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Hemant pandya

પ્રીત સુરાનર ના કામ કરે એ કરી જાણે ન પીછે હઠ કરે, માય કાગલા મેદાન છોડી ભાગે, એ કાયર ના ન આ કામ - Hemant pandya

Parmar Mayur

🙏🙏हम शांति के लिए 'युद्ध' करते हैं। बस इसी तरह कुछ लोग दुनिया को 'अप्रेल फूल' बनाते हैं।।🦚🦚

Narayan

दर्द बस दर्द हो, तो बाँटें भी ये निशानी है आख़िर उसकी💞

Swapnil Dnyaneshwarrao Karhale Patil

राष्ट्राची प्रगती की मानवतेची अधोगती खूप थकलेला दिसतोस रे माझ्या पंढरीच्या राजा पांडुरंगा कसा सहन होतोय रे विठ्ठला तुला अस्तित्वासाठी चाललेला अमानवी दंगा माझा शेतकरी राजा झालाय कर्जाच्या वाढत्या डोंगरामुळे वेडापिसा पापाच्या पैशामुळे फुगत चाललाय भ्रष्ट आणि निर्दयी राजकारण्यांचा खिसा शेतकऱ्याचं ऐकणारा कोणी नसल्याने करतोय तो अश्रूंची काळजामध्ये साठवण अशा खडतर प्रसंगावेळी खरंच येते स्वराज्यसंकल्पक शहाजी महाराजांची आठवण पाठव ना रे विठ्ठला त्यांना परत खचून गेली स्वाभिमानाची धरती नक्कीच आळा बसेल पांडुरंगा भ्रष्ट हुकुमशाही राजकारणावरती शेतकरी राजा खूप खचलाय रे कायम पाठीशी असो तुझा आशिर्वाद लवकरच मिटवून टाक पांडुरंगा माणुसकी संपवणारा अस्तित्वाचा वाद स्वप्निल संगीता ज्ञानेश्वरराव कऱ्हाळे पाटील लेखक शाश्वत सत्य मराठी काव्यसंग्रह मो. नं. 9049225717

Vartikareena

https://www.matrubharti.com/book/19990954/my-dear-professorमाई_डियर_प्रोफेसर का भाग 8 आज आएगा। आप लोग पढ लेना। और कमेंट और रेटिंग भी कर दिया करो। आप लोग के लिए पढने के लिए कहानिया है..लेखिका के लिए भी तो कुछ होना चाहिए। ये आज के भाग की एक झलक 👇

Sohagi Baski

গোপন ভালোবাসা... তার চোখে সে শুধু এক চুপচাপ, সংযত মানুষ— যে নিজের মতো থাকে, বেশি কথা বলে না, হাসিটাও যেন মাপা… অনুভূতিগুলো সবসময় আড়ালে রাখা। কিন্তু এই নীরবতার আড়ালে, তার মনের ভেতরে প্রতিনিয়ত ঝড় ওঠে— অজস্র না-বলা কথা, অগণিত অনুভূতি, যেগুলো সে কখনোই মুখে আনতে পারে না। সে ভাবে— “তুমি কি সত্যিই কিছুই বুঝতে পারো না? আমার চোখে তাকিয়ে একবারও কি বুঝতে পারো না, আমি তোমাকে কতটা ভালোবাসি? শুধু একবার তোমার সামনে দাঁড়ানোর জন্য, শুধু একবার তোমার কাছে নিজের সবটুকু স্বীকার করার জন্য, আমি হাজারটা হৃদয় ভেঙে দিতে পারি, পুরো একটা দুনিয়া ধ্বংস করতেও আমার ভয় লাগবে না…” তবুও, সবকিছুই থেকে যায় মনের ভেতরে— অপ্রকাশিত, অসম্পূর্ণ, অজানা। কারণ সে জানে, সব ভালোবাসা প্রকাশ পাওয়ার জন্য তৈরি হয় না— কিছু ভালোবাসা থাকে শুধু অনুভব করার জন্য, নিঃশব্দে, দূর থেকে। আর সেই গোপন ভালোবাসা— যা কখনো বলা হয় না, কখনো স্বীকার করা হয় না— সেটাই হয় সবচেয়ে গভীর, সবচেয়ে সত্যি… আর সবচেয়ে কষ্টের। সমাপ্তি🍁

Sohagi Baski

ভালোবাসার দ্বন্দ্ব***** . . . . . . একজন মানুষ তার প্রিয় মানুষটাকে গভীরভাবে ভালোবাসে। কিন্তু সেই ভালোবাসার ভেতরে লুকিয়ে আছে একসাথে সুখ আর কষ্ট। সে চায়, প্রিয় মানুষটা যেন কষ্টটাও অনুভব করে— যেন বুঝতে পারে ভালোবাসার গভীরতা। তবুও, যখন সে সত্যিই সেই কষ্টে ভেঙে পড়ে, তখন তার নিজের মনটাই সবচেয়ে বেশি ভেঙে যায়। ভালোবাসা কখনো শুধু সুখ নয়, কখনো এটা সুখ আর যন্ত্রণার মাঝখানে দাঁড়িয়ে থাকা— একটা অদ্ভুত, তীব্র অনুভূতি। সমাপ্তি🍁

Kaushik Dave

॥ હાટકેશ્વર સ્મરણ।। @કૌશિક દવે મન મારું મુંઝાય ત્યારે કરું હું સ્મરણ, મનને શાંત કરે છે એ નામ રટણ..એ નામ રટણ. જય જય જય જય હાટકેશ્વરમ્... (૨) હાટકેશ્વરના સ્મરણમાં જીવનું છે કલ્યાણ, ઈશ્વરને પ્રાર્થના કરું, મનને સમર્પિત કરું. જય જય જય જય હાટકેશ્વરમ્... અંબાજીની આરાધના ને હાટકેશ્વર જયંતિ, કરવી રે આરતી મારે હર હર મહાદેવની. જય જય જય જય હાટકેશ્વરમ્... - : કૌશિક દવે હાટકેશ્વર જયંતિની શુભકામનાઓ 💐 જય હાટકેશ્વર 🙏 - Kaushik Dave

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास और क्या क्या राज छुपा है मिस्त्रा ए सानी में ll मुकम्मल मटरगश्ती ही की है जवानी में ll पढ़ लिख लिया है जिंदगी को कहानी में l देखो उम्रभर की मेहनत ही हुई पानी में ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

santhoshi Vadlamani

🌼 ప్రకృతి పిలుపు 🌼 పచ్చని పూల గాలిలో పరిమళం వెదజల్లే వేళ, పక్షుల గానంలో జీవితం సాగే వేళ… ప్రకృతి మనసుకు మాటలు చెబుతుంది, మనసులోని మౌనాన్ని మెల్లగా తాకుతుంది. పర్వతాల నడుమ గాలి ఊపిరి, నదుల ప్రవాహంలో కాలం నడక… చెట్టుల నీడలో శాంతి దొరుకుతుంది, పచ్చని లోకంలో నిజమైన సుఖం కనిపిస్తుంది. సూర్యోదయం ఆశల రంగులు పూయగా, సంధ్యారాగం మనసుకు నిద్ర పాడగా… ప్రకృతి ప్రతి క్షణం ఒక పాఠం చెప్తుంది, జీవితం అంటే అందాన్ని ఆస్వాదించడమే అంటుంది. మనిషి దూరమైనా ప్రకృతి దగ్గరే ఉంటుంది, మనసు బాధలో ఉన్నా దాన్ని ఆప్యాయంగా ఆదరిస్తుంది… ప్రకృతిని కాపాడితేనే మన భవిష్యత్తు, అదే మన జీవితానికి నిజమైన సత్యం.

known stranger

તારા સુંદર પગસ્પર્શનો અવસર છે આજે પાયલને જાણે કોઈ તહેવાર છે ઘરેણાં બીજા એમ કહી સળગી ગયા કાં પાયલ માટે જ પ્રેમનો વ્યવહાર છે સીતારા આજ આસમાનમાં ગમસુદા છે ચાંદ જાણે આજે તારા પગનો શૃંગાર છે આ હોઠને આજ હોઠ થવાનો ઇનકાર છે પાયલ થઈ તારા પગ ચુમવાનો વિચાર છે - known

Mamta Trivedi

ममता गिरी त्रिवेदी की🌹कविताएं https://www.instagram.com/reel/DWkpLCUqJGK/?igsh=MWhnNW1hNHp5aWx1aQ==

Sonu Kumar

भारत में जनसंख्या वृद्धि दर को कम करने के लिए क्या करना चाहिए? . जनसंख्या नियंत्रण का क़ानून गेजेट में छाप कर जनसँख्या वृद्धि दर को नियंत्रित किया जा सकता है। क़ानून लागू करने के लिए सबसे पहले हमें इसका ड्राफ्ट चाहिए, ताकि यह निर्धारित हो सके कि जनसँख्या नियंत्रण क़ानून में क्या प्रावधान होंगे, और यह कैसे काम करेगा। . भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून यदि 1952 में छापा जाता तो Four Child Policy लागू करने से भी काम चल जाता था। यदि यह क़ानून 1992 में लाया जाता तब भी Three Child Policy काफी थी। 70 साल के टाइम पास ने हालात ऐसे कर दिए है कि अब जनसँख्या नियंत्रण के लिए हमें Two Child Policy की जरूरत है !! . लेकिन यदि 2 बच्चों का क़ानून सीधे तौर पर लागू कर दिया जाए तो कन्या भ्रूण हत्या में विस्फोटक वृद्धि हो जाएगी। इसके अलावा गोद ली गयी संताने, दिव्यांग संताने, मंदबुद्धि संताने, आदिवासियों में बढ़ी हुयी शिशु मृत्यु दर आदि विषयों को भी दृष्टिगत रखना होता है। दुसरे शब्दों में जब तक हमारे सामने इसका ड्राफ्ट न हो तब तक जनसँख्या नियंत्रण की समस्या पर बात करके टाइम पास तो किया जा सकता है, किन्तु इस समस्या का समाधान करने की दिशा में कदम नहीं उठाया जा सकता। ड्राफ्ट के अभाव में पहले ही हम काफी वक्त जाया कर चुके है। . 70 साल का टाइम पास करने का यह श्रेय पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए भारी भरकम नेताओं को जाता है। और इसका क्रेडिट उन कार्यकर्ताओ को भी दिया जाना चाहिए जो पेड मीडिया द्वारा खड़े गए इन ब्रांडेड नेताओं से चिपके रहते है, और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कानूनों की अवहेलना करते है !! . पेड मीडिया के प्रायोजको का जनसँख्या नियंत्रण कानून को लेकर एजेंडा — पेड मीडिया के प्रायोजक 1951 से ही भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून लाने के खिलाफ रहे है !! . पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित पार्टियों का जनसँख्या नियंत्रण क़ानून पर स्टेंड : PMP01* हमेशा से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून के खिलाफ रही है। PMP02 के नेता एवं कार्यकर्ता धार्मिक जनसँख्या के बिगड़ते अनुपात के प्रति चिंता जताते रहे है, किन्तु जनसँख्या नियंत्रण के लिए क़ानून बनाने का वे हमेशा विरोध करते है !! दरअसल, उनकी रुचि इस समस्या को इस तरह उठाने रहती है कि इससे उनके वोट बढ़े। वे धार्मिक जनसँख्या के बिगड़ते संतुलन के बारे में नागरिको को सूचित करके वोट खींचते है। दुसरे शब्दों में, यह समस्या उन्हें वोट देती है। इसका समाधान होने से वोट खींचने का एक बिंदु उड़ जाएगा !! PMP03 भी जनसँख्या नियंत्रण क़ानून के खिलाफ है। इसके नेता इस क़ानून के इस हद तक खिलाफ है कि वे इस मुद्दे पर कोई बात ही नहीं करना चाहते। वे चुप रहते है, और समस्या की अनदेखी करते है !! . इस तरह ये इन तीनो पार्टियों के नेता एवं कार्यकर्ता पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे में खुद को एडजस्ट करके रखते है, और अलग अलग तरीको का इस्तेमाल करके इस क़ानून को टालते है। . ———- . [ टिप्पणी : पेड मीडिया पार्टी से आशय ऐसी राजनैतिक पार्टी से होता है जो पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के समर्थन में रहती है, और कभी भी उनके खिलाफ नहीं जाती। उदारहण के लिए, जनसँख्या नियंत्रण को लेकर पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा हमेशा से यह रहा है कि भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून नहीं आना चाहिए, अत: पेड मीडिया पार्टीयां यह क़ानून गेजेट में छापने के खिलाफ रहेगी। . अब यहाँ इस बात को समझना जरुरी है कि, यहाँ मुख्य बिंदु क़ानून छापना है। तो कोई भी पेड मीडिया पार्टी जनसँख्या नियंत्रण का मुद्दा तो उठा सकती है, किन्तु क़ानून नहीं छाप सकती। मतलब अमुक पार्टियाँ जनसंख्या नियंत्रण पर डिबेट कर सकती है, “जागरूकता” फैला सकती है, और जनसँख्या नियंत्रण की आवश्यकता बताने को लेकर देश व्यापी हल्ला मचा सकती है, किन्तु क़ानून नही बना सकती। और उन्हें इसका क़ानून नहीं बनाना अत: पेड मीडिया पार्टियों के नेता एवं कार्यकर्ता कभी भी इसका ड्राफ्ट नहीं देंगे। ] . (*) PMP01 - कोंग्रेस , PMP02 – संघ=बीजेपी , PMP03 – आम आदमी पार्टी . ————— . समाधान : भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून का आज तक सिर्फ एक ही ड्राफ्ट लिखा गया है। सिर्फ एक !!! इस क़ानून का नाम Two Child Law है। इस क़ानून में कुल 16 धाराएं है। इस क़ानून का पहला संस्करण 2016 में प्रकाशित किया गया था। फरवरी 2020 में इसे अपडेट करके नया संस्करण जारी किया गया है। इस प्रस्तावित क़ानून की हेश #TwoChildLaw है। . यह क़ानून 2016 में ही पीएम को भेज दिया गया था, एवं तब से लगातार विभिन्न कार्यकर्ता पीएम को ट्विट करके इसे गेजेट में छापने का अनुरोध करते रहते है। . निचे प्रस्तावित टू चाइल्ड लॉ का सारांश एवं इसकी एक महत्त्वपूर्ण धारा (9) का ब्यौरा दिया गया है : . ——-ड्राफ्ट के सारांश का प्रारंभ—— . इस कानून को धन विधेयक के रूप में लोकसभा से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके देश में लागू किया जा सकता है। इस क़ानून को राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। यह क़ानून ड्राफ्ट भारतीय संविधान के किसी भी मौजूदा प्रावधान का उलंघन नहीं करता, अत: इसके लिए किसी प्रकार के संवैधानिक संशोधन की भी ज़रूरत नहीं है। . (9) भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती, जुर्माना और कारावास : . (9.1) यदि किसी व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के पास निर्धारित संतानों की संख्या से अधिक संताने है, तो खनिज रॉयल्टी भुगतान में कटौती, आर्थिक सहायता/अनुदान आदि में कटौती, जुर्माना और कारावास लागू हो सकते है। आदिवासियों के संतानों की संख्या अन्य के लिए निर्धारित संतानों की संख्या से एक संतान अधिक हो सकती है। सिर्फ आदिवासियों को ही यह छूट मिलेगी। अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यको को यह विशेषाधिकार नहीं मिलेगा। . (9.2) यह कानून लागू होने के 1 साल बाद यदि किसी व्यक्ति के कोई संतान पैदा नहीं हुई है , तो सजा या भुगतान और आर्थिक सहायता में कटौती नहीं होगी। लेकिन भुगतान में वृद्धि हो सकती है। . (9.3) इस खंड में D का अर्थ है सिर्फ एक पुत्री, और S का अर्थ है सिर्फ एक पुत्र। DD का अर्थ है दो पुत्रियाँ और DS का अर्थ है पहली संतान पुत्री और दूसरी संतान पुत्र है। DDS का अर्थ है पहली संतान पुत्री है, दूसरी पुत्री है और तीसरी पुत्र है। दूसरे शब्दों में, इस खंड में संतानों के पैदा होने का क्रम बताया गया है ना कि सिर्फ कुल संख्या। DSD का अर्थ होगा पहली संतान पुत्री, दूसरी पुत्र और तीसरी पुत्री है। और इसी तरह SDD, DSD अलग अलग क्रम को दर्शाता है। . निसंतान - यदि किसी व्यक्ति की आयु 18 से 23 वर्ष के मध्य है तब उसे प्राप्त होने वाली खनिज रॉयल्टी एवं सरकारी जमीनों के किराये से प्राप्त होने वाली राशि में 33% की अधिक वृद्धि हो जायेगी। 23 वर्ष की आयु के बाद निसंतान होने पर कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलेगा। S - कोई सजा नहीं और ना ही खनिज रॉयल्टी का अतिरिक्त भुगतान। D या DD या DDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी में 33% की अतिरिक्त वृद्धि। DDDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी में 66% की अतिरिक्त वृद्धि। SS, SD, DS, DDS, DDDS, DDDDS, DDDDD - कोई सजा नहीं और खनिज रॉयल्टी का कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं। एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.5) के बाद - खनिज रॉयल्टी में 33% कटौती 10 साल के लिए , ना कारावास और ना जुर्माना। एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.6) के बाद - खनिज रॉयल्टी में 66% कटौती 10 साल के लिए , 20 वर्ष के लिए मताधिकार का निलम्बन, ना कारावास और ना जुर्माना। ( मताधिकार निलम्बन एवं इसकी अवधि का फैसला नागरिको की जूरी करेगी ) एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.7) के बाद - खंड (9.3.7) की सजा और साथ में 10 साल के लिए आय का 10% जुर्माना ( न्यूनतम रु 1000 प्रति माह और अधिकतम रु 10000 प्रति माह ), ना कारावास। एक संतान, पुत्र या पुत्री खंड (9.3.8) के बाद - खंड (9.3.8) की सजा और साथ में 2 साल तक का कारावास। प्रत्येक संतान के लिए खंड (9.3.9) के बाद - खंड (9.3.9) की सजा और साथ में प्रति संतान के लिए 2 अधिक साल के लिए कारावास और बाध्यकारी नसबंदी। . [ टिप्पणी : खनिज रॉयल्टी : खनिज रॉयल्टी एवं सरकारी जमीनों से प्राप्त होने वाले प्रावधान तब लागू होंगे जब प्रधानमंत्री प्रस्तावित धन वापसी पासबुक का क़ानून गेजेट में छापकर भारत के सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों को भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित कर देते है। जब तक धन वापसी पासबुक गेजेट में नहीं आता, तब तक उन सभी आर्थिक अनुदानों, सब्सिडी आदि में कटौती होगी जो आर्थिक अनुदान नागरिको को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा दिए जा रहे है। ] . (9.4) यह कानून लागू होने के 5 साल बाद, अधिक संतान उत्पत्ति पर होने वाली सजा इस प्रकार है : खंड (9.3.1) से (9.3.5) तक के मामलों में संतान संख्या के लिए - कोई सजा नहीं। खंड (9.3.6) में संतान संख्या के लिए, खंड (9.3.7) में दी गयी सजा मिलेगी, और खंड (9.3.7) में संतान संख्या के लिए, खंड (9.3.8) में दी गयी सजा मिलेगी, और सभी खंडो के लिए इसी प्रकार से सजा मिलेगी। दूसरे शब्दों में, खंड (9.3.5) के बाद सभी खंडो के लिए सजा "एक स्तर आगे" हो जाएगी। . (10) जुर्माना संग्रहित करने में नियम - जुर्माना प्रत्येक माता-पिता पर 1000 रू प्रति महीना न्यूनतम तथा 10000 रू प्रति महीना अधिकतम होगा। लेकिन संग्रहित जुर्माना मासिक आय के 10% से अधिक नहीं होगा। तो यदि व्यक्ति की आय 10000 रू से कम है तब उसकी आय का 10% जुर्माना ही लिया जायेगा और शेष राशि "लंबित जुर्माना" के रूप में रखी जाएगी। लंबित जुर्माने पर प्रचलित दर के अनुसार ब्याज देय होगा। "लंबित जुर्माना" के मामले में, अवधि 10 साल के बाद भी बढाई जा सकती है, जब तक कि सारा लंबित जुर्माना ब्याज सहित संग्रहित नहीं हो जाता। अमुक व्यक्ति चाहे तो लंबित जुर्माना शीघ्र अति शीघ्र अदा कर सकता है। और राशियाँ 1000 रू और 10,000 रू महंगाई दर के अनुसार प्रति वर्ष बढाई जा सकती है। . (12) कुछ जटिल और विशेष परिस्थितियां : इस कानून के पारित होने से पूर्व ( या पारित होने के 1 वर्ष के अन्दर) जन्मी संतानों के कारण कोई भी जुर्माना या सजा नहीं होगी। यदि अंत में जन्मी संताने जुडवा हैं तो उनको एक संतान ही गिना जाएगा। लेकिन यदि जुडवा संतानों के बाद कोई संतान जन्म लेती है तो जुडवा बच्चों को दो अलग संतानों के रूप में गिना जाएगा। गोद ली गयी संतानों को गिना नहीं जाएगा। दिव्यांग संतानों को गिना जाएगा। माता-पिता को दिव्यांग संतानों के लिए 66% अधिक खनिज रोयल्टी दी जाएगी। यदि जन्मित संतान पुत्र या पुत्री नहीं है तो ऊपर लिखे नियमो को लागू करते समय उस संतान को पुत्री के रूप में गिना जाएगा। . (13.1) जब भी कभी राष्ट्रीय जनसख्या नियंत्रण अधिकारी ( या उनके कर्मचारी ) किसी नागरिक को खनिज रॉयल्टी एवं सब्सिडी आदि के रूप में मिलने वाली धन राशि को कम करने का निर्णय करेंगे या किसी तरह की सजा देना या जुर्माना लगाना चाहेंगे तो मामले के विचार के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी 25 से 55 तक की उम्र के नागरिकों को रैंडमली चुनेंगे और एक जूरी मंडल का गठन करेंगे। और जब भी कोई नागरिक किसी राष्ट्रिय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी के कर्मचारिओं के विरुद्ध कोई शिकायत दर्ज कराना चाहेंगे तब भी राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण अधिकारी वेसे ही एक जूरी मंडल का गठन करेंगे। इस क़ानून से सम्बधित सभी प्रकार के मामलों का निपटान जूरी मंडल द्वारा किया जाएगा। किन्तु जूरी मंडल के फैसले की अपील उच्च या उच्चतम न्यायालयों में की जा सकेगी . (06) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय जनसँख्या नियंत्रण अधिकारी (NPCO = National Population Control Officer) को नियुक्त करेंगे जिसे भारत के नागरिक वोट वापसी प्रक्रियाओं का प्रयोग करके बदल सकेंगे। NPCO एवं उसका स्टाफ जूरी मंडल के दायरे में रहेगा एवं उसके खिलाफ कोई शिकायत आती है तो सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी। . [ टिप्पणी : वापसी एवं जूरी के दायरे में होने के कारण NPCO एवं उसका स्टाफ कार्यकुशलता एवं इमानदारी से काम करेगा। ] . ———ड्राफ्ट के सारांश समापन——- . इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या बदलाव आएगा ? . (ia) भारत में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का एक बड़ा कारण धार्मिक जनसँख्या के अनुपात का लगातार बिगड़ना है। यदि भारत में यह क़ानून कई दशक पहले आ जाता धार्मिक जनसँख्या के इस असंतुलन को रोका जा सकता था। किन्तु भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी एवं संगठन ने भारत में जनसँख्या नियंत्रण का क़ानून ड्राफ्ट सामने रखने तक की जहमत नहीं उठायी। क़ानून पास करना तो आगे की बात है। इस कानून के आने से भारत जनसँख्या नियंत्रण शुरू होगा और इस वजह से साम्प्रदायिक तनाव में भी कमी आएगी। . (ib) हमारे समाज में बहुधा पुत्र प्राप्ति के लिए स्वाभाविक झुकाव देखने में आता है। अत: इस क़ानून को इस तरह लिखा गया है कि यदि किसी दम्पत्ति की प्रथम 4 संताने पुत्रियाँ है तो उसे सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदान में अतिरिक्त वृद्धि होगी, और 5 पुत्रियाँ होने तक भी उसे किसी आर्थिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस तरह इस क़ानून के आने के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या के मामलो में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। . पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें – https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1062761064096970/ . ऊपर दिए गए विवरणों को सलंग्न तालिका में भी दर्शाया गया है

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

जग में पले अनाथ पर, मरे नृपति का पुत्र। ईश कृपा बिन किस तरह ? नृप का बचे सुपुत्र।। दोहा --467 (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(52) की व्याख्या -"समानी व आकूति:" ऋगुवेद - 10/191/3 भाव--समान विचार रखो। यह दिया हुआ मन्त्र ऋग्वेद (10.191.3) का अंश है— मन्त्र: “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” सरल भावार्थ_ आपका भाव बिल्कुल सही है— “सभी लोगों के विचार (आकांक्षाएँ/उद्देश्य) समान हों।” लेकिन इसका अर्थ थोड़ा और व्यापक है— समानी व आकूतिः → सबकी इच्छाएँ और लक्ष्य एक जैसे हों। समाना हृदयानि वः → सबके हृदय (भावनाएँ) समान हों। समानमस्तु वो मनः → सबका मन एक जैसा हो। यथा वः सुसहासति → जिससे आप सब मिलकर सुखपूर्वक रह सकें विस्तृत भाव-- यह मन्त्र सामाजिक एकता, सामंजस्य और सहयोग की शिक्षा देता है। ऋषि कहते हैं कि— जब लोगों के विचार, भाव और उद्देश्य एक दिशा में होते हैं, तब समाज में शांति रहती है। सहयोग बढ़ता है। संघर्ष कम होता है सार--- भाव—“समान विचार रखो”—सही है, लेकिन पूरा मन्त्र यह भी कहता है कि— केवल विचार ही नहीं, बल्कि मन और हृदय भी एकता में हों, तभी सच्चा सामंजस्य बनता है। वेदों में प्रमाण-- 1. ऋग्वेद-- 10.191.2 मन्त्र: “सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते॥” अर्थ: तुम सब मिलकर चलो, मिलकर बोलो और अपने मनों को एक करो। जैसे प्राचीन देवता एक भाव से यज्ञ करते थे, वैसे ही तुम भी एकता से रहो। 2. ऋग्वेद-- 10.191.3 मन्त्र: “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” अर्थ: तुम्हारी इच्छाएँ, हृदय और मन समान हों, जिससे तुम सब मिलकर सुखपूर्वक रह सको। 3. अथर्ववेद-- 3.30.1 मन्त्र: “समानी प्रपा सह वोऽन्नभागाः समाने योक्त्रे सह वो युनज्मि।” अर्थ: तुम सबका जल और अन्न समान हो, और तुम सब एक ही बंधन (सम्बन्ध) में जुड़े रहो। 4. अथर्ववेद-- 3.30.4 मन्त्र: “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” अर्थ: (ऋग्वेद के समान) — तुम्हारे विचार, हृदय और मन एक हों, जिससे आपसी सुख बना रहे। 5. यजुर्वेद --36.18 मन्त्र: “मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे।” अर्थ: मैं सभी प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखूँ। (अर्थात् सबके प्रति समानता और सद्भाव रखें) 6. यजुर्वेद --40.1 (ईशावास्योपनिषद् मन्त्र) मन्त्र: “ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।” अर्थ: इस जगत में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से आवृत है। (अर्थात् सबमें एक ही तत्व है—इसलिए भेदभाव नहीं करना चाहिए) निष्कर्ष--- वेदों का स्पष्ट संदेश है— एकता, समानता, सामंजस्य और परस्पर सहयोग। साथ चलो (सं गच्छध्वं)।साथ सोचो (समानं मनः)। सबको समान दृष्टि से देखो। उपनिषदो में प्रमाण-- 1. ईशावास्योपनिषद् ---6 यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति। सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते॥” अर्थ: जो व्यक्ति सभी प्राणियों को अपने आत्मा में और अपने आत्मा को सभी प्राणियों में देखता है, वह किसी से घृणा नहीं करता। 2. ईशावास्योपनिषद् मन्त्र -7 मन्त्र: “यस्मिन्सर्वाणि भूतानि आत्मैवाभूद्विजानतः। तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः॥” अर्थ: जो ज्ञानी सबमें एक ही आत्मा को देखता है, उसे न मोह होता है, न शोक—क्योंकि वह एकत्व को समझ चुका है। 3. छान्दोग्य उपनिषद्-- 6.8.7 “तत्त्वमसि” अर्थ: “वह (ब्रह्म) तू ही है।” अर्थात् जीव और ब्रह्म में मूलतः एकता है 4. बृहदारण्यक उपनिषद् --1.4.10 “अहं ब्रह्मास्मि” अर्थ: “मैं ब्रह्म हूँ।” (अर्थात् आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है) 5. माण्डूक्य उपनिषद् मन्त्र-- 2 “अयमात्मा ब्रह्म” अर्थ: यह आत्मा ही ब्रह्म है। (सबमें एक ही चेतना का निवास है) 6. कठोपनिषद्-- 2.1.10 मन्त्र: “यदेवेह तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह। मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति॥” अर्थ: 6-जो यहाँ (इस संसार में) अनेकता देखता है, वह जन्म-मरण के चक्र में फँसा रहता है। 7. श्वेताश्वतर उपनिषद्-- 6.11 “एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सब प्राणियों में छिपा हुआ है, वह सबमें व्याप्त और सबका अंतरात्मा है। निष्कर्ष-- उपनिषदों का मूल सिद्धान्त है— “सबमें एक ही आत्मा (ब्रह्म) है” इसलिए—किसी से द्वेष नहीं। सबके प्रति समान दृष्टि। एकत्व का अनुभव ही ज्ञान है। पुराणों में प्रमाण-- 1. भागवत पुराण --11.29.15 “सर्वभूतेषु यः पश्येद्भगवद्भावमात्मनः। भूतानि भगवत्यात्मन्येष भागवतोत्तमः॥” अर्थ: जो मनुष्य सभी प्राणियों में भगवान् को और भगवान् में सभी प्राणियों को देखता है, वही श्रेष्ठ भक्त (भागवतोत्तम) है। 2. विष्णु पुराण- 1.19.85 “समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्। विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥” अर्थ: जो परमेश्वर को सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित देखता है, और नश्वर शरीरों में भी उस अविनाशी तत्व को पहचानता है—वही वास्तव में देखता है। . शिव पुराण --1.6.38 “एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में छिपा हुआ है, वह सबमें व्याप्त और सबका अंतरात्मा है। 4. गरुड़ पुराण-- 1.229.32 “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान (आत्मभाव) देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। 5. नारद पुराण-- 1.41.62 “नास्ति तेषां पृथग्भावो येषां ब्रह्मणि चेतसि।” अर्थ: जिनका मन ब्रह्म में स्थित है, उनके लिए कोई भेदभाव नहीं रहता। 6. पद्म पुराण-- 2.71.38 “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। निष्कर्ष-- पुराणों का भी स्पष्ट संदेश है— एक ही परमात्मा सबमें विद्यमान है, इसलिए सबके प्रति समान भाव रखें। सबमें भगवान् देखें। भेदभाव त्यागें। आत्मभाव से व्यवहार करें। भगवद्गीता में प्रमाण-- 1. अध्याय 5, श्लोक 18 श्लोक: “विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि। शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥” अर्थ: ज्ञानी पुरुष विद्या-विनययुक्त ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ता और चाण्डाल में भी समान दृष्टि रखते हैं। 2. अध्याय 6, श्लोक 29 श्लोक: “सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥” अर्थ: योगयुक्त व्यक्ति सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखता है। 3. अध्याय 6, श्लोक 30 श्लोक: “यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति। तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥” अर्थ: जो मुझे (भगवान को) हर जगह देखता है और सबको मुझमें देखता है, वह मुझसे कभी अलग नहीं होता। 4. अध्याय 6, श्लोक 32 श्लोक: “आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन। सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः॥” अर्थ: जो अपने समान सभी में समान भाव रखता है, चाहे सुख हो या दुःख—वही श्रेष्ठ योगी है। 5. अध्याय 13, श्लोक 27 श्लोक: “समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्। विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥” अर्थ: जो परमेश्वर को सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित देखता है, वही वास्तव में सत्य को देखता है। 6. अध्याय 13, श्लोक 28 श्लोक: “समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्। न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्॥” अर्थ: जो हर जगह समान रूप से ईश्वर को देखता है, वह किसी को हानि नहीं पहुँचाता और परम गति को प्राप्त करता है। 7. अध्याय 12, श्लोक 13–14 श्लोक: “अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च…” अर्थ: जो सभी प्राणियों से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र और दयालु है। वह भगवान को प्रिय है। निष्कर्ष-- गीता का स्पष्ट संदेश है— समदृष्टि (Equality), सर्वात्मभाव (Oneness) और करुणा। सबमें ईश्वर देखें। सबको अपने समान समझें। किसी से द्वेष न करें। महाभारत में प्रमाण-- 1. शान्ति पर्व-- 262.5 श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल (अप्रिय) हो, वैसा दूसरों के साथ कभी न करो। (अर्थात् सबको अपने समान समझो) 2. शान्ति पर्व-- 167.9 श्लोक: “अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च।” अर्थ: अहिंसा ही परम धर्म है (और आवश्यकता पड़ने पर धर्मरक्षा भी)। (अर्थात् सबके प्रति करुणा और समभाव रखें) 3. अनुशासन पर्व-- 113.8 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। 4. शान्ति पर्व-- 188.8 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। 5. वन पर्व-- 313.117 श्लोक: “न हि मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किञ्चित्।” अर्थ: मनुष्य से बढ़कर कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है। अर्थात् सभी मनुष्यों का सम्मान समान रूप से होना चाहिए) 6. शान्ति पर्व-- 109.11 श्लोक: “समं सर्वेषु भूतेषु वर्तयन्ति महात्मानः।” अर्थ: महात्मा लोग सभी प्राणियों के प्रति समान व्यवहार करते हैं। निष्कर्ष-- महाभारत का भी यही संदेश है दूसरों को अपने समान समझो, अहिंसा रखो और सबके प्रति समभाव अपनाओ। जो अपने लिए अच्छा है, वही दूसरों के लिए भी करो। किसी के साथ अन्याय न करो। सबमें आत्मभाव रखें। स्मृतियों में प्रमाण-- 1. मनुस्मृति-- 6.92 श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल (अप्रिय) हो, वह दूसरों के साथ कभी न करो। 2. मनुस्मृति-- 5.18 श्लोक: “अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।” अर्थ: अहिंसा, सत्य, छचोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रिय-निग्रह— ये सबके लिए समान धर्म हैं। 3. याज्ञवल्क्य स्मृति --1.122 श्लोक: “अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।” अर्थ: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शौच और इन्द्रिय-निग्रह— ये सभी मनुष्यों के लिए समान आचरण हैं। 4. याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.145 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव रखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। 5. पराशर स्मृति- 1.60 श्लोक: “दया सर्वभूतेषु क्षान्तिः सर्वत्र साधुता।” अर्थ: सभी प्राणियों पर दया और सबके प्रति क्षमा— यही श्रेष्ठ आचरण है। 6. नारद स्मृति- 1.15 श्लोक: “धर्मो हि तेषां बलवान् समत्वेन व्यवस्थितः।” अर्थ: धर्म सबके लिए समान रूप से स्थापित है। निष्कर्ष--- स्मृतियों का भी यही मूल संदेश है आत्मवत् व्यवहार, अहिंसा, समता और दया दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा अपने लिए चाहते हों। सभी के प्रति समान धर्म लागू हो। दया और क्षमा का पालन करो। नीति-ग्रन्थों में प्रमाण-- 1. चाणक्य नीति (अध्याय 1, श्लोक- 15) श्लोक: “मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः॥” अर्थ: परायी स्त्री को माता के समान, पराये धन को मिट्टी के समान, और सभी प्राणियों को अपने समान देखने वाला ही सच्चा ज्ञानी है। 2. विदुर नीति (शान्ति/उद्योग पर्व संदर्भ) श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल हो, वह दूसरों के साथ न करो। 3. हितोपदेश (मित्रलाभ) श्लोक: “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” अर्थ: “यह अपना है, यह पराया है”—ऐसा विचार छोटे मन वालों का है। उदार हृदय वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है। 4. पंचतंत्र श्लोक: “परहित सरिस धर्म नहि भाई, परपीड़ा सम नहि अधमाई।” (लोकप्रचलित भाव) अर्थ: दूसरों का भला करना सबसे बड़ा धर्म है, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है। 5. भर्तृहरि नीति शतक श्लोक-- 71 श्लोक: “सन्तः स्वयं परहिते विहिताभियोगाः।” अर्थ: सज्जन लोग स्वयं ही दूसरों के हित में लगे रहते हैं। 6. सुभाषित संग्रह-- श्लोक: “परोपकाराय सतां विभूतयः।” अर्थ: सज्जनों की सम्पत्ति (शक्ति/संसाधन) दूसरों के उपकार के लिए होती है। निष्कर्ष-- नीति ग्रन्थों का भी यही मूल संदेश है— आत्मवत् व्यवहार, परोपकार, और समभाव सबको अपने समान समझो। दूसरों का हित करो। भेदभाव छोड़ो—“वसुधैव कुटुम्बकम्” वाल्मीकि रामायण में प्रमाण-- 1. अयोध्या काण्ड- 109.11 श्लोक: “न हि परो धर्मोऽस्ति परोपकारात्।” अर्थ: परोपकार (दूसरों का भला करना) से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। 2. अयोध्या काण्ड-- 2.30 श्लोक: “सर्वभूतेषु हिते रतः।” अर्थ: (राम का वर्णन) — वे सभी प्राणियों के हित में लगे रहते थे। 3. अरण्य काण्ड- 37.12 श्लोक: “दयालुः सर्वभूतेषु।” अर्थ: श्रीराम सभी प्राणियों पर दया करने वाले हैं। अध्यात्म रामायण 4. अयोध्या काण्ड --3.15 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव रखता है, वही ज्ञानी है। 5. अरण्य काण्ड-- 1.20 श्लोक: “एक एव परो आत्मा सर्वभूतेषु गूढः।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में छिपा हुआ है। 6. उत्तर काण्ड-- 5.22 श्लोक: “निर्द्वन्द्वो हि महायोगी समदर्शी भवेत् सदा।” अर्थ: महान योगी सदा द्वन्द्व से रहित और समदर्शी होता है। अध्यात्म रामायण में प्रमाण-- 1. अयोध्या काण्ड 3.16 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा स सर्वत्र समदर्शी॥” अर्थ: जो साधक सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखता है, वह सर्वत्र समदर्शी हो जाता है। 2. अरण्य काण्ड 1.19 श्लोक: “एकोऽहं सर्वभूतेषु भूतात्मा अव्ययः स्थितः।” अर्थ: मैं (परमात्मा) एक ही होकर सभी प्राणियों में अविनाशी रूप से स्थित हूँ। 3. अरण्य काण्ड 1.20 श्लोक: “एक एव परो ह्यात्मा सर्वभूतेषु गूढः।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में छिपा हुआ है। 4. उत्तर काण्ड 5.21 श्लोक: “निर्द्वन्द्वो हि महायोगी समदर्शी भवेत् सदा।” अर्थ: महान योगी सदा द्वन्द्व से रहित और समदर्शी होता है। 5. उत्तर काण्ड 7.24 श्लोक: “यदा सर्वेषु भूतेषु समदृष्टिर्भविष्यति। तदा मोक्षं अवाप्नोति नात्र कार्यविचारणम्॥” अर्थ: जब सभी प्राणियों में समान दृष्टि हो जाती है, तब बिना किसी संदेह के मोक्ष प्राप्त होता है। 6. ब्रह्मज्ञान उपदेश (सार भाव) श्लोक (भाव): “अहमेवेदं सर्वं जगदात्मस्वरूपकम्।” अर्थ: यह सम्पूर्ण जगत मेरे ही आत्मस्वरूप का विस्तार है। निष्कर्ष-- रामायण का मूल सिद्धान्त है— अद्वैत (एकत्व), समभाव और ब्रह्मदृष्टि। सबमें एक ही आत्मा का निवास। समदृष्टि ही मुक्ति का मार्ग।भेदभाव अज्ञान है। गर्ग संहिता में प्रमाण-- 1. गोलोक खण्ड-- 12.45 श्लोक: “सर्वभूतेषु यः पश्येद्भगवद्भावमात्मनः। भूतानि भगवत्यात्मन्येष भक्तः स उत्तमः॥ अर्थ: जो सभी प्राणियों में भगवान् का भाव देखता है और सबको भगवान् में स्थित मानता है, वही श्रेष्ठ भक्त है। 2. वृन्दावन खण्ड --5.18 श्लोक: “एको देवः सर्वभूतेषु तिष्ठति हृदि सर्वदा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों के हृदय में सदा स्थित है। योग वशिष्ठ में प्रमाण-- -- 3. निर्वाण प्रकरण-- 2.13.45 श्लोक: “चित्तमेव हि संसारस्तत्प्रयत्नेन शोधनम्।” अर्थ: यह संसार मन (चित्त) ही है, इसलिए उसे शुद्ध करना चाहिए। (जब चित्त शुद्ध होता है, तब समभाव उत्पन्न होता है) 4. उपशम प्रकरण- 6.12 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। 5. वैराग्य प्रकरण --3.21 श्लोक: “यदा सर्वत्र समदृष्टिः तदा मुक्तिः न संशयः।” अर्थ: जब सभी में समान दृष्टि हो जाती है, तब निःसंदेह मुक्ति प्राप्त होती है। 6. निर्वाण प्रकरण-- 1.28 श्लोक: “एकोऽहमिदं सर्वं विश्वमित्यवधारय।” अर्थ: यह सम्पूर्ण विश्व मैं ही हूँ—ऐसा निश्चय करो। (अर्थात् सबमें एक ही आत्मा है) निष्कर्ष-- इन ग्रन्थों का भी यही एकमत सिद्धान्त है— एक ही परमात्मा/आत्मा सबमें व्याप्त है, इसलिए समभाव और परोपकार आवश्यक है। सबमें भगवान् देखें। मन को शुद्ध करें। समदृष्टि ही मुक्ति का मार्ग है। इस्लामिक धर्म ग्रन्थों में प्रमाण-- 1. क़ुरआन-- 49:13 (सूरह अल-हुजुरात) अरबी: يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن ذَكَرٍ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَاكُمْ شُعُوبًا وَقَبَائِلَ لِتَعَارَفُوا إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ हिन्दी अर्थ: हे मनुष्यों! हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें विभिन्न जातियों और क़बीलों में बाँटा ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निस्संदेह, अल्लाह के निकट तुममें सबसे श्रेष्ठ वह है जो सबसे अधिक धर्मपरायण (तक़वा वाला) है। 2. क़ुरआन-- 5:32 مَن قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍ فِي الْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَمِيعًا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَا أَحْيَا النَّاسَ جَمِيعًا हिन्दी अर्थ: जिसने एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की, उसने मानो पूरी मानवता की हत्या की; और जिसने एक व्यक्ति की जान बचाई, उसने पूरी मानवता को बचाया। 3. क़ुरआन- 2:177 لَّيْسَ الْبِرَّ أَن تُوَلُّوا وُجُوهَ وَلَٰكِنَّ الْبِرَّ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ... وَآتَى الْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِ ذَوِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينَ हिन्दी अर्थ: सच्चा धर्म केवल बाहरी कर्म नहीं है, बल्कि अल्लाह पर विश्वास करना और अपने प्रिय धन को रिश्तेदारों, अनाथों, गरीबों और जरूरतमंदों पर खर्च करना है। 4. हदीस — सहीह बुख़ारी --13 لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّىٰ يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ हिन्दी अर्थ: तुममें से कोई सच्चा ईमान वाला नहीं हो सकता, जब तक वह अपने भाई के लिए वही न चाहे जो अपने लिए चाहता है। 5. हदीस — सहीह मुस्लिम --2564 الْمُسْلِمُ أَخُو الْمُسْلِمِ لَا يَظْلِمُهُ وَلَا يَخْذُلُهُ وَلَا يَحْقِرُهُ हिन्दी अर्थ: मुसलमान, मुसलमान का भाई है वह न उस पर अत्याचार करता है, न उसे छोड़ता है और न उसका अपमान करता है। 6. अंतिम उपदेश-- (ख़ुत्बा-ए-विदा) — हज़रत मुहम्मद: لَا فَضْلَ لِعَرَبِيٍّ عَلَىٰ عَجَمِيٍّ وَلَا لِعَجَمِيٍّ عَلَىٰ عَرَبِيٍّ إِلَّا بِالتَّقْوَىٰ हिन्दी अर्थ: किसी अरबी को गैर-अरबी पर और न किसी गैर-अरबी को अरबी पर कोई श्रेष्ठता है— सिवाय धर्मपरायणता (तक़वा) के। निष्कर्ष- इस्लाम का स्पष्ट संदेश है— सभी मनुष्य एक हैं, समान हैं, और परस्पर भाई-भाई हैं। जाति, रंग, भाषा से श्रेष्ठता नहीं सबके प्रति न्याय और करुणा अपने लिए जो चाहो, वही दूसरों के लिए भी चाहो। सिक्ख धर्म में प्रमाण-- ☬ 1. गुरु ग्रन्थ साहिब (--1349) ਮਾਨਸ ਕੀ ਜਾਤ ਸਭੈ ਏਕੈ ਪਹਿਚਾਨਬੋ॥ हिन्दी अर्थ: समस्त मानव जाति को एक ही मानो (सबको एक ही समझो)। ☬ 2. गुरु ग्रन्थ साहिब (--611) ਏਕੁ ਪਿਤਾ ਏਕਸ ਕੇ ਹਮ ਬਾਰਿਕ ਤੂ ਮੇਰਾ ਗੁਰ ਹਾਈ॥ हिन्दी अर्थ: एक ही परमात्मा (पिता) है, और हम सब उसके बच्चे हैं। ☬ 3. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 8) गੁਰਮੁਖੀ: ਸਭ ਮਹਿ ਜੋਤਿ ਜੋਤਿ ਹੈ ਸੋਇ॥ ਤਿਸ ਦੈ ਚਾਨਣਿ ਸਭ ਮਹਿ ਚਾਨਣੁ ਹੋਇ॥ हिन्दी अर्थ: सभी में एक ही परमात्मा की ज्योति है,। और उसी के प्रकाश से सब प्रकाशित हैं। ☬ 4. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 349) गੁਰਮੁਖੀ: ਨ ਕੋ ਬੈਰੀ ਨਹੀ ਬਿਗਾਨਾ ਸਗਲ ਸੰਗ ਹਮ ਕਉ ਬਨਿ ਆਈ॥ हिन्दी अर्थ: न कोई शत्रु है, न कोई पराया— सभी के साथ मेरा प्रेमपूर्ण संबंध है। ☬5. गुरु ग्रन्थ साहिब (--1299) ਗੁਰਮੁਖੀ: ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਇਕੁ ਦਾਤਾ ਸੋ ਮੈ ਵਿਸਰਿ ਨ ਜਾਈ॥ हिन्दी अर्थ: सभी जीवों का दाता एक ही है, उसे कभी नहीं भूलना चाहिए। ☬ 6. गुरु नानक देव जी (उक्ति) ਨ ਕੋ ਹਿੰਦੂ ਨ ਮੁਸਲਮਾਨ॥ हिन्दी अर्थ: न कोई हिन्दू है, न मुसलमान— (अर्थात् सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की सन्तान हैं) ☬ निष्कर्ष-- सिख धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सभी मनुष्य एक हैं, सबमें एक ही परमात्मा की ज्योति है। कोई पराया नहीं। सब भाई-बहन हैं। एक ही ईश्वर का वास सबमें है। ईसाई धर्म में प्रमाण-- ✝️ 1. Bible — Galatians --3:28 “There is neither Jew nor Greek, there is neither slave nor free, there is neither male nor female: for ye are all one in Christ Jesus.” हिन्दी अर्थ: न कोई यहूदी है, न यूनानी; न दास है, न स्वतंत्र; न पुरुष, न स्त्री क्योंकि तुम सब मसीह में एक हो। ✝️ 2. Bible — Matthew --22-39 “Thou shalt love thy neighbour as thyself.” हिन्दी अर्थ: अपने पड़ोसी से उसी प्रकार प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो। ✝️ 3. Bible — John 13:34 “A new commandment I give unto you, That ye love one another; as I have loved you, that ye also love one another.” हिन्दी अर्थ: मैं तुम्हें एक नया आदेश देता हूँ—एक-दूसरे से प्रेम करो। जैसा मैंने तुमसे प्रेम किया है। ✝️ 4. Bible — 1 John--- 4:20 “If a man say, I love God, and hateth his brother, he is a liar: for he that loveth not his brother whom he hath seen, how can he love God whom he hath not seen?” हिन्दी अर्थ: जो कहता है “मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ” लेकिन अपने भाई से द्वेष रखता है, वह झूठा है। ✝️ 5. Bible — Acts --17:26 “And hath made of one blood all nations of men for to dwell on all the face of the earth.” हिन्दी अर्थ: परमेश्वर ने एक ही रक्त से सभी मनुष्यों की जातियाँ बनाई हैं, जो पूरी पृथ्वी पर रहती हैं। ✝️ 6. Bible — 12:10 Roman English: “Be kindly affectioned one to another with brotherly love.” हिन्दी अर्थ: एक-दूसरे के प्रति भाईचारे के प्रेम से स्नेह रखो। ✝️ निष्कर्ष-- ईसाई धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सब मनुष्य एक हैं, और प्रेम ही सर्वोच्च धर्म है। सब मसीह में एक हैं।अपने समान दूसरों से प्रेम करो। द्वेष नहीं, प्रेम और करुणा अपनाओ। जैन धर्म में प्रमाण-- 🕉️ 1. आचारांग सूत्र --1.2.3 “सव्वे पाणा न हंतव्वा, सव्वे जीवा दयालुया।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणियों की हिंसा नहीं करनी चाहिए, सभी जीव दया के योग्य हैं। 🕉️ 2. उत्तराध्ययन सूत्र 6.10 प्राकृत (देवनागरी): “सव्वेसिं जीवानं पियं जीवियं।” हिन्दी अर्थ: सभी जीवों को अपना जीवन प्रिय होता है। (अतः किसी को कष्ट न दो) 🕉️ 3. तत्त्वार्थ सूत्र 5.21 सूत्र (संस्कृत-प्राकृत परम्परा): “परस्परोपग्रहो जीवानाम्।” हिन्दी अर्थ: सभी जीव एक-दूसरे के उपकार (सहयोग) के लिए हैं। 🕉️ 4. दशवैकालिक सूत्र-- 6.9 “जे णं जाणइ अप्पाणं, तं जाणइ परं पि।” हिन्दी अर्थ: जो अपने आत्मा को जानता है, वह दूसरों के आत्मा को भी समझता है। 🕉️ 5. समयसार-- 1.4 “एको अम्मि, नाणो अम्मि, सव्वे जीवा समा मया।” हिन्दी अर्थ: आत्मा एक है, ज्ञान स्वरूप है, और सभी जीव मेरे समान हैं। 🕉️ 6. मूलाचार- “दया सव्वभूएसु, खंति च सव्वदा।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणियों पर दया करो और सदैव क्षमा रखो। 🕉️ निष्कर्ष-- जैन धर्म का भी यही मूल संदेश है अहिंसा, समता और सर्वजीव करुणा, किसी भी जीव को कष्ट न दें। सबको अपने समान समझें। सभी जीव परस्पर जुड़े हैं। बौद्ध धर्म में प्रमाण-- 1. करणीय मेत्ता सुत्त (सुत्तनिपात --1.8 “सुखिनो वा खेमिनो होन्तु, सब्बे सत्ताः भवन्तु सुखितत्ता।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणी सुखी हों, सबका कल्याण हो, सबके भीतर सुख की भावना हो। 2. धम्मपद --1.5 “न हि वेरेन वेरानि सम्मन्ति इध कुदाचनं। अवेरेन च सम्मन्ति, एष धम्मो सनन्तनो॥” हिन्दी अर्थ: इस संसार में वैर से वैर कभी शांत नहीं होता, केवल अवैर (प्रेम/क्षमा) से ही शांत होता है—यह सनातन सत्य है। 3. धम्मपद --5.18 “सब्बे तस्सन्ति दण्डस्स, सब्बेसं जीवितं पियं। अत्तानं उपमं कत्वा, न हनेय्य न घातये॥” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणी दण्ड (कष्ट) से डरते हैं, सभी को जीवन प्रिय है; अपने समान समझकर न स्वयं हिंसा करो, न दूसरों से कराओ। 4. सुत्तनिपात (मेत्ता भाव) “माता यथा निजं पुत्रं आयुसा एकपुत्तमनुरक्खे।” हिन्दी अर्थ: जैसे माँ अपने इकलौते पुत्र की रक्षा करती है, वैसे ही सब प्राणियों के प्रति प्रेम रखना चाहिए। 5. अंगुत्तर निकाय --4.67 “मेत्ता च सब्बलोकस्मिं, मनसं भावये अप्पमाणं।” हिन्दी अर्थ: पूरे संसार के प्रति असीमित मैत्री (प्रेम) का भाव विकसित करो। 6. गौतम बुद्ध (उपदेश सार) “बहुजनहिताय बहुजनसुखाय।” हिन्दी अर्थ: अनेक लोगों के हित और सुख के लिए कार्य करो। निष्कर्ष-- बौद्ध धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— मैत्री, करुणा, अहिंसा और समता। सब प्राणियों के प्रति प्रेम। किसी के प्रति द्वेष नहीं। अपने समान सबको समझना। सर्वजन-हित का भाव। यहूदी धर्म में प्रमाण-- 1-तनाख -Leviticus--19:18 וְאָהַבְתָּ לְרֵעֲךָ כָּמוֹךָ हिन्दी अर्थ: अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो। 2. तनाख — Genesis-- 1:27 וַיִּבְרָא אֱלֹהִים אֶת־הָאָדָם בְּצַלְמוֹ בְּצֶלֶם אֱלֹהִים בָּרָא אֹתוֹ हिन्दी अर्थ: परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया। (अर्थात् सभी मनुष्यों में दिव्यता है) 3. तनाख — Deuteronomy --10:19 וַאֲהַבְתֶּם אֶת־הַגֵּר כִּי־גֵרִים הֱיִיתֶם בְּאֶרֶץ מִצְרָיִם हिन्दी अर्थ: परदेशी (अजनबी) से भी प्रेम करो। क्योंकि तुम भी मिस्र में परदेशी थे। 4. तनाख — Micah 6:8 הִגִּיד לְךָ אָדָם מַה־טּוֹב וּמָה־יְהוָה דּוֹרֵשׁ מִמְּךָ כִּי אִם־עֲשׂוֹת מִשְׁפָּט וְאַהֲבַת חֶסֶד וְהַצְנֵעַ לֶכֶת עִם־אֱלֹהֶיךָ हिन्दी अर्थ: प्रभु तुमसे क्या चाहता है? न्याय करना, दया से प्रेम करना और नम्रता से ईश्वर के साथ चलना। 5. तनाख — Proverbs-- 22:2 עָשִׁיר וָרָשׁ נִפְגָּשׁוּ עֹשֵׂה כֻלָּם יְהוָה हिन्दी अर्थ: अमीर और गरीब दोनों मिलते हैं, और दोनों को बनाने वाला एक ही परमेश्वर है। 6. तलमूद — तलमूद (Shabbat --31a) דעלך סני לחברך לא תעב हिन्दी अर्थ: जो तुम्हें अप्रिय है, वह अपने साथी के साथ मत करो। निष्कर्ष-- यहूदी धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सब मनुष्य एक ही ईश्वर की सृष्टि हैं, इसलिए प्रेम, न्याय और समभाव रखें। अपने समान दूसरों से प्रेम करो। सभी में ईश्वर का स्वरूप है। न्याय और दया का पालन करो। पारसी धर्म में प्रमाण-- 1. अवेस्ता — यश्ना- 30.2 Avestan (Romanized): “šrəṇvantu vispā xšnaoθrā, yā vaēnā vīcithā ahūm.” हिन्दी अर्थ: सब लोग सत्य को सुनें और उसे समझकर अपने जीवन का मार्ग चुनें। 2. अवेस्ता — यश्ना-- 43.1 Avestan (Romanized): “āat̰ yā ahū vairyo …” (अहुनवर प्रार्थना का अंश) हिन्दी अर्थ: सर्वोत्तम मार्ग वही है जो धर्म (सत्य) और न्याय पर आधारित हो। 3. अवेस्ता — यश्ना-- 34.1 “vahmāi ahmāi ushtā ahmāi, hyat̰ ashai vahishtāi.” हिन्दी अर्थ: जो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही वास्तविक सुख प्राप्त करता है। 4. अवेस्ता — वेंदिदाद 19.20 Avestan (Romanized): “humata, hukhta, hvarshta” हिन्दी अर्थ: अच्छे विचार, अच्छे वचन, अच्छे कर्म — यही जीवन का मूल सिद्धान्त है। 5. अवेस्ता — यश्ना-- 47.1 Avestan (Romanized): “asha vahishta ashem.” हिन्दी अर्थ: सत्य (Asha) ही सर्वोत्तम है। 6. जरथुस्त्र (उपदेश भाव) Avestan (Romanized): “āramaitiš ahurāi mazda हिन्दी अर्थ: नम्रता, शांति और भक्ति के साथ सत्य मार्ग पर चलो। निष्कर्ष-- पारसी धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सत्य, सद्भाव और परोपकार अच्छे विचार, वचन और कर्म अपनाओ। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलो सबके प्रति सद्भाव और न्याय रखो। ताओ धर्म में प्रमाण-- 1. ताओ ते चिंग — अध्याय -1 चीनी (汉字): 道可道,非常道;名可名,非常名。 हिन्दी अर्थ: जिसे शब्दों में व्यक्त किया जा सके, वह शाश्वत ताओ नहीं है। (अर्थात् सत्य एक है, पर शब्दों से परे है) 2. ताओ ते चिंग — अध्याय 8 चीनी (汉字): 上善若水。水善利万物而不争。 हिन्दी अर्थ: सर्वोत्तम गुण जल के समान है जो सबका हित करता है और किसी से विरोध नहीं करता। 3. ताओ ते चिंग — अध्याय 34 चीनी (汉字): 大道泛兮,其可左右。万物恃之以生而不辞。 हिन्दी अर्थ: महान ताओ सर्वत्र फैला हुआ है; सभी प्राणी उसी पर निर्भर हैं, और वह किसी का भेद नहीं करता। 4. ताओ ते चिंग — अध्याय 49 चीनी (汉字): 圣人无常心,以百姓心为心。 हिन्दी अर्थ: संत का अपना अलग मन नहीं होता, वह सभी लोगों के मन को ही अपना मन मानता है। 5. च्वांग-त्सु (齐物论) चीनी (汉字): 天地与我并生,而万物与我为一。 हिन्दी अर्थ: आकाश और पृथ्वी मेरे साथ ही उत्पन्न हुए हैं, और सभी वस्तुएँ मेरे साथ एक हैं। 6. लाओत्से (उपदेश भाव) चीनी (汉字): 知人者智,自知者明。 हिन्दी अर्थ: जो दूसरों को जानता है वह बुद्धिमान है, और जो स्वयं को जानता है वह वास्तव में ज्ञानी है। निष्कर्ष-- ताओ धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सभी में एक ही तत्त्व (ताओ) व्याप्त है, इसलिए समभाव और सहजता रखें। प्रकृति के साथ सामंजस्य। सबमें एकता का अनुभव। बिना संघर्ष के सबका हित। कन्फ्यूसियस धर्म में प्रमाण-- 1. लुन्यू (Analects)-- 12.2 चीनी (汉字): 己所不欲,勿施于人。 हिन्दी अर्थ: जो तुम अपने लिए नहीं चाहते, उसे दूसरों पर मत थोपो। 2. लुन्यू (Analects) 12.22 चीनी (汉字): 樊迟问仁。子曰:爱人。 हिन्दी अर्थ: फान-ची ने “रेन (मानवता)” के बारे में पूछा। कन्फ्यूशियस ने कहा—“लोगों से प्रेम करो।” 3. लुन्यू (Analects) 4.15 चीनी (汉字): 夫子之道,忠恕而已矣。 हिन्दी अर्थ: आचार्य (कन्फ्यूशियस) का मार्ग केवल दो बातों पर आधारित है— निष्ठा (忠) और सहानुभूति/क्षमा (恕)। 4. मेंसियस (Mencius) 2A:6 चीनी (汉字): 恻隐之心,人皆有之。 हिन्दी अर्थ: करुणा का भाव हर मनुष्य में स्वाभाविक रूप से होता है। 5. मेंसियस (Mencius) 7A:45 चीनी (汉字): 老吾老,以及人之老;幼吾幼,以及人之幼。 हिन्दी अर्थ: अपने बुज़ुर्गों का आदर करो और दूसरों के बुज़ुर्गों का भी; अपने बच्चों से प्रेम करो और दूसरों के बच्चों से भी। 6. कन्फ्यूशियस (उपदेश भाव) चीनी (汉字): 四海之内,皆兄弟也。 हिन्दी अर्थ: चारों दिशाओं में (पूरी दुनिया में) सभी लोग भाई-भाई हैं। निष्कर्ष-- कन्फ्यूशियस परम्परा का भी यही स्पष्ट संदेश है— मानवता (Ren), करुणा, और आत्मवत् व्यवहार। जो अपने लिए न चाहो, दूसरों पर न करो। सबके प्रति प्रेम और सम्मान। समभाव और सामाजिक सामंजस्य। --------+-------+------_+------_-

kattupaya s

Good morning friends... have a nice day

Piyu soul

Good Morning ☀️ सुबह की ये पहली किरण तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान बनकर उतरे, हर नया दिन तुम्हारे लिए खुशियों का पैगाम लेकर आए… नींद से जागते ही बस एक ख्याल आए — कि कोई है… जो तुम्हारी खुशी के लिए हर दिन दुआ करता है। 💛 आज का दिन भी तुम्हारे नाम हो, प्यारा सा, सुकून भरा और दिल को छू जाने वाला… 🌸✨ शेर 💫 तेरी यादों से ही शुरू होती है हर सुबह मेरी, वरना ये सूरज भी मेरे लिए यूँ ही निकलता था पहले। 💛 #Good morning buddies 😊 have a great day

Avinash

🙂

Vanita Thakkar

Poem - Forgive Me - by Vanita Thakkar on vanitathakkar.blogspot.com …. https://vanitathakkar.blogspot.com/2026/03/poem-forgive-me.html

Harshida Joshi

દરેક નુ પોતપોતાનું એક જંગલ હોય છે જેમાં જે ખોવાઈ જાય છે. એમાંથી જે નીકળી શકે એ જ નીકળી શકે છે પણ એ નીકળી ને પણ એ જંગલ માં ફરી થી ખોવાઈ જાય છે. એમાં એને સુકુન મળતું હોય છે.એમાં એ એ પોતાનુ અતીત, વર્તમાન અને ભવિષ્ય જુએ છે. ભવિષ્ય એના હાથ માં નથી અને વર્તમાન માં એ અતીત અને ભવિષ્ય માંથી બહાર નીકળી શકતો નથી જેથી એ વર્તમાન માં જીવી શકતો નથી. એ જોઈ નથી શકતો કે એની આસપાસ કુદરતે છુટ્ટા હાથે પ્રકૃતિ ને વિખેરી છે. એની આસપાસ એક હુંફાળું વ્યક્તિત્વ, એક પ્રેમ, એક સાનિધ્ય, એક સાથ, એક આભા એને વિટળાઈ ને ઘેરી ને એની સાથે સતત ઓર ની જેમ સાથે છે. એના ખાલી મન , લાગણીઓ ને સ્પર્શવા માટે બેતાબ છે.એ મહેસુસ પણ કરે છે પણ એની એકલતાને સાથ વગર મિટાવી શકતો નથી. બસ ઝંખનાઓ થી મહેસુસ કરીને પીડાય છે.

Mamta Trivedi

कविता का शीर्षक है 🌹 सपनों के मोती https://youtu.be/7gwcdK9E_6s?si=z8uClNswvfKUakDI

Avinash

All time fav. work location 🫶🏻💖❤️

Meeta

हर शाम एक सुहानी यादों सी हो, दिल की हर धड़कन में कोई बात सी हो। खामोशी भी जैसे कुछ कहती चली जाए, रात की हर सन्नाटे में मुलाक़ात सी हो। न नाम की ज़रूरत, न कोई वजह लगे, बस एक एहसास हो… जो हर बार पास सी हो। कुछ पल यूँ ही ठहर जाए वक़्त के साथ, हर लम्हा जैसे किसी ख़्वाब की सौगात सी हो।❤️

Sonam Brijwasi

“तुझे खोने का डर हर पल सताता है, क्योंकि मेरा कोई और नहीं इस जहां में… तू चली गई तो मैं भी खत्म हो जाऊँगा, बस नाम रह जाएगा मेरे निशां में…”

Piyu soul

Good Night Message 🌙 दिन भर की थकान अब चाँद की ठंडी रोशनी में खो जाने दो, सारे ख्यालों को थोड़ी देर सुकून से सो जाने दो… और हाँ, मुस्कुराते हुए आँखें बंद करना, क्योंकि कोई है… जो तुम्हें सोचकर ही खुश हो जाता है। 💛 शेर 💫 तेरे ख्यालों में ही सिमट जाती है हर रात मेरी, वरना ये नींद भी मुझसे यूँ ही रूठ जाया करती थी। #Good night buddies 😊 sweet dreams

Piyu soul

💛तेरा होना ही काफी है 💛 तुमसे मिला तो ऐसा लगा, जैसे किसी दुआ ने मुझे छू लिया… भीड़ में भी जो खालीपन था, वो तेरे साथ ने चुपके से भर दिया। तुम्हारी आवाज़ में एक सुकून है, जो हर दर्द को धीरे-धीरे सुला देता है… और तुम्हारी खामोशी भी ऐसी है, जो बिना कहे सब कुछ कह जाती है। ना जाने क्यों… तुम्हें खोने का ख्याल भी डराता है, और तुम्हें पाने की चाह भी दिल को रुला जाती है। तुम साथ हो तो सब आसान लगता है, और दूर होकर भी तुम दिल के सबसे पास लगते हो। ये कैसा रिश्ता है हमारा… जहाँ हर एहसास गहरा है, पर कोई नाम नहीं है। बस एक बात जानती हूँ— अगर तुम हो, तो मैं पूरी हूँ… और अगर तुम नहीं… तो सब कुछ होकर भी कुछ अधूरा सा है। 💔💛 by piyu 7soul

kattupaya s

நிழல் தரும் வசந்தம் பகுதி 1 scheduled to publish on matrubharti @11 15 pm. 1/4/26

Narayan

"ज़ुल्फ़ें तुम सँवारती हो, बिखर हम जाते हैं।” ♥️

ek archana arpan tane

વાતચીત અમારી સાથે અને ખ્યાલો માં કોઈક બીજું હાલ તમારો અમારી પાર્થના જેવો જ છે. - ek archana arpan tane

Avinash

😎

Dimple Das

hello everyone, I hope you all are doing good ...do check out the link below https://youtube.com/shorts/5BGON211KAA?si=KbIHQ6fajdIPrKv-

Ajit

તું ખુશ રે...... 🙏

બદનામ રાજા

पत्ते कि तरह बिखेरा था ज़माने ने मुझको, फिर एक शख्स ने समेटा ओर आग लगा दी... 🌸

Falguni Dost

દોસ્ત! હિસાબી મહિનામાં હિસાબ કંઈક એમ થયો, મારી જ ચર્ચાની મહેફિલમાં મારી હાજરીનો અસ્વીકાર થયો. - ફાલ્ગુની દોસ્ત

રોનક જોષી. રાહગીર

શું ક્યારેય દરિયાના કિનારે બેસીને તમે વિતેલી ક્ષણોને ફરી જીવવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે? જ્યારે રેતી પર લખેલા નામ ભૂંસાઈ જાય છે, પણ હૃદયની ભીની માટીમાં એ સ્મરણો કાયમી અંકાઈ જાય છે. ​આ ગઝલ વિરહ, મૌન અને અધૂરી આશાઓની એક એવી સફર છે જ્યાં 'રાહગીર' પોતાની જિંદગીના કિનારે ઊભા રહીને વીતેલા સમય સાથે સંવાદ કરે છે. દરિયાનું મૌન, આથમતો સૂરજ અને પાંપણે આવીને અટકેલી વાતો—આ ગઝલનો દરેક શેર એક અલગ વેદના અને ગહનતા રજૂ કરે છે. - રોનક જોષી 'રાહગીર'. મારા ફેસબુક પેજની લિંક ઓપન કરી માણો મારી સંપૂર્ણ ગઝલ. https://www.facebook.com/share/v/1C3qDP4Pq6/

Abha Dave

महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🙏🏻 हाइकु - महावीर जयंती पर ----------------------------------------- 1)थे वर्धमान राजा सिद्धार्थ पुत्र माँ थी त्रिशाला। 2) नाम अमर वर्धमान से स्वामी हैं महावीर । 3)महावीर जन्म चैत्र मास शुक्ल पक्ष थी त्रयोदशी। 4)हैं तीर्थंकर चौबीसवें महान पाया है मान। 5)केवलज्ञान कठिन तप फल शांति का पल। 6)सत्य अहिंसा उपदेश है न्यारा मार्ग है प्यारा 7) नैतिक पाठ पंचशील सिद्धांत बनाए शांत। 8)महान ज्ञानी थे महावीर स्वामी दुनिया मानी। 9)क्षमाशीलता धर्म है मैत्री भाव भरते घाव। 10)तप है धर्म उसी संग सत्कर्म छुपा है मर्म। 11)प्रेम -करुणा प्रवचन का सार जीवनाधार। 12)जन कल्याण जन्मे थे महावीर पाया निर्वाण । आभा दवे मुंबई

kattupaya s

அன்பு நண்பர்கள் அனைவருக்கும் வணக்கம். என்னுடைய தமிழ் நாவல் நிழல் தரும் வசந்தம் நாளை முதல் matrubhartiயில் வெளியாக உள்ளது. உங்கள் அன்பு மற்றும் ஆதரவு எப்போதும் எதிர்நோக்கும்.. kattupaya s

Sneha Gupta

एक शिक्षक का रूप – एक सच्चा स्वरूप, हर व्यक्ति का आधार, जीवन का स्तंभ, और मृत्यु का शंख। कभी आँसुओं की बाढ़, कभी गर्व का मंज़र, हर नायाब खेल का स्तंभ है। वक्त है – इसे रेत का नाम। गिरी से रौड़ा या कंकड़ से धराधर, हर ओर इसका वर्चस्व है। जीवन का पतन या उत्थान, पल-पल गिरता, झर-झर बहता, हर रंग जीवन के आलिंगन करता। महारथी सा अद्भुत है, सबको नाचना चाहता है। समय है – इसे सम्राट का नाम। Written by: Sneha Gupta

Jyoti Gupta

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Mare Do Alfaz

रात और ख्वाब की, जो मिलावट है.... सच पूछो तो यही, मोहब्बत की सजावट हैं.. मेरे दो @ल्फाz..

AbhiNisha

कविता रोने की आजादी है जब रोने का जी करें तो रो लो ठहरे हुए आंसू आंखों में रहकर जहर बन जाएंगे इससे पहले रो लो जी भर रो लो इससे पहले की तुम्हारा जी किसी को मारने के करें रो लो जब रोने का जी करे तो रो लो इससे पहले की तुम्हें जग के साथ-साथ खुद से नफरत हो जाए रो लो तुम्हारा दर्द तुम्हें खो दे इससे पहले तुम रो लो जी भर रो लो दुनिया भर के गम लेकर तुम लाचार हो यह भरम लेकर तुम खुद के नशे काटो इससे पहले रो लो रोने से शायद तुम हल्का महसूस करोगी इसलिए रो लो जी भर रो लो चिक चिक कर रो लो हां तुम रो लो सायद रोने से मन में बिछे नफरत काम हो जाए इसलिए रो लो शायद रोने के बाद जीने का इच्छा करें इसलिए रो लो शायद रोने के बाद जीने की कोई उम्मीद मिल जाए इसलिए रो लो जी भर तुम रो लो सारे थकान खत्म हो जाएंगे इसलिए रो लो तुम रो लो जी भर रो लो जिंदा रहने के लिए घुट घुट कर कब तलक जिओगे जो जहर है दिल के अंदर वह बाहर निकालो खुद से ही बोलो अगर कोई नहीं है सुनने वाला खुद के जख्मी दिल को डटोलो और जी में जो आए बोलो तुम रो लो खुद को तुम प्यार से सहलाओ खुद को तुम खुद ही गले लगाओ और खुद को और रोने दो दर्द थोड़ी कम होंगे और तुम फिर से मुस्कुराने के लिए नज़रें उठा होगी शायद और ज्यादा मुस्कुराओगी हां तुम रो लो जब तक जी चाहे रो लो किसी चीज की आजादी हो या ना हो तुम्हें रोने की आजादी है तुम रो लो जी भर रो लो और फिर आओ उठो और खुद को संभालो रहा लंबी है दर्द गेहरा है फिर भी चलना है डगमगाते कदम लेकर कापते बदन लेकर रोते हुए तुम्हें खुद को संभालना है हां तुम रो लो पर खुद को संभालो रोने की आजादी है तुम रो लो जी भर रो लो आगर ऐ कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

Mara Bachaaaaa

सारे सवालों के जवाब तब मिले, अहमियत में उनकी जब हम ना मिले। - Mara Bachaaaaa

Anjana A Kulkarni

Please read, it's my first novel and I am waiting for all your valuable support and feedback

Rupal Jadav

First Gazal Album Will Be Out Tomorrow ............

Munmun Das

💔💔💔

kashish

socha bol du dil ki baate ... khe du jo bhi hai mere man mai uske liye jgha... mujhe lagata tha uske liye bhi hai meri trah tbhi to ham dur hoker bhi sath the ... lekin jab bola tab uska mana tha shayad mai hi karti thi use vo nhi karta tha lekin fir usene dikhaya khu vo bhi karta hai .... 29/3/26 last time pata nhi ab mile ge bhi ya nhi .... by kashish

Sudhir Srivastava

चौपाई - आस इक रोटी की आस लगाई। राह ईश ने उसे दिखाई।। तड़प भूख की रुला रही है। मुख पर बड़ी वेदना भी है।। लिए एक उम्मीद मैं आई। भूख हमें है विवश कराई।। तुम हमको दुत्कार न देना। जीवन नैया द्वय की खेना।। नहीं माँगती धन दौलत वो। भूख पेट से व्याकुल है वो।। नहीं तोड़िए उसकी आशा। दूर करो बस आप निराशा।। तेरे द्वारे वो है आई । वो भी तो इक माँ है भाई।। आँसू जैसे पिए हुए है। मन में ढेरों आस लिए है।। ******* चौपाई - जग समझो जग की माया भाई। सुख-दुख की सब यहां मिठाई।। जिसने जग को जान लिया है। नव जीवन पहचान दिया है।। यह जग सारा बड़ा निराला। मुखड़ा उजला दिल है काला।। आओ इसमें हम रम जाएं। राजनीति में नाम कमाएं।। इस जग का इतिहास पुराना। रहे बताते दादा नाना।। हमको अपना फर्ज निभाना। जग के सुंदर गीत सुनाना।। ******* चौपाई - गुणसागर ******* खुद को मत कहिए गुणसागर। भेद नहीं तुम करो उजागर।। अपनी छवि मत आप गिराओ। मूर्ख नहीं बन काम बनाओ।। जितने भी दिखते गुण सागर। कभी भरी नहिं उनकी गागर।। लिए घड़ा वे घूम रहे हैं। मुँह काला वे आप किए हैं।। सुधीर श्रीवास्तव

वात्सल्य

લોકો એને આંગણે વધુ આવે છે જે પરોપકારી હોય.બાકી સ્મશાને તો મડદા જ જાય.તમને કોઇ એવું આવતું હોય મળવા જેને સ્વાર્થ જ ન હોય.એમને માત્ર તમારું નિરાળું વ્યક્તિત્વ જ ખેંચી લાવતું હોય છે.અને એજ સાચો તમારો ચાહક હોય કે સાચો મિત્ર છે,અન્યથા આ જગતમાં કોઇ કોઇ ને મળવા સાતમા આસમાન-પાતાળે સ્વાર્થ હશે જ. - વાત્સલ્ય

Sudhir Srivastava

यमराज का ट्रंप को श्राप ******* वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले और वहाँ के राष्ट्रपति को पत्नी के साथ अलोकतांत्रिक ढंग से अपराधियों की तरह बलपूर्वक बंधक बनाकर अमेरिका लाने की खबर आने के बाद मित्र यमराज को बड़ा गुस्सा आया। बिना सोचे विचारे वो सीधे व्हाट्स हाउस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया, जो मुँह में आया-जमकर सुनाया, फिर धमकाया ट्रंप तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। शान्ति का नोबेल पुरस्कार भी चाहने की छटपटाहट में तू सारे अलोकतांत्रिक काम करता है। कहने को तो तू शाँति का मसीहा बनता है पर दुनिया जानती है, कि तू हर ओर युद्ध ही चाहता है। अपने हथियारों का बड़ा बाजार बनाये रखने की जुगत में दुनिया के अलग-अलग देशों को आपस में लड़ाते रखना चाहता है। दूसरे देशों में अपरोक्ष अतिक्रमण की आड़ में सबसे बड़ा लंबरदार बनने की चाह में तेल, गैस, खनिज, स्वर्ण भंडार पर एकाधिकार चाहता है। दोहरे मापदंड अपनाकर खुद को महान बताता है, समूचे विश्व का नायक बनना चाहता है, अपना व्यवसाय चमकाना बेटे को स्थापित करना चाहता है। पर तेरा ये सपना कभी पूरा नहीं होगा, अब मैं यमराज! आज तुझे श्राप देता हूँ, क्योंकि तू अपने देश और नागरिकों से भी विश्वासघात के नित नए आयाम गढ़ता है। आखिर तू खुद को क्या समझता है? लगता है कि तू एकदम पागल हो गया है, तू लाख कोशिश कर ले, चाहे जितना हाथ पाँव मार ले, खुद को खुदा ही क्यों न समझ ले, तू निश्चित ही हारेगा और एक दिन सिर पकड़ कर रोयेगा, अपने अधर्म -कर्म के लिए पछताएगा अपनी सोच पर रोएगा, आंसू बहाएगा। आखिर तू भी तो महज एक इंसान हैं आज़ अमेरिका का राष्ट्रपति है, हमेशा तो नहीं रहेगा, तब तू खौलते दूध में आये उबाल बाद शांत हो जाने की तरह जल्दी ही बैठ जायेगा, तब विश्व ही नहीं तेरा देश भी तुझे भाव नहीं देगा, क्योंकि तू तो क्या हर कोई मेरे कोप से डरेगा। वैसे भी सत्ता का घमंड एक दिन उतर ही जायेगा जब तेरा कार्यकाल पूरा हो जाएगा, और तेरे नोबल पुरस्कार का पाने सपना दिवास्वप्न बनकर रह जायेगा, क्योंकि यह यमराज का श्राप है जो कभी खाली भी नहीं जायेगा। और जो मुझे उकसाएगा वो एक जन्म ही नहीं दो-चार जन्मों तक पछताएगा, पर मेरा वो कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा, तू भी एक कोशिश करना चाहे, तो जरूर कर ले क्या पता तेरा जलवा यमलोक में भी बढ़ जाए, और तू मेरे श्राप का तोड़ निकाल ले जाए। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

चौपाई - गर्मी ऐसा कुछ उपाय अपनाओ। दुविधा से तुम बाहर आओ।। कोई भी उपाय अपनाओ। गर्मी को यूँ मार भगाओ।। रंग आधुनिकता का छोड़ो। गाँवों से मुँह कभी न मोड़ो।। खाली जगहों पर वृक्ष लगाओ। हरियाली से लगन लगाओ।। भोजन सादा ठंडा पानी। जीवन की हो सुखद कहानी।। प्रकृति से सब नाता जोड़ों। मूल को अपने कभी न छोड़ो।। जल्दी सोना जल्दी उठना। शौच बाद कुछ आप टहलना।। प्रकृति से अपना नाता रखना। इससे दूर कभी मत होना।। सरल सहज जीवन अपनाओ। व्यर्थ नहीं तनाव में आओ।। निज जीवन संयमित बनाओ। गर्मी को यूँ मार भगाओ।। सुधीर श्रीवास्तव

ziya

thank you so muchhh all gusy

Anghad

વહાલા વાંચક મિત્રો મારી નવી સિરીઝ આજે જ શરૂ થઈ છે જરૂર થી વાંચજો અને વંચાવજો https://www.matrubharti.com/book/19991020/kaalchakra-1

Anjana A Kulkarni

Sometimes, it's not motivation but a wounded ego that pushes us to become better than we ever were.

Shivraj Bhokare

"मेरी खामोशियों को लफ़्ज़ों का लिबास मिल गया, कलम पकड़ी तो जीने का एक एहसास मिल गया, लोग ढूँढते रहे सुकूँ महफ़िलों के शोर में, मुझे तो सादे कागज़ों में सारा जहान मिल गया।"

Shivraj Bhokare

"मेरी हर अधूरी नज़्म का तू ही खूबसूरत अंजाम है, मेरी कोरी डायरी के हर पन्ने पर बस तेरा ही नाम है। लिखने बैठूँ जो इश्क़, तो स्याही कम पड़ जाती है, शायद मेरी कलम को भी तुझसे मोहब्बत तमाम है।" .

Shivraj Bhokare

तन्हा नहीं हूँ मैं, महादेव का साथ है, मेरे सिर पर रखा मेरे भोलेनाथ का हाथ है। चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ राह में, जब शिव साथ हैं, तो डरने की क्या बात है?" . - Shivraj Bhokare

Shivraj Bhokare

तलवार की धार से नहीं, मैं कलम की नोक से लड़ता हूँ, हवाओं के रुख के खिलाफ अक्सर मैं ही खड़ा होता हूँ। मशहूर होने का शौक नहीं मुझे ज़माने में, बस हक की बात को बेबाकी से कागज पर उतरा करता हूँ। .

Shivraj Bhokare

शेर के पाँव में अगर कांटा चुभ जाए, तो इसका मतलब ये नहीं कि अब कुत्ते राज करेंगे। वक्त बुरा हो सकता है मेरा, लेकिन याद रखना, मैदान में वापसी हम धमाके के साथ करेंगे। .

Piyu soul

तेरी मुस्कान से रोशन मेरा जहाँ हो जाता है, तेरे ख्यालों में ही मेरा हर अरमान सज जाता है। न जाने कैसी ये मोहब्बत की आदत लगी है, तू दूर हो फिर भी दिल तेरे ही पास रह जाता है। 🌸

Dhamak

અંધારામાં દબાયેલા એ સત્યો મને જગાડે છે, કંઈ પણ બોલ્યા વગર ઘણું સમજાવે છે. ઈચ્છાઓના આ વળાંક પર હું શું શોધી રહી છું? ખબર નથી કેમ હું આમ એકલી ભટકી રહી છું? ​ દમ ઘૂંટાય એવી આ જગ્યા, હૈયું પથ્થર જેવું થયું, પ્રેમ બધો સૂકાઈ ગયો ને મન તલવાર જેવું થયું. નીકળી પડી છું એવા રસ્તે જ્યાંથી પાછું નથી વળવું, ભલે ગમે તે થાય, હવે મારે નથી ડરવું. ​ નસીબના આ ખેલમાં હું સપનાઓ પાછળ દોડું છું, જે મારા નથી કદી, એને જ હું ઝંખું છું. આભમાં બહુ ઊંચે ઊડીને યાદોમાં ખોવાઈ જાઉં, વેરવિખેર યાદોમાં મારી જાતને હોમી દઉં. લાગે છે કે હારી ગઈ, પણ ખેલ હજી બાકી છે, સત્ય બહાર લાવવાની એક વેળા હજી બાકી છે. જ્યારે હકીકત સામે આવશે ત્યારે આ દુનિયા જોશે, સત્તાના આ કિલ્લાઓ પળવારમાં નીચે પડશે. હીના ગોપીયાણી

Rajeev Namdeo Rana lidhori

*आकांक्षा पत्रिका के 2026 हास्य_व्यंग्य विशेषांक हेतु रचनाएं #सहयोग_सहित सादर आमंत्रित हैं :-* टीकमगढ़ जिले से विगत 20 साल से नियमित प्रकाशित एकमात्र साहित्यिक पत्रिका *आकांक्षा* के *हास्य-व्यंग्य विशेषांक* हेतु रचनाएं सहयोग सहित सादर आमंत्रित हैं - *प्रमुख शर्तें :-* 1- एक रचना किसी भी विधा आधिकतम(14 पंक्तियां) *सहयोग -200 रुपए* बिना फोटो के एक रचना प्रकाशित की जाएंगी 2- दो रचनाएं किसी भी विधा अधिकतम(14 पंक्तियां) सहयोग -300 रुपए *फोटो_सहित दो रचनाएं* प्रकाशित की जाएंगी 3- *बिना सहयोग राशि के रचनाएं प्रकाशित करने में हम *असमर्थ* हैं। प्रकाशित होने पर एक प्रति *निःशुल्क* भैंट की जाएगी। *आपको होने वाले कुछ #प्रमुख_लाभ:-* आपकी रचनाओं को 102 देशों के लगभग *सात लाख* के अधिक पाठक *सोशल_मीडिया* के विभिन्न प्लेटफार्म में पढ़ेंगे तथा लगभग 20 देश की प्रतिष्ठित *लाइब्रेरियों* सहित 40 पत्र- पत्रिकाओं के *संपादकों* तक पहुंचेगी आपकी रचना। 'आकांक्षा' की अनेक विद्वानों द्वारा समीक्षा की जाती है। आपको टीकमगढ़ में समय समय पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों व कवि सम्मेलनों में आमंत्रित कर सम्मानित भी किया जाएगा। -आपकी *बुंदेली* रचनाओं को देश की पहली बुंदेली में प्रकाशित *#अनुश्रुति* त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका में फोटो सहित *निःशुल्क* प्रकाशित किया जाएगा तथा उसकी पीडीएफ फाइल भी *#निःशुल्क* भेजी जाएगी। तो फिर देर किस बात की शीघ्र ही मोबाइल -9893520965 पर *#फोन_पे* से पहले सहयोग राशि भेजकर स्क्रीन शाट भेजे फिर *व्हाट्स_ऐप* पर अपनी रचनाएं व फोटो भेजे अधिक जानकारी के लिए समय-रात दोपहर-2-5 एवं 8-10 के बीच मोबाइल से संपर्क कीजिए। *अंतिम_तिथि:-* कृपया सहयोग राशि एवं रचनाएं *20 अप्रैल 2026* तक अवश्य भेज दीजिए। *** ✍️ *राजीव नामदेव"राना लिधौरी"*            संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका संपादक-'अनुश्रुति'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़ अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी, *टीकमगढ़* (मप्र)-472001 मोबाइल- 9893520965 Email - ranalidhori@gmail.com

known stranger

लुफ़्त-ए-क़ुर्बत-ए-यार का हमसे आलम ना पूछिए हम फिर हम नहीं रहते खुदा का गुमान रखते है - नोन

Anup Gajare

"दूर कही जब" ____________________________________________________ तुम्हें देखना चाहता था हरे रंग की सारी में बेलों का पल्लू ओढ़कर किसी मजबूत तने सी। तुम्हारी नाभी कि खोह पर मरते था किसी को क्या पता कितना अंधकार उसीस्थान से जन्म लेता रहा। दूर तक फैलें नीले रंग में डूबी तुम्हारी हरे रंग की आंखें जिसमें मेलोलिन की कमी थी बस उसी हिस्से में मैं मुसाफिर दुबक बैठा था दुबक बैठा था किसी कीट की तरह। जल प्रपात में बहता हुआ सामान्य जीवन जीना चाहता था तुम्हारे संग बस एक छोटा रोजगार उतना ही छोटा घर उसके आंगन में झाड़ू लगाती तूम! कितना सूक्ष्म सपना था ये क्या पता था कभी तो नींद खुल जाएगी, प्रिये तूम इंतज़ार मत करना अब मैं मुचकुंद के वरदानी निंद्रा से बाहर आ गया हु, सामने वासुदेव खड़े है मुझे नहीं पता वे कौन हैं उनकी दिव्यता में डूब रहा हु। उनका इंतजार करती कोई थी या शायद है तुम्हारी तरह वृंदावन के किसी अरण्य में इंतजार करती हुई उनके पहले उसका नाम आ जाता है। विरह मीठा है या उसका कोई स्वाद ही नहीं है। फिर भी कभी-कभी रात के तीसरे पहर में जब नींद का जल धीरे-धीरे उतरता है और चेतना की रेत नंगी होने लगती है, तब तुम्हारी वही हरी साड़ी किसी वृक्ष की छाल की तरह मेरे भीतर उग आती है। मैं छूना चाहता हूँ उसे पर उंगलियाँ काई से ढकी किसी स्मृति पर फिसल जाती हैं। तुम्हारी हँसी अब किसी ध्वनि की तरह नहीं बल्कि एक अधूरी प्रतिध्वनि है जो गूंजती नहीं— बस ठहर जाती है सीने के किसी अंधे कुएँ में। मैंने सोचा था जाग जाना ही मुक्ति है पर यह जागना भी एक और प्रकार की नींद निकला— जहाँ तुम नहीं हो पर तुम्हारा न होना हर जगह उपस्थित है। वासुदेव की आँखों में जब भी झाँकता हूँ तो एक क्षण के लिए तुम्हारी परछाई जल पर बनती है और उसी क्षण टूट भी जाती है। क्या तुम वही थी जिसे मैं प्रेम कहता था? या तुम वह द्वार थी जिससे गुजरकर मैं इस अनंत रिक्ति में आ गिरा? अब जब कोई नाम लेता है तुम्हारा तो वह नाम शब्द नहीं रहता एक धीमा कंपन बन जाता है जो हड्डियों तक उतर जाता है। मैंने त्याग दिया है तुम्हें पाने का स्वप्न, पर तुम्हें खोने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। और शायद यही विरह है— न मिलना नहीं, न खोना, बल्कि दोनों के बीच अनंत समय तक लटका रहना। कभी सोचता हूँ यदि फिर से वही छोटा सा घर मिले, वही आँगन, वही झाड़ू लगाती हुई तुम— तो क्या मैं वापस चला जाऊँगा उस सरल अज्ञान में? या यह जानकर भी कि वह सपना है, मैं फिर से उसी में डूबना चाहूँगा? उत्तर नहीं मिलता। बस एक शांत स्वीकृति है— कि तुम अब कोई स्त्री नहीं, न ही कोई स्मृति, तुम एक अवस्था हो जिसमें मैं कभी था, और अब नहीं हूँ। और शायद इसीलिए— विरह का कोई स्वाद नहीं होता, क्योंकि वह स्वयं ही स्वाद लेने वाला हो जाता है। _______________________________________________

Anish

तुम जिसे होशियारी समझते हो उसे बेवफाई कहते है।

Maulik Patel

એક સાંજે એની પાસે, શાંત મને ઝરણાં પાસે, વાતો કરું હૃદય સાથે, અને માથું મૂકું એના ખભા પાસે.

Soni shakya

समय निकलने के बाद, दी हुई अहमियत की कोई कीमत नहीं.. 🥀🥀🥀🥀 - Soni shakya

Kaushik Dave

આ દેહ છે જૂનું ભાડાનું મકાન, એનો ભરોસો ના કરશો, આત્મા તો છે અમર અવિનાશી, એનો જ સંગાથ ધરશો. ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો... ઘડીક અહીં તો ઘડીક ત્યાં, આ પંખીનો છે મેળો, આજે અજવાળું કાયામાં, કાલે અંધારાનો છેડો; શ્વાસ ખૂટે ને પાંજરું છૂટે, મિથ્યા છે આ અભિમાન. ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો... ચોળાશે ચામડી ને અટકી જશે આ કાયાની માયા, જેને પાળ્યું પોષ્યું રાત-દિન, એ તો છે બસ છાયા; રામ નામની લગની લગાડી, ભજવા શ્રી રામ ભગવાન. ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો... જૂનું વસ્ત્ર તજીને આત્મા, નવું રૂપ જો લેશે, કર્મ તણી આ પોટલી લઈને, નવો જ મારગ ખેડશે; સેવા-સ્મરણમાં વિતાવો જીવડા, ધરજો પ્રભુનું ધ્યાન. ના રાખવો ભરોસો આ દેહનો... દેહ છે કૌશિકનો પણ આત્મા અજરામર છે ઈશ્વર કહે કે જૂનું છે ઘર ને નવી આત્મા છે. - કૌશિક દવે

Chaitanya Joshi

જીવતે જીવ કદર નૈ કરે એ આ સમાજ છે. મોઢે વખાણીને સળી કરે એ આ સમાજ છે. દાઝ્યા ઉપર મલમ લગાડશે નહીં કદી પણ, ઘા ઉપર મીઠું ભભરાવે એ આ સમાજ છે. ખુશી તમારી જોઈને ઘા પણ ખોતરી જાણે, ખરાખરીમાં જે મોઢું ફેરવે એ આ સમાજ છે. નમતા પલ્લે બેસવાની છે આદત એને વર્ષોથી, લાભ ખાટવા ગમે તે બોલે એ આ સમાજ છે. કાચીંડાનું લેટેસ્ટ વર્ઝન જોવાની કોઈ જરૂર નૈ , બધાની હાજરીમાં રાજ ખોલે એ આ સમાજ છે. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

kattupaya s

Please read and expecting your valuable feedback.

Munmun Das

💔💔💔

Chaitanya Joshi

હાથમાં લઈને કરતાલ એ હરિ ને જગાડતો. પદો પોતાનાં પ્રેમથી એ હરિને સંભળાવતો. શેષશાયીની નિદ્રા તૂટતી જ્યાં એ પોકારતો, હડી કાઢે હરિ જ્યાં નરસિંહ આભ ગજવતો. વ્યસન હરિને નરસિંહના ભજનનું પડી ગયેલું, એને ક્યાં હતા પારકા પોતાના સૌને સમજતો. હરિ થતા વ્યાકુળ જો નરસિંહ ના સંભળાતો, પ્રભાતના પહોરથી પ્રભુને દિનરાત એ પ્રાર્થતો. ત્યજીને ક્ષીરસાગર નરસિંહના રુદે હરિ વસતા હાકલ હરિને કરી પછી પ્રતિચારને એ સુણતો. -ચૈતન્ય જોષી .'દિપક' પોરબંદર.

vrinda

mmm - vrinda

kattupaya s

Good morning friends. My new tamil novel " nizhal tharum vasantham" is going to be published on 1/4/2026 on matrubharti.expecting your love and support. "நிழல் தரும் வசந்தம்"

Shailesh Joshi

ગમતું વ્યક્તિ શોધવાની અને એની સાથે સંબંધો મજબૂત બનાવવા માટેની સરળ રીત જુઓ આ ફેસબૂક motivation રીલ https://www.facebook.com/share/r/183wgLJQGF/

Anjali Singh

"तू मिले तो दिन बन जाए, ना मिले तो भी तेरा ही ख्याल आए… अजीब सा रिश्ता है तुझसे मेरा, दूर रहकर भी तू हर पल पास नजर आए…" 💫

akhil kumar

मैंने शिव को देखा 🙏 ऊं नम शिवाय

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं कविता का शीर्षक है 🌹 https://youtube.com/watch?v=0sQN7u_H2Jc&si=P4SjsEr6xGejLJ_s

Saliil Upadhyay

मैं अपनी बराबरी किसी से नहीं करता.... जैसा भी हुं बेहतरीन हुं। अकेले खड़े होने का साहस रखता हुं क्युकी मुझे पता है दुनिया ज्ञान देती है साथ नहीं...। खुश रहो और मस्त रहो🌹

Archana Singh

" रिश्ते कभी बोझ नहीं होते , पर अगर संभालकर ना रखा जाए तो ... बोझिल जरूर हो जाते हैं " । अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Rinal Patel

શ્રી હરિ એ જેને જન્મથી તેજસ્વી બનાવેલ હોય તેના તેજને કોઈ સ્પર્શ કરશે તો એ તો બળી જશે ને!!! આ સંસારનો નિયમ છે. અંતરની દ્રષ્ટિએ. -Rinall.

Dada Bhagwan

On Mahavir Bhagwan’s Janma Kalyanak, may we remain in equanimity and progress towards Moksha. On the auspicious occasion of Lord Mahavir Swami Janma Kalyanak, let us read about His life stories here: https://dbf.adalaj.org/Ao4GIP2E #lordmahavira #mahavirjayanti #mahavirjanmakalyanak #DadaBhagwanFoundation #mahavirswami

Bhavesh Tejani

અડક્યા વગરનો આભડછેટ લાગ્યો છે એને, મને જોઈને રસ્તો બદલે છે ઈ...!

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास खुशियो की तलाश में ताउम्र फिरता इधर उधर l जिस तरफ भी ध्यान गया वहां तह गया आदमी ll सदा ही मुस्कुराने हुए अपनों लोगों की ख़ातिर l दिल से लाचार हो भावनाओ में बह गया आदमी ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Komal Mehta

શું મળ્યું? કે શોધ્યું કઈ નથી 🙂‍↔️ સમય સાથે આગળ વધતા વધતા એક વાત સમજાણી……. કઈ કદી મારું હતું નહીં ……. સનાતન સત્ય સમજાયું આખરે કે…… છોડી દે સમજવાની અને સમજવાની મથામણ… બસ વ્યસ્ત રે તું જીવન માં - Komal Mehta

known stranger

રહી ગયેલી શ્વાસોનો થોડો એહતરામ કરી લઈએ, જીવ્યા એકલા હવે સાથ થોડું જીવન જીવી લઈએ. દિવસો તો વીત્યા ફરજમાં, રાતો ગઈ ચિંતા સાથે, બે પળ હસી લઈએ, થોડું દિલ ભીંજવી લઈએ. કેટલું સંગ્રહ્યું દુઃખને આજીવન સ્મિતને રાખ્યું ઉધાર, આજ ભાર ઉતારીને આંખોમાં સચ્ચાઈ ભરી લઈએ. હજી મોડું નથી કહો, જે કદી કહેવામાં રહી ગયું, અહંકારને એક બાજુ મૂકી માફી પણ માંગી લઈએ. જો કાલ ન આવે તો અફસોસ ન રહે મનના ખૂણે, આજની આ સાંજને યાદોની જેમ સજીવી લઈએ. - known

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रखो सुरक्षित वस्तु को, ले जाएँगे चोर। पर रक्षित जो देव से, क्या कर सकें छिछोर। दोहा --४६६ (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

Sonu Kumar

बाबा राम रहीम का सच क्या है? . श्री गुरमीत राम रहीम जी पर लगाए गए मुकदमें की तथ्यात्मक समय सारणी : . (i) सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए !! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए ) . (ii) घटना के 3 साल बाद भेजे गए इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने सी बी आई जांच के आदेश जारी किये !! और बहाना यह था कि - हाई कोर्ट के जज ने वाजपेयी को सी बी आई जांच करवाने के आदेश दिए थे !!! . (iii) सी बी आई के आईपीएस अधिकारी ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को "सबूत" के तौर पर मान लिया गया !!! . (iv) कथित साध्वियां लगातार कह रही थी कि - 'कोई अपराध नहीं हुआ था ', किन्तु उनके बयानों का आशय बलात्कार निकाला गया। उनके द्वारा दिए गए पहले बयानों को सबूत माना गया और बाद के कथ्यों को अस्वीकार कर दिया गया !! . तब सी बी आई वाजपेयी के नियंत्रण में काम कर रही थी। यह अंदाजा लगाने की बात है कि किसने क्या किया होगा और कैसे किया होगा। तो इस मामले में आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है। और 18 साल बाद इस मुकदमे के फैसले में गुरमीत राम रहीम जी को दोषी करार देकर जेल भेज दिया गया !!! . दरअसल पूरा देश एक विशाल सर्कस के मंच में तब्दील हो चुका है। और किसी व्यक्ति को लग सकता है कि - तो इससे क्या फर्क पड़ता है। असल में समस्या यह है कि कई देशो में इस तमाशे की डोज़ काफी कम है। और जिस देश में यह तमाशा कम है वह देश अच्छी व्यवस्थाओ के कारण तेजी से मजबूत होगा और अंततोगत्वा या तो हम पर नियंत्रण हासिल कर लेगा या हमें नष्ट कर देगा। और उस समय यह कॉमेडी हमारी ट्रेजिडी बन जायेगी। . ============ . डेरा सच्चा सौदा प्रकरण ; समस्या एवं समाधान . अध्याय . (1) समस्या यह है कि आबादी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि राम रहीम जी के साथ न्याय नहीं किया गया है। . (2) वजहें, जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है . (3) तर्क ; जिनसे यह स्थापित किया जाता है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है . (4) डेरा और राजनीति . (5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है . (6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो . (7) समाधान . (8) संत और संतत्व की परिभाषा पर मेरा प्रतिभाव . ————— . टिप्पणी : इस जवाब में कुल 8 बिंदु है। 7 बिन्दुओ में मैंने इस प्रकरण से जुडी हुयी विभिन्न सूचनाएं, तथ्य एवं इनके आधार पर मेरा निष्कर्ष रखा है। इस निष्कर्ष या विश्लेषण को आप मेरा दृष्टिकोण भी कह सकते है। यदि मेरा दृष्टिकोण पूर्वाग्रह से ग्रसित है तो मैं इस बात से इंकार नहीं करता कि मैं पूर्वाग्रह से मुक्त होकर लिखता हूँ। जवाब में एक बिंदु समाधान का भी है, और यह बिंदु महत्वपूर्ण है। पाठको से आग्रह है कि मेरे दृष्टिकोण की तुलना में समाधान वाले हिस्से को ज्यादा भार दें। . ————— . (1) समस्या यह है कि लाखों डेरा समर्थको एवं लाखों स्वतंत्र कार्यकर्ताओ का मानना है कि श्री राम रहीम जी के मामले में अदालत द्वारा दिया गया फैसला संदिग्ध है !! . हो सकता है श्री राम रहीम जी दोषी हो, और ये भी हो सकता है कि वे निर्दोष हो। किन्तु इतना तो तय है कि देश की आबादी का एक वर्ग इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसी तरह का असंतोष संत श्री आसाराम जी बापू के मामले में भी देखने को मिला था। आसाराम जी के मामले में भी देश की आबादी का एक वर्ग यह मानता था एवं आज भी मानता है उनके साथ न्याय नहीं किया गया। संत रामपाल जी, जयेंद्र सरस्वती जी एवं नित्यानंद जी से जुड़े हुए मामलो में भी देश की एक बड़ी आबादी की यही धारणा थी। . इस तरह यहाँ 2 वर्ग बन जाते है : पहला वर्ग वह है जो यह मानता है कि श्री राम रहीम जी के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है और वे दोषी है, व उनके दोषी होने का सबसे बड़ा सबूत यह है कि अदालत ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है !! अदालत ने उन्हें किस आधार पर दोषी ठहराया है और क्या सबूत बरामद किये गए है, इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है !! जबकि दुसरे वर्ग का मानना है कि, हो सकता है वे दोषी हो या हो सकता है कि दोषी नहीं भी हो। इस वर्ग को अदालत के फैसले पर विश्वास नहीं है, तथा इस अविश्वास की "पर्याप्त एवं वाजिब" वजहें मौजूद है। . टिप्पणी - इस लेख में उन नागरिको के लिए कुछ नहीं है जो यह मानते है कि 2000 के नोटों में चिप लगी हुयी है, और इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि टीवी-अख़बार पर ऐसा बताया गया था, और वे यह भी मानते है कि भारत के जज चाहे पैदाइशी ईमानदार न हो किन्तु नियुक्ति मिलते ही एक प्रकार की जादुई प्रक्रिया द्वारा वे ईमानदार हो जाते है !!! यह लेख सिर्फ उन लोगो के काम का है जो जाया तौर पर न्यायमूर्ति पूजक नहीं है और साथ ही यह भी मानते है कि 2000 के नोटों में ऐसी कोई चिप नहीं है। . ———————- . (2) वजहें , जो पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है : . एक पोचा तर्क यह है कि इन सभी संतो की भक्ति के कारण इनके भक्त अदालत पर अंगुली उठा रहे है। यह एक गलत तर्क है। आप संतो और उनके भक्तो की बात को जाने दीजिये। सलमान खान का उदाहरण लीजिये। जब उन्हें छोड़ दिया गया था तब भी देश की आबादी का एक बड़ा वर्ग इस तरह की आवाजे उठा रहा था कि हमारी अदालते भ्रष्ट है। तो यह खुली हुयी बात है कि पेड मीडिया द्वारा की जाने वाली तमाम पॉलीस के बावजूद भारत का एक वर्ग यह मानता है कि हमारी जज भ्रष्ट है !! . क्यों कार्यकर्ताओ के एक वर्ग का मानना है कि हमारी अदालतें भ्रष्ट है ? . क्योंकि ऐसी कोई वजह ही नहीं है जो इस बात का इत्मीनान दिलाए कि भारत की अदालतें भ्रष्ट नहीं है। लेकिन ऐसी ढेर सारी वजहें है जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट न हो ऐसा किसी भी तौर से संभव नहीं है। कुछ वजहें निचे दी गयी है : . 2.1 साक्षात्कार : भारत में जज बनने के लिए साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है। साक्षात्कार में अंक देना जजों के हाथ में होता है। तो भाई भतीजावाद एवं घूस (सेटिंग) के अवसर यहीं से बन जाते है। इस तरह नियुक्ति से ही भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। जज एवं नेता साक्षात्कार की प्रक्रिया को हटाना नहीं चाहते। यदि साक्षात्कार को हटा दिया जाए तो जजों के भ्रष्ट होने की एक वजह समाप्त हो जायेगी। लेकिन फिलहाल साक्षात्कार है , अत: भ्रष्टाचार है। उल्लेखनीय है कि चीन में जजों की नियुक्ति में साक्षात्कार नहीं है। सिर्फ लिखित परीक्षा के माध्यम से ही जजों की नियुक्ति की जाती है। इस वजह से चीन के जज भारतीय जजों की तुलना में कम भ्रष्ट है। समाधान - जजों की नियुक्ति प्रक्रिया से साक्षात्कार को हटाया जाना चाहिए। . 2.2. पदोन्नति एवं स्थानान्तरण : जजों की नियुक्ति, स्थानांतरण एवं पदोन्नतियां वरिष्ठ जजों के हाथ में होती है। शेषन जज हाई कोर्ट के एवं हाई कोर्ट के जज सुप्रीम कोर्ट के चंगुल में है। यदि हाई कोर्ट का जज भ्रष्ट है तो वह शेषन कोर्ट के सभी जजों पर मनचाहे फैसले करवाने के लिए चाबुक चला सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट के जज भ्र्ष्ट है तो वे पूरी न्यायपालिका को भ्रष्ट बना देते है। और सुप्रीम कोर्ट के जज पूरी तरह से निरंकुश है। . यदि सुप्रीम कोर्ट का जज कुर्सी पर रहते हुए घूस खा रहा है तो उसकी शिकायत कहाँ करेंगे आप ? . दरअसल शेषन कोर्ट, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी एक टोली बना ली है। इनके फैसले में किसी का कोई दखल नहीं। जनता को तो भूल ही जाइए, सरकार तक का दखल नहीं !! जब किसी आदमी को यह पता हो कि उसे पकड़ने वाला कोई नहीं है, न ही कोई उससे सवाल पूछने वाला है, तो उसके भ्रष्ट होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। यह निरंकुशता भ्रष्टाचार को जन्म देती है। . उल्लेखनीय है कि जापान में जजों को हर आम चुनाव में नागरिको के अनुमोदन से गुजरना पड़ता है। जब भी चुनाव होते है तो बेलेट पेपर के साथ एक अतिरिक्त प्रश्न रखा जाता है कि क्या आप इस जज को नौकरी से निकालना चाहते है या नहीं। इस तरह से नागरिको के पास विकल्प होता है कि वे भ्रष्ट एवं निकम्मे जज को खारिज कर सके। जज को भय रहता है कि भ्रष्टाचार करने पर जनता मुझे खारिज कर सकती है। इस वजह से उनके भ्रष्टाचार में कमी आती है। इसे रिटेंशन इलेक्शन या रिव्यू कहते है। किन्तु भारत के जज और नेता यह कतई नहीं चाहते कि नागरिको को जजों के काम काज पर टिप्पणी करने का अवसर दिया जाए। . अमेरिका में इससे भी बेहतर प्रणाली है। वहां नागरिक के पास जजों को किसी भी समय नौकरी से निकालने प्रक्रिया है। वहां के जज जानते है कि यदि वे भ्रष्टाचार करेंगे तो यह छिपेगा नहीं और जनता उन्हें नौकरी से निकाल देगी। इस तरह जनता द्वारा नौकरी से निकाले जाने का भय उन्हें कम भ्रष्ट बना देता है, और वे तमीज से पेश आते है। नागरिको द्वारा बहुमत का प्रयोग करके इस तरह नौकरी से निकालने की प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। समाधान - भारत में जजों को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार आम नागरिको को दिया जाना चाहिए। इससे नागरिको का न्यायपालिका में दखल बढेगा और इस अंकुश से भ्रष्टाचार में कमी आएगी। . 2.3. पैसे लेकर सीधे नियुक्तियां : क्या आप जानते है कि, उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा से भी नहीं गुजरना होता है !! वरिष्ठ जज कोर्ट में प्रेक्टिस करने वाले किसी भी वकील को सीधे हाई कोर्ट में न्यायधीश के पद पर नियुक्ति दे सकते है !! एक तरह से यह नियम घूसखोरी को कानूनी करने के लिए बनाया गया है, जिसका परोक्ष अर्थ यह है कि – यदि आपके भाई भतीजे वरिष्ठ जज है , यदि आप एक वकील है , और यदि आपके पास घूस देने के लिए मोटी राशि है तो आप सीधे ही हाई कोर्ट के जज बन सकते है !! अनुमान किया जा सकता है कि इस ढंग से जो व्यक्ति जज बनेगा वह कितना भ्रष्ट होगा, और इस तरीके से जो जज किसी को जज बनाएंगे वे कितने ईमानदार होंगे !! समाधान - पसंदगी के आधार पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया को ख़त्म किया जाना चाहिए। न्यायधीश जनता के बहुमत से अनुमोदित और यदि वे भ्रष्ट आचरण करते है तो उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार जिले / राज्य / देश के मतदाताओं के पास हो। . 2.4. मन मर्जी क़ानून बनाने की शक्ति : जब तक संसद दखल कर के इसे पलट न दे तब तक सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट की रुलिंग्स का प्रभाव कानूनों की तरह ही होता है। और, यदि संसद कोई क़ानून बनाती है तो सुप्रीम कोर्ट उसे अवैध भी घोषित कर सकती है। इस तरह कानूनों को वैध / अवैध घोषित करने और क़ानून / संविधान की व्याख्या का अधिकार जजों के पास है। . दूसरे शब्दों में, भारत में अंततोगत्वा जज ही यह तय करते है कि कौनसा क़ानून लागू होगा और कौनसा नहीं होगा। क्या संवैधानिक है और क्या असंवैधानिक है यह तय करने का अधिकार भी जजों के पास है !! और ख़ास बात यह है कि जजों पर नागरिको का कोई नियंत्रण नहीं है। समाधान - कानूनों एवं संविधान की व्याख्या का अधिकार आम नागरिको के पास होना चाहिए। इससे जनता यह निर्धारित कर सकेगी कि कौनसा क़ानून देश हित में है व कौनसा देश विरोधी। . 2.5. मामले को असीमित समय तक लटकाने की शक्ति : धीमी अदालती प्रकिया भ्रष्टाचार को जन्म देती है। जजों के पास किसी मामले को असीमित समय तक लटका कर रखने की शक्ति है। वे घूस खाकर किसी मुकदमें के फैसले को इच्छित समय तक टालते रह सकते है, तथा घूस मिलने पर किसी मामले में अति न्यायिक सक्रियता दिखा सकते है। भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लटके हुए है। इनमे कई नेता, अभिनेता, अधिकारी, उद्योगपति आदि शामिल है। वे इनके मामलों की सुनवाई धीमी गति से करते है ताकि लम्बे समय तक आरोपी जजों के पंजे में फंसा रहे। चीन के 2 लाख जजों के मुकाबले भारत में सिर्फ 18 हजार जज होने से अदालती प्रक्रिया धीमी है और इस वजह से जजों में भ्रष्टाचार है। समाधान - भारत को जजों की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख करने की जरुरत है। . 2.6. अवमानना का क़ानून : जजों को कोई भ्रष्ट कह कर न पुकारे, इसके लिए जजों ने अवमानना का क़ानून बनाया है। यदि आप जज को भ्रष्ट कहेंगे तो जज आपको अदालत की अवमानना के आरोप में जेल पहुंचा देंगे। इस क़ानून के कारण जजों के भ्रष्टाचार की चर्चा नहीं हो पाती और इससे जज निशंक होकर भ्रष्टाचार कर पाते है। एक तरह से जजों ने इस तरह का क़ानून बनाकर पूरे देश को बाध्य कर दिया है कि वे जजों को ईमानदार एवं फ़रिश्ता माने !! और आपको अपने आस पास ऐसे लोग बहुतायत से मिलेंगे जो बिना किसी वजह से जजों को हरिश्चंद्र की औलाद मानकर चलते है। और इसकी उनके पास सिर्फ एक वजह है – उन्होंने यह अख़बार में पढ़ा हुआ होता है कि भारत के जज ईमानदार है !! समाधान - अवमानना के क़ानून को रद्द किया जाना चाहिए। . 2.7. विवेकाधिकार की असीम शक्ति : जजों का विवेकाधिकार भी भष्टाचार को बढ़ावा देता है। कानूनों को कितना भी विस्तृत रूप से लिखा जाये, तब भी कई बिन्दुओ को तय करने के लिए दंडाधिकारी को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करना होता है। यह विवेकाधिकार भारत के जजों को असीमित शक्ति प्रदान कर देता है। वे घूस खाकर अपने विवेकाधिकार का इस तरह से इस्तेमाल करते है, जिससे घूस देने वाले को लाभ पहुँचाया जा सके। एक मशहूर कथन है कि – क़ानून मोम के टुकड़े की तरह होते है, और इसकी व्याख्या करने वाला इसे मनचाहे सांचे में ढाल सकता है !! समाधान - विवेकाधिकार की शक्ति जजों की जगह नागरिको के ज्यूरी मंडल को दी जानी चाहिए। . तो ऊपर दिए गयी प्रशासनिक वजहें बताती है कि हमारी न्यायपालिका में ऐसी पर्याप्त व्यवस्थाएं है जो यह सिद्ध करती है कि ऐसी कोई वजह मौजूद नहीं है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के जज देश के अन्य अधिकारियो एवं नेताओ की तुलना में ज्यादा ईमानदार है। . बल्कि स्थिति इसके उलट है। दरअसल जजों की नियुक्ति-पदोन्नति की प्रणाली, विवेकाधिकार का प्रयोग एवं अवमानना का क़ानून उन्हें ज्यादा भ्रष्ट होने के ज्यादा सहज अवसर प्रदान करता है। और उन्हें नेताओं की तरह कभी जनता के प्रति जवाबदेहिता की प्रक्रिया से नही गुजरना पड़ता !! जीवन में कभी भी नही !! यही वजह है कि हमारी न्यायपालिका में भारी भ्रष्टाचार है। . 2.8. दूसरी तरफ सिर्फ दो वजहें है जिसकी वजह से यह बात स्थापित की जाती है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है : अवमानना के क़ानून का भय : यदि आप जजों पर अंगुली उठाएंगे तो वे आपको अवमानना का दोषी ठहरा कर जेल में डाल देंगे !! इस वजह से भारत के सभी समझदार एवं बड़े आदमी निरंतर यह दोहराते रहते है कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है !!! दूसरी बड़ी वजह पेड मिडिया है : धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में जज सिस्टम को जारी रखना चाहते है, ताकि वे जजों को घूस देकर मनचाहे फैसले निकलवा सके। इस तरह धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक अपने पक्ष में फैसले लेने के लिए जजों के भ्रष्टाचार का लाभ उठाते है। अत: वे जजों की छवि बनाये रखने के लिए पेड मिडिया को भुगतान करते है। पेड मिडिया निरंतर इस तरह की धारणा खड़ी करता है जिससे नागरिको में यह भ्रम फैले कि भारत के माननीय जज बेहद ईमानदार है। . ——————- . (3) डेरा और राजनीति : . यह एक बहुत ही गलत धारणा है कि धर्म में राजनीति का एवं राजनीति में धर्म का दखल नहीं होना चाहिए। दरअसल धर्म राजनीति से अलग किया ही नही जा सकता। . वजह ? . कोई भी धार्मिक संस्था या धार्मिक गुरु लोगो से जुड़ा होता है तथा उसकी गतिविधियों में धार्मिक जमाव होता है। जहाँ भी लोगो का जमाव होगा वहां दखल करना राजनीति की मजबूरी है। राजनेता ऐसे सभी व्यक्तियों का पीछा करते है जिसके पास लोगो के किसी समूह को प्रभावित करने की क्षमता हो। . धार्मिक संस्थाओ के पास यह क्षमता काफी बढ़ी हुयी होती है। अत: राजनेता चाहते है कि अमुक गुरु या संस्था अपने श्रद्धालुओं को उनके पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित करे। कोई गुरु या संस्था राजनीति से अलग रहना चाहे तो भी राजनेता उनका पीछा करते है। धार्मिक गुरुओ के पास इनसे बचने का कोई विकल्प नहीं है। . और कभी कभी इसका उल्टा भी देखने में आता है। सभी धार्मिक संस्थाओ को अपने विस्तार के लिए सरकार से मधुर सम्बन्ध बनाये रखना जरुरी होता है। इसीलिए वे बढ़त बनाये रखने और स्वयं को सुरक्षित करने के लिए सत्ता के साथ गठजोड़ बनाते है। कुल मिलाकर धार्मिक संस्थाओ / गुरुओ के पास लोगो का जमाव है और ये लोग वोट करते है। राजनीति में प्रत्येक व्यक्ति एक वोट है। तो धर्म में राजनीति स्थायी तत्व है। इससे बचा नहीं जा सकता। . जो लोग इस तरह का ज्ञान बाँटते फिरते है कि धर्म का राजनीती में दखल नहीं होना चाहिए वे भी यह बात अच्छी तरह से जानते है कि पूरी धर्म का राजनीती में दखल अनिवार्य तत्व है, किन्तु वे अपने निहित स्वार्थो के लिए इस तरह के भ्रम फैलाते है। . मौजूदा स्थिति में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ, कांग्रेस, अकाली और आम आदमी पार्टी में से कोई भी राजनैतिक दल डेरा के समर्थन में नहीं था / है। अकाली स्थानीय राजनीति और धार्मिक वजहों से तथा बीजेपी=संघ राष्ट्रीय राजनीति की वजह से डेरे को गिराना चाहते थे !! अपनी राजनैतिक वजहों के चलते कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की रुचि भी डेरे को बचाने में नहीं थी। आरएसएस हिन्दू धर्म के अनुयायियों को अपने नीचे "एक" करने के मिशन पर है। संघ के अनुसार विभिन्न सम्प्रदाय एवं गुरु वगैरह हिन्दुओ को विभाजित कर रहे है, और इसकी वजह से हिन्दुओ को एक करने का उनका मिशन पिछड़ जाता है !! अत: संघ पिछले 90 वर्ष से विभिन्न सम्प्रदायों एवं गुरुओ को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखता है। गोल्डन टेम्पल पर अपना प्रभाव रखने वाले अकाली भी डेरे को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखते है। कोंग्रेस को डेरे ने एक लम्बे समय तक राजनैतिक समर्थन दिया था, किन्तु हाल ही में डेरे के बीजेपी की और चले जाने से कोंग्रेस को भी डेरे के गिर जाने से कोई दिक्कत नहीं है। इसके अलावा मिशनरीज द्वारा समर्थित तर्क शील सोसाइटी जैसे संगठन भी डेरे के खिलाफ है। . बहरहाल, विभिन्न दलों और संगठनो के अपने हित और उनकी राजनीति है, और इसके कई आयाम हो सकते है। . इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु यह है कि मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियां डेरे को गिराना चाहती थी। अत: इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि संघ / कोंग्रेस / अकाली आदि क्या चाहते थे। भारत में एफडीआई बढ़ने से मिशनरीज की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि बीजेपी / कोंग्रेस / अकाली / आम आदमी पार्टी आदि कोई भी दल मिशनरीज के खिलाफ नहीं जा सकते। अत: इस प्रकरण में संघ / कोंग्रेस / अकाली एवं आम आदमी पार्टी की भूमिका को ज्यादा गंभीरता से लेने से हम मूल विषय से भटक जायेंगे। . यहाँ हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि परदे के पीछे जो भी सियासत रही हो , लेकिन निष्पादन जज द्वारा ही किया जाता है। . आशय यह कि किसी व्यक्ति को जेल में भेजने की शक्ति सिर्फ जज के पास ही होती है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी इस शक्ति से वंचित है। तो जब किसी व्यक्ति को फंसाना होता है तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक हमेशा जज का ही इस्तेमाल करते है। जब तक जज नहीं चाहेगा तब तक किसी भी व्यक्ति को किसी तरह से जेल में नहीं पहुचायां सकता। और यदि जज किसी व्यक्ति को जेल भेजना चाहता है तो उसे फिर कोई बचा भी नहीं सकेगा। ऊपर उन कारणों को बताया गया है जो इस बात की पुष्टि करते है कि भारत की अदालतें उतनी ही भ्रष्ट है जितने कि अन्य विभाग। . ———————— . (5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है : . सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए ! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह भी दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए ) !!! घटना के 3 साल बाद यानी 2002 में इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने CBI जांच के आदेश जारी किये !!! इन पत्रों में यह नहीं लिखा गया था कि ये पत्र किसने भेजे है। अत: CBI के आईपीएस अधिकारीयों ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc-164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को आगे की जांच के लिए सबूत के तौर पर मान लिया गया !!! 2005 तक CBI ने पीड़ीताओ से कई बार पूछताछ की। किन्तु हर बार पीड़ीताओ ने बयान दिया कि हमारे साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ !! CBI का कहना है कि उन्होंने कथित पीड़ीताओ को 2002 में ही खोज निकाला था !! किन्तु सीबीआई ने उनके बयान 2006 में दर्ज किये, और 2006 में ही चालान पेश किया। CBI ने दोनों कथित पीड़ीताओ के बयान 2006 में फिर दर्ज किये, और इनमे यह कहा गया कि बलात्कार किया गया था !! राम रहीम जी के वकील को दोनों पीड़ीताओ के बयानों की कॉपी नहीं दी गयी !! राम रहीम जी के वकील को पीड़ीताओ से क्रोस क्वेशचन करने का मौका नहीं दिया गया !! पीड़ीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी किन्तु उन्हें बयान बदलने की अनुमति नहीं दी गयी !! . तो तकनिकी रूप से मुकदमे का सार यह है कि – 3 साल बाद प्राप्त हुए गुमनाम पत्रों के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश किये गए !! 6 साल बाद सीबीआई ने ख़त लिखने वालो को खोज निकाला और उनके बयान दर्ज किये !! उन्होंने 4 वर्ष तक यह कहा कि कोई बलात्कार नही हुआ था , किन्तु सीबीआई ने इसे नहीं माना !! 2006 में सीबीआई ने दो साध्वियों के बयान दर्ज किये जिनमे कहा गया कि, बलात्कार हुआ था !! वकील को इन पीडिताओ से क्रोस क्वेश्चन करने की अनुमति नहीं दी गयी !! पीडीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी, किन्तु उन्हें अनुमति नहीं दी गयी !! 11 साल पहले लिए गए इन बयानों के आधार पर जज ने घटना के 18 साल बाद राम रहीम जी को जेल भेज दिया !!! . ध्यान देने वाली बात यह है कि, इस मुकदमे के सम्बन्ध में कोई भी "भौतिक सबूत" बरामद नहीं किये गए। सिर्फ बयानों को आधार पर फैसला दिया गया। जज को यह फैसला करना था कि कौन सच बोल रहा था और कौन झूठ। इस स्थिति में अभियुक्त एवं पीडिताओ का नारको टेस्ट लेकर पता किया जा सकता है कि किसका बयान सच था। किन्तु नारको टेस्ट नहीं लिया गया और जज ने लड़कियों के बयानों को सच मानने का फैसला किया !!! . सुप्रीम कोर्ट की यह रूलिंग कि — लड़की का बयान हर हाल में सच माना जाएगा और लड़की को अपना बयान बदलने की इजाजत नहीं होगी मुख्य वजह बनी जिसके कारण सरकार के नियन्त्रण में काम करने वाले CBI के आईपीएस अधिकारी एवं जज श्री राम रहीम जी को जेल में पहुंचा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह रूलिंग रसूखदार लोगो को पंजे में लेने के लिए की है, और लगभग सभी हिन्दू संतो को गिराने के लिए इस रूलिंग का इस्तेमाल किया गया है, और आगे भी इसी रूलिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। . इस रूलिंग का एक सबसे बड़ा साइड इफेक्ट यह आया कि अवसरवादी काम काजी महिलाओं ने इसका इस्तेमाल सहकर्मी पुरुष साथियों को ब्लेकमेल करने में शुरू किया और ज्यादातर पुरुष मालिको ने महिलाओं से दूरी बनाने के लिए उन्हें नियुक्तियां देना बंद कर दिया !! . पिछले 3 साल में मेरे खुद के सामने ऐसे दर्जन भर वाकये गुजर चुके है जब महिलाओं को नौकरियां गंवानी पड़ी है। और विडम्बना यह है कि उन महिलाओं / लडकियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस रूलिंग की वजह से वे नौकरियां गँवा रही है !! . लिंक - Victim's testimony is enough for conviction for rape: court . CBI के अधिकारियों ने ये बयान मजिस्ट्रेट के सामने कथित Crpc की धारा 164 के तहत दर्ज किये थे !! अब यदि बयान देने वाली लड़की अपने बयान को बदलती तो उसे झूठा बयान दर्ज करवाने के मुकदमे का सामना करना पड़ता। इस तरह उन्हें कोर्ट में श्री गुरु राम रहीम जी के खिलाफ फिर वही बयान देने के लिए बाध्य किया गया !! . और फिर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का इस्तेमाल किया गया कि - लड़की के बयान को अंतिम सत्य एवं अकाट्य सबूत माना जाएगा। . और फिर हमारे पास ऐसे शिक्षित एवं जागरूक लोगो का जमघट है जो इस प्रक्रिया को क़ानून का शासन कह के संबोधित कर रहे है !!! . इस सम्बन्ध में डेरा प्रमुख की पैरवी करने वाले वकील का साक्षात्कार निचे दिए लिंक पर देखें। इस साक्षात्कार में कहे गए तथ्यों को आप विश्वसनीय मान सकते है, क्योंकि वकील ने जो भी तथ्य रखे है वे रिकॉर्ड पर है, और गलत बयानी पर जज वकील को जेल भेज सकता है। . और वकील का साफ़ कहना है कि आरोप लगाने वाली लकड़ियों ने क्या बयान दिया है उसकी कॉपी हमें दी ही नहीं गयी !! और भौतिक सबूत इस मामले में थे नहीं !! मतलब आरोप लगाने वाली लड़कियां कौन है वकील को मालूम नहीं है, उन्होंने क्या बयान दिए वो भी वकील को मालूम नहीं है !! और इन्ही बयानों के आधार पर 10 साल की सजा !! . मैं आपसे आग्रह करूँगा कि कृपया यह पूरा साक्षात्कार देखें - Interview with S.K. Garg Narwana, Lawyer, Gurmeet Ram Rahim . और क़ानून के इस मखौल को कवर करने के लिए मिशनरीज ने 24*7 घंटे देश भर में एक अलग तरह तमाशा रचा, जिसमें राम रहीम जी संत नहीं है , वे विलासी है, ऐश्वर्य प्रिय है, उनके पास गुफाएं है, उनके डेरे में स्वीमिंग पूल है, उन्होंने आलिशान महल बना रखा है, उनके पास 2 बाज, 3 उल्लू , 5 तीतर है, उनके पास ढेर सारी जमीन है, वे फिल्मे बनाते है, नाचते-गाते है, क्रिकेट खेलते है, कारोबार करते है , रंग बिरंगे कपड़े पहनते है आदि आदि जैसे बकवास आरोपों को पेड मीडिया द्वारा बार बार इसीलिए दोहराया गया ताकि बलात्कार के मूल मुकदमे पर चर्चा को टाला जा सके !! . पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले ज्ञानी लोगो ने ये सब देखा-पढ़ा और फेसबुक-कोरा-व्हाट्स एप आदि के माध्यम से पूरे देश में फैलाने में भी योगदान दिया !! . यदि इन फर्जी आरोपों पर बहस नहीं चलाई जाती है तो जनता का ध्यान बलात्कार के मुकदमे से जुड़े तथ्यों पर चला जाएगा। और तब जनता को यह मालूम होगा कि सिर्फ बयान को आधार बनाकर ही राम रहीम जी को दोषी ठहरा दिया गया है। . सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग ने जज को यह तय करने का अधिकार दे दिया था कि वह यदि चाहे तो पीड़िता के बयान को सच मान सकता है !! और जज को इस बात में सुविधा थी कि लड़की के बयान को सच मान लिया जाए !! . इस तथ्य को चर्चा से बाहर करने के लिए मीडिया ने ऊपर दिए गए फर्जी आरोपों की झड़ी बनाकर यह धारणा खड़ी करने की कोशिश की है कि श्री राम रहीम जी एक दुर्जन व्यक्ति है। और सुबह शाम अनाज खाने के बावजूद कई लोग इन आरोपों को दोहरा रहे है। उन्हें इस बात पर सोचने का अवकाश ही नहीं है कि गुफाएं, स्वीमिंग पूल, महल आदि बनाना और फिल्मो में अभिनय करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। . ————————- . (6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो . टिप्पणी : मैं श्री राम रहीम जी का भक्त नहीं हूँ, न ही मैं कभी डेरे पर गया हूँ। और मुझे यह भी पता नहीं है कि अमुक मामले में श्री राम रहीम जी दोषी है या नहीं है। जब मेरे सामने यह मामला आया तो मैंने इसे कानूनी नजरिये से देखा, और कानूनी टर्म के अनुसार कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति यही निष्कर्ष निकालेगा कि यह मुकदमा पहले दिन से ही फर्जी है, और उन्हें जानबूझकर फंसाया गया प्रतीत होता है। . लेकिन पेड मीडिया की अफीम लेने वाले व्यक्ति मुकदमे से जुड़े तथ्यों को टच ही नहीं करते है, वे उन्हें बस इसीलिए जेल में देखना चाहते है कि राम रहीम जी का रहन सहन उनके अनुसार एक संत जैसा नहीं है !! बताइये !!! . जैसे जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ता गया उससे यह बात और भी साफ़ होती चली गयी कि मिशनरीज का उद्देश्य डेरे को तोडना है। मिशनरीज ने बड़ी मेहनत करके पंजाब को नशे की गिरफ्त में लिया है, और डेरे द्वारा इस तरह की प्रभावी गतिविधियाँ संचालित की जा रही थी जिससे लोग नशा छोड़ रहे थे !! . इसके अलावा डेरे के ज्यादातर अनुयायियों में ओबीसी शामिल है और इनमें दलित भी है। मिशनरीज के लिए यह वर्ग आसान शिकार है। सहजधारी सिक्खों को गोल्डन टेम्पल की वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाने और दलित सिक्खों के गोल्डन टेम्पल से दूर छिटकने के बावजूद मिशनरीज इन्हें अपनी और खींच नहीं पा रही है, क्योंकि संत श्री राम रहीम एवं रामपाल जी इन्हें आश्रय दे देते है। . यह देखना बेहद दुखद है कि, इन सभी संतो के अनुयायी करोडो रूपये लेकर वकीलों के चक्कर लगा रहे है, ताकि वकील उन्हें जजों से न्याय दिला सके। एक मात्र अपवाद संत श्री रामपाल जी रहे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि देश के 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है !! . इन अनुयायियों को इस बात का भान नहीं है कि हमारे जज / प्रशासनिक अधिकारी / पुलिस अधिकारी / मंत्री एवं कल्कि पुरुष तृतीय मोदी साहेब समेत संघ के सभी मंत्री अमेरिकी धनिकों की फौलादी पकड़ में है। ये सभी नेता अधिकारी एवं सभी मीडिया कर्मी ( पेड अर्नव, पेड सुधीर, पेड रजत एवं पेड रविश समेत ) अमेरिकी धनिकों की कठपुतलियां मात्र है। . गुरमीत जी , श्री आसाराम जी बापू, श्री रामपाल जी आदि संतो ने अपने असाधारण कार्यो से इस बात को सुनिश्चित किया कि गरीब /दलित / ओबीसी आदि मिशनरीज के आश्रय में चले जाने की जगह हिन्दू धर्म में बने रहे। . मैं इसे फिर से दोहराता हूँ - यदि आज गरीब /दलित / ओबीसी आदि हिन्दू धर्म में बने हुए है तो मंदिर प्रमुखों, प्राचीन राजाओ, संघ के नेताओं, बीजेपी नेताओं का इसमें योगदान शून्य है। इसका असली श्रेय सिर्फ इन तथा इन जैसे अन्य संप्रदाय प्रमुखों की नयी खेप को जाता है। और विडम्बना यह है कि आज उदारवादी / पढ़े लिखे / आधुनिक हिन्दू इन संतो को जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है !!! . हिन्दुओ को अपने नीचे एक करने की चाहत रखने वाले संघ=बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ता भी इससे खुश है। उनका नजरिया है कि, चलो अच्छा हुआ। यदि ये सभी संत हवालात में भेज दिए जाते है तो हम उनके अनुयायियों को आसानी से संघ=बीजेपी में जोड़ लेंगे !! . इन्हें यह अहसास ही नहीं है कि, मिशनरीज की ताकत के सामने इनकी कोई हैसियत नहीं है। यदि संत गुरमीत जी , संत श्री आसाराम जी एवं संत रामपाल जैसे लोग कमजोर हो गए तो दलितों / ओ बी सी / गरीबो की एक बड़ी संख्या मिशनरीज की गोद में जा गिरेगी। ऐसे सभी व्यक्ति जो इन संतो को गलत तरीके से 10-20 साल के लिए जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है दरअसल वे जाने-अनजाने मिशनरीज की मदद कर रहे है। . उन्हें इस बात को समझने की जरूरत है कि ये संत धर्म के नाम पर सिर्फ डायलॉग नहीं मार रहे है, बल्कि स्कूल, अस्पताल, दवाइयाँ, आश्रय आदि भी उपलब्ध करवा रहे है। और मिशनरीज को कथाएँ कहने वाले संतो से ज्यादा परेशानी नहीं होती है, किन्तु वे ऐसे संतो को बाधा के रूप में देखते है जो परोपकारी कार्य कर रहे है !! . ओह माय गॉड फिल्म कान्हा Vs कान्हा नामक नाटक पर लिखी गयी है। परेश रावल ने इसमें मुख्य भूमिका भी निभायी है और वे इसके सह निर्माता भी है। इस नाटक के फायनेंसर संघ=बीजेपी के नेता है, औ

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8) का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:-- नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीन भवति = होता है / बनता है भावार्थ: मनुष्य को हमेशा अपने विचारों, कर्मों और जीवन-दृष्टि में नवीनता बनाए रखनी चाहिए। अर्थात—जड़ता, आलस्य और पुराने, अप्रासाँगिक विचारों में अटके न रहकर निरंतर विकास, परिवर्तन और नव-सृजन की ओर बढ़ते रहना ही जीवन की सार्थकता है। गहन व्याख्या: ऋग्वेद यहाँ यह संकेत देता है कि प्रकृति स्वयं हर क्षण नई होती रहती है (सूर्योदय, ऋतुओं का परिवर्तन)। जो व्यक्ति भी नवीनता (innovation) को अपनाता है, वही जीवंत और प्रगतिशील रहता है। मानसिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक स्तर पर “नया बने रहना” ही उन्नति का मूल है। जीवन में अनुप्रयोग: विचारों में – नए दृष्टिकोण अपनाना। ज्ञान में – सतत अध्ययन और सीखना। आत्म-विकास में – हर दिन स्वयं को बेहतर बनाना। आध्यात्मिकता में – साधना में ताजगी और जागरूकता रखना। संक्षेप में: “जो हर दिन नया बनता है, वही सच में जीवित और सफल‌ होता है। वेदों में प्रमाण,-- 1. ऋग्वेद प्रमाण 1. ऋग्वेद-- 1/31/8 “नव्यो नव्यो भवति जायमानः” भावार्थ – मनुष्य को बार-बार नया बनते रहना चाहिए; निरंतर उन्नति और नवता ही जीवन का धर्म है। 2. ऋग्वेद-- 1/89/1 “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” भावार्थ – हमारे पास चारों दिशाओं से नए-नए शुभ विचार आते रहें। यह मंत्र स्पष्ट रूप से मानसिक नवीनता और openness की शिक्षा देता है। 3. ऋग्वेद --10/191/2 “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” भावार्थ – मिलकर चलो, मिलकर विचार करो, अपने मनों को एक करो (नए सामूहिक विचार विकसित करो)। 2. यजुर्वेद प्रमाण 4. यजुर्वेद-- 22/22 “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” भावार्थ – पूरे विश्व को श्रेष्ठ (उन्नत) बनाओ। यह निरंतर सुधार और नव-निर्माण की प्रेरणा देता है। 5. यजुर्वेद-- 40/2 (ईशोपनिषद्) “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः” भावार्थ – कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करो। यहाँ निरंतर कर्म (dynamic life) = निरंतर नवीनता। 3. सामवेद प्रमाण 6. सामवेद-- 375 (ऋग्वेद 1/89/1 का ही रूप) “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” भावार्थ – चारों ओर से श्रेष्ठ, नए विचार हमें प्राप्त हों। 4. अथर्ववेद प्रमाण 7. अथर्ववेद-- 7/52/1 “नवीनं नव्यं वर्धय” (भावानुसार) भावार्थ – जीवन में नवीनता को बढ़ाओ, उन्नति करते रहो। निष्कर्ष: वेदों का स्पष्ट संदेश है— नए विचार अपनाओ, रूढ़ियों में मत फँसो सदैव उन्नति और नव-सृजन करते रहो। इसलिए “नव्यो नव्यो भवति” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरे वैदिक दर्शन का मूल सिद्धांत है। उपनिषदों में प्रमाण -- 1. कठोपनिषद् कठोपनिषद् 1.3.14 “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” भावार्थ – उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त करो। यहाँ “जाग्रत” और “उत्तिष्ठत” का अर्थ है—जड़ता छोड़कर नवीन चेतना में प्रवेश करना। 2. ईशावास्य (ईश) उपनिषद् ईशोपनिषद्- 11 “विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह…” भावार्थ – जो व्यक्ति विद्या और अविद्या दोनों को जानता है, वही मृत्यु से पार होकर अमरत्व को प्राप्त करता है। यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण (holistic understanding) की शिक्षा देता है। 3. मुण्डकोपनिषद् मुण्डकोपनिषद् --1.1.4–5 “द्वे विद्ये वेदितव्ये…” भावार्थ – दो प्रकार की विद्याएँ जानने योग्य हैं—परा (आध्यात्मिक) और अपरा (भौतिक)। यह जीवन में नए-नए आयामों में ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा है। 4. छान्दोग्य उपनिषद् छान्दोग्य उपनिषद्-- 7.1.3 “तारति शोकमात्मविद्” भावार्थ – आत्मा का ज्ञान पाने वाला शोक से पार हो जाता है। आत्मज्ञान = आंतरिक रूप से नया जन्म / नवीनता। 5. बृहदारण्यक उपनिषद्++ बृहदारण्यक उपनिषद् --4.4.19 “तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति” भावार्थ – उसी (ब्रह्म) को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार हो जाता है। यहाँ ज्ञान के द्वारा नए अस्तित्व (transformation) की प्राप्ति बताई गई है। 6. श्वेताश्वतर उपनिषद् श्वेताश्वतर उपनिषद्--- 6.23 “यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ…” भावार्थ – जिसे ईश्वर और गुरु में परम भक्ति है, उसके लिए ज्ञान स्वतः प्रकट होता है। ज्ञान का प्रकट होना = निरंतर नवीनता और आंतरिक विकास। निष्कर्ष: उपनिषदों का मुख्य संदेश है— जागो (Awaken) ज्ञान प्राप्त करो (Learn continuously) स्वयं को रूपांतरित करो ।(Transform yourself) यही “नव्यो नव्यो भवति” का उपनिषदिक रूप है। पुराणों में प्रमाण -- 1. श्रीमद्भागवत महापुराण श्रीमद्भागवत --1.2.18 “नष्टप्रायेष्वभद्रेषु नित्यं भागवतसेवया। भगवत्युत्तमश्लोके भक्तिर्भवति नैष्ठिकी॥” भावार्थ – नित्य (प्रतिदिन) सत्संग और साधना से अशुद्धियाँ दूर होती हैं और दृढ़ भक्ति उत्पन्न होती है। यहाँ “नित्यं” (हर दिन) = निरंतर नवीनता और आत्म-शुद्धि। श्रीमद्भागवत --11.20.9 “तावत्कर्माणि कुर्वीत न निर्विद्येत यावता।” भावार्थ – जब तक वैराग्य उत्पन्न न हो, तब तक मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए। निरंतर कर्म तथा जीवन में गतिशीलता और नवीनता। 2. विष्णु पुराण विष्णु पुराण --1.22.53 “एवं प्रवर्तते सर्गः पुनः पुनरनादिकः।” भावार्थ – यह सृष्टि बार-बार निरंतर उत्पन्न होती रहती है। सृष्टि का चक्र है निरंतर नवीन सृजन (renewal)। 3. शिव पुराण शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता 1.10.25 “ज्ञानं विना न मुक्ति:” भावार्थ – ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं है। ज्ञान प्राप्ति से निरंतर आत्म-विकास और नवीनता। 4. गरुड़ पुराण गरुड़ पुराण --1.115.22 “विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्” भावार्थ – विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है। विद्यार्जन निरंतर नवीनता और प्रगति होती है। 5. ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण, कृष्ण जन्म खण्ड-- 59.45 “संसारः परिवर्तनशीलः” भावार्थ – संसार निरंतर परिवर्तनशील है। परिवर्तन ही नवीनता का शाश्वत सिद्धांत। 6. मार्कण्डेय पुराण मार्कण्डेय पुराण-- 50.15 “नित्यं यत्नः कर्तव्यः” भावार्थ – मनुष्य को सदा प्रयास करते रहना चाहिए। सतत प्रयास से निरंतर उन्नति और नवीनता आतीं है निष्कर्ष: पुराणों का संदेश स्पष्ट है— सृष्टि स्वयं निरंतर नई होती रहती है। मनुष्य को भी निरंतर कर्म, ज्ञान और साधना में आगे बढ़ना चाहिए।‌ स्थिरता नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रगति ही जीवन का नियम है। इस प्रकार पुराण भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को सृष्टि के चक्र, ज्ञान और कर्म के माध्यम से पुष्ट करते हैं। गीता में प्रमाण -- 1. निरंतर कर्म (Dynamic Life) गीता --3.8 “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।” भावार्थ – अपना कर्तव्य कर्म करो, क्योंकि कर्म न करना (जड़ता) से कर्म करना श्रेष्ठ है। यह श्लोक बताता है कि सक्रिय रहना चाहिए जिससे निरंतर नवीनता बनी रहे 2. आत्म-उन्नति (Self-Development) गीता-- 6.5 “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।” भावार्थ – मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, पतन नहीं। आत्म-उत्थान से व्यक्ति हर दिन बेहतर और नया बनता है। 3. अभ्यास और निरंतर साधना गीता --6.26 “यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्॥” भावार्थ – चंचल मन जहाँ-जहाँ जाए, उसे बार-बार नियंत्रित कर आत्मा में स्थिर करो। “बार-बार प्रयास” निरंतर सुधार होता है जिससे नवीनता बनी रहती है। 4. ज्ञान की नवीनता गीता-- 4.38 “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।” भावार्थ – इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ नहीं है। ज्ञान प्राप्ति से चेतना का विकास होता से। 5. परिवर्तन का सिद्धांत गीता-- 2.22 “वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।” भावार्थ – जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर नए शरीर धारण करती है। यह श्लोक सीधे बताता है कि पुराना छोड़कर नया अपनाना ही जीवन का नियम है। 6. निरंतर योग में स्थित रहना गीता-- 2.48 “योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।” भावार्थ – आसक्ति त्यागकर योग में स्थित होकर कर्म करो। यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण से कर्म करने की शिक्षा है। निष्कर्ष: गीता का स्पष्ट संदेश है— कर्म करते रहो (Act continuously) स्वयं को उठाओ (Self-evolve) ज्ञान प्राप्त करो (Learn & grow) पुराना छोड़कर नया अपनाओ (Transform) इस प्रकार गीता में “नव्यो नव्यो भवति” का भाव कर्म, ज्ञान और परिवर्तन के माध्यम से पूर्ण रूप से प्रतिपादित होता है। महाभारत में प्रमाण -- 1. निरंतर प्रयास (Continuous Effort) महाभारत, उद्योग पर्व -5.39.57 “उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः दैवेन देयं इति कापुरुषा वदन्ति।” भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो परिश्रमी और उद्यमी होता है; कायर लोग ही भाग्य की बात करते हैं। निरंतर प्रयास = नवीनता और उन्नति का मूल। 2. कर्म का महत्व महाभारत, शान्ति पर्व --12.153.18 “कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।” भावार्थ – जीव कर्म से ही उत्पन्न होता है और कर्म से ही उसका विकास या पतन होता है। कर्म करते रहना से जीवन गतिशील (नवीन) बना रहता है। 3. ज्ञान और विकास महाभारत, शान्ति पर्व --12.188.15 “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।” भावार्थ – ज्ञान के समान इस संसार में कुछ भी पवित्र नहीं है। ज्ञान = नए दृष्टिकोण और आंतरिक नवीनता। 4. आलस्य त्याग महाभारत, वन पर्व-- 3.33.28 “अलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।” भावार्थ – आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला बड़ा शत्रु है। आलस्य छोड़ना = नवीनता और प्रगति की शुरुआत। 5. सतत् उन्नति का संदेश महाभारत, शान्ति पर्व --12.237.11 (भावानुसार) “नित्यं यत्नेन कर्तव्यं श्रेयः” भावार्थ – मनुष्य को नित्य (हर दिन) प्रयास करते रहना चाहिए। “नित्यं” = हर दिन नया प्रयास, नया विकास। निष्कर्ष: महाभारत का स्पष्ट संदेश है— उद्यम और प्रयास करते रहो ज्ञान प्राप्त करते रहो, आलस्य से दूर रहो, हर दिन स्वयं को बेहतर बनाओ यही “नव्यो नव्यो भवति” का महाभारतीय रूप है— निरंतर कर्म, प्रयास और आत्म-विकास के द्वारा नया बनते रहना। स्मृतियों में प्रमाण -- 1. मनुस्मृति (क) मनुस्मृति --4.138 “नित्यं यत्नेन कर्तव्यं कर्म शुद्धिमिच्छता।” भावार्थ – जो व्यक्ति शुद्धि (उन्नति) चाहता है, उसे नित्य (प्रतिदिन) प्रयत्नपूर्वक कर्म करना चाहिए। “नित्यं यत्न” = हर दिन नया प्रयास, नवीनता। (ख) मनुस्मृति-- 2.87 “स्वाध्यायेन नित्ययुक्तः” भावार्थ – मनुष्य को नित्य स्वाध्याय (अध्ययन) में लगे रहना चाहिए। निरंतर अध्ययन से नवीन ज्ञान होता है। 2. याज्ञवल्क्य स्मृति याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.122 “अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।” (भाव समान परंपरा में प्रयुक्त) भावार्थ – अभ्यास और वैराग्य से ही मन वश में होता है। “अभ्यास” से निरंतर सुधार जिससे नवीनता आती है। याज्ञवल्क्य स्मृति-- 3.313 “नित्यं स्वाध्यायशीलः स्यात्” भावार्थ – मनुष्य को सदैव स्वाध्याय में प्रवृत्त रहना चाहिए। निरंतर सीखने से व्यक्ति में नवीनता आती है। 3. पाराशर स्मृति-- पाराशर स्मृति-- 1.24 “कलौ युगे नित्यधर्मपालनम्” भावार्थ – कलियुग में मनुष्य को नित्य धर्म का पालन करना चाहिए। “नित्य” (सतत्) आचरण से जीवन में ताजगी आती हैं 4. नारद स्मृति-- नारद स्मृति --1.2 “धर्मशास्त्रानुसारं नित्यं आचरेत्” भावार्थ – मनुष्य को नित्य धर्मशास्त्र के अनुसार आचरण करना चाहिए। सतत् आचरण से जीवन में निरंतर सुधार होता है। निष्कर्ष: स्मृतियों का मूल संदेश है— नित्य कर्म और प्रयास करो। निरंतर स्वाध्याय करो। अभ्यास से स्वयं को सुधारो। धर्मानुसार जीवन को विकसित करो। इस प्रकार स्मृतियाँ भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को नित्य प्रयास, अध्ययन और आचरण के माध्यम से स्थापित करती हैं। नीति-ग्रन्थों में में प्रमाण -- 1. चाणक्य नीति (क) चाणक्य नीति-- 1.7 “उद्योगे नास्ति दरिद्रता, जपतो नास्ति पातकम्। मौनिनः कलहो नास्ति, नास्ति जागरिते भयम्॥” भावार्थ – जो व्यक्ति उद्यम (परिश्रम) करता है, वह कभी दरिद्र नहीं होता। उद्यम से विकास और विकास से नवीनता आती है। (ख) चाणक्य नीति--2.10 “विद्या मित्रं प्रवासे च” भावार्थ – विद्या ही मनुष्य की सच्ची मित्र है। विद्या अर्जन से मानव निरंतर नया बनता है।। 2. हितोपदेश हितोपदेश, मित्रलाभ-- 1.71 “उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥” भावार्थ – कार्य उद्यम से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं। उद्यम से सक्रिय जीवन और सक्रिय जीवन से=नवीनता आतीं है। 3. पंचतंत्र पंचतंत्र-- 1.15 “नित्यं प्रयत्नशीलस्य सिद्धिर्भवति निश्चिता” भावार्थ – जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, उसे सफलता निश्चित मिलती है। “नित्यं प्रयत्न” = हर दिन नया प्रयास। 4. भर्तृहरि नीति शतक (क) नीति शतक --19 “आरभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः…” भावार्थ – नीच व्यक्ति विघ्न के भय से कार्य शुरू ही नहीं करते, जबकि श्रेष्ठ लोग निरंतर प्रयास करते हैं। निरंतर प्रयास से जीवन में गतिशीलता और नवीनताआती है। (ख) नीति शतक-- 75 “विद्या नाम नरस्य रूपमधिकम्” भावार्थ – विद्या मनुष्य का सर्वोत्तम रूप है। विद्या नवीनता की स्रोत है। निष्कर्ष: नीति ग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है— उद्यम (Effort) करो। नित्य प्रयास करो। ज्ञान अर्जित करो। आलस्य से बचो यही “नव्यो नव्यो भवति” का नीति-शास्त्रीय रूप है— हर दिन कर्म, ज्ञान और प्रयास से स्वयं को नया बनाते रहो। 1. वाल्मीकि रामायण से प्रमाण (क) प्रयास और उत्साह सुन्दरकाण्ड 5.12.3 “उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।” “सोत्साहस्य हि लोकेषु न किंचित् अपि दुर्लभम्॥” भावार्थ – उत्साह (निरंतर प्रेरणा और प्रयास) सबसे बड़ा बल है; उत्साही व्यक्ति के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं। उत्साह = जीवन में नित नई ऊर्जा (नवीनता)। (ख) आलस्य का त्याग अयोध्याकाण्ड 2.100.15 (भावानुसार) “न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः” (परंपरागत नीति-सूक्ति, भाव समान) भावार्थ – सोए हुए (निष्क्रिय) व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती। सक्रियता = नवीनता और प्रगति। (ग) धर्म में निरंतरता अयोध्याकाण्ड-- 2.109.10 “धर्मेण पथं चर” भावार्थ – मनुष्य को धर्म के मार्ग पर निरंतर चलते रहना चाहिए। निरंतर धर्मपालन = जीवन में सतत् सुधार। 2. अध्यात्म रामायण से प्रमाण (क) आत्म-विकास और ज्ञान अध्यात्म रामायण, अयोध्याकाण्ड 1.7 “ज्ञानवैराग्ययुक्तेन भज रामं निरन्तरम्” भावार्थ – ज्ञान और वैराग्य के साथ निरंतर भगवान का भजन करो। “निरन्तर” = सदैव नवीनता और जागरूकता। (ख) निरंतर साधना अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.35 “नित्यं आत्मचिन्तनं कुर्यात्” भावार्थ – मनुष्य को नित्य आत्म-चिंतन करना चाहिए। आत्मचिंतन = आंतरिक नवीनता और परिवर्तन। (ग) संसार की परिवर्तनशीलता अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.12 “अनित्यं असुखं लोकम्” भावार्थ – यह संसार अनित्य (निरंतर बदलने वाला) और अस्थिर है। परिवर्तन = नवीनता का शाश्वत नियम। निष्कर्ष: रामायण का संदेश है— उत्साह और प्रयास बनाए रखो आलस्य छोड़ो धर्म और साधना में निरंतर रहो आत्मचिंतन से स्वयं को विकसित करो इस प्रकार रामायण और अध्यात्म रामायण दोनों “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को उत्साह, साधना और निरंतर आत्म-विकास के माध्यम से स्थापित करते हैं। 1. गर्गसंहिता से प्रमाण (क) निरंतर भक्ति और साधना गर्गसंहिता, गोलोक खण्ड --3.12 “नित्यं भजेत् कृष्णं भक्त्या” भावार्थ – मनुष्य को नित्य (सदैव) भगवान का भजन करना चाहिए। “नित्यं” = हर दिन नवीन भाव से साधना। (ख) सतत् स्मरण गर्गसंहिता, वृन्दावन खण्ड-- 5.21 “स्मरणं सततं विष्णोः” भावार्थ – भगवान का सतत स्मरण करो। “सततं” = निरंतर जागरूकता = नवीनता। 2. योग वशिष्ठ से प्रमाण-- (क) पुरुषार्थ (Self-effort) योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण --2.18 “उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः” (समान भाव का श्लोक यहाँ भी उद्धृत मिलता है) भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो उद्यमी है। उद्यम = निरंतर नवीन प्रयास। (ख) चित्त का विकास योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण--3.7 “चित्तमेव हि संसारः” भावार्थ – यह संसार चित्त (मन) का ही रूप है। चित्त परिवर्तन = नया जीवन, नई दृष्टि। (ग) निरंतर अभ्यास योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण-- 5.10 “अभ्यासेन विनाऽन्यथा न सिद्धिः” भावार्थ – अभ्यास के बिना सिद्धि नहीं होती। अभ्यास = हर दिन नया प्रयास और सुधार। (घ) जागरूकता और आत्म-विकास योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण _6.1.13 “नित्यं जागरूकतया आत्मानं पश्येत्” भावार्थ – मनुष्य को सदा जागरूक रहकर अपने आत्मा का निरीक्षण करना चाहिए। जागरूकता = निरंतर आंतरिक नवीनता। निष्कर्ष: इन ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है— नित्य साधना और स्मरण करो उद्यम और पुरुषार्थ बनाए रखो मन (चित्त) को विकसित करो अभ्यास से स्वयं को निरंतर सुधारो। इस प्रकार गर्गसंहिता और योग वशिष्ठ दोनों“नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को निरंतर साधना, पुरुषार्थ और आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से स्थापित करते हैं। इस्लाम धर्म- में प्रमाण -- “सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव इस्लाम में नियत (नीयत), निरंतर प्रयास (इज्तिहाद), तौबा (आत्म-सुधार) और इल्म (ज्ञान) के रूप में स्पष्ट रूप से मिलता है। 1. क़ुरआन से प्रमाण (क) प्रयास और परिवर्तन सूरह अर-रअद (13:11) إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ भावार्थ – निःसंदेह, अल्लाह किसी क़ौम की दशा नहीं बदलता जब तक वे स्वयं अपने आप को न बदलें। स्वयं परिवर्तन = निरंतर नवीनता। (ख) निरंतर उन्नति की दुआ सूरह ताहा (20:114) وَقُل رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا भावार्थ – कहो: “हे मेरे पालनहार! मेरे ज्ञान में वृद्धि कर।” ज्ञान में वृद्धि = हर दिन नया बनना। (ग) कर्म और प्रयास सूरह नज्म (53:39) وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ भावार्थ – मनुष्य के लिए वही है जिसके लिए वह प्रयास करता है। सतत प्रयास = उन्नति और नवीनता। 2. हदीस से प्रमाण (क) आत्म-सुधार हदीस (सहीह बुखारी 6469 – “كُلُّكُمْ خَطَّاءٌ وَخَيْرُ الْخَطَّائِينَ التَّوَّابُونَ” भावार्थ – हर इंसान से गलती होती है, और सबसे अच्छे वे हैं जो बार-बार तौबा (सुधार) करते हैं। लगातार सुधार = निरंतर नवीनता। (ख) श्रेष्ठता में वृद्धि हदीस (मुस्लिम 2699 – भावानुसार) “مَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ” भावार्थ – जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। ज्ञान का मार्ग = निरंतर विकास। निष्कर्ष: इस्लाम का स्पष्ट संदेश है— अपने आप को बदलो।(Self-transformation) ज्ञान बढ़ाते रहो। (Continuous learning) प्रयास करते रहो। (Consistent effort) गलतियों से सुधार करते रहो। (Continuous renewal) इस प्रकार इस्लाम में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत तौबा, इल्म और आत्म-सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से समर्थित है। सिक्ख धर्म में प्रमाण -- गुरु ग्रंथ साहिब -- 1. नाम-स्मरण और नवीनता ਅੰਗ --660 “ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਜਪਹੁ ਮਨ ਮੇਰੇ ਹੋਵਤ ਸਗਲ ਘਾਤ ਕਾ ਨਾਸੁ॥” भावार्थ – हे मेरे मन! निरंतर हरि का नाम जप; इससे सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। निरंतर नाम-स्मरण = आंतरिक नवीनता। 2. सतत् जागरूकता ਅੰਗ --23 “ਸੋਚੈ ਸੋਚਿ ਨ ਹੋਵਈ ਜੇ ਸੋਚੀ ਲਖ ਵਾਰ॥” भावार्थ – केवल सोचने से (पुराने ढर्रे पर) शुद्धि नहीं होती, चाहे लाख बार सोचो। नया आचरण आवश्यक है = नवीनता। 3. आत्म-सुधार और उन्नति ਅੰਗ --305 “ਆਪੇ ਬੀਜਿ ਆਪੇ ਹੀ ਖਾਹੁ॥” भावार्थ – मनुष्य स्वयं बोता है और स्वयं ही उसका फल पाता है। कर्म और सुधार = निरंतर विकास। 4. ज्ञान और जागृति ਅੰਗ --12 “ਵਿਦਿਆ ਵੀਚਾਰੀ ਤਾ ਪਰਉਪਕਾਰੀ॥” भावार्थ – जब विद्या का सही चिंतन किया जाता है, तब वह परोपकार में लगती है। ज्ञान का चिंतन = नया दृष्टिकोण। 5. चढ़दी कला (सदैव उन्नति) ਅੰਗ-- 2 “ਨਾਨਕ ਨਾਮ ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ ਤੇਰੇ ਭਾਣੇ ਸਰਬੱਤ ਦਾ ਭਲਾ॥” भावार्थ – हे नानक! नाम के द्वारा मनुष्य सदा उन्नति (चढ़दी कला) में रहता है और सबका भला चाहता है। चढ़दी कला = निरंतर सकारात्मक नवीनता। निष्कर्ष: सिख धर्म का स्पष्ट संदेश है— नाम जपते रहो (Spiritual renewal) कर्म सुधारते रहो। (Self-improvement) ज्ञान से जागरूक बनो ।(Awareness) चढ़दी कला में रहो (Always rising, evolving) इस प्रकार सिख धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत नाम-सिमरन, सेवा और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ईसाई धर्म में प्रमाण बाइबिल से-- 1. Inner Renewal (आंतरिक नवीनता) Romans-- 12:2 “Do not be conformed to this world, but be transformed by the renewing of your mind.” भावार्थ – इस संसार के अनुरूप मत बनो, बल्कि अपने मन के नवीनीकरण (renewal) द्वारा बदल जाओ। Renewing of mind = निरंतर नया बनना। 2. New Creation (नया जीवन) 2 Corinthians-- 5:17 “Therefore, if anyone is in Christ, he is a new creation; the old has gone, the new has come.” भावार्थ – जो मसीह में है, वह नया सृजन है; पुराना चला गया, नया आ गया। Old → New = पूर्ण नवीनता। 3. Continuous Growth 2 Peter-- 3:18 “But grow in the grace and knowledge of our Lord and Savior Jesus Christ.” भावार्थ – प्रभु यीशु मसीह की कृपा और ज्ञान में निरंतर बढ़ते रहो। Growth = निरंतर उन्नति और नवीनता। 4. Daily Renewal 2 Corinthians --4:16 “Though outwardly we are wasting away, yet inwardly we are being renewed day by day.” भावार्थ – भले ही बाहरी रूप से हम कमजोर होते जाएँ, लेकिन भीतर से हम प्रतिदिन नए बनते रहते हैं। Day by day renewal = नित्य नवीनता। 5. Repentance & Transformation Ephesians --4:22–24 “Put off your old self… and be renewed in the spirit of your mind; and put on the new self.” भावार्थ – अपने पुराने स्वभाव को त्यागो और मन की आत्मा में नए बनो। Self-transformation = नवीन जीवन। निष्कर्ष: ईसाई धर्म का स्पष्ट संदेश है— मन को नया बनाओ (Renew your mind) पुराना छोड़ो, नया अपनाओ (New creation) ज्ञान और कृपा में बढ़ो (Continuous growth) प्रतिदिन आत्मिक नवीनता प्राप्त करो (Daily renewal) इस प्रकार ईसाई धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आत्मिक परिवर्तन और नये जीवन के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। जैन आगम ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. उत्तराध्ययन सूत्र उत्तराध्ययन सूत्र-- 10.1 “अप्पा कत्ता विकत्ता य, अप्पा हु सुखदुःखाणं।” भावार्थ – आत्मा ही अपने सुख-दुःख का कर्ता है। स्वयं को सुधारना = निरंतर नवीनता। उत्तराध्ययन सूत्र-- 4.7 “संयमेण वि मुच्‍चइ” भावार्थ – संयम के द्वारा ही मुक्ति मिलती है। संयम और अभ्यास = आत्मिक विकास। 2. दशवैकालिक सूत्र दशवैकालिक सूत्र-- 4.1 “समयं गोयम मा पमायए” भावार्थ – हे गौतम! समय का प्रमाद मत करो। हर क्षण सजग रहना = निरंतर नवीनता। 3. तत्त्वार्थ सूत्र तत्त्वार्थ सूत्र-- 1.1 “सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः।” भावार्थ – सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र ही मोक्ष का मार्ग हैं। निरंतर सुधार = आध्यात्मिक उन्नति। 4. आचारांग सूत्र आचारांग सूत्र-- 1.2.3 “जागंति जोगं समणे” भावार्थ – साधु सदैव जागरूक रहता है। जागरूकता = निरंतर आत्म-नवीनता। 5. समयसार समयसार --1.2 “अप्पा सो परमात्मा” भावार्थ – आत्मा ही परमात्मा है। आत्म-बोध = नया जीवन, नई चेतना। निष्कर्ष: जैन धर्म का स्पष्ट संदेश है— समय का सदुपयोग करो । (Be mindful) संयम और साधना करो ।(Discipline) आत्मा को पहचानो ।(Self-realization) निरंतर सुधार करते रहो ।(Continuous growth) इस प्रकार जैन धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आत्म-साधना, जागरूकता और संयम के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। बौद्ध धर्म में धम्मपद ग्रन्थ से प्रमाण-- 1. अप्रमाद (सजगता) – निरंतर जागरूकता धम्मपद-- 21 “अप्पमादो अमतपदं, पमादो मच्चुनो पदं।” भावार्थ – अप्रमाद (सजगता) अमरता का मार्ग है, और प्रमाद मृत्यु का मार्ग है। सदैव जागरूक रहना = निरंतर नवीनता। 2. आत्म-उन्नति धम्मपद --160 “अत्ताहि अत्तनो नाथो, को हि नाथो परो सिया।” भावार्थ – मनुष्य स्वयं ही अपना स्वामी है; दूसरा कोई उसका स्वामी नहीं। स्वयं को सुधारना = नया बनना। 3. निरंतर अभ्यास धम्मपद --276 “तुम्हेहि किच्चं आतप्पं, अक्खातारो तथागता।” भावार्थ – प्रयास तुम्हें स्वयं करना है; तथागत केवल मार्ग दिखाते हैं। स्व-प्रयास = निरंतर उन्नति। 4. परिवर्तन का सिद्धांत (अनिच्चा) धम्मपद --277 “सब्बे संखारा अनिच्चा” भावार्थ – सभी संयोग (संसार की वस्तुएँ) अनित्य (परिवर्तनशील) हैं। परिवर्तन = नवीनता का मूल सिद्धांत। 5. निरंतर शुद्धि धम्मपद --183 “सब्बपापस्स अकरणं, कुशलस्स उपसम्पदा। सचित्तपरियोदपनं—एतं बुद्धानं सासनं॥” भावार्थ – पापों का त्याग, कुशल कर्मों का आचरण और चित्त की शुद्धि— यही बुद्ध का उपदेश है। निरंतर आत्म-शुद्धि = नवीनता। निष्कर्ष: बौद्ध धर्म का स्पष्ट संदेश है— सदैव सजग रहो। (Appamada) स्वयं प्रयास करो । (Self-effort) संसार की अनित्यता को समझो।(Impermanence) चित्त को शुद्ध करते रहो। (Inner renewal) ख इस प्रकार बौद्ध धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत अप्रमाद, साधना और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। “सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव यहूदी धर्म में तशूवा (repentance), नवीनीकरण (renewal), ज्ञान-वृद्धि और ईश्वर के साथ नये संबंध के रूप में स्पष्ट मिलता है। नीचे Tanakh (हिब्रू बाइबिल) से हिब्रू लिपि सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं 1. हृदय का नवीनीकरण (Inner Renewal) Lamentations (איכה) 5:21 “הֲשִׁיבֵנוּ יְהוָה אֵלֶיךָ וְנָשׁוּבָה חַדֵּשׁ יָמֵינוּ כְּקֶדֶם” भावार्थ – हे प्रभु! हमें अपनी ओर लौटा, और हमारे दिनों को पहले के समान नया कर दे। 👉 “חדש” (नया करना) = नवीनता का स्पष्ट सिद्धांत। 2. नया हृदय और नई आत्मा Ezekiel (יחזקאל) 36:26 “וְנָתַתִּי לָכֶם לֵב חָדָשׁ וְרוּחַ חֲדָשָׁה אֶתֵּן בְּקִרְבְּכֶם” भावार्थ – मैं तुम्हें नया हृदय दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा रखूँगा। New heart & spirit = पूर्ण आंतरिक नवीनता। 3. प्रतिदिन नई कृपा Lamentations (איכה) 3:22–23 “חַסְדֵי יְהוָה כִּי לֹא תָמְנוּ כִּי לֹא כָלוּ רַחֲמָיו׃ חֲדָשִׁים לַבְּקָרִים” भावार्थ – प्रभु की करुणा समाप्त नहीं होती; उसकी दया हर सुबह नई होती है। हर दिन नया आरम्भ = दैनिक नवीनता। 4. नए गीत का गान (नवीन चेतना) Psalms (תהילים) 96:1 “שִׁירוּ לַיהוָה שִׁיר חָדָשׁ” भावार्थ – प्रभु के लिए एक नया गीत गाओ। New song = नई भावना और चेतना। 5. ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि Proverbs (משלי) 4:7 “רֵאשִׁית חָכְמָה קְנֵה חָכְמָה” भावार्थ – ज्ञान की शुरुआत यही है कि ज्ञान प्राप्त करो। ज्ञान अर्जन = निरंतर उन्नति। निष्कर्ष: यहूदी धर्म का स्पष्ट संदेश है— हृदय और आत्मा को नया बनाओ (Renewal) प्रतिदिन नया आरम्भ करो (Daily renewal) ज्ञान में वृद्धि करो (Growth) ईश्वर के साथ संबंध को ताजा रखो इस प्रकार यहूदी धर्म में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आंतरिक परिवर्तन, तशूवा और नवीनीकरण के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। पारसी धर्म में प्रमाण -- 1. सद्विचार–सद्कर्म (निरंतर सुधार) यास्ना-- 30.2 𐬀𐬙 𐬀𐬱𐬀 𐬚𐬀𐬙 𐬀𐬚𐬀𐬙𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬨𐬀𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬑𐬙𐬀 𐬵𐬬𐬀𐬭𐬱𐬙𐬀॥ भावार्थ – अच्छे विचार, अच्छे वचन और अच्छे कर्म का मार्ग अपनाओ। निरंतर अच्छे कर्म करते रहने से जीवन में नवीनता आती है। 2. सत्य और प्रगति यास्ना-- 34.1 𐬀𐬴𐬎𐬭𐬀 𐬨𐬀𐬰𐬛𐬀 𐬀𐬱𐬀 𐬬𐬀𐬵𐬨𐬀𐬌 भावार्थ – अहुरा मज़्दा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को उन्नति देता है। धर्म का पालन = निरंतर उन्नति। 3. जागरूकता और चयन यास्ना- 30.3 𐬀𐬙 𐬙𐬀 𐬙𐬆𐬌 𐬥𐬀𐬎𐬙𐬀 𐬀𐬭𐬆𐬥𐬙𐬀 𐬵𐬀𐬨𐬀𐬭𐬆𐬌𐬙𐬌॥ भावार्थ – मनुष्य को सही और गलत के बीच स्वयं चयन करना चाहिए। चयन और जागरूकता = नवीनता की दिशा। 4. आत्म-विकास और प्रकाश यास्ना --43.2 𐬀𐬱𐬀𐬵𐬌 𐬭𐬀𐬙𐬀𐬨𐬀𐬌 𐬵𐬀𐬙𐬀𐬌 भावार्थ – सत्य और प्रकाश के मार्ग पर चलकर आत्मा का विकास करो। प्रकाश की ओर बढ़ना = निरंतर नवीनता। निष्कर्ष: पारसी धर्म का स्पष्ट संदेश है— अच्छे विचार अपनाओ (Humata)। अच्छे वचन बोलो (Hukhta)। अच्छे कर्म करो (Hvarshta)। सत्य और प्रकाश की ओर बढ़ो। इस प्रकार पारसी धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत सद्विचार, सद्कर्म और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ताओ धर्म में प्रमाण --+ 1. निरंतर नवीनीकरण (Renewal) ताओ ते चिंग, अध्याय 15 “孰能浊以静之徐清?孰能安以动之徐生?” भावार्थ – कौन ऐसा है जो स्थिर होकर अशुद्धता को शुद्ध कर सकता है? और गति द्वारा जीवन को धीरे-धीरे उत्पन्न कर सकता है? स्थिरता + गति = निरंतर नया बनना। 2. प्रकृति का प्रवाह (Flow of Change) ताओ ते चिंग, अध्याय 8 “上善若水。水善利万物而不争。” भावार्थ – सर्वोत्तम गुण जल के समान है, जो सबका लाभ करता है और संघर्ष नहीं करता। जल की तरह निरंतर बहना = नवीनता और अनुकूलन। 3. परिवर्तन का सिद्धांत ताओ ते चिंग, अध्याय 40 “反者道之动。” भावार्थ – परिवर्तन (विपरीत होना) ही ताओ की गति है। परिवर्तन = नवीनता का मूल नियम। 🔹 4. सरलता और नवीकरण ताओ ते चिंग, अध्याय 48 “为学日益,为道日损。” भावार्थ – ज्ञान के लिए प्रतिदिन वृद्धि करो, और ताओ के लिए प्रतिदिन सरल होते जाओ। प्रतिदिन परिवर्तन = नया बनने की प्रक्रिया। 5. जीवन की ताजगी ताओ ते चिंग, अध्याय 25 “人法地,地法天,天法道,道法自然。” भावार्थ – मनुष्य पृथ्वी का अनुसरण करता है, पृथ्वी आकाश का, आकाश ताओ का, और ताओ प्रकृति का। प्रकृति का अनुसरण = सदैव नवीन और स्वाभाविक जीवन। निष्कर्ष: ताओ धर्म का स्पष्ट संदेश है— प्रकृति के साथ बहो (Go with the flow) परिवर्तन को स्वीकारो (Accept change) सरल और स्वाभाविक बनो (Be natural) हर क्षण नया बनो (Continuous renewal) इस प्रकार ताओ धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत प्रवाह, परिवर्तन और स्वाभाविकता के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। Confucius से सम्बद्धित ग्रन्थों में प्रमाण --- 1. निरंतर अध्ययन (Continuous Learning) The Analects-- 1.1 “學而時習之,不亦說乎?” भावार्थ – क्या यह आनंददायक नहीं कि हम सीखें और समय-समय पर उसका अभ्यास करें? निरंतर अध्ययन = नवीनता। 2. आत्म-सुधार-- The Analects --4.17 “見賢思齊焉,見不賢而內自省也。” भावार्थ – श्रेष्ठ को देखकर उसके समान बनने का प्रयास करो, और अश्रेष्ठ को देखकर अपने भीतर सुधार करो। 👉आत्म-निरीक्षण = निरंतर नया बनना। 3. प्रतिदिन आत्म-परीक्षण-- The Analects--- 1.4 “吾日三省吾身。” भावार्थ – मैं प्रतिदिन अपने आप का तीन बार निरीक्षण करता हूँ। दैनिक आत्म-परीक्षण = नित्य नवीनता। 4. सतत् प्रगति The Analects- 7.8 “不憤不啟,不悱不發。” भावार्थ – जब तक जिज्ञासा और प्रयास न हो, तब तक ज्ञान प्रकट नहीं होता। प्रयास और जिज्ञासा = निरंतर विकास। 5. महानता की ओर बढ़ना The Analects--- 14.30 “君子求諸己,小人求諸人。” भावार्थ – श्रेष्ठ व्यक्ति अपने भीतर सुधार करता है, जबकि साधारण व्यक्ति दूसरों में दोष खोजता है। आत्म-विकास = नवीनता का मार्ग। निष्कर्ष: कन्फ्यूशियस परम्परा का स्पष्ट संदेश है— निरंतर सीखो (Keep learning) आत्म-निरीक्षण करो (Self-reflection) स्वयं को सुधारो (Self-improvement) प्रतिदिन आगे बढ़ो (Daily progress) इस प्रकार कन्फ्यूशियस धर्मग्रन्थों में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत अध्ययन, आत्म-संस्कार और निरंतर सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ------+------+----+------+-----+-

Piyu soul

कमज़ोर नहीं हूँ, बस वक्त मेरा खामोश है, मेहनत मेरी जारी है, बस मुकाम थोड़ा दूर है। जो आज नजरअंदाज करते हैं मेरी कहानी को, कल वही कहेंगे — ये लड़की कुछ खास जरूर है। 😏💛 #Good morning buddies ☺️❤️

Munmun Das

कुछ रिश्तों का पीछे छूट जाना ही हमारे भबिस्व के लिए सुख दायक है

Munmun Das

कौन से अपने और कौन से चार लोग ये चार लोग सिर्फ मुर्दे को कंधा देने के काम आते हैं जितेजी हर दर्द तो अकेले को ही सहना पड़ता हैं।

Manali

हाय…! क्या बात होती, अगर ये मिलता, ग़ुलज़ार की ग़ज़लों-सी मोहब्बत अगर मिलती। क्या होता, जो जॉन एलिया की शायरी-सा इश्क़ नसीब होता, और क्या ही होता, अगर कोई मिल जाता, जो मेरे ख़यालों, मेरे तसव्वुर और मेरे हसरतों का हमनवा होता।

ziya

*गुनाह* कुछ ऐसे हुए हमसे *अनजाने में,* 🥺 *फूलों* का *क़त्ल* कर बैठे 🌸💔 पत्थरों को *मनाने में...* 😔✨

ziya

अहमियत दी तो खुद को कोहिनूर मानने लगे, काँच के टुकड़े भी क्या वहम पालने लगे...* 😏💔🖤

Radhe

जब "कृष्ण" जीवन में आय तो समझ लेना के आने वाले समय में आपके जीवन मे कुछ बड़ा परिवर्तन आने वाला है. और वो आपको किसी न किसी रुप मैं समझाएगा के कौन सच मैं आपका हे और कौन अपना होने का दिखावा कर रहा है... मतलब यह के आपके आने वाले जीवन में परिवर्त /महाभारत जो भी हो उसके लिए आपको सज्ज कर रहा हे! धैर्य सर्वस्य साधनम्।। राधे राधे

Kartik Kule

डोळ्यातील अश्रूंची गाथा मी तरी तुला समजाऊ शकेन का , शोधताना समुद्र मीही नदीस कुठेतरी वाफे सारखा हरवेन का. अपुरी तुझी माझी सात वाफ होऊंतरी आकाशात भेटेल का. आणि तरीही आपण भेटल्यावर पुन्हा पावसासारखी तू हरवशील का . तुझ्या भेटण्याची आस मला प्रत्येक वेळी पहावी लागेल का. मग पुन्हा तुझ्या आठवणीत आश्रूंचीच भेट होईल का - Kartik Kule

Narendra Parmar

किराए की इज्ज़त का क्या भरोसा ??? वो वक्त आने पर ब्याज के साथ वसूल करते हैं ! वैसे भी कलयुग चल रहा है इतना जल्दी भी हर इंसान के उपर भरोसा नहीं कर सकते हैं ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Vipul Borisa

अपनी ख्वाहिशों को तरबतर कर गये। कुछ ऐसा हुआ के हम जीतेजी मर गये। एक आख़री मौका उनको भी मिला था, वो कमबख्त उस वक़्त ही मुकर गये। विपूल प्रीत - Vipul Borisa

वात्सल्य

ઓ નાદાન ! એવું ના સમજ કે તુ નાદાન છે. માટે નાદાન સમજવાની હું ભૂલ નહીં કરું.... - वात्सल्य

Piyu soul

💫तेरे एहसास की रोशनी 💫 तेरी बातों में कुछ ऐसा नूर है, कि हर लम्हा थोड़ा सा खास लगने लगता है। तू पास हो तो दिल को सुकून मिल जाता है, और दूर होकर भी तू कहीं पास ही लगता है। ना कोई नाम है इस रिश्ते का, ना कोई वादा, ना कोई शर्त… फिर भी ये दिल हर बार तेरी ही तरफ झुकने लगता है। कभी तेरी हँसी में खुद को ढूंढ लेती हूँ, कभी तेरी खामोशी में भी सुकून मिल जाता है। ये कैसा रिश्ता है हमारा… जो अधूरा होकर भी पूरा सा लगता है। शायद इसी को प्यार कहते हैं, जहाँ मिलना जरूरी नहीं होता… बस एक-दूसरे का एहसास ही काफी होता है। 💛

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