસ્યને સાથ સહકારની સૌના,
જરૂરત છે સંબંધની હવે,ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
લંબાય હાથ પરસ્પર એકમેકના મૈત્રી ભાવથી ,
જરૂરત છે પ્રબંધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે
- ચૈતન્ય જોષી. "દિપક"પોરબંદર.
Falguni Dost
Mahadev har 🙏🏻😊🙏🏻
Narendra Parmar
पागलों से बहस करना यानी कि
पत्थर पर खुदका सर फोड़ने के बराबर है !
पत्थर को तो कूंच नहीं होगा किंतु
ख़ून हमारा निकलेगा,दर्द हमें होगा इसलिए ऐसे
लोगों से हमेशा दूर रहिए ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
ધબકાર...
સર્જન હૃદયનું થયું ધબકાર સાથે,
ઈચ્છે ધબકાર તો હ્રદય શૂન્ય આજે.
સમયનું વહેણ વિરુદ્ધ, અનાયાસે,
અનંત એકાંત ના પ્રવાસે હું આજે.
ધબકાર...
Siboniso BoyBoy Dlamini
In the quiet mountain town of Piggs Peak, desperation pushes one young man to the edge.
At just twenty-six years old, Thabo Sacolo carries the heavy responsibility of raising his two younger siblings after the loss of their parents. With no job, a leaking roof over their heads, and school fees piling up, hope begins to fade.
But one night, standing outside the local First National Bank, Thabo makes a dangerous decision.
If life will not give him an opportunity…
He will take one.
Gathering a team of skilled men — a brilliant hacker, a fearless driver, an inside man, and a master locksmith — Thabo carefully plans what will become the most daring bank robbery Piggs Peak has ever seen.
Every detail must be perfect.
But when unexpected guards appear, security systems threaten to trap them, and a high-speed police chase erupts through the dark mountain roads, the team realizes that one mistake could destroy everything.
Will the plan succeed and change their lives forever?
Or will the heist that promised freedom lead them straight to prison?
The Heist of the Decade is a gripping African crime thriller filled with suspense, loyalty, danger, and the harsh choices people make when survival is on the line.
Mrs Farida Desar foram
वो कह्ते हे,
अपना ख्याल रखना,
कहा से रखूँ में खुद का ख्याल,
ख्यालों में तुम ही तुम हो अक्सर....
- Mrs Farida Desar foram
Ruchi Dixit
वो खुद टूटा था! जोड़ने आया था जो ,
हवा समय की चली तो बिखरने लगा पत्तो सा थपेड़े सह न सका वो समय के, तिलमिलाहट में भागता रहा अपनो से ही.....
शिकायत बहुत थी उसे ज़िन्दगी से अपनी
बार-बार मौत की बात करता रहा जीवन देने आया था जो...
समय की शाख पर लड़खड़ा रहा वो , कड़वाहट लेकर..
स्थिरता , प्रेम और जीवन देने आया था जो..
- Ruchi Dixit
Shailesh Joshi
"રૉકેટમાં"
ઉપર સુધી પહોંચવાની સામગ્રી ભરી હોય છે,
પરંતુ એ રૉકેટ
પોતાની ઊંચાઈ પર પહોંચવાની ક્ષમતા
ત્યારે જ બતાવી શકે, કે જ્યારે
એ રૉકેટમાં વાટ લાગેલી હોય,
બાકી તો
એ રૉકેટમાં ભરેલી બધી સામગ્રીની
"વાટ" લાગી જાય. મનુષ્ય જીવનમાં પણ
"આવડત એ રૉકેટ છે, અને તક એ વાટ"
- Shailesh Joshi
Avinash
Have a faith my brother, that car will come, we will buy a house too, mother will smile and father will also be proud.
😇❤️
Mrugzal
જોઈલે સંધ્યા પણ કેવી છે ચમકતી,
ચાલ ને પીયે એક કપ ચાય છલકતી.
- મૃગજળ
#TeaLover
#EmptyHeart
Saliil Upadhyay
पति पत्नि की तू तू मैं मैं
पति रेडियो पर बिजी था।
पत्नी: क्या सुन रहे हो ?
पति: मोदी जी के मन की बात ।
पत्नी: मेरी तो कभी नहीं सुनते।
पति: तुम जो कहती हो उसे मन की बात नहीं, मन की भड़ास कहते हैं।
फिर तो दे धना धन
पर आप हंसते हुए अच्छे लगते हो।🤣
Sonam Brijwasi
https://www.youtube.com/@Sonam_Singh536
please subscribe my YouTube I'd....
Soni shakya
लाख कोशिश कर ले तू मुझे भूल जाने की..
मेरी यादें तेरे दिल का पता जानती है..
🍁🍁
- Soni shakya
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
बहारों से पूछो
हसीं हुस्न को कैसे छुते है बहारों से पूछो जाकर l
नशे सा अह्सास मिलता है छुने का लुत्फ़ पाकर ll
हजारों मोहब्बत के अरमान हासिल हो
गये l
सुषुप्त जिन्दगी में खुशियाँ छा गई रंगत
लाकर ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
Good morning friends.. Have a great day
મનોજ નાવડીયા
સ્મિતનો ઉમળકો ચહેરા પર રાખતો ફરે,
જવબદારીનો ભાર મનમા ફરતો રહે,
કેવો એ પિતાનો અદ્રશ્ય ભાવ ફરે,
ઘરને સુખી રાખવાં પરસેવો પાડતો રહે..
મનોજ નાવડીયા
#father #pitaji #papa #manojnavadiya #manojnavadiyapoetry #manojnavadiyabooks #vishvyatri #vishvkhoj #heetkari #saravichar #maravichar #marivat #goodthinking
Rashmi Dwivedi
मन में उठने वाला हर विचार एक बीज है अगर बीच अच्छा है तो फल भी अच्छे होंगे हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Imaran
इश्क़ वालों को फ़ुर्सत ही कहाँ कि वो ग़म लिखें
अरे क़लम इधर लाओ, बेवफ़ा के लिए हम लिखेंग
✍️imran ✍️
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
प्रगति मित्र की देखकर, बढ़े मित्र में द्वेष। हत्या करके मित्र की, धरें साधु का भेष।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या
"सत्या मनसो मे अस्ति"
ऋगुवेद--१०/१२८/४
भाव--मेरे मन के भाव सच्चे हों।
"सत्या मनसो मे अस्ति"
पदच्छेद--
सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।
शब्दार्थ--
सत्या — सत्य, सच्चे, शुद्ध
मनसः — मन के (मन का)
मे — मेरे
अस्ति — हों / हैं
समष्टि अर्थ (भाव)--
मेरे मन के विचार सत्य और शुद्ध हों। सच्चे हों।
भावार्थ:
मेरे मन में जो संकल्प और भाव उत्पन्न हों, वे सत्य, शुद्ध और धर्मयुक्त हों।
संक्षिप्त व्याख्या:
इस ऋग्वैदिक प्रार्थना में साधक ईश्वर से यह कामना करता है कि उसके मन के विचार असत्य, कपट या दुष्टता से रहित हों। मन ही कर्मों का मूल है, इसलिए जब मन के संकल्प सत्य और पवित्र होते हैं, तब वाणी और कर्म भी सत्य मार्ग पर चलते हैं।
वेदों में यह सिद्धान्त बार-बार आता है कि—
पहले मन शुद्ध और सत्यनिष्ठ हो
फिर उसी से सत्य वाणी और सत्कर्म प्रकट हों।
इस प्रकार यह मंत्र मन की सत्यता, पवित्रता और सद्भावना की प्रार्थना है। वेदों में मन की सत्यता, शुद्ध संकल्प और सत्य विचार के विषय में कई स्थानों पर प्रमाण मिलते हैं।
वैदिक प्रमाण
१-ऋगुवेद--१०/१९१/४
समानो मन्त्रः समिति: समानी
समानं मनः सहचित्तमेषाम्।
भावार्थ:
सबका मंत्र (विचार) समान हो, सबका मन एक और शुभ संकल्प वाला हो।
२- यजुर्वेद --३४/१
तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु।
भावार्थ:
मेरा मन सदैव शुभ और कल्याणकारी संकल्प वाला हो।
३. ऋगुवेद --१/८९/१
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।
भावार्थ:
हमारे पास सब ओर से कल्याणकारी और शुभ विचार आएँ।
४-अथर्ववेद--१९/९/१४
मंत्र:
शिवो मे मनः।
भावार्थ:
मेरा मन मंगलमय और कल्याणकारी हो।
इन वैदिक मंत्रों से स्पष्ट है कि वेदों में बार-बार मन की शुद्धता, सत्य विचार, और शुभ संकल्प की प्रार्थना की गई है।
यह भाव "सत्या मनसो मे अस्ति" मंत्र के समान है कि मन के विचार सत्य और पवित्र हों।
उपनिषदों में प्रमाण--
१-मुण्डक उपनिषद् -३/१)६
सत्यमेव जयते नानृतम्।
भावार्थ:
सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नही।
२-छान्दोग्य उपनिषद -३/१४/१
यथा क्रतुरस्मिन् लोके पुरुषो भवति तथेतः प्रेत्य भवति।
भावार्थ:
मनुष्य जैसा संकल्प और विचार करता है, वैसा ही वह बन जाता है।
३. अमृतबिन्दु उपनिषद --२
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
४.बृहदारण्यक उपनिषद --४/४/५
स यथा कामो भवति तत्क्रतुर्भवति।
भावार्थ:
मनुष्य जैसा मन में संकल्प करता है, वैसा ही उसका कर्म और जीवन बन जाता है।
५. तैत्तिरीय उपनिषद--१/११/१
सत्यं वद, धर्मं चर।
भावार्थ:
सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो।
६. प्रश्न उपनिषद--१/१५
तेषामेवैष ब्रह्मलोको येषां तपो ब्रह्मचर्यं येषु सत्यं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
जिन लोगों के जीवन में तप, ब्रह्मचर्य और सत्य प्रतिष्ठित होता है, वही ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं।
७. श्वेताश्वतर उपनिषद --२/१४
यदा चित्तं निरुद्धं योगसेवया।
भावार्थ:
जब योग के द्वारा मन (चित्त) को शुद्ध और स्थिर किया जाता है, तब आत्मतत्त्व का ज्ञान होता है।
८. कठ उपनिषद-- १/३/३-४
आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु।
बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च॥
भावार्थ:
शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और मन लगाम है। मन को संयमित रखने से जीवन सही मार्ग पर चलता है।
९. केन उपनिषद --१/५
यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम्।
भावार्थ:
जिससे मन विचार करता है, उस परम तत्व को मन पूरी तरह जान नहीं सकता।
१०. कौषीतकि उपनिषद --३/२
प्राणो वा एष यः मनः।
भावार्थ:
प्राण और मन का गहरा संबंध है; मन ही चेतना का प्रमुख साधन है।
इन उपनिषदों के प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि मन की शुद्धता, सत्य संकल्प और संयम आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव को भी पुष्ट करता है कि मन के भाव सत्य और पवित्र होने चाहिए।
पुराणों में प्रमाण--
१.पद्म पुराण --
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है। यदि मन शुद्ध और सत्य भाव वाला हो तो मुक्ति का मार्ग खुलता है।
२. विष्णु पुराण--६/७/२८
सत्यं शौचं दया क्षान्तिः सर्वेषां धर्मसाधनम्।
भावार्थ:
सत्य, शुद्धता, दया और क्षमा—ये सभी धर्म की साधना के मुख्य साधन हैं।
४. भागवत पुराण-- ११/१९/३६
सत्यं शौचं दया मौनं बुद्धिर्ह्रीः श्रीर्यशः क्षमा।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया, संयम आदि गुणों से मनुष्य का जीवन श्रेष्ठ बनता है।
४--स्कंद पुराण --
न हि सत्यात्परो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
५ गरुड़ पुराण--
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
भावार्थ:
सत्य के आधार पर ही पृथ्वी स्थित है और सत्य के प्रभाव से ही सूर्य तपता है।
६. अग्नि पुराण-
सत्यं धर्मस्य मूलं हि।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
७--ब्रह्म पुराण --
सत्येन धार्यते धर्मः।
भावार्थ:
धर्म की स्थापना सत्य के आधार पर ही होती है।
८- वायु पुराण --
सत्यं परं नास्ति तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं है।
९. नारद पुराण--
सत्यं शौचं दया दानं धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और दान—ये धर्म के मुख्य मार्ग हैं।
१०-मार्कण्डेय पुराण --
न सत्यात्परमो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
इन पुराणों के प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि सत्य और शुद्ध मन को धर्म का मुख्य आधार माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव को पुष्ट करता है।
भगवद्गीता में प्रमाण --
1. गीता --१७/१६
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः।
भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते॥
भावार्थ:
मन की प्रसन्नता, सरलता, मौन, आत्मसंयम और भावों की शुद्धि—ये सब मन का तप कहलाते हैं।
२-गीता--६/५
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
भावार्थ:
मनुष्य को अपने मन द्वारा ही अपना उत्थान करना चाहिए; मन ही मनुष्य का मित्र और शत्रु बनता है।
३. गीता-१६/१-२
अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्॥
भावार्थ:
मन की शुद्धता, सत्य, शान्ति और सरलता दिव्य गुण हैं।
४. गीता- १०/४-५
बुद्धिर्ज्ञानमसंमोहः क्षमा सत्यं दमः शमः।
भावार्थ:
सत्य, ज्ञान, संयम आदि श्रेष्ठ गुण भगवान से ही उत्पन्न होते हैं।
इन गीता के श्लोकों से स्पष्ट है कि मन की शुद्धता, सत्य भाव और संयम आध्यात्मिक जीवन के लिए आवश्यक हैं। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
महाभारत मे प्रमाण--
१. शान्ति पर्व १६२/२१
न सत्यात्परमो धर्मो न सत्यात्परं तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर न कोई धर्म है और न ही कोई तप।
२. अनुशासन पर्व -११३/२४
सत्यं हि परमं धर्मं सत्यं हि परमं तपः।
भावार्थ:
सत्य ही सर्वोच्च धर्म है और सत्य ही सर्वोच्च तप है।
३-शान्ति पर्व --१०९/११
मनसा चिन्तितं कर्म वचसा न प्रकाशयेत्।
भावार्थ:
मन के विचारों को शुद्ध और संयमित रखना चाहिए।
४. उद्योग पर्व--३३/६३
(विदुरनीति)
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए, पर अप्रिय सत्य भी नहीं बोलना चाहिए।
५. शान्ति पर्व --३२९/४०
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
भावार्थ:
सत्य के आधार पर पृथ्वी स्थित है और सत्य के प्रभाव से सूर्य तपता है।
इन श्लोकों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सत्य भाव को महाभारत में भी धर्म का मुख्य आधार बताया गया है, जो वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव का समर्थन करता है।
स्मृति-ग्रन्थों में प्रमाण--
१. मनु स्मृति --४/१३८
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
भावार्थ:
सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए; अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए और प्रिय असत्य भी नहीं बोलना चाहिए—यही सनातन धर्म है।
२-याज्ञवल्क्य स्मृति--१/१२२
अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
भावार्थ:
अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रियों का संयम—ये धर्म के मुख्य लक्षण हैं।
३. नारद स्मृति-- १/१५
सत्यं धर्मस्य मूलम्।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
४. पराशर स्मृति-- १/२४
सत्यं शौचं दया दानं धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और दान—ये धर्म के श्रेष्ठ मार्ग हैं।
५- दक्ष स्मृति-२/३
सत्यं हि परमं ब्रह्म।
भावार्थ:
सत्य को ही परम ब्रह्म कहा गया है।
इन स्मृति-ग्रन्थों के प्रमाणों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सच्चे भाव को धर्म का मूल आधार माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
नीति-ग्रन्थों में प्रमाण--
१-चाणक्य नीति-- ३/१३
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वायवो वान्ति सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्॥
भावार्थ:
सत्य से ही पृथ्वी धारण होती है, सत्य से सूर्य तपता है और वायु चलती है; सब कुछ सत्य पर ही स्थित है।
३- विदुर नीति-- ३३/६३ महाभारत, उद्योग पर्व )
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य और प्रिय वचन बोलना चाहिए।
३-शुक्र नीति-२/२०
सत्यं धर्मस्य मूलं हि।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
४-भृतहरि नीति शतक-८४
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् धर्मं ब्रूयात् न चानृतम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य, प्रिय और धर्मयुक्त वचन बोलने चाहिए, असत्य नहीं।
५-सुभाषित रत्न-
न सत्यात्परमो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
इन नीति-ग्रन्थों से स्पष्ट होता है कि सत्य और शुद्ध मन को जीवन का मुख्य धर्म और श्रेष्ठ आचरण माना गया है, जो वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
हितोपदेश, पंचतंत्र और रामायण में प्रमाण--
१-हितोपदेश-१/२४
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य और प्रिय वचन ही बोलने चाहिए।
२. पंचतंत्र-१/७८
न सत्यात्परमो धर्मो न सत्यात्परमं तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर न कोई धर्म है और न कोई तप।
३-वाल्मीकि रामायण (अयोध्या काण्ड १०९/३४)
सत्यं हि परमं धर्मं धर्मे सत्यं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
सत्य ही सर्वोच्च धर्म है और धर्म की प्रतिष्ठा सत्य में ही है।
४. वाल्मीकि रामायण (अयोध्या काण्ड २/३१)
रामो द्विर्नाभिभाषते।
भावार्थ:
श्रीराम एक बार जो वचन कहते हैं, उसे कभी बदलते नहीं—अर्थात् वे सत्यव्रती हैं।
५. अध्यात्म रामायण-२/७/१६
सत्यं शौचं दया शान्तिर्धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और शान्ति—ये धर्म के श्रेष्ठ लक्षण हैं।
इन ग्रन्थों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सत्य भाव को धर्म और आदर्श जीवन का मूल माना गया है। यह भाव वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के सिद्धान्त को पुष्ट करता है।
गर्ग संहिता और योग वशिष्ठ में
प्रमाण--
१. गर्ग संहिता --१/३/२०
सत्यं धर्मस्य मूलं हि सत्ये सर्वं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल है और सब कुछ सत्य पर ही आधारित है।
२. गर्ग संहिता-२/१५/३४
सत्यं शौचं दया शान्तिः साधूनां भूषणं परम्।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और शान्ति—ये सज्जनों के श्रेष्ठ आभूषण हैं।
३. योग वशिष्ठ-
(निर्वाण प्रकरण २/१८/२३)
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
४-योग वशिष्ठ --
(उत्पत्ति प्रकरण १/७/८)
चित्तमेव हि संसारः तेन मुक्तं भवेच्चित्तम्।
भावार्थ:
चित्त ही संसार का कारण है; जब चित्त शुद्ध हो जाता है तो मुक्ति प्राप्त होती है।
५. योग वशिष्ठ
(निर्वाण प्रकरण २/१३/१२)
श्लोक:
शुद्धं मनः शान्तिमुपैति नित्यम्।
भावार्थ:
शुद्ध मन सदा शान्ति को प्राप्त करता है।
इन ग्रन्थों से भी स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और पवित्र संकल्प को आध्यात्मिक जीवन का मूल माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव का समर्थन करता है।
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MASHAALLHA KHAN
बस इस तरह से मुस्कुरा दे जरा
फिर एक दफा इतरा दे जरा
होगी कई जाने कितनी हसीं
पर तुझसी कहा कोई अप्सरा .
-MASHAALLHA
ધબકાર...
શું ધબકાર પણ શૂન્ય હશે? હ્રદય વિના!
થયું હું પૂછી લઉં એનેય વિચાર્યા વિના!
ધબકાર...
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
આ હૃદયના ૭/૧૨માં કબજેદાર સદરે તારૂં નામ ચાલી આવેલ છે,
ને એમાં કોઈ જ અન્ય ફેરફાર નોંધ નહીં પડે.
- સ્પંદન
Asmita Madhesiya
याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज,
जो अब बन गया है कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
हां कुछ खास नहीं,
याद आया ,
रक्खा क्या है उस पल में,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
बीते हुए कल में,
अरे जीना है,
अरे जीना है,
तो जीओ हर पल में,
क्या रखा है कल में,
जो बीत गया उसकी यादें,
कहीं कभी किसी से की हुई ,
कही कभी किसी से की हुई,
कसमें और वादें,
कुछ पूरी हुई होगी,
कुछ अधूरी रह गई होगी,
किसी से कही हुई बातें,
किसी के द्वारा कही हुई बातें,
जो बीत गया उसकी यादें,
मन को झकझोर देने वाली बातें,
घर के कोने कोने में बसी कुछ यादें,
दिल दिमाग में छाई ,
कुछ परछाई ,
रातों की नींद ,
सुबह की रौनक ,
उसकी ऐनक,
चादर की सिलवट,
तुहारी करवट,
तकिए का खोल,
कुछ प्यार भरे मीठे बोल,
मन को गुदगुदाने वाली बातें ,
खूबसूरत रातें ,
आंखों की नमी ,
जीवन का सार,
बढ़ता गया ,
गाड़ी चलती गई ,
बात बदलती गई,
भावनाए बढ़ते गए,
आपस में लड़े भी ,
झगड़े भी ,
परिवार भी बढ़ा ,
रिश्ता रिश्तों की सीढ़ी चढ़ा,
अंश आया ,
पदवी बढ़ी,
सदस्य बढ़ा ,
आपस में प्रेम की लहर दौड़ी ,
आंखें नम हो गई,
याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज ,
जो बन गया कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
वाकई रक्खा नहीं कुछ उस पल में,
एक बार शुरू हो जाए ,
एक बार शुरू हो जाए ,
तो दिल उसी वक्त में खो जाए,
मन कही चला जाए ,
तन यही रह जाए ,
आज को भूल जाए ,
कल में डूब जाए ,
आज की खुशी से वंचित कर ले ,
अपने आप को चिंतित कर ले ,
जो कभी खराब न होना था ,
वो भी खराब कर जाए ,
ऐसा नशा है कल में,
जो डूबा दे उसी पल में,
हां कुछ खास नहीं याद आया ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
रक्खा है उस पल में,
हो भी क्यों न,
सदियां गुजरी,
जाने कितनी सर्दियां गुजरी,
बांहों में बांहे डाले यूहीं घूमा करते थे ,
पुराने गीतों पर,
खून झूमा करते थे ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनकी देख भाल में लग गए ,
कुछ सुलझे रिश्ते उलझ गए ,
कुछ उलझे रिश्ते सुलझ गए ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनके देख भाल में लग गए,
समय भी अपने रफ्तार से चलने लगा,
काले बाल भी साथ छोड़,
अपने रंग बदलने में लग गए,
शरीर भी अब पहले सा न रहा ,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
याद आया जीना है तो जीओ हर पल में,
क्या रक्खा है कल में,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
मन का विश्वास ,
आत्म विश्वाश बन कर झलकने लगा ,
क्या रक्खा है कल में,
जीओ हर पल में।।
Riddhi Gori
"પીંછી તો મેં પણ પકડીતી એ જીંદગી
તને રંગીન બનાવવા..
પણ ક્યાંક રંગ ઓછા પડ્યા,
તો ક્યાંક સંગ ઓછા પડ્યા...!!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
"ખોલી જો જીંદગી ની કિતાબ,
તો થોડી ધુળ નિકળી..
એમાં કંઈ પણ નથી લખાણ,
છતાં ઘણી ભૂલ નિકળી…!!
- Riddhi Gori💙🤍
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