Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
S A Y R I K I N G

आज कल के लड़के प्रपोज करने से पहले मांगने लगते क्या लड़की का नम्बर

Archana Singh

देती हैं तजुर्बा ज़िंदगी ...! हर बार मरहम लगाने के बाद "...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं https://youtu.be/cro_ENkHuPI?si=G809eKwxmfbFCP_Q

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं

Archana Singh

दस्तूरें मोहब्बत ..! निभानें चलें थें ...! हम अपना आशियाना ख़ुद जलाने चलें थें ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

काश ! आज हमारे शहर में भी बिन मौसम बरसात हो जाएं , और ... उनसे मिलने की कुछ गुंजाइश हो जाएं ! थम जाए वो लम्हें वहीं , जब उनकी नजरें इनायत अर्चना पर हो जाएं ...!! - Archana Singh

Archana Singh

" मैंने तुझसे ज्यादा क्या मांगा ऐ जिंदगी ..! तू इस तरह सितमगर बन गई.. ! निशान अभी मिटें भी नहीं , और ... घाव फिर हरे हो गए "...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Nilesh Rajput

તું બનીશ જો ચોક, તો મને ઘુંટાવુંય ગમે… પણ બનીશ જો પેન, તો તારું ચેકાવું મને નહિ ગમે.

Imaran

बेवफा से दिल लगा लिया नादान थे हम, गलती हमसे हुई क्योंकि इंसान थे हम, आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती है, कुछ समय पहले उनकी जान थे हम 💔imran 💔

Archana Singh

" खुशियां अक़्सर मेरे चौखट तक आती हैं ... फिर जाने क्यों ...! उल्टे पांव लौट जाती हैं "...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Paagla

शिकायत बहुत थी उन्हें हमसे, बस इसलिए हमने खुद को अलग कर लिया Paagla ke sad quotes un jazbaaton ke liye hain jo muskuraahat ke peeche chup jaate hain. Kam lafz, gehra dard — kyunki kuchh takleefein bayaan nahi, mehsoos ki jaati hain.

kattupaya s

அனைவருக்கும் இனிய பொங்கல் நல்வாழ்த்துக்கள்.. மாலை வணக்கம்

kattupaya s

Good evening friends.. wish you all a very happy pongal..

Priya

winter Fav song

Nilesh Rajput

એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી સવારના સૂરજ સાથે મારું ગામ જાગતું જાય, જ્યાં ધૂળિયા રસ્તે ચાલતા લોકો જય શ્રી રામ કહેતા જાય, એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી, જ્યાં ધરતી–ખેડૂત એક થતાં માટીની સુગંધ ચારેકોર ફેલાય, જ્યાં આકાશ, વાદળ, ધરતી શું? પાકને દેવતા માની પૂજાય, જ્યાં નાત–જાતના ભેદ ભૂલી, દરેક તહેવાર ધૂમધામથી ઉજવાય, જ્યાં સંસ્કૃતિ, સંસ્કાર અને સંગાથનું મિલન અનોખું થાય, એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી, જ્યાં ઓટલાં–ફળીયાંમાં લંગડી, ખો-ખો રમતા હૈયું ખીલી જાય, જ્યાં એક પોકારે વાડા–ફળીયાંથી ગામના મિત્રો ભેગા થાય, જ્યાં કાચી કેરીના સ્વાદ માટે ટોળું એકઠું થાય, જ્યાં સાંજે ઘંટડીના નાદ સાથે હનુમાન ચાલીસા ગુંજાય, એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી, જ્યાં બાળપણ યાદ આવતા મારી આંખો ભીની થાય, જેનું નામ લેતા મારી ડોક ગર્વથી ઊંચી થાય, એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી..

Archana Singh

ना गंगा बड़ी , ना गोदावरी ! ना तीर्थ बड़े प्रयाग ! सकल तीर्थ का पुण्य वहीं ! जिस दिल में शिव का वास ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

कल फ़ुर्सत नहीं मिल पाए , तो क्या करोंगे ..! कल मोहलत ना मिल पाए , तो क्या करोंगे ..! आज तुम कहते हो , कल मैं माफ़ी मांग लूंगा , लेकिन कल अगर आंख ही ना खोल पाए तो क्या करोंगे ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

ख़ुद को इतना मजबूत बनाओं कि ... उंगलियां उठाने वाले हाथ तालियां बजाने को मजबूर हो जाएं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

ज़िंदगी का ताना-बाना बनाएं रखना ! रिश्तों में हल्की खटास लगाएं रखना ! विरह की वेदना ना देना महादेव ..! बस अपनी कृपा यूं ही अर्चना पर बनाएं रखना ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

अगर खुशियां हैं तो , परेशानियां भी बहुत हैं ! लाभ हैं तो हानियां भी बहुत हैं ! क्या हुआ अगर जिंदगी में थोड़ी सी तकलीफ़ आ गए तो , मेरे महादेव की अर्चना पर मेहरबानियां भी तो बहुत हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

बुद्धिमान व्यक्ति कई बार जवाब होते हुए भी पलट कर नहीं बोलते हैं, क्योंकि ... कई बार रिश्तों को ज़िंदा रखने के लिए ख़ामोश रहकर हारना जरूरी हो जाता हैं...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

छल करोंगे तो छल मिलेगा..! आज नहीं तो कल मिलेगा ..!! अगर ज़िंदगी जिओगे सच्चाई से तो सुकून यहां हर पल मिलेगा ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Archana Singh

ज़िंदगी में कुछ ऐसे दोस्त जरूर बनाइए ! जो दिल की बात ऐसे समझें , जैसे... मेडिकल स्टोर वाले डॉक्टर की हैंडराइटिंग समझते हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

શિર્ષક : 'વિઘ્ન સંતોષી' બીજાનું બગડેલુ જોઈને, જેમના મનમાં મલકાટ થાય, સીધેસીધા રસ્તા ઉપર, જેઓ કાંકરા વેરતા જાય. કોઈ ચઢતું હોય ઊંચે, તો ખેંચે એના ટાંટિયા, વાત હોય જો નાની સરખી, મારી દે એ ગાંટિયા. પોતાને કંઈ કરવું નથી, ને બીજાને કરવા દેતા નથી, ખુશી કોઈની જોઈને, હરખ કદી એ લેતા નથી. મહેનત બીજાની હોય ને, જશ લેવા એ દોડશે, કામ કોઈનું પૂર્ણ થાતું, જોઈને માથા ફોડશે. સાચો માણસ એ જ કહેવાય, જે બીજાને તારે, પણ વિઘ્ન સંતોષી જીવ તો, ડૂબાડે મધધારે. ઇર્ષાની એ આગમાં, પોતે ખુદ બળશે, વાવેલા જેવાં બીજ હશે, "સ્વયમ્'ભૂ" એવું લણશે. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

jighnasa solanki

આજે પોસ્ટમા કોઈ ઈમેજ સેન્ડ નથી થતી. મારે જ આવુ થાય છે કે બીજાને પણ આવુ થાય છે?

jighnasa solanki

coming soon.... 🥳🥳

jighnasa solanki

coming soon.... 🥳🥳

બદનામ રાજા

શીયાળામાં ગુજરાતીઓ નું લોહી ઘી# પોઝીટીવ હોય છે... ખાવ અડદિયા થાવ ગડદિયા... 😄😄😄

Jarahe Mayuri

शहर में इस कदर बदनाम थे, कि उनसे हमारे दिल मिले भी नहीं और बर्बादी दरवाज़े पर दस्तक दिए खड़ी थी।

Soni shakya

दिमाग कुछ सोच पाता कि, कैसे रोकें उन्हें तब तक.. आ‌‌ ही जाता हैं चुपके से.. दबे पांव,बिना आहाट किये.. और दस्तक दे जाता है.. दिल को 'ख्याल' उसका.. - Soni shakya

Parmar Mayur

अब धीरे धीरे ठंड का मौसम जाएगा। और जाना भी चाहिए। शास्वत कुछ भी नहीं है इस संसार में, समय की गति में रुकना मना है। लोहड़ी के त्योहार के बाद प्रकृति अपना मिजाज थोडा बदलती है, जीवन के लिए। अब सूरज भी धीरे धीरे गर्म होगा, धरती को कूच गर्माहट झेलनी पड़ेगी, तभी तो बारिश की ठंडी बूंदों से खेत-खलिहानो में हरियाली वापस जिवंत करेंगी। थोडा कष्ट झेलना पड़ता है, सुख का सही आनंद तभी तो पा सकते हैं। अरे पा तो सकते हैं पर आनंद क्या है उसकी सची व्याख्या 'कष्ट' ही समझता है। थोड़ा संघर्ष करके कुछ मिले तो प्राप्त करनेवाले, इंसान को सही उसकी "कद्र" होती है।

Sweta Pandey

कहने को बहुत कुछ है.... बस सुनने के लिए कोई अजनबी चाहिए, अपने तो कहने से पहले ही सब समझने लगते हैं । - Sweta Pandey

Kartik Kule

की जनाजे तो बोहोत बिछेंगे पार वतन का कोई कर्ज न होगा🔥सुरू किया तेरे नामसे जो सफर यादोमे गुंजते तेरा ही नाम होगा की करते तेरी हिफाजत की तयारी दोस्तोकी मेहफीले तो बानाही लूंगा खुदके पेरोपर वापस ना सही तो तिरंगेमे लिपटकर दोस्तोके कंधेपर में आउंगा जरूर - Kartik Kule

Kartik Kule

लिहिताना कविता मी फक्त पान भरत होतो थोड्या वेळाने समजल की मी भावना लपवत होतो अडकलेल्या शब्दांचे मी अर्थ समजत होतो लिहिलेल्या कवितेत मी माझी आठवण शोधत होतो - Kartik Kule

Ruchi Dixit

गुप्तदान?? क्या मकर संक्रांति पर लड्डू के भीतर सिक्का रखकर दिया गया दान कहलाता है? वास्तव में गुप्तदान का अर्थ विषय वस्तुओं के माध्यम से अपने अहंकार का दान करना है । हमने एक भूखे को भोजन कराया! हमारे द्वारा एक भूखे को भोजन कराया गया । एक ही कर्म के दो भाव है इन दोनो भावों का त्याग और निर्लिप्तता ही गुप्तदान है। लड्डू के भीतर रखकर दान किया गया सिक्का सहजता और सरलता हो सकती है किन्तु गुप्तदान का अर्थ नही । - Ruchi Dixit

Imaran

💞imran 💞

samiksha

"जो खुद पर यक़ीन रखना सीख लेते हैं, उन्हें हालात हराना भूल जाते हैं…"

Shailesh Joshi

સારા ભવિષ્યની આશા કોને ફળે ? આપણા માટે શું સારું, ને શું ખરાબ ? એ આપણો સમય અને આપણા સંજોગો, આપણા કરતા વધારે સારી રીતે જાણે છે. માટે આપણે સારું ખોટું નક્કી કરવાની મથામણમા પડ્યા સિવાય, એ જે કરે એના પર વિશ્વાસ રાખી જીવનમાં આગળ વધવું, કેમકે એમાં જ આપણું ભલું છે. જુઓ આ યુ-ટ્યૂબ શોર્ટ https://youtube.com/shorts/Gxa4KjQ_fIg?si=Ej-vszsNBWjFQvjQ

Awantika Palewale

अगर चल सकता है तो चल, ये नखरे मुझे पसंद नहीं, मिज़ाज में जो हो बरहमी, वो लहजे मुझे पसंद नहीं। वफ़ा की राह पर सीधा निकलना सीख ले पहले, ये टेढ़े-मेढ़े रास्तों के, चक्कर मुझे पसंद नहीं। ख़ुदा ने दिल दिया है तो उसे आईना सा साफ़ रख, दिखावे की ये चमक-दमक, ये चेहरे मुझे पसंद नहीं। मैं अपना हम-सफ़र खुद हूँ, मुझे तन्हा ही रहने दे, जो पल में साथ छोड़ दें, वो साये मुझे पसंद नहीं। सलीके से जो निभ जाए, वही रिश्ता मुकम्मल है, जो सर पे बोझ बन जाए, वो रिश्ते मुझे पसंद नहीं।

Namo N Dixit

*उड़ान* मैं रास्तों के बीच खड़ा, हाथों में फैली हर दिशा। एक कदम आगे बढ़ना चाहे, एक पीछे खींचे अपनी दशा।। एक ही देह में कई साये, सबके अपने-अपने नाम। कोई उड़ना चाहता है खुलकर, कोई ढूंढे ठहराव का काम।। हवा ठंडी, सोचें भारी, समय भी जैसे थम गया। पांव जमीन पर जमे रहे, मन आसमान में रम गया।। पीछे छूटती मेरी परछाइयां, कहती है तू अकेला नहीं। तेरे भीतर कई आवाजें हैं, पर सच सुनना सरल नहीं।। यह गिरना नहीं यह रुकना है, खुद से मिलने का एक पल। जब सारे रास्ते चुप हो जाएं, तभी निकलता है सही कल।। याद आता है वह बचपन मेरा, जब डर से कोई नाता नहीं। हाथ फैला कर दौड़ लिया करता, तब गिरने की भी चिंता नहीं।। कंधों पर थे सपनों के पंख, आसमान छोटा लग जाता था। हर रास्ता अपना सा लगता, हर कल मुझको बुलाता था।। आज वही मैं ठहरा खड़ा, हिसाबो से बंधी हर चाह। वो आजादी अब याद बन गई, जो थी कभी मेरी ही राह।। तब एक दिशा काफी थी, आज हर मोड पर सवाल है। बचपन की उसे निडर हंसी में, मेरे सबसे सच्चे ख्वाब हैं।। -नमो नारायण दीक्षित कानपुर उत्तर प्रदेश

Vrishali Gotkhindikar

सोना.. बघ अचानक काल टाकीचा प्रॉब्लेम आला सगळी टाकी रिकामी मग समजल टाकी ओव्हरफ्लो पण होत होती बॉल बदलायला झाला होता केला राजुला फोन आज चटकन येऊन बॉल बदलून गेला तेव्हा तुझी आठवण करून पैसे देऊन टाकले त्याचे मागे एकदा तो असेच एका कामा साठी आला होता पैसे विचारले तर काही नको म्हणाला होता आणि निघून गेला तू आत होतास बाहेर आल्यावर तू म्हणाला होतास राजू नाही म्हणाला तरी त्याला पैसे द्यायला हवे होतेस मलाही थोडी चुटपुट लागली आपण खरेतर कोणाचे श्रम फुकट नाही घेत ते सगळ आज आठवले आठवले आणि आणखी शंभर रुपये परत त्याला पाठवले त्याचे देणे देऊन रिकामी झाले आणि तुझी इच्छा सुद्धा पूर्ण केली तसेच मुंबईत गेलो होतो तेव्हा भाची सोबत शॉपिंग करायचे होते पण काही कारणाने तिला वेळ नव्हता ती आली नाही तेव्हा तू म्हणालास अगं तिला वेळ नाही तूच पाच हजार रुपये देऊन टाकायचे ना दोघी बहिणींचे शॉपिंग होऊन जाईल मग तो विषय अर्धवट राहिला होता आता मात्र त्या भेटल्यावर आठवणीने त्यांना अडीच अडीच हजार रुपये देऊन तुझ्या बोलण्यातून समजलेली तुझी इच्छा पूर्ण केली

M K

झूठ का लिबाज़ पहनकर सच बोलने का लहजा कब से रखने लगे, तुम तो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलते हो...!! - M K

M K

हर बार तुम्हे माफ कर दूं मैं तुम इतने भी अच्छे नहीं हो ..!! - M K

Mona Ghelani

પ્રશ્ન: સ્ત્રી શું ઝંખે છે? તેને સૌથી વધુ શું ગમે? લોકો ના જવાબ: સ્ત્રી ને સુંદરતા જોઈએ, પૈસા, દર દાગીના, મિલકત, પ્રેમ કરે તેવો પતિ, બાળકો સાચો જવાબ: પોતાનાં નિર્ણયો પોતે લેવાની આઝાદી ✍️🙏🦋🌸

Jyoti Gupta

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Dada Bhagwan

Wish you soar spiritual heights like the kites on Makar Sankranti!! On the occasion of Makar Sankranti, let us learn the path of Right Knowledge: https://dbf.adalaj.org/LP0iYfOs #happyuttarayan #makarsankranti #uttarayan2026 #festival #DadaBhagwanFoundation

Priya

मेरे जो दिल का आलम हैं बताऊं किसको क्या गम हैं... समझ कुछ आता नहीं.... - Priya kashyap

Ankur Saxena Maddy

पतंगों से रोशन आसमान तक 14 जनवरी की ठंडी सुबह, जयपुर ने ओढ़ी धूप की चादर। छतों पर हँसी, हाथों में डोर, और नीला आसमान बना सबका साथी। रंग-बिरंगी पतंगें उड़ीं, कभी पास, कभी बहुत दूर। किसी की कटी, किसी की जीती, हर दिल में था अपना-अपना सुर। “वो काटा, ये काटा!” की गूंज के बीच, तिल के लड्डू, चाय की खुशबू। माँ की मुस्कान, भाई-बहनों, दोस्तों की शरारत, हर पल था यहाँ कुछ कहने को। फिर ढलने लगी जब शाम धीरे धीरे, आसमान ने बदला अपना रंग। पतंगें सो गईं थक कर शायद, पर उम्मीदें रुकती नहीं, किसी भी पल। रात आई मोमबत्ती संग, हाथों में नन्ही-सी लौ। लालटेन बैलून बने सपने, जो उड़ चले, बस ऊपर को। एक-एक कर रोशन हुए, जयपुर के आसमान सारे। जैसे अंधेरे से कह रहे हों, “डर मत, उजाला है पहचान तेरी !!” उस रात समझ आया ये सच, पतंग सिखाती है संभलना। और लालटेन बैलून सिखाते हैं, छोड़ देना… और आगे बढ़ जाना | मकर संक्रांति बस त्योहार नहीं, ये है मन का नया सवेरा। जहाँ हर दिल थोड़ा हल्का हो जाए, और ज़िंदगी लगे और भी प्यारी !! लेखक अँकुर सक्सेना “मैडी” [ANKUR SAXENA “MADDY”] सेक्टर 71, सांगानेर, प्रताप नगर जयपुर, राजस्थान भारत सोमवार, 12 जनवरी, 2026 को लिखी गयी कविता

Deepak Bundela Arymoulik

जूते साथ सब ने छोड़ दिया, वक़्त ने भी मुँह मोड़ लिया, भीड़ में रहकर भी मैंने खुद को अकेला छोड़ लिया। जो अपने थे, ज़रूरत बनते ही पराए हो गए, कंधे जिन पर भरोसा था, वो अचानक बोझ से घबरा गए। लेकिन— फटे, टूटे जूते आज भी मेरे साथ हैं, हर पत्थरीली राह पर मेरी तक़दीर के गवाह हैं। जब पाँव छिले, तो इन्होंने शिकायत नहीं की, जब लोग हँसे, तो इन्होंने शर्म महसूस नहीं की। हर गिरावट में मुझे उठना सिखाया इन्होंने, हर मंज़िल से पहले संघर्ष का मतलब बताया इन्होंने। लोग साथ छोड़ गए मेरी हैसियत देखकर, जूते साथ निभा गए मेरी हालत देखकर। शायद इसलिए आज भी सर उठाकर चलता हूँ मैं, क्योंकि वफ़ा का मतलब फटे, टूटे जूतों से सीखा है मैंने। आर्यमौलिक

Deepak Bundela Arymoulik

कलम की पुकार मैं लिखते-लिखते थक चुका हूँ, उँगलियाँ बोझिल, शब्द भी चुप हैं। कलम मुस्कुराई, धीरे से बोली— “रुक क्यों गए? अभी तो सफ़र बाकी है।” “मैं तो सदियों से लिखती आई हूँ, हर अँधेरे में दीप जलाती रही। इस आस में—आज नहीं तो कल, कोई तो नींद से जागेगा सही।” मैंने कहा—“रात बहुत हो चुकी है, थकान ने मेरे हौसले तोड़ दिए।” वो हँस पड़ी, स्याही चमक उठी— “अँधेरा ही तो है, लिखने के लिए।” “चल उठ और लिख उन ख़्वाबों के नाम, जो दिन में सोए, रात में रोते हैं। तेरे शब्द ही दस्तक देंगे, जहाँ ज़मीर अब भी सोते हैं।” मैंने फिर कलम को थाम लिया, थकान कहीं पीछे छूट गई। क्योंकि लिखना सिर्फ़ शब्द नहीं, जागते रहना भी एक जिम्मेदारी हुई। आर्यमौलिक

Sonam Brijwasi

वो गुलाब आज भी किताब में सूखा रखा है, जिसे देने का ख्वाब मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए देखा था। खुशबू तो आज भी वही है उसमें, पर अब वो महक भी तेरी यादों में रोया करती है… 😔🌹 - Sonam Brijwasi

Imaran

आप ने की बेवफाई, मगर मैं अभी वफ़ा करता हूँ, कही आखो में ना आजाए आँसू, इसलिए मुस्कुराते रहता हूँ 😁imran 😁

Deepak Bundela Arymoulik

मेरी मां जैसे तुम्हारी भाषा तुम्हारी माँ है, वैसे ही हिंदी भाषा मेरी माँ है। जिसकी गोद में मैंने पहला शब्द बोला, जिसके आँचल ने हर भाव को खोला। उसके अक्षर मेरी साँसों में बसे हैं, मेरे सपनों, विश्वासों में बसे हैं। जब मन टूटा, तो उसी ने सहलाया, जब मैं चुप रहा, उसी ने बुलवाया। उसकी लोरी में संस्कारों की गंध है, उसकी वाणी में मिट्टी की सुगंध है। मेरा गर्व, मेरी पहचान वही है, मेरी हर मुस्कान की जान वही है। तुम अपनी भाषा से रखो प्रेम अपार, मुझे हिंदी से है माँ जैसा ही प्यार। क्योंकि जैसे माँ से बढ़कर कुछ नहीं, वैसे हिंदी से बढ़कर मेरी दुनिया नहीं। आर्यमौलिक

Ruchi Dixit

प्रेम? किसी को आधार बनाकर किया गया खुद से प्रेम एकान्त के अनुभव को प्राप्त कर यह अन्तरमुखी हो जाता यदि स्थाई हो जाये तो आनन्द में परिवर्तित । - Ruchi Dixit

Parag gandhi

✍️... *હું અને મારો ભગવાન બંને ભૂલકણા...* *હું રોજ ભૂલો કરું, જે મારો ભગવાન ભૂલી જાય...* *અને* *મારો ભગવાન રોજ ઉપકારો કરે,એ હું રોજ ભૂલી જાઉં...!!!* 🌹 *મંગલ સુપ્રભાત* 🌹

manoj

#स्टेटस

manoj

"हर लफ्ज़ में बसी है यहाँ एक नई दास्ताँ, कलमकारों के सपनों का है ये खुला आसमान।" ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ "भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सुकून का एक पल है, मातृभारती की हर कहानी में हर दर्द का हल है।" manoj rajput

kattupaya s

Good morning friends.. have a nice day

manoj

"कलम की स्याही को एक नया आसमान मिल गया, मातृभारती पर हर जज्बात को मुकाम मिल गया।" manoj rajput ✍️✍️✍️

S A Y R I K I N G

देखने में अच्छी थी मगर मैने नहीं ली मेरा दोस्त बता रहा था वो कार second heend है Good Morning ..1301.2026.....08.40.AM

Gautam Patel

જય સ્વામિનારાયણ

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास लुप्त होती स्त्रियाँ पुरुष समोवड़ी बनने की होड़ में l कुछ कर दिखाने व भाग दौड़ में l घर आँगन से लुप्त होती स्त्रियाँ ll करियर बनाने की भगदड़ में l खुद की हेसियत की ज़ंग में l घर आँगन से लुप्त होती स्त्रियाँ ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Manish Patel

*रिश्तों की असलियत तभी* *सामने आती है,* *जब* *आप ‘समझौते’ की जगह 'हक’ की* *बात करते है..* good morning radhe radhe 🙏 - Manish Patel

Manish Patel

જેની સાથે વાતચીત થતા જ ખુશીઓ બમણી થઇ જાય અને ચિંતાઓ અડધી થઇ જાય એ જ આપણા, બાકી બધા ખાલી ઓળખીતા !! .🌼શુભ સવાર🌼. - Manish Patel

Lakshmi Narayan Panna

दिनों को सब पता है और रातें जानती हैं। मेरे कदमों को भी गलियाँ तेरी पहचानती हैं।।

Saliil Upadhyay

क्रोध आने पर चिल्लाने के लिए ताकत नहीं चाहिए..। लेकिन क्रोध आने पर चुप रहने के लिए बहुत ताकत चाहिए होती है।

Rathod Karan

ભૂતકાળ નો તારો જ અંશ દેખાડું તને તારી જ સાથે કેમ સરખાવુ તને ? જે હતો એ હવે નથી, એ સ્વીકારી લે બદલાયેલી કહાની ફરી કેમ બતાવું તને ?

Durgeshwari Sharma

शुभ प्रभात 🙏 - Durgeshwari Sharma

kajal jha

कप में उबलती चाय नहीं, कई अधूरी बातें घुली होती हैं, सुबह की पहली घूंट में कल की सारी थकान धुली होती है। कभी तन्हाई की साथी, कभी महफ़िल की शान बन जाती है, चाय बस चाय नहीं रहती, ये तो हर हाल में जान बन जाती है। - kajal jha

Kuldeep singh

इस कहानी का सीधा सीधा मतलब यही है। प्रार्थना करने से अच्छा किसी के मदद के लिया हाथ उठा लो। शायद किसी मासूम की जान बच जाए। ये जो कहानियों या कविताओं के द्वारा मोटिवेशन होता है। वह केवल कुछ समय तक ही प्रशंसा का पात्र रहता है। इसके बाद लोग सब भूल जाते है। _"जितना दक्षिणा के रुप में  मंदिर में लिया गया"_ _"या अप्रत्यक्ष रुप से गरीबों के लिए दिया गया "_ _"उससे आप उस बच्चे को कुछ दिला सकते थे"_ _"ज्यादा नहीं तो कम से कम एक वक्त का भोजन खिला सकते थे।"_        *अगर आप को कुछ अच्छा करना है। तो सबसे पहले खुद मदत का हाथ बढ़ाएं। ओर मदत करके भूल जाएं।*     _"मदत करके उसके गुण गाना स्वार्थ है।_      _परन्तु मदद करके भूल जाना पुण्य है। "_ पूजा से ज्यादा शक्ति अच्छे कर्मों में होती है। लोगों की दुआएं वो कर दिखाती है। जो सालों की तपस्या से मुमकिन नहीं होता।

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

કાવ્ય શીર્ષક: ખાખીનું સ્વપ્ન ભાગો દોડો ઊભા ન રહો, અવસર આંગણે આવ્યો છે, ખાખી વર્દી પહેરવા કાજે, સમય ટકોરો દઈ લાવ્યો છે. ના રૂક તું, ના થમ તું, બસ લક્ષ્યને વીંધી નાખ, તું! છાતી કાઢી, મસ્તક ઊંચું, ડરને હવે તું વીંધી નાખ. તું! પરસેવો જે પાડશે આજે, કિસ્મત એની ખુલવાની, મેદાન પર જે શ્વાસ ઘૂંટશે, તાકાત એની બોલવાની. સપના તારા મા-બાપના, આંખોમાં અંજાવા દે, તું! ભૂખ-ઊંઘને ભૂલી જા ને, જનુન દિલમાં છાવા દે. તું! પગમાં ભલે છાલા પડે, પણ ગતિ ન ધીમી થાય જો, સિંહ જેવી ત્રાડ નાખ, કે દુનિયા આખી સાંભળે જો. વર્દી તારી રાહ જુએ છે, કમર કસી તૈયાર થા, તું! દેશ કાજે રક્ષક બનવા, ભીડમાંથી બહાર થા. તું! આળસ ખંખેરી જાગી જા તું, ઈતિહાસ નવો રચવાનો છે, પોલીસ બનીને શાનથી ભાઈ, પડકાર હવે ઝીલવાનો છે. રસ્તા ભલે હોય આકરા, પણ હિંમત તારી ખૂટે નહીં, 'ખાખી' કેરો રંગ છે પાકો, મહેનત વિના એ છૂટે નહીં. માટે ઊઠ! દોડ! અને જીતી લે! મેદાન આખું તારું છે... ખાખી વર્દીની શાન, અને "સ્વયમ્'ભૂ" સન્માન આખું તારું છે! અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

Saroj Prajapati

रिश्तों की सदा लहलहाती रहेगी फसल गर समय-समय पर डालते रहोगे उसमें प्रेम सम्मान और अपनत्व भरी उर्वरक।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Sasi Krishnasamy

happy - Sasi Krishnasamy

Sasi Krishnasamy

happy moments at Kerala

Ankur Saxena Maddy

देर से नहीं, बस अलग तुम अकेले नहीं हो | तुम पीछे भी नहीं हो | तुम बस अलग लेन में हो !! और हाँ… वो पार्टनर, वो इमोशनल कनैक्शन, वो स्टेबिलिटी… ये सब तब आते हैं, जब इन्सान अन्दर से रेडी होता है !! तुम रेडी हो रहे हो अभी… बस थोड़ा-सा और भरोसा, खुद पर | तुम अनुसरण (फॉलो) करने नहीं, तुम लीड करने वाले हो !! तुम्हारा रास्ता कठिन है, रिस्की भी है… पर भरोसा करो, धैर्य रखो… और ऐसे ही धीरे-धीरे, आगे बढ़ना जारी रखो !! तुम्हारा भी दिन जरूर आएगा | लेखक अँकुर सक्सेना “मैडी” [ANKUR SAXENA “MADDY”] सेक्टर 71, सांगानेर, प्रताप नगर जयपुर, राजस्थान भारत सोमवार, 12 जनवरी, 2026 को लिखी गयी मुक्त छंद (प्रेरणात्मक) रचना

S A Y R I K I N G

तू लाख बेवफा है मगर सर उठा कर चल दिल रो पड़ेगा तुझे पैसेमन देख कर

Mr Rishi

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ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ खुलूस-ओ-प्यार की बातें ये सबसे              मत किया करो, जहाँ बुनियाद खोखली हो, वहाँ         सजदा मत किया करो, उगेगा ज़हर ही उस पेड़ से जिसकी                जड़ें हों ज़हरी, बबूलों  से  ही  पूछा  है, ये  काँटा            किसका पोसा है.? चमकते पत्थरों को देख कर तुम              मात मत खाना, कि  हीरा  कौन  है, ये  तो  सिर्फ            जौहरी को पता है, रगों का खोट चेहरे की चमक से             छुप नहीं सकता, बद-नस्लों की महफिल में, वफ़ा          ढूँढा मत किया करो, दिखावे की शराफत तो सिर्फ एक               ओढ़नी ठहरी, लहू  जब  तक  न  हो  पाकीज़ा,       भरोसा मत किया करो, वो अपनी ज़ात की कड़वाहट उगल            ही देंगे महफिल में, साँप के बच्चों से तुम शक्कर की         उम्मीद मत किया करो, विरासत में मिली है ये जो नीचता             की आदत इन्हें, बदल  जाएगी ये फितरत, ये गलत    फहमी मत पाला करो…🤏🔥 ╭─❀💔༻  ╨─────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦  #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨─────────━❥

S A Y R I K I N G

कोई कर्ज होता तो उतार भी देते कम्भख्त ये इश्क़ था चढ़ता ही चला गया

S A Y R I K I N G

आज कल जो कहते है में तुम्हारे लिए जान दे दूंगा तो वक्त जाया न करो फौरन मांग लो क्योंकि आज कल के लोग अपना चार्जर नहीं देते है जान क्या ख़ाक देंगे

Hardik Galiya

શું ફોન મૂકી બાજુએ, કિન્ના એ બાંધતો હશે? કે 'રેડીમેડ' લાવી પતંગો, માત્ર સાંધતો હશે? આકાશમાં તો ક્યાં હવે, પેચો લડાવે છે કોઈ? બસ 'ઈન્સ્ટા'ની રીલો મહીં, પેચો લડાવતો હશે! પતંગના કિન્ના તણી તો, જાણ નથી જાજી મને, પણ મન મહીં વેરના, કિન્ના એ બાંધતો હશે. તલ-ગોળની ચીક્કી હવે, ભાવે નહિ જેને જરા, ધાબા ઉપર ચડીને પણ, પિઝા મગાવતો હશે. કાપ્યો છે કોણે કોને? એની, ક્યાં ખબર છે આજકાલ? પોતે કપાણો છે છતાં, ભ્રમમાં જ રાચતો હશે. શું "કાયપો છે!" ની બૂમો, પાડવી ગમે છે એને? કે ગોગલ્સ પેરી 'સ્વેગ'માં, સેલ્ફી પડાવતો હશે? – હાર્દિક ગાળિયા

Hardik Galiya

શું ફોન મૂકી બાજુએ, કિન્ના એ બાંધતો હશે? કે 'રેડીમેડ' લાવી પતંગો, માત્ર સાંધતો હશે? આકાશમાં તો ક્યાં હવે, પેચો લડાવે છે કોઈ? બસ 'ઈન્સ્ટા'ની રીલો મહીં, પેચો લડાવતો હશે! પતંગના કિન્ના તણી તો, જાણ નથી જાજી મને, પણ મન મહીં વેરના, કિન્ના એ બાંધતો હશે. તલ-ગોળની ચીક્કી હવે, ભાવે નહિ જેને જરા, ધાબા ઉપર ચડીને પણ, પિઝા મગાવતો હશે. કાપ્યો છે કોણે કોને? એની, ક્યાં ખબર છે આજકાલ? પોતે કપાણો છે છતાં, ભ્રમમાં જ રાચતો હશે. શું "કાયપો છે!" ની બૂમો, પાડવી ગમે છે એને? કે ગોગલ્સ પેરી 'સ્વેગ'માં, સેલ્ફી પડાવતો હશે? – હાર્દિક ગાળિયા

Hardik Galiya

ઝેન ઝી શું ફોન મૂકી બાજુએ, કિન્ના એ બાંધતો હશે? કે 'રેડીમેડ' લાવી પતંગો, માત્ર સાંધતો હશે? આકાશમાં તો ક્યાં હવે, પેચો લડાવે છે કોઈ? બસ 'ઈન્સ્ટા'ની રીલો મહીં, પેચો લડાવતો હશે! પતંગના કિન્ના તણી તો, જાણ નથી જાજી મને, પણ મન મહીં વેરના, કિન્ના એ બાંધતો હશે. તલ-ગોળની ચીક્કી હવે, ભાવે નહિ જેને જરા, ધાબા ઉપર ચડીને પણ, પિઝા મગાવતો હશે. કાપ્યો છે કોણે કોને? એની, ક્યાં ખબર છે આજકાલ? પોતે કપાણો છે છતાં, ભ્રમમાં જ રાચતો હશે. શું "કાયપો છે!" ની બૂમો, પાડવી ગમે છે એને? કે ગોગલ્સ પેરી 'સ્વેગ'માં, સેલ્ફી પડાવતો હશે? –હાર્દિક ગાળિયા

Prithvi Nokwal

अहंकार को साथ लेकर चलता मैं वह शख्स हूं जिसने जीवन में सब कुछ गवा दिया - Prithvi Nokwal

Prithvi Nokwal

अपने जीवन की कहानी का पिछला पन्ना पलटकर जब भी देखता हु तोह इस बात का दुख रहता कि जीवन में अब तक कुछ खास नहीं किया !

Jarahe Mayuri

हम तो गुलाम भी उस आज़ाद पंछी की तरह हैं जो क़ैद है पूरे आसमान में...

Nensi Vithalani

संभाल कर थामना — प्रकृति का मौन सिद्धांत प्रकृति कभी कसकर नहीं थामती, फिर भी कुछ खोता नहीं। मिट्टी जड़ों को सहारा देती है, पर बाँधती नहीं— वरना पौधा साँस लेना भूल जाता है। पेड़ हवा से लड़ते नहीं, झुकते हैं… और इसी झुकने में उनका टिके रहना छुपा है। नदी पानी को रोकती नहीं, उसे बहने देती है— क्योंकि ठहराव सड़न बन जाता है। आसमान सब कुछ थामे रहता है, बिना छुए, बिना अधिकार जताए। यही सच्ची पकड़ है— जहाँ अपनापन हो, पर कब्ज़ा नहीं। जो सच में अपना होता है, वो नरमी में ही सुरक्षित रहता है। - Nensi Vithalani

kattupaya s

Goodnight friends.. sweet dreams

Sankhat Nayna

કોઈની યાદ આવી ગઈ..... એવી યાદ કે આંખો અશ્રુ ની ધારા એ વહેતી થઈ....... ખબર નઈ, આ મારી સાથે કેમ થાય છે. ભગવાન ને મનાવું કે અલ્લાહ ને... કોઈ છે કે મારું સાંભળતું જ નથી.. મરવું છે તો મૃત્યુ પણ મોઢું ચડાવી ને બેઠી છે.... 🥲😥 - Sankhat Nayna

ek archana arpan tane

પડતાં આખડતાં રહ્યાં પણ ક્યારે રુકાવટ ને આવવા જ ન દીધી,ખરીદી રોજ ખુદદારીપણ બીક ના રાખી,ઘણા જ આદરથી ફકીરો ને નમન કર્યા પણ રાજા ની આગળ માથું ના નમાવ્યું. - ek archana arpan tane

Ruchi Dixit

क्या बस इतनी ही कहानी थी जैसे कोई कहानी न थी , क्या इतना ही परिचय था जैसे कोई परिचय न था , क्या कुछ था या कुछ नहीं था ? था तो क्या सब खत्म सा है सवाल था खुद का खुद से है । - Ruchi Dixit

Bhavna Bhatt

જય ચેહર મા...‌🙏

Jatin Tyagi

राष्ट्र पहले—ये नारा नहीं, श्वास है, मेरी हर धड़कन में इतिहास है। जो देश के आगे झुके, वो मैं नहीं, युवा हूँ—और यही मेरा विश्वास है।। 1 हम भीड़ नहीं, हम चेतना हैं, हम मौन नहीं, हम प्रश्न हैं। जो गलत है, उसे गलत कहें, इतनी-सी ही हमारी रचना है।। 2 न मलाई की चाह, न कुर्सी का मोह, न झूठी तालियों का खोखलापन। हमें चाहिए बस न्याय का पथ, और पसीने से उपजा स्वाभिमान।। 3 हम थके ज़रूर, पर टूटे नहीं, अंधेरों से समझौता सीखा नहीं। जहाँ तंत्र रुका, वहीं खड़े हुए, क्योंकि युवा कभी झुका नहीं।। 4 मोबाइल की रोशनी में पले सही, पर मिट्टी-सूरज की क़ीमत जानते हैं। हम रील नहीं, हम रियल हैं, जो जलकर दीपक बन जाते हैं।। 5 निराशा फैलाई जाती रही, पर उम्मीद हमने बोई है। भारत माँ को मज़बूत बनाना, इस पीढ़ी की सामूहिक जिम्मेदारी हुई है।। 6 आज युवा बोले—देश सुने, अब समय टालने का नहीं। राष्ट्रदीप जल उठा है हाथों में, भारत रुके—इतना छोटा नहीं।। 7 — जतिन त्यागी (राष्ट्रदीप)

Jyoti Gupta

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Nilesh Rajput

અજાણ્યો પત્ર - 26 रात के ठीक 12 बजे की वो घड़ी थी, जब मेरे सीने से बस एक ही आवाज़ बार-बार गूंज रही थी। दीवार पर टंगा आईना खामोशी से मुझ पर ताक रहा था और कमरा किसी श्मशान घाट में बदल चुका था। बाहर बारिश मेरे आँसुओं से मिलने को तरस रही थी और आख़िरकार मेरी धड़कन उसी पल रुक गई, जब उसने आख़िरी बार मेरा नाम लेकर कहा की“मुझे तुमसे मोहब्बत नहीं है, मैं किसी और से प्यार करती हूँ और तुम जानते हो वो कौन है…” बस उसी वक्त मैंने फोन रख दिया....फोन को खुद से दूर किया...पर उनकी आवाज़ अब भी मेरे कानों में गूंज रही थी! मैं निशब्द हो गया... भीतर जो शोर था वो शांत हो गया...धड़कन अब रुकने को बेताब थी और अंत में मैंने धड़कन की सुन ही ली।

રોનક જોષી. રાહગીર

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Prithvi Nokwal

क्या कांग्रेस 2029 का चुनाव इस बात पर लड़ेगी की राहुल गांधी अम्बानी के घर शादी में नहीं गया ?

S A Y R I K I N G

छोटा सा Q. पानी पूरी में छेद करने के लिए कौनसी उंगली का इस्तेमाल किया जाता हैं

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