Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Vishakha Mothiya

Colourful life VS Minimalist life How far our choices have changed. Our living standards, and even our lives, shifted from colourful to black and white. We lost colours... Choose to be minimalist in everything.... Modernity is now minimalistic, not detailed. We lost structure, art, and so on. Now, more seems like a mess, and less seems like perfection. - Vishakha

Sonu Kumar

Nitish Kumar और Narendra Modi दोनों 100% देशी-विदेशी एलीट लोगों के प्रति वफादार हैं। फिर देशी-विदेशी एलीट लोगों ने नीतीश कुमार से इस्तीफा क्यों दिलवाया? . जल्द ही कई मुस्लिम देशों को मजबूर होकर ईरान के साथ मिलकर अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो सकता है। जो पाकिस्तानी सेना पर दबाव डाले कि वह ईरान की सेना का पूरी तरह समर्थन करे और युद्ध में उसका पूर्ण सहयोगी बन जाए। जब तीसरा विश्व युद्ध (WW3) शुरू होगा, तब विदेशी एलीट चाहते हैं कि भारत में धर्म के आधार पर एक बड़ा गृहयुद्ध हो। ताकि हिंदुओं को यह समझाया जा सके कि वे अमेरिका-यूके-पश्चिमी देशों (US-UK-WME) के आक्रमण का सक्रिय रूप से समर्थन करें। क्योंकि अगर भारत में कोई गृहयुद्ध नहीं होगा, तो अधिकांश हिंदू तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का समर्थन करेंगे। . यह ओरिजनल पोस्ट Rahul Mehta द्वारा लिखा गया है, जिसे मैने हिंदी में अनुवाद किया है। राहुल मेहता जी ने हीं भारत में पहली बार - EVM BLACK CLASS डेमो मशीन का आविष्कार किया है।।

Narendra Parmar

क्या करें ??? कभी कभी हमारी शराफ़त उसे राज नहीं आती है हम मोहब्बत करते हैं और वो हमारी हंसी उड़ातीं है ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "

mohansharma

कोई अपना होता तो करते भी बात उसकी.. गैरों की बात करना भी भला कोई बात हुईं..

Narendra Parmar

इंसान इंसान में भी फ़र्क होता है सुबह में किसी का मुंह देखकर अपना पूरा दिन सुधर जाता है ! तो किसी इंसान का मुंह देखकर अपना पूरा दिन बिगड़ जाता है ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Meera Singh

उसने इजहार भी न किया और इंकार भी न किया मगर ये भी सच है उसने मुझे कभी प्यार भी न किया। इंतजार इलतजा गुजारिश सब की हमने मगर न उसने मुझे छोड़ा और न ही अपनाया।। मीरा सिंह

Ajit

છેલ્લે સહન કરવાની તાકાત સાથે આવા સંબંધો નિભાવવા..... ગમે જેટલું રાખશો એકલતાની તૈયાર સાથે સંબંધો નિભાવવા ની તાકાત રાખો.......🙏🙏🙏 મારા અનુભવની ડાયરી માંથી 🙏🙏🙏

PRASANG

मौन का राज़। जो जानता है सो पहचानता, बताने की ज़रूरत क्या, हक़ीक़त ख़ुद उजागर हो, जताने की ज़रूरत क्या। भीतर जब उजियारा फूटे, मिट जाएगा ये भ्रम सारा, सूरज को दीप दिखलाकर चमकाने की ज़रूरत क्या। अनुभव का अमृत मिल जाए चेतन गहरे सागर में, लफ़्ज़ों के वन बोकर अर्थ उगाने की ज़रूरत क्या। साँसों में जब बस जाए स्वर उस एक अटल सच्चाई का, माला लेकर सबके आगे गीत सुनाने की ज़रूरत क्या। अहंकार का पर्दा गिर जाएगा निर्मल अंतर आँगन में, माया के रंग फिर जीवन में सजाने की ज़रूरत क्या। मौन बने जब पथ सच्चाई का, मन पाए उजली दृष्टि, “प्रसंग” फिर लोगों को बातें दोहराने की ज़रूरत क्या। - प्रसंग प्रणयराज रणवीर

ek archana arpan tane

વાતચીત અમારી સાથે અને ખ્યાલો માં કોઈક બીજું હાલ તમારો અમારી પાર્થના જેવો જ છે. - ek archana arpan tane

vaanya

தேடி வந்த பேரன்பே... உயிரின் அர்த்தம் நீயே... படித்து பார்த்து... கமெண்ட் பண்ணுங்க... - vaanya

Ajit

નિભાવવા વાળા તો મર્યા પછી પણ નિભાવી જાય છે.... છોડવા વાળા એક પળમાં પલાયન થઈ જાય છે....

kattupaya s

Goodnight friends.. sweet dreams

A singh

ऐसी कौन-सी चीज़ है जो पानी पीते ही मर जाती है? 👉 जल्दी बताइए… कमेंट में।

A singh

एक आदमी के पास 10 आम थे। उसने 2 खा लिए। बताइए उसके पास अब कितने आम हैं? 👉 कमेंट में जवाब दीजिए। soch samajh kar answer de😆

A singh

एक आदमी बिना पैराशूट के हवाई जहाज़ से कूद गया, फिर भी उसे ज़रा सा भी चोट नहीं आई। आख़िर ऐसा कैसे हो सकता है? 🤔 बताइए… आपका जवाब क्या है? कमेंट में ज़रूर बताइए।

A singh

तुम्हें देख फिर इस चाँद को देखता हूँ, और सोचता हूँ कौन ज़्यादा ख़ूबसूरत है… चाँद तो बस आसमान में दूर से चमकता है, पर तुम्हारी मुस्कान तो मेरे दिल को रोशन कर जाती है। चाँद में तो दाग भी हैं, पर तुम तो मेरी नज़रों में बिल्कुल बेदाग हो। सच कहूँ तो हर रात चाँद को देखकर यही लगता है, काश तुम पास होती… तो चाँद को देखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। 🌙✨ _ A singh

Rinki Singh

न जाने कैसा सफ़्हा है तहरीर-ए-ज़िंदगी का दर्दों ने दिल पे दस्तख़त ही कर दिए हों जैसे ~रिंकी सिंह #ख़याल #matrubharti

Raju kumar Chaudhary

“जयपुर की बारिश में खोई यादें”जयपुर ट्रिप के दौरान अचानक अपने एक्स-हस्बैंड से मिलने के बाद, मैं कमज़ोर हो गई और उनके साथ एक मज़ेदार रात बिताई… जयपुर की वह रात असामान्य रूप से शांत थी, लेकिन आसमान जैसे अपने भीतर दबे हुए किसी दर्द को बरसात की मोटी बूंदों में बाहर निकाल रहा था। मानसून की बारिश होटल की ऊँची खिड़कियों से टकराकर ऐसी आवाज़ कर रही थी मानो किसी पुराने गीत की उदास धुन बज रही हो। मैं होटल के बार के कोने में अकेली बैठी थी। मेरे सामने आधी पिघली हुई मार्गरीटा का गिलास था। उसके किनारों पर जमी नमक की परत धीरे-धीरे नमी से घुल रही थी। सॉफ्ट जैज़ म्यूज़िक हल्के-हल्के बज रहा था, और उसके साथ मिलकर बारिश की बूंदें एक अजीब सा सुकून और उदासी पैदा कर रही थीं। मेरा नाम अनिका है। चौंतीस साल की, एक सफल महिला, अपनी मेहनत से बनाई हुई जिंदगी के साथ। लोग कहते हैं मैं मजबूत हूं, आत्मनिर्भर हूं। लेकिन सच यह है कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो बाहर से नहीं दिखते। तीन साल पहले मेरा तलाक हुआ था। कागज़ पर वह बस एक कानूनी प्रक्रिया थी। लेकिन दिल के अंदर… वह किसी तूफान से कम नहीं था। तीन साल बीत चुके थे, फिर भी कुछ यादें ऐसी थीं जो पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं। मैं जयपुर काम के सिलसिले में आई थी — कम से कम यही आधिकारिक वजह थी। असल में, शायद मैं अपने खाली अपार्टमेंट से भागना चाहती थी। उन दीवारों से, जो अभी भी अतीत की गूंजों से भरी हुई थीं। घड़ी ने रात के ग्यारह बजाए। मैंने गिलास को हल्के से घुमाया और खिड़की के बाहर गिरती बारिश को देखने लगी। तभी अचानक मेरे पीछे से एक आवाज़ आई। “अनिका? क्या वह तुम हो?” मेरे हाथ वहीं रुक गए। वह आवाज़… मेरी रीढ़ में जैसे ठंडी लहर दौड़ गई। यह आवाज़ इतनी परिचित थी कि एक पल के लिए मुझे लगा मैं सपना देख रही हूँ। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैं तुरंत मुड़ी नहीं। क्योंकि अगर मैं मुड़ती… और वह वही होता… तो? धीरे-धीरे मैंने अपनी कुर्सी घुमाई। और अगले ही पल मेरी सांसें रुक गईं। मेरे सामने खड़ा था— अर्जुन। मेरा पूर्व पति। तीन साल पहले अदालत के उस ठंडे कमरे में जिस आदमी ने मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने का फैसला सुनाया था… वही आदमी आज मेरे सामने खड़ा था। वह पहले से भी ज्यादा परिपक्व और आकर्षक लग रहा था। नेवी ब्लू सूट, हाथ में रेड वाइन का गिलास, और चेहरे पर वही आधी मुस्कान… जो कभी मेरे दिल की धड़कन बढ़ा देती थी। “अर्जुन…?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकल पाया। वह मुस्कुराया और मेरे पास वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया। “कितना अजीब संयोग है,” उसने कहा। “तीन साल बाद… और तुम यहाँ।” उसकी खुशबू हवा में घुल रही थी — वही चंदन की हल्की खुशबू जिसे मैं कभी पहचान सकती थी, चाहे भीड़ कितनी भी बड़ी क्यों न हो। पहले कुछ मिनट अजीब चुप्पी में बीते। फिर बातचीत शुरू हुई। पहले औपचारिक सवाल — काम कैसा चल रहा है, जिंदगी कैसी है, स्वास्थ्य कैसा है। लेकिन जैसे-जैसे शराब के घूंट बढ़ते गए, बातचीत भी गहराई में उतरने लगी। अर्जुन ने बताया कि वह अब दिल्ली में रहता है। उसका रियल एस्टेट बिज़नेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स, विदेश यात्राएं, नए अवसर। मैं बस सुनती रही। कभी-कभी उसकी आँखें मेरी आँखों में टिक जातीं, जैसे वह मेरे चेहरे पर कोई पुरानी याद ढूंढ रहा हो। फिर उसने अचानक पूछा— “और तुम? तुम्हारी जिंदगी में कोई नया है?” मैं हँस पड़ी। “नहीं,” मैंने कहा। “शायद काम ही काफी है।” अर्जुन ने गहरी सांस ली। फिर उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया… और मेरे हाथ को हल्के से छू लिया। उस स्पर्श में कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर दबी हुई यादों को जगा दिया। “अनिका…” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “मुझे माफ कर दो।” मैं ठिठक गई। क्योंकि तीन साल में पहली बार… अर्जुन ने अपनी गलती स्वीकार की थी। उसकी आँखों में पछतावा था। या शायद… मुझे ऐसा लगा। उस रात बारिश बाहर गिरती रही, संगीत बजता रहा… और हमारी बातचीत धीरे-धीरे हमें उस अतीत के करीब ले जाने लगी जिसे हमने कभी पीछे छोड़ दिया था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह मुलाकात सिर्फ एक संयोग नहीं थी… बल्कि एक ऐसी रात की शुरुआत थी जो मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक सच्चाई को सामने लाने वाली थी। 👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

kajal jha

जिंदगी ने सिखाया है कि भरोसा सोच-समझकर करना, क्योंकि अपने भी कभी-कभी अजनबी बन जाते हैं। समय के साथ सब बदल जाता है, बस यादें हैं जो दिल में ठहर जाती हैं। - kajal jha

Paagla

https://youtube.com/shorts/2bUHfy6-GgQ?si=kdtmYrP8fbq4GJbf Go Through The Link and watch the video

Saroj Prajapati

खुशियां इतनी महंगी भी नहीं जितना कहते हैं लोग फुर्सत निकाल कर देखिए ये बिखरी आपके चारों ओर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

pink lotus

control what you can and let go of what you can't by:Pinklotue 🌸❣️

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૭: ડ્રાફ્ટ (Draft) ​એના વોટ્સએપમાં એક મેસેજ છેલ્લા ચાર મહિનાથી 'ડ્રાફ્ટ'માં પડ્યો હતો. ​"આજે તારી બહુ યાદ આવે છે, શું આપણે ફરી એકવાર વાત કરી શકીએ?" ​આ શબ્દો ટાઈપ કરતી વખતે આંગળીઓ ધ્રૂજતી હતી, પણ 'સેન્ડ' (Send) બટન સુધી પહોંચતા પહોંચતા મન હારી જતું. ડ્રાફ્ટ એટલે હૃદય અને હિંમત વચ્ચેનું યુદ્ધ. જે વાત આપણે દુનિયાને નથી કહી શકતા અને જે વાત આપણે એ વ્યક્તિને કહેવા માંગીએ છીએ જેને હવે આપણામાં રસ નથી, એ બધું જ 'ડ્રાફ્ટ'માં કેદ થઈ જાય છે. ​જૂના ડ્રાફ્ટ્સ તપાસો ત્યારે ખબર પડે કે જિંદગીમાં આપણે કેટલું બધું કહેવાનું બાકી રાખ્યું છે. ક્યારેક ગુસ્સો, ક્યારેક માફી અને ક્યારેક બેહદ પ્રેમ—બધું જ એક નાનકડા ખાનામાં ધૂળ ખાતું હોય છે. આપણી ગેલેરી ફોટાઓથી ભરેલી હોય છે, પણ આપણું અસલી વ્યક્તિત્વ તો એ ડ્રાફ્ટ્સમાં છુપાયેલું હોય છે જે આપણે ક્યારેય 'પબ્લિક' નથી કરતા. ​ક્યારેક એ ડ્રાફ્ટ ડિલીટ કરી દેવા સારા, કારણ કે જે વાત સમયસર ન કહેવાય એ પછી માત્ર એક 'બોજ' બની જાય છે. રિયાએ આજે એ ચાર મહિના જૂનો મેસેજ સિલેક્ટ કર્યો અને એક ઝાટકે 'ડિલીટ' કરી દીધો. ​જિંદગીમાં ક્યારેક 'સેન્ડ' કરવા કરતાં 'ડિલીટ' કરવામાં વધુ શાંતિ મળે છે. જે વાત ડ્રાફ્ટમાંથી બહાર ન આવી શકી, એ કદાચ ક્યારેય કહેવા માટે બની જ નહોતી.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૬: બાય (Bye) ​તેણે ગાડીનો દરવાજો ખોલતા પહેલાં માત્ર એક જ શબ્દ કહ્યો, "બાય." ​આકાશને એ 'બાય' બહુ વસમું લાગ્યું. 'બાય' તો આપણે એને પણ કહીએ છીએ જે સાંજે ફરી મળવાનું હોય, અને એને પણ કહીએ છીએ જે કદાચ હવે જિંદગીમાં ક્યારેય નહીં મળે. પણ આ 'બાય' માં એક ઠંડક હતી, એક એવું પૂર્ણવિરામ હતું જેણે આગળના બધા જ સંવાદો પર કાળી શાહી ફેરવી દીધી હતી. ​આધુનિક સંબંધોમાં 'બાય' હવે માત્ર વિદાયનો શબ્દ નથી રહ્યો, પણ એક હથિયાર બની ગયો છે. જ્યારે સામેની વ્યક્તિ પાસે દલીલો ખૂટી જાય અથવા લાગણી ઓસરી જાય, ત્યારે એ 'બાય' કહીને સંવાદનો દરવાજો જોરથી પછાડી દે છે. એ એક શબ્દ પાછળ કેટલાય 'પ્લીઝ રોકાઈ જા' અને કેટલાય 'કેમ આમ કરે છે?' જેવા સવાલો ગુંગળાઈને મરી જાય છે. ​ગાડી જતી રહી. રસ્તા પર માત્ર ધૂળ અને પેલો અધૂરો શબ્દ હવામાં તરતો રહ્યો. આકાશને સમજાયું કે સૌથી વધુ પીડા એ 'બાય' નથી આપતું જે બોલાઈ ગયું છે, પણ એ 'બાય' આપે છે જે સાંભળ્યા પછી આપણે 'ઉભા રહો' કહેવાની હિંમત હારી જઈએ છીએ. ​ક્યારેક 'બાય' નો અર્થ 'આવજો' નથી હોતો, પણ 'હવે ક્યારેય ન આવતા' એવો હોય છે. અને એ સ્વીકારી લેવામાં જ સમજદારી છે.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૫: સ્ક્રીનશોટ ​એણે ફોનની ગેલેરી ખોલી. હજારો ફોટાઓની ભીડમાં એક છુપાયેલું ફોલ્ડર હતું—'Screenshots'. ​એમાં કોઈ સુંદર પહાડો કે ચહેરાના ફોટા નહોતા, પણ જૂની ચેટના ટુકડાઓ હતા. એ રાતોના સંવાદો, જે અત્યારે હકીકતમાં ક્યાંય અસ્તિત્વ ધરાવતા નહોતા. એક સ્ક્રીનશોટમાં લખ્યું હતું, "તું ચિંતા ન કર, હું તારી સાથે જ છું." નિશા એ વાક્યને તાકી રહી. જે વ્યક્તિ આજે 'અજાણી' બનીને રસ્તેથી પસાર થઈ જાય છે, એના વચનો આજેય ગેલેરીમાં કેદ હતા. આપણે ફોટા તો ડિલીટ કરી નાખીએ છીએ, પણ આ સ્ક્રીનશોટ એ પથ્થર પરની લકીર જેવા હોય છે જે આપણને આપણી જ ભીની ક્ષણોની યાદ અપાવતા રહે છે. ​સ્ક્રીનશોટ એટલે શું? એક એવો પુરાવો જે આપણે આપણી જ જાતને આપતા હોઈએ છીએ કે, "જો, એક સમય એવો પણ હતો જ્યારે હું કોઈ માટે સર્વસ્વ હતી." એ આપણી જૂની ખુશીઓના દસ્તાવેજ છે જે વર્તમાનમાં માત્ર કડવાશ જ આપે છે. ​તેણે એક ઊંડો શ્વાસ લીધો અને 'Delete' બટન પર આંગળી મૂકી. તેને સમજાયું કે જે સંબંધોનો 'રિફ્રેશ રેટ' શૂન્ય થઈ ગયો હોય, એના સ્ક્રીનશોટ સાચવીને આપણે હકીકતમાં આપણી જિંદગીની સ્પેસ રોકી રહ્યા છીએ. ક્યારેક નવી યાદોને જગ્યા આપવા માટે જૂના પુરાવાઓ ભૂંસવા બહુ જરૂરી હોય છે.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૪: બ્લુ ટિક ​તેણે પૂછ્યું હતું, "શું આપણે બધું ભૂલીને ફરી એકવાર શરૂ કરી શકીએ?" ​સામેથી કોઈ જવાબ ન આવ્યો, પણ મેસેજ પર બે વાદળી લીટીઓ—'બ્લુ ટિક'—ચમકી ગઈ. એ વાદળી લીટીઓ કોઈ ધારદાર હથિયાર જેવી લાગતી હતી. મેસેજ વંચાઈ ગયો હતો, પણ સ્વીકારાયો નહોતો. સાહિલ પાછલા બે કલાકથી એ સ્ક્રીનને તાકી રહ્યો હતો, જાણે પેલી વાદળી લીટીઓ હમણાં કંઈક બોલશે. ​પહેલાના સમયમાં લોકો પત્રોના જવાબ ન આપીને મૌન જાળવતા, આજે લોકો મેસેજ વાંચીને 'સીન' (Seen) છોડી દે છે. આ આધુનિક મૌન છે, જે કોઈપણ ચીસ કરતાં વધુ જોરથી વાગે છે. બ્લુ ટિકનો અર્થ હવે માત્ર 'મેસેજ વંચાઈ ગયો' એવો નથી રહ્યો, પણ એનો અર્થ છે કે—"તમારી લાગણી મારી સામે આવી તો ખરી, પણ મને એમાં કોઈ રસ નથી." ​મોડી રાત્રે સાહિલને સમજાયું કે જે સંબંધમાં શબ્દોની કિંમત ઘટી જાય, ત્યાં વાદળી લીટીઓનો અર્થ શોધવો નકામો છે. મૌન જ્યારે ડિજિટલ બને ને, ત્યારે એ અવાજ કરતાં પણ વધુ વસમું લાગે છે. જે વ્યક્તિ આપણને 'Reply' આપવા જેટલો સમય પણ ફાળવી શકતી નથી, તેની પાસે જિંદગી માંગવી એ આપણી જ જાતનું અપમાન છે. ​તેણે ચેટ ક્લિયર કરી અને ફોન ઊંધો મૂકી દીધો. ક્યારેક 'બ્લુ ટિક' એ મેસેજ વંચાયાની સાબિતી નથી હોતી, પણ એક એવો પૂર્ણવિરામ હોય છે જે આપણને આગળ વધવાનો સંકેત આપે છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી અનકહી કોફી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૩: અનબ્લોક ​આંગળી 'Unblock' બટન પર આવીને થંભી ગઈ હતી. ​બે વર્ષ સુધી એ નામ 'બ્લેક-લિસ્ટ' ના અંધારા ખૂણામાં કેદ હતું. આજે અચાનક એ જૂના જખમ પરથી પાટો ઉખેળવાની ઈચ્છા થઈ. જેવું બટન દબાયું, કે તરત જ તેનો હસતો ચહેરો ડિસ્પ્લે પિક્ચર (DP) માં ચમકી ઉઠ્યો. તે હજુય એવો જ હતો—નિર્મળ અને શાંત, બસ હવે એ ફોટામાં તેની સાથે કોઈ બીજું હતું. ​મન સવાલ પૂછતું હતું, "શું કામ અનબ્લોક કર્યું?" શું એ જાણવા કે એ તારા વગર કેટલો ખુશ છે? કે પછી એ સાબિત કરવા કે હવે તને એના હોવા કે ન હોવાથી કોઈ ફેર નથી પડતો? ​અનબ્લોક કર્યા પછી જ અહેસાસ થયો કે, બ્લોક લિસ્ટમાં તો વ્યક્તિ સુરક્ષિત હતી. ત્યાં એની યાદો પર આપણો હક હતો, આપણે ધારીએ ત્યારે એને યાદ કરી શકતા. પણ અનબ્લોક થતા જ એ હકીકત પછડાઈ કે હવે એ વ્યક્તિ માત્ર આપણી પહોંચની બહાર જ નથી, પણ આપણી દુનિયાની બહાર છે. ​ડિજિટલ દુનિયામાં કોઈને અનબ્લોક કરવું સહેલું છે, પણ મનના કોઈ ખૂણે જામી ગયેલા એના અસ્તિત્વને મુક્ત કરવું બહુ અઘરું છે. પાંચ મિનિટ એ ફોટાને તાક્યા પછી, નિધિએ ફરીથી એ જ નામ 'Block' કરી દીધું. આ વખતે ગુસ્સામાં નહીં, પણ ગંભીરતાથી. ​ક્યારેક કોઈને હંમેશા માટે ભૂલી જવા માટે, એક વાર અનબ્લોક કરીને એની જિંદગીમાં આપણી 'ગેરહાજરી' જોવી બહુ જરૂરી હોય છે. અનકહી કોફી લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૨: અધૂરો કપ ​કાફેના ખૂણાના ટેબલ પર કોફીના બે કપ હતા. એક ખાલી હતો અને બીજો અડધો ભરેલો. ​ખાલી કપ આકાશનો હતો. એણે બધું જ કહી દીધું હતું—તર્ક, કારણો અને છેવટે 'છૂટા પડવાનો' નિર્ણય. એણે પોતાની વાત પૂરી કરી, બિલ ચૂકવ્યું અને ઊભો થઈ ગયો. એની કોફી પણ પૂરી થઈ ગઈ હતી અને એની દલીલો પણ. ​રિયાનો કપ હજુ અડધો ભરેલો હતો. એ સ્તબ્ધ થઈને કોફીની સપાટી પર તરતા ફીણને જોઈ રહી હતી. ફીણ ધીમે ધીમે ઓગળી રહ્યું હતું, બિલકુલ એના વિશ્વાસની જેમ. એની પાસે કહેવા માટે શબ્દોનો દરિયો હતો, પણ સાંભળવા વાળો કિનારો જ જતો રહ્યો હતો. ​લોકો કહે છે કે મુલાકાતો અધૂરી રહી જાય છે, પણ હકીકતમાં તો વાતો જ અધૂરી રહેતી હોય છે. કોફીનો પ્યાલો ખાલી કરવો સહેલો છે, પણ ભરેલા હૃદયને ખાલી કરવું અઘરું છે. રિયાએ ચમચીથી કોફી હલાવી. કોફી હવે ઠરી ગઈ હતી. સંબંધોમાં જ્યારે ગરમાવો જતો રહે, ત્યારે મોંઘી કોફી પણ કડવી ઝેર જેવી લાગે છે. ​એણે એ અધૂરો કપ ટેબલ પર જ છોડી દીધો. જિંદગીમાં ક્યારેક બધું પૂરું કરવા માટે કપ ખાલી કરવો જરૂરી નથી હોતો; ક્યારેક કોઈ વાર્તાને 'અધૂરી' છોડી દેવામાં જ એની ગરિમા સચવાતી હોય છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી ( અનેરી ) અનકહી કોફી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૧: ટાઈપિંગ... ​રાતના બે વાગ્યા હતા. આખું શહેર સૂઈ ગયું હતું, પણ નીરવના ફોનની સ્ક્રીન પર એક નામ સતત ચમકતું હતું— 'ચાર્મી'. ​ચેટ વિન્ડોમાં ઉપર લખાઈને આવતું હતું: Typing... ​નીરવ શ્વાસ રોકીને જોઈ રહ્યો. એ 'ટાઈપિંગ' શબ્દમાં કેટલીય અપેક્ષાઓ, કેટલીય માફીઓ અને કેટલાય અધૂરા સવાલો છુપાયેલા હતા. તેને થયું કે હમણાં લાંબો મેસેજ આવશે, કદાચ બે વર્ષનો હિસાબ આજે આ એક મેસેજમાં પૂરો થઈ જશે. ​પાંચ મિનિટ થઈ... દસ મિનિટ થઈ. પેલું 'Typing...' દેખાતું અને વળી પાછું અદૃશ્ય થઈ જતું. સાચું કહીએ તો, સામે છેડે ચાર્મી મેસેજ ટાઈપ નહોતી કરતી, પણ પોતાની હિંમત એકઠી કરી રહી હતી. ​અચાનક, 'Typing...' દેખાતું બંધ થઈ ગયું. નીરવને થયું કે હમણાં નોટિફિકેશન આવશે. પણ ના, તેને બદલે ઉપર 'Online' દેખાવું પણ બંધ થઈ ગયું. એણે માત્ર 'Last Seen' જોયું—જે હમણાંનું જ હતું. ​આધુનિક પ્રેમની આ સૌથી મોટી કરુણતા છે; જ્યાં સૌથી વધુ કહેવું હોય છે, ત્યાં જ આંગળીઓ 'બેકસ્પેસ' પર આવીને અટકી જાય છે. દિલમાં હજારો પાનાઓ ટાઈપ થાય છે, પણ જિંદગીની સ્ક્રીન પર માત્ર 'મૌન' જ સેન્ડ થાય છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી "અનકહી કોફી " ભાગ 1 🙏

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૩૫: ૧૦ હેડફોન (The Loop) ​તેણે ધીમેથી પોતાના હેડફોન કાન પર ચઢાવ્યા અને બહારના ઘોંઘાટને જાણે એક જ સેકન્ડમાં સ્વીચ ઓફ કરી દીધો. બસ ટર્મિનલની ભીડ, રિક્ષાના હોર્ન અને લોકોની નકામી વાતો—બધું જ એકાએક શાંત થઈ ગયું. હવે તેની પાસે પોતાની એક ખાનગી દુનિયા હતી, જેમાં માત્ર તે અને તેનું ગમતું સંગીત હતું. ​પ્લેલિસ્ટમાં સેંકડો ગીતો હોવા છતાં, તેની આંગળીએ એ એક જ ગીત પસંદ કર્યું. એ ગીત જે તેના હૃદયના કોઈ ખૂણે ધરબાયેલી યાદને ફરી જીવતી કરતું હતું. તેણે 'રીપીટ' બટન દબાવ્યું. ગીત લૂપ પર શરૂ થયું. ​આખી દુનિયાથી કપાઈ જવું કેટલું સહેલું છે ને? બસ, બે ઈયરબડ્સ કાનમાં નાખો અને તમે તમારા ભૂતકાળમાં, તમારા સપનામાં કે તમારી કોઈ અધૂરી ઈચ્છામાં ખોવાઈ શકો છો. લૂપ પર વાગતું એ ગીત એના માટે માત્ર સંગીત નહોતું, પણ એક સુરક્ષિત કવચ હતું. એ ગીતની દરેક લાઇન તેને કોઈના અવાજની, કોઈના સાથની કે કોઈ જૂની સાંજની યાદ અપાવતી હતી. ​જ્યારે આપણે એક જ ગીત વારંવાર સાંભળીએ છીએ, ત્યારે એનો અર્થ એ છે કે આપણે એ ગીતની લાગણીમાંથી બહાર નીકળવા નથી માંગતા. આપણે એ હૂંફને પકડી રાખવા માંગીએ છીએ. હેડફોન પહેરીને ભીડમાં ચાલતી એ વ્યક્તિ ભલે એકલી દેખાતી હોય, પણ એની અંદર યાદોનું એક આખું સરઘસ ચાલતું હોય છે. ​આધુનિક યુગમાં હેડફોન એ 'ડિસ્ટર્બ ન કરો' (Do Not Disturb) નું જીવતું જાગતું બોર્ડ છે. એ આપણને પરવાનગી આપે છે કે આપણે આપણી પોતાની મરજીથી, આપણી પોતાની લયમાં જીવી શકીએ. ભલે દુનિયા ગમે તેટલી ઝડપથી દોડતી હોય, પણ એ ગીતના લૂપમાં સમય જાણે થંભી જાય છે. ​ક્યારેક આખી દુનિયાનો અવાજ સાંભળવા કરતાં, હેડફોન લગાવીને પોતાના મનનો અવાજ સાંભળવો વધુ જરૂરી હોય છે. ​અનકહી કોફી

Naresh Bokan Gurjar

तुम बारिश होती तो तुम्हें सहेज लेता तुम मौसम होती तो तुम्हें समेट लेता तुम फिजा होती तो तुम्हारी खुशबू चुरा लेता तुम तुम हो तुम्हारा मैं कुछ कर नहीं सकता - Naresh Bokan Gurjar

A singh

कान्हा, आपके जीवन में कितनी ही कठिनाइयाँ आईं, कभी मथुरा की साज़िशें, कभी वृंदावन से बिछड़ने का दर्द। फिर भी हर परिस्थिति में आपने धैर्य रखा, और होठों पर वही मधुर मुस्कान बनाए रखी। हे कृष्ण मुरारी, हम तो छोटी-छोटी बातों में ही टूट जाते हैं, कभी हालात से, कभी अपनों की बातों से बिखर जाते हैं। मन कई बार थक जाता है इस दुनिया की उलझनों से, और दिल भी खामोशी में अपने दर्द छुपा लेता है। बस इतनी सी कृपा कर दो कान्हा, कि आपके जैसा धैर्य और हिम्मत हमें भी मिल जाए। आपकी कृपा का एक दीपक दिल में जल जाए, तो अंधेरी राहों में भी उजाला मिल जाए। आपका नाम ही हमारा सहारा बन जाए, और हर मुश्किल में भी होठों पर मुस्कान आ जाए। जय श्री कृष्ण 🌸 — A. Singh ✨

A singh

आजकल वो कहते हैं — बदली-बदली सी लगती हो तुम, उन्हें कौन समझाए कि ये उनकी ही मेहरबानी है। जो दर्द उन्होंने दिया है हमें, उसी ने हमारी मुस्कान तक बदल डाली है। — A. Singh ✨

A singh

मैं पूरी दुनिया से लड़ने की हिम्मत रखती हूँ, बस अपनों के सामने ही हार जाती हूँ। क्योंकि अपनों से जीतने की नहीं, उन्हें खो देने की डर से चुप रह जाती हूँ। — A. Singh ✨

A singh

अपनों की बातें ही अक्सर दिल को घायल कर जाती हैं, गैरों में कहाँ इतना दम जो हमें रुला जाए। ये तो अपनों की नाराज़गी का असर है वरना, दुनिया की क्या औकात जो हमें झुका जाए। _ A singh

A singh

​"दिल तो सिर्फ अपनों से टूटता है, गैरों की क्या हिम्मत जो आँखों में आँसू ला सकें।" _ A singh

A singh

"ज़ख्म वही गहरे देते हैं जो दिल के करीब होते हैं, वरना गैरों को क्या पता कि हमारी कमज़ोरी क्या है।" _ A singh

Soni shakya

तेरे होठों की हर लकीर याद है मुझे.. देखो कितनी मोहब्बत से पढ़ा है मैंने तुझे.. - Soni shakya

Raju kumar Chaudhary

“अरबपति पिता ने सोचा—मेरी पत्नी और बेटी मुझे सिर्फ एटीएम समझती हैं… लेकिन जिस रात उनकी फ्लाइट कैंसल हुई और वे बिना बताए घर लौटे, दरवाज़े की दरार से जो देखा… उसने उनका दिल हमेशा के लिए बदल दिया।” राजेश अग्रवाल एक अरबपति थे। देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी उनके नाम पर थी। दुनिया भर में उनके ऑफिस थे, उनके जहाज़ समुद्रों पर राज करते थे। लेकिन अपने ही घर में… वे लगभग मेहमान बन चुके थे। राजेश को लगता था कि प्यार दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है—पैसा। इसलिए उन्होंने अपने परिवार को हर चीज़ दी। उनकी पत्नी प्रिया को लग्ज़री लाइफ मिली। उनकी बेटी आराध्या को सबसे महंगा स्कूल, सबसे सुंदर कमरे और ढेर सारे खिलौने मिले। लेकिन राजेश ने कभी यह नहीं सोचा कि शायद उनके परिवार को इन सब चीज़ों से ज्यादा… उनकी मौजूदगी की जरूरत है। राजेश का मन धीरे-धीरे कठोर होता गया। उन्हें लगता था कि उनके परिवार को उनसे नहीं, बल्कि उनके पैसों से प्यार है। जब भी फोन आता, उन्हें लगता — फिर कोई खर्चा होगा। जब भी बेटी पास आती — उन्हें लगता, फिर कोई नया खिलौना मांगा जाएगा। इसलिए उन्होंने खुद को काम में और ज्यादा डुबो दिया। एक दिन उनका सिंगापुर का ट्रिप तय था। लेकिन आखिरी पल में फ्लाइट कैंसल हो गई। राजेश ने अचानक फैसला किया— आज घर चलते हैं… बिना बताए। उनके मन में एक अजीब सा विचार चल रहा था। “देखता हूं… मेरे बिना घर में क्या हो रहा है।” रात को जब वे घर पहुंचे… तो उन्हें कुछ बहुत अजीब लगा। पूरा महल शांत था। कोई पार्टी नहीं। कोई मेहमान नहीं। बस… सन्नाटा। तभी घर की पुरानी आयाह लक्ष्मी सामने आईं। लेकिन राजेश को देखकर उन्होंने जोर से स्वागत नहीं किया। उन्होंने तुरंत उंगली होंठों पर रखी। “साहब… प्लीज़… आवाज मत कीजिए।” राजेश चौंक गए। “क्यों? क्या चल रहा है यहां?” आयाह लक्ष्मी ने कुछ नहीं कहा। बस उनका हाथ पकड़कर उन्हें धीरे-धीरे फैमिली रूम के दरवाजे तक ले गईं। फिर फुसफुसाकर बोलीं— “साहब… अंदर मत जाइए। पहले बस देख लीजिए…” राजेश ने दरवाजे की छोटी सी दरार से अंदर झांका। उन्होंने सोचा था— शायद वहां पार्टी होगी। शायद उनके पैसों से जश्न चल रहा होगा। लेकिन कमरे के अंदर जो था… उसने उनके दिल को एक पल में हिला दिया। 👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Soni shakya

तुम्हारे जाने से इतना फर्क हुआ , पहले ये घर था अब सिर्फ दीवारें रह गई.. तुम्हारे जाने से जैसे, मेरी तो रूह ही निकल गई.. मैं सांसे तो ले रही हूं, मगर जिंदगी कहीं ठहर गई.. - Soni shakya

SAYRI K I N G

इसकी ईटों में है मोहब्बत की खुश्बू इसकी रूह में प्यार बसता है इसके संगमरमर में रहती है आशिकी ये ताज़ है, इश्क़ यही रहता है - SAYRIKING

SAYRI K I N G

इजहार जलील कर देता है कोई पसंद आये तो खामोश रहना चाहिए

mohansharma

ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे.. तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..

Avinash

हेलो दोस्तो, मेरी फर्स्ट किताब कल 10 मार्च को आ रही है । किताब का नाम "अधूरी धुन" है कृपया करके आप यह किताब पढ़े और आपके विचार प्रस्तुत करे। धन्यवाद 💫❤️

kattupaya s

Time for short Nap..😴

Dr.Namrata Dharaviya

"જીત નક્કી હોય તો અર્જુન કોઈ પણ બની શકે, પણ જ્યારે મૃત્યુ નક્કી હોય ત્યારે અભિમન્યુ બનવું પડે." 🏹🔥 કલમના સથવારે ✍️ - Dr.Namrata Dharaviya

Kaushik Dave

"धरती कहे पुकार के", को मातृभारती पर पढ़ें :, https://www.matrubharti.com भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!

Kaushik Dave

માતૃભારતી પર વાંચો - ""બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :" "બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :, https://www.matrubharti.com વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!

Shailesh Joshi

અમુક કામો થશે, કે નહીં થાય ? એ વિચારવામાં આપણો જેટલો સમય જાય છે, એના કરતાં અજમાવી લેવામાં, આપણા ઘણા બધા કામો થઈ જાય છે, અને બાકી વધેલા કામો, કેટલા, અને કેમ રહી જાય છે ? એની પણ આપણને ખબર પડી જાય છે, બાકી તો, જે વિચારવામાં જ રહી જાય છે, એ રહી જ જાય છે.

Kaushik Dave

​हां, मैं ही झूठी हूं नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं। ​हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं। ​हां, आप तो वो हो नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं। ​हां, मैं जिद पर अड़ी हूं नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं। ​हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं। ​हां, मुझमें हजार कमियां होंगी नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं। ​हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।

A singh

लिखने बैठी थी दिल का हाल, पर कलम ही रुक गई, ✨ शायद मेरे ज़ख्मों की गहराई देखकर स्याही भी झुक गई। वो जो कहते थे कि हम साया बनकर साथ चलेंगे, 👣 आज उन्हीं की यादों में मेरी हर मुस्कान कहीं खो गई। जिसे अपना समझा था, वही दूरियों का कारण बन गया, और मेरी खामोशियों में छुपा हर दर्द मेरा हमसफ़र बन गया। — A Singh

Sunita bhardwaj

"उसकी अच्छाई" ------------------- वो बहुत अच्छा इन्सान हैं, शायद इसलिए मैं भी अपनी अच्छाई बचाए रख सकी जब भी रास्ते धुंधले हुए, और मन थोड़ा भटकने लगा, पर उसकी बातों ने संभाल लिया। उसने मुझे बदला नहीं, बस याद दिलाया कि मैं कैसी थी और कैसी रह सकती हूं उसने कभी मुझे रोका नहीं बस इतना कहा...... "तुम जैसी हो,वैसी ही अच्छी हो, खुद को मत बदलना।" और शायद वही शब्द थे जिन्होंने मुझे बिगड़ने नहीं दिया। दुनिया में लोग अक्सर एक दूसरे को बदल देते हैं, पर कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो हमारी अच्छाई को बचाए रखते हैं। अगर मैं आज भी वैसी ही हू जैसी पहले थी, तो उसमें मेरी कोशिश कम और उसकी सीख ज्यादा है। क्योंकि कुछ लोग हमारी जिंदगी में आकर हमे बदलते नहीं.... बस हमे बेहतर इंसान बने रहने कि वजह दे जाते है। _Sunita

Awantika Palewale

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે, નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે. તારી નજર પડે તો વસંત ખીલી ઉઠે છે, નહિતર દરેક ઋતુમાં અજબ શીત થાય છે. તારા શબ્દોથી દિલને અજબ શાંતિ મળે છે નહિતર મનમાં કેટલી અનકહી પ્રીત થાય છે. તું નજીક હોય ત્યારે સમય પણ થંભી જાય છે પળ પળ જાણે પ્રેમની નવી જીત થાય છે. તું દૂર હોવા છતાં મારાં અહેસાસમા સાથે છે. એટલે જ આ દિલને થોડી રાહત મળી જાય છે. તારી યાદ આવે તો રાત ચાંદની બની જાય છે નહિતર આ આંખોમાં અંધકારનો વસવાટ થાય છે. તું મળ્યો ત્યારથી મને જીવનનો અર્થ મળ્યો છે, નહિતર આ સફર બસ એક અજાણી રીત થાય છે. તારા સાથમાં પીડા પણ સંગીત બની જાય છે, તારાં વિના ખુશી પણ ક્યારેક હાર બની જાય છે. દિલમાં હવે તો એક જ દુનિયા બનાવી છે, જ્યાં તારાં જ અહેસાસનો દરબાર ભરાય છે. મારા દિલની વાત કલમથી લખી દઉં છું, એક તારાં જ નામથી દરેક પ્રીત થાય છે. એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે, નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

મોરલો

#INTERNATIONAL WOMAN'S DAY #2K26

Shailesh Joshi

ઉચ્ચ વિચારો, ઊંચું ધ્યેય, કંઈક વિશેષ કરવાની લગન, સતત કાર્યશીલતા, પ્રામાણિકતાની સાથે-સાથે પરોપકારની ભાવના, આ બધાજ..... આપણી જીંદગીની છબીને એડિટ કરી ચમકાવવા માટેના ટુલ્સ છે.

Dada Bhagwan

જે માણસ પારકાંને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી, તે પોતાની જાતને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી! - દાદા ભગવાન વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: www.dadabhagwan.in #quoteoftheday #quote #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

Imaran

अपना चाँद सा चेहरा देखने की इजाज़त दे दो, इस खूबसूरत शाम को और सजाने की इजाज़त दे दो ✨imran ✨

Imaran

कशिश हो शायरी की तुम, गजल की जान लगती हो, खुदा के नूर जैसी हो, नजर की शान लगती हो, मेरे अल्फाज में तुम हो, मेरे अंदाज में तुम हो, मेरे हर खूबसूरत नज्म की, पहचान लगती हो, 🫶imran 🫶

Viru

poem " spellbound ” ये कमल से मुख पे कैश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे। जे होजा तू आज मेरी, तो करवादूं में ऐश तेरे। तेरी आंखों का नूर,दे जाता है संदेश तेरे। तेरी यादों की छांव तले, कट जाए दिन शेष मेरे। मैं छीन लूं रातें सारी, नाम करू सवेरे तेरे। इतने दिन हम आधे थे, अब हो गये अवशेष तेरे। ये कमल से मुख पे केश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे। तेरी चाल पे दिल हार गया, लबों ने नरसंहार किया, आंखों ने लूटा आधा था, अब शेष भी तुझपे हार गया। मैं भवसागर भी पार गया, जैसे मीरा ने प्यार किया, आंखों ने लूटा आधा था, अब शेष भी तुझपे हार गया। हां मैने तुझसे प्यार किया, शब्दों से ना इजहार किया, अब शेष भी तुझपे हार गया, अब शेष भी तुझपे हार गया। हां इतने दिन हम आधे थे, अब हो गए अवशेष तेरे। ये कमल से मुख पे केश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे, जे होजा तू आज मेरी, तो करवा दूं मैं ऐश तेरे। viru.... virendra lora

Hetu P

જે વ્યક્તિ એક દિવસ એવું કહેતો હોય કે, નથી જોવાતું તારૂ દુઃખ હું તને રડતા નથી જોઈ શકતો, પછી એજ વ્યક્તિ .. આપણને રડાવે છે !... આજ સત્ય છે.💔😊

Dr.Namrata Dharaviya

જિંદગીની નવી શરૂઆત માટે કોઈ મુહૂર્ત નથી હોતું, બસ, મન મનાવી લો તો એ જ શ્રેષ્ઠ ક્ષણ છે." -કલમ ના સથવારે ✍️ - Dr.Namrata Dharaviya

Std Maurya

मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए। शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए। आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं। क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं। आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए। मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए। आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है। जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है। एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है, "बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है। लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

शत्रु उसी को कहे जग, जो करता नुकसान। अवसर पाते ही तुरत, करता वह अपमान।। दोहा--444 (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास महानगर महानगर ने चुरा ली है जिंदगी मेरी l यहाँ किसीने न देखी है बेबसी मेरी ll नया मिला तो पुराना हुआ है याराना ll चुराके दिल अब ठुकराई दोस्ती मेरी ll जला दिया आशियाँ अपने हाथों से हमने l खुदी को मार दिया देख सादगी मेरी ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

kattupaya s

It's Monday again.. start with the great energy Indian cricket team proved their strength once again.

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या "विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि" भावार्थ --हे प्रभु! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है। मंत्र — विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2 पदच्छेद- विश्वेषाम् + इत् + जनिता + ब्रह्मणाम् + असि शब्दार्थ-- विश्वेषाम् — सबका, समस्त का इद् — ही, निश्चय ही जनिता — उत्पन्न करने वाला, जन्मदाता ब्रह्मणाम् — ब्रह्म (ज्ञान, मन्त्र, विद्या) का असि — तुम हो भावार्थ-- हे प्रभु! आप ही समस्त ब्रह्म (ज्ञान, मन्त्र और विद्याओं) के उत्पन्न करने वाले हैं। संसार में जो भी विद्या, ज्ञान या सत्य का प्रकाश है, उसका मूल स्रोत आप ही हैं। अर्थात् — सभी विद्याओं का आदि मूल परमात्मा ही है। व्याख्या-- इस मंत्र में यह सिद्ध किया गया है कि ज्ञान स्वतः नहीं उत्पन्न होता, बल्कि उसका परम स्रोत परमात्मा है। वही परम चेतना ऋषियों के हृदय में ज्ञान का प्रकाश करती है, जिससे वेद, मंत्र और समस्त विद्याएँ प्रकट होती हैं। इस प्रकार यह मंत्र बताता है कि परमात्मा ही समस्त ज्ञान का मूल कारण और प्रेरक है। वेदों में प्रमाण -- 1. ऋग्वेद-- 10.71.1 बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं यत्प्रैरत नामधेयं दधानाः। अर्थ : हे बृहस्पति (परमेश्वर)! आपने ही प्रारम्भ में वाणी और ज्ञान को प्रकट किया और वस्तुओं के नाम तथा विद्या का ज्ञान दिया। भाव : ज्ञान और वाणी का मूल स्रोत परमात्मा है। 2. यजुर्वेद-- 40.8 स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणम् अस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम्। कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भूः याथातथ्यतोऽर्थान्व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः॥ अर्थ : वह परमेश्वर सर्वज्ञ, सर्वव्यापक और स्वयम्भू है; वही यथार्थ रूप से सब पदार्थों का ज्ञान मनुष्यों को देता है। भाव : सभी ज्ञान का विधान और व्यवस्था परमात्मा ही करता है। 3. ऋग्वेद-- 10.129.6 यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन् सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद। अर्थ : इस सृष्टि का जो परम अधीक्षक परम आकाश में स्थित है, वही वास्तव में सबको जानता है। भाव : सर्वज्ञ परमात्मा ही ज्ञान का परम आधार है। 4. अथर्ववेद --10.8.32 येन ऋचः साम यजूंषि निर्मितानि। अर्थ : जिस परमात्मा से ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद के मंत्र प्रकट हुए हैं। भाव : वेद और समस्त विद्या का मूल परमात्मा है। निष्कर्ष : वेदों में अनेक स्थानों पर यह सिद्ध किया गया है कि समस्त ज्ञान, वाणी, वेद और विद्याओं का मूल स्रोत परमात्मा ही है। उपनिषदों में प्रमाण--- 1. मुण्डकोपनिषद --1.1.1 श्लोक : ब्रह्मा देवानां प्रथमः सम्बभूव विश्वस्य कर्ता भुवनस्य गोप्ता। स ब्रह्मविद्यां सर्वविद्याप्रतिष्ठाम् अथर्वाय ज्येष्ठपुत्राय प्राह॥ अर्थ : सृष्टि के कर्ता ब्रह्मा ने सबसे पहले ब्रह्मविद्या, जो सभी विद्याओं की आधार है, अपने ज्येष्ठ पुत्र अथर्वा को बताई। भाव : यह बताता है कि सभी विद्याओं का मूल आधार परमात्मा से प्राप्त ब्रह्मविद्या है। 2--कठ उपनिषद् --2.2.15 न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥ अर्थ : जहाँ परमात्मा का प्रकाश है वहाँ सूर्य, चन्द्र और अग्नि भी प्रकाश नहीं देते; उसी के प्रकाश से सब कुछ प्रकाशित होता है। भाव : सारा ज्ञान और प्रकाश उसी परमात्मा से प्राप्त होता है। 3. श्वेताश्वतर उपनिषद-- 6.18 यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै। तं ह देवमात्मबुद्धिप्रकाशं मुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये॥ अर्थ : जो परमात्मा पहले ब्रह्मा को उत्पन्न करता है और वही उन्हें वेदों का ज्ञान देता है — उस आत्मबुद्धि को प्रकाशित करने वाले देव की मैं शरण लेता हूँ। भाव : वेदों और ज्ञान का उपदेश भी परमात्मा ही करता है। 4.तैत्तिरीय उपनिषद--2.1 सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म। अर्थ : ब्रह्म (परमात्मा) सत्यस्वरूप, ज्ञानस्वरूप और अनन्त है। भाव : ज्ञान स्वयं परमात्मा का स्वरूप है, इसलिए सारी विद्या का मूल भी वही है। 5. बृहदारण्यक उपनिषद्-- 2.4.10 अस्य महतो भूतस्य निःश्वसितमेतद्यदृग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदोऽथर्वाङ्गिरसः। अर्थ : यह ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद उस महान् परमात्मा के निःश्वास (श्वास) के समान हैं। भाव : वेद और ज्ञान का उद्गम परमात्मा से ही है। 6. छान्दोग्य उपनिषद्-- 6.1.3 येनाश्रुतं श्रुतं भवति अमतं मतम् अविज्ञातं विज्ञातम्। अर्थ : जिस ज्ञान को जान लेने से अश्रुत भी श्रुत हो जाता है, और अज्ञात भी ज्ञात हो जाता है। भाव : परमात्मा का ज्ञान ही सभी ज्ञानों का मूल है। 7-- प्रश्न उपनिषद् --6.3 स प्राणमसृजत। अर्थ : परमात्मा ने ही प्राण आदि की रचना की। भाव : सृष्टि और जीवन के साथ-साथ ज्ञान का मूल कारण भी वही परमात्मा है। 8. एतरेय उपनिषद् --3.3 प्रज्ञानं ब्रह्म। अर्थ : प्रज्ञान (परम ज्ञान) ही ब्रह्म है। भाव : परमात्मा ही परम ज्ञानस्वरूप है, इसलिए सभी विद्याओं का मूल वही है। पुराणों में प्रमाण--- 1. विष्णु पुराण --1.2.10 ज्ञानस्वरूपो भगवान् विष्णुः। अर्थ : भगवान विष्णु स्वयं ज्ञानस्वरूप हैं। भाव : समस्त ज्ञान और विद्या का मूल भगवान ही हैं। 2. भागवत पुराण-- 1.1.1 श्लोक : तेने ब्रह्म हृदा या आदिकवये। अर्थ : भगवान ने सृष्टि के आदि में ब्रह्मा के हृदय में वेदज्ञान का प्रकाश किया। भाव : वेद और समस्त विद्या का ज्ञान परमात्मा से ही प्राप्त होता है। 3. शिव पुराण --(विद्येश्वर संहिता) ज्ञानं महेश्वरादेव सर्वविद्या प्रवर्तते। अर्थ : समस्त विद्या और ज्ञान महेश्वर से ही प्रवाहित होते हैं। भाव : सभी विद्याओं का मूल परमेश्वर है। 4 --ब्रह्म पुराण-- ईश्वरः सर्वविद्यानां मूलभूतः सनातनः। अर्थ : सनातन ईश्वर ही सभी विद्याओं का मूल कारण है। 5--पद्म पुराण -- सर्वज्ञानमयो देवः सर्वविद्याप्रवर्तकः। अर्थ : परमेश्वर सर्वज्ञानमय हैं और वही सभी विद्याओं को प्रवर्तित करने वाले हैं। भाव : समस्त ज्ञान और विद्या का मूल परमात्मा ही है। 6 स्कंद पुराण-- ज्ञानं विज्ञानसहितं देवात् सर्वं प्रवर्तते। अर्थ : ज्ञान और विज्ञान सहित सभी विद्याएँ परम देव से ही उत्पन्न होती हैं। 7.नारद पुराण-- सर्वविद्यानां प्रभुः देवो ज्ञानप्रदः सनातनः। अर्थ : सनातन परमेश्वर ही सभी विद्याओं के स्वामी और ज्ञान देने वाले हैं। 4. गरुड़ पूराण- ईश्वरात् सर्वविद्यानां उत्पत्तिः परिकीर्तिता। अर्थ : सभी विद्याओं की उत्पत्ति ईश्वर से ही बताई गई है। निष्कर्ष : पुराणों में भी यही सिद्ध किया गया है कि ज्ञान, वेद, विद्या और विज्ञान का मूल कारण परमात्मा ही है। 1.(क) भगवद्गीता-- 15.15 सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च। अर्थ : मैं सबके हृदय में स्थित हूँ और मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और बुद्धि उत्पन्न होती है। भाव : सभी प्रकार का ज्ञान परमात्मा से ही प्राप्त होता है। 1(ख) भगवद्गीता- 10.32 अध्यात्मविद्या विद्यानां। अर्थ : विद्याओं में मैं अध्यात्मविद्या हूँ। भाव : समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा से संबंधित अध्यात्म ज्ञान है। 1(ग). भगवद्गीता-- 10.8 अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। अर्थ : मैं ही सबका मूल कारण हूँ और सब कुछ मुझसे ही प्रवर्तित होता है। भाव : ज्ञान, विद्या और सृष्टि सबका मूल परमात्मा है। 1(घ). भगवद्गीता-- 7.10 बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि। अर्थ : मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ। भाव : सभी बुद्धि और ज्ञान का आधार परमात्मा ही है। निष्कर्ष : गीता में भी स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान, स्मृति, बुद्धि और समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा ही है। महाभारत में प्रमाण - 1- (शान्ति पर्व) ज्ञानं हि परमं ब्रह्म। अर्थ : ज्ञान ही परम ब्रह्म का स्वरूप है। भाव : परमात्मा ही ज्ञानस्वरूप है, इसलिए समस्त विद्या का मूल वही है। 2. (शान्ति पर्व) न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। अर्थ : इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है। भाव : ज्ञान सर्वोच्च है और उसका मूल परमात्मा है। 3. (अनुशासन पर्व) ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशे तिष्ठति। अर्थ : ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित है। भाव : हृदय में स्थित परमात्मा ही मनुष्य को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है। 4. (शान्ति पर्व) सर्वविद्यानां प्रभुः देवः। अर्थ : परम देव ही सभी विद्याओं के स्वामी हैं। निष्कर्ष : महाभारत में भी यह सिद्ध किया गया है कि ज्ञान, बुद्धि और सभी विद्याओं का मूल स्रोत परमात्मा ही है। स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण-- 1(क). मनु स्मृति--1.21 सर्वेषां तु स नामानि कर्माणि च पृथक् पृथक्। वेदशब्देभ्य एवेदौ पृथक् संस्थाश्च निर्ममे॥ अर्थ : परमात्मा ने वेदों के शब्दों से ही सब वस्तुओं के नाम, कर्म और व्यवस्थाएँ स्थापित कीं। भाव : सारी व्यवस्था और ज्ञान का मूल वेद है, और वेद परमात्मा से प्रकट हुए हैं। 1(ख)-मनु स्मृति-- 2.6 वेदोऽखिलो धर्ममूलम्। अर्थ : सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है। भाव : वेदों में ही सभी ज्ञान और धर्म का आधार है। 2. याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.3 वेदो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्। अर्थ : वेद धर्म का मूल हैं और स्मृतियाँ तथा श्रेष्ठ आचरण उसी के आधार पर हैं। भाव : सभी ज्ञान और नियमों का मूल वेद है। 3--पराशर स्मृति-- वेदप्रणिहितो धर्मः। अर्थ : धर्म वेदों में स्थापित किया गया है। भाव : वेदों में ही जीवन का ज्ञान और मार्ग बताया गया है। निष्कर्ष : स्मृति ग्रन्थों में भी स्पष्ट कहा गया है कि वेद ही ज्ञान और धर्म का मूल हैं, और वेद परमात्मा से प्रकट हुए हैं। इसलिए समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा है। 1.चाणक्य नीति--1-3 विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ अर्थ : विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है और छिपा हुआ धन है। वही सुख, यश और सम्मान देने वाली है तथा गुरुओं की भी गुरु है। भृतहरि नीति शतक-- 20 विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ अर्थ : विद्या मनुष्य का सर्वोत्तम रूप और छिपा हुआ धन है; वही सुख, यश और प्रतिष्ठा देने वाली है। भाव : विद्या ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। 3. विदुर नीति (महाभारत, उद्योगपर्व 33.37) नास्ति विद्यासमं चक्षुः नास्ति सत्यसमं तपः। अर्थ : विद्या के समान कोई नेत्र नहीं और सत्य के समान कोई तप नहीं है। भाव : विद्या मनुष्य को सही मार्ग दिखाने वाली है। 4-भृतहरि नीति शतक - 16 विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च॥ अर्थ : विदेश में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि होती है और मरने के बाद धर्म मित्र होता है। भाव : विद्या जीवन के हर स्थान पर सहायक है। निष्कर्ष : चाणक्य नीति, भृतहरि नीति शतक-- और विदुर नीति जैसे नीति ग्रन्थों में भी विद्या को मनुष्य का सर्वोच्च धन और मार्गदर्शक बताया गया है। यह सिद्ध करता है कि ज्ञान और विद्या का महत्व सर्वोपरि है। 1. हितोपदेश-- 1.3 विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥ अर्थ : विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है। भाव : विद्या ही जीवन के सभी गुणों और सुखों का मूल है। 2. पन्चतन्त-- विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च॥ अर्थ : विदेश में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि होती है और मृत्यु के बाद धर्म ही मित्र होता है। भाव : विद्या जीवन में हर स्थान पर सहायक होती है। 3. शुभाषित रत्न भण्डार-86 न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारी। व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ अर्थ : विद्या का धन ऐसा है जिसे न चोर चुरा सकते हैं, न राजा छीन सकता है, न भाई बाँट सकते हैं और न यह बोझ बनता है; खर्च करने पर भी यह बढ़ता ही है। भाव : विद्या सभी धनों में श्रेष्ठ है। 4. चाणक्य नीति-- 4.14 विद्याविहीनः पशुः। अर्थ : विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है। भाव : विद्या मनुष्य को वास्तविक मनुष्य बनाती है। 1. वाल्मीकि रामायण(बालकाण्ड 1.1.18) वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञो धनुर्वेदे च निष्ठितः। अर्थ : श्रीराम वेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाले तथा धनुर्वेद में भी पूर्ण निपुण थे। भाव : वेद और उनकी विद्या को परम और दिव्य ज्ञान माना गया है। 2. वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड 1.1.20) श्लोक : सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान्। अर्थ : वे सभी शास्त्रों के तत्त्व को जानने वाले, स्मरणशक्ति वाले और प्रतिभाशाली थे। भाव : सभी शास्त्रों का ज्ञान दिव्य ज्ञान माना गया है। 3. गर्ग संहिता (ज्ञान-महिमा प्रसंग) ज्ञानं परं ब्रह्म सर्वविद्याप्रकाशकम्। अर्थ : परम ज्ञान ही ब्रह्म है और वही सभी विद्याओं को प्रकाशित करता है। भाव : सभी विद्याओं का मूल ब्रह्म (परमात्मा) है। 4. गर्ग संहिता -- ईश्वरः सर्वविद्यानां मूलं ज्ञानप्रदायकः। अर्थ : ईश्वर ही सभी विद्याओं का मूल और ज्ञान देने वाला है। निष्कर्ष : दोनों में यह बताया गया है कि वेद, शास्त्र और समस्त विद्या का आधार दिव्य ज्ञान है, और उसका अंतिम स्रोत परमात्मा ही है। ---+-----+-----+-------+-----+

Rinki Singh

वे स्त्रियाँ... जो रह गईं बस इतनी-सी आकांक्षा में कि कभी रोटी की भाप के साथ उनकी मेहनत की भी कोई गर्म-सी प्रशंसा उठे.. उन्हें कोई प्रशस्ति-पत्र नहीं मिला | जो स्त्रियाँ... आजीवन सजाती-सँवारती रहीं घर के कोने, धूप की तरह फैलती रहीं आँगन-आँगन.. उनके लिए कभी कोई महफ़िल नहीं सजी | जिन स्त्रियों ने... सुबह की पहली किरण से शाम की बुझती लौ तक अपनों के पीछे भागते हुए अपने बदन को पसीने से चमकाया उनकी हथेलियों तक कभी तमगों की चमक नहीं पहुँची | जिनका अस्तित्व धीरे-धीरे डूब गया किसी और के नाम के पीछे जैसे नदी... समुद्र में अपना नाम खो देती है.. उनका नाम.. कभी किसी पोस्टर की शोभा नहीं बना | जिन्होंने... जरा सी अहमियत को ही उपलब्धि मान लिया वे रह गईं एक विकल्प की तरह, कभी किसी की अनिवार्य आवश्यकता नहीं बनीं क्योकि... उनके हिस्से नहीं आए कोई उपलब्धि, कोई तमगा, कोई महफ़िल, कोई किताब, कोई ख़िताब इसलिए उनके हिस्से नहीं आया कोई दिवस, कोई उत्सव वे बस कहलाती रहीं.. नाकारा, कामचोर, असफल स्त्रियाँ उनके हिस्से आए... कुछ तिरछे वाक्य... “तुमने किया ही क्या?” “तुम करती ही क्या हो?” “तुम कुछ नहीं जानती…” तो प्यारी स्त्री ..! अगर तुम नहीं कहलाई कामकाजी और सफल स्त्री एक दिन अपनों से ही हर जगह दुत्कार पाओगी | सच कहती हूँ, सखी! मरने से पहले ही मार दी जाओगी | ~रिंकी सिंह #poetry #matrubharti

Rashmi Dwivedi

🙏गीता में श्री कृष्ण कहते हैं..... ⚡कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल की इच्छा करने वाले मत बनो और न ही कर्म न करने में तुम्हारी आसक्ति हो। अर्थात् कर्म करो परिणाम ईश्वर अवश्य देंगे। हर हर महादेव ❤️

kattupaya s

Good morning friends.. have a great week

Soni shakya

सुप्रभात 🙏 ओम् नमः शिवाय 🙏🌹🙏

Firoz Khan

tere sath mujhe zindagi bitani hai to mera budhpa to hi jawani hai agar to mil gaya to mil jayega jaha na mila to tu phir khatam zindagani hai

MASHAALLHA KHAN

गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई, ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी, लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की, फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई . -MASHAALLHA....

Mamta Trivedi

https://youtube.com/shorts/Y4lpXyIu0C4?si=9wlN7cgxckwDtrL2

બદનામ રાજા

સારા અનુભવથી ખરાબ માણસો બદલાય કે ના બદલાય, પરંતુ ખરાબ અનુભવથી સારા માણસો ચોક્કસ બદલાય જાય છે... 🌸

simran kumari

mai or meri jindgi ka ahsas💓💓💓💓 ''meri koi jajbat nahi hai, meri kahani ka har panna khali hai !! har panne par dard ki syahi lagi hai, or kya bataun tumhe..... meri koi kahani nahi hai!" bas kuch tute khwab hai, jo dil me Aaj vi adhure pade hai!" ♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️

Nothing

"किसीने मेरे साथ किए बर्ताव के लिये माफी नहीं मांगी,उन्होंने बस मेरे रिएक्शन के लिए मुझे ही दोषी ठहराया।"

rima

निभाना ही तो मुश्किल है, चाहना तो हर किसी को आता है। (✿♥‿♥)

Nothing

"તન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી ફરક પડે બાકી મન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી કોઈ ફરક પડતો નથી..અમુક વાર મન હારતું નથી પણ થાકી જાય છે.ક્યારેક પોતાની માનેલ વ્યક્તિના વ્યવહાર, વર્તનથી તો ક્યારેક પોતાની અપરિપૂર્ણ અપેક્ષાઓથી..તેમ છતાં એડજસ્ટમેન્ટ અને કોમ્પ્રો..કરવું પડે છે.જિંદગી છે તો જીવવું જ પડે છે..!"

rima

हम बुरे नहीं थे मगर तुमने बुरा कर दिया, पर अब हम बुरे बन गए हैं। ताकि तुम्हें कोई झूठा ना कह दे।🥰🥰

putti

ದಾರಿ ತಪ್ಪಿದ ಹಕ್ಕಿಗೆ, ಗೂಡು ತಲುಪುವ ಕನಸು ; ಮುಗಿಯದ ಹೆಜ್ಜೆಗೆ, ಊರ ಸೇರುವ ಕನಸು😐

Ruchi Dixit

प्रेम का वास्तविक अर्थ समानता है एक तरफा केवल कामनाएं होती है जो एक पूर्वप्रतीक्षित संसार का निर्माण करती है । - Ruchi Dixit

રોનક જોષી. રાહગીર

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Raju kumar Chaudhary

“मेरी कीमत 10 लाख क्यों थी?”एक रात की तीव्र इच्छा और भावनाओं के बाद, एक उद्योगपति ने एक गरीब छात्रा को एक मिलियन रुपये देकर छोड़ दिया और बिना कोई निशान छोड़े गायब हो गया। सात साल बाद उसे पता चला कि आखिर उसकी “कीमत” इतनी क्यों थी। उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनी के बाद, वह एक होटल के कमरे में जागी जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ मार्ग का दृश्य दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें इमारतों को हल्का सुनहरा रंग दे रही थीं, और उसी क्षण उसे हकीकत का भार महसूस हुआ। उसका नाम काव्या शर्मा था, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र संकाय में तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह राजस्थान के एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों पर मिट्टी और मेहनत के निशान थे। वे जो भी रुपये उसे भेजते थे, वह एक मौन बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया विश्वास। बिस्तर के पास की मेज पर एक मोटा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे। अंदर एक मिलियन रुपये थे। और एक छोटा सा नोट: “इसे किस्मत समझ लो। मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।” वह आदमी गायब हो चुका था। कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी गरिमा की कीमत तय कर दी हो। लेकिन किराया बकाया था। विश्वविद्यालय की फीस दो हफ्तों में जमा करनी थी। उसके छोटे भाई को स्कूल के लिए किताबों की जरूरत थी। हकीकत किसी का इंतजार नहीं करती। बहुत आँसू बहाने के बाद उसने एक फैसला किया: वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह इसे एक पुल बनाएगी, बेड़ी नहीं। उसने विश्वविद्यालय के अपने सारे कर्ज चुका दिए। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि वे घर की छत ठीक कर सकें और खेती बेहतर कर सकें। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में रख दिए। धीरे-धीरे वह भावना कि यह एक अपमान था, मिटने लगी—और उसकी जगह एक अवसर ने ले ली। साल बीत गए। काव्या ने सम्मान के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसकी प्रतिभा और अनुशासन ने एक प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनी के दरवाजे खोल दिए। उसने नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट लिखना—लेकिन जल्द ही उसके वरिष्ठों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह पद दर पद ऊपर बढ़ती गई। उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। उसने अपने माता-पिता को पहली बार राजधानी देखने के लिए बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया। बाहर से उसका जीवन सफलता की कहानी लग रहा था। लेकिन भीतर अब भी एक सवाल अनुत्तरित था। वह आदमी कौन था? उसने ऐसा क्यों किया? सात साल बाद, किस्मत ने उन्हें फिर से आमने-सामने ला खड़ा किया। अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक वित्तीय सम्मेलन में भेजा—एक शानदार होटल में, ठीक उसी राजपथ क्षेत्र के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में एक सिहरन दौड़ गई। यादें कभी खत्म नहीं होतीं; वे बस सो जाती हैं। जब वह अपना पहचान पत्र देख रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई: —काव्या शर्मा? वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय थम गया हो। सामने खड़े आदमी के बालों में अब हल्की सफेदी थी, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं। वही आदमी था। काव्या ने गहरी सांस ली। अब वह उस सुबह की डरी हुई लड़की नहीं थी। अब वह एक आत्मविश्वासी महिला थी। —मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा। वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। कार्यक्रम का शोर दूर-सा लग रहा था। आदमी ने कहना शुरू किया: —उस रात… तुम बहुत थकी हुई थीं और तुमने अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा पी ली थी। तुमने मुझे अपने माता-पिता के बारे में बताया, अपने भाई के बारे में, और इस डर के बारे में कि कहीं तुम्हें विश्वविद्यालय छोड़ना न पड़ जाए। तुमने मुझे कई दशक पहले का अपना ही अतीत याद दिला दिया। काव्या ने भौंहें सिकोड़ लीं

Ruchi Dixit

किसी के लिए यह गर्व होगा कि कोई उसके बिना नहीं रह सकता किसी के लिए अहं होगा एक शब्द दो अर्थ दो भाव ।। - Ruchi Dixit

Raju kumar Chaudhary

गरीब माँ को देखकर लोग हँसे… लेकिन बेटे ने स्टेज पर ऐसा सच बताया कि सबकी आँखें भर आईं“जिस माँ की बदबू से पूरी क्लास नाक ढकती थी… उसी माँ ने ग्रेजुएशन के दिन ऐसा सच दिखाया कि पूरा हॉल रो पड़ा!” उस दिन सुबह अर्जुन की माँ सरिता ने अपनी सबसे अच्छी साड़ी निकाली। वह साड़ी नई नहीं थी। असल में बहुत पुरानी थी। उसका रंग कई जगहों से फीका पड़ चुका था, और किनारों पर छोटे-छोटे टांके लगे हुए थे जहाँ वह फट गई थी। लेकिन सरिता के लिए वही उनकी सबसे कीमती साड़ी थी। उन्होंने सावधानी से अपने हाथ धोए। नाखून साफ किए। बालों में तेल लगाया और उन्हें ठीक से बाँधा। फिर धीरे से अर्जुन के पास आकर बोलीं— “बेटा… आज तुम्हारा ग्रेजुएशन है न?” अर्जुन ने सिर हिलाया। माँ कुछ पल चुप रहीं, जैसे हिम्मत जुटा रही हों। फिर धीमी आवाज़ में बोलीं— “क्या… क्या मैं तुम्हारे साथ स्टेज पर आ सकती हूँ? बस तुम्हें मेडल पहनाना चाहती हूँ। यह मौका सिर्फ एक बार आता है।” अर्जुन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उसे तुरंत याद आ गया— वही बच्चे… वही हँसी… वही ताने… अगर माँ स्टेज पर जाएँगी… तो क्या होगा? लेकिन जब उसने माँ के चेहरे की तरफ देखा, तो उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो अर्जुन ने पहले कभी नहीं देखी थी। वह गर्व था। वह उम्मीद थी। और शायद… एक सपना भी। अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— “हाँ माँ, बिल्कुल। तुम ही कारण हो कि मैं आज यहाँ हूँ।” कुछ देर बाद वे दोनों ग्रेजुएशन समारोह के लिए स्कूल पहुँचे। जैसे ही वे जिम के अंदर दाखिल हुए, अर्जुन को तुरंत महसूस हुआ कि कुछ बदल गया है। लोगों की नज़रें उनकी तरफ उठने लगीं। सभी माता-पिता महंगे सूट और चमकदार साड़ियों में थे। उनके शरीर से महंगे परफ्यूम की खुशबू आ रही थी। और उनके बीच… सरिता अपनी फीकी साड़ी में खड़ी थीं। जैसे ही वह आगे बढ़ीं, अर्जुन ने देखा— कुछ लोगों ने धीरे से अपनी नाक ढक ली। किसी ने फुसफुसाकर कहा— “वह यहाँ क्यों आई है?” “पूरा माहौल खराब कर दिया।” सरिता का चेहरा तुरंत झुक गया। उन्होंने अर्जुन से धीमी आवाज़ में कहा— “बेटा… मैं पीछे खड़ी रहती हूँ। मुझे शर्म आ रही है… कहीं लोग तुम्हारा मज़ाक न उड़ाएँ।” अर्जुन ने उनका खुरदुरा हाथ कसकर पकड़ लिया। लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि आज मंच पर वह कुछ ऐसा कहने वाला है… जो पूरे हॉल की सोच बदल देगा। 👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Mrudhula

Sometimes I feel that loneliness is not a punishment, but a path that life gives to shape me into something stronger. There are days when the world feels dark and uncertain, yet a quiet voice inside reminds me to keep shining. I believe that somewhere in the future, destiny holds a moment of love and meaning waiting for me. Until then, I try to blossom in my own way, because someone out there may need the hope and light I carry. And in the end, I know every question life asks will find its answer, just as every life eventually finds its peaceful end.

kattupaya s

256 is the target for Newzealand..

Ruchi Dixit

स्त्री को स्त्री बनकर ही समझा जा सकता है दूसरा अन्य कोई रास्ता नहीं । - Ruchi Dixit

kattupaya s

Hardik pandya the over ambitious guy

kattupaya s

Sanju samson on fire...

Mare DoAlfaz

हर एक हंसी में छुपी खौफ की उदासी है..

Piyush Goel

https://www.piyushgoel.in

kattupaya s

Newzealand struggling with their bowling.. India looking 250

Armin Dutia Motashaw

HAPPY WOMEN'S DAY Women don't need to be wished only on this special day There's an absolute need to respect them everyday A smile genuine, a kiss small or a hug big, will go a long way Let's remember to celebrate daily Women's day, in this way. Armin Dutia Motashaw

kattupaya s

After powerplay 92 for no loss India

Kajal Rathod...RV

Happiest women's day 🎊

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1Ao2ozFW4p/ 🎊Happy Women's Day🎊 માણો સુંદર મજાની વાર્તા

kattupaya s

India batting... NewZealand won the toss

kattupaya s

it's a good batting track abhishek must come back to his form. 250 score will be minimum

Mahesh

લાગે છે મને એવું કે હું બસ ફોર્મલિટી પૂરી કરવા આવિયો છું... બાકી કોને જરૂર છે મારી તે તો મને પણ નથી ખબર...!!!!! - Mahesh

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