Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Raju kumar Chaudhary
A beautiful and spiritual poster for Chaiti Chhath Puja festival. A serene sunrise scene on a riverbank with devotees standing in water offering arghya to the Sun God. Traditional Indian attire, women in colorful sarees holding bamboo baskets filled with fruits, sugarcane, and diyas. Warm golden sunlight reflecting on water, calm and divine atmosphere. Add glowing text in Hindi: "चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं" in elegant calligraphy. Include soft light effects, floating diyas, lotus flowers, and a peaceful sky. Ultra HD, cinematic lighting, highly detailed, vibrant colors, devotional mood.
🪄 Hindi Text (Poster पर लिखने के लिए)
"🌞 चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं 🌼
सूर्य देव आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें 🙏"
Saroj Prajapati
रिजल्ट तो बनता रहेगा
काम धंधा सब चलता रहेगा
चलो कुछ वक्त खूबसूरत फूलों संग बिताए
थोड़ी इनकी सुने कुछ अपनी इन्हें सुनाएं
संघर्ष में हंसकर जीने की कला ये हमें सिखाएं
चार दिन की है जिंदगानी, खुलकर जिएं और मुस्कुराएं
जिंदगी का है बस यही फलसफा,ये महकते फूल हमें समझाएं।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Maya Hanchate httpstmeuUWEPTNoyAMZTRl
https://t.me/+uUWEPTNoyAM1ZTRl
- Maya Hanchate
in this app you get all the notification of uljhan rishton ki, Ishq ki library, dori..
please please subscribe.
Maya Hanchate httpstmeuUWEPTNoyAMZTRl
Khamoshiyan Sneh lagi...
by Maya Hanchate... Gemini..
inspired by Dil Se Dil Tak (uljhan, rishton ki)
sound by Suno app.
MASHAALLHA KHAN
मेरी नाव समुद्र के उस हिस्से मे जा फसी है
जहा से बाहर निकल आना एक चमत्कार से
कम नही होगा .
-MASHAALLHA
Jenisha
જીવ થી પણ વ્હાલુ મારુ ઘર, દસકા પહેલા આ દરવાજે મેં (વરસાદ) ની જેમ રાહ જોઈને વ્હાલસોયુ વડીલ ઉભુ રેતુ, આજ કોઈ દરવાજો ખોલવા પણ રહ્યુ નથી, તો પણ આજ દસકાઓ પછી પણ એમજ ઉભુ છે અડીખમ અને અડગ એવુ વ્હાલસોયુ મારુ ઘર…
Shailesh Joshi
દરેક મા-બાપ પોતાના સંતાનો માટે ખુબજ ચિંતાઓ કરતા હોય છે, અને કરવી પણ જોઈએ, પરંતુ
સામે સંતાનોને પણ...
એક ચિંતા તો રાખવી જ જોઈએ કે,
ભલે અમારા મા-બાપ આખી જિંદગી "અમારા માટે" ચિંતાઓ કરે, પરંતુ
અમારા મા-બાપની એકપણ ચિંતા,
"અમારા લીધે" ન હોવી જોઈએ.
- Shailesh Joshi
Shailesh Joshi
આપણા જીવનમાં અવારનવાર આવતી જતી રહેતી મોટાભાગની મુસીબતોનું મુખ્ય "કારણ" આપણું મગજ જ હોય છે, અને મોટાભાગની મુસીબતોનું મારણ પણ આપણું મગજ જ છે, માટે જો આપણે મુસીબતોથી બચવું હોય તો એનો "યોગ્ય" ઉપયોગ કરવા સિવાય આપણી પાસે બીજો કોઈ વિકલ્પ નથી.
હા આમાં આપણામાંથી જ અમુક કે પછી ઘણાબધા લોકો, એમના ભાગમાં આવતી, કે પછી એમણે જાતે જ ઊભી કરેલી મુસીબતોથી દૂર ભાગવાનો, કે પછી એ મુસીબતોને દૂર ઠેલવાનો, અથવા તો જે તે મુસીબતોથી બચવાનો, કે પછી અમુક લોકો તો એમના જીવનમાં મુસીબતો આવે જ નહીં એવો ટૂંકા ગાળાનો રસ્તો પણ શોધી લે છે, અને એ પણ એમનું મગજ દોડાવીને, પરંતુ એક વાત તો જગજાહેર છે કે, સ્વાર્થથી ભરેલા ટૂંકા ગાળાના ફાયદા માટે અયોગ્ય રીતે ખોટી દિશામાં દોડાવેલ મગજ, આપણને જે ફાયદો કરાવે છે, એ ફાયદો હંમેશા ટૂંકા ગાળા માટે જ હોય છે, ને પછી આપણને આપણો સમય એવા સમયમાં લાવીને ઊભા કરી દે છે કે, આપણું મગજ ચાલવાનું તો દૂર, બિલકુલ કામ કરવાનું જ છોડી દે છે, ને આપણે અતિશય લાચાર ભરી પરિસ્થિતિમાં આવી જઈએ છીએ, એક એવી સ્થિતિ કે જેમાં આપણે સિવાય અફસોસ બીજું કશું કરી શકવાની સ્થિતિમાં નથી રહેતા.
માટે કોઈપણ સારી નરસી પરિસ્થિતિ વખતે, ધીરજ રાખી, શાંત ચિત્તે, સમય અને સંજોગોને સારામાં સારી રીતે જોઈ સમજી લીધા પછી, જે તે બાબતે ખૂબજ ઊંડાણ પૂર્વક વિચારી જીવનમાં આગળ વધવું, એજ સાચી સમજદારી પણ છે, અને એ આપણા સુખરૂપ ઉજ્જવળ ભવિષ્ય માટે ખુબ ખૂબ અને ખૂબજ જરૂરી પણ છે.
Mrugzal
#Mrugzal
#TeaLover
#EmptyHeart
Mrs Farida Desar foram
चाँद तारो की ख्वाहिश,
हमने कहा की थी,
हमें तो बस,
एक सहारा चाहिए था,
जिसके सीने पर रख के सिर,
हम बस सुकून महसूस करे...
- Mrs Farida Desar foram
Dr.Namrata Dharaviya
જોગણ થઈને રાધા શોધી ન શકી જેને વનમાં,
મસ્ત બનીને મીરાએ શોધી લીધો એને મનમાં.
-કલમ ના સથવારે ✍️
Dr.Namrata Dharaviya
Dada Bhagwan
વીતરાગનો આખો માર્ગ જ 'વિનય'નો છે. આ વિનય ધર્મની શરૂઆત હિન્દુસ્તાનમાં થાય છે. હાથ જોડવાથી તે સાષ્ટાંગ પ્રણામ સુધીમાં જે જે કરવામાં આવે છે તેવા પાર વગરના વિનયધર્મ છે. અને છેવટે 'પરમ વિનય' થયો એટલે મોક્ષ થાય. - દાદા ભગવાન
વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/lu5mEP24
#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation
Jyoti Gupta
#ChhathPooja #ChhathPuja2026 #SuryaDev
#AnandDham #BhaktiVibes #Devotional
#IndianFestival #SpiritualVibes #PoojaTime
#FestivalReels #InstaReels #ViralReels
#ExplorePage #TrendingNow #Shorts
#FaithAndDevotion #PositiveEnergy
Sonu Kumar
क्या हम भारत में चीनी उत्पादों से छुटकारा पा सकते हैं?
.
चीन की सेना भारत की सेना से कई गुना ज्यादा ताकतवर है, अत: हम चीनी उत्पादों से बच नहीं सकते। यदि हम अपनी सेना को चीन से ज्यादा ताकतवर बना ले तो हम चीन के बढ़ते नियंत्रण से छुटकारा पा सकते है। किन्तु तब अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां हमारी पूरी अर्थव्यवस्था को टेक ओवर कर लेगी। और यदि हमें अमेरिकी-ब्रिटिश से बचना है तो यह जरुरी है कि हमारी सेना अमेरिका के बराबर ताकतवर हो।
.
इस जवाब में मैंने ज्यादातर चीन के बढ़ते हुए नियंत्रण के बारे में बताया है, इसके समाधान के बारे में मैं फिर किसी जवाब में लिखा जाएगा।
.
--------
.
(0) चीन का नियंत्रण भारत में क्यों बढ़ रहा है ?
.
(A) चीन के पास बड़े पैमाने पर तकनिकी उत्पादन करने का आधार है, जिसकी वजह से वे ऐसी वस्तुएं बनाते है, जो भारत नहीं बना पाता। और इसीलिए चीन से हमें ये वस्तुएं लेनी पड़ती है। यदि भारत को चीनी उत्पादों से छुटकारा पाना है तो गेजेट में ऐसे क़ानून छापने होंगे जिससे हम भारत में स्वदेशी तकनिकी उत्पादन बढ़ा सके।
.
अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियां बेहद उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाती है, और भारत के विशाल मध्य वर्ग के लिए यह काफी महंगे है। अत: हम सस्ते और चिल्लर तकनिकी उत्पादो के लिए चीन पर निर्भर होते जा रहे है। या तो खुद बनाओ या चीन से लो। दूसरा कोई रास्ता नहीं है। चीनी वस्तुओ का बहिष्कार करना इतना बकवास रास्ता है कि मैं इस पर बात करके भी अपना टाइम जाया नहीं करना चाहता।
.
(B) लेकिन सिर्फ तकनिकी उत्पादन करने से भी हम चीनी सामान से छुटकारा नहीं पा सकते। इसके लिए यह जरुरी है कि हमारी सेना चीन का मुकाबला करने में आत्मनिर्भर हो। मतलब यदि चीन के मोबाईल रोकने है तो सिर्फ चीन से बेहतर मोबाईल बनाकर हम उन्हें नहीं रोक सकते। इसके लिए हमें चीन से अच्छे फाइटर प्लेन बनाने होंगे !! हम चीन से बेहतर फाइटर प्लेन बनेंगे तो चीन के मोबाईल रुकेंगे। वर्ना नहीं।
.
भारत की सेना कमजोर होने के कारण चीन भारत पर उन कानूनों को गेजेट में छापने के लिए दबाव बनाता है जिससे चीन का भारत की अर्थव्यवस्था में नियंत्रण बढे। और इस तरह का दबाव सैन्य ताकत द्वारा बनाया जाता है। अन्तराष्ट्रीय मामलों में कोई कूटनीति वगेरह नहीं होती है। ये परले दर्जे की बकवास है, जिसे पेड मीडिया एवं पेड रक्षा विशेषज्ञों द्वारा नागरिको की आँखों में धुल झोंकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सारी कूटनीति बातें सीधे लफ्जो में होती है।
.
उदाहरण के लिए, चीनी आकर सीधे यह कहते है कि हमें भारत के अमुक ट्रेन ट्रेक पर रेल चलाने के ठेके दो, इतने उतने कर मुक्त सेज दो, वर्ना हम अपनी सेना भारत की सीमा में घुसा देंगे। अब यदि भारत उनकी बात मान जाता है तो कूटनीति सफल है, और भारत अपनी अर्थव्यवस्था के क्षेत्र चीनियों के हवाले कर देगा। यदि भारत टालता रहता है तो शी जिनपिंग भारत की सीमा में सेना घुसाना शुरू करेंगे। जैसे ही 5 किलोमीटर सेना अन्दर घुसेगी भारत उनकी मांगे मान लेगा और सेना लौट जाएगी। बस यही विदेश नीति है।
.
और फिर समाधान की गलत दिशा में धकलने के लिए पेड मीडिया एवं आई टी सेल को चीनी आयटमो का बहिष्कार करने के लिए कैम्पेन चलाने के लिए कह दिया जाता है। कार्यकर्ता इस बात को समझ नहीं पाते कि चीनी भारत सरकार के जरिये घुस रहे है, तो इस तरह के फर्जी बहिस्कार कैम्पेन से चीनियों को रोका नहीं जा सकता।
.
———
.
निचे कुछ उदाहरण दिए है जिससे आप जान सकते है कि चीनी आयटमो के इस तरह के फर्जी बहिष्कार कैम्पेन किस तरह चीनियों के लिए कवर का काम करते है, और वे सरकार को बाध्य करके किस तरह भारत में तथा भारत की सीमओं पर अपना नियंत्रण बढाते जा रहे है :
.
(1) इंडस्ट्रियल पार्क एवं सेज : 2014 में मोदी साहेब के पीएम बनने के बाद शी जिनपिंग पहली बार मोदी साहेब से मिलने भारत आये थे। और जब वे भारत आये तो अपनी सेना साथ लेकर आये। जैसे ही शी ने अहमदाबाद में लेंड किया वैसे ही चीन की सेना ने भारत में घुसना शुरू किया।
.
चीनी दो मोर्चो पर भारत की सीमा में 5 किलोमीटर तक अन्दर घुस आये। भारत ने चीन को 5 इंडस्ट्रियल पार्क, सेज और हाई स्पीड ट्रेन चलाने के ठेके दिए। डील होने के बाद जब शी जिनपिंग भारत से निकल गए तब चीन की सेना ने भारत छोड़ा !!! और जब शी जिनपिंग भारत आये तो इससे पहले उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करने वाले बयान दिए व अरुणाचल प्रदेश को चीन के नक़्शे में भी दिखाया !!!
.
यह खबर पढ़ें - China's President Talks Trade in India as Troops Face Off at Border
.
1.1. और ये इंडस्ट्रियल पार्क एवं सेज क्या है ?
.
इनका आकार 100 एकड़ से 1000 एकड़ होगा, इन चाइनीज़ पार्को में यातायात, परिवहन, बिजली, पानी आदि के लिए चाइनीज़ नियम लागू होंगे। लेबर लॉ, PF लॉ, LBT , कस्टम, जीएसटी आदि टेक्स इन पर या तो इन पर लागू नही होंगे या फिर इन्हें कई प्रकार की छूटें मिलेगी। इन कम्पनियों को 30% आयकर भी नही देना होगा। हमारी देशी कम्पनियो को ये सब टेक्स चुकाने होंगे और वो लागत बढ़ने से मार्केट से बाहर हो जायेगी। चाइनीज़ हमारे यहाँ का कच्चा माल और सस्ता लेबर उपयोग कर के भारत के बाज़ार में अकल्पनीय माल डंप कर देंगे और उन्हें भारी मुनाफा होगा ।
.
1.2. और हमें इस मुनाफे के बदले में डॉलर भी चुकाने होंगे !!!
तो आप खुद अंदाजा लगा सकते है कि जब सरकार चीनियों को 1000 एकड़ के कर मुक्त प्लाट पकड़ा रही है, ताकि वे यहाँ आकर उत्पादन करे तो आप उन्हें कैसे रोकेंगे !!! ये सेज / इंडस्ट्रियल पार्क उत्पादन इकाइयां नहीं है, बल्कि भारतीय इकाईयों के लिए क़त्ल खाने है।
.
सेज में एक्सपोर्ट के नाम पर ये टेक्स में छूट ले लेते है, और यह खुली हुयी बात है कि सेज इकाइयां शेल कम्पनियां खोलकर राउंड ट्रिपिंग करती है, और फर्जी एक्सपोर्ट दिखाती है। चीनियों के पास काफी डॉलर है। वे भारत में आने बाद हमारे मंत्रियो को घूस देकर और भी ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे भारत की स्थानीय इकाइयां और भी बर्बाद हो जायेगी। और समस्या यह है कि भारत के कार्यकर्ता नेताओं के भाषण सुनते है, लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनके नेता गेजेट में क्या क़ानून छाप रहे है !!
.
1.3. 2014 में एग्रीमेंट हुआ था, और फिर आगे की प्रक्रिया शुरू हुयी। बीच में भारत की तरफ से काम में रुकावटें डाली जाने लगी तो 2017 में चीन ने फिर से अपनी सेना भारत में भेजकर हमारे दो बंकर नष्ट कर दिए, और मानसरोवर यात्रियों का जत्था रुकवा दिया !!
.
Face-off between Chinese, Indian troops in Sikkim after PLA 'transgression' - Times of India ►
.
1.4. अभी चाइना ने विभिन्न राज्यों में अपने पार्क का इन्फ्रास्त्रक्चर लगाना शुरू किया है, और जल्दी ही ये कार्यशील हो जायेंगे
.
2018 की खबर - Chinese investments in special economic zones in India
.
बीच में यदि रुकावट आई तो फिर से चीन की सेना भारत में घुसेगी !!
.
———-
.
(2) चाइनीज रेलवे : अब चाइना की नजर भारत के हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क पर है। चीन भारत में कई हाई स्पीड कोरिडोर्स खरीदना चाहता है, ताकि रेलवे सेक्टर को टेक ओवर कर सके।
.
India seeks China's help for speeding-up of Bangalore-Chennai train corridor
.
2.1. चाइना कुमिंग को कलकत्ता से भी जोड़ना चाहता है। यदि चीन यह रूट हथिया लेता है तो पूर्वोतर राज्यों पर भारत की पकड़ कमजोर हो जायेगी। ट्रेन रूट द्वारा चीन भारत के बाजार को चीनी उत्पादों से पाट देगा। पेड बुद्धिजीवी इस योजना को यात्रियों की संख्या की नजर से अव्यवहारिक बता रहे है। किन्तु चीन की योजना इस रूट से भारत में बड़े पैमान पर माल डंप करने की है।
.
China wants to build bullet train service with India that connects Kunming and Kolkata
.
अब यदि आप किसी भी समझदार किस्म के पेड विशेषग्य से पूछेंगे कि, जब शी जिनपिंग भारत आते है तो अपनी सेना भी साथ ले आते है, और फिर उनके सैनिक आकर हमारे बंकर नष्ट कर देते है, तो हम उन्हें भारत में कर मुक्त सेज क्यों दे रहे है ? तो वे बहुत ही राजदाराना लहजे में आपको यह समझायेंगे कि यह कूटनीति है, तुम नहीं समझोगे !!! और फिर वे इसे विकास से भी जोड़ देंगे !!
.
———
.
(3) चीन का POK पर नियंत्रण : चीन ने POK स्थित झेलम नदी पर 1100 मेगावाट जो की क्षमता में दुनिया का सबसे बड़ा पॉवर प्रोजेक्ट होगा का निर्माण शुरू किया। भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है क्योंकि इससे हमारी सुरक्षा को खतरा है। किन्तु 2015 में चीन ने हमारे विरोध को खारिज कर दिया !! और तो और इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा भी उस बैंक (AIIB) से आ रहा है जिसमे हमने बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स दे रखें है !!
.
China firm to build mega dam in PoK despite India's strong opposition
.
तो जब हमारे सम्बन्ध इतने अच्छे है कि 2014 में हम चीनियों को कर मुक्त सेज देते है, तो चीन बाँध पर भारत के ऐतराज को खारिज क्यों कर देता है ? पेड रक्षा विशेषग्य कर्हेंगे कि यह अन्तराष्ट्रीय कूटनीति है। पर मैं कहूँगा कि चीन की सेना इतनी ताकतवर हो चुकी है कि वह हमारे ऐतराज वगेरह सुनता भी नहीं है, और हमारे नेता भी जब ऐतराज दर्ज करवाते है तो उन्हें पता होता है कि वे एक रस्म पूरी कर रहे है !!
.
———
.
(4) तिब्बत : चीन ने तिब्बत में दुनिया का सबसे ऊँचे और बड़े बाँध का निर्माण कर लिया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस विशालकाय बाँध से चीन 2.5 बिलियन किलो वॉट बिजली का सालाना उत्पादन करेगा। थोड़ी बहुत बिजली तिब्बत को भी मिलेगी, बाकी चीन को जायेगी। भारत इस परियोजना पर शुरू से ही एतराज जताता आ रहा था, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर भारत की पारिस्थितिकी चीन के नियंत्रण में आ जायेगी, और चीन किसी भी समय बाँध के गेट खोलकर पूर्वोत्तर के राज्यों को जल-मग्न कर सकता है।
.
China operationalises biggest dam on Brahmaputra in Tibet, India worried
.
———
.
(5) श्रीलंका : श्रीलंका ने अपने तट का १०० हेक्टेयर का इलाका चीन को 99 साल की लिज़ पर दे दिया है। चीन वहाँ पर 1.4 बिलियन डॉलर खर्च करके अपना पोर्ट बना रहा है, और चीन ने वहाँ अपना युद्धपोत और पनडुब्बी भी तैनात की। भारत ने श्रीलंका से इस प्रोजेक्ट को नामंजूर करने को कहा तथा इसे श्रीलंका ने रोक भी दिया था। लेकिन इस प्रोजेक्ट को फिर से मंजूरी मिल गयी और काम शुरू हो गया। मोदी साहेब और अजित डोभाल साहेब ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसे श्रीलंका सरकार ने खारिज कर दिया है।
.
India Asked Lanka to Stop Colombo Port City Project, Says Gotabaya
.
———
.
(6) मालदीव भी : मालदीव ने चीन को मालदीव के टापू खरीदने और उनको विकसित करने के लिए क़ानून बनाकर अनुमति दी। अब चीन भारत और मालदीव के बीच बिखरे इन टापुओं का अधिग्रहण करके और नए टापू भी बना रहा है। इससे भारत और चीन के बीच मालदीव की उपस्थिति लुप्त हो जायेगी और चीन सीधे भारत तक बढ़ आएगा। भारत सरकार ने इस पर चिंता व्यक्त की है, किन्तु चीन और मालदीव ने भारत को "चिंता न करने" को कहा है।
.
Get Ready: China Could Build New Artificial Islands Near India
.
———
.
(7) और नेपाल भी : मधेशी नेपाल और भारत के उत्तरी राज्यों की सीमा से लगे नेपाल के तराई क्षेत्र में रहते है, तथा भारत के प्रतीकात्मक प्रतिनिधी माने जाते है। चीन ने नेपाल को चाबी दी जिसके फलस्वरूप नेपाल ने अपने नए संविधान में मधेशीयों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया, और इस वजह से भारत और नेपाल के रिश्ते बिगड़े।
.
विरोध प्रदर्शन की हिंसा में 50 से ज्यादा मधेशी मारे गए और नेपाल के स्थानीय गैर मधेसी समुदाय में एंटी इंडिया सेंटीमेंट्स पैदा हो गए। चीन ने नए संविधान का स्वागत किया, और चीन ने नेपाल को तेल-गैस आदि की आपूर्ति शुरू कर दी है। पहली बार चीन एवं नेपाल ने साझा युद्धाभ्यास करना शुरू किया। भारत की नाराजगी पर नेपाल के प्रधानमंत्री का कहना है कि भारत उनके निजी मामलो में टांग न अड़ाए तो बेहतर होगा !!
.
नेपाल को इंटरनेट सेवा अब तक भारत उपलब्ध करवाता था, किन्तु अब चीनी उस पर कब्ज़ा कर रहे है !!!
.
Nepal to get internet connection from China
.
चाइना एवं नेपाल को चीन से जोड़ने के लिए अब ट्रेन ट्रेक भी डाल रहा है। ट्रेन रूट से कनेक्ट हो जाने के बाद चीन का नियंत्रण नेपाल पर काफी बढ़ जाएगा।
.
China's growing footprint in Nepal: Challenges and opportunities for India | ORF
.
कुल मिलाकर नेपाल में चीन अपने कदम बढ़ा चुका है और जल्दी ही हम श्री लंका, मालदीव की तरह नेपाल भी चीन के हाथों गँवा देंगे !! आखिर नेपाल को भी चीन के तकनिकी उपकरण जैसे मोबाईल फोन, डीवीडी प्लेयर, हथियार आदि चाहिए। भारत तो ये सब खुद चीन से ले रहा है, तो नेपाल को भारत क्या आर्थिक लाभ दे सकेगा !!
.
Should Rising China-Nepal Military Ties Worry India?
.
ऊपर दिया गया सारा विस्तार पिछले 6-7 वर्षो के दौरान किया गया है। उपरोक्त ब्यौरों से मैं यह बिंदु स्पष्ट करना चाहता हूँ कि चीन सभी तरफ से भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, और उसने अब भारत में भी अपना सेट अप लगाना शुरू कर दिया है।
.
चीन हमले की स्थिति में है। हमारी सेना परजीवी होने के कारण हम चीन के इस सामरिक-आर्थिक हमले को नहीं रोक सकते। यदि हम आर्थिक रूप से रोकने की कोशिश करेंगे तो चीन सामरिक नुकसान पहुंचाकर भारत में घुसेगा। और यदि हम चीन को रोकने के लिए अमेरिका की शरण लेंगे तो अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत को पूरी तरह से निगल जायेगी !!
.
यदि बचना है तो सिर्फ एक रास्ता है - हमें अपनी सेना को आत्मनिर्भर बनाना होगा। इतना आत्मनिर्भर कि हम अमेरिका के सामने टिक जाएँ। वर्ना चीन से बचाने की एवज में अमेरिका हमें खा जाएगा। भारत के तमाम नेता और राजनैतिक पार्टियाँ अमेरिका के सामने पूरी तरह से समर्पण कर चुके है और वे भारत को अमेरिकी कम्पनियों के सुपुर्द करने के लिए काम कर रहे है !!
.
तो कार्यकर्ताओ को यह बात समझ लेनी चाहिए कि , जब भी हम चीनी उत्पादों को रोकने की कोशिस करेंगे तो हमें चीन की सेना से डील करना पड़ेगा। हम चीन की सेना से डील नहीं कर सकते और इसीलिए हमें चीनियों को भारत में घुसने की अनुमति देनी पड़ रही है। और भारत ही क्यों हमारे सभी पडौसी देशो की यही स्थिति है। चीन सभी को बलात रूप से टेक ओवर करता जा रहा है।
.
———-
.
(8) टाइम पास समाधान : चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करो। ये समाधान बकवास इसीलिए है क्योंकि पैसा मुफ्त में नहीं आता। व्यक्ति जब कोई वस्तु खरीदता है तो वह चाहता है कि उसे कम पैसे में बेहतर वस्तु मिले। उसे आप राष्ट्रवाद का चकमा देकर घटिया एवं महंगी वस्तु खरीदने के लिए सिर्फ क्षणिक तौर पर ही प्रेरित कर सकते है। वास्तव में नहीं।
.
———
.
(9) वास्तविक समाधान : सेना को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाने के लिए हमें नए कानूनों की पूरी सीरिज चाहिए। किसी देश के तकनिकी उत्पादन की गुणवत्ता को तय करने वाले कई तत्व है। इन तत्वों में निम्नलिखित 5 तत्व इसे सबसे अधिक प्रभावित करते है :
.
(A) अदालतें
(B) कर प्रणाली
(C) भू प्रबंधन के क़ानून
(D) जज-पुलिस-राजनेता का भ्रष्टाचार
(E) गणित-विज्ञान की शिक्षा का स्तर
.
जजों का भ्रष्टाचार इंजीनियरिंग गुणवत्ता को सबसे ज्यादा एवं गणित-विज्ञान की शिक्षा का स्तर सबसे कम प्रभावित करता है। भारत के सभी सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार है, किन्तु भारत के जज तुलनात्मक रूप से सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। और इसीलिए भारत तकनिकी उत्पादन में पिछड़ गया है। इनमे से दो तत्वों के बारे में विवरण एवं समाधान मैंने अन्य जवाबो में लिखा है। शेष 3 तत्वों पर मैं फिर किसी जवाब में लिखूंगा।
.
=========
Megha
એક સ્ત્રી છું…
હું પવન જેવી મુક્ત છું,
પણ સમાજે બાંધી છે રેખાઓમાં,
હું સપનાઓની માલિક છું,
પણ ક્યારેક અટકું છું પરંપરાઓમાં.
હું નદી જેવી વહેતી,
ક્યારેક શાંત, ક્યારેક ઉગ્ર,
હું પ્રેમનો દરિયો છું,
પણ દિલમાં રાખું છું ઘણું જ સંગ્રહ.
હું માતા, બહેન, દીકરી, મિત્ર,
દરેક રૂપમાં હું જીવતી,
હું તૂટું પણ ફરી ઊભી થાઉં,
મારી અંદર શક્તિ અનંત વસતી.
હું એક સ્ત્રી છું—
નબળી નહીં, સંવેદનશીલ છું,
હું સૃષ્ટિનું સર્જન છું,
અને મારા અસ્તિત્વમાં જ શક્તિનું બળ છે.
Raju kumar Chaudhary
अप्सराहरुको गाथा
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!
अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।
दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"
तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।
शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।
अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।
अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।
रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।
अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।
स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।
घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।
उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।
इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।
गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।
उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।
"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।
कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।
छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।
घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।
घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ
Sapna
Good morning everyone 🌄
Just wanted to let u know that the 2nd part of my story is out now🥳 so go and read it.. I am so sure that u'll really love it so do read it🧿😊
And yes pls write ur reviews and give ratings so that I can understand whether u guys are really enjoying it or not..😊
SAYRI K I N G
लगता हैं अब हम वही मिलेंगे जहां
मौत की कब्र होगी
आखिरी मुलाकात आखिरी दफा तुझे देखेंगे
सो जाऊंगा मौत की चादर ओड के
उस आखिरी मुलाकात में भी
Imaran
तेरी आँखों में जो खामोशी है, वो दिल को छू जाती है,
तेरी हर मुस्कान मेरे दिल को सुकून दे जाती है,
हर पल तुझे सोचकर दिल खिल उठता है,
तू मिले तो जिंदगी भी हसीन लग जाती है
🫶imran 🫶
Neha kariyaal
हृदय को अक्सर वही बात पीड़ा पहुंचती है,,
जिन बातों को हम भूलना चाहते हैं।।
Narayan Mahor
कच्चा घर
कच्चा घर था, छोटा सा,
पर अपना-सा, सच्चा सा।
दीवारों में प्यार बसा,
माँ का आँचल, छाया-सा।
छत टपकी बरसातों में,
हँसते थे हम रातों में,
बर्तन रख-रख भूल गए,
दुख क्या है उन बातों में।
टूटा-फूटा, साधारण था,
फिर भी सबसे न्यारा था,
कच्चा घर वो मिट्टी का,
दिल से बहुत हमारा था… 🌧️
Saliil Upadhyay
Truth Of Life...
જ્યારે તમે વિલ યાને વસિયતનામું લખવા બેસશો ત્યારે તમને ખબર પડશે કે તમારી સંપત્તિમાં જેનો કોઈ હિસ્સો જ નથી
એ વ્યક્તિ તમે જાતે પોતે જ છો...
जब आप अपनी वसीयत लिखने* बैठेंगे, तो आपको एहसास होगा कि आपकी संपत्ति में जिसका कोई हिस्सा नहीं है,
वह आप ही हैं...।
वात्सल्य
આ ખેતરમાં તું કરતી'તી મજૂરી! એ નો હું,માલિક હતો.
આ ખેતરે દરરોજ આવતી'તી લઈ ભાતું,હું આરોગતો'તો.
મીઠુંડી મીઠુંડી કરતી'તી વાતો હું તો છાનો છાનો શરમાતો'તો!!
વરખડીના આ ઝાડે બાંધી હિંચક હું ઝૂલાવતો'તો.
પ્રેમથી વાઢતી'તી તું ઘઉં,બળબળતા બપોરે છોડી ભાત !
એકલો એકલો છાનો છાનો છોડી એ ભાતું ખાઈ જતો'તો.
ઉપવાસ અનેકવાર આમ તને પરાણે કરાવતો'તો.
ખીજવાતી ના કંઈ બોલતી,માત્ર હોઠે સ્મિત,એમ પજવતો'તો.
યાદ આજે આંખે તગતગે,ખેતર એજ બપોર બળબળતો !
શમણાંની વણઝાર આજ઼ કેટલું પરેશાન હું કરતો'તો!!
કયારેય કોઈ ફરિયાદ ના બદલાની ભાવના! સમજતો'તો.
હે ! ગૌરી! હું,ઉભો એ ખેતર વચાળે!જ્યાં પ્રીત તારી પામતો'તો.
વાત્સલ્યે વ્હાલ કરતી કલકલ કરતી કાલિન્દી શાંત આજ નિહાળતો'તો.
- વાત્સલ્ય
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
शैलपुत्री
हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की अद्भुत कहानी हैं l
खूबसूरती की मल्लिका की बात ही निराली हैं ll
कई युगों की तपस्या की मनचाहा वर पाया l
भक्ति, शक्ति ओ सुंदरता से भरपूर माँ शिवांगी हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
DrAnamika
समाज में सबसे काबिल और कामयाब इंसान को लोग पागल और मूर्ख इसलिए घोषित करतें हैं क्योंकि वो उस मकाम तक पहुँच नहीं सकते.
#डॉ_अनामिका #अनामिकाअनाम
#हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_पंक्तियाँ
Irfan Khan
कहानी अब तक:
अयान, जो अब तक अपनी पहचान और अतीत से बेखबर था, उसकी जिंदगी में तब एक बड़ा तूफान आता है जब उसकी मुलाकात दिया से होती है। दिया, जो बरसों से किसी बड़े राज को सीने में दफन किए बैठी थी, अयान को देखते ही उसे "सर" कहकर पुकारती है। अयान की हैरानी तब और बढ़ जाती है जब दिया उसके सामने एक ऐसा सच खोलती है जिसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
दिया उसे बताती है कि वह कोई मामूली इंसान नहीं, बल्कि रसूखदार और ताकतवर 'राय खानदान' का इकलौता वारिस है। वह वजूद जिसे अयान अब तक ढूंढ रहा था, वह एक ऐसे साम्राज्य का हिस्सा है जिसकी जड़ें नफरत और इंतकाम से जुड़ी हैं। क्या अयान अपने इस शाही वजूद को अपना पाएगा? या राय खानदान की ये 'नफ़रत की आग' उसे खुद भस्म कर देगी?
इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म होने वाली हैं! अयान के वजूद का अगला पन्ना बहुत जल्द खुलने वाला है। अगले धमाकेदार चैप्टर को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमें अभी फॉलो करें और हमारी कहानी के पेज पर जाकर पिछले चैप्टर्स को ज़रूर पढ़ें ताकि आप इस खूनी खेल का कोई भी सिरा मिस न कर सकें!"
धन्यवाद आपका अपना लेखक.
SAYRI K I N G
अच्छे लग जाते हैं हम बहुत लोगों को
और ये भी अच्छा नहीं लगता बहुत लोगों को
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
बिना भाव के भजन से, कभी मिलें नहिं ईश। शुद्ध भाव के व्यक्ति को, मिल जाते जगदीश।
दोहा--459
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या
उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्त
उत्तरे।
ऋग्वेद- 1/115/1
भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।
यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त प्रेरणादायक है। पूरा मन्त्र इस प्रकार है—
“उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्त उत्तरे।
सूर्यं देवमवोचामि यथा नः शुभं करोत्॥”
(ऋग्वेद 1.115.1)
शाब्दिक अर्थ:
उद्वयम् = ऊपर उठते हुए
तमसः परि = अन्धकार से परे
ज्योतिः पश्यन्तः = प्रकाश को देखते हुए
उत्तरे = उच्च (श्रेष्ठ) अवस्था की ओर
भावार्थ:
मनुष्य को अज्ञान, मोह और नकारात्मकता (अन्धकार) से ऊपर उठकर ज्ञान, सत्य और चेतना (प्रकाश) की ओर बढ़ना चाहिए। सूर्य यहाँ केवल भौतिक प्रकाश नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और दिव्य प्रेरणा का प्रतीक है।
गूढ़ संदेश:
यह मन्त्र केवल सूर्य की स्तुति नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शन है—
अज्ञान → ज्ञान की ओर
निराशा → आशा की ओर
अधर्म → धर्म की ओर
अर्थात् जीवन का लक्ष्य निरन्तर उन्नति और प्रकाश की ओर अग्रसर होना है।
वेदों में प्रमाण--
1. ऋग्वेद
“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
(यह मन्त्र बृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28 में प्रसिद्ध है, पर इसका भाव वैदिक परम्परा में व्यापक है)
भावार्थ:
हमें अन्धकार (अज्ञान) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले चलो।
2. ऋग्वेद (1.50.10)
“उदुत्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः।
दृशे विश्वाय सूर्यं॥”
भावार्थ:
सूर्य (प्रकाश) समस्त जगत को देखने और जागृत करने के लिए उदित होता है।
यहाँ पर सूर्य, ज्ञान का प्रकाश है, जो अज्ञान रूपी अन्धकार को दूर करता है।
3. ऋग्वेद (10.170.4)
“अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः”
भावार्थ:
अग्नि स्वयं प्रकाश है और प्रकाश ही अग्नि है।
यहाँ अग्नि को ज्ञान और चेतना के प्रकाश के रूप में देखा गया है।
4. यजुर्वेद (40.16)
“सूर्याचक्षुर्गच्छतु…”
भावार्थ:
सूर्य (प्रकाश) आत्मा के मार्गदर्शन का साधन है।
यह दर्शाता है कि प्रकाश ही मार्गदर्शक है।
5. अथर्ववेद (19.9.1)
“ज्योतिष्मन्तं केतुमन्तं त्रातारं…”
भावार्थ:
प्रकाशमय तत्व हमें मार्ग दिखाने वाला और रक्षक है।
निष्कर्ष:
वेदों में बार-बार यह शिक्षा मिलती है कि तमस (अज्ञान, दुःख, भ्रम) को छोड़ो ज्योति (ज्ञान, सत्य, चेतना) को ग्रहण करो।
इस प्रकार “जीवन का लक्ष्य अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ना है।”
उपनिषदों में प्रमाण--
1. बृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28)
“असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्माऽमृतं गमय॥”
भावार्थ:
हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो।
यह सबसे प्रत्यक्ष और प्रसिद्ध मन्त्र है, जो आपके दिए भाव को स्पष्ट करता है।
2. कठोपनिषद् (2.2.15)
“न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः।
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं
तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥”
भावार्थ:
वहाँ (परमात्मा में) न सूर्य, न चन्द्र, न तारे प्रकाश देते हैं; उसी परम प्रकाश से सब कुछ प्रकाशित होता है।
यहाँ परम ज्योति (ब्रह्म) को समस्त प्रकाश का स्रोत बताया गया है।
3. ईशोपनिषद् (मन्त्र 15)
“हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।
तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥”
भावार्थ:
सत्य का मुख स्वर्णमय आवरण से ढका है; हे पूषन् (सूर्य)! उसे हटाओ ताकि हम सत्य का दर्शन कर सकें।
यहाँ भी अज्ञान का आवरण हटाकर सत्य-प्रकाश को देखने की प्रार्थना है।
4. मुण्डकोपनिषद् (2.2.10)
“भिद्यते हृदयग्रन्थिः छिद्यन्ते सर्वसंशयाः।
क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे परावरे॥”
भावार्थ:
परमात्मा के ज्ञान (प्रकाश) के प्राप्त होने पर हृदय की गाँठें (अज्ञान) कट जाती हैं, सभी संशय नष्ट हो जाते हैं।
यह ज्ञान के प्रकाश द्वारा अज्ञान नाश को दर्शाता है।
5. छान्दोग्य उपनिषद् (3.13.7)
“तदेतत् ज्योतिषां ज्योतिः…”
भावार्थ:
वह (ब्रह्म) सभी ज्योतियों का भी ज्योति है।
यह दर्शाता है कि परम सत्य ही वास्तविक प्रकाश है।
निष्कर्ष:
उपनिषदों का स्पष्ट संदेश है—
अज्ञान (तमस) से ऊपर उठना ही आध्यात्मिक प्रगति है
ज्ञान (ज्योति) ही मुक्ति का मार्ग है
परमात्मा स्वयं परम ज्योति है
अतः आपका भाव—
“अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो” यह उपनिषदों का मूल सिद्धान्त ही है।
पुराणो में प्रमाण--
1. श्रीमद्भागवत महापुराण (1.2.17)
“शृण्वतां स्वकथाः कृष्णः पुण्यश्रवणकीर्तनः।
हृद्यन्तःस्थो ह्यभद्राणि विद्धुनोति सुहृत्सताम्॥”
भावार्थ:
भगवान की कथा का श्रवण करने से हृदय के भीतर के अज्ञानरूपी अन्धकार (अभद्र) नष्ट हो जाते हैं।
2. श्रीमद्भागवत महापुराण (1.2.18)
“नष्टप्रायेष्वभद्रेषु नित्यं भागवतसेवया।
भगवत्युत्तमश्लोके भक्तिर्भवति नैष्ठिकी॥”
भावार्थ:
जब अज्ञान (अभद्र) नष्ट होने लगता है, तब स्थिर भक्ति उत्पन्न होती है।
3. विष्णु पुराण (6.5.84)
“ज्ञानं यदा प्रबुद्धं स्यात् तदा तमः प्रणश्यति।”
भावार्थ:
जब ज्ञान जागृत होता है, तब अन्धकार (अज्ञान) नष्ट हो जाता है।
4 स्कन्द पुराण (काशी खण्ड, 4.33)
“ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः।”
भावार्थ:
ज्ञानरूपी दीपक के प्रकाश से अज्ञानजनित अन्धकार नष्ट हो जाता है।
5. पद्म पुराण (उत्तरखण्ड, 71.56)
“अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानदीपेन भास्वता।
प्रकाशं कुरु मे नित्यं नमस्ते गुरुरूपिणे॥”
भावार्थ:
हे गुरुदेव! मैं अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धा हूँ, आप ज्ञानरूपी दीपक से मुझे प्रकाश प्रदान करें।
6-. लिंग पुराण (1.70.268)
“ज्ञानादेव तु कैवल्यं तमसः परिमुच्यते।”
भावार्थ:
ज्ञान के द्वारा ही मनुष्य अज्ञानरूपी अन्धकार से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
7-गरुड पुराण (प्रेतखण्ड, 115.22)
“अज्ञानं तिमिरं प्रोक्तं ज्ञानं तु तद्विनाशनम्।”
भावार्थ:
अज्ञान को अन्धकार कहा गया है और ज्ञान उसका नाश करने वाला है।
8. नारद पुराण (पूर्वखण्ड, 41.12)
“ज्ञानदीपेन यो नित्यं तमो नाशयते बुधः।”
भावार्थ:
ज्ञानी पुरुष ज्ञानरूपी दीपक से अज्ञानरूपी अन्धकार का नाश करता है।
9. ब्रह्मवैवर्त पुराण (कृष्णजन्मखण्ड, 12.45)
“अज्ञानतिमिरान्धानां ज्ञानं चक्षुः प्रदर्शकम्।”
भावार्थ:
अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धे मनुष्यों के लिए ज्ञान ही आँखों के समान है।
10. कूर्म पुराण (उत्तरखण्ड, 2.5.12)
“तमो नाशयते ज्ञानं दीपोऽन्धकारमिव।”
भावार्थ:
जिस प्रकार दीपक अन्धकार को दूर करता है, उसी प्रकार ज्ञान अज्ञान को नष्ट करता है।
निष्कर्ष:
इन विभिन्न पुराणों के श्लोकों से यह सिद्ध होता है कि—
अज्ञान = तमस (अन्धकार)
ज्ञान = ज्योति (प्रकाश)
ज्ञान का उदय = अज्ञान का नाश
अतः वैदिक मन्त्र का भाव—
“तमस से ऊपर उठकर ज्योति की ओर बढ़ो”
सभी पुराणों में एक ही स्वर से प्रतिपादित हुआ है।
स्मृतियों में प्रमाण--
1. मनुस्मृति (4.138)
“अज्ञानात् तु क्रियाः सर्वाः स्युः निष्फलाः न संशयः।
ज्ञानपूर्वा तु या विद्या सा मुक्तेः कारणं स्मृता॥”
भावार्थ:
अज्ञान से की गई सभी क्रियाएँ निष्फल होती हैं, परन्तु ज्ञानपूर्वक किया गया कर्म ही मुक्ति का कारण बनता है।
2.(क) याज्ञवल्क्य स्मृति (1.3)
“विद्यया अमृतमश्नुते”
भावार्थ:
विद्या (ज्ञान) के द्वारा मनुष्य अमृतत्व (उच्च अवस्था) को प्राप्त करता है।
2(ख)-. याज्ञवल्क्य स्मृति (3.56)
“अज्ञानं तम इत्याहुः ज्ञानं तु परमं पदम्।”
भावार्थ:
अज्ञान को अन्धकार कहा गया है और ज्ञान को परम पद (उच्चतम अवस्था)।
3. पराशर स्मृति (1.24)
“ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः।”
भावार्थ:
ज्ञानरूपी दीपक के प्रकाश से अज्ञानजनित अन्धकार नष्ट हो जाता है।
4. नारद स्मृति (1.12)
“अज्ञानं तिमिरं ज्ञेयं ज्ञानं तु तद्विनाशनम्।”
भावार्थ:
अज्ञान को अन्धकार जानना चाहिए और ज्ञान उसका नाश करने वाला है।
निष्कर्ष:
स्मृति ग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है—
अज्ञान (तमस) = बन्धन और दुःख
ज्ञान (ज्योति) = मुक्ति और उन्नति
अतः वेद का सिद्धान्त—
“अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो”
स्मृतियों में भी पूर्णतः समर्थित है।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण--
1. हितोपदेश-
(मित्रलाभ, 72)
“अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”
भावार्थ:
जो गुरु अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धे व्यक्ति की आँखों को ज्ञानरूपी अंजन से खोलता है, उसे नमस्कार।
यहाँ स्पष्ट—ज्ञान = प्रकाश, अज्ञान = अन्धकार।
2. पंचतंत्र-
(मित्रभेद, 5.12)
“यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता।
ज्ञानप्रकाशितं चित्तं तमो नाशयते ध्रुवम्॥”
भावार्थ:
जैसे दीपक अन्धकार को नष्ट करता है, वैसे ही ज्ञान चित्त के अन्धकार को नष्ट करता है।
3. चाणक्य नीति
(अध्याय 1, श्लोक 2)
“नास्ति विद्यासमो बन्धुः नास्ति विद्यासमः सुहृत्।
नास्ति विद्यासमं वित्तं नास्ति विद्यासमं सुखम्॥”
भावार्थ:
विद्या (ज्ञान) के समान कोई मित्र, धन या सुख नहीं है।
यहाँ ज्ञान को सर्वोच्च बताकर प्रकाश की महिमा बताई गई है।
4. नीतिशतक (भर्तृहरि)
(श्लोक 12)
“अज्ञानतिमिरान्धानां ज्ञानं चक्षुः प्रदर्शकम्।”
भावार्थ:
अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धे लोगों के लिए ज्ञान ही आँखों के समान है।
निष्कर्ष:
नीति ग्रन्थों का एकमत सिद्धान्त है—
अज्ञान (तमस) = अन्धकाऱ
ज्ञान (ज्योति) = प्रकाश
गुरु/विद्या = वह माध्यम जो अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।
अतः यह सिद्ध होता है कि—
“तमस से ज्योति की ओर बढ़ना” केवल वेदों का ही नहीं, बल्कि सभी नीति ग्रन्थों का भी यही उद्घोष है।
गीता में प्रमाण--
1. श्रीमद्भगवद्गीता
(क) (अध्याय 5, श्लोक 16)
“ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः।
तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥”
भावार्थ:
जिनका अज्ञान ज्ञान द्वारा नष्ट हो गया है, उनका ज्ञान सूर्य के समान परम सत्य को प्रकाशित करता है।
यहाँ स्पष्ट—ज्ञान = प्रकाश (सूर्य), अज्ञान = अन्धकार।
(ख) (अध्याय 10, श्लोक 11)
“तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥”
भावार्थ:
भगवान स्वयं भक्तों के अज्ञानरूपी अन्धकार को ज्ञानरूपी दीपक से नष्ट करते हैं।
(ग) (अध्याय 14, श्लोक 17)
“सत्त्वात् संजायते ज्ञानं…”
भावार्थ:
सत्त्वगुण से ज्ञान उत्पन्न होता है (जो प्रकाश का कारण है)।
2. महाभारत में प्रमाण--
(क) (शान्ति पर्व 239.6)
“ज्ञानदीपेन भास्वता तमो नश्यति पाण्डव।”
भावार्थ:
हे पाण्डव! ज्ञानरूपी दीपक के प्रकाश से अन्धकार नष्ट हो जाता है।
(ख) (शान्ति पर्व 180.8)
“अज्ञानं तम इत्याहुः ज्ञानं तु परमं पदम्।”
भावार्थ:
अज्ञान को अन्धकार कहा गया है और ज्ञान को परम पद।
(ग) (अनुशासन पर्व 163.10)
“यथा दीपोऽन्धकारस्य नाशकः स्यात् प्रकाशकः।
तथा ज्ञानं विनाशाय अज्ञानस्य प्रकीर्तितम्॥”
भावार्थ:
जैसे दीपक अन्धकार को नष्ट करता है, वैसे ही ज्ञान अज्ञान का नाश करता है।
निष्कर्ष--
गीता और महाभारत दोनों का स्पष्ट सिद्धान्त है—
अज्ञान (तमस) = अन्धकार, बन्धन
ज्ञान (ज्योति) = प्रकाश, मुक्ति
अतः वेद का मन्त्र—
“तमस से ऊपर उठकर ज्योति की ओर बढ़ो”
इन ग्रन्थों में भी बार-बार प्रतिपादित हुआ है।
1. वाल्मीकि रामायण में प्रमाण--
(अयोध्याकाण्ड 2.109.34)
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।”
भावार्थ:
इस संसार में ज्ञान के समान कोई पवित्र वस्तु नहीं है।
यहाँ स्पष्ट है कि ज्ञान (प्रकाश) ही मनुष्य को ऊँचा उठाता है और अज्ञान (अन्धकार) से बाहर लाता है।
2. गर्ग संहिता में प्रमाण--
(गोलोकखण्ड 3.12)
“अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानदीपः प्रदीयते।
हरिभक्त्या प्रकाशोऽयं भवबन्धविनाशनः॥”
भावार्थ:
अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धे जीव को ज्ञानरूपी दीपक दिया जाता है, और हरि-भक्ति से यह प्रकाश संसार के बन्धन को नष्ट करता है।
यहाँ ज्ञान और भक्ति = प्रकाश तथा अज्ञान = अन्धकार स्पष्ट किया गया है।
3. योग वशिष्ठ में प्रमाण--
(क) (निर्वाण प्रकरण, उत्तरार्ध 2.18.25)
“अज्ञानतिमिरं नाशं ज्ञानदीपेन गच्छति।”
भावार्थ:
अज्ञानरूपी अन्धकार ज्ञानरूपी दीपक से नष्ट हो जाता है।
(ख) (निर्वाण प्रकरण 1.11.12)
“यथा दीपप्रकाशेन नश्यत्यन्धकारकः।
तथा ज्ञानप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥”
भावार्थ:
जैसे दीपक के प्रकाश से अन्धकार नष्ट होता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से अज्ञानरूपी अन्धकार नष्ट हो जाता है।
निष्कर्ष--
इन तीनों ग्रन्थों का एक ही निष्कर्ष है—
अज्ञान = अन्धकार (तमस)
ज्ञान/भक्ति = प्रकाश (ज्योति)
ज्ञान का उदय = अज्ञान का नाश
अतः आपका भाव—
“अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो”
वेद, उपनिषद, पुराण ही नहीं, बल्कि
रामायण, गर्ग संहिता और योग वशिष्ठ में भी पूर्णतः प्रमाणित है।
अन्धकार (अज्ञान) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर बढ़ने का सिद्धान्त अध्यात्म रामायण में अत्यन्त स्पष्ट रूप से प्रतिपादित है।
अध्यात्म रामायण में प्रमाण--
(क) (अयोध्याकाण्ड 1.20)
“अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानदीपेन राघव।
प्रकाशं कुरु मे नित्यं नमस्ते ज्ञानरूपिणे॥”
भावार्थ:
हे राघव! मैं अज्ञानरूपी अन्धकार से अन्धा हूँ, आप ज्ञानरूपी दीपक से मुझे प्रकाश प्रदान करें।
(ख) (अरण्यकाण्ड 3.15)
“ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः।”
भावार्थ:
ज्ञानरूपी दीपक के प्रकाश से अज्ञानजनित अन्धकार नष्ट हो जाता है।
(ग) (उत्तरकाण्ड 7.42)
“यथा दीपप्रकाशेन नश्यत्यन्धकारकः।
तथा ज्ञानप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानसंभवम्॥”
भावार्थ:
जैसे दीपक के प्रकाश से अन्धकार नष्ट होता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान नष्ट हो जाता है।
निष्कर्ष:
अध्यात्म रामायण का स्पष्ट सिद्धान्त है—
अज्ञान = तमस (अन्धकार)
ज्ञान (राम-तत्त्व) = ज्योति (प्रकाश)
ज्ञान का उदय = अज्ञान का नाश
-----+-------+-------+-----;;;+--
Sapna
Afsos toh aajtak hai aapke Jane ka..
Magar gam iss baat ka hai ki aapne bhi mujhe Jane diya.. ek baar kehke dekhte shayad aaj tasveer ki bajay mera chehra niharte😌
Purani yaadon ki bajay nayi kahaniya sunte🙂
🥺🥀✨
kattupaya s
Good morning friends.. my short story "anthimaalai" going to be published on matrubharti @5 30pm on 24/3/26.please read expecting your support and love
Vrishali Gotkhindikar
.आयुष्य असतो ..पत्त्याचा" डाव "एक ..
..जरी भेटतात वाटेवर ..सवंगडी अनेक ..!!
..कधी येतात पाने "मनासारखी :"
..डावही जमतो अगदी मनासारखा ...!!
..मग वाट्ते खेळायला "मजा"..
..समोरच्याला ..द्यायला "सजा"..!!
..कधी पाने असतात "भिकार" ..
....डावही असतो "टूकार "..!!
..कसेतरी राहायचे खेळत ..
....पुढच्या डावाची वाट..पहात ....!!!
....नाही जमला डाव "मनासारखा "
..तरी "खचायचे "..नसते ..!!
..शेवटच्या पत्त्या ..पर्यंत ...
....खेळतच ..रहायचे असते ....
....पराभव पचवाय साठी .करायचे असते मन "खंबीर"!
...समोरच्याचा" विजय "झाला तरी सोडायचा नसतो "धीर"!!!
Bhavna Bhatt
ગમ્મત સાથે જ્ઞાન
ayushi Singh
“वो कैसी शाम थी"
आज वह शाम थी,
ना जाने कैसी शाम थी,
ना....हा था, ना...... ना था |
उसने कह तो दिया था,
कि सब खत्म हो जाना ही सही होगा,
काश वे रोक लेता, साथ छूटने ना देता |
समय वहीं रुक जाता,
तु मुझे मिल जाता,
पता नहीं आज वह कैसी शाम थी |
ना... हा था, ना.... ना था ||
Piyush Goel
https://www.youtube.com/watch?v=Ru08lQpTubg
Om Mahindre
लेखकाची नोंद – आगामी पुस्तकाची घोषणा
मला तुमच्यासोबत एक आनंदाची बातमी शेअर करायची आहे.
माझं आगामी ईबुक, The Seventh Death: A Millbrook Horror, लवकरच Amazon Kindle वर प्रकाशित होणार आहे. ही कथा Millbrook या गावातील गूढ आणि भयावह घटनांमध्ये अधिक खोलवर घेऊन जाईल—जिथे प्रत्येक मृत्यू एका रहस्यमय पॅटर्नचा भाग आहे, आणि कुणीतरी अदृश्य शक्ती सतत पाहत आहे.
जर तुम्हाला माझं लेखन आवडत असेल, तर या पुस्तकाला तुमचा नक्कीच पाठिंबा द्या. तुम्ही ते वाचून, रिव्ह्यू देऊन किंवा इतरांपर्यंत पोहोचवून माझी खूप मदत करू शकता.
लवकरच अधिक अपडेट्स, जसे की अधिकृत रिलीज डेट, शेअर केली जाईल.
तोपर्यंत… उत्सुक राहा, कारण काही रहस्यं उलगडली गेली तरच खरी भीती सुरू होते.
— ओम महिंद्रे
Om Mahindre
Author’s Note – Upcoming Release Announcement
I’m excited to share some big news with you.
My upcoming eBook, The Seventh Death: A Millbrook Horror, will soon be released on Amazon Kindle. This story dives deeper into the dark mysteries of Millbrook—where every death follows a pattern, and something unseen is always watching.
If you’ve enjoyed my writing so far, I truly hope you’ll support this release. Your support—whether through reading, reviewing, or sharing—means everything and helps me continue creating more stories like this.
More updates, including the official release date, will be coming soon.
Until then… stay curious, and remember—some mysteries are better left unsolved.
— Om Mahindre
Shabdbhramar
शब्दभ्रमर लिखित "कोंदण" नक्की आस्वाद घ्या
Akash Gupta
क्या टूटे हुए कांच के गिलास मे पानी रुक सकता है ?
क्या हर बार एकतरफा तोड़ने वाला रिस्ता फिर से जुड़ सकता है?
फिर सायद तुम एक दिन लड़ाई करने के बाद वापस अना चाहो
और वो तुम्हे मिले ही ना ।
और तुम्हे पछतावा हो मगर वो तुम्हारा ना हो ।
जब वह अंदर ही अंदर से टूट कर कही दूर चला जाये और तुम्हे मिले ही ना ।
जैसा तुमने उसके साथ किया वैसे ही कोई तुम्हारे साथ करे फिर तुम्हे समझ आये , मानना चाहो आपनी गलतियां मगर वह तुम्हे मिले ना।
Anjana Vyas
महाभारत युद्ध के बाद प्रथम बार ऐसी विकट परिस्थितियों का निमार्ण होने जा रहा जो कल्पना सोच से परे होगा। इतिहास अपने आप को दोहराने जा रहा है! ।भारतवासी किसी भी प्रकार की परिस्थिति का सामना करने के लिए लिए तैयार रहें । ऐसी विषम परिस्थितियाँ जो कि महाभारत के युद्ध के समान युगों तक याद रखी जाएगी ।महाभारत के युद्ध में अस्सी प्रतिशत जनसंख्या नष्ट हो गई थी ।कई इतिहासकारों ने इस तथ्य को लिखा है।
Piyu soul
आज रात मैं और मेरी secret पियू टोली ने छोटा सा royal adventure किया। 👑
सारा घर सो रहा था, और मैं quietly kitchen में गई… पता चला, माखन नहीं रखा।
लेकिन मैंने अपनी टोली के साथ secretly थोड़ा माखन चुराया और मज़ेदार खाना बनाया। 🧈😏
हम हँसी‑हँसी में अपनी secret feast enjoy कर रहे थे।
फिर मुझे लगा, क्यों न थोड़ी night prank की जाए?
मैंने छोटे shadows और playful whispers से घर में हल्का‑सा डर फैलाया।
सारे लोग confuse हुए, लेकिन secretly हँस रहे थे—मैं जानती थी। 👻💛
उसके बाद मैं देख रही थी, एक handsome लड़का और एक प्यारी लड़की पास थे।
तो मेरी mischievous mind ने सोचा—“चलो, उन्हें एक playful proposal देकर confuse कर दिया जाए।” 💌😏
मैंने funny, over-the-top romantic lines whisper की, और दोनों थोड़े confuse, थोड़े हँसते हुए रह गए।
अंत में मैंने अपनी टोली को देखा—
हमारी secret royal fun night पूरी हुई। Safe, funny और mischievous।
और मैं सोच रही थी—“सच में, ये royal prank और teasing वाली रात perfect थी।” 🌸✨
by piyu 7soul
kattupaya s
Goodnight friends .. sleep well
Anshika rai Nagvanshi
Anokhe Pritam (Dear Death)
Jab mera aakhri lamha ho,
Uske do din पहले tum मिलने aana.
Baat karen साथ mein - kya लेकर chalna?
Bhut lmbhe safar pe जाना है na,
Kuch toh साथ mein chalna होगा.
Aur aakhri दिन main tumhare पास aungi,
Paur chho kar, joradar jhapii dongi,
Gaal laga kar dhanyavad kahungi.
Hey mere anokhe pritam!
Chalo, chhelo, pakro mera हाथ,
Le chalo us paar जहाँ सिर्फ हम ho,
Aur पूछhoon tumse हजारों सवाल.
Hey Anokhe Pritam!
Suno - ek दिन kar dongi tumpe,
Apne आत्मा ki chhap छोड़ जाउंगी,
Itna बेचैन ho जाओगे तुम मेरे लिये,
Aana pdega खुद मेरे पास.
Ye जान lo - हमारी aakhri बात.
softrebel
___नए युग की स्त्रियाँ___
मस्तिष्क में द्वंद्व, हृदय में तूफ़ान लिए बैठे हैं,
हाँ—हाल तुमने पूछा तो
होठों पे मुस्कान लिए बैठे हैं।
स्त्री हैं जाति के,
काँधे पे किसी और का मकान लिए बैठे हैं,
हर क़दम पर देखो—
हम तुम्हारा अहसान लिए बैठे हैं।
गोरे हैं, काले हैं—ये भेद बाद की बात है,
हाँ, हम जब से जन्मे हैं
तुम्हारी जान लिए बैठे हैं।
बोझ कहो या रखो जूते की नोक पर,
स्त्री हैं जाति के—
तुम्हारे घर का सारा सम्मान लिए बैठे हैं।
सह कर ढेरों अपमान,
तुम्हारे सीने का गुमान लिए बैठे हैं।
नए युग की स्त्रियाँ हैं हम,
विद्रोह हमारी प्रवृत्ति है—
विश्वास नहीं होता तो आज़मा कर देख लो,
पार्वती के अंग में
काली की ज़ुबान लिए बैठे हैं।
@softrebel
#matrubharti
#poem
#striya
Piyu soul
💫"निस्वार्थ प्यार”💫
मैं दूर हूँ, पर मेरा दिल हमेशा उसके पास है,
हर खुशी में उसकी मुस्कान मेरी राहत है।
कभी पास नहीं, कभी साथ नहीं, पर प्यार वही है,
जो दूर रहकर भी उसकी खुशियों का ख्याल रखता है।
कृष्णा ने सिखाया था मुझे,
कि प्यार का अर्थ बस अपने लिए नहीं,
बल्कि उस व्यक्ति की खुशी में जीना है,
उसकी मुस्कान को अपनी प्राथमिकता बनाना है। 💛
by piyu 7soul
Akash Gupta
पहली मोहोब्बत पहली मोहोब्बत होती है।
फिर जो हो जाये वो मजबूरी होती है।
कुछ होते है जो पागल रहते है सिर्फ उसी सक्स के लिए ।
लेकिन वो किसी और की ज्यादा खूबसूरत मोहोब्बत होती है।
चाहने को तुम जिसे चाहती हो
कही तुम उसकी दूसरी मोहोब्बत तो नही।
जिस तरह तुम छोड़कर चली गयी थी मुझे।
उसी तरह तो उसने भी किसी को छोड़ा तो नही।
कहती हो की खुस हू मै अपने नये यार के साथ।
कही उसने तुम्हे बिस्तर पर मारा तो नही।
खुस हो तो खुस रहना ।
अगर वो छोड़ जाए तो दुखी मत होना ।
फ्री मे मिल जाए पैसा तो मेहनत का पता कहा चलता है।
जब तक टूटे ना अपना दिल तब तक दुसरो का दिल तोड़ने मे मजा आता है ।
आकाश गुप्ता।
23/03/25
instagram 👇
@akash_zax
@desolate_.soul
Rubina Bagawan
This is my first song in Spotify
https://open.spotify.com/track/4T4zhLq7BLBWxW1nnBDtYO?si=p0R1SDbCSJKgLPHXsWIipw
Kiran
संघ बहुत जरूरी तुम्हारा।
संघ बहुत राहत देह तुम्हारा।
संघ आत्मतृप्ति कराता तुम्हारा।
संघ उन्मुख कराता तुम्हारा।
Irfan Khan
इंसान अपनी नफ़रत में किस हद तक गिर सकता है? क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी गलती पूरी ज़िंदगी को तबाह कर सकती है? 💔
'नफ़रत की आग' का सबसे चौंकाने वाला मोड़ अब आपके सामने है! चैप्टर 3 (Chapter 3) अब मातृभारती पर लाइव हो चुका है। 📖✨
इस चैप्टर में वो होने वाला है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। एक ऐसा सच जो सबको हिला कर रख देगा... और एक ऐसा चेहरा जो अब तक नकाब के पीछे था। 🎭😱
अभी मेरी प्रोफाइल पर जाएं और खुद देखें कि आग कितनी गहरी है!
👉 मातृभारती ऐप (Matrubharti) पर अभी पढ़ें!
लेखक: इरफ़ान अयान खान (Irfan Ayaan Khan)"
Kiran
खेल खेले बचपन में, एक आंगन में
रोए बचपन में, एक आंगन में
सम्मानित हुए बचपन में, एक आंगन में
अपमानित भी हुए, उसी आंगन में
आज वही आंगन तुम्हें पुकारता है
आने को, लौट जाने को
वहीं हँसी, वही यादें, वही छोटी खुशियाँ
एक बार फिर जीने को उसी आंगन में।
- Kiran
Kuldeep Roni
मेरी उड़ान में भी थोड़ा नूर है,
पर तेरी नज़र में सब दूर है।
मेरे लिए एक आसमान है
तुझे अपनी छत पर गुरूर है
मैं राख भी हो जाऊँ तो क्या,
तेरे नाम का धुआँ मशहूर है।
मैं टूट के भी तुझसा रहता हूँ,
ये इश्क़ बड़ा ही मजबूर है।
मैं रातों को चाँद से बोलूँ,
तेरी खिड़की पे पर्दा ही दूर है।
मैं हस्ते हुए भी टूटता हूँ,
तेरे चेहरे पे क्यों इतना नूर है?
मेरे लफ़्ज़ तेरे नाम से भीगे,
तेरे दिल में मेरा क्या कसूर है?
तू चुप है तो बर्छियाँ चलतीं,
मेरी ख़ामोशी में भी सुरूर है।
मैं जज़्बों की आग में पिघला,
तेरे सीने में ठंडा सा हूर है।
तू सोचता है मैं झुक जाऊँ,
मेरी मिट्टी में ख़ुद का दस्तूर है।
तेरी यादों के साये चलते,
मेरी रग–रग में तेरा शोर है।
तू शोहरत की चादर ओढ़े हुए,
मेरे हिस्से में बस धूप–दूर है
मैं चाँद को हाथ में थामकर भी,
कह दूँ कि ये बस एक हूर है।
तू छत पर खड़ा है ऐ ‘रोनी’,
मेरा दिल तो तिरे ही हुज़ूर है।
AKHILABALARAJ
you know what ???I really wanna say something to u hardly...I know it won't reach to you. Whenever I see you, in my eyes... the feeling which I felt was genuine and real.
S Sinha
विश्व जल दिवस के अवसर पर
पानी बचाओ, पर्यावरण के अनुकूल जीवन जियो और जीवन बचाओ
अगर पानी नहीं है, तो कितना भी सोना और हीरा उसे नहीं खरीद सकता
On the eve of WORLD WATER DAY -
Save Blue , Live Green and Save Life
If no water , no amount of gold and silver can buy it
Paagla
https://youtube.com/shorts/_vsO89zS1jg?si=L58Hv_RDKeqQ-iC5
M K
मैं मुस्कुराऊँ तो उसे हैरानी होती है,
जैसे मेरी खुशी उससे अनजानी होती है…
वो समझता है मैं टूट चुकी हूँ शायद,
उसे क्या पता..??
मेरी हँसी भी मेरी कहानी होती है…
हर दर्द को छुपाकर रखती हूँ अपने अंदर,
इसलिए चेहरा थोड़ा रोशनी-सा नजर आता है,
उसे लगता है सब ठीक है मेरे साथ,
पर सच तो ये है.....
मुस्कुराना भी एक तरह की मजबूरी लगती है…
- M K
Prem Solanki
#sadpoetry
#sadshayari
Narendra Parmar
झूठ बोलने से एक फायदा होता है
दुसरो को टेंशन
और हमें आनंद होता है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
mohansharma
तुम क्यों पसार देते हो दामन हर एक के सामने..
हर हाथ सहारा दे मोहन ये कोई जरुरी तो नहीं..
kattupaya s
My short story "veyil kaalam" is live now in matrubharti.
Imaran
तेरे चेहरे पे जो मासूमियत है, वो हर दिल को छू जाती है,
तू अपनी आँखों से ही तो, ये कायनात बदल देती
👄imran 👄
Piyu soul
प्रेम इक खेल नहीं, ये हक़ीक़त की आवाज़ है,
नम्रता से माँगो तो दिल आएगा ख़ास।
जो मज़ाक में ले ले हमारी चाहत को,
उसको भी समझना पड़ेगा — यह इश्क़ की साज़ है। ⚡️
piyu 7soul
Dhara K Bhalsod
બીજું જોઈએ પણ શું?
એક જીગરજાન બહેનપણી,
બે કપ ચા અને......
"તને ખબર છે આજે શું થયું..!! "
🎊🎊🎊
- Dhara K Bhalsod
kvlsandhyarani
Author :Dr kvl Sandhya Rani
Hindi lecturer, BVK college, Visalakshi Nagar, visakhapatnam.
Introduction:
A Mother's love is one of the purest and most powerful emotions in the world. From the moment a child is born, a mother dedicates her life to caring, protecting and guiding her child. Her sacrifices are endless. And her love is unconditional. ,This story reflects the affection ,patience, and strength of a mother who shapes her son's life with care and devotion.
The beginning of a mother's journey:
In a small village Lived a woman named Lakshmi. she was known for her Kind heart & gentle nature. After many years of marriage she was blessed with a baby boy. The moment she held her child in her arms, tears of joy filled her eyes.
From that day, lakshmis life revolved around her son she wanted him sleep peacefully and prayed everyday for his happines and success. Even she was tied from household work, she never complained .Her son's Smile was enough to remove all worries.
Lakshmi believed that rising a child was not only about feeding & protecting him but also about teaching him good values. She wanted her son to grow into a kind honest and responsible person.
A mother sacrifices:
As the boy Grew older , lakshmi faced many challenges. Her family was not very rich, but she was determined to provide the best education for her son.some times She skipped her own meals so that Her son would never feel hungry. Every morning she work up early, prepared food and sent him with a smile. She encouraged him to studywell & reminder him that education would shape his future.
When ever he felt discouraged, lakshmi would comfort him with gentle Words. She would say, "My son, hard work and patience will always lead you to success". Her words become a guiding light in his life.
The son's Realization;
Years passed and the boy grew into a man with his mother's constant support and encouragement. He completed his education and found a good job in the City.
One day while remembering his childhood, he realized how much his mother had sacrificed for him. He remembered the Sleepless Nights she spent taking care of him when he was sick the sacrifices she made for his educationand and the love she showed every single day tears filled his eyes as he understood the depth of his mother's love .
He returned home and held his mother's hands with gratitude.
" Amma" he said softly, "what ever I am today is because of you".
Lakshmi smiled gently. For her,hers son's happiness was the greatest reward.
The True meaning of Mother's Love:
A mother's love cannot be measured with words.It is a silent strength that supports a child throught out life even when the world turns away,a mother's heart always remains open.
Lakshmi's story remind us that behind every successful person there is often a mother who believed in them, encouraged them,and sacrificied for their dreams.
A mother doesnot expect any thing in return except love and respect.
conclusion:
Motherhood is a sacred gift .mother nurtures her child with patience,kindness,and unconditional love.her sacrifices often go unnoticed,but they shape the future of her children and society.
we should always respect and care for our mother's.,for their love is the foundation of our lives.
As a famous saying goes:
"God could not be everywhere,so he created mother's"
A mother's love is eternal ,pure and everlasting.
Dhara K Bhalsod
મજા તો ગાંડા બનીને રહેવામાં જ છે.
સમજદારી તો જીંદગીના રંગો ઉડાડી નાંખે છે.
- Dhara K Bhalsod
Kavya Sharma
રાત કેટલીય અંધારી હોય,
પ્રભાત તો આવવાનું જ હોય…
આંસુઓની સાથોસાથ,
હાસ્ય પણ ખીલવાનું જ હોય…
હારી જઈએ ક્યારેક રસ્તામાં,
પણ હિંમત ફરી જાગવાની જ હોય…
જીવનના આ ચક્રમાં,
દરેક અંતે શરૂઆત હોવાની જ હોય…
સપનાઓને થોડી રાહ જોવડાવ,
સાચી ક્ષણ તો આવવાની જ હોય…
Narayan
तेरी यादों की खुशबू मेरे वजूद में कुछ यूँ बसी है,
कि आँखें बंद करूँ तो दीदार तेरा, और खोलूँ तो तलाश तेरी है।🍁🍂🌹
- Narayan
वात्सल्य
વચને ક'દી ના વંચિત થાઓ
વંચિત થવા વચન ના ખાઓ.
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
Narayan Mahor
“मन की हर धड़कन में बसे हो तुम,
हर साँस में नाम तुम्हारा है।
राधे-श्याम की इस प्रेम धारा में,
जीवन सारा हमारा है। 💙”
- Narayan Mahor
M K
झूठ कहते है लोग __अच्छे कर्म करने से अच्छा फल मिलता है ___या आपके साथ अच्छा होता है __अक्सर बुरे कर्म करने वाले ही खुश रहते हैं __अच्छे कर्म वाले रोता हुआ नजर आते हैं __जैसे जो लोग दिल से निभाते हैं रिश्ता___उन्हीं को धोखा मिलता है ___🌻 खुद से प्यार करे , किसी दूसरे से पहले अपनी खुशियों को रखे
- M K
Kuldeep Roni
एक देशभक्त चाहिए ए भगत सिंह तेरे जैसा
मेरे जैसा उसके जैसा या तेरे जैसा
भगत सिंह तेरे खून में एक अलग ही बात थी
आज के नौजवानों में खून नहीं मिलता तेरे जैसा
मैं ढूंढता फिर रहा हूं इस दुनिया में
मुझे कोई नहीं मिला आज तक तेरे जैसा
और क्या ही था जादू इन्कलाब कि बोली में
हर कोई चाहत रखता है बनने को तेरे जैसा
तेरे जैसा बनना चाहते हैं सभी रोनी
पर कौन बन पाया है तेरे जैसा
मैं ढूंढ ढूंढ कर थक गया हूं रोनी
पूरे जहां में कोई नहीं है तेरे जैसा
और मुझे बता मैं क्या करूं
क्योंकि मुझे बनना है तेरे जैसा
मुझे बताया ही नहीं तुमने
और कौन है तेरे जैसा
Raju kumar Chaudhary
Read my thoughts on YourQuote app at https://www.yourquote.in/raju-kumar-chaudhary-d3asy/quotes/hello-namaste-friends-how-you-cyfagq
Mara Bachaaaaa
कुछ सांसे
उनके लिए
संभाल रखी थी,
अब वो ना रहे
सांस ना रही।
- Mara Bachaaaaa
Piyu soul
“हर कहानी प्यार से शुरू नहीं होती…
कुछ कहानियाँ सौदे से शुरू होती हैं।
उसे लगा… वो एक लड़की को खरीद रहा है,
उसे क्या पता था—
वो अपनी बर्बादी घर ला रहा है।
जब एक लड़की की ज़िंदगी उसकी खामोशी में तय हो जाए…
तो वो हारती नहीं—
खेल शुरू करती है।
25 तारीख…
कहानी नहीं, हिसाब शुरू होगा।
तैयार रहना।
(वैसे फॉलो करना ना भूले वरना मिस हो जाएगी ये दिलचस्प कहानी )
_piyu 7soul
Shailesh Joshi
જીવનનું તો એવું છે કે,
જે દિવસથી જીવનમાં
ફરિયાદો ઓછી થવા લાગે છે,
એ દિવસથી જ જીવવાની
મજા આવવા લાગે છે,
પરંતુ એની જાણ તો
આપણને ત્યારે જ થાય છે,
કે જ્યારે ધીરજ સાથે
એની શરૂઆત થાય છે.
- Shailesh Joshi
Aaliya khan
hello guys kese hai aap sab Maine Hal hi mai apni ek urdu novel likhi hai agar aap padna chate hai to meri Instagram I'd par DM KRE Our follow krehttps://www.instagram.com/aaliyakhan___80
Nilesh Rajput
“एक होता है प्यार, और एक होता है सिर्फ प्यार,
और मैंने तुमसे सिर्फ प्यार किया था…”
Anup Gajare
"दोनों"
____________________________________________________
दोनों घूम रहे थे
शाम के निर्जन स्थल पर
उसके गर्म तलवे पर
उंगलियों को घुमाते हुए
वह चल रहा था।
इतना अंतर
नापने के बाद
दोनों को अंधेरे में
अपने ही सौरमंडल का
आंगन न दिखा।
वे टूटे हुए
बस आगे बढ़ रहे थे
जीवन की नींव रखने के लिए
उन्हें किसी फरिश्ते ने नहीं
भेजा था कही।
सदियों पहले
घटित हुआ था
कि उसने नकार दिया
उसके अस्तित्व को।
आश्वासन देते हुए
उसने शाम बीता दी
रात के दूसरे पहर
उसने दूसरे तारे को
उसके ब्रह्मांड में
रिसीव किया।
आकाशगंगा की खिड़की से
जन्मदाता देख रहा था
दोनों को बिखरते हुए।
फिर
शायद
दोनों कभी न मिलने की शर्त पर
जुदा हुए।
पर शर्तें
समय को याद नहीं रहतीं।
वह
किसी अनजान ग्रह पर
धीरे-धीरे बूढ़ा होता रहा,
जहाँ गुरुत्वाकर्षण
उसके दुख से हल्का था।
और वह—
एक तारे के भीतर
जलती रही,
अपनी ही रोशनी से
अंधी होती हुई।
कभी-कभी
किसी टूटते उल्कापिंड की तरह
उनकी स्मृतियाँ
एक-दूसरे की दिशा में गिरतीं,
पर
मध्य में फैला निर्वात
हर बार
उन्हें निगल लेता।
जन्मदाता अब भी
आकाशगंगा की उसी खिड़की पर था,
पर उसकी आँखों में
अब पहचान नहीं थी—
सिर्फ गणना थी
दूरी की,
और क्षय की।
एक दिन
जब समय ने
अपनी ही परछाईं को पार किया,
दोनों ने
अलग-अलग ब्रह्मांडों में
एक ही सपना देखा—
कि वे फिर मिलेंगे
किसी ऐसे स्थान पर
जहाँ
न सौरमंडल होगा,
न तारे,
न कोई देखने वाला।
सिर्फ
एक अधूरा स्पर्श
जो
कभी हुआ ही नहीं।
और उसी अधूरेपन में
उन्होंने
अपना अस्तित्व
पूरा मान लिया।
बिछड़े हुए तारे
टूटती प्रकाश शलाकों से
अब बात नहीं करते।
इसलिए दो
अलग होने के बाद
एक दूसरे का अक्ष छू न सके कभी।
_____________________________________________
Anup Ashok Gajare
Nisha ankahi
मांग लूँ प्यार… इतनी भी फकीरी नहीं,
और छोड़ दूँ खुद को… इतनी भी लाचारी नहीं,
जो मेरा है वो खुद चलकर आएगा,
मुझे किसी के पीछे भागने की बीमारी नहीं…
- Nisha ankahi
Nisha ankahi
खुद्दारी रखकर ही इश्क़ किया करो,
वरना मोहब्बत अक्सर भीख बन जाती है…
जो बिना कहे तुम्हें समझ न पाए,
उसके सामने हर बात चीख बन जाती है…
- Nisha ankahi
Kiran
दिल में लिए बैठे हैं दु:खों के गुलदस्ते
और वह कहते हैं कि तुम मुस्कुराते क्यों नहीं
- Kiran
Sonalpatadia darpan
જેટલું જાણશો તેટલું માણશો.📖
Kiran
शीर्षक : सुकून से डर
मिले हुए पिछले दुखों से,
मिलने वाले नए सुकून से डर लगता है,
लगता है कि यह सुख अपना रूप बदल कर आया है,
वास्तव में है तो यह वही दुख ही....
Sneha Gupta
🙏🏻“अटूट सहारा”🙏🏻
हमें मुश्किलों से डर नहीं लगता,
क्योंकि साथ माता-पिता का है।
अगर कभी गिर भी जाएँ हम,
तो यकीन है सहारा माता-पिता का है।
क्या लिखें आपकी खिदमत में,
शब्द ही कम पड़ जाते हैं,
जब भी कुछ लिखना चाहें,
तो बस सोचते ही रह जाते हैं।
Created by: Sneha Gupta
Grade : 10th
Soni shakya
हम भी बेफिक्र हुआ करते थे कभी फिर,,
मोहब्बत हो गई..!!
- Soni shakya
Soni shakya
अब तो आदत हो गई है दर्द में रहने की,,
नहीं तो खुश रहना भी कुछ मुश्किल नहीं था..!
- Soni shakya
SAYRI K I N G
Dutty Time Have Nice Day frends
Dada Bhagwan
Do you know that one who expends their life for any kind of help will not come across any hindrance in life?
Read more on: https://dbf.adalaj.org/nhlK0zgJ
#helpothers #humanity #helping #lifelessons #DadaBhagwanFoundation
महेश रौतेला
मैंने चाहा
तृणभर परिचय,
इस धरा का,इस ब्रह्मांड का।
सपना चाहा
तृणभर सुन्दर
इस देश का, इस मनुष्य का।
प्यार चाहा
अतिशय व्यापक
इस लोक का, फिर परलोक का।
*** महेश रौतेला
Vartikareena
आज माई डियर प्रोफेसर के दो भाग आएंगे । आप सब पढ लेना। और समीक्षा नही करते हो। गलत बात है ये।
SAYRI K I N G
And one day you look at yourself and realise... it wasn't all breaking. Something was blooming the whole time.
Piyu soul
💫“साथ का एहसास”💫
हम चुपचाप अपनी ही धुन में चलते थे,
बूढ़े दादा बोले — “कुछ समझ नहीं आया।”
पर हमारी दुनिया में शब्दों की ज़रूरत नहीं थी,
हर कदम में बस एक दूसरे का साथ था।
एडमिशन के हर फॉर्म में उसने राह आसान बनाई,
हर मुश्किल मेरे लिए हल्की कर दी।
और आज भी जब मन में तूफान उठता है,
वो जट से पूछता है — “क्या हुआ?”
हर छोटी‑छोटी बात में उसका एहसास दिखता है,
हर पल उसकी care और प्यार मेरे साथ था।
कभी teasing, कभी silent, लेकिन हमेशा साथ,
ऐसा रिश्ता बस किस्मत में लिखा होता है। 💛
SAYRI K I N G
I love you 😘
i love you too
Main Kitna antar hai
SAYRI K I N G
...मेरी शिद्दत मेरी चाहत का हिसाब क्या दोगे..
@.sayri king
मैं कहूँ तुमसे इश्क़ है' बोलो जवाब क्या दोगे?
Sss
"જવાબદારી ની તાકાત"
Saliil Upadhyay
*बचपन के अनुभव बताते हुए कहा...
मेरा बचपन काफ़ी संघर्ष" पूर्ण*l बीता था...!
स्कूल जाता था तो मास्टर पीटते थे....और नही जाता था तो घरवाले..!!
बेचारा जाये तो कहां जायें...
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ठिकाना
गर दिल में ठहरने का ठिकाना बन जाए l
दो पल जिंदगी जीने का बहाना बन जाए ll
यू बारहा मुस्कुराया न करो खुले आम l
हस्ते ही दिल्लगी का निशाना बन जाए ll
जरा तमीज में रहकर बात किया करो l
बैठे बिठाएं दुश्मन ज़माना बन जाए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
DrAnamika
जब भी मुझे कोई जख्म़ नया मिला
समझ गई पुराने जख़्मों का मुआवजा़ मिला.
#डॉ_अनामिका #हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_काव्य #हिंदी_पंक्तियाँ #शायरी #शेर #मातृभारती
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पाप पुण्य सब मनुज के, करे संग में वास। जैसे बछड़ा गाय का, जाता माँ के पास।।
दोहा --458
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (44) की व्याख्या
अध: पश्यस्व मोपरि --ऋगुवेद
8/33/19
भाव--
“हे मानव! तू नीचे देख, ऊपर मत देख — अर्थात् विनम्र बन, अहंकारी मत बन।”
मूल वैदिक अर्थ (प्रसंग सहित)
इस मन्त्र का पद— अधः पश्यस्--नीचे देखो। मोपरि-- मा उपरि--ऊपर मत देखो।
आचार्य सायणा ने इस मन्त्र- को
स्त्री-आचरण के रूप में लिया है।
अर्थात—
नीचे देखो ! ऊपर/इधर-उधर मत देखो। संयम और मर्यादा रखो।
पर यहाँ जो अर्थ लिया गया है, वह—
रूपकात्मक है और
आधुनिक नैतिक व्याख्या है
इसमें:
“नीचे देखना” = विनम्रता
“ऊपर देखना” = अहंकार
भाव-विस्तार--
विनम्रता बनाम अहंकार (सभी मनुष्यों के लिए)
इस मन्त्र को आज के संदर्भ में उपयोग करते हैं, तो भाव—
“विनम्र बनो, अहंकारी मत बनो”
अत्यन्त उपयुक्त और उपयोगी है
यह व्याख्यात्मक अर्थ है, न कि शाब्दिक अर्थ।
“मनुष्य में विनम्रता हो, अहंकार न हो”—वेदों की भावना के बिल्कुल अनुरूप है।
1. संगच्छध्वं मन्त्र (ऋग्वेद 10.191.2)
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते॥
अर्थ:
साथ-साथ चलो, मिलकर बोलो, तुम्हारे मन एक हो जाएँ।
जैसे प्राचीन देवता सामंजस्य और एकता से यज्ञ करते थे।
भाव:
अहंकार अलगाव लाता है
विनम्रता और समता एकता लाती है
2. मित्र-दृष्टि मन्त्र (यजुर्वेद 36.18)
मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्।
अर्थ:
सब प्राणियों को मित्रभाव से देखो।
भाव:
जो अहंकारी है, वह दूसरों को नीचा देखता है
जो विनम्र है, वह सबको मित्र मानता है
3. ईशावास्य उपनिषद् (मन्त्र 1)
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आच्छादित है;
त्यागपूर्वक भोग करो, किसी के प्रति लोभ/अहंकार न रखो।
भाव:
अहंकार = “सब मेरा है”
विनम्रता = “सब ईश्वर का है”
4. न कर्मणा… (कैवल्य/मुण्डक उपनिषद् भाव)
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।
अर्थ:
न कर्म, न वंश, न धन—
बल्कि त्याग (विनम्रता) से ही अमृतत्व मिलता है।
5. समानी व आकूति (ऋग्वेद 10.191.4)
समानी व आकूति: समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥
अर्थ:
तुम्हारे संकल्प, हृदय और मन समान (समभाव) हों।
भाव:
अहंकार भेद पैदा करता है
विनम्रता समभाव लाती है
निष्कर्ष --
वेदों का मूल संदेश यह है कि:
अहंकार से विभाजन, संघर्ष, अज्ञान परन्तु विनम्रता से एकता, समभाव, आध्यात्मिक उन्नति
इसलिए वाक्य—
“मानव में विनम्रता हो, अहंकारिता न हो”
वेदों की मूल भावना के अत्यन्त निकट है।
उपनिषदों में प्रमाण :
1. ईशावास्य उपनिषद् (मन्त्र- 1)
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आच्छादित है;
त्यागपूर्वक भोग करो, किसी के प्रति लोभ (अहंकार) मत करो।
भाव:
अहंकार से अधिकार-बुद्धि (“सब मेरा”)
विनम्रता से त्याग और समर्पण
2. कठोपनिषद् (1.2.24)
नाविरतो दुश्चरितान्नाशान्तो नासमाहितः।
नाशान्तमानसो वापि प्रज्ञानेनैनमाप्नुयात्॥
अर्थ:
जो दुष्कर्मों से नहीं हटता, अशान्त है, असंयमी है—
वह आत्मज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकता।
भाव:
अहंकार मन को अशान्त और असंयमी बनाता है
विनम्रता और संयम से ही ज्ञान प्राप्त होता है
3. मुण्डक उपनिषद् (3.1.5)
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यः…॥
अर्थ:
यह आत्मा न वाक्पटुता, न बुद्धि, न अधिक श्रवण से मिलती है;
वह उसी को मिलती है जो उसके योग्य (नम्र) बनता है।
भाव:
अहंकार (ज्ञान का गर्व) बाधक है
विनम्रता ही आत्मप्राप्ति का मार्ग है
4. केनोपनिषद् (2.3)
यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद सः।
अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम्॥
अर्थ:
जो सोचता है “मैं जानता हूँ”, वह नहीं जानता;
जो मानता है “मैं नहीं जानता”, वही जानता है।
भाव:
“मैं जानता हूँ” अहंकार है
“मैं नहीं जानता” विनम्रता (सच्चा ज्ञान) है।
5. तैत्तिरीय उपनिषद् (शिक्षावल्ली 1.11)
सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः…
अर्थ:
सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, स्वाध्याय में लगे रहो।
भाव:
धर्म और स्वाध्याय = विनम्रता का मार्ग
अहंकार धर्म से दूर ले जाता है
निष्कर्ष--
उपनिषदों का स्पष्ट संदेश है—
अहंकार, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार में बाधा है,
जबकि विनम्रता, संयम और त्याग ही सच्चे ज्ञान का मार्ग हैं।
पुराणों में प्रमाण --
1. श्रीमद्भागवत महापुराण
(5.18.12)
यस्यास्ति भक्तिर्भगवत्यकिञ्चना
सर्वैर्गुणैस्तत्र समासते सुराः।
हरावभक्तस्य कुतो महद्गुणाः
मनोरथेनासति धावतो बहिः॥
अर्थ:
जिसमें अहंकार-रहित भक्ति (अकिञ्चन भाव) होती है, उसमें सभी गुण आ जाते हैं।
अहंकारी (ईश्वर-विमुख) में कोई श्रेष्ठ गुण नहीं टिकता।
2. शिव पुराण
(विद्येश्वर संहिता, अध्याय 16 – भावानुसार)
अहंकारो महान् दोषो विनयः परमं सुखम्।
अर्थ:
अहंकार महान दोष है, और विनम्रता सर्वोत्तम गुण है।
3. विष्णु पुराण
(3.7.20 )
विनयादेव शोभन्ते विद्या कुलं च सम्पदः।
अर्थ:
विद्या, कुल और सम्पत्ति—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं।
4. पद्म पुराण
(उत्तर खण्ड 72.335 – )
अहंकारविहीनः स्यात् साधुः सर्वत्र पूज्यते।
अर्थ:
जो अहंकार-रहित है, वही साधु और सर्वत्र पूजनीय होता है।
5. गरुड़ पुराण
(आचार काण्ड, 111.12 – )
अहंकारात् विनश्यन्ति विनयाद् यान्ति उन्नतिम्।
अर्थ:
अहंकार से मनुष्य नष्ट होता है, और विनम्रता से उन्नति करता है।
6. स्कन्द पुराण
(काशी खण्ड –)
त्यक्त्वा अहंकारं मनुष्यः पूज्यते सर्वदेहिनाम्।
अर्थ:
जो मनुष्य अहंकार त्याग देता है, वह सबके द्वारा सम्मानित होता है।
7- ब्रह्मवैवर्त पुराण
(कृष्णजन्म खण्ड- 22.12 )
अहंकारविहीनो हि जनो याति परां गतिम्।
अर्थ:
अहंकार से रहित मनुष्य ही परम गति को प्राप्त करता है।
8- लिंग पुराण
(पूर्व भाग 1.70.95 )
अहंकारः परं दुःखं विनयः परमं सुखम्।
अर्थ:
अहंकार दुःख का कारण है, और विनम्रता सर्वोत्तम सुख है।
9-वामन पुराण
(अध्याय 14.8 )
विनयाद् याति पात्रत्वं न तु दर्पेण कर्हिचित्।
अर्थ:
मनुष्य विनम्रता से ही योग्य बनता है, अहंकार से कभी नहीं।
10- कूर्म पुराण
(पूर्व भाग 2.12.34 )
त्यक्त्वा दर्पं च मानं च विनीतः शोभते नरः।
अर्थ:
जो मनुष्य दर्प और मान (अहंकार) त्याग देता है, वही शोभा पाता है।
11-- मत्स्य पुराण-
(अध्याय 153.22 )
अहंकारात् विनश्यन्ति विनयाद् यान्ति संपदः।
अर्थ:
अहंकार से नाश होता है, और विनम्रता से समृद्धि आती है।
12- ब्रह्माण्ड पुराण
(अध्याय 2.3.45 )
विनयेन हि भूष्यन्ते गुणा विद्या कुलं धनम्।
अर्थ:
गुण, विद्या, कुल और धन—सब विनम्रता से ही सुशोभित होते हैं।
निष्कर्ष--
इन पुराणों का भी यही एकमत संदेश है—
अहंकार से दुःख, पतन, विनाश
और विनम्रता से उन्नति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवद्गीता में विनम्रता (अमानित्व) और अहंकार त्याग का स्पष्ट उपदेश कई स्थानों पर मिलता है।
भगवद्गीतामें प्रमाण--
1. अमानित्व (विनम्रता) का प्रत्यक्ष उल्लेख
अध्याय 13, श्लोक 7–8--
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः॥
भावार्थ:
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने "अमानित्व" (अहंकार का अभाव, विनम्रता) को ज्ञान का पहला गुण बताया है।
2. अहंकार त्याग का उपदेश
अध्याय 18, श्लोक 58--
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
अथ चेत्त्वमहंकारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि॥
भावार्थ:
यदि तुम अहंकार छोड़कर मेरी शरण में रहोगे तो सभी बाधाओं को पार कर जाओगे, परंतु अहंकार से युक्त होकर नहीं सुनोगे तो विनाश होगा।
3. अहंकार को आसुरी गुण बताया गया
अध्याय 16, श्लोक 4--
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च।
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्॥
भावार्थ:
दम्भ, घमंड (दर्प), अभिमान आदि आसुरी गुण हैं।
4. अहंकार रहित व्यक्ति प्रिय है
अध्याय 12, श्लोक 13–14--
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी॥
भावार्थ:
जो निरहंकारी (अहंकार रहित), सबके प्रति मित्र और करुणा रखने वाला है, वही भगवान को प्रिय है।
5. कर्तापन के अहंकार का निषेध
अध्याय 3, श्लोक 27--
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥
भावार्थ:
अहंकार से मोहित मनुष्य यह सोचता है कि “मैं ही कर्ता हूँ”, जबकि वास्तव में प्रकृति ही सब कार्य कर रही है।
निष्कर्ष:
भगवद्गीता स्पष्ट रूप से सिखाती है कि—
विनम्रता (अमानित्व) ज्ञान का मूल गुण है। अहंकार आध्यात्मिक पतन का कारण है। निरहंकारिता भगवान को प्रिय बनाती है।
महाभारत में भी विनम्रता (निरहंकारिता) की महिमा और अहंकार के दोष अनेक स्थानों पर बताए गए हैं।
महाभारत में प्रमाण--
1. अहंकार पतन का कारण है
उद्योगपर्व (विदुरनीति)
अहंकारः श्रियं हन्ति पुरुषस्याल्पमेधसः।
विनयाद् याति पात्रत्वं ततो लभते धनम्॥
भावार्थ:
अहंकार मनुष्य की लक्ष्मी (समृद्धि) को नष्ट कर देता है, जबकि विनम्रता से मनुष्य योग्य बनता है और फिर धन-वैभव प्राप्त करता है।
2. विनम्रता से ही सम्मान
शान्तिपर्व
न विनीतो न शूरोऽपि न दानी न च पण्डितः।
न चाप्यन्यः कश्चिदस्ति यः प्रियः सर्वदेहिनाम्॥
भावार्थ:
विनम्रता के बिना न वीर, न दानी, न पण्डित—कोई भी सबको प्रिय नहीं हो सकता।
3. अहंकार विनाश का मूल
शान्तिपर्व
अहंकारसमुत्थेन विनाशो जायते नृणाम्।
विनयाद् यशो लोके प्राप्नोति च परां गतिम्॥
भावार्थ:
अहंकार से मनुष्य का विनाश होता है, जबकि विनम्रता से यश और उत्तम गति प्राप्त होती है।
4. विदुरनीति में विनम्रता का उपदेश
उद्योगपर्व (विदुरनीति)
विनयेन हि शोभन्ते विद्या रूपं कुलं धनम्।
विनयाद् याति पात्रत्वं न विनयात् कुतो गुणाः॥
भावार्थ:
विद्या, रूप, कुल और धन—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं; विनय के बिना गुणों का मूल्य नहीं रहता।
5. भीष्म का उपदेश
शान्तिपर्व (भीष्म-युधिष्ठिर संवाद)
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च त्याज्याः सर्वात्मना नरैः।
एते हि नाशनाः सर्वे धर्मस्य च सुखस्य च॥
भावार्थ:
दम्भ, घमंड और अभिमान—इनका पूर्ण त्याग करना चाहिए, क्योंकि ये धर्म और सुख दोनों का नाश करते हैं।
निष्कर्ष:
महाभारत का स्पष्ट संदेश है—
अहंकार = विनाश का कारण
विनम्रता = यश, सम्मान और उन्नति का आधार
सभी गुण विनय से ही शोभित होते हैं
स्मृति (जैसे मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति आदि) में भी विनम्रता (विनय) और अहंकार त्याग का स्पष्ट उपदेश मिलता है। प्रमुख प्रमाण इस प्रकार हैं—
1. मनुस्मृति में विनय की महिमा
मनुस्मृति 2.121
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
भावार्थ:
जो विनम्र होकर बड़ों का अभिवादन करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल—ये चारों बढ़ते हैं।
2. अहंकार का त्याग
मनुस्मृति (अर्थानुसार)
नात्मानमवमन्येत नातिमानं समाचरेत्।
भावार्थ:
मनुष्य न तो स्वयं को तुच्छ समझे और न ही अहंकार (अतिमान) करे—संतुलित विनम्रता अपनाए।
3. विनय से ही विद्या की शोभा
याज्ञवल्क्य स्मृति 1.15 (भावानुसार)
विद्या विनययुक्तेन शोभते नान्यथा क्वचित्।
भावार्थ:
विद्या तभी शोभा पाती है जब वह विनम्रता के साथ हो।
4. विनम्र आचरण का महत्व
याज्ञवल्क्य स्मृति (आचार अध्याय)
विनीतः शीलसम्पन्नः सर्वभूतेषु नित्यदा।
स पूज्यः सर्वलोकस्य न तु दर्पसमन्वितः॥
भावार्थ:
जो मनुष्य विनम्र और शीलवान होता है, वही सबका पूज्य बनता है; अहंकारी व्यक्ति नहीं।
5. अहंकार से पतन
अन्य स्मृतियों का भाव
दर्पो हि मनुष्याणां कारणं सर्वनाशनम्।
भावार्थ:
अहंकार (दर्प) मनुष्य के पतन और विनाश का कारण बनता है।
निष्कर्ष:
स्मृति का संदेश है—
विनम्रता (विनय) से आयु, यश, विद्या और सम्मान बढ़ते हैं
अहंकार (दर्प/अभिमान) पतन और विनाश का कारण है
विद्या और गुण तभी शोभा पाते हैं जब उनमें विनय हो।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण--
1. मनुस्मृति से प्रमाण
(1) मनुस्मृति 2.121
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
भावार्थ:
विनम्र (अभिवादनशील) व्यक्ति की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।
(2) मनुस्मृति 7.47
नातिमानं समाचरेत्।
भावार्थ:
मनुष्य को अहंकार (अतिमान) का आचरण नहीं करना चाहिए।
(3) मनुस्मृति 4.162
परद्रव्येषु लोभो न परदाराभिमर्शनम्।
स्वात्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥
भावार्थ (संदर्भ सहित):
धर्माचरण में संयम और विनम्रता आवश्यक है; अहंकारी व अनियंत्रित आचरण वर्जित है।
2. याज्ञवल्क्य स्मृति से प्रमाण
(1) याज्ञवल्क्य स्मृति 1.122
विनीतः शीलसम्पन्नः सर्वभूतेषु नित्यदा।
स पूज्यः सर्वलोकस्य न तु दर्पसमन्वितः॥
भावार्थ:
विनम्र और शीलवान व्यक्ति ही सबका पूज्य होता है, अहंकारी नहीं।
(2) याज्ञवल्क्य स्मृति 1.2 (आचार संदर्भ)
शौचाचारस्थितो नित्यं विनीतो जितेन्द्रियः।
भावार्थ:
मनुष्य को सदा शुद्ध आचरण वाला, विनम्र और इन्द्रिय-नियंत्रित होना चाहिए।
3. नारद स्मृति से संकेत
नारद स्मृति में भी आचार और धर्म के संदर्भ में विनम्रता को श्रेष्ठ गुण माना गया है—
(नारद स्मृति, आचार प्रकरण)
दर्पो हि धर्मनाशाय विनयः सर्वसिद्धये॥
भावार्थ:
अहंकार धर्म का नाश करता है, और विनम्रता सभी सिद्धियों को प्रदान करती है।
निष्कर्ष--
स्मृति का स्पष्ट सिद्धान्त है—
विनय (विनम्रता) से आयु, यश, विद्या और सम्मान का कारण है।
नीति ग्रन्थो मेँ प्रमाण--
1. चाणक्य नीति से प्रमाण
(1) चाणक्य नीति, अध्याय 1, श्लोक 15
विनयेन हि शोभन्ते विद्या रूपं कुलं धनम्।
विनयाद् याति पात्रत्वं न विनयात् कुतो गुणाः॥
भावार्थ:
विद्या, रूप, कुल और धन—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं; विनय के बिना गुणों का कोई मूल्य नहीं।
(2) चाणक्य नीति, अध्याय 7, श्लोक 11
दर्पो नाशाय भूतानां नम्रता सर्वसिद्धये।
भावार्थ:
अहंकार (दर्प) प्राणियों के नाश का कारण है, जबकि नम्रता सभी सिद्धियों को देने वाली है।
2. हितोपदेश से प्रमाण-
(1) हितोपदेश, मित्रलाभ, श्लोक 71 (प्रसिद्ध नीति)
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
भावार्थ:
विद्या से विनय आता है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।
-----+------+-------+----+-++++
Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status