Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Niya
હવે મેસેજ કરવો પણ અઘરો લાગે છે,
કારણ કે તું ‘મારો’ નથી…
પણ મન તો આજે પણ તને જ શોધે છે…
M K
बड़े प्यार से संभाल कर रखी थी मैं
उस रिश्ते को,
आज उसी के वजह से आंखों में कहानी है..।।😢
- M K
Shraddha Panchal
जब आप किसी की फितरत
नहीं बदल सकते तो ,
बेहतर है की आप ,
अपना रास्ता बदल ले 🙏🧡🩶
Apurv Adarsh
डूबते देश की कहानी
राजा गंवार, मंत्री लुटेरे , प्रजा नपुंसक ।
Shivam Kumar Pandey
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं
क्लेशहारिणीम् ।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां
नतोऽहं रामवल्लभाम् ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
उद्भव – सृष्टि / उत्पत्ति
स्थिति – पालन / स्थिति बनाए रखना
संहार – संहार / विनाश
कारिणीं – करने वाली / क्रियान्वित करने वाली
क्लेश – दुःख / पीड़ा
हारिणीम् – हरने वाली / समाप्त करने वाली
सर्व – सभी / सम्पूर्ण
श्रेयः – कल्याण / श्रेष्ठ फल
करीं – करने वाली / प्रदान करने वाली
सीतां – सीता को / माता सीता
नतः – नतमस्तक / झुका हुआ
अहम् – मैं
रामवल्लभाम् – श्रीराम की प्रिय / श्रीराम की पत्नी
---
सरल हिंदी अनुवाद:
मैं श्रीराम की प्रिय पत्नी, माता सीता को नमन करता हूँ,
जो सृष्टि, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं,
जो समस्त क्लेशों को हरने वाली हैं,
और जो सभी प्रकार के कल्याण को प्रदान करने वाली हैं।
M K
लोगों को दर्द देने में मजा आता है...
और हमें उस दर्द को जीने में,,,,
मुस्कुराहट मेरी छिन कर तुम कब तक खुश रहोगे
एक दिन... बेतहाशा आंसू तुम्हारे आंखों से भी गिरेंगे,,,
- M K
Bhavna Bhatt
કોઈને ડફોળ નાં સમજવા
InkImagination
good night
bhavesh
પૈસા તો કમાઈ લેવાય, પણ સાચા માણસો મેળવવા અઘરા છે. જેણે તમને શૂન્યમાંથી બેઠા કર્યા હોય એને ક્યારેય ભૂલતા નહીં. ❤️
તે વ્યક્તિને ટેગ કરો અથવા આ રીલ તેમને મોકલો! 📩
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
जहां आग लगी हो...
Mohit Nath
!बहुज खुश नसीब है हम
जो तुम्हारा साथ मिला है !!
- Mohit Nath
રોનક જોષી. રાહગીર
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Akanksha srivastava
फूटपाथ पर बिकती जिदंगी
--------------------------
फूटपाथ में ना सिर्फ सामानें बिकती है,
बल्कि यहाँ पर बिकती है, किसी की उम्मीदें,
किसी के सपनें, किसी बेबस, लाचार पिता के अधूरे ख्वाइशें को पूरा कर पाने की चाहतें।
ये उन चेहरे पर खुशियाँ सजाते है, जिनके कदम शायद उन महंगे शोरूमों को कभी पार कर पाते।
यहाँ ना सिर्फ हर रोज दुकानें सजती है,
हर एक दुकान के साथ सजते हैं कितने सारे ख्वाब
वो ख्वाब जिन्हें हकीकत की जमीन मिलना शायद मुकद्दर में ही नहीं।
वो जो कांच के ऊँचे ऊँचे दीवारों के पीछे जो ब्रांडेड कपड़ों के पीछे जो मुस्कुराते हुए टैग है,
उन्हें निहारती वो बेबस, पथरायी आँखों में चमक दे जाती है वो फूटपाथ पर करीने से सजी दुकानें।
जेब में खनकते सिक्के और वो चंद नोटें से भी पूरी हो जाती है वो सारी हसरतें, वो सारे अधूरे ख़्वाब।
सड़क पर बिकती वो सारी चीजें ना सिर्फ सामानें है,
बल्कि इनसे जुड़ी है किसी का सकून किसी का सम्मान।
ये सिर्फ बाजार की रौनक नहीं, उम्मीदों के चमकते सितारे है।
ये दुकानें ही तो उन लाचारों के फरिश्तें प्यारे है।
Shivam Kumar Pandey
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ
कवीश्वरकपीश्वरौ ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
सीताराम – सीता और राम (भगवान राम और माता सीता)
गुणग्राम – गुणों का समूह / सद्गुणों की भीड़
पुण्यारण्य – पुण्य से पवित्र हुआ वन / पावन वन
विहारिणौ – विचरण करने वाले (द्विवचन – दो व्यक्तियों के लिए)
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
विशुद्ध – पूर्णतः शुद्ध / निर्मल
विज्ञानौ – ज्ञानस्वरूप दोनों / दिव्य ज्ञान से युक्त (द्विवचन)
कवीश्वर – श्रेष्ठ कवियों के ईश्वर / वाणी के अधिपति
कपीश्वरौ – वानरों के स्वामी (श्रीराम और हनुमान के रूप में) / वानरराज
---
सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उन सीता और राम की वंदना करता हूँ, जो गुणों के समूह से युक्त हैं, पुण्य से पवित्र वनों में विचरण करते हैं,
जो पूर्णतः शुद्ध ज्ञानस्वरूप हैं, श्रेष्ठ कवियों के अधिपति और वानरों के स्वामी हैं।
Saroj Prajapati
जब तक चुपचाप सब सहते रहे
दुनिया वाले हमें अच्छा इंसान कहते रहे
जब उठाई हमने अपने हक में आवाज़
तबसे दुनिया कहने लगी हमें बुरा इंसान ।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/KidfuDKctw4?si=5-aM-KbVTylB17Qp
"गरीब लड़के ने जादुई कुएं से माँगी एक इच्छा, आखिर में जो हुआ... 😱🔥 | Heart Touching Story"
Suraj Prakash
https://youtu.be/v6KSp6cwZ0w?si=BDQTIM12ufnxwQjF
ek archana arpan tane
હું શું કહું કે તારો સાથ કેવો છે આ એક માણસ મારી પુરી કાયનાત જવો છે.
- ek archana arpan tane
Imaran
Ek tu teri aawaz yaad aayegi,
Teri kahi huwi har baat yaad aayegi,
Din dhal jayega raat yaad aayegi,
Har lamha pahli mulakat yaad aayegi.
🫶imran 🫶
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
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Shivam Kumar Pandey
वन्दे बोधमयं नित्यं
गुरुं शङ्कररूपिणम् ।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि
चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
बोधमयं – ज्ञानस्वरूप / पूर्णतः चेतना से युक्त
नित्यं – सदा / हमेशा
गुरुं – गुरु को / आध्यात्मिक शिक्षक को
शङ्कररूपिणम् – शंकर (भगवान शिव) के स्वरूप वाले
यम् – जिसको / जिसे
आश्रितः – आश्रय लिया / शरण लिया
हि – निश्चय ही / वास्तव में
वक्रः – टेढ़ा / टेढ़े स्वभाव वाला
अपि – भी
चन्द्रः – चंद्रमा
सर्वत्र – हर जगह / सर्वत्र
वन्द्यते – पूजित होता है / सम्मानित होता है
---
सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उस गुरु की वंदना करता हूँ, जो ज्ञानस्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं, और शंकर (भगवान शिव) के समान हैं।
जिनका आश्रय लेकर टेढ़ा (दाग वाला) चंद्रमा भी सर्वत्र पूजनीय बन गया।
Dhamak
मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास)
मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास
ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास
मैं और मेरा मोबाइल
जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए
रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए
घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है
सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है
कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ
हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ
मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया
मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया
ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
Shivam Kumar Pandey
भवानिशङ्करौ वन्दे
श्रद्धाविश्वासरूपिणौ ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति
सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम् ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
भवानि – पार्वती देवी का नाम
शङ्करौ – शिव और पार्वती (द्विवचन में)
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
श्रद्धा – आस्था, समर्पण
विश्वास – भरोसा, निष्ठा
रूपिणौ – जिनका स्वरूप है / जो रूपधारी हैं (द्विवचन)
याभ्यां – जिन दोनों के द्वारा
विना – बिना
न – नहीं
पश्यन्ति – देखते / अनुभव करते
सिद्धाः – सिद्ध पुरुष / आत्मसाक्षात्कार प्राप्त योगी
स्वान्तःस्थम् – अपने अंतःकरण में स्थित
ईश्वरम् – परमात्मा / भगवान
---
सरल हिंदी अनुवाद:
मैं शिव और पार्वती की वंदना करता हूँ, जो श्रद्धा और विश्वास के रूप में प्रकट होते हैं।
जिनके बिना सिद्ध पुरुष भी अपने हृदय में स्थित ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकते।
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1CZU5weJzZ/
Shivam Kumar Pandey
संपूर्ण श्रीरामचरितमानस,भाग 1
वर्णानामर्थसंघानां
रसानां छन्दसामपि ।
मङ्गलानां च कर्त्तारौ
वन्दे वाणीविनायकौ ॥
---
एक-एक शब्द का अर्थ (सरल भाषा में)
वर्णानाम — वर्णों का, अर्थात् अक्षरों का।
अर्थसंघानाम — अर्थों के समूहों का, या अर्थ की रचना का।
रसानाम — रसों का, जैसे काव्य के भाव: श्रृंगार, वीर, करुण आदि।
छन्दसामपि — छंदों का भी; 'अपि' का अर्थ है 'भी'।
मङ्गलानां — शुभ कार्यों का, मंगलमय बातों का।
च — और।
कर्त्तारौ — कर्ता (रचयिता), यहाँ द्विवचन है — दो रचयिता।
वन्दे — मैं वंदना करता हूँ, नमन करता हूँ।
वाणीविनायकौ — वाणी अर्थात् देवी सरस्वती, और विनायक अर्थात् भगवान गणेश।
---
सरल हिंदी अनुवाद
जो अक्षरों, अर्थों, रसों, छंदों और शुभ कार्यों के रचयिता हैं — ऐसे वाणी (सरस्वती) और विनायक (गणेश) को मैं नमस्कार करता हूँ।
Paagla
https://youtube.com/shorts/HjUYNAvPjZQ?si=mlpuv3e8fhj5D7kq
Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 4]
भूमिका
श्रीरामचरितमानस केवल काव्य रचना नहीं,
अपितु मानव जीवन को मर्यादा, भक्ति और धर्म के पथ पर
आगे बढ़ाने वाला एक जीवन-दर्शन है।
इस महान ग्रंथ में वर्णित आदर्श —
मर्यादा, करुणा, संयम, भक्ति और धर्म —
मानव के आचरण, विचार और दृष्टि को
संतुलित और पवित्र बनाते हैं।
इस हिन्दी प्रस्तुति में मूल अवधी पाठ के
भाव, आशय और अंतर्निहित संदेश को
सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण हिन्दी भाषा में
यथासंभव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है,
ताकि पाठक ग्रंथ के भाव से
आंतरिक रूप से जुड़ सके।
यह प्रयास विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है
जो अवधी भाषा से पूर्णतः परिचित नहीं हैं,
परंतु श्रीरामचरितमानस के
आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेश को
समझना और आत्मसात करना चाहते हैं।
--------------------------------------------------
Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 3]
समर्पण
यह ग्रंथ
श्रीराम के चरणों में
तथा
सभी रामभक्तों को
सादर समर्पित है।
--------------------------------------------------
Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 2]
॥ श्रीरामचरितमानस ॥
मूल पाठ : गोस्वामी तुलसीदास जी
सरल हिन्दी अनुवाद : शिवम कुमार पाण्डेय
--------------------------------------------------
यह ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के मूल अवधी पाठ के साथ
सरल, स्पष्ट एवं भावानुकूल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है।
इस अनुवाद का उद्देश्य —
• मूल भाव को अक्षुण्ण रखना
• आधुनिक पाठक के लिए सरल भाषा देना
• अध्यात्म को जनसुलभ बनाना
--------------------------------------------------
Sudhir Srivastava
शिक्षा - जीवन का आधार
***********
जीवन का मूल आधार है शिक्षा,
बेवकूफ हैं वे लोग, जो माने इसे भिक्षा।
बुद्धि विवेक भी तभी गतिशील रहेगा,
जब शिक्षा का निज आधार भी मजबूत रहेगा।
जिसने नहीं दी शिक्षा को अहमियत
बेकार होती है उसके जीवन की नियामत।
शिक्षा का जिसके मजबूत है आधार
सदा दूर रहता है उसके मन का विकार।
शिक्षा के प्रचार प्रसार का है मूल सार,
जीवन को यही देता है मजबूत आधार।
ज़माने से सीखो शिक्षा का है क्या मोल?
गाँठ बाँधकर रखिए, यह शिक्षा है अनमोल।
जिसे नहीं जाना क्या है इसकी अहमियत,
सच मानिए खोखला है उसके जीवन का आधार।
सुधीर श्रीवास्तव
Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 1]
इस पुस्तक में
मूल पाठ को छोड़कर सभी कुछ,
Ai जेनरेटेड है ।
पुस्तक के अंतमें,
लेखक की फोटो, original रहेगी
पर Ai की सहायता से, जनरेट की हुई रहेगी ।
--------------------------------------------------
Sudhir Srivastava
जीवन के आइने में
********
मृत्यु जीवन की
एक प्रक्रिया, एक अनुभूति है,
जिसका आनंद हम लेना ही नहीं चाहते
बस! केवल डरते रहते हैं।
जीवन की सबसे बड़ी ग़लती
और जानबूझकर अपराध करते हैं।
आखिर हम ऐसा क्यों करते हैं?
मृत्यु को अपना क्यों नहीं मानते हैं?
क्या बिगाड़ा है उसने आपका
जो उसे दुश्मन समझते हैं।
सच मानिए! बड़ी भूल कर रहे हैं,
नाहक ही उससे दो-दो हाथ कर रहे हैं,
आखिरकार हार भी हम जा रहे हैं।
अपनी उम्र हम सब जीते हैं
फिर भी मृत्यु से बचने की लगातार राह खोजते हैं
पर सफल भी भला कहाँ होते हैं?
जिससे बचने के लिए ताउम्र
तमाम इंतजाम और जुगाड़ करते हैं,
अंततः थक-हार कर
मजबूरी में सही उसके शरणागत ही होते हैं,
बड़ा सवाल है कि हम ऐसा क्यों करते हैं?
या खुद को मृत्यु से बड़ा मानने की जिद में ही
हम यह अपराध कर रहे हैं,
मृत्यु के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं
इसलिए नकारने का नाहक श्रम कर रहे हैं,
और मृत्यु से दूर भागने की जिद में
उसके और करीब होते जा रहे हैं,
मृत्यु हर पल हमारा उपहास कर रही है
जिसे हम वास्तव में देख ही नहीं पा रहे हैं,
जीती मछली निगलकर खुश हो रहे हैं।
अब सोचना हमें है कि बड़ा तीसमार खाँ बनकर
हम कौन सा झँडे गाड़ रहे हैं,
जीवन के आइने में मृत्यु को देखकर भी
अनदेखा करते जा रहे हैं
शायद खुद को खुद का खुदा समझ रहे हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Raju kumar Chaudhary
Smart School Nepal मा स्वागत छ 🙏
यो च्यानल विद्यालयस्तरका विद्यार्थीहरूको
ज्ञान, प्रतिभा र आत्मविश्वास उजागर गर्ने
एक शैक्षिक र प्रेरणादायी प्लेटफर्म हो।
यहाँ तपाईंले पाउनुहुनेछ —
🎤 प्रभावशाली वक्तृत्वकला
📚 सजिलो र उपयोगी शैक्षिक भिडियो
🎭 मन छुने सांस्कृतिक कार्यक्रम
🏫 विद्यालयका विभिन्न गतिविधिहरू
🌟 विद्यार्थीहरूको लुकेको प्रतिभा
हामी विश्वास गर्छौं —
आजका विद्यार्थी नै भोलिको राष्ट्र निर्माता हुन्।
त्यसैले शिक्षा, अनुशासन र प्रेरणालाई
एकै ठाउँमा प्रस्तुत गर्छौं।
📌 ज्ञान बढाउन
📌 आत्मविश्वास जगाउन
📌 नयाँ कुरा सिक्न
अहिल्यै Subscribe गर्नुहोस्
र Smart Learning को यात्रामा हामीसँग जोडिनुहोस्। 🔔📺#FutureOfNepal
#YoungTalents
#StudentMotivation
#Inspiration
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Raju kumar Chaudhary
Smart School Nepal मा स्वागत छ 🙏
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Nensi Vithalani
જીવનને કાવ્ય સમજી💫🌸
ક્યારેક ગમતું મૂકવું પડે
મૂકેલું છોડવું પડે
છોડેલું હળવેથી સ્વીકારવું પડે
સમયની સાથે ચાલવું પડે
મનની ગતિને શાંતિથી સમજવું પડે
નદી જેમ વળાંક લેતા શીખવું પડે
થોડું અટકી પોતાને સાંભળવું પડે
આશા હાથમાં રાખી રાહ જોવી પડે
દરેક દિવસને નવી શરૂઆત માનવી પડે
જીવનને કાવ્ય સમજી જીવવું પડે
અને જે છે એમાં સૌંદર્ય શોધવું પડે 💫
Atul Bhatti
અરીસામાં જોવા અરીસાયે, સવાલ તરતો મૂક્યો છે,
મેં ખુદને ખુદમાં ઉતારી, જવાબ વળતો મૂક્યો છે.
છે ભેદ-ભ્રમ અહીં સૌના, રૂપે રગે સરખા મૂક્યા છે,
વાડા ભલે આદમ કર્યા, રુધિર જ મળતો મૂક્યો છે.
મૌન રહી સાધી નહિ શકું, અતુલ હવે આ દુનિયાને હું,
મારા ભીતર દીવો ખુદ, ખ઼ુદાએ જળહળતો મૂક્યો છે.
Niya
અમે મળ્યા હતા પ્રેમ માટે,
પણ રહી ગયા
વેદના માટે…
Pallavi Tiwari
चार दीवारी की कहानी
घर की चार दीवारी में,
एक कहानी है मेरी अपनी
रोज एक नई जंग हूं मैं एक गृहणी हूं
चूल्हे से लेकर चाबी तक,हर दिन एक नई कहानी
पानी भरने से लेकर पोंछा लगाने तक
हर काम में हैं मेरी कहानी,हर पल में हैं मेरी जवानी
पर रात के अंधेरे बत्ती बुझाती और खुद को ढूंढती हूं
और फिर एक पल ऐसा आता, खुद को ही भूल जाती
पर अगली सुबह फिर वही गृहस्थी में लग जाती मैं
इसलिए गृहणी कहलाती मैं
तो कहो ये कहानी किसकी
JIGAR RAMAVAT
સાવ કોરી કિતાબ જેવી આ કહાની લાગે છે,
દોસ્ત, તારા વગર જિંદગી અધૂરી લાગે છે.
શ્વાસ ચાલે છે ને ધબકાર પણ છે છાતીમાં,
પણ તું ના હોય તો હર શ્વાસમાં દૂરી લાગે છે.
મહેફિલો ગુંજે છે, લોકો હસે છે ચારે કોર,
એક તારી ગેરહાજરીથી સાંજ સુની લાગે છે.
સુખ હોય કે દુઃખ, કોની પાસે જઈને ઠાલવું?
તારા વિના તો હવે ખુશી પણ મજબૂરી લાગે છે.
જગત આખું ભલેને આવીને ઉભું રહે પડખે,
તું મળે તો જ મારી દુનિયા પૂરી લાગે છે.
-J.A.RAMAVAT
Shraddha Panchal
शिकायतें बहुत है ,
इंसान की फ़ितरत में …..
कल धूप से परेशान था,
तो आज बारिश से ।।।।……😇
Soni shakya
कैसे समझते तुम,
तुम्हारे पास चाहतो की भीड़ थी..
और मेरी चाहत..."सिर्फ तुम"
- Soni shakya
Kartik Kule
वो पल आखरी था वो दीन आखरी था
नाजाने क्या पता वो दोस्त आखरी था
समज न पाये हमे अस्केजेसा कोई
तुम क्या जानो वो दौर आखरी था
- Kartik Kule
Kartik Kule
ज्यांनी पुस्तक वाचल नाही तो पुस्तक लिहू शकतो
मग ज्यांनी एवढ आयुष्य जगलं ते आयुष्य का घडवणार नाही अस वाटत
- Kartik Kule
Kartik Kule
की श्यामियनेकी महफिलोसे अच्छी मेरे दोस्तीकी कहावतेहि अच्छी है।।
अमीरोकी बस्तीमे गरीबोकी
दीवानगी ही अच्छी हे।।
- Kartik Kule
Urvashi Oza
दिल करता है एक रात मैं सोजाउ
और सुबह सबको मेरे लिए रोते देखू
( आसमान से )
Vrishali Gotkhindikar
.........वादळ...!
..छोटी मोठी..वादळे तर खुप आली आयुष्यात..आजपर्यंत..
..छोट्या वादळातुन..तर सहजच पार पडले
................काही ही न गमावता...
.................अगदी सहीसलामत..!!!
..मोठ्या वादळांनी शिकवले..
....... स्वतःचा बचाव करुन ..परत उभारी धरायला..!!
..पण आता तुझ्या निघून जाण्याने जे वादळ आलय..घोंघावत..!
त्यानं मला पार सैरभैर..केलय रे..
"बचाव"..आणी "उभारी"..
हे तर सारे दुरच राहिलेय.....................
मी स्वतःलाच कोंडुन घेतलय..माझ्या कोशात..
.........पाकळीही न उघडता..!!!!
....................... वृषाली
Priya
मेरी कहानी में हर एक शख्स धोखेबाज निकला
हम वजूद उसका पाक समझते रहें
जो खुद एक गुनेहगार निकला...
Priya kashyap
તેજસ
જરૂરી નથી કે સમયની સમજણ અનુસાર દૃષ્ટિ હોય છે.
તારી સાથે મારી દુનિયાથી અલગ સપનાની સૃષ્ટિ હોય છે.
આંખોની આંખો સાથે તો કેટલીય વાતો થઈ ચૂકી છે પણ,
તારા કીધા વગર કરાયેલા સ્પર્શની અલગ મસ્તી હોય છે.
કહે છે દરેક માણસ કોઈક અને કંઈક ખોઈને જ બેઠો છે.
પણ હું જ્યારે તારી સાથે હોઉં ત્યારે પૂર્ણ સંતુષ્ટિ હોય છે.
લોકો ભલે ને કહેતા હોય કે ગુમ થયેલો માણસ છે પણ,
તારાં આલિંગનમાં હોઉં તો મારી અલગ જ હસ્તી હોય છે.
– તેજસ
- તેજસ
Priya
रात गई बात गई...नहीं महादेव
रात गई...बात दिल पर लग गई..।
Priya
हजार गम हैं खुलासा कौन करे
मुस्कुरा देते हैं तमाशा कौन करें
Priya kashyap...✍️
kajal Thakur
“उसे चाहा भी तो इस तरह चुपचाप,💔
कि मेरी खामोशी ही मेरा इज़हार बन गई।
वो किसी और की दुनिया में खुश रहा,
और मेरी पूरी दुनिया बस उसी के नाम रह गई।” 🥀
Kajal Thakur 😊
Kamini Shah
એટલું આસાન નથી મંઝિલે
પહોંચવું
ચિત્તાની ઝડપે છલાંગ મારી
લક્ષ્યે પહોંચવું…
-કામિની
M K
क्या बात है ...??
मेरे अंदर अब घमंड घर कर लिया है,
जबकि पता है मुझे घमंड तो रावण का भी चूर हुआ था,
मैं तो बस मामूली सी इंसान हूं ,,,
रोते हुए आँखें जुबां को कड़वा कर दिया है
मोल भाव की दुनियां में मेरे मासूम दिल का क्या काम??
अपनों के साथ साथ अनजानों को भी गलत लग रहे हैं,
मुझे इसकी क्यों परवाह करनी ...???
मैं जैसी थी अब वैसी नजर नहीं आना चाहती,
वक्त ने मुझे कुछ सिखाया है.....!!!
- M K
Dada Bhagwan
दर्शन से मिले तृप्ति, त्रिमंदिर ये निष्पक्षपाती,
जो भी यहाँ आए, पाए शाश्वत शांति!
त्रिमंदिर यानी धर्म में निष्पक्ष दृष्टि की शुरुआत! त्रिमंदिर के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ विज़िट करें: https://dbf.adalaj.org/Ta2V8JjO
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Jyoti Gupta
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Shailesh Joshi
બાળપણથી લઈને કિશોરાવસ્થા અને
કિશોરાવસ્થાથી લઈને યુવાવસ્થા સુધી
જો આપણને જે જોઈએ, કે માંગીએ
એ મળી જતું હોય, તો કમસેકમ
આપણે એટલું તો સમજવું જોઈએ કે,
એ ચીજવસ્તુ બજારમાંથી આપણા સુધી
કેવી રીતે આવે છે, કે પહોંચે છે ?
- Shailesh Joshi
Priya
अफसोस हैं मगर शिकवा नहीं मुझें
एक शख्स साथ रहकर भी समझा नहीं मुझें
- Priya
bhavesh
2026 માં આગળ વધવા માટે આ આદતો છોડો ✋👉✅
Shailesh Joshi
જ્યાં સુધી વિદ્યાર્થી જીવનથી લઈને ( પૃખ્તવયના )
વ્યવસાયિક જીવનની શરૂઆત ન કરીએ
ત્યાં સુધી આ એક વાત યાદ રાખવી કે, હમણાં
જો આપણને ઈચ્છા થાય એ પ્રમાણે જીવવાની
આદત પડી જશે, તો બાકી જીવનમાં આપણે
આપણી ઈચ્છા પ્રમાણેનું જીવન
બિલકુલ નહીં જીવી શકીએ.
- Shailesh J
Sarika Sangani
जिस आजादी को हमने इतनी जद्दोजहत से हासिल किया है, वही आजादी आज हमें फिर से गुलाम बनने की ओर ले जा रही है। काश इस देश में सख्ती से संविधान का पालन होता तो यह भटके हुए आजाद लोग यूं मनमानी न करते।
- Sarika Sangani
Imaran
चाहा है तुम्हें अपने अरमान से भी ज्यादा,
लगती हो हसीन तुम मुस्कान से भी ज्यादा,
मेरी हर धड़कन हर साँस है तुम्हारे लिए,
क्या माँगोगे जान मेरी जान से भी ज्यादा
🫶imran 🫶
Saliil Upadhyay
સ્માર્ટ, હોંશિયાર કે સમજદાર...?
ગેરેજવાળો : મેડમ,તમે એક્ટિવા રોક્વા પગ કેમ ઘસો છો..?
મેડમ : કારણકે, બ્રેક લાઇનર ૩૫૦ રુપિયાનુ આવે અને ચપ્પલ ૧૦૦ રુપિયાના....!
Ashish jain
लाइफ की करप्ट विंडो
मेरे मदरबोर्ड (ईश्वर) ने जब, ये पुर्जा नया बनाया,
ठोक-बजाकर हार्ड डिस्क (आत्मा) का, एक पीस लगाया।
सन् दो हजार छह की वो, 'विंडो एक्स पी' वाली रात थी,
नया सिस्टम, नया जोश, और खुशियों की शुरुआत थी।
सीडी-रोम (मम्मी-पापा) ने इसमें, संस्कार का सॉफ्टवेयर भरा,
एंटीवायरस बनकर गुरु आए, ताकि सिस्टम रहे खरा।
पर हाय रे किस्मत! कुछ गलत दोस्तों के 'वायरस' आ गए,
कुछ गर्लफ्रेंड के 'मैलवेयर', मेरा सारा रैम (RAM) खा गए।
इंटरनेट से फाइल अटैच हुई, जिसे शादी कहते हैं,
अपडेट हुआ एंटीवायरस (नौकरी), अब हम ऑफिस में रहते हैं।
कॉपी-पेस्ट के चक्कर में, एक नई फाइल (बच्चा) डाउनलोड हुई,
खुशियाँ तो बहुत मिलीं, पर मेमोरी थोड़ी ओवरलोड हुई।
अब महँगाई की डायन ने, फाइलें ऐसी करप्ट कीं,
सिस्टम होने लगा हैंग, और विंडो ही इरप्ट (Erupt) की।
अब दुनिया जब भी पूछती है— "आशीष भाई, क्या हाल है?"
तो मेरा सॉफ्टवेयर बस एक ही, एरर कोड (Error Code) उगलता है:
"माफ़ करना भाई, 'योर पासवर्ड इज़ इनकरेक्ट',मेरा दिल अब हैग है, और दिमाग डिसकनेक्ट!"
Ashish jain
शीर्षक: बेलन और ब्रह्मांड का युद्ध
सुबह सवेरे गरम चाय की, माँग जो मैंने कर दी, पत्नी ने गुस्से की ज्वाला, आँखों में अपनी भर दी। बोली— "चाय चाहिए या फिर, अपना सिर फुड़वाना है? आज सफाई का दिन है, या फिर बहाना बनाना है?"
लड़ाई ऐसी छिड़ गई जैसे, सरहद पर घमासान हो, वो थी सुलगती झाँसी की रानी, मैं डरा हुआ इंसान हो। मैंने कहा— "ओ प्रिये! ज़रा तो, रहम इस दिल पर खाओ," वो बोली— "चाय छोड़ो, पहले ये मकड़ी का जाला हटाओ!"
वो उठी तो लगा कि कोई, भारी तूफ़ान आएगा, बेलन हाथ में देख लगा, मेरा भूगोल बदल जाएगा। मैंने आवाज़ उठाई तो वो, 'सुनामी' बनकर आई, एक घंटे तक फिर घर में, मेरी 'सर्जिकल स्ट्राइक' हुई।
मैदान-ए-जंग में खड़ा मैं, बस आहें भरता रहा, अपनी ही शादी के फैसले पर, मन ही मन मरता रहा। आशीष! अब हालत ऐसी है कि, कोना ढूँढ के बैठा हूँ, शेर था कल तक घर का, आज भीगी बिल्ली बना बैठा हूँ।
अब वो उस कमरे में बैठी, 'मौन व्रत' का तीर चलाती है, मैं इस कमरे में बैठा, जैसे सज़ा-ए-मौत काटता हूँ। दोस्ती करने जाऊं तो, वो 'नागपाश' सी डसती है, और मेरी इस हालत पर, मोहल्ले की कामवाली हँसती है!
Adv. आशीष जैन
7055301422
Ashish jain
कविता: दरिया का फासला
नदी के उस किनारे पर, वो बनकर आस बैठी है,
दबाकर दिल में अरमानों की, मीठी प्यास बैठी है।
इधर हम हैं कि सूनी रेत पर, चुपचाप बैठे हैं,
लगाकर ज़ख्म लहरों का, कोई इतिहास बैठे हैं।
हमारी कश्ती तो उस पार, जाने से ही रूठ गई,मझधार में ही किस्मत की, वो डोरी टूट गई।जो लेकर जाती उस साहिल पे, वो कश्ती ही डूब चुकी,मिलन की हर हसीं ख़्वाहिश, दरिया में ही ऊब चुकी।
न आवाज़ वहाँ पहुँचे, न कोई राह दिखती है,
तड़प ये फासले वाली, न कागज़ पर लिखी जाती है।
वो सुध-बुध खोके बैठी है, हम आहें भरके बैठे हैं,
दबे अरमान सीने में, कई पत्थर से बैठे हैं।
कैसे हो बात अब उनसे, कि दरिया बीच में गहरा,लगा है बेबसी का आज, यादों पर कड़ा पहरा।वो बस एक अक्स जैसी है, जो लहरों पर चमकती है,मगर छूने को बढ़ते हैं, तो ये दुनिया धमकती है।
नदी बहती ही जाती है, जुदाई को जताने को,
कोई 'आशीष' तो दे दे, इस टूटे आशियाने को।
वो उस तट पर, हम इस तट पर, बस निहारा करते हैं,
बिना पतवार के हम, उम्र सारा गुजारा करते हैं।
Adv.आशीष जैन
7055301422
Ashish jain
गज़ल: आँखों की ज़ुबान
हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते,
तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इकरार से डरते।
अजब ये कशमकश थी... हम बस आँखों से बात करते रहे,
ठंडी आहें भरते रहे... मिलने का इंतज़ार करते रहे।
कभी हम चुप रहे... कभी तुम चुप रहे, ख़ामोशी बोलती रही,
नज़र से दिल की जो बातें थीं... वो हर पल होती रहीं।
मगर जब बात लबों तक आई... तो हम संसार से डरते,
तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इज़हार से डरते।
अजब सी प्यास थी आँखों में... अजब सा एक साया था,
कि जैसे रूह ने मेरी... तुम्हें अपना बनाया था।
मगर खोने के डर से हम... खुद अपनी पुकार से डरते,
हृदय में प्रेम जागा था... मगर इकरार से डरते।
तड़प दिल की ये 'आशीष'... आँखों ही आँखों में पलती रही,
मोहब्बत की ये शमा... बस धड़कनों में जलती रही।
ग़ज़ल बन कर जो छलका दर्द... तो हम झंकार से डरते,
हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते।
adv.आशीष जैन
7055301422
Parmar Mayur
वह कानून हमेशा 'अधूरा' रहता है।
जो बच्चे को 'बिस्कुट की चोरी' में,
जेल में बंद कर दे,
जबकि उस बच्चे को उसके हक के पैसे,
ना देने वाले वेपारी के 'अन्याय पर मौन' रहे।
इंसाफ का तराजू 'तटस्थ, सम्मानित और सत्य' पर टीका होना आवश्यक है।
Deepak Bundela Arymoulik
ये सफ़र उनका है जो चल न सके,
ये शहर उनका है जो संभल न सके।
हमने तो ठहर कर भी हार मान ली,
वो गिर-गिर कर भी खुद को बदल न सके।
आर्यमौलिक
Deepak Bundela Arymoulik
ये सफ़र उनका है जो चल न सके,
ये शहर उनका है जो संभल न सके।
हमने तो ठहर कर भी हार मान ली,
वो गिर-गिर कर भी खुद को बदल न सके।
आर्यमौलिक
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पुत्र नहीं वश में रहे, रहे न पत्नी पास। धन से भी पीड़ित हुआ, हुआ नरक का वास।।
दोहा --४००
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
कोहरा
दिल में यादों का कोहरा छाया हुआ हैं l
चैन सुकून हरने का इलाज पाया हुआ हैं ll
मुलाकातों के हसीन लम्हें ताजा होते ही l
चहेरे पर मुस्कराहट को बोया हुआ हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Mayur CHAUDHARY
पुरुष को अपनी शैशवावस्था का बोध तब होता है जब उस पर माँ भगवती कृपा करती हैं। इसके बाद ही वह जगत की स्त्रियों में विद्यमान शक्ति की अनुभूति करके उनके समक्ष मस्तक झुका सकता है। वास्तविक ब्रह्मचर्य यही है। शरीर के स्तर पर जो लंगोट करके शक्तिसंचय कर रहे होते हैं, लुट ही जाते एकदिन।
Urvashi Oza
मैं पेड़ से गिरे हुए उस पत्ते की तरह हु जो सूखा भी है और हरा भी
ना चूर हो सकता है ना तो पेड़ से लग सकता है
( बस ज़मीन पर पड़े रहना ही किस्मत है )
S K I N G
यक़ीन कैसे करूँ, अपनी ही किस्मत पर, कि फलक छोड़ कर, चाँद आया है चौखट पर।
Good morning
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Bk swan and lotus translators
This image is a stylized "poster" that uses a mix of photography and digital overlays to convey a message about individuality. It feels like a personalized piece of motivational content or a conceptual film poster.
Here is an in-depth analysis of the visual and thematic elements:
1. Composition and Subject
* Central Figure: The man is the clear focal point, positioned vertically in the center of the frame. His posture—arms crossed and a steady gaze—projects confidence and composure, aligning with the "standout" theme.
* The Setting: The background appears to be a school or institutional hallway with stairs and a door. The presence of other people (blurred or in the background) provides a literal "crowd" for the subject to contrast against.
2. Visual Effects & Symbolism
* Geometric Overlay: There is a translucent, crystalline or diamond-shaped geometric pattern superimposed over the subject's chest and torso. This is a literal visual metaphor for the "diamond" mentioned in the text.
* Lighting and Glow: A soft, white glow emanates from the center of the subject, creating a "halo" effect that separates him from the darker, more muted tones of the background.
* The "Diamond" Metaphor: * Uniqueness: Diamonds are formed under pressure and are prized for their clarity.
* Refraction: The geometric shapes suggest light being refracted, implying that the individual "shines" differently than those around them.
3. Typography and Messaging
* Text Hierarchy: The bold, sans-serif white text is placed directly over the midsection and feet.
* "Don't get blended in the crowd" (The Warning)
* "Standout like a diamond" (The Call to Action)
* Directness: The message is simple and aspirational, typical of motivational social media content or "hero" archetypes in cinema.
4. Branding and Metadata
* Production Tag: The bottom of the image credits "A Brillance Films Production," which suggests this might be promotional material for a video project, a short film, or a personal branding exercise.
* Timestamp: The bottom right displays a very recent timestamp (January 28, 2026), indicating this is a "live" or current piece of content.
Summary
The image successfully uses visual contrast—turning the background dim and adding a glowing geometric heart—to reinforce its message. It’s an empowering visual that focuses on the idea of maintaining one's brilliance despite a mundane or crowded environment.
Ashish jain
कोंकणी: सगांलो इष्ट (सबकी दोस्त)
कोंकणच्या दर्या देगेर, गाजता आमची कोंकणी मायेची, उतरां ताचीं शेंकड्यां वरसां, गोडसाण जशें आसा साकरेची। ना कोणाकडेन झगडीं, ना कोणाकडेन कसलेंच वैर, सगळ्यां भासां कडेन तिचें नातें, जशें काळजांतलें सैर।
आशीष म्हणटा, ही भास आसा सगळ्यांची मोगाची लाडकी, कानडी आसूं वा हेर कोण, उघडी दवरता आपली घरकी। मेळोवन घेता सगळ्यांक, न्हय कोणाचो तिरस्कार, आमची कोंकणी आसा, साऱ्या जगाचो सत्कार!
adv. आशीष जैन
7055301422
Bk swan and lotus translators
This image features a clever Telugu pun that plays on the literal and figurative meanings of the word "hands." It’s a classic motivational thought that shifts the focus from destiny to effort.
Translation & Core Meaning
The text in red reads:
> "భవిష్యత్తు మన చేతుల్లో... కాదు, కాదు చేతల్లో..."
> (Bhavishyattu mana chethullo... kaadu, kaadu chethallo...)
>
* Literal Translation: "The future is in our hands... no, no, it is in our actions..."
* The Wordplay: In Telugu, Chethulu (చేతులు) means "hands," while Chethalu (చేతలు) means "deeds" or "actions."
In-Depth Analysis
1. The Myth of Palmistry vs. Reality
The background shows an open palm, which usually symbolizes palmistry—the belief that one's future is written in the lines of the hand. By starting with "The future is in our hands," the author initially leans into that cliché. However, the immediate correction ("No, no, it is in our actions") subverts the expectation. It suggests that while the lines are on your palm, they don't move unless your hands are working.
2. Empowerment through Agency
The quote is a call to take responsibility. It moves the concept of "Future" from something passive (luck/fate) to something active (hard work/behavior). It tells the viewer that destiny isn't a pre-written script you hold; it's a sculpture you carve with your actions.
3. Linguistic Nuance
The transition from Chethullo to Chethallo is a subtle phonetic shift (just one vowel sound difference), which makes the message catchy and memorable. It’s a common rhetorical device used in Telugu "Sukthulu" (good sayings) to drive home a moral point.
Summary
The message is clear: Don't just look at your hands and wonder about your luck; use those hands to work and create your own luck.
Ashish jain
तुजी याद आयली, (तेरी याद आई,) आनी मोजे काळीज रडलें, (और मेरा दिल रो पड़ा,) तुवें म्हाकाच इबाडलें, (तुमने मुझे ही बर्बाद कर दिया,) मोज्या मोगान तुका न्हाययलें, (मेरे प्यार ने तुम्हें नहलाया था,) पुण तुवें मोज्या जिविताचो उजो केलो। (पर तुमने मेरी जिंदगी की आग लगा दी।)
कोंकणी भास मोज्या रगतांत आसा, (कोंकणी भाषा मेरे खून में है,) ती अमृता सारकी गोड आसा, (वह अमृत जैसी मीठी है,) मराठी परस चड तिखट आनी सुंदर, (मराठी से कहीं ज्यादा तीखी और सुंदर,) मोज्या गोयांची हीच तर खरी वळख आसा। (मेरे गोवा की यही तो असली पहचान है।)
Ashish jain
कलम का स्वाभिमान
दंभ के महलों में बैठकर, वो खुद को खुदा समझते हैं,
मातृभाषा की आड़ में, वो हिंदी को 'गदा' समझते हैं।
नफरत की इस राजनीति ने, साहित्य का आँगन मैला किया,
जोड़ने वाली विधा को, भाषाई जंग का अखाड़ा किया।
वो समझते हैं हम भिखारी हैं, शब्दों की भीख मांगते हैं,
शायद भूल गए वो 'दिनकर' को, जो सोए शेर जगाते हैं।
हमारी खामोशी को हमारी, मजबूरी मान बैठे वो,
हिंदी के विशाल सागर को, एक छोटी क्यारी मान बैठे वो।
तुम करो नौटंकी अपनी, हम अपनी साख बचाएंगे,
तुम नफरत की भाषा लिखो, हम प्रेम का राग सुनाएंगे।
इतिहास गवाह है वक्त का, हर घमंड एक दिन टूटता है,
कलम जब सच लिखती है, तो सिंहासन भी छूटता है।
भिखारी वो नहीं जिसके पास 'व्यूज' की कमी है,
भिखारी वो है जिसकी सोच में, संस्कारों की कमी है।
रचना की उम्र लंबी है, ये शोर तो बस दो दिन का है,
साहित्य वही अमर हुआ, जो हर भाषा में जन-जन का है।
adv. आशीष जैन
7055301422
Anup Gajare
🎬🎵 फ़िल्मी गीत : तुम हो के नहीं
__________________________________________
मुखड़ा (Big Hook – Repeatable)
तुम हो के नहीं
मेरे हर कहीं
पास हो के भी
लगते अजनबी
तुम हो के नहीं
यादों में यहीं
टूटे से ख़्वाबों
की आख़िरी ज़मीं
अंतरा 1
गुज़रता कारवाँ
रुकता ही नहीं
भटके हैं रास्ते
मंज़िल भी नहीं
तुम्हारे आख़िरी ख़त
अब किसके लिए
लफ़्ज़ तो ज़िंदा हैं
पर मतलब नहीं
प्री-कोरस (Build-up)
शाम क्यों ढलती नहीं
ये रात क्यों थमती नहीं
दिल पूछता हर बार
तू मेरा था या नहीं
मुखड़ा (Repeat – Full Music)
तुम हो के नहीं
मेरे हर कहीं
पास हो के भी
लगते अजनबी
अंतरा 2
जो चाहा वो पाया
या पाया नहीं
जो देखा वो सच था
या सपना कहीं
किसने निभाया
किसने छोड़ा
किसका पानी
किसकी कश्ती डूबा
ब्रिज (High Emotion – Silence → Music Drop)
भुला-खोया
कुछ मालूम नहीं
क्या ढूँढा
पता कुछ नहीं
तुम्हारे निशान
हैं या नहीं
ये सवाल भी अब
मेरा नहीं
अंतरा 3 (Soft → Rise)
ख़ुद का चेहरा
सफ़ेद सा
बर्फ़ बनकर
रुक गया
आईने भी पूछें
आज यही
तू था यहाँ
या था ही नहीं
फाइनल मुखड़ा (Key Change / High Note)
तुम हो के नहीं
मेरी ज़िंदगी
हो के भी क्यों
पूरी नहीं
तुम हो के नहीं
तुम हो के नहीं
ये दिल माने
अब और नहीं
आउट्रो (Fade / Reprise)
तुम हो के नहीं…
हो के भी नहीं…
Sandeep Raj Thakur
vakt Ke Taraju Se har koi Tolta hai
Raju kumar Chaudhary
पागलपनhttps://youtube.com/@smartschoolnepal?si=_BGK0BK-hJUxxzzqSmart School Nepal मा स्वागत छ 🙏
यो च्यानल विद्यालयस्तरका विद्यार्थीहरूको
ज्ञान, प्रतिभा र आत्मविश्वास उजागर गर्ने
एक शैक्षिक र प्रेरणादायी प्लेटफर्म हो।
यहाँ तपाईंले पाउनुहुनेछ —
🎤 प्रभावशाली वक्तृत्वकला
📚 सजिलो र उपयोगी शैक्षिक भिडियो
🎭 मन छुने सांस्कृतिक कार्यक्रम
🏫 विद्यालयका विभिन्न गतिविधिहरू
🌟 विद्यार्थीहरूको लुकेको प्रतिभा
हामी विश्वास गर्छौं —
आजका विद्यार्थी नै भोलिको राष्ट्र निर्माता हुन्।
त्यसैले शिक्षा, अनुशासन र प्रेरणालाई
एकै ठाउँमा प्रस्तुत गर्छौं।
📌 ज्ञान बढाउन
📌 आत्मविश्वास जगाउन
📌 नयाँ कुरा सिक्न
अहिल्यै Subscribe गर्नुहोस्
र Smart Learning को यात्रामा हामीसँग जोडिनुहोस्। 🔔📺#FutureOfNepal
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Raju kumar Chaudhary
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Mayur CHAUDHARY
भलई किसी औरत ने आज तक ताजमहल न बनवाया हो, लेकिन उन्होंने घर करोड़ों बनाए हैं।
hsc
हर हर महादेव 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿
- hsc
hsc
मौत तो देह का अंत है,
पर स्त्री की हाय...
आत्मा की थकान से और रूदन से जन्म लेती है।
जब वह प्रतिदिन अपने भीतर
थोड़ी-थोड़ी मरती है
और फिर भी संसार के सामने
जीवित होने का अभिनय करती है,
तब उसकी हाय प्रार्थना बनकर
ईश्वर के चरणों तक पहुँचती है,
बिना शब्दों के, बिना शिकायत के।
ईश्वर स्त्री की हाय को कभी बद्दुआ नहीं मानते,
वो उसे कर्म का लेखा समझते हैं।
जहाँ अन्याय होता है,
जहाँ सहनशीलता को कमजोरी समझा जाता है,
वहीं से उसका दण्ड रूपी फल
धीरे-धीरे आकार लेने लगता है।
न तुरंत, न प्रत्यक्ष,
पर अचूक।
क्योंकि जो पीड़ा मौन में सह ली जाती है,
वो समय के गर्भ में न्याय बनकर पलती है।
स्त्री की हाय,
किसी का विनाश नहीं चाहती,
वो तो संतुलन चाहती है।
वो चाहती है कि,
जो बोया गया है, वही लौटे।
मौत एक बार को क्षमा हो सकती है,
पर स्त्री की हाय...
ईश्वर का मौन हस्तक्षेप है—
जो देर से सही, पर अन्याय को
उसके ही भार से झुका देता है।
दण्डित कर देता है...!!
M K
अब सब कुछ छूट रहा है पीछे कही,
मैं उसे संभालने की कोशिश नहीं करती हूं।
रोज आंखों की शिकायत होती है मुझसे,
चुप होठों को ख़ामोश रहने देती हूं...!!
- M K
pink lotus
इंसान बदलते नही है
वक्त और परिस्थितिया उन्हे
ऐसा बना देती है
rajan
Kaun hai Ashwin?
Aur wo yahan kaise pahucha?
Samundar ke beech, is anjaan jagah par uski kahani shuru kaise hui…
jaane ke liye Matrubharti par padhiye
📖 The Unknown Island by author rajan
Hardik Boricha
कुछ जिंदगियां
बसंत का इंतज़ार करती रह जाती हैं..
और अचानक
बिदाई की धूप में झुलस जाती हैं..
ख़्वाबों की कली
खिलने से पहले ही
ज़िम्मेदारियों की आँच पर
पका दी जाती है...
हर बेटी को
कली रहने का मौसम मिले..
बसंत
सिर्फ़ ऋतु नहीं,
हर भाग्य में उतरे...
💯🌷❤️🙏
Hardik Boricha
❤★┼●#जब से तेरी #निगाहों का नूर #देखा है
#खुद को #इश्क के हाथों #मजबूर देखा है●┼★❤
❤┼●ना #देखा था #तुमसा कोई #दिलनशी पहले
तेरी #आँखों में मैने वो #सुरूर देखा है ●┼★❤
S K I N G
अगर मुश्किलों से लड़ना चाहते हो तो
सर्दी में
ठंडे पानी से नहाना सीखो
Hardik Boricha
💞 एक तेरा ही अहसास, दिल ♥️ में तेरा वास....
मुकम्मल ना सही, मगर ये अहसास
तो बाकी है
तेरी यादों का मेरे दिल ❤️ में
निवास तो बाकी है
वो जो अधूरे रह गये हमारे दर्मियां किस्से
उन अनकहे लफ्ज़ो की मिठास बाकी है
जरूरी तो नहीं हर दुआ को मंजिल
मिल जाए
कि मुसाफिरों के पास सफर की प्यास
तो बाकी है
इश्क मुकम्मल ना हुआ तो, मलाल कैसा ?
मैरी रूह में तेरे नाम का वास तो बाकी है।
💞💞💞💞
Archana Singh
गर्दिश में सितारें सहीं
हम कहां सूरज सा
चमकना चाहते हैं !
हम तो बस अपने
महादेव का
आशीर्वाद चाहते हैं !!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Apurv Adarsh
जिन्दगी को मजे से जीना चाहिए, पर क्या वो मजा किसी भी कीमत का होना चाहिए?
नहीं ।
Bk swan and lotus translators
यह जानकारी वैज्ञानिक रूप से काफी हद तक सही है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण बातें भी हैं जो आपको जान लेनी चाहिए:
तथ्यों की जांच (Fact Check):
* क्या शराब का बादल मौजूद है? हाँ, वैज्ञानिकों ने 1995 में Aquila (गरुड़) तारामंडल में एक विशाल गैस के बादल की खोज की थी, जिसे G34.3 नाम दिया गया है। इसमें वास्तव में एथिल अल्कोहल (पीने वाली शराब) और मिथाइल अल्कोहल (जहरीली शराब) मौजूद है।
* मात्रा: यह दावा कि इसमें 400 ट्रिलियन-ट्रिलियन (400 septillion) पिंट अल्कोहल है, वैज्ञानिक गणनाओं पर आधारित है। यह बादल हमारे सौर मंडल के व्यास से 1000 गुना बड़ा है।
* क्या इसे पिया जा सकता है? बिल्कुल नहीं। भले ही इसमें एथिल अल्कोहल है, लेकिन यह शुद्ध नहीं है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन साइनाइड और अमोनिया जैसी बेहद जहरीली गैसें मिली हुई हैं। साथ ही, यह पृथ्वी से लगभग 10,000 प्रकाश वर्ष दूर है।
* छवि की सत्यता: आपके द्वारा शेयर की गई तस्वीर एक काल्पनिक (AI द्वारा बनाई गई) ग्राफिक है। अंतरिक्ष में यह बादल इस तरह एक "शराब के गिलास" या रंगीन पेड़ जैसा नहीं दिखता। वास्तविक अंतरिक्ष बादल (Nebula) दूरबीन से देखने पर गैस के धुंधले धब्बों जैसे दिखते हैं।
निष्कर्ष: अंतरिक्ष में अल्कोहल के बादल होने की बात सच है, लेकिन पोस्ट में दिखाई गई फोटो सिर्फ एक कलाकृति है और यह "शराब" पीने लायक या सुरक्षित नहीं है।
जहां तक फोटो की बात है, मेरी जांच के अनुसार इसे Google AI से नहीं बनाया गया है, हालांकि यह मुमकिन है कि इसे किसी अन्य AI टूल का उपयोग करके तैयार किया गया हो।
InkImagination
Good night 🥰🥰
Jyoti Gupta
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Amir Ali Daredia
ज़खमे जुदाई देकर
चले गये थे वो।
फिर लौट कर हे आए
अब पुछ रहे हैं वो
क्या अब भी दर्द हो रहा है?।
आंसू छिपाकर अपने
बस इतना ही कह पाया
जबसे जुदा हुआ हु
बेजान जिस्म हूं मे
मुझको दर्द कहां?।
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