Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
SARWAT FATMI
कुछ अनसुलझी पहेलियाँ
उन्होंने कभी नहीं रोका
न टोका किसी राह पर
पर क्यों?
एक अदृश्य डोर खिंची रही
मैं खुल कर कभी चल न पाई
एक चिरस्थायी भय
मन के किसी कोने में दुबका रहा
चीजें खरीदने की छूट थी
पसंद चुनने की आज़ादी भी थी
पर बाज़ार की भीड़ में
मेरी उँगलियाँ जम सी जाती थीं
पसंद मेरी ठहर जाती थी
हर जगह मुझे आगे किया गया
मेरी छोटी से छोटी बात पर
पलकों का बिछौना बिछाया गया
बच्चों जैसी हर ज़िद पूरी हुई
फिर भी क्यों?
खुशी का वह रंग
दिल तक पहुँच ही नहीं पाया
वे कहते थे अक्सर
तुम्हारा मन जो चाहे करो
तुम बढ़ो आगे
मैं तुम्हारी परछाई बनकर साथ हूँ
तुम्हें कभी गिरने न दूँगा
बस जी लो अपनी ज़िंदगी खुलकर
वे कहते रहे
शब्दों के झरने बहाते रहे
पर मेरी उड़ान धीमी ही रही
उफ्फ ये कैसी उलझन है
कितना सोचा मैंने खुद के बारे में
कितनी रातें जाग कर बिताईं
फिर एक धीमी सी आवाज़ आई
रोकने वाला कोई नहीं था
बाहर से तो कोई बंधन न था
शायद इजाज़त
मैंने खुद को ही कभी दी नहीं
यह कैद बाहर की नहीं थी
यह दीवारें मेरे भीतर थीं
जहाँ मेरी मर्ज़ी
मेरी ही आवाज़ से दब गई
अनकही अनसुनी सी
बस एक सवाल बनकर रह गई
यह मौन स्वीकृति
किस डर की देन थी
मैं आज तक समझ न पाई।
🥰sarwat fatmi 🥰
Nitesh pratap singh
मुझे तुझसे मोहब्बत है
लेकिन जताना नहीं आता II
यूहीं समझ जाओ तुम
कि यूहीं समझ जाओ तुम II
ऐसी यह कमबख्त किस्मत कहा हमारी I
SARWAT FATMI
कुछ ऐसी बातें,जो मैंने कभी समझ नह पाई
उन्होंने मुझे कभी किसी चीज के लिए रोका नहीं,टोका नहीं पर न जाने क्यों?
खुल कर कभी चल नहीं पाई
एक डर सा बना ही रह गया
मुझे किसी भी चीज को खरीदने या अपनी पसंद के लिए मनाही नहीं
पर पता नहीं क्यों??
बाजार में कुछ खरीद नहीं पाई
पसंद नहीं कर पाई
हर जगह उन्होंने मुझे ही आगे रखा
मेरी हर बातो को पलकों पर रखा गया
मेरी हर ज़िद को, बच्चों की तरह पूरी की गई
पर पता नहीं क्यों??
खुशी महसूस ही नहीं हुई
वो अकसर कहते हैं
तेरा जो मन करें वो किया करो
तुम आगे बढ़ो
मैं तेरे पीछे ही हूं
तुम्हें कभी गिरने नहीं दूंगा
बस तू खुल कर अपनी जिंदगी जिया करो
वो कहते रहे मुझसे, पर मैंने किया नहीं
उफ्फ्फ.... ये उलझने
बहुत सोचा मैंने अपने बारे में
फिर एक आवाज आई
रोक तो किसी चीज की नहीं
पर शायद इजाजत मैं खुद को कभी दी नहीं
🥰sarwat Fatmi🥰
Radha Rani
महिला शब्द तीन अक्षर से मिल कर बना है म,हि और ला इसी से इनकी ताकत को हम पहचान सकते है कि वो मैं ही हूँ जो सबको हिलाने की शक्ति रखती हूँ
हैप्पी वीमेंस डे 💐💐
Radha Rani
शायद ही ऐसा कोई घर हो ,जहां बेटियों के जन्म पर खुशियां मनायी जाती हों,पर जैसे जैसे वो बड़ी होती है उसकी मुस्कान घर आंगन में बिखरती है उस सुने से अंगना में शहनाई सी बज जाती है, घर में जब माँ का हाथ बटाती है,जन्म के समय वो दर्द के आशु भी पोंछ जाती है,पापा की सिर मालिश से वो दिनभर का टेंशन दूर भागती है ,जन्म के समय मिले वो जीवनभर की मानसिक तनाव को वो कम कर जाती है, एक दिन ऐसे ही वो मेरे कुल का भी नाम बनायेगी, नहीं खलेगी कमी बेटे की मेरी बेटी ही कुछ ऐसा कर जाएगी
kashish
aaj last din tha class 10th ka ...
khush thi ki last exam hai lekin udas bhi kyuki kya pata kon kha hoge vo log ...
socha tha maze karege lekin sab udas ho gye the last time haato mai gola aur kuch baate yaad aaye gi ...
vo jagre ,mazak ,aur ham sath ka ek sath gumna ,tution ka bingo chup chap khelna aaj sab alag ho gye
chehe vo school ke ho ya tution ke
yaade achchi thi ...
by kashish
Bindiya
" આગમન "
હવાની લહેરખી આવે ને કોઈનું આગમન લાગે,
ધ્વનિનો રણકાર થાય ને કોઈનું આગમન લાગે,
આમતેમ પતંગિયું ઉડે ને કોઈનું આગમન લાગે,
ફૂલોની ફોરમ આવે ને કોઈનું આગમન લાગે,
દિલની ધડકન વધે ને કોઈનું આગમન લાગે.
બિંદિયા જાની
(તેજબિંદુ)
8/3/26
Neha kariyaal
आज मैंने एक फिल्म देखी जिसमें दो इंसान एक लड़का और एक लड़की जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते थे।
क्योंकि रात को सपने में जाने पर उनकी आत्मा एक दूसरे से बदल जाती थी। उस दौरान वे एक दूसरे की जिंदगी जीते थे उनके हिस्से का काम करते थे। पर अफ़सोस आंख खुल जाने पर वे एक दूसरे का नाम भूल जाते।
फ़िर उन्हों एक दूसरे के लिए डायरी लिखनी शुरु की जिससे उन्हें पता हो आज क्या किया। और एक दिन उस लड़की ने लिखा आज रात आसमान में धूमकेतु दिखाई देगा जो कई सालों बाद नज़र आएगा तुम भी देखना... लड़के ने उसका छोड़ा msg पढ़ा और बोला आज रात जब वो वापस उस लड़की के शरीर में जायेगा तो उससे उसका नाम पूछेगा?
लेकिन उस रात के बाद उसकी आत्मा कभी भी बदली!
क्योंकि उस रात धूमकेतू का एक हिस्सा गिरने से उस लड़की का पूरा गांव ख़त्म हो गया था।
तो कितना दुखद होता जिसक बारे में हम सबसे ज्यादा जानते है और अंत में उसी का नाम याद न रहे!!!
kapila padhiyar
મૌન સંબધોની આ તુટેલી જંજાળ.
સારી નીવડી કઈક અંશે તુટેલી જંજાળ.
વેરવિખેર કરીને આ સંબધો ગયા દુર ,
સાથે હતા ક્યારેક તો હતી તુટેલી જંજાળ.
હવે, કલ્પી રહી છે ખાલી આ તુટેલી જંજાળ
મનમાં ભાર હતો , તે હવે ઓછો થયો છે.
હવે આ અમસ્તી જંજાળ રહી નથી,
બસ સુકુન છે જીવનમાં મારા હવે ઘણો.
હવે તો ખુશીઓ પણ દરવાજે દસ્તક દે છે.
રોજ મળવાનું પણ થાય છે હવે ખુદથી ,
પેલા તો બસ મળતી આ બાંધેલી જંજાળ.
હવે તો છે મલકતું મુખ મારુ ને હસતી તસવીર...
બસ આ જ તો છે કલ્પી જીવનની મોજ
મૌન સંબધોની આ તુટેલી જંજાળ.
સારી નીવડી કઈક અંશે તુટેલી જંજાળ.
કપિલા પઢીયાર (કલ્પી)
mohansharma
ग़लत कहते हैँ लोग मोहन कि दूर रहने से प्यार होता नहीं कम..
मगर जो दूर हो जाए उस प्यार में बताओे कहीं होता है दम..
Mare DoAlfaz
जो मुकम्मल नहीं मिलते,
वो मुकम्मल बिछड़ते भी नहीं।
- Mare DoAlfaz
ArUu
नहीं तो
मुझे कहाँ है शिकायत…🫣
मुझे तो गर्व है।
गर्व है इस बात का कि
I’m the best creature created by God ❤️
कौन सा प्राणी होगा भला औरत से ज्यादा महान?
शायद जब भगवान सबसे सुखद मनःस्थिति में होंगे,
तभी उन्होंने एक स्त्री का सृजन किया होगा…
क्योंकि स्त्री से अधिक
सरल, सौम्य, संवेदनशील, समझदार,
साहसी, सहनशील, स्नेहमयी,
सजग, समर्थ, सृजनशील,
संस्कारवान और सशक्त
प्राणी इस जगत में और कहाँ होगा?
सच है न कि
स्त्री सिर्फ़ एक शब्द नहीं,
समर्पण, शक्ति और सृष्टि का सुंदर संगम है।
So proud to be a woman 😌
हर उस स्त्री को सलाम
जो संघर्ष में भी संभलना जानती है,
संवेदना में भी शक्ति बनना जानती है,
और अपने साहस से संसार को संवारना जानती है।
Happy International Women’s Day
my all strong, stunning womaniyaaaas ❤️
ArUu ✍️
jassu
आखिरी चिठ्ठी जो कभी भेजी हीं नहीं गई..?
एक लड़का आरव हर रात किसी अजनबी लड़की को चिट्ठियाँ लिखता है…
लेकिन वो चिट्ठियाँ कभी भेजता नहीं।
शहर में एक लड़की आयरा है जिसे हर महीने एक रहस्यमयी चिट्ठी मिलती है…
जिसमें उसकी ज़िंदगी की वो बातें लिखी होती हैं जो उसने किसी को नहीं बताई।
दोनों कभी मिले नहीं…
लेकिन दोनों की ज़िंदगी एक-दूसरे से जुड़ी है।
और असली रहस्य यह है —
जिस लड़के की चिट्ठियाँ हैं… वो 3 साल पहले मर चुका है।
like & share
thank you...
बिट्टू श्री दार्शनिक
follow me more on insta @publishedphilosopher
Chaitanya Joshi
પ્રકૃતિને મળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
તરંગો નિહાળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
સામ્રાજ્ય રજનીનું ને સાગર શાંત બની ટહેલે , ઉતંગરવ સાંભળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
દીસે છે નાવ ક્યાંક ક્યાંક સમંદર શોભા વનારી,
પ્રફુલ્લતા પામવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
હરખે હૈયું નિસર્ગને નિહાળીને નિજ નયનને સહજ,
ઉરધબકારે સાંકળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
દેવ વરુણ રખેને શાંતિ સુત્રો ભણી રહ્યા હોય ને,
મનને મહેકાવવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે.
ચૈતન્ય જોષી 'દિપક 'પોરબંદર.
kattupaya s
That's all for now. see u later
Nandani
સ્ત્રી...
અઢી અક્ષરનો આ શબ્દ દુનિયાનું સર્જન અને સંરક્ષણ બંને કરવાની ગજબની શક્તિ ધરાવે છે...
બેડીમાં બંધાયેલી સ્ત્રીથી શરૂ કરીને માથા ઉપર તાજ પહેરતી સ્ત્રી સુધીની સફરનો સાક્ષી આપણો આ સમાજ રહ્યો છે.
અત્યારના સમયમાં આ તાજ માત્ર સ્ત્રીઓના માથામાં જ નહીં પરંતુ...
તેની નિર્ણય શક્તિમાં,
તેની વિચાર શક્તિમાં,
તેના અવાજમાં,
તેના આત્મવિશ્વાસમાં નિખરતો જોવા મળે છે.
એક શિક્ષિત અને સશક્ત મહિલા માત્ર તેના પરિવારને જ નહીં પરંતુ સમાજને પણ આગળ વધારવામાં મહત્વની ભૂમિકા ભજવે છે.
સમય બદલાયો છે,, પાંજરામાં પુરાયેલી સ્ત્રી હવે આકાશમાં ઉડીને પોતાની પ્રતિભા સાબિત કરી રહી છે.
તો આવો સ્ત્રીમાં રહેલી આવી પ્રતિભાઓ ને સલામ કરીએ...
8 માર્ચ એટલે કે વિશ્વ મહિલા દિવસના દિવસે સમાજમાં રહેલી તમામ સ્ત્રીઓને અને તેના દરેક સ્વરૂપને વંદન કરીએ..
અને સાથે તેમને આદર, સન્માન અને સમાનતાનો હક આપીએ...
સ્ત્રી હોવાનો ગર્વ રાખો કારણ કે..
તમે દુનિયાથી નથી,, દુનિયા તમારાથી છે..!!
Happy Women's Day..
--Nandani
kattupaya s
Hiding your love with someone you care not easy. it's like a fragile glass. hold it nicely
kattupaya s
She may angry with me. I just pass it. it will be good for her future.
kattupaya s
happiness outside sadness inside. let's hope tomorrow will it change Or not
kattupaya s
sleeping peacefully is like a dream nowadays. I try to sleep on time. but all kind of memories come together like a ocean waves.
kattupaya s
I like her aggressiveness. don't search answers outside. it's all in with you
kattupaya s
Frankly speaking I don't need attention for my quotes.iam so conservative.if u like .read the quotes and leave me alone.. just saying
kattupaya s
Sometimes I don't want to go argument with people who were spending their valuable time with me. I admire them and hope they will understand me and forgive me for my mistakes
kattupaya s
Goodnight friends sweet dreams
PRASANG
“ख़ामोशी में विद्रोह”
भूखों की भीड़ देखो, कैसा तमाशा चल रहा है,
सत्ता के घर में लेकिन जश्न निराला चल रहा है।
डिग्रियों का ढेर लेकर फिर रहा हर युवा अब,
सपनों के शहर में बस दर्द का धुआँ चल रहा है।
खेतों में सूखी मिट्टी, कारख़ाने सब हैं वीरान,
फिर भी मंचों पर विकासों का नज़ारा चल रहा है।
रोटियों की जंग में सड़कों पे उतरा हर इंसाँ,
और कुर्सियों का खेल वैसे ही सारा चल रहा है।
झूठे वादों से यहाँ हर रोज़ बहलाया गया है,
सच पूछो तो देश में कैसा गुज़ारा चल रहा है।
टूटते सपनों को आखिर कौन देगा अब सहारा,
हर तरफ़ बेरोज़गारी का अँधेरा चल रहा है।
एक दिन बदलेगी तस्वीर ये सियासत की ‘प्रसंग’,
आज खामोशी सही- दिल में विद्रोह चल रहा है।
-प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
kattupaya s
I want to be with you whatever you name it in a relationship or friendship. even anonymous.
kattupaya s
I forgive others easily but not myself for making again a mistake
kattupaya s
it's a bitter experience
kattupaya s
it's quite different
kattupaya s
believe in love.. This quote deals the reality
kattupaya s
fear of losing you...
kattupaya s
when love peaks at you possessiveness also grows with it. without that love circle cannot complete
kattupaya s
iam too possesive
kattupaya s
it's going to be great Sunday of the year. Cheers for India to win the T20 world cup
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/18GohwrHeg/
સુંદર વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
kattupaya s
Indian cricket team has some solid batting. but poor fielding skills. Newzealand may look like over confident on their spin dept. that's their weakness.
kattupaya s
let s go to sports topic.. I support Indian team. but they have really prepared?for worst conditions. I feel no. Newzealand attacking with rachin ravindra. he is the key man going to be reason for their world Cup.
kattupaya s
stories were motivating me more than 15 years. we have to identify the good writers and encourage them.
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/15acpswqQon/
સુંદર મજાની બોધ વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.
kattupaya s
it's Tea time..
kattupaya s
best stories came from travel ✈️️. from origin to various origins. try to travel a lot.
kattupaya s
story structure is must. for love stories it's not necessary. social stories I want to write but audience like sex oriented social stories. a male dominated society and he fall in love for a girl. finally the girl will use all her power for to release him from pressure. I just hate it.
kattupaya s
stories are like a ocean. sometimes big whales 🐳 will swallow you. be careful. famous writers are so simple in thinking but their expression is amazing. iam thinking amazing but in writing not even closer to their imagination.
RM
ફરી મને !!
"મને તારા સિવાય બીજું કોઈ નથી જોઈતું, તારા જેવું, તારા જેમ, તારી જગ્યાએ.
મને નથી જોઈતું કે કોઈ મને તારા જેવું નામથી બોલાવે, મને તારી જગ્યાએ બીજું કોઈ નથી જોઈતું જે મને પોતાનો હક આપે.
મને ફક્ત તું જ જોઈએ છે... ફક્ત તું જ અને બીજું કોઈ નહીં.
મને ફક્ત તારો પ્રેમ, તારી સુગંધ, તારી લાગણીઓ, તારું હાસ્ય, તારા બધા આનંદ, તારા દુ:ખ, તારા આંસુ, તારા બધા દુ:ખ જોઈએ છે.
અને આ સિવાય, મને તારા સિવાય બીજું કંઈ નથી જોઈતું, તારા જેવું, તારી જગ્યાએ, તારા વગર.".....!!
❤️❤️
kattupaya s
it is easy to start writing a story but the process of finishing it takes time. This time I have a schedule for that so that it will teach you on time.
kattupaya s
Thinking about writing new story. but my laptop has become too old. any new model laptop suggestions under 30K? dell or HP
kattupaya s
Good evening friends.. have a great evening
Narayan Mahor
ठहराव की छाया
कभी-कभी
दुनिया बहुत तेज़ भागती है,
जैसे किसी अदृश्य मेले में
सबको जल्दी पहुँचना हो।
सड़कें थक जाती हैं,
पैर धूल से भर जाते हैं,
पर लोग फिर भी चलते रहते हैं—
मानो रुकना कोई भूल हो।
ऐसे ही एक मोड़ पर
एक बूढ़ा पेड़ खड़ा है।
वह किसी से कुछ नहीं कहता,
बस छाया बिखेरता रहता है।
जो भी थोड़ी देर रुकता है,
उसे हवा धीरे से समझाती है—
कि सफ़र केवल चलना नहीं होता,
कभी-कभी ठहरना भी रास्ता होता है।
और तब लगता है
कि जीवन कोई दौड़ नहीं,
बल्कि एक लंबी पगडंडी है
जहाँ हर कदम के साथ
मन भी थोड़ा-सा घर लौटता है।
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय।
मन की चिकित्सा ग्रहों के माध्यम से (तत्व-आधारित नवग्रह उपायों का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण)
वैदिक ज्योतिष में नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — हमारे आंतरिक और बाहरी संसार को प्रभावित करते हैं। जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और अन्न/शरीर से जुड़े पारंपरिक उपाय केवल अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव रखते हैं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ये उपाय अवचेतन प्रतीकों को सक्रिय करते हैं, सजगता बढ़ाते हैं और भावनात्मक संतुलन के लिए मस्तिष्क की न्यूरल संरचनाओं को पुनः प्रशिक्षित करते हैं।
प्रत्येक तत्व एक मानसिक कार्य से जुड़ा है:
जल – भावना और प्रवाह
अग्नि – इच्छा शक्ति और दिशा
पृथ्वी – स्थिरता और ग्राउंडिंग
वायु – विचार और श्वास
अन्न/शरीर – पोषण और आत्म-मूल्य
इनके साथ कार्य करने से ज्योतिष अमूर्त विचार न रहकर एक जीवंत, उपचारात्मक अनुष्ठान बन जाता है।
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🌞 सूर्य: प्राणशक्ति, अहं, उद्देश्य
जल उपाय: प्रतिदिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देना केवल कर्मकांड नहीं है; यह आत्मविश्वास और उद्देश्य की भावना को मन में स्थापित करता है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके तांबे के लोटे से जल अर्पित करना अहं के समर्पण का प्रतीक है। प्रातः सूर्य प्रकाश से सेरोटोनिन बढ़ता है और यह अभ्यास आत्म-विश्वास को मजबूत करता है।
अग्नि उपाय: सूर्योदय पर घी का दीपक जलाकर उसमें शांत दृष्टि से देखना संकल्प-शक्ति को मजबूत करता है। यह मस्तिष्क को दिशा चुनने का अभ्यास कराता है।
पृथ्वी उपाय: नंगे पांव धरती पर खड़े होकर सूर्य की ओर देखना शरीर को स्थिरता देता है। यह तनाव घटाता है और आत्मविश्वास की देहगत स्मृति बनाता है।
वायु उपाय: 5 मिनट सूर्यभेदी प्राणायाम तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है और आलस्य दूर करता है।
अन्न/शरीर उपाय: सूर्य अर्घ्य के बाद हल्का, सात्त्विक और गरम नाश्ता आत्म-सम्मान और अनुशासन का भाव बढ़ाता है।
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🌙 चंद्र: भावना, अंतर्ज्ञान, सुरक्षा
जल उपाय: शिवलिंग पर दूध मिश्रित जल से अभिषेक मन को शांत करता है और भावनात्मक तनाव को बाहर निकालता है।
अग्नि उपाय: पूर्णिमा की रात जल पात्र में दीपक का प्रतिबिंब देखना भावना और स्पष्टता का संतुलन बनाता है।
पृथ्वी उपाय: चंद्र दर्शन करते हुए धरती को स्पर्श करना शरीर को सुरक्षा का अनुभव कराता है।
वायु उपाय: सोने से पहले 4 गिनती में श्वास और 6 गिनती में श्वास-त्याग चिंता कम करता है।
अन्न/शरीर उपाय: हल्का रात्रि भोजन और कम उत्तेजना भावनात्मक स्वच्छता का अनुष्ठान बन जाता है।
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🔴 मंगल: कर्म, क्रोध, साहस
जल उपाय: श्रमिकों को जल देना आक्रोश को सेवा में बदलता है।
अग्नि उपाय: कार्य से पहले लाल दीपक जलाना लक्ष्य पर एकाग्रता बढ़ाता है।
पृथ्वी उपाय: नंगे पांव चलना या व्यायाम करना क्रोध को सुरक्षित रूप से बाहर निकालता है।
वायु उपाय: कपालभाति प्राणायाम मानसिक अशांति को शुद्ध करता है।
अन्न/शरीर उपाय: अदरक, काली मिर्च जैसे हल्के मसाले संतुलित रूप से मंगल ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं।
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🟢 बुध: बुद्धि, संवाद, अनुकूलन
जल उपाय: प्रतिदिन पौधों को पानी देना मन को स्थिर करता है।
अग्नि उपाय: पढ़ाई से पहले दीपक जलाना ध्यान को प्रशिक्षित करता है।
पृथ्वी उपाय: एक ही स्थान पर बैठकर हाथ से लिखना एकाग्रता बढ़ाता है।
वायु उपाय: नाड़ी शोधन प्राणायाम विचारों को संतुलित करता है।
अन्न/शरीर उपाय: हल्का और रेशा युक्त भोजन मानसिक स्पष्टता देता है।
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🟡 गुरु: ज्ञान, आस्था, विस्तार
जल उपाय: मंदिर में जल दान कृतज्ञता और उदारता का भाव बढ़ाता है।
अग्नि उपाय: गुरुवार को दीपक जलाकर शास्त्र पढ़ना मन को स्थिर करता है।
पृथ्वी उपाय: धरती पर बैठकर चिंतन करना विचारों को जीवन में उतारता है।
वायु उपाय: मंत्रोच्चार या सकारात्मक वाक्य बोलना तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
अन्न/शरीर उपाय: प्रसाद ग्रहण करना भोजन को पवित्र अनुभव बनाता है।
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💕 शुक्र: प्रेम, सौंदर्य, सुख
जल उपाय: मीठा शरबत बांटना संबंधों में मिठास लाता है।
अग्नि उपाय: सुगंधित दीपक या अगरबत्ती सौंदर्य बोध जगाती है।
पृथ्वी उपाय: फूलों और पौधों के साथ काम करना आत्म-मूल्य बढ़ाता है।
वायु उपाय: संगीत के साथ श्वास-प्रश्वास सामंजस्य बढ़ाता है।
अन्न/शरीर उपाय: सुंदर ढंग से भोजन बनाकर साझा करना संबंध चिकित्सा है।
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⚫ शनि: अनुशासन, समय, कर्म
जल उपाय: वृद्धों को जल सेवा करुणा जगाती है।
अग्नि उपाय: शनिवार को तिल के तेल का दीपक धैर्य का प्रतीक है।
पृथ्वी उपाय: रोज थोड़ा सफाई कार्य आदत निर्माण करता है।
वायु उपाय: प्रतीक्षा करते समय मोबाइल न देखना सहनशीलता सिखाता है।
अन्न/शरीर उपाय: सप्ताह में एक दिन सरल भोजन संयम सिखाता है।
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🌪 राहु: आसक्ति, भ्रम, लालसा
जल उपाय: पक्षियों के लिए जल रखना अनासक्ति सिखाता है।
अग्नि उपाय: दीपक देखकर विचारों को केवल “विचार” मानकर जाने देना माइंडफुलनेस है।
पृथ्वी उपाय: पेड़ या दीवार से पीठ लगाकर बैठना भ्रम को तोड़ता है।
वायु उपाय: विचार लिखकर फिर गहरी श्वास लेना चिंता कम करता है।
अन्न/शरीर उपाय: निर्णय के दिनों में अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से बचना मन को सुरक्षित रखता है।
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🌑 केतु: वैराग्य, आध्यात्म, पूर्व कर्म
जल उपाय: आवारा पशुओं को जल देना करुणा और मुक्ति का अभ्यास है।
अग्नि उपाय: मंद प्रकाश में दीपक के साथ आत्म-प्रश्न (“यह कौन अनुभव कर रहा है?”) अवचेतन को उजागर करता है।
पृथ्वी उपाय: प्रतिदिन कुछ मिनट मौन में धरती पर बैठना आंतरिक शांति देता है।
वायु उपाय: विचारों को बादलों की तरह आते-जाते देखना साक्षी भाव सिखाता है।
अन्न/शरीर उपाय: कभी-कभी सादा भोजन आत्म-नियंत्रण सिखाता है।
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प्लेसबो और अर्थ प्रभाव
ये उपाय इसलिए भी काम करते हैं क्योंकि मन उन्हें अर्थ देता है। “प्लेसबो” नकली नहीं, बल्कि मस्तिष्क की उपचार शक्ति का सक्रिय होना है।
सुरक्षा और नैतिकता
उपाय अहिंसक हों। भय नहीं, सशक्तिकरण का भाव रखें। यह चिकित्सा या मनोचिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक अभ्यास हैं।
व्यक्तिगत चयन
1–2 उपाय चुनें जो भावनात्मक रूप से आपको सच्चे लगें। 21–43 दिन तक स्वयं पर प्रयोग करें और बदलाव देखें।
सांस्कृतिक व प्रतीकात्मक स्तर
ये उपाय तीन स्तरों पर काम करते हैं —
प्रतीकात्मक (archetype)
मनोवैज्ञानिक (व्यवहार, भावना, विचार)
ऊर्जात्मक/आध्यात्मिक (जो इसमें विश्वास करते हैं)
आधुनिक चिकित्सा से एकीकरण
जल = भावनात्मक संतुलन
अग्नि = प्रेरणा और लक्ष्य
पृथ्वी = ग्राउंडिंग और आदत निर्माण
वायु = श्वास और विचार नियंत्रण
अन्न = आत्म-देखभाल और सीमाएं
अशांत संसार में ये देह-आधारित उपाय हमें याद दिलाते हैं:
सच्चा उपचार तब होता है जब संकल्प और कर्म जीवन के हर स्तर पर एक हो जाते हैं।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय।
पीड़ा और समस्याओं के पीछे का विज्ञान, साधना के गुप्त प्रभाव जो सामान्य धारणा से भिन्न होते हैं, ज्योतिषीय नियम जो पुस्तकों के अनुसार काम नहीं करते।
हम में से अधिकांश जो आध्यात्मिक क्षेत्रों में गहराई से उतरते हैं, उन्होंने अनगिनत स्तर की पीड़ा और आघात का अनुभव किया है। यह सार्वभौमिक नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा होता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह घटनाएं लगातार होती रहती हैं, जो हमारे भीतर की अच्छाई को चुनौती देती हैं। अक्सर पूछा जाता है कि ऐसा क्यों होता है और इतनी क्रूरता से क्यों होता है, और सबसे महत्वपूर्ण, इतनी बार क्यों होता है? चलिए जानते हैं:-
🦜 सबसे पहले, यह केवल सच्चे साधक के साथ होता है। यह जीवन में नकारात्मक तत्वों द्वारा उत्पन्न प्रभावों के समान भी है। इसलिए, इन दोनों के बीच अंतर करना आवश्यक है और जाहिर है कि जो व्यक्ति पीड़ित है, वह इसका कारण नहीं समझ सकता क्योंकि उसका मन उस स्तर पर नहीं होता है कि वह मूल कारण को समझ सके।
🦜 नियमित परीक्षण होते रहेंगे। आपको धन अर्जित करने के अवसर मिलेंगे जिसमें दूसरों को धोखा देना, कामुक लालच से मार्ग से भटकना, विरोधियों को नुकसान पहुँचाने के मौके, और जब आप गरीबी के चरम पर होंगे, तब गलत तरीके से धन का आगमन। जब आपकी आत्मा बुराइयों की ओर गिरती है, तो ब्राह्मण उसी क्षण आपको छोड़ देता है। आप अमीर, धनी और भ्रष्ट साधक बन जाते हैं।
🦜 जब आप साधना करते हैं या जब आप किसी आध्यात्मिक रूप से उन्नत व्यक्ति से मिलते हैं या जब आप किसी देवता की नजरों में महत्वपूर्ण हो जाते हैं, तो आपके द्वारा किए गए कर्मों के परिणाम तीव्र हो जाते हैं। यह केतु और राहु दोनों के कारण होता है क्योंकि परब्रह्मण हमें बंधनों से मुक्त करना चाहता है। सबसे पहले वह हमारे कर्म बंधनों को कम करता है, और इसी के परिणामस्वरूप जीवन में सबसे खराब घटनाओं की बाढ़ आ जाती है।
🦜 पीड़ा की तीव्रता और लगातार होने वाली घटनाएं यह दर्शाती हैं कि भगवान हम पर किस प्रकार कार्य कर रहे हैं। यह हमारे कर्म ऋणों के स्तर को भी इंगित करता है। इसलिए जब यह सब हो रहा हो, तो धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।
🦜 साधक कभी मरता नहीं है, वह हमेशा अंतिम क्षण में बच जाता है, उसे हमेशा दिव्य सहायता मिलती है, और हमेशा एक अदृश्य सहायता होती है। इष्ट देवता से जुड़े किसी भी ग्रह द्वारा यह प्रभाव उत्पन्न होता है। जो ग्रह अत्यधिक शुभ, उच्च अवस्था में हो, वह सामान्य रूप से (केवल साधक के लिए) बुरा दशा देता है। यह ठीक उसके विपरीत होता है जो ग्रंथों में लिखा होता है। भौतिक लाभ की कमी और आध्यात्मिक अनुभवों की प्रचुरता होती है। हालांकि, आपको धन तब मिलेगा जब जरूरत होगी।
🦜 जब आप आध्यात्मिक रूप से ऊँचे हो जाते हैं, तो बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। हालांकि, भगवान यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको किसी भी प्रकार के आनंद से वंचित रखा जाए। आप ध्यानमग्न हो जाते हैं, और भले ही आपको जीवन में हर भौतिक या अन्य रूप में सब कुछ मिल जाए, आप उसका आनंद नहीं ले पाएंगे। यह आपके लिए अर्थहीन हो जाएगा।
🦜 कुछ शारीरिक लक्षणों में साधना के दौरान झटके आना, सम्मोहन की स्थिति, दूसरों के बारे में सब कुछ जानना, हर पल में खुश रहना, शत्रुता की कमी, अभिमान, ईर्ष्या, काम व अन्य पापों की कमी शामिल है। आप भगवान को हर जगह देखते हैं और वही करते हैं जो वे आपसे कहते हैं। आप वास्तव में कोई नहीं बन जाते हैं।
🦜 उच्च ग्रह, आत्मकारक और अमात्यकारक अच्छे होने के बावजूद बुरे परिणाम देंगे। कोई भी भौतिक लाभ गायब हो जाएगा। राहु पंचम और केतु एकादश में या इसके विपरीत होने पर स्थिति तीव्रतम हो जाती है ताकि ऋणों को कम किया जा सके। केतु इसे बहुत बुरे तरीके से करता है। राहु भ्रम और जाल तैयार करता है।
🦜 मजबूत षष्ठमेश (छठे घर का स्वामी) वर्षों की तपस्या और पीड़ा का कारण बनेगा क्योंकि हमें संसार को बहुत कुछ लौटाना है। व्यक्ति पर उपाय काम नहीं करेंगे क्योंकि वह भगवान का है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
A singh
अगर एक तोता 1 घंटे में 1 गाना गाता है,
तो 3 तोते 3 घंटे में कितने गाने गाएंगे?
विकल्प:
A) 3
B) 9
C) 6
D) तोते बहस करेंगे 😜
sahi jabab de😆😆
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
भारत के संन्यासी (समयरेखा और योगदान)
वयम् अमृतस्य पुत्राः (श्वेताश्वतरोपनिषद्)
अमृतस्य पुत्रा वयं, सबलं सदयं नो हृदयम्।
गतमितिहासं पुनरुन्नेतुं, युवसङ्घटनं नवमिह कर्तुम्॥
भारतकीर्तिं दिशि दिशि नेतुं, दृढसंकल्पा विपदि विजेतुम्।
ऋषिसन्देशं जगति नयेम, सत्त्वशालिनो मनसि भवेम॥
कष्टसमुद्रं सपदि तरेम, स्वीकृतकार्यं न हि त्यजेम।
दीनजनानां दुःखविमुक्तिं, महतां विषये निर्मलभक्तिम्॥
सेवाकार्ये सन्ततशक्तिं, सदा भजेम भगवति रक्तिम्।
सर्वे अमृतस्य पुत्राः शृण्वन्तु ये दिव्यानि धामानि आतस्थुः॥
युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभिर्विश्लोक एतु पथ्येव सूरेः।
शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्रा आ ये धामानि दिव्यानि तस्थुः॥
(श्वेताश्वतरोपनिषद् – द्वितीय अध्याय)
---
भारत की आध्यात्मिक धरोहर उसके संतों, ऋषियों और रहस्यवादी साधकों के जीवन से सदैव प्रकाशित होती रही है।
हम अमरत्व की संतान हैं, इसलिए हमारे हृदय बलवान और करुणामय हों।
आओ, हम भूले हुए इतिहास को पुनर्जीवित करें और एक नवीन युवा संगठन का निर्माण करें।
भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और विपत्ति में भी दृढ़ संकल्प के साथ हम विजयी बनें।
ऋषियों के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ और अपने चरित्र को उत्तम विचारों से समृद्ध करें।
कष्टों के सागर को शीघ्र पार करें और जो कार्य हमने स्वीकार किया है उसे कभी न छोड़ें।
दीन-दुखियों की पीड़ा दूर करने का प्रयास करें और महान आत्माओं के प्रति निर्मल भक्ति रखें।
सेवा कार्य में निरंतर शक्ति बनी रहे और हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम सदा जाग्रत रहे।
अमृत के पुत्र—जो दिव्य लोकों को प्राप्त हुए हैं—उनके वचनों को सुनें और अनुसरण करें।
---
वेद कहते हैं कि समस्त प्राणी अमर और अविनाशी परमात्मा की संतान हैं।
जैसे संतान अपने पिता के गुणों को धारण करती है, वैसे ही वेद के अनुसार हम भी अमर स्वरूप हैं।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है—संसार की प्रत्येक वस्तु निरंतर बदलती रहती है।
संपूर्ण ब्रह्मांड में जन्म, मृत्यु, निर्माण और विनाश की प्रक्रिया हर क्षण चलती रहती है।
शरीर माता-पिता से जन्म लेता है, पर प्रकृति के नियम के अनुसार जड़ या चेतन कोई भी वस्तु सदा एक-सी नहीं रहती।
अतीत की ऐतिहासिक विरासत को पुनः जाग्रत करने के लिए युवाओं को संगठित होकर नए भारत का निर्माण करना चाहिए।
वे महान संत स्मरणीय हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज के कल्याण के लिए दिव्य जीवन जिया।
भारत की महिमा को चारों दिशाओं में फैलाएँ और दृढ़ निश्चय के साथ संकटों में विजयी हों।
ऋषियों के संदेश को विश्व में प्रचारित करें और अपने व्यक्तित्व को उत्तम विचारों से अलंकृत करें।
भक्ति के साथ सेवा करें और ईश्वर के प्रति आध्यात्मिक उत्साह को विकसित करें।
अमृत के पुत्र—दिव्य संस्थानों, तीर्थों, संतों और महापुरुषों के पदचिह्नों का अनुसरण करें और उनके उपदेश आत्मसात करें।
नीचे दिए गए महान व्यक्तित्व “अमृतपुत्र” कहे जाते हैं, जिनकी शिक्षाओं और कर्मों ने पीढ़ियों को प्रभावित किया है:
(संक्षिप्त हिंदी रूपांतरण)
1. बुद्ध (563–483 ई.पू.) – करुणा, अहिंसा और चार आर्य सत्यों का उपदेश; एशिया में शांति का मार्ग।
2. महावीर (599–527 ई.पू.) – अहिंसा, सत्य और तपस्या; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर।
3. आदि शंकराचार्य (502 ई.पू.) – अद्वैत वेदांत के आचार्य; चार मठों की स्थापना।
4. रामानुजाचार्य (1017–1137) – विशिष्टाद्वैत वेदांत; भक्ति और समरसता।
5. गुरु नानक (1469–1539) – सिख धर्म के प्रवर्तक; समानता और सेवा का संदेश।
6. कबीर (1440–1510) – निर्गुण भक्ति; जाति-पंथ का विरोध।
7. तुलसीदास (1532–1623) – रामचरितमानस के रचयिता।
8. चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) – संकीर्तन और कृष्ण प्रेम का प्रचार।
9. गोरखनाथ (10–11वीं शताब्दी) – नाथ योग परंपरा के प्रवर्तक।
10. लाहिड़ी महाशय (1828–1895) – क्रिया योग का प्रचार।
11. रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) – धर्म समन्वय और रामकृष्ण मिशन की प्रेरणा।
12. स्वामी विवेकानंद (1863–1902) – वेदांत और योग का विश्व प्रचार।
13. श्री अरविंद (1872–1950) – समग्र योग और आध्यात्मिक उत्क्रांति।
14. तोतापुरी (18वीं शताब्दी) – अद्वैत साधक; रामकृष्ण के गुरु।
15. देवरहा बाबा (20वीं शताब्दी) – दीर्घायु और सेवा।
16. जलाराम बापा (1799–1881) – दया और सेवा के प्रतीक।
17. विशुद्धानंद परमहंस (1853–1937) – तंत्र, योग और भक्ति का समन्वय।
18. त्रैलंग स्वामी (1607–1887) – महान योगी, दीर्घायु।
19. पद्मपादाचार्य – शंकराचार्य के प्रमुख शिष्य।
20. नित्यानंद प्रभु – चैतन्य आंदोलन के सहचर।
21. भक्त हरिदास – मीरा बाई के गुरु।
22. सनतदासजी – समाज सुधारक संत।
23. मधुसूदन सरस्वती – अद्वैत सिद्धि के रचयिता।
24. विजयकृष्ण गोस्वामी – भक्ति मार्ग के संत।
25. स्वामी प्रणवानंद – भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक।
26. स्वामी गंभीरा नंद – वेदों के अनुवादक।
27. बालनाथजी – नाथ योगी।
28. रामप्रसाद सेन – काली भक्ति के कवि।
29. साधक रामदेव – योग साधक।
30. खथिया बाबा – तपस्वी योगी।
31. रमण महर्षि (1879–1950) – “मैं कौन हूँ?” आत्मविचार।
32. भोला गिरी – करुणा और सेवा।
ए
33. महावतार बाबाजी – क्रिया योग के प्रवर्तक।
34. समर्थ रामदास (1608–1681) – दासबोध के रचयिता।
35. श्री भोलनाथ – योग और सेवा।
36. लोकनाथ ब्रह्मचारी (1730–1890) – तपस्या और चमत्कार।
37. जगतबंधु प्रभु (1871–1921) – भक्ति और समाज सेवा।
ये संत अद्वैत, भक्ति, तंत्र, योग और समाज सुधार—भारत की आध्यात्मिक विविधता के प्रतीक हैं।
इन संतों ने मानव के भीतर छिपे चेतना-रस (अमृत) को जाग्रत किया और धर्म, करुणा, साहस, सत्य और भक्ति का संदेश दिया।
हम अमृत के पुत्र हैं—अर्थात शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है।
श्वेताश्वतर उपनिषद, भगवद्गीता और अष्टावक्र गीता कहते हैं—बंधन से मुक्त हो, जागरूकता, आनंद और शांति में स्थित हो।
धर्मपूर्वक कर्म करते हुए दिव्य चेतना का अमृत पान करते रहो।
पृथ्वी के संतों का मूल सिद्धांत:
दुखियों की पीड़ा दूर करो और समाज कल्याण में दृढ़ रहो।
मन, वाणी और कर्म को प्रेम, सेवा, संस्कृति और भारतीय धरोहर के संरक्षण में समर्पित करो।
“अमृतस्य पुत्र” को शरीर से नहीं, आत्मा की दृष्टि से समझो और संतों के मार्ग का अनुसरण करो।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं:
“जातस्य हि ध्रुवं मृत्यु:” – जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
अतः शरीर अमर नहीं हो सकता, पर आत्मा जन्म-मरण से परे है।
वेद का महान मंत्र “वयम् अमृतस्य पुत्राः” शरीर नहीं, आत्मा को संबोधित करता है।
अष्टावक्र गीता में कहा गया है:
यदि देह से स्वयं को अलग जानकर आत्मा में स्थित हो जाओ,
तो उसी क्षण तुम सुखी, शांत और बंधनमुक्त हो जाते हो।
आत्म-अमृत के अनुभव के बाद क्या करना चाहिए?
शास्त्र कहते हैं:
यावत जीवेत – सुखं जीवेत, धर्मकार्यं कृत्वा अमृतं पिबेत।
जब तक जियो, सुखपूर्वक जियो;
धर्म के अनुसार कर्म करो, परोपकार में लगे रहो और ज्ञान रूपी अमृत का पान करते रहो।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
A singh
एक आदमी 1 घंटे में 1 कप चाय पीता है।
अगर 3 आदमी 2 घंटे में कितने कप चाय पीते हैं?
विकल्प:
A) 2
B) 6
C) 10
D) चाय खत्म हो जाएगी 😂
sahi jabab de 😆😆
A singh
एक मुर्गा 1 दिन में 1 अंडा देता है।
अगर आप उसके अंडे को रोज़ खा लें, तो 5 दिन बाद कितने अंडे बचे होंगे?
विकल्प:
A) 0
B) 5
C) 1
D) 10
😆 जल्दी जवाब देना!
A singh
एक आदमी रोज़ नदी पार करता है, मगर कभी भी गीला नहीं होता। कैसे? 🌊
उत्तर सोचकर कमेंट करें!😆
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
भारत के बयालीस संन्यासी (समयरेखा और योगदान)
वयम् अमृतस्य पुत्राः (श्वेताश्वतरोपनिषद्)
अमृतस्य पुत्रा वयं, सबलं सदयं नो हृदयम्।
गतमितिहासं पुनरुन्नेतुं, युवसङ्घटनं नवमिह कर्तुम्॥
भारतकीर्तिं दिशि दिशि नेतुं, दृढसंकल्पा विपदि विजेतुम्।
ऋषिसन्देशं जगति नयेम, सत्त्वशालिनो मनसि भवेम॥
कष्टसमुद्रं सपदि तरेम, स्वीकृतकार्यं न हि त्यजेम।
दीनजनानां दुःखविमुक्तिं, महतां विषये निर्मलभक्तिम्॥
सेवाकार्ये सन्ततशक्तिं, सदा भजेम भगवति रक्तिम्।
सर्वे अमृतस्य पुत्राः शृण्वन्तु ये दिव्यानि धामानि आतस्थुः॥
युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभिर्विश्लोक एतु पथ्येव सूरेः।
शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्रा आ ये धामानि दिव्यानि तस्थुः॥
(श्वेताश्वतरोपनिषद् – द्वितीय अध्याय)
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भारत की आध्यात्मिक धरोहर उसके संतों, ऋषियों और रहस्यवादी साधकों के जीवन से सदैव प्रकाशित होती रही है।
हम अमरत्व की संतान हैं, इसलिए हमारे हृदय बलवान और करुणामय हों।
आओ, हम भूले हुए इतिहास को पुनर्जीवित करें और एक नवीन युवा संगठन का निर्माण करें।
भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और विपत्ति में भी दृढ़ संकल्प के साथ हम विजयी बनें।
ऋषियों के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ और अपने चरित्र को उत्तम विचारों से समृद्ध करें।
कष्टों के सागर को शीघ्र पार करें और जो कार्य हमने स्वीकार किया है उसे कभी न छोड़ें।
दीन-दुखियों की पीड़ा दूर करने का प्रयास करें और महान आत्माओं के प्रति निर्मल भक्ति रखें।
सेवा कार्य में निरंतर शक्ति बनी रहे और हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम सदा जाग्रत रहे।
अमृत के पुत्र—जो दिव्य लोकों को प्राप्त हुए हैं—उनके वचनों को सुनें और अनुसरण करें।
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वेद कहते हैं कि समस्त प्राणी अमर और अविनाशी परमात्मा की संतान हैं।
जैसे संतान अपने पिता के गुणों को धारण करती है, वैसे ही वेद के अनुसार हम भी अमर स्वरूप हैं।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है—संसार की प्रत्येक वस्तु निरंतर बदलती रहती है।
संपूर्ण ब्रह्मांड में जन्म, मृत्यु, निर्माण और विनाश की प्रक्रिया हर क्षण चलती रहती है।
शरीर माता-पिता से जन्म लेता है, पर प्रकृति के नियम के अनुसार जड़ या चेतन कोई भी वस्तु सदा एक-सी नहीं रहती।
अतीत की ऐतिहासिक विरासत को पुनः जाग्रत करने के लिए युवाओं को संगठित होकर नए भारत का निर्माण करना चाहिए।
वे महान संत स्मरणीय हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज के कल्याण के लिए दिव्य जीवन जिया।
भारत की महिमा को चारों दिशाओं में फैलाएँ और दृढ़ निश्चय के साथ संकटों में विजयी हों।
ऋषियों के संदेश को विश्व में प्रचारित करें और अपने व्यक्तित्व को उत्तम विचारों से अलंकृत करें।
भक्ति के साथ सेवा करें और ईश्वर के प्रति आध्यात्मिक उत्साह को विकसित करें।
अमृत के पुत्र—दिव्य संस्थानों, तीर्थों, संतों और महापुरुषों के पदचिह्नों का अनुसरण करें और उनके उपदेश आत्मसात करें।
नीचे दिए गए बयालीस महान व्यक्तित्व “अमृतपुत्र” कहे जाते हैं, जिनकी शिक्षाओं और कर्मों ने पीढ़ियों को प्रभावित किया है:
(संक्षिप्त हिंदी रूपांतरण)
1. बुद्ध (563–483 ई.पू.) – करुणा, अहिंसा और चार आर्य सत्यों का उपदेश; एशिया में शांति का मार्ग।
2. महावीर (599–527 ई.पू.) – अहिंसा, सत्य और तपस्या; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर।
3. आदि शंकराचार्य (502 ई.पू.) – अद्वैत वेदांत के आचार्य; चार मठों की स्थापना।
4. रामानुजाचार्य (1017–1137) – विशिष्टाद्वैत वेदांत; भक्ति और समरसता।
5. गुरु नानक (1469–1539) – सिख धर्म के प्रवर्तक; समानता और सेवा का संदेश।
6. कबीर (1440–1510) – निर्गुण भक्ति; जाति-पंथ का विरोध।
7. तुलसीदास (1532–1623) – रामचरितमानस के रचयिता।
8. चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) – संकीर्तन और कृष्ण प्रेम का प्रचार।
9. गोरखनाथ (10–11वीं शताब्दी) – नाथ योग परंपरा के प्रवर्तक।
10. लाहिड़ी महाशय (1828–1895) – क्रिया योग का प्रचार।
11. रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) – धर्म समन्वय और रामकृष्ण मिशन की प्रेरणा।
12. स्वामी विवेकानंद (1863–1902) – वेदांत और योग का विश्व प्रचार।
13. श्री अरविंद (1872–1950) – समग्र योग और आध्यात्मिक उत्क्रांति।
14. तोतापुरी (18वीं शताब्दी) – अद्वैत साधक; रामकृष्ण के गुरु।
15. देवरहा बाबा (20वीं शताब्दी) – दीर्घायु और सेवा।
16. जलाराम बापा (1799–1881) – दया और सेवा के प्रतीक।
17. विशुद्धानंद परमहंस (1853–1937) – तंत्र, योग और भक्ति का समन्वय।
18. त्रैलंग स्वामी (1607–1887) – महान योगी, दीर्घायु।
19. पद्मपादाचार्य – शंकराचार्य के प्रमुख शिष्य।
20. नित्यानंद प्रभु – चैतन्य आंदोलन के सहचर।
21. भक्त हरिदास – मीरा बाई के गुरु।
22. सनतदासजी – समाज सुधारक संत।
23. मधुसूदन सरस्वती – अद्वैत सिद्धि के रचयिता।
24. विजयकृष्ण गोस्वामी – भक्ति मार्ग के संत।
25. स्वामी प्रणवानंद – भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक।
26. स्वामी गंभीरा नंद – वेदों के अनुवादक।
27. बालनाथजी – नाथ योगी।
28. रामप्रसाद सेन – काली भक्ति के कवि।
29. साधक रामदेव – योग साधक।
30. खथिया बाबा – तपस्वी योगी।
31. रमण महर्षि (1879–1950) – “मैं कौन हूँ?” आत्मविचार।
32. भोला गिरी – करुणा और सेवा।
ए
33. महावतार बाबाजी – क्रिया योग के प्रवर्तक।
34. समर्थ रामदास (1608–1681) – दासबोध के रचयिता।
35. श्री भोलनाथ – योग और सेवा।
36. लोकनाथ ब्रह्मचारी (1730–1890) – तपस्या और चमत्कार।
37. जगतबंधु प्रभु (1871–1921) – भक्ति और समाज सेवा।
ये संत अद्वैत, भक्ति, तंत्र, योग और समाज सुधार—भारत की आध्यात्मिक विविधता के प्रतीक हैं।
इन संतों ने मानव के भीतर छिपे चेतना-रस (अमृत) को जाग्रत किया और धर्म, करुणा, साहस, सत्य और भक्ति का संदेश दिया।
हम अमृत के पुत्र हैं—अर्थात शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है।
श्वेताश्वतर उपनिषद, भगवद्गीता और अष्टावक्र गीता कहते हैं—बंधन से मुक्त हो, जागरूकता, आनंद और शांति में स्थित हो।
धर्मपूर्वक कर्म करते हुए दिव्य चेतना का अमृत पान करते रहो।
पृथ्वी के संतों का मूल सिद्धांत:
दुखियों की पीड़ा दूर करो और समाज कल्याण में दृढ़ रहो।
मन, वाणी और कर्म को प्रेम, सेवा, संस्कृति और भारतीय धरोहर के संरक्षण में समर्पित करो।
“अमृतस्य पुत्र” को शरीर से नहीं, आत्मा की दृष्टि से समझो और संतों के मार्ग का अनुसरण करो।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं:
“जातस्य हि ध्रुवं मृत्यु:” – जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
अतः शरीर अमर नहीं हो सकता, पर आत्मा जन्म-मरण से परे है।
वेद का महान मंत्र “वयम् अमृतस्य पुत्राः” शरीर नहीं, आत्मा को संबोधित करता है।
अष्टावक्र गीता में कहा गया है:
यदि देह से स्वयं को अलग जानकर आत्मा में स्थित हो जाओ,
तो उसी क्षण तुम सुखी, शांत और बंधनमुक्त हो जाते हो।
आत्म-अमृत के अनुभव के बाद क्या करना चाहिए?
शास्त्र कहते हैं:
यावत जीवेत – सुखं जीवेत, धर्मकार्यं कृत्वा अमृतं पिबेत।
जब तक जियो, सुखपूर्वक जियो;
धर्म के अनुसार कर्म करो, परोपकार में लगे रहो और ज्ञान रूपी अमृत का पान करते रहो।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
SAYRI K I N G
उसे गुरूर है उसे बहुत मिलेंगे
मुझे सब्र है मेरे जैसा एक ना होगा
MASHAALLHA KHAN
कल भी कितना खुबसुरत होता है ना
जिसके लिए हम आज का गला घोट देते,
फिर जब वह कल आता है ना तो फिर हम आज
को कौसते है .
-MASHAALLHA
Raju kumar Chaudhary
20 साल की एक युवती को 40 से अधिक उम्र के एक पुरुष से प्रेम हो गया — लेकिन जब वह उसे अपनी माँ से मिलवाने ले गई, तो माँ उसे गले लगाकर रोने लगी… क्योंकि वह उसके लिए कोई बहुत ही ख़ास व्यक्ति था…
मेरा नाम सिया है। मैं 20 साल की हूँ और दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में डिज़ाइन की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हूँ।
लोग अक्सर कहते हैं कि मैं अपनी उम्र से बड़ी लगती हूँ — शायद इसलिए क्योंकि मेरा पालन-पोषण सिर्फ मेरी माँ श्रीमती राधा मेहता ने किया।
मेरे पिता का देहांत तब हो गया था जब मैं बहुत छोटी थी।
उसके बाद माँ ने कभी दोबारा शादी नहीं की।
उन्होंने अकेले ही मुझे बड़ा किया — बिना थके, बिना शिकायत किए।
वह एक मज़बूत, मेहनती महिला हैं और हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं।
मेरी ज़िंदगी उस दिन बदल गई, जब मैं एक स्वयंसेवी प्रोजेक्ट में शामिल हुई।
वहीं मेरी मुलाक़ात अमित मल्होत्रा से हुई — जो तकनीकी टीम के समन्वयक थे।
उनकी उम्र 40 से कुछ ज़्यादा थी।
वह शांत स्वभाव के थे, सभ्य थे, और उनकी बात करने के अंदाज़ में एक हल्की-सी उदासी थी —
जो मेरे भीतर जिज्ञासा और सहानुभूति जगा गई।
शुरुआत में मैं बस उनका सम्मान करती थी।
लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि जब भी वह पास होते हैं, मेरा दिल तेज़ धड़कने लगता है।
अमित की नौकरी अच्छी थी।
वह अकेले रहते थे और कई साल पहले उनका तलाक़ हो चुका था — कोई संतान नहीं थी।
वह अपने अतीत के बारे में ज़्यादा बात नहीं करते थे।
बस एक बार उन्होंने कहा था:
“मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ बहुत कीमती खो चुका हूँ…
अब बस शांति से जीना चाहता हूँ।”
हमारे बीच सब कुछ स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ा —
ना कोई जल्दबाज़ी, ना बड़े वादे —
बस सम्मान और सच्चा अपनापन।
लोग बातें करते थे:
“वह इतनी छोटी है…
उसे इस उम्र के आदमी में क्या दिखता है?”
लेकिन मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।
उनके साथ मुझे सुकून मिलता था —
ऐसा सुकून जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
एक दिन अमित ने मुझसे कहा:
“सिया, मैं तुम्हारी माँ से मिलना चाहता हूँ।
अब मैं हमारे रिश्ते को छुपाना नहीं चाहता।”
मैं घबरा गई।
मेरी माँ हमेशा से सतर्क और बहुत ज़्यादा संरक्षण करने वाली रही हैं।
लेकिन अगर हमारा रिश्ता सच्चा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी।
अगले रविवार, अमित हमारे घर आए —
हाथ में गुलदाउदी के फूलों का गुलदस्ता था,
जो मेरी माँ के पसंदीदा फूल थे —
मैंने कभी यूँ ही ज़िक्र किया था, और उन्हें याद रह गया।
हम हाथों में हाथ डाले घर के अंदर गए।
अमित शांत दिख रहे थे…
लेकिन जैसे ही घर का दरवाज़ा खुला, सब कुछ बदल गया।
माँ आँगन में पौधों को पानी दे रही थीं।
जैसे ही उन्होंने मुड़कर हमें देखा —
वह एकदम से ठिठक गईं।
उनके हाथ से पानी का कैन गिर गया।
उन्होंने मुँह पर हाथ रखा…
और फिर अचानक अमित की ओर दौड़ीं।
उन्होंने उन्हें ज़ोर से गले लगा लिया —
और ऐसे रोने लगीं जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।
“हे भगवान… अमित?!
क्या तुम सच में हो?!”
मैं सन्न रह गई।
अमित भी हिल नहीं पाए।
उनकी आवाज़ काँप रही थी:
“राधा?…
यह कैसे हो सकता है…”
मैं दोनों को देखती रह गई —
कुछ भी समझ नहीं पा रही थी।
मेरी माँ सिसकते हुए बोलीं,
उनके हाथ काँप रहे थे:
“बीस साल, अमित…
पूरे बीस साल मैंने यही समझा कि तुम मर चुके हो…”
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
उनके आँसू…
उनके चेहरे का दर्द…
और वह भारी, बोझिल ख़ामोशी…
और उसी पल मुझे समझ आ गया—
जिस आदमी से मैं प्रेम करती थी,
वह मेरी माँ के अतीत का ऐसा हिस्सा था
जिसकी गहराई की मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी।
👉 पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट में दिए गए लिंक पर क्लिक करें! 👇�
Nandani
तुम मेरा सबसे महंगा शौक हो
तुम पर वक्त नहीं
एहसास खर्च होते हैं।।
❤️
kattupaya s
Good afternoon friends.. going for short 😴
Lalit Kishor Aka Shitiz
dream come true......
mohansharma
मैं जिसकी तरफ़ रास्ता बनाता गया..
वही मेरे रास्ते में कांटे बिछाता रहा..
kattupaya s
Time for lunch. i planned it simple and tasty. then my choice is veg briyani
kattupaya s
feeling sleepy.. day sleeping is best @holidays
A singh
🦠 मानव शरीर में सबसे लंबी हड्डी कौन सी है?
A) ह्यूमरस (Humerus)
B) फेमर (Femur)
C) टिबिया (Tibia)
D) रडियस (Radius)
👇 अपने जवाब कमेंट में लिखें!
A singh
Q1. 📚 Objective Question
🦴 मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी हड्डी कौन सी है?
A) फेमर (Femur)
B) स्टेप्स (Stapes)
C) टिबिया (Tibia)
D) ह्यूमरस (Humerus)
👇 अपने जवाब कमेंट में लिखें!
SAYRI K I N G
"दूसरा मौका सबको मिलता है"
सिर्फ मिडिल क्लास परिवार के लड़कों को छोड़कर
Shefali
#shabdone_sarname__
Kaushik Dave
તારા દ્વારે આવ્યો છું, ક્યાં બીજે જઈને નમું?
તારા શરણે રહીને, જિંદગીને સાર્થક હું કરું
Shailesh Joshi
❤️પ્રેમ સમજવાની બાબત છે💞સમજાવવાની નહીં❤️
પહેલાંના સમયમાં પ્રેમની શરૂઆત એટલી ધીમી થતી, કે
સામેના પાત્રને એની જાણ કરવા માટે
મહિનાઓ, કે વર્ષો પણ લાગી જતા.
એ સમયે કોઈ મધ્યસ્થી, કે પછી ચિઠ્ઠીના સહારાની અચૂક જરૂર પડતી.
જો કોઈ મધ્યસ્થી દ્વારા જાણ કરવાનો મનમાં વિચાર આવે તો.....
મધ્યસ્થીને શું કહું ? કેવી રીતે કહું ? ફલાણા વ્યક્તિ દ્વારા કહું, કે ઢીંકણા વ્યક્તિને વચ્ચે રાખું ? કે પછી
ડાયરેક્ટ ચિઠ્ઠી લખી નાખું ?
ચિઠ્ઠી લખું તો એમાં શું લખું ?
કેટલું અને કેવું લખું ?
અને આમ આટલું વિચારવામાં, ને વિચારવામાં લગભગ મહિનાઓ, અને અમુક કિસ્સાઓમાં તો વર્ષો પણ નીકળી જતાં, અને અમુક પ્રેમ તો એવા થતાં, કે જાણ કરવામાં મહિનાઓ કે વર્ષો નહીં, પરંતુ સામેનું પાત્ર જ જીવનમાંથી ( અહીં હાથમાંથી ન લખાય ) નીકળી જતું,
મતલબ કે, કોઈ એક પાત્ર અન્ય વ્યક્તિ સાથે લગ્ન કરી પોતાના અલગ સંસારના શ્રી ગણેશ કરી લેતું.
કહેવાનું તાત્પર્ય એટલું જ કે,
એ સમયે સૌથી વધારે વિચાર સામેના પાત્રનો કરવામાં આવતો, જેમકે...
એને ખોટું તો નહીં લાગે ને ?
હું આમ કહું, કે આમ લખું તો એને નહીં ગમે.
આવું આવું વિચારીને આઠ દસ ચિઠ્ઠી તો ફાડી નાખી હોય, અને અગિયારમી ચિઠ્ઠી લખવાની તૈયારી કરતી વખતે પણ પહેલો વિચાર તો સામેની વ્યક્તિની પસંદ ના પસંદનો કરવામાં આવતો, કેમકે
"હું એને પ્રેમ કરું છું, એની સાથે જીંદગી જીવવા માંગુ છું"
અને અત્યારે ભલે જમાનો મોડર્ન, ઝડપી, અને ટેકનોલોજીનો છે, કપડાં, રહેણી કરણી, બધું બદલીએ, પરંતુ પ્રેમ તો પ્રેમ છે યાર,
એને કેવી રીતે બદલાય ?
અને જો બદલાય તો પછી એને પ્રેમ કેવી રીતે કહેવાય ? કારણ કે પ્રેમ એ પ્રેમ છે, અને એ બંને બાજુથી, કાયમ માટે, બંને વચ્ચે જ રહેવાનો, અને રોજબરોજ, દિન-પ્રતિદિન વધતો ને વધતો જ રહેવાનો, કેમકે એતો પ્રેમનો મૂળ સ્વભાવ છે.
ટૂંકમાં એટલું માનવાનું કે, જ્યાં સુધી
અમે બંને પુરી જિંદગી એકબીજા સાથે રહી શકીશું, એટલો વિશ્વાસ બંનેને એકબીજા પર નહીં, પોતપોતાના પર ન આવે, ત્યાં સુધી જે તે બે વ્યક્તિ વચ્ચેના સંબંધને પ્રેમનું નામ ન આપવું જોઈએ.
અને આ ત્યારે જ શક્ય બને કે જ્યારે બંને વ્યક્તિ એકબીજાને સારામાં સારી રીતે સમજે, ઓળખે, અને સાંભળે, તેમજ, સમજ્યા, ઓળખ્યા અને સાંભળ્યાં પછી પણ જો કોઈ કોઈવાર મતભેદ જેવું લાગે, ત્યારે એકબીજાને જવાબ આપતા પહેલા, સામેનો વ્યક્તિ મે પોતે પસંદ કરેલ મારો પ્રેમ છે, મારી જિંદગી છે, બસ આટલું વિચારી, થોડો સમય લઈને નિર્ણય લેવો, તો જીવનમાં ગમે તેવા, ને ગમે તેટલા મતભેદો ઉભા થાય, પરંતુ એ બે પ્રેમીઓ વચ્ચે પોતાની જગ્યા ક્યારેય નહીં બનાવી શકે, એ હકીકત છે.
એના માટે બંને લોકોએ ભેગા થતાં સમયે, પ્રેમમાં બંધાતા સમયે પોતપોતાને, અને એકબીજાને પણ, એક વચનમાં બાંધી લેવા કે, અમારા જીવનમાં નાની મોટી ભલે હજ્જારો, લાખ્ખો મુસીબતો, અડચણો, તકલીફો કે ગમે તેવા, અને ગમે તેટલા કપરા, વિકટ કે અતિ વિકટ સંજોગો આવે, અમે બંને એની સામે અડીખમ રહી એનો સામનો કરીશું, કે પછી સહન કરી લઈશું, પરંતુ એમાંથી એકે ને, અમારા બંનેની વચ્ચે નહીં આવવા દઈએ.
પ્રેમ ભલે આપણે કરીએ, પરંતુ આપણે એક વાત હંમેશા યાદ રાખવી જોઈએ કે, આપણા પ્રેમમાં ઈશ્વરના આશીર્વાદ ભળેલા હોય છે, માટે એનું જતન, અને આદર કરવો, કેમકે એ પણ પૂજાથી ઓછું નથી.
Mona Ghelani
રહેમત છે ખુદાની.....🦋🌻🌸🏵️🍁🌹🌼
Paagla
https://youtube.com/shorts/6oOjoQDLAps?si=YH5kq_PWRAJobxHi
Narendra Parmar
दुरियों से मोहब्बत मापी नहीं जाती
जहां तक रुह की बात हों
वहां पर हुस्न की बात की नहीं जाती ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
Sonam Brijwasi
or badhiya sab
Narendra Parmar
यही तो एक नारी की पहचान है
मां दुर्गा उनका दुसरा नाम है ।।
✔️💯🙏
Raju kumar Chaudhary
https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kzस्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
Raju kumar Chaudhary
बेटा-बहु अपने बैडरूम में बातें कर रहे थे, द्वार खुला होने के कारण उनकी आवाजें बाहर कमरे में बैठी माँ को भी सुनाई दे रहीं थीं।
बेटा---" अपने job के कारण हम माँ का ध्यान नहीं रख पाएँगे, उनकी देखभाल कौन करेगा ?
क्यूँ ना, उन्हें वृद्धाश्रम में दाखिल करा दें, वहाँ उनकी देखभाल भी होगी और हम भी कभी कभी उनसे मिलते रहेंगे। "
बेटे की बात पर बहु ने जो कहा, उसे सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ गए।
.
.
बहु---" पैसे कमाने के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है जी, लेकिन माँ का आशीष जितना भी मिले, वो कम है। उनके लिए पैसों से ज्यादा हमारा संग-साथ जरूरी है।
मैं अगर job ना करूँ तो कोई बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा। मैं माँ के साथ रहूँगी।
घर पर tution पढ़ाऊँगी, इससे माँ की देखभाल भी कर
पाऊँगी। याद करो, तुम्हारे बचपन में ही तुम्हारे पिता
नहीं रहे और घरेलू काम धाम करके तुम्हारी माँ ने तुम्हारा पालन पोषण किया, तुम्हें पढ़ाया लिखाया, काबिल बनाया।
तब उन्होंने कभी भी पड़ोसन के पास तक नहीं छोड़ा, कारण तुम्हारी देखभाल कोई दूसरा अच्छी तरह नहीं करेगा,
और तुम आज ऐंसा बोल रहे हो।
तुम कुछ भी कहो, लेकिन माँ हमारे ही पास रहेंगी,
हमेशा, अंत तक। "
बहु की उपरोक्त बातें सुन, माँ रोने लगती है और रोती हुई ही, पूजा घर में पहुँचती है।
ईश्वर के सामने खड़े होकर माँ उनका आभार मानती है
और उनसे कहती है---" भगवान, तुमने मुझे
बेटी नहीं दी, इस वजह से कितनी ही बार मैं तुम्हे भला बुरा कहती रहती थी, लेकिन ऐंसी भाग्यलक्ष्मी देने के लिए तुम्हारा आभार मैं किस तरह मानूँ...?
Raju kumar Chaudhary
एलिसा बिलियनेयरउसने अपनी "बेचारी" पूर्व पत्नी को शानदार शादी में बुलाया ताकि अपनी दौलत दिखा सके — लेकिन जब वो लग्जरी कार में कंबल बच्चों के साथ आई और एक ही वाक्य बोला, तो सबका दिल बैठ गया!
ग्रैंड गार्डन ऑफ एक 5-स्टार होटल में हजारों सफेद गुलाब बिछे थे, जो खास तौर पर इक्वाडोर से मंगवाए गए थे। लाइव ऑर्केस्ट्रा बज रहा था। समाज के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोग मौजूद थे। ये था मार्को और कैसैंड्रा की शादी का दिन।
मार्को एक ऐसा आदमी था जो गरीबी में पला-बढ़ा लेकिन महत्वाकांक्षा से भरा हुआ। पांच साल पहले उसने अपनी पहली पत्नी एलिसा को तलाक दे दिया। एलिसा एक छोटी सी ऑफिस में साधारण क्लर्क थी। मार्को को लगा कि उसके साथ रहकर वो कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा।
“तुम बस बोझ हो, एलिसा,” ये उसके आखिरी शब्द थे जब उसने तलाक के कागज थमाए। “तुम हमेशा गरीब रहोगी। मेरे सपनों की जिंदगी तुम कभी नहीं दे सकतीं।”
मार्को ने एलिसा को रोते हुए छोटे से किराए के कमरे में छोड़ दिया। उसे नहीं पता था कि उसी दिन एलिसा उसे बताने वाली थी कि वो प्रेग्नेंट है।
अब मार्को ने अपना सपना पा लिया था। वो कैसैंड्रा से शादी करने जा रहा था — इम्पीरियल रियल एस्टेट की इकलौती बेटी और वारिस, एक बिलियन डॉलर की कंपनी।
अपनी कामयाबी को और ज्यादा चमकाने के लिए मार्को ने जानबूझकर एलिसा को पुराने पते पर VIP इनविटेशन भेजा।
“बेब, अपनी उस भूखी-मरी पूर्व पत्नी को क्यों बुलाया?” कैसैंड्रा हंसते हुए शैंपेन पीते हुए बोली, सेरेमनी शुरू होने से पहले।
मार्को ने मुस्कुराकर कहा, “बस उसे दिखाना चाहता हूं कि मैं कहां पहुंच गया हूं और वो कहां है। वो शायद यहां पुरानी जीप में और फटे कपड़ों में आएगी। मैं उसे पांच हजार रुपये दे दूंगा टैक्सी के लिए वापस जाने के।”
दोनों हंस पड़े। कुछ मेहमानों ने भी सुना और हंसे। सब इंतजार कर रहे थे कि “बेचारी” एलिसा आए और वो उसे मजाक बनाएं।
सेरेमनी शुरू हुई। कैसैंड्रा आइल में चल रही थी तभी अचानक एक तेज, गड़गड़ाती आवाज आई।
ऑर्केस्ट्रा रुक गया। सबने एंट्रेंस की तरफ देखा।
एक चमचमाती लिमिटेड एडिशन Rolls-Royce Phantom — जिसकी कीमत लगभग सौ करोड़ से ज्यादा थी — धीरे-धीरे रेड कार्पेट पर रुकी। ऐसी कार सिर्फ दुनिया के सबसे बड़े बिलियनेयर्स के पास होती है।
यूनिफॉर्म में चालक उतरा और पीछे का दरवाजा खोला।
सबकी सांसें थम गईं। सब सोच रहे थे कोई बड़ा सेलिब्रिटी या विदेशी VIP उतरेगा।
लेकिन बाहर निकली एक महिला — कस्टम-मेड हॉट क्यूचर रेड गाउन में, गर्दन पर प्योर डायमंड की नेकलेस, बाल परफेक्ट बन में, और रवैया ऐसा जैसे पूरी दुनिया उसकी हो।
मार्को का मुंह खुला रह गया। हाथ से अंगूठी छूट गई।
“ए-एलिसा?!” उसने फुसफुसाया।
वो एलिसा थी — जिसे उसने रोते हुए छोटे कमरे में छोड़ा था, आज वो यहीं खड़ी थी, दौलत और पावर से लबरेज।
लेकिन असली झटका अभी बाकी था।
कार के पीछे से दो छोटी-छोटी लड़कियां उतरीं — चार साल की जुड़वां बहनें, मोगर्ब सफेद ड्रेस में। दोनों ने एलिसा के दोनों हाथ पकड़ रखे थे।
जैसे ही बच्चों ने मुंह उठाया, मेहमानों में हलचल मच गई। सब फुसफुसाने लगे।
उनकी आंखें, नाक, चेहरे का शेप… बिल्कुल मार्को जैसा। कोई शक नहीं — ये उसकी ही संतान थीं।
मार्को का चेहरा सफेद पड़ गया। घुटने कांप रहे थे। वो रेड कार्पेट पर एलिसा की तरफ बढ़ा। कैसैंड्रा पीछे-पीछे आई, गुस्से से लाल।
“एलिसा… ये कैसे?” मार्को हकलाया, बच्चों और एलिसा की तरफ देखते हुए। “ये… मेरे बच्चे हैं?”
एलिसा ने ठंडी, आत्मविश्वास भरी मुस्कान दी।
तभी एक बच्ची ने मासूमियत से पूछा,
“मम्मी, क्या ये वही अंकल हैं जिनकी पुरानी फोटो हमने गैरेज में झाड़ू बनाने के लिए इस्तेमाल की थी?”
मार्को का सिर झुक गया। शर्म से। सबने सुन लिया।
“तुम कौन हो?!” कैसैंड्रा चिल्लाई, एलिसा की तरफ उंगली करके। “सिक्योरिटी! इस औरत को क्यों आने दिया? मार्को, तूने तो इसे निकाल दिया था ना? अब बच्चों को लेकर आई है, शायद मेंटेनेंस मांगने!”
एलिसा ने कैसैंड्रा को सिर से पांव तक देखा, जैसे कोई कचरा हो।
फिर उसने अपने महंगे Hermès बैग से एक काला लिफाफा निकाला और मार्को को थमाया।
“इनविटेशन के लिए शुक्रिया, मार्को,” एलिसा ने शांत लेकिन गूंजती आवाज में कहा। “तूने पुराने घर पर भेजा था। पता नहीं था कि मैंने वो पूरी कॉलोनी खरीद ली है और नया मॉल बनाने वाली हूं?”
मार्को की आंखें फैल गईं। एलिसा बिलियनेयर? कैसे?
उसके बाद एलिसा ने जो एक वाक्य कहा, वो मार्को और कैसैंड्रा की दुनिया हिला देने वाला था…
(क्या था वो लिफाफे में? एलिसा ने इतनी दौलत कैसे कमाई? और उस एक वाक्य ने शादी को कैसे उलट-पुलट कर दिया?)
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Hetu P
માન્યું કે હીરો હાથમાંથી સરકી ગયો છે,
પણ તારા ગયા પછી અમે ક્યાં નવી ખાણ ખોદી છે,
કહ્યું હતું કે તારા જવાથી શું થશે મને,
બસ એજ હાલત છે આજકાલ
પણ તને કિયા કશું ફરક પડે છે
ખેર....હવે હાલ કેવાથી શું ફાયદો ?
Ankita
It was too late to realize-In trying to impress you, I forgot myself.
And in trying to forget you, I lost myself.
Ankita
It was too late to realize-In trying to impress you, I forgot myself.
And in trying to forget you, I lost myself.
SAYRI K I N G
हालात गरीब हो तो चलेगा
लेकिन सोच भिखारी नहीं होनी चाहिए
kattupaya s
old painful memories fade away when you get more painful things in present. it's just a logic
kattupaya s
problems found everywhere. but all the problems coming to me for solution.
kattupaya s
morning it's cold..afternoon it's hot. evening again cold.. even climate also confused😵🤔😕
kattupaya s
I tried to quit matrubharti. but for some reasons iam unable to do it. hard to believe it
kattupaya s
it's breakfast time..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
कहाँ जा रहे हैं हम?
कहाँ जा रहे है हम मंज़िल का पता ही नहीं l
निकल तो पड़े है रास्तों का पता भी नहीं ll
सारी उम्र रिश्ता बनाने को भागते रहे हैं कि l
अनजानी डगर पर पहचाना सा कही नहीं ll
थोड़ी सी खुशियों से दामन को भरने को l
बहुत बार ऊल्लू बन चुके है अभी नहीं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kajal jha
खामोशी अक्सर उन सवालों का जवाब होती है, जिनके जवाब शब्दों में नहीं मिलते।
ज़िंदगी वही सिखाती है, जो किताबों में कभी लिखा ही नहीं होता।
कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में सबक बनकर आते हैं, और कुछ पूरी कहानी बन जाते हैं।
जिस दिन इंसान खुद को समझ लेता है, उस दिन दुनिया की आधी उलझनें खत्म हो जाती हैं। 🌙
- kajal jha
kattupaya s
people are waiting for her good morning posts. she never sleeps
kattupaya s
believe in love not the love offered to you. it is limitless. u cannot survive
kattupaya s
she used to use lot of flowers in her post. now a days it's missing. who is the lucky guy
kattupaya s
she said just a hi. within half an hour we have blessed with baby boy. my life just going on like dis
kattupaya s
if you support Newzealand in T20 world cup. I pray for u to the heart broken event.
kattupaya s
Here my morning is varying depends upon your mood.. what a day it is going to be? iam waiting for a surprise
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