Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
kattupaya s

energy for living

kattupaya s

Story behind everyone

Imaran

अगर दुनिया में जीने की चाहत न होती, तो खुदा ने मोहब्बत बनायी न होती, इस तरह लोग मरने की आरजू न करते, अगर मोहब्बत में किसी की बेवफाई न होती 💔imran 💔

kattupaya s

Thanks to music.. still iam alive

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Music a beautiful concept

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Thinking about music

Ashish jain

आते हुए रस्ते से मैंने पुछा घर कब आएगा यह सुन रास्ता मंद सी मुस्कान छोड़ कर यह बोला हे नव राही तूने की है शुरुआत अभी ही थक गया तू इतनी जल्दी मै जाने कब से बढ़ता ही जा रहा हूँ चलता ही जा रहा हूँ कितने ही रहगुजर करते है साथ चलने का वादा फिर जाने कहाँ हो जाते ग़ुम और मै ग़ुम सुम जान न सका अभी तक "घर कब आएगा " जब आ जायेगा तब थम कर कह दूंगा ऐ राही तेरा आ गया कोई दूसरा मिलेगा तब शायद मेरा भी आ जायेगा आशीष जैन.

Anup Gajare

संक्रमण _______________ पहचान टूट रही है, पर नई बनी नहीं— मैं मलबे पर खड़ा हूँ, जहाँ नाम गिर चुके हैं और आईने अभी चुप हैं। नास्तिक नहीं हूँ, बस पुराने ईश्वर से थक गया हूँ— वही ईश्वर जो हर बार मेरे सवालों पर मौन की मोहर लगा देता था। प्रार्थनाएँ अब भी आती हैं, पर हाथ जोड़ते हुए मन बैठ जाता है। अकेला हूँ, पर यह अकेलापन सादा नहीं— यह भीड़ से उपजा है। लोगों के बीच खुद को खोने का डर जंगल से भी घना होता है। भीड़ में खड़ा हूँ और भीतर से गुमशुदा। चुप हूँ— क्योंकि शब्द अब भरोसेमंद नहीं रहे। हर बोला गया वाक्य मुझे आधा कर देता है। पर भीतर एक रेलगाड़ी दौड़ती रहती है— यादें, प्रश्न, पश्चाताप, और वे सारे “काश” जो कभी प्लेटफ़ॉर्म पर नहीं उतरे। मैं न टूट रहा हूँ, न बन पा रहा हूँ— मैं बस बीच में हूँ। और शायद सबसे कठिन जगह यही होती है। जहाँ आदमी न पीछे लौट सकता है, न आगे दौड़ सकता है— सिर्फ़ खुद के साथ ठहरना सीखता है। ________________________

Ashish jain

मै केवल पढता हूँ कविता को कविता जो मेरे जीवन का सच कहती है मै डरता था जो भी कहने में वो अव केवल मेरी कविता कहती है रजनी कान्त आशीष जैन और अंत में (श्रीचंद)

Ashish jain

काश हमे कोई अपना बोले ऐ काश कोई मेरे दिल को छूले कोई काश कर शैतानी कोई मेरी पलकों में झुला झूले मेरे सपने भी किसी के बनके काश की कोई थोड़ा नैनों को धोले मेरी भी यादे किसी को कर्जा बनके रात का अपना चैन भी खो दे काश कभी जब थक के लौटूं मेरे सर से पसीना कोई पोछे काश हमे कोई अपना बोले काश कोई मेरे दिल को छूले आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

कोई खूबसूरती नहीं इन टूटे शब्दों में खूबसूरत हे ये एहसास जो बनकर दिलो में छाप बना जाते जेसे हो कोई बजाता साज इसी साज को मै बना देता हूँ केवल ऐ दोस्त बेदर्द दिल के दर्द की आवाज़ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

पानी और जीवन जाने कितने ही आकार बदलता है जब ये आसमान से आता है तो कई प्यासे मन को खुशियाँ दे कर जाता है कभी ये पिघल कर बह जाता हे जब यह फुब्बारे में सजता है तो छोटी बूंदों सा चमकता है और जब जाता है तो भाप सा सूरज की किरणों जा खोता है गम गिन माहौल पे यह तड़प सा काला बदल बन मंडराता है पर जब ये बरसता है तो खुशहाली की खुसबूदार लता सी बन कर फ़ैल जाता जीवन और पानी यही कहानी कितनो को तरसाता हा कितनो को तडपता पर दुःख और खुशियाँ सच ये हमे बरस के दिखता है आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

जिस भी ने जीवन मे कभी भी कोई भी गलती नहीं की समझ लेना चाहिए वो इंसान नहीं भेड़ है क्यों की उसने खुद कुछ नया नहीं किया बस भेड़ की तरह लाइन में पीछे ही चलता चला इंसा तो वो है जो खुद कुछ करे और जिस के पीछे ये भेड़ रुपी इंसा चले आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

कर लो चाहे पूजा एक हज़ार कहता यही मै बार बार माँ बाप को जो ठुकराया बुढ़ापे में चोट खायेगा दिन में सौ सौ बार माँ बाप तो गहना है जिसे बचपन में तूने पहना है पत्नी के आते ही ये गहना तू निकल पड़ा बेचने थोड़ी दौलत पाते ही, क्या करेगा इस सब का जब तेरे माँ बाप के आखों से टपक कर निकली है बद्दुआ कहीं का नहीं रहेगा तू कोई नहीं पूछेगा.... जय जिनेन्द्र आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

बेटा मेरा जब लिपटता है बांहों में जीवन पूरा जी लेता हूँ अब कोई तमन्ना नहीं है मेरी उसे देख आँखों से खुशियों की शराब पी लेता हूँ उसकी किलकारी ताकत है मेरी इस प्यारी चित्कार को समझ पूरा जीवन पी लेता हूँ रोता है जब तो आँखे भर आती है उसको ख़ुशी देने को खुद ख़ुशी भी कर लेता हूँ सोता है रात जब साथ मेरे साथ ही सांसे लेता हूँ बन कर ठंडी हवा का झोका सा उसे बहो में भर लेता हूँ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

उसकी आँखों में खौफ -सा बिखरा पड़ा है उसके हाथो में खिलोने है बच्चो के पर पसीना कहानी कहता है के किसी के जाने का उसके कांपते होठो पर एक अजीब सी दहशत है इस बेकार की महंगाई ने तोड़ दी है उसकी कमर बेटा तो अब रहा नहीं उपर से सता रही चिंता बेटी के जाने की वो पड़ी हुई है अस्पताल में दवा का खर्चा नहीं है देने को लगता है ये जेसे अभी देगा रो बेचता है खुशियाँ बच्चो को पर खुद की खुशी न जुटा पाया शाम को घर लौटा वापस तो देखा बेटा रहा नहीं अब घर में बेटी को भी न ये बचा पाया आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

अब्ज ज्यू बजता है नभ मे अधर धरा का लगता सिन्दूरी खग की उत्पत्ति से नभ मे बहती अचल समीर जिसके उत्तर से अब्धि की धरा लेती मधु हिलोर खग खग की चीत्कार से उत्पन्न राग से गता कण कण अमृत गीतक उत्सर्ग धरा का गाती सारंग ज्यो ज्यो अर्क ताप बरसाता दहकती भू माँ की सुगंध से भर जाता ज्यो ज्यो अर्क ताप बरसाता आशीष जैन (श्रीचंद जी)

Ashish jain

शब्दों की लड़ जब लड़ लड़ की आवाज़ के साथ तड तदाती है बड़े तूफ़ान खड़े हो जाते है आपस मे लड़ते लड़ रुपी पटाखे बड़ी आवाज़ से कानो में तड तडातेहै शब्दों की फटन से कान भी फट जाते है पर जब यही शब्द जब फुलझड़ी की तरह चमकते है तो खुशनुमा इस फिजा मे झिलमिलाते है जय जिनेन्द्र आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

मेरे देश का कानून है कमजोर पर फिर भी मुझे भरोसा है सरकारों में नहीं देश चलने का दम फिर भी मुझे भरोसा है दरोगा बन बैठा है आज डकैत फिर भी मुझे भरोसा है सन्यासी जो सबसे बड़ा है चोर फिर भी मुझे भरोसा है छींटे है दामन पर मंदिर के पुजारी के फिर भी मुझे भरोसा है कभी न कभी आयेगा राम राज इसी का मुझे भरोसा है आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

मै समय हूँ हाँ हाँ मै ही समय हूँ यह बात और है की आज कोई भी आज मेरी ही खाट कड़ी कर देता है फिर भी मै ही समय हूँ जद हंस मत यह जो फटीचर से हालत है मेरी वो कुछ नेता और सरकारी नौकरों जेसे नामुरादों ने है कर दी है फिर भी मै ही समय हूँ ओह आप मुझे भिखारी न समझे मुझे रूपये थमा के यही तो मेरी जिलालत है पर क्या करूँ मै समय हूँ तो भीख लेनी पड़ेगी क्योकि मै समय हूँ मै ही समय हूँ ये बात और है की आज मेरा ही समय है खराब फिर भी मै ही समय हूँ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

बेटी पापा से बोली शाम को घर आ के मुझे कहीं घुमाने ले चलो ना पापा झुला झुलना है गोद में लेके झुलाओ न पापा थक गयी हूँ कंधे पर बिठा लो न पापा डर लग रहा अँधेरे में सीने से लगाओ न पापा मम्मी तो थक के सो गयी आप ही लोरी सुना के सुलाओ न पापा स्कूल पूरी हो गी अब दादी कॉलेज नहीं जाने दे रही कॉलेज जाने दो न पापा कॉलेज जाने दो न पापा कॉलेज में गलती हो गी माफ़ी दे दो ना पापा छोटी सी भूल की इत्ती बड़ी सजा दी डोली में ही बिठा दिया पापा तो आप आंसूं न बहाओ पापा आप की मुस्कराहट अच्छी लगती है पापा एक बार मुस्कुराओ तो पापा मेने आपकी हर बात मानी आप भी एक मेरी बात मान जाओ तो पापा प्लीज पापा मान जाओ तो पापा में नहीं धरा पर बोझ पापा प्लीज पापा बेटी बचाओ पापा बेटी बचाओ पापा जय जिनेन्द्र (बेटी बचाओ पापा) आशीष जैन

Ashish jain

कलम आज फिर हुयी शांत किसी शब्द के लिखने पर स्याही हुयी फिर आज ख़तम के कुछ शब्दों को हमने मोड़ना चाहा पर कलम हुयी आज फिर शांत के मंजर आज जुबान पर था वो मंजर जो तड़पाता था हमको हरपल जिसकी याद हमको है रुला जाती गला है हमारा रुंधा पड़ा हाथ में कम्पन भरा पड़ा कुछ और अगर हम याद करे दिल शीशे सा बिखर गया के काश हमे तुम मिल जाते तो ये रात की बेचेनी न होती के काश तुम जो मिल जाते तो यूँ हम शायद करवटे न लेते हाँ तेरी ही यादो ने हमको बहुत बहुत तडपाया है हाँ तेरी ही सूरत ने हमको कितना हमे रुलाया है आजा के जीवन है छोटा है दुनिया तेरी भी छोटी आजा के याद है आती याद से आँखों में मोती आशीष जैन (श्रीचंद्रजी)

Ashish jain

वो लंकेश भी क्या रावण था जेसको धेनु मां का अभिमान था वो दशानन भी क्या रावण था जिसे अव्धि मां का ज्ञान था वो दैत्येन्द्र भी क्या रावण था जेसको सहोदर से अनुराग था वो दशशीश भी क्या रावण था जे अग्रजा की भक्ति में अवलेप था वो दशकंध भी क्या रावण था जेसकी निगाह नै मां सीता का सम्मान किया वो लंकापति भी क्या रावण था अपने अरि राम को ही मुक्ति मार्ग का सोम गीत माना वो रावण ही था पर उसने भी प्रभु राम सा ही काम किया बस ऐक अहं ने उसे समर भूमी पर ला खडा किया हां वो दनुज रावण ही था जिसने सर्वप्रथम अपनी शवयात्रा पर राम का नाम सत्य सभी दनुज व मनुज से कहलवाया जो आज परंपरा है आशीष जैन (श्रीचंद्र जी)

kattupaya s

Will India chase the target against newzeland 338? cricket

Kartik Kule

सावलो में आपसे हम जबाब क्या मांगेंगे जख्म एसा दिया ही जो दिखा भी ना पायेंगे आपके लफजोकी वो शिहादते हमे एसा घाव दे गई अगर चहेभी दिल हमार आपको फिरभी नजरे अपनेअप फेर लेंगी - Kartik Kule

Narendra Parmar

लोगों की तारीफे बटोरना आदत नहीं है मेरी क्योंकी में जैसा हूं वैसा ही दिखना पसंद करता हूं ! नकाब पहन कर झूठी शान और शौकत दिखाना फितरत नहीं है मेरी ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Nilesh Rajput

खड़े हो यूँ हाथों में गुलदस्ता लिए तुम, अभी तो रगों में ज़हर उतरना बाकी है, जलकर ख़ाक होना है अभी, ठहर जाओ तुम, अभी तो उनका दुल्हन बनते देखना बाकी है।

AyShAs StOrIeS

I am back!!!❤️

Mariya

মানুষকে বিশ্বাস করো না মানুষ বলে, সোনার কথা, কিন্তু মুখে হাসি, মনে ভাতা। কখনো সত্য, কখনো ছল, ধরে নিলে মনে হয় গোল। চোখে তারা প্রেমের আলো, হৃদয়ে লুকানো অন্ধকার ভালো। যতই বলো বিশ্বাসের গল্প, শেষে বাঁচি শুধু নিজের দপ্তর। তাই আমি শিখেছি ধীরে, ভালোবাসি শুধু নিজের দ্যেরে। মানুষকে বিশ্বাস করো না খুব, নিজের আলো ছাড়া অন্যের ছায়া ভুব।

Mariya

গল্পের নাম: “রাতের ছায়া” রাতটা ছিল অন্ধকার এবং চুপচাপ। মারিয়া তার ঘরের জানালার পাশে বসে দেরি হওয়া বন্ধুর জন্য অপেক্ষা করছিল। হঠাৎ ঘরের মধ্যে এক হালকা ঠাণ্ডা বাতাস বইতে শুরু করল। সে ভয়ে কাপাতে লাগল, কিন্তু মনে হল কেউ আসছে। চোখ তুলে সে দেখল, ঘরের কোণে একটি ছায়া ঘুরছে। “কে আছে সেখানে?” সে কণ্ঠ নরম করে বলল। ছায়াটি ধীরে ধীরে কাছে এল এবং বলল, “ভয় পেয়ো না, আমি শুধু তোমাকে সাহায্য করতে এসেছি।” মারিয়া প্রথমে অবাক, তারপর বুঝতে পারল—এই ছায়া আসলে তার হারানো বন্ধু ছিল, যে অনেকদিন আগে অন্য শহরে চলে গিয়েছিল। রাতের অন্ধকারে তারা কথা বলল, হাসল, এবং একসাথে বিছানায় বসে গল্প শোনার আনন্দ উপভোগ করল। সেদিন থেকে মারিয়া আর রাতের ছায়া ভয় পায়নি—কারণ সে শিখল, কখনো কখনো অজানা ছায়ার পেছনে থাকে বন্ধুদের হাসি।

Nilesh Rajput

शिकायत भी किस बात की करें, वह किसी और के लिए सही वफ़ादार तो है।

Mariya

সুন্দরবন সবুজে ঢাকা জঙ্গল ছায়া, নদীর ঢেউয়ে নাচে মায়া। বাঘের দমকে ভূবন রাঙে, প্রকৃতির বুকে গান গাঁথে। পাহাড়, নদী, পাখির ডাক, মেঘের ছায়া খেলে মাঠে দাও। প্রতিটি পাতা গল্প বলে, সুন্দরবন যেন প্রাণের খোঁজখোলা। ঝুপড়ি নদীর ধারে বয়ে যায়, হাওয়া গায় বনের সুর ছড়ায়। মানবের কাছে রহস্য আছে, প্রকৃতির কোলে শান্তি বাসে।

Annu jangra

🖋️ शीर्षक: “खुद से मुलाक़ात” आज आईने ने मुझसे एक सवाल पूछा, तू हँस तो रही है… पर क्या सच में खुश है? मैं थोड़ी देर चुप रही, फिर अपनी ही नज़रों से नज़रें चुरा लीं। लोग कहते हैं, वक़्त सब ठीक कर देता है, पर कुछ ज़ख्म ऐसे होते हैं जो वक़्त के साथ भी बस चुपचाप साँस लेते रहते हैं। मैं रोज़ खुद को समझाती हूँ — “मज़बूत बन, सब ठीक हो जाएगा,” पर हर रात, तकिए पर गिरते आँसू मेरी सारी हिम्मत बहा ले जाते हैं। मैंने सीखा है मुस्कुराना, अपने टूटे हिस्सों को छुपाना, और इस भीड़ में भी अकेले चलना। पर आज दिल ने कहा — थक गई हूँ मैं… हर किसी के लिए मजबूत बनते-बनते, खुद के लिए कमज़ोर हो गई हूँ। शायद अब वक़्त है, खुद से प्यार करना सीखने का, दुनिया को नहीं… पहले खुद को समझने का। क्योंकि हर जंग दूसरों से नहीं होती, कुछ लड़ाइयाँ खुद से भी लड़ी जाती हैं।

Gautam Patel

Gujarati Love song

Annu jangra

You're Not Alone You're Just Disconnected

Mariya

ভয়ংকর রাত রমজান মাসের পরীক্ষা সামনেই। ইফতার শেষ করে বৃষ্টি পড়তে বসেছে। বই পড়তে পড়তে কখন যে সে ঘুমিয়ে পড়েছিল, নিজেও জানে না। হঠাৎ রাত তিনটা বাজে। ঘুম ভেঙে উঠে তাকাতেই সে দেখল, তার সামনে একটি ভয়ংকর অবয়ব উপস্থিত। চোখ দুটি বড়, লাল, রক্তের মতো; দেহের উচ্চতা মাটি থেকে আকাশ পর্যন্ত বিস্তৃত। অবয়বটির রহস্যময়তা এতটাই ভয়ঙ্কর ছিল যে বৃষ্টি কেঁপে উঠল। হঠাৎ করেই সেই অবয়বটি বৃষ্টির চুলের মুঠিতে ধরে ফেলে। বৃষ্টি ছটফট করতে লাগল, কিন্তু অবয়বটি তার বুকে এসে বসে পড়ল। সে জোরে জোরে ডাক দিল, কিন্তু কেউ তার কণ্ঠ শুনতে পায় না। ভয়ে তার শরীর ঘামে ভিজে গেল। মনে হলো, আর বাঁচার কোনো উপায় নেই। ঠিক সেই মুহূর্তে তার মনে পড়ল একজনের কথা: “বোবা ধরলে একটি সূরা পড়লে বোবা চলে যায়।” বৃষ্টি সমস্ত সাহস জোগাতে সূরা ফাতিহা তিলাওয়াত করতে লাগল। প্রতিটি শব্দ যেন শক্তি সঞ্চার করল, ভয় আর কাঁপুনি ধীরে ধীরে হ্রাস পেতে লাগল। অবয়বটি ধীরে ধীরে চুল থেকে ছাড়িয়ে গেল। তিলাওয়াত শেষ হওয়ার সঙ্গে সঙ্গে অবয়বটি সম্পূর্ণ অদৃশ্য হয়ে গেল। বৃষ্টি বলে, “আর যদি দুই মিনিট এভাবে থাকতাম, হয়তো আমি মারা যেতাম।” ভয়ে কাঁপতে কাঁপতে সে দ্রুত কাকীর কাছে গেল এবং সব ঘটনা খুলে বলল। সেই দিন থেকে বৃষ্টি আর কখনো একা ঘুমায় না। সেই ভয়ঙ্কর রাতের স্মৃতি তার সঙ্গে সারাজীবন থাকবে। সে আল্লাহর কাছে ধন্যবাদ জ্ঞাপন করে এবং মনে মনে বলল, “যদি তখন আমি সূরা ফাতিহা তিলাওয়াত না করতাম, হয়তো আজ আমি বেঁচে থাকতাম না।”

Annu jangra

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Annu jangra

My new blog post:- visit my new blog post agar pasand aaye to comment krna "Why you are Always Tired: The Hidden mental Habits Draining your energy" https://share.google/ucWNGA1vR9Delbsb5

Annu jangra

Everyone Dreams

Archana Singh

सुना हैं उनको फूलों से मोहब्बत हैं... और हम बाग़ सजाएं बैठे हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

गलत कहा हर बार कश्तियां होती हैं ...! कई बार डूबना क़िस्मत में लिखी होती हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

" जाने कौन सी शौहरत पर इंसान को इतना नाज़ हैं , क्योंकि ... आख़िरी समय तो हर कोई दूसरे का मोहताज हैं " ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

चलिए ! आज अपना दिल साफ करते हैं और सभी को तहे दिल से माफ़ करते हैं! अन्न-धन तो हर कोई दान करते हैं ! चलिए ! आज हम "क्षमा" दान करते हैं !! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Abantika

दोस्तो मेरी पहली रचना प्रकाशित हुए हैं l आप सभी मेरी रचना पढ़िए और Comment,rating करे l उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी l apki Abantika 🌸✨️🦋

Jeetendra

​थॉमस एडिसन का अंधेरा: हजार असफलताओं की रौशनी ​यह 1870 के दशक की बात है, जब न्यूयॉर्क की सड़कों पर गैस लैंपों की मद्धिम रौशनी ही रात का सहारा थी। इसी शहर की एक छोटी-सी प्रयोगशाला में थॉमस एडिसन नाम का एक व्यक्ति दिन-रात एक धुन में लगा रहता था। उसका सपना था, बिजली से जलने वाला ऐसा बल्ब बनाना जो हर घर को रोशन कर दे। ​एक दिन शाम को, एडिसन अपनी प्रयोगशाला में तार और कांच के बल्बों के ढेर के बीच बैठा था। उसके सहायक, जेम्स, ने झुँझलाहट भरे स्वर में कहा, "थॉमस, हमने फिर कोशिश की, यह फिलामेंट भी टूट गया! यह हजारवीं बार है जब हम फेल हुए हैं।" ​एडिसन ने मुस्कुराते हुए जेम्स की तरफ देखा। उसकी दाढ़ी पर कार्बन के निशान थे और आँखें नींद से लाल थीं, लेकिन चेहरे पर हार का कोई भाव नहीं था। "जेम्स," एडिसन ने कहा, "हम फेल नहीं हुए हैं। हमें बस यह पता चला है कि 999 ऐसे तरीके हैं जिनसे बल्ब नहीं जलता।" ​जेम्स ने गहरी सांस ली, "लेकिन हम कब तक ऐसे ही प्रयोग करते रहेंगे? बाजार में लोग हमारा मजाक उड़ा रहे हैं। वे कहते हैं, 'यह सनकी आदमी अंधेरे में रौशनी ढूंढ रहा है!'" ​एडिसन उठ खड़ा हुआ। उसने एक पुराना टूटा हुआ फिलामेंट उठाया और उसे अपनी उंगलियों के बीच घुमाया। "जेम्स, इतिहास में कोई भी महान आविष्कार आसानी से नहीं हुआ है। क्या तुम्हें लगता है ग्राहम बेल ने एक बार में टेलीफोन बना दिया होगा? या राइट बंधुओं ने पहली उड़ान में ही सफलता पा ली होगी?" ​"पर हमें आगे क्या करना चाहिए?" जेम्स ने पूछा। ​"हमें सिर्फ एक बार सही तरीका खोजना है," एडिसन ने दृढ़ता से कहा, "एक बार। और जब हम उसे ढूंढ लेंगे, तो पूरी दुनिया रोशनी से जगमगा उठेगी।" ​अगले कुछ हफ्तों तक, एडिसन ने हर संभव सामग्री पर प्रयोग किया। प्लैटिनम, लकड़ी के रेशे, धातु के तार—वह कुछ भी छोड़ने को तैयार नहीं था। उसकी टीम थक चुकी थी, लेकिन एडिसन का जुनून कम नहीं हुआ था। ​एक रात, जब सब सो रहे थे, एडिसन को एक विचार आया। उसने बांस के बारीक रेशों को कार्बन से उपचारित किया। उसने अपनी धड़कनें रोके हुए उस फिलामेंट को बल्ब में लगाया और स्विच ऑन किया। ​एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर, एक हल्की पीली रौशनी पूरे कमरे में फैल गई। वह रौशनी लगातार जलती रही—एक घंटे, दो घंटे, चार घंटे... चालीस घंटे तक! ​जेम्स और बाकी सहायक दौड़ते हुए आए। उनकी आँखों में अविश्वास और खुशी के आँसू थे। ​"हमने कर दिखाया!" जेम्स चिल्लाया। ​एडिसन ने उस जलते हुए बल्ब को देखा, उसकी आँखों में गहरी संतुष्टि थी। "हाँ, जेम्स। हमने कर दिखाया। और इस बार हमें यह भी नहीं पता चला कि कितने और तरीके थे जिनसे यह काम नहीं करता।" ​थॉमस एडिसन की इस जीत ने दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। यह सिर्फ एक बल्ब का आविष्कार नहीं था, यह इस बात का प्रमाण था कि 'असफलता' सिर्फ एक कदम है सफलता की सीढ़ी पर, बशर्ते आप हार न मानें। उसका अंधेरा अब दुनिया की रौशनी बन चुका था

Archana Singh

गलतियां करना अच्छी बात हैं ... पर किसी के साथ ग़लत करना ... ये ग़लत बात हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

* नज़र क्या लगें उसको ... जिस पर खुद महादेव की नज़र हों * ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

kattupaya s

falling asleep when you listening to your favorite music is devine.. good afternoon guys

archana

उसने बड़े आसानी से कह दिया – कल मरो तो आज मर जाओ, और अच्छा है… जल्दी मर जाओ। आज मेरी आख़िरी उम्मीद भी टूट गई, अब मन नहीं करता कुछ लिखने का… क्योंकि अब भीतर कुछ बचा ही नहीं। जिसे अपना सब कुछ माना था, उसी के आख़िरी शब्द ज़हर बन गए। अब क्या रखूँ उम्मीद… जब सांसों की कीमत उसी की नज़रों में शून्य हो गई।

Arijit Bhattacharya

हम जब मिले थे, वह पल मुझे अभी भी याद है तुमसे कहने को बहुत कुछ था पर वो बातें मैंने तुम्हारी आँखों मैं पढ़ लीं शायद तुम्हें यह एहसास ही हुआ कि तुमने नज़रें झुका ली क्या तुम्हें भी वह पल याद है? जब हम मिले थे ऐसा तो नहीं कि बस मैं ही इंतज़ार में हूँ और तुम किसी और की ख़्यालों में खोए हो तुम्हें बताना तो चाहता हूँ पर जवाब सुनने से डरता हूँ इसलिए आज लिख रहा हूँ अगर ये अल्फ़ाज़ तुम तक पहुँचें, तो बस ख़ामोशी में कोई जवाब छोड़ जाना।

Soni shakya

पूछती है सहेलियां मेरी, मेरी मुस्कान का राज.. कहती हैं मुझसे सहेलियां मेरी, रंग क्यों गहरा है तेरे होठों का.. "तुमसे मिलने के बाद" - Soni shakya

Shailesh Joshi

ફરિયાદો કરવા, કે સાંભળવા માટે નથી હોતી, એતો ગળવા માટે હોય છે. - Shailesh Joshi

Parth yadav

लगता नही तेरे सिवा ए दिल कही मेरा, खोजता है राह पर, रात भर तुमको, क्या यही चाहतो का नशा, उम्र भर रहता है,

Parth yadav

शायद किसी और कहानी में… हम साथ लिखे जाएँगे… इस कहानी में बस इतना है… हम अधूरे… रह जाएँगे…

Shefali

#shabdone_sarname__ #shabdone_sarname_

Urvashi Oza

જેટલું શોધવા મથું છું એટલું જ ખોવાઈ રહી છું

Sarika Sangani

उम्र गुजर जाने पर यह अहसास होता है जिंदगी में सुकून सब कुछ पाने में नहीं बल्कि बहुत कुछ पाकर छोड़ने में है। - Sarika Sangani

Abha Dave

https://youtube.com/shorts/ZIexeY9IOu0?feature=shared बाल कविता

Abha Dave

https://youtube.com/shorts/P6sz4hn77zM?si=lyUEhxvYzteey7HI

Urvashi Oza

સૌ કોઈ માં રસ લઈ રહી છું હા, હું પોતાને જ બીજાના મા શોધી રહી છું.

Jeetendra

स्वामी विवेकानंद : शिकागो की गर्जना सन् 1893, शिकागो का विशाल कोलंबस हॉल। चारों तरफ विद्वानों, पादरियों और दार्शनिकों की भीड़ थी। गेरुए वस्त्र पहने एक भारतीय युवक कोने में शांत बैठा था। उसके मन में उथल-पुथल थी, पर चेहरा स्थिर। आयोजक ने आवाज दी, "अब भारत से स्वामी विवेकानंद अपना वक्तव्य रखेंगे।" विवेकानंद मंच पर आए। हजारों आँखें उन्हें संदेह और कौतूहल से देख रही थीं। उन्होंने गहरी सांस ली और कहा, "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों!" इतना सुनते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दो मिनट तक तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। भाषण के बाद, जब विवेकानंद बाहर निकले, तो प्रोफेसर राइट ने उनसे पूछा, "स्वामी जी, आपने संबोधन में 'भाइयों और बहनों' ही क्यों चुना? यहाँ तो सब लेडीज एंड जेंटलमैन कह रहे थे।" विवेकानंद मुस्कुराए, "प्रोफेसर, बाकी दुनिया के लिए संबंध औपचारिक हो सकते हैं, लेकिन मेरे भारत के लिए पूरा विश्व एक परिवार है। मैंने सिर्फ सत्य को पुकारा था।" तभी एक अहंकारी विदेशी विद्वान पास आया और व्यंग्य से बोला, "साधु जी, आपके देश में तो इतनी गरीबी है, आप यहाँ धर्म की बात करने आए हैं? क्या धर्म पेट भर सकता है?" विवेकानंद की आँखों में एक चमक उभरी, "महोदय, भूखे पेट धर्म नहीं किया जाता, यह सच है। लेकिन जिस संस्कृति के पास हजारों वर्षों का आध्यात्मिक धन हो, वह दरिद्र कैसे हो सकती है? हम रोटी मांगने नहीं, दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाने आए हैं।" उस रात विवेकानंद को एक अमीर परिवार में ठहराया गया। मखमली बिस्तर और ऐशो-आराम देखकर उनकी आँखों में आंसू आ गए। उन्होंने खुद से कहा, "मेरे देश के लोग घास फूस की झोपड़ियों में सो रहे हैं और मैं यहाँ इस विलासिता में? हे माँ, क्या इसीलिए मैं यहाँ आया हूँ?" अगले दिन, एक पत्रकार ने उनसे पूछा, "स्वामी जी, भारत को बदलने के लिए सबसे जरूरी क्या है?" विवेकानंद ने दृढ़ता से जवाब दिया, "आत्मविश्वास। भारत को अपनी शक्ति पहचाननी होगी। उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" शिकागो की उस सभा ने दुनिया को बता दिया कि भारत का गौरव उसकी मिट्टी में नहीं, उसके विचारों में है। स्वामी जी ने न केवल हिंदुत्व का मान बढ़ाया, बल्कि मानवता को एक सूत्र में पिरोने का मंत्र दिया। उनके उस भाषण ने गुलाम भारत के सोए हुए स्वाभिमान को जगा दिया, जिसकी गूँज आज भी इतिहास के पन्नों में जीवंत है।

Bhavna Bhatt

એકવાર જરૂરથી જજો

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

વિષય: "રાજકારણ ગંદુ કીચડ કે કીચડમાં ખીલેલું કમળ" પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય શીર્ષક: દ્રષ્ટિ અને દાવ લોકો કહે છે, આ તો 'ગંદુ કીચડ' છે, જ્યાં ખાદીના શ્વેત વસ્ત્રો પર, ઊડે છે છાંટા—આક્ષેપોના, અને દાગ લાગે છે—ઈમાનદારી પર. અહીં પગ મૂકતા પહેલાં સો વાર વિચારવું પડે, કારણ કે આ લપસણી જમીન છે, જ્યાં સિદ્ધાંતો લપસી પડે છે, અને સ્વાર્થનું સંતુલન જાળવવું પડે છે. અહીં કોઈ મિત્ર નથી ને કોઈ શત્રુ નથી, બસ, સમય અને સંજોગના સોગઠા છે. આ એવું અંધારું ભોંયરું છે, જ્યાં સત્તાની મશાલ લઈને સૌ ભટકે છે. પણ... થોડું અટકીને, ઉંડા શ્વાસ લઈને જોયું, તો સમજાયું... કે કમળને ખીલવા માટે, આ જ કાદવ અનિવાર્ય છે! જો કાદવ ન હોત, તો કમળની પવિત્રતાનો અર્થ શું હોત? ભ્રષ્ટાચારની દુર્ગંધ વચ્ચે જ તો, પ્રમાણિકતાની સુગંધ પરખાય છે. એક સાચો લોકનાયક એ જ છે, જે કાદવમાં ઉગે છે, કાદવથી પોષાય છે, છતાં... પોતાની પાંખડીઓ પર, કાદવનું એક ટીપું પણ ટકવા દેતો નથી. રાજકારણ પોતે ક્યાં કશું છે? એ તો માત્ર એક આરસો છે. જો જોનારની દાનત મેલી, તો એ 'કીચડ', અને જો જોનારની નિયત સાફ, તો એ જ કીચડમાં ખીલેલું... 'આશાનું કમળ'. નિર્ણય તો આપણે કરવાનો છે, "સ્વયમ્'ભૂ" કે આપણે કીચડથી ડરીને કાંઠા પર બેસવું છે? કે કમળ બનીને કાદવને સુધારવો છે? અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

Nisha ankahi

जो करते हैं जाँ-निसार तुम पर, उन्हें पहचानो, हर तालियाँ बजाने वाला अपना नहीं होता। - Nisha ankahi

Parmar Mayur

अभी के दौर में ऐसा है कि अपने धर्म को माननेवाले लोग 'अपने धर्म को ही श्रेष्ठ' मानते हैं। यह मानना भी चाहिए कोई ग़लत बात नहीं है। किन्तु मेरा 'धर्म ही श्रेष्ठ' है, यह साबित करने में 'अधर्म करना' सबसे बुरी बात है। अपने धर्म के प्रति प्रेम रखना और मानना चाहिए । ऐसे ही अन्य धर्मों के प्रति आदर भाव भी व्यक्त करना चाहिए। हमारी जो यह सोच है तो एक अच्छे धर्म को माननेवाले अच्छे व्यक्ति में हमारी गणना सत्य के साथ संपादित होगी। मानवता ही सभी धर्मों का मुख्य सार है। बस इतना जान लेने वाला इंसान किसी भी धर्म का हो उसका धर्म अपने-आप श्रेष्ठ हो जाता है।

Jeetendra

मौनी अमावस्या: मौन, आस्था और आत्मचिंतन का पर्व भारतीय पंचांग में मौनी अमावस्या का विशेष स्थान है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों में उतरने का अवसर है। माघ मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि मौन—अर्थात् चुप्पी—के महत्व को रेखांकित करती है। जहाँ दुनिया शोर में उलझी रहती है, वहीं मौनी अमावस्या हमें भीतर की आवाज़ सुनने के लिए आमंत्रित करती है। मौन का अर्थ और महत्व ‘मौनी’ शब्द मौन से बना है। इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है—कुछ लोग पूरे दिन, कुछ निश्चित समय तक। मौन का उद्देश्य केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म—तीनों को संयमित करना है। माना जाता है कि मौन से मानसिक चंचलता शांत होती है, आत्मसंयम बढ़ता है और विचारों की स्पष्टता आती है। यह दिन आत्मचिंतन, प्रायश्चित और संकल्प का होता है। पवित्र स्नान और दान मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों—विशेषकर गंगा, यमुना, सरस्वती (त्रिवेणी संगम)—में स्नान का विशेष महत्व है। प्रयागराज में इस दिन विशाल स्नान पर्व होता है, जहाँ श्रद्धालु तड़के से ही संगम की ओर बढ़ते हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद दान का विधान भी है—अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल, या सामर्थ्य अनुसार धन। दान का भाव करुणा और सेवा से जुड़ा होता है, जो समाज और आत्मा—दोनों को समृद्ध करता है। आध्यात्मिक साधना और व्रत मौनी अमावस्या साधकों के लिए विशेष दिन है। जप, ध्यान, योग और स्वाध्याय से इस दिन की साधना और फलदायी मानी जाती है। कुछ लोग फलाहार या उपवास रखते हैं। व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और मन की शुद्धि है। आधुनिक जीवन में मौनी अमावस्या आज के तेज़-रफ़्तार जीवन में मौन दुर्लभ हो गया है। मौनी अमावस्या हमें डिजिटल शोर से विराम लेने, अनावश्यक बातचीत से दूरी बनाने और अपने भीतर झाँकने का अवसर देती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, भीतर मिलती है। निष्कर्ष मौनी अमावस्या आस्था, अनुशासन और आत्मचिंतन का पर्व है। यह हमें मौन की शक्ति से परिचित कराता है—जो शब्दों से परे जाकर मन को स्थिर करता है। यदि इस दिन हम थोड़ी देर के लिए ही सही, मौन अपनाएँ, सेवा करें और भीतर की ओर देखें, तो यह पर्व अपने उद्देश्य में सफल हो जाता है। मौन में ही अक्सर सबसे स्पष्ट उत्तर मिलते हैं।

Imaran

प्यार सभी को जीना सिखा देता है वफा के नाम पर मरना सिखा देता है, प्यार नहीं किया तो कर के देख लो यारों जालिम हर दर्द सहना सिखा देता है. 😂imran 😂

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

कुशल कुअवसर देखकर, रखे‌ शत्रु को जोड़। उचित समय पर पटक कर, ज्यों घट देता‌ फोड़।। (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Nithya Reddy

The happiness of your life depends on the quality of your thoughts. - Nithya Reddy

Meeta

તારા પાસે તો સહારા ઘણા, મારા પાસે તો હું પણ નહીં.... - Meeta

Shailesh Joshi

આપણે ઘણું બધું જોવા ન જોવા જેવું જોઈએ છીએ, પછી એને ઘણી બધી રીતે વિચારીએ છીએ, અને અંતે કરવા ન કરવા જેવું પણ કરીએ છીએ, પરંતુ આ બધું અન્ય કોઈ જુએ કે ન જુએ, જાણે કે ન જાણે, પરંતુ ઈશ્વરની ધ્યાન અને જાણ બહાર કંઈ જ નથી હોતું, બસ કાયમ માટે જો આપણે આટલું ધ્યાનમાં રાખીશું તો આપણે ભલે સુખી થઈએ કે ના થઈએ, બાકી દુ:ખી તો ક્યારેય નહીં થઈએ. - Shailesh Joshi

Himanshu Shukla

सुबह की ओस चुपचाप आई, पत्तों पर मोती-सी छा गई। रात की थकन धो गई सारी, नई उम्मीद साथ ले आई। सूरज बोला—अब चलो जागो, ओस मुस्काई, दिन बन आई। Good Morning

Raju kumar Chaudhary

Mr CEO HusbandMy CEO Husband Part 1: The Man Everyone Feared The conference room on the forty-second floor of Armaan Industries was wrapped in a tense silence. A long Italian marble table stretched across the room, surrounded by some of the most powerful men in the business world. Board members, senior executives, foreign investors—everyone was present. Files lay untouched. Coffee had gone cold. No one dared to speak too loudly. They were waiting. Waiting for the man who owned not just the company, but the fear inside their hearts. “He’s late,” one of the foreign delegates whispered, checking his expensive watch for the third time. No one answered. Being late was something only one man in this building was allowed to do. Suddenly, the glass doors slid open. The entire room stood up at once. “There,” someone murmured, barely audible. “Mr. Armaan is here.” Tall. Broad-shouldered. Dressed in a perfectly tailored black suit. Black leather gloves in one hand. And dark sunglasses covering eyes that were said to be colder than steel. Armaan Malhotra walked in like he owned the air itself. He didn’t greet anyone. Didn’t smile. Didn’t acknowledge the respect rising around him. He simply took his seat at the head of the table, removed his sunglasses slowly, and placed them beside his watch. Sharp grey eyes scanned the room. “Sit,” he said. That single word carried the authority of a command. Everyone obeyed instantly. “Why is this meeting delayed?” Armaan asked, his voice calm but lethal. One of the directors cleared his throat nervously. “S–Sir, we were waiting for you.” Armaan leaned back, fingers tapping lightly on the table. “Next time, don’t.” Silence fell again. This was Armaan Malhotra. The youngest CEO in the country. A self-made billionaire. A man who never mixed emotions with business. A man whose personal life was as closed as a locked vault. And a man who hated distractions. Yet, at that very moment, a distraction was slowly entering his life. --- Across the city, in a small, modest house far away from glass buildings and power suits, Aarohi sat quietly on the edge of her bed. Her hands trembled. A letter lay open in her lap. Not just any letter. A marriage proposal. No—an arrangement. Her mother stood near the window, wiping her tears repeatedly. Her father sat on a wooden chair, his shoulders slumped as if the weight of the world rested on him. “Aarohi,” her father said softly, “we don’t have any other option.” She looked up, eyes filled with disbelief and pain. “You want me to marry a man I’ve never met… just to save this family?” Her mother rushed to her side. “Beta, he is a very big man. Very powerful. He can solve everything.” Aarohi laughed bitterly. “By buying me?” No one answered. The truth hurt too much to deny. Armaan Malhotra needed a wife. Not for love. Not for companionship. But for a business reason that would decide the future of his empire. And Aarohi—simple, educated, middle-class Aarohi—was the chosen sacrifice. --- Back in the conference room, Armaan closed the final file with a sharp thud. “The deal will go through,” he said. “Prepare the documents.” One board member hesitated. “Sir… there is one personal matter that needs your approval.” Armaan’s eyes darkened. “I don’t do personal.” “It’s about… the marriage announcement,” the man said carefully. A muscle in Armaan’s jaw tightened. “Fix the date,” he replied coldly. “I don’t care about anything else.” The room froze. For Armaan, marriage was nothing but another contract. For Aarohi, it was the beginning of a storm she wasn’t ready for. --- That night, Aarohi stood on the terrace, staring at the city lights. Somewhere in that shining jungle of buildings lived the man she was going to marry. A stranger. A CEO. A man rumored to be ruthless. She hugged her arms around herself. “Who are you, Mr. Malhotra?” she whispered to the wind. “And what will you do to my life?” Far away, in a penthouse glowing above the city, Armaan poured himself a glass of whiskey. Marriage, for him, was a means to an end. But fate had plans that neither of them could foresee. --- To be continued

Gajendra Kudmate

ख़ुद पर नही ख़ुद से भी ज्यादा हैं हमको तुमपर ऐतबार तुम मानो या ना मानो इसका तुमको पूरा हैं इख़्तियार गजेंद्र

Ruchi Dixit

कैद हूं खुद , खुद से ,खुद में,,,, - Ruchi Dixit

Shivangi Pandey

संघर्ष करती लड़की की उदासी के और भी मसले हो सकते हैं समाज आप शादी बोलकर उसकी उदासी का अपमान कर देते हैं ये काफी हद तक सच है कि औरते कितना भी पढ़ लिख जाए उनके विचार कुंद ही रहते है वे कोशिश ही नहीं करती घरेलू मानसिकता से बाहर आने का सबसे ज्यादा भ्रमित प्राणी भी यही है कि हम तो कमा रहे आजाद हैं भले ही जीवन में अपने ही जीवन का बिना पूछे कोई डिसीजन न ले पाई हों हर शादी, से दुखी औरत दूसरी कुंवारी लड़की को ज्ञान दे रही होती है हमने झंड कर ली आप भी कर लो । Instegram रील देखने से कुछ नहीं होता पहले आप खुद समाज में परिवर्तन स्वीकार करो आंटियों। और रही बात समाज में संतुलन बनाए रखने की तो आप बैचलर को ज्ञान न दे जरा शादी शुदा समाज पर भी फोकस करे भाभियों का अलग fake अकाउंट है भैया ऑफ़िस से लेट आते है । नीड्स तो इनकी शादी करके भी पूरी नहीं हो रही ।

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ अपनी कामयाबी की सीढ़ियाँ, इतनी मज़बूत बनाओ कि, किसी के हक़ के कंधों पर, पैर रखने की ज़रूरत न पड़े…🤞🔥 #𝐉𝐀𝐈_𝐒𝐇𝐑𝐄𝐄_𝐑𝐀𝐌..🚩 #𝗴𝕠𝕠𝗱_𝕄𝗼𝗥𝗻𝕚𝗡𝕘_..🌸 ╭─❀💔༻  ╨──────────━❥ ☞#motivatforself😊°   ⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪ ╨────✥}}{{✥───━❥

kattupaya s

Awaiting for Sunday

kattupaya s

sleep mode on Sunday

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास प्रणय गीत गाऊं महफिल में प्रणय गीत गाऊं या ग़ज़ल को गुनगुनाऊं l या फ़िर अपनी मुलाकातों के प्यारे किस्से सुनाऊं ll आज तुम्हें खिलखिलाता मुस्कुराता देखने को l तुम्हें पसंद आ जाए वहीं प्यारा सा नगमा गाऊं lll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

kattupaya s

Good morning friends.. have a nice Sunday

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

kajal jha

तेरी एक नज़र से दिल धड़क उठा, सांसें थम सी गईं, दुनिया भूल गया। तेरे इश्क़ में डूबा ये जज़्बा मेरा, हर धड़कन पुकारे, बस तू ही तू आ। - kajal jha

Jeetendra

**आज का मोटिवेशन** हर सुबह एक खाली पन्ना लेकर आती है। उस पर क्या लिखा जाएगा, यह हालात तय नहीं करते—तुम करते हो। कल की थकान आज के कदम रोक नहीं सकती, जब तक तुम खुद रुकने का फैसला न करो। धीरे चलो, मगर रुको मत। कम बोलो, मगर खुद से झूठ मत बोलो। जो आज दर्द दे रहा है, वही कल तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। बस एक काम ईमानदारी से करो आज, खुद से हार मत मानो।

Raju kumar Chaudhary

माँ सरस्वती की कथा ( ज्ञान की देवी का अवतरण )🌼 माँ सरस्वती की कथा – ज्ञान की देवी का अवतरण 🌼 प्राचीन काल की बात है। जब सृष्टि का आरंभ हुआ, तब चारों ओर अंधकार, मौन और शून्यता थी। न शब्द थे, न स्वर, न ज्ञान का प्रकाश। ब्रह्मांड नीरव था। तब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, परंतु उन्हें लगा कि संसार में कुछ कमी है— मनुष्य थे, पर सोच नहीं थी, नेत्र थे, पर समझ नहीं थी, कान थे, पर सुनने का अर्थ नहीं था। तब भगवान ब्रह्मा ने गहन तपस्या की। उनकी तपस्या से एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ। उसी प्रकाश से माँ सरस्वती का अवतरण हुआ। वे श्वेत वस्त्रों में, कमल पर विराजमान थीं। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और कमंडल था। माँ सरस्वती ने जब वीणा के तार छेड़े, तो— 🎵 ध्वनि पैदा हुई, 📖 ज्ञान जन्मा, 📝 भाषा बनी, 🎨 कला और संगीत का उदय हुआ। जहाँ मौन था, वहाँ शब्द आए। जहाँ अज्ञान था, वहाँ बुद्धि का प्रकाश फैला। माँ सरस्वती ने मनुष्य को विवेक, संयम, ज्ञान और सृजनशीलता प्रदान की। उन्होंने सिखाया कि— “ज्ञान बिना अहंकार के हो, विद्या बिना लोभ के हो, और बुद्धि सत्य के मार्ग पर चले।” एक बार एक अहंकारी राजा ने कहा— “मेरे राज्य में सबसे बड़ा बल धन और शक्ति है।” माँ सरस्वती एक साधारण स्त्री के रूप में वहाँ पहुँचीं और एक छोटे बालक को पढ़ाने लगीं। वही बालक आगे चलकर महान विद्वान बना, और उसी विद्या से राज्य को सही मार्ग दिखाया। तब राजा को समझ आया कि— बल से बड़ा ज्ञान होता है, और ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं। तब से माँ सरस्वती को विद्या, बुद्धि और कला की देवी माना जाने लगा। आज भी जब विद्यार्थी पढ़ाई शुरू करते हैं, कलाकार रचना करते हैं, लेखक कलम उठाते हैं— तो सबसे पहले कहते हैं— 🙏 “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” 🙏 क्योंकि जहाँ माँ सरस्वती का आशीर्वाद होता है, वहाँ अज्ञान का अंधकार टिक नहीं पाता।

Bhavna Bhatt

ગીત સંગીત

GIRLy Quotes

https://www.instagram.com/reel/DR8ZFo5EsSy/?igsh=cWRuNm02NWNkYjl6

Rajiv Jangid

घर के एक कमरे में एक अलमारी है। उसमें ढेरों निधियों का संचय कर रखा है मैंने। ये निधियाँ बनी हैं ढेरों बातों की, जो मैं कर नहीं पाया तुमसे। मैंने अलमारी को खिड़की के पास रखा है, क्योंकि तुमसे मिलने के दरवाज़े हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं।

smita

एक दिन तुम याद करोगे.... मेरा साधारण सा चेहरा, मेरी हल्की सी मुस्कान, मेरा निस्वार्थ प्रेम, बेमतलब सी लड़ाईयां अनगिनत मैसेज और मुझे🙂💯

Indrajit Chenva

પેહલો પ્યાર… કોઈને કહો તો સમજાય નહીં… પણ દિલમાં બેસી જાય છે… કોલેજનો પહેલો દિવસ… અજાણ્યા ચહેરાઓ વચ્ચે એક તૂટી ગયેલી પેન… એ પેન માંગવી… એ પેન આપવી… અને અજાણતાં જ દિલ જોડાઈ ગયું… વાતો વધી… લાગણીઓ બની… પણ પ્રેમમાં ભણતર છૂટી ગયું… અને એક દિવસ પ્રેમ પણ છૂટી ગયો… આજે પણ… જ્યારે પેન હાથમાં આવે છે… ત્યારે આંખો પોતે જ ભીની થઈ જાય છે… પેન તૂટી ગઈ હતી… પણ યાદોએ આખું જીવન તોડી નાખ્યું… પેન થી પ્રેમ સુધી… પેહલો પ્યાર… રડાવે બહુ યાર…

Shailesh Joshi

જે માણસની રોટલાની અને ઓટલાની જરૂરિયાત પૂરી ન થાય, ત્યાં સુધી એ માણસ પાસે બીજી કોઈ બે મતલબની વાત નથી હોતી, અને જેવી એની આ બે જરૂરિયાત "સંતોષાઈ જાય છે" એવો જ માણસ, કેમ બે મતલબની વાતોમાં "સપડાઈ જાય છે" - Shailesh Joshi

નીલકંઠ

એકાએક કવિતા સાંભળવાની જીદ સાથે તું મારી સામે બેસી જાય છે ત્યારે, વિખેરાયેલી પંક્તિઓને કવિતામાં સમેટવાનો અમસ્તો પ્રયાસ હું કરતો નથી.. એ ક્ષણે બસ તું જ મારા હોઠે હોય છે! મારી એકાક્ષરી કવિતા એટલે "તું"... -નીલકંઠ

Prithvi Nokwal

पता नहीं जीवन मे ऐसा क्यों लग रहा है जितना भी मैं जिया हूं पूर्ण रूप से गलत ही जिया हूं! पता नहीं क्यों?

kattupaya s

Ok guys see you in another session with bunch of thoughts. goodnight

kattupaya s

quite and dark. imaginations were overflowing. my thought process wants to write everything I suffered.. it will take time.

kattupaya s

recently I purchased this book in Chennai book fair. I recommend this book. All men and women are different from every angle. it's for adults.

kattupaya s

matrubhartiயில் எழுத ஆரம்பித்து 2ஆண்டுகள் ஆகி விட்டது. மறக்க முடியாத நினைவுகள். அன்புக்கும் ஆதரவுக்கும் நன்றி வாசகர்கள் அனைவருக்கும்.

kattupaya s

it's almost 2 years with writing @matrubharti.i remember every moment. Thanks for the support given by readers. its another cycle of my life

kattupaya s

all the short time characters coming in my yadhumatra peruveli novel make you dizzy. if that is true novel may got success. what do you think..?

kattupaya s

யாதுமற்ற பெருவெளி நாவல் பல characters குறுகிய கால கதாபாத்திரத்தில் வரும் போது ஒரு மயக்க நிலை வரும். அப்படி வந்தால் நாவல் வெற்றி பெற்றது என்று அர்த்தம். நீங்கள் என்ன நினைக்கிறீர்கள்?

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